(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (25 जुलाई 2020)

दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर


(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (25 जुलाई 2020)


:: राष्ट्रीय समाचार ::

नेशनल इंटेलिजेंस ग्रिड (नैटग्रिड)

चर्चा में क्यों?

  • आतंकवाद निरोधी मंच नैटग्रिड के तहत आयकर विभाग सीबीआइ और एनआइए सहित 10 जांच व खुफिया एजेंसियों के साथ किसी भी इकाई के पैन और बैंक खाते का विवरण साझा करेगा। आयकर विभाग के लिए नीति निर्धारण करने वाले केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड ने 21 जुलाई को जारी एक आदेश में कहा कि स्थायी खाता संख्या (पैन), कर कटौती और संग्रह खाता संख्या (टैन), बैंक खाता विवरण, आयकर रिटर्न की समरी और स्त्रोत पर कर कटौती (टीडीएस) और पारस्परिक रूप से सहमति के रूप में कोई अन्य जानकारी 10 एजेंसियों के साथ साझा की जाएगी।

पृष्ठभूमि

  • देश में नैटग्रिड की जरूरत मुंबई में 2008 में हुए आतंकी हमले के बाद महसूस की गई थी। उस समय जांच एजेंसियों के पास कोई ऐसा तंत्र नही था कि किसी व्यक्ति के बारे में रियल टाइम जानकारी हासिल की जा सके। जांच एजेंसियों को उस समय मुंबई हमले के एक आरोपी डेविड हेडली की 2006 से 2009 के बीच देश में की गई यात्राओं के बारे पता करने की जरूरत महसूस हुई थी। कैबिनेट कमेटी ने 3400 करोड़ से नैटग्रिड की स्थापना के लिए 8 अप्रैल 2010 को मंजूरी दी थी।

क्या है NATGRID?

  • Natgrid भारत सरकार की एक महात्त्वाकांक्षी परियोजना है जिसके तहत सरकार बिखरी हुई सूचनाओं व जानकारियों को एक online प्लेटफार्म में एकत्रित करेगी। इन जानकारियों के माध्यम से सरकार की सुरक्षा सम्बन्धी नीतियों को बल मिलेगा।
  • इन सूचनाओं को big data के रूप में एकत्रित करके व इनका विश्लेषण करके सरकार हर एक संदेहास्पद गतिविधि पर नजर रख सकेगी जिससे भविष्य में उत्पन्न होने वाले खतरों को टाला जा सके व उनसे निपटने की पूर्व तैयारी की जा सके।
  • इन खतरों में आतंकवादी हमले, अपराध, तस्करी, व संगठित अपराधों आदि के ऊपर नजर रखी जा सकेगी।
  • Natgrid को भारत के श्रेष्ठतम इंजीनियरों व cyber experts के द्वारा design किया गया है जिसमें इसकी गोपनीयता का खास ध्यान रखा गया है।
  • दरअसल Natgrid में कुल 21 एजेन्सियों से data माँगकर उसे सुरक्षित रखा गया है। जिसमें लोगों के Bank Accound की जानकारी, टैक्स का पैसा, अप्रवासी लोगों की जानकारी, उनके रूपयों का लेन-देन उनके फोन कॉल की जानकारी, उनकी यात्र का विवरण आदि से जुड़ी जानकारियाँ रखी गई है।
  • गौरतलब है कि इन जानकारियों तक सरकार की सिर्फ 10 संस्थाओं की पहुँच ही रहेगी जिनमें RAW यानि Research and Analysis Wing, IB यानि Intelligence Bureu, Military Intelligence, NIA आदि जैसी सुरक्षा एजेन्सियाँ शामिल रहेगी।
  • Natgrid का कार्यालय नई दिल्ली में जबकि इसके Data collection का कार्यालय बैंगलोर में होगा।

‘प्रिज्म’ कार्यक्रम

चर्चा में क्यों?

  • स्मार्टफोन और इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद बनाने वाली कंपनी सैमसंग ने इंजीनियरिंग छात्रों को कृत्रिम मेधा (एआई), इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) और 5जी जैसी प्रौद्योगिकी में प्रशिक्षण और मार्गदर्शन देने के लिए ‘प्रिज्म’ कार्यक्रम की शुरूआत की है।

‘प्रिज्म’ कार्यक्रम के बारे में

  • ‘प्रिज्म’ कार्यक्रम एक तरह का औद्योगिकी-अकादमिक प्रशिक्षण कार्यक्रम होगा। इस कार्यक्रम का मकसद भारतीय छात्रों में नवोन्मेष को प्रोत्साहित करना और उन्हें उद्योग की जरूरत के हिसाब से तैार करना है।
  • ‘प्रिज्म’ कार्यक्रम में इंजीनियरिंग छात्रों को कृत्रिम मेधा (एआई), इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) और 5जी जैसी प्रौद्योगिकी में प्रशिक्षण और मार्गदर्शन दिया जायेगा।
  • इसका संचालन उसका बेंगलुरू स्थित सैमसंग आरएंडडी इंस्टीट्यूट (एसआरआई-बी) करेगा। यह कोरिया के बाहर सैमसंग का सबसे बड़ा शोध-विकास (आरएंडडी) केंद्र है।
  • इस कार्यक्रम में ऐसे इंजीनियरिंग कॉलेजों को शामिल किया जाएगा जो भारत सरकार के राष्ट्रीय शिक्षण संस्थान रैकिंग प्रणाली (एनएआरएफ) में शीर्ष पर हैं। एसआरआई-बी ने अब तक 10 इंजीनियरिंग कॉलेजों के साथ एमओयू साइन किए हैं। यह अगले कुछ महीनों में और भी कॉलेजों को अपने साथ जोड़ेगा।
  • इस कार्यक्रम के तहत सैमसंग विभिन्न परियोजना पर काम करेगा। प्रत्येक परियोजना में छात्रों की टीम, एक प्रोफेसर और सैमसंग के एसआरआई-बी से एक प्रशिक्षक शामिल होंगे।
  • छात्रों को एसआरआई-बी के साथ संयुक्त रूप से शोधप्रकाशित करने और पेटेंट फाइल करने के लिए भी प्रोत्साहित किया जाएगा। एसआरआई-बी के प्रबंध निदेशक दीपेश शाह ने कहा, “सैमसंग प्रिज्म कार्यक्रम सार्थक नवोन्मेष के साथ लोगों के जीवन को बदलने के हमारे मिशन का एक प्रमाण है। यह कार्यक्रम हमारे इंजीनियरिंग छात्रों को सैमसंग के साथ काम करने का अवसर देगा। यह उन्हें उद्योग के लिए तैयार करने, आत्मनिर्भर भारत की दिशा में उठाया कदम होगा।”

लद्दाख का पहला केंद्रीय विश्वविद्यालय

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लद्दाख को मिलने वाले पहले केंद्रीय विश्वविद्यालय को हरी झंडी दे दी है। इस विश्वविद्यालय का केंद्र बुद्ध का अध्ययन होगा। प्रस्तावित केंद्रीय विश्वविद्यालय सभी कोर्सेज की डिग्री देगी, इसमें इंजीनियरिंग और मेडिकल शिक्षा नहीं दी जाएगी।
  • पिछले साल लद्दाख, जम्मू-कश्मीर को केंद्र प्रशासित राज्य बनाए जाने और वहां के लोगों के विकास के लिए सुधार कार्यों की समीक्षा करने के लिए सोमवार को बैठक की गई।, जिसके बाद प्रधानमंत्री की मंजूरी मिली। गृह मंत्री अमित शाह, विदेश मंत्री एस जयशंकर, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और उच्च अधिकारी बैठक में शामिल हुए थे।
  • शिक्षा मंत्रालय जल्द ही लद्दाख में केंद्रीय विश्वविद्यालय बनाने का कार्य शुरू कर देगी। केंद्र सरकार इसके लिए एक अध्यादेश लाएगी, जिसे केंद्रीय कैबिनेट मंजूरी देगा और इसके बाद संसद में इसके लिए मंजूरी दी जाएगी। 20 जुलाई को ही प्रधानमंत्री मोदी ने केंद्रीय विश्वविद्यालय बनाने के संकेत दे दिए थे।
  • मानव संसाधन विकास मंत्रालय के प्रस्ताव के आधार पर जानकारी दी गई है कि इस साल रोहतांग ला सुरंग खुलने के बाद लद्दाख केंद्रीय विश्वविद्यालय में स्पीति और लाहौल जिले के छात्र भी पढ़ने जा सकेंगे।

कुम्‍हार शक्तिकरण योजना

चर्चा में क्यों ?

  • गौरतलब है कि केंद्रीय गृहमंत्री श्री अमित शाह ने वंचित कुम्हार समुदाय के सशक्तिकरणऔर उसे ‘आत्‍मनिर्भर भारत’ अभियान से जोड़ने के लिए आज खादी और ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) द्वारा चलाई जा रही ‘कुम्‍हार शक्तिकरण योजना’ के एक सौ प्रशिक्षित कारीगरों को100 विद्युत चाक वितरित किए।

महत्व

  • ‘कुम्हार सशक्तिकरण योजना’ कुम्हार समुदाय को "आत्मनिर्भर" बनाने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है।
  • यह पहल हाशिए पर पहुंच चुके कुम्हार समुदाय को मजबूत बनाने में मदद करेगी और मिट्टी के बर्तनों की पारंपरिक कला को पुनर्जीवित करने में सहायक होगी।
  • इस संदर्भ में केवीआईसी(KVIC) द्वारा गांधीनगर जिले में14 गांवों के 100 कुम्हारों को प्रशिक्षित किया है और 100 इलेक्ट्रिक पहिये तथा 10 ब्लेंजर मशीनें वितरित की गयी हैं।

क्या है कुंभकार सशक्तिकरण योजना?

  • यह देश के दूरस्थ स्थानों में अवस्थित कुम्हार समुदाय के सशक्तिकरण के लिए खादी और ग्रामोद्योग आयोग (KVIC) की एक पहल है।
  • यह कार्यक्रम यूपी, एमपी, महाराष्ट्र, जम्मू-कश्मीर, हरियाणा, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, असम, गुजरात, तमिलनाडु, ओडिशा, तेलंगाना और बिहार सहित कई राज्यों में लागू किया गया है।
  • कुम्हार सशक्तिकरण योजना’ के तहत कुम्हारों की औसत आय लगभग 3000 रुपये प्रति माह से बढ़कर लगभग 12,000 रुपये प्रति माह हो गई है।

इस कार्यक्रम कुम्हारों को निम्नलिखित सहायता प्रदान की जाती है:

  1. उन्नत मिट्टी के बर्तनों उत्पादों के लिए प्रशिक्षण
  2. नई तकनीक पॉटरी उपकरण जैसे इलेक्ट्रिक चाक
  3. बाजार संपर्क तथा KVIC प्रदर्शनियों के माध्यम से दृश्यता

विश्व स्तरीय अत्याधुनिक शहद परीक्षण प्रयोगशाला का शुभारम्भ

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय श्री नरेंद्र सिंह तोमर ने राष्ट्रीय मधुमक्खी बोर्ड (एनबीबी) के सहयोग से राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) द्वारा आणंद (गुजरात) में स्थापित‘भारत की विश्वस्तरीय अत्याधुनिक शहद परीक्षण प्रयोगशाला’ का वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से शुभारम्भ किया।

पृष्ठभूमि

  • शहद के उत्पादन में मिलावट एक बड़ी समस्या है और इसमें फ्रक्टोज की ज्यादा मात्रा वाले कॉर्न सीरप या चावल, टैपिओका, गन्ना और बीट सीरप मिलाए जा रहे हैं, जो सस्ते होते हैं और साथ ही इनके भौतिक-रासायनिक गुण समान होते हैं।

शहद परीक्षण प्रयोगशाला के बारे में

  • एनडीडीबी ने एफएसएसएआई द्वारा निर्धारित मानदंडों पर आधारित इस विश्वस्तरीय प्रयोगशाला की स्थापना की है, जिसमें सभी सुविधाएं हैं और परीक्षण विधियां/प्रोटोकॉल विकसित किए गए हैं। इसे राष्ट्रीय परीक्षण और अंशशोधन प्रयोगशाला प्रत्यायन बोर्ड (एनएबीएल) द्वारा मान्यता प्राप्त है। एफएसएसएआई ने अब शहद, बी वैक्स और रॉयल जेली के नए मानदंड अधिसूचित किए हैं। इस शहद परीक्षण प्रयोगशाला की स्थापना से शहद के गुणवत्तापूर्ण उत्पादन और दूसरे देशों को निर्यात में सहायता मिलेगी।

मीठी क्रांति

  • 'हनी मिशन' को अगस्त 2017 में गुजरात के बनासकांठा जिले के डीसा में बनास हनी परियोजना की शुरुआत करते हुए 2016 में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 'मीठी क्रांति' के आह्वान के साथ शुरु किया गया था|
  • इस संदर्भ में केवीआईसी द्वारा मधुमक्खी पालकों को मधुमक्खी कॉलोनी की जांच करने, वानस्पतिक उपकरणों के साथ परिचित कराने, मधुमक्खी के दुश्मनों और बीमारियों की पहचान एवं प्रबंधन, शहद निकालने और मोम शोधन करने तथा वसंत, गर्मी, मानसून, शरद ऋतु और सर्दियों में मधुमक्खी कालोनियों के प्रबंधन के बारे में व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया है
  • भारत विश्व में शहद के 5 सबसे बड़े उत्पादकों में शुमार है। भारत में वर्ष 2005-06 की तुलना में अब शहद उत्पादन 242 प्रतिशत बढ़ गया है, वहीं इसके निर्यात में 265 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

मधुमक्खी पालन हेतु अन्य महत्वपूर्ण पहल

  • सरकार द्वारा राष्ट्रीय मधुमक्खी बोर्ड और राज्यों के माध्यम से एकीकृत बागवानी विकास मिशन (एमआईडीएच), राष्ट्रीय मधुमक्खी पालन मिशन के अंतर्गत मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देने के लिए कई गतिविधियां की गई हैं।‘कृषि, सहकारिता और किसान कल्याण विभाग ने दो साल की अवधि के लिए राष्ट्रीय मधुमक्खी पालन और शहद मिशन (एनबीएचएम) को स्वीकृति दे दी है।

:: अंतर्राष्ट्रीय समाचार ::

शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ)

चर्चा में क्यों?

  • केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने आज निर्माण भवन में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) में शामिल देशों के स्वास्थ्य मंत्रियों की डिजिटल बैठक में डिजिटल माध्यस से भाग लिया। बैठक की अध्यक्षता रूस के स्वास्थ्य मंत्री श्री मिखाइल मुराशको ने की। इस बैठक में चर्चा का प्रमुख विषय दुनिया भर में जारी कोविड संकट था।

क्या है शंघाई सहयोग संगठन (SCO)?

  • 1991 में सोवियत संघ के विघटन के बाद ये संगठन अस्तित्व में आया था। सोवियत संघ के विघटन के बाद मौजूदा यूरेशियन क्षेत्र में सुरक्षा और आर्थिक संरचना समाप्त हो गई थी। 1996 में बना ये संगठन पहले शंघाई - 5 के नाम से जाना जाता था। शंघाई - 5 में - चीन, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, रूस और ताजिकिस्तान जैसे देश शामिल थे। 2001 में इस संगठन का विस्तार हुआ और उजबेकिस्तान भी इस संगठन में शामिल हो गया। उजबेकिस्तान के इस संगठन में शामिल होने के बाद 15 जून, 2001 को शंघाई में SCO संगठन की स्थापना हुई थी। साल 2017 में भारत और पाकिस्तान भी SCO के सदस्य देश बन गए।

:: अर्थव्यवस्था ::

सोसायटी फॉर वर्ल्डवाइड इंटरबैंक फाइनैंशल टेलिकॉम्युनिकेशन (SWIFT)

चर्चा में क्यों?

  • कोरोना वायरस को लेकर बिगड़े रिश्ते की वजह से अमेरिका चीन को यूएस डॉलर सिस्टम (SWIFT) से बाहर निकाल सकती है या उसके एक्सेस में कटौती कर सकती है।
  • हालांकि, सीसीपी के कुछ समर्थक यह भी मानते हैं कि अमेरिका चीन के खिलाफ उस तरह के कठोर कदम नहीं उठाएगा जैसे उसने ईरान और नॉर्थ कोरिया के खिलाफ उठाए, क्योंकि इससे अमेरिका और वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए जोखिम बढ़ जाएगा। कुछ जानकारों का यह भी कहना है कि चीन का डर वास्तविक है, क्योंकि यदि संबंध यूं ही बिगड़ते रहे तो अमेरिका बीजिंग पर हमले के लिए डॉलर आधिपत्य का इस्तेमाल कर सकता है।

क्या है सोसायटी फॉर वर्ल्डवाइड इंटरबैंक फाइनैंशल टेलिकॉम्युनिकेशन (SWIFT)?

  • सोसायटी फॉर वर्ल्डवाइड इंटरबैंक फाइनैंशल टेलिकॉम्युनिकेशन (SWIFT) एक नेटवर्क है जिसका इस्तेमाल दुनियाभर के बैंक वित्तीय लेनदेन की जानकारी देने और प्राप्त करने के लिए इस्तेमाल करते हैं। यह उन इन्फ्रास्ट्रक्चर का हिस्सा है जिसकी वजह से अंतरराष्ट्रीय व्यापार और निवेश में अमेरिकी डॉलर की भूमिका अहम है।
  • वैश्विक रूप से बैंकों के अमेरिकी बैंकों से संवाद संबंध हैं, जिसके जरिए वे अमेरिकी डॉलर ट्रांसजेक्शन करते हैं। इस पेमेंट सिस्टम के जरिए वॉइट हाउस अमेरिकी बैंकों को किसी व्यक्ति, संस्था या देशों से लेनदेन रोकने का आदेश दे सकता है।

गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (एनपीए)

चर्चा में क्यों?

  • बैंकों की सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (एनपीए) तुलनात्मक परिदृश्य के अंतर्गत चालू वित्त वर्ष के अंत तक बढ़कर 12.5 प्रतिशत हो सकती है। यह मार्च 2020 में 8.5 प्रतिशत थी। रिजर्व बैंक की वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट में यह कहा गया है। रिपोर्ट के अनुसार बहुत गंभीर दबाव वाले परिदृश्य में सकल एनपीए मार्च 2021 तक 14.7 प्रतिशत तक जा सकता है।
  • इसमें कहा गया है, ‘‘दबाव परीक्षण यह संकेत देता है कि सभी अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों का सकल एनपीए अनुपात मार्च 2020 के 8.5 प्रतिशत से बढ़कर मार्च 2021 में 12.5 प्रतिशत तक हो सकता है। यह आकलन तुलनात्मक परिदृश्य के आधार पर किया गया है।’’ रिपोर्ट के अनुसार, ‘‘अगर वृहत आर्थिक माहौल और खराब होता है, ऐसे में बहुत गंभीर दबाव वाले परिदृश्य में अनुपात बढ़कर 14.7 प्रतिशत हो सकता है।’’

क्या है गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (एनपीए)?

एनपीए का मतलब गैर प्रदर्शन संपत्ति (नॉन परफोर्मिंग एसेट्स) है. यह बैंकिंग टर्म है. यदि किसी ग्राहक को दिए गये ऋण में बैंक को किसी तरह का लाभ प्राप्त नहीं होता है, तो इस तरह का ऋण एनपीए कहलाता है. भारतीय रिज़र्व बैंक के अनुसार किसी बैंक द्वारा दिए गये टर्म लोन पर पिछले 90 दिनों के लिए यदि ब्याज आदि नहीं दिया जाए, तो ऋण एनपीए हो जाता है. हालाँकि फार्म लोन के अंतर्गत इसे इस तरह से परिभाषित किया जाता है: अल्प सामयिक कृषि जैसे धान, ज्वार, बाजरा आदि के लिए लिये गये लोन पर यदि 2 क्रॉप सीजन तक किसी तरह का ब्याज नहीं दिया जाता है, तो लोन नॉन परफोर्मिंग एसेट के तहत आ जाता है. लम्बे समय वाले फसल का लोन इस स्थिति में 1 क्रॉप सीजन से अधिक होने पर वह नॉन परफोर्मिंग एसेट्स के अंतर्गत आ जाता है.

सामान्य वित्तीय नियम-2017

चर्चा में क्यों?

  • चीन के साथ सीमा विवाद के बीच केंद्र सरकार ने भारत की सीमा से लगते चीन समेत सभी देशों से सार्वजनिक खरीद पर नियंत्रण लगा दिया है। सामान्य वित्तीय नियम-2017 में संशोधन करते हुए सरकार ने ये प्रतिबंध लगाए हैं। इन देशों का कोई भी फर्म अब सुरक्षा मंजूरी और विशेष समिति के पास पंजीकरण के बाद ही टेंडर भर सकेगी।

क्या किये गए है बदलाव?

  • केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सामान्य वित्तीय नियम-2017 में संशोधन किया है जो उन देशों के बोलीदाताओं पर लागू होता है जिनकी सीमा भारत से सटती है। इसका सीधा असर चीन, पाकिस्तान, बांग्लादेश, भूटान, नेपाल जैसे देशों पर होगा। सरकारी खरीद में चाइनीज कंपनियों का बोलबाला रहता है। व्यय विभाग इन नियमों के तहत, भारत की रक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए सार्वजनिक खरीद पर एक विस्तृत आदेश जारी किया है।
  • नए नियम के तहत भारत की सीमा से सटे देशों से बोली लगाने वाली कंपनिंया गुड्स और सर्विस (कंसल्टेंसी और नॉन-कंसल्टेंसी) की बोली लगाने के लिए तभी योग्य माने जाएंगे जब वे कॉम्पीटेंट अथॉरिटी से रजिस्टर्ड होंगी। कॉम्पीटेंट अथॉरिटी का गठन डिपार्टमेंट फॉर प्रमोशन ऑफ इंडस्ट्री ऐंड इंटर्नल ट्रेड (DPIIT) की तरफ से किया जाएगा। इसके लिए विदेश और गृह मंत्रालय से भी मंजूरी जरूरी है।
  • सरकार का यह आदेश सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और वित्तीय संस्थानों, स्वायत्त निकायों, केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उद्यमों (CPSE) और सार्वजनिक निजी भागीदारी परियोजनाओं को जिसे सरकार या इसके उपक्रमों से वित्तीय सहायता मिलता हो, उसपर लागू होता है।
  • केंद्र ने राज्य सरकारों के मुख्य सचिवों को लिखित आदेश में कहा है कि राज्य सरकारें भी राष्ट्रीय सुरक्षा में अहम रोल निभाती हैं। ऐसे में सरकार ने संविधान के आर्टिकल 257(1) को लागू करने का फैसला किया है। मतलब सरकार का यह आदेश राज्य सरकार और संटेट अंडरटेकिंग के प्रोक्योरमेंट पर भी लागू होता है।

:: विज्ञान और प्रौद्योगिकी ::

आरएफआईडी टैग

चर्चा में क्यों?

  • भारतीय रेलवे ने दिसंबर 2022 तक अपने सभी डिब्बों में आरएफआईडी टैग लगाने की योजना बनाई है। भारतीय रेलवे दिसंबर 2022 तक सभी रेल डिब्बों में रेडियो-फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन टैग यानी कि आरएफआईडी लगाने की प्रक्रिया पूरी कर लेगी। इस टैग के जरिए रेल डिब्बे जहां कहीं भी हों उनका पता लगाया जा सकता है।

क्यों की जा रही है यह पहल?

  • वर्तमान में भारतीय रेलवे अपने सभी रेल डिब्बों की जानकारी लिखित रूप में रखती है जिसमें त्रुटियों की काफी गुंजाइश बनी रहती है। ऐसे में रेलवे के लिए आरएफआईडी टैग से अपने सभी डिब्बों और इंजनों की सही स्थिति जानना आसान हो जाएगा।
  • आरएफआईडी टैग डिब्बे जहां बनकर तैयार होते हैं वहीं उनपर लगा दिए जाएंगे जबकि इन टैग को पढ़ने वाले उपकरण रेलवे स्टेशनों और रेल पटरियों के पास प्रमुख स्थानों पर लगाए जाएंगे जो डिब्बो पर लगे टैग को दो मीटर की दूरी से ही पढ़ लेंगे और डिब्बे की पहचान कर उससे संबंधित आंकड़ों को केन्द्रीय कंप्यूटरीकृत प्रणाली तक पहुंचा देंगे। इससे प्रत्येक डिब्बे की पहचान की जा सकेगी और वह डिब्बा जहां कहीं भी होगा उसका पता लगाया जा सकेगा।
  • आरएफआईडी टैग प्रणाली शुरू हो जाने से माल डिब्बों, यात्री डिब्बों और इंजंनों की कमी की समस्या को तेजी के साथ अधिक पारदर्शी तरीके से सुलझाने में मदद मिल सकेगी।

आरएफआईडी (RFID) क्या है?

  • रेडियो-आवृत्ति की पहचान या आरएफआईडी टैग विभिन्न वस्तुओं को ट्रैक करने और पहचानने के लिए विद्युत चुम्बकीय क्षेत्रों का उपयोग करता है। प्रत्येक RFID टैग में एक छोटा रेडियो ट्रांसपोंडर, एक ट्रांसमीटर और एक रेडियो रिसीवर होता है। एक RFID रीडर RFID टैग द्वारा भेजी गई सूचना को डीकोड करता है।
  • एक आरएफआईडी टैग को किसी भी ऑब्जेक्ट को ट्रैक करने और मॉनिटर करने के लिए एसेंट, लोगों और इन्वेंट्री से चिपका जा सकता है। यह आम तौर पर कंप्यूटर उपकरण, कारों, यात्री ट्रेनों या बसों, किताबों आदि से चिपका होता है। यह बारकोड से तेज है क्योंकि RFID को कई बार पढ़ा जा सकता है जबकि बारकोड को एक बार में पढ़ा जा सकता है।

जैविक हथियार

चर्चा में क्यों?

  • चीन ने पाकिस्तान की सेना के साथ जैविक हथियारों को लेकर गोपनीय डील की है। क्लाक्सोन ने कई इंटेलिजेंस एजेंसियों के हवाले से बताया है कि जैविक युद्ध क्षमता विस्तार में घातक संक्रामक एजेंट एंथरेक्स सहित कई रिसर्च प्रॉजेक्ट को शामिल किया गया है।
  • यह रिपोर्ट ऐसे समय में सामने आई है जब दुनिया में चीन से निकला कोरोना वायरस तबाही मचा रहा है। लाखों लोग मारे जा चुके हैं। अटकलें लगाई जा रही हैं कि कि यह वायरस वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी से निकला है।

क्यों चिंता की है बात

  • एंथनी क्लान की रिपोर्ट के मुताबिक, इसी लैब ने पाकिस्तान सेना की डिफेंस साइसेंज एंड टेक्नॉलजी ऑर्गनाइजेशन (DESTO) के साथ गोपनीय डील की है। दोनों देशों ने संक्रामक रोगों और संक्रामक बीमारियों के बायोलॉजिकल कंट्रोल को लेकर रिसर्च के लिए समझौता किया है।
  • पाकिस्तान के साथ चीन के इस गोपनीय समझौते से चिंता बढ़ गई है। चीन कोरोना वायरस के मुद्दे पर वैश्विक रूप से घिरने से सबक लेते हुए अपनी सीमा से बाहर जैविक हथियारों पर टेस्टिंग करना चाहता है। वुहान लैब ने इस प्रॉजेक्ट के लिए सभी वित्तीय, संसाधन और साइंटफिक सपोर्ट दिया है। प्रॉजेक्ट का सारा खर्च चीन ने उठाया है। इंटेलिजेंस एजेंसियों के ने कहा है कि गोपनीय जैविक हथियार को लेकर प्रॉजेक्ट के तहत एंथरेक्स के दोहरे इस्तेमाल को लेकर रिसर्च को अंजाम दिया जाएगा।
  • यह समझौता बताए गए उद्देश्य से अलग लक्ष्यों को लेकर किया गया है। भारतीय और पश्चिमी इंटेलिजेंस एजेंसियों के मुताबिक चीन इस प्रॉजेक्ट से भारत और पश्चिमी देशों के खिलाफ पाकिस्तान का इस्तेमाल करते हुए जैविक हथियारों को विकसित करना चाहता है। इससे वह अपनी जमीन और लोगों को जोखिम से बचाते हुए अपने खतरनाक मंसूबों को अंजाम देना चाहता है।

जैविक हथियार क्या हैं?

  • उल्लेखनीय है कि कीटाणुओं, विषाणुओं अथवा फफूंद जैसे संक्रमणकारी तत्वों जिन्हें जैविक हथियार कहा जाता है, का युद्ध में नरसंहार के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। गौरतलब है कि जैव आतंकवाद के जरिए अकसर बैक्टीरिया और कई नई तकनीक के जरिए हमला किया जाता है जो हथियारों से और भी ज्यादा खतरनाक होता है। जैव आतंकवाद के वाहक के रूप में 190 प्रकार के बैक्टीरिया, वायरस, फंगस पर्यावरण में मौजूद हैं। एन्थ्रेक्स, प्लेग, बोटड्ढूलिज्म, सारमोलेला, टूलेरीमिया, ग्लैन्डर, एन्थ्रेक्स जैसे खतरनाक जीव इसमें शामिल हैं। कई वाहक पाउडर के रूप में होते हैं। इन्हें आसानी से पानी या हवा में छोड़ा जा सकता है या किसी के भोजन में मिलाया जा सकता है। ये 24 घंटे के अंदर प्राणी और अन्य जीवों की जान ले सकते हैं।

जैविक हथियार का विनयमन कैसे?

  • अगर हम जब हथियारों के विनियमन को देखें तो इसकी शुरुआत 1925 से ही हो जाती है।1925 जिनेवा प्रोटोकॉल के अंतर्गत जहरीली गैसों जीवाणुओं या इस प्रकार के अन्य तत्वों का युद्ध में उपयोग प्रतिबंध है।
  • 1972 का बायोलॉजिकल एंड टॉक्सिन विपन कन्वेंशन (BTWC) पहली ऐसी बहुपक्षीय संधि थी जो स्पष्ट रूप से जैविक हथियारों के विकास, भंडारण, उत्पादन और हस्तांतरण पर प्रतिबंध लगाती थी।

उपग्रह रोधी हथियार

चर्चा में क्यों?

  • अमेरिकी अंतरिक्ष कमान ने कहा है कि रूस ने 15 जुलाई को अंतरिक्ष-आधारित उपग्रह रोधी हथियार का एक गैर-विनाशकारी परीक्षण किया है।

क्या हैं उपग्रह रोधी हथियार

  • उपग्रह रोधी (A-SAT) हथियार किसी भी देश के सामरिक व सैन्य उद्देश्यों के लिए उपग्रहों को निष्क्रिय करने या नष्ट करने के लिए विकसित किए जाते हैं।
  • उपग्रह रोधी तकनीकी का विकास उस समय हुआ जब अमेरिका और सोवियत-संघ के बीच शीत युद्ध जारी था।
  • सबसे पहले अमेरिका ने वर्ष 1958, उसके बाद सोवियत-संघ ने 1964 और चीन ने 2007 में उपग्रह रोधी हथियारों का परीक्षण किया था।
  • 2019 में भारत भी मिशन शक्ति का सफलता पूर्वक परीक्षण करके अंतरिक्ष में मौजूद उपग्रहों को मार गिराने की क्षमता रखने वाला चौथा देश बन गया है।

क्या है मिशन शक्ति ?

  • मिशन शक्ति ऑपरेशन को उपग्रह रोधी हथियार बनाने के लिए शुरू किया गया था।
  • भारत ने अपने उपग्रह रोधी हथियार से अंतरिक्ष में 300 किमी दूर स्थित पृथ्वी की निचली कक्षा (LEO) में एक कार्यरत उपग्रह को निशाना बनाया।
  • भारत के उपग्रह रोधी हथियार का विकास DRDO की अगुवाई में पूर्णत: स्वदेशी तकनीकी से किया गया है।

:: पर्यावरण और पारिस्थितिकी ::

‘टिपिंग प्वाइंट’

चर्चा में क्यों?

  • जलवायु खतरे से जूझ रही दुनिया के लिए एक और बुरी खबर है। अंटार्कटिक में समुद्र की तलहटी में मौजूद मीथेन गैस का रिसाव शुरू हो गया है। मीथेन एक ग्रीनहाउस गैस है जिससे जलवायु खतरा तो बढ़ेगा ही लेकिन इस घटना ने वैज्ञानिकों की चिताएं इसलिए भी बढ़ा दी हैं कि लगातार ‘टिपिंग प्वाइंट’ बढ़ते जा रहे हैं। ये पृथ्वी पर गंभीर जलवायु खतरों की ओर बढ़ने का संकेत करते हैं।

क्या है ‘टिपिंग प्वाइंट’?

  • आईपीपीसी ने अपनी रिपोर्ट में दो दशक पहले टिपिंग प्वाइंट की चर्चा की थी। इसका मतलब था कि ऐसी जलवायु घटनाएं जिन्हें रोक पाना मुश्किल हो। अमेजन के रेनफारेस्ट (वर्षावन) की आग, पश्चिमी अंटार्कटिक और ग्रीनलैंड में आइस सीट का पिघलना भी टिपिंग प्वाइंट हैं। आईपीसीसी ने अपनी शुरुआती रिपोर्ट में माना था कि तापमान में पांच डिग्री की बढ़ोतरी से ऐसी घटनाएं हो सकती हैं। हालांकि, 2018 में जारी विशेष रिपोर्ट में बदलाव करते हुए कहा कि एक-या दो डिग्री की तापमान बढ़ोतरी भी ऐसी घटनाओं का कारण बन सकती है।

क्या है अंटार्कटिक का ‘टिपिंग प्वाइंट’?

  • प्रोसेडिंग्स आफ रायल सोसायटी बी जर्नल में प्रकाशित शोधपत्र में वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि अंटार्कटिक में रोज-सी में एक स्थान पर मीथेन गैस का रिसाव हो रहा है। यह रिसाव समुद्र में करीब सात मीटर की गहराई में है, लेकिन इस रिसाव क्षेत्र की लंबाई करीब 25 मीटर तक आंकी गई है। अंटार्कटिक के समुद्र में दुनिया की एक चौथाई मीथेन मौजूद है। इसे वैज्ञानिकों ने जलवायु खतरे के टिपिंग प्वाइंट की संज्ञा दी है।
  • शोधकर्ताओं ने इसे आपात घटना बताते हुए तत्काल हस्तक्षेप की जरूरत बताई है। दरअसल, मीथेन रिसाव की एक सूचना 2011 में भी मिली थी, लेकिन तब वैज्ञानिक उसकी पहचान कर पाने में असफल रहे थे। अब पहली बार रिसाव के स्थान को चिह्नित किया गया है। इसमें चिंता का एक विषय यह भी है कि जिस स्थान पर यह रिसाव हो रहा है, वहां इस गैस को उपभोग करने वाले माइक्रोब्स (सूक्ष्म जीव) भी कम पाए गए हैं। वैज्ञानिक इसके प्रभावों के अध्ययन पर जोर दे रहे हैं।

लोनार झील

चर्चा में क्यों?

  • महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले में स्थित लोनार झील के पानी का रंग बदलने के अध्यनन की रिपोर्ट आ गयी है जिसमे ‘हालोआर्चिया’ बैक्टीरिया (जीवाणुओं) को झील के रंग गुलाबी होने में उत्तरदायी मन गया है।

पृष्ठभूमि

  • महाराष्ट्र की लोनार झील के पानी का रंग बदलकर गुलाबी हो गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि लवणता और जलाशय में शैवालों की मौजूदगी से पानी के रंग में यह परिवर्तन हुआ है। इसके पाहे ईरान की एक झील का पानी भी लवणता के कारण लाल रंग का हो गया था।
  • बॉम्बे उच्च न्यायालय द्वारा हस्तक्षेप करने पर राज्य के वन विभाग ने सूचित किया था कि उसने पहले ही झील के पानी के नमूने एकत्र कर लिए थे और उन्हें नागपुर स्थित राष्ट्रीय पर्यावरण इंजीनियरिंग अनुसंधान संस्थान (NEERI) और पुणे में आगरकर अनुसंधान संस्थान को जांच के लिए भेज दिया था।

क्यों बदलता है जलीय तंत्र का रंग?

  • झीलों का रंग बदलने की पीछे कई कारक उत्तरदाई होते हैं। इसमें सबसे प्रमुख शैवालों का बढ़ना माना जाता है । दरसल सुपोषण (Eutrophication)की प्रक्रिया में जलाशय में पौधों तथा शैवाल का विकास बड़ी तेजी से होता है।ऐसी दशा में शैवाल प्रस्फुटन (Algae Bloom) के कारण झील का रंग बदल जाता है। इसके अलावा लवणता का बढ़ना, जीवाणुओं और प्रदूषण के बढ़ने से भी झीलों के रंग प्रभावित होते हैं।

क्यों हुआ लोनार झील का गुलाबी रंग?

  • पुणे स्थित आगरकर अनुसंधान ने अपने निष्कर्ष में लोनार झील के गुलाबी रंग के पीछे ‘हालोआर्चिया’ बैक्टीरिया (जीवाणुओं) को यह निष्कर्ष निकाला है।
  • ‘हालोआर्चिया’ या ‘हालोफिलिक आर्चिया’ (Haloarchaea or halophilic) एक ऐसा बैक्टीरिया होता है जो गुलाबी रंग पैदा करता है और यह खारे पानी में पाया जाता है।
  • लोनार झील में हालोआर्चिया की बड़ी संख्या में मौजूदगी के कारण पानी गुलाबी हुआ। हालोआर्चिया के गुलाबी रंग पैदा करने के पानी की सतह पर गुलाबी रंग आ गया। रिपोर्ट में बताया कि यह परिवर्तन स्थायी नहीं है कुछ समय बाद झील का जल पुराने रंग में वापस आ जायेगा।

लोनार झील के बारे में

  • लोनार झील महाराष्ट्र के बुलढ़ाणा ज़िले में स्थित एक क्रेटर झील है। यह पर्यटकों के बीच काफी लोकप्रिय है।
  • इस झील का निर्माण करीब 50,000 साल पहले एक उल्का पिंड के पृथ्वी से टकराने के कारण हुआ था।
  • करीब 1.2 किमी के व्यास वाली झील का पानी खारा है और इसका पीएच स्तर 10.5 है।
  • गौरतलब है कि भारत में खारे पानी की सबसे बाद स्थलबद्ध झील राजस्थान की सांभर झील है।

क्या होती है क्रेटर झील

  • क्रेटर किसी खगोलीय वस्तु पर एक गोल या लगभग गोल आकार के गड्ढे को कहते हैं जो किसी ज्वालामुखी विस्फोट, अंतरिक्ष से गिरे उल्कापिंड के प्रहार या फिर ज़मीन के अन्दर किसी अन्य विस्फोट जैसे परमाणु बम आदि के कारण बनते हैं। इन गड्ढो में पानी भर जाने से जो झील बनती है उसे ही क्रेटर झील करते है।

चातक पक्षी (Pied Cuckoo)

चर्चा में क्यों?

  • वाइल्डलाइफ़ इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंडिया (WII) ने चातक पक्षी के अफ़्रीका से भारत प्रवास और वापस जाने के रास्ते का पता लगाने के लिए अध्ययन शुरू किया है।

इस अध्ययन से संबन्धित जानकारी

  • यह चातक पक्षी के प्रवास मार्गों का पता लगाने और उनका निरीक्षण करने संबंधी देश का पहला अध्ययन है।
  • WII द्वारा यह अध्ययन में इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ रिमोट सेंसिंग और भारत सरकार के बायोटक्नोलोजी विभाग की सहायता से किया जाएगा।
  • इसके लिए वैज्ञानिकों ने दो चातकों पर सैटेलाइट ट्रांसमीटर से युक्त टैग लगाए हैं।
  • ये पक्षी मानसून शुरू होने के साथ ही भारत के हिमालय की तराई के इलाक़ों में नज़र आने लगते हैं।
  • इसलिए वैज्ञानिकों इस प्रयोग से उम्मीद हैं कि इससे जलवायु परिवर्तन को समझने में भी मदद मिल सकती है।

चातक पक्षी

  • चातक पक्षी है के सिर पर चोटीनुमा रचना होती है। भारत में इसे 'पपीया' भी कहा जाता है।
  • इसका वैज्ञानिक नाम क्लैमाटर जैकोबिनस है इसलिए इसे जकोबियन कुकू (Jacobin cuckoo) के नाम से भी जाना जाना जाता है।
  • IUCN की रेडलिस्ट में यह पक्षी सरक्षित श्रेणी (least concern) में आता है।

:: विविध ::

इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) 2020

  • बहु प्रतीक्षित इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) 19 सितंबर को संयुक्त अरब अमीरात में शुरू होगा और इसका फाइनल आठ नवंबर को खेला जाएगा। आईपीएल चेयरमैन ब्रजेश पटेल ने यह जानकारी दी।
  • अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) के अक्टूबर नवंबर में होने वाली टी20 विश्व कप को स्थगित करने के फैसले के बाद आईपीएल का आयोजन संभव हो गया है

:: प्रिलिम्स बूस्टर ::

  • कुछ महीने पहले झील के पानी का रंग गुलाबी होने से चर्चा में रहे लोनार झील कहां स्थित है एवं झील का रंग गुलाबी किस वजह से हुआ था? (बुलढाणा-महाराष्ट्र. ‘हालोआर्चिया’ बैक्टीरिया)
  • अमेजन के जंगलों में आग, अंटार्कटिक में बर्फ का पिघलना और मिथेन गैस का रिसाव इत्यादि से चर्चा में रहे शब्द ‘टिपिंग प्वाइंट’ का मतलब है? (ऐसी जलवायु घटनाएं जिन्हें रोक पाना मुश्किल हो)
  • शहद में कौन से मिलावटी पदार्थ मिलाए जाते हैं एवं इनके परीक्षण हेतु हाल ही में किस स्थान पर ‘भारत की विश्वस्तरीय अत्याधुनिक शहद परीक्षण प्रयोगशाला’ का शुभारंभ किया गया? (कॉर्न सीरप या चावल, टैपिओका, गन्ना और बीट सीरप; आनंद-गुजरात)
  • हाल ही में प्रारंभ हुए औद्योगिकी-अकादमिक प्रशिक्षण कार्यक्रम ‘प्रिज्म’ क्या है एवं इसे यह किस संस्था की पहल है? (इंजीनियरिंग छात्रों को AI, IOT और 5G प्रशिक्षण, सैमसंग)
  • चीन को अमेरिका द्वारा यूएस डॉलर सिस्टम से बाहर करने की आशंका से चर्चा में रहे ‘SWIFT’ क्या है? (सोसायटी फॉर वर्ल्डवाइड इंटरबैंक फाइनैंशल टेलिकॉम्युनिकेशन, बैंकिंग में वित्तीय लेनदेन हेतु प्रयुक्त)
  • राष्ट्रीय सुरक्षा के संदर्भ में भारतीय सीमावर्ती देशों के बोलीदाताओं पर नियंत्रण लगाने के लिए (सुरक्षा मंजूरी और विशेष पंजीकरण) हेतु किन नियमों में बदलाव किया है? (सामान्य वित्तीय नियम, 2017)
  • RBI की वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट के अनुसार गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (NPA) का चालू वित्त वर्ष में 12.5% तक होने चर्चा में रहे NPAक्या होता है? (ऐसी अस्तियां जिनपर 90 दिनों तक ब्याज/मूलधन प्राप्त ना हो)
  • वर्ष 2020 के इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) का आयोजन कहां किया जाएगा? (संयुक्त अरब अमीरात)
  • पाकिस्तान और चीन के साथ समझौता से चर्चा में रहे जैविक हथियारों के नियंत्रण हेतु उपलब्ध हो वैश्विक संधि कौनसी है? (1925 जिनेवा प्रोटोकॉल और 1972 का बायोलॉजिकल एंड टॉक्सिन विपन कन्वेंशन-BTWC)

स्रोत साभार: Dainik Jagran (Rashtriya Sanskaran), Dainik Bhaskar (Rashtriya Sanskaran), Rashtriya Sahara (Rashtriya Sanskaran) Hindustan Dainik (Delhi), Nai Duniya, Hindustan Times, The Hindu, BBC Portal, The Economic Times (Hindi & English), PTI, PIB