(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (25 नवम्बर 2019)

दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर


(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (25 नवम्बर 2019)


:: राष्ट्रीय समाचार ::

हरिद्वार कुंभ: 2021

  • हरिद्वार कुंभ-2021 को भव्य, शानदार, यादगार और अनूठा बनाने के लिए कुंभ मेला अधिष्ठान बड़े पैमाने पर तैयारी कर रहा है। विशेष यह कि इस बार हरिद्वार कुंभ का आयोजन 'ग्रीन कुंभ' की थीम पर होगा। इसमें गंगा की शुद्धता और पर्यावरण की रक्षा पर विशेष फोकस रहेगा। इसके तहत विद्युत ऊर्जा का कम से कम (लगभग शून्य) और सौर ऊर्जा का अधिकाधिक इस्तेमाल करने की योजना है। कुंभ के इतिहास में पहली बार ग्रीन कुंभ की थीम पर कुंभ मेला शुभांरभ समारोह का आयोजन होगा। इस दौरान बड़े पैमाने पर ईको-फ्रेंडली आतिशबाजी और लेजर शो कराने की तैयारी है। इसके साथ ही पूरा हरकी पौड़ी क्षेत्र और मुख्य कुंभ नगर सोलर पावर आधारित एलईडी लाइट्स से रोशन रहेगा।
  • कुंभ मेला स्थल और नहर पटरी मार्ग को खूबसूरत बनाने के लिए हजारों की संख्या में लगाए जाने वाले 'हैरिटेज पोल' भी सौर ऊर्जा आधारित होंगे। पूरे मेला क्षेत्र को ग्रीन क्षेत्र घोषित कर यहां सभी डीजल-पेट्रोल वाहनों पर रोक लगाने की योजना है। सिर्फ बैटरी और सौर ऊर्जा से चलने वाले वाहनों को ही मेला क्षेत्र में चलाए जाने की अनुमति होगी। इसके लिए बड़े पैमाने पर सौर ऊर्जा से चार्ज होने वाले रिक्शा, टेंपो और बसों को चलाने की योजना बनाई गई है। पूरे मेला क्षेत्र को भव्य रूप प्रदान करने के लिए इसे आकर्षक रंगों से सजाने की भी योजना है। इसमें भी सौर ऊर्जा का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे शाम ढलते ही कुंभ मेला क्षेत्र की इमारतें सौर ऊर्जा से संचालित विविध रंगों वाली लेजर लाइट्स से दमकने लगेंगी।

प्राचीन चिकित्सा पद्धति: सोवा-रिग्पा

  • प्राचीन चिकित्सा पद्धति ‘सोवा-रिग्पा’ पर भारत ने अपना दावा जताया है। इस पर चीन ने आपत्ति जताई है। सोवा-रिग्पा को आयुर्वेद के समान माना जाता है, इसलिए भारत ने इसे अपनी अमूर्त संस्कृति विरासत करार दिया है। वहीं चीन ने भी अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस पर अपना दावा किया है।
  • सोवा-रिग्पा को तिब्बती परंपरा की चिकित्सा माना जाता है और भारत में हिमालय के निकट रहने वाले समुदायों में यह लोकप्रिय रही है। सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश, पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग, हिमाचल प्रदेश और लद्दाख में यह सदियों से उपयोग में आती रही है।
  • सोवा रिगपा में अपनाई जाने वाली पद्धतियां आयुर्वेद से मिलती-जुलती हैं। इसमें कुछ चीनी चिकित्सा शैली भी शामिल हैं। इसकी मूल पुस्तक ‘ग्यूड बजी’ के लिए कहा जाता है कि इसे खुद गौतम बुद्ध ने पढ़ाया था। इसी वजह से यह बौद्ध दर्शन के भी निकट है।
  • भारत ने इसे भारतीय परंपरा का हिस्सा करार देने का दावा संयुक्त राष्ट्र संघ के शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन (यूनेस्को) में किया है। लेकिन आधिकारिक सूत्रा के अनुसार चीन ने इसे लेकर आपत्ति जताई है।
  • विदेश मंत्रालय के साथ आयुष मंत्रालय ने कई दस्तावेज और साक्ष्य तैयार किए हैं, जिन्हें भारतीय प्रतिनिधि मंडल ने अपने दावे के साथ यूनेस्को में प्रस्तुत किया है। भारत ने यह कदम मोदी सरकार द्वारा पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को दिए जा रहे प्रोत्साहन के तहत उठाया है।

सोवा रिग्पा राष्ट्रीय संस्थान (एनआईएसआर)

  • केंद्रीय कैबिनेट 20 नवंबर को लेह में सोवा रिग्पा राष्ट्रीय संस्थान (एनआईएसआर) स्थापित करने की मंजूरी दे चुकी है। यह एक स्वायत्त संस्थान होगा। यह जम्मू-कश्मीर से अलग होकर 31 अक्तूबर को अस्तित्व में आए केंद्रशासित प्रदेश लद्दाख के विकास के लिए उठाया गया पहला कदम है।
  • इसे आयुष मंत्रालय के तहत बनाया जाएगा और करीब 47.25 करोड़ रुपये लागत आएगी। इस संस्थान के जरिए भारत में सोवा-रिग्पा को लोकप्रियता दिलाई जाएगी और विश्व भर के विद्यार्थियों को यहां पढ़ने के अवसर मिलेंगे। भारत व विश्व के जाने-माने संस्थानों के साथ शोध व विभिन्न चिकित्सा पद्धतियों के मेल को भी बढ़ावा मिलेगा।

अंतरराष्‍ट्रीय पर्यटन मार्ट-2019

  • मणिपुर की राजधानी इम्‍फाल में 23 से 25 नवंबर तक आयोजित आठवे अंतरराष्‍ट्रीय पर्यटन मार्ट-2019 में 19 देशों के 34 विदेशी प्रतिनिधि देश के घरेलू पर्यटन उद्योग के 49 प्र‍तिनिधियों के साथ शिरकत कर रहे हैं।
  • मार्ट के दूसरे दिन का आरंभ आज पूर्वोत्‍तर के सभी आठ राज्‍यों, अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर,मेघालय,मिजोरम,नागालैंड,त्रिपुरा तथा सिक्किम के पर्यटन विभागों की ओर से दी गई प्रस्‍तुतियों के साथ शुरु हुआ जिसमें इन राज्‍यों ने अपने पर्यटन स्‍थलों की जानकारी दी।

भारत में अंगदान संबंधित आकड़ें

  • अंगदान वह जरिया है जिसके जरिए एक इंसान दूसरे इंसान को दुनिया से जाने के बाद भी जिंदगी का उपहार दे जाता है। अंगदान के मामले दिलवालों की राजधानी दिल्ली ने सर्वश्रेष्ठ स्थान प्राप्त किया है। वहीं उत्तर प्रदेश और बिहार ने अंगदान के मामले में दरियादिली नहीं दिखाई। नतीजतन आंकड़ों में ये दोनों राज्य पीछे रह गए। अंगदान संबंधित सरकारी जागरुकता अभियान का लाभ अब राष्ट्रीय स्तर पर मिलता हुआ दिख रहा है। पिछले तीन वर्षों के दौरान देश के अंगदान से संबंधित ग्राफ में बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है। हालांकि, अभी भी 28 राज्यों और 9 केंद्र शासित प्रदेशों में से 22 में ही अंगदान की प्रक्रिया शुरू हो पाई है।

आंकड़ों में अंगदान की मौजूदा स्थिति

  • देश में अंग दान के मामले 2016 में 9046 से बढ़कर 2018 में 10,387 हो चुके हैं।
  • दिल्ली में 2018 में सर्वाधिक 2066 अंग दान किए गए।
  • यह संख्या 2016 में 1947 और 2017 में 1989 थी।
  • मृतअंगदान के मामले में जीवित लोगों ने तीन गुना अधिक अंगदान किया।

अंगदान के मामले में राज्यों की स्थिति

  • प्रथम स्थान - दिल्ली
  • द्वीतीय स्थान – तमिलनाडू
  • तृतीय स्थान - महाराष्ट्र

आंकड़ों में मृत और जीवित अंगदान

  • 2016 में मृत शरीर से 2265 अंग दान किए गए।
  • जीवित लोगों द्वारा 6781 अंगदान हुए।
  • यह अंतर 2017 में बढ़कर 2110 के मुकाबले 7489 हो गया। 2018 में मृत शरीर से 2254 अंग दान की तुलना में 8133 -लोगों ने जीवित रहते ही अंग दान किया।

:: भारतीय राजव्यवस्था एवं महत्वपूर्ण विधेयक ::

अदालतों में लंबित मामले

  • देश की निचली एवं जिला अदालतों में 3.14 करोड़ मामले लंबित हैं, जिनमें से करीब 14 प्रतिशत मामले 10 साल या इससे अधिक पुराने हैं। इसमें से 10 साल से अधिक पुराने सर्वाधिक मामले क्रमश: उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, ओडिशा, गुजरात में लंबित हैं। लोकसभा में दिया कुमारी, लाकेट चटर्जी, निशिकांत दूबे, पंकज चौधरी के सवाल के लिखित जवाब में विधि एवं न्याय मंत्रालय की ओर से पेश राष्ट्रीय न्यायिक डाटा के आंकड़ों के अनुसार, ‘वर्तमान में सुप्रीमकोर्ट में 59,867 मामले लंबित हैं जबकि हाईकोर्टों में 44, 76,625 मामले तथा जिला एवं निचली अदालतों में 3,14,53,555 मामले लंबित हैं।’ इस प्रकार से देश की अदालतों में करीब 3.59 करोड़ मामले लंबित हैं। राष्ट्रीय न्यायिक डाटा ‘ग्रीड’ के आंकड़ों के अनुसार, देश की निचली एवं जिला अदालतों में 3.14 करोड़ मामले लंबित हैं, जिसमें से करीब 14 प्रतिशत यानि 23,90,715 मामले 10 साल या इससे अधिक पुराने हैं। इसमें से उत्तर प्रदेश में 10 साल से अधिक पुराने 9,43,935 मामले लंबित हैं जबकि बिहार में 377250 महाराष्ट्र में 250095, पश्चिम बंगाल में 286443, ओडिशा में 175409, गुजरात में 175439, राजस्थान में 48437 मामले 10 साल या उससे अधिक पुराने हैं और लंबित हैं।

10 साल से अधिक पुराने केसों का शीघ्र निपटाने पर बल

  • कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने सदन को बताया कि देश के सभी उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों से आग्रह किया गया है कि वे अपने यहां की अदालतों में लंबित पड़े 10 साल या इससे अधिक पुराने मामलों का त्वरित निपटारा सुनिश्चित करें। 50 फीसदी से ज्यादा सजा काट चुके लोगों को जेल से बाहर निकालने से जुड़ी प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाना चाहिए। 25 फीसदी सजा काट चुकी महिला कैदियों को भी छोड़ा जाना चाहिए।

बोडो उग्रवादी संगठन (NDFB)

  • केंद्र ने असम के बोडो उग्रवादी संगठन एनडीएफबी पर लगे प्रतिबंध को अगले पांच वर्षो के लिए बढ़ा दिया है। केंद्र का कहना है कि संगठन लगातार हिंसक गतिविधियों के साथ-साथ रंगदारी मांगने जैसी आपराधिक घटनाओं को अंजाम दे रहा है। यही नहीं, वह भारत विरोधी ताकतों के साथ मिलकर देश की संप्रभुता के लिए खतरा भी पैदा कर रहा है।
  • पूर्वोत्तर के उग्रवादी संगठन पर लगे प्रतिबंध को बढ़ाने संबंधी एक अधिसूचना में गृह मंत्रालय ने कहा, 'नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ बोडोलैंड (एनडीएफबी) अलग बोडोलैंड बनाने की अपनी मंशा से भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता को बाधित करने के लिए अवैध और हिंसक गतिविधियों में लिप्त रहा है।'
  • अधिसूचना के अनुसार, 'गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम-1967 की धारा 3 की उप-धारा (1) द्वारा प्रदत्त शक्तियों के अनुसार केंद्र सरकार एनडीएफबी को उसके सभी समूहों, गुटों और अग्रिम संगठनों के साथ गैरकानूनी संगठन घोषित करती है।' प्रतिबंध तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है और यह पांच साल तक जारी रहेगा।
  • केंद्र सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में इस संगठन द्वारा की गई घटनाओं की संख्या का भी उल्लेख किया है।आंकड़ोके मुताबिक जनवरी 2015 के बाद से अबतक लगभग उनहत्तर हिंसक घटनाए हुई हैं, जिसमें 19 लोगों की हत्या हुई है।इस दौरान लगभग 55 चरमपंथी मारे गए हैं, 450 चरमपंथियों को गिरफ्तार किया गया है और 444 हथियार उनसे बरामद किया गया है।
  • गृह मंत्रालय के मुताबिक एनडीएफबी ने नरसंहार और जातीय हिंसा पैदा की जिसके परिणामस्वरूप हत्याएं हुईं, गैर-बोडो की संपत्ति को नष्ट किया गया, असम में बोडो बहुल क्षेत्रों में निवास करने वाले गैर-बोडो के बीच असुरक्षा का माहौल पैदा किया गया, देश की सीमा पर शिविर और ठिकाने स्थापित किया गया ताकि अलगाववादी गतिविधियों को हवा दि जा सके।

:: विज्ञान और प्रौद्योगिकी ::

ड्रोन 'प्रहरी'

  • आईआईटी-कानपुर के विद्यार्थियों ने ‘प्रहरी’ नामक ड्रोन तैयार किया है। यह ड्रोन न सिर्फ 4-5 किलोग्राम तक वजन उठा सकता है, बल्कि संवेदनशील क्षेत्र में लगातार तीन घंटे तक गश्त भी कर सकता है। इस ड्रोन में मानवरहित हेलिकॉप्टर की सुविधा है, जिसमें अन्य ड्रोन या अनमैंड एरियर वीइकल को पकड़ने के लिए जाल की सुविधा दी गई है। ऐसे में ‘प्रहरी’ अन्य ड्रोन का पीछा करने के साथ ही उन्हें पकड़ भी सकता है।
  • इस सिस्टम को प्रफेसर अभिषेक और एरोस्पेस इंजिनियरिंग विभाग के प्रफेसर मंगल कोठारी और उनके विद्यार्थियों द्वारा विकसित किया गया है। इस ड्रोन में अडवांस ऑटोपायलट सिस्टम भी है और यह अन्य ड्रोन को पकड़ने के दौरान वजन के बढ़ने से खुद की इंटेरिया में हुए अचानक बदलाव को संभालने में सक्षम है। इसे खास तौर पर सीमा पर निगरानी रखने के लिए और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से तैयार किया गया है।
  • 'इस ड्रोन का उपयोग निगरानी से लेकर भीड़ को नियंत्रित करने में, आपातकाल में किसी चीज की सप्लाई करने में, कृषि क्षेत्र में, बंधक व्यक्ति की स्थिति का पता लगाने में, रासायनिक और परमाणु एजेंट का पता लगाने में किया जा सकता है। यह दुश्मन ड्रोन से भी आगे निकल सकता है और उसे अपनी जाल से पकड़ सकता है।'

जिरकोनियम नाइट्राइड नैनोपार्टिकल्स: प्लैटिनम कैटेलिस्ट (उत्प्रेरक)

  • फ्यूल सेल में उपयोग होने वाले महंगे प्लैटिनम कैटेलिस्ट (उत्प्रेरक) के किफायती और टिकाऊ विकल्प खोजने की वैज्ञानिकों की कोशिशों को एक नई सफलता मिली है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) मद्रास और ब्रिटेन तथा चीन के वैज्ञानिकों ने जिरकोनियम नाइट्राइड नैनोपार्टिकल्स विकसित किए हैं जो फ्यूल सेल में उपयोग होने वाले प्लैटिनम उत्प्रेरक का किफायती विकल्प हो सकता है।
  • फ्यूल सेल में उपयोग होने वाले प्लैटिनम उत्प्रेरक की लागत सेल के कुल मूल्य की करीब 20 प्रतिशत होती है। प्लैटिनम एक दुर्लभ धातु है जिसकी प्रति ग्राम कीमत करीब तीन हजार रुपये तक होती है। दूसरी ओर, पृथ्वी पर जिरकोनियम भरपूर मात्र में मौजूद है और यह प्लैटिनम की तुलना में 700 गुना तक सस्ता भी है। शोधकर्ताओं का कहना है कि इन नैनोपार्टिकल्स का वास्तविक रूप में उपयोग किए जाने पर निकट भविष्य में बाजार में सस्ते और बेहतर फ्यूल सेल देखने को मिल सकते हैं।
  • आइआइटी मद्रास के शोधकर्ता तीजू थॉमस के अलावा इस अध्ययन में चीन के निनग्बो इंस्टीट्यूट ऑफ मैटेरियल्स टेक्नोलॉजी एंड इंजीनियरिंग के याओ युआन, हैंग्जिआ सेन एवं समीरा अदीमी, शंघाई इंस्टीट्यूट ऑफ सिरेमिक्स के जियाचेंग वांग तथा रुग्आंग मा, ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी ऑफ एडिनबर्ग केजे पॉल एटफील्ड और चीन की यूनिवर्सिटी ऑफ चाइनीज एकेडेमी ऑफ साइंसेज के वैज्ञानिक मिन्घुई यांग शामिल थे। यह अध्ययन शोध पत्रिका नेचर मैटेरियल्स में हाल में प्रकाशित किया गया है।
  • ऑक्सीजन रिडक्शन रिएक्शन (ओआरआर) फ्यूल सेल और मेटल-एयर बैटरियों में होने वाली एक प्रमुख रसायनिक अभिक्रिया है, जिसके उत्प्रेरक के रूप में प्लैटिनम का उपयोग होता है। प्लैटिनम आधारित सामग्री का उपयोग माइक्रो-इलेक्ट्रॉनिक सेंसर्स, कैंसर की दवाओं, ऑटोमोटिव कैटेलिटिक कन्वर्टर और इलेक्ट्रोकेमिकल एनर्जी कन्वर्जन उपकरणों में भी होता है, लेकिन अत्यधिक महंगा, दुर्लभ और विषाक्तता के प्रति संवेदनशील होने के कारण प्लैटिनम का बड़े पैमाने पर उपयोग एक बड़ी बाधा है।

क्या होता है फ्यूल सेल

  • सेल एक ऐसा उपकरण है जो आणविक बंधों में संचित रासायनिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित कर सकता है। सामान्य तौर पर उपयोग होने वाले हाइड्रोजन फ्यूल सेल में हाइड्रोजन अणुओं को धनात्मक रूप से आवेशित हाइड्रोजन आयन और इलेक्ट्रॉन में विभाजित करने के लिए प्लैटिनम को उत्प्रेरक के रूप में उपयोग किया जाता है। जबकि इलेक्ट्रॉन प्रत्यक्ष विद्युत उत्पादन करने के लिए प्रवाहित होते हैं और धनात्मक हाइड्रोजन आयन ऑक्सीजन के साथ मिलकर ऊर्जा के सबसे स्वच्छ रूपों में से एक के उत्पादन का मार्ग प्रशस्त करते हैं। इस प्रक्रिया में ऑक्सीजन की आपूर्ति एक अन्य इलेक्ट्रोड के माध्यम से होती है। शोधकर्ताओं का कहना है कि जिरकोनियम नाइट्राइड प्लैटिनम आधारित कार्यों को तो कुशलता से पूरा करता ही है, बल्कि कई मायनों में इसे प्लैटिनम उत्प्रेरकों के मुकाबले अधिक बेहतर पाया गया है।
  • तेजी से बदलती डिजिटल दुनिया में फ्यूल सेल और मेटल-एयर बैटरियां भविष्य में ऊर्जा के क्षेत्र में नए बदलावों को जन्म दे सकती हैं। ऑटोमोटिव इंडस्ट्री और ऑफ-ग्रिड ऊर्जा उत्पादन में भी इनकी भूमिका विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो सकती है। प्लैटिनम की उच्च लागत इन बैटरियों के उपयोग में अब तक सबसे बड़ी बाधा रही है। बेहतर क्षमता के किफायती और टिकाऊ उत्प्रेरक इस बाधा को दूर करने में मददगार हो सकते हैं।

फास्टैग: FASTag

  • एक दिसंबर से नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचआई) के देशभर में मौजूद करीब 520 टोल पर फास्टैग शुरू हो जाएगा। यह सभी निजी और व्यावसायिक वाहनों पर लगाना अनिवार्य है। फास्टैग कार के सामने वाले शीशे पर ऊपर की ओर लगा होगा। अमूमन इसे शीशे पर बायीं तरफ लगाया जाता है, ताकि, ड्राइवर को किसी प्रकार की परेशानी न हो। 2014 के बाद के वाहनों में यह कंपनी से लगा आता है। हालांकि 2014 से पहले के जितने भी वाहन हैं, उन्हें लगवाना पड़ेगा। 30 नवंबर तक एनएचएआई द्वारा फास्टैग मुफ्त में उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

क्या है फास्टैग

  • फास्टैग एक छोटा सा इलेक्ट्रॉनिक उपकरण है। ये ऐसा ही है जैसा की कोई क्रेडिट या डेबिट कार्ड। हालांकि, आकार में यह क्रेडिट कार्ड से आधा या उससे छोटा भी होता है। इसमें एक चिप लगी होती है, जिसके अंदर आपके वाहन से संबंधित सारी जानकारी मौजूद रहती है। जैसे ही आप टोल प्लाजा पर जाएंगे, आपके वाहन से जुड़ी सारी जानकारी दर्ज हो जाएगी और टोल की राशि अपने आप कट जाएगी।
  • राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) और दिल्ली नगर निगम के सभी टोल प्लाजा पर एक दिसंबर तक फास्टैग मुफ्त में लगाए जा रहे हैं।

साइबर अपराध से निपटने हेतु सॉफ्टवेयर

  • ऑनलाइन अपराध कर पुलिस को चकमा देने के लिए साक्ष्य नष्ट करने वाले साइबर अपराधियों की अब खैर नहीं। दिल्ली पुलिस की साइबर सेल ने अब नष्ट किए गए ऑनलाइन साक्ष्यों का पता लगाने का भी रास्ता ढूंढ़ निकाला है। इसके लिए पुलिस ने तीन नए सॉफ्टवेयर खरीदे हैं। इसके इस्तेमाल से डिलीट डाटा तो हासिल होगा ही, क्षतिग्रस्त सिमकार्ड, मेमोरी चिप, मोबाइल से भी डाटा हासिल हो सकेगा।
  • इन सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करने वाली दिल्ली पुलिस संभवत: देश की पहली एजेंसी होगी।
  • दिल्ली पुलिस इन तीनों सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल से ऑनलाइन छेड़छाड़ को भी ट्रैक कर सकेगी। अगर अपराधी ने साक्ष्यों को अपने सिस्टम में पासवर्ड के जरिये लॉक किया है तो उसे तोड़ा भी जा सकता है। अभी कुछ यूरोपीय देशों की एजेंसियां इन सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कर रही हैं। अब दिल्ली पुलिस भी इनका इस्तेमाल करेगी।

1. क्लाउड फॉरेंसिक सिस्टम

  • इसके जरिये पुलिस साइबर अपराधियों के सर्विस प्रोवाइडर, आईपी ऐड्रेस, मेटा डाटा और लॉग मॉनिटरिंग कर सकेगी। मेटा डाटा में इस्तेमाल किए गए इनसाइड डेटा जैसे यूजर आईडी, उपकरण (मोबाइल, लैपटॉप, पीसी) की डिटेल भी मिल जाएगी।

2. मोबाइल फॉरेंसिक सिस्टम

  • इसके जरिये साइबर सेल खासतौर से मोबाइल से डिलीट किए डाटा, डैमेज सिमकार्ड, चिप से डाटा फिर हासिल कर लेगी। लॉक को भी खोलने में सक्षम होगी। दरअसल इस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल से किसी भी तरह के लॉक को तोड़ने में मदद मिलेगी।

3. नेटवर्क फॉरेंसिक सिस्टम

  • इसे मॉनिटरिंग एंड एनालिसिस ऑफ कम्प्यूटर ट्रैफिक फॉर इनफॉरमेशन सिस्टम भी कहा जाता है। इससे पता चल जाएगा कि कहां से सबसे ज्यादा ट्रैफिक जनरेट हो रहा है। इसकी खासियत है कि इसके जरिए साइबर सेल डाटा चुराने वाले पर नजर रख सकेगी।

5G: प्लेटफॉर्म

  • भारत 5जी लांच करने के लिए पूरी तरह तैयार है। चौथी पीढ़ी की इस तकनीक को मूर्त रूप देने के लिए देश में प्लेटफार्म तैयार कर लिया गया है। बीते एक साल से संबंधित इंजीनियर को प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जो कि अब पूरा हो गया है। भारत सरकार ने आईटीयू (इंटरनेशनल टेलीकॉम यूनियन) में अपनी रिपोर्ट भी जमा कर दी है। अब आईटीयू की हरी झंडी का इंतजार है।
  • गाजियाबाद स्थित एएलटीटी (उच्च स्तरीय दूरसंचार प्रशिक्षण केंद्र) के अधिकारियों के मुताबिक 5जी को सपोर्ट करने वाले सिस्टम का स्टैंडर्ड माड्यूल आईटीयू द्वारा तैयार किया जाना है। इसके लिए आईटीयू ने काम शुरू कर दिया है। जैसे ही यह स्टैंडर्ड माड्यूल तैयार होगा, चीन, जापान और अमेरिका जैसे देशों के साथ भारत भी अपनी पूरी ताकत से इस तकनीक की लांचिंग में जुट जाएगा।
  • इस संबंध में भारत ने आईटीयू को अपनी तैयारी के संबंध में अवगत करा दिया है। यहां भारत में तैयार मजबूत प्लेटफार्म आगे बढ़ने में कारगर साबित होगी। अधिकारियों ने बताया कि जिस देश का प्लेटफार्म जितना मजबूत होगा, उसे उतनी जल्दी सफलता मिलेगी।

:: विविध ::

भारतीय क्रिकेट टीम

  • भारतीय क्रिकेट टीम ने बांग्लादेश के खिलाफ रविवार को 'पिंक बॉल टेस्ट' में पारी से जीत दर्ज कर नया इतिहास रचा। टीम इंडिया ने टेस्ट सीरीज में लगातार दोनों मुकाबले जीत कर सीरीज पर 2-0 से कब्जा किया। टेस्ट चैंपियनशिप के तहत खेले गए पिछले छह लगातार मुकाबलों ने टेस्ट क्रिकेट के 143 साल के इतिहास को बदल दिया।
  • भारत, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की टीम ने आईसीसी टेस्ट चैंपियनशिप के तरह खेले गए मुकाबलों में पारी की बड़ी जीत दर्ज कर टेस्ट क्रिकेट में नया कमाल कर दिखाया है। इन तीनों टीमों ने लगातार छह टेस्ट मैच को पारी से जीत कर नया रिकॉर्ड बना डाला है। इससे पहले कभी भी टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में कभी भी लगातार छह टेस्ट मैचों में टीम ने पारी से जीत दर्ज नहीं की थी।

बदला 143 साल पुराना टेस्ट इतिहास

  • साल 1876 में पहली बार इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के बीच पहली टेस्ट सीरीज खेली गई थी। 143 साल में पहली बार ऐसा हुआ है कि पिछले छह लगातार टेस्ट मैचों में टीम ने पारी के अंतर से जीत हासिल की है। पिछले छह मैचों पर अगर नजर डालें तो मुकाबले की विजेता टीम ने महज एक बार ही बल्लेबाजी की है। इससे पहले कभी भी लगातार छह टेस्ट मैच में पारी की जीत देखने को नही मिली थी। इसमें भारतीय टीम के नाम चार, जबकि ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के नाम एक -एक पारी की जीत दर्ज है।

:: प्रिलिम्स बूस्टर ::

  • हरिद्वार कुंभ 2021 के आयोजन की थीम क्या है? (ग्रीन कुंभ)
  • हाल ही में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने किस स्थान पर सोवा रिग्पा राष्ट्रीय संस्थान (एनआईएसआर) स्थापित करने की मंजूरी प्रदान की है? (लेह)
  • हाल ही में चर्चा में रहे ‘सोवा-रिग्पा’ क्या है? (प्राचीन चिकित्सा पद्धति)
  • आठवे अंतरराष्‍ट्रीय पर्यटन मार्ट-2019 का आयोजन कहां किया गया? (इंफाल-मणिपुर)
  • हाल ही में जारी आंकड़ों के अनुसार अंगदान के मामलों में कौन सा राज्य प्रथम स्थान पर रहा? (दिल्ली)
  • राष्ट्रीय न्यायिक डाटा ‘ग्रीड’ के आंकड़ों के अनुसार किस राज्य के निचली अदालतों में 10 साल या इससे ज्यादा पुराने लंबित मामलों की संख्या सर्वाधिक है? (उत्तर प्रदेश)
  • हाल ही में केंद्र सरकार के द्वारा किस उग्रवादी संगठन पर लगे प्रतिबंध को 5 वर्षों के लिए बढ़ा दिया है? (बोडो उग्रवादी संगठन-एनडीएफबी)
  • बोडो उग्रवादी संगठन एनडीएफबी किस राज्य से संबंधित है? (असम)
  • हाल ही में चर्चा में रहे आईआईटी कानपुर के द्वारा विकसित ‘प्रहरी’ क्या है? (ड्रोन)
  • वाहनों के फ्यूल सेल में कैटेलिस्ट (उत्प्रेरक) के रूप में किस धातु का प्रयोग होता है? (प्लैटिनम)
  • किस तिथि से नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचआई) के सभी टोल बूथों पर फास्टैग का प्रयोग अनिवार्य होगा? (1 दिसंबर)
  • हाल ही में 5G परीक्षण को लेकर चर्चा में रहे एएलटीटी (उच्च स्तरीय दूरसंचार प्रशिक्षण केंद्र) कहां स्थित है? (गाजियाबाद)
  • हाल ही में किस देश के द्वारा पिछले लगातार टेस्ट मैचों में पारी के अंतर से जीत हासिल करने की उपलब्धि अपने नाम की गई है? (भारत)

स्रोत साभार: Dainik Jagran (Rashtriya Sanskaran), Dainik Bhaskar (Rashtriya Sanskaran), Rashtriya Sahara (Rashtriya Sanskaran) Hindustan Dainik (Delhi), Nai Duniya, Hindustan Times, The Hindu, BBC Portal, The Economic Times (Hindi & English), PTI, PIB

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