(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (27 मार्च 2020)

दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर


(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (27 मार्च 2020)


:: राष्ट्रीय समाचार ::

‘प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना’ के तहत 1.70 लाख करोड़ रुपये के राहत पैकेज की घोषणा

  • केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने ‘कोरोना वायरस’ के खिलाफ लड़ाई लड़ने में मदद करने के उद्देश्‍य से आज गरीबों के लिए ‘प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना’ के तहत 1.70 लाख करोड़ रुपये के राहत पैकेज की घोषणा की। आज यहां एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए श्रीमती सीतारमण ने कहा, ‘आज किए गए विभिन्‍न उपायों का उद्देश्य निर्धनतम लोगों के हाथों में भोजन एवं पैसा देकर उनकी भरसक मदद करना है, ताकि उन्‍हें आवश्यक आपूर्ति या वस्‍तुओं को खरीदने और अपनी अनिवार्य जरूरतों को पूरा करने में कठिनाइयों का सामना न करना पड़े।’
  • वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य राज्य मंत्री श्री अनुराग सिंह ठाकुर के अलावा आर्थिक कार्य विभाग में सचिव श्री अतानु चक्रबर्ती और वित्तीय सेवा विभाग में सचिव श्री देबाशीष पांडा भी इस अवसर पर उपस्थित थे।

प्रधानमंत्री गरीब कल्याण पैकेज में निम्नलिखित उपाय शामिल हैं:

प्रधानमंत्री गरीब कल्याण पैकेज

1. सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में कोविड-19 से लड़ने वाले स्वास्थ्य कर्मियों के लिए बीमा योजना

  • सफाई कर्मचारी, वार्ड-ब्‍वॉय, नर्स, आशा कार्यकर्ता, सहायक स्‍वास्‍थ्‍य कर्मी (पैरामेडिक्स), टेक्निशियन, डॉक्टर और विशेषज्ञ एवं अन्य स्वास्थ्य कार्यकर्ता एक विशेष बीमा योजना के तहत बीमा कवर पाएंगे। .
  • कोविड-19 मरीजों का इलाज करते समय किसी भी स्वास्थ्य प्रोफेशनल के साथ दुर्घटना होने पर उन्हें योजना के तहत 50 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा।
  • सभी सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों, वेलनेस सेंटरों और केंद्र के साथ-साथ राज्यों के अस्पतालों को भी इस योजना के तहत कवर किया जाएगा, इस महामारी से लड़ने के लिए लगभग 22 लाख स्वास्थ्य कर्मि‍यों को बीमा कवर प्रदान किया जाएगा।

2. पीएम गरीब कल्याण अन्न योजना

  • भारत सरकार अगले तीन महीनों के दौरान इस विपत्ति की वजह से खाद्यान्नों की अनुपलब्धता के कारण किसी को भी, विशेषकर किसी भी गरीब परिवार को कष्‍ट नहीं होने देगी।
  • 80 करोड़ व्यक्तियों, अर्थात, भारत की लगभग दो-तिहाई आबादी को इस योजना के तहत कवर किया जाएगा।
  • इनमें से प्रत्येक व्‍यक्ति को अगले तीन महीनों के दौरान मौजूदा निर्धारित अनाज के मुकाबले दोगुना अन्‍न दिया जाएगा।
  • यह अतिरिक्त अनाज मुफ्त में मिलेगा।

दालें:

  • उपर्युक्त सभी व्यक्तियों को प्रोटीन की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए, अगले तीन महीनों के दौरान क्षेत्रीय प्राथमिकताओं के अनुसार प्रत्‍येक परिवार को 1 किलो दालें दी जाएंगी।
  • ये दालें भारत सरकार द्वारा मुफ्त में दी जाएंगी।

प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत

किसानों को लाभ:

  • 2020-21 में देय 2,000 रुपये की पहली किस्त अप्रैल 2020 में ही ‘पीएम किसान योजना’ के तहत खाते में डाल दी जाएंगी।
  • इसमें 7 करोड़ किसानों को कवर किया जाएगा।

1. प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत नकद राशि का हस्तांतरण:

गरीबों की मदद:

  • कुल 40 करोड़ पीएमजेडीवाई महिला खाताधारकों को अगले तीन महीनों के दौरान प्रति माह 500 रुपये की अनुग्रह राशि दी जाएगी।

गैस सिलेंडर:

  • पीएम गरीब कल्याण योजना के तहत अगले तीन महीनों में 8 करोड़ गरीब परिवारों को गैस सिलेंडर मुफ्त में दिए जाएंगे।

संगठित क्षेत्रों में कम पारिश्रमिक पाने वालों की मदद:

  • 100 से कम कामगारों वाले प्रतिष्‍ठानों में प्रति माह 15,000 रुपये से कम पारिश्रमिक पाने वालों को अपना रोजगार खोने का खतरा है।
  • इस पैकेज के तहत सरकार ने अगले तीन महीनों के दौरान उनके पीएफ खातों में उनके मासिक पारिश्रमिक का 24 प्रतिशत भुगतान करने का प्रस्ताव किया है।
  • इससे उनके रोजगार में व्यवधान या खतरे को रोका जा सकेगा।

वरिष्ठ नागरिकों (60 वर्ष से अधिक), विधवाओं और दिव्यांगजनों के लिए सहायता :

  • ऐसी लगभग 3 करोड़ वृद्ध विधवाएं और दिव्यांग श्रेणी के लोग हैं, जो कोविड-19 की वजह से उत्‍पन्‍न हुए आर्थिक व्यवधान के कारण असुरक्षित हैं।
  • सरकार अगले तीन महीनों के दौरान कठिनाइयों से निपटने के लिए उन्हें 1,000 रुपये देगी।

मनरेगा

  • ‘पीएम गरीब कल्याण योजना’ के तहत 1 अप्रैल, 2020 से मनरेगा मजदूरी में 20 रुपये की बढ़ोतरी की जाएगी। मनरेगा के तहत मजदूरी बढ़ने से प्रत्‍येक श्रमिक को सालाना 2,000 रुपये का अतिरिक्त लाभ होगा।
  • इससे लगभग 62 करोड़ परिवार लाभान्वित होंगे।

1. स्वयं सहायता समूह:

  • 63 लाख स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) के माध्यम से संगठित महिलाएं 85 करोड़ परिवारों को आवश्‍यक सहयोग देती हैं।

ए. जमानत (कोलैटरल) मुक्त ऋण देने की सीमा 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 20 लाख रुपये की जाएगी।

  • पीएम गरीब कल्याण पैकेज के तहत अन्य उपाय

संगठित क्षेत्र:

  • कर्मचारी भविष्य निधि नियमनों में संशोधन कर ‘महामारी’ को भी उन कारणों में शामिल किया जाएगा जिसे ध्‍यान में रखते हुए कर्मचारियों को अपने खातों से कुल राशि के 75 प्रतिशत का गैर-वापसी योग्य अग्रिम या तीन माह का पारिश्रमिक, इनमें से जो भी कम हो, प्राप्‍त करने की अनुमति दी जाएगी।
  • ईपीएफ के तहत पंजीकृत चार करोड़ कामगारों के परिवार इस सुविधा का लाभ उठा सकते हैं।

भवन और अन्य निर्माण श्रमिक कल्याण कोष:

  • ‘भवन और अन्य निर्माण श्रमिकों के लिए कल्याण कोष’ केंद्र सरकार के एक अधिनियम के तहत बनाया गया है।
  • कोष में लगभग 3.5 करोड़ पंजीकृत श्रमिक हैं।
  • राज्य सरकारों को इस कोष का उपयोग करने के लिए निर्देश दिए जाएंगे, ताकि वे इन श्रमिकों को आर्थिक मुश्किलों से बचाने के लिए आवश्‍यक सहायता और सहयोग प्रदान कर सकें।

जिला खनिज कोष

  • राज्य सरकार से जिला खनिज कोष (डीएमएफ) के तहत उपलब्ध धनराशि का उपयोग करने को कहा जाएगा, ताकि कोविड-19 महामारी को फैलने से रोकने के लिए चिकित्सा परीक्षण (टेस्टिंग), स्क्रीनिंग और अन्य आवश्यकताओं की पूरक एवं संवर्धित या बढ़ी हुई सुविधाओं का इंतजाम किया जा सके और इसके साथ ही इस महामारी की चपेट में आए मरीजों का इलाज भी हो सके।

वार्षिक सिंधु बैठक टालने का प्रस्ताव

  • कोरोना वायरस महामारी के प्रकोप और उसके कारण देश में लॉकडाउन के मद्देनजर भारत ने पाकिस्तान से दोनों देशों के सिंधु आयुक्तों के बीच होने वाली सालाना बैठक टालने का अनुरोध किया है। अधिकारियों ने गुरुवार को बताया कि यह बैठक इसी हफ्ते होनी है, लेकिन पाकिस्तान ने भारत के अनुरोध पर अभी कोई जवाब नहीं दिया है।

पृष्ठभूमि

  • भारत और पाकिस्तान के सिंधु आयुक्तों को हर साल 31 मार्च तक बैठक करनी होती है। यह व्यवस्था दोनों देशों के बीच हुए सिंधु जल समझौते के तहत की गई है। इस संधि के अनुसार, आयोग की साल में एक बार बैठक होगी, यह एक बार भारत में और एक बार पाकिस्तान में होगी। आयुक्तों के बीच पिछली बैठक अगस्त 2018 में लाहौर में हुई थी।

क्या है सिंधु जल समझौता ?

  • वर्ष 1960 के सितम्बर महीने में भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री स्व. पंडित जवाहर लाल नेहरू और पाकिस्तान के सैनिक शासक फील्ड मार्शल अयूब खान के बीच यह जल संधि हुई थी।
  • इस जल संधि में दोनों देशों के मध्य 6 नदियों के पानी का बँटवारा तय हुआ जिसके मुताबिक, भारत को जम्मू-कश्मीर में बहने वाले तीन 3 पूर्वी नदियों (रावी, ब्यास और सतलज) के जल पर भारत को पूरा हक दिया गया वहीँ शेष 3 पश्चिमी नदियों (झेलम, चिनाब, सिंधु) के जल के बहाव को बाधारहित पाकिस्तान को देना तय हुआ।

:: अंतर्राष्ट्रीय समाचार ::

कोरोना से निपटने के लिए G20 देशों की आपातकालीन बैठक

  • जी20 देशों के नेताओं ने कोरोना वायरस से फैली वैश्विक महामारी के खिलाफ एकजुटता दिखाते हुए इससे लड़ने के लिए विश्व की अर्थव्यवस्था में पांच हजार अरब डॉलर खर्च करने का ऐलान किया। चीन के वुहान से शुरू हुए कोरोना वायरस संक्रमण लगभग पूरे विश्व को अपने चपेट में ले चुका है। इसके कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था आर्थिक मंदी की दहलीज पर पहुंच गई है। इसी के मद्देनजर सऊदी अरब के सुल्तान किंग सलमान की अध्यक्षता में जी20 देशों की आपातकालीन बैठक हुई।
  • इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए शामिल हुए।
  • सऊदी अरब के शाह सलमान ने गुरुवार को समूह- 20 के नेताओं से आग्रह किया कि वे कोरोना वायरस महामारी से उत्पन्न वैश्विक संकट से निपटने के लिए "प्रभावी और समन्वित" कार्रवाई करें। इसके साथ ही उन्होंने विकासशील देशों की मदद करने का भी आह्वान किया। शाह समूह- 20 के नेताओं की हुई आकस्मिक ऑनलाइन बैठक को संबोधित कर रहे थे।
  • उन्होंने अपने आरंभिक संबोधन में कहा कि हमें इस वैश्विक महामारी के मद्देनजर प्रभावी और समन्वित कार्रवाई करनी होगी तथा वैश्विक अर्थव्यवस्था में विश्वास बहाल करना होगा। उन्होंने कहा कि यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम विकासशील देशों और कम विकसित देशों की मदद के लिए हाथ बढ़ाएं ताकि उनकी क्षमताओं का निर्माण हो सके और वे इस संकट और इसके नतीजों का मुकाबला करने के लिए अपने बुनियादी ढांचे को बेहतर बना सकें। वहीं, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कोरोना वायरस को लेकर जी-20 देशों की वार्ता में शुल्क कटौती का आह्वान किया।

पृष्ठभूमि

  • कोरोना वायरस से दुनिया भर में संक्रमित लोगों की संख्या गुरुवार को करीब पांच लाख हो जाने के बीच यूरोप तथा अमेरिका में ऐसे मामलों की संख्या चीन से ज्यादा हो गई। इस बीमारी की शुरूआत चीन से ही हुई थी। यूरोप और न्यूयॉर्क की स्वास्थ्य सेवाएं इस बीमारी के कारण चरमराती प्रतीत हो रही है और अधिकारी गंभीर रूप से बीमार पीड़ितों को जीवित रखने के लिए पर्याप्त वेंटिलेटरों की तलाश में जुटे हैं ।
  • इस महामारी का सामना करने के लिए अमेरिकी सीनेट ने कारोबारियों, श्रमिकों और स्वास्थ्य तंत्र के लिए 2.2 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर का प्रस्ताव पारित किया है। लाखों अमेरिकियों को उम्मीद है कि इस कदम से उन्हें जीवनदान मिल जाएगा क्योंकि वायरस के प्रसार पर काबू के लिए आवश्यक कदमों के कारण उन्होंने नौकरी, आय आदि खो दी है। इस रोग के कारण 21,000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और लाखों लोगों की आजीविका प्रभावित हुयी है और उसने विश्व अर्थव्यवस्था को बर्बाद कर दिया है।

जी-20 क्या है और इसके कार्य क्या हैं

  • सितंबर 1999 में जी-7 देशों के वित्त मंत्रियों ने जी-20 का गठन एक अंतरराष्ट्रीय मंच के तौर पर किया था। यह मंच अंतरराष्ट्रीय वित्तीय स्थिरता को बनाए रखने के साथ ब्रेटन वुड्स संस्थागत प्रणाली की रूपरेखा के भीतर आने वाले व्यवस्थित महत्वपूर्ण देशों के बीच अनौपचारिक बातचीत एवं सहयोग को बढ़ावा देता है। यह समूह (जी-20) अपने सदस्यों के अंतरराष्ट्रीय आर्थिक सहयोग और कुछ मुद्दों पर निर्णय करने के लिए प्रमुख मंच है। इसमें 19 देश और यूरोपीय संघ शामिल है। जी-20 के नेता वर्ष में एक बार साथ मिलते हैं और बैठक करते हैं।
  • इसके अलावा, वर्ष के दौरान, देशों के वित्त मंत्री और केंद्रीय बैंक के गवर्नर वैश्विक अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने, अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों में सुधार लाने, वित्तीय नियमन में सुधार लाने और प्रत्येक सदस्य देश में जरूरी प्रमुख आर्थिक सुधारों पर चर्चा करने के लिए नियमित रूप से बैठक करते रहते हैं। इन बैठकों के अलावा वरिष्ठ अधिकारियों और विशेष मुद्दों पर नीतिगत समन्वय पर काम करने वाले कार्य समूहों के बीच वर्ष भर चलने वाली बैठकें भी होती हैं।

चीन के समर्थन से विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य सगंठन (WHO) की निंदा

  • कोरोना वायरस को दुनियाभर में फैलाने के पीछे आखिर किस देश का हाथ है? इस सवाल का जवाब अभी तक नहीं मिल पाया है, लेकिन अमेरिका और चीन के बीच इस मुद्दे पर आरोप-प्रत्‍यारोप का दौर जारी है। इस बीच अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने कहा कि विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य सगंठन(WHO) कोरोना वायरस के मुद्दे पर चीन का कुछ ज्‍यादा ही पक्ष ले रही है, जो कतई जायज नहीं है। बता दें कि अमेरिका में 1000 से ज्‍यादा लोगों की जान कोरोना वायरस के संक्रमण की चपेट में आकर हो चुकी है और 50 हजार से ज्‍यादा लोग संक्रमित हैं।
  • कोरोना वायरस को दुनिया के अन्‍य देशों में फैलाने के आरोपों पर सफाई देते हुए चीन ने कहा है कि न तो कोरोनो वायरस का निर्माण चीन ने किया है और न ही जानबूझकर इसे प्रसारित किया है। इस वायरस के लिए चीनी वायरस या वुहान वायरस जैसे शब्दों का उपयोग गलत है। चीनी दूतावास के प्रवक्ता जी रोंग ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को चीन के लोगों की आलोचना के बजाय महामारी पर चीन की त्वरित प्रतिक्रिया पर ध्यान देना चाहिए।

पृष्ठभूमि

  • कोरोना वायरस पर चिंता प्रकट करते हुए जिनेवा में डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक ट्रेडोस अधनोम घेब्येसू ने चीन की तारीफ करते हुए कहा था कि चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग खुद इस महामारी की रोकथाम के लिए बनाई गई समिति का नेतृत्व कर रहे हैं। इसके साथ ही उन्‍होंने कहा कि चीनी राष्‍ट्रपति के इस कदम से प्रेरित होकर सरकार और पूरे समाज ने इस महामारी की रोकथाम को अपनी जिम्मेदारी मानते हुए सरकार के साथ मिलकर काम किया, जिससे चीन ने सफलतापूर्वक इस वायरस को फैलने से रोका।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ)

  • विश्व स्वास्थ्य संगठन संयुक्त राष्ट्र का हिस्सा है इसका मुख्य काम दुनियाभर में स्वास्थ्य समस्याओं पर नजर रखना और उन्हे सुलझाने में मदद करना है। डब्ल्यूएचओ की स्थापना 7 अप्रैल 1948 को हुई थी इसका मुख्यालय स्विट्जरलैंड के जिनीवा शहर में है। डब्ल्यूएचओ की स्थापना के समय इसके संविधान पर 61 देशों ने हस्ताक्षर किए थे। इसकी पहली बैठक 24 जुलाई 1948 को हुई थी।

:: भारतीय राजव्यवस्था ::

वित्तीय आपातकाल लागू करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका

  • कोरोना वायरस महामारी की वजह से लॉकडाउन के मद्देनजर देश में वित्तीय आपातकाल लागू कराने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है। याचिका में दावा किया गया है कि लॉकडाउन की वजह से देश में आर्थिक गतिविधियां ठहर गई हैं। याचिका में कहा गया है कि कोविड-19 के कारण उत्पन्न स्थिति से निपटने के लिए विभिन्न अधिकारी कई कदम उठा रहे हैं जिससे घबराहट पैदा हो गई है। ऐसी स्थिति में संविधान के अनुच्छेद 360 के तहत वित्तीय आपातकाल लागू करने की जरूरत है।

याचिका के मुख्य बिंदु

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 21 दिन के लॉकडाउन की घोषणा की है और इस दौरान अनेक पाबंदियां लगाई गई हैं। 'विभिन्न अधिकारियों द्वारा अलग-अलग कदम उठाए जाने से घबराहट और अराजकता पैदा हो रही है। यह कोविड-19 जैसी गंभीर समस्या का समाधान नहीं हो सकता। लॉकडाउन की वजह से आर्थिक गतिविधियां ठहर गई हैं, इसलिए संविधान के अनुच्छेद 360 के तहत देश में वित्तीय आपातकाल लागू करने की आवश्यकता है।'
  • लॉकडाउन के दौरान केंद्र को बिजली, पानी, गैस, टेलीफोन, इंटरनेट जैसी आवश्यक सेवाओं के बिलों की वसूली और ईएमआइ की अदायगी निलंबित करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है। इसी तरह, राज्यों की पुलिस और संबंधित अधिकारियों को केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देशों का सख्ती से पालन करने का निर्देश देने का भी अनुरोध किया गया है ताकि देश में आवश्यक सेवाएं बाधित न हों।
  • कोविड-19 की वजह से देश की मौजूदा स्थिति हो सकता है कि स्वतंत्र भारत के इतिहास की सबसे बड़ी आपात स्थिति हो, इसलिए इस पर केंद्र तथा राज्य सरकारों के बीच एकीकृत कमान के माध्यम से संविधान के प्रावधानों के अंतर्गत विचार किया जाए।
  • 'ऐसा करना सिर्फ कोरोना वायरस को इसके खिलाफ जंग में हराने के लिए ही आवश्यक नहीं है, बल्कि लॉकडाउन खत्म होने के बाद देश की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए भी जरूरी है। इस लॉकडाउन की वजह से इस समय आवागमन की आजादी के अधिकार से संविधान के अनुच्छेद 21 में प्रदत्त अधिकारों के साथ ही लगभग सारे मौलिक अधिकार इस समय निलंबित हैं।'

क्या है वित्तीय आपात?

  • वैसे तो देश में अब तक आर्थिक आपातकाल लागू नहीं हुआ है. लेकिन संविधान में इसे अच्छी तरह से परिभाषित किया गया है. अनुच्छेद 360 के तहत आर्थिक आपात की घोषणा राष्ट्रपति उस वक्त कर सकते हैं, जब उन्हें लगे कि देश में ऐसा आर्थिक संकट बना हुआ है, जिसके कारण भारत के वित्तीय स्थायित्व या साख को खतरा है.
  • अगर देश में कभी आर्थिक संकट जैसे विषम हालात पैदा होते हैं और सरकार दिवालिया होने के कगार पर आ जाती है या फिर भारत की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त होने की कगार पर आ जाती है, तब इस आर्थिक आपात के अनुच्छेद का इस्तेमाल किया जा सकता है. ऐसी आपात स्थिति में आम नागरिकों के पैसों और संपत्ति पर देश का अधिकार हो जाएगा.

:: भारतीय अर्थव्यवस्था ::

लॉकडाउन से 2.5 पर्सेंट रह सकती है भारत की विकास दर: रिपोर्ट

  • कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए देश में लागू 21 दिनों के लॉकडाउन का अर्थव्यवस्था पर बहुत बुरा असर पड़ने जा रहा है। लॉकडाउन की वजह से भारत के विकास दर में गिरावट को लेकर बार्कलेज की रिपोर्ट चिंताजनक है। इसमें कहा गया है कि तीन सप्ताह के लॉकडाउन की वजह से कैलेंडर ईयर 2020 में भारत की जीडीपी विकास दर 2.5% तक गिर सकती है। पहले इसने भारत के लिए 2020 में 4.5 पर्सेंट ग्रोथ रेट का अनुमान लगाया था।
  • कई अन्य रेटिंग एजेंसियों और वित्तीय संस्थाओं जैसे आईएमएफ और वर्ल्ड बैंक ने भी भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए निराशाजनक अनुमान लगाए हैं। उधर, मूडीज ने भी जी20 देशों में मंदी का अनुमान जताया है।
  • ब्रिटने की वित्तीय कंपनी बार्कलेज ने रिपोर्ट में अंदेशा जाहिर किया है कि यह लॉकडाउन एक सप्ताह के लिए और बढ़ाया जा सकता है और यह कुल चार सप्ताह का होगा। इसके बाद 8 सप्ताह आंशिक लॉकडाउन के होंगे। इससे अर्थव्यवस्था को 120 अरब डॉलर का नुकसान हो सकता है। तीन सप्ताह के लॉकडाउन से ही 90 अरब डॉलर का नुकसान हो सकता है। यह नुकसान जीडीपी का 4 पर्सेंट है।
  • इस तरह जीडीपी विकास दर में 2 पर्सेंटेज पॉइंट की कमी हो सकती है। इसलिए बार्कले ने भारत के लिए विकास दर अनुमान को 4.5 पर्सेंट से घटाकर 2.5% कर दिया है। यदि ऐसा होता है तो यह 1992 के आर्थिक सुधारों के बाद देश का सबसे कम ग्रोथ रेट होगा।
  • वर्ल्ड बैंक के मुताबिक, भारतीय अर्थव्यवस्था 1991 में 1.06% की गति से बढ़ी थी। इसके बाद देश में आर्थिक सुधारों को अंजाम दिया गया। 2020-21 के लिए वर्ल्ड बैंक ने विकास दर 3.5 पर्सेंट रहने का अनुमान लगाया है।

क्यों बुरा है कम विकास दर?

  • कम विकास दर का असर बहुत व्यापक होता है। विकास दर गिरता है तो कंपनियां भी अपना ग्रोथ अनुमान घटाती हैं। इससे कॉस्ट कटिंग होती है। वेतन में कम वृद्धि होती है। कर्मचारियों छंटनी भी होती है। बुधवार को ही गोएयर ने कहा है कि उसके कर्मचारियों के मार्च के वेतन में कटौती होगी। कंपनी के सीईओ ने कहा कि यात्रा प्रतिबंधों की वजह से उनके पास कोई और विकल्प नहीं रह गया है।

मूडीज का 2020 में जी-20 देशों में मंदी आने का अनुमान

  • वैश्विक रेटिंग एजेंसी मूडीज ने कोरोना वायरस संकट के चलते बुधवार को जी-20 समूह देशों में इस साल मंदी आने का अनुमान जताया है। मूडीज ने अनुमान जताया है कि जी-20 समूह देशों का सब मिलाकर सकल घरेलू उत्पाद 2020 में 0.5 प्रतिशत घटेगी। इसमें अमेरिकी अर्थव्यवस्था में दो प्रतिशत और यूरोजोन (यूरो को मुद्रा के तौर पर अपनाने वाले देश) की अर्थव्यवस्था में 2.2 प्रतिशत का सिकुड़न होगा। जी20 में भारत के अलावा ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, कनाडा, चीन, फ्रांस, जर्मनी, जापान, रूस, सऊदी अरब, साउथ कोरिया, अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देश शामिल हैं।

फिच ने देसी बैंकों के लिए 'ऑपरेटिंग एनवायरनमेंट स्कोर घटाया

  • कोरोनावायरस के तेज प्रसार का विपरीत प्रभाव भारतीय बैंकों पर भी पड़ा है। रेटिंग एजेंसी फिच ने आज इन बैंकों के लिए अपना ऑपरेटिंग एनवायरनमेंट मिड-पॉइंट स्कोर 'बीबी+ से घटाकर 'बीबी कर दिया। रेटिंग एजेंसी ने एक बयान में कहा है कि इस महामारी से बढ़ रहीं चुनौतियों से पहले ही कमजोर बन चुका परिचालन परिवेश और ज्यादा खराब स्थिति में आ सकता है।
  • आईसीआईसीआई बैंक और ऐक्सिस बैंक की वायबिलिटी रेटिंग में कमी किए जाने की आशंका है, भले ही वे बेहतर आय और पूंजी बफर की स्थिति में हैं। हालांकि फिच को भारतीय बैंकों की इश्यूअर डिफॉल्ट रेटिंग्स पर अल्पावधि में किसी तरह का दबाव पडऩे की आशंका नहीं है। लेकिन ऑपरेटिंग एनवायरनमेंट स्कोर से ऊपर वायबिलिटी रेटिंग्स (वीआर) वाले बैंकों को कम रेटिंग वाले अपने प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले ज्यादा दबाव का सामना करना पड़ सकता है। कोरोनावायरस की महामारी की गंभीरता और अवधि को लेकर अनिश्चितता और भारत के बैंकों पर संबंधित प्रभाव के कारण परिचालन परिवेश पर नजरिया नकारात्मक बना हुआ है।

पृष्ठभूमि

  • देश के बैंकों को कमजोर व्यावसायिक एवं उपभोक्ता विश्वास का सामना पहले से ही करना पड़ रहा है और यह भी एक प्रमुख वजह थी जिससे फिच को बैंकिंग सेक्टर के लिए 2019 में अपना ऑपरेटिंग एनवायरनमेंट स्कोर 'बीबीबी- से घटाकर 'बीबी+ करना पड़ा था। अब अन्य देशों की तुलना में यहां कोरोना के कम मामलों के बावजूद वैश्विक जोखिम से भारत के वित्तीय बाजार प्रभावित हुए हैं।
  • 24 मार्च 2020 को देश में 21 दिन का लॉकडाउन लागू हो गया है जिससे औद्योगिक उत्पादन और घरेलू मांग पर प्रभाव पड़ेगा। इससे पिछली कुछ तिमाहियों से देखी जा रही आर्थिक मंदी और गहरा सकती है।

:: भारतीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी ::

ज्यादा तापमान और उमस से घट सकती है कोरोना वायरस के संक्रमण की गति- शोध

  • गरम और उमस भरा मौसम कोरोना वायरस (COVID-19) के संक्रमण को कम कर सकता है। एक स्टडी में कहा गया है कि एशियाई देशों में मानसून आने की स्थिति में इस खतरनाक वायरस का संक्रमण कम हो सकता है, जिसने भारत में 10 से ज्यादा और दुनियाभर में 20,000 से ज्यादा लोगों को मौत की नींद सुला दिया है। जानकारी के लिए बता दें कि यह वायरस दुनिया के 190 देशों तक फैल चुका है।

अमेरिका स्थित MIT में किया गया शोध

  • दुनियाभर में 22 मार्च तक संक्रमण का आंकड़ों का विश्लेषण कर मैसाचुसैट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) के दो शोधकर्ताओं ने बताया कि इस महामारी के मामलों का तापमान और उमस से सीधा संबंध हैं।
  • शोध में पता चला कि 90 प्रतिशत मामले उन देशों में सामने आए हैं जहां तापमान 3 से 17 डिग्री सेल्सियस के बीच था और अब्सल्यूट ह्यूमिडिटी 4 और 9g/m3 के बीच थी। अब्सल्यूट ह्यूमिडिटी प्रति वर्ग मीटर क्षेत्र में जल वाष्प की माप होता है।

शोध में क्या कहा गया है?

  • इन शोधकर्ताओं में से एक युसुफ जमील ले बताया कि तापमान, उमस और संक्रमण का संबंध लगातार बढ़ता जा रहा है। तापमान और वायरस के संक्रमण का संबंध कमजोर दिख रहा है क्योंकि ब्राजील, भारत और मलेशिया जैसे देशों से भी मामले सामने आ रहे हैं।
  • उन्होंने कहा कि अब्सल्यूट ह्यूमिडिटी एक महत्वूर्ण कारक हो सकती है, लेकिन इसे प्रयोगशाला में मापने के बाद ही इसके बारे में कुछ कहा जा सकता है।

पहले के शोध में क्या कहा गया था?

  • COVID-19 बीमारी Sars-CoV-2 नामक वायरस से होती है। यह 2003 में फैले SARS-Cov से जुड़ा है। SARS-Cov अधिक तापमान पर जीवित नहीं रह पाया था।
  • इससे पहले किए गए दो शोध में पता चला था कि कोरोना वायरस के संक्रमण पर मौसम का असर पड़ता है और यह ठंड और सूखे मौसम में तेजी से फैलता है। ये शोध चीन और स्पेन, पुर्तगाल और फिनलैंड के शोधकर्ताओं ने किए थे।

केवल तापमान में बढ़ोतरी काफी नहीं- शोध

  • इससे हटकर MIT का शोध यह कहता है कि अकेले तापमान से कोरोना के संक्रमण को नहीं रोका जा सकता। इसके लिए उमस भी एक महत्वपूर्ण कारक है।
  • उमस के महत्वपूर्ण होने के कारण अमेरिका और यूरोप में मौसम की वजह से इस वायरस को रोक पाना मुश्किल नजर आ रहा है क्योंकि यहां तापमान तो बढ़ेगा लेकिन मौसम सूखा रहेगा। अगले कुछ महीनों तक यही हाल भारत का रहने वाला है।

गरम देशों में सामने आए कम मामले

  • शोध में कहा गया है, 'हम मानते हैं कि पिछले सप्ताह 18 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान वाले इलाकों में सामने आए 10,000 मामले ट्रांसमिशन की वजह से नहीं आए हैं। अभी तक के मौजूद आंकड़ों के अनुमान के आधार पर कह सकते हैं कि उष्णकटिबंधीय देशों में कम मामले सामने आने की वजह गरम और उमस भरा मौसम रहा है, जिसके कारण वायरस के संक्रमण की गति कम हो जाती है। बाकी वायरस में भी ऐसा देखा गया है।"

भारत के बारे में क्या कहता है शोध?

  • भारत के बारे में पूछे जाने पर जमील ने कहा कि ऐसी संभावना है कि मानसून आने के बाद वायरस का संक्रमण कम हो सकता है, लेकिन सरकारों को ऐसी संभावनाओं पर नहीं टिकना चाहिए। सरकार को यह मानकर कदम उठाने चाहिए कि आने वाले दिनों में इस महामारी के संक्रमण के मामले कम होने वाले नहीं हैं।
  • बता दें, भारत में 500 से ज्यादा लोग कोरोना वायरस से संक्रमित हैं और 10 से ज्यादा की मौत हो चुकी है।

लॉक डाउन से अतिरिक्त स्पेक्ट्रम की मांग

  • दूरसंचार विभाग ने दूरसंचार ऑपरेटरों से कहा है कि वे प्रत्येक सर्किल में स्पेक्ट्रम की मात्रा के विवरण के साथ वायरलेस प्लानिंग ऐंड कोऑर्डिनेशन विंग (डब्ल्यूपीसी) को जानकारी प्रदान करें कि उन्हें मांग में आई मौजूदा तेजी को पूरा करने के लिए कितने स्पेक्ट्रम की आवश्यकता है।
  • सीओएआई के अनुमान के अनुसार, दूरसंचार नेटवर्क में किसी तरह के व्यवधान को रोकने के लिए हरेक दूरसंचार ऑपरेटर को 5 मेगाहर्ट्ज अतिरिक्त स्पेक्ट्रम की आवश्यकता होगी। उन्हें 4जी बैंड में स्पेक्ट्रम की आवश्यकता होगी क्योंकि डेटा के लिए मांग काफी अधिक दिख रही है।
  • दूरसंचार कंपनियों का कहना है कि 1800 मेगाहर्ट्ज बैंड में स्पेक्ट्रम को प्राथमिकता दी जाएगी क्योंकि डेटा के लिए उसका उपयोग किया जा रहा है। उनकी गणना के अनुसार रक्षा क्षेत्र के पास इस बैंड में लगभग 100 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम मौजूद है जिसका उपयोग नहीं हो रहा है। ऑपरेटरों को मौजूदा संकट से निपटने के लिए सीमित अवधि के लिए इसे उपलब्ध कराया जा सकता है। सीओएआई ने इससे पहले दूरसंचार विभाग को लिखे अपने पत्र में सीमित अवधि के लिए सरकार से अतिरिक्त स्पेक्ट्रम उपलब्ध कराने का अनुरोध किया था

पृष्ठभूमि

  • देश भर में लॉकडाउन और अधिकतर लोगों के घर से काम करने के कारण दूरसंचार कंपनियों ने पिछले रविवार को अपने नेटवर्क पर मांग में 15 से 20 फीसदी तक की तेजी दर्ज की। इससे पहले क्षमता में करीब 10 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई थी।

वायरलेस प्लानिंग ऐंड कोऑर्डिनेशन विंग (डब्ल्यूपीसी) क्या है?

  • डब्ल्यूपीसी स्पेक्ट्रम आवृत्ति आवंटित करने और उनकी निगरानी करने वाली सरकार की इकाई है।

टेलीकॉम स्पेक्ट्रम क्या होता है?

  • स्पेक्ट्रम का प्रयोग हम प्रतिदिन करते है, इसका प्रयोग हम टीवी का रिमोट हो या माइक्रोवेव ओवेन या फिर धूप के रूप में करते है | ‘स्पेक्ट्रम’, ‘इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पेक्ट्रम’ का छोटा रूप होता है | स्पेक्ट्रम उस विकिरण ऊर्जा को कहते हैं, जो पृथ्वी को चारों तरफ से घेरे हुए है | इस इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रैडिएशन (ईएमआर) का मुख्य स्रोत सूर्य है | यह तारों और आकाशगंगाओं से भी प्राप्त होती है | इसके अतिरिक्त यह ऊर्जा पृथ्वी के नीचे दबे रेडियोएक्टिव तत्वों से भी प्राप्त होती है | टेलीकॉम स्पेक्ट्रम हमें किसी प्रकार की हानि नहीं पहुँचाती है, इसके द्वारा ही हम टीवी और रेडियो देख पाते है तथा मोबाइल फोन चला पाते है |

महिंद्रा एंड महिंद्रा 7500 रुपये में बनाएगी वेंटिलेटर

  • कोरोना वायरस के खिलाफ जंग में महिंद्रा एंड महिंद्रा ने बड़ा ऐलान किया है। कंपनी ने कहा है कि वह महज 7,500 रुपये में वेंटिलेटर पेश कर सकती है, जिसकी अभी कीमत करीब 10 लाख रुपये है। कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों की जान बचाने के लिए यह बहुत अहम है। कंपनी ने कहा है कि उसे उम्मीद है कि वह ऑटोमेटेड वॉल्व मास्क वेंटिलेटर, जिसे आमतौर पर अंबु बैग भी कहा जाता है, का प्रोटोटाइप को तीन दिन में अप्रूवल के लिए पेश कर सकती है।
  • महिंद्रा ग्रुप देशी आईसीयू वेटिंलेटर पर भी काम कर रहा हैं। इन मशीनों की कीमत 5 से 10 लाख रुपये तक है। यह उपकरण जीवनरक्षक है और टीम का अनुमान है कि इसकी कीमत 7,500 रुपये से कम होगी।'
  • इससे पहले एमऐंडएम के मैनेजिंग डायरेक्टर पवन गोयनका ने कहा कि कंपनी दो बड़े पीएसयू और एक मौजूदा वेटिंलेटर निर्माता कंपनी के साथ काम कर रही है ताकि बड़े पैमाने पर इसका उत्पादन किया जा सके।

:: विविध ::

निकोलस मादुरो

  • अमेरिका वेनेजुएला के मादक पदार्थों की तस्करी के मामले में राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी लायक सूचना देने वाले को 1.5 करोड़ डॉलर का इनाम देगा। इसकी घोषणा गुरुवार को अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने की। पोम्पियो ने पुरस्कार की घोषणा न्याय विभाग द्वारा मादुरो के खिलाफ मामले के खुलासे के बाद की। न्याय विभाग ने मादुरो के नाम का उल्लेख एक सामान्य अपराधी के रूप में किया है बजाय के एक राष्ट्राध्यक्ष के। उल्लेखनीय है कि अमेरिका वेनेजुएला के विपक्षी नेता जुआन गुएडो को सत्तारूढ़ होने में मदद कर रहा है।

:: प्रिलिम्स बूस्टर ::

  • भारत में स्पेक्ट्रम को आवंटित करने और उसकी निगरानी करने वाली शीर्ष संस्था कौन है? (वायरलेस प्लानिंग ऐंड कोऑर्डिनेशन विंग-डब्ल्यूपीसी)
  • हाल ही में अमेरिका ने किस देश के राष्ट्रपति के संदर्भ सूचना देने पर 1.5 करोड़ डॉलर इनाम देने की घोषणा की है? (वेनेजुएला, निकोलस मादुरो)
  • किस कंपनी के द्वारा मात्र 7,500 रुपये में वेंटिलेटर तैयार करने की घोषणा की गई है? (महिंद्रा एंड महिंद्रा)
  • हाल ही में किस वैश्विक रेटिंग एजेंसी ने भारतीय बैंकों के ऑपरेटिंग एनवायरनमेंट मिड-पॉइंट स्कोर ‘बीबी+’ से घटाकर ‘बीबी’ कर दिया है? (रेटिंग एजेंसी फिच)
  • हाल ही में चर्चा में रहे वित्तीय आपातकाल का भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद में वर्णन है? (अनुच्छेद 360)
  • हाल ही में सरकार गिरने से चर्चा में रहे एल्बिन कुर्ती किस देश के प्रधानमंत्री थे? (कोसोवो)
  • हाल ही में चर्चा में रहे विश्व स्वास्थ्य संगठन की स्थापना कब की गई थी एवं इसके वर्तमान महानिदेशक कौन हैं? (1948, ट्रेडोस अधनोम घेब्येसू)
  • कोरोनावायरस के कारण आपातकालीन बैठक से चर्चा में रहे जी-20 का गठन कब किया गया था? (1999)
  • हाल ही में चर्चा में रहे सिंधु जल संधि समझौता कब हुआ था? (1960)
  • हाल ही में चर्चा में रहे उज्जवला योजना को कब और कहां से प्रारंभ किया गया था? (1 मई 2016, बलिया उत्तर प्रदेश)
  • हाल ही में चर्चा में रहे किसान सम्मान निधि को कब प्रारंभ किया गया था एवं इसके तहत प्रतिवर्ष कितनी धनराशि प्रदान की जाती है? (2019, प्रति वर्ष 6000 रूपये)
  • हाल ही में घोषित हुए ‘पीएम गरीब कल्याण योजना’ के तहत मनरेगा की मजदूरी में कितनी वृद्धि की गई है? (20 रुपये)

स्रोत साभार: Dainik Jagran (Rashtriya Sanskaran), Dainik Bhaskar (Rashtriya Sanskaran), Rashtriya Sahara (Rashtriya Sanskaran) Hindustan Dainik (Delhi), Nai Duniya, Hindustan Times, The Hindu, BBC Portal, The Economic Times (Hindi & English), PTI, PIB

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