(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (7 जून 2020)

दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर


(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (7 जून 2020)


:: राष्ट्रीय समाचार ::

अटल इनोवेशन मिशन

चर्चा में क्यों?

  • विभिन्न क्षेत्रों मेंनवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए की जा रही एक नयी पहल के अंतर्गत वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) और अटल इनोवेशन मिशन के बीच को एक नया करार किया गया है।
  • इस साझेदारी के तहत सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों को प्रमुखता से बढ़ावा देने की बात कही जा रही है। अटल इनोवेशन मिशन के अंतर्गत संचालित ‘अटल रिसर्च इनिशिएटिव फॉर स्माल एंटरप्राइजेस’ सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए कार्य करता है, तो सीएसआईआर द्वारा विकसित प्रौद्योगिकियां भी इसी तरह के उद्योगों के लिए मददगार साबित हुई हैं।

क्या है अटल इनोवेशन मिशन?

  • अटल नवाचार मिशन का लक्ष्य देशभर के स्कूलों, विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों और उद्योगों में नवाचार और उद्यमिता का एक वातावरण तैयार करना और उसे बढ़ावा देना है। वर्ष 2015 के बजट भाषण में वित्त मंत्री की घोषणा के अनुसार, इस मिशन को नीति आयोग के तहत स्थापित किया गया है।
  • हजारों स्कूलों में अत्याधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित अटल टिंकरिंग लैब स्थापित किये जा रहे हैं। विश्वविद्यालयों और उद्योगों के लिये विश्वस्तरीय अटल इंक्यूबेशन केंद्र (एआईसी) और अटल कम्युनिटी इनोवेशन केंद्र (एसीआईसी) स्थापित किये जा रहे हैं।
  • अटल न्यू इंडिया चैलेंज (एएनआईसी) के माध्यम से राष्ट्रीय प्रासंगिकता और सामाजिक महत्व के क्षेत्रों में उत्पाद विकास बढ़ावा देना।

मिशन के प्रभाव

  • मिशन के तहत अनेक सशक्त और अग्रगामी कदम उठाय़े गये हैं, जैसे अटल टिंकरिंग लैब और अटल इंक्यूबेशन केंद्र। इन पर काफी जोर दिया गया है।
  • अटल नवाचार मिशन की मदद और तकनीकी सहायता से भारत सरकार के कई मंत्रालयों/विभागों ने नवाचार से जुड़ी गतिविधियां शुरू की हैं।
  • अटल टिंकरिंग लैब कार्यक्रम के तहत, 2020 तक 10,000 से अधिक स्कूलों में इन लैबों की स्थापना होने की संभावना है।
  • देशभर में 100 से अधिक अटल इंक्यूबेशन केंद्र स्थापित होने की संभावना हैं, जिससे पहले के 5 वर्षों में कम से कम प्रत्येक 50-60 स्टार्टअपों को सहायता मिलेगी।
  • 100 से अधिक इन्नोवेटरों/स्टार्टअपों को अपने नवाचारों को उत्पाद का रूप देने में कुछ सहायता मिलने की संभावना है।
  • मंत्रालयों के माध्यम से समर्थित अन्य कार्यक्रमों से और भी अधिक लोग लाभान्वित होंगे।
  • प्रत्येक इंक्यूबेटर से प्रत्येक 4 वर्ष में प्रोद्योगिकी चालित 50-60 नवाचार स्टार्टअपों का पोषण होने की आशा है।
  • इस प्रकार 100 से अधिक इंक्यूबेटरों की स्थापना से 5,000-6,000 नवाचार स्टार्टअपों का पोषण हो सकेगा और नये इंक्यूबेटरों की स्थापना से इसकी संख्या में और अधिक वृद्धि होगी।
  • इन नवाचार चालित स्टार्टअपों से रोजगार की अत्यधिक संभावना है

मातृत्व की आयु, ‘एमएमआर’ और पोषण स्तर से संबंधित मुद्दों पर कार्यदल का गठन

  • भारत सरकार ने 04 जून, 2020 को जारी एक राजपत्र अधिसूचना में मातृत्व की आयु, ‘एमएमआर’ को कम करने की अनिवार्यताओं और पोषण स्तर बेहतर करने से जुड़े मुद्दों के साथ-साथ कुछ अन्‍य संबंधित विषयों पर भी गौर करने के लिए एक कार्यदल का गठन किया है। सुश्री जया जेटली को इसका अध्यक्ष बनाया गया है ।

पृष्ठभूमि

  • केंद्रीय वित्त मंत्री ने संसद में वित्‍त वर्ष 2020-21 के अपने बजट भाषण के दौरान कहा, ‘‘वर्ष 1978 में तत्कालीन शारदा अधिनियम, 1929 में संशोधन करके लड़कियों के विवाह की आयु को पंद्रह वर्ष से बढ़ाकर अठारह वर्ष कर दिया गया। जैसे-जैसे भारत प्रगति पथ पर निरंतर आगे बढ़ता रहा, लड़कियों के लिए उच्च शिक्षा प्राप्‍त करने और करियर बनाने के अवसर भी मिलने लगे। ‘एमएमआर’ को कम करने के साथ-साथ पोषण स्तर बेहतर करना भी नितांत आवश्‍यक है। इन सभी बातों को ध्‍यान में रखकर ही लड़कियों के मातृत्व की उम्र से जुड़े समस्‍त मुद्दे पर गौर करने की जरूरत है। मैं एक कार्यदल का गठन करने का प्रस्ताव करती हूं, जो छह माह में अपनी सिफारिशें पेश करेगा ..’’ (संदर्भ: वित्त वर्ष 2020-21 के लिए बजट भाषण का पैरा 67)।

कार्यदल के विचारार्थ विषय निम्‍नलिखित हैं:

  • विवाह और मातृत्व की आयु के इन सभी के साथ सह-संबंध पर गौर करना (ए) मां का स्वास्थ्य, चिकित्सीय सेहत एवं पोषण की स्थिति और गर्भावस्था, जन्म एवं उसके बाद नवजात शिशु/ शिशु/ बच्चा (बी) प्रमुख मापदंड जैसे कि शिशु मृत्यु दर (आईएमआर), मातृ मृत्यु दर (एमएमआर), कुल प्रजनन दर (टीएफआर), जन्म के समय लिंग अनुपात (एसआरबी), बाल लिंग अनुपात (सीएसआर), इत्‍यादि और (सी) इस संदर्भ में स्वास्थ्य और पोषण से संबंधित कोई अन्य प्रासंगिक बिंदु।
  • लड़कियों के बीच उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने के उपाय सुझाना।
  • कार्यदल की सिफारिशों के समर्थन में उपयुक्त विधायी उपाय और/अथवा मौजूदा कानूनों में संशोधन सुझाना।
  • कार्यदल की सिफारिशों को लागू करने के लिए समयसीमा के साथ एक विस्तृत शुभारंभ योजना तैयार करना।
  • कार्यदल आवश्‍यकता पड़ने पर अन्य विशेषज्ञों को अपनी बैठकों में आमंत्रित कर सकता है।
  • कार्यदल को नीति आयोग द्वारा सहायता प्रदान की जाएगी और कार्यदल 31 जुलाई, 2020 तक अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा।

बेंगलुरु मेघा संदेशा और वरुणमित्र

  • कर्नाटक राज्य प्राकृतिक आपदा निगरानी केंद्र (KSNDMC) ने बारिश और बाढ़ के पूर्वानुमान की जानकारी लोगों तक पहुंचाने के लिए एक एप बनाया है। इस एप के जरिए लोगों को आसानी से मौसम संबंधित जानकारी मिल पाएगी। केएसएनडीएमसी ने बारिश और मौसम के बारे में आधिकारिक जानकारी के लिए बेंगलुरु मेघा संदेशा (Bengaluru MeghaSandesha)और वरुणमित्र (Varunamitra) के लिए दो समर्पित डिजिटल समाधान तैयार किए हैं।
  • "बारिश और बाढ़ के पूर्वानुमान का प्रसार करने और मौसम की विशिष्ट गतिशील जानकारी को सीधे जनता तक पहुंचाने के लिए KSNDMC ने एक मोबाइल एप्लिकेशन, मेघा संदेशा को विकसित किया है।"
  • आपदा निगरानी विभाग ने प्रोजेक्ट 'अर्बन फ्लड मॉडल' (UFM) के तहत भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) के साथ मिलकर यह एप बनाया है। इस परियोजना के जरिए बेंगलुरु शहर में शहरी बाढ़ के प्रबंधन और उसे कम करने के लिए प्रौद्योगिकी संचालित समाधान प्रदान किया जाएगा। इसके तहत अलग-अलग मौसम में होने वाली बारिश की तीव्रता से बाढ़ पूर्वानुमान जारी करने के लिए एक हाइड्रोलॉजिकल मॉडल विकसित और परिचालन किया गया है।

दिल्ली के स्वास्थ्य ढांचे के इस्तेमाल पर डॉ. महेश वर्माकमेटी

  • दिल्ली सरकार की एक कमेटी ने सुझाव दिया है कि कोविड-19 संकट के मद्देनजर शहर के स्वास्थ्य ढांचे का इस्तेमाल केवल राष्ट्रीय राजधानी के निवासियों के उपचार में होना चाहिए ।
  • डॉ. महेश वर्मा के नेतृत्व वाली कमेटी ने सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। इसमें कहा गया है कि अगर दिल्ली का स्वास्थ्य ढांचा बाहर के लोगों के लिए खुला रहा तो तीन दिन में सारे बेड भर जाएंगे। वर्तमान में दिल्ली में संक्रमित लोगों की संख्या 26,000 को पार कर गयी है। संक्रमण से अब तक 708 लोगों की मौत हो चुकी है ।

:: अंतर्राष्ट्रीय समाचार ::

इंटर-पार्लामेंटरी अलायंस ऑन चाइना (IPAC)

चर्चा में क्यों?

  • कोरोना वायरस, साउथ चाइना सी और हॉन्ग-कॉन्ग को लेकर चीन पूरी दुनिया के निशाने पर है। वहीं, भारत के साथ लद्दाख सीमा पर जारी तनाव पर भी दुनिया की नजर है। ऐसे में अमेरिका समेत 8 देशों ने चीन की मौजूदगी को वैश्विक व्यापार, सुरक्षा और मानवाधिकारों के लिए खतरा मानते हुए एक अलांयस बनाया है। वहीं, इस इंटर-पार्लामेंटरी अलायंस ऑन चाइना (IPAC) को चीन में 'फर्जी' बताते हुए कहा है कि 20वीं सदी की तरह उसे अब परेशान नहीं किया जा सकेगा और पश्चिम के नेताओं को कोल्ड वॉर वाली सोच से बाहर आ जाना चाहिए।

क्या है इंटर-पार्लामेंटरी अलायंस ऑन चाइना (IPAC)

  • इंटर-पार्लामेंटरी अलायंस ऑन चाइना (IPAC)को इसी शुक्रवार को लॉन्च किया गया था। इसमें अमेरिका, जर्मनी, ब्रिटेन, जापान, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, स्वीडन, नॉर्वे और यूरोप की संसद के सदस्य शामिल हैं। इसके मुताबिक चीन से जुड़े हुए मुद्दों पर सक्रियता से रणनीति बनाकर सहयोग के साथ उचित प्रतिक्रिया देनी चाहिए। चीन के आलोचक और अमेरिका की रिपब्लिकन पार्टी के सीनेटर मार्को रूबियो IPAC के सह-अध्यक्षों में से एक हैं।

चीन ने की '8 नेशन अलायंस' से इसकी तुलना

  • चीन में इस कदम की तुलना 1900 के दशक में ब्रिटेन, अमेरिका, जर्मनी, फ्रांस, रूस, जापान, इटली और ऑस्ट्रिया-हंगरी के '8 नेशन अलायंस' से की जा रही है। चीन के ग्लोबल टाइम्स के मुताबिक इन देशों की सेनाओं ने पेइचिंग और दूसरे शहरों में लूटपाट मचाई और साम्राज्यवाद के खिलाफ चल रहे यिहेतुआन आंदोलन को दबाने की कोशिश की।
  • पेइचिंग में चाइन फॉरन अफेयर्स यूनिवर्सिटी के एक्सपर्ट ली हाएडॉन्ग का कहना है कि चीन अब 1900 दशक की तरह नहीं रहा और वह अपने हितों को कुचलने नहीं देगा। ली का कहना है कि अमेरिका दूसरे देशों के प्रशासन तंत्रों को अपने साथ 'चीन विरोधी' सोच में शामिल करना चाहता है और पश्चिम में चीन के खिलाफ माहौल बनाना चाहता है ताकि अमेरिका को फायदा हो

ब्लैक फ्राइडे कार्यक्रम

  • दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति ने संयुक्त राज्य अमेरिका में नस्लवाद पर कहा कि उनका दृढ़ विश्वास है कि यह एक क्षण है जिसे हमें दुनिया भर में नस्लवाद से निपटने के लिए एक पहल के रूप में मानना ​​चाहिए।राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा ने कहा कि सत्तारूढ़ अफ्रीकी राष्ट्रीय कांग्रेस ने जॉर्ज फ्लॉयड की जघन्य हत्या और अमेरिका में नस्लवाद के जवाब में एक ब्लैक फ्राइडे कार्यक्रम शुरू किया।

पृष्ठभूमि

  • दरअसल, अमेरिका में हाल ही में अश्वेत व्यक्ति जॉर्ज फ्लाइड की मौत के बाद अमेरिका में जबरदस्त विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है। लोग सड़कों पर उतकर नस्लवाद के खिलाफ नारे बाजी कर रहे हैं। हालांकि, देश के कई हिस्सो में ये प्रदर्शन काफी हिंसक हो गया है। दरअसल, मिनियापोलिस में जॉर्ज फ्लॉयड की पुलिस कस्टडी में मौत हो गई थी। इसके बाद हिंसक प्रदर्शन के बीच कई इलाकों में नेशनल गार्ड की तैनाती की गई है।
  • अमेरिका में हुई इस घटना के बाद एक बार फिर काले और गौरे को लेकर बहस छिड़ गई है। गौरतलब है कि अमेरिका में लंबे वक्त से अश्वेत लोग प्रताड़ना और पूर्वाग्रह के शिकार होते रहे हैं।

संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार प्रमुख मिशेल बैचेलेट

चर्चा में क्यों?

  • भारत और कुछ अन्य एशियाई देशों ने शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार प्रमुख मिशेल बैचेलेट द्वारा इन देशों में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता हनन होने की टिपण्णी का जवाब देते हुए कहा कि सरकारें कोरोना वायरस महामारी के दौरान लोगों का जीवन बचाने पर ध्यान दे रही हैं और गलत जानकारियां लोगों के लिए खतरा बन सकती हैं।

क्या कहा मिशेल बैचेलेट ने

  • संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकारों के लिए उच्चायुक्त ने तीन जून को एक बयान में कहा था कि बांग्लादेश, कंबोडिया, चीन, भारत, इंडोनेशिया, मलेशिया, म्यांमा, नेपाल, फिलीपीन, श्रीलंका, थाईलैंड और वियतनाम में प्रेस और सोशल मीडिया के माध्यम से असंतोष व्यक्त करने या कथित रूप से गलत जानकारी फैलाने वाले लोगों को गिरफ्तार किया गया है। बैचेलेट ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हनन बताते हुए कहा कि इन्हें रोकने के लिए की जाने वाली कार्रवाई संतुलित होनी चाहिए।
  • जिनेवा में भारत के स्थायी मिशन और इंडोनेशिया, कंबोडिया, मलेशिया, म्यांमा, फिलीपीन, थाईलैंड और वियतनाम के स्थायी मिशनों द्वारा जारी संयुक्त प्रेस विज्ञप्ति में बैचेलेट की टिप्पणियों का दृढ़ता से जवाब दिया गया। जवाब में कहा गया, “ हमारी सरकारों का मुख्य उद्देश्य कोविड-19 से नागरिकों के अनमोल जीवन को बचाना है। ओएचसीएचआर (मानव अधिकारों के लिए संयुक्त राष्ट्र के उच्चायुक्त का कार्यालय) को दूसरे मुद्दों पर ना भटककर इस ओर ध्यान देते हुए जिम्मेदार भूमिका निभाने की आवश्यकता है।”

:: अर्थव्यवस्था ::

भुगतान संरचना विकास कोष (पीआईडीएफ)

चर्चा में क्यों?

  • भारतीय रिजर्व बैंक ने छोटे शहरों और पूर्वोत्तर राज्यों में डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए 500 करोड़ रुपये का भुगतान संरचना विकास कोष (पीआईडीएफ) बनाने की घोषणा की है।

भुगतान संरचना विकास कोष (पीआईडीएफ) के बारे में

  • डिजिटल भुगतान को और प्रोत्साहन देने के लिए विशेषरूप से वंचित क्षेत्रों में स्वीकार्य ढांचा उपलब्ध कराने की जरूरत है। भारतीय रिजर्व बैंक ने छोटे शहरों और पूर्वोत्तर राज्यों में डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए 500 करोड़ रुपये का भुगतान संरचना विकास कोष (पीआईडीएफ) की कवायद की गयी है।
  • रिजर्व इस कोष में शुरुआती 250 करोड़ रुपये का योगदान देगा। शेष राशि कार्ड जारी करने वाले बैंक और देश में परिचालन कर रहे कार्ड नेटवर्क उपलब्ध कराएंगे। इसके अलावा पीआईडीएफ को कार्ड जारी करने वाले बैंकों और कार्ड नेटवर्कों से परिचालन खर्च को पूरा करने के लिए आवर्ती योगदान भी मिलेगा। सालाना आधार पर किसी तरह की कमी होने पर उसकी भरपाई को केंद्रीय बैंक योगदान देगा। पीआईडीएफ की निगरानी सलाहकार परिषद करेगी। इसका प्रशासनिक नियंत्रण रिजर्व बैंक के पास रहेगा।
  • इसके तहत छोटे शहरों और पूर्वोत्तर राज्यों में पॉइंट ऑफ सेल (पीओएस) उपकरण लगाए जाएंगे। इस कोष में केंद्रीय बैंक शुरुआती 250 करोड़ रुपये का योगदान देगा। शेष राशि का वित्तपोषण कार्ड जारी करने वाले बैंक और कार्ड नेटवर्क करेंगे।
  • हाल के बरसों में देश में भुगतान पारिस्थतिकी तंत्र काफी बदला है। अब भुगतान के कई विकल्प मसलन बैंक खाते, मोबाइल फोन और कार्ड उपलब्ध हैं।

:: विज्ञान और प्रौद्योगिकी ::

आरोग्य सेतु एप

चर्चा में क्यों?

  • सूचना प्रौद्योगिकी पर संसदीय पैनल 17 जून को एक बैठक आयोजित करेगा। बैठक में सरकार के कोरोना वायरस-ट्रैकिंग आरोग्य सेतु एप, डाटा सुरक्षा और नागरिकों की गोपनीयता से संबंधित मुद्दों पर सूचना और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अधिकारियों से चर्चा की जाएगी। सूचना प्रौद्योगिकी पर संसदीय स्थायी समिति की बैठक पहले 10 जून को वरिष्ठ कांग्रेसी नेता शशि थरूर की अध्यक्षता में होनी थी, लेकिन इसे 17 जून तक के लिए स्थगित कर दिया गया।
  • सरकार के कोरोना वायरस-ट्रैकिंग आरोग्य सेतु एप, डाटा सुरक्षा और नागरिकों की गोपनीयता के मुद्दों पर समिति के सदस्यों को संक्षिप्त जानकारी देने के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अधिकारियों को बुलाया गया है।वीडियो कांफ्रेंसिंग बैठक के समग्र विषय पर दो महासचिवों की रिपोर्ट के बाद बैठक के प्रारूप पर अंतिम निर्णय लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू लेंगे।

क्या है आरोग्य सेतु एप

  • सरकार ने कोविड-19 का दृढ़ता से मुकाबला करने के लिए भारत के लोगों को एकजुट करने के उद्देश्‍य से सार्वजनिक-निजी साझेदारी से विकसित एक मोबाइल ऐप की शुरुआत की है। ‘आरोग्‍यसेतु’ नाम का यह ऐप प्रत्‍येक भारतीय के स्वास्थ्य और कल्याण के लिए डिजिटल इंडिया से जुड़ा है। अरोग्य सेतु इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) द्वारा विकसित एक संपर्क-ट्रेसिंग ऐप है।
  • यह लोगों को कोरोना वायरस का संक्रमण पकड़ने के जोखिम का आकलन करने में सक्षम करेगा। यह अत्याधुनिक ब्लूटूथ टेक्‍नोलॉजी, तकनीक, गणित के सवालों को हल करने के नियमों की प्रणाली (अलगोरिथ्म) और कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग करते हुए, दूसरों के साथ उनकी बातचीत के आधार पर इसकी गणना करेगा।
  • एक बार एक आसान और उपयोगकर्ता के अनुकूल प्रक्रिया के माध्यम से स्मार्टफोन में स्थापित होने के बाद, ऐप आरोग्‍यसेतु के साथ स्‍थापित अन्य उपकरणों का पता लगाएगा जो उस फोन के दायरे में आते हैं। एप्लिकेशन तब परिष्कृत मापदंडों के आधार पर संक्रमण के जोखिम की गणना कर सकता है यदि इनमें से किसी भी संपर्क का परीक्षण पॉजिटिव आता है।
  • ऐप कोविड-19 संक्रमण के प्रसार के जोखिम का आकलन करने और आवश्यक होने पर एकांतवास सुनिश्चित करने के लिए सरकार के समय पर कदम उठाने में मदद करेगा।

:: पर्यावरण और पारिस्थितिकी ::

पैंगोलिन

चर्चा में क्यों?

  • चीन ने पैंगोलिन के संरक्षण के स्तर को बढ़ा दिया है। उसने इस प्राणी को प्रथम श्रेणी के संरक्षित जानवरों में शामिल कर दिया है। इस श्रेणी में पांडा जैसे उन जानवरों को रखा गया है, जो विलुप्त होने के कगार पर है। यह माना गया कि पैंगोलिन से ही कोरोना वायरस इंसानों में पहुंचा।
  • चीन ने इस सप्ताहांत पैंगोलिन की सभी प्रजातियों की द्वितीय श्रेणी को बढ़ाकर प्रथम कर दिया। प्रथम श्रेणी में संरक्षित जानवरों को रखा जाता है। इनके शिकार पर प्रतिबंध होता है।

पृष्ठभूमि

  • चीन में पैंगोलिन के मांस का भी सेवन किया जाता है। पारंपरिक चीनी दवाओं में भी आमतौर पर इस स्तनधारी प्राणी का इस्तेमाल होता है। इसके चलते बड़े पैमाने पर पैंगोलिन का शिकार किया जाता है।
  • कोरोना के शुरुआती दौर में संदेह जताया गया था कि सांप और चमगादड़ खाने से यह खतरनाक वायरस फैला। बाद में चीनी वैज्ञानिकों ने माना था कि पैंगोलिन भी कोरोना वायरस का वाहक हो सकता है। यह भी संदेह जताया जाता है कि चीन के वुहान शहर के सीफूड मार्केट से कोरोना वायरस का प्रसार हुआ था।

पैंगोलिन के बारे में

  • पैंगोलिन का जीवन चींटी खाकर गुजरता है। यह पृथ्‍वी पर स्तनधारी और सांप-छिपकली जैसे जानवरों के बीच की कड़ी है। ये एशिया और अफ्रीका के कई देशों में पाए जाते हैं। इनकी खाल के ऊपर ब्लेडनुमा प्लेट्स की एक परत होती है। ये इतनी मजबूत होती है कि इस पर शेर जैसे जानवर के दांतों का भी असर नहीं होता है।

क्यों खतरें मेंपैंगोलिन का अस्तित्व?

  • पैंगोलिन एक ऐसा जानवर है जिसकी दुनिया में सबसे अधिक तस्‍करी होती है। पैंगोलिन के मांस को चीन और वियतनाम समेत कुछ दूसरे देशों में बेहद चाव से खाया जाता है, इसका दूसरा उपयोग दवाओं के निर्माण में भी होता है। खासतौर पर चीन की पारंपरिक दवाओं के निर्माण में इसका ज्‍यादा इस्‍तेमाल होता है। बीते एक दशक के दौरान दस लाख से अधिक पैंगोलिन की तस्‍करी की जा चुकी है।
  • यही वजह है कि ये दुनिया का सबसे अधिक तस्‍करी किए जाने वाला जानवर बन गया है। इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजरवेशन ऑफ नेचर के मुताबिक दुनियाभर के वन्‍य जीवों की अवैध तस्‍करी में अकेले 20 फीसद का योगदान पैंगोलिन का ही है। चीन और वियतनाम में इसका मांस खाना अमीर होने की निशानी है।

राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए)

चर्चा में क्यों?

  • मीडिया के कुछ वर्गों द्वारा देश में बाघों की मौतों का आंकड़ा के मुद्दें पर राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण ने आपत्ति जताते हुए अपना रुख स्पष्ट किया है

पृष्ठभूमि

  • मीडिया के कुछ वर्गों द्वारा देश में बाघों की मौतों का आंकड़ा कुछ इस प्रकार पेश किए जाने का मामला प्रकाश में आया है, जो देश में बाघ संरक्षण के प्रति असंतुलित दृष्टिकोण रखता है और स्पष्ट रूप से इस संबंध में भारत सरकार के प्रयासों को विफल करने और इस मुद्दे को सनसनीखेज बनाने का प्रयास है।

बाघों के संरक्षण के सन्दर्भ में एनटीसीए द्वारा प्रस्तुत तथ्य

  • भारत सरकार के प्रयासों की बदौलत राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के जरिए बाघों को कगार से पुन: प्राप्ति के एक सुनिश्चित मार्ग पर लाया गया है, जो 2006, 2010, 2014 और 2018 में किए गए चार साल में एक बार होने वाले भारतीय बाघ अनुमान के निष्कर्षों से स्पष्ट है। ये परिणाम बाघों की 6 प्रतिशत स्वस्थ वार्षिक वृद्धि दर दर्शाते हैं, जो भारतीय संदर्भ में प्राकृतिक नुकसान की कमी को पूर्ण करते हैं और बाघों को पर्यावासों की क्षमता के स्तर पर बनाए रखते हैं। 2012 से 2019 की अवधि के दौरान देखा जा सकता है कि देश में प्रति वर्ष बाघों की मृत्यु औसतन लगभग 94 के आसपास रही है, जो कि वार्षिक स्‍तर पर प्राकृतिक तौर पर इनकी तादाद बढ़ने से संतुलित होती रही है, जैसा कि इस सुदृढ़ वृद्धि दर से उजागर होता है। इसके अलावा, राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण ने वर्तमान में जारी केंद्र प्रायोजित योजना प्रोजेक्ट टाइगर के तहत गैर कानूनी शिकार पर काबू पाने के लिए कई कदम उठाए हैं, जिसे काफी हद तक नियंत्रित किया जा चुका है, जैसा कि शिकार और जब्ती के पुष्‍ट मामलों में देखा गया है।
  • राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण ने अपनी वेबसाइट के साथ-साथ समर्पित पोर्टल के माध्यम से नागरिकों को बाघों की मौत के आंकड़े उपलब्ध कराने के लिए पारदर्शिता के उच्चतम मानकों को बरकरार रखा है, ताकि लोग यदि चाहें तो उनका तार्किक मूल्यांकन कर सकें। 8 वर्षों की लम्‍बी समय सीमा के आंकड़ों की प्रस्तुति बड़ी संख्या बताकर भोले भाले पाठकों के मन में अवांछित भय उत्‍पन्‍न करने की मंशा की ओर इंगित करती है। इसके अलावा, इसमें इस तथ्य को पर्याप्त रूप से शामिल नहीं किया गया है कि भारत में 60 प्रतिशत बाघों की मौत का कारण शिकार नहीं है।
  • एनटीसीए में एक समर्पित मानक संचालन प्रक्रिया के माध्यम से किसी बाघ की मौत का कारण बताने के लिए एक कठोर प्रोटोकॉल मौजूद है, जिसे राज्य द्वारा तस्वीरों और परिस्थितिजन्य सबूतों के अलावा शव परीक्षण रिपोर्ट, हिस्टोपैथोलॉजिकल और फोरेंसिक आकलन प्रस्तुत करने के माध्यम से साबित नहीं किए जाने तक अप्राकृतिक माना जाता है। इन दस्तावेजों के विस्तृत विश्लेषण के बाद ही बाघ की मौत का कारण बताया जाता है।

राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के बारे में

  • राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के तहत एक सांविधिक निकाय है, जिसे वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के प्रावधानों के सक्षम प्रावधानों के तहत गठित किया गया है। इसके शक्तियों और कार्यों के अनुसार बाघ संरक्षण को मजबूत करने के लिए 2006 में संशोधित किया गया ।

मध्य प्रदेश में चमगादड़ों की मौत

चर्चा में क्यों?

  • मध्य प्रदेश में चमगादड़ों की मौत का कारण अब भी नहीं सुलझ पाई है। राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशु रोग संस्थान की रिपोर्ट से यह तो पुष्टि हो गई है कि सिंगरौली में चमगादड़ों की मौत का कारण निपाह व सार्स-2 वायरस नहीं है, पर वास्तविक कारण क्या है, इस बारे में कोई जानकारी नहीं हो सकी।

पृष्ठभूमि

  • गौरतलब है कि सिंगरौली और बैतूल जिले में पिछले माह अचानक सैकड़ों चमगादडों की मौत हो गई थी।दोनों ही जिलों से मृत चमगादड़ों के पोस्टमार्टम कर सैंपल राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशु रोग संस्थान आनंद नगर, भोपाल भेजे गए थे। इनमें से सिंगरौली के सैंपलों की जांच पूरी कर संस्थान ने उप-संचालक पशु चिकित्सा सेवाएं सिंगरौली को रिपोर्ट भेजी है। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि जांच में चमगादड़ों की मौत निपाह और सार्स-2 वायरस से होना नहीं पाया गया है।
  • मध्य प्रदेश के बैतूल और सिंगरौली में सैकड़ों की संख्‍या में चमगादड़ों की मौत से दहशत फैल ऐसे में वन विभाग ने दोनों जिलों में टीमें गठित कर जांच शुरू कर दी और संबंधित डीएफओ (डिस्ट्रि‍क्ट फॉरेस्ट ऑफिसर) से विस्तृत रिपोर्ट मांगी। चमगादड़ों का पोस्टमार्टम कराकर सैंपल जांच के लिए वेटरनरी कॉलेज जबलपुर और उच्च सुरक्षा पशु रोग प्रयोगशाला (एचएसएडीएल) भोपाल भेजे गए।

:: विविध ::

महिला एशिया कप 2022

  • एशियाई फुटबॉल परिसंघ (एएफसी) ने 1979 के बाद पहली बार 2022 महिला एशियाई कप की मेजबानी के अधिकार भारत को दिये हैं।यह फैसला एएफसी महिला फुटबॉल समिति की बैठक में लिया गया। फरवरी में एएफसी महिला फुटबॉल समिति ने भारत को मेजबान बनाने की सिफारिश की थी।एआईएफएफ के लिये यह मेजबानी मनोबल बढ़ाने वाली है क्योंकि उसे फीफा अंडर-17 महिला विश्व कप की मेजबानी भी सौंपी गयी थी जिसका आयोजन अगले साल होगा।

आर्ट बेसेल’ मेला

  • वर्तमान वैश्विक स्थिति को देखते हुये इस साल आयोजित होने वाले ‘आर्ट बेसेल’ मेले को रद्द कर दिया गया है। मेला को पहले जून से सितंबर तक के लिए टाल दिया गया था, लेकिन अब वर्तमान वैश्विक स्थिति के व्यापक विश्लेषण के बाद आखिरकार इसे रद्द कर दिया गया।
  • विश्व के सबसे बड़े कला मेलों में से एक, आर्ट बेसेल मेला 17 से 20 सितंबर तक चार दिनों तक मेस्सी बेसेल (स्विट्जरलैंड) में होने वाला था। पहले इसका आयोजन जून में होने वाला था। बाद में इसे सितंबर तक के लिए टाल दिया गया।

:: प्रिलिम्स बूस्टर ::

  • हाल ही में भारत सरकार के द्वारा मातृत्व की आयु, ‘एमएमआर’ और पोषण स्तर बेहतर करने से जुड़े मुद्दों हेतु किसकी अध्यक्षता में कार्यदल का गठन किया गया है? (सुश्री जया जेटली)
  • बाघों की मृत्यु के आंकड़े को लेकर चर्चा में रही ‘राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण’ का गठन किस अधिनियम के तहत किया गया था? (वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 में संशोधन द्वारा 2006 में)
  • डाटा सुरक्षा और नागरिकों की गोपनीयता से संबंधित मुद्दों से चर्चा में रही आरोग्य सेतु का विकास किस संस्था के द्वारा किया गया है? (इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय)
  • आरोग्य सेतु एप के निजता और गोपनीयता से संबंधित मुद्दों पर बैठक के कारण चर्चा में रहे सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी संसदीय समिति के अध्यक्ष कौन हैं? (शशि थरूर)
  • चमगादड़ों में निपाह व सार्स-2 वायरस के प्रसार की संभावना की जांच को लेकर चर्चा में रहे उच्च सुरक्षा पशु रोग प्रयोगशाला (एचएसएडीएल) कहां स्थित है? (भोपाल मध्य प्रदेश)
  • हाल ही में किस राज्य के द्वारा बारिश और बाढ़ के पूर्वानुमान हेतु मेघा संदेशा (MeghaSandesha) और वरुणमित्र (Varunamitra) ऐप लॉन्च किए गए हैं? (कर्नाटक)
  • कोविड-19 के संभावित स्रोत की आशंका से चीन सरकार ने हाल ही में किस जंतु को ‘प्रथम श्रेणी में संरक्षित जानवरों की सूची’ में शामिल किया है? (पैंगोलिन)
  • हाल ही में किस देश ने जॉर्ज फ्लॉयड की जघन्य हत्या और अमेरिका में नस्लवाद के प्रत्युत्तर में ‘ब्लैक फ्राइडे कार्यक्रम’ को शुरू किया है? (दक्षिण अफ्रीका)
  • हाल ही में 8 देशों के द्वारा चीन पर नजर रखने हेतु किस एलायंस का गठन किया गया है एवं इसमें कौन से देश शामिल है? (इंटर-पार्लामेंटरी अलायंस ऑन चाइना-IPAC, अमेरिका, जर्मनी, ब्रिटेन, जापान, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, स्वीडन, नॉर्वे और यूरोप की संसद)
  • भारत समेत अन्य एशियाई देशों में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के हनन पर टिप्पणी से चर्चा में रहे संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख कौन है? (मिशेल बैचलेट)
  • हाल ही में रिजर्व बैंक ने छोटे शहरों और पूर्वोत्तर राज्यों में डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने हेतु 500 करोड़ रुपए के किस कोष की स्थापना की है? (भुगतान संरचना विकास कोष-पीआईडीएफ)
  • हाल ही में एशियाई फुटबॉल परिसंघ (एएफसी) ने 1979 के बाद पहली बार किस वर्ष हेतु महिला एशियाई कप की मेजबानी के अधिकार भारत को दिये हैं? (2022)

स्रोत साभार: Dainik Jagran (Rashtriya Sanskaran), Dainik Bhaskar (Rashtriya Sanskaran), Rashtriya Sahara (Rashtriya Sanskaran) Hindustan Dainik (Delhi), Nai Duniya, Hindustan Times, The Hindu, BBC Portal, The Economic Times (Hindi & English), PTI, PIB

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