(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (25 अप्रैल 2020)

दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर


(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (25 अप्रैल 2020)


:: राष्ट्रीय समाचार ::

'प्रकृति' डैशबोर्ड करेगा कोरोना की ‘भविष्यवाणी’

  • आने वाले दिनों में किसी इलाके में कोरोना संक्रमण की स्थिति क्या होगी, इसकी भविष्यवाणी अब प्रकृति (PRACRITI) डैशबोर्ड करेगा। वेब आधारित इस डैशबोर्ड प्रकृति पर हर राज्य और हर जिले के अनुसार आने वाले दिनों में वहां कोरोना संक्रमण की स्थिति की विस्तृत जानकारी मिलेगी।
  • यह स्मार्टफोन पर भी काम करेगा और कोई भी व्यक्ति अपने फोन पर आने वाले दिनों में अपने इलाकों में कोरोना संक्रमण की स्थिति जान पाएगा। वेब डैशबोर्ड पर यह जानकारी साप्ताहिक आधार पर दी जाएगी और इसे हर हफ्ते अपडेट किया जाएगा।
  • आम लोगों के अलावा स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए भी यह जानकारी काफी महत्त्वपूर्ण साबित हो सकती है और इसके मुताबिक वे सुरक्षा के उपाय उठा सकेंगे।

कैसे करेगा कार्य

  • दरअसल प्रकृति (PRACRITI- Prediction and Assessment of Corona Infections and Transmissions in India) डैशबोर्ड बुनियादी प्रजनन संख्या के मूल आधार पर काम करता है।
  • इसके लिए यह विश्व स्वास्थ्य संगठन, भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय और आपदा प्रबंधन प्राधिकरण से प्राप्त आंकड़ों का उपयोग करता है और इसी के आधार पर भविष्यवाणी करता है।
  • इसके आंकड़ों को तैयार करते समय इसका भी ध्यान रखा जाएगा कि किसी राज्य के द्वारा लॉक डाउन के नियमों का कितना अच्छे तरीके से पालन किया जा रहा है।

क्या होंगें लाभ?

  • आईआईटी दिल्ली के वैज्ञानिक प्रो. एन. एम. अनूप कृष्णन ने बताया कि केंद्र और राज्य सरकारों के स्वास्थ्य विभाग के लोगों के लिए इन आंकड़ों की उपयोगिता बहुत अधिक हो सकती है।
  • इसके आधार पर वे किसी क्षेत्र में अपने प्रयास तेज करने और आवश्यक तैयारी करने के उपाय सुझा सकेंगे। इस मानक पर मिली जानकारी के आधार पर कोई व्यक्ति यह तय कर सकेगा कि वह जिस क्षेत्र में जा रहा है, वह कोरोना के लिहाज से कितना संक्रामक हो सकता है। वह अपने लिए जरुरी एहतियाती उपाय भी कर सकता है।

श्रम पर संसदीय समिति का औद्योगिक संबंध संहिता, 2019 पर प्रतिवेदन

  • श्रम पर संसदीय समिति के अध्यक्ष एवं बीजू जनता दल सांसद भर्तुहरि महताब ने कहा है कि उद्योगों पर कर्मचारियों को लॉकडाउन की अवधि का वेतन देने के लिए दबाव नहीं डाला जा सकता। कोरोना वायरस की वजह से लागू राष्ट्रव्यापी बंद के बीच इस समिति ने औद्योगिक संबंध संहिता, 2019 पर अपना प्रतिवेदन लोकसभाध्यक्ष ओम बिड़ला को आनलाइन सौंपा।

रिपोर्ट की प्रमुख तथ्य

  • रिपोर्ट में समिति ने किसी प्राकृतिक आपदा की स्थिति में प्रतिष्ठानों के बंद होने की स्थिति में श्रमिकों को वेतन देने को लेकर आपत्तियां उठाई हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि भूकंप, बाढ़, चक्रवात आदि की स्थिति में कई बार प्रतिष्ठानों को लंबी अवधि के लिए बंद करना पड़ता है। इसमें नियोक्ता की कोई गलती नहीं होती। ऐसे में श्रमिकों को वेतन देने के लिए कहना अनुचित होगा।
  • महताब ने कहा कि उद्योगों को मौजूदा बंदी कोविड-19 संकट की वजह से करनी पड़ी है। ऐसे में उन पर कर्मचारियों को बंद की अवधि का वेतन देने के लिए दबाव नहीं डाला जा सकता। समिति ने सिफारिश की है कि ले-आफ, छंटनी या कंपनी बंद करने से जुडे विशेष प्रावधन उन उद्योग प्रतिष्ठानों पर लागू होने होने चाहिए जिनमें काम करने वाले कर्मचारियों की संख्या 300 है। अभी ये प्रावधान 100 कर्मचारियों वाली कंपनियों पर लागू होते है। समिति ने इसे बढ़ाकर 300 करने का सुझाव दिया है।
  • रिपोर्ट में कहा गया है, ‘‘समिति के संज्ञान में आया है कि कुछ राज्य सरकारों मसलन राजस्थान में इस सीमा को बढ़ाकर 300 किया गया है। मंत्रालय का कहना है कि इससे रोजगार बढ़ा है और छंटनियां कम हुई हैं।’’

:: अंतर्राष्ट्रीय समाचार ::

चीन ने दक्षिण-पूर्वी चीन सागर में बढ़ाईं आक्रामक गतिविधियां

  • कोरोना महामारी के प्रसार में अपनी भूमिका को छिपाने के लिए चीन ने दक्षिण और पूर्वी चीन सागर में आक्रामक गतिविधियां तेज कर दी हैं। चीन के इस कदम को अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान बंटाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
  • अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोंपियो ने गुरुवार को एक वीडियो कांफ्रेंस में आसियान नेताओं को इसका ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि दक्षिण चीन सागर में चीन की आक्रामक गतिविधियों से दुनिया को महामारी से निपटने में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। पोंपियो ने उस वैज्ञानिक रिपोर्ट पर भी चिंता जताई, जिसमें कहा गया है कि चीन द्वारा मेकांग नदी का प्रवाह बदलने से थाइलैंड, लाओस, वियतनाम और कंबोडिया में सूखे की आशंका उत्पन्न हो गई है।
  • हाल में जापान के विदेश मंत्री तोशिमिसु मोटेगी ने पूर्वी चीन सागर के सेनकाकू द्वीप समूह के पास जापानी जलक्षेत्र में चीन द्वारा जहाज भेजने पर विरोध दर्ज कराया था। चीन के जहाजों ने इस साल जापान के नियंत्रण वाले इस द्वीप समूह के जलक्षेत्र में सात बार घुसपैठ की। आखिरी बार उसने पिछले शुक्रवार को ही घुसपैठ की थी। चीन इस द्वीप समूह पर अपना दावा करता रहा है। जापान के अलावा फिलीपींस ने भी अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन और पश्चिमी फिलीपींस सागर में अपनी संप्रभुता को लेकर चीन के खिलाफ दो बार राजनयिक विरोध दर्ज कराया है।
  • क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच एक महीने में दूसरी बार अमेरिकी युद्धपोत संवेदनशील ताइवान स्ट्रेट (जलडमरूमध्य) से गुजरा है। इससे ताइवान और चीन के बीच तनाव बढ़ गया है। इस घटना के बाद एक चीनी विमान भी ताइवान के पास से गुजरा। दो सप्ताह पहले जब अमेरिकी युद्धपोत यूएसएस बैरी ताइवान स्ट्रेट से गुजरा था तो उसी दिन चीनी लड़ाकू विमान ताइवान के जलक्षेत्र के करीब युद्धाभ्यास कर रहे थे।

‘साम्यवादी चीन को रोको’ अभियान: निक्की हेली

  • अमेरिका में रिपब्लिकन पार्टी की नेता निक्की हेली ने इस बात पर जोर दिया है कि चीन की ‘‘साम्यवादी सरकार को कोरोना वायरस वैश्विक महामारी के बारे में झूठ बोलने” के लिए जिम्मेदार ठहराए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने एक ऑनलाइन याचिका पर हस्ताक्षर कराने का अभियान शुरू किया है जिसमें अमेरिकी संसद से इस मामले पर प्रतिक्रिया देने की अपील की गई है। ‘साम्यवादी चीन को रोको’ याचिका पर शुक्रवार रात तक 40,000 से ज्यादा लोग हस्ताक्षर कर चुके थे। भारतीय मूल की अमेरिकी नेता ने इस याचिका पर 1,00,000 हस्ताक्षर प्राप्त करने के लक्ष्य से अभियान शुरू किया है।
  • संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका की पूर्व राजदूत, 48 वर्षीय हेली ने कहा, “चीन की साम्यवादी सरकार को कोरोना वायरस वैश्विक महामारी के बारे में झूठ बोलने के लिए जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए और अमेरिकी संसद को अब प्रतिक्रिया देने की जरूरत है।” उन्होंने कहा, “चीन को अमेरिका और दुनिया भर में अपना प्रभाव कायम करने से रोकने की जंग में हमारे साथ शामिल हों। इस याचिका पर हस्ताक्षर करें और अपने दोस्तों के साथ भी इसे साझा करें।” इसके अलावा याचिका में सांसदों से इस बात की जांच करने की अपील की गई है कि क्या चीन ने कोरोना वायरस के प्रकोप पर पर्दा डालने की कोशिश की। साथ ही अहम चिकित्सीय आपूर्तियों एवं दवाओं के लिए चीन पर अमेरिका की निर्भरता को खत्म करने, चीन को अमेरिका को इसका भुगतान करने पर मजबूर करने और चीन के कारण परेशानी झेल रहे ताइवान का समर्थन करने का आग्रह किया गया है।

चीन ने म्यांमार से लगती सीमा बंद की

  • चीन ने म्यांमार से लगती अपनी सीमा बंद कर दी है। विद्रोही समूहों और म्यांमार की सेना के बीच हुए ¨हिंसक संघर्ष के चलते उसने यह कदम उठाया है। इस संघर्ष में चीन के युन्नान प्रांत का एक स्कूल और कुछ अन्य इमारतें भी क्षतिग्रस्त हुई हैं। कई वाहन भी जलकर राख हो गए।
  • दरअसल, सीमावर्ती इलाके में विभिन्न जातीय विद्रोही समूह स्वायत्तता के लिए म्यांमार की सेना से संघर्ष कर रहे हैं। इस संघर्ष के कारण चीन के युन्नान प्रांत में रहने वाले लोगों को भी परेशानी ङोलनी पड़ती है। संघर्ष के चलते म्यांमार के शरणार्थी चीनी इलाके में शरण लेने को मजबूर होते हैं। चीन के म्यांमार के सैन्य नेताओं से संबंध रहे हैं। लेकिन म्यांमार में चीन विरोधी भावनाएं भी कम नहीं हैं। मांडले जैसे देश के उत्तरी क्षेत्रों में यह भावना प्रमुख तौर पर देखी जा सकती है। चीन के लिए भौगोलिक रूप से म्यांमार बेहद अहम है। म्यांमार चारों ओर से जमीन से घिरे चीन के युन्नान प्रांत और हिंद महासागर के बीच पड़ता है। ऐसे में म्यांमार के जरिये चीन आसानी से हिंद महासागर तक पहुंच सकता है।

कश्मीरी आतंकियों को अफगानिस्तान भेज रहा पाकिस्तान: यूरोपियन थिंक टैंक

  • भारत के खिलाफ छद्म युद्ध में मुंह की खाने के बाद पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आइएसआइ ने अपनी रणनीति में बदलाव किया है। उसके निशाने पर अब अफगानिस्तान है और यहां पर हिंसक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए वह कश्मीरी आतंकियों का सहारा ले रही है। 25 मार्च को काबुल के गुरुद्वारे पर हुए हमले में आइएसआइ की भूमिका को बेनकाब करने वाले द यूरोपियन फाउंडेशन फॉर साउथ एशियन स्टडीज (ईएफएसएएस) ने अपनी रिपोर्ट में यह बात कही है।
  • रिपोर्ट के मुताबिक, 'अफगान राष्ट्रीय सुरक्षा निदेशालय (एनडीएस) ने बताया था कि आइएसकेपी (इस्लामिक स्टेट इन खोरासान प्रोविंस) के प्रमुख आतंकी अब्दुल्ला ओरकजई उर्फ असलम फारुकी को कुछ दिनों पहले उसके चार सहयोगियों के साथ गिरफ्तार किया गया था।' जांच में पता चला है कि उसके हक्कानी नेटवर्क और लश्कर-ए-तैयबा जैसे पाकिस्तान स्थित आतंकी गुटों से घनिष्ट संबंध हैं। इतना ही नहीं उसने यह भी कुबूल किया है कि उसके आइएसआइ के लिए काम करने वाली क्षेत्रीय खुफिया एजेंसियों से भी संबंध हैं।

:: भारतीय अर्थव्यवस्था ::

एमएसएमई को पांच फीसद ब्याज पर एक करोड़ तक का लोन

  • कोरोना से जंग में इस्तेमाल होने वाली वस्तुओं के उत्पादन के लिए स्माल इंडस्ट्रीज डेवलपमेंट बैंक ऑफ इंडिया (सिडबी) ने सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को मात्र पांच फीसद की ब्याज दर पर 50 लाख से एक करोड़ रुपये तक का कर्ज देने का प्रस्ताव रखा है। कर्ज लेने के लिए एमएसएमई को कोई गारंटी देने या गिरवी रखने की जरूरत नहीं होगी। इस कर्ज के लिए सिडबी कोई प्रोसेसिंग फीस भी नहीं ले रहा है और प्री-पेमेंट करने पर भी कोई अतिरिक्त चार्ज नहीं लिया जाएगा।
  • सिडबी के अधिकारियों ने बताया कि कोरोना के खिलाफ जारी लड़ाई में इस्तेमाल होने वाली वस्तुओं के उत्पादन के साथ इनसे जुड़ी सेवा मुहैया कराने वाली सभी एमएसएमई के लिए यह कर्ज उपलब्ध है। इन उत्पादों में मास्क, सैनिटाइजर, ग्लव्स, दवाइयां जैसी चीजें शामिल हैं। कोरोना के खिलाफ लड़ाई के दौरान एमएसएमई को दो प्रकार की स्कीम के तहत कर्ज दिए जा रहे हैं।

दो प्रकार की स्कीम

  • सेफ नामक पहली स्कीम के तहत 50 लाख रुपये तक के कर्ज उपलब्ध हैं,
  • सेफ प्लस के तहत एमएसएमई एक करोड़ तक का कर्ज ले सकती हैं।

मात्र 5 फीसद है ब्याज दर

  • दोनों ही स्कीम के तहत लिए जाने वाले कर्ज पर मात्र पांच फीसद का ब्याज देना होगा। कर्ज के लिए ऑनलाइन आवेदन करना होगा और मात्र 48 घंटे में कर्ज स्वीकृत हो जाएगा। कर्ज देने से पहले जरूरी जांच प्रक्रिया भी इलेक्ट्रॉनिक तरीके से पूरी की जाएगी। दोनों स्कीम के तहत कर्ज देने के लिए 100 करोड़ रुपये का फंड रखा गया है।

पात्रता की शर्तें

  • एमएसएमई भी इस स्कीम का लाभ ले सकती हैं, जिनका सिडबी से अब तक कोई नाता नहीं है। इस स्कीम के तहत कर्ज लेने की सिर्फ एक ही शर्त है कि उस एमएसएमई की बैलेंस शीट में कैश प्रॉफिट हो। जो सिडबी के पुराने ग्राहक हैं, उनकी बैलेंस शीट पिछले साल कैश प्रॉफिट में हो और सिडबी के साथ पहली बार जुड़ने वाली एमएसएमई की बैलेंस शीट में दो साल का कैश प्रॉफिट दिखना चाहिए।

सरकार छोटे दुकानदारों के लिए बनाएगी ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म

  • कोरोना संकट और लॉकडाउन के बीच देशभर में सामान आपूर्ति बनाए रखने के लिए सरकार ई-कॉमर्स पोर्टल बनाने की तैयारी में है। वाणिज्य मंत्रालय के औद्योगिक नीति एवं संवर्द्धन विभाग (डीपीआईआईटी) और कन्फेडरेशन ऑफ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) की योजना के तहत देशभर के करीब 7 करोड़ खुदरा कारोबारियों को पोर्टल से जोड़ने का लक्ष्य है।
  • कैट ने बताया कि डीपीआईआईटी की आपूर्ति शृंखला में काम करने वाली कंपनियों और स्टार्टअप के सहयोग से यह पोर्टल शुरू किया जाएगा। इस पर स्थानीय किराना स्टोर ऑनलाइन ऑर्डर लेकर ग्राहकों तक सामान की डिलीवरी करेंगे।
  • इस राष्ट्रीय अभियान में स्टार्टअप इंडिया, इनवेस्ट इंडिया, ऑल इंडिया कंज्यूमर प्रोडक्ट डिस्ट्रीब्यूटर्स फेडरेशन और अवाना कैपिटल शामिल हैं। पोर्टल पर उत्पाद निर्माता, वितरक, थोक विक्रेता, खुदरा विक्रेता और उपभोक्ताओं को एकसाथ ऑर्डर देने और आपूर्ति का मौका मिलेगा। कैट ने कहा कि वर्तमान में देश के टीयर 2 और 3 शहरों में सामान की आपूर्ति में कई चुनौतियां आ रही हैं। स्थानीय किराना स्टोर पर निर्भर इन उपभोक्ताओं तक जरूरी चीजों की पहुंच बनाने के लिए ही सरकार ने यह कदम उठाया है।

लॉकडाउन अवधि के दौरान किसानों और खेती के कार्यों की पहल

कृषि, सहकारिता और किसान कल्याण विभाग, भारत सरकार लॉकडाउन अवधि के दौरान किसानों और खेती के कार्यों को सरल बनाने के लिए अनेक उपाय कर रही है। इन कार्यों की अद्यतन स्थिति नीचे दी गई है:

  1. कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय ने 17.04.2020 को किसान रथ नाम का एक ऐप शुरू किया है जो किसानों और व्यापारियों की कृषि उत्‍पादों खाद्यान्‍न (अनाज, मोटा अनाज, दलहन आदि) से लेकर फल और सब्जियां, तिलहनों, मसाले, रेशे वाली फसलें, फूल, बांस, लठ्ठे और छोटे वनोत्‍पाद, नारियल आदि को पहुंचाने के लिए परिवहन की सही प्रणाली का पता लगाने में मदद करेगा। अब तक, कुल 80,474 किसान और 70,581 व्‍यापारी इस ऐप पर पंजीकृत हैं।
  2. पूर्ण लॉकडाउन के कारण, सभी थोक मंडियों को 25.03.2020 को बंद कर दिया गया था। भारत में 2587 प्रमुख/ मुख्य कृषि बाजार उपलब्ध हैं, जिनमें से 1091 बाजार 26.03.2020 को कार्य कर रहे थे। 23.04.2020 तक, 2067 बाजारों को काम करने लायक बनाया गया है।
  3. दलहन और तिलहन की न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य पर खरीद वर्तमान में बीस (20) राज्यों में चल रही है। नैफेड और एफसीआई 1,79,852.21 मीट्रिक टन दलहन और 1,64,195.14 मीट्रिक टन तिलहन खरीद चुके हैं जिसका मूल्‍य 1605.43 करोड़ रुपये आंका गया है, जिससे 2,05,869 किसान लाभान्वित हुए हैं।

ग्रीष्मकालीन फसलों का बुवाई वाला क्षेत्र:

  • चावल: पिछले वर्ष इसी अवधि के दौरान 25.22 लाख हेक्टेयर की तुलना में ग्रीष्‍मकालीन चावल का बुवाई वाला क्षेत्र लगभग 34.73 लाख हेक्टेयर है।
  • दलहन: पिछले वर्ष इसी अवधि के दौरान 3.82 लाख हेक्टेयर की तुलना में दालों की बुवाई वाला क्षेत्र लगभग 5.07 लाख हेक्टेयर है।
  • मोटा अनाज: मोटे अनाज के तहत पिछले वर्ष इसी अवधि के दौरान लगभग 5.47 लाख हेक्टेयर की तुलना में बुवाई वाला क्षेत्र 8.55 लाख हेक्टेयर है।
  • तिलहन: तिलहन के तहत पिछले वर्ष इसी अवधि के दौरान 6.80 लाख हेक्टेयर की तुलना में बुवाई वाला क्षेत्र लगभग 8.73 लाख हेक्टेयर है।

24.04.2020 को कटाई की स्थिति

  • गेहूं: जैसा कि राज्यों ने बताया है कि मध्य प्रदेश में लगभग 98-99% गेहूं की फसल काटी जा चुकी है, राजस्थान में 90-92%, उत्तर प्रदेश में 82-85%, हरियाणा में 50-55%, पंजाब में 45-50% और अन्य राज्यों में 86-88% फसल काटी जा चुकी है।

:: विज्ञान और प्रौद्योगिकी ::

चुंबकीय नैनोकण आधारित आरएनए निष्कर्षण किट: चित्रा मैग्ना

  • भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग(डीएसटी) के तहत राष्ट्रीय महत्व के संस्थान श्री चित्रा तिरुनल इंस्टीट्यूट फॉर मेडिकल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी (एससीटीआईएमएसटी) ने कोविड-19 के संक्रमण का पता लगाने के लिए एक नवीन तकनीक के रूप में आरएनए निष्कर्षण किट - चित्रा मैग्ना विकसित की है।
  • सार्स-सीओवी-2, कोविड-19 महामारी का विषाणु, सभी जीवित कोशिकाओं में मौजूद एक लंबा एकल- बहुलक पदार्थ है जो एक आरएनए विषाणु है। यह जीवन के लिए आवश्यक आनुवांशिक जानकारी वहन करता है। यह एक ऐसा विषाणु है जिसका निर्माण नाभिकीय अम्ल से होता है। इस विषाणु का पता लगाने के महत्वपूर्ण चरणों में से एक व्यक्तियों के गले या नाक से लिए गए स्वैब नमूने में आरएनए की उपस्थिति की पुष्टि करना है।एकत्र किए गए नमूने को निर्दिष्ट तरीके से परीक्षण प्रयोगशाला में ले जाया जाता है।
  • यह किट स्वैब के नमूनों से आरएनए को निकालने के लिए चुंबकीय नैनोकणों का उपयोग करती है। इसका सबसे बड़ा लाभ यह है कि यदि रोगी के एकत्र किए गए स्वैब नमूने इकठ्ठा कर रखने या कहीं ले जाते समय विघटित हो जाते हैं तो किट किट की चुंबकीय नैनोकण धारित निष्कर्षण तकनीक इन्हें एक जगह खींच लाती । चूंकि पीसीआर या एलएएमपी परीक्षण पर्याप्त मात्रा में आरएनए प्राप्त करने पर निर्भर है, यह नवाचार, कोविड-19 के पॉजिटिव मामलों की पहचान करने की संभावना को बढ़ाता है। संस्थान ने इस तकनीक के पेटेंट के लिए आवेदन किया है।
  • चित्रा मैग्ना का उपयोग न केवल एलएएमपी परीक्षण के लिए बल्कि आरटी-पीसीआर परीक्षण के लिए रोगी के नमूनों से उच्च शुद्ध स्तर के आरएनए के निष्कर्षण के लिए भी किया जा सकता है। कुछ भारत में निर्मित किटों को छोड़कर, अधिकांश आरएनए आइसोलेशन किट आयात किए जाते हैं, और  इनकी उनुबलब्धता अक्सर देश  में बड़ी संख्या में आरटी-पीसीआर परीक्षण के लिए एक गंभीर अड़चन बन जाती है।

कोविड-19 टीके का मानव परीक्षण

  • ब्रिटेन की एक सूक्ष्मजीव विज्ञानी का नाम इतिहास में दर्ज हो गया है। इस विज्ञानी को कोविड-19 टीके के मानव परीक्षण चरण में पहला टीका लगाया गया है। इस टीके को ब्रिटेन के ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने विकसित किया है।
  • इस टीके के मानव परीक्षण के लिए पहले चरण में आठ सौ लोगों का चयन किया गया है, जिसमें से एलिसा ग्रैनाटो को सबसे पहले यह टीका लगाया गया है। इस टीके पर पूरी दुनिया की निगाह टिकी है, खतरनाक कोरोना वायरस से बचाव के लिए इस टीके को बहुत बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। यह टीका शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करेगा, जिससे कोरोना वायरस से लड़ने में मदद मिलेगी।

रेमिडेसिविर दवा

  • अमेरिकी कंपनी गिलिएड साइंसेज की वायरस रोधी रेमिडेसिविर नामक दवा कोरोना पीड़ितों के इलाज में अपेक्षित परिणाम देने में नाकाम रही। इस दवा का चीन के अस्पतालों में क्लीनिकल परीक्षण चल रहा था। रिपोर्ट के अनुसार चीन में किए गए परीक्षण में पाया गया कि इस दवा से न तो कोरोना पीड़ितों की तबीयत में कोई सुधार हुआ और न ही उनके रक्त में मौजूद वायरस की तीव्रता में कोई कमी आई।
  • रिपोर्ट के अनुसार शोधकर्ताओ ने 237 मरीजों को अपने शोध में शामिल किया। इनमें 158 को यह दवा दी गई जबकि 79 को यह दवा नहीं दी गई। जिन मरीजों को यह दवा दी गई उनमें इस दवा के दुष्प्रभाव देखे जाने पर 18 मरीजों को यह दवा देना बंद कर दिया गया। चीन में किए गए इस शोध की रिपोर्ट से दवा बनाने वाली कंपनी गिलएड सहमत नहीं है।

वाइटल (वेंटिलेटर इंटरवेंशन टेक्नोलॉजी एक्सिसेबल लोकली) वेंटिलेटर

  • खास कोविड-19 के मरीजों के इलाज के लिए अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने एक नया कम कीमत का हाईप्रेशर वेंटिलेटर तैयार किया है। आसानी से तैयार किए जाने वाले इस उपकरण को नासा के इंजीनियरों ने वाइटल (वेंटिलेटर इंटरवेंशन टेक्नोलॉजी एक्सिसेबल लोकली) नाम दिया है। इससे हल्के लक्षण वाले मरीजों का इलाज किया जाएगा। नासा का बनाया वेंटिलेटर विगत 21 अप्रैल को नोवल कोरोना वायरस संक्रमण के केंद्र रहे न्यूयार्क के माउंट सिनाई स्थित इक्हान स्कूल ऑफ मेडिसिन में सभी टेस्ट में खरा उतरा है।

विशेषता

  • नासा ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका फूड एंड ड्रंग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) अब इस वेंटिलेटर के आपात इस्तेमाल के लिए इसकी समीक्षा कर रही है। वाइटल वेंटिलेटर से हल्के लक्षणों वाले मरीजों का इलाज किया जाएगा, ताकि अमेरिका में सीमित मात्रा में मौजूदा परंपरागत वेंटिलेटरों से कोरोना के गंभीर मरीजों के लिए सुरक्षित रखा जा सके। वाइटल वेंटिलेटर परंपरागत वेंटिलेटरों के मुकाबले काफी सस्ता है। वाइटल का निर्माण अपेक्षाकृत अधिक तेजी से हो सकेगा और इसमें कम उपकरणों की जरूरत पड़ती है। इसी कारण यह ज्यादा सस्ता पड़ता है।
  • नासा के इंजीनियरों ने इसे दक्षिणी कैलीफोर्निया स्थित नासा की जेट प्रपलजन लैबोरेट्री (जेपीएल) में तैयार किया है। सभी वेंटिलेटर की तरह वाइटल में भी मरीजों को बेहोश करके ऑक्सीजन की ट्यूब लगाई जाती है। इसका मकसद कम बीमार मरीजों को पहले ही ठीक करके उन्हें गंभीर अवस्था में पहुंचने से बचाना है। ताकि हालात और न बिगड़ें।

जीन थेरेपी और एंटी वायरल से कोरोना वायरस (कोविड-19) के इलाज की उम्मीद

  • कोरोना वायरस (कोविड-19) की काट खोजने के लिए इस समय पूरी दुनिया में कई उपचार और वैक्सीन को लेकर तेज गति से शोध हो रहे हैं। इसी प्रयास में शोधकर्ताओं को जीन थेरेपी और कुछ चुनिंदा एंटीवायरल दवाओं में कोरोना को मात देने की उम्मीद दिखी है। यह निष्कर्ष कई अध्ययनों की समीक्षा के आधार पर निकाला गया है।
  • फ्रंटियर्स इन माइक्रोबायोलॉजी जर्नल में प्रकाशित अध्ययन में नए कोरोना वायरस सार्स-कोवी-2 के साथ ही सार्स (सिवियर रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम ) की वजह बनने वाले सार्स-कोवी और मर्स (मिडिल ईस्ट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम) का कारण बनने वाले मर्स-कोवी वायरस का भी विश्लेषण किया गया। इनके अलावा कई ऐसे अज्ञात वायरसों पर भी गौर किया गया, जो आने वाले समय में खतरा बन सकते हैं।
  • अमेरिका की नॉर्थ कैरोलिना यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर राल्फ बेरिक ने कहा, 'कोरोना वायरस ने ना सिर्फ मानव स्वास्थ्य बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भी खतरा पैदा कर दिया है। हमें सबसे पहले सार्स-कोवी-2 महामारी को नियंत्रित करने के बारे में विचार करना चाहिए। इसी प्रयास में शोधकर्ता सार्स-कोवी-2 और संबंधित कोरोना वायरसों के खिलाफ उपचार के विकास पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।' अध्ययन के सह शोधकर्ता लांग पिंग विक्टर ने कहा, 'उपचार के त्वरित विकल्प के तौर पर एडीनो-एसोसिएटेड वायरस (एएवी) आधारित पैसिव इम्युनाइजेशन का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसकी एक खुराक से ही हफ्तेभर में सुरक्षात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिल सकती है।'

:: पर्यावरण और पारिस्थितिकी ::

दुर्लभ ग्लाइडिंग स्नेक : तक्षक सांप

  • बस्तर के वनों में दुर्लभ वन्य प्रजातियों का बसेरा है। पौराणिक हिंदू कथाओं में वर्णित तक्षक सांप इन्हीं में से एक है। तक्षक सांप दंतेवाड़ा जिले के बैलाडीला पहाड़ों पर मिलता है। यह हवा में 50-60 फीट तक छलांग लगा सकता है। इसकी खोज किरंदुल कालेज में जीव विज्ञान शास्त्र के प्राध्यापक रहे एचकेएस गजेंद्र ने कुछ साल पहले की थी। तक्षक सांप जगदलपुर के पास तीरथगढ़ जलप्रपात के इलाके में भी देखा गया है, पर बैलाडीला में अक्सर दिख जाता है।

पुराणों में उल्लेख

  • तक्षक का उल्लेख हिंदू पुराणों की एक कथा में मिलता है। इसके अनुसार श्रंगी ऋषि ने राजा परीक्षित को शाप दिया था कि उनकी मृत्यु तक्षक सांप के डसने से होगी। राजा परीक्षित की मौत के बाद उनके पुत्र जनमेजय ने सांपों से बदला लेने के लिए यज्ञ का आयोजन किया। यज्ञ कुंड में सांप आकर गिरने लगे। तब तक्षक राजा इंद्र की शरण में गया। यज्ञ करने वाले ब्राम्हण में तक्षक सांप की आहुति डाली तो तक्षक आकाश से यज्ञ में गिरने लगे। तब ऋषि आस्तीक ने अपने मंत्रों की शक्ति से तक्षक सांप को आकाश में ही रोककर स्थिर कर दिया।

गलाइडिंग स्नेक तक्षक से संबंधित तथ्य

  • तक्षक का वैज्ञानिक नाम कराइसोपेलिया आर्नेटा है। वैज्ञानिक भाषा में इसे ग्लाइडिंग स्नेक कहा जाता है। यह मांसपेशियों में हवा भर लेता है जिससे वजन हल्का हो जाता है। इसके बाद हवा से हवा में लंबी छलांग लगाता है। उड़ते या छलांग लगाते समय यह अपने शरीर को अंग्रजी के एस अक्षर के आकार में मोड़ देता है। बैलाडीला का रहवास इसके लिए अनुकूल है। गजेंद्र ने बताया कि तक्षक ठंडे शुष्क स्थलों पर पाए जाते हैं। ये विलुप्तप्राय प्रजातियों में शामिल हैं।
  • तक्षक सांप को विषैला तो नहीं कहा जा सकता पर यह विषहीन भी नहीं है। सरीसृप विज्ञानी सांपों को तीन वर्ग में बांटते हैं। अति विषैला, मध्यम विषैला और विषहीन। यह मध्यम विषैला श्रेणी का सांप है। इसके जहर के असर से मनुष्यों में हल्की निश्चेतना की अनुभूति तो होगी पर मृत्यु नहीं होगी। इसका जहर छोटे जंतुओं गिलहरी आदि पर गहरा असर करता है। अपने जहर का इस्तेमाल यह शिकार के लिए करता है।

2050 तक आर्कटिक से गायब हो जाएगी बर्फ: रिसर्च

  • साल 2050 तक आर्कटिक महासागर में दिखने वाली बर्फ गर्मियों में गायब हो जाएगी। वैज्ञानिकों के अनुसार आर्कटिक का औसत तापमान पहले ही 02 डिग्री सेल्सियस बढ़ चुका है। जिसकी वजह से दक्षिणी ध्रुव में जमी बर्फ की चादर तेजी से पिघल रही है। यह रिपोर्ट हाल ही में जर्नल जियोफिजिकल रिसर्च लेकर्स में पब्लिश हुई है। इसे दुनिया के 21 प्रमुख संस्थानों ने 40 अलग-अलग क्लाइमेट मॉडल्स की मदद से तैयार किया है

कुछ दशक में पूरी तरह खत्म हो जाएगी बर्फ़

  • रिसर्च के अनुसार, क्लाइमेट चेंज को रोकने के लिए कोई भी प्रयास इसे बदल नहीं सकता। यह लगभग तय है कि आने वाले दशकों के दौरान आर्कटिक की बर्फ़ गर्मियों में पूरी तरह खत्म हो जाएगी। हालांकि, एक्सपर्ट्स ने कहा है कि यह तय नहीं है कि आर्कटिक कितनी बार और कितने समय तक बर्फ़ मुक्त रहेगा। यह इस बात पर निर्भर करेगा कि क्लाइमेट चेंज को रोकने के लिए हमने किस तरह के प्रयास किए हैं।

कार्बन उत्सर्जन बड़ी वजह

  • इस अध्ययन से जुड़े जर्मनी की यूनिवर्सिटी ऑफ हैम्बर्ग के रिसर्चर के अनुसार बर्फ गायब होना तभी रुक सकता है, जब हम वैश्विक उत्सर्जन को तेजी से कम कर दें। अनुमान है कि दुनिया के पास अब केवल 1000 गीगा टन का कार्बन बजट शेष है। इसका मतलब यह है कि यदि हम इससे अधिक उत्सर्जन कर रहे हैं तो हम तापमान में हो रही वृद्धि को 02 डिग्री से नीचे नहीं रख पाएंगे।

2050 तक 10 लाख वर्ग किमी रह जाएगी बर्फ

  • इस रिसर्च के अनुसार, यदि हम इस उत्सर्जन को रोक भी दें, तो भी आर्कटिक को गर्मियों में बर्फ मुक्त होने से नहीं रोक पाएंगे। हम अपने पूरे कार्बन बजट को खर्च न भी करें तब भी रिसर्च के लिए किए गए 128 सिमुलेशन में से 101 बार यही बात सामने आई है कि आर्कटिक की बर्फ 2050 तक 10 लाख वर्ग किलोमीटर से भी कम रह जाएगी।

तेजी से पिघल रही बर्फ

  • नैशनल स्नो एंड आइस डाटा सेंटर की रिपोर्ट के अनुसार, मार्च 2020 में आर्कटिक समुद्र में बर्फ का क्षेत्रफल करीब 1.48 करोड़ वर्ग किलोमीटर मापा गया था। यह रेकॉर्ड के अनुसार 11वीं बार सबसे कम है। उत्तरी ध्रुव पूरे साल बर्फ से ढका रहता है। गर्मी में बर्फ़ में कमी जरूर आती है लेकिन सर्दियों में बर्फ फिर पहले जैसी हो जाती है। हाल के कुछ दशकों में क्लाइमेट चेंज की वजह से समुद्री बर्फ से ढका यह क्षेत्र तेजी से कम हो रहा है, जहां बर्फ तेजी से पिघल रही है।

विरूंगा नेशनल पार्क: डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो

  • डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो के विरुंगा नेशनल पार्क में गुरिल्ला और वहां की आबादी की सुरक्षा में लगे 12 रेजरों की रवांडा विद्रोही समूह के संदिग्ध सदस्यों ने हत्या कर दी। बीबीसी और स्थानीय मीडिया रिपोर्ट के अनुसार सरकारी अधिकारी कॉस्मा विलुंगुला ने कहा कि इस काफिले पर शुक्रवार को हमला किया गया। ये हमला इस जगह पर हाल के इतिहास में सबसे घातक हमला था।

विरूंगा नेशनल पार्क:

  • विरूंगा अफ्रीका का सबसे पुराना प्रकृति रिजर्व और एक लोकप्रिय पर्यटक केंद्र है, इसे खासकर पर्वत गोरिल्लाओं की आबादी के लिए भी जाना जाता है। ये पार्क यूनेस्को की ओर से विश्व धरोहर स्थल में भी शुमार है।
  • अफ्रीका के सबसे आश्चर्यजनक पार्कों में से एक है। अफ्रीका के सबसे विविध वन्य जीवों के लिए विरुंगा नेशनल पार्क को जाना जाता है। ये पार्क 7,800 वर्ग किमी (3,000 वर्ग मील) में फैला है। महाद्वीप पर सबसे खतरनाक पार्कों में से एक है। खतरे की सीमा इस तथ्य से परिलक्षित होती है कि 1,500 और 2,000 सशस्त्र सेनानियों के बीच डी मेरोड के अनुसार विरुंगा और इसके आसपास के क्षेत्रों में घूमते हैं। वे कई अलग-अलग विद्रोही समूहों से संबंधित हैं। क्षेत्र के समृद्ध संसाधनों के नियंत्रण के लिए लड़ाई लड़ते हैं। वे अवैध रूप से मछली मारते हैं, अपने जानवरों को मारते हैं, उसके पेड़ गिरते हैं और स्थानीय लोगों और विदेशियों को मारते, बलात्कार और अपहरण करते हैं। 

तस्करी समूह 

  • बीबीसी के अनुसार पिछले साल प्राकृतिक संसाधनों की तस्करी का अनुमान $ 170m (£ 125m) से अधिक था, जिसमें से ये मिलिशिया समूह लगभग $ 47m की तस्करी कर रहा है। तस्करी को रोकने के लिए ही रेंजर हमेशा यहां एलर्ट रहते हैं। यदि कहीं तस्कर दिखाई देते हैं तो उनकी रेंजरों के साथ मुठभेड़ हो जाती है जिसमें जानें जाती हैं। चूंकि तस्करी गुरिल्लाओं के तमाम अंगों की भी तस्करी करते हैं इस वजह से यदि उनको रेंजर्स से किसी तरह का खतरा लगता है तो वो उनको जान से मार देते हैं।
  • अवैध शिकार ने पार्क की बड़ी स्तनपायी आबादी को खत्म कर दिया। बुनियादी ढांचे को नष्ट कर दिया गया और कई रेंजर्स मारे गए। कांगोलेस वाइल्डलाइफ अथॉरिटी ने धीरे-धीरे विरुंगा का नियंत्रण खो दिया और यूनेस्को ने वर्ल्ड हेरिटेज साइट का दर्जा बदलकर लुप्तप्राय कर दिया। 

अंटार्कटिका में मिले मेंढ़क के 4 करोड़ साल पुराने अवशेष

  • अंटार्कटिका में रीसर्चर्स को एक मेंढ़क के 4 करोड़ साल पुराने अवशेष मिले हैं। माना जा रहा है कि यह ऐसा वक्त था जब इस क्षेत्र का क्लाइमेट बिलकुल ही अलग हुआ करता था। ये अवशेष सीमोर आइलैंड पर मिले जो अंटार्कटिका के पेनिनसुला (प्रायद्वीप) क्षेत्र पर दक्षिण अमेरिका के सबसे नजदीक है। इस टीम को मेंढ़क के खोपड़ा और कूल्हे की हड्डी मिली है। इन मेंढ़कों को हेल्मेटेड (Helmeted) फ्रॉग कहते थे।

पहले कितना ठंडा था

  • ये अभी भी साउथ अमेरिका में पाए जाते हैं जहां तापमान गर्म और नम होता है। ऐसा बहुत मुश्किल है कि ये मेंढ़क अंटार्कटिका में आज के तापमान में जिंदा रह जाए लेकिन इस खोज से पता चलता है कि अंटार्कटिका में कितने साल तक टेंपरेट पीरियड रहा। स्वीडिश म्यूजिय्म ऑफ नैचरल हिस्ट्री की ओर से की गई इस स्टडी के को-लीडर थॉमस के मुताबिक अब सवाल यह है कि अंटार्कटिका पहले कितना ठंडा था और वहां जब बर्फ की शीट बननी शुरू हुई तो वहां क्या रहता था।

पहले होते थे अलग जीव

  • कम से कम मेंढ़क के अवशेष मिलने से यह कहा जा सकता है कि वहां रेंगने वाले जीव (reptiles) और उभयचर (amphibian) रहते होंगे। उस वक्त इस क्षेत्र में आज के न्यूजीलैंड जैसे रेनफॉरेस्ट हुआ करते थे। इनमें आज के अंटार्कटिका से काफी अलग जीव रहते थे।

:: विविध ::

संजय कोठारी बने नए केंद्रीय सतर्कता आयुक्त

  • राष्ट्रपति के सचिव संजय कोठारी को शनिवार को केंद्रीय सतर्कता आयुक्त नियुक्त किया गया। राष्ट्रपति भवन से जारी एक विज्ञप्ति में यह जानकारी दी गई। देश की भ्रष्टाचार रोधी सर्वोच्च संस्था केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) के प्रमुख का पद के. वी. चौधरी का कार्यकाल पूरा होने के बाद पिछले साल जून से रिक्त था।

क्या होता है केंद्रीय सतर्कता आयुक्त

  • केंद्रीय सतर्कता आयुक्त देश की भ्रष्टाचार रोधी सर्वोच्च संस्था केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) का प्रमुख होता है।  केंद्रीय सतर्कता आयुक्त की नियुक्ति राष्ट्रपति एक चयन समिति की सिफारिश पर करते हैं जिसके अध्यक्ष प्रधानमंत्री हैं और गृह मंत्री तथा लोकसभा में विपक्ष के नेता इसके सदस्य होते हैं।सीवीसी प्रमुख का कार्यकाल चार वर्ष का या इसके मौजूदा प्रमुख की 65 वर्ष की आयु होने तक का होता है। सीवीसी में केंद्रीय सतर्कता आयुक्त और दो सतर्कता आयुक्त हो सकते हैं।

:: प्रिलिम्स बूस्टर ::

  • हाल ही में चर्चा में रहे ‘सेनकाकू द्वीप समूह’ को लेकर किन देशों के मध्य विवाद है? (चीन और जापान)

  • प्रति वर्ष विश्व मलेरिया दिवस किस तिथि को मनाया जाता है एवं वर्ष 2020 की कैंपेन थीम क्या है? (25 अप्रैल, “Zero malaria starts with me”)

  • भारत के द्वारा किस तिथि तक क्रमशः भारत को मलेरिया मुक्त एवं मलेरिया के जड़ से खात्मे का लक्ष्य रखा गया है? (मलेरिया मुक्त- 2027,  मलेरिया का जड़ से खात्मा-2030)

  • चर्चा में रहे यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल में शामिल और गोरिल्लाओं की आबादी के लिए प्रसिद्ध, ‘विरुंगा नेशनल पार्क’  किस देश में अवस्थित है? (डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो)

  • हाल ही में चर्चा में रहे विलुप्त प्रजातियों में शामिल ‘तक्षक’ किस जीव का नाम है? (भारत में पाए जाने वाले ग्लाइडिंग स्नेक- उड़ने वाली सर्प)

  • चर्चा में रहे लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी द्वारा विकसित सोशल डिस्टेंसिंग का पालन सुनिश्चित करने वाली मोबाइल ऐप का क्या नाम है? (कवच)

  • हर राज्य और हर जिले में कोरोना संक्रमण की स्थिति की विस्तृत जानकारी उपलब्ध करवाने के लिए वेब आधारित किस डैशबोर्ड को विकसित किया गया है? (प्रकृति-PRACRITI)

  • औद्योगिक संबंध संहिता, 2019 पर अपना प्रतिवेदन देने से चर्चा में रही श्रम पर संसदीय समिति के अध्यक्ष कौन है? (भर्तुहरि महताब-बीजू जनता दल)

  • चर्चा में रहे कृषि उत्पादों के परिवहन और परिवहन प्रणाली का पता लगाने के लिए सरकार द्वारा प्रारंभ किए गए ऐप का क्या नाम है? (किसान रथ)

  • हाल ही में चर्चा में रहे ‘आरएनए निष्कर्षण किट - चित्रा मैग्ना’ क्या है? (कोविड-19 के संक्रमण का पता लगाने के लिए नवीनतम तकनीक)

  • हाल ही में किसे केंद्रीय सतर्कता आयुक्त के रूप में नियुक्ति दी गई है एवं केंद्रीय सतर्कता आयुक्त की चयन समिति में कौन शामिल होते हैं? (संजय कोठारी, प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और लोकसभा में विपक्ष के नेता)

  • हाल ही में किसके द्वारा ‘साम्यवादी चीन को रोको’ ऑनलाइन याचिका पर हस्ताक्षर का अभियान शुरू किया गया है? (निक्की हेली, अमेरिका)

  • हाल ही में किस वित्तीय संस्था के द्वारा बिना गारंटी के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों को मात्र पांच फीसद की ब्याज दर पर 50 लाख से एक करोड़ रुपये तक का कर्ज देने का प्रस्ताव रखा है? (SIDBI)

  • ब्रिटेन में कोविड-19 टीके के मानव परीक्षण चरण में पहला टीका लगाए जाने से चर्चा में रहे सूक्ष्मजीव वैज्ञानिक कारण क्या नाम है? (एलिसा ग्रैनाटो)

 

 

 

स्रोत साभार: Dainik Jagran (Rashtriya Sanskaran), Dainik Bhaskar (Rashtriya Sanskaran), Rashtriya Sahara (Rashtriya Sanskaran) Hindustan Dainik (Delhi), Nai Duniya, Hindustan Times, The Hindu, BBC Portal, The Economic Times (Hindi & English), PTI, PIB

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