(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (30 जुलाई 2020)

दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर

:: राष्ट्रीय समाचार ::

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020

चर्चा में क्यों?

  • प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आज राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को मंजूरी दे दी है जिससे स्कूली और उच्च शिक्षा दोनों क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर रूपांतरकारी सुधार के रास्ते खुल गए हैं।

पृष्ठभूमि

  • देश में नई शिक्षा की आवश्यकता काफी समय से महसूस की जा रही थी। वर्ष 2016 में टीएसआर सुब्रमण्यम ने नई शिक्षा नीति पर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की थी। इसके बाद सरकार के द्वारा गठित कस्तूरीरंगन समिति में नई शिक्षा नीति की रिपोर्ट सरकार को वर्ष 2018 में प्रस्तुत की थी। पुनः वर्ष 2019 में कस्तूरीरंगन की अध्यक्षता वाली समिति ने नई शिक्षा नीति 2019 का ड्राफ्ट प्रस्तुत किया गया।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के बारे में

  • यह 21वीं सदी की पहली शिक्षा नीति है और यह 34 साल पुरानी राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनपीई), 1986 की जगह लेगी।
  • सबके लिए आसान पहुंच, इक्विटी, गुणवत्ता, वहनीयता और जवाबदेही के आधारभूत स्तंभों पर निर्मित यह नई शिक्षा नीति सतत विकास के लिए एजेंडा 2030 के अनुकूल है।
  • इसका उद्देश्य 21वीं सदी की जरूरतों के अनुकूल स्कूल और कॉलेज की शिक्षा को अधिक समग्र, लचीला बनाते हुए भारत को एक ज्ञान आधारित जीवंत समाज और ज्ञान की वैश्विक महाशक्ति में बदलना और प्रत्येक छात्र में निहित अद्वितीय क्षमताओं को सामने लाना है।
  • नयी शिक्षा नीति के तहत मानव संसाधन विकास मंत्रालय का पुन: नामकरण शिक्षा मंत्रालय किया गया है।

नई शिक्षा नीति की महत्वपूर्ण बातें

स्कूली शिक्षा

  • नई नीति के तहत 2030 तक स्कूली शिक्षा में 100% सकल नामांकन अनुपात के साथ पूर्व-विद्यालय से माध्यमिक स्तर तक की शिक्षा के सार्वभौमिकरण का लक्ष्य गया है।
  • एनईपी 2020 में स्कूल से दूर रह रहे 2 करोड़ बच्चों को फिर से मुख्य धारा में लाने के लिए प्रबद्धता व्यक्त की गयी है।
  • 12 साल की स्कूली शिक्षा और 3 साल की आंगनवाड़ी / प्री-स्कूलिंग के लिए एक नई 5 + 3 + 3 + 4 स्कूली पाठ्यक्रम व्यवस्था लागू की जाएगी।
  • इसमें पढ़ने-लिखने और गणना करने की बुनियादी योग्यता पर ज़ोर देने; स्कूलों में शैक्षणिक धाराओं, पाठ्येतर गतिविधियों और व्यावसायिक शिक्षा के बीच समानता लाने; इंटर्नशिप के साथ कक्षा 6 से व्यावसायिक शिक्षा शुरू करने के प्रावधान किए गए है।
  • एनईपी 2020 में बुनियादी साक्षारता और संख्यात्मक ज्ञान की प्राप्ति को सही ढंग से सीखने के लिए मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा “बुनियादी साक्षारता और संख्यात्मक ज्ञान पर एक राष्ट्रीय मिशन” की स्थापना किए जाने पर विशेष ज़ोर दिया गया है।
  • एक नई और व्यापक स्कूली शिक्षा के लिए राष्ट्रीय पाठ्यक्रम रूपरेखा ‘एनसीएफ़एसई 2020-21’ एनसीईआरटी द्वारा विकसित की जाएगी। इसके अलावा 2030 तक, शिक्षण कार्य करने के लिए कम से कम योग्यता 4 वर्षीय इंटीग्रेटेड बीएड डिग्री हो जाएगी। गुणवत्ताविहीन स्वचालित अध्यापक शिक्षा संस्थानों के खिलाफ सख्त कार्यवाही की जाएगी।
  • नई शिक्षा नीति कम से कम 5 वीं कक्षा तक मातृभाषा / क्षेत्रीय भाषा में पढ़ाई पर ज़ोर देती है। समग्र विकास कार्ड के साथ मूल्यांकन प्रक्रिया में पूरी तरह सुधार किया गया है, साथ ही सीखने की प्रक्रिया में छात्रों की प्रगति पर पूरी नज़र रखने के प्रावधान हैं।

समान और समावेशी शिक्षा

  • एनईपी 2020 में जेंडर इंक्लूजन फंड और वंचित इलाकों तथा समूहों के लिए विशेष शिक्षा क्षेत्र की स्थापना पर ज़ोर दिया गया है।
  • इसमें बुनियादी सुविधाओं से वंचित क्षेत्रों एवं समूहों के लिए “बालक-बालिका समावेशी कोष” और “विशेष शिक्षा जोन” की स्थापना करना भी शामिल है।

उच्चतर शिक्षा

  • उच्च शिक्षा में सकल नामांकन अनुपात को 2035 तक 50% तक बढ़ाये जाने और उच्च शिक्षा में 3.5 करोड़ नई सीटें जोड़ने की बात कही गयी है।
  • उच्च शिक्षा पाठ्यक्रम में विषयों की विविधता होगी और उपयुक्त प्रमाणीकरण के साथ पाठ्यक्रम के बीच में नामांकन / निकास की अनुमति होगी।
  • ट्रांसफर ऑफ क्रेडिट की सुविधा के लिए अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट की स्थापना की जाएगी। पूरी उच्च शिक्षा में एक मजबूत अनुसंधान संस्कृति तथा अनुसंधान क्षमता को बढ़ावा देने के लिए एक शीर्ष निकाय के रूप में राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन का सृजन किया जाएगा।
  • सभी व्यावसायिक शिक्षाओं को उच्च शिक्षा प्रणाली का अभिन्न अंग बनाया जाएगा। स्वचलित तकनीकी विश्वविद्यालयों, स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालयों, कानूनी और कृषि विश्वविद्यालयों आदि को उद्देश्य बहु-विषयक संस्थान बनना होगा।

विनियमन

  • चिकित्सा एवं कानूनी शिक्षा को छोड़कर समस्त उच्च शिक्षा के लिए एक एकल अति महत्वपूर्ण व्यापक निकाय के रूप में भारत उच्च शिक्षा आयोग (एचईसीआई) का गठन किया जाएगा।
  • एचईसीआई के चार स्वतंत्र वर्टिकल होंगे- विनियमन के लिए राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा नियामकीय परिषद (एनएचईआरसी), मानक निर्धारण के लिए सामान्य शिक्षा परिषद (जीईसी), वित पोषण के लिए उच्चतर शिक्षा अनुदान परिषद (एचईजीसी) और प्रत्यायन के लिए राष्ट्रीय प्रत्यायन परिषद (एनएसी)।

विवेकपूर्ण संथागत संरचना

  • महाविद्यालयों की संबद्धता 15 वर्षों में चरणबद्ध तरीके से समाप्त हो जाएगी तथा महाविद्यालयों को क्रमिक स्वायत्ता प्रदान करने के लिए एक राज्य वार तंत्र की स्थापना की जाएगी।
  • एनईपी 2020 में जरूरत के हिसाब से प्रौद्योगिकी के उपयोग पर ज़ोर, राष्ट्रीय शिक्षा प्रौद्योगिकी मंच की स्थापनी की जाएगी।

खुली एवं दूरस्थ शिक्षा

  • सकल नामांकन अनुपात को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए खुली और दूरस्थ शिक्षा का विस्तार किया जाएगा।
  • ऑनलाइन पाठ्यक्रमों और डिजिटल संग्रहों, अनुसंधान के लिए वित्तपोषण, बेहतर छात्र सेवाएं, एमओओसी द्वारा क्रेडिट आधारित मान्यता आदि जैसे उपायों को यह सुनिश्चित करने के लिए अपनाया जाएगा कि यह उच्चतम गुणवत्ता वाले इन-क्लास कार्यक्रमों के समतुल्य हों।

शिक्षा में प्रौद्योगिकी

  • सीखने, मूल्यांकन करने, योजना बनाने, प्रशासन को बढ़ावा देने के लिए, प्रौद्योगिकी का उपयोग करने पर विचारों का मुक्त आदान-प्रदान करने हेतु एक मंच प्रदान करने के लिए एक स्वायत्त निकाय, राष्ट्रीय शैक्षिक प्रौद्योगिकी मंच ( एनईटीएफ) का निर्माण किया जाएगा।

भारतीय भाषाओं को बढ़ावा

  • नई शिक्षा नीति स्कूली और उच्च शिक्षा दोनों में बहुभाषावाद को बढ़ावा देती है; पाली, फारसी और प्राकृत के लिए राष्ट्रीय संस्थान, भारतीय अनुवाद और व्याख्या संस्थान की स्थापना की भी सिफ़ारिश की गयी है।

प्रौढ़ शिक्षा

  • इस नीति का लक्ष्य, 2030 तक 100% युवा और प्रौढ़ साक्षरता की प्राप्ति करना है।

वित्तपोषण शिक्षा

  • शिक्षा पहले की तरह 'लाभ के लिए नहीं' व्यहार पर आधारित होगी जिसके लिए पर्याप्त रूप से धन मुहैया कराया जाएगा। शिक्षा क्षेत्र में सार्वजनिक निवेश को बढ़ावा देने के लिए, केंद्र और राज्य मिलकर काम करेंगे जिससे जीडीपी में इसका योगदान जल्द से जल्द 6% हो सके।

डिजिटल शिक्षा पर “भारत रिपोर्ट-2020”

चर्चा में क्यों?

  • केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री श्री रमेश पोखरियाल “निशंक” द्वारा डिजिटल मधायम से डिजिटल शिक्षा पर “भारत रिपोर्ट-2020” जारी की गयी।

रिपोर्ट के प्रमुख विशेषताएँ

  • यह रिपोर्ट में मानव संसाधन विकास मंत्रालय, राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों के शिक्षा विभागों द्वारा घर पर बच्चों के लिए सुलभ और समावेशी शिक्षा सुनिश्चित करने और उनके सीखने के क्रम में आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए अपनाए गए अभिनव तरीकों की विस्तृत व्याख्या की गयी।
  • रिपोर्ट को राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों के शिक्षा विभागों के परामर्श से मानव संसाधन विकास मंत्रालय के डिजिटल शिक्षा प्रभाग द्वारा तैयार किया गया है।
  • रिपोर्ट के अनुसार सरकार ने शिक्षा को एक व्यापक कार्यक्रम के रूप में परिकल्पित किया गया है जिसका लक्ष्य प्री-नर्सरी से लेकर उच्चतर माध्यमिक कक्षाओं तक स्कूलों के व्यापक स्पेक्ट्रम में डिजिटल शिक्षा को सार्वभौमिक बनाना है।

प्रमुख डिजिटल पहलें

  • मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने शिक्षकों, विद्वानों और छात्रों को सीखने की उनकी ललक में मदद करने के लिए कई परियोजनाएं शुरू की हैं, जैसे कि “दीक्षा मंच”, “स्वयं प्रभा टीवी चैनल”, ऑनलाइन एमओओसी पाठ्यक्रम, ऑन एयर– “शिक्षा वाणी”, दिव्यांगों के लिए एनआईओएस द्वारा विकसित “डेजी, ई-पाठशाला”, “ओपन एजुकेशनल रिसोर्सेज (एनआरओईआर) की राष्ट्रीय रिपोजिटरी”, टीवी चैनल, ई-लर्निंग पोर्टल, वेबिनार, चैट समूह और पुस्तकों के वितरण सहित राज्य/केन्द्र शासित सरकारों के साथ अन्य डिजिटल पहल।

राज्यों की प्रमुख डिजिटल पहलें

  • राज्य सरकारों द्वारा की गई कुछ प्रमुख डिजिटल पहलों में राजस्थान में “स्माइल” (सोशल मीडिया इंटरफेस फॉर लर्निंग एंगेजमेंट), जम्मू में “प्रोजेक्ट होम क्लासेस”, छत्तीसगढ़ में “पढ़ाई तुहार दुवार” (आपके द्वार पर शिक्षा), दिल्ली में एनसीटी का अभियान “बुनियाद”, केरल का अपना शैक्षिक टीवी चैनल (हाई-टेक स्कूल प्रोग्राम), “ई-विद्वान पोर्टल” और साथ ही मेघालय में शिक्षकों के लिए मुफ्त ऑनलाइन पाठ्यक्रम शामिल हैं।
  • “उन्नयन बिहार पहल” के तहत बिहार सरकार ने छात्रों के लिए “मेरा मोबाइल मेरा विद्यालय” शुरू किया है।
  • असम ने कक्षा 6 से 10 के लिए “बिस्वा विद्या असम मोबाइल एप्लिकेशन” लॉन्च किया है।
  • उत्तराखंड “संपर्क बैंक ऐप” का उपयोग कर रहा है, जिसके माध्यम से प्राथमिक स्कूल के छात्र एनिमेटेड वीडियो, ऑडिओ, वर्कशीट, पहेलियों आदि का उपयोग कर सकते हैं।
  • मध्य प्रदेश ने टॉप पैरेंट ऐप लॉन्च किया है, जो एक नि:शुल्क मोबाइल ऐप है जो छोटे बच्चों के माता-पिता (3-8 साल) को बाल विकास के ज्ञान और व्यवहारों की सीख देता है। तेलंगाना में कोविड संकट के दौरान शिक्षकों के लिए मानसिक स्वास्थ्य पर ऑनलाइन सर्टिफिकेट प्रोग्राम भी चलाया जा रहा है।

दूरस्थ शिक्षा की सुविधा के लिए नवीन मोबाइल ऐप और पोर्टल

कुछ राज्यों ने दूरस्थ शिक्षा की सुविधा के लिए नवीन मोबाइल ऐप और पोर्टल लॉन्च किए हैं। जोकि निम्न है-

  • मध्य प्रदेश-टॉप पैरेंट ऐप
  • उत्तराखंड “संपर्क बैंक ऐप”
  • बिस्वा विद्या असम मोबाइल एप्लिकेशन”
  • बिहार-“विद्यावाहिनी ऐप” और “मेरा मोबाइल मेरा विद्यालय”
  • चंडीगढ़-“फीनिक्स मोबाइल एप्लिकेशन”
  • महाराष्ट्र-“लर्निंग आउटकम स्मार्ट क्यू मोबाइल ऐप”
  • पंजाब-आई स्कूएला लर्न मोबाइल एप्लिकेशन
  • “सिक्किम एडुटेक ऐप”
  • त्रिपुरा-‘एम्पॉवर यू शिक्षा दर्पण’
  • उत्तर प्रदेश-“टॉप पैरेंट ऐप” लॉन्च किया है।
  • वर्तमान में बच्चों के लिए “चिंपल”, “मैथ्स मस्ती” और “गूगल बोलो” जैसे तीन बेहतरीन एडुटेक ऐप हैं।

शिक्षा के एक माध्यम के रूप में व्हाट्सएप का इस्तेमाल

राज्य भी शिक्षा के एक माध्यम के रूप में व्हाट्सएप का इस्तेमाल कर रहे हैं और शिक्षकों, अभिभावकों और छात्रों को जुड़े रहने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं।जोकि निम्न है-

  • “ओडिशा शिक्षा संजोग”-
  • राजस्थान-“हवामहल- खुशनुमा शनिवार”
  • मिशन प्रेरणा ई-पाठशाला- उत्तर प्रदेश
  • हिमाचल-“करोना”, “थोड़ी मस्ती, थोड़ी पढ़ाई”

बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाने में राज्‍यों का प्रदर्शन

  • बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाने को लेकर राज्यों का यह रुझान मानव संसाधन विकास मंत्रालय की ओर से डिजिटल एजुकेशन को लेकर जारी रिपोर्ट से सामने आया है। इसमें 16 अलग- अलग मापदंडों पर राज्यों की ओर से उठाए गए कदमों को परखा गया है।
  • रिपोर्ट के मुताबिक, गुजरात और छत्तीसगढ़ राज्य ने इस दिशा में सबसे बेहतर काम किया है, जिन्होंने 16 मापदंडों में से 15 पर काम किया है, जबकि यूपी, झारंखड़ जैसे राज्यों ने इसे लेकर 14 गतिविधियां पर काम किया। उत्तराखंड ने 12 व पंजाब, दिल्ली और बिहार में ऑनलाइन पढ़ाने के 11-11 तरीकों को अपनाया। वहीं, बंगाल ने नौ और मध्य प्रदेश ने सिर्फ सात उपायों पर काम किया है। इस मुहिम में मध्यप्रदेश और बंगाल जैसे राज्य पिछड़े रहे हैं, जिनकी ओर से इस दिशा में सबसे कम प्रयास किए गए हैं।

:: अंतर्राष्ट्रीय समाचार ::

एशियाई विकास बैंक (एडीबी)

  • बहुपक्षीय वित्तपोषण एजेंसी एशियाई विकास बैंक (एडीबी) ने कहा कि उसने भारत को कोविड- 19 महामारी का मुकाबला करने के लिए सरकार की आपात पहल का समर्थन करने के तहत 30 लाख डॉलर (करीब 22 करोड़ रुपये) का अनुदान देने को मंजूरी दी है। यह अनुदान एडीबी अपने एशिया प्रशांत आपदा प्रतिक्रिया कोष से उपलब्ध कराएगा। इस अनुदान राशि का इस्तेमाल कोविड- 19 के खिलाफ भारत की लड़ाई को और मजबूती देने के लिए थर्मल स्केनर और अन्य आवश्यक उपभोक्ता वस्तुओं की खरीद में किया जायेगा। यह अनुदान जापान सरकार द्वारा वित्तपोषित है।

एशियाई विकास बैंक के बारे में

  • एशियाई विकास बैंक एक बहुपक्षीय वित्तीय संस्था है। इस बैंक की स्थापना एशिया और प्रशान्त क्षेत्रों में आर्थिक विकास को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से वर्ष 1966 में की गई थी, जिसका मुख्यालय फिलिपींस के मनीला में है।

अंतरराष्ट्रीय थर्मोन्यूक्लियर प्रायोगिक रियेक्टर (ITER)

चर्चा में क्यों?

  • आईटीईआर ऑर्गनाइजेशन को फ्रांस के सैंट-पॉल-लेज-ड्यूरैंस में एक समारोह के साथ आईटीईआर टोकोमक की स्टार्ट ऑफ असेंबली मना रहा है। इसमें आईटीईआर के सभी सदस्य देशों के प्रमुख व्यक्तिगत रूप से, या इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से भाग ले रहे हैं, या अपना संदेश दे रहे हैं। राष्ट्रपति मैक्रों वर्चुअल माध्यम से इस समारोह की मेजबानी कर रहे हैं।
  • अपने संदेश में माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कड़ी मेहनत और अभी तक हासिल की गई सफलता के लिए आईटीईआर ऑर्गनाइजेशन को बधाई दी।

पृष्ठभूमि

  • भारत औपचारिक रूप से इस परियोजना में 2005 में शामिल हुआ था। भारत को इस परियोजना में क्रायोस्टेट, इन-वॉल शील्डिंग, कूलिंग वाटर सिस्टम, क्रायोजेनिक सिस्टम, हीटिंग सिस्टम, डायग्नोस्टिक न्यूट्रल बीम सिस्टम, बिजली की आपूर्ति के साथ कुछ डायग्नोस्टिक्स सिस्टम का निर्माण करना था।
  • पिछले महीने भारत के लार्सन एंड टूब्रो द्वारा निर्मित क्रायोस्टैट को सफलतापूर्वक रियेक्टर भवन में स्थापित कर दिया गया है। निम्नतापस्थापी या क्रायोस्टैट एक ऐसी युक्ति है जो अपने अन्दर रखी वस्तुओं का तापमान अत्यन्त कम बनाये रखने के लिये प्रयुक्त होती है। एलएंडटी द्वारा निर्मित क्रायोस्टैट रियेक्टर के वैक्यूम वेसल के चारो ओर अभेद कंटेनर बनाकर एक बहुत बड़े रेफ्रिजरेटर की तरह काम करता है।

क्या है आईटीईआर प्रोजेक्ट?

  • यह दुनिया की सबसे बड़ी शोध परियोजनाओं में एक है, जिसके तहत संलयन शक्ति के वैज्ञानिक और तकनीकी व्यवहार्यता पर काम किया जा रहा है। लिटिल सन के नाम से जाने वाले इस प्रोजेक्ट को इंटरनेशनल थर्मोन्यूक्लियर एक्सपेरिमेंटरल रिएक्टर यानी ITER कहा जाता है। ITER प्रोजेक्ट की शुरुआत साल 2013 में फ्रांस के कराहाश में की गई थी जिसके लिए सभी सदस्य देशों ने इसके निर्माण में वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई थी। इस परियोजना में भारत समेत सात सदस्य (अमेरिका, रूस, दक्षिण कोरिया, चीन, जापान, और यूरोपीय संघ) शामिल है।

परियोजना के लाभ

  • दरअसल परमाणु ऊर्जा दो तरह से हांसिल की जा सकती है। इनमें परमाणु के नाभिकों का विखंडन और परमाणु के नाभिकों के संलयन जैसे तरीके शामिल हैं।परमाणु नाभिकों के संलयन द्वारा प्राप्त उर्जा के जरिये उर्जा सुरक्षा के साथ पूरी दुनिया को परमाणु ऊर्जा के दुष्प्रभावों से बचाने में मददगार होगा। आज दुनिया में जितने भी परमाणु रिएक्टर मौजूद हैं इनसे कभी भी परमाणु दुर्घटना का खतरा समेत रिएक्टरों से निकलने वाला परमाणु कचरा से सैकड़ों सालों तक जहरीला विकिरण निकलता रहता है। जिसके निपटारे के लिए अभी कोई व्यवस्था नहीं है। हालाँकि अब परमाणु संलयन तकनीक के आधार पर बन रहे ये परमाणु रिएक्टर सुरक्षित होंगे और उनसे कोई ऐसा परमाणु कचरा भी नहीं निकलेगा।
  • ये प्रोजेक्ट साल 2025 से काम करना शुरू कर देगा जो प्रदूषण रहित ऊर्जा स्रोतों के विकास में मील का पत्थर साबित होगा। साथ ही इसके बाद 2040 तक एक डेमो रिएक्टर भी तैयार किया जाना प्रस्तावित है जो बिजली पैदा करने की बड़ी यूनिट होगी। भारत के लिहाज से भी काफी अहम क्योंकि भारत इस प्रोजेक्ट के जरिये 2050 तक परमाणु संलयन प्रक्रिया पर आधारित अपना रिएक्टर भी बना पाएगा।

:: अर्थव्यवस्था ::

एरोपोनिक्स तकनीक

चर्चा में क्यों

  • कांडला विशेष आर्थिक क्षेत्र (KASEZ) गुजरात में कच्छ जिले के शुष्क क्षेत्रों में किसानों के लिए एरोपोनिक्स तकनीक के व्यावसायिक अनुप्रयोग का प्रदर्शन कर रहा है।
  • इसके लिए कांडला विशेष आर्थिक क्षेत्र एक ऊर्ध्वाधर खेत का निर्माण कर रहा है, यह मृदा रहित ऊर्ध्वाधर खेत लगभग 20 फीट ऊंचाई पर होगा।

एरोपोनिक्स तकनीक क्या होती है?

  • एरोपोनिक्स तकनीक नियंत्रित वातावरण में की जाने वाली एक मृदा रहित कृषि तकनीकी है।
  • इसमें ऊर्ध्वाधर रूप से बहुस्तरीय खेती की जा सकती है, जिससे जमीन के एक छोटे टुकड़े की क्षमता को अधिकतम 22 गुना तक बढ़ाया जा सकता है।
  • ऊर्ध्वाधर खेती की ऊंचाई 10-20 फीट के बीच हो सकती है और इसे घर के अंदर और बाहर उगाया जा सकता है।
  • इस तकनीक में पानी और पोषक तत्वों की आवश्यकता परंपरागत खेती की तुलना में सिर्फ पांच प्रतिशत हो होती है। इसमें पोषक तत्वों को सीधे जड़ों में पहुंचाया जाता है।

विशेष आर्थिक क्षेत्र

  • विशेष आर्थिक क्षेत्र अथवा सेज़ (SEZ) उस विशेष रूप से परिभाषित भौगोलिक क्षेत्र को कहते हैं, जहां से व्यापार, आर्थिक क्रिया कलाप, उत्पादन तथा अन्य व्यावसायिक गतिविधियों को संचालित किया जाता है।
  • भारत सरकार ने विशेष आर्थिक क्षेत्रों (Special Economic Zones) की स्थापना और विकास के लिए विशेष आर्थिक क्षेत्र अधिनियम (Special Economic Zone Act), 2005 बनाया है।
  • गौरतलब है कि विशेष आर्थिक क्षेत्र की शुरूआत 1965 में गुजरात के कांडला से हुई थी। कांडला में एशिया का सबसे पहला मुक्त व्यापार क्षेत्र(Free Trade Zone) बनाया गया था।

उड़ान योजना

चर्चा में क्यों?

  • श्री हरदीप सिंह पुरी ने उड़ान-आरसीएस योजना के अंतर्गत उत्तराखंड में पवन हंस द्वारा पहली हेलीकॉप्टर सेवा का शुभारंभ किया। इस हेली सेवा की शुरुआत और इन नए रूटों के खुलने से राज्य के लोग ज्यादा नजदीक आएंगे और क्षेत्र में पर्यटन को प्रोत्साहन मिलेगा। इस सेवा से देहरादून, नई टिहरी, श्रीनगर और गोचर के बीच संपर्क सुनिश्चित होगा।

क्या है उड़ान योजना?

  • उड़ान योजना, भारत की केन्द्रीय सरकार द्वारा शुरू की गई योजना है, जिसे क्षेत्रीय हवाई सम्पर्क योजना भी कहा जाता है, स्कीम की पहल आम लोगों को हवाई जहाज यात्रा की सुविधा कम पैसे में मुहैया कराने की कोशिश में की गयी है। यह योजना नई दिल्ली में केन्द्रीय सिविल एविएशन मंत्री अशोक गजपति राजू द्वारा अक्टूबर सन 2016 को लोंच की गई। लेकिन इस योजना की शुरुआत अप्रैल 2017 से हुई है और 10 साल तक की अवधि के लिए इस योजना में ऑपरेशन होगा।
  • प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा अप्रैल, 2017 में शिमला से दिल्ली के लिए पहली उड़ान (यूडीएएन) सेवा को हरी झंडी दिखाने के बाद अभी तक 45 हवाई अड्डों और 3 हेलीपोर्ट्स को जोड़ने वाले 274 उड़ान रूट्स परिचालन में आ चुके हैं।
  • उड़ान के तीन चरण पहले ही पूरे कर लिए गए हैं और अभी तक 19 राज्यों तथा 2 संघ शासित क्षेत्रों में उड़ान सेवाओं में लगभग 50 लाख यात्री यात्रा कर चुके हैं। उड़ान के चौथे चरण पर अभी काम चल रहा है। यह योजना माननीय प्रधानमंत्री के विज़न को पूरा करने में और आदर्श वाक्य “सब उड़ें, सब जुड़ें” के उद्देश्य को पूरा करने में सक्षम है।

:: विज्ञान और प्रौद्योगिकी ::

नवजात शिशुओं में बिलीरुबिन की जांच हेतु “एजेओ–निओ” उपकरण

  • एसएन बोस नेशनल सेंटर फॉर बेसिक साइंसेज (एसएनबीएनसीबीएस), कोलकाता के वैज्ञानिकों ने नवजात शिशुओं में पीलिया के लक्षणों को लेकर बिलीरुबिन के स्तर का पता लगाने के लिए एक नई तकनीक ईजाद की है।
  • विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत स्वायत्त अनुसंधान संस्थान एसएनबीएनसीबीएस में प्रोफेसर समीर के. पाल और उनके समूह ने ‘एजेओ नियो’ नामक उपकरण में स्पेक्ट्रोमेट्री आधारित तकनीक का इस्तेमाल किया है।
  • ‘अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडीऐट्रिक्स’ (2004) के मुताबिक नवजात बच्चों में बिलीरुबिन के स्तर का पता सावधानीपूर्वक लगाना जरूरी है। बच्चे के खून में बिलीरुबिन के उच्च स्तर के कारण मस्तिष्क को नुकसान पहुंचने की आशंका रहती है।
  • एसएनबीएनसीबीएस नील रतन सरकार मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के साथ भागीदारी कर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा वित्तपोषित टेक्निकल रिसर्च सेंटर की मकजबानी कर रहा है।
  • एनआरस मेडिकल कॉलेज में एसएनबीएनसीबीएस टीम के अध्ययन के मुताबिक विकसित उपकरण ‘एजेओ नीओ’ बिलीरुबिन का स्तर पता लगाने में असरदार है। इस उपकरण के जरिए डॉक्टरों को तुरंत ही (10 सेकंड में) रिपोर्ट मिल जाती है।
  • खून से परीक्षण की पारंपरिक पद्धति की तुलना में यह आसान और सुविधाजनक भी है।

बिलीरुबिन क्या है ?

  • बिलीरुबिन हर मनुष्य के शरीर में एक पीले रंग का द्रव्य होता है, जो खून और मल में प्राकृतिक रूप से मौजूद होता है। शरीर में मौजूद रेड ब्लड सेल्स टूटने की वजह से बिलीरुबिन का निर्माण बढ़ जाता है। ऐसी स्थिति में जब लिवर बिलीरुबिन के स्तर को संतुलित नहीं बना पाता है या संतुलित करने में असफल रहता है, तो ऐसे में बिलीरुबिन का स्तर बढ़ जाता है। शरीर में बिलीरुबिन का स्तर बढ़ना जॉन्डिस की दस्तक माना जाता है। वहीं शिशु के जन्म के दौरन बिलीरुबिन ठीक तरह से विकसित नहीं होने के कारण पीलिया का खतरा बना रहता है और नवजात शिशु में पीलिया की बीमारी हो जाती है।

राफेल विमान

चर्चा का कारण

  • रूस से सुखोई विमानों की खरीद के लगभग 23 साल बाद, हाल ही में पांच सुपरसोनिक राफेल लड़ाकू विमानों का बेड़ा फ़्रांस से भारत के सामरिक रूप से महत्वपूर्ण अंबाला हवाई अड्डे पर पहुंचा है ।
  • भारतीय वायुसेना में पांच सुपरसोनिक राफेल लड़ाकू विमानों के शामिल होने के बाद अब इनकी संख्‍या छह हो गई है। उल्लेखनीय है कि फ्रांस निर्मित राफेल का पहला विमान ‘RB 001‘ भारत को पिछले वर्ष अक्‍टूबर में मिला था।

पृष्ठभूमि

  • भारत सरकार ने फ्रेंच कंपनी दसॉल्ट एविएशन को 2016 में 36 राफेल जेट का ऑर्डर दिया था।
  • पांच राफेल विमानों के आने के साथ, बाकी के बचे विमानों को कई चरणों में 2021 तक पहुंचाया जाना है।
  • राफेल विमान डील के तहत, भारतीय पायलटों को दसॉल्ट द्वारा हथियार प्रणाली और विमान पर पूरा प्रशिक्षण प्रदान किया गया है ।

राफेल विमान

  • राफेल विमान फ्राँस की दसॉल्ट एविएशन द्वारा बनाया गया दो इंजन वाला मल्टी-रोल लड़ाकू विमान है। यह 4.5 पीढ़ी का विमान है। राफेल विमान अपने साथ परमाणु हथियार समेत कई मिसाइलों को लेकर उड़ान भर सकता है।
  • राफेल विमान स्टील्थ टेक्नोलॉजी से लैस है अर्थात यह दुश्मन के राडार से बचाने में सक्षम है। इसलिए राफेल विमान को विश्व स्तर पर सबसे शक्तिशाली मुकाबला करने में सक्षम जेट माना जाता है।
  • फ्राँसीसी कंपनी दसॉल्ट एविएशन ने इन विमानों को फ्राँसीसी वायुसेना और नौसेना के लिये विकसित किये गए थे।
  • राफेल विमान 1800 किमी प्रति घंटे की गति तक पहुंचने में सक्षम है।
  • राफेल विमान घातक स्कल्प क्रूज मिसाइल और Meteor एयर-टू-एयर मिसाइल का निशाना चूकता नहीं है।
  • इन विमानों को अब हैमर मिसाइलों से भी लैस किया जाएगा। इन मिसाइलों की खासियत है कि नो स्केप जोन में अगर कोई भी लड़ाकू विमान दिखाई दिया तो ये विमान उसको भी मार गिरा सकेगा।
  • भारत ने अपनी जरूरत के हिसाब से इन विमानों में हैमर (HAMMER) मिसाइल लगवाई है। हैमर मिसाइल का इस्तेमाल मुख्य रूप से बंकर या कुछ छिपे हुए स्थानों को तबाह करना होता है।

:: पर्यावरण और पारिस्थितिकी ::

चौथे अखिल भारतीय बाघ अनुमान की विस्तृत रिपोर्ट

चर्चा का कारण?

  • हाल ही में पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री प्रकाश जावड़ेकर ने बाघों की गणना पर एक विस्तृत रिपोर्ट (चौथे अखिल भारतीय बाघ अनुमान की विस्तृत रिपोर्ट) जारी करते हुए कहा कि बाघ प्रकृति का एक असाधारण हिस्सा है और भारत में इनकी बढ़ी संख्या प्रकृति में संतुलन को दर्शाती है।

बाघों की गणना के विस्तृत रिपोर्ट से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य

  • कैमरे से दुनिया का सबसे बड़ा वन्‍य जीव सर्वेक्षण होने के कारण अखिल भारतीय बाघ अनुमान 2018 के चौथे चक्र को गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में शामिल किया गया है।
  • बाघों की गणना पर जारी इस विस्तृत रिपोर्ट में पूरे भारत में स्थानिक अध्यावास और घनत्व के संदर्भ में बाघों की स्थिति का आकलन किया गया है।
  • भारत में बाघों की स्थिति पर जारी इस विस्तृत रिपोर्ट में पिछले तीन सर्वेक्षणों (2006, 2010 और 2014) से प्राप्त जानकारी की तुलना देश में बाघों की संख्या के रुझान का अनुमान लगाने के लिए 2018-19 में किए सर्वेक्षण से मिली जानकारी से की गई है।
  • इसमें 100 किलोमीटर के दायरे में बाघ की स्थिति में बदलाव के लिए जिम्मेदार संभावित कारकों की जानकारी के साथ-साथ वास्तविक परिदृश्य, बाघों के उपनिवेश और उनके विलुप्त होने की दर के बारे में भी विशेष रूप से जानकारी दी गई है।
  • रिपोर्ट में बाघ आबादी वाले प्रमुख क्षेत्रों को जोड़ने वाले निवास स्थानों की स्थिति का मूल्यांकन किया गया है और वैसे क्षेत्रों की पहचान की गई है जिन्हें हर हाल में संरक्षण की आवश्यकता होती है।
  • रिपोर्ट में प्रमुख मांसाहारी जानवरों के बारे में जानकारी दी गई है और उनके विचरण क्षेत्र और सापेक्ष बहुतायत के बारे में बताया गया है।
  • पहली बार एलआईडीएआर (लिडार) आधारित सर्वेक्षण तकनीक का उपयोग किया गया है । लिडार लेजर प्रकाश से लक्ष्य को रोशन करके और एक सेंसर के साथ प्रतिबिंब को मापने के जरिए दूरी को मापने की एक विधि है।

चौथे अखिल भारतीय बाघ अनुमान की विस्तृत रिपोर्ट निम्नलिखित मायने में अद्वितीय है;

  1. सह-शिकारियों और अन्य प्रजातियों के जानवरों के बहुतायत सूचकांक तैयार किए गए हैं, जिन्हें अब तक सिर्फ रहने भर तक सीमित किया गया है।
  2. सभी कैमरा लगे इलाकों में बाघों का लिंगानुपात पहली बार किया गया है।
  3. बाघों की आबादी पर मानवजनित प्रभावों का विस्तृत रूप से वर्णन किया गया है।
  4. बाघ अभयारण्यों के भीतर बाघों की मौजूदगी का पहली बार प्रदर्शन किया गया है।

बाघों की संख्या से जुड़ें तथ्य

  • वर्तमान में, टाइगर रिज़र्व में बाघों की आबादी 1,923 है जोकि भारत की कुल बाघ आबादी का 65 प्रतिशत है।
  • रिपोर्ट के अनुसार, बाघों के राज्य-वार वितरण में, मध्य प्रदेश में सर्वाधिक 526 बाघ पाए गए एवं इसके बाद कर्नाटक में 524 और उत्तराखंड में 442 बाघ पाए गए थे।
  • 2018-19 के लिए टाइगर रिज़र्व में बाघों की जनसंख्या के अनुमान के अनुसार, जिम कॉर्बेट में सर्वाधिक 231 बाघ है उसके उपरान्त कर्नाटक के नागरहोल और बांदीपोर में हैं, क्रमशः 127 और 126 बाघ हैं।
  • रिपोर्ट के अनुसार असम के काजीरंगा और मध्य प्रदेश के बांधवगढ़ में 104 बाघ दर्ज किए गए हैं।
  • देश में 50 टाइगर रिज़र्व में से तीन रिज़र्व -मिजोरम का डंपा रिजर्व, पश्चिम बंगाल का बक्सा रिजर्व और झारखंड का पलामू रिजर्व – में कोई बाघ अब नहीं बचा है।

नमामि गंगे परियोजना

चर्चा का कारण

  • हाल ही में नमामि गंगे परियोजना को प्रतिष्ठित ‘लोक प्रशासन में उत्कृष्टता के लिए प्रधानमंत्री पुरस्कार - 2020’ में शामिल किया गया है।

महत्वपूर्ण तथ्य

  • गंगा नदी का न सिर्फ़ सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व है बल्कि देश की 40% आबादी गंगा नदी पर निर्भर है।
  • वर्ष 2014 में न्यूयॉर्क में मैडिसन स्क्वायर गार्डन में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था, “अगर हम गंगा को साफ करने में सक्षम हो गए तो यह देश की 40 फीसदी आबादी के लिए एक बड़ी मदद साबित होगी , अतः गंगा की सफाई एक आर्थिक एजेंडा भी है”।

नमामि गंगे परियोजना के बारे में

  • राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (National Mission for Clean Ganga) अथवा नमामि गंगे परियोजना को वर्ष 2014 में शुरू किया था।
  • भारत सरकार ने गंगा नदी के प्रदूषण को समाप्त करने और नदी को पुनर्जीवित करने के लिए नमामि गंगे परियोजना को शुरू किया गया है अर्थात इस परियोजना का उद्देश्य गंगा नदी को स्वच्छ बनाना तथा इसके संरक्षण के लिए कार्य करना है।
  • नमामि गंगे परियोजना का क्रियान्वयन केंद्रीय जल संसाधन,नदी विकास और गंगा कायाकल्प मंत्रालय द्वारा किया जा रहा है।
  • नमामि गंगे परियोजना में डिजिटल एलिवेशन मॉडल (डीईएम) तकनीक का उपयोग भी किया जा रहा है , जो सटीक डेटा संग्रह सुनिश्चित करता है ।

विश्व बाघ दिवस

  • दुनिया भर में बाघों की घटती जनसंख्या को देखते हुए इन्हें संरक्षित करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर तमाम प्रयास शुरू किये गए।
  • इसी कड़ी में, साल 2010 में सेंट पिट्सबर्ग में एक 'बाघ समिट' का आयोजन किया गया। इस समिट में 29 जुलाई की तारीख को बाघों को समर्पित करने का निर्णय लिया गया।
  • साथ ही, इस सम्मेलन में बाघ की आबादी वाले 13 देशों ने ये वादा किया कि साल 2022 तक वे बाघों की आबादी दुगुनी कर देंगे।
  • पिछले साल वैश्विक बाघ दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने दुनिया के सामने तय समय से चार साल पहले ही बाघों की संख्या दोगुना करने के भारत के संकल्प को पूरा कर लेने की घोषणा की थी।
  • केंद्रीय पर्यावरण मंत्री ने विश्व बाघ दिवस 2020 की पूर्व संध्या पर भारत के लोगों को गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड समर्पित करने का निर्णय किया। इस गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में भारत में बाघों की आबादी की निगरानी में वन्यजीवों के सर्वेक्षण के लिए दुनिया का सबसे बड़ा कैमरों का जाल बिछाने के रूप में देश के प्रयासों को मान्यता दी गई है।

:: विविध ::

पृथ्वी प्रणाली विज्ञान में उत्कृष्टता के लिए पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय राष्ट्रीय पुरस्कार

  • पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने वातावरण विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, समुद्र विज्ञान, भू विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा समुद्र प्रौद्योगिकी एवं ध्रुवीय विज्ञान के क्षेत्र में लाइफ टाइम उत्कृष्टता पुरस्कार, राष्ट्रीय, दो युवा शोधकर्ता पुरस्कारों तथा महिला वैज्ञानिकों के लिए डॉ. अन्ना मणि राष्ट्रीय पुरस्कार का गठन किया है।
  • इस वर्ष लाइफ टाइम उत्कृष्टता पुरस्कार प्रोफेसर अशोक साहनी को जियोलौजी, वर्टिब्रेट पेलियोनटोलॉजी तथा बायोस्ट्रेटीग्राफी के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए दिया जा रहा है।
  • समुद्र विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार विशाखापट्टनम के सीएसआईआर- राष्ट्रीय समुद्रशास्त्र संस्थान के वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक डॉ. वी. वी. एस. एस. शर्मा तथा गोवा के राष्ट्रीय ध्रुवीय केंद्र एवं समुद्र अनुसंधान के निदेशक डॉ. एम रविचंद्रन को दिया जा रहा है।
  • वातावरण विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार तिरुवनंतपुरम के वीएसएससी के वैज्ञानिक-एसएफ डॉ. एस. सुरेश बाबू को दिया जाएगा।
  • भू-विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार वाराणसी के बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के जियोलॉजी विभाग के एन वी चलापति राव को दिया जाएगा।
  • समुद्र प्रौद्योगिकी के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार चेन्नई के राष्ट्रीय समुद्र प्रौद्योगिकी संस्थान के निदेशक डॉ. एम. ए. आत्मानंद को प्रदान किया जाएगा।
  • गोवा के सीएसआईआर- राष्ट्रीय समुद्र विज्ञान संस्थान की वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. लिदिता डी. एस. खांडेपारकर को महिला वैज्ञानिक के लिए डॉ. अन्ना मणि राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान किया जाएगा।
  • कानपुर के भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान के डॉ. इंद्र शेखर सेन तथा अहमदाबाद के फिजिकल रिसर्च लैबोरेट्ररी (पीआरएल) के डॉ. अरविंद सिंह को पृथ्वी प्रणाली विज्ञान में उनके उल्लेखनीय कार्यों के लिए यंग रिसर्चर अवार्ड से पुरस्कृत किया जाएगा।

ब्रजेंद्र नवनीत: डब्ल्यूटीओ में भारत के स्थायी प्रतिनिधि

  • राजदूत एवं विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) में भारत के स्थायी प्रतिनिधि ब्रजेंद्र नवनीत ने 28 जुलाई, 2020 को डब्ल्यूटीओ के महानिदेशक श्री राबर्टो एजेवेडो को अपना प्रत्यय पत्र प्रस्तुत किया। डब्ल्यूटीओ के महानिदेशक ने राजदूत ब्रजेंद्र नवनीत का स्वागत किया तथा डब्ल्यूटीओ में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया।

:: प्रिलिम्स बूस्टर ::

  • हाल ही में पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय द्वारा पृथ्वी प्रणाली विज्ञान में उत्कृष्टता के के लिए किस वैज्ञानिक को लाइफ टाइम उत्कृष्टता पुरस्कार प्रदान किया गया? (प्रोफेसर अशोक साहनी)
  • नवजात शिशुओं में बिना दर्द के बिलीरुबिन (Bilirubin) मापन हेतु किस नए उपकरण को तैयार किया गया है एवं बिलीरुबिन की जांच किस लिए की जाती है? (“एजेओ–निओ”, पीलिया की जांच हेतु)
  • हाल ही में जारी हुई नई शिक्षा नीति के अनुसार किस नाम से मानव संसाधन विकास मंत्रालय का नामकरण कर दिया गया है? (शिक्षा मंत्रालय)
  • हाल ही में सरकार द्वारा लागू करने से चर्चा में रहे राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2019 का मसौदा तैयार करने वाली समिति के अध्यक्ष कौन थे? (डॉक्टर कस्तूरीरंगन)
  • भारत को कोविड-19 महामारी का मुकाबला करने हेतु 30 लाख डॉलर के अनुदान की मंजूरी से चर्चा में रहे एशियाई विकास बैंक (एडीबी) की स्थापना कब हुई एवं इसका मुख्यालय कहां है? (1966, मनीला-फिलिपींस)
  • परियोजना से जुड़े यंत्रों की असेंबलिंग से चर्चा में रहे अंतरराष्ट्रीय थर्मोन्यूक्लियर प्रायोगिक रिएक्टर(ITER) का निर्माण कहां किया जा रहा है एवं यह किस सिद्धांत पर आधारित है? (कराहाश-फ्रांस, नाभिकीय संलयन)
  • कांडला स्पेशल इकोनामिक जोन में कच्छ के किसानों को वर्टिकल फार्मिंग के प्रदर्शन से चर्चा में रहे एयरोपोनिक्स (Aeroponics) तकनीक क्या है? (बिना मिट्टी के हवा में कृषि की तकनीक)
  • हाल ही में किसे विश्व व्यापार संगठन में भारत का स्थानीय प्रतिनिधि बनाया गया है एवं इस समय विश्व व्यापार संगठन के डायरेक्टर जनरल कौन है? (क्रमशः ब्रजेंद्र नवनीत, रॉबर्ट एजेवेदो)
  • प्रतिवर्ष विश्व बाघ दिवस किस तिथि को मनाया जाता है एवं किस अंतरराष्ट्रीय घोषणा पत्र के अनुसार 13 देशों ने बाघों की आबादी को 2022 तक दोगुना करने का संकल्प लिया था? (29 जुलाई, सेंट पीटर्सबर्ग घोषणा पत्र)
  • भारत में डिजिटल शिक्षा पर रिपोर्ट से चर्चा में रहे “स्माइल”, “पढ़ाई तुहार दुवार” और मिशन प्रेरणा ई-पाठशाला क्रमशः किन राज्यों की डिजिटल शिक्षा हेतु पहल है? (क्रमशः राजस्थान, छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश)
  • हाल ही में जारी हुई बाघ गणना पर विस्तृत रिपोर्ट के अनुसार क्रमशः किस राज्य एवं किस भाग टाइगर रिजर्व में सर्वाधिक बाघों की आबादी निवास करती है? (क्रमशः मध्यप्रदेश और जिम कार्बेट- उत्तराखंड)
  • हाल ही में जारी हुई बाघ गणना पर विस्तृत रिपोर्ट के अनुसार किन तीन टाइगर रिजर्व में अब एक भी बाघ शेष नहीं बचे? (मिजोरम का डंपा रिजर्व, पश्चिम बंगाल का बक्सा रिजर्व और झारखंड का पलामू रिजर्व)
  • उत्तराखंड के लिए पहली पवन हंस हेलीकॉप्टर सेवा की शुरुआत से चर्चा में रहे ‘उड़ान योजना’ को कब एवं किस उद्देश्य हेतु प्रारंभ किया गया था? (2016, नोट 2017 में पहली उड़ान, क्षेत्रीय एयर कनेक्टिविटी को मजबूत करने हेतु)

स्रोत साभार: Dainik Jagran (Rashtriya Sanskaran), Dainik Bhaskar (Rashtriya Sanskaran), Rashtriya Sahara (Rashtriya Sanskaran) Hindustan Dainik (Delhi), Nai Duniya, Hindustan Times, The Hindu, BBC Portal, The Economic Times (Hindi & English), PTI, PIB