(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (27 जुलाई 2019)

दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर


(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (27 जुलाई 2019)


:: राष्ट्रीय समाचार ::

औद्योगिक प्रदूषण की रैंकिंग (केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड -सीपीसीबी)

  • राष्ट्रीय राजधानी में औद्योगिक प्रदूषण तेजी से बढ़ रहा है। स्थिति यह है कि दिल्ली का सीईपीआइ (कांप्रिहेंसिव एनवायरमेंट पॉल्यूशन इंडेक्स) बीते पांच सालों में 20 प्वाइंट तक बढ़ गया है, जिससे केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की रैंकिंग में औद्योगिक प्रदूषण के मामले में यह देश में दूसरे नंबर पर है। महाराष्ट्र का तारापुर पहले नंबर पर तो हरियाणा का गुरुग्राम नौवें और पानीपत ग्यारहवें स्थान पर है।

आई एम ए विलेज योजना

  • पलायन का दंश झेल रहे उत्तराखंड में सरकार 95 ब्लाकों वाले राज्य में इस साल प्रत्येक ब्लाक में एक गांव को कृषि के लिहाज से मॉडल विलेज के रूप में विकसित करने जा रही है। माहभर के भीतर प्रदेश सरकार 'आई एम ए विलेज' (मैं एक गांव हूं) योजना लॉन्च करने जा रही है। इसके तहत पांच साल में 475 गांव चमकाने का लक्ष्य है।
  • घटती कृषि विकास दर और बड़े पैमाने पर कृषि भूमि के बंजर में तब्दील होने से सरकार की पेशानी पर बल पड़े हैं। आंकड़े बताते हैं कि नौ साल पहले राज्य के सकल घरेलू उत्पाद में कृषि की जो भागीदारी सात फीसद थी, वह घटकर 4.67 प्रतिशत पर आ गई है। अब तक करीब एक लाख हेक्टेयर कृषि भूमि बंजर में तब्दील हुई है। इसके पीछे पलायन सबसे बड़ी वजह है। नतीजतन गांव खाली हो रहे और खेत- खलिहान बंजर में तब्दील।
  • हालांकि, खेती-किसानी को संवारने के लिए किसानों की आय दोगुना करने की कवायद चल रही है, मगर इसके लिए कृषि को लाभकारी बनाना होगा। ग्रामीणों को खेती की तरफ उन्मुख करने के उपायों पर ध्यान केंद्रित करना समय की मांग है। इसी के दृष्टिगत कृषि मंत्री सुबोध उनियाल की पहल पर खींचा गया 'मैं एक गांव हूं' योजना का खाका। इसके तहत अगले पांच साल तक हर ब्लाक में एक गांव को कृषि एवं उससे जुड़ी तमाम सुविधाओं से सुसज्जित कर मॉडल के रूप में विकसित किया जाएगा। योजना के मसौदे को अंतिम रूप दिया जा चुका है।
  • मैं एक गांव हूं' में चयनित प्रत्येक गांव को विभिन्न योजनाओं के लिए दिए जाने वाले बजट से अतिरिक्त एक से डेढ़ की राशि दी जाएगी। यह राशि कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों को जोड़कर गांव में कृषि सुविधाएं विकसित करने पर व्यय होगी। योजना में गांवों में वन सीमा पर सोलर पावर फैंसिंग, सिंचाई की सुविधा, फार्मर्स मशीनरी बैंक, कलेक्शन कक्ष, शॉर्टिंग-ग्रेडिंगप्लांट, पशुपालन, मुर्गी, मछली व मधुमक्खी पालन जैसी गतिविधियां होंगी। कृषि उत्पादों की मार्केटिंग की व्यवस्था भी अलग से होगी।
  • योजना के क्रियान्वयन को सरकार बेहद गंभीरता से लेगी। कृषि मंत्री बताते हैं कि योजना में चयनित गांव में होने वाले प्रत्येक कार्य की निगरानी को विशेष प्रकोष्ठ गठित किया जाएगा। कार्य शुरू होने से लेकर इनके आकार लेने और नतीजों तक की रिपोर्ट सरकार को देगा। ऐसी व्यवस्था की जाएगी।
  • सुबोध उनियाल (कृषि मंत्री उत्तराखंड) का कहना है कि मैं एक गांव हूं योजना को अंतिम रूप दे दिया गया है। एक माह के भीतर इसे लांच कर दिया जाएगा। इसके माध्यम से गांवों को मॉडल गांव के रूप में विकसित किया जाएगा। अगले पांच साल तक हर ब्लाक में एक-एक गांव को इसके लिए चयनित किया जाएगा।

जानकी सेतु

  • तीर्थनगरी ऋषिकेश में मुनि की रेती व स्वर्गाश्रम के बीच गंगा नदी पर बन रहे जानकी सेतु (झूला पुल) के निर्माण में लोनिवि ने अब पूरी ताकत झोंक दी है। विश्व प्रसिद्ध लक्ष्मणझूला पुल के बंद होने के बाद रामझूला पुल पर बढ़े अतिरिक्त दबाव ने जानकी सेतु को विकल्प के तौर पर तैयार करने के लिए विभाग को मजबूर कर दिया है। लोनिवि अब जनवरी 2020 तक हर हाल में जानकी सेतु को तैयार करने में जुट गया है।
  • टिहरी व पौड़ी जिलों को तीर्थनगरी से जोडऩे वाले दो महत्वपूर्ण पुलों लक्ष्मणझूला व रामझूला में से लक्ष्मणझूला को आवाजाही के लिए बंद कर दिया गया है। सो, अब रामझूला पुल पर ही पूरा दारोमदार टिका हुआ है। इन दोनों पुलों के विकल्प के तौर पर वर्ष 2006 में मुनिकीरेती के कैलाश गेट व स्वर्ग आश्रम के वेद निकेतन घाट के बीच जानकी सेतु के निर्माण की परिकल्पना की गई थी।
  • कैलाश गेट व वेद निकेतन के बीच गंगा में निर्माणाधीन जानकी सेतु उत्तराखंड में पहला थ्री लेन पुल होगा।

:: अंतर्राष्ट्रीय समाचार ::

अमेरिका में दो दशक के अंतराल के बाद मौत की सजा बहाल

  • एक बड़े फैसले में ट्रंप प्रशासन ने तकरीबन दो दशक के अंतराल के बाद मौत की सजा को बहाल करने की गुरुवार को घोषणा की। साथ ही हत्या के दोषी ठहराए गए पांच लोगों को मौत की सजा दिये जाने की तारीख भी तय की।
  • अमेरिकी अटॉर्नी जनरल विलियम बर्र ने एक बयान में कहा, ‘‘न्याय मंत्रालय ने इन पांच हत्यारों समेत सबसे बुरे अपराधियों के खिलाफ मृत्युदंड की मांग की है। उनमें से प्रत्येक को पूर्ण और निष्पक्ष सुनवाई के बाद दोषी ठहराया गया।’’ उन्होंने कहा, ‘‘न्याय मंत्रालय विधि के शासन को कायम रखता है और हम पीड़ितों और उनके परिवारों के लिये न्यायिक व्यवस्था द्वारा दी गई सजा पर तामील करते हैं।’’
  • बर्र ने संघीय कारा ब्यूरो को संघीय मृत्युदंड प्रोटोकॉल में प्रस्तावित परिशिष्ट अपनाने का निर्देश दिया, जो संघीय सरकार द्वारा लगभग दो दशक के अंतराल के बाद मृत्युदंड को फिर से शुरू करने और सबसे भयानक अपराधों के पीड़ितों को न्याय दिलाने का रास्ता साफ करेगा। जिन पांच कैदियों को मृत्युदंड दिया जाएगा उसमें डेनियल लेविस ली, लेजमंड मिचेल, वेस्ली इरा पुर्के, अल्फ्रेड बुर्जुआ और डस्टिन ली हॉन्केन शामिल है। इन्हें यह सजा क्रमश: नौ दिसंबर 2019, 11 दिसंबर 2019, 13 दिसंबर 2019, 13 जनवरी 2020 और 15 जनवरी 2020 को दी जाएगी।

:: राजव्यवस्था एवं महत्वपूर्ण विधेयक ::

भ्रामक विज्ञापनों का विनियमन

देश में उपभोक्ताओं के हित को सुरक्षित और संरक्षित रखने के लिए नया उपभोक्ता संरक्षण विधेयक संसद में लंबित है। अगर यह विधेयक कानून बन जाता है तो भ्रामक या गुमराह करने वाले विज्ञापनों का हिस्सा बनने वाली हस्तियों पर शिकंजा कसेगा। अभी विज्ञापनों में उत्पादों की तमाम खूबियां गिनाई जाती हैं जबकि गुणवत्ता के लिहाज से वह वास्तविकता से परे होती हैं। चूंकि उसकी खूबियां ऐसी हस्ती बताती है जिसकी जनमानस में अच्छी छवि होती है, लिहाजा लोग बिना किसी शंका के उस उत्पाद को खरीद लेते हैं। हालांकि इस्तेमाल करने पर वे छले महसूस करते हैं।

भ्रामक विज्ञापन

एफएसएसएआइ के मुताबिक किसी उत्पाद को तब भ्रामक माना जाता है जब उसे गलत तथ्यों, भ्रामक विज्ञापनों के सहारे प्रदर्शित या बेचा जाए। विज्ञापन में कही गई बातें उत्पाद लेबल पर दी गई जानकारी से मेल न खाए। लेबल पर खाद्य पदार्थ के विषय में जानकारी न उपलब्ध हो। इस श्रेणी में आने वाले सभी उत्पादों को भ्रामक माना जाता है।

भ्रामक विज्ञापन से संबंधित भारतीय विधान

देश में उपभोक्ता हितों के सुरक्षित और संरक्षित करने के लिए कई नियम-कानून हैं।

फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड एक्ट: यदि कोई सेलेब्रिटी किसी खाद्य पदार्थ का भ्रामक विज्ञापन करता है तो फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड एक्ट (एफएसएसएआइ) 2006 की धारा 2 (जेडएफ) के प्रावधान के तहत उसे दस लाख रुपये तक का जुर्माना देना पड़ सकता है। अभी तक यह देश का एकमात्र ऐसा कानून है जिसमें भ्रामक विज्ञापनों के लिए सेलेब्रिटी को जिम्मेदार ठहराने की व्यवस्था की गई है।

ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट: किसी ऐसी दवा का विज्ञापन नहीं किया जाएगा जो डायबिटीज, मोतियाबिंद जैसी बीमारियों के रोकथाम या इजाज का दावा करती हो। इस श्रेणी में मोटापा, गाल ब्लैडर में पथरी, कम लंबाई जैसी 50 बीमारियां शामिल हैं।

ड्रग एंड मैजिकल रैमेडीज (ऑब्जेक्शनेबल एडवर्टीजमेंट) एक्ट: इस कानून के अतंर्गत दवाओं के इस्तेमाल से संबंधित चार तरह के विज्ञापनों को प्रतिबंधित किया गया है। इसमें गर्भनिरोधक दवाएं और कैंसर, डायबिटीज, मोतियाबिंद, गठिया, ब्लडप्रेशर व एड्स जैसी बीमारियों के जांच व उपचार से संबंधित विज्ञापन शामिल हैं। उल्लंघन पर सजा का प्रावधान न होने की वजह से प्रभावशाली नहीं।

कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट 1986: यदि किसी उत्पाद के विषय में विज्ञापन के जरिए कुछ ऐसे दावे किए जाते हैं जिसपर यह खरा नहीं उतरता तो यह छलपूर्ण कारोबारी गतिविधियों में आएगा। इस तरह के भ्रामक विज्ञापन की शिकायत करने पर इसे हटाने का आदेश दिया जा सकता है। इससे यदि कोई क्षति होती है तो विज्ञापनदाता को इसके लिए मुआवजा देना पड़ सकता है। विज्ञापनदाता को इसके सुधार के लिए दूसरा विज्ञापन जारी करने का आदेश दिया जा सकता है।

भारतीय मानक ब्यूरो: यदि कोई उत्पाद भारतीय मानक ब्यूरो से प्रमाणित है तो निर्माता इसके संबंध में किसी प्रकार का भ्रामक विज्ञापन नहीं चला सकता। यदि वह इसके संबंध में विज्ञापन चलाता है तो उत्पाद के विषय में वही बातें बतानी होंगी जिसके आधार पर सर्टिफिकेशन मिला हुआ है।

विदेशों में प्रावधान

अमेरिका: यहां का फेडरल ट्रे़ड कमीशन किसी भी उत्पाद के विज्ञापन को लेकर बहुत सख्त है। हालांकि सामान्य नियम है कि विज्ञापनों में विज्ञापन करने वाले की ईमानदार राय, तथ्य, नतीजे, भरोसे, मान्यताएं की झलक होनी चाहिए। कई मामलों में यहां विज्ञापन करने से पहले सेलेब्रिटी द्वारा उत्पाद के इस्तेमाल किए जाने का भी नियम है। वास्तविकता से परे के दावे करने वाले विज्ञापनों के मामले में अगर जांच में झूठ पाया जाता है तो विज्ञापन करने वाला जिम्मेदार होता है।

चीन: चीन के फूड सेफ्टी लॉ में गुमराह करने वाले विज्ञापनों और सिफारिशों के लिए निर्माता, विज्ञापनदाता और विज्ञापनकर्ता को जिम्मेदार ठहराए जाने की व्यवस्था है।

दक्षिण कोरिया: यहां की स्व नियमन संस्थाओं के पास काफी अधिकार हैं। इन संस्थाओं के पास यह तय करने की ताकत है कि निर्माताओं द्वारा किस उत्पाद का विज्ञापन किया जा सकता है और किसका नहीं। यहां पर मेडिकल दवाओं का कोई सेलेब्रिटी विज्ञापन नहीं कर सकता है। कानून के किसी भी उल्लंघन की सूरत में निर्माता और विज्ञापन करने वालों को दंडित करने के कड़े नियम हैं।

नए उपभोक्ता संरक्षण विधेयक का मसौदा

  • उत्पादों के भ्रामक और गुमराह करने वाले प्रचार का हिस्सा बनने वाली नामचीन हस्तियों पर कानूनी शिकंजा कसने की तैयारी है। ऐसा करने वाले दोषियों पर भारी जुर्माना और उसके साथ जेल की सजा का प्रावधान किया जा रहा है। जुर्माने की राशि 50 लाख रुपये तक की जा सकती है, जबकि जेल की सजा की अवधि पांच साल हो सकती है। इसके लिए उपभोक्ता संरक्षण विधेयक के संसद से पारित होने का इंतजार है।
  • सुप्रीम कोर्ट में पिछले दिनों जाने-माने क्रिकेट महेंद्र सिंह धोनी का नाम आम्रपाली बिल्डर्स के ब्रांड अंबेस्डर के रूप में आया था। इसके पहले मैगी के ब्रांड अंबेस्डर रहे अमिताभ बच्चन भी विवादों में आये थे।
  • ऐसे ही कई नामी गिरामी दिग्गज लोग घटिया उत्पादों की गुणवत्ता को जांचे बगैर उसके प्रचार अभियान का हिस्सा बनने वालों पर गुमराह करने का आरोप लगाया गया था। इस तरह की नामचीन हस्तियों को ऐसे भ्रामक प्रचार आदि में हिस्सा लेने पर रोक लगाने के उद्देश्य से ऐसे कड़े प्रावधान किये जा रहे हैं।
  • उपभोक्ता संरक्षण विधेयक का नया मसौदा लोकसभा में आठ जुलाई को पेश कर दिया गया है। लेकिन अभी तक इस विधेयक पर चर्चा नहीं हो सकी है। लेकिन संसद सत्र की सात दिन की बढ़ी अवधि के दौरान इस विधेयक के पारित हो जाने की संभावना है।
  • उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986 में पहली बार बना था, जो बदलते परिवेश और उदारीकरण के बाद प्रभावकारी नहीं रह गया था। इसके लिए अधिनियम में कई संशोधन तो हुए लेकिन इनकी संख्या इतनी अधिक हो गई कि उस कानून की जगह नया मसौदा तैयार कर संसद में विधेयक पेश करना पड़ा है।
  • प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया की विज्ञापन स्व नियमन परिषद व विज्ञापन दाताओं के संगठनों के कामकाज से सरकार संतुष्ट नहीं है।

नए विधेयक के प्रमुख प्रावधान:

  • विधेयक में नकली व घटिया उत्पाद बनाने और बेचने वालों के साथ गलत प्रचार में हिस्सा लेने वालों पर भी प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव है। इसके लिए केंद्रीय उपभोक्ता प्राधिकरण के गठन का प्रावधान किया गया है। इसके तहत अगर कोई सेलिब्रिटी गुमराह करने विज्ञापन में हिस्सा लेता है तो उस पर प्रतिबंध लगाने के सख्त कदम उठाने के उपाय किये गये हैं।
  • जुर्माने के तौर पर पहले 10 लाख रुपये का जुर्माना और दो साल की सजा का प्रावधान है। लेकिन इस तरह का अपराध दोबारा करते पाया गया तो उस निर्माता, दुकानदार अथवा ब्रांड अंबेसडर पर जुर्माने की राशि बढ़ाकर 50 लाख रुपये और सजा की अवधि पांच साल की जा सकती है। अपराध करने की बारंबारता बढ़ने पर जुर्माना व जेल दोनों में और वृद्धि की जा सकती है।
  • उपभोक्ता संरक्षण विधेयक में कई नये प्रावधान किये जा रहे हैं, जो उपभोक्ताओं के हितों के संरक्षण के लिए जरूरी हैं। विधेयक में उपभोक्तों के हितों संरक्षित करने का प्रावधान है। इसमें पहला उत्पाद व सेवा से उपभोक्ताओं के जीवन व संपत्ति के लिए पैदा हुए खतरे से संरक्षित करना है। जबकि दूसरा उत्पाद व सेवा की गुणवत्ता, मात्रा, प्रभाव, शुद्धता, मानक और मूल्य के बारे में जानकारी देना है।
  • तीसरा उत्पाद व सेवा के प्रकार और उनकी प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित होनी चाहिए। चौथा गलत वस्तुओं की बिक्री अथवा किसी तरह की धोखाधड़ी की शिकायत का अधिकार होना जरूरी है।
  • चमत्कारिक दवाओं व अचूक नुस्खों से गोरा बनाने, कद बढ़ाने और मोटापा घटाने जैसे लुभावने व कथित भ्रामक विज्ञापनों देने वाले और इस तरह के विज्ञापनों में हिस्सा लेने वाले ब्रांड अंबेसडर कानून के दायरे में आयेंगे।

कंपनी संशोधन विधेयक और कारपोरेट सोशल रिस्पोंसिबिलिटी (CSR)

  • लोकसभा ने शुक्रवार को कंपनी कानून में संशोधन का विधेयक पारित कर दिया। इस विधेयक के कानून का रूप लेने पर कारपोरेट सोशल रिस्पोंसिबिलिटी (CSR) नियम सख्त हो जाएंगे और जो कंपनियां कंपनी कानून के तहत नियमों का पालन नहीं करेंगी उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सकेगी।
  • विधेयक में सबसे बड़ा बदलाव यह है कि कंपनियां CSR की जिस राशि को खर्च नहीं कर पाती हैं, उसे उन्हें एक विशेष खाते में रखना होगा। अगर कंपनियां निर्धारित अवधि में CSR की राशि खर्च नहीं करतीं तो यह प्रधानमंत्री राहत कोष में चली जाएगी।
  • कंपनी संशोधन विधेयक 2019 सदन के विचारार्थ रखते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि जो कंपनियां चार साल तक अपने लाभ की दो प्रतिशत राशि CSR गतिविधियों पर खर्च नहीं करती हैं, उन्हें एक विशेष खाते में धनराशि जमा करनी होगी।

कारपोरेट सोशल रिस्पोंसिबिलिटी (CSR)

  • कंपनी कानून में यह प्रावधान है कि अगर कोई कंपनी पांच करोड़ रुपये से अधिक लाभ अर्जित करती है और उसका टर्नओवर 100 करोड़ रुपये से अधिक है या उसका नेटवर्थ 500 करोड़ रुपये से अधिक है, उसे तीन साल के औसत शुद्ध लाभ की कम से कम दो प्रतिशत धनराशि CSR गतिविधियों पर खर्च करनी होती है।
  • भारत दुनिया का पहला ऐसा देश है जिसने CSR खर्च करने की बाध्यता का प्रावधान कानून में किया है। कंपनियों को एक साल में CSR का प्रस्ताव बनाना होगा और तीन साल में उस पर धनराशि खर्च करनी होगी। अगर धन खर्च नहीं हो पाता है तो वह राशि एक अलग खाते में चली जाएगी। यह खाता प्रधानमंत्री राहत कोष का भी हो सकता है।

'गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) संशोधन विधेयक-2019'

  • देश के आतंकवाद विरोधी कानून में प्रस्तावित संशोधनों के प्रभाव में आने के बाद हाफिज सईद और मसूद अजहर आतंकवादी घोषित किए जाने वाले पहले मोस्ट वांटेड होंगे। प्रस्तावित नए संशोधन अंतरराष्ट्रीय मानकों और संयुक्त राष्ट्र कनवेंशन के अनुसार होंगे। अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
  • 'गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) संशोधन विधेयक-2019' को लोकसभा ने बुधवार को पारित कर दिया है। अब इसे चर्चा के लिए राज्यसभा में भेजने की तैयारी है। अगर इसे संसद की स्वीकृति मिल जाती है तो आतंकवादी घोषित किए जाने वाले की यात्रा पर प्रतिबंध लगाया जा सकेगा और उनकी संपत्ति भी जब्त की जा सकेगी।
  • गृह मंत्रालय के अनुमोदन के बाद किसी व्यक्ति को आतंकवादी घोषित किया जा सकेगा। इस प्रकार घोषित किया गया आतंकवादी केंद्रीय गृह सचिव के समक्ष अपील कर सकेगा। वह इस पर 45 दिनों के भीतर फैसला करेंगे। एक कार्यरत अथवा सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक समीक्षा समिति का गठन होगा, जिसमें भारत सरकार के कम से कम दो सेवानिवृत्त सचिव शामिल होंगे।
  • आतंकवादी घोषित किए जाने के खिलाफ इन सदस्यों तक सीधे पहुंचा जा सकेगा। आतंकवादी घोषित होने के बाद सरकार उनकी संपत्ति को जब्त करने जैसे कदम उठा सकेगी।
  • जिसे भी आतंकवादी घोषित करना है, उससे संबंधित आंकड़े दूसरे देशों की सरकारों से साझा किए जा सकेंगे।
  • अपील की है। हालांकि, जब सरकार एक बार फिर अपने फैसले की पुष्टि कर देगी तो यह संगठन अदालत में चुनौती नहीं दे सकेगा।

उप्र राजस्व संहिता (संशोधन) विधेयक, 2019

  • सरकार ने शुक्रवार को विधानमंडल से उप्र राजस्व संहिता (संशोधन) विधेयक, 2019 को पारित कराकर उद्योग जगत को बड़ा संदेश दिया है। विधेयक में ऐसे प्रावधान हैं जिनसे उद्योगों की स्थापना में आड़े आ रही जमीन की दिक्कत को दूर किया जा सकेगा।
  • राज्यपाल की मंजूरी मिलने के बाद सभी विधेयक प्रभावी हो जाएंगे। उप्र राजस्व संहिता (संशोधन) विधेयक, 2019 में यह प्रावधान है कि प्रदेश में खेती की जमीन कृषि और सौर ऊर्जा परियोजनाओं के लिए पट्टे (लीज) पर दी जा सकेगी। यदि कोई भूमिधर जिसे जमीन हस्तांतरित करने का अधिकार है, यदि वह अपनी जमीन या उसके किसी हिस्से का इस्तेमाल औद्योगिक, वाणिज्यिक और आवासीय प्रयोजनों के लिए करेगा तो उप जिलाधिकारी उसके आवेदन पर इसकी जांच कर उस भूमि को गैर कृषिक घोषित करेगा।
  • एसडीएम को आवेदन मिलने के 45 दिन के अंदर जमीन को गैर कृषिक घोषित करने के बारे में निर्णय करना होगा।

उत्तर प्रदेश भू-गर्भ जल (प्रबंधन और विनियमन) विधेयक, 2019

  • भू-गर्भ जल प्रदूषित करने पर 20 लाख तक जुर्माना उत्तर प्रदेश भू-गर्भ जल (प्रबंधन और विनियमन) विधेयक, 2019 के जरिये सरकार ने भू-गर्भ जल के अंधाधुंध दोहन को रोकने के लिए सख्त कदम उठाया है।
  • यह विधेयक लागू होने के बाद भू-गर्भ जल उपभोक्ताओं को शुल्क देना होगा। नियमों का उल्लंघन करने पर दो से पांच लाख रुपये तक जुर्माना और कारावास की भी सजा हो सकती है। भू-गर्भ जल प्रदूषित करने पर तीन वर्ष कारावास और दस लाख रुपये से लेकर सात वर्ष कारावास और 20 लाख रुपये जुर्माने का प्रावधान है।

उत्तर प्रदेश का राज्य संप्रतीक विधेयक, 2019

  • राज्य के प्रतीक चिह्न के अनुचित प्रयोग पर सजा : विधान सभा में उत्तर प्रदेश का राज्य संप्रतीक विधेयक, 2019 भी पारित हुआ। इस में राज्य के प्रतीक चिह्न का अनुचित प्रयोग किये जाने पर दो वर्ष की सजा और पांच हजार रुपये जुर्माना का प्रावधान है।

:: आर्थिक समाचार ::

7वीं आर्थिक गणना

  • 7वीं आर्थिक गणना के क्षेत्र कार्य की शुरूआत 29 जुलाई, 2019 को त्रिपुरा में होगी और इसके बाद यह कार्य पुद्दुचेरी में किया जाएगा। अन्य राज्यों/संघ शासित प्रदेशों में क्षेत्र कार्य अगस्त/सितंबर, 2019 में शुरू होगा। आंकड़े जुटाने, उनके प्रमाणीकरण, रिपोर्ट तैयार करने और इनके प्रसार के लिए विकसित मोबाइल एप्लीकेशन पर आंकड़े एकत्र करने के लिए सीएससी द्वारा इस कार्य में लगाए जाने वाले गणनाकारों और पर्यवेक्षकों को प्रशिक्षित किया गया है।
  • आंकड़े एकत्र करने संबंधी कानून 2008 के प्रावधानों के अंतर्गत प्रत्येक परिवार के घर-घर जाकर और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से आंकड़े एकत्र किए जाएंगे। परिवारों और प्रतिष्ठानों से एकत्र किए गए आंकड़ों को गोपनीय रखा जाएगा और उनका इस्तेमाल केवल राज्य/संघ शासित प्रदेशों की सरकारों और केन्द्र सरकार द्वारा केवल विकास संबंधी योजनाओं के लिए किया जाएगा।
  • गणनाकारों द्वारा एकत्र किए गए आंकड़ों की संबद्ध परिवार और प्रतिष्ठान का दौरा करने वाले पर्यवेक्षकों द्वारा सत्यापन किया जाएगा। आंकड़ों के संग्रहण और प्रोसेसिंग का काम पूरा हो जाने के बाद 7वीं आर्थिक गणना के परिणाम जारी किए जाएंगे।
  • क्षेत्र में काम करने वालों और नागरिकों के सवालों के जवाब के लिए क्षेत्रीय भाषा और टोल फ्री नम्बर (1800-3000-3468) के साथ एक समर्पित हेल्प डेस्क बनाया गया है। मंत्रालय (http://mospi.nic.in/7th-economic-census) की वेबसाइट पर एक वेब पन्ना भी तैयार किया गया है, ताकि 7वीं आर्थिक गणना कराने के विभिन्न पहलुओं के बारे में सूचना का प्रसार आसानी से किया जा सके।

आर्थिक गणना 2019

  • सातवीं आर्थिक गणना सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा 2019 में कराई जा रही है। वर्तमान आर्थिक गणना में मंत्रालय ने सातवीं आर्थिक गणना के लिए कार्यान्वयन एजेंसी के रूप में इलेक्ट्रॉनिक और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अंतर्गत एक विशेष उद्देश्य माध्यम, सीएससी ई-शासन सेवा इंडिया लिमिटेड के साथ साझेदारी की है। 7वीं आर्थिक गणना में आंकड़े जुटाने, उनके प्रमाणीकरण, रिपोर्ट तैयार करने और इनके प्रसार के लिए आईटी आधारित डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया जाएगा। 7वीं आर्थिक गणना का क्षेत्र कार्य अगले माह समाप्त हो जाने की उम्मीद है। क्षेत्र कार्य के सत्यापन और प्रमाणीकरण के बाद इसके परिणाम उपलब्ध होंगे।
  • आर्थिक गणना में परिवारों के उद्यमों, गैर-जोत कृषि और गैर-कृषि क्षेत्र में वस्तुओं/सेवाओं (स्वयं के उपभोग के अलावा) के उत्पादन एवं वितरण की गणना की जाएगी।

हवाई अड्डों का निजीकरण

  • एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एएआई) के चेयरमैन गुरुप्रसाद महापात्रा ने शुक्रवार को कहा कि देश के 6 हवाई अड्डों के निजीकरण के बाद सरकार जल्द इसका दूसरा चरण शुरू करने जा रही है। उन्होंने कहा कि अगले चरण में देश के 20-25 हवाई अड्डों का निजीकरण किया जाएगा।
  • सरकार ने पिछले साल पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल के तहत लखनऊ, अहमदाबाद, जयपुर, मंगलुरु, तिरुवनंतपुरम और गुवाहाटी हवाई अड्डे का संचालन, प्रबंधन और विकास का जिम्मा निजी हाथों में देने का फैसला किया था। फरवरी में हुई नीलामी प्रक्रिया में इन 6 में से 5 हवाई अड्डों का ठेका अडानी ग्रुप को मिला था। अगले चरण में हम जिन 20-25 हवाई अड्डों के निजीकरण की योजना बना रहे हैं उनमें वह मुख्य हवाई अड्डे शामिल हैं जिनकी क्षमता सालाना 10 से 15 लाख यात्रियों की है।

न्यूजप्रिंट पर सीमाशुल्क वृद्धि वापस लेने की मांग

  • इंडियन न्यूजपेपर सोसाइटी की कार्यकारी समिति ने अपनी आपात बैठक में सरकार से समाचार पत्रों के लिए इस्तेमाल होने वाले न्यूजप्रिंट, अनकोटेड पेपर तथा पत्रिकाओं में इस्तेमाल होने वाले लाइट वेट पेपर पर लगाए गए 10 फीसद सीमा शुल्क को वापस लेने की मांग की है।
  • इंडियन न्यूजपेपर सोसाइटी (आइएनएस) के मुताबिक भारत में न्यूजप्रिंट की कुल खपत 25 लाख टन की है। जबकि स्वदेशी मिलों का कुल उत्पादन केवल 10 लाख टन का है। ऐसा प्रतीत होता है कि भारतीय न्यूजप्रिंट निर्माताओं ने सरकार को गलत भरोसा दिया है कि वे संपूर्ण आवश्यकता की पूर्ति कर सकते हैं।
  • पिछले वर्ष दुनिया भर में न्यूजप्रिंट की भारी किल्लत थी। इसके बावजूद भारतीय निर्माता केवल 12,726 टन न्यूजप्रिंट का ही निर्यात कर सके थे। इससे पता चलता है कि भारत में उत्पादन क्षमता सीमित है और स्वदेशी निर्माताओं ने सरकार को गलत जानकारी दी है।
  • इतना ही नहीं, स्वदेशी न्यूजप्रिंट आयातित न्यूजप्रिंट के मुकाबले गुणवत्ता में भी कमतर है, जिससे आधुनिक छापाखानों में इसका सीमित इस्तेमाल हो पाता है। छपाई के दौरान आयातित न्यूजप्रिंट के मुकाबले स्वदेशी न्यूजप्रिंट के फटने की दर तीन गुना से भी ज्यादा है। इससे बर्बादी के अलावा उत्पादकता में कमी आती है।
  • स्वदेशी मिलों से न्यूजप्रिंट की आपूर्ति में भी अनिश्चितता रहती है। क्योंकि अनेक मिले केंद्रीय प्रदूषण बोर्ड की ओर से कारण बताओ नोटिस का सामना कर रही हैं। जहां तक अनकोटेड तथा लाइटवेट कोटेड पेपर का मामला है तो इनकी देश में कोई उत्पादन क्षमता ही नहीं है।
  • कम विज्ञापन आय, ऊंची लागतों तथा डिजिटल के बढ़ते चलन के कारण समाचारपत्रों एवं पत्रिकाओं के छोटे और मझोले प्रकाशक पहले ही भारी वित्तीय दबाव का सामना कर रहे हैं। सरकार के ताजा कदम से उन्हें भारी नुकसान का सामना करना पड़ेगा। ये भी संभव है कि उन्हें अपना कारोबार बंद करना पड़े। इसलिए सरकार को दखल देकर सीमाशुल्क बढ़ोतरी के इस कदम को वापस लेना चाहिए तथा समाचार पत्र उद्योग को असहनीय बोझ से बचा लेना चाहिए।

:: पर्यावरण और पारिस्थितिकी ::

इंटरनेशनल चार्टर स्पेस एंड मेजर डिजास्टर

यूएन-स्पाइडर (यूनाइटेड नेशंस प्लेटफॉर्म फॉर स्पेस बेस्ड इंफॉर्मेशन फॉर डिजास्टर मैनेजमेंट एंड इमरजेंसी रिस्पॉन्स)

  • भारत को देश के बाढ़ प्रभावित इलाकों के संबंध में अमेरिका, चीन और रूस समेत आठ राष्ट्रों से उपग्रह के आंकड़े मिले हैं। विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को बताया कि प्राकृतिक या मानवीय आपदा के दौरान अंतरिक्ष आधारित आंकड़ों के साझा करने के बहुपक्षीय तंत्र के तहत यह आंकड़े साझा किये गए।
  • मंत्रालय ने कहा कि जब भी प्राकृतिक आपदा होती है तो इंटरनेशनल चार्टर स्पेस एंड मेजर डिजास्टर के सदस्य इसरो के राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र (एनआरएससी) और 32 अन्य देशों की अंतरिक्ष एजेंसियां सक्रिय हो सकती हैं।
  • “इसके बाद चार्टर सभी 33 सदस्य अंतरिक्ष एजेंसियों के पास मौजूद आपदा प्रभावित इलाकों से संबंधित जानकारी लेती है। यह तय प्रक्रिया है।”
  • एनआरएससी चार्टर में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) का प्रतिनिधित्व करता है। यूएन-स्पाइडर (यूनाइटेड नेशंस प्लेटफॉर्म फॉर स्पेस बेस्ड इंफॉर्मेशन फॉर डिजास्टर मैनेजमेंट एंड इमरजेंसी रिस्पॉन्स) के तहत गठित किया गया है।
  • “विभिन्न अंतरिक्ष एजेंसियों द्वारा मिली जानकारी से चार्टर संसाधनों और विशेषज्ञता को संकट की अहम स्थितियों में तेज समन्वय के साथ प्रतिक्रिया में मदद मिलती है।” भारत में भारी बाढ़ के बाद 17 जुलाई को एनआरएससी ने चार्टर को सक्रिय किया था।
  • “चार्टर के तहत अब तक यूएसजीएस, सीएनईएस, ईएसए, रॉसकॉसमॉस, सीएनएसए और तीन अन्य एजेंसियों समेत आठ राष्ट्रों से आंकड़े मिल चुके हैं।”
  • दूसरे देशों द्वारा किये जाने वाले ऐसे ही अनुरोध पर इसरो भी जानकारी उपलब्ध कराती है। इससे पहले भारत में चीन के राजदूत सुन वीदोंग ने शुक्रवार को यहां बताया कि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधन संगठन (इसरो) ने अंतरराष्ट्रीय आपदा राहत सहयोग मांगा था जिसके बाद उपग्रह से भेजा डेटा दिया गया। ''अंतरराष्ट्रीय आपदा राहत सहयोग के लिए इसरो के अनुरोध के बाद चीन ने भारत के राहत प्रयासों में मदद देने के लिए उसके बाढ़ ग्रस्त क्षेत्रों का, उपग्रह से भेजा डेटा उसे मुहैया कराया है।

बॉक्साइट अवशेष (सामान्य नाम रेड मड)

  • खान मंत्रालय ने बॉक्साइट अवशेष (सामान्य नाम रेड मड) के बेहतर उपयोग के लिए आज एक कार्यशाला ‘वेस्ट टु वेल्थ’ का आयोजन किया। कार्यशाला में रेड मड के उत्पादन, उपयोग और निष्पादन के संबंध में विचार-विमर्श किया गया। जवाहरलाल नेहरू एल्यूमिनियम अनुसंधान विकास और डिजाइन केंद्र (जेएनएआरडीडीसी), नागपुर के सहयोग से आयोजित इस कार्यशाला की अध्यक्षता खान मंत्रालय के अपर सचिव डॉ. के राजेश्वर राव ने की।

रेड मड

  • एल्यूमिनियम उत्पादन प्रक्रिया के दौरान एक ठोस अपशिष्ट रेड मड का उत्पादन होता है। इसमे कास्टिक सोडा और अन्य खनिजों की उपस्थिति रहती है, जो पर्यावरण के लिए चिंता का विषय है। विश्व स्तर पर 150 मिलियन टन रेड मड का उत्पादन होता है। विश्व स्तर पर लगभग 3 बिलियन टन रेड मड जमा है। भारत में प्रतिवर्ष 9 मिलियन टन रेड मड का उत्पादन होता है।

अगले 10 साल में भारतीय रेलवे दुनिया की पहली ग्रीन रेलवे होगी

  • रेल मंत्री पीयूष गोयल ने ऊर्जा संरक्षण के क्षेत्र में भारतीय रेलवे के उल्लेखनीय प्रयासों का जिक्र करते हुए अगले 10 साल के भीतर इसके ‘ग्रीन रेलवे’ बनने का दावा किया है। गोयल ने शुक्रवार को राज्यसभा में प्रश्नकाल में बताया कि 2022 तक देश में सभी ब्रॉडगेज रेल लाइन का विद्युतीकरण हो जाएगा।
  • उन्होंने बताया कि रेल सेवा का संचालन शत प्रतिशत बिजली से करने के बाद भी सीमावर्ती इलाकों और आपात स्थिति में डीजल से चलने वाली रेल सेवा बरकरार रह जाएगी। इसमें भी डीजल की जगह बायोडीजल का इस्तेमाल सुनिश्चित किया जाएगा। इसके अलावा, रेलवे अपनी खाली पड़ी जमीन पर सौर ऊर्जा संयत्र लगा रहा है। इससे अतिक्रमण की समस्या से भी मुक्ति मिलेगी और ऊर्जा जरूरत की पूर्ति में सौर ऊर्जा का इस्तेमाल बढ़ेगा।
  • गोयल ने कहा, ‘इन सभी प्रयासों के बलबूते मैं यह महत्वपूर्ण घोषणा कर सकता हूं कि 10 साल के भीतर भारतीय रेलवे दुनिया की पहली शत प्रतिशत ‘ग्रीन रेलवे’ हो जाएगी।’

:: विज्ञान और प्रौद्योगिकी ::

ऑटोसाइडल ग्रेविड ओवीटै्रप टूल (एजीओ)

  • डेंगू, चिकनगुनिया और जीका वायरस के संक्रमण के कारण हर साल देश में हजारों लोग जान गंवा देते हैं। इन बीमारियों के लिए अब तक कोई ठोस और सटिक इलाज उपलब्ध नहीं हो पाया है और इनसे बचने का सही इलाज सावधानी ही है।
  • लेकिन, वैज्ञानिकों ने इन वायरस का संक्रमण फैलाने वाले मादा एडीज एजिप्टी मच्छर को नियंत्रित करने का तरीका ढूंढ़ लिया है। उन्होंने एक ऐसा टूल बनाया है जो अंडे देने के लिए जगह तलाश रही मादा मच्छर को अपना निशाना बनाएगा।
  • ऑटोसाइडल ग्रेविड ओवीटै्रप टूल (एजीओ) की मदद से चिकनगुनिया को हराया जा सकेगा। अमेरिका के सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेशन के वैज्ञानिक ने कहा कि इस रसायन मुक्त टूल से चिकनगुनिया के संक्रमण से सुरक्षा मिलेगी। प्यूर्टोरिको में इस टूल का परीक्षण किया गया था, जो सफल रहा।
  • अध्ययन के लिए 639 घरों को चुना गया था जिसमें 290 घरों में एजीओ ट्रैप उपलब्ध कराए गए। फिर, जिन घरों में एजीओ ट्रैप दिए गए थे उनमें से 175 व्यक्तियों और अन्य घरों के 152 लोगों के रक्त के नमूने की जांच की गई।
  • एजीओ ट्रैप वाले घर के केवल उन 10 फीसदी लोगों में ही चिकनगुनिया के लक्षण मिले जो ज्यादातर समय बाहर रहते थे। अन्य घरों के करीब 48.7 फीसदी लोगों में इसके लक्षण मौजूद थे।

आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान (एरीज)

  • आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान (एरीज) के वैज्ञानिकों ने दूर अंतरिक्ष में चमक बदलने वाले 28 चर कांति तारों की पहचान कर उन्हें खोजा है। तीन साल पहले एरीज द्वारा देवस्थल (नैनीताल) में स्थापित 3.6 मीटर व्यास की ऑप्टिकल दूरबीन के जरिए यह संभव हो पाया है।
  • देवस्थल में एरीज की 3.6 मीटर व्यास की दूरबीन की सुविधा उपलब्ध हो जाने से दूर के तारों को देखना और उनकी पहचान कर पाना संभव हो पाया है। इसके परिणामस्वरूप ही 57 हजार प्रकाश वर्ष दूर ग्लोब्यूलर क्लस्टर का अध्ययन किया। दूरबीन में लगे सीसीडी (चार्ज्ड कप्लड डिवाइस) इमेजर से इस कलस्टर के चित्र लिए गए। इनके गहन अध्ययन के बाद पता चला कि इस क्लस्टर में 28 चर तारे मौजूद हैं। चमक बदलते रहना इन तारों का स्वभाव है। इससे वैज्ञानिकों का इनके प्रति आकर्षित होना स्वभाविक है।
  • एनजीसी (न्यू गैलेटिक कैटेलॉग) 4147 नामक इस क्लस्टर में पहली बार इन तारों की पहचान की गई है। इसके कारण यह खोज महत्वपूर्ण मानी जा सकती है।
  • एशिया की सबसे बड़ी यह दूरबीन अंतरिक्ष विज्ञान और सुविधाओं के क्षेत्र में देश की बड़ी उपलब्धि है।

अमेरिका और ताइवान के साथ मिलकर 'न्यूट्रिनो' पर शोध

चंद्रयान-2 की सफलता के बाद इसरो के वैज्ञानिक सूर्य मिशन (आदित्य एल-वन) में जुट गए हैं। बीएचयू के वैज्ञानिक भी एक नया अध्याय लिखने की तैयारी में हैं। न्यूट्रिनो (घोस्ट पार्टिकल) के जरिए सूर्य की संरचना व उत्पत्ति के रहस्यों को सुलझाने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि न्यूट्रिनो के बारे में भी पूरी जानकारी हासिल नहीं हो सकी है। इसकी विशेषताओं पर भी शोध चल रहे हैं। इस मिशन में साथ दे रहे हैं अमेरिका व ताइवान के वैज्ञानिक। न्यूट्रिनो का पता लगाने में प्रयुक्त रेजिस्टिव प्लेट चैंबर (आरपीसी) डिटेक्टर में प्रयोग होने वाले चार्ज पिकअप पैनल के स्वरूप में बीएचयू के वैज्ञानिकों ने कई बदलाव किया है। यह शोध यूरोप के जर्नल ऑफ इंस्ट्रूमेंटेशन (जेआइएनएसटी) में 2017 में प्रकाशित हुआ।

तमिलनाडु में प्रयोगशाला प्रस्तावित : न्यूट्रिनो के माध्यम से सूर्य की जानकारी जुटाने का विचार वैज्ञानिकों ने 2000 में सरकार के सामने रखा था। सरकार ने तमिलनाडु के थेनी जिले में प्रस्तावित प्रयोगशाला के लिए छह वर्ष पहले करीब 1600 करोड़ रुपये स्वीकृत भी किए।

सीधी रेखा में चलता है

  • सूर्य की ऊर्जा का 90 फीसद न्यूट्रिनो है
  • सूर्य के कोर (केंद्र) से सतह तक आने में फोटान (प्रकाश ऊर्जा) को करीब एक लाख वर्ष का समय लगता है
  • न्यूट्रिनो यह दूरी मात्र 2.3 सेकंड में तय कर लेता है
  • न्यूट्रिनो सीधी रेखा में चलता है-यह रास्ते में पडऩे वाले धातुओं के भीतर से बिना किसी प्रतिक्रिया के गुजरता है
  • इस पर आधारित तकनीक सेटेलाइट फोन से भी कई गुना ज्यादा बेहतर साबित हो सकती है।

न्यूट्रिनो: न्यूट्रिनो पहचान बदलने वाला अतिसूक्ष्म कण है। यह लगभग प्रकाश की गति के बराबर गतिमान रहता है। डीएनए की तर्ज पर इससे उत्पत्ति स्थल की पूरी जानकारी हासिल की जा सकती है।

:: विविध ::

वर्ल्ड वुमन डेंजर इंडेक्स रिपोर्ट- 2019

  • अकेले यात्रा करने वाली महिलाओं के लिए दक्षिण अफ्रीका सबसे असुरक्षित देश है। जबकि स्पेन सबसे सुरक्षित है। अशर एंड लिरिक रिसर्च एजेंसी ने अपनी वुमन डेंजर इंडेक्स रिपोर्ट में यह दावा किया है। 50 देशों पर यह रिपोर्ट तैयार की गई है। इसमें भारत नौवें स्थान पर है।
  • अकेले सफर करने वाली महिलाओं के लिए द. अफ्रीका सबसे असुरक्षित, भारत नौवें स्थान पर
  • 50 देशों की रिपोर्ट में स्पेन सबसे सुरक्षित, अमेरिका 19वें नंबर पर

टॉप- 5 असुरक्षित देश

1. द. अफ्रीका
2. ब्राजील
3. रूस
4. मैक्सिको
5. ईरान
9. भारत

जहां रात में घूमना खतरनाक

1. द. अफ्रीका
2. ब्राजील
3. अर्जेंटीना
4. मेक्सिको
5. डोमिनिक रिपब्लिक

जहां सबसे ज्यादा हत्याएं

1. द. अफ्रीका
2. रूस
3. ब्राजील
4. मैक्सिको
5. डोमिनिक रिपब्लिक

फोर्टनाइट वर्ल्ड कप-ई-स्पोर्ट्स का सबसे बड़ा इवेंट

  • न्यूयॉर्क में आज से ई-स्पोर्ट्स का दुनिया का सबसे बड़ा इवेंट शुरू हो रहा है- फोर्टनाइट वर्ल्ड कप। वर्ल्ड कप में हिस्सा लेने के लिए हुए क्वालिफायर्स में करीब चार करोड़ गेमर्स ने हिस्सा लिया था, इनमें से 100 गेमर चुनकर आए हैं। ये गेमर 12 साल उम्र के भी हैं और 40 साल से ज्यादा के भी। फोर्टनाइट वर्ल्ड कप दुनिया का सबसे ज्यादा प्राइज मनी वाला ई-स्पोर्ट्स टूर्नामेंट है।

यूएन मिशन के लिए शहीद हुए भारतीय सैनिक रमेश मरणोपरांत सम्मानित

  • लेबनान में संयुक्त राष्ट्र मिशन के लिए कार्य करते हुए शहीद हुए भारतीय सैनिक रमेश सिंह को मरणोपरांत सम्मानित किया गया है। भारतीय सैनिक को लेबनान में संयुक्त राष्ट्र अंतरिम फोर्स के कमांडर स्टेफानो डेल कर्नल और लेबनानी सेना ने उनके समर्पण और प्रतिबद्धता के लिए पदक से सम्मानित किया है।
  • 14 जुलाई 2019 तक लेबनान में संयुक्त राष्ट्र अंतरिम फोर्स में कुल 43 टुकड़ियां शामिल हैं, जिसमें सैन्य-सहयोगी देशों के 10,556 शांति सैनिक शामिल हैं। संयुक्त राष्ट्र शांति सेना में भारत चौथा सबसे बड़ा योगदान देने वाला देश है। भारत के करीब 6400 सैनिक संयुक्त राष्ट्र की शांति सेना में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

:: प्रिलिमिस बूस्टर ::

  • पर्यावरण के लिए चिंताजनक ठोस अपशिष्ट रेड मड का उत्पादन किस औद्योगिक प्रक्रिया के फलस्वरूप होता है? (एल्यूमिनियम उत्पादन प्रक्रिया)
  • रेल मंत्रालय के द्वारा कितने वर्षों में भारतीय रेलवे को ‘ग्रीन रेलवे’ में रूपांतरण कर दिया जाएगा? (10 वर्ष)
  • हाल ही में किस शोध संस्थान के वैज्ञानिकों के द्वारा 28 तारों की पहचान एवं खोज की गई है? (आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान - एरीज)
  • वूमेन डेंजर इंडेक्स 2019 के अनुसार महिलाओं के लिए कौन सा देश सबसे असुरक्षित हैं? (दक्षिण अफ्रीका)
  • ई-स्पोर्ट्स खेलों का दुनिया का सबसे बड़ा इवेंट फोर्टनाइट वर्ल्ड कप कहां आयोजित किया जा रहा है? (न्यूयॉर्क)
  • औद्योगिक प्रदूषण के मामले में हाल ही में जारी हुए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की रैंकिंग में सबसे प्रदूषित नगर कौन है? (तारापुर-महाराष्ट्र)
  • कौन सी राज्य सरकार 'आई एम ए विलेज' (मैं एक गांव हूं) योजना लॉन्च करने जा रही है? (उत्तराखंड)
  • किस राज्य में जानकी सेतु निर्मित किया जा रहा है? (उत्तराखंड)
  • जानकी सेतु किस नदी पर निर्मित किया जा रहा है? (गंगा नदी)
  • जानकी सेतु किन दो जिलों को आपस में जोड़ेगी? (टिहरी व पौड़ी जिलों को)
  • हाल ही में किस देश के द्वारा दो दशक अंतराल के उपरांत मौत की सजा को पुनः बहाल किया गया है? (अमेरिका)
  • नए कंपनी कानून के तहत सीएसआर(CSR) राशि को खर्च करने में विफल होने वाली कंपनियों को उन्हें यह राशि किस खाते में जमा करनी होगी? (प्रधानमंत्री राहत कोष)
  • आर्थिक गणना 2019 की शुरुआत कहां से की जाएगी? (त्रिपुरा)
  • भारत में अब तक हुए आर्थिक गणना की श्रृंखला में आर्थिक गणना 2019 का क्रम कौन सा होगा? (सातवा)
  • आर्थिक जनगणना 2019 का कार्यान्वयन किस विभाग के द्वारा किया जाएगा? (सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय)
  • बजट 2019-20 के द्वारा समाचार पत्रों के इस्तेमाल होने वाले पेपर पर कितने प्रतिशत सीमा शुल्क लगाया गया है? (10%)
  • किस अंतरराष्ट्रीय चार्टर के तहत प्राकृतिक घटनाओं के संदर्भ में अंतरिक्ष एजेंसियों के द्वारा डाटा उपलब्ध करवाया जाता है? (इंटरनेशनल चार्टर स्पेस एंड मेजर डिजास्टर)
  • संयुक्त राष्ट्र मिशन के लिए कार्य करते हुए शहीद हुए किस भारतीय सैनिक को हाल ही में मरणोपरांत सम्मानित किया गया? (रमेश सिंह)

स्रोत साभार: Dainik Jagran (Rashtriya Sanskaran), Dainik Bhaskar (Rashtriya Sanskaran), Rashtriya Sahara (Rashtriya Sanskaran) Hindustan Dainik (Delhi), Nai Duniya, Hindustan Times, The Hindu, BBC Portal, The Economic Times (Hindi & English), PTI, PIB

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