(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (29 मार्च 2020)

दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर


(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (29 मार्च 2020)


:: राष्ट्रीय समाचार ::

‘राष्‍ट्रीय दूरभाष-परामर्श केंद्र (कॉनटेक)’ का शुभारंभ

  • केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने आज ‘राष्‍ट्रीय दूरभाष-परामर्श केंद्र (कॉनटेक) (CoNTeC)’ का शुभारंभ किया। डॉ. हर्षवर्धन ने इसके साथ ही राज्यों के मेडिकल कॉलेजों और देश भर के अन्य एम्स के प्रमुख अधिकारियों के साथ विचार-विमर्श किया और ‘कोविड-19’ से निपटने की तैयारियों की समीक्षा की।
  • कॉनटेक’ परियोजना दरअसल ‘कोविड-19 नेशनल टेलीकंसल्टेशन सेंटर’ का संक्षिप्त नाम है। इसकी परिकल्‍पना स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने की है और इसे अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, नई दिल्ली द्वारा कार्यान्वित किया गया है।

क्या है कॉनटेक?

  • ‘कॉनटेक’ एक टेलीमेडिसिन केन्द्र है जिसकी स्थापना अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान., नई दिल्ली के द्वारा की गई है, जिसमें देश भर से विशेषज्ञों के बहु-आयामी सवालों का उत्तर देने के लिए विभिन्न नैदानिक क्षेत्रों के विशेषज्ञ डॉक्टर 24 घंटे उपलब्ध होंगे। यह एक बहु-मॉडल दूरसंचार केन्द्र है जिसके माध्यम से देश के अलावा विश्व के किसी भी हिस्से से दोनों ओर से ऑडियो-वीडियो वार्तालाप के साथ-साथ लिखित संपर्क भी किया जा सकता है। संचार साधनों के रूप में, सरल मोबाइल टेलीफोन के साथ-साथ दोनों और से वीडियो वार्तालापों के लिए व्हाट्सएप, स्काइप और गूगल डुओ का उपयोग किया जाएगा।
  • ‘कॉनटेक’, लखनऊ के एसजीपीजीआई स्थित राष्ट्रीय संसाधन केंद्र के साथ एनएमसीएन के माध्यम से जुड़े 50 मेडिकल कॉलेजों के बीच वीडियो सम्मेलन (वीसी) का संचालन करने के लिए पूरी तरह से राष्ट्रीय मेडिकल कॉलेज नेटवर्क (एनएमसीएन) के साथ एकीकृत है।
  • रोगी प्रबंधन सलाह को एम्स के निदेशक द्वारा नामित एम्स की टीम द्वारा तैयार किए गए राष्ट्रीय दिशा-निर्देश परिपूरक प्रोटोकॉल के अनुसार मानकीकृत किया जाएगा।

‘कॉनटेक’ से संपर्क कैसे करें?

  • ‘कॉनटेक’ से संपर्क करने के लिए कोविड-19 का उपचार करने वाले चिकित्सकों के द्वारा देश/दुनिया में कहीं से भी एकल मोबाइल नंबर (+91 9115444155) डायल किया जा सकता है जिसमें छह लाइनें हैं जिनका वर्तमान में एक साथ उपयोग किया जा सकता है। भविष्य में जरूरत पड़ने पर लाइनों की संख्या बढ़ाई जा सकती है। इनकमिंग कॉल्स को कॉनटेक प्रबंधकों द्वारा उठाया जाएगा, इसके पश्चात कोविड-19 का उपचार कर रहे विशेषज्ञ चिकित्सकों की इच्छानुसार नैदानिक क्षेत्रों के विशेषज्ञ चिकित्सक से उनकी बात कराई जाएगी।
  • प्रबंधक, कॉल करने वालों विशेषज्ञों की इच्छानुसार व्हाट्सएप, स्काइप या गूगल डुओ के माध्यम से दोनों ओर से वीडियो कॉल संपर्क स्थापित करने में मार्गदर्शन करेंगे। एनएमसीएन नेटवर्क से कॉल करने वाले व्यक्त अपनी ओर से किसी भी समय टेलीमेडिसिन बुनियादी सुविधा का उपयोग करके संपर्क कर सकते हैं।

'आपात स्थितियों में प्रधानमंत्री नागरिक सहायता और राहत कोष (पीएम केयर्स फंड)'

  • कोविड-19 महामारी से उत्पन्न चिंताजनक हालात जैसी किसी भी प्रकार की आपात स्थिति से निपटने के उद्देश्य से एक विशेष राष्ट्रीय कोष बनाने की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए और इससे प्रभावित लोगों को राहत प्रदान करने के लिए 'आपात स्थितियों में प्रधानमंत्री नागरिक सहायता और राहत कोष (पीएम केयर्स फंड)' के नाम से एक सार्वजनिक धर्मार्थ ट्रस्ट बनाया गया है। प्रधानमंत्री इस ट्रस्ट के अध्यक्ष हैं और इसके सदस्यों में रक्षा मंत्री, गृह मंत्री एवं वित्त मंत्री शामिल हैं। प्रधानमंत्री ने इस कोष में लोगों से दान देने की अपील की है।

ऐसे कर सकते हैं दान

  • पीएम केयर्स फंड में डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड, इंटरनेट बैंकिंगयूपीआई (भीम, फोनपे, अमेजन पे, गूगल पे, पेटीएम मोबिकिविक आदि), आरटीजीएस/एनईएफट के इस्तेमाल से भी दान दे सकते हैं। इस कोष में दी जाने वाली दान राशि पर धारा 80 (जी) के तहत आयकर से छूट दी जाएगी। नागरिक और संगठन वेबसाइट पीएमइंडिया.जीओवी.इन की साइट पर जाकर पीएम केयर्स फंड में दान देने की विस्तृत जानकारी ले सकते हैं।

NHP-2019 रिपोर्ट: देश के सार्वजनिक स्वास्थ्य स्थिति

  • रक्तबीज की तरह बढ़ता यह अदना सा वायरस इंसानी सभ्यता की अब तक की सबसे बड़ी चुनौती बन चुका है। इसकी काट खोजने में वक्त लगेगा, लेकिन इतना तो तय है कि इस जंग में जीत तो इंसानियत की ही होगी। बस हमें संयम, संकल्प और धैर्य बनाए रखने की दरकार होगी। 21 दिनों की बात है। हम अपने घरों में रहकर पूरे राष्ट्र को संक्रमण से बचा सकते हैं। इस वायरस के संक्रमण की शृंखला इतनी तेज और लंबी है कि एक संक्रमित व्यक्ति अगर पहले की तरह ही अपनी दिनचर्या रखे तो चंद दिनों में 406 लोगों को संक्रमित कर सकता है। खतरा बड़ा है। इससे निपटने के लिए इसकी संक्रमण शृंखला को तोड़ना होगा। वह तभी संभव होगा जब हम सब अपनी फिजिकल डिस्टैंसिंग को चरम पर जीएंगें। यानी अपने घरों से बिल्कुल भी नहीं निकलेंगे। दुनिया का अनुभव बताता है कि जिन देशों ने इसमें कोताही की, वे आज बेबस और लाचार दिख रहे हैं। भले ही उनके पास स्वास्थ्य सुविधाओं का आधुनिक जखीरा कितना भी क्यों न हो।

कहां खड़े हैं हम?

  • कोविड-19 से मुकाबले में आर्थिक संपन्नता और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का दावा करने वाले देश भी ठहर नहीं पा रहे हैं। अमेरिका, इटली, फ्रांस, ब्रिटेन, चीन जैसे देशों की हालत कमोबेश एक जैसी ही है। विकसित मुल्कों का ये हाल भारत की स्थिति को लेकर हमारी चिंता बढ़ा रहा है। नेशनल हेल्थ प्रोफाइल 2019 की रिपोर्ट के मुताबिक देश के सार्वजनिक स्वास्थ्य का हाल बहुत अच्छा नहीं है।

एक नजर

  • 1.2-1.6% : 2008-09 से 2019-20 के बीच भारत का सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यय कुल जीडीपी का तक रहा।
  • 1.28% : जीडीपी का 2017-18 में स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च किया गया।
  • 3.4% : स्वास्थ्य खर्च कुल खर्च का 2015 में था
  • भारत में प्रति 1000 लोगों पर 0.8 डॉक्टर।
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मुताबिक 1000 लोगों पर 1 डॉक्टर होना चाहिए। भारत में फरवरी 2020 में 1404 लोगों पर एक डॉक्टर।
  • ग्रामीण इलाकों में 10,926 लोगों पर 1 डॉक्टर डब्ल्यूएचओ के मुताबिक नर्स और आबादी का अनुपात 1:483 होना चाहिए। वहीं भारत में 650 से ज्यादा लोगों पर एक नर्स है।
  • सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं पर जीडीपी का खर्च करने में हम भूटान, बांग्लादेश से पीछे।

सरकारी बेड

  • सरकारी अस्पतालों में कुल 7,13,986 बेड हैं। एक हजार लोगों की आबादी पर 0.55 बेड।
  • बुजुर्ग जनसंख्या (60 या अधिक आयु) के लिए भारत में प्रति 1000 लोगों की जनसंख्या पर 5.18 बेड हैं।
  • अस्पताल बेड की उपलब्धता 12 राज्यों (जहां देश की 70 फीसद आबादी रहती है) में राष्ट्रीय औसत (0.55 बेड प्रति 1000 व्यक्ति) से नीचे हैं। ये राज्य बिहार, झारखंड, गुजरात, उप्र, आंध्रप्रदेश, छत्तीसगढ, मध्यप्रदेश, हरियाणा, महाराष्ट्र, ओडिशा, असम और मणिपुर हैं।
  • बिहार की स्थिति सबसे खराब है। जहां पर 1000 की आबादी पर सिर्फ 0.11 बेड हैं।
  • सबसे बेहतर स्थिति वाले राज्यों में पश्चिम बंगाल (1000 लोगों पर 2.25 सरकारी बेड), सिक्किम (1000 लोगों पर 2.34 सरकारी बेड), दिल्ली (1000 लोगों पर 1.05 सरकारी बेड) और केरल (1000 लोगों पर 1.05 सरकारी बेड) हैं।

वेंटिलेटर्स

  • देश में सरकारी बेड 7,13,986 के अनुमानित करीब 5-8 फीसद आइसीयू बेड हैं, जिनके मुताबिक 35,699 से 57,119 हजार के करीब आइसीयू बेड हैं।
  • यदि आइसीयू का 50 फीसद वेंटिलेटर मानें तो देश में 17,850 से 25,556 वेंटिलेटर हैं।

:: अंतर्राष्ट्रीय समाचार ::

भारत को 29 लाख डॉलर की मदद देगा अमेरिका

  • कोरोना वायरस की महामारी से निपटने के लिए अमेरिका ने भारत समेत दुनिया के 64 देशों को 17.4 करोड़ डालर की सहायता प्रदान करने की घोषणा की है। भारत को इस राशि से 29 लाख डालर (21.7 करोड़ रुपये) मिलेंगे। यह राशि अमेरिका द्वारा फरवरी में घोषित 10 करोड़ डालर की सहायता राशि से अलग होगी। अमेरिका ने यह कदम सेंटर्स फार डिसीज कंट्रोल व अन्य विभागों द्वारा विश्व के 64 देशों में कोरोना के व्यापक विस्तार के बाबत जताये गये खतरे को देखते हुए उठाया है।

पिछले 20 वर्षों में भारत को 2.8 अरब डॉलर की सहायता दे चुका है अमेरिका

  • अमेरिकी विदेश विभाग ने यह जानकारी देते हुए बताया कि इसमें से 29 लाख डॉलर भारत को दिए जाएंगे। इस राशि को नई लैब स्थापित करने, कोरोना वायरस के मामलों की जांच, निगरानी करने तकनीकी विशेषज्ञों को तैयार करने पर खर्च किया जायेगा। उल्लेखनीय है अमेरिका पिछले 20 वर्षों में भारत को 2.8 अरब डॉलर की सहायता दे चुका है। इसमें 1.4 अरब डॉलर की सहायता अकेले चिकित्सा क्षेत्र के लिए दी गई।

ईरान में मेथनॉल के सेवन से 300 लोगों की मौत, 1000 बीमार

  • ईरान में शराब पीने से कोरोना वायरस के संक्रमण से मुक्ति की अफवाह ने सैकड़ों लोगों की जान ले ली है. दरअसल संक्रमण ठीक करने को लेकर सैकड़ों लोगों ने जहरीली शराब का सेवन किया.
  • ईरान में हाल में इस अफवाह के शिकार एक पांच साल के बच्चे को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है. उसे कोरोना वायरस से बचाने के लिए मां-बाप ने जहरीली मेथनॉल पिलाई जिससे उसके आंखों की रोशनी चली गई. इस बच्चे का मामला कोरोना वायरस की महामारी में जकड़े ईरान में अफवाह के शिकार हुए सैकड़ों लोगों में एक बानगी भर है.

पृष्ठभूमि

  • ईरानी मीडिया के मुताबिक अबतक देश में मेथनॉल पीने से करीब 300 लोगों की मौत हुई है और एक हजार से अधिक लोग घायल हुए हैं जबकि इस्लामिक देश ईरान में शराब पीने पर रोक है. स्वास्थ्य मंत्री की सहायता कर रही एक ईरानी डॉक्टर ने शुक्रवार को बताया कि समस्या इससे बड़ी है जिसमें करीब 480 लोगों की मौत हुई है 2,850 लोग बीमार हुए हैं.
  • ईरानी सोशल मीडिया में फारसी भाषा में फर्जी खबर चल रही है जिसमें दावा किया गया है कि एक ब्रिटिश स्कूल शिक्षक और अन्य लोग व्हिस्की और शहद के सेवन से कोरोना वायरस के संक्रमण से मुक्त हो गए.
  • गौरतलब है कि ईरान ने शनिवार को घोषणा की कि कोरोना वायरस से 139 और लोगों की मौत हो गई है. इस विषाणु से सबसे अधिक प्रभावित देशों में से एक ईरान में मृतकों की कुल संख्या बढ़कर 2,517 हो गई है. स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता कियानुश जहांपुर ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि पिछले 24 घंटे में 3,076 नये मामलों की पुष्टि हुई है जिससे संक्रमित लोगों की संख्या 35,408 पर पहुंच गई है.

संयुक्त राष्ट्र ने टाला परमाणु हथियार सम्मेलन

  • संयुक्त राष्ट्र ने कोरोना वायरस महामारी के पूरी दुनिया में बढ़ते प्रसार को देखते हुए परमाणु अप्रसार संधि के लिए आयोजित होने वाली अहम बैठक को टालने का फैसला लिया है। परमाणु अप्रसार संधि के 191 सदस्यों ने इसके क्रियान्यवन की समीक्षा करने के लिए होने वाले सम्मेलन को टाल दिया है।
  • संयुक्त राष्ट्र ने यह जानकारी देते हुए बताया कि सदस्य हर पांच साल में यह चर्चा करने के लिए बैठक करते हैं कि यह कैसे काम कर रही है। इस बैठक में दुनिया के भीतर परमाणु अप्रसार को लेकर चल रही गतिविधियों की समीक्षा की जाती है। यह बैठक न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में 27 अप्रैल से 22 मई के बीच होनी थी। संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने कहा कि परिस्थितियां ठीक होने पर जल्द से जल्द यह बैठक होगी लेकिन अप्रैल 2021 से पहले तो नहीं होगी। यानी यह अहम बैठक करीब एक साल तक के लिए टाल दी गई है।

क्या है परमाणु अप्रसार संधि?

  • परमाणु अप्रसार संधि का मुख्य उद्देश्य परमाणु हथियारों और परमाणु तकनीकों के प्रसार को रोकना, परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग में सहयोग को बढ़ावा देने और परमाणु निरस्त्रीकरण के लक्ष्य को हासिल करना था. वर्ष 1970 में लागू हुई इस संधि पर अब तक 191 सदस्य देश मुहर लगा चुके हैं जिनमें पांच परमाणु हथियार संपन्न देश भी शामिल हैं. वर्ष 1995 में इस संधि की मियाद को अनिश्चितकालीन अवधि के लिए बढ़ा दिया गया था

पृष्ठभूमि

  • संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता ने कहा है कि विश्व भर में उसके स्टाफ के 86 सदस्य कोरोना वायरस से संक्रमित हैं। प्रवक्ता के मुताबिक, यूरोप में सर्वाधिक सदस्य कोरोना संक्रमण की चपेट में आए हैं। दुजारिक ने कहा कि अफ्रीका, एशिया, पश्चिम एशिया और अमेरिका में भी यूएन के कर्मचारी इस वायरस की चपेट में आए हैं। उन्होंने बताया कि संक्रमण रोकने के लिए यूएन के अधिकतर कर्मचारी घर से काम कर रहे हैं।

:: भारतीय अर्थव्यवस्था ::

अर्थव्यवस्था को राजकोषीय घाटे की चिंता छोड़ बड़े आर्थिक पैकेज की जरूरत

  • कोरोना संकट के बावजूद चालू वित्त वर्ष 2019-20 के राजकोषीय घाटे में अति मामूली बढ़ोतरी का अनुमान है जो अधिकतम 0.1 फीसद तक रह सकता है। हालांकि आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि अभी राजकोषीय घाटे की चिंता करने का समय नहीं है। इस समय सरकार को तमाम वित्तीय चिंताओं को छोड़ अधिक से अधिक पैकेज देना चाहिए। यहां तक कि केंद्र सरकार को राज्यों को भी अतिरिक्त कर्ज लेने की इजाजत देनी चाहिए।

SBI के अर्थशास्त्रियों के मुताबिक 3.88% तक पहुंच सकता है राजकोषीय घाटा

  • एसबीआइ इकोरैप के अनुमान के मुताबिक चालू वित्त वर्ष 2019-20 में राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 3.88 फीसद रह सकता है जबकि संशोधित लक्ष्य 3.8 फीसद का है। पहले यह लक्ष्य 3.3 फीसद का था। यह मामूली बढ़ोतरी इसलिए संभव हो सकती है क्योंकि कोरोना की वजह से मार्च महीने में देश में टूरिज्म, ट्रांसपोर्ट, होटल व अन्य सेवा क्षेत्र काफी प्रभावित रहा। इससे चालू वित्त वर्ष (2019-20) की अंतिम तिमाही (जनवरी-मार्च,2020) में जीडीपी की दर में कमी आएगी और इसका प्रभाव चालू वित्त वर्ष की विकास दर पर दिखेगा। एसबीआइ के मुख्य आर्थिक सलाहकार एसके घोष के मुताबिक अंतिम तिमाही के प्रभावित होने से चालू वित्त वर्ष की विकास दर में 1.4 फीसद की कमी आ सकती है जिस वजह से राजकोषीय घाटा 3.88 फीसद तक पहुंच सकता है।

राजकोषीय घाटे की चिंता का समय नहीं

  • वित्तीय विशेषज्ञों ने बताया कि सरकार को अभी राजकोषीय चिंता को छोड़ राज्यों के लिए बनाए गए वित्तीय नियम में भी ढील देना चाहिए, ताकि राज्य सरकार भी अतिरिक्त कर्ज लेकर कोविड-19 के साथ की लड़ाई में अपना योगदान दे सके। अर्थशास्त्री एम. गोविंद राव कहते हैं, वर्ष 2008 की मंदी के दौरान भी ऐसा किया गया था। अब भी समय की यही दरकार है कि राज्यों को अतिरिक्त कर्ज लेने के लिए कम से कम 50 आधार अंक की छूट मिलनी चाहिए।

क्या कहता है एफआरबीएम कानून?

  • सरकारी खर्च की वजह से अगर राजकोषीय घाटे में बढ़ोतरी होती भी है तो सरकार संसद को इस आपात स्थिति की जानकारी दे सकती है जिसकी इजाजत फिस्कल रिस्पांसिबलिटी एंड बजट मैनेजमेंट (एफआरबीएम) कानून के तहत है।
  • आर्थिक विशेषज्ञों के मुताबिक एफआरबीएम कानून इस बात की पूरी तरह से इजाजत देता है कि राष्ट्रीय आपदा, राष्ट्रीय सुरक्षा जैसी कठिन स्थिति में आरबीआइ केंद्र सरकार की प्रतिभूतियों को खरीद सकता है। सरकार इस प्रावधान के तहत राशि जुटा सकती है। एसबीआइ की रिपोर्ट के मुताबिक अगले वित्त वर्ष 2020-21 में केंद्र और राज्य दोनों को 11 लाख करोड़ के कर्ज की जरूरत होगी, जिसे बैंक से प्रतिभूति की मांग, म्युचुअल फंड व एफपीआइ के फंड से उधार लेकर पूरा किया जा सकता है।
  • एक नामी अर्थशास्त्री ने तो इस संकट के समय गरीबों की मदद के लिए अतिरिक्त नोट तक छापने की सलाह दी है। उनका मानना है कि अतिरिक्त नोट छापने से राजकोषीय घाटे में भारी बढ़ोतरी होगी, लेकिन अभी उसकी परवाह करने जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने कोविड-19 के खिलाफ जंग लड़ने के लिए 2.2 लाख करोड़ डॉलर के पैकेज की मंजूरी दी है जो वहां के GDP का 10 फीसद है। भारत सरकार को बड़ा पैकेज देना चाहिए।

मंदी की गिरफ्त में दुनिया: आईएमएफ

  • अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने शुक्रवार को कहा कि कोरोना वायरस महामारी के कारण दुनिया विनाशकारी प्रभाव का सामना कर रही है और स्पष्ट रूप से आर्थिक मंदी की गिरफ्त में आ गई है। हालांकि, आईएमएफ ने अगले साल सुधार का अनुमान जताया। आईएमएफ की प्रबंध निदेशक क्रिस्टलीना जॉर्जीवा ने कहा, ‘हमने 2020 और 2021 के लिए वृद्धि की संभावनाओं का फिर से मूल्यांकन किया है। अब यह स्पष्ट है कि हम मंदी की गिरफ्त में हैं, जो 2009 जितनी या उससे भी बुरी होगी। हमें 2021 में सुधार की उम्मीद है।’
  • जॉर्जीवा आईएमएफ के संचालनक मंडल अंतरराष्ट्रीय मौद्रिक और वित्तीय समिति की बैठक में हिस्सा ली। कुल 189 सदस्यों वाले इस निकाय ने कोविड-19 की चुनौती पर चर्चा की। आईएमएफ प्रमुख ने कहा, ‘विश्व अर्थव्यवस्था के अचानक बंद होने के दीर्घकालिक प्रभावों में एक महत्वपूर्ण चिंता दिवालिया होने और छंटनी के जोखिम को लेकर है। ये न केवल सुधार धीमा कर सकती है, बल्कि हमारे समाजिक ताने-बाने को भी नष्ट कर सकती है।’ उन्होंने कहा कि इससे बचने के लिए कई देशों ने उपाए शुरू किए हैं। आईएमएफ प्रमुख ने कहा कि उन्हें निम्न आय वाले 50 देशों सहित कुल 81 आपातकालीन वित्तपोषण अनुरोध प्राप्त हुए हैं। उन्होंने कहा कि एक अनुमान के मुताबिक उभरते बाजारों की कुल वित्तीय जरूरत इस समय 2500 अरब डॉलर है।
  • उन्होंने कहा कि ये अनुमान कम से कम हैं और इस जरूरत को इन देशों के भंडार और घरेलू संसाधनों से पूरा नहीं किया जा सकता है। एक अन्य सवाल के जवाब में जॉर्जीवा ने कहा कि आईएमएफ 2020 के लिए मंदी का अनुमान लगा रहा है। उन्होंने कहा, ‘हमारा अनुमान है कि यह काफी गहरा होगा और हम देशों से अत्यधिक आग्रह कर रहे हैं कि वे आक्रामक तरीके से कदम उठाएं ताकि हम अर्थव्यवस्था में ठहराव की अवधि को कम कर सकें।’

मूडीज ने दक्षिण अफ्रीका की साख को घटाकर ‘कबाड़’ श्रेणी में डाला

  • मूडीज ने दक्षिण अफ्रीका सरकार के बांड की क्रेडिट रेटिंग (साख) को रद्दी कोटि में डाल दी है। इससे कोरोना वायरस संक्रमण की मार झेल रही और मंदी से घिरी दक्षिणी अफ्रीकी अर्थव्यवस्था के लिए और संकट पैदा हो गया है।
  • दो अन्य अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसियों फिच और एसएंडपी ने अफ्रीका क्षेत्र की सबसे विकसित अर्थव्यवस्था को 2017 में सबइन्वेस्टमेंट (निवेश के अनुकूल नहीं) की श्रेणी में डाला था।
  • अपनी आखिरी निवेश स्तर की रेटिंग को गंवाने का मतलब है कि अब दक्षिण अफ्रीका एफटीएसई के विश्व सरकारी बांड सूचकांक (डब्ल्यूजीबीआई) से बाहर निकल जाएगा।
  • दक्षिण अफ्रीका की साख को ऐसे समय घटाया गया है जबकि देश कोरोना वायरस संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए तीन सप्ताह तक लोगों को अपने घर-परिसर से बाहार निकलने पर पाबंदी लगा दी है।

कच्चे तेल का उत्पादन बढ़ा लेकिन घट गई मांग

  • कोरोना संकट के बीच तेल उत्पादक देशों के समूह (ओपेक) और उनके सहयोगी रूस में उत्पादन में कटौती पर सहमति बनने से चौतरफा मुश्किलें बढ़ गई हैं। उत्पादन बढ़ने और मांग में गिरावट से तेल उत्पादक देशों के पास भंडारण के लिए जगह कम पड़ गई है।
  • कोरोना संकट से भारत, चीन, यूरोप और अमेरिका में तेल की मांग घट गई है। इससे जनवरी से अब तक कच्चे तेल के दाम में 60 फीसदी से भी अधिक गिरावट आ चुकी है। एक साल पहले की तुलना में कच्चे तेल की रोजाना मांग घटकर दो करोड़ बैरल रह गई है। शुरुआत में इसका फायदा भारत से दुनिया के सबसे बड़े आयातक देश के रूप में मिला लेकिन यह खुशी ज्यादा देर रहने की उम्मीद नहीं है।
  • वहीं उत्पादक देशों की सबसे बड़ी मुश्किल उनकी कम भंडारण क्षमता है। सऊदी अरब, रूस और अमेरिका दुनिया के तीन सबसे बड़े तेल उत्पादक देशों में शामिल हैं। हालांकि, इनकी अपनी भंडारण क्षमता बेहद कम है। रूस की अपनी भंडारण क्षमता करीब एक हफ्ते की है। वहीं सऊदी अरब अपने लिए सिर्फ 18 दिन का भंडार रखता है। जबकि अमेरिका एक माह की तेल भंडार अपने लिए रखता है।

भारत ने बनाई दोहरी रणनीति

  • भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा तेल का आयातक है और यह जरूरत का 80 पर्सेंट तेल आयात करता है। भारत सस्ते तेल के इस मौके को गंवाना नहीं चाहता है और इसलिए उसने कच्चे तेल को ज्यादा से ज्यादा स्टोर करने का फैसला किया है।

घटते दाम से सरकार का भर रहा है खजाना

  • कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से एक तरफ भारत को कम विदेशी मुद्रा खर्च करनी पड़ रही है। वहीं दूसरी ओर वह कच्चे तेल के दाम में गिरावट के बाद पेट्रोल-डीजल का दाम घटाने की बजाय उत्पाद शुल्क बढ़ाकर सरकारी खजाना भर रहा है। उत्पाद शुल्क एक रुपया बढ़ने पर सरकार को 13 हजार करोड़ का लाभ होता है।

1 अप्रैल से 10 बैंकों के विलय से बनेंगे 4 बैंक

  • देश के 10 सरकारी बैंकों का विलय कर चार बड़े बैंक बनाने की कवायद अपने अंतिम चरण में है। 1 अप्रैल को इन 10 बैंकों के विलय से चार बड़े बैंक बनेंगे जो देश के वित्तीय क्षेत्र का सबसे बड़ा विलय होगा। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने शनिवार को इस विलय को अधिसूचित कर दिया, जो इस महीने की शुरुआत में जारी एक अधिसूचना के जरिए लागू हो जाएगा।
  • ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स तथा यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया की शाखाएं पंजाब नैशनल बैंक (PNB) की शाखाओं के रूप में काम करेंगी। वहीं, सिंडिकेट बैंक केनरा बैंक के रूप में काम करेगा। आंध्र बैंक तथा कॉर्पोरेशन बैंक की शाखाएं यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के रूप में काम करेंगी। जबकि, इलाहाबाद बैंक की शाखाएं इंडियन बैंक की शाखाओं के रूप में काम करेंगी।
  • बैंक एम्प्लॉयी यूनियंस तथा असोसिएशंस ने इस विलय को विलंबित करने के लिए जी तोड़ कोशिशें कीं, क्योंकि यह लॉकडाउन के समय हो रहा है। उन्होंने कहा है कि जन धन योजना अकाउंट-होल्डर्स को सरकारी फायदे का वितरण एक अतिरिक्त चुनौती है।
जिस बैंक में होगा विलय जिस बैंक का होगा विलय
पंजाब नैशनल बैंक ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स और यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया
केनरा बैंक सिंडिकेट बैंक
यूनियन बैंक ऑफ इंडिया आंध्रा बैंक और कॉरपोरेशन बैंक
इंडियन बैंक इलाहाबाद बैंक
  • रिजर्व बैंक के मुख्य महाप्रबंधक योगेश दयाल द्वारा जारी विज्ञप्ति के अनुसार इलाहाबाद बैंक की सभी शाखाएं एक अप्रैल 2020 से इंडियन बैंक की शाखाओं के रूप में काम करेंगी। वहीं इलाहाबाद बैंक के खाताधारक और जमाकर्ता सभी एक अप्रैल 2020 से इंडियन बैंक के ग्राहक के तौर पर माने जाएंगे। केन्द्रीय बैंक की शनिवार को ही जारी एक अन्य विज्ञप्ति में कहा गया है कि आंध्र बैंक और कार्पोरेशन बैंक की सभी शाखाएं एक अप्रैल 2020 से यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के शाखा के तौर पर काम करेंगी। इसी प्रकार आंध्र बैंक और कार्पोरेशन बैंक के ग्राहक, खाताधारक और जमाकर्ता सभी यूनियन बैंक आफ इंडिया के ग्राहक के तौर पर माने जाएंगे।

पृष्ठभूमि

  • केन्द्र सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र के 10 बैंकों को आपस में विलय कर चार बड़े बैंक बनाने का फैसला किया था। सरकार ने देश में विश्वस्तरीय बड़े बैंक बनाने के उद्देश्य से सार्वजनिक क्षेत्र के कई बैंकों को मिलाकर बड़े बैंक बनाने का कदम उठाया है। इसी के तहत लिए गए निर्णय के बाद इलाहाबाद बैंक का विलय इंडियन बैंक में और आंध्र बैंक तथा कार्पोरेशन बैंक का विलय यूनियन बैंक ऑफ इंडिया में किया गया।

2018 में आया था प्लान

  • बैंक के विलय की योजना सबसे पहले दिसंबर 2018 में पेश की गई थी, जब आरबीआई ने कहा था कि अगर सरकारी बैंकों के विलय से बने बैंक इच्छित परिणाम हासिल कर लेते हैं तो भारत के भी कुछ बैंक वैश्विक स्तर के बैंकों में शामिल हो सकता है।

:: विज्ञान और प्रौद्योगिकी ::

कोरोना के खिलाफ रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस को कम करने वाले औषधियों की खोज

  • भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने कोरोना से दो-दो हाथ करने के लिए शोध प्रयासों की पेशकश की है। केंद्रीय औषधि अनुसंधान संस्थान (सीडीआरआइ) के वैज्ञानिकों ने भी कोरोना वायरस से फेफड़ों में होने वाले रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस की दवा तलाश करने के लिए शोध की पेशकश की है। वैज्ञानिकों की कोशिश प्रचलित औषधियों में से ही कोई ऐसी दवा तलाशने की है, जो कोरोना से पीड़ित मरीजों के फेफड़ों में होने वाले रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस को कम कर सके।

करना होगा न्यूट्रोफिल पर नियंत्रण

  • वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि फेफड़ों में होने वाले न्यूट्रोफिल एक्स्ट्रा सेलुलर ट्रैप को किसी तरह रोक लिया जाए तो संक्रमण से होने वाली मृत्यु पर काफी हद तक काबू पाया जा सकता है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, श्वेत रक्त कणिकाओं में मौजूद न्यूट्रोफिल यूं तो शरीर को किसी इंफेक्शन से बचाने में मददगार होती है लेकिन, कुछ स्थितियों में यह हाइपर एक्टिव होकर शरीर के विरुद्ध ही कार्य करना शुरू कर देती है। इसी से यह फेफड़ों में एक जाल सा बना लेती है, जिससे मरीज को सांस लेने में समस्या होने लगती है। इससे शरीर में ऑक्सीजन की मात्र बहुत कम होने लगती है और मरीज को बचाना मुश्किल हो जाता है।
  • वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि न्यूट्रोफिल की अति सक्रियता को रोक दिया जाए तो रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस को खत्म किया जा सकता है। वैज्ञानिक अपना अनुसंधान इसी दिशा में करने के लिए प्रयासरत हैं। सीडीआरआइ के वैज्ञानिक जल्द ही विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग भारत सरकार को यह शोध प्रस्ताव भेजेंगे।

क्यों जरुरी है जल्द शोध

  • दरअसल, भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की ओर से देश भर के वैज्ञानिक संस्थानों से यह प्रस्ताव मांगे गए हैं कि वह कोरोना से जुड़े अनुसंधान के प्रस्ताव 30 मार्च तक भेजें। हर सीजन वायरस में म्यूटेशन यानी प्रकृति में बदलाव हो जाता है। इसके चलते कोई एक दवा इस पर कारगर नहीं होती। वहीं नई औषधि के अनुसंधान में समय भी काफी लगता है। जहां तक कोरोना वायरस से निपटने की बात है, बहुत लंबे समय तक इंतजार नहीं किया जा सकता।

कोरोना वैक्सीन के परीक्षण में जुटी ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी

  • ब्रिटेन की ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता कोरोना वायरस (कोविड-19) से मुकाबले के लिए तैयार की जा रही एक वैक्सीन के परीक्षण की तैयारी में जुट गए हैं। इसके लिए 500 से ज्यादा वालंटियर्स की भर्ती की प्रक्रिया शुरू की गई है। यूनिवर्सिटी के जेनर इंस्टीट्यूट और ऑक्सफोर्ड ग्रुप की क्लीनिकल टीमें 510 वालंटियर्स की भर्ती करेंगी। इन प्रतिभागियों को सीएचएडीओएक्स1 एनकोवी-19 वैक्सीन या तुलना के लिए एक नियंत्रित इंजेक्शन दिया जाएगा।
  • शोधकर्ताओं के अनुसार, यह नया टीका एक एडीनोवायरस वैक्सीन वेक्टर और सार्स-कोवी-2 या कोविड-19 पर आधारित है। वहीं अमेरिका के राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थान में संक्रामक रोगों में अनुसंधान का नेतृत्व करने वाले एंथोनी फौसी का कहना है कि इस जानलेवा वायरस से बचने के लिए जल्द से जल्द वैक्सीन तैयार करने की जरूरत है ताकि दूसरी बार इसकी प्रकोप से बचा जा सके।

पृष्ठभूमि

  • मालूम हो कि कोरोना वायरस का अभी तक कोई इलाज नहीं ढूंढा जा सका है... ना तो इसकी कोई वक्‍सीन ही बाजार में आ पाई है। अमेरिका को वैक्सीन बनाने में प्राथमिक सफलता मिली गई है लेकिन अभी यह भी ट्रायल के ही दौर में है। वैज्ञानिकों की मानें तो कोरोना वायरस की वैक्‍सीन को आने में अभी काफी वक्‍त लग सकता है। यही नहीं यदि वैक्‍सीन को मंजूरी मिल भी गई तो बड़े पैमाने पर उत्‍पादन और आम आदमी तक इसकी पहुंच में लंबा वक्‍त लगेगा

भारतीय वैज्ञानिकों ने ली कोरोना की तस्‍वीर

  • भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आइसीएमआर) के पुणे स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (एनआइवी) के वैज्ञानिकों ने पहली बार नए कोरोना वायरस (सार्स-कॉव-2) की तस्वीरें (इमेज) उजागर की हैं। ये इमेज ट्रांसमिशन इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप (टेम) इमेजिंग का इस्तेमाल करके ली गई हैं। इन्हें इंडियन जर्नल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आइजेएमआर) के ताजा संस्करण में प्रकाशित किया गया है।
  • यह तस्वीर भारत की कोविड-19 की पहली पुष्ट मरीज के गले से लिए गए सैंपल से ली गई है। यह मामला केरल में 30 जनवरी को रिपोर्ट हुआ था। यह महिला उन तीन छात्रों में शामिल थी जो चीन के वुहान शहर में मेडिसिन की पढ़ाई कर रहे थे। केरल के इन नमूनों की जीन सिक्वेंसिंग नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (एनआइवी) में की गई थी। इसमें पता चला था कि भारत में मिला यह वायरस चीन के वुहान शहर में मिले वायरस से 99.98 फीसद मेल खाता है।

जैविक हथियार नहीं बल्कि प्राकृतिक वायरस है कोविड-19

  • कोविड-19 की उत्पत्ति को लेकर जहां एक तरफ चीन को सवालों के घेरे में खड़ा करने की कोशिशें हो रही हैं और इसे चीन का जैविक हथियार बताया जा रहा है, वहीं अमेरिका समेत कई देशों की मदद से हुए एक वैज्ञानिक शोध में दावा किया गया है कि यह वायरस प्राकृतिक है।
  • स्क्रीप्स रिसर्च इंस्टीट्यूट के शोध को नेचर मेडिसिन जर्नल के ताजा अंक में प्रकाशित किया गया है। इस शोध को अमेरिका के नेशनल इंस्टीट्यूट आफ हेल्थ, ब्रिटेन के वेलकम ट्रस्ट, यूरोपीय रिसर्च काउंसिल तथा आस्ट्रेलियन लौरेट काउंसिल ने वित्तीय मदद दी है तथा आधा दर्जन संस्थानों के विशेषज्ञ शामिल हुए हैं।

चीन ने जीनोम सिक्वेंसिग की

  • शोध पत्र के अनुसार चीन ने कोविड-19 की पहचान के बाद तुरंत इसकी जिनोम सिक्वेंसिग कर दी थी और आंकड़ों को सार्वजनिक किया था। कोविड-19 के जिनोम से वैज्ञानिकों ने इसकी उत्पति और विकास को लेकर शोध किया। वैज्ञानिकों ने वायरस की संरचना का गहन अध्ययन किया। इसमें पाए जाने वाले स्पाइक प्रोटीन के जेनेटिक टेम्पलेट का विश्लेषण किया। इसके भीतर रिसिप्टर बाइंडिंग डोमेन (आरबीडी) की संरचना का भी अध्ययन किया। आरबीडी वायरस का वह भाग होता है, जो मानव कोशिका से चिपक जाता है। यह रक्तचाप को नियंत्रित करने वाले जीन एसीई-2 पर हमला करता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि स्पाइक प्रोटीन और आरबीडी की संरचना से स्पष्ट होता है कि यह जेनेटिक इंजीनियरिंग से बनाया गया नहीं है बल्कि प्राकृतिक रूप से हुए बदलावों का नतीजा है।
  • शोध के अनुसार वायरस की बैकबोन की संरचना से भी इसकी प्राकृतिक उत्पत्ति की पुष्टि होती है। कोविड-19 की बैकबोन की संरचना कोरोना या किसी अन्य वायरस के मौजूदा बैकबोन के स्वरूप से नहीं मिलती है। बल्कि यह नई है। यदि किसी वायरस को लैब में जेनेटिक इंजीनियरिंग से तैयार किया जाता है तो उसकी बैकबोन मौजूदा वायरस से लेकर बनानी पड़ती है।
  • स्क्रीप्स इंस्टीट्यूट के एसोसिएट प्रोफेसर क्रिस्टीन एंडरसन ने कहा कि उपरोक्त दो कारण यह साबित करने के लिए पर्याप्त हैं कि कोविड-19 लैब में नहीं बना बल्कि प्राकृतिक रूप से इसकी क्रमागत उन्नति हुई है।

कहां से आया?

  • इस शोध में वैज्ञानिकों ने यह जानने की कोशिश की कि आखिर यह मानव में कैसे पहुंचा। इस पर दो तर्क हैं। एक यह कि पुराना कोरोना वायरस बदले स्वरूप में पशु में गया और उसके बाद इंसान में गया। दूसरा विचार यह है कि यह नया वायरस है और चमगादड़ से किसी अन्य में गया और वहां से मानव में आया। वैज्ञानिकों ने सीधे चमगादड़ से इंसान में आने की संभावना से असहमति जाहिर की है।

पैंगोलिन से कोरोना की शुरुआत होने की आशंका

  • चीन के वुहान शहर से शुरू हुए कोरोना वायरस की महामारी के वजहों का पता लगाने में जुटे शोधकर्ताओं ने स्‍मगलिंग के जरिए चीन पहुंचे पैंगोलिन पर संदेह जताया है। एक अध्ययन के अनुसार, यह अनुमान लगाया जा रहा है चीन में तस्करी के जरिये पहुंचे चींटीखोर पैंगोलिन से इस महामारी की संभावना हो सकती है।
  • यह रिपोर्ट ‘नेचर पत्रिका’ में प्रकाशित हुई। इस रिपोर्ट के अनुसार, दूसरे देशों से स्‍मगलिंग के जरिए चीन लाए गए पैंगोलिन में जो कोरोना वायरस मिले उनमें और कोविड-19 में इतनी समानता नहीं है कि इस बात को अभी पूरा दावा किया जा सके या यह कहा जाए कि यही जीव कोरोना की महामारी फैलाने का जिम्मेदार है।

पैंगोलिन की खरीद-बिक्री पर लगे रोक

  • इस संबंध में हांगकांग विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं समेत अनेक विशेषज्ञों ने बताया कि पैंगोलिन दूसरा ऐसा स्तनपाई जीव है जो कोरोना वायरस का करियर है। उन्होंने कहा कि भविष्य में किसी वायरस जनित बीमारी को रोकने के लिए जरूरी है कि पैंगोलिन की खरीद बिक्री पर सख्ती से रोक लगाई जाए।

चमगादड़ के पास सार्स-सीओवी-2 वायरसों की खान

  • शोधकर्ताओं का मानना है कि अभी तक मिले प्रमाणों से चमगादड़ ऐसा जीव है जिसके शरीर में जानलेवा सार्स-सीओवी-2 वायरस बहुतायत से पाया जाता है। चमगादड़ के संपर्क में आकर किन किन जीवों के जरिये मानव शरीर में वायरस पहुंचा यह अभी रहस्य है।

समुद्री जीव नहीं हैं जिम्‍मेवार

  • कोरोना फैलते ही समुद्री जीवों पर जो संदेह व्यक्त किया गया था वह कुछ दिनों बाद ही दूर हो गया था। इसके बाद पैंगोलिन ही ऐसा संभावित जीव माना जा रहा है जिससे इस बीमारी के फैलने की आशंका हो सकती है। चीन में इसका उपयोग खाने और दवाओं में होता है।

मलाया से स्‍मगलिंग में आए पैंगोलिन

  • इस अध्ययन रिपोर्ट में अगस्त 2017 से जनवरी 2018 के बीच मलाया से तस्करी कर दक्षिण चीन लाये गये 18 पैंगोलिन के नमूनों को शामिल किया गया है। इनमें से पांच में सार्स-सीओवी-2 वायरस पाए गए थे जो कोरोना परिवार के होते हैं। इसी तरह चीन के दो और प्रांतों में तस्करों से जब्त तीन पैंगोलिन में यही खतरनाक वायरस पाया गया। शोधकर्ताओं ने बताया कि इन नमूनों और मानव शरीर में मिले सार्स-सीओवी-2 के सीक्वेंस एक खास फर्क पाया गया जिसके आधार पर यह दावे से नहीं कहा जा सकता कि पैंगोलिन से यह वायरस मानव शरीर में फैला।

:: पर्यावरण और पारिस्थितिकी ::

ओड़िशा के समुद्र तट पर ओलिव रिडले

  • ओड़िशा के समुद्र तट पर इस बार अंडे देने के लिए सात लाख नब्बे हजार ओलिव रिडले कछुए पहुंचे हैं. कोरोना वायरस के संक्रमण के खतरों को देखते हुए देश भर में लॉक डाउन कर दिया गया है. इससे पॉल्यूशन लेवल काफी कम हुआ है. साथ ही समुद्री जीवन में भी बड़े बदलाव देखे जा रहे हैं. ओड़ि‍शा के तट पर इस बार सात लाख नब्बे हजार ओलिव रिडले कछुए पहुंचे हैं. इन्होंने अपने संघर्ष का युद्ध मानो जीत लिया है. अपने समुद्र में अपना कब्जा हो गया है. इन कछुओं ने गहिरमाथा और रूसीकुल्य में छह करोड़ से ज्यादा अंडे दिए हैं.

अर्थ आवर (Earth Hour) 2020

  • कोरोनावायरस के लॉकडाउन के बीच शनिवार रात 8:30 बजे दुनियाभर में अर्थ आवर (Earth Hour) मनाया गया। इस दौरान ऊर्जा की बचत कर धरती को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से लोग अपने घरों की गैर जरूरी लाइट्स और बिजली से चलने वाले उपकरण बंद रखे। 2020 में अर्थ आवर का यह 14 वां संस्करण था और इसकी थीम 'जलवायु परिवर्तन' है।

पृष्ठभूमि

  • अर्थ आवर डे की शुरुआत वन्यजीव एवं पर्यावरण संगठन 'वर्ल्ड वाइड फंड फॉर नेचर (wwf)' ने 2007 में की थी। पहली बार इसे साल 2007 में ऑस्ट्रेलिया के सिडनी शहर में मनाया गया। इसमें लोगों से 60 मिनट के लिए सारी लाइटें बंद करने की अपील की गई थी। धीरे-धीरे इसे विश्वभर में मनाया जाने लगा। आज यह एक आंदोलन बन चुका है। 2019 में ‘अर्थ ऑवर’ की थीम ‘जीने का तरीका बदलो’ था। इसमें 187 देशों के सात हजार से ज्यादा शहरों ने हिस्सा लिया था।

:: विविध ::

बाईचुंग भूटिया बने 'ब्रेक द चेन’ का हिस्सा

  • भारतीय फुटबॉल टीम के पूर्व कप्तान बाईचुंग भूटिया एशियाई फुटबॉल परिसंघ (एएफसी) के कोरोना महामारी के बारे में जागरूकता अभियान में दिखाई देंगे। 'ब्रेक द चेन’ नाम के इस अभियान में एशिया के कुछ बेहतरीन फुटबॉलर दिखाई देंगे जिसमें विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा स्वास्थ्य संबंधित दिशा निर्देशों को साझा किया जायेगा।
  • भूटिया पहले भारतीय थे जिन्होंने देश के लिए 100 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले थे लेकिन बाद में सुनील छेत्री ने उन्हें पीछे छोड़ दिया। भूटिया को 2014 में एएफसी एशियाई फुटबाल हॉल ऑफ फेम में शामिल किया गया था।

टाटा की ओर से कोरोना वायरस से लड़ने के 1500 करोड़ रुपये की मदद

  • कोरोना वायरस के संक्रमण से पैदा हुए हालात से निपटने की मुहिम में टाटा संस और टाटा ट्रस्ट ने हुए संयुक्त रूप से 1500 करोड़ रुपये की मदद का एलान किया है। इस धनराशि का उपयोग स्वास्थ्यकर्मियों और कोरोना वायरस से प्रभावितों के लिए आवश्यक मेडिकल सुरक्षा उपकरण, जांच के लिए किट्स की खरीद और उपचार सुविधाओं की स्थापना के लिए किया जाएगा।

नवीन चिकारा

  • भारतीय शॉटपुट खिलाड़ी नवीन चिकारा का ओलिंपिक में खेलने का सपना टूट गया है। वे आउट-ऑफ-कॉम्पिटीशन डोप टेस्ट में फेल हो गए हैं। वर्ल्ड एथलेटिक्स इंटिग्रिटी यूनिट ने नवीन पर 4 साल का प्रतिबंध लगा दिया है। यह प्रतिबंध 27 जुलाई 2018 से माना जाएगा, क्योंकि टेस्ट के लिए उनका सैंपल भी तभी लिया गया था।

मीनल दखावे भोंसले

  • कोरोनावायरस के खिलाफ भारत अब और मजबूती से जंग लड़ेगा। इसकी वजह कोरोना का टेस्ट करने वाली पहली स्वदेशी किट है, जिसे एक महिला वायरोलॉजिस्ट ने तैयार किया है। वह भी अपनी बच्ची को जन्म देने से महज 4 घंटे पहले। इनका नाम है मीनल दखावे भोंसले। मीनल उसी मायलैब डिस्कवरी की रिसर्च और डेवलपमेंट प्रमुख हैं, जिसने यह किट तैयार की है।
  • 2 दिन पहले ही मायलैब डिस्कवरी को टेस्टिंग किट तैयार करने और उसकी बिक्री की अनुमति मिली है। यह देश की पहली ऐसी फर्म है, जो कोरोनावायरस किट बेचेगी। इस किट की कीमत 1200 रुपए है। हर किट से 100 सैंपल की जांच हो सकती है। यानी एक सैंपल को जांचने का खर्च केवल 12 रुपए होगा जबकि विदेशी किट की कीमत 4,500 रुपए है। किट कोरोनावायरस संक्रमण की जांच ढाई घंटे में कर लेती है, जबकि विदेशी किट में 6 से 7 घंटे का वक्त लगता है।
  • मायलैब डिस्कवरी एक मॉलिक्यूलर डायगनॉस्टिक कंपनी है। यहां एचआईवी, हेपिटाइटिस-बी, सी सहित कई अन्य बीमारियों के लिए भी टेस्टिंग किट तैयार की जाती है। कंपनी ने दावा किया है कि वह एक सप्ताह के अंदर एक लाख कोरोनावायरस टेस्ट किट की सप्लाई कर देगी। ज़रूरत पड़ने पर दो लाख टेस्टिंग किट भी तैयार कर सकती है।

:: प्रिलिम्स बूस्टर ::

  • ‘राष्‍ट्रीय दूरभाष-परामर्श केंद्र (कॉनटेक) क्या है एवं इसे किस संस्था के द्वारा संचालित किया जायेगा? (टेलीमेडिसिन केन्द्र, एम्स दिल्ली)
  • किस तिथि को अर्थ आवर 2020 मनाया गया एवं इस वर्ष की थीम क्या थी? (28 मार्च, जलवायु परिवर्तन)
  • अर्थ आवर की शुरुआत किस संगठन के द्वारा एवं किस वर्ष में की गई थी? (वर्ल्ड वाइड फॉल नेचर-wwf, 2007)
  • कोरोनावायरस के विरुद्ध विश्व स्वास्थ्य संगठन और फीफा के द्वारा कौन सा जागरूकता कार्यक्रम चलाया जा रहा है? (ब्रेक द चेन)
  • हाल ही में चर्चा में रहे ‘पीएम केयर्स फंड’ ट्रस्ट के अध्यक्ष और सदस्य कौन होंगे? (अध्यक्ष- प्रधानमंत्री, सदस्य-रक्षा मंत्री, गृह मंत्री एवं वित्त मंत्री)
  • हाल ही में चर्चा में रहे ऑलिव रिडले किसकी प्रजाति है एवं यह किस राज्य की तट पर अपना घोंसला बनाते हैं? (कछुओं की प्रजाति, उड़ीसा के तट पर)
  • हाल ही में सुर्खियों में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष का महानिदेशक कौन है? (क्रिस्टलीना जॉर्जीवा)
  • हाल ही में मूडीज ने किस ब्रिक्स देश की क्रेडिट रेटिंग को जंक (रद्दी) की श्रेणी में डाल दिया है? (दक्षिण अफ्रीका)
  • 1 अप्रैल से प्रस्तावित ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स तथा यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया का विलय किस बैंक में होगा? (पंजाब नैशनल बैंक)
  • 1 अप्रैल से प्रस्तावित आंध्रा बैंक और कॉरपोरेशन बैंक का विलय किस बैंक में होगा? (यूनियन बैंक ऑफ़ इंडिया)
  • हाल ही में किस भारतीय खिलाड़ी को डोपिंग टेस्ट में विफल होने पर 4 सालों का प्रतिबंध लगा दिया गया है? (नवीन चिकारा)
  • हाल ही में किस देश/ संस्था ने कोरोनावायरस से लड़ने के लिए भारत को 29 लाख डालर की मदद की घोषणा की है? (अमेरिका)
  • किस जहरीली पदार्थ के सेवन से ईरान में तीन सौ से भी ज्यादा लोगों की मौत हो गई? (मेथेनॉल)
  • कोरोनावायरस के खिलाफ स्वदेशी परीक्षण किट बनाने वाले दल का नेतृत्व किस महिला के द्वारा किया गया था? (मीनल दखावे भोंसले)

स्रोत साभार: Dainik Jagran (Rashtriya Sanskaran), Dainik Bhaskar (Rashtriya Sanskaran), Rashtriya Sahara (Rashtriya Sanskaran) Hindustan Dainik (Delhi), Nai Duniya, Hindustan Times, The Hindu, BBC Portal, The Economic Times (Hindi & English), PTI, PIB

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