(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (26 मार्च 2020)

दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर


(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (26 मार्च 2020)


:: राष्ट्रीय समाचार ::

#StayHomeIndiaWithBooks पहल

  • भारत सरकार के कोविड-19 के प्रसार को रोकने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों के क्रम में और लोगों को #StayIn और #StayHome के वास्ते प्रोत्साहित करने के लिए मानव संसाधन विकास मंत्रालय के तहत आने वाला नेशनल बुक ट्रस्ट लोगों को घर में ही रहकर किताबें पढ़ने को प्रोत्साहित करने के लिए अपनी सबसे ज्यादा बिकने वाली किताबें मुफ्त में डाउनलोड करने की सुविधा उपलब्ध करा रहा है। यह पहल #StayHomeIndiaWithBooks के अंतर्गत की गई है।
  • पीडीएफ प्रारूप में इन 100 से ज्यादा किताबों को एनबीटी की वेबसाइट https://nbtindia.gov.in से डाउनलोड किया जा सकता है। जीवनी, लोकप्रिय विज्ञान, शिक्षक की पुस्तिका सहित हर तरह की शैलियों में उपलब्ध ये पुस्तकें हिंदी, अंग्रेजी, असमिया, बांग्ला, गुजराती, मलयालम, उड़िया, मराठी, कोकबोरोक, मीजो, बोडो, नेपाली, तमिल, पंजाबी, तेलुगु, कन्नड़, उर्दू और संस्कृत भाषा में उपलब्ध हैं। इनमें ज्यादातर पुस्तकें बच्चों और युवा वयस्कों के लिए हैं। इसके अलावा टैगोर, प्रेमचंद और महात्मा गांधी की पुस्तकें हैं, जिनका लुत्फ परिवार का हर व्यक्ति उठा सकता है। इस सूची में आगे और भी किताबें जोड़ी जाएंगी।
  • कुछ चुनिंदा किताबों में हॉलिडेज हैव कम, एनीमल्स यू कान्ट फॉरगेट, नाइन लिटिल बर्ड्स, द पजल, गांधी तत्व सत्काम, वूमेन साइंटिस्ट इन इंडिया, एक्टिविटी बेस्ड लर्निंग साइंस, ए टच ऑफ ग्लास, गांधीः वारियर ऑफ नॉन वायलेंस आदि शामिल हैं।
  • ये पीडीएफ सिर्फ पढ़ने के लिए उपलब्ध हैं और किसी भी प्रकार के अनाधिकृत या वाणिज्यिक इस्तेमाल की अनुमति नहीं है।

रेलवे क्षेत्र में भारत और जर्मनी के बीच सहमति पत्र को मंजूरी

  • प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल को रेल मंत्रालय और जर्मनी की डीबी इंजीनियरिंग एंड कंसल्टिंग जीएमबीएच के बीच रेलवे क्षेत्र में तकनीकी सहयोग के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्‍ताक्षर करने से अवगत कराया गया। एमओयू पर फरवरी, 2020 में हस्ताक्षर किए गए थे।

विवरण :

रेलवे क्षेत्र में तकनीकी सहयोग के लिए हुए इस समझौता ज्ञापन (एमओयू) से निम्‍नलिखित क्षेत्रों में सहयोग कायम हो सकेगा :

  1. माल परिचालन (सीमा पार परिवहन, मोटर वाहन परिवहन और रसद सहित)
  2. यात्री परिचालन (उच्च गति और सीमा पार यातायात सहित),
  3. बुनियादी ढांचा निर्माण और प्रबंधन (समर्पित माल गलियारों और यात्री स्टेशनों के विकास सहित),
  4. एक आधुनिक, प्रतिस्पर्धी रेलवे संगठन का विकास (संगठनात्मक संरचनाओं के सुधार और रेलवे के उद्धार सहित),
  5. रेलवे के परिचालन, विपणन और बिक्री के साथ-साथ प्रशासनिक उद्देश्यों के लिए आईटी समाधान,
  6. भविष्‍यसूचक रख-रखाव,
  7. निजी ट्रेन संचालन, और
  8. कोई भी अन्य क्षेत्र जिस पर दोनों पक्षों के बीच लिखित रूप में परस्पर सहमति हो।

पृष्ठभूमि:

  • रेल मंत्रालय ने सहयोग के पहचाने गए क्षेत्रों के संबंध में विभिन्न विदेशी सरकारों और राष्ट्रीय रेलवे के साथ रेल क्षेत्र में तकनीकी सहयोग के लिए समझौता ज्ञापनों (एमओयू)/ सहयोग के ज्ञापनों (एमओसी)/प्रशासनिक प्रबन्‍धों(एए) /आशय की संयुक्त घोषणाओं (जेडीआई) पर हस्ताक्षर किए हैं। सहयोग के क्षेत्रों में हाई स्‍पीड रेल, मौजूदा मार्गों पर गति बढ़ाना, विश्व स्तर के स्टेशनों का विकास, भारी ढुलाई संचालन और रेल के बुनियादी ढांचे का आधुनिकीकरण आदि शामिल हैं।

अंडर-17 महिला विश्व कप

  • विश्व फुटबॉल की संचालन संस्था फीफा ने कहा कि वह नवंबर में भारत में होने वाले महिला अंडर-17 विश्व कप को ध्यान में रखकर देश में कोविड-19 महामारी की स्थिति पर नजर रखे हुए है। फीफा ने इसके साथ ही कहा कि वह अन्य विकल्पों पर भी विचार कर रहा है। कोरोना वायरस के कारण दुनिया भर में अब तक 20 हजार से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है जबकि 4,25,000 से अधिक लोग संक्रमित हैं।
  • इस टूर्नामेंट में 16 टीमें हिस्सा लेंगी, जिसके लिए अभी तक केवल तीन टीमों ने क्वॉलिफाई किया है। भारत ने मेजबान होने के नाते क्वॉलिफाई किया है जबकि उत्तर कोरिया ने एशियाई क्वॉलिफायर्स के विजेता और जापान ने उप विजेता रहने से इसमें अपनी जगह बनाई है। कोविड-19 महामारी के कारण दुनिया भर की खेल प्रतियोगिताएं रद्द या स्थगित कर दी गई है। इनमें टोक्यो ओलंपिक भी शामिल है। पूर्व कार्यक्रम के अनुसार अंडर-17 महिला विश्व कप दो से 21 नवंबर के बीच होना है। इसके मैच नवी मुंबई, कोलकाता, अहमदाबाद, भुवनेश्वर और गुवाहाटी में खेले जाएंगे।

कोरोना संकट पर केंद्र सरकार द्वारा राहत पैकेज

  • देशभर में फैले कोरोना संकट पर केंद्र सरकार ने कुछ बड़े ऐलान किए हैं। सरकार ने देश के 80 करोड़ लोगों को 2 रूपए प्रति किलो के हिसाब से गेहूं और तीन रूपए प्रति किलो के हिसाब से चावल देने का ऐलान किया है। कोरोना वायरस के चलते यह फैसला अगले तीन महीने तक लागू रहेगा। सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कैबिनेट मीटिंग के फैसलों की जानकारी देते हुए कहा कि सरकार ने अब हर गरीब व्यक्ति को महीने में 7 किलो राशन देने का फैसला लिया है। यह दुनिया की सबसे बड़ी खाद्य सुरक्षा स्कीम है। सभी राज्यों को पीडीएस के माध्यम से वितरण के लिए केंद्र से खाद्यान्न लेने के लिए कहा गया है।
  • 27 रूपए वाला गेहूं 2 रूपए किलो में मिलेगा: गेहूं की कीमत रिटेल मार्केट में 27 रुपये प्रति किलो है, जबकि खाद्य सुरक्षा योजना के तहत महज 2 रूपए किलोग्राम की दर से मुहैया कराया जाएगा।
  • चावल 3 रूपए प्रति किलो: 37 रूपए प्रति किलोग्राम की कीमत वाला चावल 3 रुपए की दर से दिया जाएगा।

सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस)

  • सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) भारतीय खाद्य सुरक्षा प्रणाली है। भारत में उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के अधीन तथा भारत सरकार द्वारा स्थापित और राज्य सरकारों के साथ संयुक्त रूप भारत के गरीबों के लिए सब्सिडी वाले खाद्य और गैर खाद्य वस्तुओं वितरित करता है। इससे पहले तक राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम कानून (एनएफएसए) के तहत, सरकार 80 करोड़ से अधिक लोगों को अत्यधिक रियायती मूल्य पर प्रति माह पांच किलोग्राम खाद्यान्न की आपूर्ति कर रही है। लेकिन अब हर गरीब व्यक्ति को महीने में 7 किलो राशन देने का फैसला लिया है।

:: अंतर्राष्ट्रीय समाचार ::

धर्मशाला गुरुद्वारा -अफगानिस्तान

  • बुधवार को काबुल स्थित सबसे प्रसिद्ध धर्मशाला गुरुद्वारे पर जबरदस्त आतंकी हमला किया गया जिसमें 11 लोगों के हताहत होने और 11 लोगों के घायल होने की सूचना है। हमले की जिम्मेदारी आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (आइएसआइएस) ने ली है लेकिन भारतीय सुरक्षा एजेंसियों को शक पाकिस्तान के समर्थन से चलने वाले आतंकी संगठन हक्कानी नेटवर्क पर है। भारतीय एजेंसियों को पहले से इस बारे में सूचना थी कि काबुल स्थित भारतीय दूतावास से जुडे कार्यालयों पर हमला करने की कोशिश हो सकती है।
  • इस्लामिक संगठन (आइएसआइएस) ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है। लेकिन भारतीय खुफिया एजेंसियों को शक है कि इसके पीछे पाकिस्तान की एजेंसियों का हाथ है जो नए शांति समझौते के बाद वहां अपनी ताकत बढ़ाने में जुटे हैं। अमेरिका और तालिबान के बीच शांति समझौता होने के बाद यह दूसरा हमला है जो परोक्ष तौर पर भारत को डराने के लिए किया गया है।
  • भारतीय सुरक्षा एजेंसियों को इस बारे में सूचना मिल रही थी कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आइएसआइ के समर्थन से चलने वाला आतंकी संगठन हक्कानी नेटवर्क भारतीय दूतावास या अन्य भारतीय अधिकारियों पर हमला कर सकता है। लेकिन वहां सुरक्षा व्यवस्था इतनी पुख्ता कर दी गई है कि उन्होंने अफगानिस्तानी सिखों व हिंदुओं के धार्मिक स्थल पर हमला कर दिया। वैसे इस गुरुद्वारे को भी निशाने बनाने की आशंका थी यही वजह है कि भारत के आग्रह पर अफगानिस्तान सरकार ने वहां की सुरक्षा व्यवस्था पहले से काफी मजबूत कर दी थी।

हक्कानी नेटवर्क

  • हक्कानी नेटवर्क अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिबंधित आतंकी संगठन है। इसे आइएसआइ ने उसी तरह से पाला-पोसा है जिस तरह से भारत में आतंकी हमला करने वाले जैश ए मोहम्मद व लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकी संगठनों को किया है।

कोरोना वायरस से निपटने के लिए ने 2 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर का राहत पैकेज

  • कोरोनावायरस महामारी के कारण अर्थव्यवस्था में आ रही गिरावट को थामने के लिए अमेरिका 2 लाख करोड़ डॉलर (करीब 151 लाख करोड़ रुपए) का राहत पैकेज जारी करने जा रहा है। पैकेज को लेकर ह्वाइट हाउस और सीनेट के बीच सहमति बन गई है। इस खबर से अमेरिकी शेयर बाजार डाउ जोंस में मंगलवार को 11.4 फीसदी की उछाल देखी गई। यह 1929 की महामंदी के बाद से एक दिन में डाउ जोंस की सबसे बड़ी उछाल है। अमेरिका में बुधवार रात (भारतीय समयानुसार) को डील सीनेट में पेश होगी। वहां से पास हो जाने के बाद इससे जुड़ा पूरा ब्यौरा सामने आएगा। इस पैकेज को अमेरिकी इतिहास का सबसे बड़ा राहत पैकेज बताया जा रहा है। सदन से पास होते ही यह दुनिया में किसी भी देश द्वारा किसी भी स्थिति में जारी किया गया सबसे बड़ा राहत पैकेज हो जाएगा।

किसको क्या मिलेगा

  • 25,000 करोड़ डॉलर का फंड ऐसे लोगों के लिए जिनकी नौकरी कोरोनावायरस के कारण चली गई या जिनका रोजगार प्रभावित हुआ है। ऐसे लोगों तक सरकार सीधे चेक भेजेगी।
  • सालाना 75 हजार डॉलर या इससे कम ग्रॉस कमाई करने वाले व्यक्ति को 1200 डॉलर का सहयोग मिलेगा। मौजूदा दरों के अनुसार यह रकम भारतीय रुपए में 90 हजार के करीब होती है। वहीं, 1,50,000 डॉलर सालाना ग्रॉस कमाई करने वाली दंपत्ति को 2400 डॉलर का सहयोग मिलेगा। साथ ही हर बच्चे के लिए 500 डॉलर अलग से मिलेंगे।
  • 35 हजार करोड़ डॉलर का एमरजेंसी लोन फंड अमेरिका की छोटी कंपनियों के लिए, ताकि उनका बिजनेस बंद न हो।
  • 25 हजार करोड़ डॉलर का फंड एम्प्लॉयमेंट इंश्योरेंस बेनिफिट के तौर पर जारी किया जाएगा।
  • 50 हजार करोड़ डॉलर का फंड संकटग्रस्त कंपनियों को लोन के तौर पर दिया जाएगा।
  • डील में एक विशेष प्रावधान किया है। इससे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प, उनके परिवार का कोई सदस्य, कांग्रेस का कोई सदस्य इस पैकेज की राशि से कोई लोन या निवेश हासिल नहीं कर पाएंगे। यह प्रावधान रकम के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए किया गया है।
  • अगर कोरोना के कारण नौकरी गई है तो पति-पत्नी के लिए 2400 डॉलर, हर बच्चे के लिए 500 डॉलर अलग।

पृष्ठभूमि

  • अमेरिका में कोरोना वायरस (कोविड-19) के मामले दिन-प्रतिदिन बढ़ते ही जा रहे हैं और अब तक इस महामारी से देश में 706 लोगों की मौत हो चुकी है। जॉन हॉपकिंस यूनिवर्सिटी के विज्ञान एवं इंजीनियरिंग केन्द्र (सीएसएसई) ने मंगलवार को इसकी जानकारी दी। सीएसएसई के मुताबिक अमेरिका में अब तक कोरोना संक्रमण के 53,740 मामलों की पुष्टि हो चुकी है। अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर में इससे सर्वाधिक मौतें हो चुकी हैं जिसके बाद किंग्स काउंटी में इस महामारी का प्रकोप देखने को मिला है।

आतंकवादी संगठन बोको हराम

  • चाड में आतंकवादी संगठन बोको हराम के घातक हमले में देश के 92 सैनिकों की मौत हो गई. चाड के राष्ट्रपति इदरिस डेबी इंतो ने यह जानकारी दी है.यह हमला लेक चाड इलाके में बढ़ाई जा रही जिहादी मुहिम के तहत किया गया जहां कैमरून, चाड, नाइजर और नाइजीरिया की सीमाएं मिलती हैं.
  • बोको हराम ने लेक चाड घाटी में हालिया महीनों में अपने हमले बढ़ा दिए हैं. संयुक्त राष्ट्र के अनुसार पूर्वोत्तर नाइजीरिया में बोको हराम के हमलों में 36,000 लोगों की मौत हुई है और करीब 20 लाख लोग विस्थापित हुए हैं.

बोको हराम :

  • बोको हराम नाइजीरिया का प्रमुख इस्लामी आतंकी संगठन है। इसका एकमात्र मकसद पूरे नाइजीरिया में इस्लामीकरण को बढ़ावा देना है। इस संगठन के अनुसार- ‘पश्चिमी शिक्षा हराम है।’ जो भी इस संगठन के खिलाफ जाता है, उसे ये मारते हैं और जला भी देते हैं। बर्बरताओं और हत्याओं के मामले में यह आईएसआईएस से भी आगे है।

कोरोना वायरस को लेकर जी-20 देशों का कल आपातकालीन बैठक

  • सऊदी अरब के सुलतान सलमान बिन अब्दुल अजीज अल साऊद जी-20 देशों के आपातकालीन शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता करेंगे. यह सम्मेलन बृहस्पतिवार को वीडियो कांफ्रेन्सिंग के जरिये होगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत दुनिया के अन्य शीर्ष नेता इसमें शामिल होंगे.
  • बैठक में कोरोना वायरस महामारी से निपटने के समन्वित उपायों पर चर्चा होगी. इस वायरस के करण अबतक करीब 19,000 लोगों की जा चुकी है जन-जीवन और कारोबार पूरी तरह ठप है. फिलहाल जी-20 की अध्यक्षता कर रहे सऊदी अरब ने पिछले सप्ताह वीडियो कांफ्रेन्सिंग के जरिये जी-20 शिखर सम्मेलन आयोजित करने का आह्वान किया.
  • सुलतन सलमान बिन अब्दुल अजीज अल साऊद बैठक की अध्यक्षता करेंगे. यह बैठक कोरोना वायरस महामारी और उसके मानवीय और आर्थिक प्रभाव से निपेटने को लेकर समन्वित उपायों पर विचार करेगा. इटली, स्पेन, जार्डन, सिंगापुर और स्विट्जरलैंड जैसे जी-20 में शामिल कोरोना वायरस से प्रभावित देशों के प्रतिनिधि इसमें शामिल होंगे.
  • संयुक्त राष्ट्र, विश्वबैंक, विश्व स्वास्थ्य संगठन, विश्व वपार संगठन, अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष और आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन जैसे शीर्ष अंतरराष्ट्रीय संगठन भी इसमें शामिल होंगे. बैठक में आसियान (दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के संगठन), अफ्रीकी संघ, खाड़ी सहयोग परिषद और अफ्रीका के विकास के लिये नयी भागीदारी (एनईपीएडी) जैसे क्षेत्रीय संगठनों के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे.

पृष्ठभूमि

  • उसने यह आह्वान ऐसे समय किया है इस वैश्विक संकट से निपटने को लेकर समूह की बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देशों तेजी से कदम नहीं उठाये जाने को लेकर आलोचना हो रही है. बुधवार को जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, जी-20 के अध्यक्ष सऊदी अरब ने 26 मार्च बृहस्पतिवार को समूह की वीडियो कांफ्रन्सिंग के जरिये असाधारण बैठक बुलायी है.

जी-20

  • जी-20 में भारत के अलावा, अर्जेन्टीना, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, कनाडा, चीन, जर्मनी, फ्रांस, इंडोनेशिया, इटली, जापान, मेक्सिको, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण कोरिया, तुर्की, ब्रिटेन और अमेरिका शामिल हैं.

कुरील द्वीप समूह में 7.5 तीव्रता का भूकंप

  • अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के हवाले से जानकारी दी है कि बुधवार को रूस के कुरील द्वीप समूह में 7.5 तीव्रता का भूकंप आया।यूएसजीएस ने कहा कि भूकंप का केंद्र 59 किलोमीटर (37 मील) की गहराई पाया गया है।अमेरिका के राष्ट्रीय सुनामी चेतावनी केंद्र ने कहा है कि फिलहाल इस भूकंप के खतरे का विश्लेषण किया जा रहा है।
  • रूस के कुरील द्वीप समूह के उत्तरी हिस्से में रहने वाले निवासियों को तट पर 7.5 तीव्रता के भूकंप के बाद सुनामी का खतरा बना हुआ है, लेकिन आपातकालीन सेवाओं ने छोटी लहरें और कोई हताहत या क्षति नहीं होने की सूचना दी।आपातकालीन सेवाओं ने सुनामी के खतरे के बीच बताया कि लहर की ऊंचाई लगभग 50 सेमी (20 इंच) थी।

कुरील द्वीप समूह

  • इन द्वीपसमूहों जिन्हें जापान में उत्तरी प्रदेश और रूस में दक्षिणी कुरील के रूप में जाना जाता है, को द्वितीय विश्व युद्ध के अंतिम दिनों में सोवियत सेनाओं द्वारा अपने अधीन ले लिया गया था, जहां से 17000 जापानी निवासियों को भागने के लिए बाध्य किया गया था। रूस और जापान के बीच संबंधों में बड़ी बाधा उनके बीच विवादित कुरील द्वीपसमूहों के संबंध में तनाव है। कुरील नामक यह द्वीप श्रृंखला प्रशांत महासागर में उत्तरी छोर पर जापानी द्वीप होकेइडो से लेकर रूस के कमछटका प्रायद्वीप के दक्षिणी भाग तक फैला हुआ है। चार द्वीपसमूह नामत: कुनासीर, ईटुरूप, शिकोटान और पठारी हेबोमाई द्वीपसमूह रूस और जापान के बीच विवाद का विषय रहा है।

:: भारतीय राजव्यवस्था ::

कोरोना वायरस के संकट से निपटने में सांसद निधि के इस्तेमाल की अनुमति

  • सरकार ने सांसद निधि से स्थानीय विकास कार्यों पर खर्च होने वाली राशि का इस्तेमाल कोरोना वायरस के संकट से निपटने में जरूरी चिकित्सा सामग्री की खरीद आदि में करने की अनुमति देते हुये नियमों में जरूरी संशोधन कर दिया है।
  • संसद के दोनों सदनों की वेबसाइट पर संशोधित नियमों से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक कर दी गयी है। ऐसा होने पर लोकसभा और राज्यसभा के सांसद अपनी सांसद निधि का इस्तेमाल मास्क, सेनेटाइजर और परीक्षण किट आदि जरूरी सामान की खरीद में कर सकेंगे। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय द्वारा मंगलवार को जारी निर्देश के अनुसार संसद सदस्य कोरोना वायरस के परीक्षण, जांच और अन्य जरूरी सुविधायें मुहैया कराने के लिये सांसद निधि की राशि का इस्तेमाल कर सकेंगे।

पृष्ठभूमि

  • मंत्रालय ने कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य विवेक तन्खा सहित अन्य सदस्यों द्वारा इस बारे में किये गये अनुरोध पर संज्ञान लेते हुये इस बाबत नियमों में संशोधन किया हैं। इसके मुताबिक अब जिला प्रशासन किसी संसद सदस्य की सांसद निधि से सरकारी अस्पताल या डिस्पेंसरी के लिये एक बार में कम से कम पांच लाख रुपये तक के चिकित्सा उपकरण की खरीद कर सकेंगे जिससे कोरोना वायरस के संक्रमण का परीक्षण, जांच, थर्मल स्कैनिंग सहित अन्य उपकरण और संक्रमण के बचाव की सामग्री की खरीद हो सके।

एनपीआर और जनगणना का काम भी टला

  • देशभर में 21 दिनों के लॉकडाउन की घोषणा के मद्देनजर राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) और जनगणना-2021 के पहले चरण के काम को अनिश्चितकाल के लिए टाल दिया गया है। इन दोनों कामों को एक अप्रैल से 30 सितंबर तक अंजाम दिया जाना था।
  • वर्तमान हालात के मद्देनजर एनपीआर और जनगणना के काम को अगले आदेश तक टाल दिया गया है। मालूम हो कि गृह मंत्रालय ने हाल ही में कहा था कि जनगणना 2021 और एनपीआर को अपडेट करने की तैयारियां चरम पर हैं और यह काम एक अप्रैल से ही शुरू होगा।

पृष्ठभूमि

  • ज्ञात हो कि कई राज्य सरकारें एनपीआर का विरोध कर रही हैं और कुछ ने तो इस कवायद के विरोध में प्रस्ताव भी पारित किए थे। इन राज्यों में केरल, बंगाल, पंजाब, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और बिहार शामिल हैं। हालांकि ज्यादातर ने कहा है कि वे जनगणना के लिए घरों को सूचीबद्ध करने के काम में सहयोग करेंगे। जानकारी के लिए बता दें कि एक अप्रैल से जनगणना के पहले चरण का काम शुरु होना था। लेकिन, कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों को देखते हुए सरकार ने पूरे देश को लॉकडाउन कर दिया है। आज से अगले 21 दिनों तक कोई भी अपने घरों से जबल तक बेहद जरुरी ना हो तब तक बाहन नहीं निकलेगा। यदि कोई नियमों का उल्लंघन करता है तो उसके खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।

:: भारतीय अर्थव्यवस्था ::

क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों का पुनर्पूंजीकरण

  • प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों पर कैबिनेट समिति (सीसीईए) ने 2019-20 के बाद एक और वर्ष के लिए यानी 2020-21 तक आरआरबी को न्यूनतम नियामकीय पूंजी प्रदान कर क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (आरआरबी) के पुनर्पूंजीकरण की प्रक्रिया को जारी रखने को अपनी स्वीकृति दे दी है। इसके तहत उन आरआरबी को न्यूनतम नियामकीय पूंजी दी जाएगी जो 9% के ‘पूंजी-जोखिम भारित परिसंपत्ति अनुपात (सीआरएआर)’ को बनाए रखने में असमर्थ हैं, जैसा कि भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा निर्दिष्‍ट नियामकीय मानदंडों में उल्‍लेख किया गया है।
  • सीसीईए ने आरआरबी के पुनर्पूंजीकरण की योजना के लिए केंद्र सरकार के हिस्से के रूप में 670 करोड़ रुपये (यानी 1340 करोड़ रुपये के कुल पुनर्पूंजीकरण सहयोग का 50%) का उपयोग करने को भी मंजूरी दे दी है। हालांकि, इसमें यह शर्त होगी कि प्रायोजक बैंकों द्वारा समानुपातिक हिस्सेदारी को जारी करने पर ही केंद्र सरकार का हिस्सा जारी किया जाएगा।

लाभ

  • बेहतर सीआरएआर वाले वित्‍तीय दृष्टि से सुदृढ़ क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक दरअसल ग्रामीण क्षेत्रों में ऋण संबंधी जरूरतों को पूरा करने में सक्षम होंगे।
  • आरबीआई के दिशा-निर्देशों के अनुसार, आरआरबी को अपने कुल ऋण का 75% ‘पीएसएल (प्राथमिकता वाले क्षेत्रों को ऋण देना)’ के तहत प्रदान करना पड़ता है। आरआरबी मुख्यत: छोटे एवं सीमांत किसानों, सूक्ष्म व लघु उद्यमों, ग्रामीण कारीगरों और समाज के कमजोर वर्गों पर फोकस करते हुए कृषि क्षेत्र और ग्रामीण क्षेत्रों की कर्ज तथा बैंकिंग संबंधी आवश्यकताओं को पूरा कर रहे हैं। इसके अलावा, आरआरबी ग्रामीण क्षेत्रों के सूक्ष्म/लघु उद्यमों और छोटे उद्यमियों को भी ऋण देते हैं। ‘सीआरएआर’ बढ़ाने के लिए पुनर्पूंजीकरण या नई पूंजी संबंधी सहयोग मिलने पर आरआरबी अपने पीएसएल लक्ष्य के तहत उधारकर्ताओं की इन श्रेणियों को निरंतर ऋण देने में समर्थ साबित होंगे, अत: वे ग्रामीण आजीविकाओं के लिए निरंतर सहयोग देना जारी रखेंगे।

पृष्‍ठभूमि:

  • आरआरबी के पूंजी-जोखिम भारित परिसंपत्ति अनुपात (सीआरएआर) के लिए प्रकटीकरण मानदंडों को मार्च 2008 से लागू करने संबंधी आरबीआई के निर्णय को ध्‍यान में रखते हुए डॉ. के.सी. चक्रबर्ती की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया था।
  • समिति की सिफारिशों के आधार पर ‘आरआरबी के पुनर्पूंजीकरण की योजना’ को कैबिनेट ने 10 फरवरी, 2011 को आयोजित अपनी बैठक में मंजूरी दी थी, ताकि विशेषकर पूर्वोत्‍तर क्षेत्र और पूर्वी क्षेत्र में कमजोर आरआरबी की आवश्यकता को पूरा करने के लिए आकस्मिक निधि के रूप में 700 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि के साथ 40 आरआरबी को 2,200 करोड़ रुपये की पुनर्पूंजीकरण सहायता प्रदान की जा सके। अत: हर साल 31 मार्च को आरआरबी के सीआरएआर की जो स्थिति होती है उसके आधार पर ही राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) उन आरआरबी की पहचान करता है, जिन्हें 9% के अनिवार्य सीआरएआर को बनाए रखने के लिए पुनर्पूंजीकरण संबंधी सहायता की आवश्यकता होती है।
  • वर्ष 2011 के बाद 2,900 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता के साथ आरआरबी के पुनर्पूंजीकरण की योजना को चरणबद्ध ढंग से वर्ष 2019-20 तक बढ़ाया गया, जिसमें भारत सरकार की 1,450 करोड़ रुपये की 50% हिस्सेदारी शामिल थी। पुनर्पूंजीकरण के लिए भारत सरकार के हिस्से के रूप में स्वीकृत 1,450 करोड़ रुपये में से 1,395.64 करोड़ रुपये की राशि वर्ष 2019-20 में अब तक आरआरबी को जारी की जा चुकी है।
  • इस अवधि के दौरान सरकार ने आरआरबी को आर्थिक दृष्टि से व्यवहार्य या लाभप्रद और टिकाऊ संस्थान बनाने के लिए भी कई पहल की हैं। आरआरबी को अपने उपरिव्यय को कम करने में सक्षम बनाने, प्रौद्योगिकी के उपयोग को बढ़ाने, पूंजी आधार एवं परिचालन क्षेत्र का विस्‍तार करने और उनकी ऋण राशि में वृद्धि करने के लिए सरकार ने तीन चरणों में आरआरबी के ढांचागत सुदृढ़ीकरण या संयोजन की शुरुआत की है। इसके परिणामस्‍वरूप आरआरबी की संख्या वर्ष 2005 के 196 से घटकर अब केवल 45 रह गई है।

:: भारतीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी ::

कोरोना वायरस की जेनेटिक संरचना

  • कोरोना के कहर से जूझ रहे लोगों के लिए एक राहत देने वाली खबर है। इंफ्लुएंजा की तरह कोरोना वायरस अपने जेनेटिक संपचना तेजी से नहीं बदल रहा है यानी चार महीने पहले वुहान में उसकी संरचना जैसी थी अब भी लगभग वैसी ही है। इसके कारण कोरोना वायरस के खिलाफ लंबे समय तक काम करने वाला वैक्सीन बनाना आसान होगा। जबकि इंफ्लुएंजा जैसे कई वायरस लगातार अपनी जेनेटिक संचरना को बदलते रहते हैं और उनके लिए हर बार नई वैक्सीन तैयार करनी पड़ती है।

म्युटेशन की प्रकिया के जरिये वायरस बदलते है अपनी सरंचना

  • भारत में कोरोना वायरस के स्वरूप पर नजर रख रहे आइसीएमआर के वैज्ञानिकों के अनुसार भारत में पाए गए कोरोना वायरस काफी हद तक एक समान है। जबकि ये कई देशों में रहने वाले लोगों के माध्यम से भारत पहुंचे है। सामान्य रूप से कोरोना वायरस एक से दूसरे मानव शरीर के भीतर गुजरते समय अपनी संरचना बदलता रहता है, जिसे म्युटेशन कहते हैं। कोरोना वायरस में यह म्युटेशन की प्रकिया नहीं देखी जा रही है। पिछले हफ्ते आईसीएमआर के वैज्ञानिक रमन गंगाखेड़कर ने बताया था कि भारत में मिले कोरोना के वायरस की जेनेटिक संरचना 99.9 फीसदी वुहान शहर में मिले वायरस के समान थी। लेकिन साथ ही उन्होंने वायरस के म्युटेशन से उसके जेनेटिक संरचना बदलने की भी आशंका जताई थी।
  • ऐसा नहीं है कि सिर्फ भारत में ही कोरोना के वायरस की जेनेटिक संरचना एक समान मिल रही है। पूरी दुनिया में यह वायरस काफी हद तक एक समान ही पाया जा रहा है। इस कारण यह माना जा रहा है कि कोरोना के वायरस में इंफ्लुएजा जैसे दूसरे वायरस की तरह तेजी से जेनेटिक संचरना बदलने के गुण नहीं है। इस कारण यदि इस वायरस को रोकने के लिए कोई वैक्सीन बनती है या फिर इससे प्रभावित मरीजों के लिए किसी कारगर दवा इजाद की जाती है, तो वह लंबे समय तक कारगर रहेगी। वैसे आइसीएमआर के वैज्ञानिकों का कहना है कि इस वायरस के बारे में निश्चित रूप से कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी। लंबे समय तक कोरोना वायरस पर नजर रखने के बाद किसी निष्कर्ष तक पहुंचा जा सकता है। यह कहना भी मुश्किल है कि कितनी जल्द वैक्सीन तैयार हो सकती है।

मलेरिया रोधी दवा हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वाइन

  • सरकार ने कोरोना वायरस के प्रकोप के मद्देनजर घरेलू बाजार में दवा की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए मलेरिया रोधी दवा हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वाइन के निर्यात पर विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) द्वारा तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया।
  • भारतीय चिकित्सा शोध परिषद (आईसीएमआर) के महानिदेशक बलराम भार्गव ने सोमवार को कोरोना वायरस संक्रमण के संदिग्ध या पुष्ट मामलों में देखभाल करने वाले स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के इलाज के लिए हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वाइन के इस्तेमाल की सिफारिश की थी। आईसीएमआर द्वारा कोविड-19 पर गठित राष्ट्रीय कार्यबल द्वारा की गई इलाज की सिफारिशों को भारतीय दवा महानियंत्रक (डीजीसीआई) ने आपातकालीन स्थितियों में प्रतिबंधित उपयोग के लिए मंजूरी दी है।

बायोफोर्टीफाइड, उच्‍च प्रोटीन वाली गेहूं की किस्‍म किस्म एमएसीएस 4028

  • भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत एक स्वायत्तशासी संस्थान, पुणे के अगहरकर रिसर्च इंस्टीट्यूट (एआरआई) के वैज्ञानिकों ने एक प्रकार के गेहूं की बायोफोर्टीफाइड किस्म एमएसीएस 4028 विकसित की है, जिसमें उच्च प्रोटीन है।

विशेषता

  • गेहूं की किस्‍म में सुधार पर एआरआई वैज्ञानिकों के समूह द्वारा विकसित गेहूं की किस्‍म में लगभग 14.7% उच्च प्रोटीन, बेहतर पोषण गुणवत्ता के साथ जस्ता (जिंक) 40.3 पीपीएम, और क्रमशः 40.3 पीपीएम और 46.1 पीपीएम लौह सामग्री, पिसाई की अच्छी गुणवत्ता और पूरी स्वीकार्यता है।
  • एमएसीएस 4028, जिसे विकसित करने की जानकारी इंडियन जर्नल ऑफ जेनेटिक्स एंड प्लांट ब्रीडिंग में प्रकाशित की गई थी, एक अर्ध-बौनी (सेमी ड्वार्फ) किस्म है, जो 102 दिनों में तैयार होती है और जिसमें प्रति हेक्टेयर 19.3 क्विंटल की श्रेष्ठ और स्थिर उपज क्षमता है। यह डंठल, पत्‍तों पर लगने वाली फंगस, पत्‍तों पर लगने वाले कीड़ों, जड़ों में लगने वाले कीड़ों और ब्राउन गेहूं के घुन की प्रतिरोधी है।

लाभ

  • एमएसीएस 4028 किस्‍म को संयुक्त राष्ट्र अंतर्राष्‍ट्रीय बाल आपात कोष (यूनीसेफ) के लिए कृषि विज्ञान केन्‍द्र (केवीके) कार्यक्रम द्वारा भी स्‍थायी रूप से कुपोषण दूर करने के लिए शामिल किया गया है और यह "कुपोषण मुक्त भारत", राष्ट्रीय पोषण रणनीति की संकल्‍पना 2022 को बढ़ावा दे सकता है। भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में अप्रत्‍यक्ष भूख से निपटने का एक प्रयास जारी है जिसमें "कुपोषण मुक्त भारत" के लक्ष्‍य को हासिल करने के लिए परम्‍परागत पौधों की प्रजनन पद्धति का उपयोग किया जा रहा है।
  • गेहूं की किस्म एमएसीएस 4028 को फसल मानकों पर केन्‍द्रीय उप-समिति द्वारा अधिसूचित किया गया है, महाराष्ट्र और कर्नाटक को शामिल करते हुए समय पर बुवाई के लिए कृषि फसलों की किस्‍में जारी करने (सीवीआरसी), प्रायद्वीपीय क्षेत्र की बारिश की स्थिति के लिए अधिसूचना जारी की गई है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) ने भी वर्ष 2019 के दौरान बायोफोर्टीफाइड श्रेणी के तहत इस किस्म को टैग किया है।

पृष्ठभूमि

  • भारत में गेहूँ की फसल छह विविध कृषि मौसमों के अंतर्गत उगाई जाती है। भारत के प्रायद्वीपीय क्षेत्र (महाराष्ट्र और कर्नाटक राज्यों) में, गेहूं की खेती प्रमुख रूप से वर्षा आधारित और सीमित सिंचाई परिस्थितियों में की जाती है। ऐसी परिस्थितियों में, फसल को नमी की मार झेलनी पड़ती है। इसलिए, सूखा-झेलने वाली किस्मों की उच्च मांग है। अखिल भारतीय समन्वित गेहूं और जौ सुधार कार्यक्रम के अंतर्गत, अगहरकर रिसर्च इंस्‍टीट्यूट, पुणे में वर्षा की स्थिति में अधिक पैदावार वाली, जल्‍द तैयार होने वाली और रोग प्रतिरोधक क्षमता वाली किस्में विकसित करने के प्रयास किए जाते हैं। यह भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा नियंत्रित भारतीय गेहूं और जौ अनुसंधान संस्‍थान, करनाल के जरिये संचालित है। एमएसीएस 4028 किसानों के लिए इस तरह के प्रयासों का परिणाम है।

अल्ट्राफास्ट लेजर सरफेस टेक्सचरिंग तकनीक

  • विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के एक स्वायत्त अनुसंधान और विकास केन्द्र, इंटरनेशनल एडवांस्ड सेंटर फॉर पाउडर मेटलर्जी एंड न्यू मटेरियल्स (एआरसीआई) ने एक अल्ट्राफास्ट लेजर सरफेस टेक्सचरिंग तकनीक विकसित की है, जो आंतरिक दहन इंजनों की ईंधन दक्षता में सुधार कर सकती है।

कार्यप्रणाली

  • माइक्रो-सरफेस टेक्सचर के आकार, बनावट और घनत्व को सटीक नियंत्रण प्रदान करने वाली लेजर सरफेस माइक्रो-टेक्सचरिंग घर्षण और घिसाव पर प्रभावशाली रूप से नियंत्रण बनाती है। इस तकनीक में, एक स्पंदित लेजर बीम के माध्यम से बेहद नियंत्रित तरीके से वस्तुओं की सतह पर सूक्ष्म-गर्तिका अथवा खांचे का निर्माण किया जाता है। इस तरह के टेक्सचर, ड्राई स्लाईडिंग स्थितियों में और तेल की आपूर्ति (स्नेहक टंकी) को बढ़ाने जैसे प्रभावों को भी नियंत्रित करते हैं और यह घर्षण गुणांक को कम करते हुए घिसने की दर को कम कर सकते हैं।
  • टेक्सचर सरफेसों का निर्माण 100 एफएस पल्स ड्यूरेशन लेजर का उपयोग करते हुए ऑटोमोटिव आंतरिक दहन इंजन पुर्जों, पिस्टन रिंग्स और सिलेंडर लाइनर्स पर किया गया था। लगभग 5-10 माइक्रोन डीप और 10-20 माइक्रोन व्यास की सूक्ष्म-गर्तिका को लेजर बीम के माध्यम से नियमित पैटर्न का उपयोग करते हुए बनाया गया हैं। निर्मित किए गए टेक्सचर का इंजन परीक्षण रिंग में शीतलक और स्नेहक तेल के साथ विभिन्न गतियों और तापमान पर परीक्षण किया गया, और यह देखा गया कि पिस्टन रिंग्स पर इस टैक्सचर के उपयोग से स्नेहक ईंधन की खपत में 16% की कमी आई। 10 घंटे की ल्यूब ऑयल खपत परीक्षण से पता चलता है कि टैक्सचर रिंग्स में लगने वाले घर्षण में भी काफी कमी हुई है।
  • वस्तुओं की सतह पर सूक्ष्म-गर्तिका अथवा खांचे के पैटर्न के निर्माण से सतह स्थलाकृति में परिवर्तन होता है जो अतिरिक्त हाइड्रोडाइनामिक दबाव उत्पन्न करता है, जिससे सतहों की भार-वहन क्षमता बढ़ जाती है। इसलिए यह ड्राई स्लाइडिंग स्थितियों और ईंधन की आपूर्ति (स्नेहक टंकी) को बढ़ाने जैसे प्रभावों को भी नियंत्रित करने के साथ-साथ घर्षण गुणांक को भी कम करते हुए घिसने की दर कम कर देते हैं।

क्यों आवश्यक है?

  • घर्षण को नियंत्रित करने के लिए, शुष्क और स्नेहक स्थिति में अनुरूप या गैर-अनुरूप संपर्क के दौरान कार्य करने वाले तंत्र को समझना अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह अल्ट्राफास्ट लेजर वैक्यूम रहित स्थितियों के बिना ही माइक्रो अथवा नैनो विशेषताओं का निर्माण करती है। ये विशेषताएं डिफरेक्शन-लिमिटेड लेजर फोकल स्पॉट डायमीडर की तुलना में छोटी हैं-जो एक अल्ट्रशॉर्ट डयूरेशन लेजर-मैटर इंटरैक्शन की यूनिक प्रॉपर्टी है। यह प्रक्रिया एक थर्मल है, और पल्स डयूरेशन थर्मल डिफ्यूजन टाईम्स की तुलना में मैग्नीट्यूड के क्रम में छोटी हैं।

‘क्वांटम केमिस्ट्री आधारित सॉफ्टवेयर’

  • विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा शुरू किए गए ‘इन्स्पायर संकाय पुरस्कार’ से नवाजे गए आईआईटी बॉम्बे के डॉ. अचिंत्य कुमार दत्ता अपने शोध समूह के साथ क्वांटम केमिस्‍ट्री के लिए नए तरीके विकसित करने और उन्हें अत्‍यंत प्रभावकारी एवं फ्री सॉफ्टवेयर में इस्‍तेमाल करने पर काम कर रहे हैं, ताकि जलीय डीएनए से इलेक्ट्रॉन के संयोजन का अध्ययन किया जा सके। कैंसर के विकिरण चिकित्सा (रेडिएशन थेरेपी) आधारित उपचार में इसके व्‍यापक निहितार्थ हैं।

क्या है क्वांटम केमिस्‍ट्री?

  • क्वांटम केमिस्‍ट्री दरअसल रसायन शास्‍त्र की नई शाखाओं में से एक है जिसके तहत प्रयोगशाला में कोई प्रयोग किए बिना ही परमाणुओं और अणुओं के रासायनिक गुणों को परखने की कोशिश की जाती है। क्वांटम केमिस्‍ट्री में वैज्ञानिक अणुओं से संबंधित श्रोडिंगर समीकरण को हल करने की कोशिश करते हैं और इससे वास्तव में माप किए बिना ही उस विशेष अणु के बारे में हर मापने योग्‍य मात्रा प्राप्‍त हो जाती है। हालांकि, श्रोडिंगर समीकरण के अनुप्रयोग से उत्पन्न गणितीय समीकरण काफी जटिल होते हैं और केवल कंप्यूटर का उपयोग करके ही इन्‍हें हल किया जा सकता है। अत: इन समीकरणों को हल करने के लिए नए सिद्धांतों को विकसित करना और अत्‍यंत कारगर कंप्यूटर प्रोग्राम लिखना आवश्यक है।

क्वांटम केमिस्‍ट्री की दिशा में पहल

  • क्वांटम केमिस्‍ट्री के लिए नए सिद्धांतों को विकसित करने में भारतीय वैज्ञानिक ही सबसे आगे हैं। हालांकि, इन सिद्धांतों को व्यावहारिक रूप से उपयोगी या काम में आने लायक कंप्यूटर सॉफ्टवेयर में परिणत करने की दिशा में अब तक कोई खास प्रगति नहीं हो पाई है। बड़ी तेजी से विकसित हो रहे भारतीय आईटी उद्योग और अंतरराष्‍ट्रीय ख्याति वाले अनगिनत अत्‍यंत प्रतिभाशाली सॉफ्टवेयर प्रोफेशनलों को देखते हुए यह आश्चर्य की ही बात है।
  • आईआईटी बॉम्बे में डॉ. दत्ता का शोध समूह दरअसल रसायन शास्त्रि‍यों, कंप्यूटर वैज्ञानिकों और इंजीनियरों का एक संगठन है, जो क्वांटम केमिस्‍ट्री से जुड़े अत्‍यंत प्रभावकारी तरीकों और फ्री सॉफ्टवेयर को विकसित करने के एक साझा लक्ष्य के लिए एकजुट हुए हैं। इसका उपयोग दुनिया भर के वैज्ञानिक नियमित रूप से रसायन शास्‍त्र संबंधी अपनी समस्याओं का समाधान निकालने में कर सकते हैं।
  • डॉ. दत्ता ने बताया, ‘मेरी इन्स्पायर फेलोशिप ने मुझे एक नए और प्रभावकारी क्वांटम केमिस्‍ट्री सॉफ्टवेयर का विकास एवं परीक्षण करने के लिए एक अत्याधुनिक कंप्यूटिंग सुविधा या यूनिट की स्थापना करने में समर्थ बनाया है। इसने मुझे पूरे भारत के काबिल श्रम बल या प्रोफेशनलों को प्रशिक्षित करने के लिए भी प्रेरित किया है जो भारतीय विज्ञान की भावी प्रगति में बहुमूल्‍य योगदान कर सकते हैं।’

शोध के क्षेत्र और लाभ

  • क्वांटम केमिस्‍ट्री के ये नव विकसित कारगर तरीके इस शोध समूह को व्‍यापक जलीय परिवेश में डीएनए से इलेक्ट्रॉन के संयोजन से संबंधित श्रोडिंगर समीकरण को हल करने में समर्थ बनाते हैं।
  • डीऑक्सीराइबोन्यूक्लिक एसिड या डीएनए मानव शरीर में आनुवांशिक जानकारियों अथवा सूचनाओं का वाहक है। वहीं, दूसरी ओर डीएनए से इलेक्ट्रॉन का संयोजन दरअसल मानव कोशिकाओं को विकिरण क्षति पहुंचाने वाले महत्वपूर्ण कदमों में से एक है। उनकी टीम ने यह साबित कर दिखाया है कि व्‍यापक जलीय परिवेश में डीएनए से इलेक्ट्रॉन का संयोजन एक द्वार-मार्ग व्‍यवस्‍था के जरिए होता है और जलीय परिवेश में इलेक्ट्रॉन का यह संयोजन बड़ी तेजी से कुछ ही क्षणों में हो जाता है। जलीय परिवेश में डीएनए से इलेक्ट्रॉन के संयोजन की इस नई उल्लिखित प्रक्रि‍या के ‘विकिरण चिकित्सा आधारित कैंसर उपचार’ में बड़े निहितार्थ हैं।
  • यह अध्ययन रेडियो-सेंसिटाइजर की एक नई श्रेणी के विकास में मददगार साबित हो सकता है, जो ट्यूमर कोशिकाओं को विकिरण चिकित्सा के प्रति अधिक संवेदनशील बनाता है और इस तरह से सामान्य कोशिकाओं की रक्षा करता है। अभिकलन (कम्प्यूटेशन) के इस तरीके से नए रेडियो-सेंसिटाइजर के विकास में आने वाली लागत समय और पैसा दोनों ही दृष्टि से काफी घट सकती है।

वैज्ञानिकों ने किया मधुमक्खियों के छत्ते में सुधार

  • पिछले कुछ वर्षों के दौरान भारत शहद उत्पादन और उसके निर्यात के मामले में तेजी से उभरा है। लेकिन, शहद उत्पादन में उपयोग होने वाले छत्तों का रखरखाव एक समस्या है, जिसके कारण शहद की शुद्धता प्रभावित होती है। भारतीय वैज्ञानिकों ने मधुमक्खी-पालकों के लिए एक ऐसा छत्ता विकसित किया है, जो रखरखाव में आसान होने के साथ-साथ शहद की गुणवत्ता एवं हाइजीन को बनाए रखने में भी मददगार हो सकता है।
  • केंद्रीय वैज्ञानिक उपकरण संगठन (सीएसआईओ), चंडीगढ़ और हिमालय जैव-संपदा प्रौद्योगिकी संस्थान (आईएचबीटी), पालमपुर के वैज्ञानिकों ने मिलकर मधुमक्खी पालन में उपयोग होने वाले पारंपरिक छत्ते में सुधार करके इस नये छत्ते को विकसित किया है। इस छत्ते की खासियत यह है कि इसके फ्रेम और मधुमक्खियों से छेड़छाड़ किए बिना शहद को इकट्ठा किया जा सकता है।

नए छत्ते से लाभ

  • पारंपरिक रूप से हनी एक्सट्रैक्टर की मदद से छत्ते से शहद प्राप्त किया जाता है, जिससे हाइजीन संबंधी समस्याएँ पैदा होती हैं। इस नये विकसित छत्ते में भरे हुए शहद के फ्रेम पर चाबी को नीचे की तरफ घुमाकर शहद प्राप्त किया जा सकता है। ऐसा करने से शहद निकालने की पारंपरिक विधि की तुलना में शहद सीधे बोतल पर प्रवाहित होता है। इस तरह, शहद अशुद्धियों के संपर्क में आने से बच जाता है और शुद्ध तथा उच्च गुणवत्ता का शहद प्राप्त होता है।
  • “इस छत्ते के उपयोग सेबेहतर हाइजीन बनाए रखने के साथ शहद संग्रहित करने की प्रक्रिया में मधुमक्खियों की मृत्यु दर को नियंत्रित कर सकते हैं। इस छत्ते के उपयोग से पारंपरिक विधियों की अपेक्षा श्रम भी कम लगता है। मधुमक्खी-पालक इस छत्ते का उपयोग करते है तो प्रत्येक छत्ते से एक साल में 35 से 40 किलो शहद प्राप्त किया जा सकता है। मकरंद और पराग की उपलब्धता के आधार पर यह उत्पादन कम या ज्यादा हो सकता है। इस लिहाज से देखें तो मधुमक्खी का यह छत्ता किफायती होने के साथ-साथ उपयोग में भी आसान है।”

शहद से सम्बंधित तथ्य

  • शहद उत्पादन के मामले में भारत दुनिया में 8वाँ प्रमुख देश है, जहाँ प्रतिवर्ष 1.05 लाख मीट्रिक टन शहद उत्पादित होता है। राष्ट्रीय मधुमक्खी बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 1,412,659 मधुमक्खी कॉलोनियों के साथ कुल 9,580 पंजीकृत मधुमक्खी-पालक हैं। हालांकि, वास्तविक संख्या बहुत अधिक हो सकती है। कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण की रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने 2018-19 में 732.16 करोड़ रुपये मूल्य का 61,333.88 टन प्राकृतिक शहद का निर्यात किया था। प्रमुख निर्यात स्थलों में अमेरिका, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, मोरक्को और कतर जैसे देश शामिल थे।
  • आईएचबीटी ने खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग(केवीआईसी) के साथ मिलकर मधुमक्खी पालन के लिए कलस्टरों की पहचान की है, जहाँ मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देकर किसानों की आमदनी बढ़ायी जा सकती है। आगामी पाँच वर्षों में हिमाचल प्रदेश में केवीआईसी और मधुमक्खी कलस्टरों के साथ मिलकर आईएचबीटी का लक्ष्य 2500 मीट्रिक टन शहद उत्पादन करने काहै।
  • वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद से संबद्ध आईएचबीटी अरोमा मिशन, फ्लोरीकल्चर मिशन और हनी मिशन के अंतर्गत मधुममक्खी पालन को बढ़ावा देने के लिए कार्य कर रहा है। इसके तहत प्रशिक्षण एवं कौशल विकास कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं और मधुमक्खी के छत्ते तथा टूल किट वितरित किए जा रहे हैं, ताकि रोजगार और आमदनी के असवर पैदा किए जा सकें।

:: पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी ::

वैज्ञानिकों ने एक बार फिर जगायी चीते के पुनरुद्धार की उम्मीद

  • शोधकर्ताओं के एक संयुक्त अध्ययन में भारतीय वैज्ञानिकों ने भारत से लुप्त हो चुके चीते को दोबारा देश में उसके वन्य आवास में स्थापित करने की संभावनाओं का आकलन किया है। इस अध्ययन में वैज्ञानिकों ने जानने का प्रयास किया है कि अफ्रीकी चीता भारतीय परिस्थितियों में किस हद तक खुद को अनुकूलित कर सकता है। शोधकर्ताओं ने इस आनुवांशिक अध्ययन में एशियाई और अफ्रीकी चीतों के विकास क्रम में भी भारी अंतर का पता लगाया है।
  • इस अध्ययन में कोशिकीय एवं आणविक जीव विज्ञान केंद्र (सीसीएमबी), हैदराबाद के वैज्ञानिकों ने विलुप्त हो चुके भारतीय चीते के स्रोत का पता लगाया है। अध्ययन से पता चलता है कि विकास के क्रम में दक्षिण-पूर्व अफ्रीकी और एशियाई चीता दोनों का उत्तर-पूर्वी अफ्रीकी चीते के बीच विभाजन 100,000-200,000 साल पहले हुआ है। लेकिन दक्षिण-पूर्वी अफ्रीकी और एशियाई चीता एक दूसरे से 50,000-100,000 साल पहले अलग हुए थे।
  • अध्ययन में शामिल कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के डॉ गाई जैकब्स के अनुसार "यह मौजूदा धारणा के विपरीत है कि एशियाई और अफ्रीकी चीतों के बीच विकासवादी विभाजन मात्र 5,000 वर्षों का ही है।" हालाँकि, वैज्ञानिकों का कहना है कि भारत में एशियाई और अफ्रीकी प्रजातियों के चीतों के बीच प्रजनन के निर्णय को निर्धारित करने वाले प्रमुख मापदंडों में यह देखना अहम होगा कि चीतों की दोनों आबादी परस्पर रूप से कितनी अलग हैं।

तीन अलग चीता नमूनों का विश्लेषण

  • सीसीएमबी के वरिष्ठ शोधकर्ता डॉ के. थंगराज ने इंडिया साइंस वायर को बताया कि "हमने तीन अलग चीता नमूनों का विश्लेषण किया है; पहला नमूना चीते की त्वचा का था, जिसके बारे में माना जाता है कि उसे 19वीं शताब्दी में मध्य प्रदेश में मार दिया गया था, जो कोलकाता के भारतीय प्राणी सर्वेक्षण की स्तनपायी गैलरी से प्राप्त किया गया है। दूसरा नमूना मैसूर प्राकृतिक इतिहास संग्रहालय से प्राप्त 1850-1900 के समय के चीते की हड्डी का नमूना है। जबकि, तीसरा नमूना नेहरू जूलॉजिकल पार्क, हैदराबाद से प्राप्त वर्तमान में पाये जाने वाले एक आधुनिक चीते का रक्त नमूना है। सीसीएमबी की प्राचीन डीएनए सुविधा में दोनों ऐतिहासिक नमूनों (त्वचा और हड्डी) से डीएनए को अलग किया गया है और उसका विश्लेषण किया गया है।"
  • अध्ययन में शामिल एक अन्य शोधकर्ता डॉ नीरज राय ने बताया कि "हमने इन दो नमूनों के माइटोकॉन्ड्रियल डीएनए और वर्तमान में पाये जाने वाले चीतों के नमूनों को क्रमबद्ध किया है और अफ्रिका व दक्षिण-पश्चिम एशिया के विभिन्न भागों में पाये जाने वाले 118 चीतों के माइटोकॉन्ड्रियल डीएनए का विश्लेषण किया है। डॉ थंगराज ने बताया कि "भारतीय प्राणी सर्वेक्षण के संग्रहालय से प्राप्त नमूने एवं नेहरू प्राणी उद्यान के आधुनिक नमूने पूर्वोत्तर अफ्रीकी मादा वंश के हैं, जबकि मैसूर के संग्रहालय से प्राप्त नमूने दक्षिण-पूर्वी अफ्रीकी चीतों के साथ घनिष्ठ संबंध दर्शाते हैं।"

चीता से जुड़ें महत्वपूर्ण तथ्य

  • चीता, जो बिल्ली की सबसे बड़ी प्रजाति है, की आबादी में लगातार कमी हो रही है। वर्तमान में इन बिल्लियों की सबसे बड़ी आबादी अफ्रीका में पायी जाती है, जिन्हें अफ्रीकी चीता कहा जाता है। दूसरी ओर, सिर्फ ईरान में मात्र 50 एशियाई चीते बचे हैं।

क्यों किया गया अध्यनन

  • लगभग एक दशक से भी अधिक समय से भारत में इस पर विचार किया जा रहा है कि क्या देश में चीतों को पुन: जंगलों में लाना चाहिए! इस अध्ययन में यह जानने की कोशिश की जा रही है कि क्या अफ्रीकी चीता भारतीय परिस्थितियों में खुद को ढाल सकता है। इस वर्ष के आरंभ में सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार को देश में दक्षिणी अफ्रीकी चीते को अनुकूल आवास में रखने की अनुमति दी थी।
  • यह अध्ययन सीसीएमबी के अलावा बीरबल साहनी पुरा-वनस्पति विज्ञान संस्थान, लखनऊ, कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय, युनाइटेड किंगडम, जोहान्सबर्ग विश्वविद्यालय, दक्षिण अफ्रिका, नानयांग टेक्नोलॉजिकल विश्वविद्यालय, सिंगापुर के वैज्ञानिकों द्वारा संयुक्त रूप से किया गया है। वैज्ञानिकों ने एशियाई और दक्षिण अफ्रिकी चीतों के विकास क्रम के विवरण को गहराई से समझने के लिए माइटोकॉन्ड्रियल डीएनए का विश्लेषण किया है। उन्होंने पाया कि क्रमिक विकास के साथ चीतों की ये दोनों आबादी एक-दूसरे से भिन्न होती गईं। यह अध्ययन हाल ही में शोध पत्रिका साइंटिफिक रिपोर्ट्स में प्रकाशित किया गया है।

हिमालय के अन्‍य हिस्‍सों से ज्‍यादा तेजी से पिघल रहे हैं सिक्किम के ग्‍लेशियर

  • विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत हिमालय के भू-विज्ञान के अध्ययन से संबंधित एक स्वायत्त अनुसंधान संस्थान, वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी (डब्‍ल्यूआईएचजी), देहरादून के वैज्ञानिकों ने पता लगाया है कि अन्य हिमालयी क्षेत्रों की तुलना में सिक्किम के ग्लेशियर बड़े पैमाने पर पिघल रहे हैं।

अध्‍ययन के मुख्य बिंदु

  • साइंस ऑफ़ द टोटल एनवायरनमेंट में प्रकाशित अध्ययन में 1991-2015 की अवधि के दौरान सिक्किम के 23 ग्लेशियरों पर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव का आकलन किया गया और इससे यह पता चला कि 1991 से 2015 तक की अवधि में सिक्किम के ग्लेशियर काफी पीछे खिसक गए हैं और उनकी बर्फ पिघलती जा रही है। जलवायु परिवर्तन के कारण सिक्किम के छोटे आकार के ग्लेशियर पीछे खिसक रहे हैं और बड़े ग्लेशियर पिघलते जा रहे हैं।
  • अन्य हिमालयी क्षेत्रों की तुलना में आयामी परिवर्तन का पैमाना और मलबे की वृद्धि की मात्रा सिक्किम में अधिक है। ग्लेशियर के व्यवहार में प्रमुख बदलाव 2000 के आसपास हुआ। पश्चिमी और मध्य हिमालय के विपरीत, जहां हाल के दशकों में ग्लेशियरों के पिघलने की गति धीमी हुई है, वहीं सिक्किम के ग्लेशियरों में 2000 के बाद इसमें नाममात्र का धीमापन देखा गया है। ग्लेशियर में हो रहे बदलावों का प्रमुख कारण गर्मियों के तापमान में वृद्धि है।
  • सिक्किम हिमालयी ग्लेशियरों की लंबाई, क्षेत्र, मलबे के आवरण, हिम-रेखा की ऊंचाई (एसएलए) जैसे विभिन्न मापदंडों और उन पर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को समझने के लिए डब्‍ल्यूआईएचजी के वैज्ञानिकों ने इस क्षेत्र के 23 प्रतिनिधि ग्लेशियरों का चयन किया। विषय से संबंधित पहले से मौजूद ज्ञान का आकलन करने के लिए अध्ययन से संबंधित विस्तृत और कठिन साहित्य सर्वेक्षण किया गया। इसके बाद, अध्ययन क्षेत्र में फैले प्रतिनिधि ग्लेशियरों का चयन आकार, लंबाई, मलबे के आवरण, ढलान, पहलू जैसे विविध मानदंडों के आधार पर किया गया। फिर, चयनित ग्लेशियरों को कवर करते हुए मल्टी-टेम्पोरल और मल्टी-सेंसर उपग्रह डेटा प्राप्‍त किए गए। टीम ने इन परिणामों का विश्लेषण किया और पहले से मौजूद अध्ययनों के साथ उनकी तुलना की तथा ग्लेशियरों की स्थिति को समझने के लिए उन पर प्रभाव डालने वाले विभिन्न कारकों का व्यवस्थित रूप से पता लगाया गया।
  • इस क्षेत्र के ग्‍लेशियरों का व्‍यवहार विविधता से भरपूर है और ऐसा पाया गया है कि यह प्राथमिक तौर पर ग्‍लेशियर के आकार, मलबे के आवरण और ग्‍लेशियर झीलों से निर्धारित होता है। हालांकि छोटे (3 वर्ग किमी से कम) और बड़े आकार के ग्लेशियरों (10 वर्ग किमी से अधिक) दोनों के ही द्रव्‍यमान में सामान्‍यत: हानि देखी जा रही है, लेकिन ऐसा प्रतीत होता है, जैसे उन्‍होंने जलवायु परिवर्तनों से निपटने के लिए वे अलग-अलग तरीके अपनाये हैं। जहां छोटे ग्‍लेशियर विहिमनदन से पीछे खिसक हे हैं, वहीं बड़े ग्‍लेशियरों में बर्फ पिघलने के कारण द्रव्यमान की हानि हो रही है।

क्या होंगें अध्यनन के लाभ?

  • अब तक सिक्किम के ग्‍लेशियरों का संतोषजनक अध्‍ययन नहीं किया गया था और फील्‍ड-बेस्‍ड मास बेलेंस आकलन केवल एक ग्‍लेशियर (चेंग्‍मेखांग्‍पु) तक सीमित था और यह अल्‍पावधि (1980-1987) तक ही चला था। इन अध्‍ययनों की प्रकृति क्षेत्रीय है और इसमें अलग-अलग ग्‍लेशियर के व्‍यवहार पर बल नहीं दिया गया। इसके अतिरिक्‍त इस क्षेत्र में अधिकांश आकलन केवल लम्‍बाई/क्षेत्र के बदलावों तक ही केंद्रित रहे हैं। वेग का आकलन भी अत्‍यंत दुर्लभ रहा है।
  • इस अध्‍ययन में पहली बार ग्‍लेशियर के विविध मानकों यथा लम्‍बाई, क्षेत्र, मलबे के आवरण, हिम-रेखा की ऊंचाई (एसएलए), ग्‍लेशियर झीलों, वेग और बर्फ पिघलने का अध्‍ययन किया गया और सिक्किम में ग्‍लेशियरों की स्थिति और व्‍यवहार की स्‍पष्‍ट तस्‍वीर प्रस्‍तुत करने के लिए उनके अंतर-संबंध का पता लगाया गया।
  • ग्‍लेशियरों के आकार साथ ही साथ उनमें हो रहे परिवर्तनों की दिशा की सटीक जानकारी, जिसे मौजूदा अध्‍ययन में उजागर किया गया है, वह जलापूर्ति और ग्‍लेशियर के संभावित खतरों के बारे में आम जनता, विशेषकर उनके निकटवर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के बीच जागरूकता उत्‍पन्‍न कर सकता है। यह अध्ययन ग्लेशियर परिवर्तनों पर पर्याप्त आधारभूत डेटा प्रदान कर सकता है और ग्लेशियर मापदंडों और विभिन्न प्रभावकारी कारकों के बीच आकस्मिक संबंधों का व्यवस्थित रूप से पता लगा सकता है। इससे ग्लेशियर की स्थिति की स्पष्ट समझ भविष्य के अध्ययन को अनुकूल बनाने के साथ-साथ आवश्यक उपाय करने में मदद करेगी।

:: विविध ::

टोक्यो ओलंपिक 2020 स्थगित

  • अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (आइओसी) के अध्यक्ष थॉमस बाक ने कहा कि टोक्यो ओलंपिक अगले साल गर्मियों से पहले हो सकते हैं लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि इन खेलों के कार्यक्रम को बनाना मुश्किल चुनौतीपूर्ण होगा। नया कार्यक्रम बनाने के लिए 'हेयर वी गो' कार्यबल बनाया गया है।"

पेरिस ओलंपिक 2024 तय समय

  • कोरोना वायरस संक्रमण के कारण टोक्यो ओलंपिक ओलंपिक स्थगित होने का असर पेरिस में 2024 में होने वाले खेलों पर नहीं पड़ेगा। आयोजन समिति के प्रमुख टोनी एस्तांगुत ने यह बात कही। उन्होंने कहा, ‘टोक्यो ओलंपिक को स्थगित करने का फैसला सही है। हम अपने खेलों की तैयारी कर रहे हैं और टोक्यो खेलों का असर उस पर नहीं पड़ेगा।

पृष्ठभूमि

  • कोरोना वायरस के कारण जापान के प्रधानमंत्री एबी शिंजो और बाक ने मंगलवार को इस साल होने वाले टोक्यो ओलंपिक को अगले साल के लिए स्थगित कर दिया था।

:: प्रिलिम्स बूस्टर ::

  • #StayHomeIndiaWithBooks पहल किस संस्था के द्वारा शुरू की गई है? (नेशनल बुक ट्रस्ट-NBT)
  • हाल ही में भारत सरकार के द्वारा रेलवे में तकनीकी सहयोग के लिए किस देश के साथ समझौता किया गया है? (जर्मनी)
  • आगामी अंडर-17 फीफा महिला विश्व कप का आयोजन कहाँ किया जाएगा? (भारत-नवी मुंबई, कोलकाता, अहमदाबाद, भुवनेश्वर और गुवाहाटी)
  • कोरोना वायरस के कारण बुलाए गए जी-20 देशों के आपातकालीन शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता कौन करेगा? (सऊदी अरब सुलतान सलमान बिन अब्दुल अजीज अल साऊद)
  • चाड में आतंकवादी हमले के कारण चर्चित बोको हराम समूह किस देश का प्रमुख आतंकवादी संगठन है? (नाइजीरिया)
  • भूकंप के कारण चर्चित रहे कुरील द्वीप समूह को लेकर किन देशों के मध्य विवाद है? (रूस और जापान)
  • पुनर्पूंजीकरण से चर्चा में रही क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों की पूंजी में सभी संगठक घटकों का योगदान कितना होता है? (केंद्र 50%, राज्य 15% और प्रायोजित बैंक 35%)
  • हाल ही में पुणे के अगहरकर रिसर्च इंस्टीट्यूट द्वारा विकसित गेहूं की बायोफोर्टीफाइड प्रजाति का नाम क्या है? (एमएसीएस 4028)
  • हाल ही में चर्चा में रहे भारतीय गेहूं और जौ अनुसंधान संस्‍थान कहाँ स्थित है? (करनाल,हरियाणा)
  • आंतरिक दहन इंजनों की ईंधन दक्षता में सुधार हेतु एआरसीआई द्वारा किस नई तकनीक का विकास किया गया है? (अल्ट्राफास्ट लेजर सरफेस टेक्सचरिंग तकनीक)
  • हाल ही में चर्चा में रहे क्वांटम केमिस्‍ट्री क्या है? (बिना प्रयोगशाला के कंप्यूटर अनुप्रयोग धारा परमाणु और अणुओं के गुणों को परखना)
  • अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति के वर्तमान अध्यक्ष कौन हैं एवं वर्ष 2024 के ओलंपिक का आयोजन कहाँ किया जाएगा? (थॉमस बाक, 2024 ओलंपिक-पेरिस)
  • सिक्किम में हिमालय पर शोध से चर्चा में रहे वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी संस्थान कहाँ स्थित है? (देहरादून)
  • मधुमक्खी पालन में उपयोग होने वाले नए मधुमक्खी के छत्ते का विकास करने के कारण चर्चा में रहे हिमालय जैव-संपदा प्रौद्योगिकी संस्थान कहाँ स्थित है? (पालमपुर)
  • आतंकी हमले के कारण चर्चा में रहे प्रसिद्ध धर्मशाला गुरुद्वारा कहाँ स्थित है? (काबुल अफगानिस्तान)

स्रोत साभार: Dainik Jagran (Rashtriya Sanskaran), Dainik Bhaskar (Rashtriya Sanskaran), Rashtriya Sahara (Rashtriya Sanskaran) Hindustan Dainik (Delhi), Nai Duniya, Hindustan Times, The Hindu, BBC Portal, The Economic Times (Hindi & English), PTI, PIB

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