(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (25 जनवरी 2020)

दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर


(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (25 जनवरी 2020)


:: राष्ट्रीय समाचार ::

मीसा पेंशन

  • छत्तीसगढ़ सरकार ने देश में आपातकाल के दौरान जेल में बंद रहे मीसा बंदियों को मिलने वाली सम्मान निधि (मीसा पेंशन) को समाप्त करने का फैसला किया है। राज्य सरकार ने अधिसूचना जारी कर लोकनायक जयप्रकाश नारायण सम्मान निधि नियम 2008 को रद्द कर दिया है।

पृष्ठभूमि

  • छत्तीसगढ़ में वर्ष 2008 में तत्कालीन भाजपा सरकार ने आपातकाल के दौरान छत्तीसगढ़ के राजनैतिक या सामाजिक कारणों से मीसा, डीआईआर के अधीन निरुद्ध व्यक्तियों को सहायता देने के लिए लोकनायक जयप्रकाश नारायण सम्मान निधि नियम 2008 बनाया था।

देश का पहला जानवरों का युद्ध स्मारक

  • आरवीसी के जांबाज कैटल, जिन्होंने कारगिल की ऊंची चोटियों व कश्मीर घाटी में वीर जवानों के साथ देश की आन, बान और शान को बढ़ाया, इनके साहस और वीरता को देखते हुए मेरठ के आरवीसी सेंटर में देश का पहला वार मेमोरियल फॉर एनीमल बनने जा रहा है। आरवीसी सेंटर एंड कॉलेज को इन सेवाओं के लिए भारत के पहले युद्ध स्मारक की मेजबानी दी जाएगी।
  • यह स्मारक उन पशुओं के योगदान को समर्पित होगा, जिन्होंने कारगिल युद्ध के दौरान और कश्मीर में आतंकवाद विरोधी अभियानों में सेना की मदद की। रेमाउंट एंड वेटरनरी कोर (आरवीसी) में इस वक्त एक हजार से अधिक कुत्ते, 15 सौ घोड़े और पांच हजार खच्चर शामिल हैं।
  • मेरठ कैंट स्थित आरवीसी सेंटर में युद्ध स्मारक का निर्माण होगा। इसमें देश के जांबाज कैटल को शामिल कर उन्हें ट्रेनिंग दी जाएगी। कारगिल युद्ध में पशुओं के साथ रहे उनके हैंडलर्स को भी इसमें शामिल किया जा सकता है। ये स्मारक सेवा जानवरों के लिए समर्पित है। यह देश का पहला पशु युद्ध स्मारक होगा। बताया जा रहा है कि मानसी नामक लैब्राडोर को वर्ष 2016 में कश्मीर में आतंकवाद रोधी अभियानों में उसकी भूमिका को कुत्तों के लिए सेना के सर्वोच्च सम्मान से सम्मानित किया गया था। मानसी याद किए जाने वाले जानवरों की सूची में सबसे ऊपर है।

:: अंतर्राष्ट्रीय समाचार ::

'सागरमाथा संवाद' फोरम

  • नेपाल में अप्रैल माह में शुरू हो रहे सागरमाथा संवाद वैश्विक एवं क्षेत्रीय महत्‍व के ज्‍वलंत मुद्दों पर विचार-विमर्श करने के लिए आयोजित किया जाएगा। 'सागरमाथा संवाद' का पहला संस्करण 'जलवायु परिवर्तन- पहाड़ों और मानवता के भविष्य" विषय पर 2 से 4 अप्रैल तक आयोजित होगा।
  • संवाद के पहले संस्करण के मुख्य उद्देश्य आसन्न जलवायु संकट पर देशों के बीच आम सहमति बनाने और राजनीतिक नेताओं को अपनी राजनीतिक इच्छा शक्ति को बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करना है। यह जलवायु परिवर्तन और पर्वत पारिस्थितिकी के बीच मौजूद प्रत्यक्ष संबंध के बारे में प्रतिभागियों और दुनिया के बीच जागरूकता पैदा करने की उम्मीद करता है।

:: भारतीय राजव्यवस्था ::

राजनीति के अपराधीकरण पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

  • सुप्रीम कोर्ट ने राजनीति के अपराधीकरण को समाप्त करने को लेकर फ्रेमवर्क तैयार करने का चुनाव आयोग को निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति आर एफ नरीमन और न्यायमूर्ति रवीन्द्र भट की पीठ ने आयोग से कहा, 'राजनीति में अपराध के वर्चस्व को खत्म करने के लिए एक फ्रेमवर्क तैयार किया जाए।'
  • न्यायालय ने इस पर जवाब के लिए आयोग को एक सप्ताह का समय भी दिया है। न्यायालय ने राजनीति के अपराधीकरण पर सख्त
  • चुनाव आयोग का कहना है कि चुनाव लड़ने वाले तमाम उम्मीदवारों द्वारा उनकी आपराधिक रिकॉर्ड देने मात्र से समस्या हल नहीं हो सकती।
  • आयोग ने न्यायालय के वर्ष 2018 में दिए गए उस फैसले की याद दिलाई जिसके तहत उम्मीदवारों से उनके आपराधिक रिकार्ड को इलेक्ट्रॉनिक एवम् प्रिंट मीडिया में घोषित करने को कहा गया था। आयोग ने कहा कि राजनीति का अपराधीकरण रोकने में उम्मीदवारों द्वारा घोषित आपराधिक रिकॉर्ड से कोई मदद नहीं मिली है।
  • आयोग ने सुझाव दिया कि उम्मीदवारों से आपराधिक रिकॉर्ड मीडिया में घोषित करने के बजाए ऐसे उम्मीदवारों को टिकट से वंचित कर दिया जाना चाहिए जिनका पिछला रिकॉर्ड आपराधिक रहा हो।

इस बार संसद में 43 फीसदी सांसद दागी

  • 43 % सांसदों पर केस : 542 सांसदों में से 233 यानि 43 फीसदी सांसदों के खिलाफ आपराधिक मुकदमे लंबित हैं। हलफनामों के हिसाब से 159 यानि 29 प्रतिशत सांसदों के खिलाफ हत्या, बलात्कार और अपहरण जैसे गंभीर मामले लंबित है।
  • 116 निर्वाचित भाजपायी सांसद दागी : भाजपा के 303 में से 301 सांसदों के हलफनामे के विश्लेषण में पाया गया कि साध्वी प्रज्ञा सिंह सहित 116 सांसदों के खिलाफ आपराधिक मामले चल रहे हैं।
  • कांग्रेसी सांसद कुरियाकोस पर 204 मुकदमे : 204 लंबित मामलों वाले केरल से नवनिर्वाचित कांग्रेसी सांसद डीन कुरियाकोस हैं सूची में प्रथम। कांग्रेस के 52 में से 29 सांसद आपराधिक मामलों में घिरे हैं
  • सभी प्रमुख दलों में हैं दागी सांसद : सत्तारूढ़ राजद के घटक दल लोजपा के सभी छह निर्वाचित सदस्यों, बसपा के आधे (10 में से 5), जदयू के 16 में से 13, तृणमूल कांग्रेस के 22 में से नौ और माकपा के तीन में से दो सांसदों के खिलाफ आपराधिक मामले चल रहे हैं। इस मामले में बीजद के 12 निर्वाचित सांसदों में सिर्फ एक सदस्य ने अपने खिलाफ आपराधिक मामले की हलफनामे में घोषणा की है।
  • बिहार और बंगाल के सबसे ज्यादा सांसदों पर मामले : आपराधिक मामलों में फंसे सर्वाधिक सांसद केरल और बिहार से चुन कर आए। केरल से निर्वाचित 90 फीसदी, बिहार से 82 फीसदी, पश्चिम बंगाल से 55 फीसदी, उत्तर प्रदेश से 56 और महाराष्ट्र से 58 प्रतिशत सांसदों पर केस लंबित। वहीं सबसे कम नौ प्रतिशत सांसद छत्तीसगढ़ के और 15 प्रतिशत गुजरात के हैं।
  • 16वीं लोकसभा में थे 34 % दागी : 2014 के चुनाव में निर्वाचित ऐसे सांसदों की संख्या 185 (34 प्रतिशत) थी, 112 सांसदों पर चल रहे थे गंभीर केस

राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (National Security Act)

  • सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय राजधानी और कुछ राज्यों में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (National Security Act) लागू किए जाने को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया है। इस कानून के तहत पुलिस के पास किसी व्यक्ति को बिना मुकदमा चलाए 12 महीने तक हिरासत में रखने का अधिकार है।
  • अधिवक्ता एमएल शर्मा की ओर से दायर याचिका पर जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस इंदिरा बनर्जी की पीठ ने सुनवाई की। सुप्रीम कोर्ट ने एमएल शर्मा को याचिका वापस लेने का आदेश देते हुए कहा कि हम एनएसए के तहत दिल्ली पुलिस कमिश्नर को लोगों को हिरासत में लेने का अधिकार देने वाली अधिसूचना मे दखल नहीं दे सकते। कोर्ट ने कहा कि इस बारे में जनरल आदेश नहीं दिया जा सकता। कानून के दुरुपयोग की कोई विशेष घटना हो तभी सुनवाई हो सकती है।
  • सुप्रीम कोर्ट ने NSA के तहत दिल्ली पुलिस कमिश्नर को लोगों को हिरासत में लेने का अधिकार देने वाली अधिसूचना मे दखल देने से इनकार किया। कोर्ट ने कहा कि इस बारे में जनरल आदेश नहीं दिया जा सकता। कानून के दुरुपयोग की कोई विशेष घटना हो तभी सुनवाई हो सकती है।

पृष्ठभूमि

  • अधिवक्ता एमएल शर्मा की ओर से राष्ट्रीय राजधानी और कुछ राज्यों में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (National Security Act) लागू किए जाने को चुनौती देने वाली याचिका दायर की थी।
  • याचिका में कहा गया था कि नागरिकता संशोधन कानून, राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों को कुचलने और प्रदर्शनकारियों पर दबाव बनाने के लिए एनएसए लागू किया गया है।
  • याचिका में कहा गया है पुलिस को हिरासत में लिए गये व्यक्तियों पर रासुका लगाने की अनुमति देने संबंधी अधिसूचना से संविधान के अनुच्छेद 19 (1) (अभिव्यक्ति और बोलने की आजादी) तथा अनुच्छेद 21 (जीने के अधिकार) के तहत प्रदत्त मौलिक अधिकारों का उल्लंघन होता है. याचिका में इस अधिसूचना को निरस्त करने का अनुरोध किया गया था.
  • इसके साथ ही याचिका में कानून के तहत हिरासत में लिए गए हर व्यक्ति के लिए 50-50 लाख रुपये हर्जाने की मांग की गई है।
  • बता दें कि दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल ने 10 जनवरी को एनएसए के तहत दिल्ली पुलिस की हिरासत में लेने के अधिकार 19 जनवरी से तीन महीने के लिए बढ़ा दिए थे।

:: भारतीय अर्थव्यवस्था ::

नवंबर में पैदा हुईं 14.33 लाख नई नौकरियां, EPFO से जुड़े 11.63 लाख लोग

  • नवंबर, 2019 में नई नौकरियों की संख्या बढ़कर 14.33 लाख हो गई, जबकि अक्तूबर में यह 12.60 लाख रही थीं। कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) के आंकड़ों में ये बातें सामने आई हैं। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा कि वित्त वर्ष 2018-19 के दौरान ईएसआईसी में कुल 1.49 करोड़ नए नामांकन हुए। इससे यह भी पता चलता है कि सितंबर, 2017 से नवंबर, 2019 के दौरान ईएसआईसी योजना से 3.37 करोड़ नए सदस्य जुड़े।
  • एनएसओ की रिपोर्ट ईएसआईसी द्वारा चलाई जा रहीं विभिन्न सामाजिक सुरक्षा योजनाओं, सेवानिवृत्ति कोष संस्था ईपीएफओ और पेंशन कोष विनियामक और विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) के नए सदस्यों से सबंधित आंकड़ों पर आधारित हैं। इन तीन संगठनों द्वारा अप्रैल, 2018 से ही नए सदस्यों से जुड़े आंकड़ें जारी किए जा रहे हैं, जिसमें सितंबर, 2017 के बाद की अवधि को कवर किया गया है।
  • ईपीएफओ योजना उन कंपनियों में लागू होती है, जहां पर 20 से अधिक कर्मचारी काम करते हैं। वहीं ईएसआईसी 10 कर्मचारियों वाली कंपनी पर और एनपीएस में 18 से 60 साल का कोई भी व्यक्ति अपना खाता खोल सकता है।

:: विज्ञान और प्रौद्योगिकी ::

K-4 बैलिस्टिक मिसाइल

  • भारत ने विशाखापट्टनम तट से एक हफ्ते में दूसरी बार पनडुब्बी से छोड़ी जाने वाली बैलिस्टिक मिसाइल के-4 का सफल परीक्षण किया। इसे नौसेना की ताकत बढ़ाने के लिहाज से मील का अहम पत्थर माना जा रहा है।
  • डीआरडीओ द्वारा विकसित ये मिसाइल 3,500 किलोमीटर तक मार कर सकती है और इसकी जद में पाकिस्तान के सभी हिस्सों के साथ चीन के कुछ इलाके भी आते हैं। इस मिसाइल को भारत की अरिहंत श्रेणी की परमाणु पनडुब्बियों पर तैनात किये जाने की तैयारी है। इससे पहले 12 जनवरी को भी परमाणु हमला करने में सक्षम बैलिस्टिक मिसाइल के-4 का सफल परीक्षण किया गया था।
  • परमाणु हमला करने में सक्षम पनडुब्बियों पर तैनात करने से पूर्व इस मिसाइल के कई और परीक्षणों से गुजरने की संभावना है। फिलहाल नौसेना के पास आईएनएस अरिहंत ही एकमात्र ऐसी पनडुब्बी है, जो परमाणु क्षमता से लैस है।

विशेषता

  • इस सबमरीन (पनडुब्बी से छोड़े जाने वाली) मिसाइल को रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) ने तैयार किया है।
  • ये मिसाइल 3,500 किलोमीटर तक मार कर सकती है
  • दुश्मन के रडार पर मिसाइल आसानी से नहीं आती।
  • के-4 पानी के नीचे चलने वाली उन दो स्वदेशी मिसाइल में से एक है, जिन्हें समुद्री ताकत बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। ऐसी ही अन्य पनडुब्बी बीओ-5 है, जो 700 किलोमीटर से अधिक की दूरी पर मौजूद अपने लक्ष्य पर हमला सकती है।

क्या होती है बैलिस्टिक मिसाइल :

  • जब किसी मिसाइल के साथ दिशा बताने वाला यंत्र लगा दिया जाता है, तो वह बैलिस्टिक मिसाइल बन जाती है। इस मिसाइल को जब अपने स्थान से छोड़ा जाता है या दागा जाता है तो यह पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण नियम के अनुसार अपने पूर्व निर्धारित लक्ष्य पर जाकर गिरती है। ऐसी मिसाइलों में बहुत बड़ी मात्रा में विस्फोटकों को ले जाने की क्षमता होती है। भारत के पास पृथ्वी, अग्नि, और धनुष जैसी बैलिस्टिक मिसाइलें हैं।
  • इतिहास में सबसे पहली बैलिस्टिक मिसाइल नाजी जर्मनी ने 1930 से 1940 के मध्य में विकसित की थी। यह कार्य रॉकेट वैज्ञानिक वेन्हेर्र वॉन ब्राउन की देखरेख में हुआ था। यह सबसे पहली बैलिस्टिक मिसाइल ए4 थी, जिसे दूसरे शब्दों में वी-2 रॉकेट के नाम से भी जाना जाता है। इसका परीक्षण तीन अक्तूबर 1942 को हुआ था।

एंटी ड्रोन सिस्टम(ड्रोन कैचर)

  • सीमा सुरक्षा बल (BSF) के बेड़े को अत्याधुनिक बनाने की मुहिम के तहत खरीदे जा रहे 10 एंटी ड्रोन सिस्टम में से पांच को जम्मू में स्थापित करने की योजना है। एंटी ड्रोन सिस्टम को ड्रोन कैचर भी कहा जाता है। इस तकनीक की सहायता से दो किलोमीटर की दूरी से दुश्मन के ड्रोन का सिग्नल जाम कर उसे गिराया जा सकता है। एंटी ड्रोन सिस्टम महज पांच सेकेंड के अंदर यह कार्रवाई करने की क्षमता रखता है। रडार युक्त यह सिस्टम आसानी से कहीं भी मूव हो सकता है। ड्रोन कम ऊंचाई पर उड़ान भरता है, ऐसे में वायुसेना के बड़े रडार के मुकाबले एंटी ड्रोन सिस्टम का रडार इसे आसानी से पकड़ सकता है।

एंटी ड्रोन सिस्टम की कार्य प्रणाली

  • विदेशी तकनीक के आधार पर बनाए गए एंटी ड्रोन सिस्टम में दुश्मन के ड्रोन को अपने इलाकों में आने से पहले कार्रवाई के लिए रेडियो फ्रीक्वेंसी रिसीवर, सेंसर्स और जैमर होंगे। इसके रडार तेज गति से 360 डिग्री के एंगल पर घूमते हुए सटीक जानकारी देगा कि हवा में दुश्मन के ड्रोन कितनी दूरी व ऊंचाई पर है। सिस्टम में हाई डेफिनेशन कैमरे भी होंगे, जो दिन और रात में दूर तक देखने में सक्षम होंगे। सिस्टम की असली ताकत इसके जैमर में है, जो रडार की सूचना के आधार पर सटीक प्रहार करते हुए दो किलोमीटर की दूरी से इसका सिग्नल जाम कर देगा। ग्राउंड से ड्रोन का संपर्क टूटते ही वह अनियंत्रित होकर गिर जाएगा।

कोरोना वायरस

  • चीन में कोरोना वायरस का कहर जारी है। इस नए तरह के घातक कोरोना वायरस ने अब तक 25 लोगों की जान ले ली है और करीब 800 से अधिक लोग इसकी चपेट में हैं। कोरोना वायरस की भयावहता को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने चीन में इमरजेंसी की घोषणा कर दी है, मगर अभी अंतरराष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थिति की घोषणा नहीं की है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने कहा है कि इस वायरस को वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित करना जल्द बाजी होगी।

कोरोनो वायरस क्या है

  • वायरसों का एक बड़ा समूह है कोरोना जो जानवरों में आम है। अमेरिका के सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीएस) के अनुसार, कोरोना वायरस जानवरों से मनुष्यों तक पहुंच जाता है। अब एक नया चीनी कोरोनो वायरस, सार्स वायरस की तरह है जिसने सैकड़ों को संक्रमित किया है। हांगकांग विश्वविद्यालय में स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के वायरोलॉजिस्ट लियो पून, जिन्होंने पहले इस वायरस को डिकोड किया था, उन्हें लगता है कि यह संभवतः एक जानवर में शुरू हुआ और मनुष्यों में फैल गया।

MERS और SARS कोरोना वायरस के रूप

  • मध्य पूर्व श्वसन सिंड्रोम, जिसे एमईआरएस (MERS) वायरस के रूप में भी जाना जाता है का हमला पहली बार 2012 में मध्य पूर्व देशों में देखा गया था। इससे श्वसन संबंधी समस्याएं होती हैं, लेकिन लक्षण बहुत अधिक गंभीर होते हैं। MERS से संक्रमित हर 10 में से तीन से चार रोगियों की मृत्यु हो गई थी। गंभीर तीव्र श्वसन सिंड्रोम, जिसे सार्स (Severe Acute Respiratory Syndrome या SARS) के रूप में भी जाना जाता है, एक अन्य किस्म का कोरोना वायरस है जो अधिक गंभीर लक्षण पैदा कर सकता है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार, दक्षिणी चीन के गुआंगडोंग प्रांत में पहली बार इसकी पहचान की गई थी। यह भी सांस संबंधी समस्याओं का कारण बनता है, लेकिन इसके कारण दस्त, थकान, सांस की तकलीफ, श्वसन संकट और गुर्दे की विफलता भी हो सकती है। रोगी की उम्र के आधार पर, सार्स के साथ मृत्यु दर 0-50% मामलों में थी।

कोरोना वायरस कैसे फैलता है

  • कोरोना वायरस जानवरों के साथ मानव संपर्क से फैल सकता है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार, वैज्ञानिकों को लगता है कि MERS ने ऊंटों से निकल कर संक्रमित किया था, जबकि सार्स के प्रसार के लिए सिवेट बिल्लियों को दोषी ठहराया गया था। जब वायरस के मानव-से-मानव संचरण की बात आती है, तो अक्सर ऐसा तब होता है जब कोई व्यक्ति संक्रमित व्यक्ति के स्राव के संपर्क में आता है। वायरस कितना वायरल है, इसके आधार पर खांसी, छींक या हाथ मिलाना जोखिम का कारण बन सकता है। किसी संक्रमित व्यक्ति के छूने और फिर अपने मुंह, नाक या आंखों को छूने से भी वायरस का संक्रमण हो सकता है।

जे0815 प्लस 4729 तारा

  • खगोलविदों ने एक सबसे पुराने और मौलिक रूप से कमजोर तारे के वायुमंडल में बड़ी मात्रा में ऑक्सीजन का पता लगाया है। यह एक ऐसी खोज है, जो ब्रह्मांड में जीवन को बनाए रखने के लिए आवश्यक महत्वपूर्ण यौगिकों के गठन पर प्रकाश डालती है। साथ ही इससे अंतरिक्ष के अन्य खगोलीय पिंडों पर जीवन की संभावनाओं को और बल मिला है। एस्ट्रोफिजिकल लेटर्स नामक जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन के लिए शोधकर्ताओं ने जे0815 प्लस 4729 नामक एक प्राचीन तारे की रासायनिक बनावट का विश्लेषण किया और यह पता लगाया कि ब्रह्मांड में फ‌र्स्ट जनरेशन के तारों यानी शुरुआती दौर के तारों में ऑक्सीजन और अन्य महत्वपूर्ण तत्वों का निर्माण कैसे होता है।

5000 प्रकाशवर्ष दूर है मौजूद

  • शोधकर्ताओं में शामिल ब्रिटेन की कैंब्रिज यूनिवर्सिटी के शोधार्थियों ने कहा, 'जे0815 प्लस 4729 नामक तारा अपने नक्षत्र मंडल 'लिंक्स' से लगभग 5000 प्रकाशवर्ष दूर स्थिति है यानी इस तारकीय स्त्रोत से पृथ्वी तक प्रकाश पहुंचने में पांच हजार साल लग जाएंगे।'

दूसरे तारों में जगी जीवन की आस

  • अमेरिका की डब्ल्यू. एम. कीक वेधशाला के वैज्ञानिक और इस अध्ययन के सह-लेखक जॉन ओ मारिया ने कहा, 'यह परिणाम बहुत ही रोमांचक है। यह हमारे ब्रह्मांडीय बैक यार्ड में मौजूद तारों का उपयोग करके ब्रह्मांड के सबसे शुरुआती समय के बारे में बताता है।' उन्होंने कहा कि 'जे0815 प्लस 4729' में ऑक्सीजन मिलने का मतलब है कि अन्य तारों में भी जीवन संभव हो सकता है।

न्यूक्लियर रिएक्शन से हुआ गैसों की निर्माण

  • शोधकर्ताओं के अनुसार, हाइड्रोजन और हीलियम के बाद ब्रह्मांड में ऑक्सीजन तीसरा सबसे प्रचुर मात्रा में पाया जाने वाला तत्व है, और पृथ्वी पर जीवन के सभी रूपों के लिए आवश्यक है। हालांकि, उन्होंने कहा, यह तत्व प्रारंभिक ब्रह्मांड में मौजूद नहीं था। इनका निर्माण बड़े पैमाने पर तारों के अंदर न्यूक्लियर रिएक्शन होने पर अल्ट्राहाई एनर्जी के उत्सजर्न के माध्यम से हुआ, जिनका द्रव्यमान सूर्य की तुलना में लगभग 10 गुना अधिक है।

16 रसायनों का डाटा जुटाया

  • एक ही रात में तारे का पांच घंटे से अधिक समय तक अवलोकन करने के बाद खगोलविदों ने इसके वातावरण में ऑक्सीजन सहित अन्य 16 रसायनों का डाटा एकत्र किया। इस अध्ययन के प्रमुख लेखक, जोयन गोंजालेज हर्नाडेज ने कहा, 'इस तारे की संरचना यह इंगित करती है कि बिग बैंग के बाद सैकड़ों करोड़ों वषरें के दौरान इसका गठन हुआ था। संभवत: यह मिल्की वे के पहले सुपरनोवा से निकली हुई सामग्री से बना होगा। इस अध्ययन के निष्कर्ष यह भी बताते हैं कि इस तारे एक बहुत ही असामान्य रासायानिक संरचना थी।

आकाशगंगा में नहीं है ऐसा तारा

  • वैज्ञानिकों के मुताबिक, जे0815 प्लस 4729 नामक इस तारे में कार्बन, नाइट्रोजन, और ऑक्सीजन की मात्रा क्रमश: 10, आठ और तीन प्रतिशत है। ऐसी ही कुछ स्थिति सूर्य की भी है। हालांकि, उन्होंने कहा कि इसमें कैल्शियम और आयरन जैसे अन्य तत्व बेहद दुर्लभ थे। अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ कैंब्रिज के पोस्टडॉक्टोरल शोधकर्ता और इस अध्ययन के सह-लेखक डेविड एगुओडो ने कहा, 'हमारी आकाशगंगा के प्रभामंडल में केवल कुछ तारे ही पाए जाते हैं, लेकिन कार्बन, नाइट्रोजन और ऑक्सीजन की इतनी भारी मात्रा किसी के पास नहीं है।

सोमेटिक सेल काउंट (Somatic cell count)

  • राष्ट्रीय डेरी अनुसंधान संस्थान (NDRI) करनाल के ताजातरीन शोध में पता चला है कि देसी गाय की ज्यादातर नस्लों में सोमेटिक सेल काउंट (Somatic cell count) की तादाद अब एक लाख से बढ़कर डेढ़ लाख प्रति मिलीलीटर यूनिट तक पहुंच गई है। संस्थान द्वारा विकसित करण स्विस सरीखी नस्लों में ये सेल दो लाख तक हो सकते हैं। विदेश में दो लाख सोमेटिक सेल काउंट ही उच्च गुणवत्ता का मानक है। स्पष्ट है कि मानक पर खरा उतरने के बाद देसी गायों व उनके दुग्ध उत्पादों की मांग विदेश में भी बढ़ेगी।
  • NDRI में देसी गाय की कई नस्लों पर अनुसंधान होता है। इनमें साहीवाल, थारपारकर, गिर और राही आदि शामिल हैं। देसी नस्ल की इन गायों के दूध में ए-2 पाया जाता है, जो मानव शरीर के लिए अति लाभदायक है और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है। अभी तक सोमेटिक सेल काउंट एक लाख होने के कारण विदेश में इन गायों और इनके दुग्ध उत्पादों को महत्व नहीं मिलता थां। संस्थान के पशु शरीर क्रिया विभाग के अध्यक्ष डॉ. महेंद्र सिंह बताते हैं कि आम तौर पर देसी गायों के एक एमएल दूध में एक लाख सोमेटिक सेल पाए जाते रहे हैं। अब इनकी मात्रा डेढ़ लाख तक मिल रही है।

क्या है सोमेटिक सेल काउंट

  • सोमेटिक सेल काउंट दूध में शामिल दैहिक कोशिकाओं की एक कोशिका गणना होती है। इससे दूध की गुणवत्ता का पता चलता है। खासकर, हानिकारक बैक्टीरिया व उच्चस्तरीय खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए इसे परखा जाता है। श्वेत रक्त कोशिकाएं अधिकांश दैहिक कोशिकाओं का गठन करती हैं।

मौसम की चुनौती झेलने में भी देसी गाय सक्षम

  • देसी गाय मौसम व तापमान की चुनौतियां सहने में भी खरी उतर रही है। संस्थान में हुए शोध में पता चला है कि संकर या विदेशी नस्ल की तुलना में देसी गाय जलवायु परिवर्तन से कम प्रभावित होती हैं। गर्मी में 40 से ज्यादा व सर्दियों में 20 डिग्री से कम तापमान होने पर दूध उत्पादन में 30 फीसद तक गिरावट आती है। लेकिन देसी नस्ल की गायों पर इसका खास असर नहीं होता। इसके लिए एमसीआर-वन और सरीखे कुछ खास किस्म के जीन जिम्मेदार हैं, जो देसी नस्लों में ही मिलते हैं

:: विविध ::

राष्‍ट्रीय मतदाता दिवस 2020

  • राष्‍ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद निर्वाचन आयोग द्वारा 25 जनवरी 2020 को मानेकशॉ केंद्र दिल्‍ली कैंट में आयोजित किए जा रहे 10वें राष्‍ट्रीय मतदाता दिवस (एनवीडी) समारोह में मुख्‍य अतिथि होंगे। यह वर्ष भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक महत्‍वपूर्ण मील का पत्‍थर है क्‍योंकि भारत का निर्वाचन आयोग अपनी यात्रा के 70 वर्ष पूरे कर रहा है।
  • राष्‍ट्रीय मतदाता दिवस 2020 का विषय है ‘मजबूत लोकतंत्र के लिए चुनावी साक्षरता’। सालभर चलने वाली गतिविधियों में मतदाता शिक्षा और चुनावी प्रक्रिया में नागरिको के विश्‍वास के नवीकरण पर ध्‍यान केंद्रित किया जाएगा।
  • राष्‍ट्रीय मतदाता दिवस वर्ष 2011 से हर साल 25 जनवरी को मनाया जाता है। यह दिवस भारतीय निर्वाचन आयोग के स्‍थापना दिवस के उपलक्ष्‍य में मनाया जाता है। निर्वाचन आयोग की स्‍थापना 25 जनवरी, 1950 को हुई थी। एनवीडी के समारोह का मुख्‍य उद्देश्‍य विशेष रूप से नए मतदाताओं के लिए नामांकन को प्रोत्‍साहित करना, सुविधा प्रदान करना और उसे अधिकतम बनाना है। देश के मतदाताओं को समर्पित इस दिवस का चुनावी प्रक्रिया में सूचित भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए मतदाताओं में जागरूकता फैलाने के लिए उपयोग किया जाता है। राष्‍ट्रीय मतदाता दिवस कार्यक्रम में नए मतदाताओं को उनके मतदाता फोटो पहचान पत्र सौंपे जाते हैं।

:: प्रिलिम्स बूस्टर ::

  • हाल ही में किस राज्य सरकार के द्वारा मीसा बंदियों को मिलने वाली सम्मान निधि ( मीसा पेंशन ) को बंद करने का फैसला लिया है? (छत्तीसगढ़)
  • देश का पहला जानवरों का युद्ध स्मारक की स्थापना कहां की जा रही है? (मेरठ)
  • नेपाल द्वारा आयोजित किए जाने वाले प्रथम ‘सागरमाथा संवाद’ की विषय वस्तु क्या है? ('जलवायु परिवर्तन- पहाड़ों और मानवता के भविष्य")
  • हाल ही में भारत के द्वारा पनडुब्बी से छोड़े जाने वाली किस बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया गया है? (के-4)
  • पनडुब्बी से छोड़े जाने के-4 बैलिस्टिक मिसाइल का विकास किस संस्था के द्वारा किया गया है? (डीआरडीओ)
  • हाल ही में खगोलविदों के द्वारा किस तारे के वायुमंडल में व्यापक मात्रा में ऑक्सीजन का पता लगाया गया है? (जे0815 प्लस 4729 तारा)
  • किस तिथि को राष्ट्रीय मतदाता दिवस(NVD) मनाया जाता है? (25 जनवरी)
  • राष्ट्रीय मतदाता दिवस 2020 की विषय-वस्तु/ थीम क्या है? (‘मजबूत लोकतंत्र के लिए चुनावी साक्षरता’)

स्रोत साभार: Dainik Jagran (Rashtriya Sanskaran), Dainik Bhaskar (Rashtriya Sanskaran), Rashtriya Sahara (Rashtriya Sanskaran) Hindustan Dainik (Delhi), Nai Duniya, Hindustan Times, The Hindu, BBC Portal, The Economic Times (Hindi & English), PTI, PIB

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