(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (31 मार्च 2020)

दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर


(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (31 मार्च 2020)


:: राष्ट्रीय समाचार ::

बच्चों को सामाजिक दूरी के बारे में समझाएं- एनसीपीसीआर

  • राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने राज्यों से कहा है कि वे बाल देखभाल संस्थानों में रखे गए बच्चों को सामाजिक दूरी के बारे में समझाएं और कोरोना वायरस से उनकी सुरक्षा के लिए उन्हें संस्थान के भीतर ही रखें। एनसीपीसीआर ने जिला बाल संरक्षण इकाइयों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि वे दानदाताओं को परिसर के अंदर आने की इजाजत नहीं दें। संस्थान के प्रवेश द्वार के पास एक अलग काउंटर बनाएं, जहां से दान स्वीकार करें। दानदाताओं से पकाया हुआ भोजन देने के बजाय सूखा राशन या बिना पका हुआ सामग्री देने का अनुरोध करें। आधिकरिक आंकड़ों के अनुसार, देशभर में 60,000 से अधिक बच्चे विभिन्न बाल देखभाल संस्थानों में रह रहे हैं।
  • एनसीपीसीआर ने राज्यों को यह सुनिश्चित करने के लिए भी कहा है कि बाल देखभाल संस्थानों को पर्याप्त शैक्षणिक और मनोरंजक सामग्रियों से लैस रखें। इसके अलावा यदि आवश्यक हो, तो बच्चों और कर्मचारियों का सामाजिक कल्याण सुनिश्चित करने के लिए चिकित्सा परामर्श सेवा प्रदान की जा सकती है। एचआइवी, एड्स वाले बच्चों के लिए सभी बाल देखभाल संस्थानों, जहां ये बच्चे रह रहे हैं, पर दवा और चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जानी चाहिए।

बाल अधिकार संरक्षण आयोग

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ;एन. सी. पी. सी. आर. की स्थापना संसद के एक अधिनियम ;दिसम्बर 2005 बालक अधिकार संरक्षण आयोग अधिनियम 2005 के अंतर्गत मार्च 2007 में की गई थी। आयोग का अधिदेश यह सुनिश्चित करना है कि समस्त विधियाँए नीतियां कार्यक्रम तथा प्रशासनिक तंत्र बाल अधिकारों के संदर्श के अनुरूप होंए जैसाकि भारत के संविधान तथा साथ ही संयुक्त राष्ट्र बाल अधिकार सम्मेलन ;कन्वेशनद्ध में प्रतिपादित किया गया है। बालक को 0 से 18 वर्ष के आयु वर्ग में शामिल व्यक्ति के रूप में पारिभाषित किया गया है।

एसईजेड  की इकाइयों/डेवलपर्स/सह-डेवलपर्स को अनुपालन में छूट

वैश्विक महामारी कोविड-19 के प्रकोप तथा पूरे देश में लॉकडाउन को देखते हुए अधिकांश सरकारी सेवाएं बंद हैं और आपातकालीन सेवाओं आदि से जुड़े कार्यालय बहुत कम कर्मचारियों की मदद से चल रहे हैं। इसलिए वाणिज्य विभाग ने विशेष आर्थिक जोन (एसईजेड) की इकाइयों/डेवलपर्स/सह-डेवलपर्स को अनुपालन में उचित छूट देने का निर्णय लिया है। ऐसे अनुपालन जिनमें यह छूट लागू होगी, में शामिल हैः-

  • डेवलपर्स/सह-डेवलपर्स द्वारा स्वतंत्र चार्टर्ड इंजीनियरों से सत्यापित त्रैमासिक प्रगति रिपोर्ट (क्यूपीआर) दाखिल करने की आवश्यकता
  • आईटी/आईटीईएस इकाइयों द्वारा दाखिल किए जाने वाले सॉफ्टेक्स फार्म
  • एसईजेड इकाइयों द्वारा वार्षिक प्रदर्शन रिपोर्ट (एपीआर) दाखिल करना
  • मंजूरी पत्र (एलओए) का विस्तार जिसकी अवधि निम्न स्थितियों में समाप्त हो सकती हैः-
  • डेवलपर्स/सह-डेवलपर्स जो एसईजेड का विकास तथा संचालन करने की प्रक्रिया में हैं
  • इकाइयां जिनकी एनएफई मूल्यांकन के लिए 5 वर्ष की अवधि का पूरा होना संभावित है
  • इकाइयां जिन्हें अभी संचालन शुरू करना है

क्या है एसईजेड?

  • भारत उन शीर्ष देशों में से एक है, जिन्होंने उद्योग तथा व्यापार गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष रूप से ऐसी भौगोलिक इकाईयों को स्थापित किया। इतना ही नहीं, भारत पहला एशियाई देश है, जिसने निर्यात को बढ़ाने के लिए सन 1965 में कांडला में एक विशेष क्षेत्र की स्थापना की थी। इसे निर्यात प्रकिया क्षेत्र (एक्सपोर्ट प्रोसेसिंग ज़ोन/ईपीजेड) नाम दिया गया था।
  • विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईजेड) अधिनियम, 2005 के अनुसार, जो भी ईकाइयां एसईजेड में स्थापित की जाएंगी उन्हें पांच वर्षों तक कर में 100% की छूट दी जाएगी। इसके बाद अगले पांच वर्ष कर में 50% छूट दी जाएगी। इसके बाद के अगले पांच वर्ष तक निर्यात से होने वाले मुनाफे पर 50% की छूट दिए जाने का प्रावधान है। एसईजेड विकसित करने वालों को भी 10 से 15 वर्ष की समय सीमा के लिए आयकर में 100% छूट का प्रावधान किया गया है।

'कंपनी फ्रेश स्टार्ट स्कीम, 2020' और 'एलएलपी सेटलमेंट स्‍कीम, 2020'

  • कोविड-19 के मद्देनजर कानून का पालन करने वाली कंपनियों और सीमित दायित्‍व भागीदारी (एलएलपी) को राहत प्रदान करने के लिए भारत सरकार के प्रयासों के तहत कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय (एमसीए) ने 'कंपनी फ्रेश स्टार्ट स्कीम, 2020' की शुरुआत की है। साथ ही मंत्रालय ने 'एलएलपी सेटलमेंट स्कीम, 2020' में संशोधन किया है जो कंपनियों और एलएलपी दोनों को अपने प्रकार का पहला अवसर प्रदान करने के लिए प्रचलन में है। यह कंपनियों और एलएलपी को डिफॉल्‍ट की अवधि के बावजूद फाइलिंग संबंधित डिफॉल्‍ट को कम करने और पूरी तरह अनुपालन करने वाली एक नई इकाई के तौर शुरुआत करने मदद करता है।

क्या होंगें लाभ?

  • यह फ्रेश स्‍टार्ट स्‍कीम और संशोधित एलएलपी सेटलमेंट स्कीम कोविड-19 वैश्विक महामारी के कारण पैदा हुई अप्रत्‍याशित सार्वजनिक स्वास्थ्य परिस्थिति में अनुपालन को प्रोत्साहित करती है और अनुपालन बोझ को भी कम करती है। इन योजनाओं की विशेषता यह है कि इनके तहत इन योजनाओं की अवधि यानी 1 अप्रैल 2020 से 30 सितंबर 2020 की अवधि में कंपनी रजिस्‍ट्रार में पंजीकृत कंपनियों अथवा एलएलपी को फाइलिंग में देरी के लिए अतिरिक्‍त शुल्‍क में एकमुश्‍त छूट दी गई है।
  • इन योजनाओं के तहत कंपनी अधिनियम 2013 और एलएलपी अधिनियम, 2008 संबंधी विभिन्न खुलासा जरूरतों के अनुपालन के लिए अधिक समयसीमा दी गई है। इसके अलवा कंपनियों और एलएलपी पर संबंधित वित्तीय बोझ को भी काफी कम किया गया है, विशेष तौर पर उन मामलों में जहां डिफॉल्‍ट लंबे समय से किया जा रहा हो। इस प्रकार उन्हें एक नई शुरुआत करने का अवसर प्रदान किया गया है। दोनों योजनाओं में दंडात्मक कार्रवाई से बचाव का भी प्रावधान शामिल है जैसे देरी से जमा करने पर जुर्माना। साथ ही यदि जुर्माना पहले ही लग चुका है तो संबंधित क्षेत्रीय निदेशकों के समक्ष अपील दायर करने के लिए अतिरिक्त समय भी प्रदान किया गया है।
  • हालांकि यह प्रतिरक्षा केवल एमसीए21 में फाइलिंग संबंधी देरी के लिए है और कानून के उल्‍लंघन संबंधी किसी मामले से इसका कोई लेनादेना नहीं होगा।

आईबीबीआई ने ‘कोविड-19’ के प्रकोप के कारण ‘सीआईआरपी’ नियमों में संशोधन किए

  • ‘कोविड-19’ की वजह से लागू किए गए लॉकडाउन के कारण हो रही कठिनाई को दूर करने के लिए भारतीय दिवाला एवं दिवालियापन बोर्ड (आईबीबीआई) ने ‘सीआईआरपी’ नियमों में संशोधन कर संबंधित लोगों को सहूलियत दी है। इसमें बताया गया है कि कोविड-19 के बढ़ते प्रकोप के मद्देनजर केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए लॉकडाउन की अवधि को कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया से संबंधित ऐसे किसी भी कार्य के लिए तय की गई समय सीमा में नहीं गिना जाएगा, जो लॉकडाउन के कारण पूरा नहीं हो सका। हालांकि, इसके तहत संबंधित संहिता (कोड) में दी गई समग्र समय सीमा को ध्‍यान में रखा जाएगा।
  • आईबीबीआई ने 29 मार्च, 2020 को भारतीय दिवाला एवं दिवालियापन बोर्ड (कॉरपोरेट व्यक्तियों के लिए दिवाला समाधान प्रक्रिया) नियम, 2016 (सीआईआरपी नियम) में संशोधन किए।
  • भारत सरकार ने कोविड-19 को फैलने से रोकने और इसे नियंत्रण में रखने के ठोस कदम के तहत 25 मार्च, 2020 से 21 दिनों के लॉकडाउन की घोषणा की है। लॉकडाउन की अवधि के दौरान दिवाला से जुड़े प्रोफेशनलों के लिए प्रक्रिया का संचालन जारी रखना, कर्जदाताओं की समिति के सदस्यों के लिए बैठकों में भाग लेना और समाधान संबंधी संभावित आवेदकों के लिए समाधान योजनाओं को तैयार करना एवं प्रस्तुत करना मुश्किल है। अत: इस स्थिति में सीआईआरपी नियमों में निर्दिष्ट समयसीमा के भीतर किसी कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया के दौरान विभिन्न कार्यों को पूरा करना मुश्किल हो सकता है।

:: अंतर्राष्ट्रीय समाचार ::

UNSC ने सर्वसम्मति से पारित किया संकल्प 2518

  • कोरोना वायरस के प्रकोप को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) ने सर्वसम्मति से संकल्प 2518 को पास किया है। यूएनएससी ने पहली बार इस तरह का संकल्‍प पास किया है। यूएनएससी ने इस प्रकार का संकल्‍प कोरोना महामारी से उपजे संकट को ध्‍यान में रखते हुए लिया है। यह संकल्‍प दुनिया के विभिन्‍न देशों में तैनात शांति सैनिकों की कोरोना से बचाव व सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी उपाय करने की कोशिश करता है। 

95,000 से अधिक शांति सैनिकों को तैनाती

  • यूएनएससी के अनुसार 72 वर्षों से संयुक्त राष्ट्र के शांति अभियानों ने दुनिया के ज्‍वलंत मुद्दों के राजनीतिक समाधान में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। संगठन के अनुसार मौजूदा समय में दुनियाभर में 95,000 से अधिक शांति सैनिकों को तैनात किया गया है। यूएनएससी के जोर देकर कहा कि इन ऑपरेशनों में शांति सैनिकों की चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं। पारंपरिक और गैर-पारंपरिक सुरक्षा कारकों के साथ शांति सैनिकों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरे थे। ऐसे में यह फैसला लेना जरूरी था। संगठन ने कहा कि यह वर्ष संयुक्त राष्ट्र की स्थापना की 75 वीं वर्षगांठ और इसके कार्यान्वयन के लिए एक महत्वपूर्ण वर्ष है। 

चीन ने इस प्रस्‍ताव को किया पेश

  • समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार यूएनएससी ने अपने बयान में कहा है कि  शांति सैनिकों की बचाव और सुरक्षा को लेकर यह पहला प्रस्ताव है। समाचार एजेंसी के मुताबिक यूएनएससी ने कहा कि चीन द्वारा प्रायोजित इस प्रस्‍ताव का इटली, कजाकिस्तान, पाकिस्तान, दक्षिण अफ्रीका, रूस, स्पेन, तुर्की और वियतनाम सहित 43 देश सह प्रयोजित थे।

प्रशिक्षण, स्वास्थ्य, प्रौद्योगिकी व भागीदारी जैसे अहम क्षेत्रों को किया गया शामिल

  • इसमें प्रशिक्षण, स्वास्थ्य, प्रौद्योगिकी एवं भागीदारी जैसे अहम क्षेत्रों को शामिल किया गया है। इसका मकसद प्रशिक्षण प्रणाली को मजबूत करना, स्वास्थ्य सुरक्षा और राहत क्षमताओं में सुधार करना शामिल है। मेजबान देशों के साथ संचार को और मजबूत करने के साथ आपसी विश्वास का निर्माण करना है। इसके साथ शांति मिशन के समन्वय तंत्र की व्यवस्था को और मजबूत करना है।

:: भारतीय अर्थव्यवस्था ::

लॉकडाउन के कारण बीएसएनएल और एयरटेल ने ग्राहकों को दी राहत

  • कोरोना वायरस के कारण लॉकडाउन की स्थिति में भारती एयरटेल और भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL) ने अपने ग्राहकों को बड़ा तोहफा देते हुए फ्री में 10 रुपये का टॉकटाइम देने का एलान किया है। इसके अलावा कंपनी ने अपने ग्राहकों के नंबर्स की वैलिडिटी क्रमशः 17 अप्रैल और 20 अप्रैल तक बढ़ा दी गई है।

पृष्ठभूमि

  • ट्राई ने लॉकडाउन के कारण ग्राहकों को राहत देने के लिए दूरसंचार कंपनियों से अपील की थी।

भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण

  • दूरसंचार सेक्टर में निजी सेवा प्रदाताओं का प्रवेश, अपने साथ स्वतंत्र विनियमन की अनिवार्य आवश्यकता को लेकर आया। दूरसंचार सेवाओं के लिए प्रशुल्क का निर्धारण/संशोधन सहित दूरसंचार सेवाएं, जो कि पूर्व में केन्द्रीय सरकार में निहित थे, को विनियमित करने के लिए, संसद के अधिनियम द्वारा दिनांक 20 फरवरी, 1997 को भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) की स्थापना हुई, जिसे भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण अधिनियम 1997 कहा जाता है।

कोरोना संकट से अर्थव्यवस्था को जीडीपी का 4.3 फीसद का राहत पैकेज

  • कोरोना संकट से अर्थव्यवस्था को उबारने के लिए बूस्टर डोज देने में भारत भी पीछे नहीं है। फरवरी से लेकर अब तक भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआइ) और सरकार की तरफ से 9 लाख करोड़ से अधिक के वित्तीय पैकेज की घोषणा की जा चुकी है जो सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की लगभग 4.3 फीसद है।गत शुक्रवार को कोविड19 से प्रभावित वित्तीय व्यवस्था को बचाने के लिए आरबीआइ के गवर्नर शक्तिकांत दास को आगे आना पड़ा था। उन्होंने गत शुक्रवार को बाजार में नकदी के प्रवाह को बढ़ाने के लिए विभिन्न पहलों के माध्यम से 3.74 लाख करोड़ के बूस्टर डोज का एलान किया था।
  • गत शुक्रवार को दास ने कहा था कि आरबीआइ फरवरी माह में भी अर्थव्यवस्था को संकट से निकालने से लिए 2.8 लाख करोड़ की नकदी का डोज दिया था और दोनों को जोड़ कर यह बूस्टर डोज हमारे सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 3.2 फीसद है। फरवरी और मार्च महीने में आरबीआइ की तरफ से 6.54 लाख करोड़ का पैकेज दिया जा चुका है। वैश्विक महामारी कोरोना संकट का असर फरवरी माह से हमारी अर्थव्यवस्था पर दिखने लगा था। फरवरी माह से ही शेयर बाजार और औद्योगिक जगत की स्थिति प्रभावित होने लगी थी जिसे उबारने के लिए आरबीआइ आगे आया था।
  • आरबीआइ के 6.54 लाख करोड़ के अलावा सरकार की तरफ से पिछले 15 दिनों में 2.47 लाख करोड़ रुपए के वित्तीय पैकेज का एलान किया जा चुका है जो जीडीपी का लगभग 1.1 फीसद है। अगर आरबीआइ और सरकार के पिछले 15 दिनों पैकेज को जोड़ दिया जाए तो कुल पैकेज जीडीपी का 4.3 फीसद हो जाता है और दोनों मिलाकर कुल वित्तीय पैकेज 9.01 लाख करोड़ का हो जाता है।
  • पिछले सप्ताह वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कोरोना पैकेज के नाम पर 1.7 लाख करोड़ की वित्तीय मदद की घोषणा की थी। वहीं गत 24 मार्च को राष्ट्र के नाम संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ से हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर के नाम पर 15,000 करोड़ रुपए के पैकेज का एलान किया गया था। उससे पहले बल्क दवा और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग के लिए सरकार की तरफ से 62,000 करोड़ रुपए के पैकेज की घोषणा की गई थी। इस प्रकार यह तीन पैकेज 2.47 लाख करोड़ रुपए का होता है जो कि जीडीपी का लगभग 1.1 फीसद है।
  • हालांकि, वित्त मंत्री की तरफ से घोषित 1.7 लाख करोड़ के पैकेज में कुछ मदों का भार राज्य सरकार को उठाना पड़ेगा। इनमें राशन की दुकान से मिलने वाले अनाज का लगभग 45,000 करोड़ का खर्च भी शामिल है। एसबीआई इकोरैप की रिपोर्ट के मुताबिक वित्त मंत्री की तरफ से घोषित 1.7 लाख करोड़ के पैकेज में से केंद्र सरकार को 73,000 करोड़ का वहन करना होगा।
  • वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि अगर कोरोना कवर के नाम पर उत्तर प्रदेश, केरल व अन्य राज्यों के पैकेज को जोड़ दिया जाए तो यह आंकड़ा देश के जीडीपी का 5 फीसद से अधिक हो जाएगा। कोरोना से वित्तीय व्यवस्था को कवर देने के लिए अमेरिका ने 2.2 ट्रिलियन डॉलर के पैकेज की घोषणा की है जो अमेरिका के जीडीपी का लगभग 10 फीसद है। ब्रिटेन ने 330 अरब पौंड के पैकेज का एलान किया है जो ब्रिटेन के जीडीपी के 15 फीसद के बराबर है।

:: विज्ञान और प्रौद्योगिकी ::

भारत में वायरस के 'जीनोम स्ट्रक्चर' में हुआ म्यूटेशन

  • लॉकडाउन और कोरोना वायरस के संक्रमित मरीजों की संख्या के बीच आपको यह खबर निश्चित रूप से राहत देगी। चीन, इटली, स्पेन, ईरान के बाद अमेरिका में कोरोना वायरस का कहर देखा जा रहा है। हमारे देश में सरकार ने कमर कस ली है और ‘धरती के भगवान’ भी जी जान से अपना कर्तव्य निभाने में लगे हैं। इस माहौल में एक बढ़िया खबर आई है। भारत में कोरोना वायरस में एक छोटा लेकिन, महत्वपूर्ण म्यूटेशन रिपोर्ट किया गया है। इसके कारण कोरोना वायरस कुछ कमजोर हो गया है।
  • वर्ष 2016 में पद्मभूषण से सम्मानित और एशियाई गैस्ट्रोएंट्रोलॉजिस्ट सोसायटी के अध्यक्ष रहे डॉ. डी. नागेश्वर राव ने किया दावा। डॉ. राव ने बताया कि भारत में कोरोना के जीनोम स्ट्रक्चर में म्यूटेशन हुआ है। यह म्यूटेशन इस वायरस के एस-प्रोटीन की चिपकने की क्षमता को कम करता है। इसका अर्थ है कि अब कोरोना के स्पाइक उस कदर शक्तिशाली नहीं रह गए हैं, जैसे चीन में थे।

इटली में हुए नकारात्मक म्यूटेशन इटली बनाम भारत :

  • इस समय कोरोना वायरस का सबसे घातक असर इटली में दिख रहा है। जहां मृतकों की संख्या 11 हजार का आंकड़ा छूने को बेताब है। इटली में कोरोना वायरस के जैनेटिक मटैरियल में तीन म्यूटेशन हुए। तीनों म्यूटेशन खतरनाक थे और उन्होंने कोरोना वायरस को ज्यादा घातक बना दिया।

क्या होता है म्यूटेशन :

  • स्थान, वातावरण या अन्य किसी कारण से यदि किसी सेल (वायरस, बैक्टीरिया से लेकर इंसान तक) के डीएनए और आरएनए में कोई भी बदलाव होता है, तो वह म्यूटेशन होता है। म्यूटेशन ने जीवों के विकास क्रम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कोरोना वायरस में 29,903 न्यूक्लियस बेस हैं, जिनका क्रमानुसार चीन के मुकाबले भारत और इटली में बदल गया।

एक साथ 4 लोगों को रखने वाला वेंटिलेटर

  • कोरोना वायरस के चलते जहां प्रदेश में वेंटिलेटर की कमी है ऐसे में जेएनयू अस्पताल के चिकित्सकों ने इनोवेटिव तरीके से अमेरिका की तर्ज पर ऐसा वेंटिलेटर तैयार किया है जिसमें एक साथ चार लोगों को वेंटिलेटर पर रखा जा सकता है।
  • चिकित्सकों ने बताया कि साधारणतया वेंटीलेटर के साथ दो टीपीकनेक्ट्स जोड़ते हैं। इसमें एक को इंस्पिरेट्री पार्ट के साथ तथा दूसरे को एक्सपर्टली पार्ट के साथ जोड़कर एक साथ चार वेंटिलेटर सर्किट कनेक्ट किए गए हैं। वेंटिलेटर की कमी के चलते इसे एक जैसे मरीजों में काम में लिया जा सकता है।
  • इसके अलावा चिकित्सकों ने मास्क और सैनिटाइजर भी बनाए हैं। जेएनयू हॉस्पिटल के संचालक डॉ संदीप बख्शी ने बताया कि इस तरह का सिस्टम आपदा के समय ही एक जैसे मरीजों पर काम में लेने के लिए इजाद किया गया है। अलग-अलग बीमारियों से ग्रसित मरीजों पर काम में लेने से क्रॉस इन्फेक्शन का खतरा रहता है।

भारत में तेजी से बढ़ रहे तापमान से कोरोना वायरस से मिलेगी राहत

  • विश्व का कोना-कोना कोरोना वायरस से भयभीत है लेकिन, भारत में तेजी से बढ़ रहा तापमान राहत की खबर लेकर आने वाला है। बीएचयू के जीन वैज्ञानिक प्रो.ज्ञानेश्वर चौबे और दिल्ली स्थित आइसीएमआर (इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च) के डॉ.प्रमोद कुमार ने अपने लैब में शोध से यह निष्कर्ष निकाला है। जीन वैज्ञानिकों ने लैब में शून्य से लेकर 29 डिग्री सेल्सियस तक कोविड-19 की हरकत का जायजा लिया। उन्होंने पाया कि शून्य से 23 डिग्री सेल्सियस तक आते-आते कोविड-19 वायरस की संख्या आधी हो गई थी।
  • प्रो.चौबे के मुताबिक यह शोध जनता और प्रशासन को राहत देने वाला है। गंगा के मैदानी इलाके में तापमान अधिकतम 30 डिग्री तक पहुंच चुका है, जिससे आधी समस्या समाप्त हो गई है लेकिन, सतर्कता जरूरी है। तापमान के आधार पर कोरोना वायरस के वजूद का गणितीय आकलन किया जा सकता है। वैज्ञानिकों का दावा है कि तूफान, चक्रवात, बाढ़ और मौसम के दौरान जान बचाने व राहत को लेकर जैसे देश में भविष्यवाणी की जाती है, उसी तरह कोरोना को लेकर महामारी की आशंका से पूर्व सटीक भविष्यवाणी की जा सकती है।

खास लैब में विश्लेषण

  • प्रो.ज्ञानेश्वर चौबे के मुताबिक बीजिंग द्वारा निर्धारित वायरस के आरएनए सीक्वेसिंग को आर प्रोग्रामिंग की सहायता से तापमान के साथ महामारी का कंप्यूटर सिमुलेशन किया जाता है, जिसकी रिपोर्ट डॉ. प्रमोद को भेजी जाती है। यहां एक खास प्रकार की बीएसएल-4 लैब में विभिन्न तापमान पर वायरस की हरकतें नोट कर उन्हें कंप्यूटर सिमुलेशन के आंकड़े से मेल कराया जाता है। जब दोनों आंकड़े 99.99 फीसद मिल जाते हैं तो कोरोना के घटते स्तर की पुष्टि हो जाती है।

20 दिनों में मिली सफलता

  • डॉ.प्रमोद कुमार ने बताया कि इस शोध में प्रो.चौबे के साथ वह पिछले 20 दिनों से लगे थे। अपने शोध में उन्होंने यह भी पाया कि आठ डिग्री सेल्सियस तापमान कोविड-19 के पनपने की सबसे आदर्श स्थिति है। इस खोज के आधार पर दोनों जीन वैज्ञानिकों को हॉर्वर्ड, कैंब्रिज और ऑक्सफोर्ड सरीखे वैश्विक संस्थानों के वैज्ञानिकों की कंसोर्टियम में भी शामिल किया गया है।

आइआइटी मद्रास के शोधकर्ताओं ने मिट्टी और चूना पत्थर से बनाया कंक्रीट

  • भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) मद्रास के शोधकर्ताओं ने मिट्टी और चूना पत्थर को मिलाकर ऐसा कंक्रीट तैयार किया है जो सीमेंट की जगह ले सकता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि नए कंक्रीट के माइक्रोस्ट्रक्चरल डेवलपमेंट और स्थायित्व के बीच एक संबंध है, जो निर्माण उद्योग के लिए सामान्य सीमेंट की तुलना में कहीं अच्छा साबित हो सकता है और पर्यावरण के लिए भी यह बेहद अनुकूल है। बता दें कि कंक्रीट दुनिया में सबसे ज्यादा इस्तेमाल की जाने वाली निर्माण सामग्री है। हर साल सात घन किलोमीटर कंक्रीट का निर्माण किया जाता है।
  • शोधकर्ताओं ने कहा, ‘पारंपरिक कंक्रीट सीमेंट, रेत, पत्थरों के छोटे टुकड़ों और पानी को मिलाकर तैयार किया जाता है। रासायनिक प्रतिक्रिया के कारण तैयार करने के कुछ घंटों बाद यह कठोर हो जाता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में हमारे पास जो सीमेंट आता है उसे रासायनिक और खनिज योजक अद्वितीय गुणों से युक्त कर देते हैं, जिसके चलते यह टिकाऊ बन जाता है।

हो रहे हैं अनुसंधान :

  • आइआइटी मद्रास में सिविल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर मनु ने कहा, ‘दुनिया भर में वैकल्पिक कंक्रीट के कुशल बाइंडर्स विकसित करने के लिए तमाम तरह के अनुसंधान हो रहे हैं, जो और अधिक टिकाऊ कंक्रीट का उत्पादन करने में मदद कर सकते हैं। संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) ने भी सीमेंट उद्योग को विघटित करने के लिए सीमेंट के विकल्पों को तैयार करने की आवश्यकता पर जोर दिया है। क्योंकि इससे पर्यावरण को काफी नुकसान पहुंचता है।’

कंक्रीट के जंगलों में तब्दील हो रहे हैं शहर :

  • मनु ने कहा कि आपने गौर किया होगा आज खासतौर पर शहरी क्षेत्रों का लगातार विस्तार हो रहा है। कहने को तो इसे विकास का नाम किया जाता है परंतु शहरों में केवल कंक्रीट के जंगल पनप रहे हैं। शहरीकरण पेड़ों का कटान होता है और पर्यावरणीय असंतुलन पैदा हो जाता है। शोधकर्ताओं ने कहा, ‘नया कंक्रीट कम से कम पर्यावरणीय असंतुलन से तो बचा ही सकता है क्योंकि यह हमारे पर्यावरण को किसी तरह का नुकसान नहीं पहुंचाता है।’

नैनोमटेरियल से कोरोना वायरस के संक्रमण को पूरी तरह ठीक करने का दावा

  • जहां दुनिया इस भयानक कोरोना वायरस से इलाज तलाश रही है तो वहीं चीनी वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि उन्होंने इस कोरोना वायरस का इलाज खोल निकाला है। ग्लोबल टाइम्स के मुताबिक चीनी वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि उन्होंने कोरोना वायरस का इलाज खोज निकाला है। रिपोर्ट के मुताबिक चीनी वैज्ञानिकों ने नैनोमेटेरियल की तलाश की है, जिसकी मदद से कोरोना वायरस के संक्रमण को 96.5% से लेकर 99.9% तक डिएक्टिवेट किया जा सकता है। कोरोना वायरस को निष्क्रिय कर उससे बचा जा सकता है।

नैनोमेटिरियल से खत्म होगा कोरोना

  • चीनी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने दावा किया है कि चीन के वैज्ञानिकों ने एक ऐसे नैनोमटेरियल को डेवलप किया है, जो कोरोना वायरस को निष्क्रिय कर सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक चीनी वैज्ञानिकों की एक टीम ने कोविड-19 बीमारी से निपटने के लिए नया तरीका खोज निकाला है, जिसमें नैनो मटेरियल की मदद से कोरोना का इलाज किया जा सकता है। चीनी वैज्ञानिकों ने जिस नेनो मेटिरियल का निर्माण किया है उसकी मदद से कोरोना वायरस को 96.5-99.9% तक अवशोषित और उसे डिएक्टिवेट कर सकता है। हालांकि चीन के इस दावे पर अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। अगर चीनी वैज्ञानिकों का ये दावा सच साबित होता है कि कोरोना के खिलाफ ये बड़ी सफलता हो सकती है।

क्या होता है नैनोमटेरियल

  • मेडिकल साइंस की भाषा में नैनो मटेरियल ऐसा पदार्थ होता है, जिनमें एंजाइम की तरह विशिष्ट गुण पाए जाते हैं। इसका इस्तेमाल अलग-अलग प्रकार की निर्माण प्रक्रियाओं, उत्पादों और हेल्थकेयर में होता है। चीनी वैज्ञानिकों ने अब इसके इस्तेमाल से कोरोना का इलाज खोजा गया है। हालांकि चीन के इस दावे पर अभी कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अगर वैज्ञानिकों का ये दावा सच साबित होता है तो कोरोना को खत्म किया जा सकता है।

भारतीय वैज्ञानिक को वायरस को अलग थलग करने में मिली सफलता

  • पुणे के नेशनल इंस्टीट्यूट आफ वाइरोलाजी (National Institute of Virology, NIV) के शोधकर्ताओं द्वारा कोरोना वायरस कोविड-19 को अलग थलग करने में सफल हो चुके हैं और अब महत्वपूर्ण जानकारियां जुटाने का काम चल रहा है। जल्द ही इनके परिणाम आ सकते हैं। इंडियन कौंसिल आफ मेडिकल रिसर्च (आइसीएमआर) में महामारी व संचारी रोग के प्रमुख रमन आर गंगाखेड़ेकर पहले ही बता चुके हैं पुणे का नेशनल इंस्टीट्यूट आफ वाइरोलाजी ने इस घातक वायरस को अलग-थलग कर लिया है। किसी भी वायरस पर शोध करने के लिए यह सबसे प्रमुख आवश्यकता होती है।

वैक्सीन बनाने के दो तरीके

  • वायरस की रोकथाम के वैक्सीन बनाने के दो तरीके हैं। पहला तरीका है जीन के क्रम को समझना। इनसे ही आगे चलकर एंटीबाडी को विकसित करने में कामयाबी मिल सकती है। दूसरा तरीका स्ट्रेन देने का है। स्ट्रेन देने के बाद वैक्सीन विकसित की जा सकती है जो कि एक आसान विकल्प माना जाता है।
  • एनआइवी के शोधकर्ता अब कुछ अन्य बहुमूल्य जानकारियां जुटाने में लगे हैं। कोरोना की दवा विकसित करने में हम लोग जल्द ही विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) के साथ मिलकर काम कर सकते हैं। इससे पहले हम लोगों ने कभी ऐसा नहीं किया। हमारी संख्या इतनी कम थी कि हमारे योगदान को बहुत कम कर के देखा जाता।

पृष्ठभूमि

  • उल्लेखनीय है देश में कोरोना वायरस का पहला फोटो एनआइवी के वैज्ञानिकों ने ट्रांसमिशन इलेक्ट्रान माइक्रोस्कोप से 30 जनवरी को लिया था। इसका नमूना वुहान से लौटे केरल के छात्र के गले से लिया गया था। मालूम हो कि चीन के वुहान शहर से शुरू हुआ यह वायरस अब तक दुनिया के सौ से ज्यादा शहरों में फैला चुका है। अकेले भारत में अब तक तीस से अधिक मौतें हो चुकी हैं और एक हजार से अधिक लग इसकी चपेट में हैं।

बीएचयू प्रोफेसर ने खोजी कोरोना वायरस के जांच की सरल तकनीक

  • कोरोना वायरस के संक्रमण के खतरे से जहा देश-विदेश में चिकित्सक-वैज्ञानिक इससे निपटने के उपाय तलाशने में लगे हैं, वहीं बीएचयू की महिला प्रोफेसर ने सैंपल जांच की एक आसान तकनीक तैयार की है। अपने शोध छात्राओं के साथ मिलकर तैयार इस तकनीक को पेटेंट कराने के लिए भी प्रयास शुरू कर दिया है।
  • बीएचयू में डिपार्टमेंट ऑफ मॉलिक्यूलर एंड ह्यूमन जेनेटिक्स की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. गीता राय और उनकी टीम डोली दास, खुशबू प्रिया और हीरल ठक्कर ने यह तकनीक तैयार की है। डॉ. गीता के मुताबिक कोरोना वायरस का संक्रमण भारत में तेजी से बढ़ता जा रहा है। इसके सैंपल जांच करने के लिए लैब में घंटों लग जाते हैं। जल्दी और सटीक जांच के लिए एक नई तकनीक तैयार की गई है। उन्होंने कहा कि आरटी-पीसीआर आधारित नैदानिक परीक्षण 100 फीसदी सटीक जानकारी देगा।

कैसे करता है कार्य

  • यह तकनीक एक ऐसे अनोखे प्रोटीन सीक्वेंस को टारगेट करती है जो सिर्फ कोरोना वायरस (COVID-19) में मौजूद है। किसी और वायरल स्ट्रेन में मौजूद नहीं। इस टेक्नोलॉजी की नवीनता के आधार पर एक पेटेंट भी फाइल किया गया है। भारतीय पेटेंट कार्यालय द्वारा किए गए पूर्व निरीक्षण में यह पाया गया कि देश में इस सिद्धांत पर आधारित कोई किट नहीं है, जो कि इस तरह के प्रोटीन सीक्वेंस को टारगेट कर रहा  हो।
  • देश में कोरोना वायरस के संक्रमण की बढ़ती स्थिति एवं सटीक, तीव्र और सस्ते नैदानिक किटों की कमी को यह नैदानिक परीक्षण इन सभी मापदंडों को पूरा कर सकता है। बताया कि केंद्रीय औषध मानक नियंत्रण संगठन और भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद से भी संपर्क किया गया है, ताकि इसे जनता तक ले जाया जा सके।

हर्ड इम्युनिटी से कोरोना वायरस से लड़ने का प्रयास

  • कोरोना वायरस (Corona Virus) से लड़ने के लिए दुनियाभर के देश एकसाथ आ गए है। हर देश अपने स्तर पर कोरोना से लड़ाई लड़ रहा है, इसी बीच ब्रिटिश सरकार के प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार ने कोरोना वायरस यानी COVID-19 से निपटने के लिये हर्ड इम्युनिटी (Herd Immunity) का नाम सुझाया है।

क्या है हर्ड इम्युनिटी

  • हर्ड इम्युनिटी एक प्रोसेस या एक प्रकिया है जिसे अपना कर किसी समाज या समूह में रोग के फैलने की शृंखला को तोड़ा जा सकता है और इस प्रकार रोग को उन लोगों तक पहुँचाने से रोका जा सकता है, जिन्हें इससे सबसे अधिक खतरा हो या जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर है। इसे सरल भाषा में ऐसे समझा जा सकता है कि यह एक ऐसा प्रयोग है जिसका इम्यून सिस्टम बेहद स्ट्रोंग होगा और ये प्रयोग कमजोर इम्यून सिस्टम वाले लोगों को संक्रमित होने से बचाएगा।

कैसे काम करेगा?

  • इस प्रकिया के लिए सबसे पहले किसी संक्रामक बीमारी के फैलने के तरीके और उसके लिये जरुरी हर्ड इम्युनिटी की लिमिट का पता लगाना जरुरी है। इस लिमिट को जानने के लिए महामारी वैज्ञानिक मापदंड यानी स्टैंडर्ड का इस्तेमाल करते है, जिसे ‘मूल प्रजनन क्षमता’ कहा जाता है। यह बताता है कि किसी एक संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने पर और कितने लोग संक्रमित हो सकते हैं। इन स्टैंडर्ड के आधार पर ही इसके प्रयोग को आगे बढ़ाया जा सकता है।

इसे ऐसे समझें...

  • 1 से अधिक R0 होने का मतलब है कि एक व्यक्ति कई अन्य व्यक्तियों को संक्रमित कर सकता है।
  • विशेषज्ञों का मानना है कि कोरोना वायरस का R0 2 से 3 के बीच हो सकता है।
  • वैज्ञानिकों के अनुसार, खसरे (Measles) से पीड़ित एक व्यक्ति 12-18 अन्य व्यक्तियों को जबकि इन्फ्लूएंजा (Influenza) से पीड़ित व्यक्ति लगभग 1-4 व्यक्तियों को संक्रमित कर सकता है।

कोरोना से कैसे लड़ेगा हर्ड इम्युनिटी

  • कोरोना से संक्रमित होने वाले मामलों में ज्यादातर मामले कमजोर इम्यून सिस्टम वाले है। साथ ही इसमें वो लोग भी शामिल हैं जो हार्ट पेशेंट हैं या बीपी की मरीज हैं। ऐसे में हर्ड इम्युनिटी को इस्तेमाल करने में बहुत अधिक समय लग सकता है। वहीँ, अगर एक बार संक्रमित होने वाला व्यक्ति दोबारा संक्रमित होता है तो उसके बचने का अनुमान कम हो जाता है।
  • जानकारों का कहना है कि इस प्रोसेस में उन्हीं लोगों को शामिल किया जा सकता है जिनके अंदर इम्युनिटी का निरंतर विकास हो सकता है। वैसे अभी तक कोरोना/COVID-19 के संदर्भ में इस प्रक्रिया की सफलता के कोई प्रमाण नहीं मिलते हैं और न ही यह सुनिश्चित किया जा सका है कि एक बार ठीक होने के बाद कोई व्यक्ति दोबारा इससे संक्रमित नहीं होगा।
  • सबसे बड़ी बात यह है कि इस खतरनाक कोरोना वायरस से लड़ने की चुनौती के बीच अगर हर्ड इम्युनिटी को अपनाने का दबाव वैज्ञानिकों पर आता है तो ये सही काम कर सकेगा, इसका अनुमान नहीं लगाया जा सकता।

ब्लड प्लाज्मा से कोराना वायरस के इलाज का प्रयोग

  • अमेरिका के डॉक्‍टर कोरोना वायरस के संक्रमण का इलाज करने के लिए एक नए तरीके पर काम कर रहे हैं। ह्यूस्टन के ह्यूस्टन मेथोडिस्ट हॉस्पीटल के डॉक्‍टरों ने कोरोना संक्रमण से ठीक हुए एक मरीज का खून इस बीमारी से गंभीर रूप से पीड़ित एक रोगी को चढ़ाया है। ऐसा प्रायोग करने वाला यह देश का पहला अस्‍पताल बन गया है। घातक कोरोना से दो हफ्ते से अधिक समय तक लड़कर स्‍वस्‍थ्‍य हो रहे एक शख्‍स ने ब्लड प्लाज्मा कोनवा लेस्सेंट सीरम थेरेपी के लिए दान दिया है। 

इलाज की पुरानी पद्धति है प्लाज्मा तकनीक

  • इलाज का यह तरीका साल 1918 के स्पैनिश फ्लू महामारी के समय का है। मेथोडिस्ट्स रिसर्च इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिक डॉ. एरिक सलाजार ने अपने बयान में कहा कि कोनवालेस्सेंट सीरम थेरेपी कोरोना के इलाज का एक कारगर तरीका हो सकता है। हालांकि, अभी चल रहे नैदानिक परीक्षणों में थोड़ा समय लग सकता है लेकिन हमारे पास इतना वक्‍त नहीं है।
  • रिपोर्ट में कहा गया है कि इलाज के इस तरीके को इस हफ्ते के अंत में तेजी से इस्तेमाल किया गया। मेथोडिस्ट्स रिसर्च इंस्टीट्यूट ने 250 मरीजों से ब्लड प्लाज्मा लिया है जो वायरस से पीड़ित हुए थे। अस्‍पताल के अध्यक्ष एवं सीईओ मार्क बूम ने कहा कि इस बीमारी के बारे में जानने के लिए बहुत कुछ है। यदि इस थेरेपी से संक्रमण से जूझ रहे लोगों को बचाने में मदद मिलती है तो हमारे द्वारा हमारे ब्लड बैंक और हमारे शैक्षणिक चिकित्सा के पूर्ण संसाधनों को प्रयोग में लेना एक सार्थक कदम होगा।

कैसे कार्य करता है प्लाज्मा तकनीक

  • दरअसल, कोरोना वायरस के संक्रमण से ठीक हुए व्‍यक्ति के प्लाज्मा में एंटीबॉडी विकसित हो जाते हैं। ये एंटी बॉडीज प्रतिरोधक प्रणाली द्वारा वायरस पर हमला करने के लिए बनाए जाते हैं। माना जा रहा है कि इस तरह के प्लाज्मा को एक रोगी में प्रवेश कराने के बाद उसमें इस जानलेवा वायरस से लड़ने के लिए एंटीबॉडी की शक्ति बढ़ाई जा सकेगी। मालूम हो कि कोरोना की वजह से संयुक्‍त राज्य अमेरिका में 2,000 से अधिक लोगों की मौत हो गई है। दुनियाभर में इस वायरस से 662,700 लोग संक्रमित हैं जबकि 30,751 लोगों की मौत हो चुकी है।

क्या है प्लाज्मा?

  • प्लाज्मा एक तरल पदार्थ होता है जिसका 92% भाग पानी होता है तथा प्लाज्मा में प्रोटीन, ग्लूकोस मिनरल, हारमोंस, कार्बन डाइऑक्साइड आदि तत्व भी होते हैं, रक्त का 55 प्रतिशत भाग प्लाज्मा का बना होता है

:: विविध ::

टोक्यो ओलिंपिक 23 जुलाई से 8 अगस्त 2021 तक होंगा आयोजित

  • कोरोना वायरस महामारी के चलते स्थगित किए गए टोक्यो ओलिंपिक अब अगले साल 23 जुलाई से आठ अगस्त तक आयोजित किए जाएंगे। तोक्यो 2020 के प्रमुख योशिरो मोरी कहा, ‘अब ओलिंपिक खेल 23 जुलाई से आठ अगस्त 2021 के बीच होंगे। पैरालिंपिकक खेल 24 अगस्त से पांच सितंबर के बीच होंगे।’

पृष्ठभूमि

  • टोक्यो ओलंपिक का आयोजन 2020 में किया जाना था। जापान ओलंपिक का शुभंकर (Moscot) को ‘मिराइतोवा’ (Miraitowa) नाम दिया गया था। वहीं पैरालंपिक खेलों हेतु लाल चेक धारी शुभंकर को ‘सोमाइटी’ (Someity) नाम दिया गया था।

:: प्रिलिम्स बूस्टर ::

  • हाल ही में चर्चा में रहे राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग का गठन किस वर्ष किया गया था एवं कितने वर्ष के आयु वर्ग को बालक के रूप में परिभाषित करता है? (2007,  शून्य से 18 वर्ष)

  • हाल ही में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में शांति सैनिकों की कोरोनावायरस से बचाव एवं सुरक्षा हेतु कौन से संकल्प को पारित किया गया है? (संकल्प 2518)

  • भारत में विशेष आर्थिक क्षेत्र को किस अधिनियम के तहत विनियमन किया जाता है एवं भारत का प्रथम विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र कौन था? (विशेष आर्थिक क्षेत्र अधिनियम-2005, कांडला)

  • हाल ही में चर्चा में रहे सीमित दायित्‍व भागीदारी (एलएलपी) में न्यूनतम एवं अधिकतम भागीदारों की संख्या कितनी होती है? (न्यूनतम दो अधिकतम कोई सीमा नहीं)

  • हाल ही में चर्चा में रहे भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण का गठन कब किया गया था? (1997)

  • हाल ही में चर्चा में रहे जीवों में म्यूटेशन की प्रक्रिया क्या होती है? (कोशिकाओं के डीएनए और आरएनए में होने वाला बदलाव)

  • हाल ही में किस संस्था के द्वारा सीमेंट के विकल्प के रूप में मिट्टी और चूना पत्थर से कंक्रीट का निर्माण किया? (आईआईटी मद्रास)

  • हाल ही में चर्चा में रहे ‘हर्ड इम्युनिटी’ सिद्धांत से आप क्या समझते हैं? (टीकाकरण या सामूहिक प्रतिरोधकता का विकास कर रोग के संचार को रोकना)

  • हाल ही में भारतीय वैज्ञानिकों के द्वारा बंद वातावरण वाले स्थलों को वायरस, बैक्टीरिया, फंगस, प्रदूषण इत्यादि से संक्रमण मुक्त करने हेतु किस उपकरण का विकास किया है? (साइंटेक एअरऑन)

  • हाल ही में चर्चा में रहे टोक्यो ओलंपिक और पैरालंपिक का शुभंकर क्या है? (‘मिराइतोवा’ और ‘सोमाइटी’ क्रमशः)

 

 

स्रोत साभार: Dainik Jagran (Rashtriya Sanskaran), Dainik Bhaskar (Rashtriya Sanskaran), Rashtriya Sahara (Rashtriya Sanskaran) Hindustan Dainik (Delhi), Nai Duniya, Hindustan Times, The Hindu, BBC Portal, The Economic Times (Hindi & English), PTI, PIB

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