(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (21 मई 2020)

दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर


(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (21 मई 2020)


:: राष्ट्रीय समाचार ::

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना

चर्चा में क्यों?

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के क्रियान्वयन को मंजूरी दे दी है। योजना का उद्देश्य नीली क्रांति के माध्यम से देश में मत्स्य पालन क्षेत्र के सतत और जवाबदेह विकास को सुनिश्चित करना है। कुल 20050 करोड रुपए की अनुमानित लागत वाली यहयोजना, केन्द्रीय योजना और केन्द्र प्रायोजित योजना के रूप में लागू की जाएगी। इसमें केन्द्र की हिस्सेदारी 9407 करोड रूपए, राज्यों की हिस्सेदारी 4880 करोड रुपए तथा लाभार्थियों की हिस्सेदारी 5763 करोड रुपए होगी।

  • इस योजना को वित्त वर्ष 2020-21 से 2024 25 तक पांच वर्षों की अवधि में लागू किया जाएगा।
  • योजना के दो घटक होंगे। पहला केन्द्रीय योजना और दूसरा केन्द्र प्रायोजित योजना।
  • केन्द्रीय योजना के दो वर्ग होंगे एक लाभार्थी वर्ग और दूसरा गैर लाभार्थी वर्ग। केन्द्र प्रायोजित योजना को तीन प्रमुख श्रेणियों में विभाजित किया गया है
  1. उत्पादन और उत्पादकता को प्रोत्साहन
  2. अवसंरचना और उत्पादन बाद प्रंबधन
  3. मत्स्य पालन प्रबंधन और नियामक फ्रेमवर्क

योजना का वित्त पोषण

केन्द्रीय परियोजना के लिए 100 प्रतिशत वित्तीय जरुरतों की पूर्ति केन्द्र की ओर की जाएगी। इसमें लाभार्थी वर्ग से जुडी गतिविधियों को चलाने का काम पूरी तरह से राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड सहित केन्द्र सरकार का होगा। इसमें सामान्य लाभार्थियों वाली परियोजना का 40 प्रतिशत जबकि अनुसूचित जाति और जनजाति तथा महिलाओं से जुडी परियोजना का 60 प्रतिषण वित्त पोषण केन्द्र सरकार करेगी।

केन्द्र प्रायोजित योजना का वित्त पोषण

इस योजना के तहत गैर लाभार्थियों से जुडी गतिविधियों का पूरा खर्च राज्य और केन्द्र शासित प्रदेश की सरकारें मिलकर उठाएंगी।

  • इसके तहत पूर्वोत्तर तथा हिमालयी क्षेत्र वाले राज्यों में लागू की जाने वाली ऐसी परियेाजना का 90 फीसदी खर्च केन्द्र और 10 फीसदी खर्च राज्य सरकारें वहन करेंगी।
  • अन्य राज्यों के मामले में केन्द्र और संबधित राज्यों की हिस्सेदारी क्रमश 60 और 40 प्रतिशत होगी।
  • केन्द्र शासित प्रदेशों में लागू की जाने वाली ऐसी योजनाओं का सौ फीसदी वित्त पोषण केन्द्र की ओर से किया जाएगा

गैर लाभार्थी वर्ग की योजना का वित्त पोषण

इस वर्ग की योजना का वित्त पोषण पूरी तरह से संबधित राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों की ओर से किया जाएगा। इसमें सामान्य श्रेणी वाली परियोजना में सरकार, राज्य और केन्द्रशासित प्रदेशों की कुल हिस्सेदारी 40 प्रतिशत से अधिक नहीं होगी जबकि महिलाओं,अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग से जुडी परियोजना के लिए सरकार की ओर से 60 फीसदी की आर्थिक मदद दी जाएगी।

  • पूर्वोत्तर तथा हिमालयी क्षेत्र के राज्यों में ऐसी परियोजनाओं के लिए सरकार की ओर से 90 प्रतिशत वित्त पोषण किया जाएगा जबकि राज्यों की हिस्सेदारी 10 प्रतिशत होगी।
  • अन्य राज्यों के लिए यह क्रमश 60 और 40 प्रतिशत होगी
  • केन्द्र शासित प्रदेशों के लिए केन्द्र की ओर से 100 फीसदी मदद दी जाएगी

लाभ

  • मत्स्य पालन क्षेत्र की गंभीर कमियो को दूर करते हुए उसकी क्षमताओं का भरपूर इस्तेमाल होगा
  • मत्स्य पालन क्षेत्र में 9 प्रतिशत की सालाना दर से वृद्धि के साथ 2024 25 तक 22 मिलियन मेट्रिक टन उत्पादन का लक्ष्य हासिल किया जा सकेगा।
  • मत्स्य पालन के लिए गुणवत्ता युक्त बीज हासिल करने तथा मछली पालन के लिए बेहतर जलीय प्रबंधन को बढावा मिलेगा।
  • मछली पालन के लिए आवश्यक अवसंरचना और मजबूत मूल्य श्रृंखला विकसित की जा सकेगी।
  • शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में मछली पालन से सीधे या परोक्ष रूप से जुडे हुए सभी लोगों के लिए रोजगार और आय के बेहतर अवसर बनेंगे।
  • मछली पालन क्षेत्र में निवेश आकर्शित करने में मदद मिलेगी जिससे मछली उत्पाद बाजार में और अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकेंगे।
  • वर्ष 2024 तक मछली पालन से जुडे किसानों की आय दोगुनी करने में मदद मिलेगी
  • मछली पालन क्षेत्र तथा इससे जुडे किसानों और श्रमिकों को सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा मिलेगी

सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों को औपचारिक रूप देने की योजना (एफएमई)

चर्चा में क्यों?

  • प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल ने 10,000 हजार करोड़ रूपए के परिव्यय के साथ अखिल भारतीय स्तर पर असंगठित क्षेत्र के लिए एक नई केन्द्र प्रायोजित “सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों को औपचारिक रूप देने की योजना (एफएमई)” को स्वीकृति दे दी है। इस व्यय को 60:40 के अनुपात में भारत सरकार और राज्यों के द्वारा साझा किया जाएगा।

योजना का विवरण:

उद्देश्य:

  • सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाईयों के द्वारा वित्त अधिगम्यता में वृद्धि
  • लक्ष्य उद्यमों के राजस्व में वृद्धि
  • खाद्य गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों का अनुपालन
  • समर्थन प्रणालियों की क्षमता को सुदृढ़ बनाना
  • असंगठित क्षेत्र से औपचारिक क्षेत्र में पारगमन
  • महिला उद्यमियों और आकांक्षापूर्ण जिलों पर विशेष ध्यान
  • अपशिष्ट से धन अर्जन गतिविधियों को प्रोत्साहन
  • जनजातीय जिलों लघु वन उत्पाद पर ध्यान

मुख्य विशेषताऐं:

  • केन्द्र प्रायोजित योजना। व्यय को 60:40 के अनुपात में भारत सरकार और राज्यों के द्वारा साझा किया जाएगा।
  • 2,00,000 सूक्ष्म-उद्यमों को ऋण से जुड़ी सब्सिडी के माध्यम से सहायता प्रदान की जाएगी।
  • योजना को 2020-21 से 2024-25 तक के लिए 5 वर्ष की अवधि हेतु कार्यान्वित किया जाएगा।
  • समूह दृष्टिकोण
  • खराब होने वाली वस्तुओं पर विशेष ध्यान

व्यक्तिगत सूक्ष्म इकाईयों को सहायता:

  • 10 लाख तक के लागत वाली वैध परियोजना के सूक्ष्म उद्यमों को 35 प्रतिशत की दर से ऋण से जुड़ी सब्सिडी मिलेगी।
  • लाभार्थी का योगदान न्यनतम 10 प्रतिशत और ऋण का शेष होगा।

एफपीओ/एसएचजी/क़ोओपरेटिव को सहायता:

  • कार्यशील पूँजी और छोटे उपकरणों के लिए सदस्यों हेतु ऋण के लिए एसएचजी को प्रारंभिक पूँजी
  • अगले/पिछले लिकेंज, सामान्य बुनियादी ढ़ाचे, पैकेजिंग, विपणन और ब्रांडिंग के लिए अनुदान
  • कौशल प्रशिक्षण एवं हैंडहोल्डिंग समर्थन
  • ऋण से जुड़ी पूँजी सब्सिडी

कार्यान्वयन कार्यक्रम:

  • योजना को अखिल भारतीय स्तर पर प्रारंभ किया जाएगा।
  • ऋण से जुड़ी सहायता सब्सिडी 2,00,000 इकाईयों को प्रदान की जाएगी।
  • कार्यशील पूँजी और छोटे उपकरणों के लिए सदस्यों हेतु ऋण के लिए एसएचजी को (4 लाख रूपए प्रति एसएचजी) की प्रारंभिक पूँजी दी जाएगी।
  • अगले/पिछले लिकेंज, सामान्य बुनियादी ढ़ाचे, पैकेजिंग, विपणन और ब्रांडिंग के लिए एफपीओ को अनुदान प्रदान किया जाएगा।

प्रशासनिक और कार्यान्वयन तंत्र

  • इस योजना की निगरानी खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री की अध्यक्षता में एक अंतर-मंत्रिस्तरीय अधिकार प्राप्त समिति (आईएमईसी) के द्वारा केन्द के स्तर पर की जाएगी।
  • मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य/संघ शासित प्रदेशों की एक समिति एसएचजी/ एफपीओ/क़ोओपरेटिव के द्वारा नई इकाईयों की स्थापना और सूक्ष्म इकाईयों के विस्तार के लिए प्रस्तावों की निगरानी और अनुमति/अनुमोदन करेगी।
  • राज्य/संघ शासित प्रदेश इस योजना के कार्यान्वयन के लिए विभिन्न गतिविधियों को शामिल करते हुए वार्षिक कार्ययोजना तैयार करेंगे।
  • इस कार्यक्रम में तीसरे पक्ष का एक मूल्याँकन और मध्यावधि समीक्षा तंत्र भी बनाया जाएगा।

राज्य/संघ शासित प्रदेश नोडल विभाग और एजेन्सी

  • राज्य/संघ शासित प्रदेश इस योजना के कार्यान्वयन के लिए एक नोडल विभाग और एजेन्सी को अधिसूचित करेगें।
  • राज्य/संघ शासित प्रदेश नोडल एजेंसी (एसएनए) राज्य/संघ शासित प्रदेशों में इस योजना को कार्यान्वित करने के लिए उत्तरदायी होने के साथ-साथ राज्य/संघ शासित प्रदेश स्तर उन्नयन योजना की तैयारी और प्रमाणीकरण, समूह विकास योजना, इकाईयों और समूहों आदि को सहायता प्रदान करते हुए जिला, क्षेत्रीय स्तर पर स्रोत समूह के कार्य की निगरानी करेगी।

राष्ट्रीय पोर्टल और एमआईएस

  • एक राष्ट्रीय पोर्टल की स्थापना की जाएगी जहाँ आवेदक/ व्यक्तिगत उद्यमी इस योजना में शामिल होने के लिए आवेदन कर सकते हैं।
  • योजना की सभी गतिविधियों को राष्ट्रीय पोर्टल पर संचालित किया जाएगा।

समाभिरूपता प्रारूप

  • भारत सरकार और राज्य सरकारों के द्वारा कार्यान्वयन के अंतर्गत मौजूदा योजनाओं से सहायता भी इस योजना के अंतर्गत ली जा सकेगी।
  • यह योजना उन अंतरालों को भरने का कार्य करेगी जहाँ अन्य स्रोतों खासकर पूँजी निवेश, हैंडहोल्डिंग सहायता, प्रशिक्षण और सामान्य बुनियादी ढ़ांचे के लिए सहायता उपलब्ध नहीं है।

प्रभाव और रोजगार सृजन:

  • करीब आठ लाख सूक्ष्म-उद्यम सूचना, बेहतर विवरण और औपचारिक पहुँच के माध्यम से लाभान्वित होंगे।
  • विस्तार और उन्नयन के लिए 2,00,000 सूक्ष्म उद्यमों तक ऋण से जुड़ी सब्सिडी और हैंडहोल्डिंग सहायता को बढ़ाया जाएगा।
  • यह उन्हें गठित, विकसित और प्रतिस्पर्धी बनने में समर्थ बनाएगा।
  • इस परियोजना से नौ लाख कुशल और अल्प-कुशल रोजगारों के सृजन की संभावना है।
  • इस योजना में आकांक्षापूर्ण जिलों में मौजूदा सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमियों, महिला उद्यमियों और उद्यमियों को ऋण तक पहुँच बढ़ाया जाना शामिल है।
  • संगठित बाजार के साथ बेहतर समेकन।
  • सोर्टिग, ग्रेडिंग, प्रसंस्करण, पैकेजिंग, भंडारण आदि जैसी समान सेवाओं को पहुँच में वृद्धि।

पृष्ठभूमि:

  • करीब 25 लाख अपंजीकृत खाद्य प्रसंस्करण उद्यम है जो इस क्षेत्र का 98 प्रतिशत है और ये असंगठित और अनियमित हैं। इन इकाईयों का करीब 68 प्रतिशत ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित है और इनमें से 80 प्रतिशत परिवार आधारित उद्यम हैं।
  • यह क्षेत्र बहुत सी चुनौतियों जैसे ऋण तक पहुँच न होना, संस्थागत ऋणों की ऊँची लागत, अत्याधुनिक तकनीक की कमी, खाद्य आपूर्ति श्रृंखला के साथ जुड़ने की असक्षमता और स्वास्थ्य और सुरक्षा मानकों के साथ अनुपालन का सामना करता है।
  • इस क्षेत्र को मजबूत करने से व्यर्थ नुकसान में कमी, खेती से इतर रोजगार सृजन अवसर और किसानों की आय को दुगना करने के सरकार के लक्ष्य तक पहुँचने में महत्वपूर्ण रूप से मदद मिलेगी।

कैबिनेट ने ‘प्रधानमंत्री वय वंदना योजना’ के विस्तार को स्वीकृति दी

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल ने वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण और वृद्धावस्था आय सुरक्षा को समर्थ बनाने के लिए निम्नलिखित को अपनी स्वीकृति दे दी है:

  1. 31 मार्च 2020 से अगले तीन वर्षों अर्थात 31 मार्च 2023 तक प्रधानमंत्री वय वंदना योजना (पीएमवीवीवाई) का विस्तार।
  2. प्रारंभ में 2020-21 के लिए प्रतिवर्ष 7.40 प्रतिशत की सुनिश्चित प्रतिफल दर और इसके पश्चात प्रत्येक वर्ष पुन: समायोजित की जाएगी।
  3. वरिष्ठ नागरिक बचत योजना (एससीएसएस) की संशोधित प्रतिफल दर के अनुरूप वित्तीय वर्ष में 1 अप्रैल से प्रभावी वार्षिक समायोजित सुनिश्चित ब्याज की दर किसी भी बिंदु पर योजना के नवीन मूल्यांकन के साथ 7.75 प्रतिशत तक होगी।
  4. योजना के अंतर्गत प्रतिफल की गारंटीकृत दर और एलआईसी द्वारा प्रतिफल की बाजार दर के बीच अंतर के कारण होने वाले व्यय के लिए अनुमोदन।
  5. नई जारी पालिसियों के संबंध में योजना के प्रथम वर्ष के कोषों के वित्तीय प्रबंधन व्ययों को प्रतिवर्ष 0.5 प्रतिशत और इसके बाद दूसरे वर्ष से अगले 9 वर्षों के लिए प्रतिवर्ष 0.3 प्रतिशत तक सीमित करना।
  6. प्रत्येक वित्तीय वर्ष क पर प्रतिफल की वार्षिक समायोजित दर की स्वीकृति के लिए वित्त मंत्री को अधिकार दिए गए हैं।
  7. इस योजना की अन्य नियम एवं शर्ते समान रहेंगी।

इस योजना के अंतर्गत, प्रति वर्ष 12,000 रूपए की पेंशन के लिए 1,56,658 रूपए और प्रति माह 1000 रूपए की न्यूनतम पेंशन धनराशि प्राप्त करने के लिए 1,62,162 रूपए तक के न्यूनतम निवेश तक संशोधित किया गया है।

वित्तीय निहितार्थ:

  • सरकार का वित्तीय दायित्व वर्ष 2020-21 के लिए प्रारंभिक तौर पर प्रतिवर्ष 7.40 प्रतिशत की सुनिश्चित वापसी और एलआईसी द्वारा तय बाजार प्रतिफल के बीच अंतर के विस्तार तक सीमित है और इसके बाद एससीएसएस के अनुरूप प्रतिवर्ष निर्धारित किया जाएगा। इस योजना के वित्तीय प्रबंधन व्ययों प्रथम वर्ष के लिए प्रबंधन के अंतर्तग परिसम्पत्तियों के 0.5 प्रतिशत प्रतिवर्ष और इसके बाद दूसरे वर्ष से अगले 9 वर्षों के लिए प्रतिवर्ष 0.3 प्रतिशत तक सीमित किया गया है। इसके अनुसार वित्तीय वर्ष 2023-24 में 829 करोड़ रूपए और अंतिम वित्तीय वर्ष 2032-33 में 264 करोड़ रूपए का अनुमानित व्यय होगा। वास्तविक आधार पर वार्षिक भुगतान के लिए सब्सिडी प्रतिपूर्ति के 614 करोड़ रूपए होने का उम्मीद है। हालांकि वास्तविक ब्याज अंतर (सब्सिडी) नई जारी पालिसियों की संख्या में शर्तों के वास्तविक अनुभव पर निर्भर होगी।
  • पीएमवीवीवाई वरिष्ठ नागरिकों के लिए एक समाजिक सुरक्षा योजना है जो क्रय मूल्य/वार्षिक अंशदान पर सुनिश्चित रिटर्न के आधार पर उनको न्यूनतम पेंशन सुनिश्चित कराने की मंशा रखती है।

क्या है प्रधानमंत्री वय वंदना योजना?

  • केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री वय वंदना योजना को 4 मई 2017 को लॉन्च किया है। वरिष्ठ पेंशन बीमा योजना (वीपीबीवाई) की ही तरह प्रधानमंत्री वय वंदना योजना (पीएमवीवीवाई) उन वरिष्ठ लोगों के लिए एक पेंशन योजना है जिनकी उम्र 60 वर्ष के ऊपर है।

कोणार्क सूर्य मंदिर और कोणार्क शहर के शत प्रतिशत सोलराइजेशन की योजना

  • नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने ओडिशा में कोणार्क सूर्य मंदिर और कोणार्क शहर के शत प्रतिशत सोलराइजेशन का दायित्‍व ग्रहण किया है। इस योजना के बारे में जानकारी देते हुए विद्युत तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा राज्‍य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) श्री आर के सिंह ने बताया, ‘भारत सरकार ने ऊर्जा के आधुनिक उपयोग तथा प्राचीन सूर्य मंदिर के बीच तालमेल के संदेश को प्रकट करने तथा सौर ऊर्जा के महत्‍व को प्रोत्‍साहन देने के लिए ओडिशा में ऐतिहासिक कोणार्क सूर्य मंदिर को ‘सूर्य नगरी’ के रूप में विकसित करने के प्रधानमंत्री के विजन को आगे ले जाने के उद्देश्‍य के साथ इस योजना का शुभारंभ किया है।’
  • इस योजना में भारत सरकार की ओर से नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के माध्‍यम से लगभग 25 करोड़ रूपये की सहायता सहित 100 प्रतिशत केंद्रीय वित्‍तीय सहायता (सीएफए) के साथ10मेगावाट ग्रिड कनेक्‍टेड सौर परियोजना और सौर वृक्ष, सौर पेयजल कियोस्कजैसेविविध सौर ऑफ-ग्रिड अनुप्रयोगों, बैटरी स्‍टोरेज सहित ऑफ ग्रिड सौर संयंत्रों की स्‍थापना आदि की परिकल्‍पना की गई है।
  • इस योजना का कार्यान्‍वयन ओडिशा नवीकरणीय ऊर्जा विकास एजेंसी (ओआरईडीए)द्वारा किया जाएगा। यह योजना सौर ऊर्जा के साथ कोणार्क शहर की ऊर्जा संबंधी जरूरतों को पूरा करेगी।

प्रवासियों के लिए खाद्यान्नों के आवंटन हेतु ‘आत्म निर्भर भारत’ पैकेज को स्वीकृति दी

  • प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल ने करीब 8 करोड़ प्रवासियों/फँसे हुए प्रवासियों के लिए केन्द्रीय भंडार से दो माह (मई और जून, 2020) तक प्रति व्यक्ति 5 किलोग्राम निःशुल्क खाद्यान के आवंटन को पूर्वव्यापी स्वीकृति दे दी है।
  • इससे करीब 2,982.27 करोड़ रूपए की खाद्य सब्सिडी प्रदान की जाएगी। इसके अलावा अंतराराज्य परिवहन और लदाई-उतराई प्रभार और डीलरों की अतिरिक्त राशि/अतिरिक्त डीलर लाभ के लिए दिए जाने वाले करीब 127.25 करोड़ रूपए का वहन पूरी तरह से केन्द्र सरकार के द्वारा किया जाएगा। इसके फलस्वरूप, भारत सरकार से मिलने वाली कुल अनुमान खाद्य सब्सिडी करीब 3,109.52 करोड़ होगी।
  • यह आवंटन से कोविड-19 के कारण हुए आर्थिक व्यवधान से प्रवासियों/फँसे हुए प्रवासियों के द्वारा सामना की जा रही कठिनाईयों को कम किया जा सकेगा।

:: अंतर्राष्ट्रीय समाचार ::

चीन और ताइवान के परिदृश्य में ताइवानी राष्ट्रपति त्साई इंग-वेन पुनः निर्वाचित

  • चीन के साथ बढ़ते तनाव के बीच ताइवानी राष्ट्रपति त्साई इंग-वेन ने रिकार्ड रेटिंग के साथ अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत की है। इस दौरान उन्होंने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ सह अस्तित्व के आधार पर बातचीत की पेशकश भी की है। बता दें कि चीन हमेशा से ताइवान को अपना अभिन्न हिस्सा मानता है, जबकि ताइवान हमेशा से अपने आपको एक अलग देश बताता है।
  • ताइपे में अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत के मौके पर आयोजित एक परेड के दौरान 63 साल की राष्ट्रपति त्साई इंग-वेन ने कहा कि वह चीन के साथ बातचीत कर सकती हैं लेकिन एक देश-दो सिस्टम के मुद्दे पर नहीं। त्साई के पहले कार्यकाल के दौरान चीन ने ताइवान से सभी प्रकार के संबंधों को खत्म कर दिया था। इसके अलावा कई बार चीनी सरकार ने ताइवान पर सैन्य कार्यवाई की धमकी भी दी थी।
  • ताइवानी राष्ट्रपति ने कहा कि चीन और ताइवान के संबंध ऐतिहासिक मोड़ पर पहुंच गए हैं। दोनों पक्षों का कर्तव्य है कि वे दीर्घकालिक रूप से सह-अस्तित्व का रास्ता खोजें और दुश्मनी या मतभेदों को बढ़ने से रोकें। उन्होंनें कहा कि मुझे उम्मीद है कि चीन का नेतृत्व जिम्मेदारी लेगा और साथ मिलकर दोनों देशों के संबंधों के दीर्घकालिक विकास को बढ़ाने के लिए काम करेगा।
  • त्साई ने चीन और ताइवान के बीच संबंधों में शांति, समानता, लोकतंत्र और बातचीत का समर्थन किया। उन्होंने हांगकांग की तरह एक देश, दो प्रणालियों के तहत चीन के साथ एकीकरण के लिए अपना विरोध भी दोहराया। उन्होंने देश में 5 जी, जैव-प्रौद्योगिकी, चिकित्सा, रक्षा और नवीकरणीय ऊर्जा सहित मुख्य उद्योगों के निर्माण का भी वादा किया।

क्यों है चीन और ताइवान में तनाव?

  • 1949 में माओत्से तुंग के नेतृत्व में कम्युनिस्ट पार्टी ने चियांग काई शेक के नेतृत्व वाले कॉमिंगतांग सरकार का तख्तापलट कर दिया था। जिसके बाद चियांग काई शेक ने ताइवान द्वीप में जाकर अपनी सरकार का गठन किया। उस समय कम्यूनिस्ट पार्टी के पास मजबूत नौसेना नहीं थी। इसलिए उन्होंने समुद्र पार कर इस द्वीप पर अधिकार नहीं किया। तब से ताइवान खुद को रिपब्लिक ऑफ चाइना मानता है।
  • चीन ताइवान को अपना अभिन्न अंग मानता है। चीनी कम्यूनिस्ट पार्टी इसके लिए सेना के इस्तेमाल पर भी जोर देती आई है। ताइवान के पास अपनी खुद की सेना भी है। जिसे अमेरिका का समर्थन भी प्राप्त है। हालांकि ताइवान में जबसे डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी सत्ता में आई है तबसे चीन के साथ संबंध खराब हुए हैं।

:: अर्थव्यवस्था ::

‘राजकोषीय सुदृढ़ीकरण की रूपरेखा’ पर 15वें वित्त आयोग की समिति

  • ‘राजकोषीय सुदृढ़ीकरण की रूपरेखा’ पर 15वें वित्त आयोग की समिति की पहली बैठक कल यानी 21 मई, 2020 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित की जाएगी।

‘राजकोषीय सुदृढ़ीकरण की रूपरेखा’ की समीक्षा समिति के बारे में

  • पंद्रहवें वित्त आयोग का एक विचारार्थ विषय (टीओआर) उच्च समावेशी विकास को बढ़ावा देते हुए ऋण एवं घाटे के उपयुक्त स्तरों का पालन करने की अपनी जिम्मेदारी को ध्यान में रखकर केंद्र और राज्य सरकारों के ‘राजकोषीय सुदृढ़ीकरण की रूपरेखा’ पर सिफारिशें पेश करना है। ये समानता, दक्षता और पारदर्शिता के सिद्धांतों द्वारा निर्देशित होने चाहिए। इस टीओआर को ध्‍यान में रखते हुए 15वें वित्त आयोग ने 18 मार्च 2020 को सामान्‍य सरकार (जनरल गवर्नमेंट) के ‘राजकोषीय सुदृढ़ीकरण की रूपरेखा’ की समीक्षा करने के लिए एक समिति का गठन किया। इस समिति का गठन 15वें वित्त आयोग के अध्यक्ष श्री एन के सिंह की अध्यक्षता में किया गया।
  • वर्ष 2020-21 के लिए 15वें वित्त आयोग की रिपोर्ट पर केंद्र सरकार द्वारा पहले ही आवश्‍यक कदम उठाए जा चुके हैं। उपर्युक्‍त टीओआर के तहत 15वें वित्त आयोग को वर्ष 2021-22 से लेकर वर्ष 2025-26 तक की अवधि के लिए सामान्‍य सरकार (जनरल गवर्नमेंट) के ‘राजकोषीय सुदृढ़ीकरण की रूपरेखा’ तैयार करने का कार्य सौंपा गया है।
  • हालांकि, यह कार्य महामारी फैलने से उत्पन्न अप्रत्‍याशित स्थिति और केंद्र एवं राज्य सरकारों पर संलग्‍न या सहवर्ती राजकोषीय बाध्यताओं के कारण जटिल हो गया है। इस स्थिति से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने राज्य सरकारों को पहले से ही उपलब्ध 3 प्रतिशत के अलावा भी जीडीपी के 2 प्रतिशत के बराबर अतिरिक्त उधारी लेने की अनुमति दे दी है।

क्या है वित्त आयोग?

  • वित्त आयोग एक संवैधानिक निकाय है जो राजकोषीय संघवाद की धुरी है, जिसका गठन संविधान के अनुछेद 280 के तहत किया जाता है। इसका मुख्य दायित्व: संघ व राज्यों की वित्तीय स्थितियों का मूल्यांकन करना, उनके बीच करों के बटवारे की संस्तुति करना तथा राज्यों के बीच इन करों के वितरण हेतु सिद्धांतो का निर्धारण करना है। वित्त आयोग की कार्यशैली की विशेषता सरकार के सभी स्तरों पर व्यापक एवं गहन परामर्श कर सहकारी संघवाद के सिद्धांत को सुदृढ़ करना है। इसकी संस्तुतियां सार्वजनिक व्यय की गुणवत्ता में सुधार लाने और राजकोषीय स्थिरता को बढ़ाने की दिशा में भी सक्षम होती है।
  • प्रथम वित्त आयोग 1951 में गठित किया गया था और अब तक पंद्रह वित्त आयोग गठित किये जा चुके हैं।15वें वित्त आयोग के अध्यक्ष श्री एन के सिंह है।

15वें वित्‍त आयोग की स्‍वास्‍थ्‍य क्षेत्र से संबंधित उच्‍च स्‍तरीय समूह

चर्चा में क्यों?

  • 15वें वित्‍त आयोग की स्‍वास्‍थ्‍य क्षेत्र से संबंधित अपने उच्‍च स्‍तरीय समूह(एचएलजी) के साथ 21 मई 2020 को वर्चुअल कॉन्‍फ्रेंस के माध्‍यम से बैठक होगी।

क्यों महत्वपूर्ण है यह बैठक?

  • 15 वें वित्त आयोग ने स्वास्थ्य क्षेत्र को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए वर्तमान में जारी कोविड -19 संकट के कारण उपजे हाल के घटनाक्रमों के मद्देनजर इस एचएलजी की फिर से आयोजित करने का फैसला किया है।
  • एचएलजी को वर्तमान में जारी कोविड-19 महामारी के संदर्भ में अपनी मूल सिफारिशों की समीक्षा करने को कहा गया है। स्वास्थ्य इन्फ्रा-गैप (अस्पताल की बुनियादी सुविधाओंचिकित्सा उपकरण, पीपीई, आदि) के संबंध में 2021-22 से 2025-26 के लिए स्वास्थ्य संबंधी जनशक्ति (चिकित्सा और अर्द्धचिकित्‍सा) की जरूरतों और संसाधनों की अनुमानित आवश्यकता का नए सिरे से आकलन करने की तत्काल आवश्यकता है। इसके अलावा, निजी क्षेत्र की संवर्धित भूमिका सहित इन आवश्यकताओं के लिए धन उपलब्‍ध कराने संबंधी तंत्र की गंभीर रूप से जांच किए जाने की आवश्यकता होगी।
  • आयोग ने वर्तमान में जारी कोविड-19 संकट की चुनौतियों से निपटने के लिए भारत सरकार के कुछ दूरगामी प्रयासों को नोट किया है। राज्यों के लिए घोषित 15000 करोड़ रुपये के पैकेज से जमीनी स्तर पर निवेश बढ़ेगा और ब्लॉक स्तर पर सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रयोगशालाओं की स्थापना के साथ ही साथ सभी जिला अस्पतालों में संक्रामक रोग ब्लॉक की स्थापना होगी। आवश्यक उपायों की श्रृंखला में ये शुरुआती महत्वपूर्ण कदम हैं।

पृष्ठभूमि

  • 15वें वित्‍त आयोग द्वारा स्‍वास्‍थ्‍य क्षेत्र से संबंधित उच्‍च स्‍तरीय समूह (एचएलजी) का गठन मई 2018 में एम्‍स के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया की अध्‍यक्षता में किया गया था और इसमें स्‍वासथ्‍य क्षेत्र के प्रमुख व्‍यवसायी शामिल थे। इस समूह ने अगस्‍त 2019 में अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंप दी थी और उसकी कुछ प्रमुख सिफारिशों को 15वें वित्‍त आयोग की वर्ष 2020-21की प्रथम रिपोर्ट में शामिल किया गया था।

NCGTC द्वारा सदस्य ऋणदात्री संस्थाओं को 100 फीसदी क्रेडिट गारंटी कवरेज

चर्चा में क्यों?

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट ने निम्नलिखित मंज़ूरी दी है।

  • कैबिनेट ने आज योग्य एमएसएमई और इच्छुक मुद्रा कर्जदारों को तीन लाख करोड़ रुपये तक की अतिरिक्त फंडिंग के लिए ‘आपातकालीन क्रेडिट लाइन गारंटी योजना’ को मंजूरी दी।
  • योजना के तहत, राष्ट्रीय क्रेडिट गारंटी ट्रस्टी कंपनी लिमिटेड (एनसीजीटीसी) द्वारा योग्य एमएसएमई और इच्छुक कर्जदारों को गारंटी युक्त आपातकालीन क्रेडिट लाइन (जीईसीएल) सुविधा के रुप में तीन लाख रुपये तक की अतिरिक्त फंडिंग के लिए 100 फीसदी गारंटी कवरेज उपलब्ध कराई जाएगी।
  • इस उद्देश्य के लिए भारत सरकार द्वारा मौजूदा और अगले तीन वित्तीय वर्षों के लिए 41,600 करोड़ रुपय की राशि उपलब्ध कराई जाएगी।
  • कैबिनेट ने यह भी मंज़ूरी दी कि यह योजना जीईसीएल सुविधा के तहत इस योजना की घोषणा की तारीख से लेकर 31.10.2020 की अवधि में स्वीकृत सभी कर्जों या जीईसीएल के तहत 3,00,000 करोड़ रुपये तक की कर्ज राशि की स्वीकृति, इनमें से जो पहले हो, पर लागू होगी।

विवरण:

  • आपातकालीन क्रेडिट लाइन गारंटी योजना (ईसीएलजीएस) को कोविड-19 और इसके बाद लॉकडाउन की वजह से बनी अप्रत्याशित स्थिति से निपटने के एक निर्दिष्ट उपाय के रुप में बनाया गया है। इससे एमएसएमई सेक्टर में विनिर्माण और अन्य गतिविधियां बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। इस योजना का उद्देश्य आर्थिक परेशानी झेल रही एमएसएमई को पूरी गारंटी युक्त आपातकालीन क्रेडिट लाइन के रुप में तीन लाख करोड़ रुपये तक की अतिरिक्त फंडिंग उपलब्ध कराते हुए उन्हें राहत दिलाना है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य सदस्य ऋणदात्री संस्थाओं यानी बैंकों, वित्तीय संस्थानों (एफआई), और गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थानों (एनबीएफसी) को कोविड-19 संकट की वजह से आर्थिक तंगी झेल रहे एमएसएमई कर्जदारों को देने के लिए उनके पास अतिरिक्त फंडिंग सुविधा की उपलब्धता बढ़ाना है। उन्हें कर्जदारों द्वारा जीईसीएल फंडिंग का पुनर्भुगतान नहीं किए जाने की वजह से होने वाले किसी नुकसान के लिए 100 फीसदी गारंटी उपलब्ध कराई जाएगी।

इस योजना में शामिल प्रमुख विशेषताएं-

  1. योजना के तहत जीईसीएल फंडिंग के लिए वे सभी एमएसएमई योग्य होंगे जिनका बकाया ऋण 29.02.2020 को 25 करोड़ रुपये तक जो इस तारीख तक पिछले 60 दिनों तक या उससे कम दिनों तक बकाया यानी नियमित एसएमए 0 और एसएमए 1 खातों या जिनका एक करोड़ रुपये का वार्षिक कारोबार हो।
  2. योग्य एमएसएमई कर्जदारों को जीईसीएल फंडिंग की राशि या तो अतिरिक्त सक्रिय पूंजी मियादी ऋण (बैंकों और वित्तीय संस्थानों के मामले में) या मियादी ऋण (एनबीएफसी के मामले में) के रुप में उनके 29 फरवरी, 2020 को 25 करोड़ रुपये तक की कुल बकाया राशि का 20 फीसदी ही होगी।
  3. ईसीएलजीएस के तहत जीईसीएल के जरिए की जाने वाली पूरी फंडिंग एनसीजीटीसी द्वारा सदस्य ऋणदात्री संस्थाओं को 100 फीसदी क्रेडिट गारंटी के साथ होगी।
  4. योजना के तहत ऋण की अवधि 4 साल होगी और इसकी अधिस्थगन अवधि मूलधन पर एक साल होगी।
  5. योजना के तहत एनसीजीटीसी द्वारा सदस्य ऋणदाता संस्थानों से कोई भी गारंटी राशि नहीं ली जाएगी।
  6. योजना के तहत ब्याज दर बैंकों एवं वित्तीय संस्थानों के लिए अधिकतम 9.25 फीसदी और गैर- वित्तीय संस्थाओं के लिए अधिकतम 14 फीसदी होगी।

क्रियान्वयन कार्यक्रम:

  • यह योजना जीईसीएल सुविधा के तहत इस योजना की घोषणा की तारीख से लेकर 31.10.2020 की अवधि में स्वीकृत सभी कर्जों या जीईसीएल के तहत 3,00,000 करोड़ रुपये तक की कर्ज राशि की स्वीकृति, इनमें से जो पहले हो, पर लागू होगी।

प्रभाव:

  • योजना को कोविड-19 और इसके बाद लॉकडाउन की वजह से बनी अप्रत्याशित स्थिति से निपटने के एक निर्दिष्ट उपाय के रुप में बनाया गया है। इससे एमएसएमई सेक्टर में विनिर्माण और अन्य गतिविधियां बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। अर्थव्यवस्था और रोजगार सृजन में एमएसएमई की अहम भूमिका को देखते हुए, प्रस्तावित योजना से एमएसएमई सेक्टर को सदस्य ऋणदाता संस्थानों के जरिए कम ब्याज दर पर 3 लाख करोड़ रुपये तक के अतिरिक्त ऋण मुहैया कराने से काफी राहत मिलेगी और इस तरह एमएसएमई को अपनी संचालन उत्तरदायित्वों को पूरा करने और व्यापार को फिर से शुरू करने में मदद मिलेगी। मौजूदा अप्रत्याशित माहौल में अपना कामकाज जारी रखने में योजना के तहत एमएसएमई को मदद देने से अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक असर पड़ेगा और इसे पुनर्जीवित करने में मदद मिलेगी।

:: विज्ञान और प्रौद्योगिकी ::

अगप्पे चित्रा मैग्ना (Agappe Chitra Magna)

  • श्री चित्रा तिरुनल इंस्टीट्यूट फॉर मेडिकल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी (एससीटीआईएमएसटी) – त्रिवेंद्रम और अगप्पे डायग्नोस्टिक्स लिमिटेड, कोचीन द्वारा विकसित अगप्पे चित्रा मैग्ना का वाणिज्यिक लॉन्च 21 मई, 2020 को शाम 4.30 बजे आयोजित किया जायेगा। अगप्पे चित्रा मैग्ना मैग्नेटिक नैनोपार्टिकल-आधारित आरएनए एक्सट्रैक्शन किट है जिसका उपयोग कोविड – 19 की जांच में किया जाता है। एससीटीआईएमएसटी राष्ट्रीय महत्व का संस्थान है जो विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के अंतर्गत कार्य करता है। अगप्पे डायग्नोस्टिक्स लिमिटेड, इन विट्रो डायग्नोस्टिक्स का निर्माण करती है।

क्या है चित्रा मैग्ना?

  • वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ अनूपकुमार थेक्वेवेटिल के नेतृत्व में एससीटीआईएमएसटी द्वारा विकसित चित्रा मैग्ना एक अभिनव आरएनए एक्सट्रैक्शन किट है जिसे अप्रैल 2020 में अगप्पे डायग्नोस्टिक्स को हस्तांतरित कर दिया गया था और अब यह अगप्पे चित्रा मैग्ना आरएनए एक्सट्रैक्शन किट के रूप में बाजार में उपलब्ध होगा।
  • इस उत्पाद को कोविड -19 आरएनए को अलग (आइसोलेशन) करने के लिए नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी द्वारा स्वतंत्र रूप से मान्यता दी गयी है। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) ने इस किट के व्यावसायीकरण के लिए मंजूरी दे दी है।

क्या है विशेषता?

  • सार्स - कोव – 2 का पता लगाने के लिए किट का उपयोग आरटी-लैंप, आरटी-क्यूपीसीआर, आरटी-पीसीआर और अन्य पीसीआर आधारित प्रोटोकॉल के आरएनए एक्सट्रैक्शन के लिए किया जा सकता है।
  • यह आरएनए को अलग करने के लिए एक अभिनव तकनीक का उपयोग करता है जिसके तहत रोगी के नमूने से आरएनए को अलग करने के लिए चुंबकीय नैनोकणों का उपयोग किया जाता है। चुंबकीय नैनोकण वायरल आरएनए के साथ जुड़ जाते हैं और चुंबकीय क्षेत्र के संपर्क में आने पर अत्यधिक शुद्ध और सान्द्र आरएनए देते हैं। पता लगाने की विधि की संवेदनशीलता वायरल आरएनए की पर्याप्त मात्रा पर निर्भर करती है। यह नवाचार पॉजिटिव मामलों की पहचान करने की संभावना को बढ़ाता है।

लाभ

  • अनुमान है कि भारत को अगले छह महीनों के दौरान प्रति माह लगभग 8 लाख आरएनए एक्सट्रैक्शन किट की आवश्यकता होगी। अगप्पे चित्रा मैग्ना आरएनए एक्सट्रैक्शन किट की कीमत लगभग 150 रुपये प्रति किट है। इससे परीक्षण की लागत और आयातित किट पर देश की निर्भरता कम होने की उम्मीद है, जिसकी लागत लगभग 300 रुपये है। अगप्पे डायग्नोस्टिक्स की विनिर्माण क्षमता 3 लाख किट प्रति माह है।

TB जांच की मशीन से COVID-19 की जांच

  • ट्यूबरकुलॉसिस (TB) के टेस्टिंग में इस्तेमाल किए जाने वाले डायग्नॉस्टिक मशीनों (Diagnostic machines) का इस्तेमाल अब कोविड-19 मामलों की पुष्टि व स्क्रीनिंग के लिए किया जाएगा। यह जानकारी शीर्ष स्वास्थ्य रिसर्च निकाय , भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) ने दी। टेस्टिंग क्षमता को बढ़ाने के लिए अपने प्रयासों के तौर पर ICMR ने 10 अप्रैल को ट्रूनैट (TrueNat) सिस्टम का इस्तेमाल कोविड-19 की जांच के लिए प्रयुक्त करने की मंजूरी दी थी।
  • अब ICMR ने इसके लिए संशोधित गाइडलाइन जारी किया है। साथ ही कहा है, 'यह सिस्टम अब कोविड-19 की पुष्टि व स्क्रीनिंग के लिए इस्तेमाल की जाएगी।'

TrueNat सिस्टम की विशेषता

  • इस मशीन से जांच में अधिकतम 35 से 45 मिनट का समय लगेगा। यह आधुनिक मशीन बगैर बिजली के भी चलाई जा सकती है। मशीन में बैटरी है जो एकबार चार्ज होने पर 45 मिनट तक बैकअप देता है। यदि दो शिफ्टों में जांच के लिए टेक्निशियन लगाया जाए तो एक दिन में 30 से 40 नमूनों की जांच पूरी की जा सकती है।
  • इडलाइंस के अनुसार, COVID-19 संक्रमण के संदिग्धों के सभी सैंपल लिए जाएंगे। इन सैंपल की सबसे पहले ई जीन (E gene) स्क्रीनिंग होगी। जिनके पॉजिटिव रिपोर्ट आएंगे उन्हें अगले चरण से गुजरना होगा जिसमें RdRp जीन की जांच होगी। इसमें भी पॉजिटिव आने पर उन्हें पूरी तरह संक्रमित माना जाएगा और इलाज के लिए भेजा जाएगा। इसके अलावा सभी पॉजिटिव और निगेटिव परिणामों को ICMR पोर्टल पर रियल टाइम में अपलोड करना अनिवार्य होगा। देश में अब तक कुल संक्रमितों की संख्या 10,6750 हो गई है वहीं मरने वालों की संख्या 3,303 हो गई है। 20 मई सुबह 9 बजे तक देश भर में कुल 25,12,388 सैंपल टेस्ट के लिए एकत्रित किए गए हैं।महामारी की संकट से जूझ रही दुनिया में इस घातक वायरस के खात्मे के लिए शोध और अध्ययन किए जा रहे हैं। इस क्रम में तमाम देशों में वैक्सीन व दवाओं को विकसित करने का काम चल रहा है।

कॉयर जियो टेक्सटाइल्स को ग्रामीण सड़क निर्माण के लिए मंजूरी

चर्चा में क्यों?

  • कॉयर जियो टेक्सटाइल्स को अंततः ग्रामीण सड़क निर्माण के लिए एक अच्छी सामग्री के रूप में स्वीकार किया गया है।
  • सड़क निर्माण के लिए पीएमजीएसवाई की नई प्रौद्योगिकी दिशानिर्देशों के अनुसार, प्रस्तावों के प्रत्येक बैच के सडकों की कुल लम्बाई के 15 प्रतिशतमें नई प्रौद्योगिकियों का उपयोग करके निर्माण किया जाना है। इनमें से 5प्रतिशत सड़कों का निर्माण आईआरसी मान्यता प्राप्त प्रौद्योगिकी का उपयोग करके किया जाना है। आईआरसी ने अब ग्रामीण सड़क निर्माण के लिए कॉयर जियो टेक्सटाइल्स को मान्यता दी है।
  • इन निर्देशों के अनुसार, पीएमजीएसवाई -III के तहत 5 प्रतिशत ग्रामीण सड़कों का निर्माण कॉयर जियो टेक्सटाइल्स का उपयोग करके किया जाएगा। तदनुसार कॉयर जियो टेक्सटाइल्सका उपयोग करके आंध्र प्रदेश में 164 किलोमीटर, गुजरात में 151 किलोमीटर, केरल में 71 किलोमीटर, महाराष्ट्र में 328 किलोमीटर, ओडिशा में 470 किलोमीटर, तमिलनाडु में 369 किलोमीटर और तेलंगाना में 121 किलोमीटर सड़कों का निर्माण किया जाएगा। इस प्रकार 7 राज्यों में कॉयर जियो टेक्सटाइल्स का उपयोग करके 1674 किलोमीटर सड़क का निर्माण किया जाएगा, जिसके लिए एक करोड़ वर्ग मीटर कॉयर जियो-टेक्सटाइल्स की आवश्यकता होगी। इसकी अनुमानित लागत70 करोड़ रु है।

क्या है कॉयर जियो टेक्सटाइल्स की विशेषता?

  • जो एक पारगम्य फैब्रिक है तथा प्राकृतिक, मजबूत, अत्यधिक टिकाऊ, टूट-फूट, मोड़ एवं नमी प्रतिरोधी है व किसी भी सूक्ष्मजीव (माइक्रोबियल) के हमले से मुक्त है, को अंततः ग्रामीण सड़क निर्माण के लिए एक अच्छी सामग्री के रूप में स्वीकार किया गया है।
  • इस निर्णय देश में कॉयर जियो -टेक्सटाइल के लिए एक बड़ी बाजार संभावना बनेगी और कोविड-19 से प्रभावित कॉयर उद्योग के लिए यह एक वरदान सिद्ध होगा।

:: पर्यावरण और पारिस्थितिकी ::

विश्व मधुमक्खी दिवस (World Bee Day)

  • प्रतिवर्ष 20 मई को संपूर्ण विश्व में ‘विश्व मधुमक्खी दिवस’ (World Bee Day) मनाया जाता है।यह दिवस मधुमक्खी पालन के आधुनिक तकनीक के जन्मदाता एंटोन जनसा (Antone Jansa) के जन्म दिन के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। इस विशेष दिवस को संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन के 40वें सत्र में अनुमोदित किया गया था।
  • इस महत्वपूर्ण दिवस मनाने का उद्देश्य मानव के अस्तित्व में मधुमक्खियों एवं परागणकों के महत्व, सतत विकास में उनके योगदान तथा उनके संरक्षण के बारे में जागरूकता का प्रसार करना है। वैश्वीकरण और औद्योगिकरण के कारण मनुष्य का प्रकृति में हस्तक्षेप लगातार बढ़ता जा रहा है जिसके कारण पारिस्थितिकी संतुलन एवं जैव विविधता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले मधुमक्खी और अन्य परागणकों जैसे तितलियों, चमगादड़ और हमिंग बर्ड का जीवन खतरे में है।

जैव विविधता में मधुमक्खियों की भूमिका:

  • मधुमक्खियों समेत अन्य कि जैसे तितली परागण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं जिससे नए पेड़-पौधे पनपते हैं एवं जैव विविधता बनी रहती है। इसके साथ ही बहुत सारे पौधों की प्रजातियां वंश वृद्धि के लिए इन्हें सारे कीटो पर निर्भर होती हैं अगर इनका अस्तित्व समाप्त हो जाए तो जैव विविधता पर संकट आ जाएगा। इनका उन्मूलन वैश्विक खाद्य संकट को बढ़ावा दे सकता है।

खाद्य श्रृंखला में भूमिका:

  • मधुमक्खी समेत अन्य कीट कई पक्षियों समेत कई जीव-जंतुओं के भोजन होते हैं। इनके समाप्त होने से खाद्य श्रृंखला प्रभावित होगी जिसके कारण जैव विविधता पर संकट आ सकता है।

पोषण सुरक्षा में भूमिका:

  • मधुमक्खियों से हमें शहद प्राप्त होता है जिसमें उच्च स्तर के पोषण तत्व होते हैं। इससे हमारे शरीर की प्रतिरोधकता में ना केवल सुधार होता है बल्कि यह कई आवश्यक तत्व की पूर्ति भी करता है। भारत विश्व में शहद उत्पादन में आठवें स्थान पर काबिज है।इसके अलावा मधुमक्खियों से हमें मोम भी प्राप्त होता है।

किन कारणों से इनका अस्तित्व संकट में है?

  • कृषि में अत्यधिक कीटनाशकों का प्रयोग, मोबाइल टावर के रेडिएशन, अत्यधिक वनोन्मूलन, खाद्य और नकदी फसलों को ज्यादा प्रोत्साहन इत्यादि गतिविधियों से इनका अस्तित्व संकट में आ चुका है।

:: विविध ::

स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन WHO कार्यकारी बोर्ड के अध्यक्ष

  • विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) में भारत का कद बढ़ने जा रहा है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) के 34 सदस्यीय एग्जीक्यूटिव बोर्ड के अगले चेयमैन बनने जा रहे हैं। दुनियाभर में कोरोना वायरस महामारी के बीच भारत के स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री को यह जिम्‍मेदारी मिलना काफी महत्‍व रखता है। अधिकारियों ने बताया कि हर्षवर्धन 22 मई को पदभार संभाल सकते हैं और वह जापान के डॉ. हिरोकी नकतानी की जगह लेंगे।
  • हर्षवर्धन जापान के डॉ हिरोकी नकाटानी की जगह लेंगे, जो वर्तमान में 34-सदस्यीय डब्ल्यूएचओ कार्यकारी बोर्ड के अध्यक्ष हैं। अधिकारियों ने कहा कि हर्षवर्धन का चयन 22 मई को विश्व स्वास्थ्य संगठन की कार्यकारी बोर्ड की बैठक में किया जाएगा। क्षेत्रीय समूहों के बीच अध्यक्ष का पद एक वर्ष के लिए रोटेशन द्वारा आयोजित किया जाता है। यह पिछले साल तय किया गया था कि शुक्रवार से शुरू होने वाले पहले वर्ष के लिए भारत का उम्मीदवार कार्यकारी बोर्ड का अध्यक्ष होगा।

:: प्रिलिम्स बूस्टर ::

  • केंद्रीय मंत्रिमंडल ने खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों के लिए 10,000 हजार करोड़ रूपए के परिव्यय की किस योजना को संस्तुति दी? (सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों को औपचारिक रूप देने की योजना-FME)
  • केंद्रीय मंत्रिमंडल ने नीली क्रांति के माध्यम से देश में मत्स्य पालन क्षेत्र के सतत और जवाबदेह विकास के लिए किस योजना को संस्तुति दी? (प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना)
  • तीन लाख करोड़ रुपये की ‘आपातकालीन क्रेडिट लाइन गारंटी योजना’ प्राप्त करने से चर्चा में रहे मुद्रा योजना के तहत किन श्रेणियों में ऋण प्रदान किया जाता है? (शिशु', 'किशोर' और 'तरुण')
  • हाल ही में नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने किस मंदिर एवं शहर के शत प्रतिशत सोलराइजेशन का दायित्‍व ग्रहण किया है? (सूर्य मंदिर, कोणार्क)
  • राजकोषीय सुदृढ़ीकरण की रूपरेखा पर प्रथम बैठक से चर्चा में रहे वित्त आयोग का संविधान के किस अनुच्छेद में प्रावधान है एवं 15वें वित्त आयोग के अध्यक्ष कौन हैं? (अनुच्छेद 280, एनके सिंह)
  • चर्चा में रहे 15 में वित्त आयोग द्वारा गठित स्वास्थ्य क्षेत्र पर उच्च स्तरीय समूह (HLG) के अध्यक्ष कौन थे? (रणदीप गुलेरिया)
  • हाल ही में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के एग्जीक्यूटिव बोर्ड के चेयरमैन के रूप में किस की नियुक्ति की गई है? (केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन)
  • हाल ही में किसने ताइवान के राष्ट्रपति के रूप में अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत की है? (त्साई इंग-वेन)
  • वर्ष 2023 तक योजना विस्तार से चर्चा में रहे प्रधानमंत्री वय वंदना योजना (PMVVY) का उद्देश्य क्या है एवं इसके लाभार्थी कौन हो सकते हैं? (वृद्धावस्था में आय सुरक्षा,60 वर्ष से अधिक के वरिष्ठ नागरिक)
  • हाल ही में वाणिज्यिक तौर पर लांच की गई अगप्पे चित्रा मैग्ना (Agappe Chitra Magna) क्या है? (कोविड-19 की जांच हेतु आरएनए निष्कर्षण किट)
  • पृथ्वी के समीप से गुजरने के कारण चर्चा में रहे ‘1997 BQ’ क्या है? (एक क्षुद्रग्रह Asteroids, सबसे बड़े और खतरनाक Asteroids Apollo की कैटिगरी में शामिल)
  • हाल ही में सरकार के द्वारा ग्रामीण सड़क निर्माण हेतु टिकाऊ नमी प्रतिरोधी एवं माइक्रोबियल संक्रमण से मुक्त किस प्राकृतिक सामग्री को मंजूरी दी गई है? (कॉयर जियो टेक्सटाइल्स)

स्रोत साभार: Dainik Jagran (Rashtriya Sanskaran), Dainik Bhaskar (Rashtriya Sanskaran), Rashtriya Sahara (Rashtriya Sanskaran) Hindustan Dainik (Delhi), Nai Duniya, Hindustan Times, The Hindu, BBC Portal, The Economic Times (Hindi & English), PTI, PIB

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