(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (25 मार्च 2020)

दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर


(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (25 मार्च 2020)


:: राष्ट्रीय समाचार ::

मानव संसाधन विकास मंत्रालय की शिक्षा के लिए डिजिटल पहल

  • देशभर में तेजी से फैल रहे कोरोना के बढ़ते मामलों के मद्देनजर बच्चों की पढ़ाई में आ रही बाधा को दूर करने के लिए मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने डिजिटल पहल की है, जिसके जरिए बच्चे घर बैठे अपनी पढ़ाई पूरी कर सकते हैं।

दीक्षा ऐप

  • यह ऐप स्टूडेंट्स को स्कूल सिलेबस से जुड़ी सभी रोचक साम्रगी उपलब्ध कराने के साथ ही टीचर्स और पैरेंट्स के लिए भी कंटेन्ट उपलब्ध कराता है। हाल ही में सीबीएसई ने भी दीक्षा ऐप पर स्टूडेंट्स के लिए ई-कंटेन्ट भी लॉन्च किया है। अलग-अलग सब्जेक्ट्स के लॉन्च किए इन ई-कंटेन्ट के जरिए 6वीं से 10वीं तक के सभी स्टूडेंट्स को भी काफी मदद मिलेगी। इसके साथ ही इस ऐप पर 7वीं से 10वीं तक के बच्चों के लिए क्रिएटिव और क्रिटिकल थिंकिंग डेवेलप करने के लिए प्रश्न बैंक भी जारी किए है। इस ऐप को आईओएस और गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड किया जा सकता है।

ई-पाठशाला

  • इस वेब पोर्टल और मोबाइल ऐप को एनसीईआरटी ने डिजाइन किया है। इसमें 1886 ऑडियो साम्रगी, 2000 वीडियो, 696 ई- बुक्स और 504 फ्लिप बुक्स उपलब्ध हैं। इसके साथ ही 11वीं और 12वीं क्लास के लिए रोचक ई-कंटेन्ट भी उपलब्ध है।

स्वयं

  • इस ऑनलाइन एजुकेशन प्लैटफॉर्म से स्कूल और उच्च शिक्षा के विभिन्न ऑनलाइन कोर्सेस अवेलेबल है। इसमें एनसीईआरटी ने कक्षा 11वीं और 12वीं की स्कूल एजुकेशन के लिए 12 सब्जेक्ट में 28 कोर्स मॉड्यूल डेवेलप किए हैं।

राष्ट्रीय मुक्त शैक्षिक संसाधन कोष

  • इस पर पोर्टल अलग-अलग विषयों पर बेस्ड कई भाषाओं के क्वालिटेटिव डिजिटल कंटेन्ट उपलब्ध हैं। इसमें कुल 14,527 फाइलें हैं जिसमें 401 कलेक्शन, 2779 डॉक्यूमेंट्स,1345 इंटरेक्टिव कंटेन्ट, 1664 ऑडियो, 2,586 तस्वीरें और 6,153 वीडियो कार्यक्रम हैं।

स्वयं प्रभा

  • चैनल नंबर 31 किशोर मंच पर 11वीं और 12वीं क्लास के लिए सभी सब्जेक्ट्स में एनसीआरटी ने मान्यता प्राप्त ई- साम्रगी 24 घंटे प्रसारित की जाती है। चयनित राज्यों के लिए रोजाना 4 घंटे के लिए स्वयं प्रभा को डीटीएच पर भी प्रसारित किया जाता है। इसके साथ ही यहां पर स्कूल सिलेबस के मुताबिक ई-क्लासेस भी चलाई जाएगी है।

निष्ठा

  • यह एक समेकित शिक्षक प्रशिक्षण और मोबाइल ऐप है। इस पर डाइट, डीएलएड के शिक्षक और शिक्षण प्रशिक्षक सभी कोर्स मॉड्यूल, वीडियो,ऑडियो और अन्य कंटेन्ट कभी भी देख सकते हैं।

स्वयं

  • इस ऑनलीइन लर्निंग प्लैटफॉर्म पर ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट के स्टूडेंट्स के लिए सभी सिलेबस रिलेडेड कंटेन्ट भी अवेलेबल है। इन कंटेन्ट को कोई भी ,कही भी और किसी भी समय देख सकता है। खास बात यह है कि यह सभी कंटेन्ट इंटरेक्टिव है, जिसे देश के बेस्ट टीचर के द्वारा तैयार किए गए है। यह सभी स्टूडेट्स के लिए फ्री अवेलेबल है।

स्वयं प्रभा

  • स्वयं प्रभा का 32 चैनल, जो कि 24 घंटे उच्च शिक्षा के लिए क्वालिटेटिव टॉपिक प्रोवाइड कराता है। इसकी मदद से स्टूडेंट्स नॉलेज गेन करने के साथ ही अपनी प्रोडक्टिविटी और क्रिएटिविटी को भी बढ़ा सकते हैं।

कोरोना: निर्माण मजदूरों को राहत देने की तैयारी

  • कोरोना के प्रकोप को देखते हुए केंद्र सरकार ने सभी राज्यों को सलाह दी है कि उनके कंस्ट्रक्शन वेलफेयर बोर्ड के सेस फंड में जो रकम जमा है उसे निर्माण मजदूरों में वितरित कर दिया जाए. अगर ऐसा हुआ तो हर मजदूर के खाते में डायरेक्टर बेनिफिट ट्रांसफर के द्वारा पैसा जा सकता है.
  • देश के सभी राज्यों के कंस्ट्रक्शन वेलफेयर बोर्ड में सेस के रूप जो फंड जमा है, वह करीब 52,000 करोड़ रुपये का है. इन बोर्ड में कुल रजिस्टर्ड मजदूरों की संख्या 3.5 करोड़ है. यानी अगर यह पूरा पैसा ट्रांसफर कर दिया जाए तो एक मजदूर को 15 हजार रुपये मिल सकते हैं. हालांकि, कितनी रकम देनी है, देनी भी है या नहीं यह अभी राज्यों को तय करना है, क्योंकि यह केंद्र सरकार की सलाह मात्र है.

पृष्ठभूमि

  • गौरतलब है कि देश में कोरोना वायरस की वजह से कारोबार और अन्य कामकाज लगभग ठप हो गया है. इसका सबसे ज्यादा असर, मजदूरों, दिहाड़ी कमाने वाले लोगों पर पड़ा है. यूपी की योगी सरकार ने ऐसे ही लोगों को हर महीने 1000 रुपये देने की एक योजना शुरू की है. अब अगर केंद्रीय श्रम राज्य मंत्री की सलाह राज्य मानते हैं, तो निर्माण मजदूरों को काफी राहत मिल सकती है.

इन्वेस्ट इंडिया बिजनेस इम्युनिटी प्लेटफार्म

  • वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के तहत कार्यरत भारत की राष्ट्रीय निवेश संवर्धन और सुविधा एजेंसी ने इन्वेस्ट इंडिया बिज़नेस इम्युनिटी प्लेटफ़ॉर्म लॉन्च किया है।
  • इसका उद्देश्य व्यवसायों और निवेशकों को कोविड-19 (कोरोना वायरस) से निपटने के लिए भारत की ओर से की गई वास्तविक तैयारियों की ताजा जानकारी उपलब्ध कराने में मदद करना है। यह प्लेटफ़ॉर्म कोरोना वायरस से निपटने की तैयारियों, इस दिशा में केंद्र और राज्य सरकारो की विभिन्न पहलों पर नवीनतम जानकारी प्रदान करता है और ई-मेल के माध्यम से और व्हाट्सएप पर प्रश्नों का उत्तर उपलब्ध कराता है। चौबीसों घंटे काम करने वाला यह प्लेटफार्म कारोबार से संबंधित शिकायतों को निपटाने में भी मदद करता है। इसे विभिन्न कारोबारी क्षेत्रों की विशेषज्ञों की एक टीम ने तैयार किया है जो सभी तरह के प्रश्नों का तत्काल समाधान उपलब्ध कराती है। इन्वेस्ट इंडिया ने सूक्ष्म, लघु और मझौले उद्योगों की जरुरतों और आवश्यकताओं से जुडे सवालों के समाधान के लिए लघु उद्योग विकास बैंक के साथ साझेदारी की भी घोषणा की है।

:: अंतर्राष्ट्रीय समाचार ::

हिंद महासागर में देखा चीन व पाकिस्‍तान नौसेना की गतिविधियाँ

  • एक ओर जहां देश के भीतर कोरोना वायरस से जंग जारी है, वहीं भारतीय नौसेना समुद्र में कड़ी निगरानी रखे हुए है। नौसेना ने हिंद महासागर में चीन और पाकिस्तान की नौसेना का अलग-अलग मूवमेंट ट्रैक किया है और उस पर लगातार नजर रखी है।

लाल सागर से लेकर मलक्का स्ट्रेट तक निगरानी

  • फारस की खाड़ी और अदन की खाड़ी के नजदीक दस्यु विरोधी मिशन 'ऑपरेशन संकल्प' में तैनात भारतीय नौसेना के युद्धपोत लाल सागर से लेकर मलक्का स्ट्रेट तक निगरानी रख रहे हैं। इस दौरान नौसेना के युद्धपोतों ने पाकिस्तानी नौसेना में नए शामिल हुए युद्धपोत पीएनएस यर्मूक के मूवमेंट को ट्रैक किया जो लाल सागर के रास्ते रोमानिया से कराची जा रहा था।

चीनी नौसेना के मूवमेंट पर नजर

  • हिंद महासागर क्षेत्र में तैनात भारतीय नौसेना के युद्धपोतों ने चीनी नौसेना के वाई901 श्रेणी के युद्धपोत को भी ट्रैक किया जो एक टैंकर है। सूत्रों ने बताया कि इस चीनी युद्धपोत ने मलक्का स्ट्रेट के जरिये क्षेत्र में प्रवेश किया था। बता दें कि भारतीय नौसेना देश से लगते समुद्र में अपने युद्धपोतों और पी-8आइ जैसे पनडुब्बीरोधी युद्धक निगरानी विमानों के जरिये चीनी नौसेना के मूवमेंट पर नजर रखती है।

टोक्यो ओलंपिक खेल 2020

  • अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (आईओसी) ने मंगलवार को घोषणा की कि विश्व भर में फैली कोरोना वायरस महामारी के कारण टोक्यो ओलंपिक खेल 2020 को अगले साल गर्मियों तक के लिए स्थगित कर दिया गया है। पूर्व कार्यक्रम के अनुसार इन खेलों का आयोजन 24 जुलाई से नौ अगस्त के बीच होना था, लेकिन आईओसी अध्यक्ष थॉमस बाक और जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे के बीच टेलीफोन पर बातचीत के बाद ओलंपिक को पहली बार शांतिकाल में भी स्थगित करने का ऐतिहासिक फैसला किया गया। ऐसा पहली बार हुआ है, जब किसी बीमारी की वजह से ओलंपिक गेम्स को टाला गया है, क्योंकि इससे पहले सिर्फ युद्ध की वजह से ही ओलंपिक गेम्स रद्द किए गए हैं।

स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में 'क्यूबा मॉडल'

  • स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में 'क्यूबा मॉडल' का उदाहरण अक्सर दिया जाता है। जब दुनिया पर कोरोना का खतरा मंडराया तो क्यूबा पहले की तरह इस बार भी मदद को आगे आया। चाहे इम्युनिटी बढ़ाने वाली उसकी जादुई दवा हो या विशेषज्ञ डॉक्टर्स, क्यूबा हर स्तर पर आगे बढ़कर संक्रमित देशों की मदद में जुटा है। वेनेजुएला, निकारागुआ, जमैका, सूरीनाम और ग्रेनेडा के बाद उसने अपनी मेडिकल टीम इटली भेजी है जहां कोरोना से सबसे अधिक मौत हुई है।
  • यह बताना महत्वपूर्ण है कि कोरोना के केंद्र चीन में जब स्वास्थ्य विभाग इससे निपटने की तैयारी कर रहा था तो चाइनीज नैशनल हेल्थ कमिशन ने जिन 30 दवाइयों का सुझाव दिया था उनमें क्यूबा का इन्टरफेरोन अल्फा-2बी भी शामिल है। इसे इम्युनिटी बढ़ाने के लिए जाना जाता है।

पृष्ठभूमि

  • इटली में उत्तरी प्रांत लॉम्बार्डी सबसे अधिक संक्रमित है और जब यहां के हालात नियंत्रण से बाहर हो गए तो इटली ने क्यूबा से मदद की अपील की। कोरोना का इलाज मौजूद न होने की स्थिति में इटली को क्यूबा की याद इसलिए भी आई क्योंकि इसके पास एक से बढ़कर एक वर्ल्ड क्लास डॉक्टर और दवाई मौजूद है। क्यूबा ने 53 सदस्यों की टीम इटली भेजी है। कोरोना वायरस को रोकने के लिए दुनिया के अलग-अलग देशों में वह छह मेडिकल टीमें भेज चुका है

इम्युनिटी बढ़ाने वाली क्यूबा की वो चमत्कारिक दवा

  • वहीं मेडिसिन की बात करें तो क्यूबन इंटरफेरोन अल्फा-2बी किसी जादू की तरह काम करता है। यह विभिन्न प्रकार के वायरस संबंधित रोगों के इलाज में कारगर भी साबित हुआ है। क्यूबा के मेडिकल विशेषज्ञों के मुताबिक, यह मरीज में वायरस के असर को रोकता है और गंभीर बीमारी का इलाज करता है।
  • स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में क्यूबा दुनिया के टॉप-5 देशों में शामिल है। चाहे मेडिसिन हो या इसके हॉस्पिटल या डॉक्टर, सभी वर्ल्ड क्लास हैं। यहां स्वास्थ्य व्यवस्था की बात करें तो प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भी तीन मंजिली इमारत में चलते हैं। जिनमें डॉक्टर और नर्स के लिए रहने की भी सुविधा होती है यानी मरीज को जरूरत हो तो डॉक्टर हमेशा मौजूद रहे।

1981 की डेंगू महामारी को जब क्यूबा ने हराया

  • 1981 में जब डेंगू की महामारी फैली तो यही इंटरफेरोन कारगार साबित हुआ। उस दौरान अकेले क्यूबा की 3.4 लाख आबादी संक्रमित हुई थी। इससे 180 लोगों की मौत हो गई थी। डेंगू को प्रभावी रूप से रोकने में क्बूया के स्वास्थ्य मंत्रालय ने इंटरफेरोन के इस्तेमाल को मंजूरी दी और इसने वाकई में अपना असर दिखाया। लाखों लोग इससे प्रभावित हुए लेकिन मौत के मामले उस अनुपात में कम थे। वहीं, 1988 में लगातार छह साल की कड़ी मेहनत के बाद उसने मेनिनजाइटिस टाइप बी का वेक्सिन तैयार कर लिया था। इस बीमारी का पहला केस सामने आते ही वह उसकी वेक्सिन को ढूंढने में जुट गया था क्योंकि टाइप ए और सी के लिए वेक्सिन दुनिया में उपलब्ध थी लेकिन बी के लिए कोई वेक्सिन नहीं थी। क्यूबा वेक्सिन बनाने में इसलिए जुटा रहा क्योंकि 1984 में मेनिनजाइटिस टाइप बी इस अमेरिकी देश के लिए गंभीर बीमारी बन गई थी।

:: भारतीय राजव्यवस्था ::

वेंटिलेटर, सैनिटाइजर और हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन ड्रग के निर्यात पर रोक लगी

  • देश में कोरोनावायरस महामारी से निपटने के लिए विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) ने मंगलवार को नोटिफिकेशन जारी करते हुए बताया कि वेंटिलेटर और सैनिटाइजर के निर्यात पर पूरी तरह से रोक लगा दी है। इसमें सांस लेने सहायक आर्टिफिशियल इक्विपमेंट्स और ऑक्सीजन थैरेपी में सहायक उपकरण भी शामिल हैं। पिछले हफ्ते भी कुछ वेंटिलेटर, सर्जिकल, डिस्पोजेबल मास्क और कपड़ा बनाने में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था। कोरोनोवायरस के प्रकोप के चलते बाजार में हैंड सैनिटाइजर और मास्क की भारी कमी हो गई है क्योंकि लोगों हड़बड़ी में सामान इकट्ठा कर घरों में रख रहे हैं जिस कारण बाजार में इनकी चीजों की भारी कमी हो गई है।
  • इतना ही नहीं भारत ने मलेरिया के इलाज में इस्तेमाल की जाने वाली दवा हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन या इससे बने अन्य ड्रग्स के निर्यात पर भी रोक लगा दी है। भारत हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन के सबसे बड़े निर्माताओं में से एक है। कुछ समय पहले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इसे कोरोना के ट्रिटमेंट के लिए गेम चेंजर बताया था, विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) ने बताया कि हाइड्रोसेक्लोरोक्वाइन के निर्यात मौजूदा अनुबंधों को पूरा करने तक सीमित होंगे।

ईसीआई ने कोविड-19 महामारी के मद्देनजर स्थगित किया राज्यसभा चुनाव

  • जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 153 में उल्लेख है कि उचित वजहों को देखते हुए निर्वाचन आयोग धारा 30 या धारा 39 की उप धारा (1) के अंतर्गत अधिसूचना में संशोधन करके किसी भी चुनाव को पूरा करने का समय बढ़ा सकता है। इस क्रम में चुनाव आयोग ने अधिनियम की धारा 153 के प्रावधानों के तहत संबंधित राज्यसभा चुनाव को स्थगित कर दिया है और इसकी समयसीमा बढ़ा दी है। अधिसूचना के मुताबिक, संबंधित रिटर्निंग अधिकारियों द्वारा पूर्व में जारी चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों की सूची बाकी गतिविधियों के लिए वैध बनी रहेगी। द्वैवार्षिक चुनाव के लिए मतदान और गणना की नई तारीख हालात की समीक्षा के बाद की जाएगी।

कोविड-19 के लिए इस्तेमाल हो सकता है एमपीलैड्स का कोष

  • कोविड-19 के प्रसार को रोकने के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों के क्रम में सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई) ने अभी तक कई रोकथाम संबंधी उपाय किए हैं। मंत्रालय ने कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई में आ रही चुनौतियों का समाधान करने के लिए संसद सदस्य स्थानीय क्षेत्र विकास योजना (एमपीलैड्स) के अंतर्गत निधि के उपयोग के लिए एकमुश्त वितरण को अनुमति देने के संबंध में एक परिपत्र (सर्कुलर) जारी किया है। इससे मरीजों के चिकित्सकीय परीक्षण और जांच के वास्ते सरकारी अस्पतालों/ डिस्पेंसरियों के लिए उपकरणों की खरीद को संसद सदस्य द्वारा निधि की स्वीकृति देना आसान हो जाएगा। इसके साथ ही उनके लिए अपने-अपने संसदीय क्षेत्रों में अन्य संबंधित सुविधाओं की स्थापना का रास्ता साफ हो जाएगा। एमपीलैड्स दिशा-निर्देशों में संशोधन के तहत संसद सदस्य अब एमपीलैड्स के अंतर्गत आने वाली निधि को निम्नलिखित कार्यों में उपयोग कर सकते हैं:-
  1. चिकित्सकों और चिकित्सा कर्मचारियों को एक व्यक्ति का तापमान रिकॉर्ड करने और नजर बनाए रखने में सक्षम बनाने के लिए इन्फ्रा-रेड थर्मामीटर्स (गैर अनुबंध)।
  2. चिकित्सा कर्मचारियों को ज्यादा सुरक्षित करने और उन्हें कुशलता से काम के लिए सक्षम बनाने के लिए व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (पीपीई) की व्यवस्था, जिससे बीमारी के प्रसार का जोखिम न्यूनतम हो जाए।
  3. रेलवे स्टेशन, हवाई अड्डों और प्रवेश के अन्य बिंदुओं पर थर्मल इमेजिंग स्कैनर या कैमरा लगाना, जिससे एक सुरक्षित दूरी से तापमान जानना संभव हो सके।
  4. स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा स्वीकृत कोरोना परीक्षण किट।
  5. स्वीकृत सुविधाओं के भीतर आईसीयू वेंटिलेटर और आइसोलेशन/ क्वारंटीन वार्ड की स्थापना।
  6. चिकित्सा कर्मचारियों के लिए फेस मास्क, दस्ताने और सैनिटाइजर।
  7. कोविड-19 से बचाव, नियंत्रण और उपचार के लिए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा स्वीकृत कोई अन्य चिकित्सा उपकरण।

:: भारतीय अर्थव्यवस्था ::

व्हिसलब्लोअर मामले में Infosys को मिली क्लीन चिट

  • अमेरिकी सिक्योरिटीज और एंड एक्सचेंज कमीशन ने व्हिसलब्लोअर मामले में इन्फोसिस को क्लीन चिट दे दी है। इन्फोसिस ने जारी किए गए बयान में कहा है कि कंपनी को SEC से एक नोटिफिकेशन मिला है। जिसमें लिखा गया है कि इस मामले की पूरी जांच खत्म हो चुकी है। कंपनी को इस मामले में किसी भी तरह की कोई कार्रवाई का अनुमान नहीं है।
  • कंपनी ने आगे अपने बयान में कहा है कि इन्फोसिस को इंडियन रेगुलेटरीज अथॉरिटी से मिले सभी सवालों का जवाब दिया गया है। इसके साथ ही कंपनी हमेशा अथॉरिटीज को सहयोग करती रहेगी।

पृष्ठभूमि

  • बता दें कि पिछले साल अक्टूबर महीने में कुछ गुमनाम व्हिसलब्लोअर ने मैनेजमेंट पर कई गंभीर आरोप लगाए थे। उस शिकायत के 5 महीने बाद यह बात सामने आई है। आरोप के मुताबिक मैनेजमेंट आमदनी और मुनाफे को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने के लिए बैलेंशसीट में हेर-फेर कर रही है। इस मामले में कंपनी के सीईओ सलिल पारेख और सीएफओ निलांजन रॉय का नाम उछला था। इस रिपोर्ट के बाद इन्फोसिस के शेयर BSE और US stock exchange NYSE में 16 फीसदी नीचे गिर गए। जिससे कंपनी का मार्केट कैप तकरीबन 50,000 करोड़ रुपये पहुंच गया।
  • देश की दूसरी सबसे आईटी कंपनी इन्फोसिस ने जनवरी महीने में व्हिसलब्लोअर की शिकायत पर अपनी ऑडिट कमेटी की रिपोर्ट को विस्तार पूर्वक जारी किया था। जिसमें इन्फोसिस को क्लीन चिट दी गई थी। स्वतंत्र कानूनी सलाहकार शार्दुल अमरचंद मंगलदास एंड कंपनी और प्राइसवाटरहाउसकूपर्स की सहायता से जांच की गई थी।

कोरोनोवायरस से निपटने के लिए हीरो दे रही 100 करोड़ रुपए की सहायता राशि

  • कोरोनावायरस महामारी से निपटने के लिए धीरे-धीरे फंड आने शुरू हो रहे हैं। हीरो साइकिल ने मंगलवार को कहा कि वह इस वायरस के प्रकोप को कम करने के लिए और इससे लड़ने के लिए आपात निधि में 100 करोड़ रुपये का योगदान दे रही है।
  • हीरो मोटर्स कंपनी के चेयरमैन पंकज एम मुंजाल ने कहा कि हम एक संगठन के रूप में मानवीय दृष्टिकोण के साथ व्यापार के सिद्धांतों के लिए खड़े हैं, हम आपात निधि में 100 करोड़ रुपये की मदद कर रहे हैं।
  • उन्होंने कहा कि कंपनी विभिन्न राज्य सरकारों को भी हर संभव मदद देने के लिए पहुंच रही है।
  • हीरो साइकिल्स ने भी मुंजाल की अध्यक्षता में एक आपातकालीन निगरानी सेल की स्थापना की है, जो महामारी के आर्थिक नतीजों पर बारीकी से नजर रख रही है।
  • कंपनी ने कहा कि सेल आपूर्ति श्रृंखला को फिर से शुरू करने की योजना की देखरेख कर रहा है और स्थिति सामान्य होने पर कर्मचारियों और उनके परिवारों के लिए चिकित्सा सहायता पर भी नजर है।
  • कोरोनावायरस से जंग के लिए रिलायंस इंडस्ट्रीज ने कहा है कि वह अपने अस्थायी कर्मचारियों और कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाले लोगों को मजदूरी का भुगतान करेगी। साथ ही कंपनी ने COVID-19 रोगियों के परिवहन के लिए इस्तेमाल होने वाले सभी इमरजेंसी सेवा वाहनों के लिए मुफ्त ईंधन देने की घोषणा की है। कंपनी अपने मास्क बनाने के अपने उत्पादन क्षमता को बढ़ाएगी और एक दिन में 1 लाख फेस मास्क बनाएगी।

कोरोना वायरस से निपटने के लिए 15 हजार करोड़ रुपये का पैकेज

  • केंद्र सरकार ने कोरोना वायरस से निपटने के लिए 15 हजार करोड़ रुपये के पैकेज का एलान किया है। पीएम मोदी ने अपने संबोधन में देशवासियों की सेहत का ख्याल रखते हुए यह घोषणा की है। इसके साथ ही उम्होंने देशभर में 21 दिनों के लॉकडाउन का एलान भी किया है। उन्होंने कहा कि इस खतरनाक वायरस की चेन को तोड़ने के लिए देशवासियों का कुछ दिनों तक घरों में रहना जरूरी है।

कोरोना से निजात के लिए दिया पैकेज

  • कोरोना के मरीजों के इलाज के लिए केंद्र सरकार ने 15 हजार करोड़ रुपये के पैकेज का प्रावधान किया है। इसस फंड से कोरोना से जुड़ी जांच तकनीक, वेंटिलेटर,आईसीयू बेड और अन्य उपकरण और पैरामैडिकल साधन भी बढ़ाए जाएंगे। उन्होंने बताय कि राज्य सरकारों से कहा गया है कि सभी के लिए स्वास्थ्य सेवाएं ही पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। पूरा अमला इस मुश्किल वक्त में देश के साथ खड़ा है। प्राइवेट अस्पताल भी सरकार के साथ काम करने आ रहे हैं।

:: भारतीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी ::

कोरोना की पहली स्‍वदेशी टेस्टिंग किट के कमर्शियल प्रोडक्शन को मंजूरी

  • पुणे की मायलैब डिस्कवरी सॉल्यूशंस कंपनी को कोविड-19 (कोरोनावायरस) की टेस्ट किट के लिए सोमवार को कमर्शियल प्रोडक्शन की अनुमति मिल गई। परमिशन पाने वाली यह देश की पहली कंपनी है। कंपनी ने बताया कि कोरोनावायरस की जांच करने वाली उसकी ‘मायलैब पैथोडिटेक्ट कोविड-19 क्वॉलिटेटिव पीसीआर किट’ को केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) ने अनुमति दी है। कंपनी का दावा है कि वे एक टेस्टिंग किट से 100 लोगों की जांच कर सकते हैं। इसके बाजार में आ जाने से एक प्राइवेट लैब में दिन में कोरोना के एक हजार टेस्ट किए जा सकेंगे। अभी एक लैब में औसतन दिनभर में 100 नमूनों की कोरोना जांच हो पाती है।

'मेक इन इंडिया' है यह किट

  • कंपनी के प्रबंध निदेशक हसमुख रावल ने कहा, 'स्थानीय और केंद सरकार से मिले सहयोग और ‘मेक इन इंडिया’ पर जोर देते हुए उसने कोविड-19 की जांच के लिए एक किट तैयार की है। इसे विश्व स्वास्थ्य संगठन और अमेरिका के सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल (सीडीसी) के दिशानिर्देशों के अनुरूप रिकॉर्ड समय में विकसित किया गया है। कोरोना वायरस की जांच किट को स्थानीय स्तर पर बनाने से इसकी मौजूदा लागत घटकर एक चौथाई रह जाएगी। '

ब्लड जांच से लेकर एचआईवी जांच के लिए किट बना चुकी है मायलैब

  • मायलैब वर्तमान में ब्लड बैंकों, अस्पतालों, एचआईवी जांच की किट बनाती है। मायलैब के कार्यकारी निदेशक शैलेंद्र कावडे ने कहा- हम अपने देश को अत्याधुनिक तकनीक, उचित और सस्ती कीमत पर उपलब्ध कराने के लिए पुरजोर कोशिश कर रहे हैं। चूंकि यह परीक्षण संवेदनशील तकनीक पर आधारित है, इसलिए प्रारंभिक चरण के संक्रमण का भी पता लगाया जा सकता है। इस किट से की गई जांच के परिणाम काफी सटीक हैं।

कोरोना जांच के मामले में भारत सबसे पीछे

  • वर्तमान में, भारत प्रति मिलियन जनसंख्या पर किए गए परीक्षण के मामले में सबसे नीचे है। यह आंकड़ा सिर्फ 6.8 का है। कोरोना संक्रमण से निपटने के लिए भारत सरकार ने जर्मनी से लाखों टेस्टिंग किट आयात की हैं। मायलैब का दावा है कि आने वाले समय में एक हफ्ते में एक लाख किट का बनाई जा सकेंगी।

लिक्विड बायोप्सी से होगा कैंसर का इलाज

  • कैंसर के चौथे चरण में पहुंच चुके रोगियों के लिए एक राहत भरी खबर है। अबूधाबी के न्यूयॉर्क विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने द्रव विश्लेषण करने का एक नया प्लेटफॉर्म तैयार किया है, जिसकी मदद से मेटास्टैटिस के दौरान बनने वाली संचारी ट्यूमर कोशिकाओं (सीटीसी) को अलग करना मुमकिन हो सकेगा। ऐसा लिक्विड बायोप्सी के जरिये होगा।
  • कैंसर दुनियाभर में मृत्यु के प्रमुख कारणों में से एक है। अगर इसकी पहचान मेटास्टैटिस से पहले यानी प्रारंभिक अवस्था में हो जाए तो ठीक होने की दर काफी अधिक है। मेटास्टैसिस के दौरान, प्राथमिक ट्यूमर से निकलकर सीटीसी आगे की ओर बढ़ता है और रक्त में फैलता है। न्यूयॉर्क विश्वविद्यालय के मैकेनिकल और बायोमेडिकल इंजीनियरिंग के असिस्टेंट प्रोफेसर मुहम्मद ए. कसाइमेह के नेतृत्व में इंजीनियरिंग शोधकर्ताओं की एक टीम ने एक माइक्रोफ्लूडिक प्लेटफॉर्म विकसित किया है जो एटमिक फोर्स माइक्रोस्कोपी (एएफएम) की अत्याधुनिक प्रक्रियाओं के अनुकूल है।
  • विकसित प्लेटफॉर्म का उपयोग प्रोस्टेट कैंसर के रोगियों के रक्त के नमूनों से सीटीसी को पकड़ने के लिए किया जाता है। इसके बाद एएफएम की मदद से सीटीसी का वर्गीकरण किया जाता है ताकि यह पता चल सके मेटास्टैटिस किस तरह हो रहा है। गौर करने वाली बात यह है कि सीटीसी के सामान्य जीवनकाल के बारे में लोगों को कुछ हद तक जानकारी है, लेकिन रक्त प्रवाह में शामिल सीटीसी के जीवनकाल और अन्य क्रियाओं के बारे में अभी तक कोई जानकारी नहीं है। इसका बड़ा कारण यह है कि सीटीसी बहुत दुर्लभ है और अरबों स्वस्थ रक्त कोशिकाओं की पृष्ठभूमि से इसे अलग करना मुश्किल है। अभी तक तो इनके जैविक और यांत्रिक फेनोटाइप का भी पता नहीं लगाया जा सका है।
  • वैज्ञानिकों द्वारा विकसित नया उपकरण सीटीसी को अलग करने और वर्गीकृत करने में सक्षम है। ऐसे में यह कैंसर की प्रारंभिक अवस्था में पहचान करने में मदद करने कर सकता है। साथ ही यह कैंसर की प्रगति और मेटास्टैटिस की निगरानी करने के लिए एक उपकरण के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। इस शोध का प्रकाशन माइक्रोसिस्टम्स और नैनोइंजीनियरिंग जर्नल में किया गया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि रक्त कोशिकाओं से अलग की गई सीटीएस उनके गुणों के आधार पर अलग-अलग रखा जाता है ताकि आगे भी शोध में इनका इस्तेमाल हो सके। इस उपकरण की मदद से सीटीसी और कैंसर कोशिकाओं की लोच और चिपकने वाले गुणों की जांच भी की जा सकती है।
  • सीटीसी कैंसर का पता लगाने, लक्षण की पहचान करने और रोग का इलाज करने के लिए एक बायोमार्कर का काम करती है। ऐसे में जैसे ही सीटीसी रक्तप्रवाह के माध्यम से फैलती है, उनके गुणों के आधार पर उन्हें एक लिक्विड बायोप्सी प्रक्रिया के माध्यम से हटाया जा सकता है। इन सीटीसी का इस्तेमाल दवा परीक्षण और कैंसर के इलाज के लिए आण्विक प्रोफार्इंलग के लिए भी किया जा सकता है। इस तरह एक पारंपरिक ऊतक बायोप्सी की तुलना में तरल बायोप्सी के जरिये ज्यादा सटीक जानकारी हासिल की जा सकती है। मुहम्मद ए, कसाइमेह का कहना है कि इस प्लेटफॉर्म के जरिये कैंसर का पता आसानी से चल सकेगा। साथ ही कैंसर के कारकों की भी पहचान मुमकिन हो सकेगी।

हंता वायरस

  • कोरोना वायरस के बाद चीन पर अब हंता वायरस का कहर शुरू हो गया है। चूहों से फैलने वाले इस वायरस की चपेट में आकर चीन के दक्षिण पश्चिमी राज्य युन्नान में एक व्यक्ति की मौत हो गई है जबकि कई लोगों के इससे संक्रमित होने की आशंका है।
  • कई वायरसों के समूह को हंता वायरस के नाम से संबोधित किया जाता है। सामान्यतः यह वायरस चूहों में पाया जाता है। लेकिन इस चूहों के अलावा छछूंदर व गिलहरी की प्रजाति में भी अलग-अलग हंता वायरस पाए जाते है। अमेरिका में जहाँ इस वायरस को न्यूव‌र्ल्ड हंता वायरस के नाम से जाना जाता है वही यूरोप, एशिया और अफ्रीका में इसे ओल्ड वर्ल्ड हंता वायरस कहा जाता हैं।
  • मनुष्यों में हंता वायरस का संक्रमण चूहों के मल, मूत्र, लार के संपर्क में आने या उनके काटने से हो सकता है। हंता वायरस से संक्रमित व्यक्ति को हल्का बुखार या फ्लू से लेकर सांस की गंभीर बीमारी, लगातार खून बहने और किडनी की बीमारी भी हो सकती है हैं। यह वायरस मुख्यत: फेफेड़ों को प्रभावित करता है।

:: विविध ::

कोरोना वायरस के खिलाफ FIFA के अभियान से जुड़े सुनील छेत्री

  • भारतीय फुटबॉल टीम के कप्तान सुनील छेत्री को फुटबॉल की नियामक संस्था फीफा (FIFA)द्वारा कोविड 19 महामारी के खिलाफ चलाए जाने वाले अभियान में शामिल किया गया है. छेत्री के अलावा इसमें 28 मौजूदा और पूर्व फुटबाल खिलाड़ियों को भी शामिल किया गया है। फीफा और विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने मिलकर कोरोना वायरस के खिलाफ जागरूकता अभियान शुरू किया है, जिसमें ये मशहूर फुटबालर लोगों को इस भयानक बीमारी से बचाव के लिए पांच जरूरी कदम उठाने का अनुरोध कर रहे हैं.
  • फीफा द्वारा चुने गए ये 28 खिलाड़ी 11 भाषाओं में वीडियों के माध्यम से लोगों को कोरोना से लड़ने के लिए संदेश देंगे. इनमें भारतीय कप्तान छेत्री के अलावा अर्जेंटीना के लियोनेल मेसी (Lionel Messi), विश्व कप विजेता फ्लिप लाम, इकेर कासियस और स्पेनिश डिफेंडर कार्लेस पुयोल शामिल हैं.

एशियाई पैरा खेलों-2022 का प्रतीक चिह्न् , स्लोगन लॉन्च

  • एशियाई पैरा खेलों-2022 का प्रतीक चिह्न् और स्लोगन का यहां अनावरण किया गया है। बैंगनी, लाल और पीले रंग का यह रनिंग ट्रैक 10 सेमी-आर्क लाइनों द्वारा बनाया गया है। यह हांग्झोउ से होकर चलने वाली क्वेंटांग नदी के बढ़ते ज्वार को भी दर्शाता है।
  • व्हीलचेयर में आगे बढ़ने वाला एथलीट गतिशीलता, ऊर्जा और जुनून का अनुभव कराता है। एशियाई पैरा खेलों के प्रतीक के दृश्य और शैली एशियाई खेलों के अनुरूप ही हैं। एशियन पैरा गेम्स आयोजन समिति के उपमहासचिव और हांग्झोउ के उपमहासचिव चेन वेक्यिांग ने कहा, "यह प्रतीक 'धूप, सद्भाव, आत्म-सुधार और साझाकरण' की अवधारणा के अनुरूप है जोकि खेलों के मूल्यों को दर्शाता है।"
  • आयोजनकर्ताओं ने एशियन पैरा गेम्स का नारा 'हार्ट्स मीट, ड्रीम्स शाइन' रखा है।
  • हांग्झोउ एशियाई खेलों का आयोजन नौ से 15 अक्टूबर 2022 तक होगा। इस दौरान 22 खेलों के करीब 300 एथलीट इसमें भाग लेते हुए दिखाई देंगे।

स्रोत साभार: Dainik Jagran (Rashtriya Sanskaran), Dainik Bhaskar (Rashtriya Sanskaran), Rashtriya Sahara (Rashtriya Sanskaran) Hindustan Dainik (Delhi), Nai Duniya, Hindustan Times, The Hindu, BBC Portal, The Economic Times (Hindi & English), PTI, PIB

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