(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (26 मई 2020)

दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर


(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (26 मई 2020)


:: राष्ट्रीय समाचार ::

लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा सीमा विवाद  (kalapani Lipulekh and Limpiyadhura border issue)

  • भारत के साथ सीमा विवाद के मध्य कुछ दिनों पहले नेपाल के कैबिनेट ने एक नया राजनीतिक मानचित्र को अपनाया है जिसमें लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा को नेपाली क्षेत्र में दर्शाया गया है। नेपाल की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी के सांसदों ने कालापानी, लिम्पियाधुरा और लिपुलेख को भारत से नेपाल की सीमा में लौटाने की मांग करते हुए संसद में विशेष प्रस्ताव भी रखा था।
  • नेपाल के विदेश मंत्री प्रदीप कुमार ग्यावली ने कहा कि उनके देश का भारत के साथ विशिष्ट व करीबी रिश्ता है और उन्हें विश्वास है कि दोनों पड़ोसियों के बीच कालापानी का मुद्दा बातचीत के जरिये सुलझा लिया जाएगा।

पृष्ठभूमि

  • कुछ दिनों पहले भारत द्वारा 17000 फुट की ऊंचाई पर स्थित लिपूलेख दर्रे को उत्तराखंड के धारचूला से जोड़ने वाली 80 किलोमीटर लंबें रणनीति सर्कुलर लिंक रोड का उद्घाटन किया गया है। जिसको लेकर नेपाल द्वारा आपत्ति जताई गयी थी।

लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा की भौगोलिक अवस्थिति और महत्व

  • लिपुलेख दर्रा कालापानी के निकट सबसे पश्चिमी क्षेत्र है जिसके जरिये प्राचीन काल से 1962 तक व्यापार होता था। 1962 के भारत-चीन युद्ध उपरांत दर्रा बंद कर दिया गया था। इसके अलावा इस दर्रे का प्रयोग कैलाश मानसरोवर यात्रा में भी इस्तेमाल होता रहा है। पुनः1991-92 में में लिपुलेख दर्रे को व्यापारिक मार्ग हेतु खोला गया।
  • लिम्पियाधुरा, कालापानी के सुदूर उत्तर पश्चिम में स्थित एक महत्वपूर्ण इलाका है। आपको बता दें काली नदी के कई उद्गम स्रोत है जिसमें दो प्रमुख धारा हैं। इसमें जहां एक प्रमुख धारा का उद्गम स्थल कालापानी है तो वही दूसरी प्रमुख धारा का एक स्रोत लिम्पियाधुरा है जिसके आधार पर नेपाल क्षेत्र पर दावा प्रस्तुत करता है। इसके साथ ही इस क्षेत्र में लिम्पियाधुरा दर्रा भी स्थित है जिसके बारे में मान्यता है कि प्राचीन काल में इस रास्ते से तिब्बत से व्यापार होता था।
  • काली नदी का उद्गम स्थल वाले कालापानी 372 वर्ग किलोमीटर में फैला एक मत्वपूर्ण सामरिक इलाका है। इसे भारत-चीन और नेपाल का ट्राई जंक्शन भी कहा जाता है। भारत इसे जहाँ उत्तराखंड के पिथौरागढ़ का हिस्सा मानता वही नेपाल इसे दार्चुला जिले का हिस्सा बताता है।
  • विगत कुछ समय से भारत चीन सीमा पर चीन के द्वारा काफी आक्रामक रवैया अपनाया जा रहा है। इसे हम डोकलाम, पैंगोंग झील, गलवान घाटी इत्यादि के संदर्भ में समझ सकते हैं।चीन हिमालय क्षेत्र में प्रभाव बनाने के लिए अंधाधुंध निर्माण कार्य कर रोड समेत अन्य अवसंरचना का निर्माण कर रहा है, जिससे यहाँ चीनी सेना की पकड़ बहुत मजबूत हो गई है। इसके साथ ही चीन अपनी स्थिति को सुदृढ़ करने के लिए कई सैन्य बंकर समेत अपने लड़ाकू विमान की तैनाती के लिए कई सारे एयर स्ट्रिप भी बना चुका है। चीन-नेपाल के बढ़ते प्रगाढ़ संबंध के बीच चीनी सेना पर नजर रखने एवं सैन्य संतुलन स्थापित करने के लिए इस क्षेत्र का बड़ा ही रणनीतिक महत्व है। इस क्षेत्र से न केवल चीन की गतिविधियों को नजर रखी जा सकती है बल्कि चीनी गतिरोध का माकूल जवाब भी दिया जा सकता है। विगत कुछ वर्षों से भारत लगातार सीमा पर अपनी अवसंरचना को मजबूत कर रहा है जिसमें मुख्य सड़कें समेत एयर स्ट्रिप भी बनाना शामिल है।

क्या है नेपाल का दृष्टिकोण?

  • नेपाल सुगौली समझौते (1816) के तहत काली नदी के पूर्वी क्षेत्र, लिंपियादुरा, कालापानी और लिपुलेख पर अपना दावा करता है। इसी आधार पर नेपाल भारतीय उपस्थिति को अवैध बताता है। लिपूलेख दर्रे-धारचूला लिंक रोड के साथ-साथ जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन कानून के उपरान्त जारी नए राजनीतिक नक्शा पर भी नेपाल ने आपत्ति जताई थी।

क्या है सुगौली संधि?

  • नेपाल और ब्रिटिश इंडिया के बीच 1816 में सुगौली संधि हुई थी। इस संधि में तहत काली(महाकाली) नदी के पूरब का इलाका नेपाल का माना गया। इसके अलावा सुगौली संधि के तहत ही गंडक नदी को भारत-नेपाल के बीच की सीमा माना गया है। जहाँ काली नदी के कई धाराओं होने के इसके अलग-अलग उदगम होने से सीमा विवाद को जन्म देती है वही गंडक नदी की धारा का प्रवाह बदलने से भारत और नेपाल सीमा को बढ़ा देती है।उदाहरण के लिए महाकाली नदी दो धाराओं से मिलकर बनती है। जहां इसकी पहली धारा लिपुलेख के उत्तर-पश्चिम में स्थित लिम्पियाधुरा से निकलती है, वहीं इसकी दूसरी धारा लिपुलेख के दक्षिण से निकलती है। नेपाल लिम्पियाधुरा से निकलने वाली धारा को महाकाली नदी का स्त्रोत मानता है और कालापानी, लिम्पियाधुरा और लिपुलेख को अपना हिस्सा बताता है। दूसरी ओर भारत लिपुलेख के दक्षिण से निकलने वाली धारा को इसकी मुख्यधारा मानता है।

लद्दाख में भारत चीन स्टैंरड-ऑफ

  • लद्दाख में लाइन ऑफ एक्चुलअल कंट्रोल (LAC) पर तनाव कम होता नहीं दिख रहा। चीन और भारत के सैनिकों के बीच हालात वैसे ही बने हुए हैं। सेना ने बड़ी तेजी से सैनिकों और जरूरी मैटीरियल्सह फॉरवर्ड पोजिशंस पर पहुंचाने शुरू कर दिए हैं। चीन ने पैंगोंग झील के पास टेंट लगाए तो भारत ने भी अपनी फ़ौज को वही डेरा जमा दिया है। सरकार ने साफ कर दिया है कि बॉर्डर पर जारी डेवलपमेंट का कोई काम इस तनाव की वजह से नहीं रोका जाएगा। संकेत यही हैं कि भारत लंबे स्टैंाड-ऑफ के लिए तैयार है। डिप्लोममेटिक और ग्राउंड लेवल पर मिलिट्री में बातचीत हो रही है मगर इस तनाव का कोई हल नहीं निकलता दिख रहा।

क्यों आक्रामक है चीन?

  • गलवां घाटी में चीन आक्रामक इसलिए है क्योंककि उसके पास भारत के कई डिफेंस रिलेटेड प्रोजेक्ट्स हैं। धारचुक से श्यो क होते हुए दौलत बेग ओल्डीआ के लिए रोड बनी है। दौलत बेग ओल्डीा में एंडवास्डल लैंडिंग ग्राउंड (ALG) है जो दुनिया की सबसे ऊंची एयरस्ट्रिप है। यहां इंडिया C-130 ग्लो‍बमास्टसर एयरक्राफ्ट उतार सकता है। यानी भारत के लिए यह रणनीतिक रूप से बेहद अहम है। यह रोड भारत को काराकोरम हाइवे का भी एक्से0स देती है जिसपर चीन को दिक्केत है। रोड 2019 में पूरी हो चुकी है।

स्टैंहड-ऑफ के फ्लैश पाइंट

  • लद्दाख में LAC पर दो जगह ऐक्श न पॉइंट हैं। 5 मई को पूर्वी लद्दाख में पैंगोंग लेक के पास करीब 250 चीनी सैनिक और भारतीय जवान आपस में भिड़ गए थे। इसमें दोनों ओर से करीब 100 सैनिक घायल हुए। झील का उत्त्री किनारा किसी हथेली जैसा है। इसमें 8 हिस्सेम हैं जिन्हें आर्मी 'फिंगर्स' कहती है। भारत के मुताबिक, LAC 8वीं फिंगर से शुरू होती है जबकि चीन कहना है कि दूसरी से। भारत चौथी फिंगर तक कंट्रोल करता है। गलवां में घुसपैठ भारत के लिए नई थी। यहां से चाइनीज क्लेभम लाइन गुजरती है। चीन के सैनिक यहीं पर मौजूद हैं।

क्यों जरूरी है स्टैं ड-ऑफ?

  • भारतीय सुरक्षा विशेषज्ञ बताते हैं कि भारत को चीन के साथ बॉर्डर पर और तनाव के लिए तैयार रहना चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंाकि चीन ने बॉर्डर पर जैसा डेवलपमेंट किया है, भारत उसी रास्ते पर है। पिछले चार साल में भारत ने पूरे LAC पर सड़कें और लैंडिंग स्ट्रिप बिछाने का काम किया है। इससे भारतीय सैनिकों का LAC पहुंचना बेहद आसान हो गया है। अब चीन को उसकी नामाकूल हरकत का जवाब फौरन मिल जाता है। चीन लगातार पैट्रोल करता रहता है, भारत ने उसका विरोध तेज कर दिया है। इस वजह से झड़पों की संख्याज भी बढ़ी है।

क्या पहले भी हुए है स्टैं ड-ऑफ?

  • लद्दाख में जो कुछ हो रहा है, उसमें से एक चीज 2017 में हुए डोकलाम विवाद के दौरान भी हुई थी। तब भी एग्रेशन चीन ने दिखाया था और अब भी ड्रैगन ही जबर्दस्ती पर उतारू है। हां एक बड़ी बात जो दोनों घटनाओं में एकदम अलग है, वो ये ऐसे इलाके में हो रहा है जहां अक्‍सर झड़पें होती रहती हैं। डोकलाम ट्राई-जंक्शघन हैं जहां आमतौर पर इतना तनाव देखने को नहीं मिलता था।

कम्युनिटी बेस्ड मैनेजमेंट ऑफ एक्यूट मैलन्यूट्रिशन (सीमैम) एसोसिएशन ऑफ इंडिया

चर्चा में क्यों?

  • भारत में बच्चों में सीवियर एक्यूट मैलन्यूट्रिशन यानी गंभीर कुपोषण के मामलों से निपटने के लिए देश में एक नए इंडस्ट्री ग्रुप, कम्युनिटी बेस्ड मैनेजमेंट ऑफ एक्यूट मैलन्यूट्रिशन (सीमैम) एसोसिएशन ऑफ इंडिया का गठन किया गया है। इस एसोसियेशन का उद्देश्य कम्यूनिटी स्तर पर रेडी टू यूज़ थेराप्युटिक फूड (आरयूटीएफ) को प्रोत्साहित करते हुए गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों को खतरे से बाहर निकालने की प्रक्रिया को तेज करना है।
  • एसोसिएशन के मुताबिक, घर के खाने के साथ एक इमरजेंसी कदम के तौर पर चिकित्सकीय सप्लीमेंट देने से अस्पताल में भर्ती किए जाने वाले कुपोषित बच्चों की संख्या में अच्छी-खासी कमी लाई जा सकती है और 90 प्रतिशत गम्भीर रूप से कुपोषित बच्चों को समुदाय के स्तर पर ही ठीक किया जा सकता है।

भारत में कुपोषण की स्थिति

  • यूनीसेफ और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा कराए गए एक व्यापक राष्ट्रीय पोषण सर्वे (2016-18) के मुताबिक, बच्चों में गंभीर रूप से कुपोषित के होने की आशंका 4.9 प्रतिशत है, यानी भारत में 5 साल से कम उम्र वर्ग हर 20 में से एक बच्चा गंभीर कुपोषण का शिकार है। संख्या के हिसाब से देखें तो 60 लाख से ज्यादा बच्चे गंभीर कुपोषण से प्रभावित हैं, जो संभवतः दुनिया में सबसे ज्यादा है। यह अनुमान भी शायद कम ही है, क्योंकि इंडियन अकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स के अनुमान के हिसाब से ऐसे बच्चों की संख्या 80 लाख है।

कुपोषण क्या है?

  • व्यक्ति के अच्छे स्वास्थ के लिए संतुलित मात्रा में पोषक तत्वों और ऊर्जा की आवश्यकता होती हैं. संतुलित आहार में जो आवश्यक तत्व होते हैं उनके नाम है : प्रोटीन, वसा, कार्बोहायड्रेट, विटामिन, फाइबर और जल. यह आवश्यकता उम्र, लिंग और जीवन शैली पर निर्भर करती हैं। कम या ज्यादा मात्रा में इन तत्वों को लेने से स्वास्थ्य पर बूरा प्रभाव पड़ सकता हैं|
  • जब बच्चों को लगातार संतुलित पोषण वाला उतना भोजन नहीं मिलता है,जितना उन्हें मिलना चाहिए,तो कुपोषण की स्थिति बनती है | कई मर्तबा उचित देखभाल न मिलने ,प्राकृतिक आपदा,पलायन और बीमारी के कारण भी बच्चे कुपोषित हो जाते हैं| कुपोषण 2 कारण से हो सकता हैं :- पोषक तत्वों की कमी से या अधिकता से जिन्हें अल्प या अति पोषण कह सकते हैं|

:: अंतर्राष्ट्रीय समाचार ::

इस्लामी सहयोग संगठन (OIC)

चर्चा में क्यों?

  • संयुक्त राष्ट्र में इस्लामिक देशों के संगठन इस्लामी सहयोग संगठन (ओआइसी) की वर्चुअल बैठक में पाकिस्तान ने इस्लामोफोबिया के आरोप पर भारत को घेरने की कोशिश की, लेकिन ओआइसी के कई सदस्यों देशों सऊदी अरब, यूएई और ओमान ने भारत का साथ दिया।
  • ओआइसी की वर्चुअल बैठक में संयुक्तै राष्ट्रम में पाकिस्ताकन के राजदूत मुनीर अकरम ने दावा किया कि भारत में इस्लामोफोबिया को बढ़ावा दिया जा रहा है।

मालदीव का निर्णायक रुख

  • चीन के प्रभाव से विगत कुछ वर्षों से भारत मालदीव संबंधों में गतिरोध कायम थे लेकिन मालदीव का रुख भारत के साथ पुनः संबंधों की मधुरता को प्रदर्शित करता है। यूएन में मालदीव की स्थायी प्रतिनिधि थिलमीजा हुसैन ने कहा था कि भारत के संदर्भ में इस्लामोबिया का आरोप लगाना तथ्यात्मक रूप से गलत होगा। भारत, दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र और बहु-सांस्कृतिक समाज है। यहां 20 करोड़ से अधिक मुसलमान रह रहे हैं। ऐसे में इस्लामोफोबिया का आरोप लगाना तथ्यात्मक रूप से गलत होगा। उन्होंने कहा कि यह दक्षिण एशियाई क्षेत्र में धार्मिक सद्भाव के लिए ऐसा करना हानिकारक होगा। इस्लाम भारत में सदियों से मौजूद है और यह देश का 14.2 फीसद आबादी के साथ भारत में दूसरा सबसे बड़ा धर्म है।

क्या है OIC?

  • OIC का पूरा नाम इस्लामी सहयोग संगठन है (Organisation of Islamic Cooperation)
  • OIC का इससे पहले नाम Organisation of Islamic Countries था
  • OIC मुस्लिम दुनिया की आवाज़ का प्रतिन्धित्व करने के लिए जाना जाता है
  • संयुक्त राष्ट्र के बाद ये दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा संगठन है
  • OIC के कुल 57 सदस्य देश हैं, जिनमें क़रीब 47 देश मुस्लिम बहुल और बाकी 10 देशों में मुस्लिम अल्पसंख्यक हैं
  • OIC का मुख्यालय सऊदी अरब के जेद्दाह में है
  • OIC में शामिल होने के लिए किसी भी देश को मुस्लिम बाहुल्य देश होना ज़रूरी होता है
  • OIC कम मुस्लिम आबादी वाले देशों को पर्यवेक्षक के रूप में शामिल हो सकते हैं
  • हालांकि इंडोनेशिया और पाकिस्तान के बाद तीसरे सबसे बड़ा मुस्लिम आबादी वाले देश भारत को OIC में पर्यवेक्षक का दर्जा नहीं मिला हुआ है, जबकि रूस थाईलैंड जैसे कम मुस्लिम आबादी वाले देशों को OIC पर्यवेक्षक का दर्ज़ा मिला हुआ है।
  • OIC में UAE और सऊदी अरब देश मुख्य भूमिका में है

:: राजव्यवस्था ::

पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन पर संसद की स्थायी समिति

चर्चा में क्यों?

  • कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने पर्यावरण एवं वन मंत्रालय की विभिन्न समितियों द्वारा लॉकडाउन के दौरान परियोजनाओं को मंजूरी दिये जाने पर रविवार को कड़ी आपत्ति जताई और इनकी समीक्षा करने तथा इन पर रोक लगाने की मांग की।
  • पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन पर संसद की स्थायी समिति के अध्यक्ष रमेश ने पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर को पत्र लिखकर मामले में गंभीर चिंता प्रकट करते हुए आपत्ति व्यक्त की है। संसदीय समिति की अगली बैठक में इस विषय को उठाया जाएगा।

पृष्ठभूमि

  • पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की अनेक समितियों ने लॉकडाउन के दौरान जैवविविधता वाले जंगलों में 30 परियोजनाओं को मंजूरी दी है और उन पर चर्चा की है।

क्या होती है संसदीय समितियां

  • आधुनिक युग में संसद को न केवल विभिन्नु और जटि‍ल प्रकार का, बल्किा मात्रा में भी अत्य धिक कार्य करना पड़ता है। संसद के पास इस कार्य को नि‍पटाने के लि‍ए सीमित समय होता है। इसलिए संसद उन सभी विधायी तथा अन्य मामलों पर, जो उसके समक्ष आते हैं, गहराई के साथ विचार नहीं कर सकती। अत: संसद का बहुत सा काम सभा की समितियों द्वारा निपटाया जाता है, जिन्हें संसदीय समितियां कहते हैं। संसदीय समिति से तात्प र्य उस समिति से है, जो सभा द्वारा नियुक्तम या निर्वाचित की जाती है अथवा अध्य क्ष द्वारा नाम-निर्देशित की जाती है और अध्येक्ष के निदेशानुसार कार्य करती है तथा अपना प्रतिवेदन सभा को या अध्यथक्ष को प्रस्तुनत करती है और समिति का सचिवालय लोक सभा सचिवालय द्वारा उपलब्घा कराया जाता है।
  • अपनी प्रकृति के अनुसार संसदीय समितियां दो प्रकार की होती हैं: स्थाेयी समितियां और तदर्थ समितियां। स्थातयी समितियां स्थाअयी एवं नियमित समितियां हैं जिनका गठन समय-समय पर संसद के अधिनियम के उपबंधों अथवा लोक सभा के प्रक्रिया तथा कार्य-संचालन नियम के अनुसरण में किया जाता है। इन समितियों का कार्य अनवरत प्रकृति का होता है। वित्तीवय समितियां, विभागों से संबद्ध स्थाकयी समितियां (डीआरएससी) तथा कुछ अन्यि समितियां स्थांयी समितियों की श्रेणी के अंतर्गत आती हैं। तदर्थ समितियां किसी विशिष्टध प्रयोजन के लिए नियुक्त( की जाती हैं और जब वे अपना काम समाप्तस कर लेती हैं तथा अपना प्रतिवेदन प्रस्तुसत कर देती हैं, तब उनका अस्तिीत्व समाप्तप हो जाता है। प्रमुख तदर्थ समितियां विधेयकों संबंधी प्रवर तथा संयुक्तन समितियां हैं। रेल अभिसमय समिति, संसद भवन परिसर में खाद्य प्रबंधन संबंधी संयुक्तत समिति इत्यािदि‍ भी तदर्थ समितियों की श्रेणी में आती हैं।
  • मोटे तौर पर संसदीय समितियों के नि‍म्नसलि‍खि‍त श्रेणियों में रखा जाता है:
  1. वित्तीसय समितियां,
  2. विभागों से संबद्ध स्था,यी समितियां,
  3. अन्यग संसदीय स्था्यी समितियां, तथा
  4. तदर्थ समितियां।

भारतीय विवाद समाधान केंद्र

  • उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश ए के सीकरी ने भारतीय विवाद समाधान केंद्र (आईडीआरसी) का उद्घाटन किया है, जो कागजरहित विवाद समाधान का माहौल मुहैया करता है। ‘‘इस मध्यस्थता समिति में उच्चतम न्यायालय, उच्च न्यायालय, जिला अदालतों के पूर्व न्यायाधीश के अलावा पूर्व नौकरशाह, चार्टर्ड अकाउंटेंट, वास्तुकार, उद्योग जगत के दिग्गज लोग आदि शामिल हैं। न्यायमूर्ति सीकरी सिंगापुर इंटरनेशनल कमर्शियल कोर्ट के अंतरराष्ट्रीय न्यायाधीश भी हैं।

:: अर्थव्यवस्था ::

न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी)

चर्चा में क्यों?

  • कृषि लागत और मूल्य आयोग ने केंद्र सरकार को आगामी खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 2-13 प्रतिशत तक बढ़ाने का सुझाव दिया है। आयोग के मुताबिक कोरोना महामारी से कृषि जिंसों की मांग घटी है। ऐसे में एमएसपी बढ़ाकर किसानों के लिए बेहतर रिटर्न पक्की की जा सकती है।

क्या है सुझाव?

  • आयोग ने सामान्य और ए ग्रेड धान की एमएसपी 53 रुपये बढ़ाकर 1,868-1,888 रुपये प्रति क्विंटल करने का सुझाव दिया है। तिल की एमएसपी में सबसे जयादा बढ़ोत्तरी की सिफारिश की गई है। इस तिलहन का समर्थन मूल्य 755 रुपये बढ़ाकर 6,695 रुपये करने का सुझाव दिया गया है। दूसरी तरफ मूंग की एमएसपी में सबसे कम बढ़ोत्तरी की सलाह दी गई है। इस दलहन की एमएसपी 146 रुपये बढ़ाकर 7,196 रुपये प्रति क्विंटल करने का सुझाव दिया गया है।
  • आयोग के पैनल ने दलहन की एमएसपी 146-300 रुपये बढ़ाने की सिफारिश की है, जबकि खरीफ तिलहन के मामले में 170--235 रुपये बढ़ोत्तरी का सुझाव दिया गया है।
  • सरकार आयात पर निर्भरता कम करने के मकसद से किसानों को तिलहन और दलहन की खेती के लिए प्रोत्साहित करने की कोशिश कर रही है। पैनल की सिफारिशें उत्पादन लागत की 1.5 गुना एमएसपी तय करने के अनुरूप हैं, जो 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य हासिल करने में सरकार की मदद करेगा। सरकार 22 खरीफ और रबी फसलों की एमएसपी तय करती है।

क्या है न्यूनतम समर्थन मूल्य ?

किसानों को कृषि उपज का उचित मूल्य दिलाने तथा किसानो से कृषि कार्यों पर भय मुक्त अधिक पूंजी लगवाने व कृषि उपज बढ़ाने का प्रोत्साहन के लिए सरकार द्वारा समय-समय पर बुवाई से पूर्व ही फसलों की उपज का एक उचित मूल्य की घोषणा करती है जिसे फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (minimum support price) कहा जाता है। न्यूनतम समर्थन मूल्य कृषि उत्पादकों के लिए एक प्रकार की बीमा कीमत होती है। इसके द्वारा उत्पादक कृषकों को भारत सरकार आश्वासन देती है कि खाद्यान्नों की कीमतें नियत कीमत से नीचे नहीं गिरने दी जाएगी। यदि कीमतें न्यूनतम समर्थन मूल्य से नीचे गिरती है तो सरकार स्वयं ही घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य पर पर ही खाद्यान्नों की क्रय कर लेगी।

कौन जारी करता है न्यूनतम समर्थन मूल्य?

  • न्यूनतम समर्थन मूल्य का निर्धारण कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (CACP-Agriculture Cost And Price Commission) द्वारा वर्ष में दो बार खरीफ एवं रबी की फसलों की बुवाई के पूर्व किया जाता है। कृषि लागत एवं मूल्य आयोग की स्थापना का मुख्य उद्देश्य किसानों को बिचौलियों के शोषण से बचाकर उनके कृषि उत्पाद को उचित मूल्य प्रदान करना है। इसकी स्थापना जनवरी 1965 में खाद्य मूल्य नीति समिति 1964 की सिफारिश पर कृषि मूल्य आयोग के रूप में हुई थी लेकिन 1985 में इस संस्था के नाम का संशोधन करते हुए इसमें 'लागत' शब्द भी जोर दिया गया जिससे 1985 के बाद इस संस्था का पूरा नाम कृषि लागत एवं मूल्य आयोग हो गया। वर्तमान में इस आयोग के द्वारा 24 कृषि फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य जारी किये जाते हैं।

:: विज्ञान और प्रौद्योगिकी ::

स्वदेशी हल्केय लड़ाकू विमान: तेजस

चर्चा में क्यों?

  • भारतीय वायु सेना तमिलनाडु के कोयंबतूर में 27 मई को अपने 18वें बेड़े की 'फ्लाइंग बुलेट' को शुरू करेगी। यह बेड़ा चौथी पीढ़ी वाले स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान यानी एलसीए तेजस से लैस होगा। भारतीय वायुसेना के चीफ ऑफ एयर स्टाफ एयर चीफ मार्शल आरकेएस भदौरिया इस फ्लाइंग बुलेट को ऑपरेशनल करेंगे। कार्यक्रम का आयोजन कोयम्बटूर के पास सुलूर एयरफोर्स स्टेशन पर होगा।
  • तेजस को उड़ाने वाली वायुसेना की यह दूसरी स्क्वाड्रन होगी। इससे पहले 45 वीं स्क्वाूड्रन ऐसा कर चुकी है। इस 18वीं स्क्वाजड्रन की स्थापना 1965 में की गई थी। यह बेड़ा पहले मिग-27 विमान उड़ा चुका है। इसका लक्ष्य वाक्य है 'तीव्र और निर्भय' के साथ... इस स्क्वाड्रन को इसी साल पहली अप्रैल को सुलूर में दोबारा शुरू किया गया था। बेड़े ने भारत और पाकिस्तान के बीच साल 1971 में हुए युद्ध में हिस्सा लिया था।

क्या है तेजस की विशेषता?

  • तेजस एक स्वदेशी चौथी पीढ़ी का टेललेस कंपाउंड डेल्टा विंग (tailless compound delta wing)लड़ाकू विमान है जिसे सरकारी विमान निर्माता कंपनी हिंदुस्तान एरोनॉटिकल्स लिमिटेड (एचएएल) द्वारा बनाया गया है। लड़ाकू विमान तेजस फ्लाई-बाय-वायर फ्लाइट कंट्रोल सिस्टम, एकीकृत डिजिटल एवियोनिक्स, मल्टीमॉड रडार से लैस है।
  • यह चौथी पीढ़ी के सुपरसोनिक लड़ाकू विमानों की सीरिज का सबसे हल्का और सबसे छोटा विमान है। हाल ही में देश में निर्मित हल्के लड़ाकू विमान तेजस के नौसैनिक संस्करण ने विमानवाहक पोत आइएनएस विक्रमादित्य के 'स्की-जंप' डेक से सफलतापूर्वक उड़ान भरी थी। विमानवाहक पोत पर तेजस की सफल लैंडिंग और टेकऑफ के साथ ही भारत उन चुनिंदा देशों के समूह में शामिल हो गया था जो ऐसे लड़ाकू विमानों की डिजाइन में सक्षम हैं और संचालन विमानवाही पोत से किया जा सकता है। तेजस हल्काि होने की वजह से तेजी दुश्मंन को छकाने में सक्षम है।

मानव रहित हेलिकॉप्टर AR500C

  • लद्दाख सीमा पर जारी तनाव के बीच चीन ने मानव रहित हेलिकॉप्टर AR500C का पहली बार सफल परीक्षण किया है। AR500C चीन द्वारा विकसित पहला मानव रहित हेलिकॉप्टर है। चीनी मीडिया के अनुसार, इस हेलिकॉप्टर को भारत से सटी सीमा पर तैनात किया जाएगा।

AR500C की विशेषता

  • चीन का सरकारी मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स के अनुसार, स्वदेशी तकनीक पर विकसित मानव रहित हेलिकॉप्टर AR500C ने हाल में ही अपनी पहली उड़ान भरी है। यह हेलिकॉप्टर टोह लेने, रेकी करने के अलावा, कम्यूनिकेशन, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर, परमाणु विकिरण का पता लगाने, ऊंचाई वाले क्षेत्रों में जंगी गतिविधि में उपयोगी साबित होगा। इस हेलिकॉप्टर का निर्माण चीन के सरकारी स्वामित्व वाली एविएशन इंडस्ट्री कॉरपोरेशन ने किया है।
  • यह हेलिकॉप्टर अधिकतम 500 किलोग्राम तक के भार तो उठा सकता है। यह पांच किलोमीटर की रेंज में 6700 मीटर की ऊंचाई तक उड़ान भर सकता है। इसकी अधिकतम स्पीड 170 किलोमीटर प्रति घंटा है, जबकि एक बार में इसे 5 घंटे तक उड़ाया जा सकता है।

:: पर्यावरण और पारिस्थितिकी ::

प्रचंड गर्मी से लू और रेड अलर्ट

  • पूरे देश में गर्मी ने सितम ढाना शुरू कर दिया है। अगले कुछ दिनों तक देश में बढ़ते पारा तकलीफ बढ़ाने वाला होगा। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने देश के कई हिस्सों के लिए रेड अलर्ट की चेतावनी जारी कर दी है। अधिक गर्म और शुष्क हवाओं को लू कहा जाता है। इस दौरान हवा की गर्मी के कारण तापमान 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है और इसे ही लू या हीट स्ट्रोक कहते हैं।

कब पैदा होती है लू

  • लू की स्थिति उस वक्त पैदा होती है जब अधिकतम तापमान 40 डिग्री तक पहुंच जाता है। यह सामान्य तापमान से 4.5 से 6.4 डिग्री सेल्सियस अधिक होता है। मैदानी इलाकों में अधिकतम तापमान 45 डिग्री तक पहुंच जाता है तो लू के हालात पैदा हो जाते हैं।

क्या होता है रेड अलर्ट

  • जब गर्मी अपने प्रचंड पर पहुंच जाती है और इसके कारण जानमाल के नुकसान की आशंका रहती है तो मौसम विभाग रेड अलर्ट जारी करता है। रेड अलर्ट चेतावनी का सबसे उच्चतम स्तर होता है। बता दें कि देश में लू के कारण हर साल सैकड़ों लोगों की जान जाती है। अगर इस दौरान तापमान 47 डिग्री तक पहुंच जाए तो स्थिति खतरनाक हो जाती है। मौसम विभाग ने इस समय देश के कई हिस्सों के लिए रेड अलर्ट की चेतावनी जारी की है। इस दौरान लोगों को उनके घरों से कम निकलने की सलाह दी जाती है।

:: विविध ::

रामकिंकर बैज

  • संस्कृति मंत्रालय का राष्ट्रीय आधुनिक कला संग्रहालय रामकिंकर बैज की 115वीं जयंती मनाने के लिए ‘रामकिंकर बैज-मूक बदलाव और अभिव्यक्तियों के माध्यम से यात्रा’ के शीर्षक से 26 मई 2020 को वर्चुअल टूर का आयोजन करेगा। इस वर्चुअल टूर के दौरान एनजीएमए के आरक्षित संग्रह से रामकिंकर बैज की उन उत्कृसष्ट कलाकृतियों को दर्शाया जाएगा जिन्हें इन पांच अलग-अलग थीम की श्रृंखला में वर्गीकृत किया गया है - (i) चित्र (पोर्ट्रेट), (ii) जीवन का अध्ययन, (iii) सार एवं संरचनात्मक रचना, (iv) प्रकृति का अध्ययन एवं परिदृश्य, और (v) मूर्तियां।

कौन थे रामकिंकर बैज?

  • आधुनिक भारत के सबसे मौलिक कलाकारों में से एक रामकिंकर बैज एक प्रतिष्ठित मूर्तिकार, चित्रकार और ग्राफिक कलाकार थे। वर्ष 1925 में उन्होंने शांतिनिकेतन स्थित कला विद्यालय यानी कला भवन में अपना प्रवेश सुनिश्चित किया और इसके साथ ही नंदलाल बोस के मार्गदर्शन में अनेक बारीकियां सीखीं। कला भवन में अपनी पढ़ाई पूरी करने के तुरंत बाद ही वे संकाय के एक सदस्य बन गए और फि‍र उन्हों ने नंदलाल बोस और बिनोद बिहारी मुख़र्जी के साथ मिलकर शांतिनिकेतन को आजादी-पूर्व भारत में आधुनिक कला के सबसे महत्वपूर्ण केंद्रों में से एक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। रामकिंकर की यादगार मूर्तियां सार्वजनिक कला में प्रमाणित मील का पत्थर हैं।
  • भारतीय कला में सबसे पहले आधुनिकतावादियों में से एक रामकिंकर ने यूरोपीय आधुनिक दृश्य भाषा की शैली को आत्मसात किया, लेकिन इसके बावजूद वह अपने ही भारतीय मूल्योंे से गहरे रूप से जुड़े हुए थे। उन्होंतने पहले आलंकारिक शैली एवं बाद में भावात्मक शैली और फि‍र वापस आलंकारिक शैली में पूरी बेकरारी के साथ अनगिनत प्रयोग किए। उनकी थीम मानवतावाद की गहरी समझ और मनुष्य एवं प्रकृति के बीच पारस्पैरिक निर्भरता वाले संबंधों की सहज समझ से जुड़ी होती थीं।
  • अपनी पेंटिंग एवं मूर्तियों दोनों में ही उन्होंने प्रयोग की सीमाओं को नए स्तवरों पर पहुंचा दिया और इसके साथ ही नई सामग्री का खुलकर उपयोग किया। उदाहरण के लिए, उनके द्वारा अपरंपरागत सामग्री जैसे कि अपनी यादगार सार्वजनिक मूर्तियों में किए गए सीमेंट कंक्रीट के उपयोग ने कला के क्षेत्र में अपनाई जाने वाली प्रथाओं के लिए एक नई मिसाल पेश की। प्रतिमाओं को बेहतरीन बनाने के लिए उनमें सीमेंट, लेटराइट एवं गारे का उपयोग और आधुनिक पश्चिमी एवं भारतीय शास्त्रीय-पूर्व मूर्तिकला मूल्यों का समावेश करने वाली अभिनव निजी शैली का इस्तेएमाल दोनों ही समान रूप से विलक्षण थे।
  • उन्हें वर्ष 1950 में सैलोन डेस रेलीटिस नूवेल्स और वर्ष 1951 में सैलोन डे माई में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया गया था। उन्हें् एक के बाद एक कई राष्ट्रीय सम्मानों से नवाजा गया। वर्ष 1970 में भारत सरकार ने उन्हें भारतीय कला में उनके अमूल्ये योगदान के लिए पद्म भूषण से सम्मानित किया। वर्ष 1976 में उन्हें ललित कला अकादमी का एक फेलो बनाया गया। उन्हें वर्ष 1976 में विश्व भारती द्वारा मानद डॉक्टरल उपाधि ‘देशोत्तम’ से और वर्ष 1979 में रवीन्द्र भारती विश्वविद्यालय द्वारा मानद डी.लिट से सम्मानित किया गया।

महान हॉकी खिलाड़ी बलबीर सिंह सीनियर

  • तीन बार के ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता महान हॉकी खिलाड़ी बलबीर सिंह सीनियर का सोमवार को निधन हो गया । वह पिछले दो सप्ताह से कई स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे ।

बलबीर सिंह सीनियर की उपलब्धियां

  • देश के महानतम एथलीटों में से एक बलबीर सीनियर अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति द्वारा चुने गए आधुनिक ओलंपिक इतिहास के 16 महानतम ओलंपियनों में शामिल थे । हेलसिंकी ओलंपिक (1952) फाइनल में नीदरलैंड के खिलाफ पांच गोल का उनका रिकार्ड आज भी कायम है । उन्हें 1957 में पद्मश्री से नवाजा गया था । बलबीर सीनियर ने लंदन (1948), हेलसिंकी (1952) और मेलबर्न (1956) ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीते थे । वह 1975 में विश्व कप जीतने वाली भारतीय टीम के मैनेजर भी थे ।

:: प्रिलिम्स बूस्टर ::

  • हाल ही में भारतीय सीमा पर तैनाती से चर्चा में AR500C क्या है? चीन का मानव रहित हेलीकॉप्टर)
  • हाल ही में न्यायाधीश एके सीकरी के द्वारा किस कागजरहित वैकल्पिक विवाद समाधान (ADR) केंद्र का उद्घाटन किया गया? ( भारतीय विवाद समाधान केंद्र-IDRC)
  • हाल ही में भारतीय बच्चों में सीवियर एक्यूट मैलन्यूट्रिशन (गंभीर कुपोषण) से निपटने हेतु किसने इंडस्ट्री ग्रुप की स्थापना की गई है? (कम्युनिटी बेस्ड मैनेजमेंट ऑफ एक्यूट मैलन्यूट्रिशन-सीमैम)
  • सीमा विवाद के कारण चर्चा में रहे ‘कालापानी’ ट्राई जंक्शन किन देशों के बीच में स्थित है? (भारत, चीन और नेपाल)
  • जैवविविधता वाले क्षेत्रों में स्वीकृत परियोजनाओं पर आपत्ति जताने से चर्चा में रहे पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन पर संसद की स्थायी समिति के अध्यक्ष कौन है? (जयराम नरेश)
  • तीन बार ओलंपिक स्वर्ण विजेता एवं ओलंपिक इतिहास के 16 महानतम खिलाड़ियों में शामिल किस खिलाड़ी का हाल में निधन हो गया? (बलबीर सिंह सीनियर- हॉकी)
  • संयुक्त राष्ट्र में वर्चुअल मीटिंग से चर्चा में रहे इस्लामी सहयोग संगठन(OIC) की स्थापना कब हुई एवं इसमें कितने देश शामिल है? (1969, कुल 57 देश, मुख्यालय-जेद्दा सऊदी अरब)
  • हाल ही में सीमा विवाद के संदर्भ में चर्चा में रहे '8 फिंगर्स' किस क्षेत्र से संबंधित है? (पैंगोंग लेक -लद्दाख)
  • रबी फसलों के संदर्भ में चर्चा न्यूनतम समर्थन मूल्य किस संस्था के द्वारा जारी किए जाते हैं एवं इस संस्था की स्थापना कब हुई थी? (कृषि लागत एवं मूल्य आयोग, 1965)
  • एयर फोर्स की 18वीं स्क्वा1ड्रन में शामिल किए गए ‘तेजस’ क्या है एवं इसका निर्माण किस संस्था ने किया है? ( चौथी पीढ़ी का स्वदेशी हल्के, लड़ाकू विमान,कंपनी हिंदुस्तान एरोनॉटिकल्स लिमिटेड)
  • नेशनल गैलरी ऑफ द्वारा वर्चुअल टूर के आयोजन से चर्चा में रहे ‘रामकिंकर बैज’ की ख्याति किस क्षेत्र में थी? (मूर्तिकार, चित्रकार और ग्राफिक कलाकार)

स्रोत साभार: Dainik Jagran (Rashtriya Sanskaran), Dainik Bhaskar (Rashtriya Sanskaran), Rashtriya Sahara (Rashtriya Sanskaran) Hindustan Dainik (Delhi), Nai Duniya, Hindustan Times, The Hindu, BBC Portal, The Economic Times (Hindi & English), PTI, PIB

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