(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (4 जून 2020)

दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर


(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (4 जून 2020)


:: राष्ट्रीय समाचार ::

आवश्यक वस्तु अधिनियम में ऐतिहासिक संशोधन

  • केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने आज आवश्यक वस्तु अधिनियम में ऐतिहासिक संशोधन को मंजूरी दी। यह कृषि क्षेत्र में आमूलचूल बदलाव लाने और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में एक दूरदर्शी कदम है।

क्या है आवश्यक वस्तु अधिनियम?

  • आवश्यक वस्तुओं की बिक्री, उत्पादन, आपूर्ति आदि को नियंत्रित करने हेतु आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 कहते हैं।
  • इस कानून के का मुख्य उद्देश्य उपभोक्ताओं को उचित मूल्य पर उपलब्ध किया जाना है।'आवश्यक वस्तु' घोषित होने पर सरकार उत्पाद का अधिकतम खुदरा मूल्य तय कर सकती है। सरकार समय अनुसार इस सूची को संशोधित करती रही है।

क्यों किये गए संशोधन?

  • वैसे तो भारत में ज्यादातर कृषि जिंसों या वस्तुोओं के उत्पाेदन में अधिशेष (सरप्ल्स) की स्थिति है, लेकिन इसके बावजूद कोल्ड स्टोरेज, प्रसंस्कृरण और निर्यात में निवेश के अभाव में किसान अपनी उपज के उचित मूल्य‍ पाने में असमर्थ रहे हैं, क्योंकि आवश्यक वस्तु अधिनियम की लटकती तलवार के कारण उनकी उद्यमशीलता हतोत्साहित हो जाती है। ऐसे में जब भी शीघ्र नष्ट हो जाने वाली कृषि उपज की बंपर पैदावार होती है, तो किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। यदि पर्याप्त प्रसंस्कारण सुविधाएं उपलब्ध हों तो बड़े पैमाने पर इस तरह की बर्बादी को रोका जा सकता है।

क्या होंगें लाभ?

  • आवश्यक वस्तु अधिनियम में संशोधन के जरिए अनाज, दलहन, तिलहन, खाद्य तेलों, प्या‍ज और आलू जैसी वस्तुओं को आवश्यक वस्तुओं की सूची से हटा दिया जाएगा। इस व्यवस्था से निजी निवेशक अत्यधिक नियामकीय हस्तक्षेप के भय से मुक्त हो जाएंगे।
  • उत्पादन, भंडारण, ढुलाई, वितरण और आपूर्ति करने की आजादी से व्यापक स्तर पर उत्पादन करना संभव हो जाएगा और इसके साथ ही कृषि क्षेत्र में निजी/प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को आकर्षित किया जा सकेगा। इससे कोल्ड स्टोरेज में निवेश बढ़ाने और खाद्य आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) के आधुनिकीकरण में मदद मिलेगी।

कैसे होगा उपभोक्ताओं और किसानो के हितों की संतुलन?

  • सरकार ने नियामकीय व्‍यवस्‍था को उदार बनाने के साथ ही उपभोक्‍ताओं के हितों की रक्षा भी सुनिश्चित की है। संशोधन के तहत यह व्‍यवस्‍था की गई है कि अकाल, युद्ध, कीमतों में अभूतपूर्व वृद्धि और प्राकृतिक आपदा जैसी परिस्थितियों में इन कृषि‍ उपजों की कीमतों को नियंत्रित किया जा सकता है। हालांकि, मूल्‍य श्रृंखला (वैल्‍यू चेन) के किसी भी प्रतिभागी की स्‍थापित क्षमता और किसी भी निर्यातक की निर्यात मांग इस तरह की स्‍टॉक सीमा लगाए जाने से मुक्‍त रहेगी, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कृषि क्षेत्र में निवेश हतोत्‍साहित न हो।
  • घोषित संशोधन मूल्‍यों में लाने के साथ-साथ किसानों और उपभोक्‍ताओं दोनों ही के लिए मददगार साबित होगा। इसके साथ ही भंडारण सुविधाओं के अभाव के कारण होने वाली कृषि उपज की बर्बादी को भी रोका जा सकेगा।

कृषि उपज वाणिज्य एवं व्यापार (संवर्धन एवं सुविधा) अध्यादेश 2020

चर्चा में क्यों?

  • कृषि उपज का बाधा मुक्त व्यापारको बढ़ावा देने के कैबिनेट ने कृषि उपज वाणिज्य एवं व्यापार (संवर्धन एवं सुविधा) अध्यादेश 2020 को मंजूदी दी है।

क्यों लाया गया यह अध्‍यादेश?

  • कई तरह के नियामक प्रतिबंधों के कारण देश के किसानों को अपने उत्पाद बेचने में काफी दिक्कत आती है। अधिसूचित कृषि उत्पाद विपणन समिति वाले बाजार क्षेत्र के बाहर किसानों को अपने उत्पाद बेचने पर कई तरह के प्रतिबंध शामिल थे।
  • किसानों को अपने उत्पाद सरकार द्वारा लाइसेंस प्राप्त खरीदारों को ही बेचने की बाध्यता थी। इसके अलावा एक राज्य से दूसरे राज्य को ऐसे उत्पादों के सुगम व्यापार के रास्ते में भी कई तरह की व्यावहारिक और प्रशासनिक बाधाएं हैं।

अध्‍यादेश का मूल उद्देश्य

  • अध्‍यादेश का मूल उद्देश्य एपीएमसी(APMC) बाजारों की सीमाओं से बाहर किसानों को कारेाबार के अतिरिक्‍त अवसर मुहैया कराना है जिससे उन्‍हें प्रतिस्‍पर्धात्‍मक माहौल में अपने उत्‍पादों की अच्‍छी कीमतें मिल सकें।
  • यह निश्चित रूप से ‘एक देश, एक कृषि बाजार’ बनाने का मार्ग प्रशस्‍त करेगा और कठोर परिश्रम करने वाले हमारे किसानों के लिए उपज की मुंह मांगी कीमत सुनिश्ति करेगा।

लाभ

  • अध्यादेश के लागू हो जाने से किसानों के लिए एक सुगम और मुक्त माहौल तैयार हो सकेगा जिसमें उन्हें अपनी सुविधा के हिसाब से कृषि उत्पाद खरीदने और बेचने की आजादी होगी।
  • अध्यादेश से राज्य के भीतर और बाहर दोनों ही जगह ऐसे बाजारों के बाहर भी कृषि उत्पादों का उन्मुक्त व्यापार सुगम हो जाएगा जो राज्यों के कृषि उत्पाद विपणन समिति (एपीएमसी) अधिनियम के तहत अधिसूचित हैं।
  • इससे किसानों को अधिक विकल्प मिलेंगे। बाजार की लागत कम होगी और उन्हें अपने उपज की बेहतर कीमत मिल सकेगी। इसके अलावा अतिरिक्त उपज वाले क्षेत्रों में भी किसानों को उनके उत्पाद के अच्छे दाम मिल सकेंगे और साथ ही दूसरी ओर कम उपज वाले क्षेत्रों में उपभोक्ताओं को भी ज्यादा कीमतें नहीं चुकानी पड़ेंगी।
  • अध्यादेश में कृषि उत्पादों का सुगम कारोबार सुनिश्चित करने के लिए एक ई-प्लेटफॉर्म बनाए जाने का भी प्रस्ताव है।

मूल्य आश्वासन पर किसान (बंदोबस्ती और सुरक्षा) समझौता और कृषि सेवा अध्यादेश, 2020’

चर्चा में क्यों?

  • कैबिनेट ने ‘मूल्य आश्वासन पर किसान (बंदोबस्ती और सुरक्षा) समझौता और कृषि सेवा अध्यादेश, 2020’ को स्वीकृति दे दी है।

पृष्ठभूमि

  • भारतीय कृषि को खेतों के छोटे आकार के कारण विखंडित खेती के रूप में वर्गीकृत किया जाता और मौसम पर निर्भरता, उत्पादन की अनिश्चितता और बाजार अनिश्चितता इसकी कुछ कमजोरियां हैं। इसके चलते कृषि जोखिम भरी है और इनपुट तथा आउटपुट प्रबंधन के मामले में अप्रभावी है।

लाभ

  • अध्यादेश किसानों को शोषण के भय के बिना समानता के आधार पर प्रसंस्करणकर्ताओं (प्रोसेसर्स), एग्रीगेटर्स, थोक विक्रेताओं, बड़े खुदरा कारोबारियों, निर्यातकों आदि के साथ जुड़ने में सक्षम बनाएगा। इससे बाजार की अनिश्चितता का जोखिम प्रायोजक पर हस्तांतिरत हो जाएगा और साथ ही किसानों की आधुनिक तकनीक और बेहतर इनपुट्स तक पहुंच भी सुनिश्चित होगी। इससे विपणन की लागत में कमी आएगी और किसानों की आय में सुधार होगा।
  • यह अध्यादेश किसानों की उपज की वैश्विक बाजारों में आपूर्ति के लिए जरूरी आपूर्ति चेन तैयार करने को निजी क्षेत्र से निवेश आकर्षित करने में एक उत्प्रेरक के रूप में काम करेगा। किसानों की ऊंचे मूल्य वाली कृषि के लिए तकनीक और परामर्श तक पहुंच सुनिश्चित होगी, साथ ही उन्हें ऐसी फसलों के लिए तैयार बाजार भी मिलेगा।
  • किसान प्रत्यक्ष रूप से विपणन से जुड़ सकेंगे, जिससे बिचौलियों की भूमिका खत्म होगी और उन्हें अपनी फसल का बेहतर मूल्य मिलेगा। किसानों को पर्याप्त सुरक्षा दी गई है और समाधान की स्पष्ट समयसीमा के साथ प्रभावी विवाद समाधान तंत्र भी उपलब्ध कराया गया है।

स्‍वदेस (स्किल्ड वर्कर्स अराइवल डेटाबेस फॉर एम्प्लॉयमेंट सपोर्ट)

चर्चा में क्यों?

  • देश में फैली महामारी के कारण देश वापस लौटने वाले हमारे कुशल कर्मचारियों के सर्वश्रेष्‍ठ उपयोग के लिए, भारत सरकार ने वंदे भारत मिशन के तहत लौटने वाले नागरिकों का कौशल मानचित्रण करने के लिए एक नई पहल स्‍वदेस (स्किल्ड वर्कर्स अराइवल डेटाबेस फॉर एम्प्लॉयमेंट सपोर्ट) शुरू की है।

क्या है स्‍वदेस (स्किल्ड वर्कर्स अराइवल डेटाबेस फॉर एम्प्लॉयमेंट सपोर्ट)?

  • यह कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय, नागरिक उड्डयन मंत्रालय और विदेश मंत्रालय की एक संयुक्त पहल है, जिसका उद्देश्य भारतीय और विदेशी कम्‍पनियों की मांग को समझने और उसे पूरा करने के लिए उनके कौशल और अनुभव के आधार पर योग्य नागरिकों का एक डेटाबेस बनाना है। लौटने वाले नागरिकों को एक ऑनलाइन स्‍वदेस कौशल कार्ड भरना आवश्यक है। कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय की शाखा राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (एनएसडीसी) परियोजनाका कार्यान्वयन कर रहा है।

क्यों किया जा रहा है?

  • इस पहल का उद्देश्य भारतीय और विदेशी कम्‍पनियों की मांग को समझने और उसे पूरा करने के लिए उनके कौशल और अनुभव के आधार पर योग्य नागरिकों का एक डेटाबेस बनाना है। एकत्रित जानकारी को देश में नियोजन के उपयुक्त अवसरों के लिए कंपनियों के साथ साझा किया जाएगा। कार्ड राज्य सरकारों, उद्योग संघों और नियोक्ताओं सहित प्रमुख हितधारकों के साथ विचार-विमर्श के जरिये रोजगार के उपयुक्त अवसरों के साथ लौटने वाले नागरिकों को प्रदान करने के लिए एक रणनीतिक ढांचा प्रदान करेगा।

पृष्ठभूमि

  • दुनिया भर में कोविड-19 के फैलने से हजारों श्रमिकों पर जबरदस्‍त आर्थिक प्रभाव पड़ा है, जिससे हजारों श्रमिकों को अपनी नौकरियां गंवानी पड़ी हैं और दुनिया भर में सैकड़ों कंपनियां बंद हो रही हैं। भारत सरकार के वंदे भारत मिशनके माध्यम से देश लौटने वाले हमारे अनेक नागरिक अपने भविष्य के रोजगार के अवसरों को लेकर अनिश्चितता का सामना कर सकते हैं। लाखों नागरिकों ने देश लौटने का अनुरोध करते हुए विभिन्न भारतीय मिशनों में पंजीकरण किया है और अब तक 57,000 से अधिक लोग देश में वापस आ चुके हैं।

वर्तमान स्थिति

  • स्‍वदेस कौशल फॉर्म (ऑनलाइन) को 30 मई 2020 को प्रसारित किया गया था और 3 जून 2020 (दोपहर 2 बजे) तक लगभग 7000 पंजीकरण किए हैं। अब तक एकत्र किए गए आंकड़ों में, जहां से नागरिक वापस लौट रहे हैं, उन शीर्ष देशों में संयुक्त अरब अमीरात, ओमान, कतर, कुवैत और सऊदी अरब शामिल हैं। कौशल मानचित्रण के अनुसार, इन नागरिकों को मुख्य रूप से तेल और गैस, निर्माण, पर्यटन और आतिथ्य, मोटर वाहन और विमानन जैसे क्षेत्रों में नियोजित किया गया था। आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि जिन राज्यों ने सबसे ज्यादा श्रमिकों के लौटने की जानकारी दी है, वे हैं- केरल, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, कर्नाटक और तेलंगाना।

श्‍यामा प्रसाद मुखर्जी बंदरगाह

  • प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल ने कोलकाता बंदरगाह का नया नाम श्‍यामा प्रसाद मुखर्जी बंदरगाह करने की अनुमति दे दी है।
  • कोलकाता बंदरगाह ट्रस्‍ट के बोर्ड ऑफ ट्रस्‍टी ने 25 फरवरी 2020 को हुई अपनी बैठक में एक प्रस्‍ताव पारित कर विधिवेत्‍ता, शिक्षक, विचारक और जन साधारण के नेता श्‍यामा प्रसाद मुखर्जी को बहुआयामी प्रतिभा के धनी के रूप में ध्‍यान में रखकर कोलकाता बंदरगाह को नया नाम श्‍यामा प्रसाद मुखर्जी करने की मंजूरी दे दी थी।
  • कोलकाता बंदरगाह की 150वीं जयंती के उद्घाटन समारोह के अवसर पर 12 जनवरी 2020 को, पश्चिम बंगाल की जनता की भावनाओं को ध्‍यान में रखते हुए यह घोषणा की गई कि कोलकाता बंदरगाह का नाम बदलकर उसे नया नाम श्‍यामा प्रसाद मुखर्जी दिया जाएगा जिन्‍हें पश्चिम बंगाल का सबसे योग्‍य पुत्र और राष्‍ट्रीय एकता को बनाए रखने में अग्रणी, बंगाल के विकास का स्‍वप्‍नदृष्‍टा, औद्यो‍गिकरण का प्रेरणा स्रोत और एक राष्‍ट्र के लिए एक कानून का प्रचंड समर्थक माना जाता था।

भारतीय औषध और होम्‍योपैथी के लिए औषधकोष आयोग की स्‍थापना को मंजूरी

चर्चा में क्यों?

  • प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल ने आयुष मंत्रालय के अंतर्गत अधीनस्‍थ कार्यालय के रूप में भारतीय औषध और होम्‍योपैथी (पीसीआईएमऔरएच) के लिए औषधकोष (फार्माकपीआ) आयोग की पुर्न स्‍थापना को अपनी मंजूरी दे दी है। इसमें गाजियाबाद में 1975 से स्‍थापित दो केन्‍द्रीय प्रयोगशालाओं- फार्माकपीआ लेबोरेट्री फॉर इंडियन मेडिसिन (पीएलआईएम) और होम्‍योपैथिक फार्माकपीआ लेबोरेट्री (एचपीएल) का विलय कर दिया गया है।

क्या है औषधकोष?

  • वर्तमान में 2010 से स्‍थापित आयुष मंत्रालय के अंतर्गत भारतीय औषध और होम्‍योपैथी (पीसीआईएमऔरएच) के लिए औषधकोष आयोग एक स्‍वयत्‍तशासी संगठन है। विलय का उद्देश्‍य तीनों संगठनों की बुनियादी ढांचा सुविधाओं, तकनीकी मानव श्रम और वित्‍तीय संस्‍थानों का अधिकतम इस्‍तेमाल करना है ताकि आयुर्वेद, सिद्ध, यूनानी और होम्‍योपैथी दवाओं के नतीजों के मानकीकरण में वृद्धि की जा सके जिससे प्रभावी नियंत्रण और गुणवत्‍ता नियंत्रण की दिशा में बढ़ा जा सकेगा।

क्या होंगें लाभ?

  • विलय से औषधकोश और लिखे गए नुसखे के विवरण का प्रकाशन और आयुष दवाओं के मानकों का केन्द्रित और संसक्‍त विकास को बढ़ावा मिलेगा। इससे पीसीआईएमऔरएच की मिली हुई अवसंरचना और इसकी प्रयोगशालाओं में आवश्‍यक संशोधन करके और औषधि और प्रसाधन सामग्री नियम 1945 के प्रावधानों को अधिकार देकर कानूनी दर्जा प्रदान किया जा सकेगा। इस संबंध में स्‍वास्‍थ्‍य सेवा महानिदेशक, औषध महानियंत्रक और आयुर्वेद, सिद्ध और यूनानी औषध तकनीकी सलाहकार बोर्ड (एएसयूडीटीएबी) के साथ सलाह-मशविरा किया जा चुका है जो औषधि और प्रसाधन सामग्री कानून 1940 के अंतर्गत एक वैधानिक संगठन है जो एएसएलटी औषधियों के नियंत्रण से जुड़े मामलों में केन्‍द्र और राज्‍य सरकारों को सलाह देता है।
  • पीएलआईएम और एचपीएल पीसीआईएमऔरएच के अधीनस्‍थ कार्यालय होने के कारण- आयुष मंत्रालय के अंतर्गत एक स्‍वायत्‍त्‍शासी संगठन है जिसका पीसीआईएमऔरएच की स्‍थापना के लिए, एक साझा प्रशासनिक नियंत्रण के साथ मंत्रालय के अधीनस्‍थ कार्यालय के रूप में विलय होना है।
  • विलय के बाद पीसीआईएमऔरएच के पास मंत्रालय के अंतर्गत पर्याप्‍त प्रशासनिक ढांचा होगा जिससे औषधकोष कार्य की क्षमता और परिणामों में वृद्धि और आयुर्वेद, सिद्ध,यूनानी और होम्‍योपैथी औषधियों के औषधकोष मानकों के परस्‍पर हितों को हासिल करने का प्रयास किया जाएगा जिससे औषधियों के मानकीकरण कार्य का दोहराव और ओवरलेपिंग रोकी जा सकेगी और संसाधनों का प्रभावी तरीके से अधिकतम इस्‍तेमाल हो सकेगा।

“सचिवों के अधिकार प्राप्त समूह और परियोजना विकास इकाइयों” की स्थापना

चर्चा में क्यों?

  • प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने “भारत में निवेश आकर्षित करने के लिए मंत्रालयों/विभागों में सचिवों के अधिकार प्राप्त समूह (ईजीओएस) और परियोजना विकास इकाइयों (पीडीसी)” की स्थापना को स्वीकृति दे दी है। इस नई व्यवस्था से भारत को 2024-25 तक 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के विजन को बल मिलेगा।

पृष्ठभूमि

  • सरकार ने निवेश अनुकूल वातावरण तैयार करने का फैसला किया है, जो घरेलू निवेशकों के साथ ही एफडीआई का मजबूती से समर्थन करता है और इससे अर्थव्यवस्था में कई गुना प्रोत्साहन मिलेगा। डीपीआईआईटी ने एकीकृत दृष्टिकोण के रणनीतिक कार्यान्वयन का प्रस्ताव किया है, जिससे हमारी निवेश और प्रोत्साहन संबंधी नीतियों में मंत्रालयों/विभागों और केन्द्र तथा राज्य सरकारों के बीच तालमेल बढ़ेगा।
  • कोविड-19 महामारी के वर्तमान दौर में भारत को विशेष रूप से ऐसी बड़ी कंपनियों की तरफ से एफडीआई प्रवाह को आकर्षित करने का अवसर मिला है, जो नए भौगोलिक क्षेत्रों में अपने निवेश को विविधता देना चाहती हैं और जोखिम में कमी लाना चाहती हैं। इसके अलावा विविध उत्पाद श्रृंखलाओं में उत्पादन बढ़ाने से अमेरिका, यूरोपीय संघ, चीन और अन्य देशों से संबंधित बड़े बाजारों को सेवाएं देने में सहायता मिलेगी। इस प्रस्ताव का उद्देश्य भारत को वैश्विक मूल्य श्रृंखला में सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल करने के लिए वैश्विक आर्थिक हालात से पैदा इन अवसरों का लाभ उठाना है।
  • भारत में निवेश के लिए निवेशकों को सहायता और सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा अर्थव्यवस्था के प्रमुख क्षेत्रों में विकास को प्रोत्साहन देने के क्रम में निम्नलिखित संयोजन और उद्देश्यों के साथ सचिवों के अधिकार प्राप्त समूह (ईजीओएस) की स्थापना का प्रस्ताव किया जाता है :

ईजीओएस की संरचना

  • कैबिनेट सचिव (अध्यक्ष)
  • सीईओ, नीति आयोग (सदस्य)
  • सचिव, उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (सदस्य संयोजक)
  • सचिव, वाणिज्य विभाग (सदस्य)
  • सचिव, राजस्व विभाग (सदस्य)
  • सचिव, आर्थिक मामलों के विभाग (सदस्य)
  • संबंधित विभाग के सचिव (विकल्प के रूप में)

ईजीओएस के उद्देश्य

  • विभिन्न विभागों और मंत्रालयों के बीच तालमेल कायम करना तथा समयबद्ध स्वीकृतियां सुनिश्चित करना।
  • भारत में ज्यादा निवेश आकर्षित करना और वैश्विक निवेशकों को निवेश समर्थन तथा सुविधाएं उपलब्ध कराना।
  • लक्षित तरीके से शीर्ष निवेशकों से आने वाले निवेश को आसान बनाना और समग्र निवेश परिदृश्य में नीतिगत स्थायित्व तथा सामंजस्य कायम करना।
  • विभागों द्वारा उनके (1) परियोजना निर्माण (2) होने वाले वास्तविक निवेश के आधार पर निवेशों का मूल्यांकन करना। इसके अलावा विभागों को अधिकार प्राप्त समूह द्वारा विभिन्न चरणों के समापन के लिए लक्ष्य दिए जाएंगे।

‘परियोजना विकास इकाई’ (पीडीसी)

  • केन्द्र सरकार और राज्य सरकारों के बीच समन्वय में निवेश योग्य परियोजनाओं के विकास के लिए एक ‘परियोजना विकास इकाई’ (पीडीसी) की स्थापना को भी स्वीकृति दी गई है। इससे भारत में निवेश योग्य परियोजनाओं की संख्या में बढ़ोतरी होगी और एफडीआई प्रवाह भी बढ़ेगा। सचिव के दिशा निर्देशन में संबंधित केन्द्रीय मंत्रालय के एक अधिकारी को निवेश योग्य परियोजनाओं के संबंध में अवधारणा तैयार करने, रणनीति बनाने, कार्यान्वयन और विवरण के प्रसार का काम सौंपा जाएगा। यह अधिकारी संयुक्त सचिव की रैंक से कम का नहीं होगा और वह पीडीसी का प्रभारी होगा।

पीडीसी के निम्नलिखित उद्देश्य होंगे :

  • सभी स्वीकृतियों, आवंटन के लिए जमीन की उपलब्धता और निवेशकों द्वारा स्वीकार्यता/निवेश के लिए पूर्ण विस्तृत परियोजना रिपोर्ट के साथ परियोजनाएं तैयार करना।
  • निवेश आकर्षित करने और उसे अंतिम रूप देने के क्रम में ऐसे मुद्दों की पहचान करना, जिनका समाधान करने की जरूरत है तथा उन्हें अधिकार प्राप्त समूह के सामने रखा जाना।

‘पैरेंटिंग मैटर्स: एक्जामिनिंग पैरेंटिंग एप्रोचेज एंड प्रैक्टिसेज’

चर्चा में क्यों?

  • यूनिसेफ द्वारा पांच राज्यों में कराये गये एक नये अध्ययन में भारतीय परिवारों में अनुशासन सिखाने के प्रयास के तहत कम से कम 30 प्रकार के शारीरिक एवं मौखिक उत्पीड़न सामने आये। ‘पैरेंटिंग मैटर्स: एक्जामिनिंग पैरेंटिंग एप्रोचेज एंड प्रैक्टिसेज’ नामक यह अध्ययन मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और ओडिशा के दो-दो जिलों, राजस्थान के तीन और महाराष्ट्र के चार जिलों में किया गया।

क्या कहा गया इस रिपोर्ट में?

  • इस अध्ययन में परिवारों में बच्चों के विरूद्ध हिंसा के विभिन्न रूपों का जिक्र किया गया हैं । शारीरिक हिंसा में जलाना, चिकोटी काटना, थप्पड़ मारना, छड़ी, बेल्ट, छड़ आदि से पीटना शामिल है जबकि मौखिक हिंसा के तहत दोषारोपण, आलोचना करना, चिल्लाना, भद्दी भाषा का इस्तेमाल करना आदि आते हैं।
  • इसके अलावा बच्चे माता-पिता में से एक के द्वारा दूसरे के प्रति, भाई-बहनों या परिवार के बाहर शारीरिक हिंसा देखते हैं। उन्हें बाहर जाने से रोकना, भोजन नहीं देना, भेदभाव करना, मन में भय पैदा करना जैसे भावनात्मक उत्पीड़न से भी गुजरना पड़ता है।
  • अध्ययन में कहा गया है, ‘‘अनुशासन का पाठ पढ़ाने के प्रयास के तहत कम से कम 30 प्रकार के शारीरिक एवं मौखिक उत्पीड़न सामने आये। परिवारों में, स्कूलों में तथा सामुदायिक स्तर पर बच्चों, लड़के और लड़कियां दोनों को ही अनुशासन सिखाने के लिए दंडित करना व्यापक रूप से स्वीकार्य चलन है।’’
  • अध्ययन के अनुसार लड़कियों और लड़कों की परवरिश भी बहुत कम उम्र से ही अलग-अलग तरीके से की जाती है तथा घरेलू कामकाज का बोझ एवं रोजमर्रा की बंदिशें पिता बेटियों पर लगाते हैं।
  • अध्ययन में कहा गया है, ‘‘बच्चों की मुख्यतौर पर देखभाल करने वाली मां होती हैं जबकि पिता इन चीजों में कम शामिल होते हैं। पुरुष बस बच्चों को बाहर ले जाते हैं, मां ही उन्हें कहानियां और लोरियां/गाने सुनाकर घर के अंदर बच्चों में प्रेरणा भरती हैं।

:: अंतर्राष्ट्रीय समाचार ::

G-7 सम्मेलन

चर्चा में क्यों?

  • अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के G-7 शिखर सम्मेलन के लिए भारत, रूस, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया को आमंत्रित करने चीन के लिए परेशानी खड़ी हो गई है। चीन की ओर से इसे लेकर मंगलवार को नाराजगी भरी प्रतिक्रिया जताई गई और कहा गया कि पेइचिंग के खिलाफ किसी गुटबंदी का प्रयास नाकाम साबित होगा।

क्या है G-7?

  • G-7 दुनिया की शीर्ष सात विकसित अर्थव्यवस्थाओं का समूह है। इसमें अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान और कनाडा शामिल हैं। जलवायु परिवर्तन, सुरक्षा और अर्थव्यवस्था सहित विभिन्न वैश्विक मुद्दों पर चर्चा के लिए इन देशों के प्रमुखों की हर साल बैठक होती है।

ट्रंपकरना चाहते है G-7 का विस्तार ( G-10 या G-11)

  • ट्रंप ने G-7 की बैठक सितंबर तक के लिए स्थगित कर दी है। उन्होंने इच्छा व्यक्त की थी कि इस 'पुराने पड़ गए संगठन' का विस्तार किया जाए और इसमें भारत, रूस, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया देशों को शामिल किया जाए। साथ ही इसे G-10 या G-11 बनाया जाए।

सेंकाकू द्वीप समूह

चर्चा में क्यों?

  • पिछले कुछ समय में चीन के कोस्ट गार्ड (CCG) ने जापान के सेंकाकू टापू के आसपास सक्रियता तेज कर दी है। चीन इस क्षेत्र पर भी अपना हक बताता है। जापान के सबसे बड़े अखबार जापान टाइम्स में टेटसुओ कोटानी ने दावा किया है कि चीन जापान के कोरोना से निपटने में व्यस्त होने का फायदा उठाकर सेंकाकू में अपनी पैठ जमाना चाहता है।

पृष्ठभूमि

  • पिछले महीने 8 मई को जापान की एक फिशिंग बोट के पीछे CCG के शिप लग गए जिसके बाद जापान कोस्ट गार्ड (JCG) ने उन्हें चेतावनी दी। दोनों आमने-सामने आ गए लेकिन CCG नहीं हटा और 10 मई तक फिशिंग बोट के पास बना रहा। जापान सरकार ने इसकी शिकायत की जिस पर चीन ने उल्टा फिशिंग बोट पर चीन के इलाके में घूमने का आरोप जड़ दिया और JCG से आगे से बीच में न आने के लिए कह दिया। ऐसा पहली बार हुआ कि CCG जहाज तीन दिन वहां रहे और जापान की फिशिंग ऐक्टिविटी को गैर-कानूनी घोषित कर दिया।
  • चीन हर साल मई से अगस्त के बीच ईस्ट-साउथ चाइना सी और यलो सी में फिशिंग बैन लगाता है। पहले CCG सिर्फ चीन की फिशिंग बोट्स को रोका करते थे लेकिन इस साल से विदेशी बोटों को भी निशाना बनाया जा रहा है।

सेंकाकू द्वीप समूह के बारे में

  • जापान और चीन के बीच वैसे तो समुद्री सीमा को लेकर कई विवाद हैं। लेकिन सबसे बड़ा विवाद सेंकाकू द्वीप ले रहा है फिलहाल ये सेकांकू द्वीप जापान के नियंत्रण में है। सेंकाकू द्वीप समूहईस्ट चाइना सी में स्थित है।चीन भी इस द्वीप पर अपना दावा करता है और वह इसे दिआओयुस द्वीप कहता है।

:: अर्थव्यवस्था ::

एमएसएमई के वर्गीकरण के नए अधिसूचित

चर्चा में क्यों?

  • केन्द्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (एमएसएमई) ने देश में एमएसएमई की परिभाषा और मानदंडों में ऊपर की तरफ संशोधन के कार्यान्वयन का मार्ग प्रशस्त करने के लिए राजपत्र अधिसूचना जारी कर दी है। नई परिभाषा और मानदंड 1 जुलाई, 2020 से प्रभावी हो जाएंगे।

क्या किये गए बदलाव

  • 2006 में एमएसएमई विकास अधिनियम अस्तित्व में आने के 14 साल के बाद, 13 मई, 2020 को आत्मनिर्भर भारत पैकेज में एमएसएमई की परिभाषा में संशोधन किए जाने की घोषणा की गई थी। इस घोषणा के तहत सूक्ष्म विनिर्माण और सेवा इकाइयों की परिभाषा 1 करोड़ रुपये के निवेश और 5 करोड़ रुपये के टर्नओवर तक बढ़ा दी गई थी। लघु इकाई के लिए सीमा 10 करोड़ रुपये के निवेश और टर्नओवर 50 करोड़ रुपये तक बढ़ा दी गई थी। इसी प्रकार, मध्यम इकाई की सीमा 20 करोड़ रुपये के निवेश और 100 करोड़ रुपये के टर्नओवर तक बढ़ा दी गई थी।
  • भारत सरकार ने 1 जून, 2020 को एमएसएमई की परिभाषा में ऊपर की ओर संशोधन किए जाने का फैसला किया। मध्यम उपक्रमों के लिए अब यह सीमा 50 करोड़ रुपये का निवेश और 250 करोड़ रुपये का टर्नओवर होगी।

पृष्ठभूमि

  • एमएसएमई की परिभाषा के वर्तमान मानदंड एमएसएमईडी अधिनियम, 2006 पर आधारित हैं। यह विनिर्माण और सेवा इकाइयों के लिए अलग थे। यह वित्तीय सीमाओं के लिहाज से काफी कम भी थे। तब से अब तक अर्थव्यवस्था में व्यापक बदलाव हो चुके हैं। 13 मई, 2020 को पैकेज के ऐलान के बाद, कई प्रस्तुतीकरणों के माध्यम से कहा गया था कि घोषित संशोधन अभी भी बाजार और मूल्य परिदृश्य के अनुरूप नहीं है, इसीलिए इसमें एक बार फिर ऊपर की ओर संशोधन किया जाना चाहिए। इन प्रस्तुतीकरणों को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री ने मध्यम इकाइयों के लिए सीमा में और बढ़ोत्‍तरी करने का फैसला किया था। हालात के साथ तालमेल बिठाने और वर्गीकरण की उद्देश्य पूर्ण प्रणाली स्थापित करने के साथ ही कारोबार के लिहाज से सुगम माहौल बनाने के क्रम में ऐसा किया गया है।
  • विनिर्माण और सेवा इकाइयों के लिए वर्गीकरण का एक नया समग्र फॉर्मूला अधिसूचित किया गया है। अब, विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों के बीच कोई अंतर नहीं होगा। इसमें टर्नओवर का एक नया मानदंड भी जोड़ दिया गया है।

क्या होगें लाभ?

  • नई परिभाषा से एमएसएमई की मजबूती और विकास के लिए मार्ग प्रशस्त होगा। विशेष रूप से टर्नओवर की गणना से निर्यात को अलग करने के प्रावधान से एमएसएमई को एमएसएमई इकाई का लाभ गंवाने के भय के बिना ज्यादा से ज्यादा निर्यात करने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा। देश के निर्यात में व्यापक बढ़ोत्‍तरी से विकास और आर्थिक गतिविधियों में बढ़ोत्‍तरी होगी, साथ ही ज्यादा रोजगार के अवसर पैदा होंगे।

चैम्पियंस पोर्टल के रूप में भी एक महत्वपूर्ण पहल शुरु

  • एमएसएमई मंत्रालय ने दोहराया कि इससे एमएसएमई और नए उद्यमियों की सहायता के लिए चैम्पियंस के नाम से एक मददगार पोर्टल लॉन्‍च किया गया है। हाल ही में प्रधानमंत्री ने इसे लॉन्‍च किया है। इच्छुक उद्यमी/ लोग इस पोर्टल का फायदा उठा सकते हैं और अपनी जिज्ञासा या शिकायत भेज सकते हैं। इन पर तत्परता से प्रतिक्रिया दी जाएगी।

:: विज्ञान और प्रौद्योगिकी ::

भीम एप (भारत इंटरफेस फॉर मोबाइल)

चर्चा में क्यों?

  • आनलाइन भुगतान की सुविधा देने वाले भीम एप की परिचालक ‘दि नेशनल पेमेंट्स कार्पोरेशन आफ इंडिया (एनपीसीआई) ने कहा कि एप में उपयोगकर्ताओं की जानकारी लीक नहीं हुई है।
  • इस एप के नेटवर्क में किसी भागीदार के छोर पर सुरक्षा चक्र में सेंध के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुये एनपीसीआई ने कहा कि इस समाचार की स्वतंत्र रूप से वैधता की जांच कराई गई जिसमें ग्राहकों की वित्तीय सूचनाओं के साथ किसी तरह की छेड़छाड़ की कोई जानकारी नहीं पाई गई। भीम एप के अब तक 13.60 करोड़ डाउनलोड किये गये हैं।

पृष्ठभूमि

  • एक इस्राइली शोध फर्म ने यह दावा किया था कि भीम एप के 70 लाख उपयोगकर्ताओं की जानकारी को संभवत: चुरा ली गयी है। उसने इसकी वजह सीएससी (साझा सेवा केंद्रों) ई- गवर्नेंस सविर्सिज के छोर में किसी तरह की खामी की संभावना जताई है। शोध कंपनी ने कहा है कि इनमें से संभवत: कई उपयोगकर्ताओं की पैन कार्ड, वित्तीय लेनदेन के स्क्रीनशॉट की जानकारी चुरा ली गई हो।

क्या है भीम ऐप?

  • भीम ऐप नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) द्वारा विकसित UPI आधारित भुगतान प्लेटफॉर्म है। डिजिटल इंडिया मिशन के तहत पीएम मोदी ने कैश लेन-देन को कम करने के लिए 30 दिसंबर 2016 को भीम ऐप लॉन्च किया था। भीम ऐप (BHIM App) का नया वर्जन भीम 2.0 (BHIM 2.0) लॉन्च किया गया है।

500 Meter Aperture Spherical Telescope (FAST) रेडियो टेलिस्कोप्स

  • दुनिया के सबसे बड़े सिंगल-अपर्चर टेलिस्कोप से चीन दूसरी दुनिया में एलियन ग्रहों को खोजने की तैयारी कर रहा है। यह टेलिस्कोप जनवरी से काम कर रहा है। पेइचिंग नॉर्मल यूनिवर्सिटी के ऐस्ट्रोनॉमर झांग तोंगजी इस प्रॉजेक्ट के चीफ साइंटिस्ट हैं। उन्होंने बताया है कि ऐसे कई सिग्नल मिले हैं जिनका संकेत दूसरी दुनिया में जीवन की ओर हो सकता है और टीम इसकी जांच करने के लिए एक्साइटेड है।

FAST रेडियो टेलिस्कोप्स के बारे में

  • 16,000 फुट के इस टेलिस्कोप को 1994 में प्रस्तावित किया गया था और आखिरकार 2007 में मंजूरी मिल सकी। इसमें 36 फुट के 4,500 तिकोने पैनल हैं जो एक डिश का आकार लेते हैं। साथ ही 33 टन का Retina है जो 460-525 फीट की हाइट पर टंगा है। इसके आसपास के तीन मील के रेडियस को पूरी तरह खाली कराया गया है ताकि कोई रेडियो इंटरफेरेंस न हो। एलियन लाइफ खोजने के साथ ही टेलिस्कोप पल्सर, ब्लैक होल, गैस क्लाउड और गैलेक्सी जैसे दूसरे कॉस्मोलॉजिकल आयामों को स्टडी करेगा।500 मीटर का Aperture Spherical Telescope (FAST) पहले के रेडियो टेलिस्कोप्स से दोगुने एरिया को कवर कर सकेगा और इसकी रीडिंग 3-5 गुना ज्यादा सटीक होगी।

रिमूव चाइना एप्पस (Remove China Apps)

चर्चा में क्यों?

  • चीनी कंपनियों द्वारा डिवेलप किए गए ऐप्स को डिलीट करने के लिए बने Remove China Apps ऐप को लेकर चीन में खलबली मच गई है। यहां तक कि चीनी इंडस्ट्री ने भारत को इसके नतीजों को लेकर चेतावनी भी देनी शुरू कर दी है। ये ऐप चीनी कंपनियों के ऐप को पहचानने में मदद करता है और यूजर्स चाहें तो इसके जरिए चीनी ऐप्स को अनइंस्टॉल कर सकते हैं। गौरतलब है कि चीन के साथ लद्दाख सीमा पर चल रहे तनाव के कारण भारत के साथ उसके संबंधों में तनाव बढ़ता जा रहा है। लद्दाख में दोनों देशों की सेनाएं आमने-सामने तैनात हैं जिस पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है।

रिमूव चाइना एप्पस के बारे में

  • 17 मई को गूगल प्ले पर लाइव होने वाले इस ऐप को अभी तक 50 लाख से ज्यादा यूजर्स डाउनलोड कर चुके हैं। गूगल प्ले पर इस ऐप को 4.9 रेटिंग के साथ अधिकतर पॉजिटिव रिव्यूज मिले हैं। इस ऐप को OneTouch AppLabs ने बनाया है। इसका दावा है कि यह जयपुर की कंपनी है और इसकी डोमेन ओनर साइट Whois के अनुसार इसकी वेबसाइट 8 मई को बनाई गई। ऐप को इस्तेमाल करने के लिए लॉगइन की जरूरत नहीं होती और यूजर्स अपने ऐंड्रॉयड फोन में चीनी ऐप्स को पहचानने के लिए Scan का विकल्प चुन सकते हैं।

:: पर्यावरण और पारिस्थितिकी ::

ट्रॉपिकल तूफान 'क्रिस्टोबल'

  • मेक्सिको की खाड़ी में मंगलवार को ट्रॉपिकल तूफान क्रिस्टोबल (Tropical Storm Cristobal) के बनने से दक्षिणी मेक्सिको और सेंट्रल अमेरिका के हिस्सों में बाढ़ का खतरा बना गया है। अटलांटिक तूफानों के मौसम के रिकॉर्ड में क्रिस्टोबल तीसरे नंबर पर है। वर्ष 2016 में 5 जून को ट्रॉपिकल तूफान कोलिन आया था। अमेरिका के राष्ट्रीय तूफान केंद्र (U.S. National Hurricane Center) ने बताया कि क्रिस्टोबल का केंद्र आयल सिटी कोटजाकोलकोस के उत्तर-पूर्व है और यह तेजी से दक्षिण पश्चिम की ओर बढ़ रहा है।

:: विविध ::

वी एन दत्त

  • श्री वीरेंद्र नाथ दत्त, निदेशक (विपणन), नेशनल फर्टिलाइजर्स लिमिटेड - एन एफ एल ने कंपनी के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक का अतिरिक्त प्रभार संभाल लिया है। श्री दत्त अक्टूबर, 2018 से कंपनी में निदेशक (विपणन) के रूप में जुड़े हुए है।

:: प्रिलिम्स बूस्टर ::

  • मंत्रिमंडल ने कृषि उत्पादों को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला से जोड़ने एवं निजी निवेश हेतु किस अध्यादेश को संस्तुति दी है? (मूल्य आश्वासन पर किसान:बंदोबस्ती और सुरक्षा समझौता और कृषि सेवा, 2020’)
  • हाल ही में ‘एक देश एक कृषि बाजार’ बनाने हेतु सरकार द्वारा इस अध्यादेश को मंजूरी प्रदान की गई है? (कृषि उपज वाणिज्य एवं व्यापार;संवर्धन एवं सुविधा अध्यादेश 2020)
  • सरकार ने अनाज, दलहन, तिलहन, खाद्य तेलों, प्‍याज और आलू को आवश्यक वस्तुओं की सूची से हटाने हेतु किस अधिनियम में संशोधन की घोषणा की है? (आवश्यक वस्तु अधिनियम)
  • कोविड-19 उपरांत भारत लौटे भारतीय नागरिकों के ‘स्किल मैपिंग के लिए’ हेतु किस योजना को शुरू किया गया है? (SWADES- Skilled Workers Arrival Database for Employment Support)
  • हाल ही में मंत्रिमंडल के द्वारा कोलकाता बंदरगाह (Kolkata Port Trust) को किस नए नाम से अलंकृत किया गया है? (श्‍यामा प्रसाद मुखर्जी बंदरगाह)
  • भारतीय परिवारों द्वारा बच्चों को अनुशासन सिखाने से संबंधित ‘पैरेंटिंग मैटर्स: एक्जामिनिंग पैरेंटिंग एप्रोचेज एंड प्रैक्टिसेज’ अध्ययन किस संस्था के द्वारा तैयार किया गया? (यूनिसेफ)
  • हाल ही में भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के अध्यक्ष का पदभार किसने संभाला है? (उदय कोटक)
  • हाल ही में किसे नेशनल फर्टिलाइजर्स लिमिटेड के अध्यक्ष के रूप में नियुक्ति प्रदान की गई है? (श्री वीरेंद्र नाथ दत्त)
  • सरकार के द्वारा भारत में निवेश को आकर्षित करने हेतु बनाए गए एंपावर्ड ग्रुप ऑफ सेक्रेटरी (EGoS) की अध्यक्षता किसके द्वारा की जाएगी? (कैबिनेट सचिव)
  • अमेरिकी राष्ट्रपति के द्वारा G-7 का विस्तार कर किन देशों को शामिल करने का प्रस्ताव रखा गया है? (भारत, रूस, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया)
  • उपयोगकर्ताओं की जानकारी लीक होने से चर्चा में रहे ‘भीम ऐप’ को कब लांच किया गया था एवं इसे किस संस्था के द्वारा निर्मित किया गया है? (2016,नेशनल पेमेंट्स कार्पोरेशन आफ इंडिया-NPCI)
  • एलियन ग्रहों की खोज से चर्चा में रहे Five-hundred-meterAperture Spherical Telescope (FAST) किस देश द्वारा विकसित का रेडियो टेलीस्कोप है? (चीन)
  • गूगल स्टोर द्वारा अनलिस्टेड करने से चर्चा में रहे ‘Remove China Apps’ का निर्माण किस कंपनी के द्वारा किया गया था? (OneTouch AppLabs-जयपुर)
  • तटरक्षक बलों के गतिरोध से चर्चा में रहेसेंकाकूद्वीपसमूह को लेकर किन देशों के मध्य सीमा विवाद है एवं यह कहां स्थित है? (चीन और जापान, पूर्वी चीन सागर)

स्रोत साभार: Dainik Jagran (Rashtriya Sanskaran), Dainik Bhaskar (Rashtriya Sanskaran), Rashtriya Sahara (Rashtriya Sanskaran) Hindustan Dainik (Delhi), Nai Duniya, Hindustan Times, The Hindu, BBC Portal, The Economic Times (Hindi & English), PTI, PIB

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