(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (22 और 23 मार्च 2020)

दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर


(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (22 और 23 मार्च 2020)


:: राष्ट्रीय समाचार ::

राष्ट्रीय आयुष मिशन में आयुष स्वास्थ्य एवं वेलनेस केन्द्र को शामिल करने को मंजूरी

  • प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने राष्ट्रीय आयुष मिशन में आयुष्मान भारत के एक हिस्से के रूप में आयुष स्वास्थ्य एवं वेलनेस केन्द्र (आयुष एचडब्ल्यूसी) को शामिल करने को मंजूरी दी।
  • आयुष स्वास्थ्य एवं वेलनेस केन्द्र के संचालन के प्रस्ताव पर वित्तीय वर्ष 2019-20 से 2023-24 की पांच साल की अवधि के दौरान कुल 3399.35 करोड़ रुपये (केन्द्र सरकार 2209.58 करोड़ और राज्य सरकार 1189.77 करोड़ रुपये वहन करेगी) का खर्च आएगा।

राष्ट्रीय आयुष मिशन के तहत आयुष स्वास्थ्य एवं वेलनेस केन्द्रों के संचालन से निम्नलिखित उद्देश्य हासिल करने होंगे:-

  • मौजूदा स्वास्थ्य देखभाल व्यवस्था के साथ मिलकर निवारक, आरोग्यकर, पुनर्सुधारक और उपशामक स्वास्थ्य देखभाल पर ध्यान केंद्रित करते हुए आयुष सिद्धांतों और अभ्यासों पर आधारित एक संपूर्ण वेलनेस मॉडल बनाना।
  • आयुष सेवाएं उपलब्ध कराकर जरूरतमंद लोगों को उपचार का नया विकल्प मुहैया कराना।
  • आयुष सेवाओं में रहन-सहन, योग, औषधीय पौधों को लेकर सामुदायिक जागरूकता को शामिल करना और आयुष व्यवस्था के सामर्थ्य के अनुसार चयनित स्वास्थ्य स्थिति के लिए दवाइयों का प्रावधान करना।
    आयुष मंत्रालय ने राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय और अन्य संबंधित मंत्रालयों के सहयोग से देश भर में 12,500 आयुष स्वास्थ्य एवं वेलनेस केंद्रों के संचालन के लिए निम्नलिखित दो मॉडल प्रस्तावित किए हैं:
  1. मौजूदा आयुष औषधालयों (लगभग 10,000) को अपग्रेड करना
  2. मौजूदा उप स्वास्थ्य केंद्रों (लगभग 2500) को अपग्रेड करना

लाभ

  • कम खर्च पर सामान्य स्वास्थ्य कवर हासिल करने के लिए पहुंच में वृद्धि।
  • द्वितीयक और तृतीयक स्वास्थ्य देखभाल सुविधाओं पर बोझ में कमी।
  • ‘स्वयं-देखभाल’ मॉडल की वजह से अतिरिक्त खर्च में कटौती।
  • एसडीजी-3 को लागू करने में आयुष का एकीकरण जैसा कि नीति आयोग ने आज्ञापित किया है।
  • लक्षित क्षेत्रों में वैध संपूर्ण वेलनेस मॉडल।

पृष्ठभूमि:

  • राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 में आयुष उपचार व्यवस्था (आयुर्वेद, योगा एवं प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्धा और होम्योपैथी) की संभावनाओं को संपूर्ण देखभाल की बहुवादी व्यवस्था की मुख्यधारा में लाने की वकालत की गई है।
  • भारत सरकार ने फरवरी 2018 में समग्र प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल सेवाएं मुहैया कराने के लिए मौजूदा उप स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को बदलकर 1.5 लाख स्वास्थ्य एवं वेलनेस केंद्र खोलने का फैसला लिया था।
  • इसके बाद यह भी फैसला लिया गया कि आयुष मंत्रालय कुल स्वास्थ्य उपकेंद्रों के 10 फीसदी केंद्रों को आयुष्मान भारत के तहत स्वास्थ्य एवं वेलनेस केंद्र के रुप में संचालित करेगा जिसकी संख्या 12,500 होगी।
  • इस प्रस्ताव का विज़न लोगों को स्वत: देखभाल के जरिए बीमारियों से बचने और अतिरिक्त खर्च बचाने में सक्षम बनाना और जरूरतमंद लोगों को उपचार का एक नया विकल्प मुहैया कराना है।

कोरोना से प्रभावित यूपी में अनौपचारिक क्षेत्र के मजदूरों को राहत के लिए घोषणा

  • उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि सरकार तत्काल प्रभाव से 35 लाख मजदूरों को भरण-पोषण के लिए 1000 रुपये प्रति व्यक्ति देगी। यह भुगतान डीबीटी के माध्यम से सीधे अकाउंट में भेजा जाएगा। उन्होंने मनरेगा मजदूरों को तुरंत भुगतान देने का ऐलान किया है। इसी के साथ ही उन्होंने 1.65 करोड़ से ज्यादा अन्त्योदय योजना, मनरेगा और श्रम विभाग में पंजीकृत निर्माण श्रमिक एवं दिहाड़ी मजदूरों को एक माह का निशुल्क राशन अप्रैल में उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए हैं।

अन्य एलान

  • प्रदेश के अंदर घुमन्तू जैसे ठेला, खोमचा, रेहड़ी और रिक्शा चलाने, साप्ताहिक बाजार आदि का कार्य करने वालों की संख्या करीब 15 लाख है। इनके लिए भी सरकार एक हजार रुपये भरण पोषण तत्काल देगी। इसे भी डीबीटी के माध्यम से उनके अकाउंट में भेजा जाएगा। इनका डेटाबेस नगर विकास द्वारा अगले 15 दिनों में तैयार किया जाएगा। एसे सभी श्रमिकों के खातों में प्रतिमाह 1000 रुपए की धनराशि हस्तान्तरित की जाएगी। इस पर सरकार का करीब 150 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
  • शहरी क्षेत्र में ऐसे दिहाड़ी मजदूर जिनके पास राशन कार्ड उपलब्ध नहीं है, उनके कार्ड प्राथमिकता के आधार पर बनाए जाएंगे। प्रदेश में ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में जो भी कार्य करने वाले लोग खासतौर पर मजदूर या ठेला, खोमचा लगाने वालों को तत्काल खाद्यान्न उपलब्ध करवाने के आदेश दिए गए हैं।
  • कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए शैक्षणिक संस्थानों, माल, सिनेमाहाल, मल्टीप्लेक्स, जिम, स्वीमिंग पूल, रेस्टोरेंट आदि बंद है। इसके कारण प्रभावित श्रमिकों और कार्मिकों के हित के दृष्टिगत बंद इकाइयों के स्वामियों औऱ नियोजकों को निर्देशित किया गया है कि वे अपने श्रमिकों और कार्मिकों को नियमित वेतन और सभुगतान अवकाश प्रदान करें।
  • मनरेगा के मजदूरों को तत्काल मजदूरी का भुगतान करने के निर्देश देते हुए कहा है कि केंद्र सरकार से करीब 556 करोड़ रुपए की धनराशि के भुगतान की कार्यवाही तत्काल मार्च 2020 में ही कराई जाएगी। इसी के साथ उन्होंने अन्त्योदय योजना, मनरेगा और श्रमि विभाग में पंजीकृत निर्माण श्रमिक एवं दिहाड़ी मजदूरों करीब 1 करोड़ 65 लाख 31 हजार जरूरतमंदों को एक माह का निशुल्क राशन अप्रैल में उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए हैं। इस पर करीब 64.50 करोड़ का व्ययभार आएगा। पीडीएस दुकानों के जरिए अनाज दिया जाएगा। इसके लिए नोडल अफसर तैनात किए गए हैं। इन परिवारों को 20 किलो गेहूं, 15 किलो चावल मुफ्त मिलेगा।
  • प्रदेश में लागू विभिन्न पेंशन योजनाओं के तहत 83.83 लाख लाभार्थियों को दी जाने वाली त्रैमासिक पेंशन की धनराशि को अब दो माह की अग्रिम पेंशन अप्रैल महीने में ही दी जाएगी। इसमें वृद्धावस्था पेंशन, दिव्यांगजन सशक्तिकरण पेंशन और निराश्रित विधवा के भरण पोषण पेंशन के लाभार्थी शामिल हैं।
  • इसके बाद भी अगर कोई असहाय व्यक्ति बच जाता है, जिसके पास अपने व अपने परिवार के भरण पोषण की व्यवस्था नहीं है, उसकी भी सरकार पूरी मदद करेगी। इसके लिए जिलाधिकारी द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में खंड विकास अधिकारी व ग्राम पंचायत अधिकारी की समिति तथा नगरीय क्षेत्रों में उपजिलाधिकारी व नगर मजिस्ट्रेट व संबंधित नगर निकायों के आयुक्त व अधिशासी अधिकारी की समिति की संस्तुति पर 1000 रुपए प्रतिमाह की सहायता उपलब्ध कराई।

पृष्टभूमि

  • कोरोना के कारण कारोबार में सुस्ती का असर दिन प्रतिदिन आजीविका कमाने वाले लोगों पर भी पड़ रहा है। इसके लिए सरकार ने वित्त मंत्री सुरेश खन्ना के नेतृत्व में एक कमेटी का गठन किया था। इस कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर दिहाड़ी मजदूरों के लिए प्रदेश सरकार ने भरण-भोषण के भत्ते की मंजूरी दी है। प्रदेश के अंदर श्रम विभाग में 20.37 लाख श्रमिक पंजीकृत हैं। भरण पोषण के रूप में एक हजार रुपये डीबीटी के माध्यम से उनके अकाउंट में भेजा जाएगा। जिन श्रमिकों के खाते नहीं है, उनके खाते यथाशीघ्र खुलवाकर विभाग में लेबर सेस फंड से सभी श्रमिकों को प्रतिमाह 1000 रुपये डीटीबीटी के माध्यम से उपलब्ध करवाए जाएंगे।

:: अंतर्राष्ट्रीय समाचार ::

रियूनियन द्वीप- हिंद महासागर

  • चीन की नौसेना के बढ़ते प्रभाव के बीच भारत और फ्रांस की नौसेना ने पहली बार हिंद महासागर में सामूहिक गश्‍त की है। दोनों देशों की नौसेनाओं की यह जॉइंट पेट्रोलिंग अफ्रीका महाद्वीप में स्थित रियूनियन द्वीप से किया गया है। इस पेट्रोलिंग के साथ ही भारत ने संदेश दिया है कि वह हिंद महासागर में अपने पैर पसारने के लिए अपने मित्र देशों के साथ आने को तैयार है।
  • भारत और फ्रांस की नौसेना का फोकस पूर्वी अफ्रीकी तटीय इलाके से लेकर मलक्‍का जलडमरू के मध्‍य तक है। द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक भारत अब तक इस तरह के अभ्‍यास केवल पड़ोसी देशों के साथ ही करता रहा है। यही नहीं भारत ने अमेरिका की ओर से दिए गए इसी तरह के ऑफर को ठुकरा दिया था। भारत ने कहा था कि केवल पड़ोसियों के साथ ही यह गश्‍त की जाएगी।

पिछले महीने रियूनियन द्वीप से जॉइंट पेट्रोलिंग

  • रक्षा सूत्रों के मुताबिक भारतीय नौसेना ने फ्रांसीसी नेवी के साथ मिलकर पिछले महीने रियूनियन द्वीप से जॉइंट पेट्रोलिंग की थी। यह गश्‍त भारतीय नौसेना के पी-8 आई विमान से की गई थी और उस दौरान फ्रांस की नौसेना के सदस्‍य शामिल थे। यह गश्‍त दक्षिणी हिंद महसागर में मॉरिशस के तट तक की गई थी। इस पेट्रोलिंग के लिए करीब एक सप्‍ताह तक पी-8 आई विमान वहां पर गया था।

रियूनियन द्वीप

  • भारत और फ्रांस दोनों समुद्री नौवहन के क्षेत्र में एक-दूसरे का काफी सहयोग कर रहे हैं। उन्‍होंने बताया कि अब यह गश्‍त समय-समय पर होती रहेगी। दरअसल, रियूनियन द्वीप समूह फ्रांस के नियंत्रण में आता है। यह स्‍वेज नहर के काफी पास है और दुनियाभर के समुद्री जहाज इस रास्‍ते से गुजरते हैं। फ्रांस के साथ भारत की दोस्‍ती बहुत गहरी है, इसलिए भारतीय नौसेना को साथ में गश्‍त करने में कोई दिक्‍कत भी नहीं है। इस पूरे इलाके में चीन की नौसेना लगातार अपना प्रभाव बढ़ा रही है। चीन ने यहां दिजिबूती में अपना सैन्‍य अड्डा बनाया है।

भारत और बेल्जियम के बीच प्रर्त्यपण संधि

  • प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने भारत गणराज्य और बेल्जियम के बीच प्रर्त्यपण संधि के हस्ताक्षर और अभिपुष्टि को मंजूरी दी।

संधि की मुख्य विशेषताएं निम्न हैः-

  1. प्रर्त्यपण का दायित्व प्रत्येक पक्ष दूसरे पक्ष के ऐसे व्यक्ति के प्रर्त्यपण की सहमति प्रदान करता है जो उसके देश के सीमा क्षेत्र में प्रत्यर्पण अपराध का आरोपी है या से सजा दी जा चुकी है।
  2. अपराध जिसके अन्तर्गत प्रर्त्यपण किया जा सकता है।
    प्रर्त्यपण अपराध का अर्थ है -एक अपराध जो दोनों देशों के कानूनों के अन्तर्गत दंडनीय है और जिसमें एक वर्ष के कारावास या अधिक कड़े दंड का प्रावधान है। जब किसी सजा प्राप्त व्यक्ति के प्रर्त्यपण की मांग की जाती है तो शेष सजा की अवधि कम से कम 6 महीने होनी चाहिए जब प्रर्त्यपण का अनुरोध किया गया हो। टैक्स, राजस्व और वित्त से जुड़े अपराधों को भी इस संधि के दायरे में रखा गया है।
  3. अस्वीकार करने के लिए अनिवार्य आधार: संधि के अन्तर्गत, प्रर्त्यपण को अस्वीकार किया जा सकता है यदि
  1. अपराध की प्रकृति राजनीतिक है। हालांकि संधि में कुछ ऐसे अपराधों को शामिल किया गया है जिन्हें राजनीतिक अपराध नहीं माना जाएगा।
  2. अपराध एक सैन्य अपराध है।
  3. व्यक्ति के रंग, लिंग, धर्म, राष्ट्रीयता या राजनीतिक विचार के कारण व्यक्ति पर अभियोजन करने या दंडित करने के उद्देश्य से अभियोजन का अनुरोध किया गया है।
  4. दंड को लागू करने की समय-सीमा बीत चुकी है। राष्ट्र के लोगों का प्रर्त्यपण राष्ट्र के लोगों का प्रर्त्यपण विवेशधिकार पर आधारित है। राष्ट्रीयता का निर्धारण उस समय के अनुसार किया जाएगा जब अपराध किया गया है।

प्रमुख विशेषताएं

  1. संधि के अन्य प्रावधान निम्न हैः-
  2. मृत्यु-दंड के मामले में आश्वासन (धारा 3 (7))
  3. केन्द्रीय प्राधिकरण (धारा 6)
  4. आत्मसमर्पण (धारा 11)
  5. संपत्ति हस्तांतरण ( धारा 18)
  6. पारगमन (धारा 19)
  7. व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा (धारा 21)
  8. प्रर्त्यपण में होनेवाला खर्च (धारा 22)
  9. परामर्श (धारा 24)
  10. प्रर्त्यपण से संबंधित आपसी कानूनी सहायता (धारा 25)
  11. संधि की समाप्ति (धारा 26)

लाभ

  • संधि के माध्यम से बेल्जियम को और बेल्जियम से प्रत्यर्पित होने वाले आतंकियों, आर्थिक अपराधियों और अन्य अपराधियों के प्रर्त्यपण को कानूनी आधार प्राप्त होगा। अभिपुष्टि के बाद भारत और बेल्जियम के बीच अभिपुष्टि-पत्रों के आदान-प्रदान के दिन से संधि लागू हो जाएगी।

पृष्ठभूमि

  • नयी संधि स्वतंत्रता-पूर्व 1901 में ब्रिटेन और बेल्जियम के बीच में हुई संधि का स्थान लेगी जो भारत पर भी लागू की गई थी। वर्तमान में उक्त संधि ही भारत और बेल्जियम के बीच लागू है। स्वतंत्रता-पूर्व संधि में अपराधों की संख्या सीमित है जिसके कारण यह उपयोगी नहीं रह गई है

कोविड-19 राहत आपदा कोष

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कोविड-19 राहत आपदा कोष में सार्क देशों के योगदान की मुहिम रंग लाने लगी है। उन्होंने पिछले दिनों सार्क देशों की बैठक के दौरान इस इमरजेंसी फंड की जरूरत बताते हुए इसके लिए एक करोड़ डॉलर देने का एलान किया था। तब से अब तक मालदीव, भूटान, नेपाल से लेकर अफगानिस्तान ने यथाशक्ति फंड दिया है। इसतरह भारत की दी धनराशि के अलावा इस फंड में और 23 लाख डॉलर की रकम जुड़ गई है। इसके लिए प्रधानमंत्री मोदी ने ट्वीट करके मालदीव, भूटान और नेपाल को धन्यवाद भी दिया है।
  • शनिवार को अफगानिस्तान के राष्ट्रपति के सादिक सिद्दीकी के प्रवक्ता ने बताया कि वह कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई में भारत का साथ देना चाहते हैं। इस संयुक्त साझेदारी से वैश्विक महामारी को मात देने के लिए सार्क देशों के फंड में अफगान सरकार ने दस लाख डॉलर देने की मंजूरी दी है। इससे पहले, पीएम मोदी के फैसले का स्वागत करते हुए मालदीव के विदेश मंत्री अब्दुल्ला शाहिद ने कहा कि कोरोना के खिलाफ युद्ध छेड़ने को सार्क देशों के कोविड-19 राहत आपदा कोष में मालदीव दो लाख डॉलर देगा। इसीतरह शुक्रवार को ही सार्क देशों के कोरोना इमरजेंसी फंड में नेपाल ने दस लाख डॉलर (नेपाली रुपये में दस करोड़ रुपये) और भूटान सरकार ने एक लाख डॉलर देने की स्वीकृति दी है।

:: भारतीय राजव्यवस्था ::

मास्क और सैनिटाइजर की सरकार ने तय की कीमतें

  • मोदी सरकार ने जरूरी चीजों को लेकर हो रही कालाबाजारी को रोकने के लिए एक ठोस कदम उठाया है। दरअसल कोरोनावायरस के खतरे को देखते हुए इन दिनों मास्क और हैंड सैनिटाइजर की मांग काफी तेजी से बढ़ गई है। ऐसे में जरुरतों को देखते हुए कई जगहों पर इसकी कालाबाजारी की शिकायतें मिल रही थी। ऐसे में सरकार ने इनकी कीमतों को तय कर दिया है। उपभोक्ता मामलों के मंत्री रामविलास पासवान के ट्विटर अकाउंट पर किए गए ट्वीट में बताया गया है कि, हैंड सैनिटाइजर की 200 मिलीमीटर की बोतल की खुदरा कीमत 100 रुपये से अधिक नहीं होगी। ऐसे में दूसरी साइज की बोतलों की कीमत भी इसी अनुपात में रहेंगी। सरकार की तरफ से तय की गई ये कीमतें 30 जून 2020 तक देशभर में लागू रहेंगी।
  • मास्क की कीमतें भी हुई तय: आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत 2 और 3 प्लाई मास्क में इस्तेमाल होने वाले फैब्रिक की कीमत वही रहेगी जो 12 फरवरी 2020 को थी। 2 प्लाई मास्क की खुदरा कीमत 8 रुपये प्रति मास्क और 3 प्लाई की कीमत 10 रुपये प्रति मास्क से अधिक नहीं होगी।
  • ट्वीट में आगे लिखा गया है कि, कोरोना वायरस #COVID19 के फैलने के बाद से बाजार में विभिन्न फेस मास्क, इसके निर्माण में लगने वाली सामग्री और हैंड सैनिटाइजर की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि देखी गई है। सरकार ने इसे गंभीरता से लेते हुए इनकी कीमतें तय कर दी हैं।
  • यहां आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कोरोनावायरस के खतरे को देखते हुए सरकार ने मास्क और हैंड सैनिटाइजर को जरूरी उत्पादों की लिस्ट में शामिल कर किया था। हालांकि, बढ़ती मांग को देखते हुए इनकी कमी और कालाबाजारी के चलते यह कदम उठाया गया है।

:: भारतीय अर्थव्यवस्था ::

इलेक्ट्रॉनिक घटकों और सेमीकंडक्टरों के विनिर्माण को बढ़ावा देने की योजना

  • प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने इलेक्ट्रॉनिक घटकों और सेमीकंडक्टरों के विनिर्माण के संवर्धन की योजना (एसपीईसीएस) के तहत इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद की आपूर्ति श्रृंखला का गठन करने वाली वस्तुओं के विनिर्माण के लिए पूंजीगत व्यय का 25 प्रतिशत वित्तीय प्रोत्साहन देने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है।
  • इस योजना से इलेक्ट्रॉनिक घटकों और सेमीकंडक्टरों की घरेलू विनिर्माण के लिए अक्षमता को दूर करने के अलावा देश में इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण पारिस्थितिकी को मजबूत बनाने में भी मदद मिलेगी।

वित्तीय अनुमानः

  • इस योजना की कुल लागत लगभग 3,285 करोड़ रुपये है। जिसमें लगभग 3,252 करोड़ रुपये का प्रोत्साहन परिव्यय तथा 32 करोड़ रुपये का प्रशासनिक व्यय शामिल है।

लाभः

  • यह प्रस्ताव लागू होने पर देश में इलेक्ट्रॉनिक घटक विनिर्माण पारिस्थितिकी विकास को बढ़ावा देगा। इस योजना के गौर करने लायक सूचकों के रूप में अनुमानित उत्पाद एवं परिणाम इस प्रकार हैं-
  • देश में इलेक्ट्रॉनिक घटकों की विनिर्माण पारिस्थितिकी का विकास और इलेक्ट्रॉनिक मूल्य श्रृंखला की मजबूती।
  • इलेक्ट्रॉनिक क्षेत्र में कम से कम 20,000 करोड़ रुपये का नया निवेश।
  • इस योजना के तहत सहायता प्रदान की गई विनिर्माण इकाइयों में उद्योग अनुमानों के अनुसार प्रत्यक्ष रोजगार के लगभग तीन गुणा अप्रत्यक्ष रोजगार सहित लगभग 1,50,000 प्रत्यक्ष रोजगार जुटाए जाने की उम्मीद है। इस प्रकार इस योजना की कुल रोजगार संभावना लगभग 6,00,000 है।
  • बड़े स्तर पर घरेलू विनिर्माण से घटकों के निर्यात पर निर्भरता घटने से राष्ट्र की डिजिटल सुरक्षा में भी बढ़ोतरी होगी।

पृष्ठभूमिः

  • 25 फरवरी, 2019 को अधिसूचित राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक नीति, 2019 (एनपीई, 2019) का दृष्टिकोण चिप्ससेट और वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धा के लिए उद्योग हेतु योग्य माहौल के सृजन सहित मुख्य घटकों के विकास के लिए देश में प्रोत्साहन और क्षमताओं द्वारा भारत को इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम डिजाइन एवं विनिर्माण (ईएसडीएम) के वैश्विक केन्द्र के रूप में स्थापित करना है।
  • देश में इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण की समग्र दीर्घकालिक और सतत प्रगति तथा भुगतान के निवल सकारात्मक संतुलन (बीओपी) को अर्जित करने की अनिवार्यता के लिए एक जीवंत इलेक्ट्रॉनिक घटक विनिर्माण पारिस्थितिकी बहुत महत्वपूर्ण है।
  • इसलिए संयंत्र मशीनरी उपकरण, इलेक्ट्रॉनिक घटक, उपकरण विनिर्माण के लिए निवेश करने वाली औद्योगिक इकाइयों के अनुसंधान विकास सहित सहायक उपयोगिताएं और प्रौद्योगिकी, एटीएमपी निर्दिष्ट श्रेणियों में इन मदों के लिए विशेषीकृत उप-एसेम्बलियां और पूंजीगत वस्तुओं के पूंजीगत व्यय पर 25 प्रतिशत प्रोत्साहन उपलब्ध कराने का प्रस्ताव किया गया है। इससे मोबाइल इलेक्ट्रॉनिक्स, उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स, औद्योगिक इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोटिव इलेक्ट्रॉनिक, चिकित्सा इलेक्ट्रॉनिक्स, रणनीतिक इलेक्ट्रॉनिक्स, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स, टेलीकॉम उपकरण और कम्प्यूटर हार्डवेयर जैसे इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण के सभी खंडों की जरूरत पूरी होगी।

संशोधित इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स विनिर्माण क्‍लस्‍टर (ईएमसी 2.0) योजना

  • प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में कैबिनेट ने संशोधित इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स विनिर्माण क्‍लस्‍टर (ईएमसी 2.0) योजना के लिए वित्‍तीय सहायता को मंजूरी दे दी है। इसका उद्देश्‍य इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स विनिर्माण क्‍लस्‍टरों (ईएमसी) के जरिए विश्‍वस्‍तरीय अवसंरचना के साथ-साथ साझा सुविधाओं को विकसित करना है। यह आशा की जा रही है कि इन ईएमसी से ईएसडीएम सेक्‍टर के साथ-साथ उदयमिता संबंधी परिवेश के विकास में मदद मिलेगी, नवाचार को बढ़ावा मिलेगा और संबंधित क्षेत्र के विकास को नई गति मिलेगी। यह इस सेक्‍टर में निवेश को आकर्षित करने और रोजगार अवसरों एवं टैक्‍स राजस्‍व में वृद्धि के जरिए संभव होगा।
  • संशोधित इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स विनिर्माण क्‍लस्‍टर (ईएमसी 2.0) योजना से इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स विनिर्माण क्‍लस्‍टरों (ईएमसी) और साझा सुविधा केंद्रों दोनों की ही स्‍थापना में आवश्‍यक सहयोग मिलेगा। इस योजना को ध्‍यान में रखते हुए एक इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स विनिर्माण क्‍लस्‍टर (ईएमसी) को विशिष्‍ट न्‍यूनतम दायरे वाले निकटवर्ती भौगोलिक क्षेत्रों में स्‍थापित किया जाएगा। इसके तहत बुनियादी अवसंरचना, विशिष्‍ट सुविधाओं और ईएसडीएम इकाइयों के लिए अन्‍य साझा सुविधाओं के विकास पर फोकस किया जाता है। साझा सुविधा केंद्र (सीएफसी) के लिए संबंधित क्षेत्र में बड़ी संख्‍या में मौजूदा ईएसडीएम इकाइयां अवस्थित होनी चाहिए और इसके तहत साझा तकनीकी अवसंरचना को उन्‍नत करने एवं इस तरह के ईएमसी, औद्योगिक क्षेत्रों/पार्कों/औद्योगिक कॉरिडोर में ईएसडीएम इकाइयों के लिए साझा सुविधाएं मुहैया कराने पर फोकस किया जाता है।

वित्‍तीय निहितार्थ

  • प्रस्‍तावित ईएमसी 2.0 योजना का कुल परिव्‍यय 3762.25 करोड़ रुपये है जिसमें 3,725 करोड़ रुपये की वित्‍तीय सहायता और आठ वर्षों की अवधि के दौरान 37.25 करोड़ रुपये का प्रशासनिक एवं प्रबंधन संबंधी व्‍यय शामिल हैं।

लाभ

इस योजना से ईएसडीएम सेक्‍टर में निवेश आकर्षित करने हेतु इलेक्‍ट्रॉनिक उद्योग के लिए एक सुदृढ़ अवसंरचना आधार का सृजन होगा और इससे रोजगार अवसर बढ़ाने का मार्ग प्रशस्‍त होगा। इस योजना के लिए अपेक्षित परिणाम निम्‍नलिखित हैं:

  1. इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स क्षेत्र में निवेश आकर्षित करने के लिए तैयार अवसंरचना और कंप्‍यूटर प्रणाली से जुड़े उपकरणों की उपलब्‍धता सुनिश्चित होगी।
  2. इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स क्षेत्र में नया निवेश आकर्षित होगा।
  3. विनिर्माण इकाइयों द्वारा रोजगार सृजित किए जाएंगे।
  4. विनिर्माण इकाइयों द्वारा अदा किए जाने वाले टैक्‍स के रूप में राजस्‍व अर्जित होगा।

पृष्‍ठभूमि

  • इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स विनिर्माण हेतु आवश्‍यक अवसंरचना परिवेश के निर्माण के लिए इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स विनिर्माण क्‍लस्‍टर (ईएमसी 2.0) योजना को अधिसूचित किया जिसके तहत अक्‍टूबर 2017 तक आवेदन आमंत्रित किए गए। स्‍वीकृत परियोजनाओं हेतु धनराशि के वितरण के लिए पांच वर्षों की अवधि (यानी वर्ष 2022 तक) तय है। ईएमसी योजना के तहत देश भर में 15 राज्‍यों में कुल 3,565 एकड़ क्षेत्र में फैले 20 नए ईएमसी और 3 साझा सुविधा केंद्रों (सीएफसी) को मंजूरी दी गई है। इन पर 3,898 करोड़ रुपये की लागत आएगी जिसमें 1577 करोड़ रुपये की अनुदान सहायता शामिल है।
  • देश में इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स उद्योग हेतु अवसंरचना आधार को और मजबूत करने तथा इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स मूल्‍य श्रृंखला को सुदृढ़ करने के लिए इस योजना को संशोधित रूप में जारी रखने की जरूरत है।
  • भारत में इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स उत्‍पादन वित्‍त वर्ष 2014-15 के 1,90,356 करोड़ रुपये (29 अरब अमेरिकी डॉलर) से बढ़कर वित्‍त वर्ष 2018-19 में 4,58,006 करोड़ रुपये (70 अरब अमेरिकी डॉलर) के स्‍तर पर पहुंच गया। अत: इस दौरान लगभग 25 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) रही। वैश्विक इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स विनिर्माण में भारत की हिस्‍सेदारी 1.3 प्रतिशत (वर्ष 2012) से बढ़कर 3.0 प्रतिशत (वर्ष 2018) हो गई। वर्तमान में भारत की जीडीपी में इसका योगदान 2.3 प्रतिशत है।

चिकित्सा उपकरणों के स्वदेशी निर्माण को बढ़ावा देने योजना

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने निम्नलिखित योजनाओं को मंजूरी दी हैं-

  1. 400 करोड़ रुपये की वित्तीय लागत से चार चिकित्सा उपकरण पार्कों में साझा बुनियादी सुविधाओं के वित्त पोषण के लिए चिकित्सा उपकरण पार्कों के संवर्धन की योजना।
  2. 3,420 करोड़ रुपये की वित्तीय लागत से चिकित्सा उपकरणों के स्वदेशी विनिर्माण के संवर्धन के लिए उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना।

उपरोक्त योजनाओं के लिए वहन किया जाने वाला व्यय अगले पांच वर्षों यानी 2020-21 से 2024-25 के लिए होगा।

विवरणः

ए. चिकित्सा उपकरण पार्कों का संवर्धन

  • चिकित्सा उपकरण एक उभरता हुआ क्षेत्र है और स्वास्थ्य देखभाल बाजार के सभी क्षेत्रों में इसके विकास की संभावना सबसे अधिक है। वर्ष 2018-19 के लिए इसका मूल्य 50,026 करोड़ रुपये है। वर्ष 2021-22 तक इसके 86,840 करोड़ रुपये तक पहुंचने की उम्मीद है। भारत चिकित्सा उपकरणों की अपनी घरेलू मांग की 85 प्रतिशत सीमा तक आयात पर निर्भर रहता है।
  • योजना का उद्देश्य राज्यों की भागीदारी में देश में चिकित्सा उपकरण पार्कों का संवर्धन करना है। राज्यों को प्रति पार्क 100 करोड़ रुपये की अधिकतम अनुदान सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

बी. उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना

  • चिकित्सा उपकरण क्षेत्र को पर्याप्त बुनियादी ढांचे की कमी घरेलू आपूर्ति श्रृंखला एवं लॉजिस्टिक, वित्त की उच्च लागत, गुणवत्तायुक्त विद्युत की अपर्याप्त उपलब्धता, सीमित डिजाइन क्षमताओं और अनुसंधान और विकास तथा कौशल विकास आदि पर कम ध्यान दिए जाने और अन्य बातों के साथ-साथ प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्थाओं के कारण लगभग 12 से 15 प्रतिशत विनिर्माण अक्षमता लागत से नुकसान उठाना पड़ता है। इसलिए विनिर्माण अक्षमता के लिए प्रतिपूर्ति तंत्र की जरूरत है।
  • इस योजना का उद्देश्य चिकित्सा उपकरण क्षेत्र में भारी निवेश को आकर्षित करके स्वदेशी विनिर्माण को बढ़ावा देना है। इस योजना के तहत आधार वर्ष 2019-20 की तुलना में वृद्धि संबंधी बिक्री का 5 प्रतिशत की दर से प्रोत्साहन इस योजना के तहत पहचान की गई चिकित्सा उपकरणों के खंडों पर प्रदान किया जाएगा।

कार्यान्वयनः

चिकित्सा उपकरण पार्कों के संवर्धन को यह योजना राज्य कार्यान्वयन एजेंसी (एसआईए) द्वारा लागू की जाएगी। स्वदेशी निर्माण को बढ़ावा देने के लिए पीएलआई योजना फॉर्मास्यूटिकल्स विभाग द्वार नामित की जाने वाली परियोजना प्रबंधन एजेंसी (पीएमए) द्वारा लागू की जाएगी। चार चिकित्सा उपकरण पार्कों के लिए साझा बुनियादी सुविधाओं हेतु वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने का लक्ष्य है। पीएलआई योजना का लक्ष्य चिकित्सा उपकरणों की निम्नलिखित श्रेणियों के तहत लगभग 25-30 विनिर्माताओं को सहायता उपलब्ध कराना है-

  1. कैंसर देखभाल/रेडियोथैरेपी चिकित्सा उपकरण,
  2. रेडियोलॉजी और इमेजिंग चिकित्सा उपकरण (आयोनाइजिंग और नॉन-आयोनाइजिंग रेडिएशन उत्पाद) और न्यूक्लियर इमेजिंग उपकरण,
  3. कार्डियो रेसपिरेट्री श्रेणी और रीनल केयर चिकित्सा उपकरणों के कैथेटर्स सहित एनस्थैटिक्स एंड कार्डियो-रेसपिरेट्री चिकित्सा उपकरण और
  4. कोचलियर इम्प्लांट्स और पेसमेकर्स जैसे इम्प्लांट योग्य इलैक्ट्रॉनिक उपकरणों सहित सभी इम्प्लांट्स।

प्रभावः

  • चिकित्सा उपकरण पार्कों के संवर्धन की उप-योजना के तहत चार चिकित्सा उपकरण पार्कों में साझा बुनियादी सुविधाएं जुटाई जाएंगी। इनसे देश में चिकित्सा उपकरणों की विनिर्माण लागत घटने की उम्मीद है।
  • चिकित्सा उपकरणों के स्वदेशी निर्माण के संवर्धन के लिए पीएलआई योजना स्वदेशी निर्माण को बढ़ावा देगी और इस क्षेत्र से विशेषरूप से पहचान किए गए लक्षित खंडों में भारी निवेश को आकर्षित करेगी।इससे पांच वर्ष की अवधि में 68,437 करोड़ रुपये मूल्य की उत्पादन वृद्धि को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इन योजनाओं से पांच वर्षों की अवधि में 33,750 नौकरियों से अतिरिक्त रोजगार जुटाए जाने में मदद मिलेगी।
  • यह योजनाएं चिकित्सा उपकरणों के लक्षित खंडों के आयात में काफी कमी लाने में मदद करेगीं।

पीएमसी बैंक पर लगा प्रतिबंध 3 महीने बढ़ा

  • वित्तीय संकट से जूझ रहे पंजाब एंड महाराष्ट्र को-ऑपरेटिव बैंक (पीएमसी ) पर लगे प्रतिबंध को आरबीआई ने को 3 महीने बढ़ाकर 22 जून तक कर दिया है। इसके पहले आरबीआई ने वित्तीय अनियमितताओं, रियल एस्टेट डेवलपर HDIL को दिए गए लोन की जानकारी छिपाने और गलत जानकारी देने के लिए 23 सितंबर, 2019 को इस को-ऑपरेटिव बैंक पर 6 माह की पाबंदी लगा दी थी। आरबीआई ने इस संबंध में विज्ञप्ति जारी कर जानकारी दी है। आरबीआई ने कहा है कि वह सिक्योरिटीज की बिक्री और लोन रिकवरी की प्रक्रिया को बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। कानूनी प्रक्रियाओं में कई कारणों से समय लग रहा है।

क्यों लग रहा है ज्यादा समय

  • आरबीआई ने कहा है कि कॉमर्शियल बैंक की तरह उसके पास यह अधिकार नहीं है कि ऑपरेटिव बैंक के लिए कोई रिकन्सट्रक्शन प्लान लेकर आए। पीएमसी बैंक एक को-ऑपरेटिव बैंक है। हालांकि, डिपॉजिटर्स के हित और को-ऑपरेटिव बैंकिंग सेक्टर में स्थिरता लाने के लिए RBI स्टेकहोल्डर्स और अथॉरिटीज से संपर्क में है। केंद्रीय बैंक ने पीएमसी बैंक के बोर्ड और मैनेजमेंट को अपने नियंत्रण में ले लिया है। आरबीआई ने अपने एक पूर्व अधिकारी को बैंक का प्रशासक नियुक्त किया है।

क्या है इस प्रतिबंध का मतलब?

  • पीएमसी बैंक न तो किसी को कर्ज दे सकेगा और न ही डिपॉजिटर्स एक तय लिमिट से ज्यादा पैसे निकाल सकेंगे। इस अवधि के दौरान बैंक न तो कोई लोन रिन्यू कर सकेगा और न ही कहीं निवेश कर सकेगा। पीएमसी बैंक में कोई फ्रेश डिपॉजिट भी नहीं की जा सकेगी। बैंक सकुर्लर के मुताबिक, यह बैंक किसी भी देनदारी के लिए कोई पेमेंट भी नहीं कर सकेगा। पाबंदी लगने के बाद पिछले साल ही नवंबर में आरबीआई ने डिपॉजिटर्स के लिए विड्रॉल लिमिट को बढ़ाकर 50,000 रुपए कर दिया था।

:: भारतीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी ::

अपतटीय निगरानी पोत आई सी जी एस वरद

  • आई सी जी एस वरद ओड़िसा के पारादीप में तैनात कर दिया गया है तटरक्षक बल के उत्तर पूर्व क्षेत्र की कोलकाता कमान मे कार्य करेगा।
  • यह पोत 98 मीटर लंबा है। इसे एल एंड टी ने डिजाइन और तैयार किया है। तटरक्षक बल के निर्देशों के अनुसार यह जलपोत चेन्नई के निकट कट्टुपल्ली में एल एंड टी के यार्ड में बनाया गया है। इस पर आधुननिक नौवहन और संचार उपकरण, सेंसर तथा मशीनरी लगी हैं। पोत पर तीस मिलीमीटर और 12 दशमलव सात मिलीमीटर की तोप लगी हैं।
  • इस पोत के साथ ही भारतीय तटरक्षक बल के पास 147 जलपोत और नौकाएं तथा 62 विमान हो गये हैं। विभिन्न भारतीय शिपयार्ड में 58 जलपोत और हिंदुस्तान एरोनोटिक्स लिमिटेड बेंगलूरू में 16 अत्याधुनिक हेलीकॉप्टर निर्माणाधीन है।

'प्रोब-फ्री डिटेक्शन एस्से' (probe-free detection assay)

  • आईआईटी दिल्ली ने जांच की स्वदेशी तकनीक विकसित की कोरोना वायरस से लड़ने की दिशा में दिल्ली आईआईटी के शोधकर्ताओं ने बहुत ही बड़ी कामयाबी हासिल कर ली है। इन्होंने कोविड-19 वायरस की जांच के लिए एक ऐसा तरीका खोज निकाला है, जिससे इसका टेस्ट बहुत ही सस्ता हो सकता है और समाज के बड़े तबके इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। अब पुणे स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी इसके क्लीनिकल सैंपल पर इसकी जांच को प्रमाणित करने की प्रक्रिया में जुट गया है।
  • आईआईटी दिल्ली के शोधकर्ताओं ने 'प्रोब-फ्री डिटेक्शन एस्से' (probe-free detection assay) को यहां के प्रतिष्ठित संस्थान कुसुमा स्कूल ऑफ बायोलॉजिकल साइंसेज की प्रयोगशालाओं में विकिसत किया है और अनुकूल परिस्थितियों में इसे परखा भी गया है और इसकी संवेदनशीलता की भी जांच की गई है।
  • शोधकर्ताओं की टीम के अगुवा रहे प्रोफेसर विवेकानंद पेरुमल ने कहा है, "तुलनात्मक अनुक्रम विश्लेषण का उपयोग करके हमने कोविड-19 में अनोखे क्षेत्रों की पहचान की है। ये अनोखे क्षेत्र दूसरे इंसानी कोरोना वायरस में में नहीं पाए जाते हैं, जिसके चलते विशेष तौर पर कोविड-19 का पता लगाने का मौका मिल जाता है।" उनके मुताबिक, "एक बार एनआईवी जांच को मान्यता दे देता है तो हमारे में देश में बढ़ती आवश्यकता के मद्देनजर इसका तेजी से उत्पादन भी किया जा सकता है।"
  • ये तरीका किफायती क्यों हैं, इसके बारे में प्रोफेसर मनोज मेनन ने बता कि जो मौजूदा टेस्ट के तरीके उपलब्ध हैं, वे 'जांच-आधारित' (probe-based) हैं, जबकि आईआईटी की टीम ने जिसका विकास है, वह तरीका 'जांच-रहित' (probe-free) है, जिससे जांच का खर्च घट जाता है, जबकि प्रमाणिकता से कोई समझौता नहीं किया जाता।

:: विविध ::

विश्व जल दिवस-22 मार्च

  • पूरी दुनिया में 1993 से प्रत्येक 22 मार्च को विश्व जल दिवस मनाया जाता है। इसका दिवस को मनाने का उद्देश्य विश्व के सभी विकसित देशों में स्वच्छ, सुरक्षित जल की उपलब्धता सुनिश्चित करवाना है। साथ ही जल संरक्षण के महत्व पर ध्यान केंद्रित करना है। विश्व जल दिवस 2020 की थीम 'जल और जलवायु परिवर्तन' है।
  • विश्व जल दिवस मनाने की अनूठी पहल रियो डी जेनेरियो में 1992 में आयोजित पर्यावरण तथा विकास पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन द्वारा आयोजित कार्यक्रम में की गई थी। इसके उपरान्त 1993 में संयुक्त राष्ट्र ने इस दिन को वार्षिक कार्यक्रम के रूप में मनाने का निर्णय लिया।

विश्व मौसम विज्ञान दिवस-23 मार्च

  • प्रत्येक वर्ष विश्व मौसम विज्ञान दिवस 23 मार्च को मनाया जाता है। वर्ष 2020 के विश्व मौसम विज्ञान दिवस की थीम “जलवायु और जल” है।
  • 1873 में स्थापित हुए अंतरराष्ट्रीय मौसम संगठन (आईएमओ) को डब्ल्यूएमओ कन्वेंशन के तहत सन् 1950 में आज के दिन संयुक्त राष्ट्र की एक विशिष्ट इकाई के रूप में विश्व मौसम संगठन (डब्ल्यूएमओ) को स्थापित किया गया था। विश्व मौसम संगठन (डब्ल्यूएमओ) का मुख्यालय जिनेवा में स्थित है।
  • पृथ्वी के वायुमंडल की परिस्थिति और व्यवहार, महासागरों के साथ इसके संबंध, मौसम और इसके परिणामस्वरूप जल संसाधनों के वितरण के सन्दर्भ में जानकारी प्रदान करने के यह संगठन संयुक्त राष्ट्र की विशेषीकृत एजेंसी है।

:: प्रिलिम्स बूस्टर ::

  • कैबिनेट के द्वारा आयुष्मान भारत के तहत कितने आयुष स्वास्थ्य एवं वेलनेस केन्द्र संचालित करने का निर्णय लिया गया है? (12,500)
  • उत्तर प्रदेश सरकार के द्वारा प्रदेश के 35 लाख मजदूरों को भरण पोषण के लिए प्रति व्यक्ति कितनी राशि देने की घोषणा की गयी है? (1000 रुपये)
  • हाल ही में चर्चा में रहे रीयूनियन द्वीप समूह किस महासागर में स्थित है एवं इस द्वीप पर किस देश का नियंत्रण है? (हिंद महासागर, फ्रांस)
  • किस तिथि को महान क्रांतिकारी भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को ब्रिटिश सरकार के द्वारा फांसी दी गई थी? (23 मार्च)
  • भारत में सार्क देशों के कोविड-19 राहत आपदा कोष में कितनी राशि प्रदान करने की घोषणा की है? (एक करोड़ डॉलर)
  • हाल ही में भारत सरकार द्वारा इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं के निर्माण को बढ़ावा देने के लिए पूंजीगत व्यय के कितने प्रतिशत प्रोत्साहन देने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है? (25%)
  • हाल ही में भारत सरकार ने इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स विनिर्माण क्‍लस्‍टरों को प्रोत्साहन देने के लिए किस योजना को मंजूरी दी है? (संशोधित इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स विनिर्माण क्‍लस्‍टर -ईएमसी 2.0)
  • हाल ही में मंत्रिमंडल के द्वारा कितने चिकित्सा उपकरण पार्कों एवं कितने बल्क ड्रग पार्कों के वित्तपोषण को मंजूरी दी है? (चार चिकित्सा उपकरण पार्क और तीन बल्क ड्रग पार्क)
  • हाल में आरबीआई ने किस बैंक पर लगे प्रतिबंधों को पुनः 3 महीने के लिए बढ़ा दिया है? (पंजाब एंड महाराष्ट्र को-ऑपरेटिव बैंक -पीएमसी)
  • हाल ही में आईआईटी दिल्ली के द्वारा कोरोना वायरस के परीक्षण हेतु किस किट का विकास किया गया है? (प्रोब-फ्री डिटेक्शन एस्से' -probe-free detection assay)
  • विश्व जल दिवस किस तिथि को मनाया जाता है एवं वर्ष 2020 की थीम क्या है? (22 मार्च,'जल और जलवायु परिवर्तन')
  • विश्व मौसम दिवस किस तिथि को मनाया जाता है एवं वर्ष 2020 की थीम क्या है? (23 मार्च, ‘जलवायु और जल’)

स्रोत साभार: Dainik Jagran (Rashtriya Sanskaran), Dainik Bhaskar (Rashtriya Sanskaran), Rashtriya Sahara (Rashtriya Sanskaran) Hindustan Dainik (Delhi), Nai Duniya, Hindustan Times, The Hindu, BBC Portal, The Economic Times (Hindi & English), PTI, PIB

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