(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (27 जुलाई 2020)

दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर


(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (27 जुलाई 2020)


:: राष्ट्रीय समाचार ::

एमिसैट (EMISAT) सैटेलाइट

चर्चा में क्यों?

  • भारत और चीन के बीच लद्दाख स्थित एलएसी पर जारी तनाव के बीच पूर्वोत्तर के कुछ इलाको में भारत ने घुसपैठ की आशंका के मद्देनजर चौकसी बढ़ा दी है। साथ ही चीनी सेना की गतिविधियों पर भी लगातार नजर जमाए हुए है। इस बीच खबर है कि भारत की डिफेंस रिसर्च डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (डीआरडीओ) द्वारा संचालित खुफिया जानकारी जुटाने वाली सैटेलाइट EMISAT हाल ही में तिब्बत के ऊपर से गुजरी थी। इस दौरान इमिसैट ने पीएलए की पोजिशन्स की जानकारी हासिल कर ली।

क्या है ‘प्रोजेक्ट कौटिल्य’ और एमिसैट (EMISAT) सैटेलाइट?

  • ईसा पूर्व दूसरी शती के महान कूटनीतिज्ञ कौटिल्य के नाम पर डीआरडीओ ने ‘प्रोजेक्ट कौटिल्य’ शुरू किया था। सबसे पहली बार एमिसैट का जिक्र रक्षा मंत्रालय की वार्षिक रिपोर्ट 2013-14 में किया गया था। इसके पेलोड को ‘प्रोजेक्ट कौटिल्य’ के तहत डीआरडीओ के डिफेंस इलेक्ट्रॉनिक्स रिसर्च लैबोरेट्री (डीएलआरएल), हैदराबाद में विकसित किया गया है। एमिसैट उपग्रह को इजरायल के जासूसी उपग्रह ‘सरल’ (सेटलाइट विद आर्गोस एंड अल्टिका) की तर्ज पर विकसित किया गया है। एमिसैट में रडार की ऊंचाई को नापने वाला यंत्र अल्टिका लगा है, जिसे डीआरडीओ ने ही विकसित किया है। इस उपग्रह की खासियत जमीन से सैकड़ों किलोमीटर की ऊंचाई पर रहते हुए जमीन की संचार प्रणालियों, रेडार और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के सिग्नल को पकड़ना है। यह उपग्रह बर्फीली घाटियों, बारिश वाले और तटीय इलाकों, जंगल और समुद्री की लहरों को बहुत आसानी से नापने की क्षमता रखता है।
  • 01 अप्रैल, 2019 को पीएसएलवी सी-45 रॉकेट ने जासूसी उपग्रह (इलेक्ट्रोमैग्नेटिक इंटेलीजेंस-गैदेरिंग सैटेलाइट, एमिसैट) को अंतरिक्ष में पहुंचाया था। इसे ‘सन सिंक्रोनस पोलर ऑर्बिट ’ कही जाने वाली कक्षा में पहुंचाया।
  • विद्युत चुंबकीय स्पेक्ट्रम को मापने में सक्षम एमिसैट को अंतरिक्ष में भारत की ‘आंख और कान’ कहा जा रहा है।

एमिसैट के अनुप्रयोग

  • एमिसैट का मुख्य मकसद सरहद पर इलेक्ट्रॉनिक या किसी तरह की मानवीय गतिविधि पर नजर रखना है। यह उपग्रह सीमा पर रडार और सेंसर के सिग्नल पकड़ेगा। दुश्मनों की संचार से जुड़ी किसी भी तरह की गतिविधि का पता भारतीय सुरक्षा एजंसियों को चल जाएगा।
  • इसके जरिए दुश्मन देशों की रडार प्रणाली पर नजर रखने के साथ ही उनकी जगह का भी पता लगाया जा सकेगा। यह दुश्मन के इलाकों का सही इलेक्ट्रॉनिक नक्शा बना सकेगा। दुश्मन के इलाके में मौजूद मोबाइल समेत अन्य संचार उपकरणों की सही जानकारी भी मिलेगी।
  • आठ साल में वैज्ञानिकों ने 436 किलोग्राम वजनी एमिसैट को बनाया। यह दुश्मन देशों के रेडार नेटवर्क की निगरानी के साथ ही युद्ध की सूरत में दुश्मन की वायु रक्षा प्रणाली को जाम करने में सक्षम है। एमिसैट पड़ोसी देशों चीन और पाकिस्तान में चल रही है गतिविधियों पर निगरानी रखने में सक्षम तो है ही तटीय क्षेत्रों पर भी नजर रख रहा है।

बीहड़ विकास परियोजना

चर्चा में क्यों?

  • केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण, ग्रामीण विकास तथा पंचायती राज मंत्री और मुरैना- श्योपुर क्षेत्र के सांसद श्री नरेंद्र सिंह तोमर की पहल पर ग्वालियर-चंबल क्षेत्र के बीहड़ को कृषि योग्य बनाने के लिए विश्व बैंक की मदद से बीहड़ विकास परियोजना के जरिए व्यापक काम किया जाएगा।

पृष्ठभूमि

  • चंबल क्षेत्र के लिए पूर्व में विश्व बैंक के सहयोग से बीहड़ विकास परियोजना प्रस्तावित थी, पर विभिन्न कारणों से विश्व बैंक उस पर राजी नहीं हुआ। अब नए सिरे से इसकी शुरुआत की गई है, ताकि ग्वालियर-चंबल क्षेत्र के समग्र विकास का सपना हकीकत का रूप ले सके।
  • परियोजना के माध्यम से बीहड़ को कृषि योग्य बनाने का उद्देश्य तो है ही, इसके साथ ही कृषि का विस्तार होने से उत्पादकता भी बढ़ेगी। कृषि बाजारों, गोदामों व कोल्ड स्टोरेज का विकास परियोजना के अंतर्गत करने का विचार है।

प्रौद्योगिकी के लिए राष्ट्रीय शैक्षिक गठबंधन (एनईएटी)

चर्चा में क्यों?

  • एआईसीटीई के अध्यक्ष अनिल सहस्रबुद्धे ने कहा है कि नवाचार को बढावा देने के लिये ‘‘नेशनल एजुकेशन एलायंस फॉर टेक्नोलॉज’’ पोर्टल भी तैयार किया गया है।
  • इसके साथ ही सहस्रबुद्धे ने कहा कि अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) विदेशों में शिक्षा प्राप्त करने वाले भारतीय छात्रों और उन्हें आकर्षित करने को लेकर ‘‘स्थिति रिपोर्ट’’ तैयार कर रहा है। इसमें यह ब्यौरा होगा कि कितने छात्र विदेशों में पढ़ने जाते हैं, भारत में कहां ऐसी सुविधाएं उपलब्ध हैं, कोविड-19 के कारण विदेशों से स्वदेश वापसी करने वाले भारतीय छात्र कैसे सुचारू रूप से पढ़ाई कर सकते हैं, साथ ही बाहर जाने वाले छात्रों को कैसे आकर्षित किया जा सकता है।

प्रौद्योगिकी के लिए राष्ट्रीय शैक्षिक गठबंधन (एनईएटी) के बारे में

  • मानव संसाधन विकास मंत्रालय और शिक्षा प्रौद्योगिकी कंपनियों के बीच पीपीपी मॉडल के माध्यम से एक नई प्रस्तावित योजना यानी नेशनल एजुकेशन अलायंस ऑफ टेक्नोलॉजी (एनईएटी) को अंतिम रूप दिया गया।
  • आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) के माध्यम से अनुकूल और व्यक्तिगत लर्निंग की पेशकश।
  • आर्थिक और सामाजिक रूप से पिछड़े क्षेत्रों के छात्रों पर विशेष जोर देना।

मधुबनी पेंटिंग

चर्चा में क्यों?

  • मास्क पर बनी मधुबनी पेंटिंग इस कोरोना काल में भी काफी लोकप्रियता हासिल कर रही है। मधुबनी पेंटिंग के कलाकार आत्मनिर्भर भारत की दिशा में अपना योगदान दे रहे हैं। रविवार को पीएम नरेन्द्र मोदी ने मन की बात में मास्क पर बनी मधुबनी पेंटिंग और इसके बढ़ते उपयोग की जमकर तारीफ करते हुए मधुबनी पेंटिंग करने वाले स्टेट आवार्डी दंपति रेमंत कुमार मिश्रा और उषा मिश्रा की पहल को प्रधानमंत्री ने सराहना की।

क्या है मधुबनी पेंटिंग?

  • मधुबनी के मिथिला क्षेत्र में इस पेंटिंग की शैली की उत्पत्ति की वजह से इसे मिथिला पेंटिंग के नाम से भी जाना जाता है. इस पेंटिगशैली का इस्तेमाल आज भी महिलाएं अपने घरों और दरवाजों को सजाने के लिए किया करती हैं। किंविदंती के अनुसार इस कला की उत्पत्ति रामायण काल में हुई थी। मधुबनी पेंटिंग प्रकृति और पौराणिक कथाओं की तस्वीरें उकेड़ी जातीं हैं। इन चित्रों में कमल के फूल, बांस, चिड़िया, सांप आदि कलाकृतियाँ भी पाई जाती हैं। इन पेंटिंग को झोपड़ियों की दीवार पर किया जाता था, लेकिन अब यह कपड़े, हाथ से बने कागज और कैनवास पर भी की जाने लगी हैं। मधुबनी पेंटिंग दो तरह की होतीं हैं- भित्ति चित्र और अरिपन।

:: अंतर्राष्ट्रीय समाचार ::

फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ)

  • कोरोना के कारण बनी परिस्थितियों में फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) ने भारत की मनी लांड्रिंग रोधी व्यवस्था और वित्तीय अपराधों पर लगाम के लिए उठाए गए कदमों की समीक्षा फिलहाल टाल दी है।
  • एफएटीएफ के विशेषज्ञ सितंबर-अक्टूबर में भारत आकर इन कदमों की समीक्षा करने वाले थे। अब पेरिस स्थित एफएटीएफ सचिवालय ने भारत को बताया है कि यह समीक्षा अगले साल जनवरी-फरवरी तक के लिए टाल दी गई है। एफएटीएफ मनी लांड्रिंग और आतंकी फंडिंग की निगरानी करने वाली वैश्विक इकाई है।

एफएटीएफ क्या है?

  • एफएटीएफ, पेरिस स्थित एक वैश्विक संगठन है जो आतंकवाद के वित्तपोषण और मनी लॉन्ड्रिंग पर लगाम लगाने के लिए काम करती है। साल 1989 में हुए जी-7 शिखर सम्मेलन में मनी लॉन्ड्रिंग पर रोक लगाने के मक़सद से फाइनैंशल ऐक्शन टास्क फोर्स का गठन किया गया था। इसका सचिवालय पैरिस स्थित आर्थिक सहयोग और विकास संगठन यानी OECD के मुख्यालय में है। साल 2001 में इसके कार्य क्षेत्र को थोड़ा विस्तार दिया गया और आतंकवाद को धन मुहैया कराने के विरूद्ध नीतियां बनाना भी इसकी जिम्मेदारियों में शामिल कर दिया गया।
  • अभी एफएटीएफ में 39 सदस्य हैं जिसमें 2 क्षेत्रीय संगठन - यूरोपीय कमीशन और गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल शामिल है। साथ ही, इंडोनेशिया इसमें बतौर आब्जर्वर शामिल है। भारत 2010 में एफटीएफ का सदस्य बना था।

:: राजव्यवस्था ::

संविधान में समाजवाद और धर्म निरपेक्ष शब्द हटाने की मांग

  • सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल हुई है जिसमें संविधान की प्रस्तावना में बाद में जोड़े गए दो शब्द समाजवाद और धर्मनिरपेक्ष को हटाने की मांग है। कहा है कि सुप्रीम कोर्ट घोषित करे कि प्रस्तावना में दिये गये समाजवाद और धर्मनिरपेक्षता की अवधारणा गणतंत्र की प्रकृति बताते हैं और ये सरकार की संप्रभु शक्तियों और कामकाज तक सीमित हैं, ये आम नागरिकों, राजनैतिक दलों और सामाजिक संगठनों पर लागू नहीं होता। इसके साथ ही याचिका में जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा 29ए (5) में दिये गये शब्द समाजवाद और धर्मनिरपेक्ष को भी रद करने की मांग की गई है। यह याचिका तीन लोगों ने वकील विष्णु शंकर जैन के जरिये दाखिल की है। याचिकाकर्ता बलराम सिंह और करुणेश कुमार शुक्ला पेशे से वकील हैं।

सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हुई याचिका

  • याचिका में प्रस्तावना से समाजवाद और धर्मनिरपेक्ष शब्दों को हटाने की मांग करते हुए कहा गया है कि ये दोनों शब्द मूल संविधान में नहीं थे। इन्हें 42वें संविधान संशोधन के जरिये 3 जनवरी 1977 को जोड़ा गया। जब ये शब्द प्रस्तावना में जोड़े गए उस समय देश में आपातकाल लागू था। इस पर सदन में बहस नहीं हुई थी, ये बिना बहस के पास हो गया था। कहा गया है कि संविधान सभा के सदस्य केटी शाह ने तीन बार धर्मनिरपेक्ष (सेकुलर) शब्द को संविधान में जोड़ने का प्रस्ताव दिया था लेकिन तीनों बार संविधान सभा ने प्रस्ताव खारिज कर दिया था। बीआर अंबेडकर ने भी प्रस्ताव का विरोध किया था।
  • केटी शाह ने पहली बार 15 नबंवर 1948 को सेकुलर शब्द शामिल करने का प्रस्ताव दिया जो कि खारिज हो गया। दूसरी बार 25 नवंबर 1948 और तीसरी बार 3 दिसंबर 1948 को शाह ने प्रस्ताव दिया लेकिन संविधान सभा ने उसे भी खारिज कर दिया। कहा, समाजवाद और धर्मनिरपेक्ष सिद्धांत सिर्फ सरकार के कामकाज तक सीमित रखा जाए · याचिका में कहा गया है कि अनुच्छेद 14,15 और 27 सरकार के धर्मनिरपेक्ष होने की बात करता है यानि सरकार किसी के साथ धर्म, भाषा,जाति, स्थान या वर्ण के आधार पर भेदभाव नहीं करेगी। लेकिन अनुच्छेद 25 नागरिकों को धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार देता है जिसमें व्यक्ति को अपने धर्म को सर्वश्रेष्ठ मानने और उसका प्रचार करने की आजादी है। कहा गया है कि लोग धर्मनिरपेक्ष नहीं होते, सरकार धर्मनिरपेक्ष होती है। याचिका में जनप्रतिनिधित्व कानून 1951 में 15 जून 1989 को संशोधन कर जोड़ी गई धारा 29ए (5) से भी सेकुलर और सोशलिस्ट शब्द हटाने की मांग है।

इसे राजनैतिक दलों और आमजनता पर न लागू किया जाए

  • इसके तहत राजनैतिक दलों को पंजीकरण के समय यह घोषणा करनी होती है कि वे धर्मनिरपेक्ष सिद्धांत का पालन करेंगे। कहा गया है कि जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा 123 कहती है कि धर्म के आधार पर वोट नहीं मांगेगे लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि धर्म के आधार पर संगठन नहीं बना सकते। याचिका में 2017 के सुप्रीम कोर्ट के अभिराम सिंह के फैसले में जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ के अल्पमत के फैसले का हवाला दिया गया है जिसमें कहा गया है कि संविधान को यह पता है कि पूर्व में जाति, धर्म, भाषा, आदि के आधार पर भेदभाव और अन्याय हुआ है।
  • इसकी आवाज उठाने के लिए संगठन बना सकते हैं तथा चुनावी राजनीति में इस आधार पर लोगों को संगठित कर सकते हैं। याचिकाकर्ता का कहना है कि वह एक राजनैतिक पार्टी बनाना चाहता है लेकिन वह धारा 29ए(5) के तहत घोषणा नहीं करना चाहता। याचिका में मांग की गई है कि कोर्ट घोषित करे कि सरकार को लोगो को समाजवाद और धर्मनिरपेक्ष सिद्धांत का पालन करने के लिए बाध्य करने का अधिकार नहीं है।

कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न और विशाखा दिशानिर्देश

  • विशाखा दिशानिर्देश के अनुकूल कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न को रोकने हेतु दिल्ली के महिला एवं बाल विकास मंत्री राजेंद्र पाल गौतम ने राष्ट्रीय राजधानी में कार्यस्थलों पर यौन उत्पीड़न की शिकायतों की जांच के लिए पांच सदस्यीय समिति गठित करने का निर्देश दिया। समिति में सरकारी प्रतिनिधि, गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) क्षेत्र से और नागरिक समाज से सदस्य भी होंगे।
  • महिला एवं बाल विकास विभाग को कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013 का अवलोकन और निगरानी करने के लिए पांच सदस्यीय समिति का गठन करने का निर्देश दिया।

क्या है विशाखा गाइडलाइन्स?

  • कार्यस्थल पर होने वाले यौन-उत्पीड़न के ख़िलाफ़ साल 1997 में सुप्रीम कोर्ट ने कुछ निर्देश जारी किए थे। सुप्रीम कोर्ट के इन निर्देशों को ही 'विशाखा गाइडलाइन्स' के रूप में जाना जाता है. इसे विशाखा और अन्य बनाम राजस्थान सरकार और भारत सरकार मामले के तौर पर भी जाना जाता है।
  • इस फ़ैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि यौन-उत्पीड़न, संविधान में निहित मौलिक अधिकारों (अनुच्छेद 14, 15 और 21) का उल्लंघन हैं. इसके साथ ही इसके कुछ मामले स्वतंत्रता के अधिकार (19)(1)(g) के उल्लंघन के तहत भी आते हैं।

:: अर्थव्यवस्था ::

हजीरा बंदरगाह

चर्चा में क्यों?

  • आर्सेलर मित्तल निप्पॉन स्टील इंडिया लिमिटेड (एएमएनएसआईएल) ने गुजरात सरकार और एस्सार बल्क टर्मिनल लिमिटेड के खिलाफ गुजरात उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर कर हजीरा बंदरगाह लाइसेंस को अपने नाम पर हस्तांतरित किये जाने की मांग की है। आर्सेलर मित्तल निप्पॉन ने अनुच्छेद 226 के तहत यह याचिका दायर की है।

पृष्ठभूमि

  • एस्सार स्टील के पास गुजरात के हजीरा में एक करोड़ टन प्रति वर्ष क्षमता का इस्पात संयंत्र है। इसे बंदरगाह पर निर्मित निजी इस्तेमाल वाले घाट (जेट्टी) से सुविधाएं प्राप्त होती है। एक दिवालाशोधन प्रक्रिया के तहत एस्सार स्टील को खरीदने के चंद दिनों के भीतर, एएमएनएसआईएल ने गुजरात मैरीटाइम बोर्ड को एक आवेदन किया था, जिसमें अनुरोध किया गया था कि लाइसेंस उसे हस्तांतरित किया जाए। हालांकि, सरकार को इस मामले पर अभी फैसला करना बाकी है, एएमएनएसआईएल ने अदालत से गुहार लगायी है कि एस्सार बल्क टर्मिनल लिमिटेड (ईबीटीएल) एक नॉमिनी या ट्रस्टी के रूप में कैप्टिव लाइसेंस रखती है।

:: विज्ञान और प्रौद्योगिकी ::

उच्च प्रवाह क्षमता वाली कोविड-19 परीक्षण सुविधाओं का शुभारंभ

  • प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी 27 जुलाई को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उच्च प्रवाह क्षमता वाली कोविड-19 परीक्षण सुविधाओं का शुभारंभ करेंगे। इन सुविधाओं से देश में परीक्षण करने की क्षमता बढ़ेगी और इनसे बीमारी की शुरुआती पहचान और समय रहते उपचार करने में तेजी आएगी। इस प्रकार इन सुविधाओं से कोरोना महामारी के फैलाव को नियंत्रित करने में सहायता मिलेगी।

कहाँ स्थापित किये जा रहे है ये सुविधा केंद्र?

  • इन तीन उच्च क्षमता प्रवाह वाली परीक्षण सुविधाओं को रणनीतिक तौर पर आईसीएमआर- राष्ट्रीय कैंसर निवारण एवं अनुसंधान संस्थान, नोएडा;आईसीएमआर- राष्ट्रीय प्रजननीय स्वास्थ्य अनुसंधान संस्थान, मुंबई;और आईसीएमआर- राष्ट्रीय हैजा एवं आंत्र बीमारी संस्थान, कोलकाता में स्थापित किया गया है जो हर रोज 10,000 से अधिक नमूनों का परीक्षण करने में सक्षम हैं।
  • इन सुविधाओं से युक्त प्रयोगशालाओं से संक्रामक नैदानिक ​​सामग्री से स्वास्थ्यकर्मियों को बचाने और उनके प्रतिवर्तन काल (टर्नअराउंड टाइम) को कम करने में मदद मिलेगी। इन प्रयोगशालाओं में कोविड के अलावा अन्य बीमारियों का भी परीक्षण हो सकेगा और महामारी खत्म होने के बाद हेपेटाइटिस बी एवं सी, एचआईवी, माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस, साइटोमेगालोवायरस, क्लैमाइडिया,नीसेरिया,डेंगू इत्यादि बीमारियों के लिए भी परीक्षण कार्य होगा।

आइटोलीजुमैब दवा

चर्चा में क्यों?

  • कोरोना महामारी के लिए गठित केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के नेशनल टास्क फोर्स ने इस महामारी के इलाज से आइटोलीजुमैब दवा को बाहर रखने का फैसला किया है। टास्क फोर्स के अधिकतर सदस्यों का मानना था कि अब तक इस दवा के पक्ष में इतने पर्याप्त सुबूत नहीं मिले है कि इसा कोरोना के मरीजों के उपचार में शामिल किया जाए।

पृष्ठभूमि

  • कोरोना संक्रमण के इलाज में चिकित्सकीय जरूरतों को ध्यान में रखते हुए भारतीय दवा महानियंत्रक (डीसीजीआइ) ने त्वचा रोग के उपचार में काम आने वाले बायोकॉन की दवा 'आइटोलीजुमैब' का कोरोना के उन मरीजों के उपचार में सीमित इस्तेमाल किए जाने की मंजूरी दी थी, जिन्हें सांस लेने में मध्यम से लेकर गंभीर तक की दिक्कत हो।

इटोलिजुमाब दवा के बारे में

  • घरेलू जैव दवा कंपनी बायोकॉन अल्जुमैब ब्रांड नाम के तहत 2013 से इस दवा का निर्माण और विपणन कर रही है। बता दें कि इटोलिजुमाब इंजेक्शन त्वचा रोग सोरायसिस के इलाज में काम आने वाली दवा है। इस दवा को बेंगलुरू स्थित दवा कंपनी बायोकॉन (pharma company Biocon Ltd) बनाती है।

2S25 Sprut-SD लाइटवेट टैंक

  • लद्दाख जैसे ऊंचाई वाले इलाकों में चीन के खिलाफ घातक कार्रवाई के लिए भारत ने कई हथियारों का चुनाव किया है, जिसमें लाइटवेट टैंक प्रमुख है। चीन ने पहले से ही सीमा पर अपने लाइटवेट टाइप-15 टैंक जिसे जेडटीक्यू -15 नाम से जाना जाता है, उसे तैनात कर चुका है। अब भारत रूस की बनी हुई 2S25 Sprut-SD टैंक को खरीदने पर विचार कर रहा है। इस टैंक में 125 एमएम की गन लगी हुई है जिसे किसी हैवी लिफ्ट हेलिकॉप्टर के जरिए भी ऊंचाई वाले इलाके में तैनात किया जा सकता है।

:: पर्यावरण और पारिस्थितिकी ::

हरिकेन हन्ना

चर्चा में क्यों?

  • उष्णकटिबंधीय चक्रवात ‘हन्ना’ ने अमेरिका के टेक्सास प्रांत के दक्षिणी तट पर भारी मचाई है। दक्षिण टेक्सास के कुछ हिस्सों में हरिकेन हन्ना से 15 इंच से अधिक बारिश को हुई है, जिसके परिणामस्वरूप यहा गंभीर बाढ़ स्थिति बन गयी है।

क्या होते है उष्णकटिबंधीय चक्रवात?

  • उष्ण कटिबंधीय चक्रवात शक्तिशाली तूफान होते है जिनकी उत्पत्ति उष्ण-कटिबंधीय क्षेत्रों के महासागरों में होती है।
  • इनकी उत्पत्ति और विकास के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ है-
  • बृहत समुद्री सतह जहाँ तापमान 27° सेंटीग्रेड से अधिक हो,
  • कोरिकोलिस बल की मौजूदगी
  • ऊर्ध्वाधर पवनों की गति में अंतर
  • कमजोर निम्न वायुदाब क्षेत्र
  • कोरियालिस बल की अनुपस्थिति के कारण ही इनकी उत्पत्ति 5° उत्तरी अक्षांश से 5° दक्षिणी अक्षांश के क्षेत्रों के मध्य नहीं होती है।
  • ये चक्रवात शक्तिशाली पवनों के कारण अपने साथ विस्तृत विनाश, अत्यधिक वर्षा और तूफान लाते हैं।
  • हिंदमहासागर में इन्हें ‘चक्रवात’ अटलांटिक महासागर में ‘हरिकेन’ पश्चिमी प्रशांत तथा दक्षिणी चीन सागर में ‘टाइफ़ून’ और पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया में इन्हें ‘विली-विली’ के नाम से जाना जाता है।

हरिकेन

  • हरिकेन उष्णकटिबंधीय चक्रवातों में सबसे अधिक शक्तिशाली एवं विनाशकारी तूफान होते हैं|
  • इनकी उत्पत्ति अटलांटिक बेसिन में कैरेबियन समुद्र, मेक्सिको की खड़ी, अटलांटिक महासागर में होती है।
  • हरिकेन समान्यतः जून से नवंबर के बीच में आते हैं। अटलांटिक बेसिन में वर्ष में औसतन 12 हरिकेन आते हैं।
  • उष्णकटिबंधीय चक्रवात ‘हन्ना’ वर्ष 2020 में अटलांटिक महासागर का पहला हरिकेन है।

क्षतिपूरक वनीकरण कोष प्रबंधन एवं योजना प्राधिकरण (CAMPA)

चर्चा में क्यों?

  • राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) से दो महीने के अंदर अपने पर्यावरण पुनरुद्धार कोष पर फिर से काम करने को कहा। एनजीटी ने कहा कि निधि का उपयोग सतर्कता प्रणाली को मजबूत करने, प्रयोगशालाओं की स्थापना, पर्यावरण निगरानी, विशेषज्ञों और सलाहकारों की नियुक्ति तथा प्रदूषित स्थलों के अध्ययन आदि पर होना चाहिए।
  • एनजीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि पर्यावरण पुनरुद्धार कोष को राष्ट्रीय कैंपा सलाहकार परिषद द्वारा स्वीकृत की जाने वाली योजना के अनुसार किया जाना चाहिए, ना कि सरकारी कामकाज के लिए।

पृष्ठभूमि

  • अधिकरण उत्तर प्रदेश निवासी आशीष कुमार दीक्षित की याचिका पर सुनवाई कर रहा था जिन्होंने बांदा, महोबा और चित्रकूट जिलों में यूपीपीसीबी की पूर्व स्वीकृति के बिना अवैध तरीके से विवाह घरों, नर्सिंग होम, अस्पतालों, क्लीनिकों, व्यावसायिक परिसरों, होटलों और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के परिचालन के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

क्षतिपूरक वनीकरण कोष प्रबंधन एवं योजना प्राधिकरण (CAMPA) क्या है?

  • वनों के विनाश की क्षतिपूर्ति के लिए एकप्राधिकरण बनाया गया था, जिसका नाम है – प्रतिपूरक वनीकरण कोष प्रबंधन और योजना प्राधिकरण(सीएएमपीए). बांध, खनन और कारखाने आदि परियोजनाओं की मंजूरी से पहले केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय इस प्रकार की परियोजना से होने वाली वन्‍य क्षतियों का आंकलन करके उस नुकसान का एक वर्तमान शुद्ध मौद्रिक मूल्‍य तय करता है और क्षतिपूर्ति के रूप में इसकी वसूली करता है. इस राशि का इस्‍तेमाल वैकल्पिक भूमि के वनीकरण के लिए किया जाता है. इस पैसे का इस्‍तेमाल प्रतिपूरक वनीकरण कोष अधिनियम 2016 के प्रावधानों के अनुसार होना अपेक्षित है.
  • 2002 में सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के अनुसार क्षतिपूरक वनीकरण कोष प्रबंधन एवं योजना प्राधिकरण (CAMPA) की स्थापना 2006 में क्षतिपूरक वनीकरण के प्रबंधन के लिए की गई थी.
  • निगरानी, तकनीकी सहायता और प्रतिपूरक वनीकरण गतिविधियों के मूल्यांकन के लिए CAMPA केंद्रीय पर्यावरण और वन मंत्री की अध्यक्षता में राष्ट्रीय सलाहकार परिषद का कार्य करेगी।

प्रतिपूरक वनीकरण कोष अधिनियम 2016

  • इस अधिनियम का मुख्य ध्येय वन क्षेत्रों में होने वाली कमी के बदले प्राप्त राशि का संधारण और उसका वनीकरण में फिर से निवेश करना है.
  • अधिनियम के अंतर्गत केन्द्रीय स्तर पर एक राष्ट्रीय क्षतिपूरक वनीकरण कोष (National Compensatory Afforestation Fund) तथा राज्यों में राज्य क्षतिपूरक वनीकरण कोष State Compensatory Afforestation Fund) बनाये गये हैं जो सम्बन्धित लोकलेखा के अधीन रहेंगे.
  • इन कोषों का पैसा इन स्रोतों से आएगा – क्षतिपूर्ति वनीकरण, वन का शुद्ध वर्तमान मूल्य (net present value of forest – NPV) और अन्य परियोजनावार भुगतान.
  • प्राप्त राशियों का 10% अंश राष्ट्रीय कोष में जाएगा और शेष 90% राज्यों के कोषों में जाएगा. अधिनियम के प्रावधानानुसार जो कम्पनी किसी जंगल के भूमि को उपयोग में लाना चाहती है तो उसे इसके बदले किसी उतनी ही बड़ी भूमि पर क्षतिपूरक वनीकरण का काम करना पड़ेगा.
  • जंगल लेने वाली कम्पनी सरकार द्वारा दी गई वैकल्पिक भूमि पर नए पेड़ लगाने का खर्च वहन करेगी. राज्य सरकार उसी भूमि को वनीकरण के लिए देगी जो कम्पनी द्वारा ली जा रहे जंगल से सटी हुई हो जिससे कि नये वन का प्रबंधन सरलता से हो सके. परन्तु यदि ऐसी कोई सटी हुई नहीं मिली तो वनीकरण के लिए उन जंगलों को चुना जाएगा जो क्षरण की अवस्था में हैं.

:: विविध ::

माईगव प्लेटफ़ॉर्म (MyGov Platform)

  • माईगव प्लेटफ़ॉर्म (MyGov Platform)- 1.2 करोड़ माईगव के उपयोगकर्ताओं एवं फॉलोवर्स के नागरिक सहभागिता एवं भागीदारी वाले शासन के 6 वर्ष पूरे हो गए है।

क्या है माईगव प्लेटफ़ॉर्म (MyGov Platform)?

  • माईगव.इन की अवधारणा भारतीय नागरिकों के एक साझा मंच के तौर पर “नागरिकों से शासन संबंधी विचारों को हासिल करने” के लिए रखी गयी थी। इसे 2014 में लॉन्च किया गया था। यः एक डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म है।
  • माईगव प्लेटफ़ॉर्म सरकारी विभागों, नीति निर्माताओं एवं कार्यान्वयनकर्ताओं के साथ सीधे संपर्क करके सभी चरणों में शासन संबंधी अहम मुद्दों पर अपने विचार साझा करने के लिए नागरिकों और दुनिया भर के सभी हितधारकों को एक अवसर प्रदान करता है।
  • माईगव की पहुंच ने नीति निर्माण के दौरान नागरिकों से उनकी प्रतिक्रिया प्राप्त करने में मदद की है, जिसके परिणामस्वरूप कार्यक्रमों और योजनाओं का विकास होता है, जो नागरिकों की प्रमुख चिंताओं को दूर करने में सक्षम होता है। इसने सरकार को नागरिकों तक पहुंच बढ़ाने में भी मदद की है, जिससे सरकार की छवि में सुधार हुआ है। माईगव आज विभिन्न प्रकार के सहभागिता मॉडल के साथ-साथ सरकार के विभिन्न फ्लैगशिप कार्यक्रमों के प्रदर्शन संबंधी संकेतकों की पेशकश के साथ एक संपूर्ण और उत्तम सहभागिता मंच के रूप में विकसित हुआ है।

:: प्रिलिम्स बूस्टर ::

  • आर्सेलर मित्तल निप्पॉन स्टील इंडिया लिमिटेड के द्वारा याचिका से बंदरगाह का लाइसेंस अपने नाम हस्तांतरण करने की मांग से चर्चा में रहे हजीरा बंदरगाह किस राज्य में स्थित है? (गुजरात)
  • हाल ही में 6 वर्ष पूरा होने से चर्चा में रहे ‘MyGov.’ पोर्टल को क्यों लांच किया गया था? (गुड गवर्नेंस के दिशा में नागरिकों और विशेषज्ञों को सरकार से जोड़कर नीति निर्माण हेतु)
  • हाल ही में चीन और भारत के तनाव के संदर्भ में चर्चा में रहे ‘EMISAT’ क्या है? (इलेक्ट्रॉनिक इंटेलिजेंस सैटेलाइट: भारत की खुफिया सैटलाइट)
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा मन की बात जिक्र करने से चर्चा में रहे ‘मधुबनीं’ पेंटिंग की विषय वस्तु क्या होती है एवं इस चित्रकला के कितनी शैलियां हैं? (पौराणिक और प्रकृति, दो- भित्ति चित्र और अरिपन)
  • हाल ही में चर्चा में रहे ‘प्रौद्योगिकी के लिए राष्ट्रीय शैक्षिक गठबंधन (एनईएटी)’ क्या है? (AI और व्यक्तिगत लर्निंग हेतु HRD मंत्रालय और शिक्षा प्रौद्योगिकी कंपनियों का PPP मॉडल)
  • हाल ही में सेना के द्वारा संभावित खरीद से चर्चा में रहे ‘2S25 Sprut-SD’ क्या है एवं इसे किस देश के द्वारा निर्मित किया गया है? (लाइटवेट टैंक, रूस)
  • दिल्ली में कार्य स्थलों पर यौन उत्पीड़न की जांच हेतु समिति गठित करने से चर्चा में रहे किस वाद के द्वारा SC ने कार्य स्थलों पर यौन उत्पीड़न रोकने हेतु कौन से दिशा निर्देश दिए थे? (विशाखा बनाम राजस्थान सरकार एवं भारत सरकार. विशाखा गाइडलाइंस 1997)
  • हाल ही में ‘हन्ना’ तूफान को लेकर किस स्थान में चेतावनी जारी की है एवं यह तूफान किस सागर/ महासागर से संबंधित है? (टेक्सास अमेरिका, अटलांटिक महासागर)
  • कोविड-19 के इलाज के संदर्भ में चर्चा में रहे ‘आइटोलीजुमैब’ दवा का इस्तेमाल किस रोग में होता है? (सोरायसिस: स्किन अस्थमा)
  • विश्व बैंक एवं कृषि मंत्रालय की बैठक से चर्चा में रहे ‘बीहड़ विकास परियोजना’ क्या है एवं यह किस क्षेत्र से संबंधित है? (बीहड़ को कृषि योग्य बनाने हेतु, ग्वालियर एवं चंबल)
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा किन स्थानों पर उच्च प्रवाह क्षमता वाली कोविड-19 परीक्षण सुविधाओं का शुभारंभ किया जाएगा? (राष्ट्रीय कैंसर निवारण एवं अनुसंधान संस्थान, नोएडा; राष्ट्रीय प्रजननीय स्वास्थ्य अनुसंधान संस्थान, मुंबई; राष्ट्रीय हैजा एवं आंत्र बीमारी संस्थान, कोलकाता)
  • याचिका द्वारा द्वारा संविधान से शब्दों के हटाए जाने की मांग से चर्चा में ‘समाजवाद और धर्मनिरपेक्ष’ शब्दों को संविधान में किस संशोधन के द्वारा शामिल किया गया था? (42वां संशोधन, 1976)
  • एनजीटी द्वारा UP प्रदूषण बोर्ड को पर्यावरण पुनरुद्धार कोष के संदर्भ में निर्देश देने से चर्चा में रहे ‘राष्ट्रीय कैंपा सलाहकार परिषद’ की अध्यक्षता कौन करता है? (केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री)

स्रोत साभार: Dainik Jagran (Rashtriya Sanskaran), Dainik Bhaskar (Rashtriya Sanskaran), Rashtriya Sahara (Rashtriya Sanskaran) Hindustan Dainik (Delhi), Nai Duniya, Hindustan Times, The Hindu, BBC Portal, The Economic Times (Hindi & English), PTI, PIB