(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (6 जून 2020)

दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर


(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (6 जून 2020)


:: राष्ट्रीय समाचार ::

ऑपरेशन ब्लू स्टार

चर्चा में क्यों?

  • ब्रिटेन में विपक्षी दल लेबर पार्टी के सांसद तनमनजीत सिंह ढेसी ने भारत में जून 1984 में हुए ऑपरेशन ब्लू स्टार में मार्गरेट थैचर के नेतृत्व वाली तत्कालीन ब्रिटिश सरकार की भूमिका की स्वतंत्र जांच की मांग की है। अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में भारतीय सेना के अभियान ऑपरेशन ब्लू स्टार के 36 वर्ष पूरा होने के मौके पर ब्रिटेन के पहले पगड़ीधारी सिख सांसद ढेसी ने हाउस ऑफ कॉमन्स में यह मुद्दा उठाया। उन्होंने इस पर चर्चा की भी मांग की।
  • इस मामले में जांच की मांग कुछ वर्ष पहले तब उठी थी जब यह खुलासा हुआ था कि ऑपरेशन ब्लू स्टार से पहले ब्रिटेन की सेना ने भारतीय बलों को सलाह दी थी। तब ब्रिटेन के तत्कालीन प्रधानमंत्री डेविड कैमरून ने इस बारे में आंतरिक जांच के आदेश दिए थे। इसके बाद संसद में बयान दिया गया था कि ब्रिटेन की भूमिका पूरी तरह से परामर्शदाता की थी और विशेष वायु सेवा की सलाह का उस अभियान पर ‘सीमित असर’ पड़ा था।

ऑपरेशन ब्लू स्टार क्या था?

  • ऑपरेशन ब्लू स्टार भारतीय सेना द्वारा 3 से 6 जून 1984 को अमृतसर (पंजाब, भारत) स्थित हरिमंदिर साहिब (स्वर्ण मंदिर) परिसर को ख़ालिस्तान समर्थक जनरैल सिंह भिंडरावाले और उनके समर्थकों से मुक्त कराने के लिए चलाया गया अभियान था।दरअसल देश की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी देश के सबसे खुशहाल राज्य पंजाब को उग्रवाद के दंश से छुटकारा दिलाना चाहती थीं, लिहाजा उन्होंने यह सख्त कदम उठाया और खालिस्तान के प्रबल समर्थक जरनैल सिंह भिंडरावाले का खात्मा करने और सिखों की आस्था के पवित्रतम स्थान स्वर्ण मंदिर को उग्रवादियों से मुक्त करने के लिए यह अभियान चलाया।

‘मेरा जीवन - मेरा योग’ वीडियो ब्लॉगिंग प्रतियोगिता

  • कोविड-19 की वजह से देश में मौजूदा स्वास्थ्य आपात स्थिति के मद्देनजर इस वर्ष अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पूरी दुनिया में डिजिटल प्‍लेटफॉर्मों के माध्‍यम से मनाया जाएगा। माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने सभी लोगों से ‘मेरा जीवन - मेरा योग’ वीडियो ब्लॉगिंग प्रतियोगिता में भाग लेने का आह्वान किया है। इस वीडियो ब्लॉगिंग प्रतियोगिता के माध्यम से आयुष मंत्रालय और आईसीसीआर योग के बारे में जागरूकता बढ़ाने और अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस यानी आईडीवाई2020 मनाने के लिए लोगों को तैयार करने एवं इसमें सक्रिय भागीदार बनने के लिए प्रेरित करना चाहते हैं।
  • यह प्रतियोगिता योग की उपचारात्मक और चिकित्सीय क्षमता के साथ-साथ लोगों के जीवन पर योग के उल्‍लेखनीय परिवर्तनकारी प्रभावों के बारे में भी वैश्विक स्‍तर पर जागरूकता बढ़ाने में व्‍यापक योगदान देगी। योग संस्‍थानों, योग स्टूडियो, योग प्रोफेशनलों जैसे सभी हितधारकों को प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया सहित उनके विभिन्न प्लेटफॉर्मों के माध्यम से ब्लॉगिंग प्रतियोगिता के बारे में जागरूक किया जा रहा है।

देश भर में 200 ‘नगर वन’ विकसित करने की शहरी वन योजना

चर्चा में क्यों?

  • विश्व पर्यावरण दिवस (डब्‍ल्‍यूईडी) हर साल 5 जून को मनाया जाता है।पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) द्वारा घोषित थीम पर ध्यान केंद्रित करते हुए डब्‍ल्‍यूईडीमनाता है और कई कार्यक्रम आयोजित करता है। इस वर्ष का विषय 'जैव विविधता' है। कोविड-19 महामारी के कारण जारी हालात के मद्देनजर मंत्रालय ने इस वर्ष के थीम नगर वन (शहरी वन) पर ध्यान केंद्रित करते हुए विश्व पर्यावरण दिवस का आयोजन वर्चुअल रूप से किया।
  • विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर परसरकार ने वन विभाग, नगर निकायों, गैर सरकारी संगठनों, कॉर्पोरेट्स और स्‍थानीय नागरिकों के बीच भागीदारी और सहयोग पर नए सिरे से ध्यान केंद्रित करते हुए अगले पांच वर्षों में देश भर में 200 शहरी वन विकसित करने के लिए नगर वन योजना के कार्यान्वयन की घोषणा की।
  • शहरी वनों पर सर्वोत्तम प्रथाओं पर एक विवरणिका का विमोचन और नगर वन योजना की घोषणा करते हुएकेंद्रीय पर्यावरण मंत्रीश्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि ये वन शहरों के फेफड़ों के रूप में काम करेंगे और मुख्य रूप से शहर की वन भूमि पर या स्थानीय शहरी निकायों द्वारा प्रस्तावित किसी अन्य खाली जगह पर होंगे। इस वर्ष के थीम अर्थातजैव विविधता पर विशेष ध्यान देने के साथ "टाइम फॉर नेचर" पर जोर देते हुएश्री जावड़ेकर ने कहा, "प्रधान नियम यह है कि यदि हम प्रकृति की रक्षा करते हैं, तो प्रकृति हमारी रक्षा करती है"।

पृष्ठभूमि

  • भारत पशुओं और पौधों की कई प्रजातियों से समृद्ध जैव विविधता से संपन्न है और जैव-विविधता से युक्‍त 35 वैश्विक हॉटस्पॉट्स में से 4 का मेजबान है, जिनमें अनेक स्थानिक प्रजातियां मौजूदहै। हालांकिबढ़ती जनसंख्या, वनों की कटाई, शहरीकरण और औद्योगीकरण ने हमारे प्राकृतिक संसाधनों पर भारी दबाव डाल दिया है, जिससे जैव विविधता की हानि हो रही है। जैव विविधता इस ग्रह पर सभी जीवन रूपों के अस्तित्व के लिए महत्वपूर्ण है और विभिन्न पारिस्थितिकीय सेवाएं प्रदान करने की कुंजी है।
  • पारंपरिक रूप से जैव विविधता संरक्षण को दूरस्थ वन क्षेत्रों तक ही सीमित माना जाता रहा है, लेकिन बढ़ते शहरीकरण के साथ शहरी क्षेत्रों में भी जैव विविधता को सुरक्षित रखने और बचाने के लिए आवश्यकता उत्पन्न हो गई है। शहरी वन इस अंतर को मिटाने का सबसे अच्छा तरीका है। इसलिए, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने उचित रूप से शहरी परिदृश्य में जैव विविधता के प्रोत्‍साहन और संरक्षण के लिए नगर वन को डब्‍ल्‍यूईडीसमारोह 2020 के थीम के रूप में अपनाया है।

कोविड-19 के समय सुरक्षित ऑनलाइन लर्निंग सूचना पुस्तिका

चर्चा में क्यों?

  • केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री श्री रमेश पोखरियाल निशंक ने नई दिल्ली में सूचना पुस्तिका ‘कोविड-19 के समय सुरक्षित ऑनलाइन लर्निंग‘ को डिजिटल तरीके से लॉन्‍च किया, जिससे कि सुरक्षित रहते हुए ऑनलाइन शिक्षा को लेकर छात्रों एवं शिक्षकों के बीच जागरूकता का प्रसार हो सके। राष्ट्रीय शैक्षणिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) एवं यूनेस्को के नई दिल्ली कार्यालय ने यह पुस्तिका तैयार की। यह पुस्तिका मूलभूत रूप से क्या करें और क्या न करें के माध्यम से बच्चों, युवाओं को ऑनलाइन तरीके से सुरक्षित रखने में मददगार होगी, जिससे माता-पिता और शिक्षक अपने बच्चों को सुरक्षित तरीके से इंटरनेट का उपयोग करना सिखाएंगे।
  • अगर बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की सुविधा प्रदान करनी है,तो वेबसाइट, डिजिटल प्लेटफार्म, सोशल मीडिया प्लेटफार्म साइबर बदमाशी से मुक्त रहें। सूचना पुस्तिका ‘कोविड-19 के समय सुरक्षित ऑनलाइन लर्निंग‘ साइबर बदमाशी के नकारात्मक दुष्परिणामों और उनसे बचने तथा उन्हें खत्म करने के तरीकों को रेखांकित करती है। यूनेस्को और एनसीईआरटी यह पुस्तिका एक सुरक्षित ऑनलाइन वातावरण सृजित करने में एक बहुमूल्य माध्यम के रूप में कार्य करेगी।

पृष्ठभूमि

  • कोविड-19 महामारी के और अधिक प्रसार पर अंकुश लगाने के लिए रोकथाम संबंधी उपाय के रूप में, देश भर में 20 मार्च, 2020 से स्कूलों, विश्वविद्यालयों, प्रशिक्षण केंद्रों एवं अन्य शैक्षणिक संस्थानों को बंद कर दिया गया। इससे शिक्षा में अभूपूर्व व्यवधान पड़ा और 90 प्रतिशत से अधिक स्कूली आबादी प्रभावित हुई। मानव संसाधन विकास मंत्रालय और राज्य शिक्षा विभागों ने विभिन्न डिजिटल प्लेटफार्मों के माध्यम से शिक्षा की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए सतत् प्रयास किए हैं। किशोरों को विभिन्न डिजिटल प्लेटफार्मों का यह अनुभव प्राप्त होने से साइबर बदमाशी के प्रति उनकी अतिसंवेदनशीलता बढ़ी है।

क्यों चिंता की है बात?

  • भारत में, 5-11 वर्ष की आयु के लगभग 71 मिलियन बच्चे अपने परिवार के सदस्यों के डिवाइस पर इंटरनेट एक्सेस करते हैं जो कि देश के 500 मिलियन के सक्रिय इंटरनेट यूजर बेस का लगभग 14 प्रतिशत हैं। भारत में दो तिहाई इंटरनेट यूजर 12 से 29 वर्ष की आयु समूह के (इंटरनेट एवं एएमपी, मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया द्वारा साझा किया गया डाटा) हैं। डाटा एवं संख्याओं ने रेखांकित किया है कि लॉकडाउन के बाद इंटरनेट ने बच्चे एवं युवाओं के लिए आनलाइन भेदभाव सहित साइबर बदमाशी के जोखिम को बढ़ा दिया है।
  • इन समस्याओं के समाधान के प्रयोजन से राष्ट्रीय शैक्षणिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) एवं यूनेस्को के नई दिल्ली कार्यालय ने यह पुस्तिका तैयार की।

:: अंतर्राष्ट्रीय समाचार ::

म्यूचुअल लॉजिस्टिक्स सपोर्ट एग्रीमेंट (एमएलएसएम)

चर्चा में क्यों?

  • भारत और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्रियों की अगुआई में दोनों देशों के बीच पहली वर्चुअल शिखर बैठक कई मायने में ऐतिहासिक रही। ऑस्ट्रेलिया के पीएम स्कॉट मॉरीसन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दोनों देशों के बीच के रिश्ते को आगे बढ़ाते हुए इसे व्यापक रणनीतिक साझेदारी में तब्दील कर दिया है। दोनों देशों के बीच नौ समझौते हुए जिसमें सबसे अहम डील एमएलएसएम है, जिसके तहत दोनों देश एक दूसरे के सैन्य अड्डे का इस्तेमाल कर सकेंगे।

क्या है म्यूचुअल लॉजिस्टिक्स सपोर्ट एग्रीमेंट (एमएलएसएम)?

  • एमएलएसएम के तहत दोनों देश एक दूसरे के सैन्य अड्डे का इस्तेमाल कर सकेंगे। इस तरह का समझौता भारत ने अभी तक अमेरिका, फ्रांस, दक्षिण कोरिया और सिंगापुर के साथ किया है। इस समझौते के मुताबिक अब भारतीय नौसैनिक जहाजों को ऑस्ट्रेलिया के तेल टैंकर से कहीं भी ईंधन मिल सकता है। ऑस्ट्रेलियाई नौसेना के जहाजों को यही सुविधा भारत भीदेगा।
  • एक दूसरे की वायु सेना के विमानों को उतरने, उड़ान भरने, रख-रखाव की सुविधा भी दोनों देश देंगे। जाहिर है कि भारतीय जहाजों को अब हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहूलियत होगी। सैन्य सहयोग बढ़ाने के दूसरे आयामों का एलान किया गया है।

अन्य अहम समझौते

  • दोनों देशों ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सामुद्रिक सहयोग को लेकर जारी किया साझा दृष्टि पत्र
  • भारत को एनएसजी की सदस्यता दिलाने के लिए अपना मजबूत समर्थन देगा ऑस्ट्रेलिया
  • सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता की दावेदारी के लिए भी समर्थन का भरोसा
  • इंडोनेशिया, वियतनाम, न्यूजीलैंड, दक्षिण कोरिया, अमेरिका के साथ बढ़ाएंगे सहयोग

परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी)

चर्चा में क्यों?

  • परमाणु आपूर्ति समूह में भारत की सदस्यता के लिए ऑस्ट्रेलिया ने मजबूत समर्थन जताया और विस्तारित संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् में नयी दिल्ली की स्थायी सदस्यता का समर्थन किया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और ऑस्ट्रेलिया के उनके समकक्ष स्कॉट मॉरिसन के बीच हुए ऑनलाइन शिखर सम्मेलन के बाद जारी संयुक्त बयान में ऑस्ट्रेलिया के समर्थन की जानकारी दी गई। ‘‘दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय नागरिक परमाणु सहयोग जारी रखने और वैश्विक परमाणु अप्रसार को और मजबूत करने के लिए अपनी वचनबद्धता दोहराई। ऑस्ट्रेलिया ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् (यूएनएससी) में भारत की स्थायी सदस्यता और 2021-22 में यूएनएससी में अस्थायी सीट के लिए भी समर्थन किया।

पृष्ठभूमि

  • ऑस्ट्रेलिया ने परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) में भारत को सदस्यता देने का मजबूत समर्थन किया।’’ एनएसजी 48 देशों का समूह है जो वैश्विक परमाणु व्यापार को नियंत्रित करता है। नये सदस्यों को सहमति से प्रवेश दी जाती है। भारत ने मई 2016 में सदस्यता के लिए औपचारिक रूप से आवेदन किया था। समूह के अधिकतर सदस्य जहां भारत का समर्थन करते हैं वहीं इस समूह में भारत के प्रवेश के लिए चीन विरोध करता रहा है।

क्या है परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी)

  • एनएसजी परमाणु सामग्री आपूर्तिकर्ता देशों का एक समूह है जो इन सामग्रियों, उपकरणों और प्रौद्योगिकियों के निर्यात को नियंत्रित कर परमाणु प्रसार को रोकना चाहता है, इनका इस्‍तेमाल परमाणु हथियार निर्माण में किया जा सकता है। एनएसजी को सात भागीदारी सरकारों यथा कनाडा, पश्‍चिमी जर्मनी, फ्रांस, जापान, सोवियत संघ, यूके और अमेरिका के साथ मिलकर 1975 में गठन किया गया था।

वैश्विक टीका गठबंधन ‘गावी’

चर्चा में क्यों?

  • भारत ने अंतरराष्ट्रीय टीका गठबंधन ‘गावी’ के लिये 1.5 करोड़ डॉलर देने का संकल्प व्यक्त किया । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह संकल्प ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन द्वारा आयोजित वैश्विक टीका शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए व्यक्त किया। इस शिखर सम्मेलन में 50 से अधिक देशों के कारोबारी नेताओं, संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों, सरकार के मंत्रियों, नागरिक संस्थाओं, शासनाध्यक्षों आदि ने हिस्सा लिया ।
  • इस सम्मेलन का मकसद वैक्सीन एलाइंस ‘गावी’ के लिए 7.4 अरब डॉलर जुटाना है। यह आने वाली पीढ़ियों को टीके के जरिए सुरक्षित करने के अतिरिक्त संसाधन के जैसा है।

क्या है वैक्सीन एलाइंस ‘गावी’?

  • वैक्सीन एलाइंस ‘गावी’ संयुक्त राष्ट्र समर्थित एक संगठन है जो दुनिया भर में टीकाकरण का समन्वय करता है।

:: अर्थव्यवस्था ::

ग्रामीण भारत और कृषि को बढ़ावा देने के उद्देश्‍य से दो अध्‍यादेश जारी

  • आत्‍मनिर्भर भारत अभियान के अंतर्गत किसानों की आय बढ़ाने के लिए कृषि क्षेत्र में सुधारों के लिए भारत सरकार द्वारा ऐतिहासिक फैसलों की घोषणा के बाद, भारत के राष्ट्रपति ने कृषि और सहायक कार्यों में लगे किसानों के लिए ग्रामीण भारत को बढ़ावा देने के उद्देश्‍य से निम्नलिखित अध्यादेशों को जारी कर दिया है।
  1. कृषि उपज व्‍यापार और वाणिज्‍य (संवर्धन और सुविधा) अध्‍यादेश 2020
  2. मूल्‍य आश्‍वासन पर किसान समझौता (अधिकार प्रदान करना और सुरक्षा) और कृषि सेवा अध्‍यादेश 2020

पृष्ठभूमि

  • केन्‍द्र सरकार किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से कृषि विपणन में दक्षता और प्रभावशीलता प्रदान करने के लिए व्यापक हस्तक्षेप कर रही है। कृषि उपज के विपणन के समग्र विकास को रोकने वाली अड़चनों को पहचानकर, सरकार ने राज्‍यों द्वारा अपनाए जाने के लिए मॉडल कृषि उत्पाद और पशुधन विपणन (एपीएलएम) कानून 2017 और मॉडल कृषि उत्पाद और पशुधन संविदा कानून, 2018 का मसौदा तैयार किया और उसे प्रचारित किया।
  • कोविड-19 संकट के दौरान जब कृषि और उससे संबद्ध गतिविधियों के पूरे पारिस्थितिकी प्रणाली की जांच की गई, तो इसमें इस बात की एक बार फिर पुष्टि हुई कि केन्‍द्र सरकार की सुधार प्रक्रिया में तेजी लाई जानी चाहिए और इसमें एक राष्‍ट्रीय कानूनी सुविधाजनक प्रणाली होनी चाहिए ताकि राज्‍य के भीतर और दो राज्‍यों के बीच कृषि उपज के व्‍यापार में सुधार हो सके। भारत सरकार ने इस बात को मान्‍यता दी कि किसान बेहतर मूल्‍य पर अपनी फसल को अपनी पसंद के स्थान पर अपने कृषि उत्पाद बेच सकता है जिससे संभावित खरीदारों की संख्‍या में बढ़ोतरी होगी। खेती के समझौतों के लिए एक सुविधाजनक ढांचा भी आवश्यक माना गया। अत: दो अध्यादेशों को जारी कर दिया गया।

“कृषि उपज व्‍यापार और वाणिज्‍य (संवर्धन और सुविधा) अध्‍यादेश 2020

  • एक ऐसे पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करेगा जहां किसानों और व्यापारियों को किसानों की उपज की बिक्री और खरीद से संबंधित पसंद की स्वतंत्रता का आनंद मिलता है जो प्रतिस्पर्धी वैकल्पिक व्यापार प्रणाली के माध्यम से पारिश्रमिक मूल्‍यों की सुविधा देता है। यह विभिन्न राज्य कृषि उपज बाजार कानूनों के तहत अधिसूचित वास्‍तविक बाजार परिसरों या जिनको बाजार बनाया जाएगा उनके बाहर किसानों की उपज के कुशल, पारदर्शी और बाधा रहित अंतर-राज्य और राज्‍य के भीतर व्यापार और वाणिज्य को बढ़ावा देगा। इसके अलावा, अध्यादेश इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग और जुड़े हुए मामलों या आकस्मिक उपचार के लिए एक सुविधाजनक ढांचा प्रदान करेगा।

“मूल्‍य आश्‍वासन पर किसान समझौता (अधिकार प्रदान करना और सुरक्षा) और कृषि सेवा अध्‍यादेश 2020”

  • कृषि समझौतों पर एक राष्ट्रीय ढांचा प्रदान करेगा जो कृषि-व्यवसाय फर्मों, प्रोसेसर, थोक व्यापारी, निर्यातकों या कृषि सेवाओं के लिए बड़े खुदरा विक्रेताओं और आपस में सहमत पारिश्रमिक मूल्य ढांचे पर भविष्य में कृषि उपज की बिक्री के लिए स्‍वतंत्र और पारदर्शी तरीके से और इसके अतिरिक्‍त एक उचित रूप से संलग्न करने के लिए किसानों की रक्षा करता है और उन्हें अधिकार प्रदान करता है।
  • उपरोक्त दो उपाय कृषि उपज में बाधा मुक्त व्यापार को सक्षम बनाएंगे, और किसानों को उनकी पसंद के प्रायोजकों के साथ जुड़ने के लिए भी सशक्त बनाएंगे। इस प्रकार किसान की स्वतंत्रताजो सर्वोपरि है, प्रदान की गई है।

:: विज्ञान और प्रौद्योगिकी ::

आईसीएआर के वैज्ञानिकों ने खेाजी कोविड-19 की दवा!

  • भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के तहत काम करने वाले राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र (NRCE) हिसार के वैज्ञानिकों ने कोरोनावायरस की एक दवा खोजने में सफलता पाई है। यदि इसका परीक्षण सफल रहा तो इससे कोविड-19 के मरीजों का इलाज हो सकता है।

कोविड-19 सदी का सबसे भयानक संकट क्यों है?

  • Indian Council of Agriculture research (ICAR) के अनुसार इस समय कोरोना महामारी विश्व समुदाय के लिए इस सदी के सबसे भयानक संकट के रूप में उभर कर सामने आया है। कोरोना के नियंत्रण हेतु फिलहाल न तो कोई दवा और न ही कोई टीका उपलब्ध है। परंपरागत रूप से एंटीवायरल दवाओं को विकसित करते समय वायरस के किसी एक प्रोटीन को टारगेट किया जाता है। लेकिन वायरस को अपने आप में तेजी से और लगातार परिवर्तन करने की अपनी क्षमता इस तरह की दवाओं को बेअसर कर देती है। वैज्ञानिकों के लिए यह एक बड़ी चुनौती है।
  • विकल्प के तौर पर पिछले एक डेढ़ दशक से वैज्ञानिक मानव कोशिकाओं में विद्यमान लगभग 25 हजार प्रोटीन में से उन प्रोटीन का पता लगाने में जुटे है जो वायरस के लिए तो अत्यंत आवश्यक है लेकिन कोशिका को अपना जीवन चलाने के अन्य विकल्प विद्यमान रहते है। ऐसी प्रोटीन को टारगेट कर एंटीवायरल दवा बनाना जिसे सामान्यता होस्ट डायरेक्टिड एंटीवायरल host-directed antiviral थैरेपी कहते हैं। इसमें दवा प्रतिरोधी वायरस उत्पन्न करने की क्षमता ना के बराबर होती हैं।

संस्थान द्वारा खोजी गयी दवा के बारे में

  • आईसीएआर के अधीन कार्यरत राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केन्द्र हिसार के वैज्ञानिक इस तरह की दवा को विकसित करने में लम्बे समय से प्रयासरत हैं। कोरोना महामारी के शुरू होते ही केन्द्र के वैज्ञानिकों ने कुछ ऐसी परंपरागत दवाओं पर तेजी से परीक्षण शुरू किया जिनका उपयोग मनुष्य में पहले कभी न कभी अन्य बीमारियों में हो चुका है और पूर्णतया सुरक्षित मानी जाती है।
  • ऐसी दवाएं सामान्यतया सीधे वायरस पर टारगेट करने की बजाय होस्ट की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती हैं। इस दिशा में एक कम्पाऊंड VTC-antiC1 ने मुर्गी के भ्रूणों को कोरोनावायरस (इन्फैकशियस ब्रांइकाइट्‌स वायरस) के खिलाफ न केवल पूर्णतया सुरक्षा प्रदान की अपितु भ्रूणों के विकास को भी सामान्य बनाए रखा। तत्पश्चात्‌ इस दवा को अन्य विषाणुओं जैसे एन.डी.वी. (आर.एन.ए. वायरस) एवं बफैलोपॉक्स (डी.एन.ए.वायरस) में भी सफल परीक्षण किया गया। उपरोक्त सभी परिणाम इस ओर इंगित करते है VTC-antiC1 कोविड-19 के खिलाफ कारगर साबित हो सकता है। आईसीएआर का कहना है कि इस दिशा में अभी और परिक्षण जारी हैं।

:: पर्यावरण और पारिस्थितिकी ::

5 जून: विश्व पर्यावरण दिवस

  • 5 जून को मनुष्य और प्रकृति के मध्य संबंधों को दर्शाते हुए पर्यावरण के संदर्भ में जागरूकता प्रसार करने के लिए प्रतिवर्ष विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है। वैश्विक समुदाय के द्वारा पहली बार 5 जून 1974 को स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम में पहला विश्व पर्यावरण दिवस मनाया गया जिसके बाद से हर साल 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है।
  • वर्ष 2020 के पर्यावरण दिवस की थीम ‘जैव विविधता’ पर केंद्रित करते हुए तत्कालजैव विविधता केसंरक्षण की बात कही गई है। इसके साथ ही वर्ष 2020 के पर्यावरण दिवस का मेजबान राष्ट्र कोलंबिया है। यह वर्ष जैव विविधता के दृष्टिकोण से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकिसंयुक्त राष्ट्र अध्यक्ष के द्वारा न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र असेंबली में 22-23 सितंबर को एक बैठक का आयोजन किया जाएगा जिसकी थीम है “ सतत विकास के लिए जैव विविधता पर तुरंत कार्रवाई”। इसके साथ ही 2020 के जैव विविधता कन्वेंशन में जैव विविधता के संदर्भ में वर्ष 2020 से आगे वैश्विक जैव विविधता फ्रेमवर्क को स्वीकार करेगा जो 2050 के विजन “"Living in harmony with nature" के अनुरूप होगा। इसमें कुल 196 पार्टी के द्वारा नए नियमों के लिए बातचीत प्रारंभ करेंगें जो जैव विविधता के लिए नए नियम बनाएगा।

"हेल्दी एंड एनर्जी एफिशिएंट बिल्डिंग्स" पहल

चर्चा में क्यों?

  • विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर, एनर्जी एफिशिएंसी सर्विसेज लिमिटेड (ईईएसएल), विद्युत मंत्रालय के अंतर्गत सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों का एक संयुक्त उपक्रम, यूएस एजेंसी फॉर इंटरनेशनल डेवलपमेंट्स (यूएसएआईडी) के मैत्री कार्यक्रम की साझेदारी में, "हेल्दी एंड एनर्जी एफिशिएंट बिल्डिंस" पहल की शुरुआत कार्यस्थलों को स्वच्छ और हरा-भरा बनाने का मार्ग प्रशस्त करने के लिए किया है।

क्या है उद्देश्य?

  • मार्केट इंटीग्रेशन एंड ट्रांसफॉर्मेशन प्रोग्राम फॉर एनर्जी एफिशिएंसी (मैत्री), जिसके अंतर्गत इस पहल की शुरुआत की गई है, ऊर्जा मंत्रालय और यूएसएआईडी के बीच अमेरिका-भारत द्विपक्षीय साझेदारी का एक हिस्सा है और इसका उद्देश्य इमारतों के अंदर एक मानक अभ्यास के रूप में लागत प्रभावी ऊर्जा दक्षता को अपनाना है, और उसका ध्यान विशेष रूप से शीतलन पर केंद्रित है।
  • इस पायलट "हेल्दी एंड एनर्जी एफिशिएंट बिल्डिंग्स" पहल के भाग के रूप में, ईईएसएल ने अपने कार्यालयों में इस संरचना को लागू करके नेतृत्व प्राप्त किया है। “यह पहल मौजूदा इमारतों और वातानुकूलन प्रणाली को फिर से तैयार करने की चुनौतियों का समाधान कर रही है जिससे कि वे स्वच्छ और ऊर्जा कुशल दोनों बन सकें। यह पायलट योजना अन्य इमारतों को स्वच्छ और ऊर्जा कुशल बनने के लिए उचित कदम उठाने का मार्ग प्रशस्त करेगा।

पृष्ठभूमि

  • भारत में बहुत लंबे समय से हवा की खराब गुणवत्ता चिंता का विषय रही है और कोविड महामारी के आलोक में यह और ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है। जैसा कि लोगों ने अपने कार्यालयों और सार्वजनिक स्थानों पर वापस जाना शुरू कर दिया है, सुख-साधन, तंदुरुस्ती, उत्पादकता और समग्र सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए स्वच्छ आंतरिक हवा की गुणवत्ता को बनाए रखना आवश्यक है।
  • आने वाले समय में, ईईएसएल ऑफिस पायलट योजना पूरे देश में अन्य इमारतों में इसका उपयोग करने के लिए विशिष्टताओं को विकसित करके इस समस्या का समाधान करेगा, साथ ही विभिन्न प्रौद्योगिकियों की प्रभावशीलता और लागत लाभों और उनकी वायु गुणवत्ता, सुख-साधन और ऊर्जा उपयोग पर लघु और दीर्घकालिक प्रभावों का मूल्यांकन करने में सहायक साबित होगा।

ईईएसएल के बारे में:

  • भारत सरकार के विद्युत मंत्रालय के प्रबंधन के अंतर्गत आनेवाला एनर्जी एफिशिएंसी सर्विसेज लिमिटेड (ईईएसएल), ऊर्जा दक्षता को मुख्यधारा में लाने की दिशा में काम कर रहा है और दुनिया के सबसे बड़े ऊर्जा दक्षता पोर्टफोलियो को देश में लागू कर रहा है। अधिक पारदर्शिता, अधिक परिवर्तन, और अधिक नवाचार को सक्षम बनाने के अभियान से प्रेरित, ईईएसएल का उद्देश्य कार्यकुशल और भविष्य के लिए तैयार परिवर्तनकारी समाधानों के लिए बाजार तक पहुंच विकसित करना है जो प्रत्येक हितधारकों के लिए लाभदायक स्थिति उत्पन्न करते हैं।

‘राजमार्गों पर मानव और पशु मृत्यु दर पर रोकथाम’ पर राष्ट्रीय जागरूकता अभियान

चर्चा में क्यों?

  • केन्द्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग और एमएसएमई मंत्री श्री नितिन गडकरी ने सड़कों पर मृत्यु के मामलों में कमी या खत्म करने के लिए जनता को जागरूक करने और शिक्षित बनाने की जरूरत को रेखांकित किया है। वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से ‘राजमार्गों पर मानव और पशु मृत्यु दर पर रोकथाम’पर यूएनडीपी और एमओआरटीएच के राष्ट्रीय जागरूकता अभियान के शुभारम्भ करते हुए केन्द्रीय मंत्री ने कहाकि नैतिकता, अर्थव्यवस्था और पारिस्थितिकी हमारे देश के तीन सबसे अहम स्तम्भ हैं।

सरकार द्वारा इस दिशा में उठाये गए कदम

  • भारत में हर साल लगभग पांच लाख सड़क हादसे होते हैं, जिनमें लगभग 1.5 लाख लोगों की जान चली जाती है। सरकार आने वाली 31 मार्च तक इन आंकड़ों में 20-25 प्रतिशत तक कमी लाने की दिशा में प्रयास कर रहे हैं। पांच हजार से ज्यादा ब्लैक स्पॉट्स (संवेदनशील स्थानों) की पहचान की गई है और अनिवार्य रूप से अस्थायी तथा स्थायी उपायों सहित इनके सुधार के कदम उठाए जा रहे हैं। अल्पकालिक और दीर्घकालिक स्थायी उपाय करने के लिए ब्लैक स्पॉट्स में सुधार की प्रक्रिया से संबंधित एसओपी जारी कर दी गई हैं। अभी तक, 1,739 नए चिह्नित ब्लैक स्पॉट्स पर अस्थायी उपाय और 840 नए चिह्नित ब्लैक स्पॉट्स पर स्थायी उपाय पहले ही किए जा चुके हैं।
  • राष्ट्रीय राजमार्गों के टुकड़ों पर विभिन्न सड़क सुरक्षा उपाय रेखांकित किए गए हैं, जिनमें ब्लैक स्पॉट्स के सुधार, यातायात कम करने के उपाय, क्रैश बैरियर्स, मरम्मत, कमजोर और संकरे पुलों का पुनर्वास एवं पुनर्निर्माण, सड़क सुरक्षा ऑडिट, कमजोर सड़कों पर हादसों में कमी, राजमार्ग निगरानी और निर्माण के दौरान सुरक्षा शामिल हैं।
  • केन्द्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय सड़कों पर पशुओं के जीवन की रक्षा को लेकर सचेत है। मंत्रालय ने सभी एजेंसियों से भारतीय वन्य जीव संस्थान, देहरादून द्वारा मैनुअल शीर्षक “वन्य जीवन पर रैखिक बुनियादी ढांचे के प्रभाव को कम करने के पर्यावरण अनुकूल उपायों” के तहत जारी प्रावधानों का पालन करने और इस क्रम में वन्य जीवों की देखभाल करने का अनुरोध किया है। गैर सरकारी संगठनों (एनजीओ) और सामाजिक संगठनों से सड़कों पर पशुओं के लिए ब्लैक स्पॉट का पता लगाने तथा उनके मंत्रालय को सूचित करने का अनुरोध किया, जिससे आवश्यक सुधार किए जा सकें।
  • मंत्रालय और उसके संगठन पशुओं के उपयोग के अनुकूल बुनियादी ढांचे तैयार करने पर बड़ी धनराशि व्यय कर रहे हैं। उन्होंने नागपुर-जबलपुर राजमार्ग का उल्लेख किया, जहां बाघों को मार्ग अधिकार (राइट-ऑफ-वे) देने के लिए 1,300 करोड़ रुपये की लागत से पुल (वाया-डक्ट) बनाए गए हैं। इसी प्रकार, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा आदि के वन क्षेत्रों में भी यही प्रक्रिया अपनाई जा रही है। इनमें पशुओं के विचरण, अंडरपास के निर्माण, एलिवेटेड कॉरिडोर (ऊंचे गलियारे) आदि के अनुकूल सड़क इंजीनियरिंग का अध्ययन करना शामिल है।
  • एमओआरटीएच ने हमेशा ही वन्य जीवों के निवास स्थलों के विखंडन से बचने के लिए पारिस्थितिकी वन्य जीव गलियारों के रूप में एलीवेटेड सड़कों, अंडरपास/ ओवरपास के निर्माण की वकालत की थी और आवश्यकता पड़ने पर काटे जाने वाले पेड़ों के बदले में क्षतिपूर्ति वनीकरण योजनाओं द्वारा इसे बाध्यकारी बनाया गया है। पूर्व में किए गए उपायों में कोई कमी नहीं मानते हुए अब नई सड़क परियोजनाओं को सड़कों के लिए हरित रेटिंग प्रणाली अपनानी होगी, जिसे पहले ही आईआरसी परिषद पहले ही प्रकाशन के लिए स्वीकृति दे चुकी है। इसके अलावा, भारत के जैव भूगोल पर केन्द्रित हरित सड़कों के लिए मसौदा भी तैयार किया जाएगा।

आईकोमिट (#iCommit) पहल

चर्चा में क्यों?

  • केन्द्रीय विद्युत और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री आर. के. सिंह ने विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर ‘आईकोमिट’‘#iCommit’ अभियान की शुरुआत की। यह पहल एक प्रकार से सभी हितधारकों और लोगों से ऊर्जा दक्षता, नवीकरणीय ऊर्जा की दिशा में प्रयास जारी रखने तथा भविष्य में एक मजबूत और लचीली ऊर्जा प्रणाली कायम करने के लिए स्थायित्व कायम करने का स्पष्ट आह्वानहै।
  • विद्युत मंत्रालय, भारत सरकार के अधीन आने वाली एनर्जी इफिशिएंसी सर्विसेस लिमिटेड (ईईएसएल)द्वारा शुरू कीगई ‘आईकोमिट’ पहल से सरकारों, कंपनियों और बहुपक्षीय और द्विपक्षीय संगठनों, थिंक टैंक और व्यक्तियों आदि को एकजुट किया जा रहा है।

क्या है ‘आईकोमिट’पहल का उद्देश्य?

  • ‘आईकोमिट’पहल ऊर्जा क्षेत्र के लिहाज से बेहतर भविष्य के निर्माण के विचार पर केन्द्रित है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए एक लचीली और मजबूत विद्युत प्रणाली की स्थापना पूर्व अपेक्षित है। एक मजबूत विद्युत क्षेत्र से राष्ट्र को ऊर्जा उपयोग और सभी के लिए सुरक्षा के उद्देश्य को पूरा करने में सहायता मिल सकती है। विद्युत प्रणाली में विकेन्द्रीयकृत सौर और बिजली चालित वाहनों जैसे नवाचारों के द्वारा जरूरी बदलावों के साथ ही सभी हितधारकों के बीच भागीदारी से आगे बढ़ने का रास्ता साफ होगा और ‘आईकोमिट’ अभियान का मूल उद्देश्य भी यही है।
  • इस पहल से भारत सरकार के नेशनल इलेक्ट्रिक मोबिलिटी मिशन 2020, फेम 1 और 2, दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना, सौभाग्य योजना, उज्ज्वल डिस्कॉम एश्योरैंस योजना (उदय), अटल वितरण प्रणाली सुधार योजना (एजेएवाई), स्मार्ट मीटर राष्ट्रीय कार्यक्रम, प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महा अभियान (कुसुम), सौर पार्क, ग्रिड कनेक्टेड रूफटॉप, सभी को सस्ती एलईडी के द्वारा उन्नत ज्योति (उजाला), अटल ज्योति योजना (एजेएवाई) आदि अन्य प्रमुख उपक्रम भी जोड़े जाएंगे।

‘अपशिष्ट के प्रभावकारी निपटान के जरिए जैव विविधता का संरक्षण’

  • आवास एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) श्री हरदीप सिंह पुरी ने विश्व पर्यावरण दिवस 2020 मनाए जाने के अवसर पर नई दिल्ली स्थित निर्माण भवन में कई एडवाइजरी जारी कीं। ‘अपशिष्ट के प्रभावकारी निपटान के जरिए जैव विविधता का संरक्षण’ के शीर्षक वाले कार्यक्रम को लाइव वेबकास्ट किया गया।
  • इस अवसर पर जारी की गई तीन प्रमुख एडवाइजरी में ये शामिल हैं जिसे एसबीएम-यू के अधीनस्‍थ केंद्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य और पर्यावरण इंजीनियरिंग संगठन (सीपीएचईईओ) द्वारा तैयार किया गया है:
  1. ‘नगरपालिका ठोस अपशिष्ट (एमएसडब्ल्यू) के लिए सामग्री पुन: प्राप्ति सुविधाओं (एमआरएफ) पर एडवाइजरी’;
  2. अपशिष्ट भराव क्षेत्र के पुनरुद्धार पर एडवाइजरी और
  3. ऑन-साइट एवं ऑफ-साइट सीवेज प्रबंधन प्रथाओं पर परामर्शी दस्तावेज (मसौदा)
  • मंत्रालय ने मल युक्‍त गाद के निपटान पर एक संचार अभियान के लिए टूलकिट भी जारी की जिसका शीर्षक है ‘मलासुर- द डेमन ऑफ डिफेका’ और इसका उद्देश्य मल युक्‍त गाद की जोखिम धारणा को सही ढंग से रेखांकित करना है।

दिल्ली में भूकंप के हल्के झटकेपर IIT कानपुर की रिसर्च

  • आईआईटी कानपुर ने एक रिसर्च के बाद चेतावनी दी है कि अरावली (दिल्ली-हरिद्वार) रिज में खिंचाव के कारण दिल्ली में रिक्टर स्केल पर 5 तीव्रता तक भूकंप आने की आशंका लगातार बनी हुई है। तिब्बती प्लेट से टकराव में इंडियन प्लेट नीचे है और रिज प्लेट में भी खिंचाव जारी है।
  • सिविल इंजिनियरिंग विभाग के प्रोफेसर जावेद मलिक के अनुसार, धरती के नीचे हलचल के कारण फिलहाल एनसीआर में बड़े भूकंप की आशंका तो नहीं है, लेकिन हिमालय रेंज में बड़ा भूकंप आया तो इसका असर दूर तक दिखेगा।

क्या है इन भूकंप के हल्के झटकों की वजह

  • प्रोफेसर मलिक ने बताया कि इंडियन प्लेट का तिब्बती प्लेट से टकराव लगातार जारी है। इसके साथ दिल्ली-हरिद्वार रिज भी खिंच रहा है। इस दबाव से दिल्ली में लगातार भूकंप के हल्के झटके महसूस किए जा रहे हैं। प्रफेसर ने उदाहरण के तौर पर बताया कि जब दो ट्रेनें आमने-सामने टकराती हैं तो सबसे ज्यादा नुकसान इंजनों को होता है। बोगियों पर भी असर पड़ता है। इंडियन और तिब्बती प्लेटों के टकराने का असर सभी प्लेटों पर पड़ रहा है। इस बारे में कुछ दिन पहले ही एक रिसर्च पेपर जारी किया गया है। फिलहाल भूकंप की तीव्रता बढ़ने की आशंका नहीं है।
  • हिमालय के आसपास बड़े भूकंप आने की पूरी आशंका है। प्रफेसर मलिक कहते हैं कि कुछ लोग हिमालय से दूर लातूर और कच्छ के बड़े भूकंपों का उदाहरण दे सकते हैं, लेकिन उन्हें वहां धरती के नीचे प्लेटों के व्यवहार के बारे में कुछ खास पता नहीं है। विशेषज्ञों को भी इसके बारे में काफी कुछ समझना बाकी है। कच्छ और आसपास का इलाका भी एक्टिव है। वहां रिक्टर स्केल पर 7.5 से ज्यादा और 8 से कम तीव्रता के भूकंप आने की आशंका है।

हिमालयी रेंज को दो भागों में बांटता है रिज

  • दिल्ली-हरिद्वार रिज हिमालय रेंज को दो भागों सेंट्रल और नॉर्थ वेस्ट हिमालय में बांटता है। रिज को सीधा खींचे तो यह देहरादून-चंडीगढ़ के बीच मिलता है। ऐतिहासिक रूप से कुमाऊं और नेपाल में ज्यादा भूकंप आए हैं। चंडीगढ़ और पठानकोट की तरफ अपेक्षाकृत कम भूकंप दर्ज किए गए हैं। माना जा रहा है अरावली रिज इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। यह हिस्सा हिमालय के नीचे जा रहा है।

:: विविध ::

किरण मजूमदार-शॉ को ‘ईवाई वर्ल्ड आंत्रप्रन्योर’ पुरस्कार

  • बायोकॉन की कार्यकारी अध्यक्ष किरण मजूमदार शॉ को एक आभासी पुरस्कार समारोह में ‘ईवाई वर्ल्ड एंट्रेप्रन्योर ऑफ द ईयर 2020’ का पुरस्कार दिया गया। कंपनी ने बताया कि 41 देशों के 46 उद्यमियों के बीच उन्हें इस पुरस्कार के लिए चुना गया।
  • मजूमदार शॉ यह पुरस्कार जीतने वाली तीसरी भारतीय हैं और उनसे पहले कोटक महिंद्रा बैंक के उदय कोटक और इंफोसिस टेक्नालॉजीस के नारायणमूर्ति को यह पुरस्कार मिल चुका है।

एम नेत्रा बनी UNADAP की गुडविल एंबेसडर

  • कोरोना वायरस के बीच चेन्नई के मदुरै में 13 साल की लड़की एम नेत्रा (M. Nethra)को यूनाइटेड नेशंस एसोसिएशन फॉर डेवलपमेंट एंड पीस के लिए गुडविल एंबेसडर टू द पुअर नियुक्त किया गया है। UNADAP ने नेत्रा के नाम की घोषणा करते हुए कहा कि न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र (यूएन) सम्मेलनों और सिविल सोसायटी मंचों और सम्मेलनों को संबोधित करने वाले जिनेवा में उन्हें बोलने का अवसर दिया जाएगा।
  • UNADAP की तरफ से जारी किए गए बयान में कहा गया है कि यह स्थिति उसे दुनिया के नेताओं, शिक्षाविदों, राजनेताओं और नागरिकों से बात करने का अवसर और जिम्मेदारी देगी, जिससे गरीब लोगों तक पहुंचने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके।
  • एम नेत्रा ने अपनी पढ़ाई के लिए बचत से पांच लाख रुपये लॉकडाउन में गरीबों को खिलाने में खर्च किए थे। यह नहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात कार्यक्रम में सी मोहन के बारे में बातचीत की थी। उनकी तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि था कि इस संकट में वह कैसे जरुरतमंदों की मदद कर रहे हैं।

:: प्रिलिम्स बूस्टर ::

  • देश में सभी अर्बन लोकल बॉडीज (ULBs) और स्मार्ट शहर केनए स्नातकोंके लिए किस इंटर्नशिप प्रोग्राम शुरुआत की गई है? (ट्यूलिप-The Urban Learning Internship Program: TULIP)
  • विश्व पर्यावरण दिवस 2020 के अवसर पर भारतीय पर्यावरण और वन मंत्रालय द्वारा इस वर्ष की थीम किस विषय वस्तु पर केंद्रित की गई है? (नगर वन-Urban Forest)
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ब्रिटेन की अगुवाई में होने वाले वर्चुअल ‘वैश्विक टीका सम्मेलन’ में हिस्सा लेने से चर्चा में रहे ‘गावी-Gavi’ क्या है? (संयुक्त राष्ट्र समर्थित अंतरराष्ट्रीय वैक्सीन एलायंस)
  • हाल ही में लगभग 20 हजार टन डीजल ईंधन बहने के कारण रूस के किस क्षेत्र में आपातकाल लगाने की घोषणा की गई है? (साइबेरिया)
  • कोयला खनन के खिलाफ PIL से चर्चा में रहे ‘पूर्व के अमेजन वर्षा वन’ के नाम से किस वन क्षेत्र को जाना जाता है एवं यह किस राज्य में अवस्थित है? (देहिंग पटकाई जंगल, असम)
  • हाल ही में किस की अध्यक्षता में भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने जिंस डेरिवेटिव्स सलाहकार समिति का पुनर्गठन किया है? (अशोक दलवानी)
  • लगातार भूकंप से चर्चा में रहे एनसीआर भूकंप के लिहाज से किस जोन में अवस्थित है? (जोन-4)
  • 2021 के अंत में भारत को आपूर्ति किए जाने की आश्वासन से चर्चा में रहे एस-400 क्या है एवं भारत द्वारा किस देश से इसकी खरीद हेतु समझौता किया गया है? (वायु रक्षा मिसाइल प्रणाली, रूस)
  • देश में गोद लेने की समयसीमा बढ़ाने से चर्चा में रहे किस नियामक संस्थान के द्वारा भारत में अभिभावकों द्वारा बच्चों को गोद लेने का विनियमन किया जाता है? (केंद्रीय दत्तक संसाधन प्राधिकरण-कारा)
  • धर्मेंद्र प्रधान द्वारा वैश्विक ऊर्जा स्थिरता के संदर्भ में बात करने से चर्चा में रहे ओपेक (OPEC) का गठन कब हुआ एवं इसका मुख्यालय कहां स्थित है? (1960, विएना-ऑस्ट्रिया)
  • भारतीय नेवी द्वारा सभी 6 अनुसूचियां को अपनाए जाने की घोषणा से चर्चा में रहे ‘मार्पोल-MARPOL’ रेगुलेशन किससे संबंधित है? (समुद्री जहाजों से प्रदूषण की रोकथाम हेतु अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन)
  • हाल ही में किस वैश्विक कंपनी के सीईओने नस्लवाद के खिलाफ लड़ाई में 3.7 करोड़ डॉलर का योगदान देने की घोषणा की है? (गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई)

स्रोत साभार: Dainik Jagran (Rashtriya Sanskaran), Dainik Bhaskar (Rashtriya Sanskaran), Rashtriya Sahara (Rashtriya Sanskaran) Hindustan Dainik (Delhi), Nai Duniya, Hindustan Times, The Hindu, BBC Portal, The Economic Times (Hindi & English), PTI, PIB

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