(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (22 जनवरी 2020)

दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर


(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (22 जनवरी 2020)


:: राष्ट्रीय समाचार ::

32वीं 'प्रगति' समीक्षा बैठक

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार को सक्रिय प्रशासन और विभिन्न परियोजनाओं के सामयिक क्रियान्वयन की समीक्षा के लिए 32वीं 'प्रगति' बैठक की अध्यक्षता करेंगे। 'प्रगति' सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी आधारित एक बहुउद्देश्यीय मंच है।
  • 'प्रगति' के पिछले संवादों के दौरान प्रधानमंत्री ने 12 लाख करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली परियोजनाओं की समीक्षा की। इसमें कहा गया कि 2019 में 16 राज्यों तथा जम्मू एवं कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश से संबंधित 61,000 करोड़ रुपये से अधिक की नौ परियोजनाओं पर चर्चा की गई थी।
  • बैठक में विदेशों में काम करने वाले भारतीय नागरिकों की शिकायतों, राष्ट्रीय कृषि बाजार, आकांक्षी जनपद कार्यक्रम और अवसंरचना विकास कार्यक्रमों व पहलों जैसे विभिन्न विषयों पर भी चर्चा की गई थी।

'प्रगति' क्या है?

  • प्रधानमंत्री ने मार्च, 2015 को बहुउद्देश्यीय और बहुविषयक शासन मंच 'प्रगति' की शुरुआत की थी। 'प्रगति' के जरिये भारत सरकार के महत्वपूर्ण कार्यक्रमों और परियोजनाओं तथा विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा शुरू की जाने वाली परियोजनाओं की निगरानी और समीक्षा में मदद मिलती है।

:: भारतीय राजव्यवस्था ::

सांसदों-विधायकों की अयोग्यतानिर्धारण में अध्यक्ष की भूमिका

  • उच्चतम न्यायालय ने सांसदों और विधायकों को अयोग्य घोषित करने की याचिकाओं पर फैसले में अध्यक्ष की भूमिका और इसमें अत्यधिक विलंब का संज्ञान लिया। पीठ ने मणिपुर विधानसभा के अध्यक्ष से कहा कि वह भाजपा के विधायक और मणिपुर के वन मंत्री टी श्यामकुमार को अयोग्य घोषित करने के लिये कांग्रेस नेता की याचिका पर चार सप्ताह के भीतर निर्णय लें।
  • उच्चतम न्यायालय ने संसद से अनुरोध किया कि उसे सांसदों और विधायकों की अयोग्यता के मामलों पर फैसला करने के अध्यक्ष के अधिकारों पर फिर से विचार करना चाहिये क्योंकि इस पद पर आसीन निर्वाचित प्रतिनिधि भी 'एक राजनीतिक दल विशेष का सदस्य होता है।

उच्चतम न्यायालय का नजरिया

  • न्यायमूर्ति आर एफ नरीमन, न्यायमूर्ति अनिरूद्ध बोस और न्यायमूर्ति वी रामसुब्रमणियन की पीठ ने अपने फैसले में कहा कि अयोग्यता के मामले में निर्णय के लिये संसद को संविधान में संशोधन करके लोकसभा और विधानसभाओं के अध्यक्ष के स्थान पर एक स्वतंत्र और स्थाई अधिकरण गठित करने पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। पीठ ने कहा कि उच्चतम न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश या उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता में स्थाई अधिकरण बनाने या कोई ऐसी व्यवस्था तैयार करने पर विचार करना चाहिए जिसमें तेजी से और निष्पक्षता से फैसले हों सकें।
  • पीठ ने कहा कि संसद 10वीं अनुसूची के तहत आने वाले अयोग्यता से संबंधित विवादों में पंचाट के रूप में लोक सभा और विधानसभा अध्यक्ष के स्थान पर शीर्ष अदालत के पूर्व न्यायाधीश या उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक स्थाई अधिकरण या कोई अन्य स्वतंत्र व्यवस्था बनाने के बारे में गंभीरता से विचार करे ताकि ऐसे विवादों का तत्परता और निष्पक्षता से निर्णय हो सके। इस तरह 10वीं अनुसूची के प्रावधानों को असली अधिकार मिलेंगे जो हमारे लोकतंत्र के सही तरीके से काम करने के लिये बहुत ही महत्वपूर्ण है।
  • पीठ ने कहा कि अब समय आ गया है कि संसद को पुन: विचार करना चाहिए कि क्या संसद या विधानसभा की सदस्यता से अयोग्य घोषित करने के लिये दायर याचिकाओं पर निर्णय का दायित्व अर्द्ध न्यायिक प्राधिकारी के रूप में अध्यक्ष को सौंपा जाना चाहिए जबकि ऐसे अध्यक्ष राजनीतिक दल विशेष के ही सदस्य होते हैं।

पृष्टभूमि

  • मणिपुर की 60 सदस्यीय विधानसभा के चुनाव मार्च 2017 मे हुये थे और इसमें 28 सीटें जीतकर कांग्रेस सबसे बड़े दल के रूप में उभरी थी जबकि भाजपा के पार 21 सीटें थीं। हालांकि, राज्य में भाजपा के नेतृत्व में सरकार ने शपथ ली। कांग्रेस के विधायक श्यामकुमार ने पाला बदल लिया था और वह सरकार में मंत्री बन गये थे। इसके बाद श्यामकुमार को दल-बदल कानून के तहत अयोग्य घोषित करने के लिये अप्रैल 2017 में कई याचिकायें अध्यक्ष के यहां दायर की गयी थीं।
  • चूंकि यह मामला अध्यक्ष के पास लंबित था, इसलिए कांग्रेस नेता पहले उच्च न्यायालय गये और फिर उन्होंने शीर्ष अदालत में अपील दायर की। कांग्रेस नेता चाहते थे कि मंत्री की नियुक्ति रद्द की जाये और अध्यक्ष के इस मामले में आवश्यक कार्यवाही करने की बजाय न्यायालय ही अयोग्यता के मुद्दे पर फैसला करे।

:: भारतीय अर्थव्यवस्था ::

जोमैटो ने खरीदा ऊबर ईट्स का भारतीय कारोबार

  • ऑनलाइन फूड डिलिवरी की सेवा देने वाली कंपनी जोमैटो ने ऊबर ईट्स का भारतीय कारोबार खरीद लिया है। जोमैटो ने यह सौदा 2485 करोड़ अर्थात करीब 35 करोड़ डॉलर में किया है। इससे पहले काफी समय से जोमैटो द्वारा ऊबर ईट्स का अधिगृहण करने की खबरें सामने आ रही थीं। कैब सर्विस प्रोवाइडर ऊबर के इस ऑनलाइन फूड सर्विस कारोबार को भारत में कोई अच्छी सफलता नहीं मिल रही थी। इसी कारण ऊबर ने अपने इस कारोबार को जोमैटो को बेचने का फैसला लिया है। बताया जा रहा है कि अब ऊबर के पास मात्र 9.9 फीसद शेयर रहेंगे।

भारती एयरटेल में 100% FDI की मंजूरी

  • दूरसंचार विभाग ने भारती एयरटेल में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश 49 फीसदी से बढ़ाकर 100 फीसदी तक करने की मंजूरी दे दी है.
  • भारती एयरटेल को बैंकिंग नियामक भारतीय रिजर्व बैंक से भी कंपनी में विदेशी निवेशकों की 74 फीसदी तक हिस्सेदारी रखने की अनुमति मिल गयी है.
  • कुछ दिन पहले ही एयरटेल ने वैधनिक बकाये के रूप में करीब 35,586 करोड़ रुपये का भुगतान किया. इस रकम में 21,682 करोड़ रुपये लाइसेंस शुल्क और 13,904.01 करोड़ रुपये स्पेक्ट्रम बकाया चार्ज शामिल है. इसमें टेलीनॉर और टाटा टेली के बकाये शामिल नहीं हैं. एयरटेल ने टेलीनॉर और टाटा टेली को खरीदा है, जिसकी वजह से उसके बकाये का भुगतान भी एयरटेल को ही करना होगा.
  • भारती टेलीकॉम ने सिंगापुर की सिंगटेल और अन्य विदेशी कंपनियों से 4,900 करोड़ रुपये के निवेश के लिए पिछले महीने मोदी सरकार से अनुमति मांगी थी. 100 फीसदी तक एफडीआई मंजूरी के बाद देश की सबसे पुरानी निजी क्षेत्र की दूरसंचार कंपनी एयरटेल विदेशी इकाई बन सकती है.
  • दूरसंचार विभाग ने इससे पहले इस साल की शुरुआत में भारती एयरटेल के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश आवेदन को खारिज कर दिया था, क्योंकि कंपनी ने विदेशी निवेश की सीमा या रकम के बारे में स्पष्ट नहीं किया था.

भारती एयरटेल

  • भारती टेलीकॉम भारती एयरटेल की प्रमोटर कंपनी है. 100 फीसदी एफडीआई की अनुमति मिलने के बाद भारती टेलीकॉम में विदेशी हिस्सेदारी बढ़कर 50 फीसदी से अधिक हो जाएगी. इस वजह से एयरटेल विदेशी स्वामित्व वाली इकाई बन जाएगी.
  • इस समय सुनील भारती मित्तल और उनके परिवार की भारती टेलीकॉम में करीब 52 फीसदी हिस्सेदारी है. भारती टेलीकॉम की भारती एयरटेल में करीब 41 फीसदी हिस्सेदारी है.

ओरियंटल इंश्योरेंस में होगा नेशनल इंश्योरेंस और यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस का विलय

  • सरकारी जनरल इंश्योरेंस कंपनियों नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड और यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड का ओरियंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड में विलय हो सकता है। इन तीनों कंपनियों के विलय को सैद्धांतिक मंजूरी मिल चुकी है और बजट से पहले या बाद में कभी भी इस विलय की औपचारिक घोषणा हो सकती है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बजट में इन कंपनियों के लिए कैपिटल इंफ्यूजन की भी घोषणा कर सकती है।

पृष्ठभूमि

  • वित्त वर्ष 2018-19 के आम बजट में तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने तीनों सरकारी जनरल बीमा कंपनियों के विलय के प्रस्ताव की घोषणा की थी। हालांकि, कई कारणों से अभी तक विलय की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है। इसमें कंपनियों की खराब वित्तीय हालत भी एक प्रमुख कारण है। सूत्रों का कहना है कि सरकार तीनों कंपनियों की वित्तीय हालत सुधारने के लिए बजट में कैपिटल इंफ्यूजन की घोषणा भी कर सकती है। तीनों कंपनियों को विलय के लिए 10 से 12 हजार करोड़ रुपए की अतिरिक्त पूंजी की आवश्यकता है।

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया बना विश्व का सबसे बड़ा डेरिवेटिव एक्सचेंज

  • नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया लिमिटेड (एनएसई), वायदा कारोबार से जुड़ी एक संस्था फ्यूचर इंडस्ट्री एसोसिएशन (एफआईए) द्वारा आंकड़ों के मुताबिक अनुबंधों की संख्या के लिहाज से सीएमई समूह को 2019 में पीछे छोड़कर विश्व की सबसे बड़ा डेरिवेटिव (वायदा) एक्सचेंज बन गई। वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ एक्सचेंज (डब्ल्यूईएफ) द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक नकदी इक्विटी खंड में कारोबार की संख्या के लिहाजसे भी एनएसई वैश्विक स्तर पर तीसरे स्थान पर रही।

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज

  • नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) भारत का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज है। यह मुंबई में स्थित है।
  • NSE की स्थापना 1992 मे 25 करोड़ रुपये की समता पूँजी के साथ हई थी।
  • नेशनल स्टॉक एक्सचेंज की स्थापना देश में वित्तीय सुधार के लिए M.J. शेरवानी समिति की सिफारिशों के आधार पर की गयी थी|

:: विज्ञान और प्रौद्योगिकी ::

टी-सेल इम्यून थेरपी

  • वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी शरीर की इम्यूनिटी को बढ़ाकर हम हर तरह के कैंसर से लड़ सकते हैं। इंग्लैंड की कार्डिफ यूनिवर्सिटी के अनुसंधानकर्ताओं की टीम ने पाया कि इंसान के ब्लड सेल में एक नए तरह का किलर टी-सेल भी होता है। ये टी-सेल एक तरह का इम्यून सेल होता है, जो शरीर में स्कैनर का काम करता है और शरीर के लिए किसी भी तरह के खतरे को खत्म कर देता है।

लंग्स से लेकर कोलोन तक हर तरह के कैंसर का होगा इलाज

  • जब लैब में इन टी-सेल्स का इस्तेमाल किया गया तो पाया गया कि ये सेल्स फेफड़े, स्किन, ब्लड, कोलोन, ब्रेस्ट, हड्डियां, प्रॉस्टेट, ओवेरियन, किडनी और सर्वाइकल में होने वाले कैंसर सेल्स को टार्गेट करते हैं जबकी शरीर के हेल्दी सेल्स को किसी भी तरह का नुकसान नहीं पहुंचाते। कैंसर के इलाज में टी-सेल थेरपी बिलकुल नई मिसाल है और इस थेरपी में इम्यून सेल्स को निकालकर, उन्हें मॉडिफाई करके मरीज के खून में वापस डाल दिया जाता है ताकि ये मॉडिफाइ्ड इम्यून सेल्स कैंसर सेल्स को खत्म कर सकें। फिलहाल कैंसर के इलाज में सबसे ज्यादा जिस थेरपी का इस्तेमाल होता है उसका नाम CAR-T है जो हर मरीज के लिए पर्सनलाइज्ड होता है लेकिन सिर्फ कुछ ही तरह के कैंसर के इलाज में सफल साबित हुआ है।

टी-सेल थेरपी से कैंसर का हर मरीज हो पाएगा ठीक

  • अगर इन टी-सेल थेरपी का हमला कैंसर सेल पर भी सफल रहता है तो वैज्ञानिकों का मानना है कि एक तीर से कई शिकार करने वाला सिस्टम हमारे शरीर के अंदर ही मजबूत किया जा सकता है। कार्डिफ यूनिवर्सिटी टीम की इस खोज को नेचर इम्यूनोलॉजी मेडिकल जर्नल में प्रकाशित किया गया है। प्रफेसर एंड्रयू सीवेल का दावा है कि इस टी-सेल थेरपी से कैंसर के हर मरीज को ठीक किया जा सकता है।

नए तरह के टी-सेल रिसेप्टर की हुई खोज

  • कार्डिफ के अनुसंधानकर्ताओं ने एक नए तरह के टी-सेल्स की खोज की है जिसमें एक अलग तरह का टी-सेल रिसेप्टर (TCR) होता है जो इंसानों में पाए जाने वाले ज्यादातर कैंसर की पहचान कर उन कैंसर वाले सेल्स का खात्मा करता है जबकी हेल्दी सेल्स को किसी तरह का नुकसान नहीं पहुंचाता। इस स्टडी के लीड ऑथर प्रफेसर ऐंड्रयू सीवेल कहते हैं, 'हम यही उम्मीद कर रहे हैं कि इस नए टीसीआर के जरिए हमें एक नया रास्ता मिलेगा जिसके जरिए हम हर तरह के कैंसर से पीड़ित मरीज में इस थेरपी का इस्तेमाल कर कैंसर सेल्स को खत्म कर पाएंगे।

:: पर्यावरण,पारिस्थितिकी और प्रदूषण ::

‘‘जलवायु आपातकाल’’

  • स्पेन की नयी सरकार ने मंगलवार को ‘‘जलवायु आपातकाल’’ की घोषणा करने के साथ ही कहा कि वह अपने कार्यकाल के पहले 100 दिन के भीतर नवीकरणीय ऊर्जा को अपनाने के लिए एक मसौदा विधेयक पेश करेगी।
  • सरकार ग्रीन हाऊस गैसों के उत्सर्जन में कमी लाने के लिए एक मसौदा विधेयक लाने को प्रतिबद्ध है और उसका लक्ष्य 2050 तक जलवायु तटस्थता के लक्ष्य को हासिल करना है जहां उसका कार्बन उत्सर्जन शून्य होगा।
  • आयरलैंड की संसद ने जलवायु आपातकाल घोषित कर दिया है। ब्रिटेन के बाद ऐसा कदम उठाने वाला वह संसार का दूसरा देश बन गया है।

2022 तक 'अक्षय ऊर्जा का लक्ष्य': एक विश्लेषण

  • ग्लोबल वार्मिंग से निपटने के लिए तय किए अपने लक्ष्यों के तहत केंद्र सरकार ने 2022 के लिए ऊर्जा का अक्षय सपना 2015 में देखा। इस दिशा में तेजी से काम भी शुरू हुए। अब सेंटर फॉर स्टडी ऑफ साइंस टेक्नोलॉजी एंड पॉलिसी की रिसर्च बताती है कि सरकार के अपने लक्ष्य तक पहुंचने के लिए कुल जमीन फुटप्रिंट 55 हजार से 1.25 लाख वर्ग किमी की दरकार होगी। यह रकबा देश के छत्तीसगढ़ या हिमाचल प्रदेश के बराबर है। बता दें कि 175 गीगावाट- 2022 तक अक्षय ऊर्जा पैदा करने का सरकार का महत्वाकांक्षी लक्ष्य है।

चिंता की बात

  • रिपोर्ट के मुताबिक अगर तय लक्ष्य को हासिल करने के लिए एकसूत्री कार्यक्रम के तहत आगे बढ़ा गया तो इसके कई नकारात्मक असर दिखाई दे सकते हैं। औसतन 6,700 से 11,900 वर्ग फीट जंगल और 24,100 से 55,700 वर्ग फीट कृषि योग्य भूमि इससे अलग-अलग स्तरों पर प्रभावित हो सकती हैं। इस नुकसान से पर्यावरणीय और सामाजिक टकराव शुरू हो सकते हैं। लिहाजा निवेश पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। कुल मिलाकर अक्षय ऊर्जा पैदा करने के लक्ष्य को पाना मुश्किल हो सकता है।

क्या है समाधान

  • रिपोर्ट के अनुसार भारत के 32.90 करोड़ हेक्टेयर रकबे में से 27 फीसद बेकार भूमि है। जो इस लक्ष्य को पाने के लिए पर्याप्त है।

उठाए गए प्रभावी कदम

  • अक्षय ऊर्जा का लक्ष्य हासिल करने के लिए सरकार का सबसे चर्चित कदम टैक्स हॉलिडे रहा। इसमें सरकार ने राज्यों के स्तर पर अक्षय ऊर्जा की खरीद को अनिवार्य बनाने से लेकर 10 साल के टैक्स हॉलिडे के जरिए आर्थिक प्रोत्साहन देने का प्रयास किया।
  • धूप वाले 300 दिनों के साथ भारत सूरज की सर्वाधिक रोशनी वाले देशों में प्रमुख है जबकि पवन ऊर्जा का निर्माण भी पूरे देश में कहीं भी संभव है।

पांचवां अक्षय ऊर्जा उत्पादक देश

  • भारत अब दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा अक्षय ऊर्जा उत्पादक देश है। साथ ही विश्व का चौथा सबसे बड़ा पवन ऊर्जा क्षमता और पांचवां सबसे बड़ा सौर क्षमता वाला देश बन चुका है। 2015 के पेरिस जलवायु समझौते में भारत ने 2022 तक 175 गीगावाट अक्षय ऊर्जा क्षमता हासिल करने का दावा किया है इसलिए 2014-15 और 2017-18 के बीच अक्षय ऊर्जा के बजटीय आवंटन में 38.9 प्रतिशत की वृद्धि भी की गई। 2010-11 में राष्ट्रीय स्वच्छ ऊर्जा और पर्यावरण निधि का गठन किया गया था।

ऐसा होगा विभाजन

  • 2022 तक 175 गीगावाट अक्षय ऊर्जा का जो लक्ष्य रखा है, इसमें 100 गीगावाट सौर, 60 गीगावाट पवन, 10 गीगावाट बॉयो पावर और 5 गीगावाट छोटे हाइड्रो पावर का रहेगा।

महत्वपूर्ण तथ्य:

  • अक्षय ऊर्जा भारत की ऊर्जा योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा है। 1970 में ही इसकी टिकाऊ ऊर्जा के रूप में पहचान कर ली गई थी।
  • देश में ऊर्जा उत्पादन की स्थापित क्षमता 310 गीगावाट है। इसमें 69.4 फीसद तापीय, 13.9 जलविद्युत, 14.8 अक्षय और 1.9 फीसद परमाणु ऊर्जा है।
  • आधुनिक समय में इसका इस्तेमाल बिजली पैदा करने, गर्म व ठंडा करने के उपयोगों में, परिवहन और गांवों में ग्रिड से बाहर ऊर्जा सेवाएं देने में हो रहा है।
  • देश में 12 लाख से ज्यादा घरों में रोशनी के लिए सोलर ऊर्जा का उपयोग हो रहा है। इतने ही घरों में खाना पकाने के लिए बॉयो गैस प्लांट का इस्तेमाल हो रहा है। सोलर फोटोवोल्टिक पावर सिस्टम ग्रामीण विद्युतीकरण, रेलवे सिग्नलिंग, मोबाइल टावर, टीवी ट्रांसमिशन और सीमा चौकियों पर बिजली मुहैया कराने में इस्तेमाल हो रहे हैं।

वायु प्रदूषण पर ग्रीनपीस इंडिया की रिपोर्ट

  • गैर-सरकारी संगठन ग्रीनपीस इंडिया द्वारा भारत में वायु प्रदूषण पर एक रिपोर्ट जारी की गयी। रिपोर्ट में कोयला खदानों के लिए मशहूर झारखंड के झरिया और धनबाद की हवा सबसे जहरीली बताई गई है। साल 2018 में दोनों शहरों में पीएम-10 का वार्षिक औसत स्तर क्रमश: 322 और 264 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रिकॉर्ड किया गया था।
  • भारत के दस सबसे प्रदूषित शहरों में छह उत्तर प्रदेश के हैं। रिपोर्ट में नोएडा, गाजियाबाद, बरेली, प्रयागराज, मुरादाबाद और फिरोजाबाद की आबोहवा बेहद खराब करार दी गई है।
  • चौथी एयरपोकैलिप्स रिपोर्ट में दावा किया गया है कि नेशनल एम्बियेंट एयर क्वॉलिटी मॉनिटरिंग प्रोग्राम (एनएएमपी) में शामिल 287 भारतीय शहरों में से 231 में उच्च स्तर का वायु प्रदूषण बरकरार है। इन शहरों में पीएम-10 की मात्रा तय राष्ट्रीय मानक 60 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से कहीं ज्यादा दर्ज की गई है।
  • रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यूपी, बिहार, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, तेलंगाना, कर्नाटक और तमिलनाडु में कई ऐसे शहर हैं, जहां पीएम-10 का स्तर राष्ट्रीय मानक से अधिक है। बावजूद इसके उन्हें राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनएसीपी) का हिस्सा नहीं बनाया गया है।
  • 2017 में सबसे दूषित भारतीय शहरों की सूची में आठवें पायदान पर काबिज दिल्ली 2018 में दसवें स्थान पर पहुंच गई है। हालांकि, यहां पीएम-10 की मात्रा अब भी तय राष्ट्रीय मानक से साढ़े तीन गुना, जबकि डब्ल्यूएचओ के मानकों से 11 गुना ज्यादा है।
  • जनवरी 2019 में शुरू किए गए एनएसीपी के लिए 122 शहरों को चिन्हित किया गया था। हालांकि, अभी महज 102 शहर इस कार्यक्रम से जुड़े हैं। कुछ शहरों में हवा की गुणवत्ता सुधारने का काम भी शुरू किया जा चुका है, लेकिन वायु प्रदूषण में ज्यादा कमी नहीं देखने को मिल रही है।
  • रिपोर्ट में कोयला खदानों के लिए मशहूर झारखंड के झरिया और धनबाद की हवा सबसे जहरीली बताई गई है। साल 2018 में दोनों शहरों में पीएम-10 का वार्षिक औसत स्तर क्रमश: 322 और 264 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रिकॉर्ड किया गया था।

मिजोरम के लुंगलेई की हवा सबसे साफ

  • ग्रीनपीस इंडिया के मुताबिक मिजोरम के लुंगलेई और मेघालय के डॉकी की हवा सबसे साफ है। 2018 में दोनों शहरों में पीएम-10 का वार्षिक औसत स्तर क्रमश: 11 व 23 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया। 2017 में यह क्रमश: 25 और 28 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर था।

:: विविध ::

जेयर मेसियास बोलसोनारो

  • इस बार गणतंत्र दिवस समारोह के मुख्य अतिथि ब्राजील के राष्ट्रपति जेयर मेसियास बोलसोनारो शुक्रवार को चार दिवसीय यात्रा पर भारत आएंगे। राष्ट्रपति के रूप में बोलसोनारो की यह पहली भारत यात्रा है। वह आठ मंत्रियों, शीर्ष अधिकारियों और एक बड़े व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल के साथ दिल्ली पहुंचेंगे। इस दौरान भारत और ब्राजील के 15 समझौते पर हस्ताक्षर होंगे।

चैंपियंस फॉर चेंज अवार्ड

  • केंद्रीय वित्त एवं कारपोरेट मामले राज्यमंत्री अनुराग ठाकुर को समाजसेवा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए चैंपियंस फॉर चेंज 2019 का अवार्ड दिया गया है।
  • चैंपियंस ऑफ चेंज अवार्ड के दूसरे संस्करण में सुप्रसिद्ध कत्थक नृत्यांगना, फिल्म निर्मात्री, कवित्री, व्यवसायी, पर्यावरणविद्, समाज सेविका व नमामि गंगे परियोजना की प्रमोटर आरुषि निशंक को सम्मानित किया गया। राजधानी दिल्ली में आयोजित इस कार्यक्रम में उत्तराखंड से आरुषि को उनके द्वारा किये गए सामाजिक कार्यों, स्पर्श गंगा मुहीम और सेल्फी विद माय स्पर्श ट्री के लिए। उन्हें यह सम्मान दिया गया।

क्रिस्टल अवॉर्ड

  • दीपिका पादुकोण को वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की ओर से क्रिस्टल अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है। दीपिका को ये सम्मान उनके द्वारा मेंटल हेल्थ को लेकर किए गए कार्य के लिए दिया जा रहा है। बता दें कि जब इस सम्मान की घोषणा की गई थी तो दीपिका का नाम चयन किए जाने के बाद फोरम की ओर से कहा गया था कि 2014 में दीपिका को अपने डिप्रेशन के बारे में पता चला था और उन्होंने इससे निजात पाने के लिए प्रोफेशनल मदद ली थी। जून 2015 में, उन्होंने स्ट्रेस, टेंशन, डिप्रेशन का अनुभव करने वाले प्रत्येक व्यक्ति को आशा देने के लिए द लाइव लव लाफ फाउंडेशन की स्थापना की।

:: प्रिलिम्स बूस्टर ::

  • किस ऑनलाइन फूड डिलीवरी कंपनी के द्वारा ऊबर ईट्स का अधिग्रहण किया गया? (जोमैटो)
  • हाल ही में सरकार के द्वारा किस दूरसंचार कंपनी में 100% एफडीआई की मंजूरी प्रदान की गई है? (भारतीय एयरटेल)
  • अनुबंधों की संख्या के आधार पर विश्व की सबसे बड़ा डेरिवेटिव (वायदा) एक्सचेंज कौन है? (नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ़ इंडिया लिमिटेड-NSE)
  • हाल ही में किस देश के द्वारा जलवायु आपातकाल की घोषणा की गई है? (स्पेन)
  • जलवायु आपातकाल की घोषणा करने वाला प्रथम देश कौन है? (ब्रिटेन)
  • हाल ही में जारी हुई ग्रीनपीस के आंकड़ों के अनुसार वायु प्रदूषण के संदर्भ में किस शहर की हवा सबसे ज्यादा प्रदूषित रही? (झरिया)
  • हाल ही में जारी हुई ग्रीनपीस के आंकड़ों के अनुसार वायु प्रदूषण के संदर्भ में किस शहर की हवा सबसे ज्यादा स्वच्छ रही? (लुंगलेई- मिजोरम)
  • भारतीय गणतंत्र दिवस 2020 के मुख्य अतिथि कौन होंगे? (ब्राजील के राष्ट्रपति मेसियास बोलसोनारो)
  • हाल ही में किन्हें चैंपियंस फॉर चेंज 2019 का अवार्ड दिया गया? (राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर और कथक नृत्यांगना आरुषि निशंक)
  • हाल ही में किस भारतीय को वर्ल्ड इकोनामिक फोरम के द्वारा क्रिस्टल अवॉर्ड से सम्मानित किया गया? (दीपिका पादुकोण)

स्रोत साभार: Dainik Jagran (Rashtriya Sanskaran), Dainik Bhaskar (Rashtriya Sanskaran), Rashtriya Sahara (Rashtriya Sanskaran) Hindustan Dainik (Delhi), Nai Duniya, Hindustan Times, The Hindu, BBC Portal, The Economic Times (Hindi & English), PTI, PIB

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