(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (30 मार्च 2020)

दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर


(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (30 मार्च 2020)


:: राष्ट्रीय समाचार ::

पीएम केयर फंड

  • कोरोना वायरस के खिलाफ चल रही लड़ाई को लेकर केंद्र सरकार ने बड़ी घोषणा की है। सरकार ने कहा है कि कंपनियों द्वारा प्रधानमंत्री आपात राहत कोष (पीएम-केयर्स) में योगदान को कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व (सीएसआर) खर्च माना जाएगा।

कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व (सीएसआर) क्या है?

  • कंपनी कानून 2013 के तहत कुछ निश्चित श्रेणी की मुनाफा कमाने वाली कंपनियों को अपने तीन साल के औसत शुद्ध लाभ को दो प्रतिशत एक वित्त वर्ष में सीएसआर गतिविधियों पर खर्च करना होता है।
  • कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय ने इस बारे में ज्ञापन जारी कर स्पष्ट किया है कि पीएम-केयर्स कोष में किए गए किसी भी योगदान को कंपनी कानून, 2013 के तहत सीएसआर खर्च माना जाएगा।’’

पीएम-केयर्स फंड क्या है?

  • सरकार ने आपात स्थितियों में प्रधानमंत्री नागरिक सहायता एवं राहत कोष (पीएम-केयर्स फंड) बनाया है। यह कोष कोरोना वायरस जैसी किसी आपात स्थिति में मदद देने का काम करेगा।

अंडमान- निकोबार द्वीप समूह के आदिवासियों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं मानवविज्ञानी

  • कोविड-19 के छह मामलों का पता चलने के बाद प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह पर खतरे के बादल मंडराने लगे हैं। इन द्वीपों पर रहने वाले विलुप्त हो रहे पांच आदिवासी समूहों को लेकर भय पैदा हो गया है। न्यून इम्यूनिटी होने के कारण डर है कि यदि ये इस खतरनाक बीमारी की चपेट में आ गए तो उनका अस्तित्व मिट जाएगा।

महामारी फैलने पर इनके उन्‍मूलन का डर 

  • एक साथ इन आदिवासियों की कुल संख्या 1000 से भी कम है। ये बाहरी दुनिया से अलग-थलग हैं और इनका इम्यूनिटी स्तर अत्यंत न्यून है। मानवविज्ञानियों को द्वीप समूह में महामारी फैलने पर इनके उन्मूलन का डर है। अंडमान एवं निकोबार 572 द्वीपों का समूह है। बंगाल की खाड़ी और अंडमान सागर स्थित इन द्वीपों में से केवल 37 पर ही लोग निवास करते हैं। कोरोना वायरस से संक्रमण के सभी छह मामले पोर्ट ब्लेयर क्षेत्र में पाए गए हैं।

सतर्कता के सभी कदम उठाने का आश्वासन

  • केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन ने इन आदिवासियों को कोरोना वायरस से संरक्षित रखने के लिए सतर्कता के सभी कदम उठाने का आश्वासन दिया है। लेकिन मानवविज्ञानियों को इस बात की आशंका है कि बाहरी दुनिया से संपर्क में आने से ये संक्रमित हो सकते हैं।

पांच विलुप्त हो रहे आदिवासियों का है निवास?

  • यह द्वीप समूह दुनिया में पांच विलुप्त हो रहे आदिवासियों ग्रेट अंडमानी, जारावा, ओंगे, शोंपेन और सेंटिनेली का निवास है। हजारों वर्षों से ये अलग-थलग रह रहे हैं और बाहरी दुनिया से इनका संपर्क बहुत कम या बिल्कुल नहीं है। द्वीप समूह पर इनकी कुल आबादी 900 के आसपास है। भारतीय मानविकीय सर्वेक्षण (एएसआइ) के अनुसार ग्रेट अंडमानी आदिवासियों की संख्या करीब 60, ओंगे 124, सोंपेन 200, जारावा 520 और सेंटिनेली 60 हैं।

कोविड-19 से लड़ने वाले स्वास्थ्य कर्मियों के लिए बीमा योजना

  1. प्रधानमंत्री गरीब कल्याण पैकेज के तहत की गई घोषणा के अनुसार, ‘प्रधानमंत्री गरीब कल्याण पैकेज: कोविड-19 से लड़ने वाले स्वास्थ्य कर्मियों के लिए बीमा योजना’ शुरू करने को निम्नलिखित शर्तों के साथ मंजूरी दी गई है:
  2. इसके तहत सामुदायिक स्वास्थ्य कर्मियों सहित उन तकरीबन 22.12 लाख सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं को 90 दिनों के लिए 50 लाख रुपये का बीमा कवर प्रदान किया जाएगा जिन्हें कोविड-19 के रोगियों के सीधे संपर्क में रहना पड़ सकता है या उनकी देखभाल करनी पड़ सकती है और जिनके इससे प्रभावित होने का खतरा है। इसमें कोविड-19 से संक्रमित हो जाने के कारण आकस्मिक मौत भी शामिल होगी।
  3. अभूतपूर्व स्थिति के कारण निजी अस्पताल के कर्मचारी/सेवानिवृत्त/स्वयंसेवक/स्थानीय शहरी निकाय/अनुबंध/दिहाड़ी वेतन पर काम करने वाले/तदर्थ/ राज्यों/केंद्रीय अस्पतालों/केंद्रीय/राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के स्वायत्त अस्पतालों, एम्‍स एवं आईएनआई/ केंद्रीय मंत्रालयों के अस्पतालों द्वारा आउटसोर्स किए गए अपेक्षित कर्मचारियों को भी कोविड-19 से संबंधित जिम्मेदारियों के लिए निर्दिष्‍ट किया जा सकता है। इन मामलों को भी कवर किया जाएगा। हालांकि, इसके तहत स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा निर्दिष्‍ट संख्या को ध्‍यान में रखना होगा।
  4. इस योजना के तहत प्रदान किया जा रहा बीमा कवर दरअसल संबंधित लाभार्थी के किसी भी अन्य मौजूदा बीमा कवर के अलावा होगा। 

नेशनल बुक ट्रस्ट “कोरोना अध्ययन श्रृंखला” लॉन्च करेगा

  • आने वाले समय में मानव समाज पर वैश्विक महामारी कोरोना के असाधारण मनोवैज्ञानिक, सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक प्रभाव को महसूस करते हुए नेशनल बुक ट्रस्ट “कोरोना अध्ययन श्रृंखला” के तहत पुस्तकों का प्रकाशन करेगा। इसके अंतर्गत कोरोना के बाद के समय में सभी आयु-वर्गों के लिए प्रासंगिक पठन सामग्री का प्रकाशन किया जाएगा।
  • इससे पहले नेशनल बुक ट्रस्ट ने  #StayHomeIndiaWithBooks पहल की शुरुआत की थी। सर्वाधिक लोकप्रिय पुस्तकों को पीडीएफ फार्मेट में अपलोड किया गया और लोगों को निःशुल्क डाउनलोड की सुविधा दी गई।

क्या है नेशनल बुक ट्रस्ट?

नेशनल बुक ट्रस्ट मानव संसाधन विकास मंत्रालय के अंतर्गत एक राष्ट्रीय निकाय है जो पुस्तकों का प्रकाशन करती है और पुस्तकों को बढ़ावा देती है।

टीम ट्राइफेड वन-धन इंडिया और ‘जनजातीय लोगों के लिए टेक’ परियोजना

  • जनजातीय कार्य मंत्रालय के संगठन ट्राइफेड, के देश के 27 राज्यों में काम कर रहे 500 से अधिक अधिकारियों की एक टीम के वेबिनर सॉफ्टवेयर के जरिए एक दूसरे के साथ संपर्क बनाए रखने और घर से कंम्यूटर पर काम करने के अविश्वसनीय परिणाम सामने आए हैं। 
  • सभी बाधाओं को पार करते हुए देश के 16 प्रमुख भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों और भारतीय प्रबंधन संस्थानों में जनजातीय उद्यमियों को प्रशिक्षित करने के लिए "सभी जनजातीय लोगों के लिए टेक" परियोजना की शुरुआत 19 मार्च 2020 को की गई  थी। यह योजना गांवों में रहने वाले लगभग 3.5 लाख जनजातीय उद्यमियों को आईआईटी और आईआईएम जैसी विश्व की अग्रणी संस्थाओं से जुडने का अवसर देगी।

क्या है ट्राइफेड वन-धन?

  • भविष्य में 50 लाख जनजातीय लोगों के लिए संचार के माध्यम के रूप में जीआईएस आधारित ट्राइफेड वन-धन वेबसाइट, 27 राज्यों में ट्राइफेड की भाग लेने वाली  टीमों के परीक्षण के लिए 27 मार्च 2020 को ऑनलाइन शुरू की गई थी। इसके तहत ट्राइफेड की ओर से प्रतिदिन कम से कम दो प्रतिभागी टीमों के बीच बैठक की व्यवस्था की जा रही है और ऐसी टीम आगे अपने साझेदारों से संपर्क बनाने का काम कर रही ट्राइब्स इंडिया की बिक्री में पिछले साल की तुलना में इस वर्ष 29 फरवरी तक ही 30% की वृद्धि दर्ज हो चुकी है और इसने 1.50 लाख जनजातीय कारीगरों को जीविका के अवसर उपलब्ध कराए हैं। ऐस में ये लोग लॉकडाउन से कोई खास प्रभावित नहीं हुए हैं।
  • ट्राइफेड ने देश के 22 राज्यों में 1205 वन-धन केंद्र स्थापित करने का काम पूरा कर लिया है, जिसमें उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए  29 फरवरी तक 3 लाख 70 हजार जनजातीय लोगों को रोजगार दिया जा चुका है। यह 600 केंद्रों के लिए निर्धारित लक्ष्य का दोगुना है। इन केन्द्रों में शुरुआती प्रयासों को और मजबूत बनाया जा रहा है जो जनजातीय स्टार्टअप्स की गुणवत्ता और उनके प्रदर्शन में सुधार के रूप में सामने आ रहा है।

:: अंतर्राष्ट्रीय समाचार ::

‘हैशटैग कुटू’ आंदोलन

  • जापान में ‘हैशटैग कुटू’ आंदोलन का असर दिखाई पड़ने लगा है। जापानी एयरलाइन्स ने महिलाओं को स्कर्ट के साथ हाई हील्स पहनने की अनिवार्यता को समाप्त कर दिया गया है।

क्यों शुरू किया गया आंदोलन

  • जापान में महिलाओं को दफ्तरों में हाई हील्स पहनना जरूरी है। इसको लेकर महिलाएं काफी परेशान हैं। एड़ी और पैर दर्द की शिकायतें बढ़ने लगीं। दफ्तर में काम के दौरान उनका मन नहीं लगता है। इन परेशानियों को देखते हुए 32 साल की अभिनेत्री और मॉडल यूमी इशिकावा ने एक पहल की। उन्होंने ‘हैशटैग मीटू’ अभियान की तर्ज पर ‘हैशटैग कुटू’ शुरू किया।

कंपनियों में लागू है ड्रेस कोड

  • जापान में ज्यादातर कंपनियों और सार्वजनिक संस्थाओं में कर्मचारियों के लिए ड्रेस कोड लागू है। पुरुषों को सूट और डार्क कलर के जूते जबकि महिलाओं को स्कर्ट के साथ हाई हील्स पहनना जरूरी है। यूमी बताती हैं कि मैंने लोगों का समर्थन जुटाने के लिए पिटीशन दाखिल की। मैं लिंगभेद को खत्म करना चाहती हूं। इस अभियान में 25 हजार लोगों का समर्थन जुटाकर मैं साबित करना चाहती हूं कि महिलाओं पर सख्ती खत्म होनी चाहिए।

स्पेन और इटली ने यूरोपीय यूनियन (ईयू) से मांगी मदद

  • कोरोना वायरस महामारी से सबसे ज्यादा प्रभावित स्पेन और इटली ने यूरोपीय यूनियन (ईयू) से मदद मांगी है। इटली के प्रधानमंत्री ग्यूसेप कोंते ने शनिवार देर शाम कहा कि यूरोप को शेष दुनिया को यह बताना होगा कि वह इस खराब समय का मुकाबला करने में सक्षम है। स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज ने भी यूरोपीय यूनियन के 27 देशों से मदद का आह्वान किया है।
  • बता दें कि स्पेन, इटली, फ्रांस सहित ईयू के छह अन्य देशों ने ईयू से कोरोना बांड जारी करने को कहा है। यह भी एक तरह का कर्ज होगा, जिसे बाजार में बेचकर महामारी से लड़ रहे देश पैसा पा सकेंगे। हालांकि इन देशों के इस विचार से जर्मन और नीदरलैंड जैसे देश सहमत नहीं हैं।

पृष्ठभूमि

  • यूरोप में कोरोना वायरस के संक्रमण से मरने वालों का आंकड़ा 20,000 के पास पहुंच गया है। इसमें से आधी मौत इटली में हुई हैं। कोरोना से मौतों के मामले में स्पेन दूसरे नंबर पर है। रूस ने कहा है कि वह सोमवार को वह अपनी सीमाएं बंद कर देगा। फ्रांस में करीब 2,000 लोगों की जान कोरोना संक्रमण से हो चुकी है। फ्रांस के प्रधानमंत्री एडवर्ड फिलिप की मानें तो अप्रैल के शुरुआती दो हफ्ते ज्यादा मुश्किल रहने वाले हैं। ब्रिटेन में वायरस से मरने वालों की संख्या 1,000 के पार चली गई है। वहीं ईरान में 139 और लोग संक्रमण से मारे गए हैं।

यूरोपीय संघ

  • यह संघ में 28 सदस्य थे किंतु ब्रिटेन के इससे निकल जाने से इस संघ के सदस्यों की संख्या अब 27 रह गयी।  यह पेरिस संधि (1951) तथा रोम संधि (1957) के अधीन स्थापित यूरोपीय समुदाय (ईसी) के आधार पर गठित किया गया है तथा एकल यूरोपीय अधिनियम (1986), यूरोपीय संघ के लिये मैस्ट्रिच संधि (1991) तथा अम्स्टर्डम प्रारूप संधि), आदि संधियों ने इसके गठन को संपूरकता प्रदान की।

वुहान की पेशेंट जीरो वेई गुझियान

  • दुनियाभर में कहर बरपा रहे कोरोनावायरस को लेकर बड़ी खबर है। बीमारी से पहले संक्रमित का पता चल गया है। यह 57 साल की एक महिला है, जो चीन के वुहान में झींगा बेचती थी। वेई गुझियान को पेशेंट जीरो बताया जा रहा है। पेशेंट जीरो वह मरीज होता है, जिसमें सबसे पहले किसी बीमारी के लक्षण देखे जाते हैं। खास बात यह है कि करीब एक महीने चले इलाज के बाद यह महिला पूरी तरह से ठीक हो चुकी है।

क्या होता है पेशेंट जीरो?

  • दुनिया भर में कहर बरसाने वाले कोरोनावायरस की बीमारी से पहले संक्रमित का पता चल गया है। कोरोनावायरस से संक्रमित पहली मरीज ‘वेई’ है जो चीन के वुहान में झींगा बेचती थी। करीब एक महीने चले इलाज के बाद यह महिला पूरी तरह से ठीक हो चुकी है।
  • मेडिकल क्षेत्र में तकनीकी भाषा में किसी वायरस या बैक्टीरिया के कारण बीमार हुए पहले मरीज को 'पेशेंट जीरो' कहा जाता है। दुसरे शब्दों में पेशेंट जीरो वह मरीज होता है, जिसमें सबसे पहले किसी बीमारी के लक्षण देखे जाते हैं।
  • दरसल 'पेशेंट जीरो' के बारे में ज्ञात हो जाने पर शोधकर्ताओं को बीमारी के बारे में जानने में मदद मिलती है कि ‘यह कब और कैसे शुरू हुआ’। यह स्वास्थ्य विशेषज्ञों को रोग के संक्रमण के मॉडल विकसित करने में मदद करता है कि “कैसे इसका प्रसार जानवरों से मनुष्यों में हुआ और इसके प्रकोप को रोकने के लिए क्या कदम लिए जा सकते है”।

2022 राष्ट्रमंडल खेल

  • कॉमनवेल्थ गेम्स फेडरेशन (सीजीएफ) ने 2022 के बर्मिंघम खेलों में भारत को बड़ा झटका दिया है। सीजीएफ की ओर से इन खेलों के निर्धारित किए गए कार्यक्रम में शूटिंग और तीरंदाजी का कहीं जिक्र तक नहीं है। सीजीएफ ने पैरास्पोर्ट्स समेत 31 खेलों में खिलाड़ियों की भागीदारी सुनिश्चित की है। इससे साफ है कि शूटिंग और तीरंदाजी कॉमनवेल्थ गेम्स का हिस्सा नहीं है। वहीं दूसरा झटका यह दिया है कि 15 खेलों में भारतीय दल की भागीदारी का कोटा 109 निर्धारित किया गया है। इसके चलते इन खेलों में भारतीय दल ग्लास्गो और गोल्ड कोस्ट से छोटा रहने की संभावना बन गई है।

संयुक्त राष्ट्र ने टाला परमाणु हथियार सम्मेलन

  • संयुक्त राष्ट्र ने कोरोना वायरस महामारी के पूरी दुनिया में बढ़ते प्रसार को देखते हुए परमाणु अप्रसार संधि के लिए आयोजित होने वाली अहम बैठक को टालने का फैसला लिया है। परमाणु अप्रसार संधि के 191 सदस्यों ने इसके क्रियान्यवन की समीक्षा करने के लिए होने वाले सम्मेलन को टाल दिया है।
  • संयुक्त राष्ट्र ने यह जानकारी देते हुए बताया कि सदस्य हर पांच साल में यह चर्चा करने के लिए बैठक करते हैं कि यह कैसे काम कर रही है। इस बैठक में दुनिया के भीतर परमाणु अप्रसार को लेकर चल रही गतिविधियों की समीक्षा की जाती है। यह बैठक न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में 27 अप्रैल से 22 मई के बीच होनी थी। संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने कहा कि परिस्थितियां ठीक होने पर जल्द से जल्द यह बैठक होगी लेकिन अप्रैल 2021 से पहले तो नहीं होगी। यानी यह अहम बैठक करीब एक साल तक के लिए टाल दी गई है।

क्या है परमाणु अप्रसार संधि?

  • परमाणु अप्रसार संधि का मुख्य उद्देश्य परमाणु हथियारों और परमाणु तकनीकों के प्रसार को रोकना, परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग में सहयोग को बढ़ावा देने और परमाणु निरस्त्रीकरण के लक्ष्य को हासिल करना था. वर्ष 1970 में लागू हुई इस संधि पर अब तक 191 सदस्य देश मुहर लगा चुके हैं जिनमें पांच परमाणु हथियार संपन्न देश भी शामिल हैं. वर्ष 1995 में इस संधि की मियाद को अनिश्चितकालीन अवधि के लिए बढ़ा दिया गया था

पृष्ठभूमि

  • संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता ने कहा है कि विश्व भर में उसके स्टाफ के 86 सदस्य कोरोना वायरस से संक्रमित हैं। प्रवक्ता के मुताबिक, यूरोप में सर्वाधिक सदस्य कोरोना संक्रमण की चपेट में आए हैं। दुजारिक ने कहा कि अफ्रीका, एशिया, पश्चिम एशिया और अमेरिका में भी यूएन के कर्मचारी इस वायरस की चपेट में आए हैं। उन्होंने बताया कि संक्रमण रोकने के लिए यूएन के अधिकतर कर्मचारी घर से काम कर रहे हैं।

:: भारतीय अर्थव्यवस्था ::

मुक्त व्यापार के भागीदार देशों से भारत के माल को बिना उत्पत्ति प्रमाणपत्र के प्रवेश देने का आग्रह

  • सरकार ने मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) कर रखे देशों को कुछ समय के लिये उत्पत्ति प्रमाणपत्र के बिना भी भारत से पहुंचने वाले व्यापारिक माल को प्रदेश की छूट देने देने का आग्रह किया है। इसका कारण घरेलू प्राधिकरण फिलहाल कोरोना वायरस महामारी को फैलने से रोकने के लिये ‘लॉकडाउन’ की वजह से दस्तावेज जारी नहीं कर रहे हैं।

क्या होता है उत्पत्ति प्रमाणपत्र?

  • निर्यातक को आयातक देश के उस बंदरगाह पर मूल प्रमाणपत्र सौंपना होता है जहां माल पहुंचता है। मुक्त व्यापार समझौते के तहत शुल्क छूट का दावा करने के लिये दस्तावेज जरूरी है। प्रमाणपत्र यह साबित करने के लिये अनिवार्य है कि माल कहां से आया है। यह किसी तीसरे देश से सस्ते आयात की डंपिंग तथा खराब गुणवत्ता के सामान को रोकने में भी मददगार है।
  • भारत ने दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के संगठन (आसियान), सिंगापुर, दक्षिण कोरिया, जापान, श्रीलंका, थाईलैंड और मलेशिया समेत अन्य देशों के साथ व्यापार समझौता कर रखा है।

पृष्ठभूमि

  • देश में ‘लॉकडाउन’ के कारण संबंधित प्राधिकरण एफटीए, व्यापक आर्थिक सहयोग समझौता, व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौता तथा तरजीही व्यापार समझौते के तहत उत्पत्ति प्रमाणपत्र जारी नहीं कर पा रहे। इस परिस्थिति में संबंधित एजेंसियां कार्यालय खुलने पर पूर्व की तारीख से प्रमाणपत्र जारी करेंगी। ऐेसे में तबतक के लिये भारत के साथ व्यापार समझौता कर रहे देश के सीमा शुल्क प्राधिकरण और अन्य उचित प्राधिकरण पात्र आयात की तरजीही आधार पर अनुमति दे सकते हैं। यह मंजूरी बाद में उत्पत्ति प्रमाणपत्र पेश करने पर निर्भर होगी।
  • संबंधित देशों की सरकारों के आग्रह पर भारत भी इसी प्रकार अपने तरजीही व्यापार समझौता आयात का सम्मान कर सकता है। इन व्यापार समझौतों के तहत भागीदार देश आपासी व्यापार वाले ज्यादातर वस्तुओं पर आयात शुल्क या तो बहुत कम कर देते हैं या फिर उसे समाप्त कर देते हैं।

सनफार्मा का हलोल संयंत्र ओएआई श्रेणी में

  • प्रमुख औषधि कंपनी सन फार्मास्युटिकल्स इंडस्ट्रीज लिमिटेड (सन फार्मा) ने कहा कि अमेरिकी औषधि नियामक यूएसएफडीए ने गुजरात के उसके हालोल संयंत्र को दिसंबर 2019 के निरीक्षण के बाद ऑफिसियल ऐक्शन इंडिकेटेड (ओएआई) की श्रेणी में रखा है।
  • हालाँकि कंपनी अमेरिकी बाजार के लिए मौजूदा दवाओं का निर्माण और वितरण करना जारी रखेगी। इसलिए इससे कंपनी के मौजूदा कारोबार पर किसी तरह के विपरीत प्रभाव नहीं पड़ेगा।'

क्या है ऑफिसियल ऐक्शन इंडिकेटेड (ओएआई)?

  • ओएआई का मतलब यह है कि इस संयंत्र के उत्पादों के लिए लंबित मंजूरी को नियामक द्वारा रोका जा सकता है। इससे पहले दिसंबर में इस संयंत्र को यूएसएफडीए द्वारा 8 आपत्तियों के साथ फॉर्म 483 जारी किया गया था लेकिन अब इसे ओएआई श्रेणी में रख दिया गया है।
  • 'ओएआई श्रेणी में रखे जाने का मतलब यह है कि यूएसएफडीए किसी भी लंबित दवा ऐप्लिकेशन अथवा इस संयंत्र से किसी भी पूरक दवाओं के लिए मंजूरी को तब तक रोका जा सकता है जब तक बकाया आपत्तियों का निराकरण नहीं किया जाता है।

बासेल-तीन मानकों से 2022 तक छूट

  • COVID-19 वायरस की वजह से देश की अर्थव्यवस्था जिस तरह से ठप हुई है, उससे बैंकों का कामकाज काफी प्रभावित हो रहा है। आने वाले दिनों में बैंकिंग व्यवस्था के लिए उत्पन्न होने वाली चुनौतियों को देखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक ने बासेल-तीन नियमों के पालन को लेकर बैंकों को कई तरह की राहत दी है।
  • बैंकों को किसी भी तरह की अस्थिरता की स्थिति में इस्तेमाल होने वाले विशेष फंड (नेट स्टेबल फंडिंग रेश्यो-एनएसएफआर) संबंधी मानकों को इस वर्ष पहली अक्टूबर से लागू करने की छूट दे दी है। अभी तक यह मानक इस वर्ष पहली अप्रैल से लागू होना था। इसी तरह से बैंकों के लिए अलग से कैपिटल कंजर्वेशन बफर (सीसीबी) संबंधी टाइमलाइन को भी इस वर्ष 31 मार्च से बढ़ाकर 30 सितंबर कर दिया गया है। इस छूट का मतलब यह हुआ कि बैंकों को अपने मौजूदा कारोबार से अतिरिक्त धन अलग कर एक विशेष कोष में फिलहाल नहीं रखना होगा।

कैपिटल कंजर्वेशन बफर (सीसीबी) क्या है?

  • सीसीबी संबंधी नियम कहता है कि नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) के अलावा बैंकों के पास 2.5 फीसद राशि अलग से संरक्षित होनी चाहिए। बैंक अपनी कुल जमा राशि का 4 फीसद अभी सीआरआर के तौर पर रखते हैं। अगर सीसीबी नियम लागू हो जाता तो उन्हें 2.5 फीसद और राशि अलग रखनी पड़ती। इसी तरह से एनएसएफआर एक ऐसा अनुपात है जिसे बैंकों को अपनी जमा-पूंजी से अलग रखनी है ताकि अगर कोई बड़ा वित्तीय संकट आए तो इसका इस्तेमाल हो सके।

2022 से लागू होंगें नए नियम

जाहिर है कि उक्त दोनो मानकों के पालन संबंधी समय के आगे बढ़ जाने से बैंकों पर दबाव कम होगा। गौरतलब है कि अंतराष्ट्रीय बासेल-3 मानक को शनिवार को ही एक और वर्ष के लिए टाल दिया गया है। अब यह जनवरी, 2023 से लागू होगा। बासेल समिति की निगरानी संस्था सेंट्रल बैंक गवर्नर्स एंड हेड्स ऑफ सुपरविजन (जीएचओएस) ने कोरोना वायरस के संकट को देखते हुए यह फैसला किया है। पहले ये नियम जनवरी, 2022 से लागू होने थे।

पृष्ठभूमि

  • दुनियाभर के बैंकों की वित्तीय स्थिति मजबूत बनाने और उन्हें तात्कालिक जोखिमों से बचाने के लिए बासेल मानकों की शुरुआत हुई थी। वर्ष 2007-08 की वैश्विक आर्थिक मंदी और बैंकों की बुरी हालत के दौरान बासेल-2 मानकों की खामियां खुलकर सामने आईं। इसे देखते हुए बासेल-3 मानक तैयार किए गए, जिसे पिछले वर्ष ही लागू हो जाना था। लेकिन इसे जनवरी, 2022 के लिए टाल दिया गया था। बासेल मानक भारत में भी वर्ष 2013 से धीरे-धीरे लागू किए जा रहे हैं।

FPI में मार्च में की रिकॉर्ड निकासी

  • कोरोना वायरस संकट के चलते दुनियाभर की अर्थव्यवस्था को मंदी की ओर जाते देख विदेशी निवेशक भारतीय पूंजी बाजारों से कन्नी काटने लगे हैं। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआइ) ने मार्च में अब तक भारतीय पूंजी बाजारों से एक लाख करोड़ रुपये से अधिक रकम की निकासी कर ली है, जो अब तक का सर्वोच्च है। इससे पहले लगातार छह महीनों तक एफपीआइ भारतीय पूंजी बाजारों में शुद्ध खरीदार बने हुए थे।
  • जानकारों का कहना है कि कोरोना वायरस के प्रकोप से बचने के लिए लोगों की आवाजाही पर प्रतिबंध् या लॉकडाउन सिर्फ भारत नहीं, बल्कि दुनियाभर में कारगर उपाय के रूप में आजमाया जा रहा है। इसने विदेशी निवेशकों को सतर्क रुख अपनाने पर मजबूर किया है।
  • डिपोजिटरी आंकड़ों के मुताबिक 2-27 मार्च की अवधि में एफपीआइ ने इक्विटी से 59,377 करोड़ रुपये और डेट सेग्मेंट से 52,811 करोड़ रुपये की राशि निकाल ली। इस दौरान कुल शुद्ध आउटफ्लो 1,12,188 करोड़ रुपये रहा।
  • नेशनल सिक्युरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड ने जब से एफपीआइ आउटफ्लो आंकड़े मुहैया कराने शुरू किए हैं, तब से किसी एक महीने में एफपीआइ द्वारा यह रिकॉर्ड निकासी है।

विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI)

  • जब विदेशी निवेशक शेयर बाजार में सूचीबद्ध भारतीय कंपनी के शेयर खरीदकर 10 प्रतिशत से कम हिस्सेदारी खरीदता है, तो उसे एफपीआइ कहते हैं। यह निवेश शेयरों और बांड के रूप में होता है। एफपीआई में कारोबारी इकाई पर नियंत्रण नहीं करता है जिसमें निवेश किया जाता है। चूंकि प्रतिभूतियों को आसानी से कारोबार किया जाता है इसलिए एफपीआई की तरलता उन्हें खरीद-बिक्री में ज्यादा आसान बनाती है।

क्रूड ऑयल की घटी मांग

  • कुछ महीने पहले इंटरनेशनल एनर्जी फोरम ने वर्ष 2020 के बाद दुनिया में क्रूड खपत का अनुमान जारी करते हुए कहा था कि वर्ष 2040 तक इसकी मांग बढ़ती रहेगी। लेकिन कोरोना वायरस ने अभी जिस तरह से दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं का चक्का जाम किया है उससे पेट्रोलियम उत्पादों की खपत में भारी कमी होती दिख रही है। पेट्रोलियम उत्पादों के तीन सबसे बड़े उपभोक्ता देश अमेरिका, चीन व भारत में से भारत में पूरी तरह से लॉकडाउन है। अमेरिका के आधे से ज्यादा उद्योग व ट्रांसपोर्ट बंद हैं जबकि चीन के भी कई प्रांतों में स्थिति अभी सामान्य नहीं हुई है। यही वजह है कि पिछले पांच हफ्तों में क्रूड की कीमत 65 डॉलर से घटकर 26 डॉलर प्रति बैरल आ जाने के बावजूद इसके खरीददार नहीं मिल रहे।

भारत में स्थिति

  • भारत में पेट्रोल व डीजल की खपत में 50 फीसद से ज्यादा की कमी आ चुकी है। देश की अधिकांश रिफाइनरियों के क्रूड भंडार पूरी तरह से भरे हुए हैं। जबकि मांग नहीं होने की वजह से देश की अधिकांश रिफाइनरियों में या तो उत्पादन बंद कर दिया गया है या फिर वे अपनी क्षमता का बहुत ही कम उत्पादन कर रही हैं। देश की सबसे बड़ी रिफाइनरी कंपनी इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक पिछले बुधवार तक कंपनी ने उत्पादन में 30 फीसद कटौती कर दी थी।
  • पेट्रोल, डीजल, बिटूमिन व अन्य औद्योगिक उत्पादों की खुदरा बिक्री तब तक 50 फीसद कम हो चुकी थी। रेलवे व एविएशन सेक्टर से आने वाली मांग भी नगण्य है। ऐसे में पहले से जो क्रूड खरीद समझौते हुए हैं वे मांग को पूरा करने के लिए काफी हैं। बहरहाल, एलपीजी की मांग बढ़ रही है और उसकी निर्बाध आपूर्ति की जा रही है।

विश्व में कच्चे तेल के शीर्ष उत्पादक

  • विश्व में कच्चे तेल के उत्पादन से संयुक्त राज्य अमेरिका शीर्ष देश है। जनवरी 2020 तक, संयुक्त राज्य अमेरिका में कच्चे तेल का उत्पादन प्रति दिन 12,970.97 हजार बैरल था। शीर्ष 5 देशों में रूसी संघ, सऊदी अरब, इराक और कनाडा भी शामिल हैं।

:: विज्ञान और प्रौद्योगिकी ::

कोरोना वायरस (कोविड-19) की वैक्सीन

  • कोरोना वायरस (कोविड-19) जिस तेजी से फैला उतनी ही तेजी से इसकी वैक्सीन और दवा बनाने पर पूरी दुनिया में काम शुरू हो गया। अमेरिका में एक कंपनी ने तो बकायदा इंसानों पर ड्रग ट्रायल शुरू कर दिया है। यह वायरस जितना जुदा है उतनी ही इसकी वैक्सीन भी अलग होगी। ह्यूमन ट्रायल शुरू हो चुके हैं लेकिन, 18 माह में पहली वैक्सीन का व्यावसायिक उत्पादन शुरू हो जाएगा। तब तक सतर्कता और स्वच्छता के जरिये ही कोरोना के खिलाफ लड़ाई लड़नी होगी।
  • दुनियाभर में 40 शोधकेंद्रों और कंपनियों की लैबों में कोरोना वायरस की वैक्सीन और संक्रमण को खत्म करने लिए दवा पर काम चल रहा है। यूरोप में तो इसके लिए नियमों में ढील देकर शोधकर्ताओं को प्राइवेट कंपनियों के साथ मिलकर शोध करने को कहा गया है। फिर भी माना जा रहा है कि पहली वैक्सीन व्यावसायिक रूप से 18 माह में उपलब्ध हो सकेगी।
  • अनोखी होगी वैक्सीन : दुनियाभर के शोधकर्ता के सामने कोरोना की सेल को तोडऩे की चुनौती है। शोधकर्ता उसका जैविक खोल तोड़ना चाहते हैं, यानी की उसके खतरनाक जैविक पदार्थ के लिए इंसान को तैयार किया जाएगा। कोरोना के स्पाइक्स एस-प्रोटीन से बने हैं, इन पर शोधकर्ताओं की विशेष नजर है, चिपकने की ताकत को वे खत्म करना चाहते हैं। कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता जोनाथन हैनी भी इसी प्रयास में लगे हुए हैं। उन्होंने अपनी प्राइवेट लैब में ताकतवर कंप्यूटरों की मदद से कोरोना के जैविक पदार्थ के कई डुप्लीकेट भी बना डाले हैं, हालांकि वह मानते हैं कि अभी चुनौती तगड़ी है।
  • अनोखा है कोरोना वायरस : कोरोना वायरस अनोखा है। इसमें सिर्फ प्रोटीन और आरएनए (राइबोन्यूक्लिक एसिड) ही है। आरएनए एक जैविक पदार्थ होता है। इसके स्पाइक इसे खास बनाते हैं, जो इसे किसी भी सतह से चिपकने में मदद करते हैं। अपने स्पाइक की वजह से ही यह सिंथेटिक चीजों पर पांच दिन तक बना रहता है।
  • चीन ने दिखाई फुर्ती : चीन पर हुबेई प्रांत की राजधानी वुहान में फैले कोरोना वायरस संक्रमण की जानकारी समय से नहीं देने का आरोप है। इजरायल व अमेरिका का आरोप है कि उसने जैविक हथियार के रूप में कोरोना को तैयार किया। चीन के वैज्ञानिकों ने तेजी से कोरोना का आरएनए कोड तोड़ दिया और पूरी दुनिया को बता भी दिया, ताकि शोध का काम तेजी से हो सके। 30 जनवरी को चीन के शोधकर्ताओं ने डब्ल्यूएचओ को बताया कि 29,903 न्यूक्लियस बेस हैं। इनके कोड चीन ने दुनियाभर में सार्वजनिक किए। इसी कारण दुनिया में हांगकांग से लेकर अमेरिका तक में 43 वैक्सीन का निर्माण लगभग अंतिम चरण में है।
  • नियमों का जाल : इंसान के शरीर में जैविक वैक्सीन डालने के लिए अभी कोई स्पष्ट नियम नहीं हैं। ऐसे में विभिन्न देशों और डब्ल्यूएचओ (विश्व स्वास्थ्य संगठन) को प्रॉटोकॉल बनाना होगा। डॉ. हैनी मानते हैं कि यह बड़ी चुनौती है। भले ही इंसानों पर ट्रायल शुरू हो गया है लेकिन, व्यवसायिक प्रोडक्शन में नियमों की अस्पष्टता और लाइसेंस की शर्तें रोड़ा अटकाएंगी। इसलिए बहुत तेजी से काम करने पर भी 18 माह का वक्त कम से कम लग जाएगा।
  • 20 साल के मुकाबले 20 माह : दुनियाभर के शोधकर्ताओं के निशाने पर खतरनाक पोलियो वैक्सीन 20वीं शताब्दी के शुरुआत में ही आ गई थी। पहली वैक्सीन 1955 में जोनास साल्क और 1960 में एल्बर्ट ब्रूस ने पोलियो की वैक्सीन विकसित कर ली। इनका बड़े स्तर पर व्यावसायिक उत्पादन नहीं हो पाता था। यह हालत 1980 तक रही। इसके बाद वैज्ञानिकों ने वैक्सीन के बड़े स्तर पर उत्पादन का तरीका खोजा। जापानी बुखार हो या टीबी, इनकी वैक्सीन के ह्यूमन ट्रायल से मास उत्पादन तक जाने में 20-20 साल से अधिक का वक्त लग जाता था। हालांकि कोरोना के खिलाफ जंग हम 18 माह में जीत लेंगे।

शरीर से गायब कोरोना वायरस का भी पता लगाएगी रैपिड किट

  • देश में कोरोना की मास टेस्टिंग पर बहस बनी हुई है। कम्युनिटी बेस्ड जांच पर आइसीएमआर इनकार कर रहा है। वहीं, एनआइवी पुणे ने पहली रैपिड किट को वैध कर दिया है। यह किट वर्तमान संक्रमण के साथ-साथ भविष्य में भी काम आएगी। इसमें कोविड-19 से मुक्ति के बाद भी बीमारी की पहचान की जा सकेगी। सार्स-कोव-टू वायरस की जांच के लिए 27 मार्च को गाइड लाइन जारी कर दी गई है।
  • इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आइसीएमआर) देश में अभी कोरोना वायरस का थर्ड फेज नहीं मान रहा है। ऐसे में कम्युनिटी बेस्ड टेस्टिंग भी नहीं की जा रही है। वहीं एनआइवी पुणे के साथ करीब 11 रैपिड टेस्टिंग किट की वैधता को परखने पर काम चल रहा है। यह किट विभिन्न देशों की कंपनियों ने बनाई है। 27 मार्च को एनआइवी पुणे ने एंटीबॉडी बेस्ड रैपिड टेस्ट को वैध किया। यह किट व्यक्ति के शरीर में मौजूद संक्रमण का पता लगाने में सक्षम है। इसके लिए एंटीबॉडी ‘आइजीएम’ पॉजिटिव आएगा। वहीं कोरोना से मुक्त हो चुके मरीज में वषों बाद भी पता चल सकेगा कि वह पहले इससे संक्रमित रह चुका है। इसके लिए उसके शरीर में बन चुकी एंटीबॉडी ‘आइजीजी’ पकड़ने में भी यह किट सक्षम होगी।

कैसे होगी पहचान?

दरअसल, व्यक्ति में पांच प्रकार की एंटीबॉडी- जी, ए, एम, डी, ई होती हैं। इसमें संक्रमण की शुरुआत में आइजीएम बनती है, बाद में आइजीजी का निर्माण होता है। ऐसे में कोरोना से मुक्ति पा चुका व्यक्ति कभी अन्य बीमारी की गिरफ्त में आया तो उसके जोखिम की स्थिति व इलाज की दिशा तय करने में आसानी होगी।

30 मिनट में होगा टेस्ट

  • बीएसएल थ्री लैब में कोरोना की रिपोर्ट आठ से 12 घंटे में मिल रही है। विशेषज्ञ के मुताबिक एंडीबॉडी बेस्ड किट से 30 मिनट में जांच मुमकिन होगी। कंफर्मेशन के लिए बेवजह पॉलीमरेज चेन रिएक्शन (पीसीआर) जांच की भी आवश्यकता नहीं पड़ेगी। विशेषज्ञ किसी केस में शंका होने पर भले ही लैब से जांच रिपीट कराएं। गाइड लाइन के अनुसार, किट से जांच ब्लड, सीरम व प्लाच्मा से किया जाएगा। वहीं इसमें संक्रमण के सात से 10 दिन में टेस्ट पॉजिटिव आएगा।

देश में सबसे कम जांच

  • देश में कोरोना टेस्टिंग कम हो रही है। अनुमान है कि यहां प्रति 10 लाख व्यक्तियों पर 6.8 लोगों का टेस्ट हुआ। चिकित्सा विज्ञानियों के मुताबिक जांच का दायरा बढ़ाया जाए तो मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी हो सकती है। इसके लिए सिंगापुर व दक्षिण कोरिया जैसे देशों का हवाला दिया जा रहा है।

:: विविध ::

जर्मनी में हेसे राज्य के वित्त मंत्री थॉमस शाफर

  • कोरोना वायरस दुनिया भर में केवल लोगों की जान ही नहीं ले रहा है... यह अर्थव्‍यवस्‍था को भी बड़ा नुकसान पहुंचा रहा है। जर्मनी में हेसे राज्य के वित्त मंत्री थॉमस शाफर ने कोरोना के चलते देश की अर्थव्यवस्था को हुए भारी नुकसान से चिंतित होकर खुदकुशी कर ली है। वह व्‍यथित थे कि कोरोना ने अर्थव्यवस्था को जिस तरह से भारी नुकसान पहुंचाया है उससे निपटा कैसे जाए।

पृष्ठभूमि

  • कोरोना के चलते दुनिया की तकरीबन एक तिहाई आबादी लॉकडाउन का सामना कर रही है। दुनियाभर में लाखों नौकरियां खतरे में हैं। यही नहीं दुनिया के बड़े बड़े देशों की अर्थव्यवस्था हिल गई है।
  • जर्मनी की आर्थिक राजधानी माना जाने वाला फ्रैंकफर्ट शहर भी हेसे राज्‍य में ही स्थित है। यहां बड़े वित्तीय बैंक जैसे ड्यूस और कॉमर्ज बैंक के हेडक्वॉर्टर्स मौजूद हैं। यही नहीं यूरोपीय सेंट्रल बैंक भी फ्रैंकफर्ट में ही मौजूद है।

राजकुमारी मारिया टेरेसा

  • स्पेन में कोरोना वायरस से मची तबाही के बीच एक और बड़ी खबर सामने आई है। स्‍पेन की राजकुमारी मारिया टेरेसा का कोरोना वायरस से निधन हो गया है। इस तरह से मारिया टेरेसा दुनिया में शाही परिवार की पहली सदस्‍य बन गई हैं, जिनकी कोरोना वायरस से उपजे कोविड-19 महामारी से मौत हो गई है। इससे पहले ब्रिटेन के प्रिंस चार्ल्स ब्रिटेन के शाही परिवार से कोरोना से संक्रमित होने वाले पहले शख्स बने थे।

देश की पहली ट्रांसजेंडर फुटबॉल टीम

भारतीय फुटबॉल टीम भले ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अच्छा प्रदर्शन नहीं कर सकी, लेकिन इस खेल में देश को अब एक नई उपलब्धि मिली है। दरअसल, मणिपुर की राजधानी इंफाल में देश की पहली ट्रांसजेंडर फुटबॉल टीम बनी है। इस टीम में 14 खिलाड़ी हैं, जिन्होंने आपस में दो टीम बांटकर एक मैच भी खेला। यह टीम एक एनजीओ ने बनाई, जिसका नाम ‘या ऑल’ रखा है।

‘या ऑल’ एनजीओ

  • इस एनजीओ को एलजीबीटीक्यू समुदाय के लोग चलाते हैं। उन्होंने इस संगठन को 2017 में बनाया था। इस टीम को 5 दिवसीय योशांग फेस्टिवल के दौरान 8 मार्च को बनाया गया था। लेकिन इस पहले मैच के साथ ही इसे आधिकारिक तौर पर लॉन्च कर दिया गया है। योशांग मणिपुर में होली पर मनाया जाने वाले एक तरह का त्योहार है।

2020 क्रिटिक्स चॉइस फिल्म अवॉर्ड्स

  • फिल्मकार जोया अख्तर की फिल्म 'गली ब्वॉय' का इस साल के क्रिटिक्स चॉइस फिल्म अवॉर्ड्स में दबदबा बना रहा। अभिनेता रणवीर सिंह को फिल्म में निभाए उनके किरदार के लिए हिंदी श्रेणी में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार मिला। जोया अख्तर इसी फिल्म के लिए सर्वश्रेष्ठ निर्देशक चुनी गईं और इसे सर्वश्रेष्ठ फिल्म का भी सम्मान मिला।
  • सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के खिताब से गीतिका विद्या ओहल्यान को नवाजा गया। उन्हें यह पुरस्कार फिल्म 'सोनी' के लिए मिला। 'आर्टिकल 15' के लिए अनुभव सिन्हा और गौरव सोलंकी को सर्वश्रेष्ठ लेखन का पुरस्कार मिला।

:: प्रिलिम्स बूस्टर ::

  • हाल ही में चर्चित रहे अंडमान निकोबार में आदिवासियों के कौन-कौन से समूह का वास है? (अंडमानी, जारवा, ओंग,  शैम्पेन और सेंटलीज)

  • बैंकों के लिए बासेल-3 नियम कब से लागू होंगे एवं  बैंकों को कैपिटल कंजर्वेशन बफर (सीसीबी) के तहत कितनी प्रतिशत राशि संरक्षित रखनी होगी? (2023 से, 2.5%)

  • किसी कंपनी में किस सीमा तक के निवेश को विदेशी पोर्टफोलियो निवेश कहते हैं एवं इस सीमा को किस समिति के द्वारा सिफारिश की गई थी? (10% से कम, अरविंद मायाराम समिति)

  • हाल ही में चर्चा में रहे कोरोना वायरस की संभावित ‘पेशेंट जीरो’ कौन है एवं ‘पेशेंट जीरो’ क्या होता है? (वेई गुझियान, वायरस या बैक्टीरिया से  बीमार/ संक्रमित प्रथम मरीज)

  • हाल ही में ड्रेस कोड के विरोध में चर्चा में रहे ‘हैशटैग कुटू’ किस देश से संबंधित है? (जापान)

  • हाल ही चर्चा में रहे यूरोपीय संघ में वर्तमान में कितने देश हैं एवं इसके निर्माण में किस संधि की महत्वपूर्ण भूमिका रही? (27 देश, मैस्ट्रिच संधि-1991)

  • किस संस्था के द्वारा कोरोनावायरस के मनोवैज्ञानिक, सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक प्रभाव पर “कोरोना अध्ययन श्रृंखला” प्रकाशित की जाएगी? (नेशनल बुक ट्रस्ट)

  • आगामी कॉमनवेल्थ गेम्स 2022  का आयोजन कहाँ किया जाएगा? (बर्मिंघम-इंग्लैंड)

  • हाल ही में चर्चा में रहे ‘परमाणु अप्रसार संधि’ कब लागू हुई थी एवं कौन सी संस्था इसका कार्यान्वयन करती है? (1970, संयुक्त राष्ट्र)

  • किन मूलभूत तत्वों से कोरोनावायरस निर्मित है एवं कौन सी अनूठी संरचना इसे अन्य वायरसों से अलग करती है? (प्रोटीन और आरएनए, स्पाइक)

  • हाल ही में अपने निधन से चर्चा में रहे थॉमस शाफ और मारिया टेरेसा कौन थे एवं यह किस देश से संबंधित है? (क्रमशः जर्मनी में हेसे राज्य के वित्त मंत्री और स्पेन की राजकुमारी)

  • देश के पहले ट्रांसजेंडर फुटबॉल टीम की स्थापना किस संस्था के द्वारा एवं कहाँ की गई है? (‘या ऑल’,  इंफाल-मणिपुर)

  • हाल ही में किस अभिनेता और अभिनेत्री को क्रिटिक्स चॉइस फिल्म अवॉर्ड्स मिला? (रणवीर सिंह, गीतिका विद्या ओहल्यान) 

  • हाल ही में भारत सरकार के द्वारा स्वास्थ्य सेवा कर्मियों को 90 दिनों के लिए कितने धनराशि का बीमा कवर प्रदान करने की घोषणा की गई? (50 लाख रुपए)

 

 

स्रोत साभार: Dainik Jagran (Rashtriya Sanskaran), Dainik Bhaskar (Rashtriya Sanskaran), Rashtriya Sahara (Rashtriya Sanskaran) Hindustan Dainik (Delhi), Nai Duniya, Hindustan Times, The Hindu, BBC Portal, The Economic Times (Hindi & English), PTI, PIB

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