(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (26 दिसंबर 2019)

दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर


(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (26 दिसंबर 2019)


:: राष्ट्रीय समाचार ::

अटल भूजल योजना

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अटल बिहारी वाजपेयी की 95वीं जयंती के मौके पर दिल्ली में अटल भूजल योजना की शुरुआत की। इसके जरिए भूजल का प्रबंधन किया जाएगा और हर घर तक पीने के स्वच्छ पानी को पहुंचाने की योजना पर काम होगा। मंगलवार को ही पीएम मोदी के नेतृत्व में हुई कैबिनेट मीटिंग में इसे मंजूरी दी गई थी।

मुख्य तथ्य

  • अटल भूजल योजना को 12 दिसंबर को ही वर्ल्ड बैंक की ओर से मंजूरी मिली है। 6,000 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना में 50 फीसदी हिस्सेदारी भारत सरकार की होगी, जबकि आधा हिस्सा वर्ल्ड बैंक की ओर से खर्च किया जाएगा।
  • इस स्कीम को जल संकट से प्रभावित उत्तर प्रदेश, गुजरात, हरियाणा, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र में लागू किया जाएगा। इन राज्यों का चयन भूजल की कमी, प्रदूषण और अन्य मानकों को ध्यान में रखते हुए किया गया है।
  • सरकार का दावा है कि इस योजना से किसानों की आय दोगुनी करने में मदद मिलेगी। इस योजना से 8,350 गांवों को लाभ मिलेगा। सरकार के मुताबिक पानी की समस्या से निपटने के लिए अटल भूजल योजना पर पांच साल में 6,000 करोड़ रुपये का खर्च होगा।
  • ग्राम पंचायत स्तर पर जल सुरक्षा के लिए काम किया जाएगा। भूजल के संरक्षण के लिए शैक्षणिक और संवाद कार्यक्रमों को संचालित किया जाएगा।
  • इस स्कीम में आम लोगों को भी शामिल किया जाएगा। वाटर यूजर असोसिएशन, मॉनिटरिंग और भूजल की निकासी के डेटा संकलन की मदद से इस स्कीम को आगे बढ़ाया जाएगा।

पृष्टभूमि

  • गौरतलब है कि नीति आयोग ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि लगातार घट रहा भूजल स्तर वर्ष 2030 तक देश में सबसे बड़े संकट के रूप में उभरेगा । केंद्रीय भूजल बोर्ड तथा राज्य भूजल विभागों के आंकड़ों के अनुसार, देश में कुल मूल्यांकित 6584 इकाई (ब्लॉक/ तालुका / मंडल) में से 1034 इकाइयों को अत्यधिक दोहन की गयी इकाइयों की श्रेणी में रखा गया है। सामान्यतः इन्हें 'डार्क ज़ोन (पानी के संकट की स्थिति) कहा जाता है।

भारतनेट परियोजना

  • देश में डिजिटल माहौल को बढ़ावा देने के लिए मोदी सरकार गांव-गांव तक इंटरनेट सेवा पहुंचाने की कोशिश में जुटी है. लोगों के जीवन पर इंटरनेट के बढ़ते प्रभाव की वजह से मोदी सरकार ने ऐलान किया है कि अगले साल देश के करीब 2.5 लाख गांवों को मुफ्त वाई-फाई सेवा से जोड़ दिया जायेगा.
  • फिलहाल देश में भारतनेट परियोजना के तहत जुड़े 48,000 गांवों में वाई-फाई की सुविधा उपलब्ध है.भारतनेट ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क के जरिये देश भर के 2.5 लाख गांव को मार्च 2020 तक मुफ्त वाई-फाई सुविधा दी जाएगी.
  • सरकार 1.3 लाख ग्राम पंचायत को भारतनेट ऑप्टिकल फाइबर से जोड़ चुकी है. और उनका लक्ष्य मार्च 2020 तक 2.5 लाख ग्राम पंचायत को इससे जोड़ने का है. भारतनेट सेवा का उपयोग बढ़ाने के लिए मोदी सरकार भारतनेट से जुड़े सभी गांव को मार्च 2020 तक मुफ्त वाई-फाई सेवा देने जा रही है.
  • गांव में बने कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) पर लोगों को बैंकिंग सेवा दी जाएगी. इन केंद्रों की संख्या साल 2014 में 60,000 थी जो अब बढ़कर 3.60 लाख पर पहुंच गई है. हरियाणा में इस तरह के 11,000 सीएससी हैं, जो गांव के लोगों को 650 तरह की सेवा दे रहे हैं.
  • सीएससी ई-गवर्नेंस सर्विसेज इंडिया लिमिटेड देश के ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में डिजिटल ग्राम पहल योजना लागू कर रहा है. कुल मिलाकर मोदी सरकार देश के एक लाख गांव को डिजिटल गांव में तब्दील करने की तैयारी कर रही है. कॉमन सर्विस सेंटर ने गांव के लोगों को बैंकिंग सेवा देने के लिए HDFC बैंक, आईसीआईसीआई बैंक और एक्सिस बैंक से करार किया है. इसके तहत गांव के लोगों को बैंक अकाउंट खोलने से लेकर, लोन और नकद निकासी तक, हर सुविधा मिलती है.

क्या है भारतनेट परियोजना?

  • भारतनेट परियोजना नेशनल ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क का नया ब्रांड नाम है. भारतनेट को देश के 2.5 लाख ग्राम पंचायत को ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी देने के लिए अक्टूबर 2011 में लॉन्च किया गया था. साल 2015 में इसका नाम बदलकर भारतनेट रखा गया था. इसका उद्देश्य देश के 2.5 लाख ग्राम पंचायतों को इंटरनेट की 100 एमबीपीएस कनेक्टिविटी स्पीड से जोड़ना है.
  • भारतनेट विश्व का सबसे बड़ा ग्रामीण ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी कार्यक्रम है. इसे मेक इन इंडिया के तहत कार्यान्वित किया जा रहा है.

'अटल सुरंग'

  • सरकार ने बुधवार को रोहतांग दर्रे के नीचे बनी लेह और मनाली को जोड़ने वाली सामरिक सुरंग का नामकरण 'अटल सुरंग करने की घोषणा की है। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की 95वीं जयंती के अवसर पर यह घोषणा की गई। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक समारोह में इसकी घोषणा करते हुए कहा कि मनाली को लेह से जोड़ने वाली, रोहतांग सुरंग, अब अटल सुरंग के नाम से जानी जाएगी।
  • सीमा सड़क संगठन :बीआरओ: सुरंग का निर्माण कर रही है और निर्माणकार्य 2020 तक पूरा हो जायेगा। उन्होंने कहा कि सुरंग पूरी होने पर सभी मौसम में लाहौल और स्पीति घाटी के सुदूर के क्षेत्रों में सम्पर्क सुगम होगा और इससे मनाली एवं लेह की दूरी 46 किलोमीटर कम हो जायेगी।

पृष्टभूमि

  • उल्लेखनीय है कि रोहतांग दर्रे के नीचे रणनीतिक महत्‍व की सुरंग बनाए जाने का ऐतिहासिक फैसला तीन जून 2000 को लिया गया था जब वाजपेयी देश के प्रधानमंत्री थे। सुंरग के दक्षिणी हिस्‍से को जोड़ने वाली सड़क की आधारशिला 26 मई 2002 को रखी गई थी। कुल 8.8 किलोमीटर लंबी यह सुरंग 3000 मीटर की ऊंचाई पर बनायी गयी दुनिया की सबसे लंबी सुरंग है। 15 अक्‍टूबर 2017 को सुरंग के दोनों छोर तक सड़क निर्माण पूरा कर लिया गया था।

डिजिटल जनगणना

  • भारत में पहली बार 16वीं जनगणना पूरी तरह डिजिटल होने जा रही है। डिजिटल होने की वजह से विभिन्न पैरामीटर पर जनगणना के आंकड़े एक से दो साल के भीतर जारी कर दिये जाएंगे। इसके पहले कागज पर जुटाए आंकड़ों की पूरी रिपोर्ट जारी करने में आठ से 10 साल तक लग जाते थे। 2011 में हुई जनगणना के कई मानकों पर आखिरी रिपोर्ट अब तक पूरी नहीं हो पाई है। रिपोर्ट वक्त से आने पर सरकार को जरूरतमंद वर्गो के लिए विभिन्न योजनाएं तैयार करने में मदद मिलेगी।
  • डिजिटल डाटा जुटाने के लिए जनगणना में लगे 30 लाख से अधिक कर्मचारी एनड्रायड पर आधारित स्मार्टफोन या टैब का प्रयोग करेंगे। इसके लिए विशेष एप विकसित किया गया है। कर्मचारियों को सभी व्यक्तियों के आंकड़े इसी एप के सहारे डिजिटल फार्म में भरना होगा। सारे आंकड़े भरे जाने के बाद उसे सेव करते ही ये आंकड़े केंद्रीय स्तर पर कार्यरत सेंसस 2021 मैनेजमेंट एंड मॉनीटरिंग सिस्टम में सुरक्षित हो जाएगा। इस ऐप को इस तरह से तैयार किया गया है कि यह उन जगहों पर भी काम करेगा, जहां इंटरनेट का नेटवर्क नहीं होगा। ऐसी स्थिति में जनगणनाकर्मी इंटरनेट के नेटवर्क में आने के बाद आंकड़ों को सेव कर सकेंगे।

कागज पर जुटाए जाते थे आंकड़े

  • इसके पहले 2011 की जनगणना में हर व्यक्ति से जुड़े आंकड़े को ए3 साइज के कागज पर जुटाया जाता है। इसके बाद एक-एक कागज को स्कैन कर उसे डिजिटल रूप में बदला जाता था। जाहिर है कि 2011 में 121 करोड़ लोगों के आंकड़े डिजिटल रूप में लाने में कई वर्ष लग गए थे। इसके बाद इन आंकड़ों का अलग-अलग पैरामीटर पर विश्लेषण किया जाता है, जिसे समय-समय पर रजिस्ट्रार जनरल आफ इंडिया जारी करता है। 2011 के आंकड़ों का विश्लेषण इस साल तक चल रहा है। इससे सबसे बड़ी समस्या यह आती है कि जब सरकार किसी एक पैरामीटर पर गरीबों के लिए कोई योजना बनाती है, तबतक ये आंकड़े बदल चुके होते हैं। ऐसे में सभी जरूरतमंद तक योजनाओं का लाभ नहीं पहुंच पाता है।

इस बार कितनी अलग होगी जनगणना

  • इस बार कई नए पैरामीटर जनगणना के आंकड़े जुटाए जा रहे हैं। जिनमें मोबाइल फोन, स्मार्टफोन, इंटरनेट का उपयोग तक शामिल है। यह भी देखा जाएगा कि लोगों के घर की छत, दीवारें और फर्श किस चीज की बनी है। साथ ही परिवार में गैस, बिजली और पानी के उपयोग के बारे में जानकारी जुटाई जाएगी। यह भी पूछा जा रहा है कि किरायेदार के अलावा जो अपने अपने घर में रह रहे हैं, वह घर परिवार के किस सदस्य के नाम पर है और परिवार के किस-किस सदस्य के बैंक में खाते हैं। यदि एक-डेढ़ साल के भीतर देश के सभी नागरिकों से इस तरह के आंकड़े मिल जाते हैं, तो जाहिर है सरकार के लिए उनके विकास की योजनाएं बनाने में मदद मिलेगी।

देश में सभी घरों की होगी मैपिंग

  • वैसे हर बार की तरह इस बार भी जनगणना तीन चरणों में पूरी की जाएगी। प्रथम चरण में 2020 में अप्रैल से सितंबर के बीच जनगणनाकर्मी पूरे देश में सभी घरों की मैपिंग करेंगे, जिसमें घर में रहने वाले परिवार के पास पशुओं की संख्या आदि के बारे में जानकारी जुटाई जाएगी। इसी दौरान एनपीआर से जुड़े आंकड़े भी एकत्रित किये जाएंगे। असली जनगणना दूसरे चरण में 2021 को नौ फरवरी से 28 फरवरी के बीच होगी, जब जनगणनाकर्मी देश में रहने वाले एक-एक व्यक्ति की जानकारी जुटाएंगे। इसके बाद एक मार्च से सात मार्च तक तीसरे चरण में दूसरे चरण की जानकारियों की पुष्टि की जाएगी और यदि नौ से 28 फरवरी के बीच पैदा हुए बच्चों को भी इसमें शामिल किया जाएगा।

अटल बिहारी वाजपेयी चिकित्‍सा विश्‍वविद्यालय

  • प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने लखनऊ में अटल बिहारी वाजपेयी चिकित्‍सा विश्‍वविद्यालय की आधारशिला रखी।

:: अंतर्राष्ट्रीय समाचार ::

कंट्रीज ऑफ पर्टिकुलर कंसर्न (सीपीसी): अमेरिका

  • अमेरिका ने पिछले हफ्ते ही पाकिस्तान को धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन करने वाले देशों की श्रेणी में रखने का ऐलान किया था। इस पर इमरान सरकार ने ऐतराज जताया। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर फैसले को एकतरफा और मनमाना करार दिया। साथ ही लिस्ट में भारत को न रखने के लिए अमेरिका को पूर्वाग्रह से ग्रसित बताया। पाकिस्तान ने रिपोर्ट की विश्वसनीयता और पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह जमीनी हकीकत से बिल्कुल अलग है।

पृष्टभूमि

  • अमेरिका ने पिछले हफ्ते लिस्ट जारी कर पाकिस्तान के साथ म्यांमार, चीन, इरीट्रिया, ईरान, उत्तर कोरिया, सऊदी अरब, ताजिकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान को कंट्रीज ऑफ पर्टिकुलर कंसर्न (सीपीसी) श्रेणी में रखा था। अमेरिकी विदेश विभाग हर साल अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता कानून 1998 के तहत अपनी सीपीसी लिस्ट तैयार करता है। इसमें उन देशों को रखा जाता है, जहां धार्मिक आधार पर स्वतंत्रता का उल्लंघन होता है। इस श्रेणी में रखे गए देशों पर अमेरिकी सरकार आर्थिक-वाणिज्यिक प्रतिबंध लगाती है।
  • संयुक्त राष्ट्र ने माना है कि पाकिस्तान में धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति लगातार खराब हो रही है। वहां के हिंदू और ईसाई समुदाय सबसे ज्यादा खतरे में हैं। इन दोनों समुदायों की महिलाओं और बच्चियों को अगवा कर धर्म परिवर्तन कराया जाता है। मुस्लिम युवकों से शादी होने के बाद उनके परिवार के पास लौटने की उम्मीद बहुत कम होती है। यूएन की कमीशन ऑन स्टेटस ऑफ वीमेन (सीएसडब्ल्यू) की रिपोर्ट के मुताबिक, इमरान खान सरकार अल्पसंख्यकों पर हमले के लिए कट्टरपंथी विचारों को बढ़ावा दे रही है। कमीशन ने 47 पन्नों की रिपोर्ट को 'पाकिस्तान: धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला' नाम दिया है।

:: भारतीय अर्थव्यवस्था ::

ऑयल और गैस सेक्टर के विवादों को सुलझाने के लिए कमेटी गठित

  • ऑयल एंड गैस सेक्टर के विवादों को सुलझाने के लिए सरकार ने एक विशेषज्ञ कमेटी का गठन किया है। यह कमेटी सेक्टर के विवादों का निश्चित समयसीमा के भीतर निराकरण करेगी। इस सेक्टर में तेल खोज और उत्पादन को लेकर अक्सर विवाद सामने आते हैं, जिनके निराकरण की प्रक्रिया बहुत लंबी और उबाऊ होती है। इससे सेक्टर का बहुत नुकसान होता है और निवेश अधर में लटक जाता है। इस कमेटी के गठन का मकसद निवेश को सुरक्षित रखना और सेक्टर में नए निवेश को आकर्षित करना है।
  • इस कमेटी में पूर्व तेल सचिव जीसी चतुर्वेदी, ऑयल इंडिया लिमिटेड के पूर्व प्रमुख सी. बोरा और ¨हडाल्को इंडस्ट्रीज लिमिटेड के एमडी सतीश पाई को शामिल किया गया है। इस पैनल का कार्यकाल तीन वर्ष का होगा। यह कमेटी तीन महीने के भीतर किसी विवाद का हल सुलझाने की कोशिश करेगी।
  • यह कमेटी साझीदारों के बीच हुए आपसी विवाद या सरकार के साथ होने वाले विवादों में मध्यस्थता करेगी। अधिसूचना के मुताबिक घरेलू ऑयल ब्लॉक के किसी कांट्रैक्ट में सामने आने वाले विवाद को कमेटी के समक्ष रखा जा सकेगा। इसके लिए दोनों पक्षों की लिखित सहमति जरूरी होगी। एक बार मामला कमेटी के पास जाने के बाद कोई पक्ष इससे अलग नहीं हो सकेगा और इस बीच इसे कोर्ट में ले जाने की अनुमति भी नहीं होगी।
  • किसी मामले में मध्यस्थता के दौरान कानून के मुताबिक कमेटी सभी शक्तियों का उपयोग कर सकेगी। कमेटी मामले को तीन महीने में निपटाने की कोशिश करेगी। हालांकि, दोनों पक्षों की अनुमति के बाद कमेटी समयसीमा को बढ़ा सकेगी। मध्यस्थता की प्रक्रिया में यह जरूरत के मुताबिक किसी बाहरी एजेंसी या थर्ड पार्टी की मदद भी ले सकेगी। दोनों पक्षों को मध्यस्थता की पूरी प्रक्रिया को गुप्त रखना होगा और इसे किसी अन्य मध्यस्थता अदालत या कोर्ट में सबूत के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा।

जॉनसन एंड जॉनसन

  • बच्चों के लिए उत्पाद बनाने वाली कंपनी जॉनसन एंड जॉनसन पर 230 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया है। कंपनी ने जीएसटी कटौती का लाभ ग्राहकों को नहीं दिया था। नेशनल एंटी प्रोफिटियरिंग अथॉरिटी (एनएए) ने अपने मंगलवार को दिए फैसले में कहा है कि जिस हिसाब से कंपनी ने टैक्स कटौती की गणना की थी, वो काफी गलत आकलन था। जांच में पाया गया कि 15 नवंबर 2017 को कुछ वस्तुओं पर जीएसटी की दर 28 फीसदी से घटाकर 18 फीसदी की गई तो जॉनसन एंड जॉनसन ने ग्राहकों को फायदा नहीं दिया।

तीन महीने में भरनी होगी जुर्माने की रकम

  • कंपनी को अगले तीन महीने में जुर्माने की रकम को भरना होगा। जेएंडजे एक बहुराष्ट्रीय कंपनी है, जिसका कारोबार दुनिया के कई देशों में फैला हुआ है। हाल ही में इसके उत्पादों में कैंसरकारक तत्व होने की बात सामने आने पर कई देशों ने अपने यहां पर बिक्री पर रोक लगा दी थी।
  • भारत में यह कंपनी कंज्यूमर हेल्थकेयर, मेडिकल डिवाइस और फार्मा प्रोडक्ट के कारोबार में है। इसके बेबी ऑयल, क्रीम, पाउडर और सेनिटरी नैपकिन (स्टेफ्री) जैसे उत्पाद काफी इस्तेमाल किए जाते हैं। देश के 4,000 करोड़ रुपये के बेबी केयर बाजार में 2018 के आखिर तक जेएंडजे का 75 फीसदी शेयर होने का अनुमान था। वित्त वर्ष 2017-18 में भारत में कंपनी की आय 5,828 करोड़ रुपये और मुनाफा 688 करोड़ रुपये रहा था।

पृष्टभूमि

  • जीएसटी दरें घटने का पूरा फायदा ग्राहकों को नहीं देने के कारण एफएमसीजी कंपनियों प्रॉक्टर एंड गेम्बल (पीएंडजी) और नेस्ले पर भी मुनाफाखोरी रोधी प्राधिकरण जुर्माना लगा चुका है। एनएए ने पीएंडजी पर 250 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था, जबकि नेस्ले को 90 करोड़ का भुगतान करना पड़ा है।

:: विज्ञान और प्रौद्योगिकी ::

अंतरिक्ष कबाड़ का सटीक पता लगाने के लिए नई एल्गोरिद्म

  • चीन में वैज्ञानिकों ने अंतरिक्ष में पृथ्वी की कक्षा में फैले कबाड़ का पता लगाने की तकनीकि की सटीकता में सुधार किया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि नई विधि से स्पेसक्राफ्ट के लिए आसानी से सुरक्षित मार्ग की तलाश कर ली जाएगी।
  • अंतरिक्ष में फैले कबाड़ या मलबे में पुराने सेटेलाइट जो अब काम में नहीं हैं, रॉकेट के अवशेष और ऐसे ही उपकरण जो आपस में टकराकर टूट जाते हैं आदि शामिल हैं। हालांकि, वैज्ञानिकों ने अंतरिक्ष में पृथ्वी की कक्षा में फैले कबाड़ की पहचान के लिए एक प्रणाली विकसित की हुई है, लेकिन इससे मलबे के छोटे और तेज गति वाले टुकड़े की पहचान करना असंभव था।

वैज्ञानिकों ने एल्गोरिद्म विकसित की

  • 'लेजर एप्लीकेशंस' जर्नल में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार ऐसे मलबे की सटीकता से पहचान के लिए वैज्ञानिकों ने एक एल्गोरिद्म विकसित की है। इसके माध्यम से लेजर रेंजिंग टेलीस्कोप से अंतरिक्ष मलबे की सटीकता का पता लगाने की सफलता दर में काफी सुधार हुआ है।
  • चाइनीज एकेडमी ऑफ सर्वेइंग एंड मैपिंग के तियानमिंग मा ने बताया कि नई तकनीक के बाद से 1500 किलोमीटर की दूरी तक मौजूद एक वर्ग मीटर तक के टुकड़े का पता लगाया जा सकता है। लेजर रेंजिंग टेक्नोलॉजी में किसी भी वस्तु की दूरी उस वस्तु से हुए लेजर प्रतिबिंब के जरिये मापी जाती है।
  • वैज्ञानिकों ने बताया कि अंतरिक्ष मलबे की सतह से प्रतिबिंबित लेजर बहुत कमजोर होता है। इससे अंतरिक्ष मलबे की गणना कमजोर हो जाती है। पिछले कुछ प्रयोगों में वैज्ञानिकों ने इसमें कुछ सुधार किया है, लेकिन पिछली तकनीक से केवल एक किलोमीटर के स्तर तक के मलबे की सटीकता से जानकारी मिल पाती थी। नए अध्ययन में पहली बार यह पाया गया कि नई एल्गोरिद्म के माध्यम से लेजर रेंजिंग टेलीस्कोप की सटीकता में काफी सुधार आया है। वैज्ञानिकों ने बीजिंग के फांगशेन लेजर रेंज टेलीस्कोप स्टेशन पर अपनी इस नई तकनीक की सटीकता का प्रदर्शन भी किया।

प्रोजेक्ट हर्बल ओरल फार्मूलेशन फ्राम पाइनस ट्री फॉर बोन डिसआर्डर

  • पहाड़ी क्षेत्र में पाए जाने वाला चीड़ अब घुटनों की दर्द भी मिटाएगा। हिमाचल प्रदेश के सोलन स्थित शूलिनी विश्वविद्यालय के अनुसंधानकर्ताओं ने इसमें औषधीय गुण खोजा है। वैज्ञानिकों ने इसे ओरल मेडिसन (टेबलेट) के रूप में तैयार किया है।
  • इसका सफल परीक्षण जानवरों पर किया जा चुका है और जल्द ही इसे मानव शरीर पर इस्तेमाल किया जाएगा। इसका पेटेंट करवा लिया गया है। औपचारिकताएं पूरी करने के बाद इसे भारतीय बाजारों में उतारा जाएगा।

ऑस्टियोपोरोसिस

  • एक अध्ययन के अनुसार महिलाओं में ऑस्टियोपोरोसिस यानी हड्डी रोग का खतरा 30 से 50 फीसद व पुरुषों में 15 से 30 फीसद तक होता है। ऑस्टियोपोरोसिस मेटाबोलिक और हार्मोनल बीमारी है, जोकि एस्ट्रोजन नामक हार्मोन तथा सूक्ष्म पोषक जैसे कैल्शियम, मैग्नीशियम व फास्फोरस में असंतुलन के कारण होती है। विटामिन डी की कमी से मीनोपॉज (रजोनिवृत्ति) से पहले हड्डियां कमजोर हो जाती हैं जिससे ऑस्टियोपोरोसिस हो जाता है। यह समस्या विशेषकर भारतीय महिलाओं में बड़ी मात्रा में सामने आ रही है। इस दवा से महिलाओं को खास कर बहुत मदद मिलेगी।
  • इस प्रोजेक्ट के लिए भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय से 21 लाख रुपये की मदद मिली। इससे फार्मोकोलॉजी रिसर्च लैब बनाकर रिसर्च शुरू की। प्रोजेक्ट को हर्बल ओरल फार्मूलेशन फ्राम पाइनस ट्री फॉर बोन डिसआर्डर का नाम दिया था।

चीड़ की तीन प्रजातियों में औषधीय गुण

  • पहाड़ी चीड़ की तीन प्रजातियों में इसके औषधीय गुण प्राप्त हुए हैं। 15 हजार फुट पर पाए जाने वाले ब्लू पाइन, गीरारिडकना और वालिखी में ये गुण मिले। इस पेड़ का उपयोग फर्नीचर बनाने और बिरोजा के लिए भी होता है।

2013 में प्रोजेक्ट शुरू, किन्नौर से मिली राह

  • शूलिनी विश्वविद्यालय के तीन अनुसंधानकर्ताओं डॉ. रोहित गोयल, डॉ. अदिति शर्मा व डॉ. दीपक कपूर ने ऑस्टियोपोरोसिस के इलाज के लिए नई हर्बल संरचना विकसित करने की योजना 2013 में बनाई थी। डॉ. रोहित ने बताया कि उन्हें पता चला था कि हिमाचल के जिला किन्नौर में स्थानीय लोग इस पेड़ की छाल का इस्तेमाल घुटनों की दर्द दूर करने में करते हैं। छाल से 25 फीसद औषधि को निकालकर उसे पेस्ट का रूप देते हुए गोली का आकार दिया गया।

रूस का स्वदेशी वैकल्पिक इंटरनेट सिस्टम

  • रूस ने अपने देश में वैकल्पिक इंटरनेट सिस्टम तैयार कर लिया है। साथ ही इसका प्रयोग भी सफल रहा है। सोमवार को जब लोगों को इस बारे में पता चला तो वो हैरान रह गए। गौर करने वाली बात यह है कि लोगों ने अपने इंटरनेट सिस्टम के इस्तेमाल के दौरान किसी भी तरह का बदलाव महसूस नहीं किया। लोग बिना रुकावट अपना इंटरनेट का प्रयोग करते रहे।
  • रूस की तरफ से पिछले तीन सालों यह प्रयास किए जा रहे थे कि अगर वर्ल्ड वाइड वेब से उसका संबंध टूट जाता है या अमेरिकी हस्तक्षेप में बढ़ोतरी होती है तो वह देश के लोगों को जोड़ने के लिए अपना इंटरनेट सिस्टम का प्रयोग कर सकता है। रूस के इस प्रयोग की अमेरिका, ब्रिटेन समेत कई देशों ने यह कहते हुए आलोचना की है कि इससे इंटरनेट ब्रेकअप होगा और रूस अपने ही देश के लोगों पर पूरा नियंत्रण रखना चाहता है। इससे पहले चीन और ईरान ऐसी कोशिश कर चुके हैं।

इंटरनेट पर किसी का अधिकार नहीं

  • गौरतलब है कि इंटरनेट किसी सरकार द्वारा नियंत्रित नहीं है। कोई एक व्यक्ति, कंपनी, संस्था या सरकार का इस पर अधिकार नहीं रखती है। लेकिन कुछ एजेंसी सलाह देकर, मानक निर्धारित कर इसे कम करने में मदद करती है। दुनिया में लगभग साढ़े चार सौ करोड़ लोग इंटरनेट का प्रयोग करते हैं।

ऐसे काम करता है इंटरनेट

  • डोमेन वह सिस्टम है, जो इंटरनेट में बताए गए नाम और आईपी एड्रेस स्टोर रखता है। डोमेन का जिक्र करते ही इंटरनेट सर्वर उसे संबंधित आईपी एड्रेस में ट्रांसलेट करके डेटा कंप्यूटर तक भेज देता है।
  • इंटरनेट में गाइडलाइन, स्टैंडर्ड और रिसर्च करने वाले समूह को वर्ल्ड वाइड कंसोर्टियम (W3C) कहते है।
  • सर्विस प्रोवाइडर भी तीन स्तरों पर हैं। पहली कंपनी समुद्र के नीचे केबल डालकर सर्विस प्रोवाइडर्स को दुनियाभर से जोड़ती हैं। दूसरी इन प्रोवाइडर्स को राष्ट्र से और तीसरी कंपनी स्थानीय प्रोवाइडर्स होती हैं।

:: पर्यावरण, पारिस्थितिकी और प्रदुषण ::

NTPC का 10 गीगावॉट सौर ऊर्जा क्षमता जोड़ने का लक्ष्‍य

  • सार्वजनिक क्षेत्र की बिजली कंपनी नेशनल थर्मल पावर कॉरपोरेशन (एनटीपीसी) की योजना 2022 तक 10 गीगावॉट (10,000 मेगावॉट) सौर बिजली क्षमता जोड़ने की है। कंपनी इस पर करीब 50,000 करोड़ रुपए का निवेश करेगी। यह निवेश मुख्य रूप से ग्रीन बांड के जरिये वित्तपोषित किया जाएगा।
  • अभी एनटीपीसी की स्थापित अक्षय ऊर्जा क्षमता 920 मेगावॉट की है। इसमें मुख्य रूप से सौर बिजली क्षमता शामिल है। एनटीपीसी ने 2032 तक 130 गीगावॉट की कंपनी बनने के लिए दीर्घावधि की योजना बनाई है। इसमें से 30 प्रतिशत अक्षय ऊर्जा क्षमता होगी।
  • सूत्र ने कहा कि कंपनी इस वित्त वर्ष के अंत तक 2,300 मेगावॉट सौर ऊर्जा के लिए निविदा निकालने का काम पूरा कर लेगी। उसके बाद कंपनी की योजना 2020-21 और 2021-22 में चार-चार गीगावॉट की क्षमता और जोड़ने की है।
  • सूत्र ने कहा कि कंपनी बाजार से किसी भी तरह का कर्ज जुटाने को तैयार है, बशर्ते यह सस्‍ता होना चाहिए। हालांकि, मुख्य रूप से कंपनी ग्रीन बांड के जरिये धन जुटाएगी। ये बांड शुद्ध रूप से स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं के लिए पेश किए जाएंगे। कंपनी का इरादा घरेलू ग्रीन बांड के जरिये धन जुटाने का है। एनटीपीसी की 10 गीगावॉट सौर ऊर्जा क्षमता जोड़ने की योजना इस दृष्टि से महत्वपूर्ण है कि भारत ने 2022 तक 175 गीगावॉट स्वच्छ ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य रखा है।
  • सूत्र ने कहा कि कंपनी कुछ सौर ऊर्जा परियोजनाएं उस योजना के तहत भी स्थापित करेगी, जिनमें उसे परियोजनाओं को आर्थिक रूप से व्यावहारिक बनाने के लिए वित्तपोषण मिलेगा। इससे वह दरों को तीन रुपए प्रति यूनिट से नीचे रख पाएगी।

:: विविध ::

'फनफोन' तूफान

  • दुनियाभर में जहां आज क्रिसमस मनाया जा रहा है वहीं मध्य फिलीपींस में तूफान 'फनफोन' ने तबाही मचा दी। इस कैथलिक बहुल देश के लाखों लोगों के क्रिसमस के जश्न पर विराम लग गया। यह तूफान यहां मंगलवार को पहुंचा था। तूफान के कारण बुधवार को हजारों लोग फंस गए या उन्हें ऊंचाई पर बने राहत शिविरों पर ले जाया गया। तूफान ने 16 लोगों की जान ले ली।

:: प्रिलिम्स बूस्टर ::

  • हाल ही में केंद्रीय सरकार के द्वारा भूजल प्रबंधन एवं स्वच्छ पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु किस योजना की संस्तुति प्रदान की है? (अटल भूजल योजना)
  • देश के करीब 2.5 लाख गांवों को मुफ्त वाई-फाई सेवा से जोड़ने के लिए कौन-सी योजना का क्रियान्वयन किया जा रहा है? (भारत नेट परियोजना)
  • रोहतांग सुरंग किन दो स्थानों को जोड़ती है? (मनाली को लेह)
  • रोहतांग सुरंग को अब किस नाम से जाना जाएगा? (अटल सुरंग)
  • धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन करने वाले देशों को लेकर चर्चित रही कंट्रीज ऑफ पर्टिकुलर कंसर्न (सीपीसी) श्रेणी किस देश से संबंधित है? (अमेरिका)
  • हाल ही में नेशनल एंटी प्रोफिटियरिंग अथॉरिटी (एनएए) द्वारा किस कंपनी पर जीएसटी कटौती का लाभ ग्राहकों को नहीं देने के कारण जुर्माना लगाया गया है? (जॉनसन एंड जॉनसन)
  • हाल ही में किस देश के द्वारा स्वदेशी वैकल्पिक इंटरनेट सिस्टम का सफल परीक्षण किया गया? (रूस)
  • हाल ही में कौन सा देश तूफान 'फनफोन' से प्रभावित रहा? (फिलीपींस)

स्रोत साभार: Dainik Jagran (Rashtriya Sanskaran), Dainik Bhaskar (Rashtriya Sanskaran), Rashtriya Sahara (Rashtriya Sanskaran) Hindustan Dainik (Delhi), Nai Duniya, Hindustan Times, The Hindu, BBC Portal, The Economic Times (Hindi & English), PTI, PIB

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