(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (23 जुलाई 2020)

दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर


(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (23 जुलाई 2020)


:: राष्ट्रीय समाचार ::

काकरापार परमाणु ऊर्जा संयन्त्र

चर्चा में क्यों?

  • प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने को काकरापार परमाणु ऊर्जा संयंत्र -3 के लिए वैज्ञानिकों को बधाई दी, उन्होंने कहा कि यह स्वदेशी रिएक्टर 'मेक इन इंडिया' अभियान का एक शानदार उदाहरण है।
  • स्वदेशी डिजाइन पर आधारित 700 एमडब्‍ल्‍यूई का केएपीपी-3 रिएक्टर स्वदेशी तकनीक का उत्कृष्ट उदहारण है जिसके परमाणु रिएक्टर के के परिचालन के बाद भारत उन देशों की कतार में खड़ा हो गया है, जिनके पास न्यूक्लियर पावर तकनीक है।

काकरापार परमाणु ऊर्जा संयन्त्र के बारे में

  • काकरापार परमाणु ऊर्जा संयन्त्र, भारत का एक परमाणु ऊर्जा संयंत्र है जो गुजरात के तापी जिले के व्यारा नगर के समीप स्थित है। यहाँ पर पहले से ही 220 मेगावाट क्षमता के दो परमाणु रिएक्टर थे।
  • ये दाबित भारी जल रिएक्टर हैं।
  • काकरापार में पहली इकाई की स्थापना 1992 में हुई थी।
  • अभी निर्मित स्वदेशी रिएक्टर काकरापार में तीसरा संयंत्र है जिसकी क्षमता 700 मेगावाट है। यह रिएक्टर मेक इन इंडिया तथा आत्मनिर्भर भारत के अभियान को बढ़ावा देगा।
  • वर्ष 2003 में काण्डू ओनर्स ग्रुप (CANDU Owners Group (COG)) ने इस संयन्त्र को सर्वश्रेष्ठ कार्य करने वाला दाबित जल रिएक्टर घोषित किया था
  • काकरापार के चौथे सयंत्र पर काम चल रहा है। इसके 2022 -23 तक पूर्ण होने की सम्भावना है।

भारत का न्यूक्लियर ट्रॉयड

चर्चा में क्यों?

  • चीन के साथ बढ़ते तनाव के बीच भारत ने अपने परमाणु सुरक्षा रणनीति में बड़ा फेरबदल किया है। एक अमेरिकी थिंकटैंक की रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने अपने परमाणु बमों के विकास और उसके रोकधाम की रणनीति को पाकिस्तान से हटाकर चीन पर फोकस कर लिया है। अब चीन की राजधानी पेइचिंग भी भारतीय परमाणु मिसाइलों की जद में आ गई है। इसके अलावा भी भारत कम से कम तीन ऐसे हथियारों का निर्माण कर रहा है जो उसे चीन के खिलाफ बड़ी ताकत प्रदान करेंगे।
  • बुलेटिन ऑफ एटॉमिक साइंटिस्ट्स में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, 2017 डोकलाम स्टेंडऑफ के बाद भारत ने अपने परमाणु रणनीति का ध्यान पाकिस्तान से हटाकर पेइचिंग पर केंद्रित कर लिया है। भारत पहले पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम के अनुसार अपनी सुरक्षा के लिए कदम उठाता था।
  • इस रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने 150 से 200 परमाणु बमों को बनाने में प्रयोग किए जाने वाले प्लूटोनियम का संवर्धन कर रखा है। हालांकि भारत के पास वर्तमान में 150 से कम परमाणु बमों का जखीरा है।

क्या है न्यूक्लियर ट्रॉयड?

  • जो देश जमीन-हवा और पानी से परमाणु हमला करने में सक्षम होते हैं उन्हें न्यूक्लियर ट्रॉयड सपन्न देश कहा जाता है।

भारत के न्यूक्लियर ट्रॉयड से संबंधित मुख्य तथ्य

  • रिपोर्ट के अनुसार, भारत वर्तमान में जमीन-हवा और पानी से परमाणु हमला करने में सक्षम है। भारत तेजी से परमाणु वॉरहेड ले जाने में सक्षम कई अन्य मिसाइलों का निर्माण भी कर रहा है। जिसमें से कई हथियार अपने अंतिम स्टेज में पहुंच गए हैं। इसमें जमीन से दागे जाने वाली अग्नि-6 मिसाइल और पनडुब्बियों से फायर की जाने वाली के-5 मिसाइल शामिल हैं।
  • इस रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत के पास आठ हथियार ऐसे हैं जिनसे कभी भी परमाणु हमला किया जा सकता है। इनमें से हवा से हमला करने वाले 2 हथियार, जबकि जमीन से हमला करने वाले 4 बैलेस्टिक मिसाइल प्रणाली और 2 समुद्र आधारिक बैलेस्टिक मिसाळि प्रणाली शामिल हैं। इसके अलावा कम से कम 3 हथियार विकासशील प्रक्रिया में हैं।
  • भारत के पास हवा से परमाणु हमला करने में सक्षम विमानों में मिराज 2000एच और जगुआर आईएस एयरक्राफ्ट शामिल हैं। इनके अलावा इस महीने के अंत में शामिल होने वाला राफेल लड़ाकू विमान भी परमाणु मिसाइलों को दागने में सक्षम है। भारत मिराज 2000एच विमान को अपग्रेड कर रहा है जिसके बाद इन्हें मिराज 2000आई के नाम से जाना जाएगा।
  • भारत के पास अंतरमहाद्वीपीय मिसाइल अग्नि-5 है, जो 5000 किमी दूर तक हमला करने में सक्षम है। यह मिसाइल अपने साथ परमाणु बमों को ले जाने में सक्षम है। जिससे यह चीन के कई हिस्सों में निशाना लगाया जा सकता है। इसके अलावा अग्नि 6 मिसाइल के विकास की प्रक्रिया भी जारी है जो इससे भी ज्यादा रेंज तक परमाणु हमला करने में सक्षम होगी।
  • भारत के पास समुद्र से भी बैलेस्टिक मिसाइलों के जरिए परमाणु हमला करने की ताकत है। जिसमें सबमरीन लॉन्च बैलेस्टिक मिसाइल (SLBM) k-4 शामिल है। इसके अलावा के-5 मिसाइल को भी विकसित किया जा रहा है। के-4 मिसाइल 3500 किमी तक मार करने में सक्षम है। इस मिसाइल को अबतक 6 बार टेस्ट किया जा चुका है।

भारतीय सेना में 86 फीसदी हथियार रूसी ऑरिजन के: स्टिम्सन सेंटर पेपर

  • लद्दाख में चीन के साथ चरम तनाव के बाद भले ही भारत और अमेरिका के बीच आपसी रिश्ते मजबूत हो रहे हों लेकिन आज भी हथियारों के मामले में भारतीय सेना रूस पर ही निर्भर है। सेना के पास रूस से मिले हथियारों का जखीरा है और मॉस्को पर यह निर्भरता आगे भी जारी रहेगी क्योंकि, 2014 से 55 फीसदी से ज्यादा रक्षा उपकरणों का आयात रूस से ही हुआ है।
  • अमेरिका स्थित स्टिम्सन सेंटर के समीर लालवानी और अन्य की स्टडी के अनुसार, भारतीय सेना में 86 फीसदी उपकरण, हथियार और प्लेटफॉर्म रूस से आयात किए हुए हैं। नेवी में 41 प्रतिशत, वायुसेना में दो तिहाई उपकरण रूस से मंगाए हुए हैं। सेना में यह आंकड़ा 90 फीसदीस्टॉकहोम स्थित SIPRI (Stockholm International Peace Research Institute) के अनुसार, 2014 में बीजेपी सरकार के सत्ता में आने के बाद भी रूस भारत को रक्षा उपकरणों का निर्यात करने वाला प्रमुख देश बना रहा और उसने 9.3 अरब डॉलर का निर्यात भारत को किया। अमेरिका इस दौरान 2.3 अरब डॉलर के निर्यात के साथ दूसरे नंबर पर रहा। तक का है।

रूसी ऑरिजन के हथियारों के बारे में

  • 'भारत की रूसी उपकरणों पर निर्भरता सेना में सबसे अधिक है। यही नहीं, वायुसेना और नेवी में भी यही हालात हैं। मारक क्षमता वाले प्लेटफॉर्म के मामले में रूस पर निर्भरता ज्यादा है। इन हथियारों और उपकरणों की लाइफस्पैम को देखते हुए कहा जा सकता है कि अभी रूस पर निर्भरता बनी रहेगी।
  • नेवी में शामिल न्यूक्लियर पनडुब्बी INS विक्रमादित्य और चक्र-II भी रूस के हैं। ऐसे ही लद्दाख में तैनात सेना के टी-90 और टी-72 युद्धक टैंक रूसी ऑरिजन के हैं। वायुसेना के सुखोई 30MKI लड़ाकू विमान, जिसका नासिक में HAL में उत्पादन होता है, वह भी रूसी ऑरिजन के हैं। देश का एकलौता न्यूक्लियर क्षमता से लैस सुपरसोनिक ब्रह्मोस मिसाइल भी रूस के साथ मिलकर तैयार किया गया है।

अमेरिका ऑरिजन के हथियारों के बारे में

  • ऐसा नहीं है कि भारत के पास सभी सैन्य उपकरण रूसी ही हो बल्कि कुछ अमेरिका के भी हैं लेकिन रूस की तुलना में उनकी मौजूदगी बेहद कम हैं। अपाचे और चिनूक हेलिकॉप्टर को अमेरिका ने भारत को दिया है और ये अभी लद्दाख में तैनात हैं। इसके अलावा M777 होवित्जर गन का आयात भी अमेरिका से किया गया है। बोइंग C-17 और C-130J के जरिए वायुसेना भारी सामानों को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाती है। इसे भी अमेरिका से ही खरीदा गया है। इसके अलावा नेवी को पनडुब्बी के बारे में पता लगाने वाले P81 एयरक्राफ्ट भी अमेरिका से मिले हैं।

क्यों है रूसी ऑरिजन के हथियारों को वरीयता

  • पहला तो लीगेसी का मुद्दा है। भारत और रूस के बीच लंबे समय से रक्षा संबंध हैं और दोनों देश एक-दूसरे के सिस्टम से वाकिफ हैं। दूसरा निर्भरता की बात और यह रूस के पहले के ट्रैक रिकॉर्ड पर आधारित है।
  • तीसरी बात है, जिस तरह के स्पेशल उपकरण रूस हमें देता है, वह कोई और नहीं दे पाता है। सबसे ताजा उदाहरण S-400 ऐंटी मिसाइल डिफेंस सिस्टम का है। हमने रूस से न्यूक्लियर क्षमता से लैस पनडुब्बी भी लीज पर लिया है।

:: अंतर्राष्ट्रीय समाचार ::

विश्व डोपिंग रोधी एजेंसी

चर्चा में क्यों?

  • विश्व डोपिंग रोधी एजेंसी (WADA) ने देश की राष्ट्रीय डोप परीक्षण प्रयोगशाला (NDTL) के निलंबन को और छः महीने के लिए बढ़ा दिया है।
  • राष्ट्रीय डोप परीक्षण प्रयोगशाला (NDTL) का यह निलंबन उसके अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप नहीं होने के कारण बढ़ाया गया है।

विश्व डोपिंग रोधी एजेंसी (WADA)

  • विश्व डोपिंग विरोधी एजेंसी एक विश्वस्तरीय स्वतंत्र संस्था है जो अंतर्राष्ट्रीय खेलों में ड्रग्स के बढ़ते चलन को रोकने के लिए बनाई गयी है।
  • इसकी स्थापना 10 नवंबर, 1999 को स्विट्जरलैंड के लुसेन शहर में की गई थी।
  • वर्तमान में वाडा का मुख्यालय कनाडा के मॉन्ट्रियल शहर में है और इसके वर्तमान अध्यक्ष पोलैंड के पूर्व धावक वीटोल्ड बांका हैं।
  • यह संस्था विश्व भर में वैज्ञानिक शोध, एंटीडोपिंग के विकास की क्षमता में वृद्धि और दुनिया भर में वर्ल्ड एंटी डोपिंग कोड पर अपनी निगाह रखती है।
  • वाडा हर साल प्रतिबंधित दवाओं की सूची जारी करता है, जिनके विश्व के तमाम देशों में खेलों के दौरान प्रयोग पर रोक होती है।

राष्ट्रीय डोप परीक्षण प्रयोगशाला (NDTL)

  • भारत में डोप परीक्षण प्रयोगशाला को अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (आईओसी) और विश्व एंटी डोपिंग एजेंसी (वाडा) द्वारा स्थायी रूप से मानव खेलों में प्रतिबंधित दवाओं के परीक्षण के लिए मान्यता प्राप्त करने के उद्देश्य से स्थापित किया गया था।
  • नेशनल डोप परीक्षण प्रयोगशाला (NDTL) भारत सरकार के युवा मामले और खेल मंत्रालय के तहत एक स्वायत्त निकाय के रूप में स्थापित एक प्रमुख विश्लेषणात्मक परीक्षण और अनुसंधान संगठन है।
  • यह देश में एकमात्र ऐसी प्रयोगशाला है जो मानव खेल डोप परीक्षण के लिए जिम्मेदार है। इसकी अध्यक्षता मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) करते हैं, जो खेल विभाग, युवा मामले और खेल मंत्रालय, भारत सरकार के सचिव हैं।

:: अर्थव्यवस्था ::

भेदिया कारोबार के नियमों में संशोधित संशोधन

चर्चा में क्यों?

  • पूंजी बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने भेदिया कारोबार के नियमों में संशोधन कर दिया है।

पृष्ठभूमि

  • सेबी निदेशक मंडल ने भेदिया कारोबार के संबंध में पिछले महीने एक प्रस्ताव को मंजूरी दे दी थी। भेदिया कारोबार के नये नियमन 17 जुलाई 2020 से प्रभाव में आ गये हैं।

क्या किये गए है बदलाव?

  • सूचीबद्ध कंपनियों को अब अप्रकाशित मूल्य संवेदी सूचनाओं की प्रकृति को लेकर एक डजिटल डेटाबेस तैयार करना होगा। भेदिया कारोबार नियमों में जो बदलाव किये गये हैं उसके मुताबिक सूचीबद्ध कंपनियों को एक ढांचागत डिजिटल डेटाबेस अपने पास रखना होगा। इसमें अप्रकाशित मूल्य- संवेदी सूचना की प्रकृति के बारे में पूरी जानकारी रखने के साथ ही उस व्यक्ति का नाम भी होना चाहिये जिसने इस तरह की सूचना को प्रसारित किया है।
  • इसके साथ ही शेयर बाजारों को इस प्रकार की जानकारी स्वत: पहुंचाने और शेयर कारोबार पर प्रतिबंध लगाने जैसी स्व-स्फूर्त प्रक्रिया होनी चाहिये। भेदिया सूचना को फैलाने वाले व्यक्ति के नाम के साथ ही उन लोगों की भी जानकारी रखनी होगी जिनके साथ इस तरह की सूचना साझा की गई। उनके साथ व्यक्तियों के पैन नंबर अथवा कोई अन्य पहचान वाला अधिकृत डेटा भी रखना होगा।
  • संशोधित नियमों में कहा गया है कि इस प्रकार का डेटाबेस का काम बाहर किसी अन्य इकाई से नहीं कराया जा सकता है। यह पूरा रखरखाव आंतरिक तौर पर करना होगा जिसपर पर्याप्त नियंत्रण होना चाहिये।

क्या है भेदिया कारोबार ?

  • बता दें कि निवेशकों के हितों की रक्षा के लिये सेबी द्वारा भेदिया कारोबार पर रोक लगाई गई है। जब कंपनी के मैनेजमेंट से जुड़ा कोई व्यक्ति अंदरूनी जानकारी होने के आधार पर शेयर खरीद या बेचकर गलत तरीके से मुनाफा कमाता है तो इसे इनसाइडर ट्रेडिंग कहा जाता है। सेबी कानून 1992 के तहत इनसाइडर ट्रेडिंग अपराध है।

:: विज्ञान और प्रौद्योगिकी ::

एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल 'ध्रुवास्त्र'

चर्चा में क्यों?

  • चीन के साथ तनाव के बीच भारत ने हाल ही में बेहद शक्तिशाली एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल 'ध्रुवास्त्र' (Dhruvastra) का टेस्‍ट किया है।ओडिशा के चांदीपुर स्थित आईटीआर से भारत ने स्वदेश में विकसित अपने एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल ध्रुवास्त्र के तीन सफल टेस्ट किए। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन ( डीआरडीओ ) की ओर से बनाए गए ध्रुवास्त्र को हेलीकॉप्टर से लांच किया जा सकता है कि वह दुनिया के सबसे आधुनिक एंटी-टैंक हथियारों में से एक है।

क्या है 'ध्रुवास्त्र'?

  • थर्ड जेनेरेशन ऐंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल 'ध्रुवास्त्र' (Dhruvastra anti-tank guided missile) देश के पुराने मिसाइल 'नाग हेलीना' (HELINA) का हेलीकॉप्टर संस्करण है। इसके जरिए आसमान से सीधे दाग कर दुश्मन के बंकर, बख्तरबंद गाड़ियों और टैंकों को नस्तेनाबूत किया जा सकता है।
  • 'ध्रुवास्त्र' मिसाइल का ओडिशा में डायरेक्‍ट और टॉप अटैक मोड में सफल टेस्‍ट किया है। इस मिसाइल की रेंज चार किलोमीटर से लेकर सात किलोमीटर तक हो सकती है।
  • 'नाग' मिसाइल दुर्गम जगहों पर दुश्‍मनों के टैंक को आसानी से उड़ा सकती है। इस मिसाइल सिस्‍टम में एक से बढ़कर आधुनिक तकनीकों का इस्‍तेमाल किया गया है।

:: पर्यावरण और पारिस्थितिकी ::

स्मॉग टॉवर

चर्चा में क्यों?

  • सुप्रीम कोर्ट ने वायु प्रदूषण से राहत दिलाने के लिए केंद्र सरकार को एक हफ्ते के अंदर पूर्वी दिल्ली के आनंद विहार में स्मॉग टावर लगवाने के लिए सहमति पत्र जारी करने को कहा है।
  • इसके लिए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (मुंबई) के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) में हस्ताक्षरित करने का निर्देश दिया है।

क्या होता है स्मॉग टावर?

  • स्मॉग टॉवर एक चिमनी के आकार की संरचना वाला एक बहुत बड़ा एयर प्यूरीफायर होता है।
  • स्मॉग टावरों को बड़े पैमाने पर एयर प्यूरिफायर के रूप में काम करने के लिए तैयार किया गया है।
  • ऐसा अनुमान है कि लाजपत नगर में स्थापित स्मॉग टॉवर हर दिन 6,00,000 क्यूबिक मीटर हवा को साफ़ करने में सक्षम है और यह हवा से तकरीबन 75 फीसदी से अधिक प्रदूषित कणों को साफ़ करता है।
  • स्मॉग टावर परियोजना को IIT मुंबई ने IIT दिल्ली और मिनी सोटा विश्वविद्यालय के सहयोग से अमली जामा पहनाया गया है। इस परियोजना में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड़ की भी मदद ली गयी है।
  • गौरतलब है कि चीन अपने शहरों की हवा को शुद्ध करने के लिए बड़ी मात्रा में स्मॉग टावरों का उपयोग कर रहा है।

कैसे काम करता है स्मॉग टावर?

  • इसमें आमतौर पर एयर फिल्टर की कई परतें होती हैं, जो हवा से प्रदूषकों को साफ करते है जब यह हवा इन फिलटरों से होकर गुज़रती है।
  • टॉवर में लगाए गए फिल्टरों में मुख्य घटक के रूप में कार्बन नैनोफाइबर का उपयोग किया गया है जिनका काम हवा से प्रदूषक कणों या पार्टिकुलेट मैटर को कम करना है।
  • दिल्ली एनसीआर में प्रदूषण का स्तर इतना अधिक है कि यहाँ का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 700 के पार तक चला जाता है। ऐसे में ये स्मॉग टॉवर दिल्ली के प्रदूषण को कम करने में सहायक हो सकते हैं।

डिब्रू-सैखोवा राष्ट्रीय पार्क

चर्चा में क्यों?

  • राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने पर्यावरण मंत्रालय और ऑयल इंडिया लिमिटेड (OIL) सहित दो अन्य संस्थाओं को यह बताने के लिए निर्देशित किया है कि पूर्वी असम के एक राष्ट्रीय उद्यान में सात तेल कुओं की प्रस्तावित ड्रिलिंग की अनुमति कैसे दी गई’?
  • अन्य दो उत्तरदायी संस्थाएं असम राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और असम राज्य जैव विविधता बोर्ड हैं।
  • एनजीटी यह निर्देश असम के संरक्षणवादियों बिमल गोगोई और मृदु पबन फूकन की याचिका सुनवाई के बाद जारी किए हैं।
  • यह याचिका डिब्रू-सैखोवा राष्ट्रीय पार्क में ऑयल इंडिया लिमिटेड को ऑयल ड्रिलिंग के लिए दी पर्यावरण मंजूरी में सितंबर 2017 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन के विरुद्ध दायर की गयी थी।

डिब्रू-सैखोवा राष्ट्रीय पार्क के बारे में

  • डिब्रू-सैखोवा राष्ट्रीय पार्क पूर्वी असम में ब्रह्मपुत्र नदी के दक्षिणी तट में स्थित है। यह पार्क मुख्यतः नमीदार मिश्रित अर्ध-सदाबहार वन, नमीदार मिश्रित पतझड़ीय वन तथा घास के मैदानों से युक्त है।
  • डिब्रू-सैखोवा पार्क असम राज्य सरकार द्वारा 1986 में एक वन्यजीव अभयारण्य के रूप में घोषित किया गया था। इसके बाद वर्ष 1999 में भारत सरकार ने इसे राष्ट्रीय उद्यान का दर्जा दे दिया।
  • लगभग 11.19 वर्ग क्षेत्र में फैला यह अभ्यारण्य असम घाटी के डिब्रूगढ़ तथा तिनसुकिया जिलों के मध्य स्थित है। यह अरुणाचल प्रदेश की सीमा के करीब भी है तथा यहां प्रसिद्ध स्टिलवेल रोड समेत द्वितीय विश्व युद्ध के कब्रिस्तान भी हैं।
  • सैखोवा नेशनल पार्क मुख्‍य रूप से सफेद पंखों वाले देवहंस (Wood Duck) के संरक्षण के लिए बनाया गया था। बाद में यह राष्‍ट्रीय उद्यान जंगली घोड़ों और चमकदार सफेद पंखों वाली बतख के रूप में प्रसिद्ध हो गया। यहां पक्षियों की करीब 350 से ज्‍यादा प्रजातियां पाई जाती हैं।
  • असम के अन्य प्रमुख राष्ट्रीय पार्क हैं: काजीरंगा राष्ट्रीय पार्क, मानस राष्ट्रीय पार्क, ओरंग राष्ट्रीय पार्क, नामेरी राष्ट्रीय पार्क आदि।

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी)

  • राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010 द्वारा भारत में एक राष्ट्रीय हरित अधिकरण (National Green Tribunal) की स्थापना की गई है।
  • यह एक विशेष पर्यावरण अदालत है जो पर्यावरण संरक्षण और वनों का संरक्षण से संबंधित मामलों कि सुनवाई करती है।
  • अधिकरण की प्रधान पीठ नई-दिल्ली में और भोपाल, पुणे, कोलकाता और चेन्नई अधिकरण के अन्य चार पीठें हैं।
  • एनजीटी की संरचना में अध्यक्ष, न्यायिक सदस्य और विशेषज्ञ सदस्य शामिल होते हैं, जिनका कार्यकाल 5 वर्षों का होता है ।
  • इसमें पूर्णकालिक अध्यक्ष के रूप में भारत के सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश या उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति केंद्र सरकार द्वारा की जाती है।
  • प्रत्येक श्रेणी में निर्धारित न्यायिक और विशेषज्ञ सदस्यों की न्यूनतम संख्या 10 अधिकतम संख्या 20 होती है।

2030 तक कुल बिजली उत्पादन में नवीकरणीय ऊर्जा की हिस्सेदारी 60 प्रतिशत

  • ‘द एनर्जी रिसोर्स इंस्टीट्यूट (टेरी) द्वारा आयोजित वेबिनार (इंटरनेट के माध्यम से होने वाला सेमिनार) में भाग लेते हुए बिजली और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री आर के सिंह ने कहा कि देश में 2030 तक कुल बिजली उत्पादन क्षमता में स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों की हिस्सेदारी करीब 60 प्रतिशत होगी।
  • वेबिनार के दौरान मंत्री ने ‘रिन्यूबल पावर पाथवे: मॉडलिंग द इंटिग्रेशन ऑफ विंड एंड सोलर इन इंडिया बाई 2030’ शीर्षक से रिपोर्ट भी जारी किया। इसके अलावा उन्होंने ‘बेंडिंग द कर्व: 2025 फोरकास्ट फॉर इलेक्ट्रिसिटी डमिांड बाई सेक्टर एंड स्टेट इन द लाइट ऑफ कोविड ऐपिडेमिक’ शीर्षक से भी रिपार्ट जारी की। दोनों रिपोर्ट टेरी के नयी दिल्ली मुख्यालय मे स्थित शोध मंच‘ एनर्जी ट्रांजिशन कमीशन’ ने तैयार की है।

नवीकरणीय ऊर्जा से जुड़ें तथ्य

  • 2030 तक नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता 5,10,000 मेगावाट पहुंच जाएगी। इसमें पनबिजली क्षेत्र की 60,000 मेगावाट क्षमता शामिल है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले साल सितंबर में संयुक्त राष्ट्र राष्ट्रीय जलवायु कार्यवाही शिखर सम्मेलन में नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता 2022 तक 1,75,000 मेगावाट से बढ़ाकर 2030 तक 4,50,000 मेगावाट करने के लक्ष्य की घोषणा की थी।
  • ‘2030 तक 4,50,000 मेगावाट सौर और पवन ऊर्जा जैसे नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से आएंगे। इसके अलावा 60,000 मेगावाट पनबिजली क्षेत्र से आएगा।
  • देश में निर्माणधीन और पनबजली परियोजनाओं को मिलाकर स्वच्छ ऊर्जा क्षमता 1,90,000 मेगावाट है जो 2022 तक 1,75,000 मेगावाट के लक्ष्य से कहीं अधिक है।

कोयला मंत्रालय का वृक्षारोपण अभियान का शुभारंभ

  • केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह कल नई दिल्ली में केंद्रीय कोयला, खान एवं संसदीय कार्य मंत्री श्री प्रह्लाद जोशी की उपस्थिति में ‘वृक्षारोपण अभियान’ का शुभारंभ करेंगे। शुभारंभ समारोह के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री 6 इकोपार्कों/पर्यटन स्थलों का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे। यह आयोजन कोयला/लिग्नाइट के भंडार वाले 10 राज्यों के 38 जिलों में फैले 130 से भी अधिक स्थानों पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से होगा।
  • कोयला मंत्रालय द्वारा सभी कोयला / लिग्नाइट पीएसयू को शामिल करते हुए कल वृक्षारोपण अभियान आयोजित किया जाएगा। इसके दौरान कोयला / लिग्नाइट पीएसयू की खदानों, कॉलोनियों और अन्य उपयुक्त इलाकों में बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण किया जाएगा और आस पड़ोस के इलाकों में पौधे वितरित किए जाएंगे ताकि समाज द्वारा वृक्षारोपण को बढ़ावा दिया जा सके।
  • इको-पार्क / पर्यटन स्थल आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए मनोरंजन, एडवेंचर, जल खेलों, पक्षियों को देखने आदि के लिए विकल्प प्रदान करेंगे और पर्यटन सर्किट का हिस्सा बनने के लिए इन्हें एकीकृत भी किया जा सकता है। आत्मनिर्भरता के लिए राजस्व उत्पन्न करने और स्थानीय लोगों के रोजगार की संभावनाएं पैदा करने के लिए इन स्थलों की योजना बनाई जा रही है। #39;गोइंग ग्रीन' पर कोयला क्षेत्र का सबसे ज्यादा ज़ोर रहेगा जिसमें खनन किए गए इलाकों और खनन से निकले ढेरों के पारिस्थितिक पुनर्विकास, खदानों में और उनके आसपास और उपयुक्त स्थानों पर पौधारोपण के माध्यम से ग्रीन कवर यानी हरित दायरे को अधिकतम किया जाना शामिल है। मंत्रालय की 'गोइंग ग्रीन' पहल कोयला / लिग्नाइट पीएसयू और निजी खनिकों की सक्रिय भागीदारी के माध्यम से शुरू होगी। इस साल तीन कोयला / लिग्नाइट पीएसयू - कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल), एनएलसी इंडिया लिमिटेड (एनएलसीआईएल) और सिंगरेनी कोलियरीज कंपनी लिमिटेड (एससीसीएल) ने कोयला क्षेत्रों में और उनके आसपास 1789 हेक्टेयर क्षेत्र को कवर करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है, जिसके अंतर्गत जैव-पुन: चक्रण / पौधारोपण (1626 हेक्टेयर क्षेत्र), घास भूमि का निर्माण (70 हेक्टेयर क्षेत्र), हाइ-टेक कल्टीवेशन (90 हेक्टेयर क्षेत्र) और बांस वृक्षारोपण (3 हेक्टेयर क्षेत्र) का काम शामिल है।

बगजान तेल कुआँ:असम

चर्चा में क्यों?

  • असम के तिनसुकिया में बगजान स्थित ऑयल इंडिया के कुएं संख्या 5 के पास विस्फोट हुआ है। घटना के समय तीन विदेशी एक्सपर्ट मौजूद थे, जिन्हें गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया है। यह घटना तब हुई जब बगजान में आग बुझाने का काम चल रहा था।

पृष्ठभूमि

  • असम के तिनसुकिया जिले में ऑयल इंडिया लिमिटेड पिछले काफी समय से चर्चा में है। ऑयल इंडिया लिमिटेड के संचालित बगजान क्षेत्र में एक कुएं से 27 मई 2020 को प्राकृतिक गैस का अनियंत्रित रूप से रिसाव होने लगा था। इसके कारण विस्फोट हो गया जिससे आठ जून को कुएं में आग लग गई थी।
  • पेट्रोलियम मंत्रालय ने इस घटना की जांच के लिए तीन सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति का गठन भी किया था। समिति इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिये दीर्घकालिक उपायों की सिफारिश भी करेगी, ऐसा कहा गया था।
  • नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने तेल कुएं में लगी आग पर काबू पाने में असफल रहने पर सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनी ऑयल इंडिया पर 25 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था। एनजीटी का कहना था कि कुएं में लगी आग से पर्यावरण को बहुत नुकसान हो रहा है। बता दें कि तेल के कुंओं में कुंआ संख्या पांच से महीने से भी ज्यादा समय लगातार गैस का रिसाव हो रहा है और नौ जून को उसमें आग लग गई थी।

:: विविध ::

दुनिया के पांचवें सबसे अमीर: मुकेश अंबानी

  • रिलायंस इंडस्ट्रीज का बाजार पूंजीकरण (एममकैप) बड़ी तेजी से बढ़ता हुआ 13.17 लाख करोड़ रुपये (176.4 अरब डॉलर) पहुंच गया। इसके अलावा फोर्ब्स बिलिनेयर इंडेक्स में मुकेश अंबानी पांचवें स्थान पर पहुंच गए हैं। उनकी कुल संपत्ति 75 अरब डॉलर पार कर गई है।
  • बाजार पूंजीकरण में इस वृद्धि के साथ फोर्ब्स पत्रिका के अनुसार मुकेश अंबानी 75 अरब डॉलर की संपत्ति के साथ अमीरों की सूची में पाचवें स्थान पर आ गये हैं। सूची में पहले स्थान पर 185.8 अरब डॉलर के साथ अमेजन के जेफ बेजोस हैं। वहीं बिल गेट्स (113.1 अरब डॉलर), एलवीएमएच के बर्नार्ड अर्नोल्ट ऐंड फैमिली (112.0 अरब डॉलर), फेसबुक के मार्क जुकरबर्ग (89 अरब डॉलर) के साथ क्रमश: दूसरे, तीसरे और चौथे स्थान पर हैं। बर्कशायर हैथवे के वारेन बफे 72.7 अरब डॉलर की संपत्ति के साथ छठे स्थान पर हैं।

:: प्रिलिम्स बूस्टर ::

  • हाल ही में सफल परीक्षण किए जाने से चर्चा में रहे 'ध्रुवास्त्र' क्या है? (एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल)
  • सिंगापुर के टेमासेक फाउंडेशन द्वारा भारत को दान किए जाने से चर्चा में रहे ‘ऑक्सीजन सांद्रक (Concentrators)’ का अनुप्रयोग क्या है? (वायुमंडलीय हवा को चिकित्सीय ऑक्सीजन में परिवर्तित करना)
  • TERI के वेबीनार में बिजली और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री द्वारा उद्घोषणा से चर्चा में रहे 2030 तक कुल बिजली उत्पादन क्षमता में स्वच्छ ऊर्जा की हिस्सेदारी कितने प्रतिशत होगी? (60%)
  • हाल ही में सेबी के द्वारा नियमों में संशोधन किए जाने से चर्चा में रहे ‘भेदिया कारोबार’(इंसाइडर ट्रेडिंग) क्या होता है? (कंपनी की प्रतिभूतियों की अंदरूनी जानकारी का दुरुपयोग कर शेयर कारोबार करना)
  • राष्ट्रीय हरित अधिकरण द्वारा खनन को चुनौती देने वाली याचिका पर समिति बैठाने से चर्चा में रहे ‘सालेकी आरक्षित वन’ कहां स्थित है? (डिगबोई, असम)
  • उच्चतम न्यायालय के द्वारा केंद्र सरकार को आदेश दिए जाने से चर्चा में रहे ‘स्मॉग टावर’ का अनुप्रयोग क्या है? (हवा को शुद्ध करना)
  • हाल ही में स्वदेश में डिजाइन किए गए किस परमाणु रिएक्टर संयंत्र ने सामान्य परिचालन की स्थिति प्राप्त की एवं यह संयंत्र कहां स्थित है? (काकरापार परमाणु संयंत्र, गुजरात)
  • भारत के परमाणु कार्यक्रम पर बुलेटिन ऑफ एटॉमिक साइंटिस्ट्स की रिपोर्ट से चर्चा में रहे ‘न्यूक्लियर ट्रॉयड सपन्न’ देश किसे कहा जाता है? (वह देश जो जमीन-हवा और पानी से परमाणु हमला करने में सक्षम हो)
  • हाल ही में किस भारतीय उद्योगपति ने फोर्ब्स बिलिनेयर इंडेक्स में पांचवें विश्व के सबसे बड़े अमीर के रूप में अपनी जगह बनाई वहीं इस सूची में शीर्ष स्थान पर कौन काबिल है? (मुकेश अंबानी, जेफ बेजोस)
  • विगत काफी समय से तेल के कुएं में लगी आग एवं विस्फोटों से चर्चा में रहे ‘बगजान’ स्थित ऑयल इंडिया का कुआं किस राज्य में अवस्थित है? (तिनसुकिया, असम)
  • हाल ही में चर्चा में रही कोयला विभाग की 'गोइंग ग्रीन' पहल क्या है? (खनन इलाकों में पारिस्थितिक पुनर्विकास एवं पौधारोपण के माध्यम से ग्रीन कवर बढ़ाना)

स्रोत साभार: Dainik Jagran (Rashtriya Sanskaran), Dainik Bhaskar (Rashtriya Sanskaran), Rashtriya Sahara (Rashtriya Sanskaran) Hindustan Dainik (Delhi), Nai Duniya, Hindustan Times, The Hindu, BBC Portal, The Economic Times (Hindi & English), PTI, PIB