(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (23 मई 2020)

दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर


(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (23 मई 2020)


:: राष्ट्रीय समाचार ::

भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI)

चर्चा में क्यों?

  • दिल्ली उच्च न्यायालय ने प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) के आदेश को चुनौती देने वाली मोनसेंटो होल्डिंग्स प्राइवेट लि. की याचिका खारिज कर दी है। आयोग ने कंपनी और महाराष्ट्र हाइब्रिड सीड्स कंपनी की गतिविधियों की जांच के आदेश दिये हैं।

पृष्ठभूमि

  • प्रतिस्पर्धा आयोग को यह शिकायतें मिली थी कि ये कंपनियां बाजार में अपनी मजबूत स्थिति का दुरूपयोग कर बीटी कॉटन प्रौद्योगिकी के लिये अत्यधिक एवं अनुचित कीमत ले रही हैं। मोनसेंटो ने सीसीआई के 10 फरवरी के कंपनी की गतिविधियों की जांच के आदेश के अलावा आयोग के 18 फरवरी 2016 को उसे नोटिस जारी किये जाने के आदेश को भी चुनौती दी थी।
  • मोनसेंटो ने इस आधार पर सीसीआई के आदेशों को चुनौती दी थी कि आयोग के पास उसके समक्ष उठाये गये मामले में हस्तक्षेप का अधिकार नहीं है क्योंकि यह पेटेंट कानून के तहत मिले अधिकार से जुड़ा है। अदालत ने इस दलील को खारिज कर दिया।

भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) क्या है?

  • भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) की स्थापना प्रतिस्पर्धा अधिनियम, 2002 के तहत अधिनियम के प्रशासन, कार्यान्वयन और प्रवर्तन के लिए की गई थी इस अधिनियम के उद्देश्यों को भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सी सी आई) के माध्यम से प्राप्त किया जाना है जिसका गठन केन्द्र सरकार द्वारा 14 अक्टूबर, 2003 को किया गया है। भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग में केन्द्र सरकार द्वारा नियुक्त एक अध्यक्ष तथा 6 सदस्य शामिल हैं। आयोग के निम्नलिखित लक्ष्य हैं:
  1. प्रतिस्पर्धा पर विपरित प्रभाव डालने वाले व्यवहारों को रोकना।
  2. बाजारों में प्रतिस्पर्धा का संवर्धन और उसे बनाए रखना।
  3. उपभोक्ताओं के हितों की सुरक्षा और
  4. व्यापार की स्वतंत्रता सुनिश्चित करना।

“मीठी क्रांति और आत्मनिर्भर भारत’’ विषय पर वेबिनार

  • ‘’मीठी क्रांति और आत्मनिर्भर भारत’’ विषय पर राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) ने यह वेबिनार राष्‍ट्रीय मधुमक्‍खी बोर्ड, पश्चिम बंगाल सरकार, उत्तराखंड सरकार और शेर-ए-कश्मीर कृषि विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कश्मीर के साथ मिलकर कल आयोजित किया था। इस आयोजन का उद्देश्य कृषि आय और कृषि उत्पादन बढ़ाने के साधन के रूप में भूमिहीन ग्रामीण गरीब, छोटे और सीमांत लोगों के लिए आजीविका के स्रोत के रूप में वैज्ञानिक मधुमक्खी पालन को लोकप्रिय बनाना है।

कुछ महत्वपूर्ण तथ्य

  • किसानों की आय दुगनी करने के अपने लक्ष्‍य के तहत सरकार मधुमक्खी पालन को बढ़ावा दे रही है। सरकार ने आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत मधुमक्खी पालन के लिए 500 करोड़ रुपये का आवंटन किया है। भारत विश्व में शहद के 5 सबसे बड़े उत्पादकों में शुमार है। भारत में वर्ष 2005-06 की तुलना में अब शहद उत्पादन 242 प्रतिशत बढ़ गया है, वहीं इसके निर्यात में 265 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
  • बढ़ता शहद निर्यात इस बात का प्रमाण है कि मधुमक्‍खी पालन 2024 तक किसानों की आय को दोगुना करने का लक्ष्‍य हासिल करने की दिशा में महत्‍वपूर्ण कारक रहेगा। उन्‍होंने कहा कि राष्‍ट्रीय मधुमक्‍खी बोर्ड ने राष्‍ट्रीय मधुमक्‍खी पालन एवं मधु मिशन (एनबीएचएम) के लिए मधुमक्खी पालन के प्रशिक्षण के लिए चार माड्यूल बनाए गए हैं, जिनके माध्यम से देश में 30 लाख किसानों को प्रशिक्षण दिया गया है। इन्हें सरकार द्वारा वित्‍तीय सहायता भी उपलब्ध कराई जा रही है।
  • सरकार मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देने के लिए गठित की गई समिति की सिफारिशों का कार्यान्‍वयन कर रही है।
  • सरकार ने मीठी क्रांति के तहत हनी मिशन की भी घोषणा की है, जिसके चार भाग है, इसका भी काफी लाभ मिलेगा।

भारत मौसम विज्ञान की 7 सेवाओं को उमंग एप्‍लीकेशन पर प्रारंभ

  • यूनीफाइड मोबाइल एप्‍लीकेशन फॉर न्‍यू-एज गवर्नेंस (उमंग) का 22 मई 2020 को पृथ्‍वी विज्ञान मंत्रालय में सचिव डॉ एम.राजीवन ने आईएमडी के महानिदेशक डॉ. एम.मोहापात्र और एनईजीडी के अध्‍यक्ष एवं मुख्‍य कार्यकारी अधिकारी श्री अभिषेक सिंह की मौजूदगी में उद्घाटन किया।

क्या है उमंग

  • उमंग भारत सरकार का ऑल-इन-वन एकल, एकीकृत, सुरक्षित, मल्‍टी-चैनल, मल्‍टी-प्‍लेटफॉर्म, बहु-भाषी, बहु-सेवा मोबाइल एप है, जिसे विभिन्‍न संगठनों (केंद्र और राज्‍य) की अत्‍यंत महत्‍वपूर्ण सेवाओं तक पहुंच प्रदान करने वाले एक प्रबल बैक-एंड प्‍लेटफॉर्म द्वारा सक्षम बनाया गया है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने समस्‍त सरकारी सेवाओं को एकल मोबाइल एप पर लाते हुए 2017 में उमंग एप का शुभारंभ किया था। इसका लक्ष्‍य सरकार को नागरिकों के मोबाइल फोन पर सुगम्‍य बनाना था। 127 विभागों और 25 राज्‍यों की उपयोगिता भुगतानों सहित लगभग 660 सेवाएं इस पर उपलब्‍ध हैं और कई अन्‍य को इस पर लाने की योजना है।
  • भारत मौसम विभाग (आईएमडी) ने नवीनतम उपकरणों और प्रौद्योगिकियों के आधार पर मौसम पूर्वानुमान और चेतावनी सेवाओं के प्रसार में सुधार लाने के लिए हाल के वर्षों में विविध कदम उठाए हैं। इस पहल को और ज्‍यादा संवर्धित करने के लिए आईएमडी ने ‘’उमंग एप’’ का उपयोग करने के लिए डिजिटल इंडिया कार्यक्रम का लाभ उठाया।
  • निम्‍नलिखित 7 सेवाओं को उमंग एप्‍लीकेशन पर ऑनबोर्ड कराया गया है :
  1. वर्तमान मौसम : दिन में 8 बार वर्तमान तापमान, आर्द्रता, हवा की गति, 150 शहरों के लिए दिशा को अपडेट किया जाता है। सूर्योदय/सूर्यास्त और चन्‍द्रोदय/ चंद्रमा के अस्‍त होने की जानकारी भी दी जाती है।
  2. नाओकास्‍ट : आईएमडी के राज्य मौसम विज्ञान केंद्रों द्वारा भारत के लगभग 800 स्टेशनों और जिलों के लिए स्थानीय मौसम संबंधी घटनाओं और उनकी गहनता की तीन घंटे पर चेतावनी दी जाती है। गंभीर मौसम के मामले में, इसका प्रभाव भी चेतावनी में शामिल किया जाता है।
  3. शहर पूर्वानुमान : भारत के लगभग 450 शहरों के पिछले 24 घंटे और 7 दिन के मौसम के हालात का पूर्वानुमान दिया जाता है।
  4. वर्षा की सूचना : अखिल भारतीय जिला वर्षा सूचना दैनिक, साप्‍ताहिक, मासिक और संचयी श्रृंखलाएं उपलब्‍ध हैं।
  5. पर्यटन पूर्वानुमान : पर्यटन की दृष्टि से महत्‍वपूर्ण भारत के लगभग 100 शहरों के पिछले 24 घंटे और 7 दिन के मौसम के हालात का पूर्वानुमान दिया जाता है।
  6. चेतावनियां : नागरिकों को आसन्‍न खतरनाक मौसम की चेतावनी देने के लिए अलर्ट जारी किए जाते हैं। ये अलर्ट कलर कोड में होते हैं। रेड, ऑरेंज और येलो अलर्ट लेवल हैं, जिनमें रेड सबसे ज्‍यादा गंभीर श्रेणी है। सभी जिलों के लिए अगले पांच दिनों के लिए दिन में दो बार जारी किए जाते हैं।
  7. चक्रवात : चक्रवात संबंधी चेतावनियां और अलर्ट चक्रवाती तूफान का मार्ग और तट पार करने का संभावित समय और स्‍थान उपलब्‍ध कराते हैं। प्रभाव आधारित चेतावनियां, क्षेत्र/जिला वार जारी की जाती हैं, ताकि असुरक्षित स्‍थानों से लोगों को सुरक्षित स्‍थानों पर भिजवाने की उपयुक्‍त तैयारियां की जा सकें।

:: अंतर्राष्ट्रीय समाचार ::

मुक्त आकाश निगरानी संधि

चर्चा में क्यों?

  • ट्रंप प्रशासन ने अंतरराष्ट्रीय भागीदारों को सूचित किया कि वह उस संधि से बाहर हो रहा है जिसके तहत 30 से अधिक देशों को एक-दूसरे के क्षेत्र में हथियारों के बिना निगरानी उड़ानों की अनुमति है। दशकों पहले यह व्यवस्था परस्पर विश्वास बढ़ाने और संघर्ष को टालने के लिए शुरू की गयी थी।
  • अमेरिका का कहना है कि वह मुक्त आकाश संधि से बाहर होना चाहता है क्योंकि रूस समझौते का उल्लंघन कर रहा है। इसके अलावा उड़ानों के दौरान एकत्र तस्वीरें अमेरिका या वाणिज्यिक उपग्रहों से काफी कम लागत पर तुरंत प्राप्त की जा सकती हैं। हालांकि ऐसे आसार हैं कि संधि से अलग होने पर रूस के साथ अमेरिका के संबंधों में तनाव बढ़ सकता है। इसके अलावा उसके यूरोपीय सहयोगी और कांग्रेस के कुछ सदस्य भी नाराज हो सकते हैं।

मुक्त आकाश निगरानी संधि की पृष्ठभूमि

अमेरिकी राष्ट्रपति डी आइजनहावर ने पहली बार जुलाई 1955 में प्रस्ताव दिया था कि अमेरिका और तत्कालीन सोवियत संघ एक दूसरे के क्षेत्र में हवाई टोही उड़ानों की अनुमति दें। मास्को ने पहले उस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया था। लेकिन राष्ट्रपति जॉर्ज एच डब्ल्यू बुश ने मई 1989 में फिर से यह प्रस्ताव किया और जनवरी 2002 में यह संधि लागू हो गयी। अभी 34 देशों ने इस पर हस्ताक्षर किए हैं। किर्गिस्तान ने इस पर हस्ताक्षर किए हैं लेकिन उसने अभी तक इसकी अभिपुष्टि नहीं की है।इस संधि के तहत 1,500 से अधिक उड़ानों का संचालन किया गया है जिसका उद्देश्य सैन्य गतिविधि के बारे में पारदर्शिता को बढ़ावा देना और हथियारों के नियंत्रण तथा अन्य समझौतों की निगरानी करना है। संधि में सभी देश अपने सभी क्षेत्रों को निगरानी उड़ानों के लिए उपलब्ध कराने पर सहमत हैं, फिर भी रूस ने कुछ क्षेत्रों में उड़ानों पर प्रतिबंध लगा दिया है।

:: अर्थव्यवस्था ::

8000 करोड़ रुपये की पाइपलाइन परियोजनाओं की समीक्षा

  • केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस और इस्पात मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान ने लगभग 8000 करोड़ रुपये की पाइपलाइन परियोजनाओं की समीक्षा की। तेल और गैस कंपनियों की उपरोक्त परियोजनाएं कार्यान्वयन के विभिन्न चरणों में हैं। आत्मनिर्भर भारत पर जोर देते हुए मंत्री श्री प्रधान ने इन परियोजनाओं के पूर्ण स्वदेशीकरण का आह्वान किया।

वर्तमान स्थिति

  • गेल (जीएआईएल), सितंबर 2020 तक घरेलू बोलीदाताओं से 1 लाख लाख टन स्टील की खरीद के लिए 1000 करोड़ रुपये से अधिक की लाइनपाइप निविदाओं को संसाधित (प्रोसेस) करेगी। इसके अंतर्गत 800 किलोमीटर लाइन पाइप के निर्माण के लिए स्टील की आपूर्ति की जायेगी। वर्तमान वित्तीय वर्ष के अंत तक यह मात्रा दोगुनी होने की उम्मीद है। इससे मेक इन इंडिया की पहल को बढ़ावा देने और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाने में प्रोत्साहन मिलेगा।
  • प्रधानमंत्री ऊर्जा गंगा, जेएचबीडीपीएल पाइपलाइन का परियोजना कार्य लॉकडाउन के बाद तेजी से चल रहा है। यह पाइप लाइन पूर्वी भारत को सेंट्रल नेचुरल गैस पाइपलाइन कॉरिडोर के माध्यम से पश्चिम के साथ जोड़ेगी। इससे देश में गैस आधारित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा।
  • इंडियन ऑयल, दक्षिण भारत में 6025 करोड़ रुपये की परियोजना लागत के साथ 1450 किलोमीटर लंबी प्राकृतिक गैस पाइपलाइन परियोजना को लागू कर रही है। इस परियोजना में लगभग 1.65 लाख एमटी स्टील पाइप के उपयोग की क्षमता है, जिसकी अनुमानित लागत लगभग 2060 करोड़ रुपये है। यह परियोजना भी आत्मनिर्भर अभियान के अनुरूप है।
  • इन्द्रधनुष गैस ग्रिड लिमिटेड, पूर्वोत्तर में प्राकृतिक गैस पाइपलाइन ग्रिड विकसित कर रहा है। इस पाइपलाइन ग्रिड से सभी 8 पूर्वोत्तर राज्यों को प्राकृतिक गैस की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित होगी, उनकी आर्थिक वृद्धि में तेजी आयेगी और भारत में गैस आधारित अर्थव्यवस्था को आगे बढाने में मदद मिलेगी। आईजीजीएल जुलाई 2020 तक लगभग 73000 मीट्रिक टन स्टील की खरीद के लिए लगभग 950 करोड़ से अधिक की निविदाओं को संसाधित (प्रोसेस) कर रही है। यह प्रक्रिया घरेलू बोलीदाताओं से 550 किलोमीटर लाइन पाइप की स्टील आपूर्ति के लिए है। चालू वित्त वर्ष के अंत तक यह मात्रा दोगुनी होने की उम्मीद है।

आरबीआई ने अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए नौ और अहम उपायों की घोषणा

  • भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर श्री शक्तिकांत दास ने राष्ट्रपिता के वर्ष 1929 के इस अनमोल विचार से आशा एवं प्रेरणा लेते हुए वित्त के प्रवाह को सुचारू बनाने और कोविड से उत्‍पन्‍न अशांत एवं अनिश्चित माहौल में वित्तीय स्थिरता को बनाए रखने के लिए नौ और अहम उपायों की घोषणा की है। आरबीआई ने इससे पहले 17 अप्रैल, 2020 को और 27 मार्च, 2020 को अनेक महत्‍वपूर्ण उपायों की घोषणा की थी।
  • आरबीआई गवर्नर ने एक ऑनलाइन संबोधन के माध्यम से घोषणाएं करते हुए कहा कि हमें भारत की सुदृढ़ता के साथ-साथ सभी बाधाओं को दूर करने की इसकी क्षमता पर अवश्‍य ही भरोसा होना चाहिए। यह विश्वास व्यक्त करते हुए कि हम आज की कष्‍टदायक मुसीबतों से पार पा लेंगे, आरबीआई गवर्नर ने आह्वान किया। उन्होंने कहा कि स्थिति ऐसी है कि ‘केंद्रीय बैंकों को अर्थव्यवस्था के बचाव में अग्रिम पंक्ति को जवाब देना होगा।’

रेपो रेट में 0.40 प्रतिशत की कमी

  • आरबीआई गवर्नर ने महंगाई दर को निर्धारित दायरे में ही रखते हुए विकास की गति को फि‍र से तेज करने और कोविड-19 के प्रभाव को कम करने के लिए प्रमुख नीतिगत दरों (पॉलिसी रेट) में कमी करने की घोषणा की है। रेपो रेट को 4.4% से 0.40 प्रतिशत घटाकर 4.0% पर ला दिया गया है। सीमांत स्थायी सुविधा (एमएसएफ) दर और बैंक रेट को भी 4.65% से घटाकर 4.25% कर दिया गया है। इसी तरह रिवर्स रेपो रेट को 3.75% से घटाकर 3.35% पर ला दिया गया है।
  • आरबीआई गवर्नर ने कहा, ‘यह देखते हुए कि विकास से जुड़े जोखिम अत्‍यधिक हैं, जबकि महंगाई से जुड़े जोखिम के अल्पकालिक होने की संभावना है, इसलिए मौद्रिक नीति समिति का यह मानना है कि अब आत्मविश्वास बढ़ाना एवं वित्तीय परिस्थितियों को और भी अधिक आसान बनाना आवश्यक हो गया है। यह किफायती दरों पर धन के प्रवाह को सुगम करेगा और फि‍र से निवेश का माहौल बनाएगा। इसे ही ध्‍यान में रखते हुए एमपीसी ने नीतिगत रेपो रेट को 4.4% से 0.40 प्रतिशत घटाकर 4.0% पर ला दिया है।
  • श्री दास ने अनेक नियामकीय एवं विकासात्मक उपायों की भी घोषणा की जो नीतिगत दर में की गई कमी के लिए पूरक साबित होंगे और एक दूसरे को मजबूत भी करेंगे।

घोषित किए जा रहे उपायों के लक्ष्य:

  • वित्तीय प्रणाली और वित्तीय बाजारों को सुदृढ़ एवं तरल रखना और सुचारू रूप से चलाना
  • सभी, विशेषकर उन लोगों की वित्त तक पहुंच सुनिश्चित करना, जिन्‍हें वित्तीय बाजार अपने से दूर रखने की कोशिश करते हैं
  • वित्तीय स्थिरता को बनाए रखना

बाजारों के कामकाज को बेहतर करने के उपाय

सिडबी को पुनर्वित्त सुविधा 90 दिन और बढ़ा दी गई है

  • लघु उद्योगों को किफायती ऋण की आपूर्ति को सक्षम बनाने के लिए आरबीआई ने 17 अप्रैल, 2020 को सिडबी को 90 दिनों की अवधि के लिए आरबीआई के नीतिगत रेपो रेट पर 15,000 करोड़ रुपये की विशेष पुनर्वित्त सुविधा देने की घोषणा की थी। इस सुविधा को अब 90 दिन और बढ़ा दिया गया है।

स्वैच्छिक प्रतिधारण मार्ग के तहत विदेशी पोर्टफोलियो निवेश के लिए नियमों में ढील

  • स्वैच्छिक प्रतिधारण मार्ग (वीआरआर) दरअसल एक निवेश सुविधा है जो आरबीआई द्वारा विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों को प्रदान की जाती है और जो ज्‍यादा निवेश करने की प्रतिबद्धता के बदले में आसान नियमों की पेशकश करती है। नियमों में बताया गया है कि आवंटित निवेश सीमा का कम से कम 75% निवेश तीन माह के भीतर किया जाना चाहिए; निवेशकों और उनके संरक्षकों (कस्‍टोडियन) के सामने आ रही कठिनाइयों को देखते हुए अब समय सीमा को संशोधित कर छह माह कर दिया गया है।

निर्यात और आयात में सहयोग करने के उपाय

निर्यातक अब अधिक अवधि के लिए बैंक ऋणों का लाभ उठा सकते हैं

  • बैंकों द्वारा निर्यातकों के लिए मंजूर लदान-पूर्व और लदान-बाद निर्यात ऋण की अधिकतम स्‍वीकार्य अवधि को 31 जुलाई, 2020 तक वितरण के लिए मौजूदा एक साल से बढ़ाकर 15 माह कर दिया गया है।

एक्जिम बैंक के लिए ऋण की सुविधा

  • आरबीआई गवर्नर ने भारत के विदेश व्यापार के वित्तपोषण, इसे सुविधाजनक बनाने और बढ़ावा देने हेतु एक्जिम बैंक के लिए 15,000 करोड़ रुपये के ऋण (लाइन ऑफ क्रेडिट) की घोषणा की है। ऋण की सुविधा 90 दिनों की अवधि के लिए दी गई है, जिसे एक वर्ष बढ़ाने का प्रावधान भी है। एक्जिम बैंक को विदेशी मुद्रा संसाधन संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने, विशेषकर अमेरिकी डॉलर अदला-बदली (स्वैप) सुविधा का लाभ उठाने में सक्षम बनाने के लिए ऋण दिया जा रहा है।

आयातकों को आयात हेतु भुगतान करने के लिए अधिक समय

  • भारत में सामान्य आयात (यानी सोने/हीरे और कीमती पत्थरों/आभूषणों के आयात को छोड़कर) के भुगतान की समयावधि को शिपमेंट की तारीख से छह माह से बढ़ाकर बारह माह कर दिया गया है। यह 31 जुलाई, 2020 को या उससे पहले किए गए आयात के लिए लागू होगा।

वित्तीय मुश्किलें कम करने के उपाय

नियामकीय उपायों के लिए 3 माह का और समय विस्तार

  • आरबीआई ने पूर्व में घोषित किए गए कुछ नियामकीय उपायों की प्रयोज्यता या स्‍वीकार्यता को 1 जून, 2020 से तीन माह और बढ़ाकर अब 31 अगस्त, 2020 तक कर दिया है। ये उपाय अब कुल छह महीनों (यानी 1 मार्च, 2020 से लेकर 31 अगस्त, 2020 तक) के लिए लागू माने जाएंगे। संबंधित नियामकीय उपाय ये हैं: (ए) सावधि ऋणों की किस्तों की अदायगी पर 3 माह की मोहलत; (बी) कार्यशील पूंजी सुविधाओं के ब्याज पर 3 माह का स्थगन; (सी) मार्जिन कम करके या कार्यशील पूंजी चक्र का फि‍र से आकलन करके कार्यशील पूंजी वित्तपोषण संबंधी आवश्यकताओं को सुगम बनाना; (डी) पर्यवेक्षी रिपोर्टिंग और क्रेडिट सूचना कंपनियों को रिपोर्टिंग में ‘डिफॉल्टर’ के रूप में वर्गीकृत होने से छूट देना; (ई) फंसे कर्जों के लिए समाधान समयसीमा का विस्तार; और (एफ) ऋण संस्थानों द्वारा 3 माह की मोहलत अवधि, इत्‍यादि को हटाते हुए संपत्ति वर्गीकरण पर विराम। ऋण देने वाले संस्थानों को यह अनुमति दी गई है कि वे 31 मार्च, 2021 तक कार्यशील पूंजी के लिए मार्जिन को उनके मूल स्तर पर बहाल कर सकते हैं। इसी तरह कार्यशील पूंजी चक्र का फि‍र से आकलन करने से संबंधित उपायों का समय विस्‍तार 31 मार्च, 2021 तक किया जा रहा है।

कार्यशील पूंजी पर ब्याज को ब्याज सावधि ऋण में परिवर्तित करने का प्रावधान

  • ऋण देने वाले संस्थानों को 6 माह (अर्थात 1 मार्च, 2020 से लेकर 31 अगस्त, 2020 तक) की कुल स्‍थगन अवधि के दौरान कार्यशील पूंजी सुविधाओं पर संचित ब्याज को एक वित्तपोषित ब्याज सावधि ऋण में परिवर्तित करने की अनुमति दी गई है, जिसे 31 मार्च 2021 को समाप्त होने वाले चालू वित्त वर्ष के दौरान पूरी तरह से चुकाना होगा।

कंपनियों को धन प्रवाह बढ़ाने के लिए ग्रुप एक्सपोजर लिमिट में वृद्धि

  • बैंक द्वारा किसी विशेष कॉरपोरेट समूह को दिए जाने वाले अधिकतम ऋण को उसके उपयुक्‍त पूंजी आधार के 25% से बढ़ाकर 30% कर दिया गया है। वर्तमान में कंपनियों को बैंकों से धन जुटाने में हो रही कठिनाइयों को ध्‍यान में रखते हुए कंपनियों को बैंकों से अपनी वित्तपोषण आवश्यकताओं को पूरा करने में सक्षम बनाने के लिए ऐसा किया गया है। बढ़ी हुई सीमा 30 जून, 2021 तक लागू रहेगी।

राज्य सरकारों की मौजूदा वित्तीय मुश्किलों को कम करने के उपाय

राज्यों को ‘कंसोलिडेटेड सिंकिंग फंड’ से अधिक उधार लेने की अनुमति

  • कंसोलिडेटेड सिंकिंग फंड’ को राज्य सरकारों द्वारा अपनी देनदारियों के पुनर्भुगतान के लिए एक बफर के रूप में बनाया गया है। इस कोष से धन निकासी को नियंत्रित करने वाले नियमों में अब ढील दी गई है, ताकि राज्यों को वर्ष 2020-21 में देय अपनी बाजार उधारी को चुकाने में सक्षम बनाया जा सके। धन निकासी मानदंडों में बदलाव तत्काल प्रभाव से लागू होगा और 31 मार्च, 2021 तक मान्‍य रहेगा। आरबीआई गवर्नर ने कहा कि यह सुनिश्चित करते हुए ही ढील या छूट दी जा रही है कि इस कोष में उपलब्‍ध शेष राशि में कमी विवेकपूर्ण तरीके से हो।

:: विज्ञान और प्रौद्योगिकी ::

कार्सियोजेनिक एवं म्युटैजेनिक यौगिकों की जांच के लिए इलेक्ट्रोकैमिकल सेंसिंग प्लेटफार्म

  • गुवाहाटी स्थित विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी उन्नत अध्ययन संस्थान (आईएएसएसटी) ने कभी कभी क्योर्ड मीट, बैकोन कुछ पनीर एवं कम वसा वाले दूध जैसी खाद्य वस्तुओं में कार्सियोजेनिक एवं म्युटैजेनिक यौगिकों एन-नाइट्रोसोडिमेथिलामाइन (एनडीएमए) और एन-नाइट्रोसोडिथैनोलामाइन (एनडीईए) का पता लगाने के लिए इलेक्ट्रोकैमिकलसेंसिंग प्लेटफार्म का विकास किया है। इसे डीएनए में कार्बन नैनोमैटेरियल्स (कार्बन डौट्स) को स्थिर कर देने के जरिये एक मोडिफायड इलेक्ट्रोड विकसित करने के द्वारा अर्जित किया गया।

क्यों चिंता की बात है?

  • वैज्ञानिकों ने बताया कि शहरों में रहने वाले भारतीयों की बदलती भोजन शैली के कारण उन पर क्योर्ड मीट, बैकोन कुछ पनीर एवं कम वसा वाले सूखे दूध और मछली जैसी खाद्य वस्तुओं में नाइट्रोसैमीन परिवार से संबंधित हानिकारक रसायनों का खतरा मंडराने लगता है। ऐसे रसायनों में एनडीएमए एवं एनडीईए जैसे कार्सियोजेनिक शामिल होते हैं जो हमारे डीएनए की रसायनिक संरचना को भी बदल सकते हैं। इसलिए, उनका पता लगाने के लिए अनुसंधान तकनीकों का विकास किया जाना महत्वपूर्ण है।

क्या है इस नवीन तकनीक की विशेषता?

  • नाइट्रोसैमीन का पता लगाने के लिए प्रयुक्त अधिकांश तकनीकों में μM अनुसंधान सीमाएं होती हैं। जर्नल एसीएस एैपल बायो मेटर में प्रकाशित इस अध्ययन में वैज्ञानिकों ने एन- नाइट्रोसैमीन के संवेदनशील और चयनात्मक अनुसंधान के लिए कार्बन डौट्स के सतह पर स्थिर किए गए डीएनए का उपयोग करने के जरिये एक इलेक्टोकैमिकल सेंसिंग प्लेटफार्म का निर्माण किया है। एनडीएमए एवं एनडीईए के लिए क्रमशः 9.9×10−9 M और 9.6×10−9 M अन्वेषण सीमा निर्धारित की गई।
  • इलेक्टोकैमिकल बायोसेंसर प्लेटफार्म का विकास डीएनए को बदलने के लिए एनडीएमए एवं एनडीईए की क्षमता का उपयोग करने के द्वारा किया गया। एक कार्बन आधारित नैनोमैटेरियल, कार्बन डौट्स (सीडीएस) का उपयोग किया गया जो एक जैवसंगत तथा पर्यावरण के लिए हितैषी मैटेरियल के रूप में पहले से ही स्थापित है। प्राकृतिक रूप से व्युत्पन्न चितोसन ( श्रृम्प, लोबस्टर एवं क्रैब के शेल से प्राप्त प्राकृतिक बायोपोलीमर) एक पर्यावरण के लिए अनुकूल टिकाऊ मैटेरियल है जिसका उपयोग सीडी को संश्लेषित करने के लिए किया गया।
  • चूंकि यह एक इलेक्टोकैमिकल सेंसर है, इलेक्ट्रोड का विकास कार्बन डौट्स (कार्बन नैनोपार्टिकल्स) को डिपोजिट करने के द्वारा और फिर उन पर बैक्टेरियल डीएनए को स्थिर करने के जरिये किया गया। इस इलेक्ट्रोड प्रणाली का उपयोग वर्तमान पीक के मापन के लिए किया गया। एनडीएमए एवं एनडीईए दोनों ही इलेक्ट्रोड में उपस्थित डीएनए की रसायनिक संरचना को बदल देते हैं जिससे यह अधिक संवाही हो जाता है जिसका परिणाम अंततोगत्वा सवंर्द्धित वर्तमान पीक के रूप में आता है।
  • संरचनागत रूप से समान कुछ ऐसे ही रसायनिक यौगिकों को यह जांच करने के लिए जोड़ा गया कि क्या वे प्रणाली में हस्तक्षेप कर सकते हैं। लेकिन ये रसायन डीएन क्रम को नहीं बदल सकते, इसलिए वे प्रणाली को प्रभावित नहीं करते।

:: पर्यावरण और पारिस्थितिकी ::

अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस(International Day for Biological Diversity)

  • प्रतिवर्ष संयुक्त राष्ट्र के द्वारा जैव विविधता के मुद्दों के बारे में लोगों की समझ और जागरूकता विकसित करने के लिए 22 मई को अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस(International Day for Biological Diversity) मनाया जाता है। वर्ष 2020 के जैव विविधता दिवस की थीम ‘Our solutions are in nature’ है।

इस वर्ष जैव विविधता के लोगो में 4 चित्रों का मतलब

  • पहले चित्र में एक लड़की और फूल बना हुआ है। लड़की से आशय मनुष्य के पर्यावरणीय दायित्व और सामाजिक दायित्व से पर्यावरण से होने वाले परिवर्तन है वही फूल से आशय जैव विविधता के सतत सदुपयोग से है जो हम जैव विविधता से प्राप्त करते हैं।
  • दूसरे चित्र में एक मधुमक्खी और वृक्ष है। यहां पर मधुमक्खी का एक परागकर्ता के रूप में इसके महत्व को दर्शाता है वही दूसरी ओर वृक्ष इस पारिस्थितिकी तंत्र में दी जा रही अपनी विभिन्न सेवाओं जैसे फल और अन्य उत्पाद के साथ-साथ स्वास्थ्य सेवाएं, को प्रदर्शित करता है।
  • तीसरे चित्र में ‘गूज-Goose’ पक्षी को दिखाया गया है जो माइग्रेटरी बर्ड समेत अन्य माइग्रेटरी स्पीशीज, जो कि जल और स्थल में प्रवास करते हैं, इस महत्व को दर्शाता है कि इनका भौगोलिक क्षेत्र और आवास देश की सीमाओं से परे होता है।
  • चौथे चित्र में ध्रुवीय भालू को दिखाया गया है जो एक ऐसे प्रजाति जलवायु परिवर्तन और आवास विखंडन का सर्वश्रेष्ठ प्रतिनिधित्व करता है।

वर्ष 2020 को जैव विविधता के लिए क्यों सर्वश्रेष्ठ वर्ष माना जा रहा है?

  • संयुक्त राष्ट्र अध्यक्ष के द्वारा न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र असेंबली में 22-23 सितंबर को एक बैठक का आयोजन किया जाएगा जिसकी थीम है “ सतत विकास के लिए जैव विविधता पर तुरंत कार्रवाई”।
  • 2020 के जैव विविधता कन्वेंशन में जैव विविधता के संदर्भ में वर्ष 2020 से आगे वैश्विक जैव विविधता फ्रेमवर्क को स्वीकार करेगा जो 2050 के विजन “"Living in harmony with nature" के अनुरूप होगा। इसमें कुल 196 पार्टी के द्वारा नए नियमों के लिए बातचीत प्रारंभ करेंगें जो जैव विविधता के लिए नए नियम बनाएगा।

अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस 2020 से जुड़ें और महत्वपूर्ण तथ्य

  • अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस 2020 के वर्चुअल उत्सव में, केन्‍द्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री प्रकाश जावड़ेकर ने जैव विविधता के संरक्षण के लिए पांच प्रमुख पहलों की शुरूआत की।
  • इस अवसर पर, केन्‍द्रीय पर्यावरण मंत्री ने राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (एनबीए) और संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) का जैव विविधता संरक्षण प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया, जिसमें एक खुली, पारदर्शी और ऑनलाइन प्रतियोगी प्रक्रिया के जरिये एक वर्ष की अवधि के लिए 20 छात्रों को स्नातकोत्तर डिग्री के साथ जोड़ने का प्रस्ताव है।
  • वर्चुअल कार्यक्रम में लुप्तप्राय प्रजातियों की अवैध तस्करी पर यूएनईपी अभियान का शुभारंभ भी देखा गया: ‘सभी जानवर इच्‍छा से पलायन नहीं करते’। वन्यजीवों में अवैध व्यापार से खतरनाक महामारी फैलने का खतरा रहता है। वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो द्वारा यूएनईपी के साथ शुरू किए गए सभी जानवर इच्‍छा से पलायन नहीं करते अभियान, इन पर्यावरणीय चुनौतियों को दूर करने, जागरूकता बढ़ाने और समाधान की वकालत करने का प्रयास करता है

अक्षय ऊर्जा की सम्भावना हेतु एनटीपीसी और ओएनजीसी में समझौता

  • ऊर्जा मंत्रालयके तहत सार्वजनिक कंपनी एनटीपीसी लिमिटेड और पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैसमंत्रालय के तहत पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस निगम लिमिटेड (ओएनजीसी) नेअक्षय ऊर्जा व्यापार के वास्ते एक संयुक्त उपक्रम कंपनी बनाने के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं । इस समझौता ज्ञापन से दोनों कंपनियां अब ऊर्जा क्षेत्र में अपनी मौजूदगी को तेजी से आगे बढ़ने में सक्षम होंगी।
  • दोनों महारत्न कंपनियां समझौते के अनुसार, एनटीपीसी औरओएनजीसी भारत और विदेश में ऑफशोर विंड और अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं कीस्थापना से जुड़ी संभावनाओं का पता लगाएंगी।
  • दोनों कंपनियां संवहनीयता भंडारण, ई-परिवर्तनीयता और ईएसजी (पर्यावरणीय, सामाजिक एवं प्रबंधन) के अनुकूल परियोजनाओं के क्षेत्र में भीसंभावनाओं का पता लगाएंगी ।

वर्तमान स्थिति

  • एनटीपीसीके पास अभी 920 मेगावाट की स्थापित अक्षय ऊर्जा परियोजनाएं हैं और लगभग 2300 मेगावाट की अक्षय ऊर्जा परियोजनाएं अभी निर्माण की प्रक्रिया में हैं । इस समझौते से एनटीपीसी अपनी अक्षय ऊर्जा क्षमता योग कार्यक्रम में तेजी लाएगी और ऑफशोर विंड और विदेश में अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं में अपनी मौजूदगीका विस्तार करेंगी। इससे भारत की सबसे बड़ी बिजली उत्पादक कंपनी एनटीपीसीको 2032 तक 32 गीगा वाट (जीडब्ल्यू) अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं केमहत्वाकांक्षी लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिलेगी ।
  • ओएनजीसी के पास अभी 176 मेगा वाट की अक्षय ऊर्जा परियोजनाएं हैं जिसमें 153 मेगावाटपवन ऊर्जा और 23 मेगावाट सौर ऊर्जा शामिल हैं। इस नए समझौते से अक्षय उर्जाव्यापार में ओएनजीसी की मौजूदगी बढ़ेगी और 2040 तक यह अपने पोर्टफोलियोमें 10 गीगा वाट (जीडब्ल्यू) अक्षय उर्जा जोड़ने का अपना लक्ष्य हासिल करनेमें सक्षम होगी।
  • एनटीपीसीसमूह के पास कुल स्थापित क्षमता 62110 मेगावाट की है। इनमें एनटीपीसी केपास 70 ऊर्जा केंद्र हैं जिनमें 25 संयुक्त उपक्रम सहित, 24 कोयला, 7 संयुक्तगैस/द्रव्य, 1 हाइड्रो, और 13 अक्षय ऊर्जा केंद्र हैं।

:: विविध ::

डॉ. हर्ष वर्धन विश्व स्वास्थ्य संगठन के कार्यकारी बोर्ड के अध्यक्ष निर्वाचित

  • केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री डॉ हर्ष वर्धन आज विश्व स्वास्थ्य संगठन के कार्यकारी बोर्ड के वर्ष 2020-21 के लिए अध्यक्ष निर्वाचित किए गए। कार्यकारी बोर्ड के 147वें सत्र की एक वचुर्अल बैठक में उन्हें निर्वाचित किया गया। डॉ हर्ष वर्धन जापान के हीरोकि नाकातानी का स्थान लेंगे।

असम की जाह्न्वी फूकन बनीं फिक्की के महिला संगठन की राष्ट्रीय अध्यक्ष

  • असम की उद्यमी जाह्न्वी फूकन फिक्की के महिला संगठन (एफएलओ) की राष्ट्रीय अध्यक्ष चुनी गयी हैं। फिक्की एफएलओ ने कहा कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला की मौजूदगी में 36वें एफएलओ वार्षिक सत्र में फूलन ने निवर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष हरजिंदर कौर तलवार से पदभार संभाला। “फूकन फिक्की एफएलओ की 37वीं राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं।
  • फिक्की एफएलओ के 17 क्षेत्रों में निकाय हैं। यह राष्ट्रीय स्तर पर 8,000 से अधिक महिला उद्यमियों और पेशेवरों का प्रतिनिधित्व करता है।

:: प्रिलिम्स बूस्टर ::

  • प्रतिवर्ष किस तिथि को अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस मनाया जाता है एवं वर्ष 2020 के इस दिवस की थीम क्या है? (22 मई, ‘Our solutions are in nature’)
  • जयंती दिवस से चर्चा में रहे राजा राममोहन राय के द्वारा हिंदू धर्म को सरल बनाने एवं सामाजिक सुधार हेतु किस संस्था की स्थापना की गई? (ब्रह्म समाज, 1828 में)
  • भारत और विदेश में ऑफशोर विंड और अक्षय ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए हाल ही में किन दो महारत्न कंपनियों ने आपस में समझौता किया है? (NTPC और ONGC)
  • हाल ही में कार्य की समीक्षा से चर्चा में रहे ‘प्रधानमंत्री ऊर्जा गंगा’ क्या है? (पूर्वी भारत से पश्चिम भारत तक गैस पाइपलाइन कॉरिडोर- जगदीशपुर से पश्चिम बंगाल)
  • हाल ही में भारतीय मौसम विभाग के द्वारा 7 सेवाएं उपलब्ध कराने से चर्चा में रही ‘उमंगUMANG’ क्या है? (एक ऐप-ई गवर्नेंस हेतु सरकारी सेवाओं का एकीकृत प्लेटफार्म)
  • भारत के किसानों की आय दोगुनी करने के संदर्भ में चर्चा में रहे “ मीठी क्रांति-‘Sweet Revolution’ किस क्षेत्र से संबंधित है? (शहद उत्पादन/ मधुमक्खी पालन)
  • किन संस्थाओं के द्वारा लुप्तप्राय प्रजातियों की अवैध तस्करी पर वैश्विक अभियान‘सभी जानवर इच्‍छा से पलायन नहीं करते’ की शुरुआत की गई है? (वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो द्वाराUNEP)
  • 15000 करोड़ रुपए के लाइन आफ क्रेडिट से चर्चा में रहे भारतीय निर्यात-आयात बैंक(EXIM) स्थापना कब की गई एवं इसका मुख्यालय कहां है? (1982,मुंबई)
  • हाल ही में किसे फिक्की के महिला संगठन (एफएलओ) की राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में चयन किया गया है? (जाह्न्वी फूकन, असम)
  • हाल ही में किस देश ने मुक्त आकाश संधि (Open Skies Treaty) से बाहर निकलने की घोषणा की है? (अमेरिका)
  • मोनसेंटो कंपनी की जांच के आदेश देने से चर्चा में रहे भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) का गठन कब किया गया एवं इसमें कितने सदस्य होते हैं? (2003, एक अध्यक्ष और 6 सदस्य)
  • हाल ही में किसे वर्ष 2021-22 के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन के कार्यकारी बोर्ड के अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया है? (डॉक्टर हर्षवर्धन-भारत)

स्रोत साभार: Dainik Jagran (Rashtriya Sanskaran), Dainik Bhaskar (Rashtriya Sanskaran), Rashtriya Sahara (Rashtriya Sanskaran) Hindustan Dainik (Delhi), Nai Duniya, Hindustan Times, The Hindu, BBC Portal, The Economic Times (Hindi & English), PTI, PIB

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