(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (22 मई 2020)

दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर


(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (22 मई 2020)


:: राष्ट्रीय समाचार ::

पदम-दारचा सड़क

चर्चा में क्यों?

  • लद्दाख को हिमाचल प्रदेश से सीधे जोड़ने वाली नीमो-पदम-दारचा सड़क केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में भारतीय सेना की ताकत को और बढ़ाएगी। चीन और पाकिस्तान को जवाब देने के लिए भारतीय सेना के जवान हिमाचल के दारचा के रास्ते पदम और फिर नीमो होते हुए कुछ ही घंटों में लेह और कारगिल तक पहुंच जाएंगे। अगले महीने के अंत तक इसके खुलने की पूरी उम्मीद है। 298 किलोमीटर के इस महत्वाकांक्षी सड़क प्रोजेक्ट की निगरानी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद कर रहे हैं।

पदम-दारचा सड़क के रणनीतिक और आर्थिक लाभ

  • दारचा-पदम-नीमो सड़क हिमाचल प्रदेश की लाहौल घाटी के दारचा को कारगिल जिले के जंस्कार के पदम इलाके को जोड़ेगी। दारचा से पदम की दूरी करीब 148 किलोमीटर है। पदम के बाद यह सड़क नीमो के रास्ते लेह मार्ग से जुड़ जाएगी। इस सड़क के बनने से सेना का साजोसामान कारगिल व लेह तक पहुंचाना आसान हो जाएगा। पहले जंस्कार जाने के लिए तीन गुना अधिक सफर करना पड़ता था।
  • पुराने ट्रैकिंग रूट को पहले मोटरेबल रोड और अब उसे अच्छी सड़क बनाने से मनाली की ओर से पदम पहुंचने का सफर करीब 600 किलोमीटर कम हो जाएगा। इस समय मनाली से लेह होते हुए पदम पहुंचने का सफर करीब 900 किलोमीटर का है।
  • 1999 में कारगिल युद्ध के दौरान पाकिस्तानी सेना ने हाईवे को निशाना बनाकर भारतीय सेना के लिए मुश्किलें पैदा की थीं। कारगिल में ऊंचाई पर बैठा दुश्मन आसानी से हाईवे पर सेना की मूवमेंट को देखने के साथ उसे निशाना बना सकता था। इसलिए सेना इस क्षेत्र में एक सुरक्षित सड़क की जरूरत महसूस कर रही थी। इसके बाद सेना ने लेह और कारगिल तक पहुंचने के लिए अन्य सड़कों के विकल्प तलाशना शुरू किए। इसके फलस्वरूप दारचा-पदम-नीमो सड़क सामने आई।
  • दारचा-पदम-नीमो सड़क को लेकर जंस्कार और पदम क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा मिलना तय है। पदम के काउंसिलर स्टेंजिन लापका का कहना है कि यह प्रोजेक्ट भाग्य बदलने वाला है। इस सड़क के बनने से पदम में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। जंस्कार के लोगों को भी फायदा होगा। लोग एक ही दिन में आसानी से मनाली पहुंच सकेंगे। इस सड़क के निर्माण की मांग काफी समय से उठाई जा रही थी।
  • यह सड़क लद्दाख में सीमा की सुरक्षा के लिहाज से बहुत महत्वपूर्ण है। इसके बनने से लद्दाख में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को फायदा होगा। पर्यटन को प्रोत्साहन देने के लिए भी यह इस सड़क अहम होगी। प्रधानमंत्री द्वारा खुद इस प्रोजेक्ट की निगरानी करने से काम में तेजी आई है।

आयुष्मान भारत

चर्चा में क्यों?

  • प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने इस बात पर प्रसन्‍नता व्‍यक्‍त की कि ‘आयुष्मान भारत’ के तहत लाभार्थियों की संख्या एक करोड़ का आंकड़ा पार कर गई है। उन्होंने मेघालय की पूजा थापा के साथ टेलीफोन पर बातचीत की जो आयुष्मान भारत की 1 करोड़वीं लाभार्थी हैं।

क्या है आयुष्मान भारत?

  • आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (Ayushman Bharat-PMJAY) दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य बीमा योजना है. इसे सितंबर 2018 में लॉन्च किया गया था. PM-JAY का मकसद देश की आबादी में बॉटम 40 फीसदी में आने वाले गरीब, वंचित ग्रामीण परिवारों और शहरी श्रमिकों के परिवारों की चिन्हित कैटेगरी को स्वास्थ्य बीमा का लाभ देना है. इसके तहत देश के 10.74 करोड़ गरीब और वंचित परिवारों यानी 50 करोड़ लोगों को सालाना 5 लाख रुपये प्रति परिवार का कवर द्वितीयक व तृतीयक केयर कंडीशंस के लिए मिलेगा.

स्वयम पोर्टल

चर्चा में क्यों?

  • केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री श्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक‘ ने सूचित किया है कि विश्वविद्यालयों एवं संबद्ध महाविद्यालयों में नामांकित छात्र स्वयम कोर्स आरंभ कर सकते हैं और ऑनलाइन लर्निंग कोर्स के लिए क्रेडिट फ्रेमवर्क पर वर्तमान विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के वर्तमान विनियमनों के अनुरूप इन पाठ्यक्रमों को पूरा करने के द्वारा क्रेडिट का लाभ उठा सकते हैं।
  • यूजीसी ने विश्वविद्यालय के कुलपतियों एवं महाविद्यालयों के प्राचार्यों के साथ 82 यूजी एवं 42 पीजी गैर-इंजीनियरिंग एमओओसी पाठ्यक्रमों की एक सूची साझा की है जिसकी पेशकश स्वयम प्लेटफार्म पर जुलाई, 2020 सेमेस्टर में की जाएगी।
  • इन पाठ्यक्रमों में बायोकैमिस्ट्री /बायोटेक्नोलाजी/बायोलाजिकल साईसेज एवं बायोइंजीनियरिंग, शिक्षा, कानून, कंप्यूटर साईंस एवं इंजीनियरिंग, वाणिज्य, प्रबंधन, फार्मेसी, गणित, इतिहास, हिन्दी, संस्कृत आदि जैसे विषय क्षेत्र शामिल हैं।
  • कोविड-19 महामारी के वर्तमान परिदृश्य में छात्र, शिक्षक, जीवन पर्यंत सीखने वाले, वरिष्ठ नागरिक एवं गृहिणियां नामांकन करा सकती हैं और ज्ञान के अपने दायरे का विस्तार करने के लिए स्वयम पाठ्यक्रमों का लाभ उठा सकती हैं।

क्या है स्वयम पोर्टल ?

  • स्वयम (युवा आकांक्षी मस्तिष्कों के लिए एक्टिव-लर्निंग के स्टडी वेब) भारत सरकार द्वारा आरंभ एक प्रोग्राम है जिसकी रूपरेखा तीन आधारभूत सिद्धांतों अर्थात पहुंच, निष्पक्षता एवं गुणवत्ता अर्जित करने के लिए बनाई गई है।

राजीव गांधी किसान न्याय योजना

चर्चा में क्यों?

  • छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने आज से राजीव गांधी किसान न्याय योजना की शुरुआत की है। देश के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की पुण्यतिथि के मौके पर प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी और पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने एक साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए योजना की औपचारिक शुरुआत की।

योजना का लक्ष्य

  • प्रदेश सरकार ने राज्य में फसल उत्पादन को प्रोत्साहित करने और किसानों को उनकी उपज का सही दाम दिलाने के लिए राजीव गांधी किसान न्याय योजना की शुरुआत की है। इसके माध्यम से राज्य में खेती योग्य जमीन का क्षेत्रफल बढ़ाने एवं धान के अलावा अन्य फसलों के उत्पादन को प्रोत्साहित किया जाएगा। सरकार योजना के माध्यम से प्रदेश में सिंचाई व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए भी कदम उठाएगी। योजना का मकसद कोविड19 संकट के बीच ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देना और किसानों को प्रोत्साहन देना है।

कौन होंगें लाभार्थी?

  • योजना के तहत प्रदेश के 9,53,706 सीमांत किसान, 5,60,000 हजार छोटे किसान और 3,20,844 बड़े किसानों को इसका फायदा मिलगा। योजना के जरिए राज्य सरकार खरीफ 2020 के मौसम में अधिकतम 10,000 रुपये प्रति एकड़ की दर से धान और मक्का की खेती करने वाले किसानों को वित्तीय सहायता प्रदान करेगी। सहायता की राशि का निर्धारण सहकारी समिति के माध्यम से खरीदी गई फसल की मात्रा के आधार पर किया जाएगा। इसके तहत 18 लाख 34 हजार 834 किसानों को धान की फसलों के लिए पहली किस्त के रूप में 1500 करोड़ रुपये आज उनके खातों में ट्रांसफर किए गए।

कितनी सहायता मिलेगी

  • गन्ने की फसल के लिए 2019-20 में सहकारी कारखाने द्वारा खरीदी गई गन्ने की मात्रा के आधार पर एफआरपी राशि 261 रुपए प्रति क्विंटल और प्रोत्साहन राशि 93.75 रुपए होगी। यानी किसानों को अधिकतम 355 रुपए प्रति क्विंटल की दर से भुगतान किया जाएगा। वर्ष 2018-19 में सहकारी शक्कर कारखानों के माध्यम से खरीदे गए गन्ने की मात्रा के आधार पर 50 रुपए प्रति क्विंटल की दर से प्रोत्साहन राशि (बकाया बोनस) भी सरकार देगी। इसके तहत राज्य के 24 हजार 414 किसानों को 10 करोड़ 27 लाख रुपए दिया जाएगा। योजना के तहत खरीफ 2019 में सहकारी समिति के माध्यम से उपार्जित मक्का फसल के किसानों को भी लाभ देने का निर्णय लिया है। इसके लिए आंकड़े जुटाए जा रहे है।

इन्हें भी मिलेगा लाभ

  • इस योजना में खरीफ 2020 से दलहन और तिलहन को भी शामिल करने का फैसला किया है। राज्य के भूमिहीन कृषि मजदूरों को भी 'न्याय' योजना के द्वितीय चरण में इसमें शामिल किया जाएगा।

:: अंतर्राष्ट्रीय समाचार ::

लिपुलेख, लिम्पियाधुरा और कालापानी

चर्चा में क्यों?

  • नेपाल द्वारा अपने नये राजनीतिक नक्शे में लिपुलेख, लिम्पियाधुरा और कालापानी को अपने क्षेत्र में प्रदर्शित किये जाने पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए भारत ने कहा कि इस तरह से क्षेत्र में कृत्रिम विस्तार के दावे को स्वीकार नहीं किया जायेगा । भारत ने इस तरह के अनुचित मानचित्रण से पड़ोसी देश को बचने को कहा। भारत की यह प्रतिक्रिया ऐसे समय में आई है जब नेपाल सरकार ने अपने संशोधित राजनीतिक एवं प्रशासनिक नक्शे में लिम्पियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी को अपने क्षेत्र के तहत प्रदर्शित किया।

पृष्ठभूमि

  • गौरतलब है कि नेपाल के भूमि सुधार मंत्री पद्म अरयाल ने संवाददाता सम्मेलन में नया नक्शा जारी किया। नेपाल सरकार ने अपने संशोधित राजनीतिक एवं प्रशासनिक नक्शे में लिम्पियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी को अपने क्षेत्र के तहत प्रदर्शित किया।
  • लिपुलेख दर्रा, कालापानी के पास सुदूर पश्चिमी क्षेत्र है जो नेपाल और भारत के बीच विवादित सीमा क्षेत्र रहा है । भारत और नेपाल दोनों कालापानी को अपने क्षेत्र का अभिन्न हिस्सा मानते हैं। भारत के अनुसार यह उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले का हिस्सा है जबकि नेपाल उसके अपने दार्चुला जिले का हिस्सा होने का दावा करता है। नेपाली प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली ने कहा कि लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा नेपाल के हैं और उन्होंने संकल्प लिया कि राजनीतिक और कूटनीतिक प्रयासों के माध्यम से भारत से उन्हें "फिर से प्राप्त" कर लिया जाएगा।

लिपुलेख दर्रा और कालापानी की भौगोलिक अवस्थिति और महत्व

  • लिपुलेख दर्रा कालापानी के निकट सबसे पश्चिमी क्षेत्र है जिसके जरिये प्राचीन काल से 1962 तक चीन से भारत का व्यापार समेत कैलाश मानसरोवर यात्रा में इस मार्ग का इस्तेमाल होता रहा है। पुनः1991-92 में में लिपुलेख दर्रे को व्यापारिक मार्ग हेतु खोला गया।
  • काली नदी का उद्गम स्थल वाले कालापानी 372 वर्ग किलोमीटर में फैला एक मत्वपूर्ण सामरिक इलाका है। इसे भारत-चीन और नेपाल का ट्राई जंक्शन भी कहा जाता है। भारत इसे जहाँ उत्तराखंड के पिथौरागढ़ का हिस्सा मानता वाही नेपाल इसे धारचुला जिले का हिस्सा बताता है।
  • चीन हिमालय क्षेत्र में प्रभाव बनाने के लिए अंधाधुंध निर्माण कार्य कर रहा है जिससे यहाँ चीनी सेना की पकड़ बहुत मजबूत हो गई है। चीन-नेपाल के बढ़ते प्रगाढ़ संबंध के बीच चीनी सेना पर नजर रखने एवं सैन्य संतुलन स्थापित करने के लिए इस क्षेत्र का बड़ा ही रणनीतिक महत्व है।

क्या है नेपाल का दृष्टिकोण?

  • नेपाल सुगौली समझौते (1816) के तहत काली नदी के पूर्वी क्षेत्र, लिंपियादुरा, कालापानी और लिपुलेख पर अपना दावा करता है। इसी आधार पर नेपाल भारतीय उपस्थिति को अवैध बताता है। लिपूलेख दर्रे-धारचूला लिंक रोड के साथ-साथ जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन कानून के उपरान्त जारी नए राजनीतिक नक्शा पर भी नेपाल ने आपत्ति जताई थी।

क्या है सुगौली संधि?

  • नेपाल और ब्रिटिश इंडिया के बीच 1816 में सुगौली संधि हुई थी। इस संधि में तहत काली(महाकाली) नदी के पूरब का इलाका नेपाल का माना गया। इसके अलावा सुगौली संधि के तहत ही गंडक नदी को भारत-नेपाल के बीच की सीमा माना गया है।जहाँ काली नदी के कई धाराओं होने के इसके अलग-अलग उदगम होने से वही गंडक नदी की धारा का प्रवाह बदलने से भारत और नेपाल सीमा को लेकर विवाद कायम है।

CPEC समेत पाक को दिए गए ऋणों पर अमेरिका की आपत्ति

चर्चा में क्यों?

  • संयुक्‍त राज्‍य अमेरिका ने बीजिंग से कहा वह चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा CPEC एवं अन्‍य सहायता राशि के रूप में दिए गए अनुचित ऋणों को सीमित करने का कदम उठाए, ताकि पाकिस्‍तान कोरोना महामारी के संकट के दौरान लिए गए उधार को चुकता कर सके। हालांकि, अमेरिका पूर्व में चीन द्वारा पाकिस्‍तान को प्रदान किए गए ऋणों पर सवाला उठा चुका है। इसके साथ ही अमेरिका, चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा पर भी अपनी कठोर आपत्ति दर्ज करा चुका है।

क्या है अमेरिका की आपत्ति और दृष्टिकोण?

  • CPEC पर संयुक्त राज्य अमेरिका की चिंताओं, परियोजनाओं में शामिल पारदर्शिता की कमी और दोनों देशों के बीच लाभ की अनुचित दरों की गणना की है।
  • चीन द्वारा पाकिस्‍तान के अंदर किसी भी निवेश को उसी शर्त पर समर्थन करता है, जो अंतरराष्ट्रीय मानकों को पूरा करता है और वह पर्यावरण को बढ़ाता है।
  • कोरोना महामारी संकट के चलते पूरी दुनिया आर्थिक मंदी के दौर से गुजर रही है। ऐसे में चीन, पाकिस्‍तान को दिए गए ऋणों के प्रति उदार रवैया अपनाना चाहिए। चीन को बोझिल और अनुचित ऋणों के बोझ को कम करने के लिए कदम उठाना चाहिए।
  • संयुक्त राज्य अमेरिका को उम्मीद है कि चीन या तो कर्ज माफ करेगा या पाकिस्तानी लोगों के लिए एक निष्पक्ष और पारदर्शी सौदा बनाने के लिए ऋणों को फिर से वितरित करेगा। इतना ही नहीं उन्‍होंने उन देशों को भी आमंत्रित किया जो चीन के आर्थिक बोझ से दबे हुए हैं
  • अमेरिका पुननिर्माण और विकास के लिए विश्व बैंक और आईएमएफ जैसे अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों के साथ अपनी साझेदारी का उपयोग करेगा। इम इस साझेदारियों का उपयोग यह सुनिश्चित करने में करेंगे कि देश इस संकट से उबरें और हम दूसरों से इस वैश्विक प्रयास में शामिल होने का आग्रह करेंगे।

क्या है CPEC परियोजना?

  • चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) चीन की महत्वाकांक्षी परियोजना OBOR(ONE BELT ONE ROAD) का हिस्सा है। इसके तहत पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट को बलूचिस्तान, POK, होते हुए चीन के शिनजिआंग प्रांत से जोड़ा जाएगा। इस परियोजना में पाकिस्तान में बंदरगाह, सड़कों, पाइपलाइन्स, दर्जनों फैक्ट्रियों और एयरपोर्ट जैसे कई अवसंरचनात्मक निर्माण शामिल है। इसके जरिए चीन अरब सागर के ग्वादर बंदरगाह तक अपनी कनेक्टिविटी मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।

:: अर्थव्यवस्था ::

200 करोड़ रुपये तक की खरीद के लिए वैश्विक निविदा नहीं

चर्चा में क्यों?

  • सरकार ने 200 करोड़ रुपये तक के ठेकों में सामानों व सेवाओं की खरीद घरेलू कंपनियों से सुनिश्चित करने के लिये सामान्य वित्तीय नियमों (जीएफआर) में संशोधन को अधिसूचित किया है। इस कदम से सूक्ष्म लघु एवं मझोले उपक्रमों (एमएसएमई) को लाभ होगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के कार्यालय ने कहा, "सरकार ने सामान्य वित्तीय नियम 2017 में संशोधनों को अधिसूचित किया है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि आत्मनिर्भर भारत पैकेज की 200 करोड़ रुपये तक की सरकारी खरीद को विदेशी कंपनियों के लिये बंद करने की घोषणा पर अमल किया जा सके। यह घरेलू आपूर्तिकर्ताओं, विशेषकर एमएसएमई के लिए एक बड़ा बढ़ावा है।"

पृष्ठभूमि

  • सीतारमण ने पिछले हफ्ते (एमएसएमई) के लिए आर्थिक सहायता पैकेज की घोषणा की थी, जिसमें 200 करोड़ रुपये तक की सरकारी खरीद के लिए वैश्विक निविदा को अस्वीकार करना शामिल है। वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग ने जीएफआर में संशोधन करते हुए कहा, "अब 200 करोड़ रुपये या व्यय विभाग के द्वारा इस तरह की समय-समय पर निर्धारित सीमा तक की निविदाओं के लिये वैश्विक निविदा पड़ताल (जीटीई) जारी नहीं होंगे।

:: विज्ञान और प्रौद्योगिकी ::

अल्‍जाइमर के कारण स्मृति हास को रोकने की नयी तकनीक

चर्चा में क्यों?

  • भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) गुवाहाटी के शोधकर्ताओं ने ऐसी सृजनात्‍मक सोच पर काम किया है जो अल्जाइमर रोग से जुड़ी भूलने की आदत को रोकने या कम करने में मदद कर सकते हैं।टीम ने अल्जाइमर के न्यूरोकेमिकल सिद्धांतों का अध्ययन किया और मस्तिष्क में न्यूरोटॉक्सिक अणुओं का संचय रोकने के नए तरीकों की खोज की जो भूलने की आदत से जुड़े हैं।
  • आईआईटी गुवाहाटी टीम ने कम वोल्टेज वाले विद्युत क्षेत्र के अनुप्रयोग और मस्तिष्क में न्यूरोटॉक्सिक अणुओं को एकत्र होने से रोकने के लिए ‘ट्रोजन पेप्टाइड्स’के उपयोग जैसे दिलचस्प तरीकों की जानकारी की।

अल्जाइमर रोग की स्थिति

  • अल्जाइमर रोग में लोगों में स्मृति हास की समस्या होती है एवं रोगियों में भूलने की आदत विदमान होती हैं। अल्जाइमर रोग का इलाज भारत में विकसित करने का महत्व है क्योंकि चीन और अमेरिका के बाद, दुनिया में अल्जाइमर के रोगियों की तीसरी सबसे बड़ी संख्या भारत में है, भारत में 40 लाख से अधिक लोग अल्‍जाइमर से जुड़ी भूलने की आदत के शिकार हैं। वर्तमान उपचारों में केवल रोग के कुछ लक्षण कम हो जाते हैं, फिर भी चिकित्‍सा संबंधी कोई ऐसी विध्‍वंसक पद्धति नहीं है जो अल्जाइमर के अंतर्निहित कारणों का इलाज कर सकती हो।

क्या है उपचार का नया तरीका?

  • अल्जाइमर का एक निर्धारक हॉलमार्क मस्तिष्क में एमीलॉइड बीटा पेप्टाइड्स का संचय है। डॉ. रामाकृष्णन और डॉ.नेमाड़े ने अल्जाइमर की प्रगति को रोकने के लिए इन पेप्टाइड्स के संचय को कम करने के तरीकों की तलाश की।
  • 2019 में, आईआईटीगुवाहाटी के वैज्ञानिकों ने पाया कि कम-वोल्टेज, सुरक्षित विद्युत क्षेत्र के अनुप्रयोग से विषाक्त न्यूरोडीजेनेरेटिव अणुओं का निर्माण और संचय कम हो सकता है जो अल्जाइमर रोग में भूलने का कारण बनते हैं। उन्होंने पाया कि बाहरी विद्युत / चुंबकीय क्षेत्र इन पेप्टाइड अणुओं की संरचना को व्‍यवस्थित करता है, जिससे एकत्रीकरण को रोका जा सकता है।
  • “विद्युत क्षेत्र के संपर्क में आने पर, तंत्रिका कोशिकाओं के पतन को 17–35 प्रतिशत तक सीमित कर सकते हैं। इस क्षेत्र में आगे काम करते हुए, वैज्ञानिकों ने इन न्यूरोटॉक्सिन अणुओं के एकत्रीकरण को रोकने के लिए ‘ट्रोजन पेप्टाइड्स ’का उपयोग करने की संभावना का पता लगाया। ‘ट्रोजन पेप्टाइड ’का उपयोग करने का विचार पौराणिक" ट्रोजन हॉर्स "से आता है, जिसका ट्रॉय की लड़ाई में यूनानियों नेदांव-पेच के रूप में इस्तेमाल किया था। शोधकर्ताओं ने ट्रोजन पेप्टाइड्स को अमाइलॉइड पेप्टाइड के एकत्रीकरण को रोकने के लिए ‘छल-कपट’के समान दृष्टिकोण को अपनाते हुए, विषाक्त फाइब्रिलर संयोजन का गठन रोकने और भूलने की आदत की ओर ले जाने वाली तंत्रिका की विषाक्तता को कम करने के लिए डिज़ाइन किया है।

जूम ऐप पर प्रतिबंध के लिये न्यायालय में जनहित याचिका

  • उच्चतम न्यायालय में निजता के अधिकार का मुद्दा उठाते हुये एक जनहित याचिका में ‘जूम’ ऐप पर प्रतिबंध लगाने का अनुरोध किया गया है। याचिका में शासकीय और व्यक्तिगत स्तर पर जूम के इस्तेमाल के बारे में उचित कानून बनाने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है। यह याचिका दिल्ली निवासी हर्ष चुघ ने दायर की है।

क्या है याचिका के प्रमुख बिंदु?

  • लगातार इस ऐप के इस्तेमाल से राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा हो सकता है और यह तरह-तरह के साइबर अपराधों को भी बढ़ावा दे सकता है।
  • इस ऐप के लगातार इस्तेमाल से साइबर अपराध का खतरा है, इसलिए इस ऐप के इस्तेमाल के संबंध में विस्तृत तकनीकी अध्ययन कराने का केन्द्र को निर्देश दिया जाये।
  • कोविड-19 महामारी के इस दौर ने जीवन शैली में जबर्दस्त बदलाव कर दिया है जिसमें उपभोक्ता, कारोबारी और स्कूल जरूरतमंदों की मदद करने की बजाय जूम के माध्यम से संपर्क स्थापित कर रहे हैं।
  • जूम ऐप लाखों उपभोक्ताओं की व्यक्तिगत सूचनाओं का दुरूपयोग करके निजता के अधिकार का हनन कर रहा है।
  • जूम ऐप डाटा एकत्र करने की नीति पर चल रहा है और वह अपने उपभोक्ताओं का निजी डाटा और फाइलों का अपने यहां भंडार कर रहा है

जनहित याचिका क्या है?

  • जनहित याचिका के साथ भारतीय न्यायिक व्यवस्था में उत्तरदायित्व की शुरूआत करने का श्रेय जस्टिस भगवती को जाता है। भारतीय नागरिकों के मूल अधिकारों का हनन हो रहा है तो हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर अधिकारों की रक्षा की गुहार लगाई जा सकती है। हाईकोर्ट में अनुच्छेद-226 के तहत और सुप्रीम कोर्ट में अनुच्छेद-32 के तहत याचिका दायर की जा सकती है।
  • अगर किसी एक आदमी के अधिकारों का हनन हो रहा है तो उसे निजी यानि पर्सनल इंट्रेस्ट लिटिगेशन माना जाएगा और अगर ज्यादा लोग प्रभावित हो रहे हैं तो उसे जनहित याचिका माना जाएगा। पीआईएल डालने वाले शख्स को अदालत को यह बताना होगा कि कैसे उस मामले में आम लोगों का हित प्रभावित हो रहा है। दायर की गई याचिका जनहित है या नहीं, इसका फैसला कोर्ट ही करता है। इसमें सरकार को प्रतिवादी बनाया जाता है। सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट सरकार को उचित निर्देश जारी करती हैं।

जूम एप क्या है?

  • जूम ऐप का इस्तेमाल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के लिए किया जाता है। इसके जरिए एक साथ 100 लोगों को कॉन्फ्रेंसिंग में रखा जा सकता है। यही इसकी सबसे बड़ा खासियत है, जिसके चलते बैठकों और स्कूलों में पढ़ाई के लिए इसे इस्तेमाल किया जा रहा था।

पृष्ठभूमि

  • सुरक्षा कारणों से गृह मंत्रालय ने सलाह दी है कि जूम का इस्तेमाल करने से बचें। ऐसा नहीं है कि भारत में ही इसे बैन किया गया है। इससे पहले सिंगापुर में भी इस पर बैन लगाया जा चुका है। अमेरिका ने भी इस ऐप के खिलाफ मुकदमा दायर किया हुआ है, क्योंकि ऐप से यूजर के वेबकैम को हैक किया जा सकता है। वहीं जर्मनी के विदेश मंत्रालय ने भी जूम ऐप के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाया हुआ है। गूगल और स्पेस एक्स एजेंसी ने भी इसे बैन किया हुआ है।

:: पर्यावरण और पारिस्थितिकी ::

डेयरियों द्वारा पर्यावरण नियमों के पालन पर जारी हो दिशा-निर्देश: NGT

चर्चा में क्यों?

  • राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) ने केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) को देशभर में डेयरियों द्वारा पार्यावरण नियमों के पालन की निगरानी करने और प्रदूषण की जांच के लिए एक महीने के भीतर दिशा-निर्देश जारी करने का निर्देश दिया।
  • एनजीटी प्रमुख न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा, ‘‘ जल (प्रदूषण की रोकथाम और नियंत्रण) अधिनियम, 1974, वायु (प्रदूषण का रोकथाम और नियंत्रण) अधिनियम, 1981 और पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के तहत किसी भी पर्यावरण नियम के उल्लंघन पर संबंधित प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड या स्थानीय निकाय प्रदूषणकारी गतिविधियों पर रोक लगा, मुआवजा वसूल और मुकदमा दायर कर उनसे निपट सकते हैं।’’
  • एनजीटी ने कहा कि यह उचित होगा कि सीपीसीबी स्पष्ट तौर पर बताए कि किन-किन गतिविधियों पर मुआवजा वसूला जा सकता है।पीठ ने वीडियो कान्फ्रेंस के माध्यम से सुनवाई करते हुए कहा, ‘‘ सीपीसीबी आज से ठीक एक महीने के अंदर दिशा-निर्देश तय करे।

राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण NGT क्या है?

  • दिनांक 18.10.2010 को राष्ट्रीय हरित अधिकरण की स्थापना राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम 2010 के तहत पर्यावरण बचाव और वन संरक्षण और अन्य प्राकृतिक संसाधन सहित पर्यावरण से संबंधित किसी भी कानूनी अधिकार के प्रवर्तन और क्षतिग्रस्त व्यक्ति अथवा संपत्ति के लिए अनुतोष और क्षतिपूर्ति प्रदान करना और इससे जुडे़ हुए मामलों का प्रभावशाली और तीव्र गति से निपटारा करने के लिए किया गया है। यह एक विश्ष्टि निकाय है जो कि पर्यावरण विवादों बहु-अनुशासनिक मामलों सहित, सुविज्ञता से संचालित करने के लिए सभी आवश्यक तंत्रों से सुसज्जित है। यह अधिकरण 1908 के नागरिक कार्यविधि के द्वारा दिए गए कार्यविधि से प्रतिबद्ध नहीं है लेकिन प्रकृतिक न्याय सिद्धांतों से निर्देशित होगा। अधिकरण की प्रधान पीठ नई-दिल्ली में और भोपाल, पुणे, कोलकाता और चेन्नई अधिकरण के अन्य चार पीठ होंगे।

गेहूं के जीन आरएचटी14 एवं आरएचटी18

चर्चा में क्यों?

  • भारत में किसानों द्वारा सालाना बचे हुए चावल के लगभग 23 मिलियन टन अवशेषों को जला दिया जाता है जिससे कि उन्हें पुआल से छुटकारा मिले और अगली फसल जोकि गेहूं होती है, उसे बोने के लिए वे अपने खेतों को तैयार कर सकें। इसके परिणामस्वरूप वायु प्रदूषण पैदा होता है। इसके अतिरिक्त, शुष्क वातावरण लघु कोलियोपटाइल के साथ गेहूं की किस्मों के अंकुरण के लिए एक चुनौती भी पैदा करता है।
  • इन समस्याओं को दूर करने के लिए विभाग एवं प्रौद्योगिकी विभाग को एक स्वायत्तशासी संस्थान पुणे स्थित अघरकर अनुसंधान संस्थान (एआरआई) के वैज्ञानिकों ने गेहूं में दो वैकल्पिक बौना करने वाला जीनों-आरएचटी14 एवं आरएचटी18 का मानचित्रण किया है। ये जीन बेहतर नवांकुर ताकत और लंबे कोलियोपटाइल के साथ जुडे होते हैं।

कैसे मददगार होंगें ये जीन?

  • प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. रविन्द्र पाटिल ने एआरआई के जेनेटिक्स एवं प्लांट ब्रीडिंग ग्रुप की टीम के साथ दुरुम गेहूं में क्रोमोजोम 6ए पर बौना करने वाले जीनों का मानचित्रण किया है और गेहूं प्रजनन लाइनों में इन जीनों के बेहतर चयन के लिए डीएनए आधारित मार्करों का विकास किया गया। डीएनए आधारित मार्कर गेहूं के प्रजनकों को गेहूं के प्रजनन के बड़े पूल से इन विकल्पी बौना करने वाला जीनों के वाहक गेहूं लाइनों को उपयुक्त रूप से चयन करने में सहायता करेगे।
  • इन डीएनए आधारित मार्करों का उपयोग एआरआई में भारतीय गेहूं की किस्मों में इन जीनों के मार्कर समर्थित अंतरण के लिए किया जा रहा है जिससे कि उन्हें चावल की ठंठ युक्त स्थितियों एवं शुष्क वातावरणों के तहत बुवाई के लिए उपयुक्त बनाया जा सके। इन विकल्पी बौना करने वाले जीनों के साथ गेहूं प्रजनन लाइन वर्तमान में उन्नत चरण में हैं।
  • फसल अवशेष जलाने में कमी के अतिरिक्त इन विकल्पी बौना करने वाले जीनों के साथ गेहूं की किस्में शुष्क वातावरणों के तहत मृदा में अवशेष आर्द्रता का लाभ उठाने के लिए गेहूं के बीजों की गहरी बुवाई में भी सहायक हो सकती हैं।
  • वर्तमान में उपलब्ध अर्ध बौनी गेहूं किस्मों, जिनकी खोज हरित क्रांति के दौरान की गई थी, में पांरपरिक आरएचटी1 एलेल होते हैं और वे उच्च उर्वरता सिंचित स्थितियों के तहत ईष्टतम फसल की ऊपज करते हैं। बहरहाल, छोटे सेलियोप्टाइल के कारण शुष्क वातावरणों में गहरी बुवाई स्थितियों के अधिक अनुकूल नहीं हैं।
  • बचे हुए चावल फसल के अवशेषों को जलाया जाना पर्यावरण, मृदा तथा मानव स्वास्थ्य के लिए काफी नुकसानदायक है। इसलिए, गेहूं सुधार कार्यक्रमों में विकल्पी बौना करने वाले जीनों को शामिल किए जाने का आवश्यकता है। इसके अतिरिक्त, आरएचटी1 के केवल दो ड्वार्फिंग ऐलेल की ही भारतीय गेहूं किस्मों में प्रधानता हैं इसलिए भारत में गेहूं उगाए जाने वाले विविध क्षेत्रों को देखते हुए ड्वार्फिंग जीनों के जेनेटिक आधार को विविधीकृत करने की आवश्यकता है।
  • उन्नत गेहूं किस्में जो एआरआई में विकसित की जा रही हैं, चावल-गेहूं फसल प्रणाली के तहत डंठलों को जलाये जाने के मामलों में कमी लाएंगी। ये किस्में शुष्क वातावरणों के तहत मृदा में अवशेष आर्द्रता का लाभ उठाने के लिए गेहूं के बीजों की गहरी बुवाई में भी सहायक होंगी जिससे बहुमूल्य जल संसाधनों की बचत होगी और किसानों के लिए खेती की लागत कम हो जाएगी।

:: विविध ::

आतंकवाद विरोधी दिवस(Anti-Terrorism Day): 21 मई

  • प्रति वर्ष 21 मई को आतंकवाद विरोधी दिवस(Anti-Terrorism Day) के रूप में मनाया जाता है। हर साल 21 मई को मनाए जाने वाले इस दिवस पर युवाओं सहित समाज के अन्य वर्गों को आतंकवाद विरोधी शपथ दिलाई जाती है। इस दिवस को वस्तुतः पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की स्मृति के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। दरअसल 21 मई 1991 को तमिलनाडुके श्रीपेरंबदूर में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या कर दी गई थी। उनकी हत्या के बाद ही 21 मई को आतंकवाद विरोधी दिवस के तौर पर मनाने का फैसला किया गया था।

अल कायदा का आतंकवादी इब्राहिम जुबैर

  • अमेरिका ने अल कायदा के बड़े आतंकवादी मोहम्मद इब्राहिम जुबैर को भारत को सौंप दिया है। उसे 19 मई को ही भारत लाया गया और पंजाब के अमृतसर स्थित एक क्वारेंटाइन सेंटर में रखा गया है। हैदराबाद का रहने वाला जुबैर अल कायदा की फाइनैंसिंग का काम देखता था। उसे अमेरिकी अदालत में आतंकवादी घटनाओं में दोषी पाया गया।

:: प्रिलिम्स बूस्टर ::

  • जल्द ही परिचालन प्रारंभ होने से चर्चा में रहे सामरिक महत्व के नीमो-पदम-दारचा सड़क किन दो स्थानों को आपस में जोड़ेगी? (लाहौल घाटी-हिमाचल को कारगिल-लद्दाख)
  • हाल ही में धान में पराली की समस्या को दूर करने के लिए वैज्ञानिकों किन 2 जीनों की पहचान की गई है? (आरएचटी14 एवं आरएचटी18)
  • इलाज की नई विधि खोजने से चर्चा में रहे ‘अल्जाइमर’ रोग से कौन सा विकार उत्पन्न होता है एवं इसके कारक कौन होते हैं? (भूलने की बीमारी, न्यूरोटॉक्सिक अणु का संचय- एमीलॉइड बीटा पेप्टाइड्स)
  • हाल ही में भारत सरकार ने सामान्य वित्तीय नियमों (जीएफआर) में संशोधन कर कितने मूल्य/ राशि तक के ठेकों को घरेलू क्षेत्र के लिए आरक्षित कर दिया है? (200 करोड़ रुपए)
  • हाल ही में किस देश के द्वारा अल कायदा के बड़े आतंकवादी मोहम्मद इब्राहिम जुबैर को भारत को सौंपा गया? (अमेरिका)
  • 1 करोड़वीं लाभार्थी के पूर्ण होने से चर्चा में रही आयुष्मान भारत योजना को कब प्रारंभ हुआ एवं इसमें प्रति परिवार कितने रुपए का स्वास्थ्य कवर दिया जाता है? (2018, 5 लाख रुपए)
  • सरकार के द्वारा किस ऑनलाइन पोर्टल पर पाठ्यक्रम आरंभ कर यूजीसी के द्वारा क्रेडिट फैसिलिटी का लाभ लिया जा सकता है? (स्वयं पोर्टल )
  • उच्चतम न्यायालय में निजता के आधार पर प्रतिबंध लगाने की जनहित याचिका से चर्चा में रहे ‘जूम’ एप का मुख्य अनुप्रयोग क्या है? (वीडियो कॉलिंग/ कॉन्फ्रेंसिंग)
  • देशभर में डेयरियों द्वारा फैलाए जा रहे प्रदूषण की जांच को लेकर चर्चा में रहे राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण की स्थापना कब हुई थी एवं इसके अध्यक्ष कौन हैं? (2010, आदर्श कुमार गोयल)
  • हाल ही में किस सरकार ने राजीव गांधी किसान न्याय योजना को प्रारंभ किया है? (छत्तीसगढ़)
  • प्रतिवर्ष किस तिथि को एवं किनके स्मृति में आतंकवाद विरोधी दिवस मनाया जाता है? (21 मई, पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी)

स्रोत साभार: Dainik Jagran (Rashtriya Sanskaran), Dainik Bhaskar (Rashtriya Sanskaran), Rashtriya Sahara (Rashtriya Sanskaran) Hindustan Dainik (Delhi), Nai Duniya, Hindustan Times, The Hindu, BBC Portal, The Economic Times (Hindi & English), PTI, PIB

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