(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (27 दिसंबर 2019)

दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर


(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (27 दिसंबर 2019)


:: राष्ट्रीय समाचार ::

सुशासन सूचकांक (जीजीआई)

  • बेहतर शासन-व्यवस्था के मामले में तमिलनाडु देश में अव्वल राज्य रहा है, जबकि महाराष्ट्र और कर्नाटक इस मामले में क्रमश दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे हैं। कार्मिक मंत्रालय की ओर से जारी सुशासन सूचकांक (जीजीआई) में छत्तीसगढ़ को चौथा स्थान मिला है। इसके बाद आंध्र प्रदेश को पांचवें , गुजरात को 6वें , हरियाणा को 7वें और केरल 8वें पायदान पर रहा है। राजधानी दिल्ली को इस सूची में 22वां स्थान मिला है।

मुख्य तथ्य

  • कुछ अलग अलग संकेतकों के आधार पर इस रैंकिंग में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को तीन समूहों में बांटा गया है। ये समूह बड़े राज्य, पूर्वोत्तर एवं पहाड़ी राज्य तथा केंद्र शासित प्रदेश हैं। पूर्वोत्तर एवं पहाड़ी राज्यों की श्रेणी में हिमाचल प्रदेश शीर्ष स्थान पर रहा है।
  • इसके बाद उत्तराखंड, त्रिपुरा, मिजोरम, सिक्किम, असम, जम्मू एवं कश्मीर, मणिपुर, मेघालय, नगालैंड और अरुणाचल प्रदेश का स्थान रहा है। जम्मू-कश्मीर को अब दो केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू -कश्मीर और लद्दाख में बांट दिया गया है। इस सूचकांक में मध्य प्रदेश नौंवें, पश्चिम बंगाल दसवें स्थान पर रहा है। वहीं , तेलंगाना 11 वें , राजस्थान (12 वें), पंजाब (13 वें), ओडिशा को (14 वां), बिहार को (15 वां), गोवा (16 वें), उत्तर प्रदेश (17 वें) और झारखंड 18 वें स्थान पर रहा है।
  • कृषि और संबद्ध क्षेत्र में बड़े राज्यों की श्रेणी में पहले पायदान पर मध्य प्रदेश है। राजस्थान और छत्तीसगढ़ क्रमश: दूसरे और तीसरे पायदान पर हैं।
  • वाणिज्य एवं उद्योग क्षेत्र के मामले में बड़े राज्यों की श्रेणी में झारखंड पहले स्थान पर है। इसके बाद आंध्र प्रदेश और तेलगांना हैं। पूर्वोत्तर एवं पहाड़ी राज्यों में उत्तराखंड जबकि केंद्रशासित प्रदेश में दिल्ली शीर्ष पर रही। मानव संसाधन विकास क्षेत्र में बड़े राज्यों की श्रेणी में गोवा शीर्ष पर है।
  • केंद्र शासित प्रदेशों में पुडुचेरी पहले पायदान पर है। इसके बाद चंडीगढ़, दिल्ली, दमन एवं दीव, अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह, दादर एवं नगर हवेली और लक्षद्वीप हैं। कार्मिक मंत्रालय ने कहा, मौजूदा समय में राज्यों में सुशासन की स्थिति का निष्पक्ष आकलन करने के लिए कोई एक समान सूचकांक नहीं है। हालांकि, सुशासन सूचकांक राज्यों में सुशासन की स्थिति और राज्य सरकार तथा केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा उठाए गए विभिन्न कदमों के प्रभाव का आकलन करने के लिए एक साधन तैयार करने की दिशा में किया गया प्रयास है।

डिटेंशन सेंटर

  • डिटेंशन सेंटर बनाया जाना एक सतत प्रक्रिया है। अगर कोई विदेशी नागरिक पकड़ा जाता है तो उसे डिटेंशन सेंटर में ही रखा जाता है। अभी तक ऐसे लोगों को जेल में ही रखा जाता था। फिलहाल असम में ऐसा एक नया सेंटर बनाया जा रहा है। कहीं इन्हें नजरबंदी शिविर, कहीं यातना केंद्र, कहीं इमिग्रेशन डिटेंशन सेंटर तो कहीं कंसन्ट्रेशन कैंप कहा जाता है।

क्या होता है डिटेंशन सेंटर?

  • डिटेंशन सेंटर (हिरासत केंद्र) ऐसे ठिकाने होते हैं, जहां अवैध विदेशी नागरिकों को रखा जाता है। भारत के दि फॉरेनर्स एक्ट के सेक्शन 3(2)(सी) के तहत केंद्र सरकार को यह अधिकार है कि वह किसी भी अवैध नागरिक को देश से बाहर निकाल सकती है। देश से बाहर करने की प्रॉसेस के दौरान ऐसे लोगों को इन्हीं डिटेंशन सेंटरों में ही रखा जाता है। दरअसल जिनके पास देश में रहने के कागजात मौजूद नहीं होते हैं उनको यहां पर रखकर उनके देश वापस भेज दिया जाता है।

कहां बन रहा है डिटेंशन सेंटर?

  • असम के गोवालपारा जिले के मटिया में पहले डिटेंशन सेंटर (हिरासत केंद्र) का निर्माण कार्य चल रहा है। इस सेंटर का करीब 65 फीसदी हिस्सा अब तक बनकर तैयार हो चुका है। मटिया में आबादी से दूर ढाई हेक्टेयर में बन रहे डिटेंशन सेंटर का काम दिसंबर 2018 से चल रहा है, इसे दिसंबर 2019 तक बन जाना था लेकिन अब बारिश और बाढ़ के कारण इसमें देरी हो गई। 300 मजदूर इस निर्माण कार्य को पूरा करने में लगे है। इस निर्माण कार्य को पूरा करने के लिए 31 दिसंबर 2019 की डेडलाइन रखी गई थी लेकिन अब इसे 31 मार्च 2020 तक सारा काम पूरा कर लिया जाएगा। इसके निर्माण में कुल 46 करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं। ये पैसा केंद्र सरकार खर्च कर रहा है।

कितने लोगों के लिए होगा सेंटर?

  • इस डिटेंशन सेंटर में तीन हजार लोगों को रखने का इंतजाम किया जा रहा है। यहां महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग-अलग सेल बनाए गए हैं। फिलहाल इस सेंटर का 70 फ़ीसदी काम पूरा कर लिया गया है। मटिया डिटेंशन सेंटर में चार-चार मंजिलों वाली 15 इमारतें बन रही हैं। इनमें 13 इमारतें पुरुषों और 2 महिलाओं के लिए बन रही है। इस कैंपस में स्कूल और अस्पताल भी बन रहा है ताकि नागरिकता साबित न करने वालों को मूलभूत सुविधाएं मिल सकें।

क्या पहले भी मौजूद थे डिटेंशन सेंटर?

  • असम में पहले से कई डिटेंशन सेंटर मौजूद हैं। असम के मटिया में पहला डिटेंशन सेंटर तैयार हो रहा है लेकिन यहां के कई जिलों में मौजूदा जेल को भी डिटेंशन सेंटर के तौर पर इस्तेमाल किया जाता रहा है। असम में डिब्रूगढ़, सिलचर, तेजपुर, जोरहाट, कोकराझार और गोवालपारा में जेलों को ही डिटेंशन सेंटर बनाया गया है।

कब बनाया जेलों को डिटेंशन सेंटर?

  • जेलों को डिटेंशन सेंटर बनाने का फैसला 2009 में कांग्रेस सरकार ने लिया था। उस वक्त केंद्र में मनमोहन सिंह की सरकार थी। उस दौरान पी चिंदबरम गृह मंत्री थे और राज्य की कमान तरूण गोगोई के हाथ में थी। उस वक्त की सरकार ने घुसपैठियों की लिस्ट को लेकर कोर्ट में हलफनामा दाखिल किया था। ये घुसपैठिए कहीं गायब न हो जाए इस वजह से इन्हें डिटेंशन सेंटर में रखा गया था।

क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े?

  • सरकारी आंकड़ों के मुताबिक असम में 1985 से लेकर इस साल अक्टूबर तक एक लाख 29 हजार लोगों को विदेशी घोषित किया गया है लेकिन इनमें करीब 72 हजार लोगों का कोई पता-ठिकाना नहीं है जबकि असम एनआरसी की लिस्ट से 19 लाख लोगों को बाहर रखा गया है। ये 72 हजार लोग देश के अलग-अलग प्रदेशों में पहुंच गए हैं या उनका कोई रिकार्ड नहीं है।

दुनिया का दूसरा बड़ा डिटेंशन सेंटर

  • अमरीका के बाद असम में बनाया जा रहा डिटेंशन सेंटर दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा डिटेंशन सेंटर होगा। इसके अंदर अस्पताल और ठीक गेट के बाहर प्राइमरी स्कूल से लेकर सभागार और बच्चों और महिलाओं की विशेष देखभाल के लिए तमाम सुविधाएं होगी। फिलहाल असम की अलग-अलग छह सेंट्रल जेलों में बने डिटेंशन सेंटरों में 1133 घोषित विदेशी लोगों को रखा गया है।

फ्रांस में शुरू हुआ था दुनिया का पहला डिटेंशन सेंटर

  • यूएस के फ्रीडमफॉरइमिग्रेंट्स के मुताबिक, दुनिया का पहला इमिग्रेशन डिटेंशन सेंटर (जो सिर्फ अवैध नागरिकों को रखने के मकसद से ही तैयार किया गया था) 1892 में यूएस के न्यू जर्सी में शुरू किया गया। जिसका नाम एलिस आइलैंड इमिग्रेशन स्टेशन था। फ्रांस में 17वीं और 18वीं सदी में बेसिले नामक जगह पर बने किले को हिरासत केंद्र के तौर पर इस्तेमाल किया जाता था। आठ टावरों वाला यह किला चारों तरफ से दीवार से घिरा हुआ था। फ्रांस के राजा चार्ल्स पंचम द्वारा 22 अप्रैल 1370 को इसका निर्माण कार्य शुरू करवाया गया था। जिसमें पड़ोसी देशों से आए अप्रवासियों और युद्धबंदियों को रखा जाता था। इसे बेसिले सैंट-एंटोनी के नाम से भी जाना जाता है।

डिटेंशन सेंटर से जुड़े अन्य मुख्य तथ्य

  • 1892 में दुनिया का पहला इमिग्रेशन डिटेंशन केंद्र 'एलिस आइलैंड' यूएस के न्यू जर्सी में खोला गया।
  • 1910 में यूएस के कैलिफोर्निया में दूसरा इमिग्रेशन डिटेंशन केंद्र 'एंजल आइलैंड इमिग्रेशन स्टेशन' शुरू हुआ।
  • 1970 में यूरोप का पहला डिटेंशन सेंटर 'हार्डमंडवर्थ डिटेंशन सेंटर' इंग्लैंड में शुरू हुआ।
  • 1982 में साउथ अफ्रीका में देश का पहला इमिग्रेशन डिटेंशन सेंटर शुरू हुआ। पहले यहां जेल में ही इमिग्रेंट्स को रखा जाता था। अफ्रीका में इस तरह का यह पहला सेंटर था।
  • 2002 में क्यूबा में अमेरिका द्वारा अमेरिकी सैनिक अड्डे ग्वांतानामो बे को स्थापित किया गया। इस जगह को पहले पहले इमिग्रेशन डिटेंशन साइट के तौर पर ही इस्तेमाल किया जाता था।
  • 2012 में इजरायल ने 10 हजार की क्षमता वाला होलोट डिटेंशन सेंटर शुरू किया।
  • 2014 में यूएस में ओबामा प्रशासन ने फैमिली डिटेंशन सेंटर को शुरू किया। नवंबर 2016 में डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद वहां निजी जेल उद्योग के स्टॉक्स में बढ़ोत्तरी हुई। यूएस में ओबामा प्रशासन के दौरान 3 मिलियन से ज्यादा लोगों को देश से बाहर निकाला गया।

पैंगोंग झील के पास चीनी सैन्य बुनियादी ढांचे के विकास

  • चीन ने एकबार फिर लद्दाख सीमा के पास भारत की सुरक्षा के खिलाफ एक कदम उठाया है। चीन, लद्दाख के सीमावर्ती इलाके में अपने सैन्य बुनियादी ढांचे को बड़े पैमाने पर बढ़ाने की तैयारी कर रहा है। चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी(पीएलए) ने लद्दाख क्षेत्र में पैंगोंग झील के पास सैन्य बुनियादी ढांचे के विकास पर काम करना शुरू कर दिया है।
  • चीनी सेना ने इस इलाके में टेंट स्थापित किया है और वह इस इलाके में भूमिगत सुरंगों का निर्माण किया है, वहीं पैंगोंग त्सो क्षेत्र के पास विवादित फिंगर 8 माउंटेन स्पर में और अधिक सुरंगों का निर्माण चीनी सेना कर रही है।

पृष्टभूमि

  • बता दें, अब तक इस विवादित क्षेत्र में किसी तरह का सैन्य बुनियादी ढांचा नहीं बनाया गया है, जहां चीनी सेना गश्ती के लिए आई थी।लेकिन टेंट की स्थापना करने के साथ ही चीनी सेना ने जिस तरह खुद को इस सीमावर्ती इलाके में तैनात किया है, यह भारत के लिए चिंता का विषय बन गया है।
  • पैंगोंग त्सो के उत्तरी तट पर फिंगर -8 (पर्वतीय स्पर्स) क्षेत्र में विवादित फिंगर-5, भारत और चीनी सेनाओं के बीच हिंसक झड़प का गवाह बना था। 15 अगस्त, 2017 को एक दूसरे को घायल करने के लिए दोनों सेनाओं ने पत्थरों और लोहे की छड़ों का इस्तेमाल किया जा रहा था।

‘ईट राइट’ मेला और NetSCoFAN (भोजन सुरक्षा और पोषण के लिए वैज्ञानिक सहयोग नेटवर्क)

  • केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने नई दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरु स्टेडियम में दूसरे ईट राइट मेले (खानपान की अच्छी आदतों से जुड़ा मेला) का उद्घाटन किया।
  • एफएसएसएआई (भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण) का ईट राइट मेला का आयोजन करता है। डॉ. हर्षवर्धन ने इस तथ्य को रेखांकित करते हुए कहा कि भारत एक तरफ अल्प-पोषण से जूझ रहा है जिससे एक तरफ वास्टिंग और स्टंटिंग जैसी बीमारियां सामने आई हैं और दूसरी तरफ लोग मोटापे से ग्रसित हो रहे हैं। मोटापे का मुख्य कारण अधिक मात्रा में जंक फूड का उपभोग, गलत आहार का चयन अधिक मात्रा में भोजन लेना और व्यायाम की कमी है। भोजन से संबंधित बीमारियों की वृद्धि से पता चलता है कि पिछले दशक की तुलना में लोग कम स्वास्थ्यप्रद भोजन ले रहे हैं। इस संदर्भ में एफएसएसएआई द्वारा शुरु किया गया ईट राइट आंदोलन समय की मांग के अनुरूप है।

NetSCoFAN (भोजन सुरक्षा और पोषण के लिए वैज्ञानिक सहयोग नेटवर्क)

  • डॉ. हर्षवर्धन ने NetSCoFAN (भोजन सुरक्षा और पोषण के लिए वैज्ञानिक सहयोग नेटवर्क) लॉन्च किया, जो भोजन और पोषण के क्षेत्र में काम करने वाले शोध व शैक्षणिक संस्थानों का नेटवर्क है। इस नेटवर्क में विभिन्न प्रमुखों / निदेशकों और वैज्ञानिकों के बारे में विस्तृत जानकारी एक निदेशिका के तहत दी गई है।
  • NetSCoFAN के अन्तर्गत विभिन्न क्षेत्रों में काम करने वाले संस्थानों के आठ समूह है। इन क्षेत्रों में प्रमुख है – जीव विज्ञान, रसायन, पोषण, पशुओँ से प्राप्त भोजन, पेड़ पोधों से प्राप्त भोजन, जल व अन्य पेड़, भोजन की जांच सुरक्षित और टिकाऊ पैकेजिंग आदि। एफएसएसएआई ने आठ नोडल संस्थानों की पहचान की है, जो शोध, सर्वेक्षण और संबंधित कार्य करेंगे। NetSCoFAN खाद्य सुरक्षा मामलों पर डाटा इकट्ठा करेगा और डेटा बेस तैयार करेगा।

:: राजव्यवस्था ::

क्यूरेटिव पिटीशन

  • अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर मुस्लिम पक्षकारों की पुनर्विचार याचिका बगैर बहस के खारिज होने के बाद अब बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी क्यूरेटिव याचिका दाखिल करेगी। इसके साथ ही निर्भया मामले में 4 में से 3 दोषियों ने तिहाड़ जेल अधिकारियों से कहा है कि दया याचिका दायर करने से पहले उनको एक क्यूरेटिव (सुधारात्मक) याचिका दायर करनी है।

रिव्यू पिटीशन नहीं तो क्यूरेटिव पिटीशन

  • दरअसल, कोर्ट के फैसले के बाद हर पक्ष के पास पुनर्विचार याचिका यानि रिव्यू पिटीशन डालने का मौका रहेगा। कोई भी पक्षकार फैसले को लेकर सुप्रीम कोर्ट से पुनर्विचार याचिका दाखिल कर सकता है, जिस पर बेंच सुनवाई कर सकती है। हालांकि, कोर्ट को ये तय करना होगा कि वो पुनर्विचार याचिका को कोर्ट में सुने या फिर चैंबर में। वहीं अगर ये रिव्यू पिटीशन भी खारिज हो जाती है, तो फिर ऐसे में आखिर रास्ता बचता है क्यूरेटिव पिटीशन का। इसके जरिए भी याचिका दायर की जा सकती है, लेकिन ये आखिरी मौका होगा।

क्या है क्यूरेटिव पिटीशन?

  • दरअसल, क्यूरेटिव पिटीशन उस वक्त दाखिल किया जाता है जब किसी मुजरिम की राष्ट्रपति के पास भेजी गई दया याचिका और सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका यानि रिव्यू पिटीशन खारिज कर दी जाती है। ऐसे में क्यूरेटिव पिटीशन उस मुजरिम या पक्ष के पास मौजूद अंतिम मौका होता है जिसके जरिए वो अपने लिए सुनिश्चित की गई सजा में नरमी की गुहार लगा सकता है। हालांकि, क्यूरेटिव पिटीशन किसी भी मामले में अभियोग की अंतिम कड़ी होता है, इसमें फैसला आने के बाद मुजरिम या पक्ष के लिए आगे के सभी रास्ते बंद हो जाते हैं।

:: भारतीय अर्थव्यवस्था ::

'ऑपरेशन ट्विस्ट'

  • भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) 10 साल की अवधि वाली सरकारी सिक्योरिटीज की खरीदारी करेगा. साथ ही वह एक साल की अवधि वाले सरकारी बॉन्ड बेचेगा. केंद्रीय बैंक के इस कदम का मकसद अर्थव्यवस्था में ब्याज दरों को नीचे लाना है.
  • इस खरीद-फरोख्त में केंद्रीय बैंक 10,000 करोड़ रुपये मूल्य के सरकारी बॉन्ड खरीदेगा. इतनी ही रकम के सरकारी बॉन्ड बेचेगा. वैश्विक स्तर पर इस कवायद को 'ऑपरेशन ट्विस्ट' कहा जाता है. इसके तहत केंद्रीय बैंक एक साथ सरकारी सिक्योरिटी को खरीदता और बेचता है.

क्या है आरबीआई का ऑपरेशन ट्विस्ट?

  • केन्द्रीय बैंक द्वारा एक साथ बॉन्ड की खरीद-बिक्री करने की कवायद को वित्तीय जगत में ऑपरेश ट्विस्ट के नाम से जाना जाता है। करीब एक दशक पहले अमेरिकी केन्द्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ने ऐसा किया था। वित्त वर्ष 2011-12 में अमेरिकी फेडरल रिजर्व नें लंबी अवधि के कर्ज को सस्ता करने के मद्देनजर ऐसा कदम उठाया था।

पृष्टभूमि

  • भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने 23 दिसंबर को एक साथ बॉन्ड की खरीदारी और बिक्री का निर्णय किया है। आरबीआई यह कदम खुली बाजार नीति (ओएमओ) के तहत उठाएगा जिसमें 10 साल की परिपक्वता वाले 10 हजार करोड़ रुपये का बॉन्ड खरीदेगा जबकि एक साल की परिपक्वता वाले इतने ही मूल्य के नए बॉन्ड जारी करेगा। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि इससे लंबी अवधि के बॉन्ड पर रिटर्न (यील्ड) घटेगा जिससे भविष्य में कर्ज और सस्ता होने की राह खुल जाएगी।
  • बैंक कोष की सीमांत लागत (एमसीएलआर) के आधार पर कर्ज की दरें तय करते हैं। इसको रेपो रेट, 10 साल या उससे अधिक अवधि वाले बॉन्ड पर यील्ड और बैंक के अन्य खर्च के आधार पर तय किया जाता है। बॉन्ड पर यील्ड 6.75 फीसदी है। ऐसे में बैंक सिर्फ 1.25 फीसदी ऊंचे ब्याज पर आपको कर्ज दे रहे हैं। यदि बॉन्ड पर यील्ड घटे तो बैंक से मिलने वाला कर्ज और सस्ता हो सकता है।
  • नए बॉन्ड आज की दरों पर जारी किए जाएंगे जिसमें कम रिटर्न मिलेगा। ऐसी स्थिति में पुराने बॉन्ड की मांग ज्यादा और आपूर्ति कम होने से उसपर यील्ड बढ़ जाती है। लेकिन जब वैसे बॉन्ड को केन्द्रीय बैंक बड़ी मात्रा में खरीदने का फैसला करता है तो बॉन्ड की कीमत थोड़ी जरूर बढ़ जाती है लेकिन यील्ड घट जाता है। इससे लंबी अवधि के बॉन्ड कम आकर्षक हो जाते हैं जिसकी वजह से कर्ज की दरें भी घट जाती हैं।

इक्रा, केयर और इंडिया रेटिंग्स एण्ड रिसर्च पर जुर्माना

  • पूंजी बाजार नियामक संस्था सेबी ने लापवाही बरतने वाली तीन रेटिंग एजेंसियों पर बड़ी कार्रवाई की है। सेबी ने भुगतान संकट से जूझ रही आईएल एण्ड एफएस (IL &FS) कंपनी के मामले में उसके गैर- परिवर्तनीय डिबेंचर को क्रेडिट रेटिंग जारी करते समय लापरवाही बरतने को लेकर इक्रा, केयर और इंडिया रेटिंग्स एण्ड रिसर्च प्रत्येक पर 25 लाख रुपये का जुर्माना लगा दिया है।

पृष्टभूमि

  • सेबी ने कहा है कि आईएलएफएस की ओर से भुगतान में चूक की स्थिति रेटिंग एजेंसियों के ढुलमुल रवैये, लापरवाही तथा ढिलाई की वजह से उत्पन्न हुई। नियामक ने तीनों रेटिंग एजेंसियों के लिये अलग अलग आदेश जारी किए हैं और उनमें एक जैसी शब्दावली का इस्तेमाल करते हुये प्रत्येक पर 25 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। आईएलएण्ड एफएस और उसकी सहायत कंपनी आईएलएण्डएफएस फाइनेंसियल सविर्सिज के उनके वाणिज्यिक पत्रों के ब्याज भुगतान में असफल रहने से यह मामला जुड़ा है।
  • यह कंपनियां अपने वाणिज्यिक पत्र, अंतर कंपनी जमा पूंजी और उनके गैर-परिवर्तनीय डिबेंचर पर ब्याज के भुगतान में असफल रही। आईएलएण्ड एफएस के संकट का मामला पिछले साल सितंबर में सामने आया। उसके बाद सरकार ने कंपनी के बोर्ड को बर्खास्त कर उसमें नया बोर्ड बिठा दिया। तब से ही यह कंपनी और इसकी इकाइयां नियामकीय जांच के घेरे में हैं।

रिपोर्ट ऑन ट्रेंड एंड प्रोग्रेस ऑफ बैंकिंग इन इंडिया: रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया

  • हाल ही में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के द्वारा रिपोर्ट ऑन ट्रेंड एंड प्रोग्रेस ऑफ बैंकिंग इन इंडिया जारी की गई।

रिपोर्ट के मुख्य बिंदु

  • बैंकों की फाइनैंशल पोजिशन लगातार मजबूत हो रही है। बीते 7 सालों में ऐसा पहली बार हुआ है कि बैंकों के बैड लोन यानी एनपीए में कमी आई है। सभी कमर्शल बैंकों का नेट NPA वित्त वर्ष 2019 में घटकर 3.7% रह गया जो वित्त वर्ष 2018 में 6% था। वहीं, सरकारी बैंकों के विलय और नॉन-बैंकिंग फाइनैंस कंपनियों में बना स्ट्रेस कम होने से सिस्टम में लोन फ्लो बढ़ेगा। हालाँकि घरेलू मांग में सुस्ती और कंपनियों की तरफ से अपनी बैलेंस शीट पर कर्ज का बोझ कम करने की कवायद तेज रिकवरी की राह में रोड़ा बन रही हैं।
  • रिपोर्ट ऑन ट्रेंड ऐंड प्रोग्रेस ऑफ बैंकिंग इन इंडिया के मुताबिक, 'पब्लिक सेक्टर बैंकों के मर्जर के सरकार के फैसले से इंडियन बैंकिंग सेक्टर का हुलिया बदल सकता है। लोन की क्वॉलिटी में सुधार होने, कैपिटल बेस में मजबूती आने और दोबारा प्रॉफिटेबल होने से बैंकिंग सेक्टर में धीरे-धीरे टर्नअराउंड हो रहा है।' RBI की रिपोर्ट ऐसे समय आई है, जब लेंडर्स लोन बांटने में ज्यादा सावधानी बरतने लगे हैं और डिफॉल्ट के डर से NBFC के लिए लोन बांटने के मौके घटे हैं।
  • डिमांड कमजोर होने और फाइनैंशल इंस्टीट्यूशंस की हिचकिचाहट के चलते इकनॉमिक ग्रोथ छह साल के निचले स्तर पर आ गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, 'मैक्रोइकनॉमिक सिचुएशन में हो रहे बदलाव के बीच, खासतौर पर डोमेस्टिक इकनॉमिक ऐक्टिविटी की रफ्तार में आई कमी चुनौतीपूर्ण माहौल बना रही है, क्योंकि लोन बांटने में बैंकों के ज्यादा सावधानी बरतने से उस समय लोन की मांग में भारी कमी आई है, जब कंपनियां अपनी बैलेंसशीट से कर्ज का बोझ घटाने में जुटी हैं।'
  • पब्लिक सेक्टर बैंकों का बैड लोन बढ़ने के चलते पिछले कुछ वर्षों में सरकार ने उनमें दो लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की पूंजी डाली है ताकि वे अपनी बैलेंसशीट पर लॉस दिखाते हुए फिर लोन बांटना शुरू करें। हालांकि बहुत से बैंकों ने लोन बांटने को लेकर सावधानी बढ़ा दी है। वे प्रॉजेक्ट्स के लिए लोन बांटने में हिचकिचा रहे हैं और उन्होंने रिटेल क्लाइंट्स को ज्यादा होम लोन और कार लोन बांटना शुरू कर दिया है।
  • सभी पब्लिक सेक्टर बैंकों का नेट NPA वित्त वर्ष 2019 में घटकर 3.7 पर्सेंट रह गया जो वित्त वर्ष 2018 में 6 पर्सेंट था। RBI अपनी रिपोर्ट ट्रेंड ऐंड प्रोग्रेस ऑफ बैंकिंग 2018-19 में लिखता है, 'सभी बैंकों का ग्रॉस एनपीए रेश्यो लगातार सात साल बढ़ने के बाद वित्त वर्ष 2019 में गिरा क्योंकि बैड लोन का रिकग्निशन पूरा होने के करीब पहुंच गया।' रिपोर्ट के मुताबिक बैंकों के लोन की क्वॉलिटी में सुधार को पब्लिक सेक्टर बैंकों से बढ़ावा मिला है जिनके ग्रॉस NPA (GNPA) और नेट NPA रेश्यो में गिरावट आई है।

RBI ने लॉन्च किया प्रीपेड पेमेंट इंस्ट्रूमेंट (पीपीआई)

  • डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा देने के लिए छोटे मूल्य के पेमेंट गटवे के रूप में काम करने वाले 'सेमी क्लोज्ड प्रीपेड पेमेंट' (पीपीआई) उत्पाद लॉन्च किया गया है। रिजर्व बैंक ने इसे मंगलवार को पेश किया। इससे 10,000 रुपये तक के वस्तुओं को खरीदने के साथ इतने मूल्य तक के ही सेवाओं का लाभ लिया जा सकता है। इस उत्पाद में बैंक खाते से पैसा डाल सकते हैं। यह कार्ड या इलेक्ट्रॉनिक रूप में हो सकता है। आरबीआई ने एक नोटिफिकेशन में कहा, 'छोटे मूल्य के डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा देने और ग्राहकों की सुविधा के लिए नए प्रकार के सेमी-क्लोज्ड पीपीआई पेश करने का फैसला लिया गया है।' फिलहाल तीन प्रकार के पीपीआई लॉन्च किया गया है जिसमें क्लोज्ड सिस्टम, सेमी क्लोज्ड ओर ओपन पीपीआई हैं।

क्लोज्ड पीपीआई क्या है?

  • इसमें केवल वस्तु और सेवाओं की खरीद की जा सकती है, नकद निकासी नहीं कर सकते हैं। न ही इसमें किसी थर्ड पार्टी को पेमेंट किया जा सकता है।

सेमी क्लोज्ड?

  • इस सुविधा में वस्तुओं और सेवाओं की खरीद के साथ पैसे भेजने की सुविधा होती है।

ओपन पीपीआई

  • इस सुविधा में अन्य सुविधाओं के साथ नकद निकासी की सुविधा भी होती है।
  • इस तरह के उत्पाद बैंक और गैर-बैंकिंग इकाइयां जारी करेंगी। इसके लिए संबंधित ग्राहकों से न्यूनतम जानकारी लेने के बाद इसे जारी किया जाएगा। न्यूनतम ब्योरे में एक बार इस्तेमाल होने वाला (वन टाइम पिन-ओटीपी) पिन के साथ सत्यापित मोबाइल नंबर और नाम की घोषणा और विशिष्ट पहचान संख्या शामिल हैं।
  • आरबीआई के मुताबिक, इस पीपीआई में पैसे भरे जा सकते हैं और इसे कार्ड या इलेक्ट्रानिक रूप में जारी किया जा सकता है। इसमें पैसा बैंक खाते से ही डाले जा सकेंगे। किसी एक महीने में इसमें 10,000 रुपये से अधिक नहीं भरा जा सकेगा। एक वित्त वर्ष में यह 1,20,000 रुपये से अधिक नहीं होगी। इस प्रकार के पीपीआई का उपयोग केवल वस्तु और सेवाओं की खरीद में किया जा सकेगा। पैसे भेजने में इसका उपयोग नहीं होगा।

:: विज्ञान और प्रौद्योगिकी ::

मिग-27

  • कभी भारतीय वायुसेना की ताकत रहे और कारगिल युद्ध में पाकिस्तान को मुहतोड़ जवाब देने वाला मिग-27 लड़ाकू विमान शुक्रवार को जोधपुर एयरबेस से आखिरी उड़ान भरा। इस तरह से आज मिग-27 की आखिरी विदाई हो गई। कारगिल युद्ध के बाद इन विमानों को ‘बहादुर’ उपनाम दिया गया था। मिग-27 विमानों की खरीद रुस से 80 के दशक में की गई थी। पुराने पड़ने के कारण पिछले दो दशकों में करीब एक दर्जन मिग-27 हादसे के शिकार भी हुए हैं। यही मुख्य वजह रही की इस लड़ाकू विमान को हाटने के लिए।

विशेषता

  • 1700 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ान भरने में सक्षम
  • एक साथ चार हजार किलो के हथियार ले जा सकता था
  • 780 किलोमीटर तक लक्ष्य भेदने की क्षमता थी मिग-27 विमान की
  • हवा से जमीन पर हमला करने का बेहतरीन विमान माना जाता रहा है

पृष्टभूमि

  • इस विमान का इंजन आर-29 हमेशा से परेशानी का सबब बना रहा है। इंजन की तकनीकी खामी कभी पूरी तरह से दूर नहीं की जा सकी। यही कारण रहा है कि इसके दुर्घटना होने की घटनाएं बहुत अधिक हुईं। पिछले 20 साल में हर साल दो विमान हादसे का शिकार हुए।

उल्कापिंड CH59

  • नासा के उल्कापिंड ट्रैकर्स ने खुलासा किया है कि गुरुवार (26 दिसंबर, 2019) को CH59 के रूप में पहचाने जाने वाले एक विशाल उल्कापिंड पृथ्वी के करीब आ जाएगा। लगभग 2,000 फीट की दूरी पर, उल्कापिंड CH59 27,450mph की गति से पृथ्वी की ओर बढ़ रहा है और 12.54 PM (IST) पर अंतरिक्ष की चट्टान हमारे ग्रह के सबसे करीब होगी। उल्कापिंड CH59, अपने निकटतम दृष्टिकोण के दौरान, लगभग 0.04874 खगोलीय इकाइयों (au) की दूरी से पृथ्वी का रुख करेगा। एक खगोलीय इकाई हमारे ग्रह से सूर्य की दूरी या लगभग 93 मिलियन मील (149.6 मिलियन किमी) है।
  • उल्कापिंड CH59 आकार में चीन के कैंटन टॉवर और शिकागो, अमेरिका में सियर्स टॉवर के बराबर है। इसका मतलब है कि उल्कापिंड पृथ्वी पर सभी जीवन को समाप्त करने के लिए पर्याप्त नहीं है। यहां यह उल्लेखनीय है कि पृथ्वी पर उल्कापिंड के करीब पहुंचने के बाद, नासा CH59 10 सितंबर, 2020 को शुक्र के करीब से गुजर जाएगा। उल्कापिंड मार्च 2021, दिसंबर 2023 और मार्च 2024 में फिर से पृथ्वी पर आएगा।

उल्कापिंड

  • उल्कापिंड़ छोटी-छोटी चट्टानी पदार्थ हैं जो सूर्य की परिक्रमा करते रहते हैं। हमारे ग्रह के गुरुत्वाकर्षण बल के रूप में उल्कापिंड अक्सर पृथ्वी के पास का दौरा करते हैं। उल्कापिंड के कारण सूनामी, लहरें और तेज हवाएं ला सकते हैं जो विनाशकारी हो सकती हैं।
  • उल्कापिंड़ अगर पृथ्वी से टकराते हैं, तो सुनामी, बड़ी लहरें और हवाएं ला सकते हैं जो विनाशकारी हो सकते हैं। दरअसल, अंतरिक्ष की ये चट्टानें गुरुत्वाकर्षण बलों के कारण पृथ्वी की ओर आती हैं जो उन्हें प्रभावित करती हैं। ऐसा कहा जाता है कि एक दिन पृथ्वी पर सारा जीवन विलुप्त हो जाएगा। न केवल जीवन, बल्कि पृथ्वी भी किसी दिन विलुप्त हो जाएगी। हालांकि, एक कार के आकार का उल्कापिंड पृथ्वी के वातावरण में वर्ष में लगभग एक बार घूमता है।
  • हाल के समय में, 2019, 2019 OD, 2015 HM10, 2019 OE, 2019 NN3, 2019 MB4, 2019 MT2, 2006 QV89, 2016 NO56M, RF12 सहित कई विशाल उल्कापिंडों, और दूसरों ने पृथ्वी की ओर रुख किया। सौभाग्य से ये हमारे पृथ्वी से नहीं टकराए

टिश्यू कल्चर से विकसित हुई गन्ने की नई प्रजाति

  • गन्ने की तीन किस्में कोसा 13235, कोसा 10239 और कोसे 13452 विकसित हुई हैं। सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि विश्वविद्यालय में गन्ने की इन प्रजातियों को टिश्यू कल्चर विधि से मल्टीप्लाई कर पौधे तैयार किए जा रहे हैं। एक गन्ने के टॉप से गन्ने के लाखों पौधे तैयार हो रहे हैं, जो पूरी तरह से रोगरहित हैं। विवि में टिश्यू कल्चर से तैयार इन गन्ने के पौधों को नवंबर 2020 से किसानों को वितरित किया जाएगा।

:: विविध ::

सुमित सांगवान

  • पूर्व एशियाई रजत पदक विजेता मुक्केबाज सुमित सांगवान पर डोप टेस्ट में नाकाम रहने के कारण राष्ट्रीय डोपिंग निरोधक एजेंसी (नाडा) ने एक साल का प्रतिबंध लगा दिया।

फनफोन तूफान

  • पूर्वी एशियाई देश फिलीपीन्‍स में मंगलवार की रात आए समुद्री तूफान फानफोन ने पूरे देश में, खासतौर से मध्‍य भाग में भारी तबाही मचाई है। 190 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आए तूफान में 20 लोग मारे गये हैं और कई लोग लापता बताए जा रहे हैं।

विराट कोहली

  • भारतीय कप्तान विराट कोहली को विजडन क्रिकेट अलमानैक ने चार अन्य के साथ दशक के सर्वश्रेष्ठ क्रिकेटरों की सूची में शामिल किया है।कोहली के अलावा दक्षिण अफ्रीका के डेल स्टेन और एबी डिवियर्स, आस्ट्रेलिया के स्टीव स्मिथ और महिला क्रिकेट की दिग्गज आलराउंडर एलिस पैरी इस सूची में शामिल हैं।

:: प्रिलिम्स बूस्टर ::

  • हाल ही में जारी हुई सुशासन सूचकांक (जीजीआई) में कौन सा राज्य अव्वल रहा? (तमिलनाडु)
  • किस संस्था के द्वारा सुशासन सूचकांक (जीजीआई) जारी किया गया? (कार्मिक मंत्रालय)
  • हाल ही में चर्चा में रही पैंगोंग झील कहां स्थित है? (लद्दाख सीमा पर)
  • दूसरे ईट राइट मेले का शुभारंभ किस स्थान पर किया गया? (नई दिल्ली)
  • ईट राइट मेले का आयोजन किस संस्था के द्वारा किया जाता है? (एफएसएसएआई- भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण)
  • हाल ही में अर्थव्यवस्था में ब्याज दरों को नीचे लाने हेतु रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के द्वारा कौन से कार्यक्रम की शुरुआत की गई है? (ऑपरेशन ट्विस्ट)
  • हाल ही में किस संस्था के द्वारा इक्रा, केयर और इंडिया रेटिंग्स एण्ड रिसर्च रेटिंग एजेंसियों पर जुर्माना लगाया गया? (भारतीय प्रतिभूति विनिमय बोर्ड-सेबी)
  • हाल ही में किस संस्था के द्वारा रिपोर्ट ऑन ट्रेंड एंड प्रोग्रेस ऑफ बैंकिंग इन इंडिया जारी की गई? (रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया)
  • रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के द्वारा किस सीमा की लेनदेन हेतु हाल ही में प्रीपेड पेमेंट इंस्ट्रूमेंट (पीपीआई) जारी किया गया है? (10,000 रुपये)
  • हाल ही में किस लड़ाकू विमान को भारतीय वायुसेना ने सेवा से मुक्त कर दिया? (मिग 27)
  • हाल ही में नासा के द्वारा किस उल्का पिंड के पृथ्वी से टकराने की आशंका व्यक्त की गई है? (CH59)
  • हाल ही में कृषि वैज्ञानिकों के द्वारा गन्ने की कौन सी नई प्रजातियों का विकास किया गया है? (कोसा 13235, कोसा 10239 और कोसे 13452)
  • हाल ही में राष्ट्रीय डोपिंग निरोधक एजेंसी (नाडा) के द्वारा किस भारतीय मुक्केबाज को डोप टेस्ट में नाकाम रहने पर 1 साल के लिए प्रतिबंध लगाया गया है? (सुमित सांगवान)
  • हाल ही में कौन सा देश फनफोन तूफान से प्रभावित हुआ? (फिलीपींस)
  • किस भारतीय खिलाड़ी को विजडन क्रिकेट अलमानैक ने दशक के सर्वश्रेष्ठ क्रिकेटरों की सूची में शामिल किया गया है? (विराट कोहली)

स्रोत साभार: Dainik Jagran (Rashtriya Sanskaran), Dainik Bhaskar (Rashtriya Sanskaran), Rashtriya Sahara (Rashtriya Sanskaran) Hindustan Dainik (Delhi), Nai Duniya, Hindustan Times, The Hindu, BBC Portal, The Economic Times (Hindi & English), PTI, PIB

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