(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (28 अप्रैल 2020)

दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर


(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (28 अप्रैल 2020)


:: राष्ट्रीय समाचार ::

महान दार्शनिक शंकराचार्य और रामानुजाचार्य

चर्चा में क्यों?

  • उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने को भारतीय दर्शन में अध्यात्म परंपरा के महान दार्शनिक जगतगुरु शंकराचार्य और रामानुजाचार्य की जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की।

कौन थे शंकराचार्य?

  • शंकराचार्य का जन्म सन् 788 ई. में केरल के कालपी (काषल) नाम के गांव में हुआ था। इनके पिता का नाम शिवगुरु और माता का नाम सुभद्रा था। आदि शंकराचार्य को अद्वैत का प्रवर्तक माना जाता है। उनका कहना था कि आत्मा और परमात्मा एक ही हैं। हमें अज्ञानता के कारण ही दोनों भिन्न प्रतीत होते हैं। उन्होंने इन शिक्षाओं को सतत बनाए रखने को चारों दिशाओं में पीठ स्थापित किए। 1. वेदान्त ज्ञानमठ, श्रृंगेरी (दक्षिण भारत)। 2. गोवर्धन मठ, जगन्नाथपुरी (पूर्वी भारत) 3. शारदा (कालिका) मठ, द्वारका (पश्चिम भारत) 4. ज्योतिर्पीठ, बद्रिकाश्रम- बद्रीनाथ (उत्तर भारत)
  • शंकराचार्य ने सुप्रसिद्ध ब्रह्मसूत्र भाष्य के अतिरिक्त ग्यारह उपनिषदों पर तथा गीता पर भाष्यों की रचनाएं की एवं अन्य महत्वपूर्ण ग्रंथों स्तोत्र-साहित्य का निर्माण कर वैदिक धर्म एवं दर्शन को पुन: प्रतिष्ठित करने के लिए अनेक श्रमण, बौद्ध तथा हिंदू विद्वानों से शास्त्रार्थ कर उन्हें पराजित किया।
  • भारत की  सांस्कृतिक और आध्यात्मिक एकता के लिए आदि शंकराचार्य ने विशेष व्यवस्था की थी। उन्होंने उत्तर भारत के हिमालय में स्थित बदरीनाथ धाम में दक्षिण भारत के ब्राह्मण पुजारी और दक्षिण भारत के मंदिर में उत्तर भारत के पुजारी को रखा। वहीं पूर्वी भारत के मंदिर में पश्चिम के पूजारी और पश्चिम भारत के मंदिर में पूर्वी भारत के ब्राह्मण पुजारी को रखा था। जिससे भारत चारों दिशाओं में आध्यात्मिक और सांस्कृतिक रूप से मजबूत हो रूप से एकता के सूत्र में बंध सके।

रामानुजाचार्य

  • 1017 ई. में रामानुज का जन्म दक्षिण भारत के तिरुकुदूर क्षेत्र में हुआ था। बचपन में उन्होंने कांची में यादव प्रकाश गुरु से वेदों की शिक्षा ली। रामानुजाचार्य आलवन्दार यामुनाचार्य के प्रधान शिष्य थे। श्री रामानुजाचार्य ने वेदांत दर्शन पर आधारित अपना नया दर्शन विशिष्ट द्वैत वेदांत गढ़ा था। उन्होंने वेदांत के अलावा सातवीं-दसवीं शताब्दी के रहस्यवादी एवं भक्तिमार्गी अलवार संतों से भक्ति के दर्शन को तथा दक्षिण के पंचरात्र परम्परा को अपने विचार का आधार बनाया।

स्‍वयं के 6 पाठ्यक्रम 2019 की सर्वश्रेष्‍ठ ऑनलाइन पाठ्यक्रमों की सूची में शुमार

चर्चा में क्यों?

  • द क्लास सेंट्रल (स्टैनफोर्ड, एमआईटी, हार्वर्ड आदि जैसे शीर्ष विश्वविद्यालयों का एक निःशुल्‍क ऑनलाइन कोर्स यानी एमओओसी एग्रीगेटर) ने 2019 के सर्वश्रेष्ठ 30 ऑनलाइन पाठ्यक्रमों की सूची जारी की है, जिनमें से 6 पाठ्यक्रम स्‍वयं के हैं।

क्या है(स्‍वयं)?

  • ‘स्‍टडी वैब्‍स ऑफ एक्टिव लर्निंग फॉर यंग एस्‍पायरिंग माइंड्स’(स्‍वयं) सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) का उपयोग करते हुए ऑनलाइन पाठ्यक्रमों के लिए एक एकीकृत मंच है, जो स्‍कूल (9 वीं से 12 वीं) से स्नातकोत्तर स्तर तक को कवर करता है। अब तक स्‍वयं के माध्यम से कुल 2867 पाठ्यक्रमों की पेशकश की गई है और जनवरी 2020 सेमेस्टर के लिए 568 पाठ्यक्रम अपलोड किए गए हैं। स्‍वयं प्‍लेटफॉर्म पर लगभग 57 लाख (57,84,770) यूनिक यूजर्स/ पंजीकरण किए गए हैं और स्‍वयं के विभिन्न पाठ्यक्रमों में लगभग 1.25 करोड़ (125,04,722) नामांकन हैं। यह छात्रों, शिक्षकों और शिक्षक प्रशिक्षकों के लिए भी ऑनलाइन पाठ्यक्रमों की पेशकश करता है। इन्‍हें swayam.gov.in पर एक्‍सेस किया जा सकता है।

सर्वश्रेष्ठ ऑनलाइन पाठ्यक्रमों में शामिल किए गए स्‍वयं के 6 पाठ्यक्रम :

  1. ऐकडेमिक राइटिंग :एच.एन.बी.गढ़वाल विश्वविद्यालय (केंद्रीय विश्वविद्यालय) श्रीनगर गढ़वाल
  2. डिजिटल मार्केटिंग: पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ ।
  3. एनीमेशन्‍स :बनारस हिंदू विश्वविद्यालय ।
  4. मेथेमैटिकल इकॉनोमिक्‍स : दून विश्वविद्यालय, देहरादून
  5. पायथन फॉर डेटा साइंस: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास
  6. अर्ली चाइल्डहुड केयर एंड एजुकेशन (ईसीसीई): अविनाशीलिंगम इंस्टिट्यूट फॉर होम साइंस एंड हायर एजुकेशन फॉर विमेन, कोयंबटूर

स्वामित्व योजना और ई-ग्राम स्वराज

चर्चा में क्यों?

  • केन्द्रीय पंचायती राज मंत्री श्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने नई दिल्ली में पंचायत राज मंत्रालय की एक नई पहल- स्वामित्व योजना के बारे में दिशा-निर्देश जारी किया।

क्या स्वामित्व योजना है?

  • इस कार्यक्रम का लक्ष्य ग्रामीण लोगों को उनकी आवासीय संपत्तियों के दस्तावेज के साथ अधिकार प्रदान करना है ताकि वे आर्थिक प्रयोजनों के लिए अपनी संपति का इस्तेमाल कर सकें। यह कार्यक्रम फिलहाल छह राज्यों में प्रायोगिक तौर शुरू किया गया है। इसके तहत नवीनतम सर्वेक्षण पद्धतियों और ड्रोन का इस्तेमाल कर ग्रामीण आवासन भूमि का मानचित्रण किया जा सकता है।
  • इससे आवासीय संपत्तियों के दस्तावेज सुचारू बनाने और संपदा अधिकारों पर स्पष्टता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। इससे संपत्ति संबंधित विवादों के समाधान में भी सहायता मिलेगी। पंजाब और राजस्थान में, इस वर्ष के दौरान 101 सतत परिचालन संदर्भ स्टेशन (कॉर्स) स्थापित किए जाएंगे जो अगले साल गांवों के बसे हुए क्षेत्रों के वास्तविक सर्वेक्षण और मानचित्रण के लिए मंच तैयार करेंगे।

क्या है ई-ग्राम स्वराज?

  • ई-ग्राम स्वराज पंचायती राज मंत्रालय की ई-पंचायत मिशन मोड परियोजना के अंर्तगत पंचायत एंटरप्राइज सूट-पेस के हिस्से के रूप में विकसित अनुप्रयोग है।इस अनुप्रयोग का लक्ष्य विकेन्द्रीकृत नियोजन, प्रगति रिपोर्टिंग और कार्य-आधारित लेखांकन के माध्यम से देश भर में पंचायती राज संस्थानों (पीआरआई) में ई-शासन में बेहतर पारदर्शिता और मजबूती लाना है। यह पंचायतों की विश्वसनीयता बढ़ाने में भी मदद करेगा जो पीआरआई को धन के अधिक से अधिक विकास के लिए प्रेरित करेगा। इसके अलावा, ई-ग्राम स्वराज उच्च अधिकारियों द्वारा प्रभावी निगरानी के लिए एक मंच प्रदान करता है। यह पंचायतों की सभी योजनाओं और लेखांकन आवश्यकताओं के लिए एक एकल मंच होगा।

अटल ज्योति योजना के दुसरे चरण पर रोक

चर्चा में क्यों?

  • नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने सोलर स्ट्रीट लाइट स्कीम के दूसरे चरण को लागू करने की योजना पर अमल को दो साल के लिये रोक दिया है। कोरोना वायरस महामारी के प्रसार को देखते हुये यह फैसला किया गया।

पृष्ठभूमि

  • अटल ज्योति योजना (अजय) के दूसरे चरण के तहत 12वॉट क्षमता वाली एलईडी के साथ सोलर स्ट्रीट लाइटें योजना के तहत कवर होने वाले संससदीय क्षेत्रों में लगाई जानी थीं। योजना को अगले दो वित्तीय वर्षों के लिये बंद करने का निर्णय सरकार द्वारा संसद सदस्य स्थानीय क्षेत्र विकास निधि (एमपीलैड्स) योजना को 2020- 21 और 2021- 22 के दौरान परिचालन में नहीं रखने के फैसले को देखते हुये लिया गया है। अजय ज्योति योजना के तहत एक चौथाई राशि एमपीलैड्स योजना से ही आनी है जबकि तीन चौथाई राशि नवीन एवं नवीकरणीय मंत्रालय अपने बजट से उपलब्ध कराता है।

क्या है अटल ज्योति योजना (AJAY)?

  • केंद्र सरकार ने अटल ज्योति योजना (AJAY) का दूसरा चरण शुरू किया है। इस योजना के तहत उत्तर प्रदेश, बिहार सहित कई राज्यों में 3.04 लाख सोलर स्ट्रीट लाइट्स लगाई जाएंगी। इस पर केंद्र सरकार द्वारा 75 फीसदी केंद्रीय वित्तीय सहायता (सीएफए) दी जाएगी, जबकि 25 फीसदी राशि सांसद निधि कोष (MPlad) दिया जाएगा। दूसरे चरण में 761 करोड़ रुपए खर्च होंगे।

:: अंतर्राष्ट्रीय समाचार ::

सैन्य खर्च में शीर्ष तीन देशों में भारत-SIPRI

चर्चा में क्यों?

  • चालू दशक के वर्ष 2019 में सैन्य खर्चो में 3.6 फीसद की सबसे ज्यादा वैश्विक वृद्धि दर्ज की गई है। स्टॉकहोम स्थित एक थिंक टैंक के अध्ययन में ये बात सामने आई है। पहली बार है, जब एशिया की दो महाशक्तियां सैन्य खर्च के मामले में शीर्ष तीन देशों में शामिल हुईं हैं।

अध्ययन के मुख्य बिंदु

  • चालू दशक के वर्ष 2019 में सैन्य खर्चो में 3.6 फीसद की सबसे ज्यादा वैश्विक वृद्धि दर्ज की गई है। अमेरिका के बाद चीन और भारत सैन्य खर्च के मामले में क्रमश: दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं।
  • स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट के मुताबिक, 2018 की तुलना में वैश्विक सैन्य खर्च 2019 में बढ़कर 1,917 अरब यूएस डॉलर (लगभग 142 लाख करोड़ रुपये) तक पहुंच गया। 3.6 फीसद की वृद्धि 2010 के बाद से सबसे अधिक है।
  • चीन का सैन्य खर्च 2019 में 261 अरब डॉलर (लगभग 20 लाख करोड़ रुपये) तक पहुंच गया, जो 2018 की तुलना में 5.1 फीसद अधिक है।
  • भारत ने अपनी सेना पर 71.1 अरब डॉलर (लगभग साढ़े पांच लाख करोड़ रुपये) खर्च किया। भारत ने सैन्य खर्च को 6.8 फीसद तक बढ़ाया है। एसआइपीआरआइ के सीनियर रिसर्चर साइमन टी. वेजमैन ने कहा, पाक और चीन से तनाव के चलते भारत का सैन्य खर्च बढ़ा है।
  • कुल खर्च का 62 फीसद हिस्सा केवल पांच देश, अमेरिका, चीन, भारत, रूस और सऊदी अरब ने किया है।
  • वहीं एशिया में चीन और भारत के अलावा सैनिक साजोसामान पर सबसे अधिक खर्च करने वालों में जापान और दक्षिण कोरिया भी शामिल हैं। इनका सैन्य खर्च 2019 में क्रमश: 47.6 अरब डॉलर और 43.9 अरब डॉलर रहा है।

SIPRI क्या है?

  • स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (Stockholm International Peace Research Institute- SIPRI ) स्वीडन में स्थित एक अंतरराष्ट्रीय संस्थान है, जो संघर्ष, हथियारों, हथियार नियंत्रण और निरस्त्रीकरण में अनुसंधान के लिए समर्पित है। SIPRI की स्थापना 1966 में हुई थी। SIPRI का मुख्यालय स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम में है। यह संस्था संघर्ष, शस्त्र नियंत्रण, युद्धों तथा संघर्ष, युद्धक सामग्रियों, तथा निशस्त्रीकरण इत्यादि विषयों में शोध के लिए समर्पित है। SIPRI नीति निर्माताओं, शोधकर्ताओं, मीडिया तथा जन-सामान्य को डाटा, विश्लेषण तथा अनुशंसाएं उपलब्ध करवाता है।

दक्षिणी चीन सागर पर 'जबरन कब्‍जा के प्रयास

चर्चा में क्यों?

  • चीन ने साउथ चाइना सी में 'जबरन कब्‍जा' तेज कर दिया है। पिछले रविवार को चीन ने साउथ चाइना सी की 80 जगहों का नाम बदल दिया। इनमें से 25 आइलैंड्स और रीफ्स हैं, जबकि बाकी 55 समुद्र के नीचे के भौगोलिक स्‍ट्रक्‍चर हैं। यह चीन का समुद्र के उन हिस्‍सों पर कब्‍जे का इशारा है जो 9-डैश लाइन से कवर्ड हैं। यह लाइन इंटरनैशनल लॉ के मुताबिक, गैरकानूनी मानी जाती है। चीन के इस कदम से ना सिर्फ उसके छोटे पड़ोसी देशों, बल्कि भारत और अमेरिका की टेंशन भी बढ़ गई है।

विवाद के अन्य तात्कलिक कारण

  • साउथ चाइना सी पर अधिकार जताने से नाराज होकर वियतनाम ने कुछ दिन पहले संयुक्‍त राष्‍ट्र (UN) में चीन के खिलाफ शिकायत की थी। तीन दिन बाद, चीनी जहाजों ने एक वियतनामी जहाज को टक्‍कर मार-मार कर डुबो दिया। उसकी इस हरकत का फिलीपींस से लेकर अमेरिका तक विरोध हुआ।
  • इन गतिविधियों पर अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो ने कहा था कि चीन महामारी से ध्‍यान हटाने हटाने के लिए साउथ चाइना सी में इस तरह की हरकतें कर रहा है। पिछले हफ्ते, जापान के विदेश मंत्री ने भी चीन का विरोध किया था।
  • दरअसल चीन ने ईस्‍ट चाइना सी में स्थित सेनकाकू आइलैंड्स के पास जापान की समुद्री सीमा में जहाज भेज दिए थे। इसके जवाब में अमेरिका का जंगी जहाज ताइवान के जलडमरूमध्य से होकर गुजरा। चीन को काबू में रखने के लिए अमेरिका ने एक महीने के भीतर दूसरी बार ऐसा किया।

पृष्ठभूमि

  • दक्षिणी चीन सागर के पैरासेल और स्प्रैटली द्वीप समूह पर अपने अधिकार को चीन काफी पुराना बताता है। वह इसके पक्ष में 1947 में अपने यहां प्रकाशित एक मानचित्र दिखाता है जिसमें अंग्रेजी के यू अक्षर के आकार में 11 'डैश' लाइनें बनी हुई हैं।दक्षिण चीन सागर को लेकर चीन, फिलीपींस, ताइवान, वियतनाम, ब्रूनेई और मलेशिया के बीच विवाद है। समुद्री और हवाई मार्गों की स्वतंत्रता का हवाला देकर 2015 में अमेरिका भी इसमें शामिल हो गया है। हाल के वर्षों में चीन ने इस क्षेत्र में अपनी गतिविधियां बढ़ा दी हैं। इसमें द्वीपों का आकार बढ़ाने और कृत्रिम द्वीप बनाने के साथ-साथ उनमें पोर्ट, सैन्य अड्डे और हवाई पट्टियां बनाने की गतिविधियां शामिल हैं. खबरों के अनुसार, चीन स्प्रैटली द्वीप पर तीन हवाई पट्टियां विकसित कर चुका है.

9-डैश लाइन क्या है?

  • दक्षिणी चीन सागर के पैरासेल और स्प्रैटली द्वीप समूह पर अपने अधिकार को चीन काफी पुराना बताता है. वह इसके पक्ष में 1947 में अपने यहां प्रकाशित एक मानचित्र दिखाता है जिसमें अंग्रेजी के यू अक्षर के आकार में 11 'डैश' लाइनें बनी हुई हैं। 50 के दशक में प्रधानमंत्री चाऊ एनलाई ने इसमें से दो डैश हटवा दिए थे। चीन इस नक्शे के आधार पर ही दक्षिणी चीन सागर को अपना आंतरिक हिस्सा बताता है। ताइवान भी ठीक ऐसा ही दावा दोहराता है. यह स्वाभाविक भी है। 1947 में जब यह नक्शा प्रकाशित हुआ था तो चीन रिपब्लिक ऑफ चाइना हुआ करता था। 1949 की कम्युनिस्ट क्रांति के बाद चीन की मुख्यभूमि पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना हो गई और तत्कालीन सरकार का राज ताइवान द्वीप तक सीमित रह गया जो आज भी जारी है।

भारत को खतरा क्‍यों?

  • चीन ने ताइवान को डराने के लिए समुद्र में एयरक्राफ्ट कैरियर उतार दिया था। साथ ही मलेशिया के ऑयल शिप्‍स को भी चीनी जहाज धमका रहे थे। इसकी काट निकालने के लिए पिछले हफ्ते, मलेशिया के पास विवादित समुद्री इलाके से अमेरिका ने जंगी जहाज पार कराए। एक बार साउथ चाइना सी पर चीन की पकड़ मजबूत हो गई तो वह आइलैंड की आउटपोस्‍ट्स को पूर्वी हिंद महासागर में मिलिट्री पावर बढ़ाने के लिए इस्‍तेमाल करेगा।"

बालाकोट हमले और अनुच्छेद 370 का भूराजनीतिक स्थिति पर दीर्घकालिक प्रभाव

चर्चा में क्यों?

  • पाकिस्तान सेना के प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा ने कहा कि बालाकोट हवाई हमला और भारतीय संविधान के अनुच्छेद 370 को समाप्त करने के साथ जम्मू कश्मीर को विभाजित करने के दो घटनाक्रमों का दक्षिण एशिया की भूराजनीतिक स्थिति पर दीर्घकालिक असर पड़ेगा.
  • पाकिस्तानी सेना के शोध जर्नल ‘ग्रीन बुक 2020’ में एक लेख में जनरल बाजवा ने कश्मीर को ‘परमाणु युद्ध को निमंत्रण देने वाला केंद्रं बिंदु’ (न्यूक्लियर फ्लैश-प्वाइंट) बताया. इस जर्नल को पाकिस्तान के उच्च शिक्षा आयोग की मान्यता प्राप्त है. जर्नल के प्रमुख संरक्षक होने के नाते जनरल बाजवा ने इसके पहले पेज पर एक ‘नोट’ में अपने विचार लिखे हैं.

क्या कहा बाजवा ने ग्रीन बुक 2020’ में?

  • ‘‘2019 में दो घटनाक्रम हुए जिनका इस क्षेत्र की भूराजनीतिक स्थिति पर दीर्घकालिक असर पड़ेगा.’’ पहला भारतीय वायु सेना द्वारा 26 फरवरी को किया गया गैर जरूरी बालाकोट हवाई हमला और दूसरा पांच अगस्त को अनुच्छेद 370 और 35ए समाप्त करना.
  • ‘‘पहला कदम परमाणु शक्ति के तहत युद्ध के लिए जगह बनाने तथा बाध्यताएं थोपने की कोशिश थी, जिसे पाकिस्तानी वायु सेना ने अगले दिन ही उसी ताकत से जवाब देकर खारिज कर दिया.’’
  • ‘‘दूसरा फैसला, व्यापक तौर पर दुनिया की ओर से निंदा के बावजूद (कश्मीर के) 80 लाख से अधिक मुस्लिमों के जीवन को परेशान कर रहा है.’’
  • ‘‘कश्मीर परमाणु युद्ध को निमंत्रण देने का केंद्रं बिंदु बना हुआ है और अंतरराष्ट्रीय नियमों की पूरी तरह अवहेलना करते हुए (प्रधानमंत्री नरेंद्र) मोदी ने न केवल अपने सन्निकट पड़ोस को खतरे में डाला है, बल्कि पूरी दुनिया के लिये जोखिम बढ़ा दिया है.’’

:: भारतीय अर्थव्यवस्था ::

म्यूचुअल फंड्स के लिए 50 हजार करोड़ रुपये की सहायता

चर्चा में क्यों?

  • फ्रैंकलिन टेंपलटन की छह डेट म्यूचुअल फंड योजनाओं के बंद होने को लेकर सरकार से लेकर सभी नियामक एजेंसियां तक चिंतित हैं। यह संकट कहीं और भी म्यूचुअल फंड कंपनियों को अपने जद में ना ले, इसे रोकने की व्यवस्था शुरू कर दी गई है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआइ) ने सोमवार को 50 हजार करोड़ रुपये का इंतजाम देश के म्यूचुअल फंड कंपनियों के लिए किया है।

कैसे होगा इस फण्ड का इस्तेमाल?

  • इस फंड का इस्तेमाल म्यूचुअल फंड कंपनियों को आसानी से कर्ज देने के लिए कर सकते हैं। यह तीन महीनों तक के लिए खुला रहेगा। उधर, वित्त मंत्रलय और बाजार नियामक सेबी भी हालात पर नजर रखे हुए हैं ताकि अगर ज्यादा निवेशक फंड्स में निवेशित राशि निकालने के लिए सामने आते हैं तो बाजार के लिए बहुत ही चिंताजनक स्थिति पैदा न हो।
  • आरबीआइ की तरफ से उपलब्ध कराई गई यह राशि रेपो रेट व्यवस्था के तहत फंड कंपनियों को दी जाएगी। इसका मतलब है कि 90 दिनों के लिए राशि बैंकों को रेपो रेट पर दी जाएगी, बैंकों से यह राशि फंड कंपनियों को दी जाएगी जिसे वे निवेशकों की अदायगी में इस्तेमाल कर सकते हैं। आरबीआइ ने इस बारे सूचना जारी करते हुए स्वीकार किया है कि फंड प्रबंधन कंपनियों के समक्ष भुगतान की समस्या है, लेकिन यह समस्या अभी डेट से जुड़े फंड्स के लिए ज्यादा है। इसके अलावा दूसरे फंड्स में तरलता (फंड की उपलब्धता) को लेकर कोई समस्या नहीं है।

पृष्ठभूमि

  • आरबीआइ की तरफ से म्यूचुअल फंड्स कंपनियों के भुगतान के लिए अलग से राशि का इंतजाम करने का कदम ही बताता है कि हालात अभी भी खराब हैं। इसके पहले इस तरह का कदम वर्ष 2008 व 2013 में उठाया गया था, तब भी वैश्विक अस्थिरता की वजह से इन कंपनियों के लिए तरलता का संकट पैदा हो गया था। कोरोना से शेयर बाजार के साथ ही कारपोरेट सेक्टर व सरकारी बांड्स बाजार की भी खस्ताहाल स्थिति है। इसमें निवेश करने वाले फंड्स के रिटर्न का स्तर काफी नीचे आ चुका है। इस माहौल को देखते हुए बड़ी संख्या में इनमें पैसा लगाने वाले निवेशक निवेश वापस निकालने के लिए आगे आ रहे हैं। लेकिन इससे फंड प्रबंधन कंपनियों को समस्या हो रही है क्योंकि उनके पास बड़ी संख्या में लोगों की राशि लौटाने के लिए फंड नहीं है।

क्या होंगे लाभ?

  • यह फंड निवेशकों के बीच में भरोसा लाने का काम करेगा। साथ ही इससे यह भी सुनिश्चित होगा कि पूरा फंड प्रबंधन उद्योग ठीक तरीके से काम करता रहे। अभी जो माहौल बना है उसमें डेट आधारित फंड में निवेश करना एक अच्छा अवसर है। आरबीआइ का यह कदम वित्तीय स्थायित्व को बढ़ावा देगा। बैंकों के पास पर्याप्त तरलता है, लेकिन म्यूचुअल फंड्स के लिए अलग से इंतजाम होने से उन्हें ज्यादा भरोसा होगा।

म्यूच्यूअल फंड्स क्या है?

  • आसान शब्दों में कहें तो म्यूच्यूअल फंड्स बहुत सारे लोगों के पैसे से बना हुआ फण्ड होता है. जिसमे लगाया गया पैसे अलग अलग जगहों पर निवेश करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है और कोशिश की जाती है की निवेशक को उसकी रकम से ज्यादा से ज्यादा मुनाफा दिया जाए.फंड को प्रबंधित करने का काम एक पेशेवर व्यक्ति द्वारा किया जाता है जिसको पेशेवर फंड मैनेजर कहा जाता है.

नौ अहम उद्योगों पर लंबे समय तक रहेगा संकट: डन एंड ब्रैडस्ट्रीट की रिपोर्ट

चर्चा में क्यों?

  • कोविड-19 की वजह से लागू राष्ट्रीय लॉकडाउन अगर अगले कुछ हफ्तों में पूरी तरह से खत्म भी हो जाए तो इसकी छाया से तमाम उद्योगों को निकलने में महीनों लग जाएंगे। प्रमुख शोध एजेंसी डन एंड ब्रैडस्ट्रीट ने देश के 16 प्रमुख उद्योगों और इन पर कोरोना वायरस से उपजी स्थिति पर एक विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित की है जो बेहद चिंता जताने वाली है। इसमें कहा गया है कि नौ ऐसे उद्योग हैं जो लॉकडाउन व अंतरराष्ट्रीय हालात से काफी लंबे समय तक प्रभावित रहेंगे। इनमें पर्यटन, ऑटोमोबाइल, मनरंजन, इलेक्ट्ऱॉनिक्स, हॉस्पिटैलिटी, इलेक्ट्रॉनिक्स, बैंकिंग, रत्न-आभूषण और छोटे व मझोले उद्योग सेक्टर हैं। चिंता की बात यह है कि देश में रोजगार के अवसरों को पैदा करने में इन उद्योगों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होती है।

रिपोर्ट के मुख्य बिंदु

  • रिपोर्ट के मुताबिक ड्रग्स व फार्मास्यूटिकल्स, रिटेल, थोक कारोबार, टेक्सटाइल और लाइवस्टॉक पर फिलहाल तो असर होगा, लेकिन यह असर बहुत दिनों तक नहीं दिखेगा। इनमें स्थिति बहुत ही तेजी से सामान्य हो सकेगी।
  • लॉजिस्टिक्स और मेटल उद्योगों के बारे में कहा गया है कि ये बहुत ज्यादा दिनों तक दबाव में नहीं रहेंगे और अभी जो असर पड़ा है उसे जल्दी दूर करने में सफल होंगे।
  • ज्यादा प्रभावित होने वाले उद्योगों में बैंकिंग के बारे में रिपोर्ट में कहा गया है कि आने वाले महीनों में फंस कर्जे (एनपीए) की समस्या केंद्रीय बैंक के अनुमान से भी ज्यादा रहेगी। आरबीआइ ने कहा है कि सितंबर, 2020 तक एनपीए का स्तर कुल अग्रिम के मुकाबले 10.5 फीसद तक हो सकता है। अभी यह तकरीबन 9.5 फीसद है।
  • रिपोर्ट का कहना है कि वास्तविक स्थिति इससे भी ज्यादा हो सकती है। पर्यटन उद्योग जो सबसे ज्यादा रोजगार देता है, के बारे में कहा गया है कि लंबे समय तक विदेशी पर्यटकों की संख्या बहुत ही सीमित रहेगी। शारीरिक दूरी व दूसरे स्वास्थ्य मानकों का पालन करना भी इस उद्योग के लिए मुश्किल भरा होगा।
  • इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरण उद्योग के बारे में कहा गया है कि इकोनॉमी की स्थिति खराब होने की वजह से इसकी मांग और नीचे चली जाएगी।

इंडिया रेटिंग्स ने भारत का विकास दर अनुमान घटाया

  • रेटिंग एजेंसी इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च (इंड-रा) ने कोरोना संकट के बढ़ते असर के बीच चालू वित्त वर्ष के लिए देश का विकास दर अनुमान घटाकर 1.9 प्रतिशत कर दिया है। एजेंसी के मुताबिक यह 29 बीते वषों में देश की सबसे कम विकास दर रहेगी। एजेंसी को अंदेशा है कि आंशिक लॉकडाउन की अवधि मई के मध्य तक बढ़ सकती है। इसके साथ ही एजेंसी ने यह भी कहा है कि अगर लॉकडाउन मध्य-मई के बाद भी जारी रहता है, तो विकास दर 2.1 प्रतिशत के नकारात्मक स्तर तक गिर सकती है। इससे पहले वित्त वर्ष 1991-92 में जीडीपी विकास दर 1.1 प्रतिशत रही थी।
  • इस बारे में एजेंसी के प्रधान अर्थशास्त्री और पब्लिक फाइनेंस डायरेक्टर सुनील कुमार सिन्हा ने एक रिपोर्ट में कहा कि इस वर्ष 30 मार्च को हमारा अनुमान था कि अप्रैल से शुरू हो रहे वित्त वर्ष के दौरान सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी की विकास दर 3.6 प्रतिशत रहेगी। लेकिन अब हमने उसमें संशोधन करते हुए उसे 1.9 प्रतिशत कर दिया है। अगर लॉकडाउन मई-मध्य के बाद तक जारी रहता है और जून के मध्य जाकर थोड़ी रिकवरी शुरू होती है तो उस स्थिति में जीडीपी विकास दर 41 वषों के निचले स्तर तक फिसलकर 2.1 प्रतिशत के नकारात्मक जोन में जा सकती है। अगर ऐसा हुआ तो वित्त वर्ष 1951-52 के बाद से छठी बार इकोनॉमी की विकास दर नकारात्मक जोन में जाएगी।

:: विज्ञान और प्रौद्योगिकी ::

खास पूरक आहार कोविड-19 से लड़ने में हो सकते हैं मददगार : अध्ययन

चर्चा में क्यों?

  • एक नए अध्ययन में पता चला है कि ऐसे पूरक आहार जिनमें विटामिन सी और विटामिन डी होता है वह कोविड-19 जैसे विषाणु जनित संक्रमणों और श्वसन तंत्र से जुड़ी अन्य बीमारियों से लड़ने के लिए शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में प्रभावी भूमिका निभा सकते हैं। यह अध्ययन  'न्यूट्रिएंट्स जर्नल में प्रकाशित हुआ है।

क्या कहा गया अध्ययन में?

  • ''पूरी दुनिया में एक साल में श्वसन तंत्र के गंभीर संक्रमण से 25 लाख से ज्यादा लोगों की मौत हो जाती है। ''इसबीच बहुत सारे आंकडें हैं जो ये दिखाते हैं कि अच्छा पोषण रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाता है। खास तरह के विटामिन,मिनरल्स और फैटी एसिड्स शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं।
  • शोधकर्ताओं के अनुसार विटामिन सी, विटामिन डी, ज़िंक और मछलियों में पाया जाने वाला ओमेगा-3 फैटी एसिड फैटी एसिड और डीएचए खासतौर पर प्रतिरोधक क्षमता को बनाए रखने और उसके काम करने के लिए आवश्यक हैं।

क्या है विटामिन- C?

  • विटामिन C रासायनिक नाम एस्कार्बिक एसिड है। विटामिन- C शरीर की मूलभूत रासायनिक क्रियाओं में यौगिकों का निर्माण और उन्हें सहयोग करता है। तंत्रिकाओं तक संदेश पहुंचाना या कोशिकाओं तक ऊर्जा प्रवाहित करना आदि। विटामिन सी मानव शरीर के सामान्य कामकाज के लिए आवश्यक है। यह एस्कॉर्बिक अम्ल होता है जो कि हर तरह के सिट्रस फल में जैसे, नींबू, संतरा, अमरूद, मौसमी आदि में पाया जाता है। विटामिन सी की कमी से स्कर्वी नामक रोग हो सकता है, जिसमें शरीर में थकान, मासंपेशियों की कमजोरी, जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द, मसूढ़ों से खून आना और टांगों में चकत्ते पड़ने जैसी दिक्कतें हो जाती हैं। विटामिन सी की कमी से शरीर छोटी छोटी बीमारियों से लड़ने की ताकत भी खो देता है, जिसका नतीजा बीमारियों के रूप में सामने आता है।
  • विटामिन सी खट्टे रसदार फल जैसे आंवला, नारंगी, नींबू, संतरा, बेर, कटहल, पुदीना, अंगूर, टमाटर, अमरूद, सेब, दूध, चुकंदर, चौलाई और पालक विटामिन सी के अच्छे स्रोत हैं। इसके अलावा दालों में भी विटामिन सी पाया जाता है। विटामिन के वसा में घुलनशील है, इसकी कमी से रक्त का थक्का जमना बंद हो जाता है। इसके स्त्रोत हरी सब्जियां, अंकुरित चने और फल हैं।

क्या है विटामिन- D?

  • विटामिन D रासायनिक नाम कैल्सिफेराल है। विटामिन डी का सबसे अच्छा स्त्रोत सूर्य की किरणें हैं। जब हमारे शरीर की खुली त्वचा सूरज की अल्ट्रावायलेट किरणों के संपर्क में आती है तो ये किरणें त्वचा में अवशोषित होकर विटामिन डी का निर्माण करती हैं। अगर सप्ताह में दो बार दस से पंद्रह मिनट तक शरीर की खुली त्वचा पर सूर्य की अल्ट्रा वायलेट किरणें पड़ती हैं तो शरीर की विटामिन डी की पूर्ति हो जाती है।
  • इसकी कमी से हड्डियां कमजोर हो जाती हैं, हाथ और पैर की हड्डियां टेढ़ी भी हो जाती हैं। मोटापा बढ़ने के साथ ही शरीर में विटामिन डी का स्तर कम होता जाता है, जो लोग मोटापे जैसी बीमारी से ग्रस्त है उन्हें विटामिन डी की कमी को पूरा करने के साथ-साथ मोटापे को भी कम करना चाहिए। सूर्य विटामिन डी का सबसे अच्छा स्त्रोत माना जाता है। इसके अलावा दूध, अंडे, चिकन, सोयाबीन और मछलियों में भी विटामिन डी पाया जाता है।

क्या है ओमेगा-3 फैटी एसिड?

  • ओमेगा-3 फैटी एसिड एक प्रकार की वसा है। यह शरीर में हार्मोन्स के निर्माण के साथ शारीरिक और मानसिक विकास में मदद करती है।
  • इसकी कमी से उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, उच्च कॉलेस्ट्रॉल, डायबिटीज, सूजन, आंत्र रोग, अल्जाइमर जैसे रोग हो सकते हैं।  शाकाहारी और मांसाहारी दोनों स्रोतों से हमें ओमेगा-3 फैटी एसिड मिलता है। यह अखरोट जैसे सूखे मेवों, मूंगफली, अलसी, सूरजमुखी, सरसों के बीज, कनोडिया या सोयाबीन, स्प्राउट्स, टोफू, गोभी, हरी बीन्स, ब्रोकली, शलजम, हरी पत्तेदार सब्जियों और स्ट्रॉबेरी, रसभरी जैसे फलों में काफी मात्रा में पाया जाता है। टय़ूना, सामन, हिलसा, सार्डिन जैसी मछलियां, शैवाल, झींगा जैसे सी-फूड ओमेगा-3 के ईपीए और डीएचए प्रकार के अच्छे स्त्रोत हैं। इसके अलावा गाय का दूध, मूंगफली, अंडे का सेवन भी फायदेमंद है।

प्रतिरोधकता बढ़ाने के लिए काढ़ा उत्पादन को बढ़ावा दे: आयुष मंत्रालय

चर्चा में क्यों?

  • कोविड-19 महामारी के बीच आयुष मंत्रालय ने राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदशों को काढ़ा बनाने की विधि सौंपी है और उनसे उनके वाणिज्यिक उत्पादन को बढ़ावा देने का आह्वान किया है। मंत्रालय ने इस काढ़े से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ने का दावा किया है। आयुष (आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी) मंत्रालय ने कहा कि यह विधि जनसमुदाय के स्वास्थ्य के लिए गुणकारी है और प्रधानमंत्री उस पर अपनी सहमति जता चुके हैं।

किन तत्वों से बनेगा काढ़ा?

  • सभी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों एवं आयुष दवा विनिर्माताओं को भेजे पत्र में कहा गया है कि काढ़ा तुलसी, दालचीनी, सुंथी (अदरख चूर्ण) और कृष्णा मरीच (कालीमिर्च) से बनेगा और उसे ‘आयुष क्वाथ’ या ‘आयुष कुदीनर’ या ‘आयुष जोशंदा’ के जेनेरिक नाम से बेचा जाएगा।

पृष्ठभूमि

  • कोविड-19 महामारी के मद्देनजर रोग प्रतिरोधकता बढ़ाने के उपाय के महत्व पर विचार करते हुए आयुष मंत्रालय जन समुदाय के स्वास्थ्य के हित में इस रेडीमेड आयुष औषधि के उपयोग को बढ़ावा देना चाहता है। प्रधानमंत्री ने 14 अप्रैल को संविधान दिवस पर राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में इस पर मुहर लगायी थी। विभिन्न जड़ी-बूटी वाली औषधियां बनाने के काम में लगी एक कंपनी ने आयुष क्वाथ बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह दवा पाउडर या गोलियां के रूप में शीघ्र ही बाजार में मिलेगी।

एंटी पैरासाइट दवा से कोरोना वायरस को खत्म करने का दावा

चर्चा में क्यों?

  • कोरोना के इलाज में वैज्ञानिकों ने एक नया दावा किया है। अमेरिका के नॉर्थशोर यूनिवर्सिटी हेल्थ सिस्टम के संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉ. नीरव शाह ने कहा है कि एंटी पैरासाइट (कीड़े मारने की) दवा इन्वर्टीमाइसिन से वायरस को दो दिन में मारा जा सकता है।
  • ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न स्थित मोनाश बायोमेडिसिन डिस्कवरी इंस्टीट्यूट के डॉ. काइली वॉगस्टाफ का भी कहना है कि उन्होंने अध्ययन में पाया है कि दवा की एक डोज से वायरस का आरएनए को 48 घंटे या 24 घंटे के भीतर खत्म कर सकता है।
  • फ्लोरिडा के ब्रोवॉर्ड हेल्थ मेडिकल सेंटर के डॉ. जैक्स रैज्टर का कहना है कि वे पहले से ही संक्रमितों के इलाज में इस दवा  का प्रयोग कर रहे हैं। दवा का असर भी दिख रहा है। इसी तरह उटाह यूनिवर्सिटी के डॉ. अमित पटेल ने शोध में कहा, फेफड़े में नुकसान वाले  वेंटिलेटर पर रखे गए गंभीर मरीजों में भी इन्वर्टीमाइसिन का बेहतर परिणाम देखने को मिला।

किस लिए उपयोग होती इन्वर्टीमाइसिन दवा

  • इन्वर्टीमाइसिन दवा पहली बार 1970-80 में बनी थी। इसका इस्तेमाल पशुओं में मिलने वाले कीड़ों को मारने के लिए किया जाता था। इसके बाद इस दवा का इस्तेमाल मनुष्यों के सिर में होने वाले जुओं को मारने के लिए होता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की आवश्यक दवाओं की सूची में ये दवा शामिल है।

कैसे करती है कोरोना एक वायरस पर असर

  • कोरोना एक वायरस है न की पैरासाइट। ऐसे में इस दवा से वो कैसे खत्म हो सकता है? इस सवाल पर वैज्ञानिकों का कहना है कि इन्वर्टीमाइसिन वायरल आरएनए राइबो-न्यूक्लिक एसिड को ब्लॉक करने का काम करती है, जिससे स्वस्थ कोशिकाएं संक्रमण की चपेट में आने से बचती हैं और व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है, जिससे वह लंबे समय तक वायरस से लड़ सकता है।
  • अमेरिकी संस्था फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) ने आगाह किया है कि जानवरों के इलाज में इस्तेमाल दवा मनुष्यों पर असर करे यह जरूरी नहीं। इसके इस्तेमाल से पहले और अधिक अध्ययन की जरूरत है। कोरोना वायरस में इन्वर्टीमाइसिन दवा कितनी प्रभावी है, ये अध्ययन के बाद ही पता चल सकेगा।

कोरोना वायरस से बढ़ रहा इंफ्लेमेट्री सिंड्रोम

चर्चा में क्यों?

  • कोरोना की वजह से ब्रिटेन के बच्चों में इंफ्लेमेट्री सिंड्रोम बढ़ रहा है, जिसका परिणाम मल्टीपल ऑर्गन फेल के रूप में सामने आ सकता है। डॉक्टरों के अनुसार तीन हफ्ते में ऐसे मामले तेजी से बढ़े हैं। इस पर ब्रिटेन की राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा (एनएचएस) ने डॉक्टरों को अलर्ट किया है।
  • डॉक्टरों की सोसाइटी ने आईसीयू में इन बच्चों को चिकित्सा मुहैया करवाने की तैयारी रखने को कहा है। अलर्ट को लेकर बाल रोग गहन चिकित्सा सोसाइटी ने अपने सदस्यों को बताया कि कोविड-19 के साथ बच्चों में इंफ्लेमेट्री सिंड्रम बढ़ रहा है।
  • इस दौरान विभिन्न अंगों में सूजन आ जाती है, संक्रमण अधिक होने पर अंग काम करना बंद भी कर सकते हैं। कोरोना की चपेट में आ चुके बच्चों में यह जटिल स्थितियां पैदा हो रही हैं। हालांकि इसके प्रसार का खुलासा नहीं किया है, लेकिन आशंका है कि अगर मामले बढ़े तो बच्चों को सीधे आईसीयू में रखना होगा, जो पहले ही कोविड-19 मरीजों की संख्या से भरे हुए हैं।

क्या जटिलताएं आ रहीं बच्चों में?

  • टॉक्सिक शॉक सिंड्रोम : यह वायरस या बैक्टिरिया की वजह से होता है। इसमें बुखार, त्वचा पर रैश और बीपी घटने जैसी स्थितियां बन रही हैं।
  • एटिपिकल कावासाकी रोग : इसमें रक्त नलिकाओं में सूजन आ जाती हैं। वे फूलने लगती हैं।
  • पेट दर्द : दर्द के अलावा पेट से जुड़ी समस्याएं भी हो रही हैं। घातक इसलिए है क्योंकि इसकी वजह से उनकी हृदय में सूजन आ रही है।

:: पर्यावरण और पारिस्थितिकी ::

खोजा गया असि नदी का प्रवाह पथ

चर्चा में क्यों

  • बीएचयू के एक शोध छात्र ने 'वाराणसी' नाम के दो आधारों में एक असि नदी का संपूर्ण प्रवाह पथ खोज निकाला है। भूगोल के शोध छात्र मल्लिकार्जुन मिश्र को इस शोध को पूरा करने में पांच वर्ष लगे हैं। उनका दावा है कि प्रयागराज में गंगा-यमुना संगम के पास दुर्वासा ऋषि के आश्रम के पास असि का उद्गम स्थल रहा है। इस नदी का प्रवाहपथ 188 किमी लंबा था जो अब आठ किमी की दूरी में सिमट गया है। इस शोध में सुदूर संवेदन आंकड़ों, गूगल अर्थ, भुवन, इत्यादि का सहारा लिया गया।

असि नदी से सम्बंधित तथ्य

  • असि नदी वाराणसी के निकट गंगा नदी में मिलने वाली एक प्रसिद्ध छोटी शाखानदी है। ऐसी मान्यता हैं इस नगरी का नाम असी और वरुणा नदियों के बीच में स्थित होने के कारण ही वाराणसी हुआ था। असि को असीगंगा भी कहते हैं- 'संवत् सोलह सौ असी असी गंग के तीर, सावन शुक्ला सप्तमी तुलसी तज्यौ शरीर'- इस प्रचलित दोहे से यह भी ज्ञात होता है कि महाकवि तुलसी ने इसी नदी के तट पर संभवत: वर्तमान अस्सी घाट के पास अपनी इहलीला समाप्त की थी।

:: विविध ::

लेफ्टिनेंट श्री कृष्ण चंदा वेलिंकर

चर्चा में क्यों?

  • ब्रिटेन के राष्ट्रमंडल युद्ध समाधि आयोग (सीडब्ल्यूजीसी) की ओर से हाल में जारी पुरालेख में उस भारतीय वायुसैनिक की उल्लेखनीय कहानी सामने आई है जो प्रथम विश्वयुद्ध में हिस्सा लेने वाले चुनिंदा भारतीय लड़ाकू विमान पायलटों में शामिल था। लेफ्टिनेंट श्री कृष्ण चंदा वेलिंकर की कहानी युद्ध की उन हजारों मर्मस्पर्शी कहानियों में से एक है जो पारिवारिक पत्राचार के रूप में सुरक्षित हैं और जिन्हें डिजिटाइजेशन परियोजना के तहत सामने लाया गया है।
  • इन्हीं में से एक कहानी वेलिंकर की है जो औपनिवेशिक भारत के बंबई के रहने वाले थे। अत्यंत मुश्किलों और भेदभाव का सामना करने के बाद, आखिरकार वह पायलट बने और जून 1918 में पश्चिमी मोर्चे (वेस्टर्न फ्रंट) के ऊपर आसमान में गश्त करने वक्त लापता हो गए थे।

कौन थे लेफ्टिनेंट श्री कृष्ण चंदा वेलिंकर?

  • लेफ्टिनेंट श्री कृष्ण चंदा वेलिंकर उन 13 लाख भारतीयों में से एक थे जिन्होंने ब्रिटिश साम्राज्य के लिए लड़ाई लड़ने का आह्वान स्वीकार किया था। करीब 74,000 लोगों ने अपनी जन्मभूमि को दोबारा नहीं देखा और आज वे फ्रांस, बेल्जियम, पश्चिम एशिया और अफ्रीका समेत दुनिया के अन्य कोनों में स्मारकों और समाधि स्थलों में याद किए जाते हैं। वेलिंकर कैंब्रिज यूनिवर्सिटी में पढ़ रहे सुशिक्षित व्यक्ति थे।
  • वह  रॉयल फ्लाइंग कॉर्प्स में बतौर पायलट शामिल होना चाहते थे लेकिन पूर्वाग्रहों के चलते उन्हें एयर मैकेनिक बनने के लिए कहा लेकिन बाद में उन्हें अधिकारी के तौर पर कमीशन दिया गया। उन्हें 1918 में फ्रांस में तैनाती मिली जहां वह पश्चिमी मोर्चे पर आसमान में गश्त पर थे। नयी जारी की गई फाइलों में वेलिंकर की उल्लेखनीय यात्रा का और युद्ध खत्म होने के बहुत वक्त बाद उनकी समाधि का पता चलने के बारे में विस्तार से विवरण उपलब्ध है।

:: प्रिलिम्स बूस्टर ::

  • हाल ही में जारी SIPRI की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2019 में सैन्य खर्च में विश्व के प्रथम तीन अग्रणी राष्ट्र कौन है? (प्रथम अमेरिका, द्वितीय चीन और भारत तृतीय)

  • चर्चा में रहे स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) की स्थापना कब हुई थी एवं इसका मुख्यालय कहाँ स्थित है? (1966, स्वीडन)

  • कौन सा देश अपने दावों के समर्थन में विवादित 11 'डैश' लाइन का प्रयोग करता है एवं यह किस भौगोलिक क्षेत्र से संबंधित है? (चीन, दक्षिणी चीन सागर से)

  • हाल ही में चर्चा में रहे शोध जर्नल ‘ग्रीन बुक 2020’ क्या है एवं यह किस देश से संबंधित है? (पाकिस्तानी सेना का शोध जनरल, पाकिस्तान)

  • किस अनुसूची के तहत राज्यपाल ‘बोडोलैंड क्षेत्रीय परिषद’ का प्रशासन करता है एवं इस परिषद में कितने जिले शामिल है? (छठी अनुसूची, 4 जिले- कोकराझार, बक्सा, चिरांग,उदलगुड़ी)

  • चर्चा में रहे आदि गुरु शंकराचार्य का जन्म कहाँ हुआ था एवं उन्होंने किन स्थानों पर पीठों की स्थापना करवाई? (केरल, चार पीठ-श्रृंगेरी, जगन्नाथपुरी, द्वारका,बद्रीनाथ)

  • आदि गुरु शंकराचार्य और श्री रामानुजाचार्य ने क्रमशः कौन से दर्शन का प्रतिपादन किया? (शंकराचार्य-अद्वैत, रामानुजाचार्य-विशिष्टद्वैत)

  • विश्व के सर्वश्रेष्ठ संस्थानों द्वारा परिचालित ‘द क्लास सेंट्रल’ के सर्वश्रेष्ठ 30 नि:शुल्क ऑनलाइन पाठ्यक्रमों की सूची में भारत के कितने पाठ्यक्रम शामिल हैं? (6 पाठ्यक्रम-स्वयं पोर्टल)

  • चर्चा में रहे स्वामित्व योजना और ई-ग्राम स्वराज योजनाओं को क्रमशः किस लिए लागू किया गया? (क्रमशः ग्रामीण आवासीय भूमि का मानचित्रण और PRI में ई गवर्नेंस हेतु)

  • चर्चा में रहे अटल ज्योति योजना (AJAY) -II किस लिए लागू की गई थी? (संसदीय क्षेत्रों में एललईडी के साथ सोलर स्ट्रीट लाइटें को लगाना)

  • चर्चा में रहे विटामिन C और विटामिन D का रासायनिक नाम क्या है? (विटामिन C एस्कार्बिक,विटामिन D-कैल्सिफेराल)

  • प्रतिरोधकता बढ़ाने हेतु प्रस्तावित पेय पदार्थ आयुष (क्वाथ/कुदीनर/आयुष जोशंदा में किन गुणकारी तत्वों का प्रयोग किया जाएगा? (तुलसी, दालचीनी, अदरख चूर्ण और कालीमिर्च)

  • हाल ही में चर्चा में रहे लेफ्टिनेंट श्री कृष्ण चंदा वेलिंकर कौन थे? (ब्रिटेन की ओर से प्रथम विश्व युद्ध में हिस्सा लेने वाले भारतीय लड़ाकू विमान पायलट)

 

 

 

स्रोत साभार: Dainik Jagran (Rashtriya Sanskaran), Dainik Bhaskar (Rashtriya Sanskaran), Rashtriya Sahara (Rashtriya Sanskaran) Hindustan Dainik (Delhi), Nai Duniya, Hindustan Times, The Hindu, BBC Portal, The Economic Times (Hindi & English), PTI, PIB

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