(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (25 मई 2020)

दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर


(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (25 मई 2020)


:: राष्ट्रीय समाचार ::

प्रधानमंत्री वन धन योजना (PMVDY)

  • गिलोय और अन्य उत्पादों का विपणन करने वाली थाणे में शाहपुर की ‘आदिवासी एकात्मिक सामाजिक संस्था’ प्रधानमंत्री वन धन योजना के तहत विकास के पथ पर अग्रसर हो रही है। वन संपदा के कुशल प्रबंधन के माध्यम से कातकारी जनजातीय समुदाय के उत्थान के लिए एक रोल मॉडल प्रस्तुत करती है।

क्या है गिलोय?

  • आयुर्वेद में गुडूची नाम से विख्यात गिलोय का उपयोग औषधियों में होता है, जिससे विभिन्न प्रकार के बुखारों (वायरल बुखार, मलेरिया आदि) तथा मधुमेह में उपयोग में लाया जाता है। यह अर्क रूप, पाउडर रूप या क्रीम के रूप में उपयोग में लाया जाता है।

प्रधानमंत्री वन धन योजना (PMVDY)

  • जनजातीय समुदाय के लोगों सशक्तिकरण हेतु प्रधानमंत्री मोदी ने 14 अप्रैल 2018 ने बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर के जन्‍मदिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ के बीजापुर में वन धन विकास योजना को लांच किया था। प्रधानमंत्री वन धन योजना का उद्देश्य जनजातीय उद्यम का सृजन करना है। ट्राइफेड इसकी नोडल एजेंसी है एवं ट्राइफेड ने अब तक 26 राज्यों और एक केन्द्र शासित प्रदेश में 1101 वन धन केन्द्रों की स्थापना से जुड़े प्रस्तावों को मंजूरी दी है।

क्या है PMVDY का उद्देश्य?

  • वन संपदा अर्थात वन धन का दोहन कर जनजातीय समुदाय के लोगों के लिए आजीविका का सृजन करना
  • जनजातीय लोगों के पारम्परिक ज्ञान एवं कौशल को ब्रांडिंग, पैकेजिंग एवं विपणन से संबंधित कौशल देकर बाजार की अगुवाई वाले उद्यम मॉडल के जरिए उनकी आय को अधिक करना
  • प्राथमिक स्‍तर पर लघु वन उत्पादों में मूल्य संवर्धन कर ज़मीनी स्‍तर पर जनजातीय समुदाय का उन्नयन करना
  • इससे 3 वर्षों के दौरान 45 लाख जनजातीय लोगों के रोजगार एवं उद्यमिता विकास के लिए जनजातीय उद्यमों का सृजन करने की परिकल्पना की गई है।

ब्रांडिंग, पैकेजिंग एवं विपणन हेतु PMVDY की अनूठी पहल:

  • आईआईटी एवं आईआईएम और राष्ट्रीय स्तर के संस्थानों को इस पहल में सहयोग के लिए जोड़ा गया है
  • इसमें फिक्की, सीआईआई, एसोचैम, पीएचडी चैम्बर एवं डीआईसीसीआई जैसे संगठनों को भी जोड़ा जा रहा है
  • जनजातीय उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए वाणिज्य, एमएसएमई, ग्रामीण विकास एवं रेल जैसे मंत्रालयों से संपर्क

ट्राइफेड (TRIFED) क्या है?

  • भारतीय जनजातीय सहकारी विपणन विकास संघ (TRIFED) की 6 अगस्त, 1987 को स्थापना की गई। ट्राईफेड का मुख्य उद्देश्य आदिवासी उत्पादों के विपणन और विकास के माध्यम से जनजातीय लोगों का सशक्तिकरण करना है। यह जनजातीय उत्पादों के खरीद और विपणन की शीर्ष संस्था है एवं इसका मुख्यालय नयी दिल्ली में है।

भौगोलिक संकेत(Geographical Indication)

चर्चा में क्यों?

  • डाक विभाग और बिहार सरकार के बागवानी विभाग ने लोगों के दरवाजों तक ‘शाही लीची’ और ‘जर्दालु आम’ की आपूर्ति करने के लिए हाथ मिलाया है। मुजफ्फरपुर (बिहार) की ‘शाही लीची’ और भागलपुर (बिहार) का ‘ जर्दालु आम’ अपने अनूठे स्वाद के कारण GI टैग प्राप्त है।

GI टैग क्या है?

  • जीआई टैग या भौगोलिक संकेत(Geographical Indication) किसी भी उत्पाद के लिए एक प्रतीक चिन्ह के समान होता है।
  • यह उत्पाद की विशिष्ट भौगोलिक उत्पत्ति, विशेष गुणवत्ता और पहचान के आधार पर दिया जाता है।
  • जीआई टैग उस उत्पाद की गुणवत्ता और उसकी विशेषता को दर्शाता है।
  • किसी उत्पाद के जीआई टैग के लिए आवश्यक है कि “उत्पाद का उत्पादन या प्रोसेसिंग उसी क्षेत्र में होना चाहिए जहाँ के लिए जीआई टैग लिया जा रहा है।”
  • भारत में जीआई टैग को किसी विशेष फसल, प्राकृतिक और निर्मित उत्पादों को प्रदान किए जाते हैं।
  • कई बार जीआई टैग को एक से अधिक राज्यों में पाई जाने वाली फसलों या उत्पादों को प्रदान की जाती है। उदाहरण के लिए- बासमती चावल( पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड)
  • भारत में सबसे पहले दार्जिलिंग की चाय को 2004 में जीआई टैग प्राप्त हुआ था।
  • भारत के कुछ महत्वपूर्ण उत्पाद जिन्हें जीआई टैग प्राप्त है- महाबलेश्वर-स्ट्रॉबेरी, जयपुर -ब्लू पोटरी, बनारसी साड़ी, तिरुपति के लड्डू, मध्य प्रदेश के झाबुआ के कड़कनाथ मुर्गा, कांगड़ा की पेंटिंग, नागपुर का संतरा, कश्मीर की पाश्मीना, हिमाचल का काला जीरा, छत्तीसगढ़ का जीराफूल और ओडिशा की कंधमाल हल्दी इत्यादि।

GI टैग का विनियमन

  • औद्योगिक संपत्ति के संरक्षण हेतु जीआई टैग को पेरिस कन्वेंशन के अंतर्गत बौद्धिक संपदा अधिकारों (आईपीआर) के रूप में शामिल किया गया था।
  • अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जीआई टैग का विनियमन विश्व व्यापार संगठन( डब्ल्यूटीओ) के द्वारा किया जाता है।
  • भारत में जीआई टैग का विनियमन वस्तुओं के भौगोलिक सूचक (पंजीकरण और संरक्षण) अधिनियम 1999 के अंतर्गत किया जाता है।
  • वस्तुओं के भौगोलिक सूचक (पंजीकरण और संरक्षण) अधिनियम, 15 सितंबर, 2003 से लागू हुआ था।
  • जीआई टैग का अधिकार हासिल करने के लिए चेन्नई स्थित जी आई डेटाबेस में अप्लाई करना पड़ता है।
  • एक बार जीआई टैग का अधिकार मिल जाने के बाद 10 वर्षों तक जीआई टैग मान्य होते हैं। इसके उपरांत उन्हें फिर रिन्यू कराना पड़ता है।

जीआई टैग से लाभ

  • जीआई टैग किसी क्षेत्र में पाए जाने वाले उत्पादन को कानूनी संरक्षण प्रदान करता है।
  • जीआई टैग के द्वारा उत्पादों के अनधिकृत प्रयोग पर अंकुश लगाया जा सकता है।
  • यह किसी भौगोलिक क्षेत्र में उत्पादित होने वाली वस्तुओं का महत्व बढ़ा देता है।
  • जीआई टैग के द्वारा सदियों से चली आ रही परंपरागत ज्ञान को संरक्षित एवं संवर्धन किया जा सकता है।
  • जीआई टैग के द्वारा स्थानीय उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने में मदद मिलती है।
  • इसके द्वारा टूरिज्म और निर्यात को बढ़ावा देने में मदद मिलती है।

:: अंतर्राष्ट्रीय समाचार ::

लद्दाख बॉर्डर पर चीन का शक्ति-प्रदर्शन

  • भारत और चीन के बीच पूर्वी लद्दाख में शुरू हुआ तनाव बढ़ता ही जा रहा है। अब दोनों देशों ने अपने-अपने सैनिकों को भारी संख्‍या में वहां तैनात कर दिया है। गल्वान घाटी में चीन ने पिछले दो सप्‍ताह के भीतर करीब 100 टेंट गाड़ दिए हैं। वह मशीनरी भी यहां ला रहा है जो शायद बंकर्स बनाने में इस्‍तेमाल हो। भारत भी पैगोंग झील और गल्वान घाटी में सैनिकों की तैनाती लगातार बढ़ा रहा है। कई इलाकों में भारत की पोजिशन चीन से बेहतर है।

बॉर्डर पर शक्ति-प्रदर्शन कर रहा चीन?

  • चीन ने भारी संख्‍या में बॉर्डर डिफेंस रेजिमेंट (BDR) के जवानों को तैनात किया है। भारत ने भी 'मिरर डिप्‍लॉयमेंट' की रणनीति अपनाई है। इसका मतलब ये है कि चीन जितनी मैनपावर और रिसोर्सेज लगाएगा, भारत भी उसी टोन में जवाब देगा। चीन ने सिर्फ सैनिक ही नहीं बुलाए, झील में नावों की संख्‍या बढ़ा दी है। हवाई निगरानी के लिए गल्वान घाटी में हेलिकॉप्‍टर्स उड़ रहे हैं। द प्रिंट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, चीन ने करीब 1300 सैनिक यहां पर तैनात किए हैं। भारत भी उसी हिसाब से सैनिकों की तैनाती कर रहा है। हमारे सहयोगी टीओआई के मुताबिक, भारत ने लेह की इन्‍फैट्री डिजिवन की कुछ यूनिट्स को आगे भेजा है। कई और बटालियंस भी लद्दाख में मूव कराई गई हैं।

कैसे बिगड़ते गए हालात?

  • 5 मई को पूर्वी लद्दाख में करीब 250 चीनी सैनिक और भारतीय जवान आपस में भिड़ गए। इसमें दोनों ओर से करीब 100 सैनिक घायल हुए। कुछ दिन बाद, उत्‍तरी सिक्किम में फिर दोनों देशों के सैनिक भिड़े। इसके बाद से ही, पूर्वी लद्दाख तनाव का केंद्र बना हुआ है। यहां के दो पॉइंट्स पर फोकस है। पैंगोंग लेक और गल्वान घाटी। झील का उत्‍तरी किनारा हथेली जैसा है जिसके 8 भाग हैं जिसे आर्मी 'फिंगर्स' कहती है। भारत कहता है कि LAC 8वीं फिंगर से शुरू होती है जबकि चीन कहना है कि दूसरी से। चीन ने इस पॉइंट पर ब्‍लॉकिंग पॉइंट्स भी बना लिए हैं। भारत चौथी फिंगर तक के हिस्‍से को कंट्रोल करता है। चीन ने छह साल पहले, चौथे हिस्‍से पर परमानेंट कंस्‍ट्रक्‍शन की कोशिश की थी मगर भारत के कड़े विरोध के बाद उसे ढहा दिया गया।

चीन का लगातार आक्रामक रुख

  • पिछले साल नवंबर में केंद्रीय रक्षा राज्‍य मंत्री श्रीपद नाइक ने संसद में बताया था कि साल 2016 में चीन की सेना ने 273 बार बॉर्डर पर आक्रामक रुख दिखाया। 2017 में यह आंकड़ा बढ़कर 426 हो गया, इसी साल डोकलाम विवाद हुआ था। 2018 में चीन ने 326 बार झड़प की। 2019 का डेटा अभी तक सरकार ने जारी नहीं किया है।

जरूरत है 'ऑपरेशन मेघदूत' जैसे मिशन की

  • सीमा पर चीन ने हमेशा सैनिकों की तैनाती रखी है। भारत जरूरत पड़ने पर सैनिक भेजता है। मगर इन दिनों चीन जैसी हरकतें कर रहा है, उसे देखते हुए भारत को 'ऑपरेशन मेघदूत' जैसे एक मिशन की सख्‍त जरूरत है। 13 अप्रैल, 1984 को भारत ने इसी मिशन के जरिए कश्‍मीर में सियाचिन ग्‍लेशियर पर नियंत्रण कर लिया था। तब से आजतक पूरे सियाचिन ग्‍लेश‍ियर पर भारत का कंट्रोल बना है। सियाचिन दुनिया की सबसे ऊंची बैटलफील्‍ड है।

क्‍या है LAC का विवाद?

  • लाइन ऑफ एक्‍चुअल कंट्रोल (LAC) की सीमाएं विवादित हैं। भारत कहता है कि LAC 3,488 किलोमीटर लंबी है जबकि चीन इसे 2,000 किलोमीटर लंबी ही मानता है। चीन अरुणाचल प्रदेश को भारत का हिस्‍सा नहीं मानता। लद्दाख और सिक्किम में LAC से लगे कई इलाकों पर चीन अपना अधिकार जताता है। दोनों सेनाएं LAC पर रेगुलर पैट्रोल करती हैं और कई बार सैनिकों में झड़प होती रहती है। हालांकि 1962 के बाद से हालात इतने तनावपूर्ण नहीं हुए थे कि बात युद्ध तक पहुंचे। 2017 में सिक्किम का डोकलाम विवाद जरूर भारत-चीन के बीच तल्‍खी की वजह बना था मगर करीब ढाई महीने में वो मसला सुलझा लिया गया था।

1962 की जंग से है पैंगोंग झील का कनेक्‍शन

  • पूर्वी लद्दाख की पैंगोंग लेक एक लंबी, गहरी और चारों तरफ जमीन से घिरी झील है। करीब 14 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित यह झील लेह के दक्षिण-पूर्व में 54 किलोमीटर दूर स्थित है। 135 किलेामीटर लंबी यह झील करीब 604 वर्ग किेलोमीटर में किसी बूमरैंग की तरह फैली है। सर्दियों में यह झील जम जाती है। यह झील चुशूल अप्रोच के रास्‍ते में पड़ती है। यह वो रास्‍ता है जिसे चीन हमला करने के लिए इस्‍तेमाल कर सकता है। 1962 की जंग में भी चीन ने यही से बड़ा हमला किया था।

हॉन्ग कॉन्ग में चीन के विरुद्ध विरोध प्रदर्शन

  • लद्दाख में भारत को घेरने में जुटे चीन को हॉन्ग कॉन्ग में तगड़ा झटका लगा है। कई बार हिंसक हो चुके विरोध प्रदर्शनों को ध्यान में रखते हुए चीनी सरकार ने हॉन्ग-कॉन्ग के लिए नैशनल सिक्यॉरिटी कानून को संसद में पेश किया है। जिसके खिलाफ हॉन्ग कॉन्ग में सड़कों पर लाखों लोग उग्र प्रदर्शन कर रहे हैं। वहीं चीन समर्थित पुलिस लोकतंत्र की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों का सख्ती के साथ दमन कर रही है।

लगातार बढ़ रही है चीन की आक्रामक नीति

  • चीन की दादागिरी केवल हॉन्ग कॉन्ग और ताइवान में ही नहीं, बल्कि भारत के साथ लगे हुए लद्दाख सीमा पर भी जारी है। ताजा सैन्य झड़पों के बाद चीन ने बड़ी संख्या में सैनिकों को लद्दाख से लगी सीमा के नजदीक तैनात किया है। इतना ही नहीं, चीनी सेना भारतीय सड़क निर्माण को रोकने की भी प्लानिंग कर रही है।

हॉन्ग-कॉन्ग के लिए कानून

  • शिन्हुआ ने कहा है कि चीनी संसद सत्र से पहले एक बैठक में 'नैशनल सिक्यॉरिटी की रक्षा के लिए हॉन्ग-कॉन्ग में विशेष प्रशासनिक क्षेत्र में कानून व्यवस्था को स्थापित करने और बेहतर करने और तंत्र को लागू करने के लिए' बिल पर समीक्षा को अजेंडा में शामिल किया गया। साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के मुताबिक इस कानून के तहत विदेशी हस्तक्षेप, आतंकवाद और राष्ट्रदोही गतिविधयों पर प्रतिबंध होगा जिनसे सरकार को गिराने की कोशिश की जा रही हो।

1997 में चीन के हिस्से में था हॉन्ग-कॉन्ग

  • हॉन्ग-कॉन्ग ब्रिटिश शासन से चीन के हाथ 1997 में 'एक देश, दो व्यवस्था' के तहत आया और उसे खुद के भी कुछ अधिकार मिले हैं। इसमें अलग न्यायपालिका और नागरिकों के लिए आजादी के अधिकार शामिल हैं। यह व्यवस्था 2047 तक के लिए है।
  • हॉन्ग-कॉन्ग चीन का एक विशेष प्रशासनिक क्षेत्र है जहां आजादी की मांग को लेकर लाखों संख्या में पहले भी लोगों ने प्रदर्शन किया था। हालांकि, चीनी फौज और हॉन्ग-कॉन्ग की चीन समर्थित सरकार ने महीने भर से ज्यादा समय तक चले इस आंदोलन को हिंसक तरीके से कुचल दिया। इस दौरान हुई झड़पों में बड़ी संख्या में लोगों की मौत भी हुई थी।

राष्ट्रगान को लेकर विवाद

  • कुछ दिन पहले हॉन्ग-कॉन्ग में चीन के राष्ट्रगान को लेकर विधान परिषद में पेश किए एक विधेयक पर जमकर बवाल हुआ था। परिषद में चर्चा के दौरान लोकतंत्र समर्थक सांसदों ने इस बिल का विरोध किया था जिसके बाद लोकतंत्र समर्थक कई सांसदों को जबरन परिषद की कार्यवाही से बाहर निकाल दिया गया। बता दें कि इस विधेयक के पास होने के बाद हॉन्ग-कॉन्ग में चीनी राष्ट्रगान का अनादर करना अपराध की श्रेणी में आ जाएगा।

:: अर्थव्यवस्था ::

पार्टिसिपेटरी नोट्स (पी-नोट्स)

चर्चा में क्यों?

  • घरेलू पूंजी बाजारों में अप्रैल के अंत तक पार्टिसिपेटरी नोट्स (पी-नोट्स) के जरिये निवेश बढ़कर 57,100 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। इससे पिछले महीने यह 15 साल के निचले स्तर पर आ गया था।
  • भारतीय प्रतिभूति एवं विनियम बोर्ड (सेबी) के आंकड़ों के अनुसार अप्रैल के अंत तक भारतीय बाजारों...शेयर, बांड, हाइब्रिड प्रतिभूतियों और डेरिवेटिव्स में पी-नोट्स के जरिये निवेश का आंकड़ा 57,100 करोड़ रुपये था। मार्च के अंत तक यह 48,006 करोड़ रुपये था। मार्च का आंकड़ा अक्टूबर, 2004 से निवेश का सबसे निचला स्तर था। उस समय भारतीय बाजारों में पी-नोट्स के जरिये निवेश 44,586 करोड़ रुपये था।

क्या है पार्टिसिपेटरी नोट्स (पी-नोट्स)?

  • पी-नोट्स पंजीकृत विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) द्वारा ऐसे विदेशी निवेशकों को जारी किए जाते हैं जो सीधे अपना पंजीकरण कराए बिना भारतीय शेयर बाजार में निवेश करना चाहते हैं। हालांकि, उन्हें पूरी जांच-परख की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है।

भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई)

चर्चा में क्यों?

  • दूरसंचार कंपनियों ने भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) से सेवाओं की न्यूनतम दरें तय करने की प्रतावित व्यस्था लागू करने में तेजी करने का आग्रह किया है।

पृष्ठभूमि

  • निजी क्षेत्र की दूरसंचार सेवा कंपनियों के इस मंच ऑपरेटरों ने कहा कि इस क्षेत्र की मजबूती और कंपनियों को स्पेक्ट्रम तथा समायोजित सकल राजस्व (एजीआर) के बकायों के भुगतान की हालत में बनाए रखने के लिए न्यूनतम मूल्य या फ्लोर प्राइस बेहद जरूरी कदम होगा। न्यूनतम दर व ्यवस्था लागू होने पर कोई कंपनी बाजार प्रतिस्पर्धा में सेवा का मूल्य उससे कम नहीं रख पाएगी।
  • बाजार में रिलायंस जियो के आने के बाद सेवाओं की दरें गिरी हैं इस पुरानी कंपनियों की ओर से यह मांग तेजी से उठायी जा रही है। सेल्युलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीओएआई) ने ट्राई को पत्र लिखकर इस मुद्दे पर जल्द खुली चर्चा कराए जाने की मांग की है। सीओएआई के सदस्यों में भारती एयरटेल, वोडाफोन आइडिया और रिलायंस जियो जैसी कंपनियां हैं।
  • ट्राई के चेयरमैन आर एस शर्मा को लिखे इस पत्र में सीओएआई ने कहा है कि क्षेत्र पर वित्तीय दबाव तथा इस तथ्य को देखते हुए कि भारतीय दूरसंचार क्षेत्र में औसत राजस्व प्रति ग्राहक (एआरपीयू) और शुल्क दर दुनिया में सबसे निचले स्तर पर हैं, न्यूनतम कीमत तय किया जाना जरूरी है।
  • पत्र में कहा गया है कि दूरसंचार क्षेत्र को आगे टाले गए स्पेक्ट्रम भुगतान तथा एजीआर का बकाया चुकाना है। साथ ही विश्वस्तरीय नेटवर्क और सेवाओं में निवेश करना भी जरूरी है, ऐसे में क्षेत्र को टिकाऊ बनाने को न्यूनतम मूल्य को जल्द से जल्द तय किया जाना चाहिए। सीओएआई ने कहा कि उद्योग चाहता है कि नियामक डेटा सेवाओं के न्यूनतम शुल्क पर जल्द फैसला करे।

भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई)

  • दूरसंचार सेक्टर में निजी सेवा प्रदाताओं का प्रवेश के साथ इस क्षेत्र के स्वतंत्र विनियमन की आवश्यकता महसूस की गयी। इसके मद्देनजर दूरसंचार सेवाओं के लिए प्रशुल्क का निर्धारण/संशोधन सहित दूरसंचार सेवाएं को विनियमित करने के लिए, संसद के अधिनियम द्वारा दिनांक 20 फरवरी, 1997 को भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण की स्थापना हुई, जिसे भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण अधिनियम 1997 कहा जाता है।
  • भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण का मिशन है-देश में दूरसंचार सेवाओं के विकास के लिए ऐसी रीति से और ऐसी गति से परिस्थितियां सृजित और संपोषित करना, जो भारत को उभरते हुए वैश्विक सूचना समाज में एक अग्रणी भूमिका निभाने के लिए समर्थ बना सके। इसके प्रमुख उद्देश्यों में से एक है-एक उचित और पारदर्शी नीति व वातावरण प्रदान करना, जो सभी के लिए समान अवसरों को प्रोत्साहित करता है तथा समुचित प्रतिस्पर्धा को सुकर बनाता है।

‘एचआईएल (इंडिया) लिमिटेड’

  • कोविड-19 के कारण किए गए लॉकडाउन से उत्‍पन्‍न लॉजिस्टिक्स एवं अन्य चुनौतियों के बावजूद रसायन और उर्वरक मंत्रालय के रसायन एवं पेट्रोरसायन विभाग के अधीनस्‍थ सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम (पीएसयू) ‘एचआईएल (इंडिया) लिमिटेड’ ने कृषक समुदाय के लिए बिल्‍कुल ठीक समय पर कीटनाशकों का उत्पादन और आपूर्ति सुनिश्चित की है।
  • एचआईएल अब भारत और ईरान के बीच सरकारी स्‍तर पर हुई व्यवस्था के तहत ईरान को टिड्डी नियंत्रण कार्यक्रम के लिए 25 एमटी मैलाथियान टेक्निकल का उत्पादन और आपूर्ति करने की प्रक्रिया में है। केंद्रीय विदेश मंत्रालय (एमईए) ने इस वस्तु यानी कीटनाशक का उत्‍पादन कर इसकी आपूर्ति ईरान को करने के लिए एचआईएल से संपर्क किया है।
  • रसायन और उर्वरक मंत्रालय के रसायन एवं पेट्रोरसायन विभाग के अधीनस्‍थ सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम (पीएसयू) ‘एचआईएल (इंडिया) लिमिटेड’ रसायनों और कीटनाशकों की उत्पादन हेतु शीर्ष संस्था है। यही नहीं, इस केन्द्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम की क्रेडिट रेटिंग ‘बीबी’ से बढ़ाकर ‘बीबीबी- ’ कर दी गई है, जो एक ‘स्थिर निवेश ग्रेड’ को दर्शाती है।
  • इस कंपनी ने लैटिन अमेरिकी देश पेरु को 10 मीट्रिक टन फफूंद नाशक ‘मैंकोजेब’ का निर्यात किया है। इतना ही नहीं, 12 और मीट्रिक टन मैंकोजेब का निर्यात अगले एक सप्ताह में किया जाएगा। इसके अलावा, एचआईएल ने टिड्डी नियंत्रण कार्यक्रम के लिए राजस्थान और गुजरात को मैलाथियान टेक्निकल की आपूर्ति करने के लिए कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। एचआईएल ने पिछले सप्ताह तक 67 मीट्रिक टन मैलाथियान टेक्निकल का उत्पादन और आपूर्ति की थी। इसके विभिन्न राज्यों को 314 मीट्रिक टन डीडीटी 50% डब्ल्व‍यूडीपी की आपूर्ति की गई।

मैलाथियान टेक्निकल क्या है?

  • इसका उपयोग डेंगू और चिकनगुनिया नियंत्रण कार्यक्रम के लिए नगर निगमों द्वारा किया जाता है। इसके अलावा टिड्डी नियंत्रण कार्यक्रम में भी मैलाथियान टेक्निकल का प्रयोग किया जाता है।

:: विज्ञान और प्रौद्योगिकी ::

राफेल विमान

चर्चा में क्यों?

  • भारत में फ्रांस के राजदूत इमैनुएल लेनिन ने कहा कि भारत को 36 राफेल लड़ाकू विमानों की आपूर्ति में कोई देरी नहीं होगी और जिस समय सीमा को तय किया गया था उसका सख्ती से पालन किया जाएगा।

पृष्ठभूमि

  • भारत ने फ्रांस के साथ सितंबर 2016 में 36 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के लिए एक अंतर सरकारी समझौता करीब 58,000 करोड़ रुपये की लागत से किया था।

क्या है राफेल विमान और इसकी विशेषता?

  • राफेल विमान फ्रांस की विमानन कंपनी दसॉल्ट एविएशन द्वारा बनाया गया 2 इंजन वाला लड़ाकू विमान है। सबसे पहले 1970 में फ्रांसीसी सेना द्वारा अपने पुराने पड़ चुके लड़ाकू विमानों को बदलने की मांग उठी थी। इसके बाद फ्रांस ने 4 यूरोपीय देशों के साथ मिलकर एक बहुउद्देशीय लड़ाकू विमान की परियोजना पर काम शुरू किया, लेकिन बाद में उन देशों के साथ फ्रांस के मतभेद हो गए, जिसके बाद फ्रांस ने अकेले ही इस परियोजना पर काम शुरू कर दिया।
  • राफेल एक बहुत ही उपयोगी लड़ाकू विमान है। इसके एक विमान को बनाने में 70 मिलियन की लागत आती है। इस विमान की लंबाई 15.27 मीटर होती है और इसमें एक या दो पायलट ही बैठ सकते हैं।
  • इस विमान की खासियत है कि यह ऊंचे इलाकों में भी लड़ने में माहिर है। राफेल एक मिनट में 60 हजार फुट की ऊंचाई तक जा सकता है। यह अधिकतम 24,500 किलोग्राम का भार उठाकर उड़ने में सक्षम है। इसकी अधिकतम रफ्तार 2200 से 2500 किमी. प्रतिघंटा है और इसकी रेंज 3700 किलोमीटर है।
  • ऑप्ट्रॉनिक सिक्योर फ्रंटल इंफ्रारेड सर्च और ट्रैक सिस्टम से लैस इस विमान में एमबीडीए एमआइसीए, एमबीडीए मेटेओर और एमबीडीए अपाचे जैसी कई तरह की खतरनाक मिसाइलें और गन लगी होती हैं, जो पल भर में दुश्मनों को मिट्टी में मिला सकती है। इसमें लगी 1.30 एमएम की एक गन एक बार में 125 राउंड गोलियां चलाने में सक्षम है।
  • इसमें लगी मेटेओर मिसाइल 100 किलोमीटर दूर उड़ रहे फाइटर जेट को भी पलभर में मार गिराने में सक्षम है। इस तरह का मिसाइल चीन-पाकिस्तान समेत पूरे एशिया में किसी के पास भी नहीं है।

यूवीसी लाइट डिसइंफेक्टेंट बॉक्स और दोबारा इस्तेमाल होने वाले मास्क

  • आईआईटी गुवाहटी के वैज्ञानिकों ने एक डिवाइस का निर्माण किया है, जो कोरोना से बचाव में काफी कारगर होगी। आईआईटी गुवाहटी के वैज्ञानिकों ने कम कीमत वाला यूवीसी लाइट आधारित डिसइंफेक्टेंट बॉक्स का निर्माण किया है।
  • इसकी मदद से ग्लब्स, मास्क आदि को फेंकने से पहले संक्रमणमुक्त कर सकते हैं। इसकी मदद से फ्लोर को भी डिसइंफेक्ट कर सकते हैं। इसकी मदद से मेडिकल एसेसरीज के साथ-साथ कमरे और फ्लोर को भी सेनिटाइज किया जा सकता है। इसके अलावा, इसे अस्पताल, सार्वजनिक जगहों, घर के सामान और डिस्पोजेबल वेस्ट को संक्रमणमुक्त करने के लिए प्रयोग किया जा सकता है।
  • आईआईटी- गुवाहटी के डिजाइन डिपॉर्टमेंट की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ चारू मोंगा ने दोबारा इस्तेमाल होने वाले मास्क का निर्माण किया है। इस कम कीमत वाले मास्क को सिर्फ फिल्टर बदलकर कई बार इस्तेमाल किया जा सकता है। इस मास्क को डॉ चारू मोंगा ने हर्ष चतुर्वेदी के साथ मिलकर तैयार किया है। इसकी सैंपल मैन्युफैक्चिरंग ग्लोबल प्लास्टिक के द्वारा की गई है।

:: पर्यावरण और पारिस्थितिकी ::

बीएस 6 के लिए एल7 (क्वाड्रिसाइकिल) श्रेणी के लिए उत्सर्जन मानदंड अधिसूचित

  • सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने 22 मई 2020 को बीएस 6 के लिए एल7 (क्वाड्रिसाइकिल) श्रेणी के उत्सर्जन मानदंडों के बारे में अधिसूचना जीएसआर 308 (ई) जारी की है। ये मानदंड अधिसूचना की तारीख से लागू होते हैं। यह अधिसूचना भारत में सभी एल, एम और एन श्रेणी के वाहनों के लिए बीएस छह की प्रक्रिया को पूरा करती है। उत्सर्जन मानदंड डब्ल्यूएमटीसी चक्र के साथ यूरोपीय संघ के अनुरूप हैं। परीक्षण की प्रक्रिया एआईएस 137-भाग 9 में रखी गई है।

क्या है बीएस मानक?

  • बीएस यानी भारत स्टेज, जिसे भारत में साल 2000 में लागू किया गया था। इससे पहले तक भारत में कार्बन उत्सर्जन को लेकर कोई मानक तय नहीं थी। बीएस को यूरोपियन कार्बन उत्सर्जन मानक यूरो की तर्ज पर भारत में लागू किया गया था। BS मानक का निर्धारण एवं प्रवर्तन क्रमशः पर्यावरण मंत्रालय एवं केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के द्वारा कराया जाता है। देशभर में अप्रैल 2020 से पहले बीएस4 कार्बन उत्सर्जन मानक लागू थी। हालांकि अप्रैल 2020 में अगला उत्सर्जन मानक बीएस6 लागू है। भारत सरकार ने एक स्टेज छोड़कर बीएस4 के बाद सीधे बीएस6 लागू किया है। ऐसा करने के पीछे गाड़ियों से होने वाले प्रदूषण के स्तर में कमी लाने को वजह बताया गया है।

:: विविध ::

'साइंटिस्ट बियांड बॉर्डर' ग्रुप

  • आईआईटी गुवाहटी के सेंटर फॉर एनर्जी के शिक्षक प्रोफेसर हर्ष चतुर्वेदी और डिपॉर्टमेंट ऑफ डिजाइन की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ चारू मोंगा ने स्मॉर्ट डिविजन आईएनसी के निदेशक शशांका अशीली ने 'साइंटिस्ट बियांड बॉर्डर' ग्रुप बनाया है। इस ग्रुप में भारत, ऑस्ट्रेलिया, यूके, फ्रांस और अमेरिका के इंजीनियर, एंटरप्रेन्योर, साइंटिस्ट, शोधकर्ता और दुनिया भर के फैकल्टी आदि शामिल हैं। यह ग्रुप डाटा को एकत्रित करना, प्रसार करना और लोगों में जागरूकता पैदा करने का काम करता है।

:: प्रिलिम्स बूस्टर ::

  • महाराष्ट्र की कतकारी जनजाति के सशक्तिकरण से चर्चा में रहे प्रधान मंत्री वन धन योजना (PMVDY) योजना का मुख्य उद्देश्य क्या है? (गौण वन उत्पादों के मूल्यवर्धन से जनजाति लोगों का सशक्तिकरण)
  • चर्चा में रहे गिलोय (आयुर्वेद में गुडूची नाम से प्रसिद्ध) का उपयोग किन रोगों में होता है? (मधुमेह और बुखार-वायरल बुखार, मलेरिया)
  • ईरान को निर्यात से चर्चा में रहे ‘मैलाथियान टेक्निकल-Malathion Technical’ रसायन का प्रयोग किस लिए होता है? (टिड्डी, डेंगू और चिकनगुनिया नियंत्रण)
  • क्वाड्रिसाइकिल L7 के उत्सर्जन मानकों से चर्चा में रहे BS मानक का निर्धारण एवं प्रवर्तन क्रमशः किन संस्थाओं के द्वारा कराया जाता है? (क्रमशः पर्यावरण मंत्रालय एवं केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड)
  • घरेलू पूंजी बाजारों में निवेश बढ़ने से चर्चा में रहे पार्टिसिपेटरी नोट्स (पी-नोट्स) किसे जारी किए जाते हैं? ( ऐसे निवेशक जो बिना पंजीकृत हुए भारतीय बाजार में निवेश करना चाहते हैं)
  • न्यूनतम मूल्य या फ्लोर प्राइस की मांग से चर्चा में रहे भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) की स्थापना कब हुई एवं इसका मुख्यालय कहां है? (1997, नई दिल्ली)
  • हाल ही में हांगकांग में किस देश और किस कानून के विरुद्ध उग्र विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं? (चीन, नेशनल सिक्योरिटी एक्ट)
  • दुनिया की सबसे ऊंची बैटलफील्ड में शुमार सियाचिन ग्लेशियर पर भारत में किस अभियान के तहत अपना नियंत्रण स्थापित किया था? (ऑपरेशन मेघदूत)
  • भारत चीन सीमा विवाद के संदर्भ में चर्चा में रहे पैंगोंग झील और गल्वान घाटी किस राज्य/ केंद्र शासित प्रदेश से संबंधित है? (लद्दाख)
  • 36 लड़ाकू विमानों की आपूर्ति से चर्चा में रहे राफेल विमान को किस कंपनी ने बनाया है एवं यह किस पीढ़ी का लड़ाकू विमान है? (डेसॉल्ट एविएशन-फ्रांस, 4.5)
  • बिहार सरकार एवं डाक विभाग के द्वारा आपूर्ति से चर्चा में रहे जीआई टैग प्राप्त शाही लीची और जरदालु आम क्रमशः किस क्षेत्र के विशिष्ट उत्पाद हैं? (क्रमशः मुजफ्फरपुर और भागलपुर)

स्रोत साभार: Dainik Jagran (Rashtriya Sanskaran), Dainik Bhaskar (Rashtriya Sanskaran), Rashtriya Sahara (Rashtriya Sanskaran) Hindustan Dainik (Delhi), Nai Duniya, Hindustan Times, The Hindu, BBC Portal, The Economic Times (Hindi & English), PTI, PIB

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