(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (21 जुलाई 2020)

दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर


(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (21 जुलाई 2020)


:: राष्ट्रीय समाचार ::

ज़ोरम मेगा फ़ूड पार्क

चर्चा में क्यों?

  • केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री श्रीमती हरसिमरत कौर बादल ने वर्चुअल सम्मेलन के माध्यम से ज़ोरम मेगा फ़ूड पार्क लिमिटेड का उद्घाटन किया।

ज़ोरम मेगा फ़ूड पार्क के बारे में

  • 55 एकड़ में फैला जोरम मेगा फूड पार्क मिजोरम के कोलासिब जिले में स्थित है। यह मिज़ोरम में परिचालित किया जाने वाला पहला मेगा फूड पार्क है।
  • 75 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित ज़ोरम फूड पार्क से लगभग 25,000 किसानों को लाभ होगा तथा 5,000 से भी ज्यादा रोजगार के अवसर सृजित होंगे।
  • इस परियोजना में फूड पार्क में स्थापित किये जाने वाले करीब 30 प्रसंस्करण इकाइयों से करीब 250 करोड़ रुपये का आगे और निवेश आकर्षित होने की उम्मीद है।
  • गौरतलब है कि मेघालय के अतिरिक्त सभी उत्तर-पूर्वी राज्यों में मेगा फूड पार्क है।

क्या है मेगा फ़ूड पार्क योजना?

  • देश में मेगा फूड पार्क खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय की ओर से प्रधान मंत्री किसान संपदा योजना के तहत तैयार किए जा रहे हैं।
  • मेगा फूड पार्क परियोजना का कार्यान्वयन एक विशेष प्रयोजन उपाय (एसपीवी) द्वारा किया जाता है जो कंपनी अधिनियम के अंतर्गत एक पंजीकृत कॉरपोरेट निकाय होता है।
  • किसी भी फूड पार्क की स्थापना के लिये एक ही स्थान पर कम से कम 50 एकड़ भूमि उपलब्ध होनी चाहिए।
  • मेगा फूड पार्क स्थापित करने के लिए सरकार 50 करोड़ रूपए तक की अनुदान राशि उपलब्ध कराती है। हिमालयी एवं उत्तर-पूर्वी राज्यों में भूमि लागत के अतिरिक्त कुल लागत राशि का 75 प्रतिशत केंद्र सरकार द्वारा वहन किया जाता है।
  • इस योजना के अंतर्गत 37 मेगा फूड पार्कों को वित्तपोषित किया जा रहा है। जिनमे से 18 मेगा फूड पार्क पहले ही कार्यशील हो चुके है।

मेगा फूड पार्क योजना का उद्देश्य

  • मेगा फूड पार्क स्कीम का लक्ष्य किसानों, प्रसंस्करणकर्ताओं और खुदरा विक्रेताओं को साथ लाकर कृषि उत्पादन को बाजार से जोड़ने के लिए एक तंत्र उपलब्ध करवाना है।
  • इसके द्वारा मूल्य संवर्द्धन में वृद्धि, बर्बादी को कम तथा किसानों की आय में वृद्धि करना मूल लक्ष्य है के रूप में शामिल हैं, जिससे ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार के अवसर सृजित किए जा सकें।
  • मेगा फूड पार्क के जरिए किसानों के जल्द खराब हो जाने वाले खाद्य पदार्थों की बर्बादी को कम करने के साथ उनकी उपज का उचित मूल्य दिया जाना है ताकि किसानों की आय में वृद्धि हो।

मनोदर्पण

चर्चा में क्यों :-

  • केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री द्वारा छात्रों को उनके मानसिक स्वास्थ्य कल्याण के लिए एवं मनोवैज्ञानिक सहायता प्रदान करने के लिए आत्मनिर्भर भारत अभियान के अंतर्गत आने वाले एक पहल मनोदर्पण की शुरुआत किया गया है।
  • मनोदर्पण पहल के एक रूप में श्री रमेश पोखरियाल निशंक ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय के पोर्टल पर मनोदर्पण का एक विशेष वेब पेज, मनोदर्पण पर एक हैंडबुक और एक राष्ट्रीय टोल-फ्री हेल्पलाइन (8448440632) लॉन्च किया।

पृष्ठभूमि

  • “कोविड-19 का प्रकोप वैश्विक है और सभी के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण है। इसकी वजह से विश्व न केवल एक स्वास्थ्य आपातकाल से जूझ रहा है बल्कि इसने सम्पूर्ण मानव समाज में अनिश्चितता की भावना और एक तरह का मनोसामाजिक तनाव भी पैदा कर दिया है। इसका सबसे गहरा असर बच्चों और किशोरों में हुआ है और वे तनाव, चिंता, भय के साथ- साथ भावनात्मक और व्यावहारिक बदलाव से भी गुजर रहे हैं।
  • इसके अलावा इस महामारी के कारण अध्यापकों और अभिभावकों में भी तनाव की स्थिति पैदा हो गई है जिसकी वजह से वे बच्चों की मदद नहीं कर पा रहे हैं। इन सब पहलुओं पर ध्यान देने के बाद मंत्रालय ने सोचा कि जहां एक तरफ शिक्षा पर ध्यान देना जरूरी है वहीं दूसरी तरह छात्रों एवं मानसिक स्वास्थ पर भी समान महत्त्व देना आवश्यक है।

मनोदर्पण पहल के बारे में

  • मनोदर्पण के माध्यम से मंत्रालय एक समग्र और व्यापक मार्गदर्शन प्रणाली के तहत इन सभी के मानसिक स्वास्थ को सुनिश्चित करने के लिए परामर्श और कल्याण सेवाएं प्रदान करेगा।
  • मनोदर्पण के द्वारा जुटाए गए संसाधनों की मदद से विद्यार्थियों, उनके परिवारों और अध्यापकों के मानसिक स्वास्थ्य को सुनिश्चित करने के लिए एक स्थायी सहायता प्रणाली की सुविधा की गई है जो कि इन्हें कोरोना काल के बाद भी मदद उपलब्ध करवाती रहेगी।
  • इसके अलावा इसकी पहुंच को और व्यापक बनाने के लिए राष्ट्रीय टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 8448440632 भी शुरू कर दी जाएगी जो कि कोविड-19 संकट काल के बाद भी चालू रहेगी। राष्ट्रीय हेल्पलाइन पर जिन राष्ट्रीय स्तर के काउंसलरों की मदद ली जा सकती है उनका डाटाबेस और डायरेक्टरी स्कूलों और विश्वविद्यालयों को उपलब्ध करवा दिया गया है।

मनोदर्पण पहल के निम्नलिखित घटक हैं :-

  • सलाहकारी दिशानिर्देश- परिवारों के साथ छात्रों, शिक्षकों और स्कूल प्रणालियों और विश्वविद्यालयों के शिक्षकों के लिए सलाहकारी दिशानिर्देश।
  • एमएचआरडी वेबसाइट पर वेब पेज: मनोवैज्ञानिक समर्थन, FAQ, ऑनलाइन क्वेरी सिस्टम, सलाहकार एवं व्यावहारिक सुझाव, पोस्टर, वीडियो इत्यादि हेतु।
  • राष्ट्रीय स्तर के डेटाबेस और काउंसलरों की निर्देशिका: स्कूल और विश्वविद्यालय स्तर पर सेवाएं हेतु जिसके द्वारा स्वैच्छिक रूप से राष्ट्रीय स्तर पर टेली काउंसलिंग सेवा प्रदान किया जा सके।
  • राष्ट्रीय टोल-फ्री हेल्पलाइन: एमएचआरडी द्वारा स्कूल, विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के छात्रों तक पहुँच के लिए। इस अनूठी हेल्पलाइन को अनुभवी परामर्शदाताओं / मनोवैज्ञानिकों और अन्य मानसिक स्वास्थ्य पेशेवरों के एक पूल द्वारा संचालित किया जाएगा जो COVID-19 की स्थिति के बाद भी जारी रहेगी।
  • मनोवैज्ञानिक समर्थन हेतु हैंडबुक: जीवन के कौशल के संवर्धन और छात्रों के कल्याण हेतु ऑनलाइन प्रकाशित किया जायेगा। हैंडबुक में COVID-19 महामारी और उसके बाद के भावनात्मक और व्यवहार संबंधी चिंताओं (छोटे बच्चों से लेकर कॉलेज के युवाओं तक) को प्रबंधित करने के तरीके और साधन शामिल होंगे।
  • इंटरैक्टिव ऑनलाइन चैट प्लेटफार्म: छात्रों, उनके परिवारों और अध्यापकों के लिए मानसिक स्वास्थ विशेषज्ञों के परामर्श और मार्गदर्शन के लिए एक इंटरैक्टिव ऑनलाइन चैट प्लेटफार्म भी शुरू किया गया है और समय-समय पर वेबिनार इत्यादि के माध्यम से भी सभी से जुड़ने के प्रयास किया जायेगा।

सरकारी विज्ञापनों में सामग्री के नियमन से संबंधित समिति (सीसीआरजीए)

चर्चा में क्यों ?

  • उच्चतम न्यायालय द्वारा नियुक्त सरकारी विज्ञापनों में सामग्री के नियमन से संबंधित समिति (सीसीआरजीए) ने दिल्ली सरकार के एक विज्ञापन पर दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीटी) सरकार को एक नोटिस जारी किया है

पृष्ठभूमि :-

  • समिति ने दिल्ली सरकार के विज्ञापन पर सोशल मीडिया में उठाए गए कुछ बिंदुओं पर स्वतः संज्ञान लिया है, जिसमे यह संकेत किया गया था कि यह विज्ञापन राजनैतिक सन्देश हेतु प्रयुक्त हुआ है । यह विज्ञापन शिक्षा विभाग एवं सूचना एवं प्रचार निदेशालय, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार द्वारा प्रकाशित किया गया था।
  • उच्चतम न्यायालय के 13 मई, 2015 के दिशानिर्देशों के अंतर्गत- “सरकारी विज्ञापनों की सामग्री सरकार के संवैधानिक और कानूनी दायित्वों के साथ ही नागरिकों के अधिकारों और पात्रताओं के अनुरूप होनी चाहिए।”
  • इन दिशानिर्देशों के आधार पर समिति विज्ञापन पर दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीटी) सरकार को एक नोटिस जारी किया है।
  • इन दिशानिर्देशों को देखते हुए, दिल्ली सरकार को नोटिस मिलने के बाद इस मुद्दे पर समिति के पास 60 दिन के भीतर अपना जवाब दाखिल करना होगा जो निम्न है:
  • उल्लिखित विज्ञापन के प्रकाशन से सरकारी कोष से कितना व्यय हुआ ।
  • प्रकाशित किए गए विज्ञापन और विशेष रूप से दिल्ली के अलावा अन्य संस्करणों में प्रकाशन का उद्देश्य।
  • उच्चतम न्यायलय के दिशानिर्देशों का कितना पालन हुआ है

सरकारी विज्ञापनों में सामग्री के नियमन से संबंधित समिति (सीसीआरजीए) के बारे में :-

  • उच्चतम न्यायालय के 13 मई, 2015 के दिशानिर्देशों के तहत भारत सरकार द्वारा 6 अप्रैल, 2016 को तीन सदस्यीय पैनल का गठन किया था। इस समिति में सभी मीडिया प्लेटफॉर्म्स में सरकार द्वारा वित्तपोषित विज्ञापनों की सामग्री के नियमन के लिए ऐसे लोग शामिल किए गए थे जो “स्पष्ट रूप से तटस्थ और निष्पक्ष हों और अपने संबंधित क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया हो।”
  • समिति को उच्चतम न्यायालय के दिशा-निर्देशों के उल्लंघन पर आम जनता से मिली शिकायतों के निस्तारण और उपयुक्त सिफारिशें करने का अधिकार है।
  • समिति उच्चतम न्यायालय के दिशा-निर्देशों के किसी प्रकार के उल्लंघन/ विचलन का स्वतः संज्ञान ले सकती है और सुधारात्मक कदमों का भी सुझाव दे सकती है।
  • वर्तमान में भारत के पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त श्री ओम प्रकाश रावत सीसीआरजीए की अध्यक्षता कर रहे हैं तथा इसके अन्य सदस्य एशियन फेडरेशन ऑफ एडवर्टाइजमेंट एसोसिएशंस से जुड़े और आईएए के पूर्व अध्यक्ष श्री रमेश नारायण तथा प्रसार भारती बोर्ड के सदस्य डॉ. अशोक कुमार टंडन हैं।

गोधन न्याय योजना

चर्चा में क्यों?

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री बघेल ने हरेली फेस्टिवल पर 'गोधन न्याय योजना' का शुभारंभ किया है। योजना के तहत सरकार पशुपालकों से गोबर खरीदेगी। सरकार ने गोबर का परिवहन व्यय सहित दो रुपये प्रति किलो दाम तय किया है।

पृष्ठभूमि

  • भारत के सभी राज्यों समेत छत्तीसगढ़ में खुले में पशुओं के चरने की परंपरा रही है, जो मवेशियों और फसलों दोनों को ही नुकसान पहुंचाता है।
  • शहरों की सड़कों पर आवारा जानवरों के कारण सड़क दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ जाती हैं।
  • प्रायः जानवरों से दूध निकालने के बाद उन्हें खुले में छोड़ दिया जाता है, जो अन्य विभिन्न समस्याओं का कारण बनता है।

गोधन न्याय योजना के बारे में

  • गोधन न्याय योजना के तहत पशु पालकों को लाभ पहुंचाने के राज्य सरकार किसानों से गाय का गोबर खरीदेगी। गौ-पालन को आर्थिक रूप से लाभदायी बनाने तथा खुले में चराई की रोकथाम के किसानों से गाय का गोबर खरीद उससे वर्मी कंपोस्ट खाद बनाएगी। इसके उपरान्त प्राप्त वर्मी कंपोस्ट खाद को बाद में किसानों, वन विभाग और उद्यानिकी विभाग को दिया जाएगा।
  • गोधन न्याय योजना की शुरुआत 21 जुलाई को हरेली त्योहार के दिन होगी। आपको बता दे छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य होगा जो गोबर की खरीद करेगा।
  • इस योजना के तहत गोबर की खरीदी निर्धारित दर पर होगी वहीं सहकारी समितियों से वर्मी कम्पोस्ट की‍ बिक्री होगी। गोबर की खरीद की दर तय करने पांच सदस्यीय मंत्री मण्डल की उप समिति गठित की गई है।

गोधन न्याय योजना के लाभ

  • गोधन न्याय योजना से गांवों में रोजगार और अतिरिक्त आय के अवसर बढ़ेंगे।
  • इस योजना से जैविक कृषि को बढ़ावा मिलेगा।
  • पशुओं के अतिचारण से मृदा का संरक्षण किया जाना संभव होगा
  • इससे ना केवल सड़क दुर्घटनाओं पर नियन्त्र लगाया जा सकेगा बल्कि इससे जुड़े अन्य विभिन्न समस्याओं को भी कम किया जा सकेगा ।

हरेली पर्व के बारे में

  • बता दें कि हरेली पर्व को कृषि गतिविधियों की शुरुआत के तौर पर मनाया जाता है। छत्तीसगढ़ में त्यौहारों की शुरुआत हरेली फेस्टिवल से ही होती है। इस दिन यहा पर उनके कुलदेवता की पूजा का चलन है। उत्सव के दिन किसान खेती में उपयोग होने वाले सभी औजारों की पहले अच्छे से साफ-सफाई कर उसे घर के आंगन में रखकर पूजा-अर्चना करते हैं। गाय-बैलों की भी पूजा की जाती है और इस पर्व पर गाय-बैलों को बीमारी से बचाने के लिए नमक भी खिलाया जाता है। बता दें कि देश इस वक्त कोरोना संकट से जूझ रहा है। ऐसे वक्त में इस योजना को लॉन्च किया है।

युवा (यूनिसेफ द्वारा गठित एक बहु-हितधारक मंच)

चर्चा में क्यों?

  • प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत के आह्वान में योगदान देने के लिए केंद्रीय युवा मामलों और खेल मंत्री, श्री किरण रिजिजू ने 1 करोड़ युवा स्वयंसेवकों को लामबंद करने, भारत के युवाओं में स्वैच्छिकता को बढ़ावा देने के साथ-साथ उन्हें शिक्षा और उत्पादन के लिए ज्ञान प्राप्ति में सहायता प्रदान करने के लिए, साझेदारी के साथ कार्य करने के लिए, कौशल के साथ सक्रिय नागरिक बनने के लिए, युवा (यूनिसेफ द्वारा गठित एक बहु-हितधारक मंच) के लिए एक वक्तव्य पर हस्ताक्षर किया गया है।

युवा (यूनिसेफ द्वारा गठित एक बहु-हितधारक मंच) के बारे में

  • युवा साझेदारी भारत के युवाओं मे शिक्षा, कौशल और बेरोजगारी की चुनौतियों से निपटने के लिए बड़े पैमाने पर समाधानों का सह-निर्माण करने और इसे लागू करने के लिए, युवाओं के साथ मिलकर काम करने के लिए मंत्रालय और संयुक्त राष्ट्र दोनों के प्रयासों का लाभ उठाएगी। इसमें, उद्यमिता में लगे हुए युवा लोगों को समर्थन प्रदान करना, युवा लोगों को के बीच कौशल का विकास करना, आकांक्षी सामाजिक-आर्थिक अवसरों के साथ संबंध स्थापित करना, युवा लोगों के बीच बदलाव लाना और नागरिक भागीदारी को बढ़ावा देना, युवाओं को मार्गदर्शन के लिए सहायता प्रदान करना, प्रत्यक्ष संवाद का समर्थन प्रदान करना और युवाओं और नीति बनाने वाले हितधारकों के बीच फीडबैक तंत्र की स्थापना करना, सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए एनएसएस और एनवाईकेएस और कैडर फोर्स के बीच क्षमता का निर्माण करने पर सहयोग प्राप्ति करना शामिल होगा।

:: अंतर्राष्ट्रीय समाचार ::

2020 विश्व जनसंख्या डेटा पत्रक: अमेरिकी जनसंख्या रिफरेंस ब्यूरो

चर्चा में क्यों?

  • अमेरिका के निजी गैर लाभकारी संगठन अमेरिकी जनसंख्या रिफरेंस ब्यूरो द्वारा हाल ही में 2020 विश्व जनसंख्या डेटा पत्रक जारी किया गया है।
  • इस रिपोर्ट में दक्षिण एशियाई देशों से जुड़े वार्षिक प्रजनन दर के बारे में बताया गया है। अध्ययन के अनुसार दक्षिण एशिया दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ते क्षेत्रों में से एक है। इस क्षेत्र के भीतर अफगानिस्तान और पाकिस्तान को सबसे तेजी से बढ़ती आबादी के रूप में चिह्नित किया गया है।

2020 विश्व जनसंख्या डेटा पत्रक से जुड़े तथ्य

  • रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि अफगानिस्तान में पाकिस्तान की तुलना में तेज प्रजनन दर है, जो प्रति दंपति 4.5 है, लेकिन उच्च मृत्यु दर और कम जीवन प्रत्याशा के कारण देश की कुल आबादी अभी भी 3 करोड़ 89 लाख है।
  • मौजूदा समय में पाकिस्तान की कुल आबादी लगभग 22 करोड़ 9 लाख है और दक्षिण एशियाई क्षेत्र में 3.6 बच्चों की वार्षिक प्रजनन दर के साथ पाकिस्‍तान शीर्ष दो सबसे तेजी से बढ़ती जनसंख्‍या वाली देशों में शामिल है।
  • एक और दक्षिण एशियाई देश बांग्लादेश की कुल आबादी, 2020 में अनुमानित रूप से 2.3 की वार्षिक प्रजनन दर के साथ 16 करोड़ 98 लाख है। यह क्षेत्र में तीसरा सबसे तेजी से बढ़ता हुआ देश है।
  • बांग्लादेश के बाद चौथे स्थान पर मालदीव, पांचवें स्‍थान पर भारत है। इसके बाद प्रजनन दर के रूप में नेपाल और श्रीलंका और भूटान अंतिम स्थान साझा करते हैं।
  • एक अरब 40 करोड़ जनसंख्‍या के साथ भारत दुनिया की दूसरी सबसे आबादी वाला देश है, लेकिन इसकी प्रजनन दर 2.2 है। पाकिस्‍तान की प्रजनन दर 3.6 के साथ 19.4 वर्षों में दो गुनी हो जाती है।

:: राजव्यवस्था ::

सुप्रीम कोर्ट का कॉलेजियम

  • जस्टिस आर भानुमति सुप्रीम कोर्ट से रिटायर हो गई हैं। अब उनकी जगह जस्टिस यू यू ललित सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम के नए और पांचवें सदस्य होंगे। चीफ जस्टिस एस ए बोबड़े, जस्टिस एन वी रमना, जस्टिस अरूण मिश्रा और जस्टिस आर एफ नरीमन इस कॉलेजियम के सदस्य हैं। उच्चतम न्यायालय के पांच वरिष्ठतम न्यायाधीश कॉलेजियम के सदस्य होते हैं। कॉलेजियम सुप्रीम कोर्ट में जजों की नियुक्ति के लिए नामों का चयन और संस्तुति करता है। देश की अदालतों में जजों की नियुक्ति की प्रणाली को कॉलेजियम व्‍यवस्‍था कहा जाता है।

क्या है सुप्रीम कोर्ट का कॉलेजियम?

  • कॉलेजियम प्रणाली न्यायालय के निर्णयों द्वारा विकसित की गयी प्रणाली है और इसको लेकर संविधान में कोई प्रावधान नहीं है। प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय न्यायाधीश के मामलों में (First, Second and Third Judges case) सर्वोच्च न्यायालय द्वारा प्रासंगिक संवैधानिक प्रावधानों की व्याख्या के माध्यम से कॉलेजियम प्रणाली अस्तित्व में आई।
  1. 1990 में सुप्रीम कोर्ट के दो फैसलों के बाद यह व्‍यवस्‍था बनाई गई थी। कॉलेजियम व्‍यवस्‍था के अंतर्गत सुप्रीम कोर्ट के मुख्‍य न्‍यायाधीश के नेतृत्‍व में बनी सीनियर जजों की समिति जजों के नाम तथा नियुक्ति का फैसला करती है।
  2. सुप्रीम कोर्ट तथा हाईकोर्ट में जजों की नियुक्ति तथा तबादलों का फैसला भी कॉलेजियम ही करता है।
  3. उच्चतम न्यायालय के पांच वरिष्ठतम न्यायाधीश कॉलेजियम के सदस्य होते हैं।
  4. हाईकोर्ट के कौन से जज पदोन्‍नत होकर सुप्रीम कोर्ट जाएंगे यह फैसला भी कॉलेजियम ही करता है।
  5. कॉलेजियम व्‍यवस्‍था का उल्‍लेखन न तो मूल संविधान में है और न ही उसके किसी संशोधन में।

:: अर्थव्यवस्था ::

कृषि और ग्रामीण श्रमिकों के लिए अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक - जून 2020

  • जून, 2020 में कृषि श्रमिकों और ग्रामीण श्रमिकों के लिए अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (आधार वर्ष: 1986-87 = 100) क्रमश: 1-1 अंक घटकर क्रमश: 1018 (एक हजार अठारह) और 1024 (एक हजार चौबीस) के स्‍तर पर पहुंच गया। कृषि श्रमिकों और ग्रामीण श्रमिकों के सामान्य सूचकांक में हुई कमी में मुख्‍य योगदान खाद्य पदार्थों का रहा, जो क्रमशः (-) 1.82 अंकों और (-) 1.58 अंकों का रहा। मुख्यत: यह कमी चावल, अरहर दाल, मसूर दाल, मूंगफली के तेल, बकरे के मांस, पोल्ट्री, सब्जियों और फलों, इत्‍यादि की कीमतें घटने की वजह से हुई।
  • सूचकांक में वृद्धि/गिरावट हर राज्‍य में भिन्‍न रही। कृषि श्रमिकों के मामले में सूचकांक ने 9 राज्यों में 1 से 7 अंकों तक की वृद्धि दशाई, जबकि इसने 9 राज्यों में 1 से 9 अंकों तक की कमी दर्ज की। वहीं, यह सूचकांक दो राज्यों- राजस्थान तथा मणिपुर स्थिर रहा। तमिलनाडु राज्य 1214 अंकों के साथ सूचकांक तालिका में सबसे ऊपर रहा, जबकि हिमाचल प्रदेश 784 अंकों के साथ इस तालिका में सबसे नीचे रहा।
  • ग्रामीण श्रमिकों के मामले में सूचकांक ने 9 राज्यों में 1 से 8 अंकों तक की वृद्धि दर्शाई, जबकि इसने 10 राज्यों में 2 से 20 अंकों तक की कमी दर्ज की। तमिलनाडु राज्य 1199 अंकों के साथ सूचकांक तालिका में सबसे ऊपर रहा, जबकि हिमाचल प्रदेश 82 अंकों के साथ इस तालिका में सबसे नीचे रहा।
  • जहां तक राज्यों का सवाल है, कृषि श्रमिकों और ग्रामीण श्रमिकों के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में सर्वाधिक वृद्धि ओडिशा राज्य (क्रमशः 7 अंक और 8 अंक) में दर्ज की गई। इतनी वृद्धि मुख्यत: बकरे के मांस, मछली ताजी/सूखी, सब्जी, फल, साड़ी कॉटन (मिल) आदि की कीमतें बढ़ने के कारण दर्ज की गई। इसके विपरीत, कृषि श्रमिकों और ग्रामीण श्रमिकों के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में सर्वाधिक कमी जम्मू-कश्मीर राज्य (-19 अंक तथा -20 अंक प्रत्येक) में दर्ज की गई। इस हद तक कमी का मुख्य कारण फलों और सब्जियों, इत्‍यादि की कीमतें घटना रहा।
  • उपभोक्ता मूल्य सूचकांक-कृषि श्रमिक (सीपीआई-एएल) और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक- ग्रामीण श्रमिक (सीपीआई-आरएल) पर आधारित बिंदु दर बिंदु मुद्रास्फीति दर मई 2020 के क्रमशः 8.40% और 8.12%से घटकर जून 2020 में क्रमश: 7.16% और 7.00% रह गई। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक-कृषि श्रमिक और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक-ग्रामीण श्रमिक के खाद्य सूचकांक पर आधारित मुद्रास्फीति दर जून 2020 में क्रमशः (+) 8.57% और (+) 8.41% आंकी गई।

:: विज्ञान और प्रौद्योगिकी ::

राफेल लड़ाकू विमान

चर्चा में क्यों?

  • भारतीय वायु सेना (आईएएफ) के पांच राफेल विमानों का पहला बेड़ा जुलाई के अंत तक भारत आने की संभावना है। इन्‍हें अंबाला के एयरफोर्स स्टेशन पर 29 जुलाई को वायुसेना में शामिल किया जाएगा।

राफेल विमान के संबंध में जानकारी

  • राफेल विमान फ्रांस की विमानन कंपनी दसौल्ट एविएशन द्वारा बनाया गया एक 2 इंजन वाला लड़ाकू विमान है।
  • भारत ने सितंबर 2016 में फ्रांस की सरकार के साथ लगभग 58,000 करोड़ रुपये की लागत से 36 राफेल लड़ाकू जेट की खरीद के लिए एक अंतर-सरकारी समझौते पर हस्ताक्षर किया था। विमान कई शक्तिशाली हथियारों को ले जाने में सक्षम है।
  • गौरतलब है कि राफेल को 2004 में फ्रेंच नौसेना और 2006 में फ्रेंच वायुसेना में शामिल किया गया।

राफेल विमान की विशेषताएँ

  • राफेल मल्टीरोल फाइटर एयरक्राफ्ट है। यह आकार में भारतीय वायु सेना के सुखोई विमान से छोटा है जिससे इसे इस्तेमाल करना अपेक्षाकृत आसान है।
  • राफेल की ईंधन क्षमता 17 हजार किलोग्राम है और यह एक मिनट में 60 हजार फुट की ऊंचाई तक जा सकता है।
  • राफेल ज़मीन और समुद्री हमलों, टोही, उच्च सटीक हमलों और परमाणु हमले की रोकथाम सहित लघु एवं लंबी दूरी के मिशनों की एक विस्तृत श्रृंखला को पूरा करने में सक्षम है।
  • यह स्काल्प मिसाइल से लैस है, जो हवा से जमीन पर 600 किमी तक निशाना साध सकती है।
  • राफेल की मारक क्षमता 3700 किलोमीटर तक है, जबकि स्काल्प की रेंज 300 किलोमीटर है।
  • यह लड़ाकू विमान 24,500 किलो तक का वजन ले जाने में सक्षम है। यह 60 घंटे की अतिरिक्त उड़ान भर सकता है।
  • यह हवा की गति से उड़ सकता है। 2,223 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से उड़ान भर सकता है।

नया ज्वालामुखी अलर्ट सिस्टम

  • न्यूजीलैंड (New Zealand) के वैज्ञानिकों ने नए ज्वालामुखी अलर्ट सिस्टम का आविष्कार किया है। नए सिस्टम में एल्गोरिद्म पढ़ने वाली मशीन संलग्न है जो रियल टाइम डाटा का विश्लेषण करती है और भविष्य में विस्फोटों के बारे में जानकारी देती है। इस प्रोजेक्ट के यूनिवर्सिटी ऑफ ऑकलैंड के एक वैज्ञानिक शेन क्रोनिन (Shane Cronin) ने बताया कि मौजूदा सिस्टम की प्रक्रिया काफी धीमी है। 'नया सिस्टम रियल टाइम में डेटा संग्रह करता है लेकिन पैनल द्वारा इसमें मुहैया जानकारी की जांच की जाएगी और फिर इसे एक्सपर्ट की प्रक्रिया से गुजरना होगा जिसमें थोड़ा वक्त लगेगा।

UAE का मंगल ग्रह मिशन

  • सऊदी अरब अमीरात (यूएई) ने जापान के सहयोग से मंगल ग्रह पर अपना अपना पहला इंटरप्लेनेटरी होप प्रोब मिशन शुरू किया। यूएई का मंगल ग्रह के लिए पहला अंतरिक्ष मिशन जापान के तानेगाशिमा स्पेस सेंटर से लॉन्च हुआ। यूएई का यह मिशन मंगल ग्रह 'होप' नाम से डब किया गया है।
  • संयुक्‍त राष्‍ट्र अमीरात पहला अरब मुल्‍क होगा, जिसने मंगल ग्रह पर अपनी दस्‍तक दी है। इस मिशन की लाइव फीड भी दिखाया गया।हालांकि, इसे 15 जुलाई को लॉन्च किया जाना था, लेकिन मौसम खराब होने के कारण इसे कुछ समय के लिए टाल दिया गया।

'HOPE मिशन के बारे में

  • 'HOPE' के मंगल की कक्षा में फरवरी, 2021 में पहुंचने की उम्मीद है। इसके बाद यह एक मंगल वर्ष यानी 687 दिनों तक उसकी कक्षा में चक्कर लगाएगा। हालांकि, इस मार्स मिशन का मकसद इस लाल ग्रह के पर्यावरण और मौसम के बारे में सटीक जानकारी इकट्ठा करना है, लेकिन इसके पीछे एक बड़ा लक्ष्य यह भी माना जा रहा है- और वह है अगले 100 साल में मंगल पर इनसानी बस्ती बनाने का। यूएई इस प्रोजेक्ट को अरब के युवाओं के लिए प्रेरणा के स्रोत के रूप में भी पेश करना चाहता है।
  1. अंतरिक्ष यान को अब से लगभग 200 दिनों में मंगल की कक्षा में पहुंचने की उम्मीद है और फिर लाल ग्रह के वायुमंडल का अध्ययन करने के लिए अपना मिशन शुरू करेगा।
  2. यह 4.93 करोड़ किलोमीटर की यात्रा अंतरिक्ष में करेगा। इसमें सात महीने का वक्‍त लगेगा। मार्टियन वातावरण की पहली सही मायने में वैश्विक तस्वीर प्रदान करेगा।
  3. होप मगंल ग्रह के मौसमी चक्रों और जलवायु का अध्‍ययन करेगा। यह मंगल पर मौसम की घटनाओं और धूल के तूफान का अवलोकन करेगा।
  4. यह मंगल ग्रह के वायुमंडल की ऊपरी और निचली परतों और लाल ग्रह की सतह के क्षरण के कारणों के साथ-साथ मंगल ग्रह का ऊपरी वायुमंडल खो जाने के अध्ययन का भी अध्ययन करेगा।
  5. लाल ग्रह की प्राचीन जलवायु के बीच संबंध तलाशने से पृथ्वी के अतीत और भविष्य के साथ-साथ मंगल और अन्य दूर के ग्रहों पर जीवन की संभावनाएं और गहरी होंगी।

:: पर्यावरण और पारिस्थितिकी ::

भारत का पहला सार्वजनिक ईवी(इलेक्ट्रिक वाहन) चार्जिंग प्लाजा

  • ऊर्जा दक्षता बढ़ाने और ई-मोबिलिटी को बढ़ावा देने के इरादे सेकेन्द्रीय विद्युत, नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री श्री आर.के. सिंह ने नई दिल्ली में भारत के पहले सार्वजनिक ईवी(इलेक्ट्रिक वाहन) चार्जिंग प्लाजा का उद्घाटन किया।
  • ऊर्जा दक्षता सेवा लिमिटेड ईईएसएल भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग का पता लगाने और ऐसे वाहनों के लिए सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन (पीसीएस) संचालित करने के नए व्यापार मॉडल की पहचान करने के काम की अगुवाई कर रही है। एनडीएमसी के सहयोग से ईईएसएल ने मध्य दिल्ली में भारत का पहला सार्वजनिक इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग प्लाजा स्थापित किया है। इसमें पांच विभिन्न विशिष्टताओं वाले इलेक्ट्रिक वाहन चार्जर लगाए गए हैं।
  • यह पहल विश्व पर्यावरण दिवस पर आयोजित “मैं संकल्प लेता हूं” अभियान के तहत ईईएसएल और अन्य प्रमुख हितधारकों द्वारा पर्यावरण संरक्षण और एक लचीले ऊर्जा क्षेत्र के निर्माण की प्रतिज्ञा की पुष्टि करती हैं।

इंडोर एयर क्वालिटी फॉर सेफ्टी एंड एफिशिएंसी

  • केन्द्रीय मंत्री ने ईईएसएल और यूएसएआईडी की संयुक्त पहल - इंडोर एयर क्वालिटी फॉर सेफ्टी एंड एफिशिएंसी में सुधार के लिए एयर कंडीशनिंग व्यवस्था को और सक्षम बनाने की प्रणाली लांच की है। इससे पूरे देश में कार्यक्षेत्रों में खराब वायु गुणवत्ता को सुधार कर उसे स्वास्थ्य के लिहाज से हरित और बेहतर बनाया जा सकता है।
  • काफी समय से भारत में हवा की खराब गुणवत्ता चिंता का विषय बनी हुई है और विशेष रूप से कोरोना संक्रमण के समय में इसका महत्व और भी ज्यादा बढ़ गया है। कार्यालयों और सार्वजनिक स्थलों पर काम करने वाले लोगों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए कार्यस्थलों के भीतर वायु गुणवत्ता बनाए रखना जरुरी है।
  • इस संदर्भ में, ईईएसएल ने पायलट परियोजना के तौर पर नई दिल्ली के स्कोप भवन में स्थित अपने कार्यालय में एयर कंडीशनिंग और वेंटिलेशन सिस्टम का रेट्रोफिट किया है। यह यू.एस. एजेंसी फॉर इंटरनेशनल डेवलपमेंट्स(यूएसएआईडी)के साथ साझेदारी में इमारतों के लिए विकसित की गई ऊर्जा दक्षता और वायु गुणवत्ता में सुधार की पहल है।
  • ईईएसएल के अनुसार इस पायलट परियोजना के बहुत प्रभावशाली परिणाम दिखे हैं। वायु गुणवत्ता में लगभग 80 प्रतिशत का सुधार दिखा है। कोविड के मौजूदा दौर में कर्मचारियों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ईईएसएल इस प्रणाली को तय मानकों के साथ देशभर में लागू करने का इच्छुक है।
  • यह पहल विश्व पर्यावरण दिवस पर आयोजित “मैं संकल्प लेता हूं” अभियान के तहत ईईएसएल और अन्य प्रमुख हितधारकों द्वारा पर्यावरण संरक्षण और एक लचीले ऊर्जा क्षेत्र के निर्माण की प्रतिज्ञा की पुष्टि करती हैं।

भारत में भूगर्भ जल की स्थिति एक समग्र अवलोकन

  • भारत दुनिया में भूगर्भ जल का सबसे ज्यादा इस्तेमाल करने वाला देश है। धरती की कोख से पानी खींचने में दूसरे और तीसरे नंबर पर चीन और अमेरिका हैं, लेकिन अगर इन दोनों देशों द्वारा निकाले जाने वाले पानी की कुल मात्रा को जोड़ दिया जाए, भारत उससे भी अधिक भूगर्भ जल का इस्तेमाल करता है।
  • देश की कुल स्वच्छ जल जरूरत की पूर्ति भूगर्भ जल से होती है। निकाले जाने वाले कुल भूगर्भ जल में से 89 फीसद का इस्तेमाल सिंचाई के लिए होता है। घरेलू पानी की जरूरतें में भूगर्भ जल की हिस्सेदारी नौ फीसद और उद्योगों में दो फीसद है। शहरों की 50 फीसद जल जरूरत और गांवों की 85 फीसद की पूर्ति भूगर्भ जल से की जाती है।
  • केंद्रीय भूजल बोर्ड (सीजीडब्ल्यूबी) की एक रिपोर्ट के अनुसार 2007 से 2017 के बीच के सिर्फ दस साल में देश में भूजल स्तर 61 फीसद गिर चुका है। आइआइटी खड़गपुर और कनाडा के अथाबास्का विश्वविद्यालय के संयुक्त अध्ययन के अनुसार भारतीय हर साल 230 घनकिमी भूजल का इस्तेमाल करते हैं जो दुनिया में भूजल उपयोग का एक चौथाई है।

असमान वितरण और उपलब्धता

  • एक अनुमान के मुताबिक देश के 81 फीसद परिवारों को 40 लीटर पानी मुहैया होता है जबकि ग्रामीण इलाकों के सिर्फ 18-20 फीसद घरों में पाइप से जलापूर्ति की जाती है। यह जल उपलब्धता और आपूर्ति में असंतुलन पैदा करती है। नीति आयोग के कंपोजिट वाटर मैनेजमेंट इंडेक्स के अनुसार देश के 75 फीसद घरों के परिसर में पेयजल उपलब्ध नहीं है। जिन शहरों में पाइप से जलापूर्ति हो रही हैं, वहां मात्रा का बड़ा असंतुलन है। दिल्ली और मुंबई जैसे महानगरों में प्रतिदिन प्रतिव्यक्ति 150 लीटर जलापूर्ति के नियम से ज्यादा पानी की आपूर्ति की जा रही है जबकि देश के ज्यादातर शहरों में यह 40-50 लीटर के बीच है।
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार किसी व्यक्ति के लिए एक दिन उसकी साफ-सफाई और पेय संबंधी पानी की मात्रा 25 लीटर होनी चाहिए। इस वैश्विक संस्था के अनुसार इसके अतिरिक्त मुहैया कराया जा रहा पानी एक तरीके से बर्बादी के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

कानून-कायदा नहीं है बाकायदा

  • 1882 के ईजमेंट एक्ट के अनुसार भूमालिक ही वहां के पानी के इस्तेमाल का अधिकार रखता है। यही कानून अभी तक चला आ रहा है जिसके चलते भूगर्भ जल का अतिदोहन निष्कंटक रूप से बढ़ रहा है। इसके अलावा पानी राज्यों के अधिकार क्षेत्र में आता है। इसका मतलब है कि इससे जुड़े नियामक कानून राज्य सरकारें ही बना सकती हैं। 2011 में केंद्र सरकार ने राज्य सरकारों के लिए भूजल प्रबंधन से जुड़ा एक माडल बिल तैयार किया था, लेकिन अभी तक सभी राज्यों ने उससे मिलता-जुलता बिल नहीं पारित किया है। इस कानून में जोर दिया गया था कि यह प्राकृतिक संसाधन सार्वजनिक इस्तेमाल के लिए है। इसे निजी मालिकाने में नहीं बदला जा सकता है। जल निकायों और वेटलैंड्स का नुकसान भारतीय वन्यजीव संस्थान का एक सर्वे बताता है कि गंगा के बाढ़ क्षेत्र में 70-80 फीसद ताजे पानी वाले दलदल और झीलें खत्म हो गए हैं। जल संसाधन की स्थायी समिति ने दिसंबर, 2015 में संसद को बताया कि 1955 में देश के 92 फीसद जिलों का भूगर्भ जलस्तर बेहतर था, 2011 में ऐसे जिलों का फीसद 71 हो चला है। अब तो इसमें और कमी आ चुकी होगी। इसी रिपोर्ट के अनुसार 1955 में देश के सिर्फ तीन जिलों में भूगर्भ जल का अतिदोहन हो रहा था, 2011 में इनकी संख्या 15 जा पहुंची है। एक दशक बाद अब इनकी संख्या का सहज अंदाजा कोई भी लगा सकता है।
  • आंकड़ों के अनुसार भारत अभी भी पानीदार देश है। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार देश की सालाना जल जरूरत 3000 अरब घन मी है जबकि देश में हर साल 4000 अरब घन मीटर की बारिश होती है। दिक्कत यह है कि भारत अपनी सालाना बारिश का केवल आठ फीसद हिस्सा ही सहेज पाता है जो दुनिया में सबसे कम है। बढ़ती आबादी की जरूरतों और उदार टाउन प्लानिंग नियमों के चलते परंपरागत रूप से बारिश के पानी को सहेजने वाले जलस्नोत खत्म होते चले जा रहे हैं।

बदहाल रिसाइकिलिंग

  • जल शोधन और रिसाइकिलिंग के मामले में भारत की तस्वीर बहुत धुंधली है। करीब 80 फीसद घरों में पहुंचने वाला पानी इस्तेमाल के बाद ऐसे ही सीवर में बहा दिया जाता है। इससे न उसका दोबारा इस्तेमाल हो पाता है और वह प्रदूषित पानी बहकर बड़े जलस्नोतों नदियों आदि को दूषित करता है। इस मामले में हमें रेगिस्तान में बसे इजरायल से सीख लेनी चाहिए जो अपनी हर बूंद का बेहतर इस्तेमाल करता है। यह देश इस्तेमाल किए गए पानी का 100 फीसद शोधन करता है और 94 फीसद को रिसाइकिलिंग द्वारा फिर से घरेलू इस्तेमाल में लाया जाता है।

:: विविध ::

लुईस हैमिल्टन

  • फॉर्मूला वन चैंपियन लुईस हैमिल्टन ने रविवार को यहां आठवीं बार हंगरी ग्रां प्री जीता। इसके साथ ही उन्होंने माइकल शूमाकर का किसी एक ट्रैक पर सर्वाधिक जीत दर्ज करने के रेकॉर्ड की बराबरी की। हैमिल्टन की पोल पोजीशन से दर्ज की गयी जीत आसान रही क्योंकि दूसरे स्थान पर रहे मैक्स वर्साटाप्पेन उनसे 9 सेकंड पीछे रहे। ब्रिटिश ड्राइवर हैमिल्टन की फार्मूला वन में यह 86वीं जीत है और अब वह जर्मनी के महान ड्राइवर शूमाकर के 91 जीत के रेकॉर्ड से पांच जीत दूर रह गए हैं।

:: प्रिलिम्स बूस्टर ::

  • दिल्ली सरकार को नोटिस जारी करने से चर्चा में रहे किस समिति के द्वारा मीडिया में सरकार द्वारा वित्तपोषित विज्ञापनों की सामग्री का नियमन किया जाता है? (सरकारी विज्ञापनों में सामग्री के नियमन से संबंधित समिति- सीसीआरजीए)
  • किस राज्य में जोरम मेगा फूड पार्क (एमएफपी) का वर्चुअल रूप से उद्घाटन किया गया एवं सरकार के द्वारा प्रत्येक मेगा फूड और योजना हेतु कितनी वित्तीय सहायता दी जाती है? (मिजोरम, 50 करोड़ रुपए)
  • आत्मनिर्भर भारत को सफल बनाने के लिए एक करोड़ युवाओं में वालंटियर की भावना, शैक्षणिक, कौशल इत्यादि सिखाने हेतु किस संगठन के साथ समझौता किया गया है? (युवा-यूनिसेफ)
  • हाल ही में भारत के पहले सार्वजनिक इलेक्ट्रिक व्हीकल चार्जिंग प्लाजा (publicEV(Electric Vehicle) charging plaza)का उद्घाटन कहां किया गया? (चेम्सफोर्ड क्लब नई दिल्ली)
  • सरकार के द्वारा बारूदी सुरंग हटाने वाले उपकरणों की खरीद से चर्चा में रहे टी-90 क्या है एवं इसे मूलतः किस देश के द्वारा बनाया गया था? (टैंक, रूस के द्वारा- *तकनीकी हस्तांतरण द्वारा भारत में भी निर्माण)
  • हाल ही में किस खिलाड़ी ने हंगरी ग्रां प्री जीत कर माइकल शूमाकर का किसी एक ट्रैक पर सर्वाधिक जीत दर्ज करने के रेकॉर्ड की बराबरी कर ली है? (लुईस हैमिल्टन)
  • जस्टिस यू यू ललित के शामिल होने से चर्चा में रहे सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम में कितने न्यायाधीश शामिल होते हैं एवं किस वाद में कॉलेजियम व्यवस्था अस्तित्व में आई? (5, The Second Judges Case 1993)
  • कोविड-19 महामारी के दौरान छात्र-छात्राओं की बढ़ती मानसिक परेशानियों के समाधान हेतु मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा किस कार्यक्रम की शुरुआत की गई है? (मनोदर्पण)
  • अमेरिकी जनसंख्या रिफरेंस ब्यूरो द्वारा जारी 2020 विश्व जनसंख्या डेटा के अनुसार दक्षिण एशियाई देशों में सर्वाधिक प्रजनन दर किन देशों का है? (क्रमशः अफगानिस्तान 1st, पाकिस्तान 2nd और बांग्लादेश 3rd)
  • हाल ही में जारी हुए आंकड़ों के अनुसार दुनिया में भूगर्भ जल का सबसे ज्यादा दोहन करने वाले राष्ट्र कौन हैं? (क्रमशः भारत 1st, चीन 2nd और अमेरिका 3rd)
  • हाल ही में किस राज्य में हरेली महोत्सव पर गोधन न्याय योजना' का शुभारंभ किया है? (छत्तीसगढ़)

स्रोत साभार: Dainik Jagran (Rashtriya Sanskaran), Dainik Bhaskar (Rashtriya Sanskaran), Rashtriya Sahara (Rashtriya Sanskaran) Hindustan Dainik (Delhi), Nai Duniya, Hindustan Times, The Hindu, BBC Portal, The Economic Times (Hindi & English), PTI, PIB