(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (30 अप्रैल 2020)

दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर


(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (30 अप्रैल 2020)


:: राष्ट्रीय समाचार ::

राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन (NIP)

चर्चा में क्यों?

  • राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन (एनआईपी) पर गठित कार्यदल ने केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण को वित्त वर्ष 2019-25 के लिए एनआईपी पर अपनी अंतिम रिपोर्ट पेश की। वित्त वर्ष 2019-2025 के लिए राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन पर गठित कार्यदल की सारांश रिपोर्ट वित्त मंत्री द्वारा 31 दिसंबर, 2019 को पहले ही जारी की जा चुकी है।

पृष्ठभूमि

  • केंद्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने अपने बजट भाषण 2019-20 में घोषणा की थी कि अगले पांच वर्षों में बुनियादी ढांचे यानी अवसंरचना पर 100 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा।

क्या है NIP?

  • ‘एनआईपी’ पूरी तरह से सरकार की ओर से अपनी तरह की पहली कवायद है जिसका उद्देश्‍य देश भर में विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचागत सुविधाएं प्रदान करना और सभी नागरिकों का जीवन स्‍तर बेहतर करना है। इसका उद्देश्य परियोजना तैयार करने की व्‍यवस्‍था को बेहतर बनाना एवं बुनियादी ढांचागत क्षेत्र में निवेश (घरेलू और विदेशी दोनों) को आकर्षित करना है, और यह वित्त वर्ष 2025 तक भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए अत्‍यंत महत्वपूर्ण होगी।
  • एनआईपी को विभिन्न हितधारकों द्वारा प्रदान की गई जानकारियों को संयोजित करके सर्वोत्तम प्रयास के आधार पर बनाया गया है। इन हितधारकों में संबंधित मंत्रालय, विभाग, राज्य सरकारें और बुनियादी ढांचागत सेक्‍टर के उन उप-सेक्‍टरों के निजी क्षेत्र शामिल हैं जिन्‍हें अवसंरचना की समन्वित मूल सूची (मास्‍टर लिस्‍ट) में चिन्हित किया गया है।
  • एनआईपी तैयार करने के लिए ‘बॉटम-अप दृष्टिकोण’ को अपनाया गया था जिसके तहत प्रति प्रोजेक्ट 100 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली सभी परियोजनाओं (ग्रीनफील्ड या नई अथवा ब्राउनफील्ड या मौजूदा, कार्यान्वयन जारी या फि‍लहाल परिकल्‍पना के स्‍तर पर) पर गौर किया गया।

एनआईपी कार्यदल की अंतिम रिपोर्ट से जुड़े तथ्य

  • एनआईपी कार्यदल की अंतिम रिपोर्ट में वित्त वर्ष 2020-25 की अवधि के दौरान 111 लाख करोड़ रुपये के कुल अवसंरचना निवेश का अनुमान लगाया गया है। एनआईपी पर कार्यदल की सारांश रिपोर्ट जारी होने के बाद से लेकर अब तक केंद्रीय मंत्रालयों/राज्य सरकारों द्वारा प्रदान किए गए अतिरिक्त/संशोधित आंकड़ों को ध्‍यान में रखते हुए ही इस बढ़े हुए अवसंरचना निवेश का अनुमान लगाया गया है।
  • 111 लाख करोड़ रुपये के कुल अपेक्षित पूंजीगत व्यय में से 44 लाख करोड़ रुपये (एनआईपी का 40%) की लागत वाली परियोजनाएं कार्यान्वित की जा रही हैं, 33 लाख करोड़ रुपये (30%) की लागत वाली परियोजनाएं अभी परिकल्‍पना के स्तर पर हैं और 22 लाख करोड़ रुपये (20%) की लागत वाली परियोजनाएं अभी विकास के चरण में हैं। उधर, 11 लाख करोड़ रुपये (10%) की लागत वाली परियोजनाओं के लिए परियोजना चरण की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है। विभिन्‍न सेक्‍टरों जैसे कि ऊर्जा (24%), सड़कें (18%), शहरी (17%) और रेलवे (12%) का हिस्‍सा भारत में कुल अनुमानित अवसंरचना निवेश में लगभग 71% है। भारत में एनआईपी को कार्यान्वित करने में केंद्र (39%) एवं राज्यों (40%) की लगभग समान हिस्सेदारी है और इसके बाद निजी क्षेत्र (21%) की हिस्‍सेदारी है।

एनआईपी कार्यदल की मुख्य सिफारिशें

  • अंतिम रिपोर्ट में बुनियादी ढांचे के सभी सेक्‍टरों में भारत के साथ-साथ पूरी दुनिया में अवसंरचना संबंधी हालिया रुझानों की पहचान की गई है और उन पर प्रकाश डाला गया है। इसमें सेक्‍टर-वार प्रगति, कमी और चुनौतियों के बारे में भी बताया गया है। मौजूदा सेक्‍टर-वार नीतियों को अपडेट करने के अलावा  अंतिम रिपोर्ट में सुधारों के एक समूह की पहचान की गई है और उन पर प्रकाश डाला गया है, ताकि पूरे देश में विभिन्न सेक्‍टरों में बुनियादी ढांचागत निवेश को बढ़ाया जा सके। रिपोर्ट में एनआईपी के वित्तपोषण के तरीके और साधन भी सुझाए गए हैं जिनमें नगरपालिका बॉन्‍डों के बाजार सहित कॉरपोरेट बॉन्ड के बाजारों को मजबूत करना, बुनियादी ढांचागत क्षेत्र के लिए विकास वित्तीय संस्थान स्थापित करना, बुनियादी ढांचागत परिसंपत्तियों के मुद्रीकरण में तेजी लाना, भूमि मुद्रीकरण, इत्‍यादि शामिल हैं।

कार्यदल ने सिफारिश की है कि निम्‍नलिखित तीन समितियां स्‍थापित की जाएं:

  1. एनआईपी की प्रगति की निगरानी करने और देरी समाप्त करने के लिए एक समिति;
  2. कार्यान्वयन में सहयोग करने के लिए प्रत्येक अवसंरचना मंत्रालय स्तर पर एक संचालन समिति; और
  3. एनआईपी हेतु वित्तीय संसाधन जुटाने के लिए डीईए में एक संचालन समिति।
  • वैसे तो बुनियादी निगरानी का अधिकार मंत्रालय और परियोजना एजेंसी के पास होगा, लेकिन लागू किए जाने वाले सुधारों और रुकी हुई परियोजनाओं के मुद्दों से निपटने के लिए उच्च स्तर की निगरानी की आवश्यकता है। गवर्नेंस बढ़ाने संबंधी अनुशंसित संरचना सहित निगरानी और आकलन की रूपरेखा के मूल तत्वों का उललेख एनआईपी रिपोर्ट के खंड-I में किया गया है।
  • एनआईपी परियोजना के डेटाबेस को शीघ्र ही इंडिया इन्‍वेस्‍टमेंट ग्रिड (आईआईजी) पर उपलब्‍ध कराया जाएगा, ताकि एनआईपी को दृश्यता प्रदान की जा सके और उन भावी घरेलू एवं विदेशी निवेशकों के जरिए इसके वित्तपोषण में मदद मिल सके, जो परियोजना स्तर की अद्यतन जानकारियों तक पहुंचने में सक्षम हैं। प्रत्येक संबंधित मंत्रालय/राज्य कुछ और नई परियोजनाओं को जोड़ेंगे एवं पूर्व-निर्धारित समय अंतराल पर अपने संबंधित परियोजना विवरण को अपडेट करेंगे, ताकि भावी निवेशकों को अद्यतन डेटा उपलब्ध हो सके।

‘रिस्टार्ट, रिस्टोर और रिसर्जेस’(Restart, Restore and Resurgence)

चर्चा में क्यों?

  • ‘रिस्टार्ट, रिस्टोर और रिसर्जेस’, यानी शुरू करना, अपने पुराने स्थान पर आना और फिर उसे उंचाई तक ले जाना - चीन के खिलाफ बन रहे माहौल में वैश्विक अवसर को भुनाने के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स व मोबाइल मैन्यूफैक्चरिंग कंपनियां इन्हीं तीन मंत्रं को अपनाने जा रही हैं। इन मंत्रों की मदद से वियतनाम को पीछे छोड़ चीन को टक्कर देते हुए दुनिया का सबसे बड़ा निर्यातक देश बनने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। मई से इन मंत्रों पर अमल शुरू हो जाएगा। बुधवार को केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स व आइटी मंत्री रवि शंकर प्रसाद के साथ देश की सभी प्रमुख इलेक्ट्रॉनिक्स व मोबाइल मैन्यूफैक्चरिंग कंपनियों की बैठक में इलेक्ट्रॉनिक्स व मोबाइल कंपनियों की एसोसिएशन ने भी शिरकत की।

कार्यक्रम की क्या है विशेषता?

  • रिस्टार्ट मंत्र पर मई से जुलाई के बीच अमल किया जाएगा। इस दौरान मैन्यूफैक्चरिंग और रिटेल चेन शुरू करने समेत निर्यात को आगे बढ़ाने के साथ वैश्विक सप्लाई चेन के लिए दरवाजे खोलने की शुरुआत की जाएगी।
  • रिस्टोर मंत्र पर अमल का काम अगस्त से लेकर अक्टूबर तक चलेगा। इसके तहत रोजगार को सुरक्षित करने, उत्पादन को 100 फीसद क्षमता तक ले जाने, निर्यात प्रोत्साहन, घरेलू मांग में बढ़ोतरी के साथ भौगोलिक-राजनैतिक स्थिति का लाभ उठाने जैसे काम पूरे करने का लक्ष्य रखा गया है।
  • सबसे महत्वपूर्ण मंत्र रिसर्जेस की अवधि इस साल अक्टूबर के बाद शुरू होगी जो वर्ष 2025 तक जारी रहेगी। इस दौरान विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने, वियतनाम को पीछे छोड़ने के साथ चीन को टक्कर देते हुए विश्व का सबसे बड़ा निर्यातक देश बनने का लक्ष्य रखा गया है।

क्यों लायी गयी यह योजना?

  • विशेषज्ञों के मुताबिक चीन के खिलाफ कई बार ऐसे मौके आए हैं जिसे भारत भुना सकता था। भारत के मुकाबले वियतनाम छोटा सा देश है, लेकिन वह चीन के खिलाफ मिलने वाले अवसरों को भुनाते हुए इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात का बड़ा केंद्र बन गया। वियतनाम अभी 90 अरब डॉलर का इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात करता है जबकि भारत 8.5 अरब डॉलर के आस-पास ही अटका है।
  • हाल ही में इलेक्ट्रॉनिक्स व मोबाइल मैन्यूफैक्चरिंग को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार की तरफ से लगभग 50,000 करोड़ के पैकेज का एलान किया गया है।

बौद्धिक संपदा को लेकर भारत सहित 10 देशों निगरानी सूची में

चर्चा में क्यों?

  • अमेरिका ने बौद्धिक संपदा सुरक्षा के मामले में भारत को निगरानी की प्राथमिक सूची में रखा है। अमेरिका ने यह कदम भारत के बौद्धिक संपदा अधिकार की संरक्षण व्यवस्था को लेकर अपनी कुछ पुरानी और कुछ नई आपत्तियों के आधार पर उठाया है। अमेरिका ने भारत और चीन सहित अपने प्रमुख व्यापार भागीदारी सहित 10 देशों को इस सूची में रखा है।

भारत के कौन से संस्था शामिल है इसमें?

  • अमेरिका ने भारत की ई-कॉमर्स स्नैपडील सहित चार भारतीय बाजारों को निगरानी की प्राथमिक सूची में रखा है। इसे काली सूची के नाम से भी जाना जाता है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि विभाग (यूएसटीआर) की इस ताजी सूची में स्नैपडील के अलावा दिल्ली का टैंक रोड बाजार, मुंबई का हीरा-पन्ना, कोलकाता का किड्डरपोर और आइजोल का मिलेनियम सेंटर शामिल है।
  • इस सूची में भारत के अलावा दुनिया की 38 ऑनलाइन और 34 बाजारों को निगरानी सूची में रखा गया है। बौद्धिक संपदा अधिकारों के उल्लंघन और कारोबार में असमानता के आधार पर यह तय हुआ। भारत की स्नैपडील के साथ, टैंक रोड और मिलेनियम सेंटर नकली उत्पादों से भरे होते हैं। इसका नुकसान असली कंपनियों को होता है।

क्यों उठाये गए ये कदम?

  • अमेरिका का कहना है कि भारत ने कुछ ''लंबे समय से चली आ रही और कुछ ''नई चुनौतियों के मामले में अपने नियम कायदे नहीं बदले हैं। इनकी वजह से अमेरिकी कंपनियों के बौद्धिक संपदा अधिकार पर वर्षों से बुरा प्रभाव पड़ा है।
  • उसका आरोप है कि इन देशों में बौद्धिक संपदा अधिकारों को लागू करने में कमियां आई हैं और उनके नियम कानून अब भी अपर्याप्त बने हुए हैं। अमेरिका की जो भी कंपनियां अथवा इन अधिकारों के धारक इन देशों के नियमों पर निर्भर हैं उन्हें वहां बाजार में काम करने में समानता का अवसर नहीं मिलता।

पृष्ठभूमि

  • ट्रंप प्रशासन के तहत जिन देशों को बाद्धिक संपदा अधिकारों से जुड़े मामलों में निगरानी सूची में रखा गया है उनमें अल्जीरिया, अर्जेंटीना, चिली, चीन, भारत, इंडोनेशिया, रूस, सऊदी अरब, उक्रेन और वेनेजुएला शामिल हैं। कुवैत को पिछले साल की ऐसी सूची से हटा लिया गया। इसमें 11 देश शामिल थे। वर्ष 2019 में अमेरिका ने कनाडा और थाइलैंड को इस सूची से हटा लिया था।

:: अंतर्राष्ट्रीय समाचार ::

Amazon धोखाधड़ी के "कुख्यात बाजारों" वाली सूची में

चर्चा में क्यों?

  • यूएसटीआर ने अमेजन के भारत, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी और ब्रिटेन के डोमेन समेत 38 ऑनलाइन कंपनियों को इस सूची में डाला है।
  • ट्रंप प्रशासन ने दिग्गज ई कामर्स कंपनी अमेजन के 5 विदेशी डोमेन पर टेडमार्क धोखाधड़ी और कॉपीराइट पाइरेसी का आरोप लगाते हुए उन्हें "कुख्यात बाजारों" वाली सूची में डाल दिया है। इसमें अमेजन का भारतीय डोमेन भी शामिल है।

पृष्ठभूमि

  • उल्लेखनीय है यूएसटीआर ने अमेजन के भारत, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी और ब्रिटेन के डोमेन समेत पूरी दुनिया की 38 ऑनलाइन कंपनियों को इस सूची में डाला है। इन पर ट्रेडमार्क में धांधली और कॉपीराइट पाइरेसी का आरोप लगाया गया है। यूएसटीआर ने कहा कि कॉपीराइट धारकों ने इन आन लाइन प्लेटफार्म के खिलाफ नियमों का उल्लंघन करने की शिकायत की थी। कॉपीराइट धारकों का कहना है कि ये कंपनियां धड़ल्ले से जाली उत्पाद बेच रही हैं।
  • कॉपीराइट धारकों का कहना है कि अमेजन में कोई भी अपना माल बेच सकता है। ग्राहकों और कापीराइट धारकों के लिए विक्रेता का पता करना बहुत मुश्किल होता है। जब कभी शिकायत भी होती है तो अमेजन से जाली माल को हटाने की प्रक्रिया इतनी लंबी और थकानेवाली होती है कि आमतौर पर लोग इससे कतराते हैं।
  • यूएसटीआर ने कहा कि हाल के वर्षों में इन कंपनियों के जरिए बड़ी मात्रा में नकली माल बिकने लगा है। ऐसे में कॉपीराइट धारकों की मांग है कि अमेजन को अपने ब्रांड संरक्षण कार्यक्रम को ज्यादा न्यायसंगत, पारदर्शी, प्रभावी और मापनीय बनाना चाहिए।

:: भारतीय राजव्यवस्था ::

नेशनल इलेजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट-NEET

चर्चा में क्यों?

  • सुप्रीम कोर्ट ने मेडिकल में प्रवेश की परीक्षा ‘नीट’ (नेशनल इलेजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट) के प्रावधानों को सही ठहराया है। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को अहम फैसले में कहा है कि मेडिकल के ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए समान परीक्षा का प्रावधान करने वाली नीट से सहायता प्राप्त और गैरसहायता प्राप्त निजी अल्पसंख्यक संस्थानों के किसी भी मौलिक अधिकार का हनन नहीं होता। नियमों को राष्ट्रहित, जनहित और शिक्षा का स्तर कायम रखने वाला बताते हुए शीर्ष कोर्ट ने कहा, इसकी मंशा चयन में निष्पक्षता और मेरिट सुनिश्चित करना है। यह छात्रों के हित में है।
  • कोर्ट ने कहा कि शिक्षण संस्थानों का मूलत: उद्देश्य चैरिटेबल होता है, लेकिन शिक्षा आज कमोडिटी (वस्तु) बन गई है। मेडिकल प्रवेश प्रक्रिया में मेरिट को हताश करने का कोई मतलब नहीं है। सरकार को सहायता प्राप्त और गैरसहायता प्राप्त निजी अल्पसंख्यक संस्थानों के लिए नियम तय करने का अधिकार है। कोर्ट ने कहा कि मेडिकल और डेंटल शिक्षा के बारे में एमसीआइ और डीसीआइ द्वारा किए गए प्रावधानों को असंवैधानिक नहीं कहा जा सकता।

पृष्ठभूमि

  • गैरसहायता प्राप्त निजी अल्पसंख्यक संस्थानों ने ‘नीट’ से मेडिकल में प्रवेश देने को चुनौती दी थी। उनका कहना था कि इससे संविधान में भाषाई और धार्मिक अल्पसंख्यकों के शिक्षण संस्थान चलाने और प्रबंधन के अधिकार का उल्लंघन होता है। कोर्ट ने दलीलें खारिज करते हुए कहा कि संस्थानों के प्रबंधन का अनुच्छेद 30 में मिला अधिकार कानून और संविधान के अन्य प्रावधानों से ऊपर नहीं है। इस पर तर्कसंगत मानक तय किए जा सकते हैं।

NEET क्या है?

  • देश के सभी मेडिकल कॉलेजों में MBBS, BDS, MD और MS में दाखिले के लिए केंद्र सरकार ने 2020 में NEET यानी नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट की शुरूआत की थी. इसका मकसद था कि एक ही एग्जाम के तहत सभी कॉलेजों में दाखिला हो, छात्रों को हर कॉलेज के लिए अलग-अलग एग्जाम न देना पड़े और साथ में मेडिकलों कॉलेज में दाखिले में भ्रष्टाचार और निजी संस्थानों का मनमानापन खत्म किया जाए.

:: भारतीय अर्थव्यवस्था ::

इक्वलाइजेशन (समानीकरण) कर

चर्चा में क्यों?

  • विदेशी कंपनियों के संगठनों ने कोविड- 19 महामारी के प्रसार को देखते हुये वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से गैर- निवासी ई- वाणिज्य कंपनियों पर लगाये गये दो प्रतिशत इक्वलाइजेशन (समानीकरण) कर को नौ माह टालने की गुहार लगाई है। वॉलमार्ट, अमेजन, गूगल और नेटफ्लिक्स जैसी वैश्विक ई-वाणिज्य कंपनियां इन संस्थाओं की सदस्य हैं। यूएस इंडिया बिजनेस काउंसिल, सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग परिषद, जापान इलेक्ट्रानिक्स एण्ड इंफार्मेशन टैक्नालॉजी इंडस्ट्रीज एसोसिसन, एशिया प्रशांत एमएसएमई व्यापार गठबंधन और डिजिटल यूरोप सहित नौ व्यावसायिक संस्थाओं के समूह ने सरकार से समानीकरण शुल्क (दो प्रतिशत कर) पर विचार करने की मांग की है। यह शुल्क सरकार ने इसी वित्त वर्ष में लगाया है।
  • अमेरिका, यूरोपीय, आस्ट्रेलियाई और एशिया क्षेत्र की कंपनियों का प्रतिनिधित्व करने वाली इन व्यावसायिक संस्थाओं ने संयुक्त पत्र भेजकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सहित जी20 समूह के नेताओं द्वारा व्यक्त मुक्त, उचित, निष्पक्ष, पारदर्शी, विश्वसनीय और स्थिर व्यापार और निवेश परिवेश उपलब्ध कराये जाने की प्रतिबद्धता का जिक्र किया है।

पृष्ठभूमि

  • केन्द्र सरकार के वित्त विधेयक 2020 की धारा 165ए के तहत भारत की मौजूदा समानीकरण शुल्क के तहत दो प्रतिशत का नया शुलक लगाकर इसे विस्तारित किया गया है। यह शुल्क भारत में गैर- निवासी ई-वाणिज्य परिचालन करने वाली कंपनियों द्वारा माल एवं सेवाओं की आनलाइन बिक्री पर लगाया गया है।

गैर- प्रवासी ई-वाणिज्य कंपनियां क्या हैं?

  • गैर- प्रवासी ई-वाणिज्य परिचालक ऐसी कंपनियां हैं जो कि भारत में रह रहे नागरिकों को आनलाइन माल एवं सेवाओं की आपूर्ति करतीं हैं। कारोबारी उद्देश्य से उनकी जानकारी जुटातीं हैं लेकिन कर के दायरे में आने के लिहाज से उनकी यहां उपस्थिति नहीं होती है। कई इंटरनेट कंपनियां ऐसी हैं जो कि भारत में विज्ञापन और उत्पादों की बिक्री एक अलग कंपनी के जरिये करती हैं। आमतौर पर ये कंपनियों ऐसी विदेशी भूमि पर पंजीकृत होती हैं जो कि कर के लिहाज से उनके लिये स्वर्ग के समान हैं।

राइट ऑफ (write-off) बनाम लोन वेवर (loan waiver)

  • वर्तमान में भारत में विलफुल डिफॉल्टर और बैंकों से धोखाधड़ी करने वाले लोगों के ऋण माफ करने की चर्चा जोरों पर है। इसमें दो शब्द ‘राइट ऑफ-write-off’ और ‘लोन वेवर-loan waiver’ काफी चर्चा में है। क्या आप जानते हैं इन शब्दों का तकनीकी अर्थ क्या है?

राइट ऑफ(write-off):

  • यह बैंकिंग प्रणाली में अपनाए जाने वाली एक सामान्य प्रक्रिया है। जब बैंकों के द्वारा ऋण के वसूली के सारे रास्ते बंद हो जाते हैं तो ऐसे ‘नॉन परफॉर्मिंग ऐसेट-NPA’ को बंद कर इन्हें ‘राइट ऑफ’ कर बट्टा खाते में डाल दिया जाता है एवं ऋण वसूली के लिए कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाने लगती है।
  • इस प्रक्रिया में बैंकों को पूर्णता स्वायत्तता होती है अर्थात रिजर्व बैंक इसमें भूमिका नहीं होती। ‘राइट ऑफ’ करने का उद्देश्य बैंकों की बैलेंस शीट को दुरुस्त करना होता है क्योंकि ऐसा न करने से बैंकों की परिसंपत्तियों बढ़ी हुई दिखेंगी जिसमें एक बड़ा हिस्सा डूबे हुए ऋण का होगा।
  • यद्यपि दिए गए ऋण को ‘राइट ऑफ’ तो कर दिया जाता है लेकिन इसके भुगतान  का पूरा उत्तरदायित्व ऋण लेने पर वाले पर बना रहता है। उदाहरण के लिए विजय माल्या और नीरव मोदी के लोगों के ऋण को ऋण को ‘राइट ऑफ’ करने के बावजूद वित्तीय एजेंसियों के द्वारा कानूनी प्रक्रियाओं के माध्यम से ऋण की वसूली प्रक्रिया लगातार जारी है।

‘लोन वेवर-loan waiver’:

  • ‘लोन वेवर’ प्रक्रिया ‘राइट ऑफ’ से काफी अलग है। इसमें  वित्तीय संस्थान दिए गए ऋण की वसूली को रद्द कर देते हैं। साधारण शब्दों में बैंक ऐसे ऋणों को पूर्ण तरीके से छोड़ते हुए इनकी वसूली नहीं करेंगे जबकि ‘राइट ऑफ’मामलों में ऋण की वसूली की जाती है।
  • ऋण माफी वित्तीय संस्थानों या सरकार के द्वारा दिया जाने वाला एक राहत कार्य है जो सामान्यतः किसी असामान्य परिस्थिति जैसे फसल की विफलता, खराब मानसून, बाढ़, भूकंप इत्यादि के कारण  किया जाता है।  ऐसी स्थितियां नियंत्रण से परे होती हैं जिसके परिणाम स्वरूप ऋण लेने वाला बैंकों को भुगतान करने में असमर्थ हो जाते हैं तो उनके ऋणों को माफ या ‘लोन वेवर’  कर दिया जाता है। उदाहरण किसानों को दिए जाने वाला ऋण माफ करना।

वर्तमान स्थिति

  • 2009-14 के बीच 1,45,226 करोड़ रुपये का कर्ज बट्टा खाते में गया। वर्ष 2010-11 के बाद से ही बैंकों का एनपीए बढ़ना शुरू हो गया था और बट्टे खाते में डाली जाने वाली राशि भी बढ़ने लगी थी। यही कारण है कि 2014-19 के दौरान 6,24,210 करोड़ बट्टा खाता में गया।
  • आने वाले महीनों में बट्टा खाते में डाली जाने वाली राशि में और वृद्धि होगी आरबीआइ के आंकड़ों के मुताबिक दिसंबर, 2019 तक वाणिज्यिक बैंकों का कुल एनपीए 9,58,156 करोड़ रुपये था। यह राशि दिसंबर, 2018 में 10,36,187 करोड़ रुपये की थी। वर्ष 2014 से 2019 के दौरान बैंकों ने फंसे कर्जे के 5,12,687 करोड़ की राशि वसूल की थी जो रिकॉर्ड है।

:: विज्ञान और प्रौद्योगिकी ::

न्यूरो एंड्रोक्राइन ट्यूमर रोग

चर्चा में क्यों?

  • अपनी आवाज, आंखों और अभिनय से पहचाने जाने वाले अभिनेता इरफान खान का लंबी बीमारी के बाद आज निधन हो गया। वो न्यूरो एंड्रोक्राइन ट्यूमर नामक बीमारी से ग्रसित थे। आंत और पेट में यह ट्यूमर लो ग्रेड होता है, लेकिन फेफड़े सहित अन्य अंगों में यह घातक हो सकता है। अगर समय पर और सही उपचार मिले तो ही इस बीमारी से निपटा जा सकता है, नहीं तो यह खतरनाक हो सकती है।

क्या है न्यूरो एंड्रोक्राइन ट्यूमर

  • हार्मोन पैदा करने वाली एंड्रोक्राइन कोशिकाओं और नर्व कोशिकाओं की असमान वृद्धि से न्यूरो एंड्रोक्राइन ट्यूमर होता है। चिकित्सकीय जांच में यह अक्सर पेट और आंत में पाया जाता है। यहां यह लो ग्रेड होता है। इसका आकार भी छोटा होता है, डॉक्टर आम बोलचाल में इसे शरीफ ट्यूमर भी कह देते हैं, मगर आंत से यह लिवर में फैल जाता है। इसके बाद भी सर्जरी के बिना मरीज 10 से 15 साल तक बेहतर जिंदगी जी जा सकती है। फेफड़े में यह हाई ग्रेड होता है। खून से शरीर के अन्य अंगों में फैलने पर घातक हो सकता है। यह सर्विक्स सहित अन्य अंगों में न्यूरो एंड्रोक्राइन कार्सिनॉइड ट्यूमर की तरह से व्यवहार करता है तो मरीज के लिए घातक हो सकता है।

एक अलग प्रकार का कैंसर है न्यूरोएंड्रोक्राइन

  • न्यूरोएंड्रोक्राइन ट्यूमर एक अलग प्रकार का कैंसर होता है। इसे कैंसर के सिफिकेशन में 10 से 15 साल पहले ही जोड़ा गया है। इसके बारे में पता लगाने के लिए विशेष प्रकार की पड़ताल ''क्रोमोग्राफिन ऐसे'' और ''क्रोमेटिन टेस्ट'' किया जाता है।
  • इसके बाद इसके प्रायमरी या सेकंडरी स्टेज का पता लगाया जा सकता है। न्यूरोएंड्रोक्राइन ट्यूमर में पीनेट ट्यूमर की उत्पत्ति अमूमन कोलोन, फेफड़ों में या फिर शरीर के किसी और भाग में होती है।अगर इसे डायग्नोस किया जा चुका है तो यह देखना जरूरी हो जाता है कि यह लोकलाइज्ड है या फिर शरीर में फैला हुआ है।

ये होते हैं लक्षण

  • पेट, आंत, पैंक्रियाज में ट्यूमर होने पर डायरिया, पेट में दर्द, उल्टी, पसीना आना जैसे लक्षण दिखाई पड़ते हैं। फेफड़े में ट्यूमर, खांसी रहना, बुखार, ब्लड प्रेशर बढ़ना, घबराहट और बेचैनी एपेंडिक्स सहित कई अन्य अंगों में ट्यूमर होने पर कोई लक्षण नहीं होते हैं। एक बात और है कि इस बीमारी का जल्दी पता नहीं चल पाता है।

ऐसे होता है ट्रीटमेंट

  • इस बीमारी का भी ट्रीटमेंट कैंसर की बीमारी की तरह कीमोथैरेपी के जरिए ही किया जाता है। कई बार पीईटी स्कैन भी की जाती है लेकिन अगर यह बीमारी दिमाग में फैली है तो इसका पता इस स्कैन से नहीं चलता। इम्यूनो हिस्ट्रो केमेस्ट्री का भी अहम रोल होता है। इसके बाद इस बीमारी के बारे में पूरी जानकारी मिल पाती है। जहां तक बात ट्रीटमेंट की है तो इसमें काफी समय लगता है। इस बात पर भी यह निर्भर करता है कि बीमारी शरीर के किस हिस्से में है।
  • यह बीमारी अमूमन फैलने वाली होती है जिसका ट्रीटमेंट लंबे समय तक चलता है।ट्रीटमेंट के दौरान कई बार ऐसी बीमारी में रेडिएशन का उपयोग भी किया जाता है। इस बीमारी में सर्वाइवल इस पर निर्भर करता है कि, शरीर के किस हिस्से में यह बीमारी हुई है। रोग से पीड़ित व्यक्ति के आंत और पेट में ट्यूमर होने पर सर्जरी से ही इलाज हो जाता है। इसके बाद दो से तीन साल तक फॉलोअप किया जाता है। शरीर के अन्य अंगों में फैलने पर सर्जरी के साथ बायोथैरेपी देने की जरूरत होती है।

ऐसे की जाती है पहचान

  • इम्युनोहिस्टोलॉजी और हार्मोन की जांच से न्यूरोएंड्रोक्राइन ट्यूमर की पहचान की जाती है। ट्यूमर के टुकड़े के लिए स्पेसफिक स्टेन इस्तेमाल किए जाते हैं। इससे ग्रेड का पता चलता है। उसके बाद ही ये कहा जाता है कि ये ट्यूमर किस स्तर का है और किस तरह से इसका इलाज किया जा सकता है। 

फैंटम लैंस स्पाइवेयर (PhantomLance Spyware)

  • ग्लोबल साइबर सिक्योरिटी और एंटी-वायरस ब्रांड कैस्पर स्काई (Kaspersky) के एक रिपोर्ट में दावा किया  गया है कि ‘ओसेन लोटस (OceanLotus) ग्रुप के हैकर्स ने फैंटम लैंस स्पाइवेयर के जरिए 2015 से  ही कई भारतीय यूजर्स समेत वियतनाम, बांग्लादेश और इंडोनेशिया के यूजर्स का डाटा चोरी कर रहे थे।

स्पायवेयर (Spyware) क्या है?

  • स्पायवेयर ऐसे अवांछित सॉफ्टवेर होते है जो आपकी जानकारी के बिना आपके कंप्यूटर/मोबाइल में  इंस्टॉल हो जाते है। ये प्रोग्राम
  • आपके कंप्यूटर/मोबाइल की कॉन्फ़िगरेशन को बदल सकते हैं या विज्ञापन डेटा और व्यक्तिगत जानकारी एकत्रित कर सकते हैं। स्पायवेयर आपके इंटरनेट के उपयोग करने में सर्च इंजन की गतिविधियों को ट्रैक कर सकता है ।
  • इसके साथ ही है आपके पासवर्ड, कॉल रिकॉर्डिंग, वीडियो रिकॉर्डिंग के साथ-साथ आपके सोशल मीडिया की सूचना भी एकत्र करते रहते हैं। इसके अलावा  स्पाइवेयर के जरिए दूर से ही कोई व्यक्ति  आपके कंप्यूटर/मोबाइल को ऑपरेट भी कर सकता है।

कंप्यूटर/मोबाइल में कैसे स्पायवेयर इंस्टॉल होता है?

  • अन ऑफिशियल वेब साइट या ऐसे अन्य स्रोतों से मूवी, गेम्स को डाउनलोड करना या फ्री अवार्ड, लकी कूपन इत्यादि के चक्कर में अनऑफिशियल वेब साइट पर विजिट करने कारण स्पाइवेयर कंप्यूटर/मोबाइल में इंस्टॉल हो जाता है।

क्यों स्पायवेयर (Spyware) ख़तरनाक है?

  • डिवाइस के इंटरनेट से कनेक्ट होती ही फाइलों में छुपे स्पाइवेयर, यह हमारी पर्सनल इन्फो चेक और ऑनलाइन गतिविधियों को चुरा कर हैकर्स के  पास पहुचा देते है।
  • हैकर्स इन सूचनाओं को वाणिज्यिक इस्तेमाल के लिए कंपनियों को बेच देते हैं या फिर लोगों के साथ वित्तीय धोखाधड़ी/ ब्लैक मेलिंग इत्यादि गतिविधियों को अंजाम देते हैं।
  • देशों के द्वारा जासूसी के ये उपकरण वर्तमान में एक समस्या बन गये हैं। स्पाइवेयर द्वारा इस प्रकार की घुसपैठ न केवल देश के नागरिकों के अधिकारों के लिए बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी एक चुनौती है।

क्या है बचाव के उपाय?

  • स्पाइवेयर से बचाव के लिए अज्ञात स्रोतों से डाउनलोड, अज्ञात वेबसाइट/ अप्रमाणित वेबसाइट पर जाने से बचना चाहिए एवं डिवाइस में अच्छे एंटीवायरस सॉफ्टवेयर का प्रयोग करना चाहिए। इसके साथ ही देश में कुशल साइबर सुरक्षा अवसंरचना का विकास करना चाहिए।

‘प्राकृतिक उत्पाद आधारित अल्जाइमर अवरोधक’: बेर-डी 

चर्चा में क्यों?

  • भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के अधीनस्‍थ स्वायत्त संस्थान जवाहरलाल नेहरू उन्नत वैज्ञानिक अनुसंधान केंद्र (जेएनसीएएसआर) के वैज्ञानिकों ने बर्बेरिन की संरचना को बेर-डी में बदल दिया है, ताकि इसका उपयोग अल्जाइमर के अवरोधक के रूप में किया जा सके। बर्बेरिन दरअसल करक्यूमिन के समान ही एक प्राकृतिक और सस्ता उत्पाद है जो व्यावसायिक तौर पर उपलब्ध है। इन वैज्ञानिकों का शोध कार्य विज्ञान पत्रिका ‘आईसाइंस’ में प्रकाशित किया गया है।

अल्जाइमर रोग

  • अल्जाइमर रोग ही सबसे अधिक होने वाला तंत्रिका अपक्षयी (न्यूरोडीजेनेरेटिव) विकार है और मनोभ्रंश (डिमेंशिया) के 70% से भी अधिक मामलों के लिए यही जिम्मेदार होता है। बहुआयामी विषाक्तता की वजह से इस रोग का स्‍वरूप बहुघटकीय होने के कारण शोधकर्ताओं के लिए इसकी कोई अत्‍यंत कारगर दवा विकसित करना काफी मुश्किल हो गया है।

शोध कार्य से जुड़ें तथ्य

  • जेएनसीएएसआर के एक स्वर्ण जयंती फेलो प्रो. टी. गोविंदाराजू ने अल्जाइमर रोग के लिए प्राकृतिक उत्पाद आधारित चिकित्सीय सामग्री की खोज करने के लिए अपनी टीम का नेतृत्व किया और भारत एवं चीन में पाए जाने वाले आइसोक्विनोलीन प्राकृतिक उत्पाद बर्बेरिन का चयन किया और इसका उपयोग पारंपरिक चिकित्सा एवं अन्य अनुप्रयोगों में किया। हालांकि, बर्बेरिन आसानी से नहीं घुलता है और कोशिकाओं के लिए विषाक्त है। यही कारण है कि उन्होंने बर्बेरिन को बेर-डी में संशोधित कर दिया या बदल दिया, जो एक घुलनशील (जलीय) ऑक्सीकरण रोधी है। उन्होंने इसे अल्जाइमर रोग की बहुआयामी अमाइलॉयड विषाक्तता का एक बहुक्रियात्मक अवरोधक पाया।
  • प्रोटीन संयोजन और अमाइलॉइड विषाक्तता ही मुख्य रूप से तंत्रिका कोशिकाओं में पाई जाने वाली बहुआयामी विषाक्तता के लिए जिम्‍मेदार होते हैं। जेएनसीएएसआर की टीम ने जीवित कोशिकाओं में बहुआयामी विषाक्तता को दूर करने के लिए ही इस बहुक्रियाशील अवरोधक को विकसित किया है।
  • बेर-डी की संरचनात्मक विशेषताएं ऐसी हैं कि वे प्रतिक्रियाशील ऑक्सीजन प्रजातियों (आरओएस) के सृजन को रोकती हैं और आक्सीकरणीय क्षति से बड़े जैविक अणुओं (बॉयोमैक्रोमॉलिक्यूल्स) को बचाती हैं। बेर-डी धातु-निर्भर और धातु-स्‍वतंत्र अमाइलॉइड बीटा (Aβ) के एकत्रीकरण को रोकता है (जो अल्जाइमर रोग वाले लोगों के दिमाग में पाई जाने वाली अमाइलॉइड पट्टिका के मुख्य घटक के रूप में अल्जाइमर रोग में महत्वपूर्ण रूप से शामिल एमिनो एसिड के पेप्टाइड हैं)।
  • इस टीम ने अल्जाइमर रोग की बहुआयामी Aβ विषाक्तता को प्रभावकारी रूप से लक्षित करने के लिए ही बेर-डी को विकसित किया। बर्बेरिन में 4 फेनोलिक हाइड्रॉक्सिल समूह होते हैं जो मिथाइलयुक्त होते हैं, इसलिए पानी में अघुलनशील होते हैं। जल में घुलनशील पॉलीफेनोलिक व्युत्पन्न बेर-डी प्राप्त करने के लिए प्राकृतिक उत्पाद बर्बेरिन का विमेथिलिकरण (डीमिथाइलेशन) किया गया था। डीमिथाइलेशन अभिकर्ता बीबीआर3 (बोरॉन ट्राईब्रोमाइड) से बर्बेरिन का विमेथिलिकरण करने से बेर-डी प्राप्‍त हुआ। विस्तृत अध्ययनों से पता चला कि बेर-डी ने अल्जाइमर रोग की Aβ विषाक्तता को नियंत्रित किया।
  • ऑक्सीकरण रोधी बेर-डी कुशलतापूर्वक प्रतिक्रियाशील नाइट्रोजन प्रजातियों (आरएनएस) और प्रतिक्रियाशील ऑक्सीजन प्रजातियों (आरओएस) दोनों को ही शांत करता है और डीएनए की क्षति तथा प्रोटीन के ऑक्सीकरण को रोकता है। बेर-डी विषाक्त Aβ फाइब्रिलर के संयोजन को बनने से रोकता है और सूत्रकणिका को शिथिलता से बचाता है, जो तंत्रिका कोशिकाओं के नष्‍ट होने का एक प्रमुख कारण है। वैज्ञानिकों ने बर्बेरिन को कृत्रिम रूप से बेर-डी, जो एक बहुक्रियाशील ऑक्सीकरण रोधी होने के साथ-साथ संयोजन को व्यवस्थित भी करता है, में बदलने की जो डिजाइन रणनीति बनाई है वह कृत्रिम परिवेश और जीवित कोशिकाओं दोनों में ही Aβ विषाक्तता को प्रभावकारी ढंग से दूर करती है।
  • ये बहुक्रियाशील विशेषताएं बेर-डी को अल्जाइमर रोग की बहुआयामी विषाक्तता के इलाज के लिए प्रभावकारी चिकित्सा सामग्री विकसित करने की दृष्टि से अत्‍यंत उपयोगी बनाती हैं।

कांटेक्ट ट्रेसिंग (Contact Tracing): एक समग्र अध्यनन

  • कोरोना के खिलाफ इस जंग में हमारी कोशिशें जरूर रंग लाएगी। यह विश्वास उस हर शोध से पुख्ता हो रहा है, जो कोविड-19 से लड़ाई के लिए हमें नई जानकारियां उपलब्ध करवा रहा है। ऐसा ही शोध सामने आया है, जिसमें चीनी शोधकर्ताओं ने बताया है कि कांटेक्ट ट्रेसिंग के जरिए हम कोरोना वायरस के संक्रमण को रोक सकते हैं।
  • शोधकर्ताओं ने 391 कोरोना संक्रमित लोगों और उनके संपर्क में आने वाले 1,286 लोगों पर नजर रखी। डेली मेल के अनुसार कांटेक्ट ट्रेसिंग लोगों को अलग करने में लगने वाले समय को करीब दो दिनों के लिए कम कर देता है, जिससे कोरोना वायरस का प्रसार कम होता है। लौंसेट इंफेक्शियस डिजीज में यह शोध प्रकाशित हुआ है।

कांटेक्ट ट्रेसिंग :

  • इसमें संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आए हैं लोगों का तेजी से पता लगाया जाता है। फिर उन्हें आइसोलेट किया जाता है और समुदाय में संक्रमण को फैलने से रोका जाता है। वैश्किव लॉकडाउन के बाद से ही किसी भी लक्षण की रिपोर्ट करने के लिए कांटेक्ट ट्रेसिंग सरकार द्वारा समर्थित उपाय के रूप में सामने आया है।

कम होता है प्रकोप :

  • शोध कहता है कि कांटेक्ट ट्रेसिंग ने संक्रमित व्यक्ति को अलग करने में लगने वाले औसतन 4.6 दिन की जगह 2.7 दिन का समय लिया। यह शोध चीन के शेनजेन में 14 जनवरी से 12 फरवरी के मध्य हुआ। हर्बिन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के डॉ. टिंग मा कहते हैं कि शेनजेन में कोविड-19 का अनुभव, वायरस के प्रसार को कम करने के लिए परीक्षण और कांटेक्ट ट्रेसिंग के विशाल पैमाने को प्रदर्शित कर सकता है। कुछ सख्त नियंत्रण उपाय यहां लागू किए गए। जैसे लोगों को घरों के बाहर आइसोलेट करना। इन्हें अन्य जगहों पर दोहराने की जरूरत नहीं हो सकती है। उन्होंने कहा कि ऐसे परिणाम प्राप्त करने के लिए अन्य देश शारीरिक दूरी बनाए रखते हुए और आंशिक लॉकडाउन के साथ परीक्षण और कांटेक्ट ट्रेसिंग अपना सकते हैं।

लोगों को अलग रखा गया :

  • डेली मेल के अनुसार शेनजेन में संक्रमण के लक्षण वाले लोगों को आइसोलेट किया और पहले ही इलाज शुरू कर दिया गया। जिनमें लक्षण नही थे, उन्हें अलग रखा गया। संपर्क में आए लोग जिनकी रिपोर्ट नेगेटिव आई, उन्हें घर में ही अलग रखा गया और 14 दिनों तक नजर रखी गई। संपर्क में आने वाले लोग उन्हें माना गया जो लक्षण नजर आने के दो दिन पूर्व से ही किसी संक्रमित व्यक्ति के साथ रह रहे थे या फिर यात्रा या भोजन कर रहे थे। इन संपर्कों का परीक्षण किया गया। कोविड-19 की पहचान के बाद कांटेक्ट ट्रेस से मिले 87 लोगों में से 17 में कोई लक्षण विकसित नहीं हुआ। जबकि 30 फीसद को बुखार नहीं आया।

मूल्यवान रणनीति :

  • लीवरपूल स्कूल ऑफ ट्रॉपिकल मेडिसिन के सीनियर क्लिनिकल लेक्चरर डॉ. टॉम विंगफील्ड ने कहा कि ट्रेसिंग और टेस्टिंग ने कोविड-19 के लक्षणों को दर्शाने वाले व्यक्तियों के बीच के समय को कम कर दिया है। कोरोना संक्रमण रोकने में यह प्रमुख रणनीति हो सकती है। उधर, इसे लेकर एप बनाने पर भी काम चल रहा है।

सीमाएं भी :

  • हर संपर्क का पता लगाना असंभव है। इसलिए कांटेक्ट ट्रेसिंग करीबी संपर्कों पर ध्यान केंद्रित करता है क्योंकि उन्हीं लोगों में से सबसे अधिक संक्रमित होने की संभावना होती है।

साथ रहने वालों को संक्रमण :

  • रोग के प्रसार की सर्वाधिक संभावना उनमें थी जो एक घर में साथ रहते हैं, लेकिन सभी घनिष्ठ संपर्क में आने वाले लोग कोविड-19 की चपेट में नहीं आए। शोध के मुताबिक, जो लोग संक्रमित मरीज के साथ एक घर में रहते थे, उनके संक्रमण की संभावना सर्वाधिक थी, लेकिन सिर्फ 11 फीसद लोग बीमार हुए। वहीं कोरोना संक्रमित के साथ यात्रा करने पर 6 और खाना खाने पर 9 फीसद संक्रमित हुए। शोध कहता है कि पांच करीबी संपर्कों में से एक में कोई लक्षण नहीं था, जबकि तीन को बुखार नहीं था।

:: विविध ::

श्री सुरेश एन पटेल सतर्कता आयुक्त के पद पर नियुक्त

  • श्री सुरेश एन पटेल ने आज सतर्कता आयुक्त के रूप में शपथ ली। केंद्रीय सतर्कता आयुक्त श्री संजय कोठारी ने सामाजिक दूरी के नियमों का पालन करते हुए उन्हें वीडियो लिंक के माध्यम से पद की शपथ दिलाई। इस शपथ ग्रहण समारोह में सतर्कता आयुक्त श्री शरदकुमार तथा आयोग के सचिव और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
  • सतर्कता आयुक्त का कार्यकाल चार वर्ष या 65 साल की उम्र पूरी होने तक रहता है।  केंद्रीय सतर्कता आयोग में एक केंद्रीय सतर्कता आयुक्त और दो सतर्कता आयुक्त हो सकते हैं।

टीएस त्रिमूर्ति होंगे संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि

  • विदेश मंत्रालय के मौजूदा सचिव व तेजतर्रार राजनयिक टीएस त्रिमूर्ति को बुधवार को संयुक्त राष्ट्र में भारत का स्थायी प्रतिनिधि नियुक्त किया गया है। वह सैयद अकबरुद्दीन का स्थान लेंगे जो पिछले कई वर्षो से संयुक्त राष्ट्र में भारत का पक्ष मजबूती से रखते रहे हैं।
  • विदेश मंत्रालय के अनुसार 1985 बैच के भारतीय विदेश सेवा (आइएफएस) अधिकारी त्रिमूर्ति को संयुक्त राष्ट्र में राजदूत या स्थायी प्रतिनिधि नियुक्त किया गया है। फिलहाल वह विदेश मंत्रालय में सचिव (इकोनॉमिक रिलेशन) की जिम्मेदारी निभा रहे हैं।

विभिन्न देशों में राजदूतों की नियुक्ति

  • राजनयिक फेरबदल के तहत जयदीप मजूमदार को ऑस्टि्रया में भारत का राजदूत नियुक्त किया गया है।
  • दीपक मित्तल को खाड़ी क्षेत्र के प्रमुख देश कतर में भारत का राजदूत बनाया गया है।
  • वरिष्ठ राजनयिक पीयूष श्रीवास्तव को बहरीन में भारत का अगला राजदूत नियुक्त किया गया है।
  • सरकार ने नम्रता एस. कुमार को स्लोवेनिया में अपना राजदूत नियुक्त किया है।

:: प्रिलिम्स बूस्टर ::

  • भारत को अग्रणी मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने हेतु “Restart, Restore and Resurgence” किस औद्योगिक क्षेत्रक की पहल है? (इलेक्ट्रॉनिक्स व मोबाइल मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र)

  • राइट ऑफ(write-off) और लोन वेवर (loan waiver) में मुख्य रूप से क्या अंतर होता है? (राइट ऑफ में ऋण की वसूली होती है, लोन वेवर में ऋण माफ कर दिया जाता है)

  • हाल ही में किसे संयुक्त राष्ट्र में भारत का स्थायी प्रतिनिधि  के रूप में नियुक्त किया गया है? (टीएस त्रिमूर्ति)

  • अमेरिका के द्वारा किस दिग्गज ई कामर्स कंपनी के 5 डोमेन पर टेडमार्क धोखाधड़ी और कॉपीराइट पाइरेसी के आधार पर "कुख्यात बाजारों" की सूची में डाल दिया गया है? (अमेज़न)

  • हाल ही में किसे सतर्कता आयुक्त के रूप में नियुक्ति प्रदान की गई? (श्री सुरेश एन पटेल)

  • चर्चा में रहे प्राकृतिक उत्पाद बर्बेरिन (Berberine) से प्राप्त ‘बेर-डी’ का उपयोग किस रोग के इलाज में किया जाएगा? (अल्जाइमर)

  • हाल ही में चर्चा में रहे ‘फैंटम लैंस-PhantomLance’ क्या है एवं किस समूह द्वारा विकसित किया गया है? (स्पाइवेयर-Spyware, ओसेन लोटस OceanLotus)

  • किस देश के द्वारा स्नैपडील समेत टैंक रोड(दिल्ली), हीरा-पन्ना( मुंबई), किड्डरपोर(कोलकाता) और मिलेनियम सेंटर(आइजोल) जैसे बाजारों को काली सूची में रखा गया है? (अमेरिका)

  • हाल ही में चर्चा में रहे समानीकरण कर (Equalisation Levy) किन कंपनियों पर लगाए जाते हैं? (गैर निवासी या विदेशी ई वाणिज्य कंपनियों पर)

  • हाल ही में किस दुर्लभ रोग के कारण मशहूर अभिनेता इरफान खान का निधन हो गया? (न्यूरो एंड्रोक्राइन ट्यूमर-Neuroendocrine tumor)

  • NEET प्रवेश परीक्षा लागू नहीं करने के लिए गैर-सहायता प्राप्त निजी अल्पसंख्यक संस्थानों ने संविधान के किस अनुच्छेद के तहत चुनौती दी थी? (अनुच्छेद 30)

 

 

 

स्रोत साभार: Dainik Jagran (Rashtriya Sanskaran), Dainik Bhaskar (Rashtriya Sanskaran), Rashtriya Sahara (Rashtriya Sanskaran) Hindustan Dainik (Delhi), Nai Duniya, Hindustan Times, The Hindu, BBC Portal, The Economic Times (Hindi & English), PTI, PIB

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