(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (27 मई 2020)

दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर


(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (27 मई 2020)


:: राष्ट्रीय समाचार ::

चारधाम परियोजना

चर्चा में क्यों?

  • केंद्रीय मंत्री श्री नितिन गडकरी ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से चारधाम परियोजना के तहत सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) द्वारा निर्मित चंबा सुरंग से वाहन रवानगी आयोजन का उद्घाटन किया गया।

क्या है चारधाम परियोजना?

  • प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्रव मोदी ने दिसंबर 2016 में चारधाम राष्ट्री य राजमार्ग संपर्क परियोजना(ऑल वेदर रोड) का उद्धाटन किया था। इसके तहत यमुनोत्री धाम, गंगोत्री धाम, केदारनाथ धाम और बद्रीनाथ धाम जाने वाले राष्ट्रीसय राजमार्ग के 889 किलोमीटर के हिस्से तथा कैलाश मानसरोवर यात्रा वाले इसके कुछ हिस्सोंम के विकास और उसको बेहतर बनाने का काम किया जाना है।
  • इस परियोजना के तहत नए सड़कों के निर्माण, सड़कों को चौड़ा करना, ढलान वाले हिस्सोंि सुरक्षात्मक दीवारों को ऊंचा करना, भूस्खलन रोकने के लिए ड्रेपरी प्रणाली, नेटिंग,एंकरिंग की व्यावस्थाक इत्यादि शामिल है। ढलानों को स्थिर बनाने हेतु एवं वनस्पोतियां उगाने के लिए जैव इंजीनियरिंग की हाइड्रो सीडिंग जैसे अभिनव तरीकों समेत भूस्खलन संभावित स्थानों पर जियो सिंथेटिक तकनीकी से पहाड़यिों का उपचार किया जा रहा है।

परियोजना से जुड़ी चिंताएं

  • इस परियोजना को लेकर पर्यावरण से जुड़ी काफी सारी चिंताएं विद्यमान हैं। एक तो यह क्षेत्र भूकंप की दृष्टि से संवेदनशील है वहीं दूसरी ओर व्यापक मात्रा में सड़क के लिए पहाड़ों एवं वृक्षों को काटा जा रहा है। इसके साथ ही यह प्रोजेक्ट, उत्तरकाशी की भागीरथी घाटी के पर्यावरणीय लिहाज से संवेदनशील इको सेंसेटिव ज़ोन से गुजरता है। इस परियोजना में पर्यावरण मानकों के उल्लंघन पर लगातार प्रश्न चिन्ह लगाए जा रहे हैं।

क्या होंगें लाभ?

  • पहाड़ पर अनुकूल परिस्थितियां के कारण एवं बुनियादी अवसंरचना के अभाव के कारण लोग पलायन के लिए मजबूर हैं।इस परियोजना के पूर्ण होने से तीर्थाटन और पर्यटन में इजाफा होगा और जिससे पहाड़ के लोगों की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होगी। इसके साथ ही राज्य में निजी निवेश का भी आगमन होगा जिससे इस क्षेत्र की आर्थिक समृद्धि में तेजी आएगी।
  • उत्तराखंड के सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थित गांव जिसे रक्षा की प्रथम पंक्ति माना जाता है पलायन के कारण ‘घोस्ट विलेज’ में तब्दील हो गए हैं। ऑल वेदर रोड से यहां पर लोगों के पलायन पर अंकुश लगेगी। इसके साथ ही चीन सीमा पर सैन्य संसाधनों के गतिशीलता में भी तेजी आएगी। हाल में चीन के आक्रामक रवैया से इन रणनीतिक सड़कों का महत्व बढ़ जाता है।

सार्वजनिक खरीद पोर्टल जेम

चर्चा में क्यों?

  • आनलाइन सरकारी खरीद मंच जेम को नए रंग रूप और बेहतर फीचर के साथ पेश किया जाएगा। इसमें शक्तिशाली सर्च इंजन, ब्रांड की नई पहचान और उत्पाद स्वीकृति की तेज प्रक्रिया शामिल हैं। नए पोर्टल के जरिए वस्तुओं और सेवाओं के लिए तेजी से श्रेणियां तैयार की जा सकेंगी। जेम के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के अनुसार “जेम 4.0 का विकास किया जा रहा हैं, जो कुशल, बेहतर, एकीकृत, बुद्धिमान और अधिक समावेशी होगा। यह दुनिया भर के किसी भी सरकारी मंच द्वारा उन्नत प्रौद्योगिकी के सबसे बड़े उपयोगों में एक होगा। इसके लिए हमने एक प्रौद्योगिकी रोड मैप बनाया है।’’ जेम 4.0 का नए संस्करण इस साल अगस्त-सितंबर तक चालू हो जाएगा।

क्या है सरकारी ई-मार्केट (जेम)?

  • सरकारी ई-मार्केट (जेम) पोर्टल की शुरुआत अगस्त 2016 हुई थी, जहां केंद्र सरकार के सभी मंत्रालय और विभाग वस्तुओं और सेवाओं की ऑनलाइन खरीद करते हैं। भारत सरकार के वाणिज्य विभाग द्वारा गठित सरकारी ई-बाजार एक अत्याेधुनिक सार्वजनिक खरीद का मंच है। जो सार्वजनिक खरीद में पारदर्शिता और दक्षता सुनिश्चित करने के लिए सरकारी उपभोक्ता‍ओं की सुविधा के लिए ई-बोली प्रक्रिया, रिवर्स ई-नीलामी और मांग में सामंजस्यए बनाए रखने के तौर-तरीके उपलब्धा कराता है।

विध्वंसकारी टिड्डों का हमला

  • पिछले दो सालों से टिड्डों के आतंक की अचानक सुर्खियां बनने लगी हैं। अभी भी पाकिस्तान से राजस्थान, गुजरात, पंजाब, हरियाणा होते हुए मध्य प्रदेश तक टिड्डों का दल तांडव कर रहा है। फसलों को बर्बाद कर रहे टिड्डे उत्तर प्रदेश में भी घुसे थे। हालांकि हवा के बहाव के साथ पूरा दल एक बार फिर मध्य प्रदेश की तरफ मुड़ गया है।
  • आखिर इतने भारी संख्या में टिड्डे आ कहां से रहे हैं और इनका मूल स्थान कहां है? क्या ये पाकिस्तान में ही पैदा हो रहे हैं? जवाब है नहीं।

क्या कारण है टिड्डियों के हमले के?

  • IFS प्रवीण कासवान बताते हैं कि टिड्डियों की बाढ़ के पीछे मुख्य कारण मई और अक्टूबर 2018 में खाड़ी देशों, ओमान और यमन में आए मेकुनू और लुबान चक्रवाती तूफान हैं। उन्होंने विशेषज्ञों के हवाले से बताया कि उन चक्रवाती तूफानों के कारण ऐसे मौसमी हालात पैदा हुए जिनमें टिड्डियों की संख्या में अपार वृद्धि हो गई।
  • 'फूड ऐंड ऐग्रिकल्चर ऑर्गनाइजेशन (FAO) के पूर्वानुमान के मुताबिक, हॉर्न ऑफ अफ्रीका( सोमालिया, इथोपिया, इरिट्रिया और जिबूती) में रेगिस्तानी टिड्डों को लेकर बेहद गंभीर परिस्थितियां पैदा हो गई हैं। वहां अभी फसल बुआई का सीजन है, इसके साथ ही टिड्डों ने अंडे देना शुरू कर दिया है। इसलिए, अगर टिड्डे रेकॉर्ड संख्या में पैदा हुए तो वो भोजन के लिए पूरब का ही रुख करेंगे।' मतलब साफ है कि आने वाले दिनों में टिड्डों का आतंक और भयावह रूप अख्तियार कर सकता है।

टिड्डियो के बारे संक्षिप्त जानकारी

  • टिड्डियो के बारे में बताएं तो टिड्डी एक तरह के बड़े उष्णकटिबंधीय कीड़े होते हैं और इनके पास उड़ने की बेमिसाल क्षमता होती है। देखा जाए तो सामान्य तौर पर ये हर रोज़ 150 किलोमीटर तक उड़ सकते हैं। भारत में टिड्डियों की प्रजातियाों के बारे में आपको बताएं तो इनमें रेगिस्तानी टिड्डी, प्रवासी टिड्डी, बॉम्बे टिड्डी और ट्री टिड्डी जैसी प्रजातियां पाइन जाती हैं। दरअसल टिड्डियों के ये समूह मुख्य रूप से वनस्पति के लिये बड़ा खतरा होते हैं। एक वयस्क टिड्डी प्रतिदिन अपने वज़न के बराबर भोजन यानी लगभग 2 ग्राम वनस्पति खा सकती है। दरअसल टिड्डियों के ये समूह दिन के दौरान उड़ते रहते हैं और रात के वक़्त खेतों में ही रुक जाता है। ऐसे में टिड्डियों के इन समूहों को भगाना काफी दूभर हो जाता है जोकि खेती करने वाले किसानों के लिए बेहद ही जटिल समस्या है।

:: अंतर्राष्ट्रीय समाचार ::

अंतर्राष्ट्री य श्रम संगठन (ILO)

चर्चा में क्यों?

  • अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन ने विभिन्न राज्यों द्वारा श्रम कानून में फेरबदल और निलंबन पर चिंता व्यक्त की है। साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भारत की अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं को बनाए रखने के लिए इस मामले में राज्यों को स्पष्ट संदेश भेजने और प्रभावी सामाजिक संवाद कायम करने के लिए भी कहा है।

पृष्ठभूमि

  • इंटक, एटक, सीटू, एआईयूटीयूसी जैसे 10 केंद्रीय श्रमिक संगठनों ने इस बारे में 14 मई को अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की थी।
  • भारत ने आईएलओ के साथ कई संधियों पर हस्ताक्षर किए हैं। यह संधियां देश के मौजूदा कानूनी ढांचे और नियम-कानूनों के अनुरूप हैं। कोई भी देश आईएलओ के साथ अपने कानूनी ढांचे में अनिवार्य प्रावधान करने के बाद ही संधि कर सकता है। इस प्रकार किसी भी श्रम कानून में बदलाव या उन्हें निलंबित करने से इन संधियों का उल्लंघन होता है। यह संधिया एक राष्ट्र के तौर पर किसी देश की अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताएं भी होती हैं। इस बीच इन दस केंद्रीय श्रमिक संगठनों ने सोमवार को आईएलओ से इस अनिश्चित माहौल में अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए प्रभावी हस्तक्षेप करने की अपील की। ताकि भारत सरकार को श्रमिकों के मूल अधिकारों को एकतरफा उन्मूलन करने से रोका जा सके। साथ ही सामाजिक भागीदारी और आईएलओ के त्रिपक्षीय सिद्धांत को बनाए रखा जा सके।
  • उन्होंने विशेष तौर पर केंद्र सरकार के अंतरराज्यीय प्रवासी श्रमिक (रोजगार के विनियम और सेवा की शर्तें) अधिनियम-1979 को निरस्त करने के विचार को रेखांकित किया। संगठनों ने मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और गुजरात सरकारों के ट्रेड यूनियन अधिनियम-1926 को स्थगित करने का भी उल्लेख किया। यह अधिनियम संघ बनाने की आजादी, औद्योगिक विवाद अधिनियम का मूल आधार है जो मजदूरों को अन्य कानूनी अधिकार के साथ हड़ताल पर जाने का अधिकार भी देता है।

ILO क्या है?

  • अंतर्राष्ट्री य श्रम संगठन संयुक्तथ राष्ट्र की एक विशेष एजेंसी है। यह अंतर्राष्ट्रीमय श्रम मानक तय करती है, काम की जगह पर अधिकारों को प्रोत्साटहित करती है और रोजगार के उत्कृतष्टि अवसरों के लिए प्रोत्सा हित करती है, काम से जुड़े मुद्दों पर संवाद को पुष्ट करना तथा सामाजिक संरक्षण बढ़ाना। आईएलओ का अनूठा त्रिपक्षीय ढांचा है जिसमें सरकारें, नियोक्तात और श्रमिक प्रतिनिधि एकजुट होते हैं। इसकी स्थापना वर्ष 1919 में वर्साय की संधि के तहत राष्ट्र संघ की एक संबद्ध एजेंसी के रूप में हुई थे। इसका मुख्यालय जेनेवा-स्विट्ज़रलैंड में स्थित है।

इंटरनेशनल क्रिमिनल पुलिस ऑर्गेनाइजेशन (इंटरपोल)

चर्चा में क्यों?

  • इंटरपोल ने भारतीय एजेंसियों के आग्रह पर भगोड़ा हीरा कारोबारी नीरव मोदी के भाई निहाल मोदी के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस को फिर से सार्वजनिक किया है। निहाल ने इंटरपोल द्वारा इसे जारी किए जाने के खिलाफ पिछले वर्ष अपील की थी लेकिन हाल में उसकी अपील नामंजूर हो गई, जिसके बाद इसे सार्वजनिक किया गया।

पृष्ठभूमि

  • बेल्जियम का नागरिक निहाल दीपक मोदी केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा वांछित है। उसके बड़े भाई नीरव मोदी द्वारा पंजाब नेशनल बैंक के साथ कथित तौर की गई धोखाधड़ी के मामले में वह वांछित है। कथित अपराध की कड़ी को खत्म करने के लिए उस पर दुबई में साक्ष्यों को नष्ट करने के आरोप हैं।
  • भारतीय एजेंसियों के आग्रह पर इंटरपोल ने निहाल के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस (आरसीएन) जारी किया किया था और उसके बारे में ज्यादा सूचना जुटाने के लिए सार्वजनिक किया था। आरसीएन के माध्यम से पूरी दुनिया में कानून प्रवर्तन एजेंसियों से आग्रह किया जाता है कि प्रत्यर्पण होने तक किसी व्यक्ति को अस्थायी रूप से गिरफ्तार किया जाए, वह आत्मसमर्पण करे या इसी तरह की उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।

कमीशन फॉर कंट्रोल ऑफ इंटरपोल फाइल्स (सीसीएफ)

  • निहाल ने इसे कमीशन फॉर कंट्रोल ऑफ इंटरपोल फाइल्स (सीसीएफ) के समक्ष चुनौती दी थी। यह एक स्वतंत्र निकाय है जो सुनिश्चित करता है कि इंटरपोल के माध्यम से सभी निजी आंकड़े संगठन के नियमों के मुताबिक हों। पिछले वर्ष निहाल मोदी द्वारा आरसीएन को चुनौती देने का आग्रह प्राप्त होने के बाद इंटरपोल ने इसे आम लोगों की नजरों से दूर कर दिया था, लेकिन सदस्य देशों की कानून लागू करने वाली एजेंसियां इसे देख सकती थीं। सीसीएफ ने हाल में निहाल मोदी की याचिका खारिज कर दी और आरसीएन को फिर से सार्वजनिक कर दिया गया।

क्या है इंटरपोल?

  • इंटरनेशनल क्रिमिनल पुलिस ऑर्गेनाइजेशन यानी कि इंटरपोल एक संस्था है जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पुलिस के बीच समन्वय का काम करती है। इंटरपोल उन देशों के बीच समन्वय का काम करता है जो इस संस्था के सदस्य हैं। इंटरपोल की स्थापना का विचार सबसे पहले 1914 में मोनाको में आयोजित पहली अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक पुलिस कांग्रेस में रखा गया और उसके बाद इंटरपोल की स्थापना आधिकारिक रूप से 1923 में की गयी और इसका नाम ‘अंतर्राष्ट्रीय अपराध पुलिस आयोग’ रखा गया। बाद में साल 1956 में इसका नाम ‘इंटरपोल’ रखा गया। इंटरपोल मुख्य रूप से इन तीन प्रकार के अपराधों (काउंटर-टेरेरिज्म,साइबर अपराध,संगठित अपराध) के लिए अपनी पुलिस विशेषज्ञता और क्षमताओं का इस्तेमाल करता है।
  • इंटरपोल के प्रधान सचिवालय द्वारा, राष्ट्रीय केंद्रीय ब्यूरो (एनसीबी) और अधिकृत संस्थाओं के निवेदन पर 8 तरह के नोटिस जारी किए जाते हैं। ये नोटिस इंटरपोल की चार आधिकारिक भाषाओँ; अंग्रेजी, फ्रेंच, अरबी और स्पेनिश में प्रकाशित किए जाते हैं। इस तरह के नोटिस जारी करने के पीछे इंटरपोल का मकसद सदस्य देशों की पुलिस को सतर्क करना होता है ताकि संदिग्ध अपराधियों को पकड़ा जा सके या खोये हुए व्यक्तियों के बारे में जानकारी जुटाई जा सके।
  1. रेड कॉर्नर नोटिस (Red Corner Notice)
  2. पीला कार्नर नोटिस (Yellow Corner Notice)
  3. ब्लैक कार्नर नोटिस (Black Corner Notice)
  4. बैगनी नोटिस (Purple corner Notice)
  5. ग्रीन कॉर्नर नोटिस (Green Corner Notice)
  6. इंटरपोल-संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद विशेष सूचना (Interpol-United Nations Security Council Special Notice)
  7. ऑरेंज कार्नर नोटिस (Orange Corner Notice)
  8. ब्लू कॉर्नर नोटिस (Blue corner Notice)

:: राजव्यवस्था ::

अखिल भारतीय न्यायिक सेवा

चर्चा में क्यों?

  • सरकार प्रवेश परीक्षा के जरिए अधीनस्थ अदालतों में अधिकारियों की भर्ती के लिए अखिल भारतीय न्यायिक सेवा गठित करने से जुड़े एक विधेयक को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में है। अखिल भारतीय परीक्षा में सफल होने वालों को उच्च न्यायालय और राज्य सरकारों द्वारा नियुक्त किया जाएगा। मसौदा केंद्रीय मंत्रिमंडल में भेजने से पहले प्रस्तावित अखिल भारतीय सेवा की विभिन्न विशेषताओं को उच्च न्यायपालिका के साथ साझा किया जाएगा।

क्या है अखिल भारतीय न्यायिक सेवा?

  • भारतीय प्रशासनिक सेवा और भारतीय पुलिस सेवा की तर्ज पर अखिल भारतीय न्यायिक सेवा के प्रावधान पर आजादी के तुरंत बाद विचार किया गया था। अखिल भारतीय न्यायिक सेवा का प्रावधान 1976 में संविधान के अनुच्छेद 312 में 42 वें संशोधन के माध्यम से शामिल किया गया था। लेकिन इसके व्यापक पहलुओं पर निर्णय लेने के लिए एक विधेयक की आवश्यकता होगी।
  • अभी, विभिन्न उच्च न्यायालय और राज्य सेवा आयोग न्यायिक अधिकारियों की भर्ती के लिए परीक्षाएं आयोजित करते हैं। 25 उच्च न्यायालयों में से अधिकतर के निचली न्यायपालिका पर प्रशासनिक नियंत्रण बनाए रखना चाहते हैं। प्रस्तावित कानून उन्हें अधीनस्थ अदालतों के न्यायाधीशों को नियुक्त करने की अनुमति दे सकता है। निचली अदालतों में मामलों में दलीलें स्थानीय भाषाओं में दी जाती हैं। इसलिए ऐसी आशंकाएं हैं कि उत्तर भारत का कोई व्यक्ति दक्षिणी राज्य में कैसे सुनवाई कर सकता है। लेकिन सरकार का मानना है कि आईएएस और आईपीएस अधिकारी भी भाषा अवरोध को पार करते हुए विभिन्न राज्यों में अपनी सेवाएं देते हैं।

:: अर्थव्यवस्था ::

मध्यप्रदेश में 22,000 करोड़ रुपए की बहु-उद्देशीय परियोजनाओं के लिए समझौता ज्ञापन

  • ऊर्जा मंत्रालय के तहत केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रम और भारत की अग्रणी एनबीएफसी ऊर्जा वित्त निगम (पीएफसी) ने आज यहां मध्य प्रदेश राज्य में 22,000 करोड़ रुपए की 225 मेगावाट क्षमता वाली पनबिजली परियोजनाओं और बहु-उद्देशीय परियोजनाओं के वित्त पोषण के लिए मध्य प्रदेश सरकार की संपूर्ण स्वामित्व वाली कंपनी नर्मदा बेसिन प्रोजेक्ट कंपनी लिमिटेड (एनबीपीसीएल) के साथ एक समझौता किया ।

समझौते से जुड़ें प्रमुख बिंदु

  • मध्य प्रदेश में 225 मेगावाट क्षमता की पनबिजली परियोजनाओं और 12 प्रमुख बहु-उद्देशीय परियोजनाओं के ऊर्जा घटकों की स्थापना के लिए एनबीपीसीएल धन मुहैया कराएगी।
  • इस समझौता ज्ञापन से पीएफसी को एनबीपीसीएल के साथ सक्रिय रूप से भागीदारी करने और 12 बड़ी बहु-उद्देशीय परियोजनाओं को लागू करने के राज्य सरकार के उद्यम के एक हिस्से के रूप में बहुद्देशीय परियोजनाओं के ऊर्जा घटकों के साथ ही 225 मेगावाट की क्षमता वाले पनबिजली संयंत्रों को धन मुहैया कराने में मदद मिलेगी।
  • इस समझौते के तहत बसानिया बहुद्देशीय परियोजना डिंडोरी, चिंकी बोरस बहुउद्देशीय परियोजना नरसिंहपुर रायसेन होशंगाबाद, सक्कर पेंच लिंक नरसिंहपुर छिंदवाड़ा, दुधी परियोजना छिंदवाड़ा होशंगाबाद इत्यादि जैसी कुछ बड़ी बहुउद्देशीय परियोजनाओं के लिए धन उपलब्ध कराया जाएगा।

:: विज्ञान और प्रौद्योगिकी ::

आरटी-एलएएमपी आधारित जांच किट

  • कोविड-19 की गंभीरता में कमी लाने के लिए जांच एक महत्वपूर्ण घटक है, सीएसआईआर-आईआईआईएम, जम्मू, सीएसआईआर की एक संघटक प्रयोगशाला, ने रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल) के साथ साझेदारी की है जिससे एक नए रिवर्स ट्रांसक्रिप्टेज़-लूप मीडिएटेड आइसोथरमल एम्पलीफिकेशन (आरटी-एलएएमपी) आधारित कोविड-19 नैदानिक किट को विकसित किया जा सके और बढ़ावा दिया जा सके, जिसके लिए सीएसआईआर-आईआईआईएम, जम्मू और आरआईएल के बीच एक औपचारिक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर भी किए गए है।

पृष्ठभूमि

  • देश में कोविड-19 की गंभीरता को कम करने वाले अभियान के एक भाग के रूप में, सीएसआईआर ने सीएसआईआर के महानिदेशक डॉ. शेखर मांडे के मार्गदर्शन में विभिन्न अनुसंधान गतिविधियों को समन्वयित करने के लिए पांच प्रकार निर्धारित किए हैं, जो कि डिजिटल एवं आणविक निगरानी, औषधि और टीके, तीव्र और किफायती नैदानिकी, अस्पताल सहायक उपकरण और पीपीई और आपूर्ति श्रृंखला एवं लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र से संबंधित है।

क्या है आरटी-एलएएमपी जांच?

  • कोविड-19 आरटी-एलएएमपी जांच रोगियों के नाक/ गले के स्वाब के नमूने के साथ की जाने वाली न्यूक्लिक एसिड आधारित जांच है। सिंथेटिक टेम्पलेट्स का उपयोग करते हुए जांच नुस्खे को विकसित किया गया है और उसका सफलतापूर्वक प्रदर्शन किया गया है। यह तीव्र गति वाला (45-60 मिनट), लागत प्रभावी और सटीक परीक्षण है। इस परीक्षण को कम संख्या में रोगियों के नमूनों के साथ किया जा रहा है और अधिक संख्या में रोगियों के नमूनों पर किट को मान्य बनाने की योजना बनाई जा रही है और जिसको आरआईएल के साथ मिलकर पूरा किया जाएगा।

क्या है आरटी-एलएएमपी जांच के लाभ?

  • इस जांच का लाभ यह है कि आरटी-एलएएमपी आधारित कोविड-19 किट के घटक आसानी से उपलब्ध हैं और इन्हें पूरी तरह से भारत में निर्मित किया जा सकता है। जबकि, वर्तमान समय में कोविड-19 की जांच को रियल-टाइम पीसीआर द्वारा किया जाता है जिनके अधिकांश घटकों का आयात किया जाता है। इसके अलावा ये जांच महंगी होती है; जिनके लिए उच्च प्रशिक्षित श्रमशक्ति, महंगे उपकरणों और अपेक्षाकृत उच्च गुणवत्ता वाली प्रयोगशालाओं की आवश्यकता होती है और दूरदराज स्थानों के क्वारंटाइन केंद्रों, हवाई अड्डों और रेलवे स्टेशनों आदि में इनका उपयोग नहीं किया जा सकता है।
  • आरटी-एलएएमपी जांच को, हवाई अड्डों, रेलवे स्टेशनों, बस अड्डों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर मोबाइल इकाइयों/कियोस्क जैसे बहुत ही बुनियादी प्रयोगशाला संरचना में न्यूनतम विशेषज्ञता के साथ एकल ट्यूब में जांच की जा सकती है। परीक्षण का अंतिम परिणाम जानने के लिए एक साधारण रंगीन प्रतिक्रिया होती है, जो यूवी प्रकाश में आसानी से दिखाई देती है और अब इसे संशोधित किया जा रहा है जिससे कि इसे नियमित प्रकाश में भी प्राप्त किया जा सके।

चमगादड़ों से कोरोना जैसे कई खतरनाक वायरस है मौजूद: शोध

  • चीन के वुहान से निकले कोरोना वायरस (corona virus) ने पूरी दुनिया में कोहराम मचा रखा है। यह महामारी अब तक करीब 56 लाख लोगों को अपनी चपेट में ले चुकी है जिनमें से करीब साढ़े तीन लाख लोगों की मौत हो चुकी है। लेकिन चीन में चमगादड़ों पर शोध के लिए मशहूर एक महिला वायरोलॉजिस्ट का कहना है कि कोरोना वायरस तो महज झांकी है, असली तस्वीर अभी बाकी है। उनका कहना है कि चमगादड़ों में कोरोना जैसे कई खतरनाक वायरस मौजूद हैं।
  • चीन की ‘बैट वूमैन’ ने नाम से मशहूर वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी की डिप्टी डायरेक्टर शी झेंगली ने कहा कि चमगादड़ जैसे जंगली जानवरों में कोरोना जैसे कई ज्यादा खतरनाक वायरस मौजूद हैं और अगर समय रहते उनका पता नहीं लगाया गया तो आने वाले दिनों में दुनिया को इस तरह की और महामारी का सामना करना पड़ सकता है। वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी वही लैब है जहां से कोरोना के फैलने की बात कही जा रही है।
  • झेंगली ने 2004 में वायरसों पर शोध शुरू किया था जब सार्स ने कहर ढाया था। तब से वह सभी तरह के चमगादड़ों का अध्ययन किया है। 2013 में उन्हें उस समय सफलता मिली जब उन्हें पता चला कि चमगादड़ का मल 96.2 फीसदी सार्स सीओवी-2 की तरह होता है। 2015 में उन्होंने अपने शोध में पाया था कि सार्स जैसे वायरस चमगादड़ से इंसान में आ सकता है।

क्या है चीन की ‘बैट वूमैन’ की सलाह?

  • झेंगली ने कहा कि वायरसों के बारे में हो रहे शोध के बारे में सरकारों और वैज्ञानिकों को पारदर्शी रुख अपनाने की जरूरत है। अगर हमें मानवता को अगली महामारी से बचाना है तो हमें जंगली जानवरों में पाए जाने वाले अंजान वायरसों पर शोध करना चाहिए और उनके बारे में अग्रिम चेतावनी देनी चाहिए। अगर हम उनके बारे में नहीं जानेंगे तो इससे भी बड़ी महामारी फैल सकती है। उन्होंने कहा कि कोरोना से निपटने के लिए पूरी दुनिया को मिलकर काम करने की जरूरत है।

हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन

  • विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोविड-19 की रोकाथाम के लिए भारत में तैयार होने वाली मलेरिया रोधी दवा हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन (HCQ) के क्लीनिकल ट्रायल पर रोक लगा दी है।

पृष्ठभूमि

  • दरअसल, विश्व स्वास्थ्य संगठन ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन का कोविड-19 के मरीजों पर क्लीनिकल ट्रायल अस्थायी तौर पर रोकने का फैसला किया है। उससे पहले स्वास्थ्य के क्षेत्र में दुनियाभर के रिसर्च प्रकाशित करने वाली मशहूर पत्रिका द लैंसेट ने एक शोध रिपोर्ट प्रकाशति कर दावा किया था कि कोविड-19 मरीजों के इलाज में मलेरिया के इलाज में इस्तेमाल आने वाली दवा क्लोरोक्वीन और हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन (HCQ) से फायदा मिलने का कोई सबूत नहीं मिला है।

ICMR की प्रतिक्रिया

  • भारतीय आर्युविज्ञान अनुसंधान संस्थान (ICMR) का कहना है कि हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन को लेकर पिछले डेढ़ महीनों में कई स्तर पर जांच हुई जिनमें उसके कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने की क्षमता की पुष्टि हुई है। साथ ही, अध्ययन में यह भी स्पष्ट हुआ है कि इस दवा के इस्तेमाल का कोई बड़ा साइड इफेक्ट नहीं है। टेस्ट ट्यूब की स्टडी में की पाया गया कि इसमें ऐंटी-वायरल कपैसिटी है।

:: विविध ::

UN सैन्य जेंडर एडवोकेट ऑफ द ईयर अवार्ड

  • एक भारतीय सेना अधिकारी और दक्षिण सूडान (UNMISS) में संयुक्त राष्ट्र मिशन के साथ काम करने वाली महिला शांति सेना की मेजर सुमन गवानी को प्रतिष्ठित संयुक्त राष्ट्र सैन्य जेंडर एडवोकेट ऑफ द ईयर अवार्ड (2019) के लिए चुना गया है। UNMISS में शांति प्रयासों के लिए उनके योगदान के लिए उन्हें सम्मानित किया गया है।
  • यह पहली बार है कि किसी भारतीय शांति सैनिक को संयुक्त राष्ट्र सैन्य लिंग अधिवक्ता पुरस्कार दिया जा रहा है। 2016 में इस अवार्ड की शुरुआत की गई थी। यह पुरस्कार शांति अभियानों में प्रमुखों और फोर्स कमांडरों द्वारा नामित महिलाओं के संयुक्त राष्ट्र सिद्धांतों को बढ़ावा देने के लिए व्यक्तिगत सैन्य शांति सैनिकों के समर्पण और प्रयास का सम्मान करता है।

भारतीय मूल के वैज्ञानिक को 'इन्वेंटर ऑफ इयर' का पुरस्कार

  • भारतीय मूल के अमेरिकी आविष्कारक राजीव जोशी को इलेक्ट्रॉनिक उद्योग को बढ़ावा देने और कृत्रिम बुद्धिमत्ता क्षमताओं को बेहतर बनाने में योगदान के लिए प्रतिष्ठित 'इन्वेंटर ऑफ इयर' पुरस्कार दिया गया है। जोशी ने कई आविष्कार किए हैं और अमेरिका में उनके नाम 250 से अधिक पेटेंट दर्ज हैं। वह न्यूयॉर्क में आईबीएम थॉमसन वाटसन शोध केंद्र में काम करते हैं।

:: प्रिलिम्स बूस्टर ::

  • आर्थिक अपराधी निहाल मोदी के लिए रेड कार्नर नोटिस जारी करने से चर्चा में रहे इंटरपोल की स्थापना कब की गई एवं इसका मुख्यालय कहां है? ( 1923,लियोन, फ्रांस)
  • भारत में श्रम कानूनों के संदर्भ में संदेश देने से चर्चा में रहे अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन की स्थापना किस संधि के तहत हुई थी एवं इसका मुख्यालय कहां है? ( वर्साय की संधि 1919, जेनेवा-स्विजरलैंड)
  • किस भारतीय मूल के अविष्कारक को इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग को बढ़ावा और कृत्रिम बुद्धिमता बढ़ाने हेतु प्रतिष्ठित 'इन्वेंटर ऑफ इयर' पुरस्कार दिया गया है? (राजीव जोशी)
  • अपने नए संस्करण 4.0 के लागू होने से चर्चा में रही ई-मार्केट (जेम-GeM) क्या है एवं इसकी स्थापना कब हुई थी? (सरकारी खरीद हेतु एक ऑनलाइन पोर्टल, 2016)
  • न्यायिक सेवाओं के संदर्भ में चर्चा में रहे ‘अखिल भारतीय न्यायिक सेवा’ का प्रावधान किस अनुच्छेद में है एवं इसे किस संविधान संशोधन द्वारा जोड़ा गया था? (312, 42वां संशोधन)
  • हाल ही में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने सुरक्षा कारणों से किस दवा के क्लीनिकल ट्रायल पर अस्थाई तौर पर प्रतिबंध लगा दिया है? ( हाइड्रोक्सी-क्लोरोक्वीन)
  • कोविड-19 के संदर्भ में चर्चा में रहे चीन की ‘बैट वूमैन’ का क्या नाम है? (शी झेंगली-वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी की डिप्टी डायरेक्टर)
  • हाल ही में भारतीय सेना के किस अधिकारी को प्रतिष्ठित संयुक्त राष्ट्र सैन्य जेंडर एडवोकेट ऑफ द ईयर अवार्ड (2019) के लिए चुना गया है? (मेजर सुमन गवानी)
  • ही में किन संस्थाओं के द्वारा कोरोनावायरस के त्वरित टेस्ट के लिए RT-LAMP तकनीक को विकसित किया है? (CSIR-IIIM और रिलायंस)
  • चंबा में सुरंग के उद्घाटन से चर्चा में रहे ‘चारधाम परियोजना’ के तहत किन तीर्थ स्थलों को आपस में जोड़ना प्रस्तावित है? (यमुनोत्री धाम, गंगोत्री धाम, केदारनाथ धाम और बद्रीनाथ धाम)
  • प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत 2024-25 तक समग्र मत्स्य उत्पादन एवं प्रतिवर्ष औसतन वृद्धि दर कितनी निर्धारित की गई है? ( 220 लाख मीट्रिक टन, 9%)
  • FAO के द्वारा रेगिस्तानी टिड्डों की चेतावनी जारी करने से चर्चा में रहे ‘हॉर्न ऑफ अफ्रीका’ किन देशों के समूह को कहा जाता है? ( सोमालिया, इथोपिया, इरिट्रिया और जिबूती)

स्रोत साभार: Dainik Jagran (Rashtriya Sanskaran), Dainik Bhaskar (Rashtriya Sanskaran), Rashtriya Sahara (Rashtriya Sanskaran) Hindustan Dainik (Delhi), Nai Duniya, Hindustan Times, The Hindu, BBC Portal, The Economic Times (Hindi & English), PTI, PIB

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