(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (31 जुलाई 2020)

दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर

:: राष्ट्रीय समाचार ::

राष्ट्रीय आयुष मिशन

चर्चा का कारण

  • हाल ही में केंद्र द्वारा प्रायोजित किए जा रहे राष्ट्रीय आयुष मिशन योजना और आयुष स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्रों के संचालन की समीक्षा की गयी ।

महत्वपूर्ण बिन्दु

  • राष्ट्रीय आयुष मिशन योजना और आयुष स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्रों के संचालन की समीक्षा के दौरान केन्द्रीय आयुष मंत्री ने राष्ट्रीय आयुष मिशन के लिए समर्पित एक वेब- पोर्टल की भी शुरुआत की।
  • इस वेब-पोर्टल के माध्यम से राज्यों के द्वारा अपनी वार्षिक कार्य योजनाओं, उपयोगिता प्रमाण पत्रों, भौतिक और वित्तीय प्रगति रिपोर्टों, डीबीटी आदि से संबंधित सभी जानकारियों को मंत्रालय में ऑनलाइन माध्यम से प्रस्तुत कर सकेंगें।
  • भारत सरकार ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति, 2017 में आयुष प्रणाली की क्षमताओं को एक एकीकृत स्वास्थ्य सेवा का रूप देने तथा चिकित्सा पद्धति की मुख्यधारा में शामिल करने पर बल प्रदान किया है ।

राष्ट्रीय आयुष मिशन

  • भारत सरकार ने राष्ट्रीय आयुष मिशन की शुरुआत वर्ष 2014 को की थी ।
  • स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत आयुष विभाग , राष्ट्रीय आयुष मिशन (एनएएम) के लिए एक नोडल एजेंसी है । आयुष से आशय आयुर्वेद, योग, यूनानी, और होमियोपैथी की भारतीय चिकित्सा प्रणाली से है।
  • राष्ट्रीय आयुष मिशन (एनएएम) एक केंद्र प्रायोजित योजना (centrally sponsored scheme) है ।
  • सरकार द्वारा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और जिला अस्पतालों में प्रभावी गुणवत्तापूर्ण आयुष सेवाएं प्रदान करने तथा भारतीय स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली में मानव शक्ति की कमी की समस्या का समाधान करने के उद्देश्य के साथ राष्ट्रीय आयुष मिशन आरंभ किया गया है।
  • भारत सरकार ने राष्ट्रीय आयुष मिशन में आयुष्मान भारत के आयुष स्वास्थ्य और कल्याण केंद्र के घटक को शामिल करने की भी मंजूरी दी है।
  • आयुष स्वास्थ्य और कल्याण केंद्रों के संचालन हेतु 2019-20 से 2023-24 तक की अवधि में लगभग 3399.35 करोड़ रुपये का व्यय किया जाएगा।
  • आयुष मंत्रालय की इस पहल से भारत सरकार नीति के अनुसार, आईटी अनुप्रयोगों का उपयोग करते हुए काम में पारदर्शिता लाने और ईज़ ऑफ डूइंग की दिशा में काम किया जा रहा है।

सागर विजन

चर्चा में क्यों?

  • प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी और मॉरीशस के प्रधानमंत्री श्री प्रविंद जगन्नाथ ने आज संयुक्त रूप से वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए मॉरीशस में सुप्रीम कोर्ट के नए भवन का उद्घाटन किया।
  • मॉरीशस की राजधानी पोर्ट लुई में पूरी की गई यह अवसंरचना परियोजना भारत सरकार से 28.12 मिलियन अमेरिकी डालर की अनुदान सहायता प्राप्‍त परियोजना है।
  • यह पहल भारत के ‘सागर विजन (Security and Growth for All in the Region- SAGAR)’ के अनुरूप नया सुप्रीम कोर्ट भवन हिंद महासागर क्षेत्र में मॉरीशस के एक विश्वसनीय साझेदार के रूप में भारत की भूमिका को दर्शाता है।

क्या है सागर विजन?

  • भारत सरकार के द्वारा 2015 में नीली अर्थव्यवस्था (Blue Economy) पर ध्यान देते हुए “क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और संवृद्धि-सागर” (Security And Growth for All in the Region- SAGAR) विजन की शुरुआत की गई थी।
  • यह एक समुद्री पहल है जो हिंद महासागर क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समृद्धि सुनिश्चित करने के भारत के प्रयासों को प्राथमिकता देती है।
  • SAGAR शब्द प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी द्वारा वर्ष 2015 में मॉरीशस की यात्रा के दौरान नीली अर्थव्यवस्था पर ध्यान केंद्रित करने के लिए गढ़ा गया था।
  • इस विजन के निम्नलिखित उद्देश्य हैं:
  • क्षेत्र में विश्वास और पारदर्शिता के वातावरण का निर्माण करना;
  • सभी देशों द्वारा अंतर्राष्ट्रीय समुद्री नियमों और मानदंडों के लिए सम्मान;
  • एक दूसरे के हितों के प्रति संवेदनशीलता; समुद्री मुद्दों का शांतिपूर्ण समाधान;
  • समुद्री सहयोग में वृद्धि।
  • भारत की यह पहल हिंद महासागर रिम एसोसिएशन के सिद्धांतों के अनुरूप है।

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 (एनएफएसए)

चर्चा में क्यों?

  • मीडिया में छपी कुछ खबरों के अनुसार, बिहार राज्य में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 (एनएफएसए) के अंतर्गत राशन कार्ड जारी करने में लाभार्थियों की गलत पहचान और भेदभाव का आरोप लगाया गया है। उपभोक्ता मामलों, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के अंतर्गत आने वाला खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग इस बात को स्पष्ट किया है कि एनएफएसए के अंतर्गत लाभार्थियों की पहचान कुछ मानदंडों के आधार पर की जाती है और इसकी जिम्मेदारी पूर्ण रूप से राज्य सरकारों पर होती है।
  • बिहार में एनएफएसए के लाभार्थियों के साथ किसी प्रकार का भेदभाव या उनकी गलत पहचान नहीं की गई है। सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के लिए मानदंडों के आधार पर लाभार्थियों की पहचान करने की प्रणाली एक समान है।

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 (एनएफएसए) क्या है?

  • सरकार ने संसद द्वारा पारित, राष्‍ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम,2013 दिनांक 10 सितम्‍बर,2013 को अधिसूचित किया है,जिसका उद्देश्‍य एक गरिमापूर्ण जीवन जीने के लिए लोगों को वहनीय मूल्‍यों पर अच्‍छी गुणवत्‍ता के खाद्यान्‍न की पर्याप्‍त मात्रा उपलब्‍ध कराते हुए उन्‍हें मानव जीवन-चक्र दृष्‍टिकोण में खाद्य और पौषणिक सुरक्षा प्रदान करना है।
  • इस अधिनियम में,लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (टीपीडीएस) के अंतर्गत राजसहायता प्राप्‍त खाद्यान्‍न प्राप्‍त करने के लिए 75%ग्रामीण आबादी और 50%शहरी आबादी के कवरेज का प्रावधान है,इस प्रकार लगभग दो-तिहाई आबादी कवर की जाएगी। पात्र व्‍यक्‍ति चावल/ गेहूं/मोटे अनाज क्रमश: 3/ 2/1 रूपए प्रति किलोग्राम के राजसहायता प्राप्‍त मूल्‍यों पर 5 किलोग्राम खाद्यान्‍न प्रति व्‍यक्‍ति प्रति माह प्राप्‍त करने का हकदार है। मौजूदा अंत्‍योदय अन्‍न योजना परिवार,जिनमें निर्धनतम व्‍यक्‍ति शामिल हैं,35 किलोग्राम खाद्यान्‍न प्रति परिवार प्रति माह प्राप्‍त करते रहेंगे।
  • इस अधिनियम में महिलाओं और बच्‍चों के लिए पौषणिक सहायता पर भी विशेष ध्‍यान दिया गया है। गर्भवती महिलाएं और स्‍तनपान कराने वाली माताएं गर्भावस्‍था के दौरान तथा बच्‍चे के जन्‍म के 6 माह बाद भोजन के अलावा कम से कम 6000 रूपए का मातृत्‍व लाभ प्राप्‍त करने की भी हकदार हैं। 14 वर्ष तक की आयु के बच्‍चे भी निर्धारित पोषण मानकों के अनुसार भोजन प्राप्‍त करने के हकदार हैं।
  • लाभार्थी के खाद्यान्‍नों अथवा भोजन की आपूर्ति नहीं किए जाने की स्‍थिति में लाभार्थी खाद्य सुरक्षा भत्‍ता प्राप्‍त करेंगे। इस अधिनियम में जिला और राज्‍य स्‍तरों पर शिकायत निपटान तंत्र के गठन का भी प्रावधान है। पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्‍चित करने के लिए भी इस अधिनियम में अलग से प्रावधान किए गए हैं।

मणिपुर पीपल्स लिबरेशन आर्मी

चर्चा में क्यों?

  • भारत-म्यांमार सीमा पर तलाशी अभियान में उग्रवादी गुट पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के हमले में असम रायफल्स के 3 जवानों के शहीद होने और 4 जवानों के घायल होने की खबर है। हथियारबंद पीएलए के उग्रवादियों ने अचानक जवानों पर फायरिंग शुरू कर दी। मणिपुर में भारतीय जवानों पर आतंकवादी हमला हुआ है। शहीद जवान 4 असम राइफल्स यूनिट के हैं।

क्या है मणिपुर पीपल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए)?

  • मणिपुर पीपल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) एक उग्रवाटी गुट है। 25 सितंबर 1978 में एन बिशेश्वर सिंह ने इसका गठन किया था। यह गुट भारत के पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर को अलग स्वतंत्र सोशलिस्ट राज्य बनाने की मांग कर रहा है। यह गुट पूरे राज्य के लिए लड़ाई का दावा करता है हालांकि मणिपुर में नागा, कुकी और आदिवासी समुदाय वास्तव में इस गुट का हिस्सा नहीं है।
  • इस गुट में मणिपुर के मेइती-पंगल समुदाय के लोग शामिल हैं जो मणिपुर में काफी पिछड़ी और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग माना जाता है। जबसे पीएलए का गठन हुआ है, यह भारतीय सुरक्षाबलों पर गुरिल्ला हमले के जरिए निशाना साधता है। भारतीय सेना, अर्धसैन्य बल और राज्य पुलिस के जवानों पर हुए हमले में कई बार पीएलए का नाम आ चुका है। नब्बे के दशक के आखिर में इस गुट ने मणिपुर पुलिस पर हमला न करने का एकपक्षीय फैसला सुनाया था।

मणिपुर पीपल्स लिबरेशन आर्मी और चीन का गठजोड़

  • पूर्वोत्तर में अलगाववादी गुट को चीन से सीक्रेट और सिलेक्टिव मदद मिलती है। चीन पर उपद्रव गुट को हथियार मुहैया कराने के आरोप लगते रहे हैं। देश के सीमावर्ती इलाकों में दशकों से जारी उग्रवाद के बने रहने की यह एक बड़ी वजह है। 2012 में एनआईए ने माओवादी और पीएलए की मिलीभगत का खुलासा करते हुए बताया था माओवादियों ने 2006 से 2011 के बीच चीनी शस्त्रों और हथियारों को म्यामांर से कोलकाता होते हुए गुवाहाटी पहुंचाया था।
  • चीन ने म्यामांर में मौजूद काचिन इंडिपेंडेंट आर्मी (केआईए) के जरिए पीएलए के जत्थों को ट्रेनिंग दिलवाई थी। यह भी कहा जाता है कि मणिपुर पीएलए चीन के लिए आंख और कान है। चीन अपनी जरूरत के हिसाब से विध्वंसक गतिविधियों के लिए पूर्वोत्तर के विद्रोही गुट का इस्तेमाल करता है।

सरकार की प्रतिक्रिया

  • 2018 में केंद्रीय सरकार ने गैरकानूनी और हिंसक गतिविधियों में शामिल पीएलए समेत मणिपुर के 8 उग्रवादी गुटों पर बैन बढ़ा दिया था। गृह मंत्रालय ने PLA के साथ इसके पॉलिटिकल विंग RPF, UNLF और इसका सैन्य विंग MPA, PREPAK और इसके सैन्य विंग रेड आर्मी, KCP और इसके सैन्य विंग, KYKL, द कॉर्डिनेशन कमिटी और ASUK पर 5 साल का बैन बढ़ाया था।

भगवान शिव की नटराज मूर्ति

चर्चा में क्यों?

  • राजस्थान के एक मंदिर से चोरी हुई और तस्करी से ब्रिटेन पहुंची भगवान शिव की नौवीं शताब्दी की एक दुर्लभ पाषाण प्रतिमा को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को सौंप दिया जाएगा। नटराज/नटेशा की पाषाण की यह मूर्ति लगभग चार फुट ऊंची है और भगवान शिव इसमें प्रतिहार रूप में दिखाई देते हैं। मूर्ति की चोरी राजस्थान के बरोली में घाटेश्वर मंदिर से 1998 के फरवरी महीने में हुई थी। इसके तस्करी के जरिए ब्रिटेन पहुंचने की जानकारी 2003 में सामने आई थी।

क्या है नटराज स्वरुप का दर्शन?

  • नटराज शिवजी का एक नाम है उस रूप में जिस में वह सबसे उत्तम नर्तक हैं। नटराज दो शब्‍दों से मिल कर बना है- नट अथार्त कला और राज का अर्थ है राजा। शिव का तांडव नृत्‍य प्रसिद्ध है। भगवान शिव को आमतौर पर विनाश के साथ जोड़ा जाता है और हमेशा उन्‍हें गुस्‍से में ही दिखाया गया है। लेकिन बहुत ही कम लोग यह जानते हैं कि शिव जी को संगीत और नृत्‍य से कितना ज्‍यादा प्‍यार था। नटराज अवतार एक संदेश था कि अज्ञानता को केवल ज्ञान, संगीत और नृत्‍य ही दूर कर सकता है। शिव के तांडव के दो स्‍वरूप हैं। पहला उनके क्रोध को दिखाता है और दूसरा आनंदरप्रदान करने वाला तांडव। प्राचीन आचार्यों के मतानुसार शिव के आनन्द तांडव से ही सृष्टी अस्तित्व में आती है तथा उनके रौद्र तांडव में सृष्टी का विलय हो जाता है। शिव का नटराज स्वरूप भी उनके अन्य स्वरूपों की ही भातिं मनमोहक तथा उसकी अनेक व्याख्यायँ हैं।
  • नटराज शिव की प्रसिद्ध प्राचीन मुर्ति के चार भुजाएं हैं, उनके चारो ओर अग्नि के घेरें हैं। उन्‍होंने अपने एक पांव से एक बौने को दबा रखा है तथा दूसरे पांव से नृत्‍य मुद्रा में उपर की ओर उठा है। उन्‍होने अपने पहले दाहिने हाथ में डमरू पकड़ा है। डमरू की आवाज सृजन का प्रतीक है। ऊपर की ओर उठे हुए उनके दूसरे हाथ में आग है जो कि विनाश का प्रतीक है। उनका दुसरा दाहिना हाँथ अभय (या आशिस) मुद्रा में उठा हुआ है जो कि हमें बुराईयों से रक्षा करता है। नटराज का जो पांव उठा हुआ है वह मोक्ष दर्शाता है। इसका अर्थ यह है कि शिव मोक्ष के मार्ग का सुझाव करते हैं। कहा जाता है कि शिव के चरणों में मोक्ष है। जो बौना शिव के पैरों तले दबा हुआ है वह अज्ञान का प्रतीक है। शिव जी अज्ञान का विनाश करते हैं।

नटराज मूर्तिकला के बारे में

  • एक तमिल अवधारणा के अनुसार शिव को सबसे पहले प्रसिद्ध चोल कांस्य और चिदंबरम की मूर्तियों में नटराज के रूप में चित्रित किया गया था। महान चोल शासकों ने न केवल द्रविड़ स्थापत्य कला शैली को विकास के चरमोत्कर्ष पर पहुंचाया अपितु तक्षण कला व मूर्तिकला में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की। चोलों के समय निर्मित धातु मूर्तियों में 'नटराज शिव' की कांस्य प्रतिमा को विश्व के श्रेष्ठतम् मूर्ति शिल्प में से एक माना जाता है।

:: अंतर्राष्ट्रीय समाचार ::

‘क्वाड ग्रुप’ और ‘फाइव आईज’

चर्चा में क्यों?

  • अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया ने भारत एवं जापान के साथ ‘क्वाड ग्रुप’ में विचार-विमर्श करने को लेकर प्रतिबद्धता प्रकट की है और जोर दिया है कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा और समृद्धि के लिए वे अन्य भागीदारों के साथ भी काम कर रहे हैं । दोनों देशों के शीर्ष मंत्रियों ने फिर से दोहराया कि गठबंधन का ध्यान हिंद-प्रशांत क्षेत्र पर है और अमेरिका तथा ऑस्ट्रेलिया, आसियान, भारत, जापान, दक्षिण कोरिया तथा अन्य देशों के साथ क्षेत्र की सुरक्षा, समृद्धि के लिए काम कर रहे हैं। इसमें ‘फाइव आईज’ समूह के देशों की भी मदद मिल रही है ।

क्या है ‘फाइव आईज’?

  • ‘फाइव आईज’ समूह में ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, न्यूजीलैंड, ब्रिटेन और अमेरिका शामिल हैं। इस गठबंधन का मकसद चीन पर नजर रखना और उससे जुड़ी खुफिया जानकारियों को आपस में साझा करना है। चीन को रोकने और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में उसपर नजर रखने के मकसद से अब अमेरिकी कांग्रेस समिति इस गठबंधन में भारत, जापान और दक्षिण कोरिया को शामिल करना चाहती है।

क्या है ‘क्वाड’?

  • ‘क्वाड’ दरअसल चार देशों- भारत, जापान, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका का एक समूह है। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और स्थिरता, कानून का पालन सुनिश्चित करने और क्षेत्र में चीन के बढ़ते सैन्य प्रभाव को रोकने के लिए इन देशों ने हाथ मिलाया ।

हिरोशिमा परमाणु बम हमले के बाद ‘काली बारिश’ के पीड़ितों को मान्यता

चर्चा में क्यों?

  • जापान की एक अदालत ने हिरोशिमा में 1945 में अमेरिका के परमाणु बम हमले के बाद हुई रेडियोधर्मी ‘काली बारिश’ के पीड़ितों को पहली बार मान्यता दी है। अदालत ने सरकार को बम हमले के दूसरे पीड़ितों की तरह ही उन्हें भी सरकारी चिकित्सा सुविधा का लाभ देने का निर्देश दिया है। हिरोशिमा जिला अदालत ने कहा कि सरकार द्वारा चिन्हित इलाके से बाहर रहने वाले 84 शिकायतकर्ता भी विकिरण से प्रभावित हुए थे। इस वजह से वे बीमार पड़ गए और उन्हें भी परमाणु बम हमले के पीड़ित के तौर पर मान्यता मिलनी चाहिए। ज्यादातर याचिकाकर्ताओं की उम्र 70 साल से अधिक हो चुकी है और उनमें से कुछ 90 साल के बुजुर्ग हैं। शहर में अमेरिकी बमबारी के 75 साल पूरे होने के कुछ दिन पहले यह फैसला आया है ।

पृष्ठभूमि

  • अमेरिका ने छह अगस्त 1945 को हिरोशिमा पर पहला परमाणु बम गिराया था जिसमें करीब 1,40,000 लोगों की मौत हो गयी थी और पूरा शहर तबाह हो गया था। याचिकाकर्ता बम हमले की जद में आए स्थान के उत्तर-पश्चिमी इलाके में रहते थे। बम गिराए जाने के बाद हुई रेडियोधर्मी ‘काली बारिश’ से ये लोग बीमार हो गए थे। कुछ लोग कैंसर से ग्रस्त हो गए तो कुछ की आंखों की रोशनी चली गयी। शहर की जमीन और पानी भी विकिरण से दूषित हो गया था।

:: अर्थव्यवस्था ::

शिक्षा पर जीडीपी की तुलना में सर्वाधिक खर्च करने वाले देश

चर्चा में क्यों?

  • केंद्र सरकार ने न्यू एजुकेशन पॉलिसी 2020 को मंजूरी देने के साथ ही शिक्षा पर देश की जीडीपी का 6 फीसदी हिस्सा खर्च करने का फैसला लिया है। पीएम मोदी के नेतृत्व वाली कैबिनेट ने शिक्षा के बजट को जीडीपी के 6 पर्सेंट तक किए जाने को मंजूरी दी है। अब तक यह करीब 4 फीसदी ही रहा करता था, इस लिहाज से देखें तो यह बड़ा इजाफा है। केंद्र सरकार ने हाई स्कूल के 50 फीसदी छात्रों को 2035 तक हायर एजुकेशन से जोड़ने का लक्ष्य तय किया है। इससे पहले 2013 में यह महज 3.8 पर्सेंट ही था, जो बढ़ते हुए 2019 में 4.6 पर्सेंट पर आ पहुंचा है। बीते सालों के आंकड़ों की तुलना में शिक्षा पर जीडीपी के 6 फीसदी हिस्से को खर्च करने का प्रस्ताव अहम है।

कौन से देश शिक्षा पर जीडीपी की तुलना में सर्वाधिक खर्च करते है?

  • केंद्र सरकार ने शिक्षा पर जीडीपी के 6 फीसदी हिस्से को खर्च करने की बात कही है, लेकिन अब भी यह कई देशों के मुकाबले कम है। खासतौर पर भारत में शिक्षा और साक्षरता की स्थिति को देखते हुए जिस तरह से सुधार की जरूरत है, उसके मुकाबले यह बजट कम लगता है। अब भी क्यूबा, स्वीडन और फिनलैंड जैसे देश शिक्षा पर खर्च के मामले में कहीं आगे हैं। एजुकेशन और हेल्थ को लेकर दुनिया भऱ में चर्चित क्यूबा तो इस पर जीडीपी का 12.8 पर्सेंट हिस्सा खर्च करता है।

शिक्षा पर जीडीपी की तुलना में सर्वाधिक देश एक नजर में

  • क्यूबा 12.8 पर्सेंट
  • फिनलैंड 6.9 फीसदी
  • स्वीडन 7.7 पर्सेंट
  • बोत्सवाना 9.6 पर्सेंट
  • ब्राजील 6.2 पर्सेंट
  • बुर्किना फासो 6 फीसदी
  • पाकिस्तान 2.9 पर्सेंट 2017 में
  • जर्मनी 4.8 फीसदी
  • इजरायल 5.8 पर्सेंट
  • यूनाइटेड किंगडम 5.5 पर्सेंट

:: विज्ञान और प्रौद्योगिकी ::

पोसाइडन-8I

चर्चा में क्यों?

  • हिंद महासागर में चीनी पनडुब्बियों की गतिविधियों पर निगाह रखने के लिए भारत ने सबमरीन हंटर्स 'पोसाइडन-8I' की तैनाती की है। ये एयरक्राफ्ट एंटी-सबमरीन और एंटी- सरफेस वारफेयर को अंजाम देने में सक्षम हैं। लंबी दूरी पर समुद्री पेट्रोलिंग के मद्देनजर अंडमान-निकोबार द्वीप पर बने मिलिट्री बेस पर पोसाइडन-8I की तैनाती की पीछे अहम वजह इसकी मारक क्षमता है।

पोसाइडन-8I के बारे में

  • लॉन्‍ग रेंज वाले पोसाइडन-8I एयरक्राफ्ट पहले से भारतीय नेवी यूज कर रही है। इनमें खास रडार से लेकर इलेक्‍ट्रोऑप्टिक सेंसर्स लगे होते हैं। साथ ही ये हारपून ब्‍लॉक-II और एमके-54 लाइटवेट टारपीडो से लैस हैं। फिलहाल इनका इस्तेमाल हिंद महासागर के अलावा पूर्व लद्दाख में भी सर्विलांस मिशन के लिए हो रहा है।

NASA का मंगल मिशन

चर्चा में क्यों?

  • दुनिया के कई देश मंगल पर जीवन तलाशने की कोशिशों में अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी(NASA) आज अपना एक मंगल मिशन लांच करने जा रही है। इसके तहत पहली बार वह मंगल ग्रह पर रोवर(Rover) के साथ हेलिकॉप्टर भेजने जा रही है। इस अंतरिक्ष मिशन की खासियत ये होगी कि इसमें एक रोवर(Rover) होगा और दूसरा एक ड्रोन हेलिकॉप्टर(Drone Helicoptor)।
  • नासा अपनी अगली पीढ़ी के मंगल रोवर के साथ ड्रोन हेलिकॉप्टर भी साथ भेजेगा। परसिवरेंस मार्स रोवर 1000 किलोग्राम वजनी है जबकि, हेलिकॉप्टर का वजन 2 किलोग्राम है। कार के आकार का छह पहियों वाला रोबोटिक रोवर, जो बोइंग-लॉकहीड के संयुक्त उद्यम यूनाइटेड लांच अलायंस से एटलस 5 रॉकेट को लांच करेगा, जो मंगल ग्रह पर एक मिनी हेलीकॉप्टर को तैनात करने और भविष्य के मानव मिशन के लिए चौथे उपकरण का परीक्षण करने के लिए निर्धारित है। नासा(NASA) के इस मंगल मिशन का नाम मार्स रोवर परसिवरेंस (Mars rover Perseverance) है।
  • नासा ने रोवर के साथ इनजिन्युटी नाम का एक छोटा हेलिकॉप्टर भी मंगल पर भेजा। रोवर इसे मंगल की सतह पर छोड़ेगा। यह हेलिकॉप्टर मंगल की सतह पर अकेले उड़ान भरने का प्रयास करेगा। मंगल के बेहद विरल वातावरण के बीच उड़ान भरने के दौरान यह हेलिकॉप्टर सतह से 10 फीट ऊंचा उठेगा और एक बार में 6 फीट आगे तक जाएगा। हर प्रयास के साथ यह और आगे बढ़ने की कोशिश करेगा।

‘माइक्रोसॉफ्ट सिक्योरिटी एंड प्वायंट रिपोर्ट 2019’

चर्चा में क्यों?

  • एशिया-प्रशांत क्षेत्र में2019 के दौरान सिंगापुर के बाद भारत पर सबसे अधिक ‘ड्राइव- बाय डाउनलोड’ साइबर हमले देखने को मिले। सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) कंपनी माइक्रोसॉफ्ट ने ‘माइक्रोसॉफ्ट सिक्योरिटी एंड प्वायंट रिपोर्ट 2019’ रिपोर्ट में इसकी जानकारी दी।

क्या होता है ‘ड्राइव बाय डाउनलोड’?

  • ‘ड्राइव बाय डाउनलोड’ ऐसे साइबर हमले होते हैं, जिनमें किसी असुरक्षित उपयोक्ता के किसी वेबसाइट पर जाने अथवा कोई फॉर्म भरते समय उसके कंप्यूटर में दुर्भावनापूर्ण कोड डाउनलोड कर दिया जाता है। बाद में उस कोड के जरिए पासवर्ड तथा वित्तीय जानकारियां चुरायी जाती हैं।

‘माइक्रोसॉफ्ट सिक्योरिटी एंड प्वायंट रिपोर्ट 2019’ से जुड़े तथ्य

  • माइक्रोसॉफ्ट के अनुसार, एशिया-प्रशांत क्षेत्र में 2019 में इस तरह के हमले साल भर पहले यानी 2018 की तुलना में 27 प्रतिशत कम हुए। हालांकि इस दौरान भारत में ऐसे हमले 140 प्रतिशत बढ़ गये और भारत 11वें पायदान से उछलकर दूसरे स्थान पर पहुंच गया।
  • रिपोर्ट में कहा गया कि साइबर अपराधियों का मुख्य जोर अभी भी वित्तीय जानकारियां व बौद्धिक संपदा चुराने पर बना हुआ है।
  • रिपोर्ट के अनुसार, सिंगापुर और हांगकांग जैसे वैश्विक वित्तीय केंद्रों के साथ ही भारत में ऐसे हमलों की संख्या क्षेत्रीय व वैश्विक औसत की तुलना में तीन गुना रही।
  • रिपोर्ट के अनुसार, एशिया-प्रशांत क्षेत्र में मैलवेयर और रैनसमवेयर हमले औसत से अधिक हैं। साल 2019 के दौरान इस क्षेत्र में ऐसे हमले वैश्विक औसत से क्रमश: 1.6 और 1.7 गुना अधिक रहे।
  • मैलवेयर हमलों के मामले में भारत एशिया-प्रशांत क्षेत्र में सातवें स्थान पर रहा। ये हमले क्षेत्रीय औसत से 1.1 गुना अधिक रहे। इसी तरह रैनसमवेयर हमलों के मामले में भारत क्षेत्रीय औसत के दो गुना के साथ क्षेत्र में दूसरे स्थान पर रहा।

ओर्का एक्स्ट्रा लार्ज अनमैन्ड अंडरस व्हीकल (XLUUVs) 'सबमरीन'

चर्चा में क्यों?

  • अभी तक न्यूक्लियर पॉवर सबमरीन को समुद्र के अंदर सबसे शक्तिशाली हथियार माना जाता है, लेकिन इन दिनों अमेरिका की प्रमुख हथियार निर्माता कंपनी बोइंग एक ऐसे ड्रोन सबमरीन का ट्रायल कर रही है जो सैकड़ों किलोमीटर दूर स्थित दुश्मनों के जहाजों और पनडुब्बियों को पल भर में डुबा सकती है।
  • इस ड्रोन पनडुब्बी के निर्माण से युद्ध के दौरान नौसैनिकों की जिंदगियां जोखिम में नहीं होंगी। वे सुरक्षित दूरी से इस ड्रोन पनडुब्बी को ऑपरेट कर दुश्मनों के खिलाफ घातक कार्रवाई को अंजाम दे सकते हैं। अमेरिकी नेवी ने तो 13 फरवरी, 2019 को इन ड्रोन पनडुब्बियों को बनाने के लिए बोइंग के साथ 43 मिलियन डॉलर का करार किया है। इस डील के तहत बोइंग चार ओर्का एक्स्ट्रा लार्ज अनमैन्ड अंडरस व्हीकल (XLUUVs) पनडुब्बियों का निर्माण करेगी।

ओर्का एक्स्ट्रा लार्ज अनमैन्ड अंडरस व्हीकल (XLUUVs) 'सबमरीन' के बारे में

  • ओर्का एक्स्ट्रा लार्ज अनमैन्ड अंडरस व्हीकल (XLUUVs) ड्रोन पनडुब्बियां एक बार में 6,500 नॉटिकल मील की दूरी तय करने में सक्षम हैं। ओर्का क्लास की ये पनडुब्बियां माइन काउंटरमेशर, एंटी-सबमरीन वारफेयर, एंटी-सरफेस वारफेयर, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर और स्ट्राइक मिशन को अंजाम देने में सक्षम हैं। अमेरिकी नौसेना के लिए इन ड्रोन पनडुब्बियों को गेम चेंजर माना जा रहा है।
  • ओर्का क्लास की एक पनडुब्बी अपने मिशन डिप्लॉयमेंट के दौरान 46 लाइटवेट टॉरपीडो को लेकर जा सकती है। इसके अलावा ये पनडुब्बी 48 हैवीवेट टॉरपीडो को भी कैरी कर सकती है। इन तॉरपीडो की मदद से समुद्र की सतह पर मौजूद दुश्मन के किसी भी युद्धपोत को आसानी से नष्ट किया जा सकता है। इसमें एंटी शिप मिसाइलों को भी तैनात किया जा सकता है। यह पनडुब्बी समुद्र में माइन को भी बिछा सकती है।
  • इन ओर्का क्लास की पनडुब्बियों की तैनाती के बाद से न केवल उसकी फायर पॉवर बढ़ जाएगी, बल्कि ये आसानी से डिटेक्ट भी नहीं की जा सकेंगी। इन पनडुब्बियों की तैनाती से अमेरिकी नौसैनिकों के जान का खतरा कम होगा और वे सुरक्षित दूरी से इसे ऑपरेट भी कर पाएंगे।

:: पर्यावरण और पारिस्थितिकी ::

पर्यावरण प्रभाव आकलन-2020

  • पर्यावरण प्रभाव आकलन-2020 को लेकर हिमालयी राज्यों के 50 से ज्यादा पर्यावरणविद और संगठनों ने पर्यावरण मंत्रालय द्वारा प्रस्तावित पर्यावरण प्रभाव आकलन अधिसूचना, 2020 को तुरंत वापस लेने की मांग की है। इन संगठनों का आरोप है कि मंत्रालय का विवादास्पद कदम कंपनियों को फायदा पहुंचाने से प्रेरित है। ऐसे में विकास परियोजनाओं के लिए पर्यावरण मंजूरी की प्रक्रिया को ढीला बनाने की दिशा में एक और प्रयास हिमालय राज्यों के लिए घातक है।

क्यों किया जा रहा है विरोध?

  • 115000 मेगावाट बिजली की क्षमता विकसित करने के लिए पूरे हिमालयी क्षेत्र में अंधाधुंध जलविद्युत विकास परियोजनाओं को बढ़ावा दिया जा रहा है। यदि सभी प्रस्तावित 292 बड़े बांधों का निर्माण होता है, तो बांधों की वर्तमान वैश्विक संख्या के आधार पर इस क्षेत्र में दुनिया के सबसे ज्यादा बांधों का समूह वाला क्षेत्र होगा। भारतीय हिमालय की लगभग 90 फीसदी घाटियां, बांध निर्माण से प्रभावित होंगी और इनमें से 27 प्रतिशत बांध घने जंगलों को प्रभावित करेंगे।
  • लद्दाख, कश्मीर, हिमाचल जैसे क्षेत्रों में बढ़ते व्यावसायिक पर्यटन और उत्तराखंड में तीर्थ पर्यटन का अर्थ है बुनियादी ढांचे, सड़क, होटल और रिसॉर्ट का अंधाधुंध व गैर योजनाबद्ध निर्माण। चार धाम सड़क परियोजना के पूरा होने के बाद इससे होने वाला पर्यटन आने वाले समय में बड़ी तबाही और आपदा का एक जीवित उदाहरण है।

क्या कहा संगठनों ने?

  • संगठनों ने कहा कि हिमालय में वनों के दोहन के कारण जैव विविधता बड़े पैमाने पर कम हो रही है। नदियों के सूखने, खत्म होते भूजल स्रोतों, ग्लेशियरों के पिघलने, पहाड़ों के खोखले किए जाने, ठोस और संकटमय कचरे से संबंधित प्रदूषण जैसी समस्याएं आम हैं। यहां की पर्यावरणीय स्थिति अत्यंत संवेदनशील है। पर्यावरणीय नियम कानून के क्रियान्वयन में ढिलाई और उदासीनता के चलते आज पारिस्थितिकी संकट और भी विकट हो गया है।
  • पिछले कुछ सालों में पर्यावरणीय मानदंडों और सामाजिक जवाबदेही के प्रावधानों के बढ़ते उल्लंघन, विस्तृत वैज्ञानिक योजना और प्रभाव मूल्यांकन अध्ययनों के अभाव और निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में कम होते लोकतांत्रिक जन-भागीदारी ने इस स्थिति को और गंभीर कर दिया है। इसलिए केंद्र द्वारा पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (ईआईए) अधिसूचना के तहत कंपनियों और परियोजना डेवलपर्स के लिए पर्यावरण मंजूरी की प्रक्रिया में अधिक छूट का नया प्रस्ताव और घातक है।

क्या है पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA)

  • जो विकास परियोजनाएं लागू होने वाली होती हैं, उनका पर्यावरण पर क्या हानिकारक प्रभाव पड़ेगा, इस हानि को कम करने के क्या उपाय हैं. इन सबके बारे में सुझाव देने के लिए EIA का गठन किया गया है. EIA की शर्तों को पूरा करने के बाद ही पर्यावरण मंत्रालय विकास परियोजनाओं पर अपनी मुहर लगाता है.

क्या कहता है कानून?

  • 1986 पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के तहत बनाई गई ईआईए कानूनी प्रक्रिया के अंतर्गत किसी भी प्रस्तावित परियोजना या विकास कार्य के संभावित पर्यावरण व सामाजिक, आर्थिक प्रभाव का मूल्यांकन करना अनिवार्य है। इस कानून के तहत परियोजना को मंजूरी लेने की निर्णय प्रक्रिया में प्रभावित समुदायों के साथ जन परामर्श व तकनीकी और वैज्ञानिक विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा भी शामिल है, ताकि परियोजना की कीमत उससे होने वाले लाभ से ज्यादा न हो। पिछले दो दशकों में व्यापार के लिए इन नियमों को लगातार ढीला कर इस अधिसूचना में संशोधन किया गया। अब यह नया मसौदा ईआईए प्रक्रिया को एक औपचारिकता मात्र बनाकर कमजोर छोड़ देने की दिशा में ही एक और कदम है।

पर्यावरण प्रभाव आकलन-2020 के बारे में

  • मार्च 2020 में पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) द्वारा पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA-ईआईए), 2020 का एक मसौदा जारी किया गया था। यह इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें सभी नए तरह के बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को शामिल किया गया है। इसमें मौजूदा सड़कों का निर्माण, खनन परियोजनाएं, कारखाने, बिजली संयंत्र आदि शामिल हैं जोकि एक पर्यावरण प्रभाव आकलन रिपोर्ट का संचालन करने के लिए आवश्यक हैं।
  • यह रिपोर्ट हमें बताएगी कि ये परियोजनाएं पर्यावरण को कैसे प्रभावित करेंगी और यह मंत्रालय पर निर्भर करेगा कि वह किस परियोजना को मंजूरी देगा या किसे खारिज करेगा। हालांकि व्यापार करने में सहूलियत को बढ़ावा देने के लिए पर्यावरण सुरक्षा उपायों को मौलिक रूप से समाप्त करने के लिए अधिसूचना की भारी आलोचना की जा रही है। यह प्रत्येक नागरिक के स्वच्छ पर्यावरण के अधिकार को कमजोर करता है और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करता है।

:: विविध ::

लोक संगीतकार सोनम शेरिंग लेपचा

  • प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लोक संगीतकार सोनम शेरिंग लेपचा के निधन पर शोक जताया है। सोनम शेरिंग लेपचा 92 वर्ष के थे और लंबी बीमारी के बाद 30 जुलाई को उनका निधन हो गया। उनका जन्म 3 जनवरी 1928 को कालिम्पोंग जिले के कालिबुंग बस्ती में हुआ था। उन्हें 2007 में कला के क्षेत्र में योगदान के लिए पद्मश्री से सम्मानित किया गया था।
  • पद्मश्री लेप्चा ने सिक्किम के विभिन्न हिस्सों की यात्रा की और भारतीय लोक और पारंपरिक लेप्चा गीतों की एक विस्तृत श्रृंखला का अनुपालन किया। उन्होंने वर्ष 1960 में ऑल इंडिया रेडियो पर लोक संगीत बजाया था और उन्हें लोक संगीत के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए पद्म श्री से सम्मानित किया गया था।

:: प्रिलिम्स बूस्टर ::

  • हाल ही में दिवंगत हुए ‘‘पद्मश्री सोनम शेरिंग लेपचा” कला की किस विधा से संबंधित है? (संगीत)
  • हिंद महासागर में चीन की पनडुब्बियों की निगरानी से चर्चा में रहे 'पोसाइडन-8I' क्या है एवं इसे किस देश द्वरा निर्मित किया गया है? (एंटी-सबमरीन और एंटी-सरफेस वारफेयर विमान, अमेरिका)
  • माइक्रोसॉफ्ट के अनुसार भारत में सर्वाधिक मामले से चर्चा में साइबर हमला‘ड्राइव-बाय डाउनलोड’ क्या है? (असुरक्षित उपभोक्ता के कंप्यूटर में कोड डाउनलोड कर पासवर्ड तथा वित्तीय जानकारियां चुराना)
  • हिंद-प्रशांत महासागर में सुरक्षा और समृद्धि में मदद देने से चर्चा में रहे ‘फाइव आईज’ समूह में कौन से देश शामिल है? (ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, न्यूजीलैंड, ब्रिटेन और अमेरिका)
  • हाल ही में ब्रिटेन से दुर्लभ पाषाण प्रतिमा की वापसी से चर्चा में रहे ‘नटराज’ मूर्तिकला का सर्वोच्च विकास किस वंश के शासन काल में हुआ था? (चोल काल)
  • हाल ही में प्रस्तुत नई शिक्षा नीति 2020 में भारत द्वारा जीडीपी के कितने प्रतिशत के खर्च का लक्ष्य शिक्षा पर रखा गया है? (6 प्रतिशत)
  • हिमालयी राज्यों के पर्यावरणविद और संगठनों द्वारा विरोध से चर्चा में रहे ‘पर्यावरण प्रभाव आकलन 2020 अधिसूचना को किस कानून के आलोक में लाया गया है? (पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986)
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा मारीशस में सुप्रीम कोर्ट के उद्घाटन से चल ‘सागर (SAGAR)’ नीति क्या है एवं इसे कब शुरू किया गया था? (हिंद महासागर क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समृद्धि,2015)
  • हाल ही में चर्चा में रहे और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम को कब लागू किया गया था एवं इसके तहत लाभार्थियों की पहचान किसके द्वारा की जाती है? (2013, राज्य/ केंद्र शासित प्रदेश)
  • हाल ही में सेना पर हमला करने से चर्चा में रहे ‘आतंकी संगठन - पीपुल्स लिबरेशन आर्मी’ पूर्वोत्तर के किस राज्य से संबंधित है एवं इसकी स्थापना किसने की थी? (मणिपुर, एन बिशेश्वर सिंह)
  • हाल ही में किस अंतरिक्ष एजेंसी के द्वारा रोवर परसिवरेंस और इंजीन्यूटी हेलिकॉप्टर को अंतरिक्ष मिशन पर भेजा जाएगा एवं यह अंतरिक्ष मिशन किस ग्रह/ उपग्रह से संबंधित है? (नासा-अमेरिका, मंगल ग्रह)
  • निर्माण कार्य के अनुबंध से चर्चा में रहे ‘ओर्का एक्स्ट्रा लार्ज अनमैन्ड अंडरस व्हीकल (XLUUVs)’ क्या है एवं इसका निर्माण किसके द्वारा किया जाएगा? (लड़ाकू ड्रोन पनडुब्बी, गोइंग अमेरिका)
  • हाल ही में समीक्षा से चर्चा में रहे ‘राष्ट्रीय आयुष मिशन’ को कब प्रारंभ किया गया था? (2014)

स्रोत साभार: Dainik Jagran (Rashtriya Sanskaran), Dainik Bhaskar (Rashtriya Sanskaran), Rashtriya Sahara (Rashtriya Sanskaran) Hindustan Dainik (Delhi), Nai Duniya, Hindustan Times, The Hindu, BBC Portal, The Economic Times (Hindi & English), PTI, PIB