(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (22 जुलाई 2020)

दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर


(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (22 जुलाई 2020)


:: राष्ट्रीय समाचार ::

भारत ड्रोन

चर्चा में क्यों?

  • भारत और चीन के बीच जारी सीमा विवाद के बीच रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने भारतीय सेना को स्वदेशी रूप से विकसित ड्रोन "भारत" प्रदान किया है।
  • ये ड्रोन पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के साथ ऊंचाई वाले क्षेत्रों और पहाड़ी इलाकों में सटीक निगरानी करने के लिए प्रयोग में लाये जा सकते।

भारत ड्रोन

  • भारत ड्रोन का विकास DRDO की चंडीगढ़ स्थित प्रयोगशाला द्वारा किया गया है।
  • स्वदेशी रूप से विकसित भारत ड्रोन की श्रृंखला को दुनिया के सबसे चुस्त और हल्के निगरानी ड्रोन्स की सूची में शामिल किया जा सकता है।
  • इस ड्रोन की निम्नलिखित विशेषताएँ हैं:
  • ये ड्रोन आर्टिफिशिलय इंटेलीजेंस से युक्त हैं जिससे ये दुश्मनों का सही पता लगाने और उसके अनुसार कार्रवाई करने में सक्षम हैं।
  • ये ड्रोन अत्यधिक निम्न तापमान में कार्य करने में सक्षम हैं और इन्हे खराब मौसम के लिए भी विकसित किया जा रहा है।
  • ये ड्रोन किसी भी अभियान के दौरान का वास्तविक समय (रियल टाइम) में वीडियो प्रसारण करने में सक्षम है
  • इसके साथ ही यह अत्याधुनिक नाइट विजन सुविधा से भी युक्त है और यह घने जंगल में छिपे इंसानों का भी पता लगा सकता है।
  • इसकी यूनिबॉडी डिजाइन और एडवांस रिलीज टेक्नोलॉजी इसे निगरानी अभियानों के लिए अधिक उपयुक्त बनाती है। इसे इस तरह से डिजाइन किया गया है कि रडार भी इसे नहीं पकड़ सकता है।
  • गौरतलब है की DRDO ने रुस्तम, पंछी, निसांत और अभ्यास ड्रोन का भी विकास किया है।

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO)

  • रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (Defense Research and Development Organization) भारत की रक्षा से जुड़े अनुसंधान कार्यों के लिये देश की अग्रणी संस्था है।
  • यह संगठन भारतीय रक्षा मंत्रालय की एक आनुषांगिक ईकाई के रूप में काम करता है।
  • इसकी स्थापना 1958 में भारतीय थल सेना एवं रक्षा विज्ञान संस्थान के तकनीकी विभाग के रूप में की गयी थी।
  • वर्तमान में संस्थान की अपनी इक्यावन प्रयोगशालाएँ हैं जो इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा उपकरण इत्यादि के क्षेत्र में अनुसंधान में कार्यरत हैं।

सीरो अध्ययन

चर्चा मे क्यों?

  • स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने दिल्ली में कोविड-19 को लेकर सीरो निगरानी अध्ययन कराया। अध्ययन के परिणाम बताते हैं कि दिल्ली भर में औसतन आईजीडी एंटीबॉडी का प्रसार 23.8% -40% है।

क्या है सीरो सर्वे?

  • सिरो- प्रीवलेंस स्टडी में सीरोलॉजी (ब्लड सिरम) जांच का इस्तेमाल कर किसी आबादी या समुदाय में ऐसे लोगों की पहचान की जाती है जिनमें किसी संक्रामक रोग के खिलाफ एंटीबॉडी विकसित हो जाते हैं। इससे संक्रमण के स्तर के साथ लोगों में प्रतिरक्षा तंत्र के विकास की भी जानकारी मिलती है। इसके साथ ही हमें हर्ड इम्युनिटी जैसे नवीन सिद्धांत को भी जानने में मदद मिलती है।

दिल्ली में सीरो सर्वे से जुड़े मुख्य विन्दु :-

  • यह अध्ययन राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की दिल्ली सरकार के सहयोग से राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (NCDC) द्वारा किया गया।
  • यह अध्ययन 27 जून 2020 से 10 जुलाई 2020 तक कराया गया था। दिल्ली के सभी 11 जिलों के लिए सर्वेक्षण टीमों का गठन किया गया था। पहले से चयनित लोगों से लिखित सूचित सहमति लेने के बाद उनके रक्त के नमूने एकत्र किए गए और फिर उनके ब्लड सिरम को आईजीजी एंटीबॉडी और संक्रमण के लिए परीक्षण किया गया। यह एलिसा परीक्षण का उपयोग करते हुए देश में कराए गए अब तक के सबसे बड़े सीरो अध्ययन में से एक है।
  • सीरो अध्ययन से भी यह पता चला है कि बड़ी संख्या में संक्रमित व्यक्तियों में कोई लक्षण नहीं दिखाई देते हैं।

‘इंडिया आइडियाज समिट’

  • प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी 22 जुलाई को ‘इंडिया आइडियाज समिट’ में मुख्य भाषण देंगे। इस शिखर सम्मेलन की मेजबानी अमेरिका-भारत व्यवसाय परिषद द्वारा की जा रही है। इस वर्ष परिषद के गठन की 45वीं वर्षगांठ मनाई जा रही है। इस वर्ष की ‘इंडिया आइडियाज समिट’ की थीम ‘बेहतर भविष्य का निर्माण’ है।
  • इस आभासी शिखर सममेलन (वर्चुअल समिट) में भारतीय एवं अमेरिकी सरकार के नीति-निर्माताओं, राज्य स्तरीय अधिकारियों और कारोबार जगत एवं समाज के प्रमुख विचारकों की उच्चस्तरीय उपस्थिति होगी। शिखर सम्मेलन के अन्य प्रमुख वक्ताओं में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर, अमेरिकी विदेश मंत्री श्री माइक पोम्पिओ, वर्जीनिया के सीनेटर एवं सीनेट इंडिया कॉकस के सह-अध्यक्ष श्री मार्क वार्नर, संयुक्त राष्ट्र में पूर्व अमेरिकी राजदूत सुश्री निक्की हेली, इत्‍यादि शामिल हैं।
  • इस शिखर सम्मेलन के दौरान ‘भारत-अमेरिका सहयोग’ और ‘महामारी काल के बाद की दुनिया में दोनों देशों के बीच पारस्‍परिक संबंधों का भविष्य’ सहित विभिन्‍न विषयों पर गहन चर्चाएं होंगी।

टिड्डियों के हमले से भारत और पूर्वी अफ्रीका में हो सकता है खाद्य संकट:WMO ने दी चेतावनी

चर्चा में क्यों?

  • संयुक्त राष्ट्र के विश्व मौसम संगठन (डब्ल्यूएमओ) ने कहा है कि पूर्वी अफ्रीका, भारत और पाकिस्तान के कुछ हिस्सों में जलवायु परिवर्तन के कारण टिड्डी दल का हमला खाद्य सुरक्षा पर गंभीर खतरा पैदा कर रहा है। संयुक्त राष्ट्र की विशेष एजेंसी ने कहा कि जलवायु परिवर्तन जैसे कि रेगिस्तानी क्षेत्रों में तापमान और वर्षा में वृद्धि और उष्णकटिबंधीय चक्रवातों (ट्रॉपिकल साइक्लोन) से जुड़ी तेज हवाएं कीट प्रजनन, विकास और प्रवास के लिए एक नया वातावरण प्रदान करती हैं। हाल ही में राजस्थान, मध्यप्रदेश और गुजरात के दो दर्जन से अधिक जिलों में टिड्डियों के बड़े और आक्रामक झुंड ने हमला किया था। जबकि इसी साल फरवरी में पाकिस्तान ने आपातकाल की घोषणा करते हुए कहा था कि पिछले दो दशकों में टिड्डियों का ऐसा हमला कभी नहीं हुआ।

क्यों बढ़ रहे है टिड्डियों के हमले?

  • डब्ल्यूएमओ ने नेचर क्लाइमेट चेंज के एक लेख का हवाला देते हुए कहा है कि इन इलाकों में रेगिस्तानी टिड्डियां प्राचीन समय से मौजूद हैं, लेकिन हाल ही में इनके आक्रामक होने की वजह को जलवायु परिवर्तन से जोड़कर देखा जा सकता है। इंटरगर्वनमेंटल अथॉरिटी ऑन क्लाइमेट प्रडिक्शन एंड एप्रीलेकशन सेंटर (आइसीपीएसी) के वैज्ञानिकों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के लिए कोई एक कारण जिम्मेदार नहीं है और ग्लोबल वार्मिग ने टिड्डियों के विकास, प्रकोप और अस्तित्व के लिए आवश्यक परिस्थितियों को बनाने में एक प्रमुख भूमिका निभाई। लेख में कहा गया है कि टिड्डियों के बढ़ते प्रकोप के पीछे हिंद महासागर का गर्म होना, तीव्र और असामान्य उष्णकटिबंधीय चक्रवातों की भूमिका और भारी वर्षा व बाढ़ ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
  • विश्व खाद्य संगठन (एफएओ) ने कहा कि उत्तरी सोमालिया में रेगिस्तानी टिड्डियों पर की गई एक नई रिपोर्ट बताती है कि गर्मियों में प्रजनन के लिए यह टिड्डियां हिंद महासागर आ सकती है। रिपोर्ट में आगे यह भी कहा गया है कि भारत-पाकिस्तान सीमा के दोनों किनारों पर ग्रीष्मकालीन प्रजनन शुरू हो गया है। राजस्थान में तो कई झुंड मौजूद भी हैं। एफएओ रेगिस्तानी टिड्डियों की निगरानी और नियंत्रण करने वाली प्रमुख एजेंसी है और रेगिस्तानी टिड्डी सूचना सेवा का संचालन करती है।
  • डब्ल्यूएमओ के मुताबिक 2019 के अंत में टिड्डियां जहां सोमालिया और इथियोपिया में 70 हजार हेक्टेअर फसल पूरी तरह चट कर गई थीं वहीं केन्या की 2400 किमी चारागाह भूमि को नष्ट कर दिया था। आइसीपीएसी के मुताबिक इथियोपिया में किए गए एक हालिया अध्ययन में अनुमान लगाया गया है कि दिसबंर 2019 से मार्च 2020 के बीच टिड्डियों ने एक लाख 14 हजार हेक्टेअर ज्वार, 41 हजार हेक्टेअर मक्का और 36 हजार हेक्टेअर गेहूं की फसल नष्ट की है।
  • डब्ल्यूएमओ के क्षेत्रीय जलवायु केंद्र आइसीपीएसी ने कहा है कि उत्तरी केन्या, पूर्वी और उत्तर-पूर्वी इथियोपिया में पिछले चौदह दिनों से टिड्डियों के झुंड मौजूद हैं। इसकी एक बड़ी वजह यह है कि रेगिस्तानी टिड्डियों के प्रजनन के लिए युगांडा, सूडान के पूर्वी इलाके, पूर्वी इथियोपिया, उत्तरी सोमालिया और उत्तरी केन्या में जलवायु अधिक उपयुक्त हैं।

विश्व मौसम संगठन के बारे में

  • विश्व मौसम संगठन की शुरुआत अंतरराष्ट्रीय मौसम संगठन (आईएमओ) से हुई थी, जिसकी स्थापना 1873 में हुई थी। डब्ल्यूएमओ कन्वेंशन के अनुमोदन से मार्च 23, 1950 को स्थापित डब्लूएमओ, एक साल बाद मौसम विज्ञान (मौसम और जलवायु), परिचालन जल विज्ञान और संबंधित भूभौतिकी विज्ञान के लिए संयुक्त राष्ट्र की विशेष एजेंसी बन गया।
  • यह संगठन, पृथ्वी के वायुमंडल की परिस्थिति और व्यवहार, महासागरों के साथ इसके संबंध, मौसम और परिणामस्वरूप जल संसाधनों के वितरण के बारे में जानकारी के बारे में, संयुक्त राष्ट्र की आधिकारिक आवाज है।
  • विश्व मौसम संगठन का मुख्यालय जिनेवा, स्विट्ज़रलैंड में है।

:: अंतर्राष्ट्रीय समाचार ::

चाबहार परियोजना

चर्चा में क्यों?

  • ईरान ने इस बात का खंडन किया कि उसने भारत को चाबहार रेल प्रोजेक्ट से बाहर कर दिया है। समाचार एजेंसी एएनआइ के मुताबिक, ईरान ने कहा कि इस तरह की खबर फैलाकर कुछ लोग अपना हित साधना चाहते हैं। ईरान स्थित भारतीय दूतावास ने बताया कि भारतीय राजदूत जी. धर्मेद्र को ईरान के सड़क एवं रेल उप मंत्री सईद रसूली ने चाबहार में भारतीय सहयोग से हो रहे काम को देखने के लिए आंमत्रित किया था।

पृष्ठभूमि

  • उल्लेखनीय है भारत ने चाबहार बंदरगाह के विकास में 50 करोड़ डालर का निवेश किया है। इस बंदरगाह के जरिए पाकिस्तान को दरकिनार कर भारत मध्य एशिया के देशों से माल मंगा सकता है या उन्हें भेज सकता है। 2016 को हुए समझौते के अनुसार भारत इस पोर्ट पर दो बर्थ और बना रहा है। दिसंबर 2018 से अब तक भारत ने 82 जहाजों के जरिए 8,200 कंटेनर से 12 लाख टन माल मंगाया या भेजा है।
  • भारत सरकार ने पिछले बजट में चाबहार बंदरगाह के लिए निर्धारित राशि को दोगुना कर दिया था। भारत को चाबहार बंदरगाह को विकसित करने में तो अमेरिकी सरकार से हरी झंडी तो मिल गई थी लेकिन क्या चाबहार-जाहेदान रेल प्रोजेक्ट एवं अन्य कार्यों के लिए भी प्रतिबंधों से छूट मिली है यह साफ नहीं है। वहीं समाचार एजेंसी आइएएनएस ने खबर दी है कि चाबहार बंदरगाह से माल परिवहन के मसले पर भारत और ईरान मिलकर काम कर रहे हैं।

'स्ट्राइक फॉर ब्लैक लाइव्स'

  • नस्लभेद और आर्थिक असमानता के खिलाफ 'स्ट्राइक फॉर ब्लैक लाइव्स' के तहत सर्विस सेक्टर और फास्ट फूड चेन से जु़डे कर्मचारियों ने अमेरिका सहित पूरे विश्व में प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने इस दौरान कार्यस्थल में अश्वेतों के साथ बेहतर व्यवहार किए जाने की मांग दोहराई। आयोजकों के मुताबिक पूरे विश्व के 160 शहरों के 20 हजार से अधिक कामगार अपने काम पर नहीं गए।
  • प्रदर्शनकारियों में हेल्थ केयर, ट्रांसपोर्ट और कंस्ट्रक्शन से जु़डे़ कर्मचारियों की संख्या ज्यादा थी, क्योंकि महामारी के दौरान इन लोगों को वर्क फ्रॉम होम की इजाजत नहीं दी गई थी। 'स्ट्राइक फॉर ब्लैक लाइव्स' को 60 से अधिक श्रमिक यूनियनों और सामाजिक संगठनों ने समर्थन दिया था।

यूरोपियन यूनियन की बैठक में दो ट्रिलियन डॉलर के राहत पैकेज पर बनी सहमति

  • यूरोपीय संघ की मैराथन बैठक में आखिरकार यूरोपियन यूनियन के नेताओं ने समझौते पर हस्ताक्षर कर ही दिए। हस्ताक्षर दो ट्रिलियन डॉलर यानी 1800 अरब यूरो के राहत पैकेज पर हुए हैं जो अगले सात साल तक यूरोपीय संघ के देशों की मदद के लिए तैयार किया गया है। इसमें से 750 अरब यूरो को लोन और ग्रांट के रूप में दिया जाएगा।
  • यह यूरोपीय संघ की सबसे लंबी शिखर वार्ताओं में से एक थी। बेल्जियम की राजधानी ब्रसेल्स में शुक्रवार को शुरू हुई इस बातचीत को यूं तो शनिवार को ही खत्म हो जाना था लेकिन ऐसा हुआ नहीं। पहले रविवार और फिर सोमवार रात-रात भर बैठक चली और आखिर में मंगलवार सुबह समझौते पर हस्ताक्षर हुए।

पृष्ठभूमि

  • दरअसल 27 देशों वाला यूरोपीय संघ इस शिखर वार्ता में दो हिस्सों में बंटा हुआ दिखा। एक तरफ नीदरलैंड्स, ऑस्ट्रिया, डेनमार्क और स्वीडन, जिन्हें "फ्रूगल फोर" या किफायती चार के नाम से जाना जाता है। फिनलैंड ने भी इनका साथ दिया। ये पांचों देश कम ग्रांट और ज्यादा लोन देने के हक में दिखे। साथ ही ये ऐसी शर्तें भी जोड़ना चाहते थे जिनसे देशों के लिए लोन लेना मुश्किल हो जाए। ऐसे में हंगरी और पोलैंड जैसे देशों के लिए मुश्किल खड़ी हो सकती थी।
  • फ्रूगल फोर की शर्तें इनके लिए काफी भारी पड़ती लेकिन देशों ने बीच का रास्ता निकाला जिस पर सबकी सहमति बन सकी। कोरोना महामारी के कारण यूरोप में 1,35,000 लोगों की जान जा चुकी है और यूरोपीय संघ के लगभग हर देश में दो महीने तक चले लॉकडाउन के बाद इस साल अर्थव्यवस्था के 8.3 फीसदी सिकुड़ने की आशंका है। ऐसे में सभी देश इस राहत पैकेज का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे।

यूरोपियन यूनियन के बारे में

  • दूसरे विश्वयुद्ध के बाद यूरोप में यह कोशिश की गई कि सभी देश आर्थिक रूप से एक साथ आएँ और एकजुट होकर एक व्यापार समूह बनें। इसके पीछे एक मक़सद यह था कि देशों का आपस में आर्थिक जुड़ाव जितना ज़्यादा होगा, युद्ध होने की गुंजाईश उतनी कम होगी। इस तरह 1957 में 'रोम की संधि' द्वारा 'यूरोपीय आर्थिक परिषद' के ज़रिए छह यूरोपीय देशों की आर्थिक भागीदारी शुरू हुई। इसी क्रम में 1993 में 'मास्त्रिख संधि' के ज़रिए यूरोपीय यूनियन अस्तित्व में आया।
  • यूरोपियन यूनियन 27 देशों की एक आर्थिक और राजनीतिक पार्टनरशिप है। 2004 में जब यूरो करेंसी लॉन्च की गई तब यह पूरी तरह से राजनीतिक और आर्थिक रूप से एकजुट हुआ। इस संघ के सदस्य देशों के बीच किसी भी तरह का सामान और व्यक्ति बिना किसी टैक्स या बिना किसी रुकावट के कहीं भी आ-जा सकते हैं। साथ ही बिना रोक टोक के नौकरी, व्यवसाय तथा स्थायी तौर पर निवास कर सकते हैं।

:: विज्ञान और प्रौद्योगिकी ::

प्लाज्मा थेरेपी

चर्चा में क्यों?

  • प्लाज्मा थेरेपी पर इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) द्वारा कराए गए परीक्षण के निष्कर्ष उत्साहजनक रहे हैं। इस परीक्षण में भाग लेने वाले अधिकांश संस्थानों के निष्कर्ष में प्लाजमा थेरेपी को कोविड-19 के गंभीर और मामूली संक्रमित व्यक्तियों के इलाज में प्रभावी पाया गया है ।
  • संस्थानों के द्वारा प्राप्त निष्कर्षों के आधार पर आईसीएमआर के द्वारा पहली बार प्लाजमा थेरेपी पर अखिल भारतीय अध्ययन को प्रस्तुत किया गया है।

क्या है प्लाज्मा थेरेपी?

  • प्लाज्मा थेरेपी एक ऐसी तकनीक है जिसमे किसी बीमारी से संक्रमित व्यक्ति के स्वस्थ हो जाने पर उसके रक्त से प्लाज्मा लेकर संक्रमित व्यक्ति में प्लाज्मा के ट्रांस्फ्युजन द्वारा इलाज किया जाता है।
  • कोविड-19 से पीड़ित रोगियों के उपचार के लिए किसी भी वैक्सीन या विशिष्ट एंटीवायरल की अनुपस्थिति में नोवल कोरोना वायरस से संक्रमित रोगियों के उपचार के लिए यह प्लाज्मा उन लोगों से लिया गया है जो कोरोना वायरस से ग्रस्त थे और अब स्वस्थ हो चुके हैं।
  • स्वस्थ हो चुके कोविड-19 के रोगियों के शरीर में कोरोना वायरस के लिए बहुत से एंटीबॉडी उत्पन्न हो जाते हैं। इस पद्धति में स्वस्थ हो चुके कोविड-19 के रोगियों के शरीर से इस प्लाज्मा को प्राप्त किया जाता है तथा रोगी के शरीर में इन्हें प्रविष्ट करा कर उसका उपचार किया जाता है।

आईसीएमआर के अध्यनन के निष्कर्ष

  • आईसीएमआर में प्लाज्मा थेरेपी को लेकर एक अध्ययन किया जिसमें उन्होंने माना कि कोरोना मरीज के इलाज के लिए प्लाज्मा थेरेपी बहुत काम आए और उन्हें बेहतर परिणाम मिले।
  • इस अध्ययन में डॉक्टरों और वैज्ञानिकों का कहना है कि प्लाज्मा थेरेपी का इस्तेमाल हल्के और मध्यम दर्जे के मरीजों में ही किया जाना चाहिए।
  • अध्ययन में शामिल वैज्ञानिकों ने कहा कि रिकवर हो चुके मरीज का प्लाज्मा 1 महीने के भीतर कलेक्ट कर लेना चाहिए और उसे अधिकतम 5 दिन के अंदर संक्रमित मरीज को चढ़ा दिया जाना चाहिए तभी इसका परिणाम मिल सकेगा।

भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद

  • यह भारत में जैव-चिकित्सा अनुसंधान हेतु निर्माण, समन्वय और प्रोत्साहन के लिए शीर्ष संस्था है।
  • केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री परिषद के शासी निकाय के अध्यक्ष हैं।
  • इस परिषद को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा वित्तीय सहायता प्राप्त होती है।
  • इसका मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है।
  • परिषद इंट्राम्युरल (परिषद के संस्थानों द्वारा सम्पन्न) और एकक़्स्ट्राम्युरल (परिषद से असम्बद्ध संस्थानों द्वारा सम्पन्न) अनुसंधान के माध्यम से देश में जैव आयुर्विज्ञान शोध को बढ़ावा देती है।
  • यह राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राथमिकताओं के अनुसार स्वास्थ्य शोध को बढ़ावा देती है जिसमे संचारी रोगों पर नियंत्रण प्रजनन क्षमता नियंत्रण, मातॄ एवं शिशु स्वास्थ्य, पोषणजन्य विकारों , कैंसर, हृदवाहिकीय रोगों, अंधता, मधुमेह तथा चयापचय एवं रुधिर विकारों जैसे प्रमुख असंचारी रोगों पर अनुसंधान सम्मिलित हैं।

पी-8आई युद्धक विमान

चर्चा में क्यों?

  • हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की लंबी दूरी की पनडुब्बी रोधी, टोही, निगरानी और इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग क्षमताओं को अगले साल अमेरिका से चार और पी-8आई मल्टीमिशन विमानों के शामिल होने से और बल मिलने वाला है। भारत के पास छह और बोइंग खरीदने का विकल्प है। 2021 के अंत तक खरीददारी की जा सकती है।

पी-8आई युद्धक विमानके बारे में

  • P-8A Poseidon और P-8I को निवार्य रूप से समुद्री गश्त के लिए डिज़ाइन किया गया है। हार्पून ब्लॉक II और हल्के टारपीडो, टोही क्राफ्ट 129 सोनोबॉय को ले जा सकता है। यह एक घातक पनडुब्बी में बदल जाता है जो एंटी-शिप मिसाइल भी लॉन्च कर सकता है।
  • इस एयरक्राफ्ट को लंबी दूरी के पनडुब्बी रोधी युद्ध, सतह रोधी युद्ध के साथ-साथ खुफिया, निगरानी और टोही मिशन के लिए बनाया गया है। इसके अलावे भी एसका उपयोग किया जा सकता है। सेना ने चीन के साथ लद्दाख गतिरोध के दौरान निगरानी के लिए टोही विमान पर भरोसा किया था। 2017 के डोकलाम विवाद के दौरान भी इसका इस्तेमाल किया गया था।
  • इसका रेंज लगभग 2200 किमी है। साथ ही अधिकतम 490 समुद्री मील या 789 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ान भर सकता है। लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चीन के साथ गतिरोध से काफी पहले यानी नवंबर 2019 में रक्षा अधिग्रहण परिषद द्वारा छह P-8I की खरीद को मंजूरी दे दी गई थी।

नियोवाइस धूमकेतु

चर्चा में क्यों?

6000 साल बाद पृथ्वी से धूमकेतु नियोवाइस (सी 2020/एफ3) को नंगी आंखों से देखा जा रहा है। यह 21 वीं सदी का पहला दृश्यमान धूमकेतु है।यह मौका 6 हजार साल बाद आया है, जब इस अद्भुत नजारे को नंगी आंखों से देख सकते हैं। बाल वैज्ञानिक और अन्य युवा इन दिनों हर रोज इस अद्भुत नजारे को आंखों और कैमरे में कैद कर रहे हैं। 21 जुलाई को यह नजारा और भी रोचक रहा। 20 दिनों के बाद यह धूमकेतु फिर 6800 साल के लिए गायब हो जाएगा। 10 से 30 जुलाई तक उत्तर-पश्चिम क्षितिज में सूर्यास्त के तुरंत बाद दिखाई दे रहा है।

क्या होते है धूमकेतु?

  • धूमकेतु आकाशगंगा से कुछ किलोमीटर व्यास के पत्थर, बर्फ एवं धूल का कठोर पिंड होते हैं। अत्यंत ठंडी अवस्था में सूर्य के पास चक्कर लगाते हैं। धूमकेतू नियोवाइस को अपना एक चक्कर पूरा करने में लगभग छह हजार वर्ष का समय लगता है। 21 जुलाई को यह धूमकेतु पृथ्वी से करीब 10 करोड़ किमी और सूर्य से करीब 4 करोड़ किमी दूर रहा। इस धूमकेतु का नाम सी/2020 एफ-3 है।
  • आमतौर पर धूमकेतु को इतनी आसानी से देखा नहीं जा सकता। इससे पहले हेल-बोपे धूमकेतु को 1995-96 में देखा गया था। जब इसे मार्च में देखा गया था यह काफी दूर था और इसी बर्फीली पूंछ साफ-साफ नहीं दिखाई दे रही थी। उस वक्त खगोलविदों को नहीं पता था कि यहा साफ-साफ दिखाई भी देगा या नहीं।

मलेरिया नियंत्रण कार्यक्रम के लिए डीडीटी रसायन

चर्चा में क्यों?

  • रसायन और उर्वरक मंत्रालय के सार्वजनिक उपक्रम एचआईएल इंडिया लिमिटेड ने मलेरिया नियंत्रण कार्यक्रम के लिए दक्षिण अफ्रीका को 20.60 मिट्रिक टन डीडीटी 75% डब्‍ल्‍यूपी की आपूर्ति की है।

पृष्ठभूमि

  • दक्षिण अफ्रीका के स्वास्थ्य विभाग ने मलेरिया से सर्वाधिक प्रभावित मोज़ाम्बिक से सटे तीन प्रांतों में डीडीटी का बड़े पैमाने पर इस्‍तेमाल करने की योजना बनाई है। इस क्षेत्र में हाल के वर्षों में मलेरिया का काफी प्रकोप रहा है और इससे बड़ी संख्‍या में लोगों की मौत भी हुई है।
  • मलेरिया पूरी दुनिया में एक बड़ी स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍या रहा है। वर्ष 2018 में दुनिया में मलेरिया के अनुमानित 228 मिलियन मामले हुए और इससे अधिकांश मौतें (93%) अफ्रीकी क्षेत्र में हुईं। दक्षिण पूर्व एशिया में, मलेरिया के अधिकाशं मामले भारत में रहे और यहां इस बीमारी से मरने वालों की संख्‍या भी सबसे ज्‍यादा रही। मानव आबादी वाले क्षेत्र में कीटनाशकों का छिड़काव (आईआरएस) मच्‍छरों को खत्‍म करने का प्रभावी माध्‍यम साबित हुआ है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने मलेरिया फैलाने वाले मच्छरों से निपटने के लिए डीडीटी को एक प्रभावी रसायन के रूप में मानते हुए इसके इस्‍तेमाल का सुझाव दिया है। ऐसे में इसका उपयोग जिम्बाब्वे, जांबिया, नामीबिया, मोजाम्बिक आदि जैसे दक्षिणी अफ्रीकी देशों द्वारा व्यापक रूप से किया जाता है। भारत में भी मेलेरिया से निपटने के लिए डीडीटी का इस्‍तेमाल व्‍यापक रूप से किया जाता है।

क्या है डीडीटी?

  • डीडीटी पहली आधुनिक कीटनाशक दवा थी। डीडीटी, जिसे डिक्लोरो-डिफेनिल- ट्राइक्लोरोथेन भी कहा जाता है, ऑर्गनाइक्लोराइड नामक कीटनाशकों की एक वर्ग से संबंधित है। यह एक सिंथेटिक रासायनिक यौगिक है जो प्रकृति में नहीं होता है। डीडीटी एक रंगहीन, क्रिस्टलीय ठोस के रूप में पाया जाता है।
  • एचआईएल (इंडिया) दुनिया में डीडीटी बनाने वाली एकमात्र कंपनी है। भारत सरकार के मलेरिया नियंत्रण कार्यक्रम के तहत स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय को डीडीटी की आपूर्ति के लिए 1954 में कंपनी का गठन किया गया था। वर्ष 2019-20 में डीडीटी की देश में 20 राज्यों को आपूर्ति की गई थी। कंपनी कई अफ्रीकी देशों में भी इस उत्पाद का निर्यात कर रही है।

एंटीबॉडी, एंटीजन और टी सेल्स

चर्चा में क्यों?

  • कोरोनावायरस के संक्रमण को लेकर अभी तक कोई वैक्सीन नहीं बन पाई है मगर वैज्ञानिकों ने इस संक्रमण से बचने के लिए कई और चीजें बताई हैं जिसकी वजह से हम कोरोना संक्रमण होने के बाद भी उससे बच सकते हैं।
  • इसमें कुछ सबसे महत्वपूर्ण चीजें बताई जा रही है जिसमें एक एंटीजन, एक एंटीबॉडी और दूसरे टी सेल्स की भूमिका महत्वपूर्ण बताई जा रही है।

क्या होता है एंटीबॉडी और टी सेल्स?

  • कोरोनावायरस के संक्रमण से बचने के लिए लड़ाई जारी है। कोरोना (covid19) को रोकने में टी-सेल (T cell) एक बड़ा हथियार साबित हो सकता है। कोरोना की रोकथाम में लगे वैज्ञानिकों को टी सेल्स की खोज के बाद एक उम्मीद की किरण नजर आई है।
  • वैज्ञानिकों का कहना है कि कोरोना के कारण गंभीर रूप से बीमार हो रहे लोगों में रोग प्रतिरोधक कोशिकाओं जिसमें इम्यून सेल (immune-cell) या टी-सेल (T-cell) की संख्या काफी कम हो जाती है। अब ब्रिटेन के वैज्ञानिकों ने एक परीक्षण में बताया कि यदि किसी संक्रमित मरीज के शरीर में टी-सेल (T-cell) की संख्या बढ़ा दी जाए तो वो संक्रमण से बच सकता है।

क्या हैं टी-सेल (T-CELL)?

  • मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जब भी हमारे शरीर पर किसी तरह के वायरस (virus) का हमला होता है तो उससे लड़ने और बीमारी को शरीर से बाहर निकालने का काम ये टी-सेल (T-cell) ही करती हैं। एक स्वस्थ व्यक्ति के शरीर में एक माइक्रोलीटर रक्त में आमतौर पर 2000 से 4800 टी-सेल (T-cell) होती हैं, जिसे मेडिकल की भाषा में टी- लिम्फोसाइट्स (T-lymphocytes) भी कहा जाता है। वैज्ञानिकों ने अपने टेस्ट में पाया कि कोरोना के मरीजों में इनकी संख्या 200 से 1000 तक पहुंच जाती है। इसीलिए उनकी हालत गंभीर हो जाती है।

कितना है खतरा?

  • डॉक्टरों ने पाया कि आईसीयू (ICU) में आने वाले 70% कोरोना पीड़ित मरीजों में टी- सेल की संख्या 4000 से घटकर 400 तक आ जाती है। इसके साथ ही दो रिसर्च के बाद पता चला कि उन लोगों को संक्रमण नहीं हुआ जिनमें टी-सेल की संख्या ज्यादा पाई गई थी।
  • यहां एक बात ध्यान में रखने वाली है कि रोग की गंभीरता इन टी सेल प्रतिक्रियाओं के बल पर निर्भर हो सकती है। टी कोशिकाओं और बी कोशिकाओं में मुख्य अंतर यह है कि टी कोशिकाएं केवल संक्रमित कोशिकाओं के बाहर वायरल एंटीजन को पहचान सकती हैं और बी कोशिकाएं बैक्टीरिया और वायरस की सतह एंटीजन को पहचान सकती हैं।

क्या है एंटीजन?

  • एंटीजन वो बाहरी पदार्थ है जो कि हमारे शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को एंटीबॉडी पैदा करने के लिए एक्टिवेट करता है। एंटीबॉडी बीमारियों से लड़ने में कारगर साबित होता है। एंटीजन वातावरण में मौजूद कोई भी तत्व हो सकता है, जैसे कि कैमिकल, बैक्टीरिया या फिर वायरस। एंटीजन नुकसानदेह है। शरीर में इसका पाया जाना ही इस बात का संकेत है कि शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को एक बाहरी हमले से लड़ने के लिए एंटीबॉडी बनाने पर मजबूर होना पड़ा है।

क्या है एंटीबॉडी?

  • एंटीबॉडी शरीर का वो तत्व है, जिसका निर्माण हमारा इम्यून सिस्टम शरीर में वायरस को बेअसर करने के लिए पैदा करता है। संक्रमण के बाद एंटीबॉडीज बनने में कई बार एक हफ्ते तक का वक्त लग सकता है, इसलिए अगर इससे पहले एंटीबॉडी टेस्ट किए जाएं तो सही जानकारी नहीं मिल पाती है। इसके अलावा इस टेस्ट से कोरोना वायरस की मौजूदगी की सीधी जानकारी भी नहीं मिल पाती है इसलिए अगर मरीज का एंटी बॉडी टेस्ट निगेटिव आता है तो भी मरीज का RT-PCR टेस्ट करवाया जाता है।

क्यों जरूरी है एंटीबॉडी?

  • जब कोई इंसान कोरोनावायरस से संक्रमित हो जाता है तो उसके शरीर में एंटीबॉडी बनते हैं ये वायरस से लड़ते हैं। ठीक हुए 100 कोरोना मरीजों में से आमतौर पर 70-80 मरीजों में ही एंटीबॉडी बनते हैं। अमूमन ठीक होने के दो हफ्ते के अंदर ही एंटीबॉडी बन जाता है। कुछ मरीजों में कोरोना से ठीक होने के बाद महीनों तक भी एंटीबॉडी नहीं बनता है। कोरोना से ठीक हुए जिन मरीजों के शरीर में एंटीबॉडी काफी वक्त बाद बनते हैं उनके प्लाज्मा की गुणवत्ता कम होती है, इसलिए आमतौर पर उनके प्लाज्मा का उपयोग कम ही किया जाता है।
  • लेकिन जिनके शरीर में ठीक होने के दो सप्ताह के भीतर ही एंटीबॉडी बन जाती है वो फिर सालों तक रहती है। ये लोग वो होते हैं जिनकी इम्यूनिटी मजबूत होती है ऐसे लोग एक बार प्लाज्मा डोनेट करने के 15 दिन बाद फिर से प्लाज्मा डोनेट कर सकते हैं, क्योंकि उनके शरीर में एंटीबॉडी बन जाता है। यानी अगर कोरोना से ठीक हुआ कोई मरीज प्लाज्मा डोनेट करने के लिए स्वस्थ हो तो वो लगातार प्लाज्मा डोनेट कर सकता है और किसी जरूरतमंद कोरोना मरीज के काम आ सकता है।

एंटी बॉडी टेस्ट

  • कोरोना की जांच के लिए एक और टेस्ट एंटीबॉडी टेस्ट है। एंटी बॉडी टेस्ट खून का सैंपल लेकर किया जाता है इसलिए इसे सीरोलॉजिकल टेस्ट भी कहते हैं। इसके नतीजे जल्द आते हैं और ये RT-PCR के मुकाबले कम खर्चीला भी होता है। ये टेस्ट ऑन लोकेशन पर किया जा सकता है।

:: पर्यावरण और पारिस्थितिकी ::

जलवायु परिवर्तन से भारत में घटेगा सेब उत्पादन: अध्ययन

  • यूएस नेशनल साइंस फाउंडेशन (एनएसएफ) ने अपने अध्ययन में हिमाचल प्रदेश में सेब उत्पादन पर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव का आकलन किया और रेखांकित किया कि ग्लोबल वार्मिंग से निपटने के लिए वातावरण में सल्फर डाईऑक्साइड छिड़कने जैसी भू- अभियांत्रिकी विधियां भी उत्पादन कार्य में अस्थायी लाभ ही पहुंचा सकती हैं।
  • आपको बता दे सेब का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य जम्मू कश्मीर है। इसके बाद हिमाचल प्रदेश तथा उत्तराखंड सेब के प्रमुख उत्पादक राज्य है।

क्या कहा गया अध्ययन में?

  • जलवायु परिवर्तन की वजह से भारत में सेब उत्पादन में कमी आएगी क्योंकि जलवायु से संबंधित यह स्थिति भीषण सर्दी के मौसम को प्रभावित करेगी जो सेब के पौधों के लिए आवश्यक होती है। इतना ही नहीं इस समस्या से निपटने में भू-अभियांत्रिकी विधियां भी ज्यादा काम नहीं आएंगी।
  • एनएसएफ के अध्ययन के दौरान पाया गया कि जलवायु परिवर्तन पौधों के लिए आवश्यक भीषण सर्दी के मौसम को प्रभावित कर सेब उत्पादन को कम कर देगा। भू-अभियांत्रिकी विधियों के सीमित लाभ होंगे, लेकिन यदि इस तरह की विधियों को अचानक रोक दिया गया तो विपरीत परिणाम होंगे।’’
  • समाज जलवायु संबंधी इस स्थिति में गर्मी से निपटने के लिए ऊपरी वायुमंडल में सल्फर डाई ऑक्साइड छिड़कने का निर्णय कर सकता है। इस तरह की भू-अभियांत्रिकी विधियां एक बड़े बादल की स्थिति बना देंगी जो कुछ हद तक सौर विकिरण को रोकेगी और धरती को ठंडा करेगी। लेकिन यदि इस तरह के छिड़काव को अचानक रोक दिया गया तो इसका जानवरों तथा पौधों पर काफी नकारात्मक असर पड़ेगा और जानवर जीवित रहने के लिए किसी उपयुक्त ठिकाने की ओर पलायन करने को विवश होंगे।

पीपल्स फॉर एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स (पेटा)

चर्चा में क्यों?

  • दिल्ली उच्च न्यायालय ने पशु अधिकार समूह पेटा की देशभर के लगने वाले सर्कस में पशुओं की प्रस्तुतियां को तत्काल रोकने की मांग करने वाली जनहित याचिका पर केंद्र, भारतीय पशु कल्याण बोर्ड (एडब्ल्यूबीआई) और केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (सीजेडए) से सोमवार को जवाब मांगा।
  • हालांकि उच्च न्यायालय ने पशुओं को तुरंत कब्जे में लेने अथवा पेटा, भारत को पशुओं को भोजन एवं दवाइयां उपलब्ध करवाने की अनुमति देने संबंधी कोई भी अंतरिम आदेश देने से इनकार कर दिया। पीठ ने कहा कि पशुओं को दवा तथा भोजन उपलब्ध करवाने से पेटा को किसी ने नहीं रोका लेकिन अदालत शुरुआती चरण में ही दूसरे पक्ष की बात सुने बगैर अपने आदेश में इस बात को शामिल नहीं कर सकती है।

पृष्ठभूमि

  • पेटा, भारत ने याचिका में दावा किया है कि कोविड-19 के प्रकोप और उसके कारण लगे लॉकडाउन के कारण सर्कस भोजन नहीं दे पा रहे जिसके कारण पशु भूखमरी की कगार पर हैं। याचिका में सर्कस में पशुओं के खेलों को रोकने की भी मांग की गई है।

पीपल्स फॉर एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स (पेटा) के बारे में

  • पेटा एक पशु-अधिकार संगठन है। इस संगठन में पशुओं के साथ नैतिक व्यवहार के पक्षधर लोग काम करते है। यह संस्था जानवरों के अधिकारों की स्थापना और बचाव के लिए समर्पित है। यहाँ पशुओं की देख रेख से लेकर उनके रख राखब तक का पूरा ध्यान रखा जाता है। यह संस्था पशुओं के हित के लिए कार्य करती है। पेटा का गठन 1980 में इनग्रिड न्यूकिर्क और एलेक्स पचेको द्वारा किया गया था। यह पूरे संसार का सबसे बड़ा पशु- अधिकार संगठन है। इसका मुख्यालय यूएसए के वर्जिनिया के नॉर्फोल्क (Norfolk) में स्थित है

:: विविध ::

The India Way: Strategies for an Uncertain World

  • पूर्व राजनयिक एवं विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने एक नई पुस्तक 'द इंडिया वे : स्ट्रैटजीज फॉर एन अनसर्टेन वर्ल्ड' लिखी है। इस पुस्तक का विमोचन 7 सितंबर को होना है।
  • इस पुस्तक में एस. जयशंकर ने लिखा है की भारत अतीत की गलतियों के कारण विदेश नीति के क्षेत्र में अपना वो प्रभाव कायम करने में असफल रहा जिसका यह देश हकदार था। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने तीन बड़ी गलतियों का हवाला देते हुए कहा कि अब भारत को विदेश नीति में धाक जमाने के लिए पराक्रम के साथ कड़ा संघर्ष करना पड़ा जो पहले आसानी से हो सकता था। जयशंकर ने बंटवारा, आर्थिक सुधार में देरी और परमाणु विकल्प संबंधी लंबी कवायद को विदेश नीति पर अतीत के तीन बड़े बोझ के रूप में पेश किया।

:: प्रिलिम्स बूस्टर ::

  • हाल ही में पृथ्वी पर 6000 वर्षों के बाद सबसे नजदीक आने के कारण चर्चा में रहे 21 वीं सदी का पहला दृश्यमान धूमकेतु का नाम क्या है? (धूमकेतु नियोवाइस -सी 2020/एफ3)
  • भारत द्वारा संभावित खरीद से चर्चा में रहे पी-8आई (P8I) क्या है एवं इसका निर्माण किस कंपनी के द्वारा किया गया है? (निगरानी, टोही एवं पनडुब्बी रोधी युद्धक विमान, बोइंग-अमेरिका)
  • यूएस नेशनल साइंस फाउंडेशन द्वारा जलवायु परिवर्तन से पैदावार पर होने वाले असर से चर्चा में रहे ‘सेब’ के उत्पादन में कौन सा भारत का राज्य/ केंद्र शासित प्रदेश अग्रणी है? (जम्मू-कश्मीर प्रथम, हिमाचल प्रदेश द्वितीय)
  • हाल ही में चर्चा में रही पुस्तक The India Way: Strategies for an Uncertain World (अनिश्चित दुनिया के लिए रणनीति का भारतीय तरीका) किसने लिखी है? (विदेश मंत्री एस. जयशंकर)
  • भारत में सर्कस में पशुओं की प्रस्तुतियां को तत्काल रोकने की मांग से चर्चा में रहे ‘पेटा’ संस्था की स्थापना कब हुई एवं इसका मुख्यालय कहां है? (1980 नोरफ़ॉल्क, वर्जीनिया, संयुक्त राज्य अमेरिका)
  • ईरान द्वारा भारत को परियोजना से बाहर निकालने जाने की खबरों का खंडन करने से चर्चा में रहे ‘चाबहार रेल प्रोजेक्ट’ के तहत किन भागों को आपस में जोड़ा जाएगा? (चाबहार से जाहेदान )
  • टिड्डियों के हमले से भारत और पूर्वी अफ्रीका में खाद्य संकट की चेतावनी से चर्चा में रहे विश्व मौसम संगठन (WMO) संयुक्त राष्ट्र का अंग कब बना एवं इसका मुख्यालय कहां है? (1950, जिनेवा स्विट्जरलैंड)
  • हाल ही में नस्लभेद और आर्थिक असमानता के खिलाफ किस अभियान के तहत पूरे विश्व के 160 शहरों के 20 हजार से अधिक कामगार अपने काम पर नहीं गए? (स्ट्राइक फॉर ब्लैक लाइव्स)
  • हाल ही में डीआरडीओ के द्वारा AI से लैस,हर मौसम में काम करने वाले किस ड्रोन को सेना को सौंपा गया है? (भारत ड्रोन)
  • कोविड-19 महामारी के संदर्भ में चर्चा में रहे टी-सेल (T-cell) और एंटीजन का मानव शरीर में कार्य क्या है? (क्रमशः शरीर में संक्रमण से लड़ना और प्रतिरक्षा प्रणाली को एंटीबॉडी पैदा करने को प्रेरित करना)
  • हाल ही में दिल्ली में सर्वेक्षण कराए जाने से चर्चा में रहे ‘सीरो सर्वेक्षण’ क्यों कराया जाता है? (संक्रमण का प्रसार एवं संक्रमण के विरुद्ध प्रतिरक्षा/ एंटीबॉडी के विकास को जानने हेतु)
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा संबोधन किए जाने से चर्चा में रहे ‘इंडिया आइडियाज समिट’ का आयोजन किन दो देशों के मध्य किया जा रहा है एवं इसकी थीम क्या है? (भारत और अमेरिका,‘बेहतर भविष्य का निर्माण’)

स्रोत साभार: Dainik Jagran (Rashtriya Sanskaran), Dainik Bhaskar (Rashtriya Sanskaran), Rashtriya Sahara (Rashtriya Sanskaran) Hindustan Dainik (Delhi), Nai Duniya, Hindustan Times, The Hindu, BBC Portal, The Economic Times (Hindi & English), PTI, PIB