(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (3 जून 2020)

दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर


(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (3 जून 2020)


:: राष्ट्रीय समाचार ::

बिमल जुल्का समिति

चर्चा में क्यों?

  • सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अंतर्गत आने वाली फिल्म मीडिया इकाइयों को तर्कसंगत बनाने / बंद करने / विलय करने तथा मंत्रालय के अंतर्गत स्वायत्त निकायों की समीक्षा पर गठित विशेषज्ञ समितियों ने अपनी रिपोर्टें सूचना एवं प्रसारण मंत्री श्री प्रकाश जावडेकर को सौंपी।

बिमल जुल्का समिति के बारे में

  • श्री बिमल जुल्का के अधीन नियुक्त इन समितियों को फिल्म गतिविधियों से संबंधित संस्थानों को तर्कसंगत बनाने और व्यावसायिकता के लिए की अध्यक्षता में समितियों की नियुक्ति की गई थी। इस समिति की आठ बैठक हुईं थीं और राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम, फिल्म डिवीजन, चिल्ड्रंस फिल्म सोसायटी ऑफ इंडिया, सत्यजित रे फिल्म और टेलीविजन संस्थान, फिल्म महोत्सव निदेशालय और भारत के राष्ट्रीय फिल्म संग्रहालय आदि के विकास के लिए एक विशेष रोडमैप सुझाया गया। समिति ने कई संस्थानों द्वारा समान गतिविधियों का संचालन पाया और 4 व्यापक कार्यक्षेत्रों के साथ एक प्रमुख संगठन (अम्ब्रेला ऑर्गनाइजेशन) बनाने का सुझाव दिया गया है, जिसके अंतर्गत संस्थानों को उत्पादन, महोत्सव, विरासत और ज्ञान जैसे कार्य करने चाहिए। इन क्षेत्रों की अगुआई पेशेवर लोगों द्वारा की जाएगी। रिपोर्ट में व्यावसायिक फिल्मों के निर्माण के लिए स्वतंत्र फिल्म निर्माताओं को वित्तपोषण के लिए फिल्म प्रमोशन फंड के निर्माण का सुझाव दिया गया है।
  • स्वायत्त संस्थानों की समीक्षा के लिए गठित श्री बिमल जुल्का की अध्यक्षता वाली विशेषज्ञ समिति में श्री राहुल रवेल, श्री ए. के. बीर, श्री श्यामा प्रसाद और श्री टी. एस. नागाभराना जैसी प्रमुख फिल्मी हस्तियों के अलावा विशेष सचिव और वित्तीय सलाहकार (आई एंड बी) तथा संयुक्त सचिव (फिल्म) सदस्य के रूप में शामिल रहे।
  • फिल्म मीडिया इकाइयों को तर्कसंगत बनाने / बंद करने / विलय करने पर गठित विशेषज्ञ समिति के प्रमुख श्री बिमल जुल्का थे। इस समिति के अन्य सदस्य श्री राहुल रवेल, श्री ए. के. बीर, श्री श्यामा प्रसाद, श्री टी. एस. नागाभराना, विशेष सचिव और वित्तीय सलाहकार (आई एंड बी), एमडी एनएफडीसी, सीईओ सीएफएसआई, निदेशक एनएफएआई, निदेशक डीएफएफ, डीजी फिल्म फिल्म डिवीजन और संयुक्त सचिव (फिल्म) सदस्य के रूप में शामिल रहे।

पृष्ठभूमि

स्वायत्त संस्थानों की समीक्षा पर विशेषज्ञ समिति के लिए विचारार्थ विषय इस प्रकार थे :

  • मेमोरैंडम ऑफ एसोसिएशन के अंतर्गत भारतीय फिल्म एवं टेलीविजन संस्थान (एफटीआईआई), सत्यजीत रे फिल्म और टेलीविजन संस्थान (एसआरएफटीआई) और चिल्ड्रंस फिल्म सोसायटी ऑफ इंडिया के प्रदर्शन की समीक्षा की गई। क्या इन संस्थानों ने उन लक्ष्यों को हासिल किया जिनके लिए उनकी स्थापना की गई थी/ कौन सी कमियां रहीं और उनकी वजह।
  • क्या ये अभी भी औचित्यपूर्ण हैं और “सार्वजनिक उद्देश्य” को पूरा करने के लिए जारी रखे जाने के बारे में आकलन के लिए इन संस्थानों के उद्देश्यों की समीक्षा। यह आकलन करना कि क्या सरकारी या निजी क्षेत्र की अन्य इकाइयों द्वारा ज्यादा कुशलता से इन सार्वजनिक उद्देश्यों को पूरा किया जा सकता है। क्या गतिविधियों की प्रकृति ऐसी है कि उन्हें सिर्फ एक स्वायत्त संगठन द्वारा ही किए जाने की आवश्यकता है। यह सुझाव देना कि क्या सरकार इनके निगमीकरण, विलय और विघटन या इन संस्थानों को बंद करने पर विचार कर सकती है।
  • क्या उपयोग शुल्क उचित दर पर लगाए गए हैं और दीर्घकाल में संस्थान को वित्तीय रूप से आत्म निर्भर बनाने के लिए राजस्व अर्जित करने में सुधार के लिए उपाय सुझाना। उपयोग शुल्कों को जोड़ने के लिए उचित मूल्य सूचकांकों के बारे में भी सुझाव देना। कामकाज में परिचालन और लागत कुशलता लाने के लिए इन संस्थानों द्वारा किए गए व्यय की समीक्षा करना।
  • सीपीएसई की तर्ज पर मंत्रालय संस्थान के बीच होने वाले सहमति ज्ञापन का मसौदा सुझाना और इस उद्देश्य से आगे किए जाने वाले कार्यों के लिए प्रदर्शन मानदंड और रोडमैप तैयार करना।
  • एफटीआईआई और एसआरएफटीआई में प्रशासन में प्रभावशीलता और पारदर्शिता, खरीद प्रणाली की पारदर्शिता, छात्र शिकायत निवारण तंत्र की समीक्षा और कैम्पस में उचित अनुशासन बनाए रखना।

फिल्म मीडिया इकाइयों को तर्कसंगत बनाने / बंद करने / विलय करने पर गठित विशेषज्ञ समिति के विचारार्थ विषय :

  • एनएफडीसी और सीएफएसआई के कामकाज की समीक्षा
  • क्या एनएफडीसी और सीएफएसआई को बंद करने की जरूरत है और आवश्यकता पड़ने पर दूसरे विकल्पों को तलाशना चाहिए, इस बारे में सिफारिश देना।
  • प्रस्तावित प्रमुख संगठन (अम्ब्रेला ऑर्गनाइजेशन) यानी सरकारी संगठन, एक पीएसयू या एक स्वायत्त संगठन के स्वरूप को अंतिम रूप देना।
  • सभी मीडिया इकाइयों के अधिकार क्षेत्र की समीक्षा के बाद प्रस्तावित अम्ब्रेला ऑर्गनाइजेशन के अधिकार क्षेत्र को अंतिम रूप देना।
  • प्रस्तावित अम्ब्रेल ऑर्गनाइजेशन के संगठनात्मक ढांचे को अंतिम रूप देना।

नई राष्ट्रीय विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवोन्मेष नीति (STIP)

चर्चा में क्यों?

  • एसटीआईपी के लिए भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के कार्यालय तथा विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग की ओर से संयुक्त रूप से विकेंद्रीकृत, व्यापक और समावेशी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
  • भारत सरकार की ओर से पांचवी विज्ञान और प्रौद्योगिकी नीति एक ऐसे महत्वपूर्ण समय में बनाई जा रही है जब पूरी दुनिया कोविड माहामारी के संकट से जूझ रही है। यह पिछले एक दशक में हुए कई ऐसे महत्वपूर्ण परिवर्तनों के बीच नवीनतम है, जिसमें विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवप्रवर्तन के लिए एक नए दृष्टिकोण और रणनीति की आवश्यकता महसूस की गई। जिस तरह के नए संकटो का दुनिया को सामना करना पड़ रहा है वैसे हालात में यह नई नीति अपने विकेन्द्रीकृत तरीकों से प्राथमिकताओं वाले क्षेत्र तय करेगी। यह निर्धारित करेगी की किन क्षेत्रों पर ज्यादा ध्यान दिया जाना है। अनुसंधान के तरीके कैसे होने चाहिए तथा सामाजिक और आर्थिक कल्याण के लिए प्रौद्योगिकी का किस पैमाने पर इस्तेमाल किया जा सकता है।

नयी नीति के निर्माण से सम्बंधित महत्वपूर्ण तथ्य

  • नई नीति बनाने की प्रक्रिया में चार महत्वपूर्ण चरण शामिल किए गए हैं।
  1. पहले चरण के तहत विज्ञान नीति फोरम के माध्यम से एक व्यापक सार्वजनिक और विशेषज्ञ परामर्श प्रक्रिया निर्धारित की गई है। विज्ञान नीति फोरम नीति प्रारूपण प्रक्रिया के दौरान और बाद में बड़े सार्वजनिक और विशेषज्ञ पूल से इनपुट प्राप्त करने के लिए एक समर्पित मंच है।
  2. नीति-निर्माण प्रक्रिया के दूसरे चरण में साक्ष्य-आधारित सिफारिशों को फीड करने के लिए विशेषज्ञों के विषयगत परामर्श शामिल हैं। इसके लिए इक्कीस केंद्रित विषयगत समूहों का गठन किया गया है।
  3. तीसरे चरण में मंत्रालयों और राज्यों के साथ परामर्श प्रक्रिया शामिल की गई है जबकि चौथे चरण में शीर्ष स्तर पर विभिन्न-हितधारकों के साथ परामर्श की व्यवस्था की गई है। तीसरे चरण में विभिन्न मंत्रालयों और राज्यों के बीच व्यापक स्तर पर विचार विमर्श के लिए राज्यों, मंत्रालयों और एजेंसियों में नोडल अधिकारी नियुक्त किए जा रहे हैं।
  • विभिन्न चरणों में परामर्श प्रक्रियाएं शुरू हो चुकी हैं और समानांतर रूप से चल रही हैं। दूसरे चरण का विषयगत समूह परामर्श पिछले सप्ताह सूचना सत्रों की एक श्रृंखला के साथ शुरू हुआ। सूचना सत्र के दौरान, डीएसटी के नीति समन्वय और कार्यक्रम निगरानी प्रभाग के प्रमुखडॉ अखिलेश गुप्ता ने प्रस्तुतियां दीं और चर्चाओं को आगे बढ़ाया। सत्रों में 21 नीतिगत समूहों के लगभग 130 सदस्यों के साथ 25 नीति अनुसंधान अध्येताओं और डीएसटी और पीएसए के कार्यालय के वैज्ञानिकों ने भाग लिया।
  • “विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव प्रोफेसर आशुतोष शर्मा ने कहा “न्यू इंडिया के लिए बनाई जा रही नई विज्ञान और प्रौद्योगिकी नीति में कोविड महामारी से मिले सबक को भी शामिल किया जाएगा। इसमें विज्ञान और प्रौद्योगिकी तथा नवाचार के माध्यम से अनुसंधान और विकास तथा विशाल बाजारों और जनसांख्यिकीय लाभांश की हमारी ताकत का लाभ उठाते हुए एक आत्मनिर्भर भारत के निर्माण का लक्ष्य शामिल किया गया है।”
  • नीति निमार्ण की छह महीने की प्रक्रिया में देश के वैज्ञानिक पारिस्थितिक तंत्र के बाहर और भीतर सभी हितधारकों के अलावा शिक्षा, उद्योग, सरकार, वैश्विक साझेदार, युवा वैज्ञानिक और प्रौद्योगिकीविद्, नागरिक निकाय और आम जनता के साथ व्यापक परामर्श किया जाना शामिल है।
  • डीएसटी-एसटीआई नीति फेलोशिप प्राप्तकर्ताओं के कैडर को शामिल करते हुए इन-हाउस पॉलिसी नॉलेज और डेटा सपोर्ट यूनिट के साथ एक सचिवालय (प्रौद्योगिकी भवन) में स्थापित किया गया है ताकि चार चरणों की परामर्श प्रक्रिया के बीच परस्पर समन्वय बनाया जा सके।

‘जल जीवन मिशन’

चर्चा में क्यों?

  • उगते सूरज की भूमि अरुणाचल प्रदेश द्वारा अपने यहां 100% घरेलू नल कनेक्शनों के लक्ष्यन को प्राप्त करने के लिए बनाई गई वार्षिक कार्य योजना को राष्ट्रीय जल जीवन मिशन, जल शक्ति मंत्रालय ने मंजूरी दे दी। इस राज्य ने मार्च, 2023 तक सभी परिवारों को 100% नल कनेक्शन प्रदान करने का प्रस्ताव रखा।
  • अरुणाचल प्रदेश में पानी की उपलब्धता कोई मुद्दा नहीं है, लेकिन योजना के कार्यान्वयन में आने वाली चुनौतियां दुर्गम पहाड़ी इलाका, बिखरी हुई बस्तियां और कठोर जलवायु परिस्थितियां हैं। हालांकि, राज्य सरकार ने सभी गांवों/बस्तियों को कवर करने के लिए एक सुव्यमवस्थित योजना बनाई है, ताकि हर ग्रामीण परिवार के यहां पेयजल पहुंच सके। ‘जल जीवन मिशन’ दरअसल राज्य को अपने नागरिकों के घरों में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने का एक सुनहरा अवसर प्रदान करता है, ताकि महिलाओं और लड़कियों का इससे जुड़ा बोझ कम हो सके।
  • जम्मू-कश्मीर ने जल जीवन मिशन के तहत नल जल आपूर्ति के साथ हर घर के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए अपनी कार्ययोजना प्रस्तुत की है। यूटी में 18.17 लाख परिवारों हैं 5.75 लाख परिवारों के पास एफएचटीसी उपलब्ध है। इस में से वर्ष 2020-21 तक जम्मू-कश्मीर में 1.76 लाख परिवार को एफएचटीसी उपलब्ध कराने की योजना बनाई गयी है व चालू वर्ष में यूटी 3 जिले यानी गांधारबल, श्रीनगर और रायसी के सभी 5,000 गांवों को शत-प्रतिशत एफएचटीसी कवरेज की योजना है इस वित्त वर्ष में केंद्रीय हिस्सेदारी के रूप मैं 681 करोड़ रुपये यूटी सरकार को दिए गये हैं। यूटी 2024-25 तक राष्ट्रीय लक्ष्य से पहले दिसंबर 2022 तक 100% कवरेज की योजना बना रहा है। ऐसा करके, जम्मू-कश्मीर नल कनेक्शन प्रदान करने के महत्वाकांक्षी लक्ष्य को पूरा करने के लिए एक अग्रणी उदाहरण होगा।

क्या है ‘जल जीवन मिशन’

  • प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्रि मोदी ने वर्ष 2024 तक देश के हर ग्रामीण परिवार को कार्यात्मक घरेलू नल कनेक्शन प्रदान करने के उद्देश्य से 15 अगस्त, 2019 को ‘जल जीवन मिशन’ की घोषणा की थी। राज्यों के साथ साझेदारी में कार्यान्वित किए जा रहे इस मिशन का लक्ष्य हर ग्रामीण परिवार को नियमित और दीर्घकालिक आधार पर 55 लीटर प्रति व्यक्ति प्रति दिन (एलपीसीडी) के सेवा स्तर (सर्विस लेवल) पर पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करना है, ताकि ग्रामीणों के जीवन स्तिर को बे‍हतर किया जा सके।

नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन, इंडिया (एनआईएफ)

चर्चा में क्यों?

  • विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के स्वायत्त निकाय नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन, इंडिया (एनआईएफ) ने हाल ही में आम लोगों के द्वारा बनाए दो अभिनव कीटाणुशोधन समाधानों को समर्थन दिया है जिन्हें एनआईएफ ने अपने चैलेंज कोविड-19 कॉम्पिटिशन (सी3) की प्रतिक्रिया के रूप में प्राप्त किया था।
  • इस अभियान के तहत हाल ही में समर्थित इन नवीन समाधानों में से एक तो वाहन कीटाणुशोधक कक्ष है और दूसरा, पैर से संचालित होने वाला हाइट एडजस्टेबल हैंड फ्री सेनिटाइज़र डिस्पेंसर स्टैंड है।

क्या है नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन(NIF)

  • राष्ट्रीय नवप्रवर्तन प्रतिष्ठान (नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन-NIF) ने मार्च, 2000 में ग्रासरूट प्रौद्योगिकीय नवप्रवर्तनों एवं विशिष्ट पारंपरिक ज्ञान को सशक्त करने की भारत की राष्ट्रीय पहल के रूप में कार्य करना आरंभ किया। इसका मिशन है कि भारत एक सृजनात्मक एवं ज्ञान आधारित समाज बने और ऐसा ग्रासरूट प्रौद्योगिकीय नवप्रवर्तकों हेतु नीतियों के विस्तार तथा सांस्थानिक स्पेस को बढ़ाते हुए किया जाना संभव है। NIF उन ग्रासरूट नवप्रवर्तकों को खोजने के लिए प्रतिबद्ध है जिन्होंने बिना किसी बाहरी मदद के मानव उत्तरजीविता के किसी भी क्षेत्र में कोई प्रौद्योगिकीय नवप्रवर्तन विकसित किया हो।

:: अंतर्राष्ट्रीय समाचार ::

एंटिफा को आतंकी संगठन घोषित करेगा अमेरिका

  • अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि मिनीसोटा में एक श्वेत पुलिस अधिकारी द्वारा एक अश्वेत व्यक्ति के मारे जाने के बाद देश भर में भड़की हिंसा में भूमिका को लेकर अमेरिका वाम चरमपंथी समूह ‘एंटिफा’ को आतंकवादी संगठनों की सूची में शामिल करेगा।

क्या है एंटिफा?

  • ‘एंटिफा’ को अमेरिका में उग्रवादी, वाम संगठन, फासीवादी विरोधी आंदोलन के रूप में जाना जाता है। इससे ऐसे कार्यकर्ता समूह जुड़े हैं जो अपने राजनीतिक उद्देश्य नीतिगत सुधारों की जगह प्रत्यक्ष कार्रवाई के इस्तेमाल से हासिल करना चाहते हैं।

पृष्ठभूमि

  • मिनीपोलिस में जॉर्ज फ्लोयड की मौत के बाद देश भर में हिंसक प्रदर्शनों के अचानक बढ़ने का आरोप ट्रंप प्रशासन ने इस वाम चरमपंथी समूह पर लगाया है। अटॉर्नी जनरल विलियम पी बार ने एक बयान में कहा, ‘‘एंटिफा और इस तरह के अन्य समूहों द्वारा की गई तथा भड़काई गई हिंसा घरेलू आतंकवाद है और इससे तदनुसार निपटा जाएगा।’’ अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रॉबर्ट ओ ब्रायन ने सीएनएन के साथ ‘संडे टॉक शो’ में कहा कि राष्ट्रपति और अटॉर्नी जनरल एफबीआई से जानना चाहते हैं कि वह एंटिफा से जुड़े लोगों का पता लगाने और उन पर अभियोग चलाने को लेकर क्या कर रही है।

कोहला हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट

  • भारत की आपत्तियों के बावजूद PoK में चीन पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) के तहत बीजिंग 1,124 मेगावाट का पावर प्रोजेक्ट स्थापित करने की योजना बना रहा है। हजारों करोड़ डॉलर की लागत वाले CPEC प्रोजेक्ट के तहत कोहला हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट (Kohala hydropower project) को ऊर्जा मंत्री उमर अयूब की अध्यक्षता में हुई प्राइवेट पावर एंड इंफ्रास्ट्रक्चर बोर्ड की 127वीं बैठक में पेश किया गया था।
  • कश्मीर में बहने वाली झेलम नदी के ऊपर इस प्रोजेक्ट का निर्माण होगा। इसका उद्देश्य पाकिस्तान के लोगों को पांच अरब से ज्यादा साफ और कम लागत वाली बिजली की यूनिट उपलब्ध करानी है।
  • इसमें चीन की थ्री जॉर्ज कॉर्पोरेशन, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के अधिकारी और निजी पावर और इंफ्रास्ट्रक्चर बोर्ड (पीपीआईबी) की सहमति बनी। जिसके तहत पीओके में 1,124 मेगावाट का हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर प्रोजेक्ट तैयार किया जाएगा।

क्या है चीन पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) परियोजना?

  • तीन हजार किलोमीटर लंबे चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे का मुख्य उद्देश्य चीन और पाकिस्तान को आपस में रेल, सड़क, पाइपलाइन और ऑप्टिकल केबल फाइबर नेटवर्क के जरिए जोड़ना है। ये गलियारा चीन के शिंजियांग और पाकिस्तान के ग्वादर बंदरहगाह को जोड़ेगा और चीन की अरब सागर तक भी पहुंच बढ़ जाएगी।

:: अर्थव्यवस्था ::

भारतीय उद्योग परिसंघ (CII)

चर्चा में क्यों?

  • प्रधानमंत्री ने भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के 125वें वार्षिक सत्र में वीडियो कॉन्फ्रें स के जरिये उद्घाटन भाषण दिया। इस वर्ष के वार्षिक सम्मेयलन की विषय वस्तुआ है ‘’ नये विश्वे के लिए भारत निर्माण : जीवन, आजीविका, विकास’’।

क्या है भारतीय उद्योग परिसंघ?

  • CII भारत की एक गैर-सरकारी, गैर- लाभकारी, संगठन है जिसका उद्देश्य उद्योग का नेतृत्व करना है। CII भारत के औद्योगिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। CII की स्थापना वर्ष 1895 में हुई थी एवं इस संगठन का मुख्यालय नई दिल्ली में है। इस संगठन के वर्तमान अध्यक्ष विक्रम किर्लोस्कर है।

राष्ट्रीय उत्पादकता परिषद

चर्चा में क्यों?

  • केन्द्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल ने डीपीआईआईटी के स्वायत्त संगठन राष्ट्रीय उत्पादकता परिषद (एनपीसी) की एक ऑनलाइन समीक्षा बैठक ली।

बैठक से जुड़ें महत्वपूर्ण बिंदु

  • राष्ट्रीय उत्पादकता परिषद (एनपीसी) की क्षमता का ज्यादा दोहन किया जा सकता है और वह सरकार, सार्वजनिक के साथ ही निजी क्षेत्र में सक्रिय उद्योग, एसएमई तथा अन्य संगठनों के साथ ज्यादा नजदीक से जुड़कर काम कर सकता है।
  • एमएसएमई क्षेत्र में लीन मैन्यूफैक्चरिंग (ऐसी व्यवस्था जिसमें ज्यादा उत्पादन और कम बर्बादी होती है) के कार्यान्वयन में एनपीसी के सफल अनुभव को ज्यादा से ज्यादा एमएसएमई को फायदा पहुंचाने के लिए योजनाओं के विस्तार में भुनाने की जरूरत है।
  • इसी प्रकार, नदी और समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र में प्लास्टिक के कूड़े पर हाल में हुए आकलन अध्ययन का भारत को प्लास्टिक मुक्त बनाने के उद्देश्य से दूसरे शहरों तक विस्तार किए जाने की जरूरत है।
  • ज्यादा दक्षता लाने के उद्देश्य से “बॉयलर प्रमाणन के लिए कुशल लोगों को प्रशिक्षण और प्रमाणन” की वर्तमान योजना की समीक्षा किए जाने की जरूरत है।
  • केन्द्रीय मंत्री ने एनपीसी से परामर्श और क्षमता निर्माण सेवाओं का सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों तक विस्तार के माध्यम से 2024 तक अपना राजस्व 300 करोड़ रुपये तक पहुंचाने का आह्वान किया।
  • एनपीसी को स्वचालित स्थानांतरण एवं पोस्टिंग प्रणाली के दिल्ली पुलिस मॉडल को रेलवे सहित अन्य सरकारी संगठनों में लागू किया जाना चाहिए। इस मॉडल को एनपीसी के द्वारा ही विकसित किया गया था। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि एनपीसी, भारतीय रेल को अपनी सेवाएं दे सकता है जो देश में सबसे बड़ा सरकारी नियोक्ता है।

क्या है राष्ट्रीय उत्पादकता परिषद?

  • 1958 में स्थापित राष्ट्रीय उत्पादकता परिषद ऊर्जा, पर्यावरण, व्यावसायिक प्रक्रिया और उत्पादकता सुधार के क्षेत्र में परामर्श एवं क्षमता निर्माण से संबंधित विशेषज्ञ सेवाएं देती है।

मूडीज ने भारत की रेटिंग घटाकर ‘बीएए3’ की

  • रेटिंग एजेंसी मूडीज़ इनवेस्टर्स सर्विस ने सोमवार को भारत की सावरेन (राष्ट्रीय) रेटिंग को ‘बीएए2’ से घटाकर ‘बीएए3’ कर दिया। एजेंसी का कहना है कि निम्न आर्थिक वृद्धि और बिगड़ती वित्तीय स्थिति के चलते जोखिम कम करने वाली नीतियों के क्रियान्वयन में चुनौतियां खड़ी होंगी। एजेंसी ने एक वक्तव्य में कहा है, ‘‘मूडीज़ ने सोमवार को भारत सरकार की विदेशी मुद्रा और स्थानीय मुद्रा में अंकित दीर्घकालिक इश्यू (प्रतिभूतियों) की रेटिंग बीएए2 से घटाकर बीएए3 कर दिया है। ’’
  • ‘बीएए3’ सबसे निचली निवेश ग्रेड वाली रेटिंग है। इसके नीचे कबाड़ वाली रेटिंग ही बचती है। एजेंसी ने कहा, ‘‘मूडीज ने भारत की स्थानीय मुद्रा वरिष्ठ बिना गारंटी वाली रेटिंग को बीएए2 से घटाकर बीएए3 कर दिया है। इसके साथ ही अल्पकालिक स्थानीय मुद्रा रेटिंग को भी पी-2से घटाकर पी-3 पर ला दिया गया है।’’ वक्तव्य में कहा गया है कि नकारात्मक परिदृश्य में अर्थव्यवस्था और वित्तीय प्रणाली में गहरा दबाव दिखाई देता है जिसके और नीचे जाने का जोखिम है। यह स्थिति मूडीज के मौजूदा अनुमान के मुकाबले वित्तीय मजबूती को अधिक गहरा और लंबा नुकसान पहुंचा सकती है। मूडीज़ ने इससे पहले नवंबर 2017 में 13 साल के अंतराल के बाद भारत की सावरेन क्रेडिट रेटिंग को एक पायदान चढ़ाकर बीएए2 किया था।

एनर्जीप्रो एसेट्स लिमिटेड (ईपीएएल) ब्रिटेन में सबसे तेजी से वृद्धि दर्ज करने वाली भारतीय कंपनी

  • ऊर्जा दक्षता को बढ़ावा देने वाली सार्वजनिक क्षेत्र की एनर्जी एफिशिएंसी सर्विसेज़ लिमिटेड (ईईएसएल) की संयुक्तं उद्यम कंपनी एनर्जीप्रो एसेट्स लिमिटेड (ईपीएएल) ब्रिटेन में सबसे तेजी से विकास करने वाली भारतीय कंपनी के रूप में उभरी है।
  • कंपनी ने उद्योग मंडल भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) तथा ग्रांट थॉर्नटन द्वारा विकसित ‘इंडिया मीट्स ब्रिटेन ट्रैकर 2020’ में ब्रिटेन में सबस तेजी से बढ़ने वाली भारतीय कंपनी का दर्जा हासिल किया है।
  • ग्रांट थॉर्नटन एंड सीआईआई द्वारा 842 भारतीय-ब्रिटिश कंपनियों के बीच कामकाज को लेकर किये गये सर्वे में ईईएसएल और ब्रिटेन की कंपनी एनर्जीप्रो एसेट मैनेजमेंट लिमिटेड (ईपीएएम) की संयुक्त उद्यम कंपनी शीर्ष स्थान पर रही।
  • फिल्म मीडिया इकाइयों को तर्कसंगत बनाने तथा स्वायत्त निकायों की समीक्षा पर गठित विशेषज्ञ समितियों ने अपनी रिपोर्टें सौंपी

रसायन और पेट्रोरसायन की सार्वजनिक खरीद को अनिवार्य बनाया गया

  • उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) ने आय और रोजगार बढ़ाने के इरादे से हाल ही में मेक इन इंडिया को प्रोत्साहित करने और भारत में वस्तुओं के विनिर्माण और उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए सार्वजनिक खरीद (मेक इन इंडिया को प्राथमिकता) 2017 के आदेश को संशोधित किया है।
  • यह कदम प्रधानमंत्री द्वारा शुरू किए गए आत्मनिर्भर भारत अभियान को सशक्त बनाएगा और “मेक इन इंडिया” के तहत घरेलू उत्पादन को भी बढ़ावा देगा।
  • क्या बदलाव किये गए
  • रसायन और पेट्रोरसायन विभाग ने घरेलू रसायन और पेट्रोरसायन उद्योग की मौजूदा क्षमता और स्थानीय प्रतिस्पर्धा की सीमाओं के आकलन के आधार पर स्थानीय सामग्री का न्यूतनम स्तर और उनकी गणना के तरीके तय करते हुए सार्वजनिक खरीद वाले पेट्रोरसायनों की पहचान की है। इस क्रम में 55 विभिन्न प्रकार के रसायनों, पेट्रोरसायनों , कीटनाशकों और डाइस्टफ की पहचान की गई है। इन रसायनों और पेट्रोरसायनों के लिए न्यूनतम स्थानीय सामग्री की अनिवार्यता वर्ष 2020-2021 के लिए 60 प्रतिशत, 2021-2023 के लिए 70 प्रतिशत और 2023 -2025 के लिए 80 प्रतिशत निर्धारित की गई है। विभाग द्वारा चिन्हित किए गए 55 प्रकार के रसायनों और पेट्रोरसायनों में से 27 के लिए स्थानीय आपूर्तिकर्ता पांच लाख रूपए से अधिक और 50 लाख रूपए से कम के अनुमानित मूल्य की बोली लगाने के पात्र होंगे। शेष 28 रसायन और पेट्रोरसायनों के संबंध में, खरीद करने वाली संस्थाएं बोली लगाए जाने की व्यवस्था होने के बावजूद स्थानीय आपूर्तिकर्ताओं से ही इनकी खरीद करेंगी क्योंकि ऐसी सामग्रियों के लिए स्थानीय स्तर पर पर्याप्त उत्पादन क्षमता और प्रतिस्पर्धा मौजूद है।

इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए नयी नीतियों की घोषणा

  • प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आत्म निर्भर भारत का स्पष्ट आह्वान किया है। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्री श्री रवि शंकर प्रसाद कहते रहे हैं कि इसका यह अर्थ नहीं है कि भारत आइसोलेशन में है, बल्कि भारत उपयुक्त प्रौद्योगिकी, एफडीआई सहित पूंजी और असाधारण मानव संसाधन के साथ वैश्विक अर्थव्यवस्था में उल्लेखनीय योगदान देने वाला एक प्रमुख देश है।

किन योजनाओं को प्रारंभ किया गया है?

  • एक मजबूत विनिर्माण तंत्र, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था में एक परिसंपत्ति होगा, का निर्माण करने के उद्वेश्य से हम पूरी मूल्य श्रृंखला में एक मजबूत तंत्र का विकास करने और इसे वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं के साथ समेकित करने की योजना बना रहे हैं। इन तीन योजनाओं, जिनके नाम हैं- (1) बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के लिए उत्पादन लिंक्ड प्रोत्साहन स्कीम (पीएलआई), (2) इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट एवं सेमीकंडक्टरों के विनिर्माण के संवर्धन के लिए स्कीम (एसपीईसीएस) तथा (3) संशोधित इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्लस्टर (ईएमसी 2.0) स्कीम का सार तत्व है।
  • पीएलआई स्कीम भारत में विनिर्मित एवं टारगेट सेगमेंटों के तहत कवर्ड वस्तुओं की संवृद्धि बिक्री (आधार वर्ष पर) पर पात्र कंपनियों को आधार वर्ष के बाद के पांच वर्षों की अवधि के लिए 4 प्रतिशत से 6 प्रतिशत का प्रोत्साहन प्रदान करेगी। एसपीईसीएस इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं अर्थात इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट, सेमीकंडक्टर/डिस्प्ले फैब्रीकेशन इकाइयों, असेंबली, टेस्ट, मार्किंग एवं पैकेजिंग (एटीएमपी) इकाइयों, स्पेशलाइज्ड सब-असेंबलीज एवं उपरोक्त वस्तुओं के निर्माण के लिए पूंजीगत वस्तुओं की चिन्हित सूची के लिए पूंजीगत व्यय पर 25 प्रतिशत का वित्तीय प्रोत्साहन उपलब्ध कराएगी। ईएमसी प्रमुख वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माताओं को उनकी आपूर्ति श्रृंखलाओं के साथ साथ आकर्षित करने के लिए 2.0 रेडी बिल्ट फैक्टरी (आरबीएफ) शेड्स/ प्लग एंड प्ले सुविधाओं सहित सामान्य फैसिलिटीज एवं सुविधाओं के साथ साथ विश्व स्तरीय अवसंरचना के सृजन के लिए सहायता उपलब्ध कराएगी।
  • इन तीनों स्कीमों के लिए लगभग 50,000 करोड़ रुपये (लगभग 7 बिलियन डालर) की आवश्यकता है। ये योजनाएं घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के लिए कमी को खत्म करने में मदद करेगी और इस प्रकार, देश में इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण तंत्र को मजबूत बनायेंगी। तीनों योजनाएं एक साथ मिल कर बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण, कंपोनेंट्स की घरेलू आपूर्ति श्रृंखला तथा अत्याधुनिक अवसंरचना तथा बड़ी एंकर इकाइयों तथा उनकी आपूर्ति श्रृंखला साझीदारों के लिए सामान्य सुविधाओं में सक्षम बनाएंगी। ये योजनाएं 1 ट्रिलियन डालर डिजिटल अर्थव्यवस्था तथा 2025 तक 5 ट्रिलियन डालर जीडीपी अर्जित करने में उल्लेखनीय रूप से योगदान देंगी।
  • इन तीनों नई येाजनाओं से उल्लेखनीय निवेश आकर्षित होने, मोबाइल फोनों के उत्पादन में बढोत्तरी होने और उनके पार्ट्स/कंपोनेंट्स के 2025 तक लगभग 10,00,000 करोड़ रूपये के होने तथा लगभग 5 लाख प्रत्यक्ष और 15 लाख अप्रत्यक्ष रोजगारों के सृजित होने की उम्मीद है।

इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के सन्दर्भ में वर्तमान स्थिति

  • इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण का संवर्धन मेक इन इंडिया कार्यक्रम का एक प्रमुख घटक रहा है। राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स नीति, 2019, संशोधित विशेष प्रोत्साहन स्कीम (एमएसआईपीएस), इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्लस्टर तथा इलेक्ट्रॉनिक्स विकास फंड जैसे प्रयासों के कारण भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन 2014 के 29 बिलियन डालर से बढ़कर 2019 में 70 बिलियन डालर तक पहुंच गया।
  • विशेष रूप से, मोबाइल फोन विनिर्माण की बढोत्तरी इस अवधि के दौरान उल्लेखनीय रही है। 2014 में केवल दो मोबाइल फैक्टरियों की तुलना में, भारत अब विश्व में दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन उत्पादक बन गया है। 2018-19 में मोबाइल हैंडसेटों का उत्पादन 29 करोड़ इकाइयों तक पहुंच गया जो 1.70 लाख करोड़ रुपये के बराबर है जबकि 2014 में केवल 6 करोड़ इकाइयां थीं जो 19 हजार करोड़ रुपये के बराबर थीं।
  • जहां 2014-15 में इलेक्ट्रॉनिक्स का निर्यात 38,263 करोड़ रुपये का था, 2018-19 में यह बढ़कर 61,908 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन में 2012 में भारत का हिस्सा केवल 1.3 प्रतिशत था जो बढ़कर 2018 में 3 प्रतिशत तक पहुंच गया है।

:: विज्ञान और प्रौद्योगिकी ::

‘कोविड-19 परीक्षण प्रयोगशाला’ का सीएसआईआर-एनईआईएसटी, जोरहाट में उद्घाटन

  • एक कोविड-19 परीक्षण प्रयोगशाला पूर्वोत्तर विज्ञान और प्रौद्योगिकी संस्थान (एनईआईएसटी) के जोरहाट परिसर में स्थापित की गई है। डॉ. हिमंत बिस्वा सरमा, मंत्री, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, वित्त, शिक्षा (उच्च, माध्यमिक व प्राथमिक), परिवर्तन एवं विकास, पीडब्ल्यूडी, असम सरकार ने इस प्रयोगशाला का उद्घाटन किया।
  • संस्थान के 10 वैज्ञानिकों की एक टीम वायरस से आरएनए को अलग करने के अहम कार्य में सक्रियतापूर्वक जुटी हुई है। इसके अलावा, संस्था न के स्टाफ के 40 अन्य सदस्य एक सहायक प्रणाली के रूप में कार्यरत हैं। संस्थान का जैव-प्रौद्योगिकी प्रभाग ‘आरटी-पीसीआर आधारित कोविड-19 परीक्षण’ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इसके अलावा, असम सरकार और जोरहाट का जिला प्रशासन इस संस्थान द्वारा किए जा रहे उल्लेरखनीय प्रयासों में सक्रियतापूर्वक सहयोग दे रहे हैं और इसे सुविधाजनक बना रहे हैं।
  • असम सरकार के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग के एक सूक्ष्मजीव विज्ञानी की सेवाएं इस संस्थान की कोविड-19 परीक्षण प्रयोगशाला के लिए ली जा रही हैं, ताकि परीक्षण को प्रमाणित किया जा सके। परीक्षण के लिए नमूने राज्य सरकार और जोरहाट के जिला प्रशासन के आपसी समन्वय से प्राप्त होने की उम्मीद है। यह संस्थान परीक्षण के उद्देश्य से एक परियोजना वैज्ञानिक और एक अनुसंधान विद्वान की भी सेवाएं अनुबंध के आधार पर ले रहा है।

:: विविध ::

गायत्री कुमार

  • विदेश मंत्रालय ने अनुभवी राजनयिक गायत्री आई कुमार को ब्रिटेन में भारत का अगला उच्चायुक्त नियुक्त किया है। वर्ष 1986 बैच की भारतीय विदेश सेवा की अधिकारी कुमार रुचि घनश्याम की जगह लेंगी। वर्तमान में कुमार बेल्जियम, लक्जमबर्ग और यूरोपीय यूनियन में बतौर भारतीय राजदूत सेवाएं दे रही हैं।

:: प्रिलिम्स बूस्टर ::

  • हाल ही में फिल्मी गतिविधियों से जुड़े संस्थानों के युक्तिकरण और व्यावसायिकता से संबंधित किस समिति ने अपनी रिपोर्ट आईटी मंत्रालय को प्रस्तुत की? (बिमल जुल्का समिति)
  • ‘इंडिया मीट्स ब्रिटेन ट्रैकर 2020’ में ब्रिटेन में सबसे तेजी से बढ़ने वाली भारतीय कंपनी का दर्जा किसने हासिल किया है? (एनर्जीप्रो एसेट्स लिमिटेड-ईपीएएल)
  • हाल ही में किस वरिष्ठ राजनयिक को ब्रिटेन में भारत का अगला उच्चायुक्त नियुक्त किया गया है? (गायत्री आई कुमार)
  • हाल ही में किस वैश्विक रेटिंग एजेंसी ने भारत की सावरेन (राष्ट्रीय) रेटिंग को ‘बीएए2’ से घटाकर ‘बीएए3’ कर दिया है? (मूडीज़ इनवेस्टर्स सर्विस)
  • जॉर्ज फ्लॉयड की मृत्यु उपरांत भड़की हिंसा के कारण अमेरिका ने किस चरमपंथी समूह को आतंकवादी संगठनों की सूची में शामिल करने की घोषणा की है? (एंटिफा)
  • हाल ही में पाकिस्तान द्वारा POK में CPEC के तहत 1,124 मेगावाट के किस पावर प्रोजेक्ट को मंजूरी दी है एवं इसे किस नदी पर बनाया जाएगा? (कोहला हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट, झेलम नदी)
  • भारत के शीर्ष वैज्ञानिक सलाहकार विभाग एवं DST मंत्रालय के द्वारा विज्ञान और प्रौद्योगिकी की किस राष्ट्रीय नीति का निर्माण शुरू किया गया है? (साइंस टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन पॉलिसी-STIP 2020)
  • पीयूष गोयल के द्वारा समीक्षा बैठक से चर्चा में रहे नेशनल प्रोडक्टिव काउंसिल( NPC) का कब एवं किस उद्देश्य हेतु हुआ था? (1958, ऊर्जा. पर्यावरण, व्यापार प्रक्रिया में क्षमता संवर्धन एवं विशेषज्ञ सेवा हेतु)
  • हाल ही में किस स्थान पर पूर्वोत्तर राज्यों में कोविड-19 के परीक्षण हेतु प्रयोगशाला का उद्घाटन किया गया? (पूर्वोत्तर विज्ञान और प्रौद्योगिकी संस्थान, जोरहाट-असम)
  • दो अभिनव कीटाणुशोधन समाधानों को समर्थन देने से चर्चा में रहे नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन (NIF) का गठन कब किया गया था एवं यह किस मंत्रालय के अधीन है? (2000, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग)
  • भारत को इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण में अग्रणी बनाने हेतु 50,000 करोड़ रुपये किन तीन योजनाओं की परिकल्पना की गई है? (Production Linked Incentive Scheme-PLI, Scheme for Promotion of Manufacturing of Electronic Components and Semiconductors-SPECS and Modified Electronics Manufacturing Clusters-EMC 2.0)
  • 125वें वार्षिक सत्र से चर्चा में रहे भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) की थीम क्या थी एवं इस संगठन के अध्यक्ष कौन है? (नये विश्वा के लिए भारत निर्माण: जीवन, आजीविका, विकास: विक्रम किर्लोस्कर)

स्रोत साभार: Dainik Jagran (Rashtriya Sanskaran), Dainik Bhaskar (Rashtriya Sanskaran), Rashtriya Sahara (Rashtriya Sanskaran) Hindustan Dainik (Delhi), Nai Duniya, Hindustan Times, The Hindu, BBC Portal, The Economic Times (Hindi & English), PTI, PIB

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