(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (24 जून 2020)

दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर


(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (24 जून 2020)


:: राष्ट्रीय समाचार ::

उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए 'युक्ति 2.0' पहल

चर्चा में क्यों

  • हाल ही में केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री, श्री रमेश पोखरियाल 'निशंक' ने 'युक्ति 2.0' पहल की शुरुआत की है।

क्या है 'युक्ति 2.0'?

  • उच्च शिक्षण संस्थानों में व्यावसायिक क्षमता और इनक्यूबेटेड स्टार्टअप से संबंधित सूचनाओं को व्यवस्थित करने में सहायता प्रदान करने के लिए 'युक्ति 2.0' पहल की शुरुआत की गयी है।
  • इससे पहले 11 अप्रैल, 2020 को युक्ति (यंग इंडिया कॉम्बेटिंग कोविड विद नॉलेज, टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन)) वेब पोर्टल का शुभारंभ किया था। मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने कोरोना वायरस को ध्यान में रखते हुए इस पोर्टल तैयार किया था। पोर्टल का उद्देश्य बहुत ही समग्र और व्यापक तरीके से कोविड -19 चुनौतियों के विभिन्न आयामों को कवर करना है।
  • इस पोर्टल के माध्यम से मानव संसाधन विकास मंत्रालय यह सुनिश्चित करने का प्रयास करेगा कि उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रों, शिक्षकों और शोधकर्ताओं को अपनी प्रौद्योगिकियों और नवाचारों को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक जरूरतों को पूरा करने के लिए उचित सहायता मिल रही है।
  • युक्ति 2.0 कोविड महामारी में प्रासंगिक विचारों की पहचान करने के लिए एमएचआरडी की पहल 'युक्ति' के पूर्व संस्करण का तार्किक विस्तार है। युक्ति 2.0 जैसी पहल हमारे शैक्षणिक संस्थानों में नवाचार और उद्यमिता की संस्कृति को बढ़ावा देने में भी सहायता प्रदान करेगी।

युक्ति 2.0 के लाभ

  • यह डाटाबेस हमारे उच्च शिक्षण संस्थानों में नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र की स्थिति का स्पष्ट तस्वीर प्रस्तुत करेगा। इससे सरकार को समस्याओं की पहचान करने और देश में नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूती प्रदान करने के लिए उचित नीतियां बनाने में भी सहायता मिलेगी।
  • यह पोर्टल उच्च शिक्षा प्रणाली में नवाचारों और उद्यमिता संस्कृति को बढ़ावा देने और राष्ट्र निर्माण में युवाओं को शामिल करने की दिशा में मददगार साबित होगा।
  • 'युक्ति 2.0' भी उच्च और तकनीकी संस्थानों से कई और समाधानों की पहचान करने में सहायता प्रदान करेगा।
  • युक्ति 2.0 अभिनव आविष्कारों को स्टार्टअप के जरिये निवेशकों के साथ जोड़कर उच्च शिक्षा अभिनव प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा दिया जा सके।

जल विमान परियोजना

चर्चा में क्यों?

  • जहाजरानी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)श्री मनसुख मंडावियाने भारतीय जल क्षेत्र में जल विमान परियोजनाओं की समीक्षा की।

जल विमान परियोजनाओं के बारे में

  • जल विमान परियोजनाएं देश के लंबे, जोखिम भरे और पहाड़ी क्षेत्रों में तेजी से और अबाधित यात्रा का विकल्प प्रदान करेंगी। अब तक उड़ान (यूडीएएन) योजना के क्षेत्रीय कनेक्टिविटी मार्गों के तहत 16 जल विमान मार्गों को चिह्नित किया गया है। इन 16 जल विमान मार्गों में साबरमती और सरदार सरोवर- स्टैच्यू ऑफ यूनिटी मार्ग भी शामिल हैं और इस मार्ग का हाइड्रोग्राफिक सर्वेक्षण पूरा हो चुका है।
  • विस्तृत विचार-विमर्श के बादसागरमाला विकास कंपनी लिमिटेड (एसडीसीएल)और भारतीय अंतर्देशीय जल मार्ग प्राधिकरण (आईडब्ल्यूएआई)को अक्टूबर, 2020 तक साबरमती और स्टैच्यू ऑफ यूनिटी मार्ग पर जल विमान का संचालन शुरू करने के लिए आपस में सहयोग करने का निर्देश दिया। भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण की ओर से आईडब्ल्यूएआई द्वारा जल विमान मार्गों का बाथीमीट्रिक और हाइड्रोग्राफिक सर्वेक्षण सितंबर,2020 तक किया जाना है।

जल विमान परियोजना का प्रबंधन

  • भारतीय अंतर्देशीय जल मार्ग प्राधिकरण (आईडब्ल्यूएआई)अंतर्देशीय जलमार्ग में जल विमान की परियोजना का प्रबंधन करेगा और सागरमाला विकास कंपनी लिमिटेड (एसडीसीएल)तटीय क्षेत्रों में जल विमान की परियोजनाओं का प्रबंधन करेगा। आईडब्ल्यूएआई और एसडीसीएल शिपिंग मंत्रालय,उड़ान ऑपरेटरों और पर्यटन मंत्रालय के साथ-साथ नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए)के साथ समन्वय करेंगे।

:: अंतर्राष्ट्रीय समाचार ::

चीन मीडिया संस्थानों को US ने दिया विदेशी मिशन का दर्जा

  • अमेरिका ने चीन के चार और मीडिया संस्थानों को विदेश मिशन का दर्जा दिया है। प्रशासन ने कहा है कि ये चारों मीडिया संस्थान अनिवार्य रूप से चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के मुखपत्र हैं और इनका उपयोग दुष्प्रचार के लिए किया जाता है, ऐसे में इन्हें सामान्य विदेशी मीडिया की तरह नहीं माना जाना चाहिए। जिन चार संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई की गई है, वह चाइना सेंट्रल टेलीविजन, चाइना न्यूज सर्विस, द पीपुल्स डेली और द ग्लोबल टाइम्स हैं।
  • इन संस्थाओं को विदेशी मिशन का दर्जा देने का निर्णय इन संस्थाओं द्वारा प्रकाशित की गई सामग्री पर आधारित नहीं है। इन संस्थाओं पर इस प्रकार का भी कोई प्रतिबंध नहीं होगा कि वह क्या प्रकाशित करें। हालांकि विदेश मिशन का दर्जा पाने के बाद इन संस्थानों को विदेशी दूतावास और वाणिज्य दूतावासों की तरह कुछ प्रशासनिक जरूरतों का पालन करना होगा।
  • इससे पहले 18 फरवरी को अमेरिका ने चीन के पांच मीडिया संस्थानों (सिन्हुआ समाचार एजेंसी, चाइना ग्लोबल टेलीविजन नेटवर्क, चाइना रेडियो इंटरनेशनल, चाइना डेली डिस्ट्रीब्यूशन कारपोरेशन और हाई तियान डेवलपमेंट यूएसए) को विदेशी मिशन का दर्जा दिया था। यही नहीं, अमेरिका में काम कर रहे चीनी पत्रकारों की संख्या भी सीमित कर दी थी। इसके बाद चीन ने अमेरिका के कई पत्रकारों को देश छोड़कर जाने के लिए कह दिया था।

पाकिस्तान हाई कमीशन में कर्मियों की संख्या आधी करेगा भारत

  • भारत सरकार ने नई दिल्ली में स्थित पाकिस्तान के उच्चायोग में कर्मचारियों की संख्या आधी करने का फैसला लिया है। विदेश मंत्रालय की ओर से इस संबंध में कहा गया कि भारत सरकार ने पाक उच्चायोग में कर्मचारियों की संख्या 50 फीसदी घटाने का निर्णय किया है। भारत भी इस्लामाबाद स्थित भारतीय उच्चायोग में अपने कर्मचारियों की संख्या में उसी अनुपात में कमी करेगा।

पृष्ठभूमि

  • पाकिस्तान के उपराजदूत को बुलाया गया था और उनसे कहा गया कि भारत उनके उच्चायोग में कार्यरत कर्मचारियों की गतिविधियों को लेकर लगातार चिंता जताता रहा है। भारत की ओर से पाकिस्तान के वरिष्ठ अधिकारियों से कहा गया है कि पाक हाईकमीशन के अधिकारी जासूसी और आतंकी संगठनों से तालमेल बनाए रखते हैं। वह जासूसी और आतंकी संगठनों के साथ गतिविधियों में लिप्त रहे हैं। उदाहरण के तौर पर 31 मई को दो पाकिस्तान अधिकारी रंगे हाथ पकड़े गए थे। जिन्हें देश से बाहर किया गया था।

H1B वीजा

चर्चा में क्यों?

  • मेरिका में काम करने की इच्छा रखनेवाले भारतीयों को डॉनल्ड ट्रंप सरकार ने बड़ा झटका दिया है। ट्रंप ने H1B के साथ-साथ अन्य तरह के कामकाजी वीजा का सस्पेंशन फिलहाल इस साल के अंत तक के लिए आगे बढ़ा दिया है। मिली जानकारी के मुताबिक, अमेरिका की ट्रंप सरकार ने H1B, L1 और अन्य अस्थाई कामकाजी वीजा को सस्पेंड कर दिया है। यानी जिन आईटी वाले लोगों का H1B वीजा अप्रैल लॉटरी में अप्रूव हो गया था उन्हें भी अब आने की इजाजत नहीं होगी।

क्या है H1B वीजा?

  • दरअसल H-1B Visa अमेरिकी सरकार द्वारा प्रदान एक ऐसी अनुमति होती है जिसके माध्यम से अमेरिकी व अन्य कंपनियाँ अमेरिका में चल रहे अपने उद्योगों के लिये बहुत ही कुशल एवं दक्ष कर्मचारियों को नौकरी पर रखती हैं।
  • H-1B Visa एक प्रकार का Non-immigrant Visa होता है जो केवल 6 वर्षों के लिये ही मान्य होता है।
  • H-1B Visa का प्रयोग कंपनियाँ विदेशी कर्मचारियों को अपने रिक्त पदों को भरने के लिये प्रयोग करती हैं।
  • इस Visa की खास बात यह हैं कि वीजा धारक अमेरिका में Permanent Residency यानि स्थाई नागरिकता के लिये आवेदन कर सकता है साथ ही उसे अमेरिका में सम्पत्ति खरीदने व बेचने का भी अधिकार होता है।

इस्लामी सहयोग संगठन है (Organisation of Islamic Cooperation)

चर्चा में क्यों?

  • मुस्लिम देशों के सबसे बड़े मंच ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कॉपरेशन यानी ओआईसी ने सोमवार को कश्मीर को लेकर आपातकालीन बैठक की। जम्मू-कश्मीर को लेकर 1994 में बनाए गए ओआईसी की कॉन्टैक्ट ग्रुप के विदेश मंत्रियों की बैठक में भारत को लेकर कई प्रस्ताव पारित किए गए। हालांकि इस संगठन के अगुवा सऊदी अरब ने कोई सार्वजनिक बयान नहीं दिया।
  • ओआईसी के कॉन्टैक्ट ग्रुप के विदेश मंत्रियों की आपातकालीन बैठक में अजरबैजान, नाइजीरिया, पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की शामिल हुए। ओआईसी के महासचिव डॉक्टर यूसुफ अल-ओथइमीन ने कहा कि ओआईसी इस्लामी समिट, विदेश मंत्रियों की काउंसिल और अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार जम्मू-कश्मीर के मुद्दे का शांतिपूर्ण समाधान निकालने को लेकर प्रतिबद्ध है।
  • वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई बैठक में ओआईसी के सदस्य देशों ने भारत के खिलाफ कड़ा रूख अख्तियार करते हुए कहा कि वे कश्मीर के लोगों के आत्मनिर्णय के अधिकार का समर्थन करते हैं। इसके अलावा इस बैठक में भारत के 5 अगस्त 2019 को जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 खत्म करने की भी आलोचना की गई। इतना ही नहीं ओआईसी ने पाकिस्तान की चाल में फंसते हुए भारत पर मानवाधिकार के उल्लंघन को लेकर जारी रिपोर्ट का समर्थन किया।

क्या है OIC?

  • OIC का पूरा नाम इस्लामी सहयोग संगठन (Organisation of Islamic Cooperation) है।
  • OIC का इससे पहले नाम Organisation of Islamic Countries था।
  • OIC मुस्लिम दुनिया की आवाज़ का प्रतिन्धित्व करने के लिए जाना जाता है।
  • संयुक्त राष्ट्र के बाद ये दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा संगठन है।
  • OIC के कुल 57 सदस्य देश हैं, जिनमें क़रीब 47 देश मुस्लिम बहुल और बाकी 10 देशों में मुस्लिम अल्पसंख्यक हैं।
  • OIC का मुख्यालय सऊदी अरब के जेद्दाह में है एवं इसकी स्थापना 1969 में हुई थी।
  • OIC में शामिल होने के लिए किसी भी देश को मुस्लिम बाहुल्य देश होना ज़रूरी होता है।
  • OIC कम मुस्लिम आबादी वाले देशों को पर्यवेक्षक के रूप में शामिल हो सकते हैं।

:: अर्थव्यवस्था ::

गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM)

चर्चा में क्यों

  • वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के तहत एक स्पेशल पर्पस व्हीकल, गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (जीईएम) ने विक्रेताओं के लिए यह अनिवार्य बना दिया है कि जीईएम पर सभी नए उत्पादों को पंजीकृत करने के समय वे उत्पत्ति के देश के बारे में जानकारी अवश्य दें। जीईएम ने यह उल्लेखनीय कदम 'मेक इंन इंडिया' तथा 'आत्म निर्भर भारत' को बढ़ावा देने के लिए उठाया है।

क्या बदलाव किये गए है?

  • विक्रेताओं के लिए यह अनिवार्य बना दिया है कि जीईएम पर सभी नए उत्पादों को पंजीकृत करने के समय वे उत्पत्ति के देश के बारे में जानकारी अवश्य दें।
  • जिन विक्रेताओं ने जीईएम पर इस नए फीचर के लागू होने से पूर्व अपने उत्पादों को पहले ही अपलोड कर लिया है, उन्हें, इस चेतावनी के साथ कि अगर वे इसे अपडेट करने में विफल रहे तो उनके उत्पादों को जीईएम से हटा दिया जाएगा, नियमित रूप से उत्पत्ति के देश का अद्यतन करने के लिए स्मरण दिलाया जा रहा है।
  • जीईएम ने उत्पादों में स्थानीय कंटेंट की प्रतिशतता का संकेत देने के लिए भी एक प्रावधान किया है। इस नए फीचर के साथ, अब उत्पत्ति का देश तथा स्थानीय कंटेंट की प्रतिशतता सभी मदों के लिए मार्केटप्लेस में दृष्टिगोचर हैं।
  • अब पोर्टल पर 'मेक इंन इंडिया' फिल्टर सक्षम बना दिया गया है। खरीदार केवल उन्हीं उत्पादों की खरीद कर सकता है जो कम से कम 50 प्रतिशत के स्थानीय कंटेंट के मानदंड को पूरी करते हैं।
  • बोलियों के मामले में, खरीदार अब क्लास 1 स्थानीय आपूर्तिकर्ताओं (स्थानीय कंटेंट >50 प्रतिशत) के लिए किसी भी बोली को आरक्षित कर सकते हैं।
  • 200 करोड़ रुपये से नीचे की बोलियों के लिए केवल क्लास 1 तथा क्लास 2 स्थानीय आपूर्तिकर्ता (स्थानीय कंटेंट क्रमशः >50 प्रतिशत और >20 प्रतिशत) ही बोली लगाने के पात्र हैं जिसमें क्लास 1 आपूर्तिकर्ता को खरीद वरीयता प्राप्त होगी।
  • सरकारी उपयोगकर्ताओं द्वारा जीईएम के माध्यम से खरीदों को वित मंत्रालय द्वारा सामान्य वित्तीय नियम, 2017 में एक नए नियम संख्या 149 को जोड़े जाने के जरिये अधिकृत और अनिवार्य बना दिया है।

GeMक्या है?

  • GeMएक आधुनिक व स्टेट ऑफ़ आर्ट से से बना राष्ट्रीय खरीददारी मंच अर्थात् National Public Procurement Platform है।
  • इसे वाणिज्य व उद्योग मंत्रालय द्वारा संचालित किया जाता है।
  • इसका मुख्य उद्देश्य संभावित विक्रेताओं को एक ऐसा आधुनिक और सुविधाजनक मंच प्रदान करना है जिससे वे अपने उत्पादों को सरकार की आवश्यकता अनुसार बिना किसी रुकावट के उपलब्ध करा सकें।

क्या है GeMके लाभ?

  • यह पारदर्शिता बढ़ाता है जिससे खरीददारी में भ्रष्टाचार या ऐच्छिक गतिविधियों को कम किया जा सकता है।
  • यह खरीददारी व्यवस्था को और प्रभावी बनाता है जिससे कम समय में बेहतर ढ़ंग से सार्वजनिक खरीददारियों को पूरा किया जाता है। एवं सरकारी समय या धन को बचाया जा सकता है।
  • यह सार्वजनिक खरीददारी प्रक्रिया को सुरक्षित व नियमित बनाता है।
  • यह वित्तीय पारदर्शिता से सरकारी खजाने की बचत को भी बढ़ाता है।

तुरंत कस्टम्स कार्यक्रम

चर्चा में क्यों

  • केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर औरसीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी)द्वारा “तुरंत कस्टम्स” कार्यक्रम के तहत पेपरलेस निर्यात की सुविधा प्रदान की गई है।

क्या है तुरंतकस्टम्सकार्यक्रम?

  • “तुरंत कस्टम्स” पहल का मुख्य घटक फेसलेस असेसमेंट है जिसको विभिन्न चरणों में 1 जनवरी 2021 तक पूरे देश में लागू किया जाएगा। इस कार्यक्रम के अंतर्गत, आयातकों के सामान का क्लीयरेंस फेसलेस, कांटेक्टलेस और पेपरलेस हो जायेगा।
  • इस कार्यक्रम के द्वारा किये गए सुधार का मुख्य बल आयातकों, निर्यातकों और अन्य हितधारकों के लिएसमय और लागत को कम करने के लिए डिजिटल प्रौद्योगिकी के उन्नत उपयोग पर आधारित हैं।
  • इससेवर्ल्ड बैंक के डूइंग बिजनेस रिपोर्ट के सीमा-पार व्यापार मानकों के सन्दर्भ मेंभारत की रैंकिंग मेंऔर भी सुधारहो सकेगा।
  • निर्यातके लिए पेपरलेस दस्तावेज का शुभारंभ इसी की अगलीकड़ी है।शिपिंगबिल को इलेक्ट्रॉनिक रूप में भेजने से इन दस्तावेजों को कागज में प्रस्तुत करने कीवर्तमान आवश्यकता दूर हो जायेगी, जिससे ग्रीनकस्टम्स कोभी बढ़ावा मिलेगा।

केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर औरसीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी)

  • केन्द्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) वित्त मंत्रालय, भारत सरकार के राजस्व विभाग के अंतर्गत कार्य करता है।
  • यह सीमा शुल्क, सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी, सर्विस टैक्स, नारकोटिक्स और जीएसटी के अधिग्रहण और संग्रह के कार्यों से संबंधित नोडेल एजेंसी है।

पीएम केयर्स फंड

चर्चा में क्यों?

  • पीएम केयर्स फंड ट्रस्ट ने सभी राज्यों/ संघ शासित क्षेत्रों में सरकार द्वारा चलाए जा रहे कोविड अस्पतालों को 50,000 'मेड इन इंडिया' वेंटिलेटर की आपूर्ति के लिए 2,000 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। इसके अलावा प्रवासी कामगारों के कल्याण के लिए 1,000 करोड़ रुपये की धनराशि आवंटित की गई है।
  • 50,000 वेंटिलेटर में से 30,000 वेंटिलेटर एम/एस भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड द्वारा बनाए जा रहे हैं। बाकी 20,000 वेंटिलेटर एग्वा हैल्थकेयर (10,000), एएमटीजेड बेसिक (5,650), एएमटीजेड हाई एंड (4,000) और एलायड मेडिकल (350) द्वारा बनाए जा रहे हैं। अभी तक 2,923 वेंटिलेटर बनाए जा चुके हैं, जिनमें से 1,340 वेंटिलेटरों की आपूर्ति राज्यों/ संघ शासित क्षेत्रों को कर दी गई है।
  • इसके अलावा प्रवासी कामगारों के कल्याण के लिए राज्यों/ संघ शासित क्षेत्रों को 1,000 करोड़ रुपये की धनराशि पहले ही जारी की जा चुकी है। सभी राज्यों/ संघ शासितक्षेत्रों को 2011 की जनसंख्या के लिए 50 प्रतिशत भार, पॉजिटिव कोविड-19 मामलों की संख्या के लिए 40 प्रतिशत भार और सभी को समान रूप से 10 प्रतिशत के फॉर्मूले के आधार पर कोष का वितरण किया गया है। इस सहायता को प्रवासियों के आश्रय, खाना, चिकित्सा उपचार और परिवहन की व्यवस्था में उपयोग किया जाना है।

क्या है पीएम केयर्स फंड?

  • कोविड-19 महामारी जैसी किसी भी तरह की आपातकालीन या संकट की स्थिति से निपटने के प्राथमिक उद्देश्य के साथ एक समर्पित राष्ट्रीय निधि की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए और उससे प्रभावित लोगों को राहत प्रदान करने के लिए 'आपात स्थितियों में प्रधानमंत्री नागरिक सहायता और राहत कोष (पीएम केयर्स फंड)' के नाम से एक सार्वजनिक धर्मार्थ ट्रस्ट बनाया गया है।

उद्देश्य:

  • संकट की स्थिति, चाहे प्राकृतिक हो या कोई और, में प्रभावित लोगों की पीड़ा को कम करने और बुनियादी ढांचागत सुविधाओं एवं क्षमताओं को हुए भारी नुकसान में कमी/नियंत्रण करने, इत्यादि के लिए त्‍वरित अवसंरचना और संस्थागत क्षमता के पुनर्निर्माण/विस्‍तार के साथ-साथ त्वरित आपातकालीन कदम उठाना और सामुदाय की प्रभावकारी सुदृढ़ता के लिए क्षमता निर्माण करने हेतु।
  • प्रभावित लोगों को वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए, पैसे के भुगतान हेतु अनुदान प्रदान करने या ऐसे अन्य कदम उठाने के लिए पैसे के भुगतान के लिए न्यासी बोर्ड द्वारा आवश्यक समझा जा सकता है।

ट्रस्ट की संरचना:

  • प्रधानमंत्री, PM CARES कोष के पदेन अध्यक्ष और रक्षा मंत्री, गृह मंत्री और वित्त मंत्री, निधि के पदेन ट्रस्टी होते हैं।प्रधानमंत्री के पास 3 ट्रस्टीज को बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज में नामित करने की शक्ति होगी जो अनुसंधान, स्वास्थ्य, विज्ञान, सामाजिक कार्य, कानून, लोक प्रशासन और परोपकार के क्षेत्र में प्रतिष्ठित व्यक्ति होंगे।
  • ट्रस्टी नियुक्त किया गया कोई भी व्यक्ति निशुल्क रूप से कार्य करेगा।

:: विज्ञान और प्रौद्योगिकी ::

इम्यूनिटी बूस्टरहर्बल चाय

चर्चा में क्यों

  • राष्ट्रीय औषधीय शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (नाईपर) ने कोविड महामारी से लड़ने के लिए सुरक्षा उपकरण, सैनिटाइज़र और मास्क जैसे कई अभिनव उत्पाद पेश किए हैं। साथ ही इसने संक्रमण के खिलाफ शारीरिक प्रतिरोध को मजबूत करने के लिए रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढाने वाली (इम्यूनिटी बूस्टर) हर्बल चाय को भी पेश किया है।
  • रसायन और उर्वरक मंत्रालय के फार्मास्यूटिकल विभाग के तत्वावधान में नाईपर राष्ट्रीय महत्व के संस्थान हैं। सात संस्थान अहमदाबाद, हैदराबाद, हाजीपुर, कोलकाता, गुवाहाटी, मोहाली और रायबरेली में कार्यरत हैं।

पृष्ठभूमि

  • चूंकि कोविड-19 के उपचार के लिए कोई प्रभावी दवा या वैक्सीन अभी तक उपलब्ध नहीं है, इसलिए लोगों में मजबूत प्रतिरक्षा प्रणाली होना आवश्यक है ताकि वे किसी भी तरह के संक्रमण से खिलाफ आसानी से लड़ सकें और खुद को सुरक्षित रख सकें। इस बात को ध्यान में रखते हुए, नाईपर, मोहाली के प्राकृतिक उत्पाद विभाग ने हर्बल चाय विकसित की है, जो रोग-प्रतिरोधक क्षमता को बढाती है। यह हर्बल चाय शरीर में प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को बेहतर बनाती है ताकि इसका उपयोग कोविड-19 वायरल संक्रमण के खिलाफ एक निवारक उपाय के रूप में किया जा सके।

प्रतिरक्षा प्रणाली (इम्यूनिटी) का महत्व

  • एक मजबूत प्रतिरक्षा प्रणाली व्यक्तियों को संक्रमणों से बचाती है और इसमें रोगजनक सूक्ष्म जीव जैसे बैक्टीरिया, वायरस और किसी भी अन्य प्रकार के विषाक्त उत्पादों को बेअसर और समाप्त करने की क्षमता होती है। प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को मज़बूत करना एंटी-वायरल / एंटी-माइक्रोबियल दवाओं का विकल्प हो सकता है। जड़ी-बूटियों को प्रतिरक्षा बढाने वाले गुणों के लिए जाना जाता है, जिसका अर्थ है कि वे विशिष्ट और सामान्य प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया दोनों का उत्पादन करते हैं।

इम्यूनिटी बूस्टरहर्बल चाय के बारे में

  • यह हर्बल चाय अश्वगंधा, गिलोय, मुलेठी, तुलसी और ग्रीन टी जैसी 6 स्थानीय रूप से उपलब्ध जड़ी-बूटियों का एक संयोजन है, जिन्हें सावधानीपूर्वक निर्धारित अनुपात में मिलाया जाता है। इसके लिए प्रतिरक्षा बढाना, संवेदी अपील, तैयार करने में आसानी और स्वीकार्य स्वाद को ध्यान में रखा गया है। जड़ी-बूटियों का चयन आयुर्वेद में वर्णित “रसायन” अवधारणा पर आधारित है। रसायन का अर्थ है कायाकल्प। इन जड़ी-बूटियों का लंबे समय से विभिन्न आयुर्वेदिक दवाओं में उपयोग होता रहा है और इन्हें प्रतिरक्षा बढाने वाले प्रभावों के लिए जाना जाता है। ये जड़ी-बूटियां कोशिका स्तर पर प्रतिरक्षा कार्य करती हैं और वायरल / जीवाणु से लड़ने के लिए हमारे शरीर द्वारा उत्पन्न प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को बढ़ाती हैं। अधिकतम प्रतिरक्षा के प्रभाव के लिए को प्राप्त करने के लिए सूत्र (फार्मूला) को तैयार किया गया है।
  • इस चाय को दिन में 3 बार पीया जा सकता है। यह बच्चों और बुजुर्गों के लिए भी सुरक्षित है। यह गले को आराम देता है और शरीर को मौसमी फ्लू की समस्याओं से लड़ने में मदद करता है। इसे परिसर में नाईपर मेडिकल प्लांट गार्डन से एकत्रित / खरीदी गयी जड़ी-बूटियों से तैयार किया गया है।

कोरोना की दवा कोरोनिल

चर्चा में क्यों?

  • आयुष मंत्रालय ने पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड द्वारा कोरोना वायरस के उपचार के लिए विकसित आयुर्वेदिक दवाओं के बारे में मीडिया में आई खबरों का संज्ञान लिया है। कंपनी को इस मामले की विधिवत जांच होने तक इस तरह के दावों व विज्ञापन के जरिए प्रचार-प्रसार को रोकने के लिए कहा गया है।
  • कोरोना के इलाज के लिए पतंजलि की दवा को लेकर आयुष मंत्रालय का कहना है कि उसे इस बात की जानकारी नहीं है कि किस तरह के वैज्ञानिक अध्ययन के बाद दवा बनाने का दावा किया गया है। मंत्रालय ने कहा कि इससे जुड़ी पूरी जानकारी मांगी गई है। आयुष मंत्रालय ने रामदेव की कंपनी को कोरोना का इलाज करने के लिए बनी दवा के विज्ञापन करने से मना किया है। कहा गया बिना मानक की जांच कराए हर तरह के विज्ञापन पर अगले आदेश तक रोक रहेगी।

पृष्ठभूमि

  • आपको बता दें कि योग गुरु स्वामी रामदेव ने कोरोनावायरस की दवा कोरोनिल को मंगलवार को बाजार में उतार और दावा किया कि आयुर्वेद पद्धति से जड़ी बूटियों के गहन अध्ययन और शोध के बाद बनी यह दवा शत प्रतिशत मरीजों को फायदा पहुंचा रही है। यहां पतंजलि योगपीठ में संवाददाताओं से बातचीत करते हुए बाबा रामदेव ने कहा कि पतंजलि पूरे विश्व में पहला ऐसा आयुर्वेदिक संस्थान है जिसने जड़ी बूटियों के गहन अध्ययन और शोध के बाद कोरोना महामारी की दवाई प्रमाणिकता के साथ बाजार में उतारी है ।
  • उन्होंने कहा कि यह दवाई शत प्रतिशत मरीजों को फायदा पहुंचा रही है। उन्होंने कहा कि 100 मरीजों पर नियंत्रित क्लिनिकल ट्रायल किया गया जिसमें तीन दिन के अंदर 69 प्रतिशत और चार दिन के अंदर शत प्रतिशत मरीज ठीक हो गये और उनकी जांच रिपोर्ट पॉजिटिव से नेगेटिव हो गयी।

हॉवित्जर तोप

चर्चा में क्यों?

  • लद्दाख के गलवन घाटी में हिंसक संघर्ष में 20 सैनिकों के बलिदान के बाद भारतीय सेना चीन को जैसा को तैसा के अंदाज में जवाब देने को तैयार है। पिछले दिनों केंद्र सरकार ने सशस्त्र बलों को महत्वपूर्ण उपकरणों की कमी से दूर करने के लिए करीब 500 करोड़ रुपये आपातकालीन खरीद के लिए अनुमति दे दी है। इसके बाद भारतीय सेना अधिक मारक और बेहतर तरीके से तोपखाने के लिए बनाए गए गोला बारूद को हासिल करने के लिए एक आदेश देने की योजना बना रही है, जो 50 किमी रेंज तक लक्ष्य को मार सकता है।
  • गौरतलब है कि चीन सीमा पर भारतीय सेना ने अमेरिकी निर्मित एम777 होवित्जर तोपें तैनात कर दी हैं। वर्ष 1999 में कारगिल युद्ध में बोफोर्स के नाम से मशहूर होवित्जर गनों ने पाकिस्तान पर कहर बन कर दुश्‍मन पर बरसी थीं। इसके बाद दक्षिण कोरिया की के-9 वज्र तोपें भी जल्द मैदान में उतारी जा सकती हैं। इसके साथ ही लद्दाख में सेना की आर्टिलरी रेजीमेंटों को नई ताकत मिलेगी।

एम777 होवित्जर तोपों की खासियत

  • एम777 होवित्जर तोपें की 25 किलोमीटर तक मारक क्षमता है , जरूरत पड़ने पर जिसे बढ़ाकर 50 किलोमीटर किया जा सकता है।
  • इस तोप से दुश्मन पर एक मिनट में पांच गोले दागे जा सकते हैं। दुश्‍मन को संभलने का मौका दिए बिना ताबड़तोड़ प्रहार किए जा सकते हैं।
  • ऊंचाई वाले क्षेत्रों में दुश्‍मन को मात देने के लिए तोपों का घातक होने के साथ उनका हल्का होना जरूरी है। इससे उन्हें पहाड़ी इलाकों में एक जगह से दूसरी जगह लेना आसान होता है।
  • बोफोर्स तोप के नाम से मशहूर 155 एमएम की एफएच-77 होवित्जर तोपों की जगह ले रही 155 एमएम की आधुनिक एम777 होवित्जर तोपें पुरानी तोपों से 41 फीसद हल्की है।
  • इन्हें हेलिकॉप्टर के जरिए पहाड़ों की चोटियों पर पहुंचाया जा सकता है। इनकी जगह जल्‍दी से बदली जा सकती है।

ऑटोमेटेड लंग अल्ट्रासाउंड LUS

चर्चा में क्यों?

  • देशभर में कोरोना को मात देने वाली भविष्य की योजनाओं पर काम चल रहा है। इसी क्रम में आईआईटी पलक्कड़ ने एक ऑटोमेटेड लंग अल्ट्रासाउंड (एलयूएस) विकसित किया है, जो कोरोना स्क्रीनिंग में सहायक साबित हो सकता है। इसके माध्यम से क्लाउड आधारित इमेज का विश्लेषण किया जा सकेगा। शोधकर्ताओं का दावा है कि यह भारत में पहला ऐप होगा, जिसका इस्तेमाल क्लीनिशियंस कर सकेंगे। क्लीनिशियंस इसकी मदद से अल्ट्रासाउंड वीडियो को अपलोड कर उसका विश्लेषण कर सकते हैं। आईआईटी पलक्कड़ के वैज्ञानिकों का कहना है कि एलयूएस कोरोना रोगियों के इलाज में हेल्थ प्रोफेशनल के लिए काफी कारगर होगा, क्योंकि इससे चिकित्सक कम समय में अधिक रोगियों के अल्ट्रासाउंड वीडियो का विश्लेषण कर सकेंगे।

ऐसे करता है काम

  • एक नर्सिंग सहायक (एक कुशल चिकित्सक की अनुपस्थिति में) एलयूएस के सहयोग से एक साधारण प्रोटोकॉल का पालन करते हुए, फेफड़ों की इमेज प्राप्त करता है। वह इन इमेज को क्लाउड में स्थानांतरित करता है । इमेज का विश्लेषण क्लाउड पर किया जाता है। इसके बाद रोग की गंभीरता और इंफेक्शन के अनुसार स्कोर निर्धारित किया जाता है।
  • इसका इस्तेमाल कोरोना के अलावा अन्य रोगों की पहचान आदि में भी किया जा सकता है। इसका इस्तेमाल फेफड़ों के संक्रमण, ओडिमा, न्यूमीनिया, सीओपीडी या अस्थमा जैसे रोगों की पहचान करने में भी किया जाता है। डॉ पनिकर का कहना है कि अपलोड की गई छवियों को स्वस्थ फेफड़े, वायरल संक्रमण और जीवाणु संक्रमण में वर्गीकृत किया गया है। लेकिन संक्रमण की गंभीरता के मामले में छवियों को बढ़ती गंभीरता के स्तरों में वर्गीकृत किया गया है।

एलयूएस के फायदे

  • यह पोर्टेबल है। इसे ले जाना आसान है।
  • इसमें रेडिएशन एक्सपोजर का डर नहीं है
  • इसकी कीमत कम है

:: पर्यावरण और पारिस्थितिकी ::

कम्प्रेस्ड बायो-गैस (CBG)

चर्चा में क्यों?

  • पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस और इस्पात मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि सरकार कम्प्रेस्ड बायो-गैस को वित्त पोषण की प्राथमिकता वाले क्षेत्र के अंतर्गत शामिल करने की प्रक्रिया में है। इससे सीबीजी संयंत्रों के वित्तपोषण में आसानी होगी।
  • सीबीजी संयंत्रों की स्थापना के लिए केंद्रीय वित्तीय सहायता या सब्सिडी को 2020-21 तक बढ़ा दिया गया है जिससे नई परियोजनाओं को बढ़ावा दिया जा सके।

क्या है कम्प्रेस्ड बायो गैस?

  • कम्प्रेस्ड बायो गैस(सीबीजी) विभिन्न जैव ईंधनों/अपशिष्ट स्रोतों से उत्पादित की जा सकती है, इसमें कृषि अवशेष, नगरपालिका ठोस अपशिष्ट गन्ना से प्राप्त अवशेष, डिस्टिलरी स्पेंट वाश, गोबर और सीवेज उपचार संयंत्र अपशिष्ट शामिल हैं। इससे प्राप्त गैस के शुद्धिकरण के उपरान्त संपीडित किया जाता है जिससे मीथेन का उच्च स्तर प्राप्त हो सके।
  • उर्जा एवं संरचना में कम्प्रेस्ड बायो गैस प्राकृतिक गैस के समतुल्य होती है। भविष्य में कम्प्रेस्ड बायो गैस का प्रयोग ऑटोमोबाइल, उद्योगों और वाणिज्यिक उपयोग में सीएनजी का स्थान लेने की पूर्ण क्षमता है।

कम्प्रेस्ड बायो-गैस के प्रोत्साहन हेतु पहल

  • सीबीजी के लिए 'सतत' (सस्टेनेबल अल्टरनेटिव टूवर्ड्स अफोर्डेबल ट्रांसपोर्टेशन) योजना की शुरूआत 1.10.2018 को की गई थी, जिसमें 2023 तक सीबीजी के 5000 संयंत्रों से 15 एमएमटी के उत्पादन को लक्षित करने की परिकल्पना की गई।
  • तेल विपणन कंपनियों द्वारा सीबीजी पर दीर्घकालिक मूल्य निर्धारण करने की पेशकश की गई है और सीबीजी पर दीर्घकालिक समझौतों पर अमल करने पर सहमति व्यक्त की है।
  • जैविक खाद जोकिसीबीजी संयंत्रों का एक महत्वपूर्ण उप-उत्पाद है, को भी उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 में शामिल किए जाने की प्रक्रिया चल रही है।

कम्प्रेस्ड बायो-गैस के लाभ

  • बायोगैस एक नवीकरणीय, साथ ही ऊर्जा का एक स्वच्छ स्रोत है। बायो-डाइजेशन के माध्यम से उत्पन्न गैस गैर-प्रदूषणकारी है और यह ग्रीनहाउस उत्सर्जन को भी कम करती है। इससे प्रदूषण के स्तर को कम किया जा सकता है।
  • जैव ईंधन की पूर्ण क्षमता का उपयोग करने की दिशा में कम्प्रेस्ड बायोगैस या सीबीजी, इथेनॉल, 2जी इथेनॉल और बायोडीजल एक महत्वपूर्ण पहल हैं, जो देश में सतत ऊर्जा के भविष्य को सुनिश्चित करने के दृष्टिकोण को प्राप्त करने में मदद करेगा।"
  • सीबीजी के द्वारा जैव ईंधन को बढ़ावा देते हुए हरित ऊर्जा मिश्रण को बढ़ावा जा सकता है जिससे न केवल आयात पर निर्भरता कमहोगी बल्कि अर्ध-शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार उत्पन्न किया जा सकता है। यह किसानो की आय बढ़ने में मददगार होगी।
  • सीबीजी का उपयोग, पेरिस समझौते 2015 के अनुसार भारत में जलवायु परिवर्तन के लक्ष्यों की प्राप्ति में मदद करेगा। यह भारत सरकार के स्वच्छ भारत, आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया जैसी योजनाओं के अनुरूप भी होगा।

:: विविध ::

डॉ. कोटनिस

  • भारत और चीन के बीच गलवन झड़प के बाद से ही वास्तविक नियंत्रण रेखा पर तनाव है। ऐसे वक्त में रूस-भारत-चीन (आरआइसी) संगठन की वर्चुअल बैठक हुई, जिसमें विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने परोक्ष रूप से अपनी चिंताओं को जता दिया। उन्होंने बैठक में डॉ. कोटनिस की याद दिलाकर चीन को संदेश दिया कि उसके हर संकट में भारत साथ खड़ा रहा है।
  • डॉ. कोटनिस का पूरा नाम डॉ. द्वारकानाथ शांताराम कोटनिस था। उनका जन्म महाराष्ट्र के शोलापुर में 10 अक्टूबर 1910 को हुआ। उन्होंने बांबे विश्वविद्यालय से संबद्ध जीएस मेडिकल कॉलेज से अपनी पढ़ाई पूरी की। उसी वक्त जापान ने चीन पर आक्रमण कर दिया था। जिसमें बड़ी संख्या में चीन के सैनिक मारे जा रहे थे। ऐसे में चिकित्सा मिशन के तहत डॉ. कोटनिस चीन पहुंचे। जहां पर अग्रिम मोर्चों पर घायल होने वाले चीनी सैनिकों की बड़ी संख्या में उन्होंने जान बचाई।

चीन ने लगाई थी गुहार :

  • द्वितीय चीन जापान युद्ध के समय 1938 में चीन के जनरल झू दे ने जवाहरलाल नेहरु से चीन के सैनिकों को चिकित्सा सुविधा मुहैया कराने की गुहार लगाई। इसके लिए उन्होंने भारतीय चिकित्सकों को भेजने का आग्रह किया। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के तत्कालीन अध्यक्ष नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने स्वयंसेवक चिकित्सकों के दल के साथ एंबुलेंसभेजने की भी व्यवस्था की। इस एंबुलेंस के लिए 22 हजार रुपये की राशि एकत्रित की गई थी। साथ ही 1938 में पांच चिकित्सकों के दल को चीन भेजा गया। जिनमें डॉ. कोटनिस भी शामिल थे।

चीन में पूजनीय हैं कोटनिस :

  • डॉ. कोटनिस को चीन में अपने जीवनकाल में ही बेहद सम्मान मिला। बाद में उनकी याद में डाक टिकट जारी किए गए और हेबई प्रांत में उनका स्मारक बनाया गया। यहां तक की आज भी चीन के लोग डॉ. कोटनिस का नाम बेहद सम्मान से लेते हैं। 2009 में चीन के एक सदी के दौरान विदेशी मित्रों के इंटरनेट मतदान में कोटनिस को शीर्ष 10 विदेशियों में चुना गया। उनके निधन पर माओ ने कहा था कि सेना ने एक हाथ खो दिया है, देश ने एक दोस्त को खो दिया है।

:: प्रिलिम्स बूस्टर ::

  • हाल ही में किस योजना के तहत केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड द्वारा पेपरलेस एक्सपोर्ट्स की सुविधा दी गयी? (“तुरंत कस्टम्स”, Turant Customs)
  • हाल ही में जम्मू कश्मीर को लेकर आपातकालीन बैठक से चर्चा में रहे इस्लामिक सहयोग संगठन की स्थापना कब हुई एवं इसका मुख्यालय कहां है? (1969, जेद्दाह-सऊदी अरब)
  • उच्चतर शैक्षणिक संस्थानों में नवाचार और उद्यमिता संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए हाल ही में सरकार के द्वारा किस प्लेटफॉर्म की शुरूआत की गई है? ('YUKTI 2.0')
  • हाल ही में अमेरिकी प्रशासन के द्वारा आईटी क्षेत्र से जुड़े उच्च पेशेवर लोगों के लिए किस वीजा को सस्पेंड कर दिया गया है? (H1B वीजा)
  • हाल ही में भारत सरकार ने किस देश के साथ परस्पर उच्चायोग में कर्मचारियों की संख्या 50% घटाने का निर्णय लिया गया है? (पाकिस्तान)
  • भारत चीन सीमा पर तैनाती के संदर्भ में चर्चा में रहे एम777 होवित्जर तोपें और के-9 वज्र तोपें क्रमशः किन देशों के द्वारा बनाया गया है? (क्रमशः अमेरिका, दक्षिण कोरिया)
  • हाल ही में आयुष मंत्रालय के द्वारा पतंजलि आयुर्वेदिक लिमिटेड की कोरोनावायरस से संबंधित किस दवा के विज्ञापन के जरिए प्रचार-प्रसार पर रोक लगा दी गई है? (कोरोनिल)
  • कंप्रेस्ड बायोगैस(CBG) को वित्त पोषण की प्राथमिकता वाले क्षेत्र में शामिल करने से चर्चा में रहे किस योजना के तहत सरकार ने 2023 तक 15 एमएमटी CBG उत्पादन का लक्ष्य रखा है? ('सतत'-सस्टेनेबल अल्टरनेटिव टूवर्ड्स अफोर्डेबल ट्रांसपोर्टेशन, 2018 से प्रारंभ)
  • हाल ही में सरकार ने किस व्यापारिक पोर्टल पर विक्रेताओं को उत्पत्ति के देश के बारे में जानकारी देना अनिवार्य बना दिया गया है? (गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस-GeM)

स्रोत साभार: Dainik Jagran (Rashtriya Sanskaran), Dainik Bhaskar (Rashtriya Sanskaran), Rashtriya Sahara (Rashtriya Sanskaran) Hindustan Dainik (Delhi), Nai Duniya, Hindustan Times, The Hindu, BBC Portal, The Economic Times (Hindi & English), PTI, PIB

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