(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (26 अप्रैल 2020)

दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर


(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (26 अप्रैल 2020)


:: राष्ट्रीय समाचार ::

सीमा सड़क संगठन ने खोला रोहतांग दर्गा

चर्चा में क्यों?

  • सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) ने कोविड-19 लॉकडाउन के बीच आज बर्फ की सफाई के बाद तीन सप्ताह से ज्यादा समय पहले ही रोहतांग दर्रा (समुद्री स्तर से 13,500 फुट ऊपर) खोल दिया है। यह हिमाचल प्रदेश के लाहौल और स्पीति जिले को भारत के बाकी हिस्से से जोड़ने वाला मुख्य मार्ग है। पिछले साल इस दर्रे को 18 मई को खोला गया था।
  • रोहतांग दर्रा पिछले साल की तुलना में तीन सप्ताह पहले ही यातायात के लिए खोले जाने से केन्द्र और राज्य सरकारों के लिए स्थानीय आबादी तक राहत सामग्रियां और चिकित्सा सामान पहुंचाना आसान हो जाएगा। इसके साथ ही कृषि गतिविधियां भी फिर से चालू हो सकेंगी, जो जिले की अर्थव्यवस्था के लिए रीढ़ के समान हैं।
  • दर्रे को खोलने के लिए बर्फ की सफाई का काम हर साल किया जाता है, क्योंकि हर साल नवंबर से मई के मध्य तक लगभग छह महीने तक रोहतांग दर्रा बर्फ से पटा रहता है। यह 12 दिसंबर, 2019 तक खुला रहा था। पूरी घाटी सर्दियों के दौरान किसी भी तरह की ढुलाई/ आपूर्तियों के लिए हवाई माध्यम पर निर्भर रहती है।

रोहतांग दर्गा से संबधित तथ्य

  • मनाली से लगभग 51 किमी की दूरी पर, और 3,978 मीटर की ऊंचाई पर अद्भुत रोहतांग दर्रा है, जो लाहौल-स्पीति, पंगी घाटी और लद्दाख क्षेत्र का मुख्य प्रवेश द्वार है। हिमाचल प्रदेश राज्य के सबसे सुंदर स्थानों में से एक, यह दर्रा वर्ष के अधिकांश समय बर्फ से ढका रहता है, और यह केवल जून से अक्टूबर महीने तक आवागमन के योग्य रहता है। चिनाब और ब्यास नदियों के घाटियों के बीच के जलक्षेत्र पर स्थित यह दर्रा, एक सुरम्य ड्राइव के लिए अत्यंत अनुकूल है। ऐसा कहा जाता है कि एक समय यह दर्रा पीर पंजाल पर्वतीय शृंखला के दोनों ओर रहने वाले लोगों के लिए, एक प्राचीन व्यापार मार्ग के रूप में किया जाता था।

:: अंतर्राष्ट्रीय समाचार ::

यमन में अलगाववादियों ने तोडा शांति समझौता

चर्चा में क्यों?

  • यमन के दक्षिणी अलगाववादियों ने देश की अंतरराष्ट्रीय रूप से मान्यता प्राप्त सरकार के साथ शांति समझौता तोड़ दिया और क्षेत्रीय राजधानी अदन पर कब्जा करने का दावा किया जिससे दोनों पक्षों के बीच लड़ाई शुरू होने का खतरा पैदा हो गया है।
  • अलगाववादी ‘सदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल’ ने आपातकाल की घोषणा की और कहा कि वह अहम दक्षिणी बंदरगाह शहर तथा अन्य दक्षिणी प्रांतों का ‘‘शासन स्वयं’’ करेगी। संयुक्त अरब अमीरात के समर्थन वाले अलगाववादियों ने सऊदी अरब द्वारा समर्थित यमन सरकार पर भ्रष्टाचार और कुप्रबंधन के आरोप लगाए हैं।

पृष्ठभूमि

  • दोनों पक्षों के बीच यह तनातनी देश के गृह युद्ध का एक और जटिल पहलू है। एक ओर अलगाववादी हैं और दूसरी ओर पूर्व राष्ट्रपति आबिद रब्बो मंसूर हादी की वफादार सेनाएं। दोनों ने यमन के शिया हूती विद्रोहियों के खिलाफ सऊदी अरब के नेतृत्व में एक साथ मिलकर लड़ाई लड़ी थी।

कौन हैं हूती विद्रोही?

  • यमन में 2015 से गृह युद्ध चल रहा है और ये सऊदी अरब-ईरान के बीच शीत युद्ध का अखाड़ा बना हुआ है। हूती विद्रोही यमन में उत्तरी इलाके के शिया मुसलमान हैं.
  • तब हूती विद्रोहियों ने यमन की राजधानी सना पर कब्जा करते हुए तत्कालीन राष्ट्रपति अबद्राबुह मंसूर हादी को देश छोड़कर भागने पर मजबूर कर दिया था।

सऊदी अरब में कोड़े मारने की सजा समाप्त

चर्चा में क्यों?

  • सऊदी अरब में अब अपराधियों को कोड़े मारने की सजा नहीं दी जाएगी। सऊदी सुप्रीम कोर्ट की इस घोषणा को देश में जारी सुधारों के तहत उठाया गया महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस घोषणा के बाद किसी भी मामले में कैद या जुर्माने की सजा ही मिलेगी।
  • कोर्ट ने कहा कि कोड़े या बेंत मारने की सजा समाप्त करने मकसद यह है कि सऊदी शासन को मानवाधिकार के अंतरराष्ट्रीय मानकों के करीब ले जाना है।

पृष्ठभूमि

  • उल्लेखनीय है यहां की अदालतें पहले व्यभिचार और हत्या जैसे मामलों में कैद के साथ कोड़े मारने की भी सजा सुनाती थीं। कभी-कभी तो हजार-हजार कोड़े मारने की सजा दी जाती थी। मानवाधिकार संगठन इस सजा का लंबे समय से विरोध कर रहे थे। भले ही कोड़े मारने की सजा खत्म हो गई हो लेकिन गंभीर अपराधों में सजाए मौत समेत अन्य कानूनों में अभी कोई मुरव्वत होने की संभावना नहीं है।
  • सऊदी अरब में पिछले कुछ सालों में सामाजिक बदलाव के लिए कुछ विशेष कदम उठाए गए हैं।
  1. दुनिया के सामने देश की बेहतर छवि पेश करने के लिए महिलाओं को ड्राइ¨वग करने, फुटबाल मैच देखने और नए सिनेमा हाल खोलने की छूट जैसे उपाय किए गए हैं। समझा जाता है इन सुधारों के पीछे क्राउन प्रिंस मुहम्मद बिन सलमान की भूमिका है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार भविष्य में विभिन्न अपराधों में सजा के तौर पर अदालतों को जुर्माने या जेल भेजने की सजा देनी होगी। ऐसे मामले जिनमें जेल की सजा नहीं दी जा सकती उसमें सामुदायिक सेवा की सजा दी जाएगी।
  2. हाल के वर्षो में कोड़ों की सजा का सबसे चर्चित मामला ब्लॉगर रईफ बदवई का था। 2014 में इस ब्लॉगर को इस्लाम के अपमान के आरोप में दस साल की सजा और 1000 कोड़े मारने की सजा सुनाई गई थी। बाद में रईफ को यूरोपीय पार्लियामेंट ने सखारोव मानवाधिकार पुरस्कार दिया था।

:: भारतीय अर्थव्यवस्था ::

रसायन एवं पेट्रोकेमिकल्स उद्योग सबसे ज्यादा निर्यात करने वाला क्षेत्र

  • केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री श्री सदानंद गौड़ा ने रसायन एवं पेट्रोकेमिकल्स उद्योग को पहली बार देश का शीर्ष निर्यात क्षेत्र बनने पर बधाई दी। उन्होंने भारत को रसायनों और पेट्रोकेमिकल्स के उत्पादन का एक अग्रणी वैश्विक केंद्र बनाने और विश्व में गुणवत्ता वाले रसायनों की आपूर्ति करने की दिशा में पूर्ण समर्थन देने का आश्वासन दिया है।
  • इस उपलब्धि में अपने विभाग द्वारा निभाई गई महत्वपूर्ण भूमिका का उल्लेख करते हुए, श्री गौड़ा अपने ट्वीट में कहा, “मेरे रसायन एवं पेट्रोकेमिकल्स विभाग द्वारा किए गए निरंतर प्रयासों के कारण यह उद्योग पहली बार सबसे ज्यादा निर्यात करने वाला क्षेत्र बन गया है।”
  • उन्होंने बताया कि अप्रैल 2019 से जनवरी 2020 के दौरान, रसायनों के निर्यात में पिछले वर्ष इसी अवधि की तुलना में 7.43 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। इस अवधि के दौरान रसायनों का कुल निर्यात 2.68 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। यह कुल निर्यात का 14.35% है।

लॉकडाउन अवधि के दौरान देश में ‘प्रत्यक्ष विपणन’ और  प्रभाव

चर्चा में क्यों?

  • भारत सरकार प्रत्यक्ष विपणन में किसानों की सुविधा और बेहतर रिटर्न का आश्वासन देने के लिए ठोस प्रयास कर रही है। साथ ही विभाग ने कोविड 19 महामारी को देखते हुए कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए मंडियों में परस्पर दूरी (सोशल डिस्टेंसिंग) बनाए रखने के लिए सलाह जारी की हैं। राज्यों से अनुरोध किया गया है कि वे किसानों/किसान समूहों/एफपीओ/सहकारी समितियों को थोक खरीदारों/बड़े खुदरा विक्रेताओं/प्रोसेसरों आदि को अपनी उपज बेचने में सुविधा प्रदान करने के लिए ’डायरेक्ट मार्केटिंग’ की अवधारणा को बढ़ावा दें।
  • केंद्रीय कृषि मंत्री ने 16 अप्रैल, 2020 को राज्यों के मुख्यमंत्रियों को पत्र भेजकर सहकारिता/एफपीओ आदि के माध्यम से प्रत्यक्ष विपणन की आवश्यकता को दोहराया और सभी हितधारकों और किसानों को इस प्रक्रिया को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया। विभाग ने राज्यों को एडवाइजरी भी जारी की हैं कि वे बिना किसी लाइसेंसिंग प्रक्रियाओं के सीधे विपणन को बढ़ावा दें और कृषि उपज के समय पर विपणन में किसानों को सुविधा प्रदान करें।
  • थोक बाजारों को कम करने और आपूर्ति श्रृंखला को बढ़ावा देने के लिए, राष्ट्रीय कृषि बाजार (ई-नाम) के अंतर्गत दो मॉड्यूल बनाये गये हैं जो निम्नलिखित हैं:
  1. एफपीओ मॉड्यूल:  एफपीओ सीधे ई-नाम पोर्टल से व्यापार कर सकते हैं। वे चित्र/गुणवत्ता पैरामीटर के साथ संग्रह केंद्रों से उपज विवरण अपलोड कर सकते हैं और भौतिक रूप से मंडियों तक पहुंचे बिना बोली (बिड) सुविधा का लाभ उठा सकते हैं।
  2. वेयरहाउस आधारित ट्रेडिंग मॉड्यूल: किसान अपनी उपज को डब्ल्यूडीआरए पंजीकृत गोदामों से डीम्ड बाजार के रूप में अधिसूचित करके बेच सकते हैं, और इससे उन्हें भौतिक रूप से अपनी उपज नजदीकी मंडियों में लाने की आवश्यकता नहीं होती है।

विभिन्न राज्यों ने प्रत्यक्ष विपणन को अपनाया है और इसके लिए कई उपाय किए हैं:

  • कर्नाटक ने राज्य के सहकारी संस्थानों और एफपीओ को बाजार के यार्ड के बाहर कृषि उपज के थोक व्यापार में संलग्न करने के लिए छूट प्रदान की है।
  • तमिलनाडु ने सभी अधिसूचित कृषि उत्पादों पर बाजार शुल्क में छूट दी है।
  • उत्तर प्रदेश ने फार्म गेट से ई-नाम प्लेटफॉर्म में व्यापार करने की अनुमति दी और किसानों से सीधी खरीद के लिए प्रोसेसर को एकीकृत लाइसेंस जारी किया और एफपीओ को गेहूं की खरीद संचालन करने की भी अनुमति प्रदान की।
  • राजस्थान ने व्यापारियों, प्रोसेसर और एफपीओ द्वारा प्रत्यक्ष विपणन की अनुमति दी। इसके अलावा, राजस्थान में पीएसीएस/एलएएमपीएस को डीम्ड मार्केट घोषित किया गया है।
  • व्यक्तियों, फर्मों और प्रसंस्करण इकाइयों के अलावा, मध्य प्रदेश ने बाजार-यार्ड के बाहर निजी खरीद केंद्र स्थापित करने की अनुमति दी है जो केवल 500/- रुपये आवेदन शुल्क लेकर किसानों से सीधे खरीद कर सकेंगे।
  • हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और गुजरात ने भी बिना किसी लाइसेंस की आवश्यकता के  सीधे विपणन की अनुमति दी है।
  • उत्तराखंड ने वेयरहाउस/कोल्ड स्टोरेज और प्रसंस्करण संयंत्रों को उप-मंडियां घोषित किया है।
  • उत्तर प्रदेश सरकार ने हाल ही में वेयरहाउस/कोल्ड स्टोरेज को मार्केट-यार्ड घोषित करने के नियमों और मानदंडों में ढील दी है।

प्रत्यक्ष विपणन का प्रभाव:

  • राजस्थान ने लॉकडाउन अवधि के दौरान प्रोसेसर को 1,100 से अधिक प्रत्यक्ष विपणन लाइसेंस जारी किए हैं, जिससे किसानों ने अपनी उपज सीधे प्रोसेसर को बेचना शुरू कर दिया है। ग्रामीण क्षेत्रों में बाजार-यार्ड के रूप में घोषित 550 से अधिक पीएसीएस में से, 150 पीएसीएस प्रत्यक्ष विपणन के लिए कार्यात्मक हो गए हैं और गाँव के व्यापारी   सफलतापूर्वक व्यापार लेनदेन कर रहे हैं।
  • तमिलनाडु में बाजार शुल्क माफी के कारण, यह देखा गया कि व्यापारियों ने किसानों से उनके फार्म गेट/गांवों से उपज खरीदना पसंद किया है।
  • उत्तर प्रदेश में किसानों और व्यापारियों के साथ एफपीओ द्वारा प्रत्यक्ष संबंध स्थापित किए गए हैं, जिससे वे शहरों के उपभोक्ताओं को उपज की आपूर्ति कर रहे हैं, जो किसानों के  अपव्यय में बचत और प्रत्यक्ष लाभ प्रदान करती है। इसके अलावा, राज्य ने एफपीओ और जोमेटो के साथ संबंध स्थापित करने में सुविधा प्रदान की है, जिससे उपभोक्ताओं को सब्जियों  का वितरण आसानी से सुनिश्चित किया जा सके।
  • राज्यों से प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार, प्रत्यक्ष विपणन ने किसान समूहों, एफपीओ सहकारी समितियों और सभी हितधारकों को कृषि उपज के प्रभावी और समय पर विपणन की सुविधा प्रदान की है।

लॉकडाउन अवधि में एनटीपीसी विद्युत केन्द्र का प्रदर्शन अपने सर्वोच्च स्तर पर

चर्चा में क्यों?

  • कोरोना महामारी भारत की सबसे बड़ी बिजली उत्पादक और विद्युत मंत्रालय के अंतर्गत आने वाली सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी एनटीपीसी संकट की इस घड़ी में इनटीपीसी राष्ट्र को निर्बाध बिजली आपूर्ति कर रही है। इस महारत्न कंपनी के प्रत्येक विद्युत केन्द्र का प्रदर्शन अपने सर्वोच्च स्तर पर पहुंच गया है।
  • कोविड-19 संकट ने बिजली कंपनी के महत्व को रेखांकित किया है और उनकी अहमियत अब काफी बढ़ गई है क्योंकि अर्थव्यवस्था के कई क्षेत्रों के सुचारु संचालन के लिए बिजली काफी अहम है। एनटीपीसी बिजली की निरंतर आपूर्ति बनाए रखने के लिए कोयले की आपूर्ति का प्रबंधन भी कुशलता के साथ कर रही है।

एनटीपीसी से संबंधित तथ्य

  • भारत की सबसे बड़ी विद्युत कंपनी, एनटीपीसी की स्‍थापना 1975 में भारत के विद्युत विकास में तेजी लाने के लिए की गई थी। जबकि एनटीपीसी एक ताप विद्युत कंपनी है, अब यह विद्युत उत्‍पादन व्‍यापार की संपूर्ण मूल्‍य श्रृंखला में उपस्थिति के साथ एक वैविध्‍यपूर्ण विद्युत कंपनी के रूप में उभर रही है। विद्युत उत्‍पादन के अलावा, जो कंपनी का प्रमुख कार्य है, एनटीपीसी ने परामर्श, विद्युत व्‍यापार, राख उपयोगिता और कोयला खनन में उद्यम आरंभ कर दिया है।
  • आज फोर्ब्‍स सूची में ‘’वर्ष 2019 के लिए विश्‍व की 2000 सबसे बड़ी कंपनियों में’’ एनटीपीसी का 492 वां स्‍थान है। एनटीपीसी मई, 2010, को यह प्रतिष्ठा प्राप्त करने वाली सम्मानित चार कंपनियों में से, एक महारत्न कंपनी बन गई ।
  • विद्युत केन्द्रों में एनटीपीसी विंध्यांचल देश का सबसे बड़ा विद्युत केन्द्र है, जिसने 13 अप्रैल, 2020 को 100 प्रतिशत पीएलएफ हासिल किया और भारत के पहले अल्ट्रा सुपरक्रिटिकल विद्युत केन्द्र एनटीपीसी खरगोन की दूसरी 660 मेगावाट की इकाई इस अवधि के दौरान व्यावसायिक हो गई, जिससे लॉकडाउन के बावजूद परिचालन के उत्कृष्टता की दिशा में एनटीपीसी की प्रतिबद्धता का पता चलता है।
  • 62,110 मेगावाट की कुल स्थापित क्षमता के साथ एनटीपीसी के 70 विद्युत केन्द्र हैं, जिनमें 24 कोयला, 7 संयुक्त गैस/ तरल ईंधन, 1 पनबिजली, 13 नवीकरणीय ऊर्जा के साथ 25 संयुक्त उपक्रम विद्युत केन्द्र हैं।

:: विज्ञान और प्रौद्योगिकी ::

कोरोना ‘किलर बॉक्स’

चर्चा में क्यों?

  • भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) कानपुर के विशेषज्ञों ने एक ऐसा बॉक्स तैयार किया है, जिसमें उनका दावा है कि सब्जी, फल, चीनी, दूध, दाल की पैकिंग, मोबाइल, रुपये और चाबी, आदि को सैनिटाइज किया जा सकता है। इससे निकलने वाली अल्ट्रावॉयलेट रेज कुछ ही मिनटों में वस्तुओं को बैक्टीरिया और वायरस मुक्त कर सकती है। सेंसर आधारित बॉक्स में टाइम सेट करने के बाद अलार्म बज उठता है।
  • मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रो. जे रामकुमार के निर्देशन में जूनियर तकनीशियन शिवम सचान और अशोक प्रजापति ने मॉडल तैयार किया है, जिसको कोरोना किलर बॉक्स नाम दिया गया है। इस बॉक्स में कई अल्ट्रावॉयलेट लाइटें लगाई हैं, जिसकी रेंज 240 से 260 नैनोमीटर के बीच रखी गई है। एक बॉक्स की अनुमानित कीमत करीब पांच हजार रुपये है। अब आइआइटी इसके निर्माण के लिए कंपनी से संपर्क कर रहा है। अधिक बनाने में लागत और कम हो जाएगी।

क्या होंगें लाभ?

  • मास्क और पीपीई किट भी होंगे सैनिटाइज : इस बॉक्स में खाद्य पदार्थो के अलावा मास्क और पीपीई किट को भी सैनिटाइज किया जा सकेगा। इसके लिए इन्हें करीब 25 मिनट तक बॉक्स में रखना पड़ेगा। डीआरडीओ के बॉक्स से चार हजार रुपये सस्ता : डीआरडीओ ने पूर्व में ऐसा ही बॉक्स बनाया है। उसकी कीमत नौ हजार रुपये है जबकि आइआइटी में बॉक्स बनाने की लागत पांच हजार रुपये आई है। ज्यादा निर्माण होने पर कीमत और कम होने की उम्मीद है।

समुद्री लहरों से उठी नीले रंग की दुर्लभ रोशनी

चर्चा में क्यों?

  • कोरोना वायरस के कारण कई देशों में जारी लॉकडाउन के चलते पर्यावरण में आश्चर्यजनक रूप से सुधार आया है। पर्यावरण में सुधार का एक ऐसा ही खूबसूरत नजारा उस वक्त देखने को मिला, जब समुद्र की लहरों में एक नीली रोशनी नजर आई। समुद्र किनारे टहल रहे लोगों को दिखा नजारानॉर्थ अमेरिका के मेक्सिको में अकापुल्को बीच पर लोगों को अचानक लहरों में एक खास नीली रोशनी नजर आई।

क्या है इस रोशनी के पीछे की वजह?

  • इन लोगों को समुद्री लहरों में जो रोशनी दिखाई दी, उसके पीछे की वजह प्राकृतिक है। इस घटना को बायोलुमिनसेंट प्लैंकटन कहा जाता है। यह दुर्लभ घटना प्यूर्टो मार्क्वेस बीच के पानी में सूक्ष्मजीवों के कारण होने वाली 'जैव रासायनिक प्रतिक्रिया' का परिणाम है।
  • हालांकि समुद्री जीव-विज्ञानी एनरिक अयला डुवल ने इस तर्क को सिरे से खारिज किया है कि तटों पर लोगों की कम आवाजाही की वजह से यह घटना घटी है। एनरिक अयला डुवल ने बताया, 'बायोलुमिनसेंस एक ऐसी जैव रासायनिक प्रतिक्रिया के परिणामस्वरूप पैदा होने वाला प्रकाश है, जिसमें ज्यादा से ज्यादा समय लूसिफेरिन (प्रोटीन), मॉलिक्यूलर ऑक्सीजन और एटीपी (एडेनोसिन ट्राइफॉस्फेट) हिस्सा लेते है।

कैसे पैदा हुई नीले रंग की रोशनी?

  • 'ये सभी एंजाइम ल्यूसेंसज के जरिए कुछ इस तरह प्रतिक्रिया करते हैं- ऑक्सीजन लूसिफेरिन का ऑक्सीकरण करती है, लूसिफेरेज इस प्रतिक्रिया को तेज कर देता है और एटीपी पूरी प्रतिक्रिया के लिए एनर्जी उपलब्ध कराता है। इससे पानी में एक अलग रंग बनता है और रात के समय नीले रंग की चमकदार रोशनी दिखाई देती है।

यूवी कीटाणुशोधन ट्रॉली

चर्चा में क्यों?

  • इंटरनेशनल एडवांस्ड रिसर्च सेंटर फॉर पाउडर मेटलर्जी एंड न्यू मैटेरियल्स (एआरसीआई),विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी), भारत सरकार का एक स्वायत्त अनुसंधान और विकास केंद्र है। मेकिंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (एमआईएल) की सहायता से अनुसंधान केंद्र (एआरसीआई) और यूनिवर्सिटी ऑफ हैदराबाद (यूओएच ) ने साथ मिलकर यूवीसी आधारित कीटाणुशोधन ट्रॉली विकसित की है जोकोविड–19से लड़ने के लिए अस्पताल के वातावरण की तेजी से सफाई कर सकती है।

क्यों जरूरी है?

  • अस्पतालों और अन्य संक्रमण वाले वातावरण में पाए जाने वाले बैक्टीरिया और वायरस को हटाने के लिए रासायनिक कीटाणुनाशक अक्सर पर्याप्त नहीं होते हैं। रोगी के बेड और अस्पताल के कमरों का तेजी से परिशोधन, अस्पतालों में बेड की सीमित उपलब्धता के मद्देनजर एक बड़ी आवश्यकता है।

कैसे करेगा मदद

  • 200 और 300 एनएम के बीच तरंग दैर्ध्य की सीमा में यूवी प्रकाश बैक्टीरिया और वायरस जैसे सूक्ष्मजीवों को निष्क्रिय करने में सक्षम है।इस प्रकार यह हवा और ठोस दोनों सतहों को कीटाणुरहित करता है।
  • अन्य वायरस और बैक्टीरिया के मामले के समान कोरोना वायरस भी यूवीसी प्रकाश के प्रति संवेदनशील है। 254 एनएम की तीव्रता के साथ यूवीसी विकिरण के कीटाणुनाशक प्रभाव से वायरस का सेलुलर नुकसान होता है, जिससे सेलुलर प्रतिकृति बाधित होती है। कीटाणुशोधन के लिए रासायनिक दृष्टिकोण के विपरीत, यूवी प्रकाश एक भौतिक प्रक्रिया के माध्यम से सूक्ष्मजीवों को तेजी से औरप्रभावी रूप से निष्क्रिय कर देता है।

उपकरण की विशेषता और कार्यप्रणाली

  • यूवीसीकीटाणुशोधन ट्रॉली (ऊँचाई1.6 मी,चौड़ाई 0.6 मी,लंबाई 0.9 मी) एआरसीआई, यूओएचऔर एमआईएल द्वारा संयुक्त रूप से विकसित की गई है, जिसमें 6 यूवीसीट्यूब लगे हैं, जिन्हें इस तरह से व्यवस्थित किया गया हैकि प्रत्येक दिशा की तरफ 2 ट्यूबों के साथ 3 किनारे रोशन किये जाते हैं। ये लैंप दीवारों, बिस्तर पर और कमरे की हवा में कीटाणुशोधन का काम करते हैं।फर्श का कीटाणुशोधन, मशीन की निचली सतह पर लगे 2 छोटी यूवी लैंप द्वारा किया जाता है। सुरक्षात्मक सूट और यूवी प्रतिरोधी चश्मे पहनकरएक ऑपरेटर जब ट्रॉली को कमरे में चारों ओर ले जाता है तो अस्पताल के कमरे कीटाणुरहित हो जाते हैं।
  • औसतन5 फीट प्रति मिनट की गति के साथ एक ऑपरेटरयूवीसी ट्रॉली सिस्टम से 400 वर्ग फीट के कमरे को 30 मिनट के भीतरकीटाणुमुक्त (>99 प्रतिशत) कर सकता है। वर्तमान प्रणाली पहला प्रोटोटाइप है और अस्पतालों और रेलवे के डिब्बों में आसानी से प्रयोग करने योग्य है। ऐसी योजना कोविड-19 रोगियों के उपचार के लिए बनाई जा रही है। विमान के केबिनों में आवश्यक कीटाणुशोधन के मद्देनजर छोटे आयामों वाले तथा अधिक स्वचालन गुणों के साथ मशीन को विकसित करने का कार्य प्रगति पर है। वर्तमान प्रणाली को फील्ड ट्रायल के लिए हैदराबाद स्थित कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) अस्पताल में (मानक संचालन प्रक्रिया और सुरक्षा निर्देशों के साथ) तैनात किया गया है। रोगी को छुट्टी देने के बाद और स्वास्थ्य कर्मियों की अनुपस्थिति मेंयूवी-लाइट कीटाणुशोधन प्रणाली को खाली कमरे में संचालित किया जाना चाहिए।

कपड़ों के कीटाणुशोधन में कम लागत वाला धातु रहित नैनो मटीरियल की खोज

चर्चा में क्यों?

  • भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत आने वाले स्वायत्त संस्थान, नैनो विज्ञान और प्रौद्योगिकी संस्थान (आईएनएसटी) में वैज्ञानिकों ने दृश्य प्रकाश में सूक्ष्मजीव कीटाणुशोधन के लिए एक कम लागत वाले धातु रहित नैनोमटीरियल को ढूंढा है जो चांदी और अन्य धातु-आधारित सामग्रियों का विकल्प हो सकता है।
  • आईएनएसटी में डॉ. कमलाकन्नन कैलासम के समूह ने डॉ. आसिफ खान शानवस के सहयोग से दृश्य-प्रकाश-चालित जीवाणुरोधी गतिविधि के लिए कार्बन नाइट्राइड क्वांटम डॉट्स (जी-सीएनक्यूडी) का परीक्षण किया है और स्तनधारी कोशिकाओं के साथ जैव-अनुकूल होने के साथ-साथ इसे प्रभावी पाया है। इस टीम ने सुझाव दिया है कि ये धातु / गैर-धातु सेमीकंडक्टरों और महंगी चांदी के लिए एक व्यवहार्य एंटी-बैक्टीरियल विकल्प होगा, जो इसे लागत कुशल बनाता है।

कैसे कारगर है ये नैनोमटीरियल्स?

  • ये नैनोमटीरियल्स बढ़ी हुई जैवनाशी गतिविधि रखते है, जिसका कारण ये है कि जी-सीएनक्यूडी का बड़ा सतह क्षेत्र पराबैंगनी और दृश्य दोनों क्षेत्रों में अधिक प्रतिक्रियाशील स्थलों और प्रकाश संबंधी अवशोषण रखता है। जी-सीएनक्यूडी में प्रतिक्रियाशील ऑक्सीजन प्रजातियों (आरओएस) को उत्पन्न करने की क्षमता है। आरओएस तेजी से संपर्क करता है और तुरंत उपलब्ध बड़े जैविक अणुओं (मैक्रो मॉलिक्यूल्स) को नुकसान पहुंचाता है जैसे कि कोशिका झिल्ली या आवरण पर मौजूद लिपिड और कोशीय सतह पर मौजूद प्रोटीन, उन सूक्ष्मजीवों को निष्क्रिय करने की दिशा में। निष्क्रियता का ये तंत्र किसी विशेष रोगाणु के लिए गैर-विशिष्ट है, क्योंकि लिपिड और प्रोटीन माइक्रोबियल दुनिया के निवासियों के प्रमुख घटक हैं।
  • ये वैज्ञानिक ऐसे रास्ते तलाश रहे हैं जिनसे डोप या अनडोप किए हुए कार्बन नाइट्राइड आधारित मटीरियल को कपड़ों वाली बुनावटों के साथ मिलाया जा सके जो रोगाणुरोधी गतिविधि के लिए इष्टतम नमी और तापमान के अंतर्गत लगातार प्रतिक्रियाशील ऑक्सीजन प्रजातियों (आरओएस) का उत्पादन कर सकें।

क्या लाभ होंगे?

  • छींकने के दौरान उत्पन्न एरोसोल की बूंदों में पर्याप्त नमी होती है जो इन बूंदों में मौजूद किसी भी संक्रामक एजेंटों के आरओएस की मध्यस्थता से कीटाणुशोधन में तब मदद कर सकती है, जब एक बार वो सूरज की रोशनी या परिवेशी सफेद प्रकाश के तले इस नैनो मटीरियल सिले कपड़े के संपर्क में आए। इस वर्तमान अध्ययन में एक सामान्य टेबल लैंप का उपयोग किया गया जो एक साफ दिन में सूर्य के प्रकाश जितनी रोशनी प्रदान करता है।
  • सामान्य पराबैंगनी मध्यस्थता वाले कीटाणुशोधन के मुकाबले दृश्य प्रकाश पर निर्भरता भी फायदेमंद है, क्योंकि उसमें यूवी प्रकाश उत्सर्जक उपकरणों से सावधानीपूर्वक काम लेने की आवश्यकता होती है। वर्तमान परिदृश्य में इसकी प्रासंगिकता को देखते हुए एंटीवायरल दक्षता के लिए भी इस तकनीक को टटोला जाएगा।

Hubble टेलिस्कोप के 30 साल

चर्चा में क्यों?

  • इंसानों से लाखों प्रकाश वर्ष दूर अंतरिक्ष में चल रही उथल-पुथल को अपने लेंस में कैद करता है दुनिया के सबसे बेहतरीन टेलिस्कोप्स में से एक Hubble जिसे 30 साल पूरे हो चुके हैं। स्पेस में रखा गया यह पहला टेलिस्कोप है जिसकी नजर टिकी है ऐसी खूबसूरती पर, जैसी इस तस्वीर में दिखाई दे रही है।

क्या है हब्बल टेलिस्कोप?

  • दुनिया का सबसे ताकतवर टेलीस्कोप और अंतरिक्ष का सबसे बेहतरीन फोटोग्राफर हबल 24 अप्रैल 2020 को 30 साल का हो गया. हबल टेलीस्कोप को अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा, यूरोपीयन स्पेस एजेंसी ईएसए ने मिलकर बनाया था. लेकिन इसकी देखभाल नासा करती है. पिछले तीस सालों में इसने हमें अंतरिक्ष की गहराइयों की तस्वीरें दिखाई हैं. खूबसूरत तस्वीरें भेजी हैं और कई रहस्यों से पर्दा उठाया है. हबल टेलीस्कोप धरती के ऊपर अंडाकार ऑर्बिट में घूमता है. सबसे नजदीकी दूरी 537 किलोमीटर और सबसे ज्यादा दूरी करीब 541 किलोमीटर होती है. हबल टेलीस्कोप के अंदर पांच वैज्ञानिक इंस्ट्रूमेंट्स हैं. साथ ही गाइडेंस सेंसर्स हैं. हबल इकलौता टेलीस्कोप है जिसे ठीक करने या अपग्रेड करने के लिए धरती से एस्ट्रोनॉट्स को जाना पड़ता है.

हब्बल टेलिस्कोप की उप्लब्धिया

  • हबल ने यूनिवर्स की उम्र पता लगाने में वैज्ञानिकों की काफी मदद की है. हबल की मदद से पता चला कि यूनिवर्स की उम्र 13.7 बिलियन साल है. हबल टेलीस्कोप की मदद से साइंटिस्ट्स को ये पता चला कि हमारा यूनिवर्स फैल रहा है. इसके लिए सुपरनोवा सर्च टीम बनाई गई. हबल की मदद से जिन वैज्ञानिकों ने इस बात का खुलासा किया कि यूनिवर्स अपना आकार बढ़ा रहा है, उन्हें नोबेल पुरस्कार से नवाजा गया.हबल ने कई ब्लैक होल्स, सैकड़ों गैलेक्सी, हजारों नेबुला की तस्वीरें ली है. जिससे इंसानों के ये पता चल पाया है कि अंतरिक्ष कितना बड़ा है. हबल टेलीस्कोप ने 2019 में हमारी आकाशगंगा का वजन और रेडियस बताया था. वजन करीब 1.5 ट्रिलियन सोलर यूनिट और रेडियस 129,000 प्रकाश वर्ष है.

:: पर्यावरण और पारिस्थितिकी ::

लेह और नई दिल्ली के लिए हाइड्रोजन फ्यूल सेल आधारित परियोजना लॉन्च

चर्चा में क्यों?

  • एनटीपीसी लिमिटेड, भारत का सबसे बड़ा बिजली उत्पादक है और विद्युत्  मंत्रालय के तहत एक केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम है। उपक्रम ने लेह और नई दिल्ली के लिए 10 हाइड्रोजन फ्यूल सेल (एफसी) आधारित इलेक्ट्रिक बसों और 10 हाइड्रोजन फ्यूल सेल आधारित इलेक्ट्रिक कारों के लिए वैश्विक अभिरुचि पत्र (ईओआई) आमंत्रित किये हैं। एनटीपीसी की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी एनटीपीसी विद्युत व्यापार निगम (एनवीवीएन) लिमिटेड द्वारा  ईओआई जारी किया गया है।
  • हाइड्रोजन फ्यूल सेल आधारित वाहनों की खरीद, देश में अपनी तरह की पहली परियोजना है, जिसमें हरित ऊर्जा से लेकर फ्यूल सेल वाहन तक का संपूर्ण समाधान विकसित किया जाएगा।
  • इस पहल के लिए नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय का भी समर्थन लिया गया है।  लेह और दिल्ली की पायलट परियोजनाओं के हिस्से के रूप में  हाइड्रोजन के उत्पादन के लिए नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग तथा इसके भंडारण और वितरण की सुविधाएं विकसित की जाएँगी। हाइड्रोजन से चलने वाले वाहनों को लॉन्च करने का उद्देश्य परिवहन के क्षेत्र में कार्बन उत्सर्जन को कम करना भी है।

पृष्ठभूमि

  • उपक्रम (पीएसयू) सार्वजनिक परिवहन के संदर्भ में पूर्ण ई-मोबिलिटी समाधान प्रदान करने के लिए विभिन्न प्रौद्योगिकी पहल कर रहा है। इसमें आम लोगों को चार्जिंग सुविधा प्रदान करने के लिए बुनियादी ढांचे का निर्माण और राज्य / शहर परिवहन उपक्रमों को इलेक्ट्रिक बसें प्रदान करना शामिल हैं। इस संबंध में, विभिन्न शहरों में 90 सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन और फरीदाबाद में ई – थ्री व्हीलर्स के लिए बैटरी चार्जिंग और स्वैपिंग स्टेशन पहले ही चालू किये जा  चुके हैं। इसी तरह, अंडमान और निकोबार प्रशासन के लिए ई - बस समाधान योजना लागू की जा रही है।

फ्राइडेज फॉर फ्यूचर’ कार्यकर्ताओं का ऑनलाइन प्रदर्शन

चर्चा में क्यों?

  • जलवायु परिवर्तन कार्यकर्ताओं ने वैश्विक ऑनलाइन प्रदर्शन किया और अपना मुद्दा उठाया।कोरोना वायरस महामारी के चलते उन्हें अपनी आवाज ऑनलाइन उठानी पड़ी। छात्र समूह ‘फ्राइडेज फॉर फ्यूचर’ ग्लोबल वार्मिंग से निपटने के लिए विश्व के नेताओं से ऑनलाइन आह्वान कर रहा है। इस समूह की रैलियों में पूर्व में दुनियाभर में हजारों लोग सड़कों उतर चुके हैं।
  • युवा जलवायु आंदोलन का जाना-माना चेहरा स्वीडन की 17 वर्षीय कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग ने ऑनलाइन पृथ्वी दिवस कार्यक्रम के दौरान कहा कि जलवायु परविर्तन का संकट भले ही कोरोना वायरस की तरह तात्कालिक संकट नहीं है, लेकिन इससे भी निपटने की आवश्यकता है, अन्यथा बहुत देर हो जाएगी।

क्या है “फ्राइडे फॉर फ्यूचर कैंपेन”अभियान?

  • गत वर्ष अगस्त माह में ग्रेटा स्वीडन की संसद के बाहर प्रदर्शन करने के लिए और पर्यावरण संरक्षण की अपील करते हुए अकेले ही खड़ी हो गयी थी, साथ ही उन्होंने स्वीडन के संसद में दिए अपने भाषण में स्पष्ट भी किया कि आज भले ही हम पर्यावरण के लिए किये गए पेरिस समझौते को नकार रहे हों, लेकिन इससे हमारा कल कितने बड़े खतरे में होगा, यह आज हमारे समझदार राजनेता नहीं समझ रहे हैं. हमारे ग्लेशियर पिघल रहे हैं, सागरों का जलस्तर लगातार बढ़ता जा रहा है, उनकी उष्णता को अवशोषित करने की गति धीमी हो रही है, हमारे प्राणदायक जंगल जल रहे हैं, नदियां खत्म हो रही हैं. इन सभी खतरों को समझते हुए ग्रेटा ने शुरुआत की “फ्राइडे फॉर फ्यूचर कैंपेन” की, जिसमें स्कूली छात्र अपने आस पास के जिम्मेदार प्रतिनिधियों तक अपनी बात पहुँचाने के लिए धरना देते हैं.

जुरासिक काल के दुर्लभ ट्री फर्न

  • संस्कृति और परंपरा में अनूठे बस्तर में प्रकृति की अपनी थाती में भी कई विशिष्टताएं मौजूद हैं। बैलाडीला के रहस्यमयी पहाड़ों पर जुरासिक काल की विलुप्त हो चुकी वनस्पतियां भी पाई जाती हैं। इन्हीं में से एक है ट्री फर्न। तीन करोड़ साल पहले जब धरती पर डायनोसोर का युग था, तब ट्री फर्न मुख्य पादप प्रजाति थी।

शाकाहारी डायनोसोर का मुख्य भोजन फर्न था

  • माना जाता है कि शाकाहारी डायनोसोर का मुख्य भोजन फर्न ही था। यह पादप प्रजाति मध्य भारत में सिर्फ बैलाडीला के पहाड़ पर ही मिलती है। बैलाडीला की प्रसिद्धि यहां के लौह अयस्क खदानों की वजह से है। बचेली व किरंदुल में राष्ट्रीय खनिज विकास निगम की परियोजनाएं हैं। पहाड़ों को काटकर दिन रात उच्च क्वालिटी का लौह अयस्क निकाला जा रहा है। ऐसे में वैज्ञानिक महत्व के ट्री फर्न के यहां से भी विलुप्त होने का खतरा मंडरा रहा है।

लाइकोपोडियम, सेलाजिनेला प्रजाति के पादप हो गए विलुप्त

  • समुद्र तल से 1260 फीट ऊंचाई पर स्थित बैलाडीला पहाड़ की जलवायु कई विशेष प्रजाति के जीवों व पादपों के अनुकूल है। बैलाडीला पर अध्ययन कर चुके जीव विज्ञानी एचकेएस गजेंद्र बताते हैं कि इन पहाड़ों पर लाइकोपोडियम, सेलाजिनेला आदि प्रजाति के पादप भी थे लेकिन माइनिंग की वजह से कई पादप प्रजातियां विलुप्त हो गई। धरती पर पादपों के उद्भव व विकास क्रम को वैज्ञानिक रूप से समझने में ट्री फर्न उपयोगी है। इसे बचाने के लिए विशेष प्रयास किए जाने चाहिए।

दुर्लभ ट्री फर्न  से सम्बंधित मुख्य तथ्य

  • ट्री फर्न का वैज्ञानिक नाम क्याथेल्स है। यह लेप्टोसपोसेंगिएट फर्न है। ट्री फर्न में जड़, तना व पत्ता होता है पर फूल नहीं लगता। इसकी पत्तियां लंबी, नुकीली व कोमल होती हैं। इस पौधे का विकास बेहद धीमी गति से होता है। इन्हें आठ से दस फीट लंबा होने में दो से तीन सौ साल लग जाते हैं।

:: विविध ::

अमेरिकन अकैडमी ऑफ आर्ट्स ऐंड साइंसेज का हिस्सा बनीं भारतवंशी रेणु खटोड़

  • यूनिवर्सिटी ऑफ ह्यूस्टन सिस्टम की चांसलर भारतीय-अमेरिकी मूल की रेणु खटोड़ को शिक्षा और अकैडमिक नेतृत्व के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए प्रतिष्ठित अमेरिकन अकेडमी ऑफ आर्ट्स ऐंड साइंसेज में शामिल किया गया है। 61 वर्षीय खटोड़ अमेरिकन ऐकेडमी ऑफ आर्ट्स ऐंड साइंसेज (एएएएस) की 2020 की इस सप्ताह घोषित सूची में प्रतिष्ठित कलाकारों, विद्वानों, वैज्ञानिकों और सार्वनजिक, गैर लाभ वाले और निजी क्षेत्रों के नेताओं समेत 250 से अधिक लोगों के साथ सदस्य के रूप में जुड़ेंगी।

:: प्रिलिम्स बूस्टर ::

  • देश की प्रथम हाइड्रोजन फ्यूल सेल आधारित परिवहन परियोजना की पहल किस संस्था के द्वारा एवं कहाँ के लिए प्रारंभ की गई है? (एनटीपीसी, लेह और नई दिल्ली के लिए)

  • हाल ही में चर्चा में रहे ‘हूती’ विद्रोही किस देश से संबंधित हैं? (यमन)

  • हाल ही में चर्चा में रहे ‘'बायोलुमिनसेंस’ क्या है? (जैव रासायनिक प्रक्रिया के फलस्वरूप जीवों में प्रकाश उत्पन्न होना)

  • चर्चा में रहे ‘'बायोलुमिनसेंस’ प्रक्रिया में कौन से जैव-रसायन तत्व भाग लेते हैं? (लूसिफेरिन -प्रोटीन, मॉलिक्यूलर ऑक्सीजन और एटीपी-एडेनोसिन ट्राइफॉस्फेट)

  • हाल ही में चर्चा में रहे रोहतांग दर्रा किस राज्य में अवस्थित है एवं यह किन क्षेत्रों को आपस में जोड़ता है? (हिमाचल प्रदेश, मनाली- लाहौल स्पीति- लेह)

  • चर्चा में रहे क्रमशः देश का सबसे बड़ा थर्मल विद्युत केंद्र एवं भारत का पहला अल्ट्रा सुपरक्रिटिकल विद्युत केंद्र कौन है? (क्रमशः एनटीपीसी विंध्याचल, एनटीपीसी खरगोन)

  • अंतरिक्ष की आंख से प्रसिद्ध किस टेलीस्कोप ने अंतरिक्ष में स्थापना के 30 वर्ष पूर्ण किए हैं एवं यह किस अंतरिक्ष एजेंसी की परियोजना थी? (हबल टेलीस्कोप, नासा)

  • हाल ही में चर्चा में रहे छात्र समूह ‘फ्राइडेज फॉर फ्यूचर’ क्या है एवं इस पहल की नेतृत्वकर्ता कौन है? (छात्रों द्वारा समर्थित पर्यावरण आंदोलन की मुहिम, ग्रेटा थनबर्ग)

  • हाल ही में किस भारतीय मूल के व्यक्ति को प्रतिष्ठित अमेरिकन अकेडमी ऑफ आर्ट्स ऐंड साइंसेज में शामिल किया गया है? (रेणु खटोड़)

  • किस तिथि को अंतर्राष्ट्रीय बौद्धिक संपदा दिवस मनाया जाता है एवं वर्ष 2020 की थीम क्या थी? (26 अप्रैल, “Innovate for a Green Future”)

  • चर्चा में रहे विश्व बौद्धिक संपदा संगठन (WIPO) की स्थापना कब की गई एवं इसका मुख्यालय कहाँ स्थित है? (1967, जिनेवा-स्विजरलैंड)

  • हाल ही में किस देश ने उदारवादी रुख अपनाते हुए कोड़े मारने की सजा को समाप्त कर दिया है? (सऊदी अरब)

 

 

 

स्रोत साभार: Dainik Jagran (Rashtriya Sanskaran), Dainik Bhaskar (Rashtriya Sanskaran), Rashtriya Sahara (Rashtriya Sanskaran) Hindustan Dainik (Delhi), Nai Duniya, Hindustan Times, The Hindu, BBC Portal, The Economic Times (Hindi & English), PTI, PIB

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