(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (20 मई 2020)

दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर


(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (20 मई 2020)


:: राष्ट्रीय समाचार ::

समुद्री खाद्य उत्पादों में फॉर्मलडीहाइड अपमिश्रण के परीक्षण व्यवस्था

चर्चा में क्यों?

  • समुद्री उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (MPEDA) के चेयरमैन के एस श्रीनिवास कहा कि समुद्री खाद्य उत्पादों में रासायनिक योगिक फॉर्मलडीहाइड के मिलावट का पता लगाने को लेकर परीक्षणके नियम तैयार किये गये हैं।

पृष्ठभूमि

  • हाल के समय में विभिन्न घरेलू बाजारों में समुद्रीय खाद्य पदार्थों के संरक्षण के लिये फॉर्मलडीहाइड के उपयोग के मामले बार-बार सामने आये है। यह खाद्य सुरक्षा के लिये एक गंभीर चुनौती है और इससे विदेशी बाजारों में भारत के समुद्रीय खाद्य पदार्थों को लेकर नाराजगी पैदा हो सकती है। फॉर्मलडीहाइड रसायनिक तत्व का उपयोग समुद्री खाद्य पदार्थों के सुरक्षित रख रखाव के लिये किया जाता है जबकि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसे मानव स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाने वाले की श्रेणी में रखा है।

समुद्री उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (MPEDA)

  • MPEDA मछली उत्पादन तथा इससे सम्बंधित गतिविधियों के लिए सरकार नोडल एजेंसी है। MPEDA की स्थापना 1972 में समुद्री उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण अधिनियम, 1972 के तहत की गयी थी। यह केन्द्रीय व्यापार व उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करता है। MPEDA का मुख्यालय केरल के कोच्ची में स्थित है। MPEDA का उद्देश्य समुद्री उत्पादों जैसे विभिन्न प्रकार की मछलियों का निर्यात इत्यादि को बढ़ावा देना है। MPEDA निर्यात के लिए समुद्री उत्पादों का मानकीकरण, मार्केटिंग तथा विभिन्न कार्यों के लिए प्रशिक्षण उपलब्ध करवाता है। यह मछली उत्पादन तथा सम्बंधित गतिविधियों के लिए राज्य तथा केंद्र सरकार के बीच समन्वयन एजेंसी के रूप में कार्य करता है।

:: अंतर्राष्ट्रीय समाचार ::

क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक साझेदारी (RCEP)

  • क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक साझेदारी (आरसीईपी) पर वार्ता के लिए भारत के उचित समय पर फिर से शामिल होने का चीन स्वागत करेगा। चीन के सरकारी मीडिया के अनुसार यह बात चीनी वाणिज्य मंत्री वांग शोवेन ने सोमवार को एक प्रेस कांफ्रेंस में कही। इसके आलावा 15 प्रतिभागी देशों ने भी कहा कि वे वार्ता में भारत के पुन: शामिल होने का स्वागत करेंगे।

क्या है RCEP?

  • आरसीईपी, दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के संगठन (आसियान) के दस सदस्य देशों, ब्रुनेई, कंबोडिया, इंडोनेशिया, लाओस, मलेशिया, म्यांमार, फिलीपींस, सिंगापुर, थाईलैंड और वियतनाम के बीच एशिया-प्रशांत क्षेत्र में एक प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौता है। आसियान के एफटीए भागीदारों में पांच और देश ऑस्ट्रेलिया, चीन, जापान, न्यूजीलैंड और दक्षिण कोरिया भी इसमें शामिल हैं। भारत भी आसियान का एफटीए साझेदार है, लेकिन वह नवंबर 2019 में आरसीईपी से बाहर हो गया था।

लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा

  • भारत के साथ सीमा विवाद के बीच नेपाल के कैबिनेट ने एक नया राजनीतिक मानत्रिच स्वीकार किया है जिसमें लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा को नेपाली क्षेत्र में दर्शाया गया है।
  • नेपाल की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी के सांसदों ने कालापानी, लिम्पियाधुरा और लिपुलेख को नेपाल की सीमा में लौटाने की मांग करते हुए संसद में विशेष प्रस्ताव भी रखा था।
  • लिपुलेख दर्रा नेपाल और भारत के बीच विवादित सीमा, कालापानी के पास एक दूरस्थ पश्चिमी स्थान है। भारत और नेपाल दोनों कालापानी को अपनी सीमा का अभिन्न हिस्सा बताते हैं। भारत उसे उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले का हिस्सा बताता है और नेपाल इसे धारचुला जिले का हिस्सा बताता है।

पृष्ठभूमि

  • हाल ही में भारत द्वारा 17000 फुट की ऊंचाई पर स्थित लिपूलेख दर्रे को उत्तराखंड के धारचूला से जोड़ने वाली 80 किलोमीटर लंबें रणनीति सर्कुलर लिंक रोड का उद्घाटन किया गया है।

लिपुलेख दर्रा और कालापानी की भौगोलिक अवस्थिति और महत्व

  • लिपुलेख दर्रा कालापानी के निकट सबसे पश्चिमी क्षेत्र है जिसके जरिये प्राचीन काल से 1962 तक चीन से भारत का व्यापार समेत कैलाश मानसरोवर यात्रा में इस मार्ग का इस्तेमाल होता रहा है। पुनः1991-92 में में लिपुलेख दर्रे को व्यापारिक मार्ग हेतु खोला गया।
  • काली नदी का उद्गम स्थल वाले कालापानी 372 वर्ग किलोमीटर में फैला एक मत्वपूर्ण सामरिक इलाका है। इसे भारत-चीन और नेपाल का ट्राई जंक्शन भी कहा जाता है। भारत इसे जहाँ उत्तराखंड के पिथौरागढ़ का हिस्सा मानता वाही नेपाल इसे दार्चुला जिले का हिस्सा बताता है।
  • चीन हिमालय क्षेत्र में प्रभाव बनाने के लिए अंधाधुंध निर्माण कार्य कर रहा है जिससे यहाँ चीनी सेना की पकड़ बहुत मजबूत हो गई है। चीन-नेपाल के बढ़ते प्रगाढ़ संबंध के बीच चीनी सेना पर नजर रखने एवं सैन्य संतुलन स्थापित करने के लिए इस क्षेत्र का बड़ा ही रणनीतिक महत्व है।

क्या है नेपाल का दृष्टिकोण?

  • नेपाल सुगौली समझौते (1816) के तहत काली नदी के पूर्वी क्षेत्र, लिंपियादुरा, कालापानी और लिपुलेख पर अपना दावा करता है। इसी आधार पर नेपाल भारतीय उपस्थिति को अवैध बताता है। लिपूलेख दर्रे-धारचूला लिंक रोड के साथ-साथ जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन कानून के उपरान्त जारी नए राजनीतिक नक्शा पर भी नेपाल ने आपत्ति जताई थी।

क्या है सुगौली संधि?

  • नेपाल और ब्रिटिश इंडिया के बीच 1816 में सुगौली संधि हुई थी। इस संधि में तहत काली(महाकाली) नदी के पूरब का इलाका नेपाल का माना गया। इसके अलावा सुगौली संधि के तहत ही गंडक नदी को भारत-नेपाल के बीच की सीमा माना गया है।जहाँ काली नदी के कई धाराओं होने के इसके अलग-अलग उदगम होने से वही गंडक नदी की धारा का प्रवाह बदलने से भारत और नेपाल सीमा को लेकर विवाद कायम है।

कोरोना वायरस का स्वतंत्र मूल्यांकन

चर्चा में क्यों?

  • विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) कोरोना वायरस के संबंध में स्वतंत्र मूल्यांकन शुरू करने के अपने अधिकतर सदस्य देशों के आह्वान के सामने झुक गया।

पृष्ठभूमि

  • अफ्रीकी और यूरोपीय देशों तथा अन्य देशों के संगठन ने महामारी को लेकर एक ‘‘समग्र मूल्यांकन’’ की मांग की है जो कोविड-19 के प्रति वैश्विक प्रतिक्रिया के डब्ल्यूएचओ के समन्वय से ‘‘मिले सबक’’ की समीक्षा पर केंद्रित है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि उनके पास इस बात के सबूत हैं कि नया कोरोना वायरस चीन की एक प्रयोगशाला से पैदा हुआ, जबकि वैज्ञानिक समुदाय ने इस बात पर जोर दिया है कि संभवत: वायरस ने किसी पशु से मानव में प्रवेश किया। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने सभा का उद्घाटन किया और उल्लेख किया कि कई देशों ने डब्ल्यूएचओ की सिफारिशों की अनदेखी की।

क्या है विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन(WHO)?

  • विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन, स्‍वास्‍थ्‍य के लिए संयुक्‍त राष्‍ट्र की विशेषज्ञ एजेंसी है। WHO की स्थापना 7 अप्रैल, 1948 को हुई थी एवं इसका मुख्यालय जिनेवा-स्विट्जरलैंड में अवस्थित है। यह एक अंतर-सरकारी संगठन है जो आमतौर पर सदस्‍य देशों के स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालयों के जरिए उनके साथ मिलकर काम करता है। विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन दुनिया में स्‍वास्‍थ्‍य संबंधी मामलों में नेतृत्‍व प्रदान करने, स्‍वास्‍थ्‍य अनुसंधान एजेंडा को आकार देने, नियम और मानक तय करने, प्रमाण आधारित नीतिगत विकल्‍प पेश करने, देशों को तकनीकी समर्थन प्रदान करने और स्‍वास्‍थ्‍य संबंधी रुझानों की निगरानी और आकलन करने के लिए जिम्‍मेदार है।

:: अर्थव्यवस्था ::

जर्मनी की फुटवियर कंपनी कासा ऐवर्ज जिम्ब

  • कोविड-19 महामारी के बीच जर्मनी की फुटवियर कंपनी कासा ऐवर्ज जिम्ब ने अपना पूरा विनिर्माण परिचालन चीन से भारत लाने की घोषणा की है। कंपनी वहां सालाना 30 लाख जोड़ी जूतों का उत्पादन करती है। इसके लिए उसने घरेलू जूता निर्यातक कंपनी आईआट्रिक इंडस्ट्रीज के साथ समझौता किया है।कंपनी शुरुआत में 110 करोड़ रुपये का निवेश करेगी। वॉन वैलेक्स ब्रांड नाम से जूते बनाने वाली कासा ऐवर्ज जिम्ब यह कारखाना उत्तर प्रदेश में आगरा में स्थापित होगा।

कासा ऐवर्ज जूता की अनूठी विशेषता

  • कासा ऐवर्ज का जूता दुनिया के 80 देशों में पेटेंट है। यह जूता पैर, घुटने और कमर के दर्द में राहत पहुंचाता है। जोड़ों और मांसपेशियों की सुरक्षा करता है ताकि भविष्य में कोई परेशानी न हो। कंपनी मधुमेह के मरीजों के लिए भी विशेष फुटवियर भी बनाती है।

मझोले उद्यमों की परिभाषा में होंगें बदलाव: नितिन गडकरी

  • सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) की परिभाषा में बदलाव की घोषणा के कुछ ही दिन बाद सरकार ने इसमें मध्यम उद्यमों की परिभाषा की और नयी समीक्षा करने का फैसला किया है। एमएसएमई मामलों के मंत्री नितिन गडकरी ने यह जानकारी दी। उनके अनुसार मध्यम दर्जे की इकाइयों निवेश सीमा को बढ़ाकर 50 करोड़ रुपये और कारोबार सीमा को 200 करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव है। इस संबंध में आदेश जारी किए जाएंगे।

क्यों किये जायेंगे बदलाव?

  • सरकार की योजना देश के निर्यात कारोबार में एमएसएमई के योगदान को मौजूदा 48 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत तक बढ़ाना है। इसके साथ ही इस क्षेत्र के देश की जीडीपी में योगदान को 29 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत तक पहुंचाना है। सरकार देश में पांच करोड़ नये रोजगार पैदा करने की योजना बना रही हैं।

पृष्ठभूमि

  • वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इससे पहले प्रधानमंत्री के 20 लाख करोड़ रुपये के विशेष आर्थिक पैकेज के बारे में कई किस्तों में जानकारी देते हुये एमएसएमई क्षेत्र की परिभाषा में बदलाव की घोषणा की थी।

क्या है MSME की नयी परिभाषा?

  • कोई भी इकाई जिसमें एक करोड़ रुपये का निवेश किया गया है और पांच करोड़ रुपये तक का कारोबार करती है उसे सूक्ष्म श्रेणी का उद्यम माना जायेगा। इसी प्रकार 10 करोड़ रुपये का निवेश और 50 करोड़ रुपये तक का कारोबार करने वाली इकाई को लघु श्रेणी की इकाई तथा 20 करोड़ रुपये तक का निवेश और 100 करोड़ रुपये तक का कारोबार करने वाली इकाई को मध्यम दर्जे की इकाई में रखा गया।

:: विज्ञान और प्रौद्योगिकी ::

12000 एचपी का सबसे शक्तिशाली लोकोमोटिव

  • बिहार स्थित मधेपुरा इलेक्ट्रिक लोको फैक्ट्री द्वारा निर्मित 12000 एचपी के पहले ‘मेड इन इंडिया’ इंजन को कल भारतीय रेलवे द्वारा पं. दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन स्टेशन से सफलतापूर्वक चलाया गया। इंजन का नाम डब्‍ल्‍यूएजी12 नंबर 60027 है।
  • यह भारतीय रेलवे के लिए गर्व का पल है, क्‍योंकि भारत दुनिया का छठा ऐसा देश है जो स्‍वदेश में ही ज्‍यादा हॉर्स पावर का इंजन बनाने वाले देशों के प्रतिष्ठित क्लब में शामिल हो गया है। यही नहीं, पूरी दुनिया में पहली बार बड़ी रेल लाइन की पटरी पर उच्च हॉर्स पावर के इंजन का संचालन किया गया है। यह इंजन ‘मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम के तहत निर्मित किया गया है। मधेपुरा फैक्‍ट्री गुणवत्ता और सुरक्षा के उच्चतम मानकों के साथ तैयार की गई सबसे बड़ी एकीकृत नई (ग्रीनफील्ड) यूनिट है। 120 इंजनों (लोकोमोटिव) की उत्पादन क्षमता वाला यह कारखाना 250 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है।

क्या है शक्तिशाली लोकोमोटिव की विशेषता?

  • ये इंजन अत्‍याधुनिक आईजीबीटी आधारित, 3-फेज ड्राइव और 9000 किलोवाट (12000 हॉर्स पावर) के इलेक्ट्रिक इंजन हैं। यह इंजन 706 केएन के अधिकतम संकर्षण के लिए सक्षम है, जो 150 में 1 की ढाल में 6000 टी ट्रेन का संचालन शुरू करने और चलाने में सक्षम है। 22.5 टी (टन) के एक्सल लोड के ट्विन बो-बो डिजाइन वाले इंजन (लोकोमोटिव) को 120 किमी प्रति घंटे की गति के साथ 25 टन तक उन्‍नत (अपग्रेड) किया जा सकता है। यह इंजन डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के लिए कोयला रेलगाड़ियों की आगे की आवाजाही के लिए एक गेम चेंजर साबित होगा। इसमें लगे हुए सॉफ्टवेयर और एंटीना के माध्यम से इसके रणनीतिक उपयोग के लिए इंजन पर जीपीएस के जरिए करीबी नजर रखी जा सकती है। माइक्रोवेव लिंक के माध्यम से जमीन पर सर्वर के जरिए एंटीना उठाया जाता है।
  • यह इंजन पारंपरिक ओएचई लाइनों वाली रेलवे पटरियों के साथ-साथ अत्‍यंत ऊंची ओएचई लाइनों वाले समर्पित माल गलियारों (डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर) पर भी परिचालन करने में सक्षम है। इंजन में दोनों ही तरफ वातानुकूलित ड्राइवर कैब हैं। इंजन पुनरुत्पादक ब्रेकिंग सिस्टम से लैस है जो परिचालन के दौरान पर्याप्त ऊर्जा बचत सुनिश्चित करता है। ये उच्च हॉर्स पावर वाले इंजन मालवाहक ट्रेनों की औसत गति को बढ़ाकर अत्‍यधिक इस्‍तेमाल वाली पटरियों पर भीड़ कम करने में मदद करेंगे।

बैंकिंग ट्रोजन सरबेरस

  • सीबीआई ने इंटरपोल की सूचना के आधार पर राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों तथा केंद्रीय एजेंसियों को बैंकिंग ट्रोजन सरबेरस के बारे में सतर्क किया है जो स्मार्टफोन उपभोक्ताओं को कोविड-19 से संबंधित गलत लिंक डाउनलोड करने के लिए लुभाता है और फिर मोबाइल से डेटा चोरी करता है।
  • अधिकारियों के अनुसार सरबेरस नामक बैंकिंग ट्रोजन के माध्यम से कोविड-19 महामारी का फायदा उठाकर किसी उपयोगकर्ता को ऐसे लिंक डाउनलोड करने के लिए एसएमएस भेजे जाते हैं जिनमें हैक करने वाले सॉफ्टवेयर हैं।

क्या होता है ट्रोजन?

  • ट्रोजन एक ऐसा सॉफ्टवेयर प्रोग्राम है जो दिखने में तो सही लगता है, लेकिन यदि इसे चलाया जाता है तो इसके नकारात्मक प्रभाव होते हैं और इसका इस्तेमाल हैकर कर सकते हैं। ट्रोजन डाउनलोड करने पर यह क्रेडिट कार्ड नंबर जैसे वित्तीय डेटा की चोरी कर सकता है।

:: पर्यावरण और पारिस्थितिकी ::

कचरा मुक्त शहरों की स्टार रेटिंग

चर्चा में क्यों?

  • केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के राज्य मंत्री (स्वतंत प्रभार) श्री हरदीप एस पुरी ने कहा कि आकलन वर्ष 2019-2020 के लिए, कुल छह शहरों को 5-स्टार (अंबिकापुर, राजकोट, सूरत, मैसूरु, इंदौर और नवी मुंबई), 65 शहरों को 3-स्टार के रूप में और 70 शहरों को 1-स्टार के रूप में प्रमाणित किया गया है। कचरा मुक्त शहरों की स्टार रेटिंग के परिणामों की घोषणा करते हुए श्री पुरी ने कार्यक्रम में कचरा मुक्त शहरों की स्टार रेटिंग के लिए संशोधित प्रोटोकॉल को भी लॉन्च किया।

क्या है कचरा मुक्त शहरों की स्टार रेटिंग

  • कचरा मुक्त स्थिति प्राप्त करने के लिए शहरों के तंत्र को संस्थागत रूप देने और स्वच्छता के उच्च स्तर को प्राप्त करने के लिए शहरों को प्रेरित करने को ध्यान में रखते हुए मंत्रालय द्वारा जनवरी 2018 में स्टार रेटिंग प्रोटोकॉल लॉन्च किया गया था।
  • मंत्रालय ने कचरा मुक्त शहरों के लिए स्टार रेटिंग प्रोटोकॉल तैयार किया – यह परीक्षा प्रणालियों के समान एक व्यापक ढांचा है जहां हर शहर में प्रत्येक वार्ड को ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (एसडब्ल्यूएम) के 24 अलग-अलग घटकों में एक निश्चित मानक प्राप्त करना होगा और कुल प्राप्त अंक के आधार पर इन्हें श्रेणीबद्ध किया जाएगा।”
  • यह प्रमाण पत्र न केवल शहरी स्थानीय निकायों की स्वच्छ स्थिति की स्वीकार्यता है और एसडब्ल्यूएम प्रणाली को मजबूत करता है, बल्कि सार्वभौमिक रूप से ज्ञात मानकों के प्रति विश्वसनीयता का भी प्रतीक है। इसके अलावा, स्टार रेटिंग प्रोटोकॉल के तहत शहरों का प्रदर्शन महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे उनका अंतिम मूल्यांकन तय किया जाता है।
  • प्रोटोकॉल को समग्र रूप से तैयार किया गया है, जिसमें शामिल हैं - नालियों और जल निकायों की सफाई, प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन, निर्माण और तोड़ दिए गए भवनों के अपशिष्ट, आदि। ये घटक कचरा मुक्त शहर की स्थिति प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण हैं। इस प्रोटोकॉल का मुख्य जोर एसडब्ल्यूएम पर है, यह स्वच्छता के कुछ न्यूनतम मानकों का भी ध्यान रखता है।
  • नया प्रोटोकॉल वार्ड-वार जियो-मैपिंग, स्वच्छ नगर ऐप जैसे आईसीटी हस्तक्षेपों के माध्यम से एसडब्ल्यूएम मूल्य श्रृंखला की निगरानी और 50 लाख + की आबादी वाले शहरों में ज़ोन-वार रेटिंग पर विचार करेगा।

मिशन का विस्तार

  • मिशन के लिए आगे बढ़ने के तरीके पर विस्तार से चर्चा करते हुए, श्री हरदीप एस पुरी ने कहा, “हमारी दृष्टि प्रभावी मल प्रबंधन, सुरक्षित रोकथाम, परिवहन, निपटान और प्रसंस्करण के माध्यम से शहरी भारत में समग्र और स्थायी स्वच्छता सुनिश्चित करना है। इसके लिए जल निकायों में पानी बहाने से पहले 100% अपशिष्ट जल उपचार के साथ-साथ जल के अधिकतम संभव पुन: उपयोग पर ध्यान दिया जा रहा है। हम 3 आर और चक्रीय अर्थव्यवस्था के आधार पर 100% वैज्ञानिक और संसाधन कुशल एसडब्लूएम प्राप्त करना चाहते हैं। हम एसडब्लूएम के मूल सिद्धांतों - अर्थात् प्रभावी संग्रह, पृथक्करण और प्रसंस्करण पर अपना काम जारी रखेंगे, हमारे फोकस में सभी कचरा स्थलों का बायोरेमेडिएशन, एकल उपयोग प्लास्टिक मुक्त भारत, कुशल निर्माण और तोड़ दिए गए भवनों के अपशिष्ट प्रबंधन शामिल हैं।
  • हमें विश्वास है कि एसबीएम - यू के अगले चरण में, हम अपने सभी शहरों को ओडीएफ + बनाने में और कम से कम 3-स्टार कचरा मुक्त प्रमाणित करने में सक्षम होंगे तथा हमारे शहर और कस्बे स्वछता में नए मानदंड स्थापित करते रहेंगे, इस तरह एक “स्वच्छ”, “स्वस्थ”, “शशक्त” और “सम्पन” आत्मनिर्भर न्यू इंडिया का मार्ग प्रशस्त होगा ।

पृष्ठभूमि

  • 2014 में अपनी शुरुआत के बाद से, स्वच्छ भारत मिशन-शहरी (एस बी एम – यू ) ने स्वच्छता और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन दोनों ही क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति की है। आज, 4324 शहरी स्थानीय निकाय (यू एल बी ) को ओडीएफ (4204 प्रमाणित ओडीएफ ), 1306 शहरों को ओडीएफ + और 489 शहरों को ओडीएफ ++ प्रमाणित घोषित किया गया है। इसके अलावा, 66 लाख व्यक्तिगत घरेलू शौचालय और 6 लाख से अधिक सामुदायिक / सार्वजनिक शौचालयों का निर्माण हो चूका है / निर्माण प्रक्रिया जारी है। ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के क्षेत्र में, 96% वार्डों में 100% घर-घर से कचरा संग्रह की सुविधा है, जबकि कुल कचरे के 65% को संसाधित किया जा रहा है।

सुपर साइक्‍लोन 'एम्फन'

  • भारत के पूर्वी राज्‍यों में इस वक्‍त चक्रवाती तूफान 'एम्फन' का खतरा मंडरा रहा है। ये खतरा इसलिए भी अधिक है क्‍योंकि ये एक सुपर साइक्‍लोन है। इसकी वजह से चलने वाली हवा की गति 200 किमी प्रति घंटे से भी तेज हो सकती है।
  • आपको बता दें कि भारत में इससे पहले इस तरह का सुपर साइक्‍लोन वर्ष 1999 में आया था जिसमें करीब 10,000 लोगों की मौत हो गई थी। भारत सरकार की तरफ से उसको राष्ट्रीय आपदा घोषित किया गया था।

चक्रवाती तूफान का वर्गीकरण

  • नेशनल साइक्‍लोन सिस्‍क मिटीगेशन प्रोजेक्‍ट (NCRMP) के मुताबिक कटक, पुरी और बालासोर में 1891 से 2002 के बीच करीब 83 बार चक्रवाती तूफान आ चुका है। इसमें यहां पर आने वाले सुपर साइक्‍लोन भी शामिल हैं।
  • साइक्‍लोन को दरअसल कई चरणों में बांटा जाता है जिसके आधार पर इन्‍हें साइक्‍लोन या सुपर साइक्‍लोन की संज्ञा दी जाती है।
  • सामान्‍य तौर पर आने वाले चक्रवाती तूफान के दौरान चलने वाली हवा की गति 34 से 47 किलो नॉट्स या 62 से 88 किमी प्रतिघंटा हो सकती है। वहीं इससे शक्तिशाली चक्रवाती तूफान के दौरान चलने वाली हवा की रफ्तार 48 से 63 किलो नॉट्स या 89 से 118 किमी प्रतिघंटा होती है। तीसरी श्रेणी में अधिक शक्तिशाली चक्रवाती तूफान आते हैं जिनमें हवा की रफ्तार 64 से लेकर 119 किलो नॉट्स या 119 से 221 किमी प्रतिघंटे की गति से हवाएं चलती हैं। इसके बाद चौथी और अंतिम श्रेणी सुपर साइक्‍लोन की होती है जिसमें हवा की रफ्तार 221 किमी प्रति घंटे से भी तेज होती है।

क्या होते है चक्रवात?

  • दरअसल चक्रवात निम्न वायुदाब वाली ऐसी मौसमी परिघटना होती है जिसमें हवाएं बाहर से अंदर की ओर तेज़ गति से घूमती है। पृथ्वी के दोनों उत्तरी और दक्षिणी गोलार्द्धों में चक्रवात के मामले देखे जा सकते हैं। दक्षिणी गोलार्द्धों में ये चक्रवात घड़ी की सुई की दिशा यानी Clockwise जबकि उत्तरी गोलार्द्ध में ये चक्रवात घड़ी की सुई के विपरीत यानी Anti Clockwise घूमते हैं।
  • भारत में आने वाले चक्रवात मुख्य रूप से दो मौसमों में आते हैं। जिनमें पहला मानसून के पहले यानी अप्रैल - मई के महीने के बीच और दूसरा मानसून के बाद यानी अक्टूबर - दिसम्बर महीने के बीच चक्रवात के प्रकारों की बात करें तो चक्रवात मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं। जिन्हें उष्णकटिबंधीय और शीतोष्ण चक्रवात के नाम से जाना जाता है।

उष्णकटिबंधीय और शीतोष्ण चक्रवात

  • उष्णकटिबंधीय चक्रवात का प्रभाव प्रमुख रूप से प्रशांत महासागर, हिंद महासागर और उत्तरी अटलांटिक महासागर के क्षेत्रों पर ज्यादा रहता है। इस क्षेत्र में आने वाले चक्रवातों को अपने स्थान और तीव्रता के आधार पर अलग-अलग नामों से जाना जाता है। इस श्रेणी में हरिकेन, टाइफ़ून, ट्रोपिकल स्ट्रोमी, साइक्लोनिक स्टोर्म ट्रोपिकल डिप्रेशन और साइक्लोन यानी चक्रवात शामिल होते हैं।
  • इन चक्रवातों की रफ़्तार क़रीब 50 से 300 km/h तक होती है क्योंकि इनमें वाष्पीकरण के कारण भारी मात्रा में Laten Heat रहती है। मौजूदा समय में आया फानी चक्रवात भी एक उष्ण-कटिबंधीय यानी ट्रॉपिकल चक्रवात है जोकि कर्क रेखा और मकर रेखा के बीच उठते हैं।
  • जबकि शीतोष्ण चक्रवातों का प्रभाव उत्तरी एटलांटिक महासागर और उत्तरी प्रशांत महासागर में रहता है। इन क्षेत्रों में चक्रवात की उत्पत्ति महासागरों के उन क्षेत्रों में होती है जहां उष्ण कटिबंधीय वायु शीत कटिबंधीय वायु से मिलती है। शीतोष्ण कटिबंधीय क्षेत्रों में आने वाले इन चक्रवातों की रफ्तार अलग-अलग होती है, जबकि इनके आगे की गति 30 से 50 किलोमीटर प्रति घण्टे तक होती है।

वैश्विक उद्योग जगत ने ‘ग्रीन इकनॉमी’ की ओर बढ़ने की अपील

  • चार भारतीय कंपनियां उन 150 वैश्विक निगमों में शामिल हैं, जिन्होंने दुनिया भर की सरकारों से अपील की है कि वे अपने कोविड-19 आर्थिक प्रोत्साहनों और सुधार के प्रयासों को जलवायु विज्ञान के साथ जोड़ें, ताकि ‘हरित अर्थव्यवस्था’ (ग्रीन इकनॉमी) की ओर तेजी से बढ़ा जा सके।
  • ग्रीन इकनॉमी का आशय ऐसी व्यवस्था से है, जहां पर्यावरण को बिल्कुल नहीं या कम से कम नुकसान हो। डालमिया सीमेंट (भारत) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी महेंद्र सिंघी, पॉलीजेंटा टेक्नालॉजीज के मुख्य विपणन अधिकारी मकरंद कुलकर्णी, टेक महिंद्रा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सी पी गुरनानी और विप्रो के मुख्य कार्यकारी अधिकारी आबिद अली नीमचवाला ने इस बयान पर हस्ताक्षर किए हैं।
  • उनके अलावा इस बयान पर 33 देशों के 34 क्षेत्रों के शीर्ष कार्यपालकों ने हस्ताक्षर किए हैं। इस बयान पर हस्ताक्षर करने वाली कंपनियों में वैश्विक फार्मा कंपनी नोवार्टिस, एडोब, एस्ट्राजेनेका, बरबेरी, कैपजेमिनी, कोलगेट पामोलिव और हेवलेट शामिल हैं। यह बयान संयुक्त राष्ट्र द्वारा समर्थित प्रयासों का हिस्सा है और इसमें 155 कंपनियों के हस्ताक्षर हैं, जिनका कुल बाजार पूंजीकरण 2400 अरब डॉलर से अधिक है और इनके यहां 50 लाख से अधिक कर्मचारी काम करते हैं।
  • संयुक्त बयान में कहा गया, ‘‘विभिन्न देश कोविड-19 का मुकाबला करने के लिए आर्थिक सहायता और सुधार पैकेज पर काम कर रहे हैं, और जैसा कि वे पेरिस समझौते के तहत बढ़ी हुई राष्ट्रीय जलवायु योजनाओं को लागू करने की तैयारी कर रहे हैं, हम सरकारों से आह्वान करते हैं कि वे साहसी जलवायु कार्रवाई के जरिए बेहतर भविष्य के निर्माण के लिए काम करें।’’

:: विविध ::

‘‘हॉप ऑन: माई एडवेंचर्स ऑन बोट्स, ट्रेन्स एंड प्लेन्स’’

  • प्रसिद्ध लेखक रस्किन बॉन्ड मंगलवार को 86 वर्ष के हो गए। इस अवसर पर पुस्तक प्रकाशक ‘स्पीकिंग टाइगर’ ने उनकी एक नई पुस्तक जारी की है जो नावों, ट्रेनों और विमानों में उनकी यात्रा की कहानियों के बारे में है। ‘‘हॉप ऑन: माई एडवेंचर्स ऑन बोट्स, ट्रेन्स एंड प्लेन्स’’ में बॉन्ड ने अपने बचपन की कुछ यादगार यात्रा रोमांचों का वर्णन किया है।

श्री नीलम संजीव रेड्डी

  • राष्ट्रपतिश्री राम नाथ कोविंद ने 19 मई, 2020 राष्ट्रपति भवन में पूर्व राष्ट्रपतिश्री नीलम संजीव रेड्डी को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि दी। भारत के पूर्व राष्ट्रपति नीलम संजीव रेड्डी एकमात्र ऐसे राष्ट्रपति हैं जो निर्विरोध चुने गए थे। नीलम संजीव रेड्डी भारत के छठे राष्ट्रपति थे और उन्होंने 25 जुलाई 1977 को राष्ट्रपति का पद संभाला था। रेड्डी ने 2 बार राष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ा था जिसमें पहली बार उन्हें हार का सामना करना पड़ा था जबकि दूसरी बार वह निर्विरोध चुने गए।

:: प्रिलिम्स बूस्टर ::

  • जयंती दिवस से चर्चा में रहे भारत में निर्विरोध निर्वाचित होने वाले एकमात्र राष्ट्रपति कौन थे? (नीलम संजीव रेड्डी)
  • भारत द्वारा 12000 हॉर्स पावर वाली लोकोमोटिव बनाकर वैश्विक एलिट क्लब में शामिल होने से चर्चा में रहे इस लोकोमोटिव का नाम क्या है? (WAG12,मधेपुरा लोको फैक्ट्री द्वारा निर्मित)
  • वर्ष 2019-20 के लिए कचरा प्रबंधन की दिशा में किन भारतीय शहरों को कचरा मुक्त के संदर्भ में ‘फाइव स्टार रेटिंग प्रदान की गई है? (अंबिकापुर, राजकोट, सूरत, मैसूर, इंदौर और नवी मुंबई)
  • हाल ही में इंटरपोल की सूचना के आधार पर सीबीआई के द्वारा सभी केंद्रीय एजेंसियों को किस बैंकिंग ट्रोजन के बारे में सतर्क किया गया है? (बैंकिंग ट्रोजन सरबेरस)
  • हाल ही में नेपाल के द्वारा नया राजनीतिक मानचित्र जारी कर किन विवादित भारतीय क्षेत्रों को नेपाली क्षेत्र में दर्शाया गया है? (लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा)
  • चीन से अपना पूरा विनिर्माण परिचालन भारत में लाने से चर्चा में रही ‘कासा ऐवर्ज जिम्ब’ मूलतः किस देश की कंपनी है एवं यह किस चीज का निर्माण करती है? (जर्मनी ,फुटवियर कंपनी)
  • मध्यम दर्जे की इकाइयों में निवेश और कारोबार किसी सीमा बढ़ाने से चर्चा में रहे मध्यम दर्ज की इकाइयों में निवेश और कारोबार की वर्तमान सीमा क्या है? (क्रमशः 20 करोड़ रुपये और 100 करोड़ रुपये)
  • समुद्री खाद्य-उत्पादों में ‘फॉर्मलडीहाइड’ की जांच से चर्चा में रहे समुद्री उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण की स्थापना कब हुई एवं इसका मुख्यालय कहां है? (1972, कोच्ची केरल)
  • ‘हरित अर्थव्यवस्था’ की दिशा में जागरूकता हेतु संयुक्त राष्ट्र द्वारा समर्थित 150 वैश्विक निगमों में भारत की कौन सी कंपनियां शामिल है? (डालमिया सीमेंट, पॉलीजेंटा टेक्नालॉजीज, टेक महिंद्रा और विप्रो)
  • हाल ही में चर्चा में रहे ‘एम्फन’ चक्रवात को किस श्रेणी का चक्रवात घोषित किया गया है एवं इस श्रेणी के चक्रवात की गति कितनी होती है? (सुपर साइक्लोन, 221Km/H)
  • हाल ही में चर्चा में रहे ‘‘हॉप ऑन: माई एडवेंचर्स ऑन बोट्स, ट्रेन्स एंड प्लेन्स’’ पुस्तक का लेखक कौन है? (रस्किन बॉन्ड)
  • भारत को पुनः शामिल करने से चर्चा ले रहे क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी (RCEP) में वर्तमान में कुल कितने देश शामिल है? (15 देश-आसियान+ऑस्ट्रेलिया, चीन, जापान, न्यूजीलैंड,दक्षिण कोरिया)

स्रोत साभार: Dainik Jagran (Rashtriya Sanskaran), Dainik Bhaskar (Rashtriya Sanskaran), Rashtriya Sahara (Rashtriya Sanskaran) Hindustan Dainik (Delhi), Nai Duniya, Hindustan Times, The Hindu, BBC Portal, The Economic Times (Hindi & English), PTI, PIB

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