(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (20 जुलाई 2020)

दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर


(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (20 जुलाई 2020)


:: राष्ट्रीय समाचार ::

वन नेशन, वन राशन कार्ड योजना

चर्चा में क्यों?

  • देश में वन नेशन, वन राशन कार्ड की सुविधा 4 राज्यों में राशन कार्डों की अंतर-राज्यीय पोर्टेबिलिटी के साथ अगस्त, 2019 में शुरू की गई थी। तब से कुल 20 राज्यों/केन्द्र शासित प्रदेशों को निर्बाध राष्ट्रीय पोर्टेबिलिटी समूह में शामिल किया गया है जो जून 2020 से प्रभावी है। इस प्रकार, यह सुविधा अभी 20 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के एनएफएसए कार्ड धारकों को मिल रही है। ये 20 राज्य/केंद्र शासित प्रदेश- आंध्र प्रदेश, हरियाणा, कर्नाटक, महाराष्ट्र, ओडिशा, सिक्किम, मिजोरम, तेलंगाना, केरल, पंजाब, त्रिपुरा, बिहार, गोवा, हिमाचल प्रदेश, दादरा तथा नागर हवेली, दमन तथा दीव, गुजरात, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान हैं।
  • अब चार और राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों- जम्मू और कश्मीर, मणिपुर, नगालैंड और उत्तराखंड में बहुत जल्द ही वन नेशन, वन राशन कार्ड के तहत राष्ट्रीय पोर्टेबिलिटी की सुविधा देने के लिए जांच और परीक्षण का काम पूरा कर लिया गया है। इसके अलावा, अंतर्राज्यीय लेनदेन के लिए आवश्यक वेब-सेवाएं और केंद्रीय डैशबोर्ड के जरिए उनकी निगरानी भी इन राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के लिए सक्रिय हो गई हैं। शेष सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को मार्च 2021 से पहले इस योजना में शामिल कर लिए जाने का लक्ष्य रखा गया है।

वन नेशन, वन राशन कार्ड योजना के बारे में

  • वन नेशन, वन राशन कार्ड की सुविधा एक महत्वाकांक्षी योजना है। यह राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए), 2013 के तहत शामिल सभी लाभार्थियों के खाद्य सुरक्षा अधिकारों को सुनिश्चित करने के लिए खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग का प्रयास है चाहे वे देश के किसी भी हिस्से में रहें। ऐसा सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के सहयोग से 'सार्वजनिक वितरण प्रणाली के एकीकृत प्रबंधन (आईएम-पीडीएस)' पर चल रही केंद्रीय योजना के तहत राशन कार्डों की देशव्यापी पोर्टेबिलिटी को लागू करके किया जा रहा है।
  • इस प्रणाली के माध्यम से, वैसे प्रवासी एनएफएसए लाभार्थी जो अक्सर अस्थायी रोजगार इत्यादि की तलाश में अपना निवास स्थान बदलते रहते हैं, को अब किसी अपनी पंसद की किसी भी उचित मूल्य की दुकान (एफपीएस) से अपने खाद्यान्न का कोटा उठाने का विकल्प दिया गया है। ऐसा एफपीएस में स्थापित इलेक्ट्रॉनिक प्वाइंट ऑफ सेल (ईपीओएस) डिवाइस पर बायोमेट्रिक/ आधार आधारित प्रमाणीकरण के साथ अपने मौजूदा राशन कार्ड का उपयोग करके किया जा सकता है।
  • इस प्रकार, एफपीएस पर ईपीओएस उपकरणों की स्थापना और बायोमेट्रिक/आधार प्रमाणीकरण के लिए लाभार्थियों की आधार संख्या इस प्रणाली के मुख्य संवाहक हैं। लाभार्थी देश में किसी भी एफपीएस डीलर को राशन कार्ड नंबर या आधार नंबर बताकर इस सुविधा का लाभ ले सकता है। परिवार का कोई भी व्यक्ति जिसकी राशन कार्ड में आधार संख्या अंकित है, वह प्रमाणीकरण कराकर राशन उठा सकता है। इस सुविधा का लाभ पाने के लिए राशन डीलर को राशन कार्ड या आधार कार्ड दिखाने या इन्हें अपने साथ ले जाने की कोई आवश्यकता नहीं है। लाभार्थी अपने फिंगर प्रिंट या आईरिस आधारित पहचान का उपयोग करके अपना आधार प्रमाणीकरण कर सकता है।

देपसांग

  • भारत और चीन में सीमा विवाद को लेकर तनाव अभी पूरी तरह से टला नहीं है। पैंगोंग, देपसांग और कई अन्य इलाकों में अभी दोनों सेनाओं का पीछे हटना बाकी है। अभी दोनों देशों के बीच पूरी तरह सहमति बनने में भी कसर है।
  • बॉटलनेक या वाई जंक्‍शन जहां पर चीनी जवान, इंडियन आर्मी के जवानों को पेट्रोलिंग से रोक रही हैं, वह जगह डीबीओ एयरफील्‍ड से 30 किलोमीटर से भी कम दूरी पर है। साथ ही डीएसडीबीओ रोड से इसका फासला सात किलोमीटर से भी कम है।

पृष्ठभूमि

  • कुछ रिपोर्ट के अनुसार, DBO हवाई अड्डे से लगभग 30 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में चीन ने देपसांग की वाई-जंक्शन या बोटलनेक नामक जगह पर बड़ी संख्या में सैनिक तैनात कर दिए हैं। चीन ने इलाके में भारी वाहन और विशेष सैन्य उपकरण भी तैनात किए हैं।
  • बोटलनेक LAC पर भारतीय सीमा के लगभग 18 किलोमीटर अंदर है। हालांकि चीन इससे भी पांच किलोमीटर अंदर तक के इलाके को अपना बताता है।

2013 में भी इस इलाके में चीन ने की थी घुसपैठ

  • बता दें कि चीनी सैनिकों ने अप्रैल, 2013 में इस इलाके में प्रवेश करते हुए अपने टेंट बना लिए थे। इसके बाद लगभग तीन हफ्ते तक दोनों देशों के सैनिक एक-दूसरे के आमने-सामने रहे थे और राजनयिक बातचीत के बाद चीनी सैनिक पीछे लौट गए थे।
  • इस घटना के बाद भारत ने बोटलनेक पर एक नया बेस बना लिया था। हालांकि इसके बावजूद सितंबर, 2015 में चीन का एक गश्ती दल अंदर घुसने में कामयाब रहा था।

:: अंतर्राष्ट्रीय समाचार ::

गंधार मूर्तिकला की दुर्लभ गौतम बुद्ध की प्रतिमा

चर्चा में क्यों

  • पाकिस्तान के खैबर-पख्तूनख्वा प्रांत में एक खेत में पाइपलाइन की खोदाई के दौरान गौतम बुद्ध की एक दुर्लभ आदमक़द प्रतिमा मिली।
  • मर्दान जिले के तख्तबई तहसील में एक खेत में खुदाई के दौरान मिली इस प्रतिमा को एक स्थानीय मौलवी के आदेश पर नष्ट कर दिया गया है।
  • गौरतलब कि खैबर-पख्तूनख्वा प्रांत का यह तख्तबाई इलाका श्रीलंका, कोरिया और जापान के बौद्ध लोगों के लिए पर्यटन स्थल है क्योंकि यह क्षेत्र उपमहाद्वीप के इतिहास में गांधार सभ्यता की शुरुआती शहरी बसावटों में से एक है।
  • खैबर-पख्तूनख्वा का प्राचीन नाम गांधार है और इस क्षेत्र के लिए बौद्ध अनुयायियों के मन में अपार श्रद्धा है। यहाँ प्राचीन काल में बनी गंधार शैली में बुद्ध की कई प्रतिमाएं खुदाई में प्राप्त हुई हैं।

गंधार मूर्तिकला शैली

  • कुषाणों के शासन काल में उत्तर-पश्चिम भारत में मूर्तिकला की एक नव-शैली विकसित हुई। यह भारतीय और यूनानी मूर्तिकला का एक मिश्रित रुप था।
  • कनिष्क और उसके उत्तराधिकारियों ने गांधार शैली को प्रोत्साहन दिया।
  • जिस गांधार प्रदेश में इस शैली का विकास हुआ उसी के आधार पर इसे 'गांधार मूर्तिकला' के नाम से जाना गया।
  • गांधार मूर्तिकला पर यूनानी मूर्तिकला का गहरा प्रभाव था जिसमें मानव चित्रण के बहिरंग पक्ष को अधिक महत्व दिया गया है।
  • गांधार मूर्तिकला की विषय-वस्तु भारतीय थी, परन्तु मूर्तिकला शैली यूनानी और रोमन थी इसलिए गांधार मूर्तिकला को ग्रीको-रोमन, ग्रीको बुद्धिस्ट या हिन्दू-यूनानी मूर्तिकला भी कहा जाता है।
  • इसके प्रमुख केन्द्र जलालाबाद, हड्डा, बामियान, स्वात घाटी और पेशावर थे। इस मूर्तिकला में पहली बार बुद्ध की सुन्दर मूर्तियाँ बनायी गयीं।

गंधार मूर्तिकला शैली की विशेषताएँ

  • इनके निर्माण में सफेद और काले रंग के पत्थर का प्रयोग किया जाता था। गांधार मूर्तिकला को महायान धर्म के विकास से प्रोत्साहन मिला।
  • इसकी मूर्तियों में मांसपेशियाँ स्पष्ट झलकती हैं और आकर्षक वस्त्रों की सलवटें साफ दिखाई देती हैं।
  • इस शैली के शिल्पियों द्वारा वास्तविकता पर कम ध्यान देते हुए बाह्य सौन्दर्य को मूर्तरूप देने का प्रयास किया गया है।
  • महीन चूना या प्लास्टर गाँधार कला में मूर्ति निर्माण का प्रचलित माध्यम था।
  • इसकी मूर्तियों में भगवान बुद्ध यूनानी देवता अपोलो के समान प्रतीत होते हैं।

:: राजव्यवस्था ::

जनसंख्या नियंत्रण कानून

चर्चा में क्यों?

  • जनसंख्या नियंत्रण कानून को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका पर केंद्र सरकार चार हफ्ते में जवाब दाखिल करेगी।

पृष्ठभूमि

  • सुप्रीम कोर्ट ने उस याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने को कहा है, जिसमें याचिकाकर्ता ने जनसंख्या नियंत्रण के लिए वेंकटचेल्लइया कमिशन की सिफारिश लागू करने की गुहार लगाई है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को 10 जनवरी को जवाब देने के लिए कहा था, इसके बाद केंद्र की ओर से जवाब दाखिल नहीं किए जाने पर याचिकाकर्ता वकील अश्विनी उपाध्याय ने सुप्रीम कोर्ट में मामला उठाया।

क्या मांग की गयी याचिका में?

  • सुप्रीम कोर्ट में अश्विनी उपाध्याय की ओर से अर्जी दाखिल कर भारत सरकार को प्रतिवादी बनाया गया है और कहा गया है कि देश में जनसंख्या नियंत्रण करने के लिए कदम उठाए जाएं।
  • देश में बढ़ती जनसंख्या के कारण ही क्राइम बढ़ रहा है, नौकरियों की कमी हो रही है और संशाधनों का अभाव हो रहा है।
  • जनसंख्या कंट्रोल करने के लिए जस्टिस वेंकटचेलैया कमिशन ने जो सिफारिश की थी, उस पर अमल किया जाना चाहिए। आपको बता दे नेशनल कमिशन टू रिव्यू द वर्किंग ऑफ कंस्टिट्यूशन (एनसीआरडब्ल्यूसी) बनाया गया था, कमिटी के चीफ जस्टिस वेंकटचेलैया ने दो साल की बहस के बाद सिफारिश की थी कि संविधान के अनुच्छेद-47 ए में बदलाव किया जाए और उसमें जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाया जाए।
  • याचिका में गुहार लगाई गई है कि दो बच्चों की पॉलिसी घोषित किया जाए। यानी सरकारी नौकरी, सब्सिडी आदि का क्राइटेरिया तय किया जाए। साथ ही कहा कि इस पॉलिसी का उल्लंघन करने वालों के कानूनी अधिकार, वोटिंग अधिकार, चुनाव लड़ने का अधिकार वापस ले लिए जाएं।
  • याचिकाकर्ता ने अपनी अर्जी में कहा है कि देश की तमाम समस्याओं की जड़ जनसंख्या विस्फोट है। गरीबी, बेरोजगारी, प्रदूषण, रोटी, कपड़ा, मकान की समस्या से लेकर पानी की समस्या भी जनसंख्या बढ़ने के कारण हो रही है। अपराध के ग्राफ में बढ़ोतरी भी इसी वजह से हो रही है।

:: अर्थव्यवस्था ::

आयकर रिटर्न के लिए फॉर्म 26एएस

  • नया फॉर्म 26एएस अपना आयकर रिटर्न जल्दी और सही ढंग से ई-फाइल करने में करदाताओं का ‘फेसलेस (व्‍यक्तिगत उपस्थिति बगैर) मददगार’ है। इस आकलन वर्ष से करदाताओं को एक नया एवं बेहतर फॉर्म 26एएस प्राप्‍त होगा जिसमें करदाताओं के वित्तीय लेन-देन के बारे में कुछ अतिरिक्त विवरण होंगे, जैसा कि विभिन्न श्रेणियों में वित्तीय लेन-देन विवरण (एसएफटी) में निर्दिष्ट किया गया है।
  • इन निर्दिष्ट एसएफटी को दर्ज करने वालों से आयकर विभाग को प्राप्त हो रही जानकारियों को अब स्वैच्छिक अनुपालन, कर जवाबदेही और रिटर्न की ई-फाइलिंग में आसानी के लिए फॉर्म 26एएस के भाग ई में दर्शाया जा रहा है, ताकि इनका उपयोग करदाता अत्‍यंत अनुकूल माहौल में सही कर देनदारी की गणना करके अपना आयकर रिटर्न (आईटीआर) भरने में कर सकें। इसके अलावा, इससे कर प्रशासन में और भी अधिक पारदर्शिता एवं जवाबदेही आएगी।

नए फॉर्म की विशेषता

  • पिछले फॉर्म 26एएस में किसी पैन (स्‍थायी खाता संख्‍या) से संबंधित स्रोत पर कर कटौती और स्रोत पर कर संग्रह के बारे में जानकारियां होती थीं। इसके अलावा, इसमें कुछ अतिरिक्त जानकारियां भी होती थीं जिनमें भुगतान किए गए अन्य करों, रिफंड और टीडीएस डिफॉल्‍ट का विवरण भी शामिल था। लेकिन अब से करदाताओं को अपने सभी प्रमुख वित्तीय लेन-देन को याद करने में मदद के लिए इसमें एसएफटी होगा, ताकि आईटीआर दाखिल करते समय सुविधा के लिए उनके पास तैयार संगणक उपलब्‍ध हो।
  • उच्च मूल्य वाले वित्तीय लेन-देन करने वाले व्यक्तियों के मामले में आयकर विभाग को वित्त वर्ष 2016 से ही आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 285बीए के तहत ‘निर्दिष्ट व्यक्तियों’ जैसे कि बैंकों, म्यूचुअल फंडों, बॉन्ड जारी करने वाले संस्थानों और रजिस्ट्रार या सब-रजिस्ट्रार इत्‍यादि से उन व्‍यक्तियों द्वारा की गई नकद जमा/बचत बैंक खातों से निकासी, अचल संपत्ति की बिक्री/खरीद, सावधि जमा, क्रेडिट कार्ड से भुगतान, शेयरों, डिबेंचरों, विदेशी मुद्रा, म्यूचुअल फंड की खरीद, शेयरों के बायबैक, वस्‍तुओं एवं सेवाओं के लिए नकद भुगतान, आदि के बारे में जानकारियां प्राप्त होती थीं। अब से विभिन्न एसएफटी के तहत इस तरह की सभी जानकारियां नए फॉर्म 26एएस में दर्शाई जाएंगी।
  • अब से किसी भी करदाता के लिए फॉर्म 26एएस के भाग ई में विभिन्न विवरण, जैसे कि किस तरह का लेन-देन, एसएफटी दर्ज करने वाले (फाइलर) का नाम, लेन-देन की तारीख, एकल/संयुक्त पक्ष द्वारा लेन-देन, लेन-देन करने वाले पक्षों की संख्या, धनराशि, भुगतान का तरीका और टिप्पणी, इत्‍यादि को दर्शाया जाएगा।
  • इसके अलावा, इससे अपने वित्तीय लेन-देन को अपडेट रखने वाले ईमानदार करदाताओं को अपना रिटर्न दाखिल करते समय मदद मिलेगी। वहीं, दूसरी ओर यह उन करदाताओं को निराश करेगा जो अनजाने में अपने रिटर्न में वित्तीय लेन-देन को छिपाते हैं। नए फॉर्म 26एएस में उन लेन-देन की जानकारी भी होगी जो वित्त वर्ष 2015-16 तक वार्षिक सूचना रिटर्न (एआईआर) में प्राप्त होते थे।

देश में 2023 तक शुरू होंगी निजी ट्रेनों का संचालन

  • रेलवे वर्ष 2023 में पहली 12 जोड़ी निजी ट्रेनों के संचालन की शुरुआत करेगा। इसके अगले वित्तीय वर्ष में 45 और निजी ट्रेनें चलाई जाएंगी। रेलवे ने नई टाइमलाइन जारी करते हुए कहा कि वर्ष 2027 तक रेलवे की सभी 151 निजी ट्रेनों शुरू करने की योजना है। रेलवे के नेटवर्क पर निजी कंपनियों की ट्रेने चलाने के लिए एक औपचारिक शुरुआत हो चुकी है। इसी महीने की शुरुआत में रेलवे ने 151 आधुनिक ट्रेनें चलाने के लिए कंपनियों से प्रस्ताव मांगे हैं।

पहला चरण 2023 से

  • इस योजना के तहत निजी ट्रेन के संचालन का पहला चरण मार्च, 2023 से शुरू हो जाएगा। इस परियोजना से निजी कंपनियां करीब 30 हजार करोड़ रुपये का निवेश करेंगी। इसके अलावा, निजी कंपनियों को रेलवे को उपभोग के हिसाब हाउलेज चार्ज, एनर्जी चार्ज चुकाने होंगे। अधिकारियों का कहना है कि रेलवे को इन 151 ट्रेनों के संचालन से हर साल हाउलेज चार्ज के रूप में तीन हजार करोड़ रुपये मिलेंगे।

2022-23 में 12 निजी ट्रेनें

  • इस परियोजना के लिए जरूरी शर्तें रेलवे ने आठ जुलाई को जारी की थीं। अधिकारियों का कहना है कि इन नियम-कायदों पर अंतिम फैसला नवंबर तक ले लिया जाएगा। इस योजना के टेंडर के लिए बोली मार्च, 2021 में खुलेगी और कंपनियों का चयन अगले साल 31 अप्रैल तक हो जाएगा। विभाग ने अपनी इस महत्वाकांक्षी योजना की समयसीमा जारी करते हुए 12 निजी ट्रेनें 2022-23 में शुरू करने की घोषणा की है।

151 निजी ट्रेनों का संचालन 2026-27 में

  • आधिकारिक बयान के मुताबिक, 45 निजी ट्रेनें 2023-24, 50 ट्रेनें 2025-26 और 44 से अधिक निजी ट्रेनें उसके अगले वित्तीय वर्ष में शुरू करने की बात कही है। ऐसे में रेलवे की पूरी कोशिश है कि तय समयसीमा के भीतर इन निजी ट्रेनों को पूरी तरह से शुरू किया जा सके। इसके लिए स्पेशल मैकेनिज्म तैयार किया जा रहा है। इस तरह कुल 151 निजी ट्रेनों का संचालन वित्त वर्ष 2026-27 में शुरू कर दिया जाएगा।

70 फीसद ट्रेनें भारत में ही बनेंगी

  • रेलवे ने कहा कि 70 फीसद निजी ट्रेनें भारत में ही बनाई जाएंगी। यह ट्रेने अधिकतम 160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलेंगी। 130 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली ट्रेनों की यात्रा अवधि में 10 से 15 फीसद की कमी आएगी जबकि 160 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली निजी ट्रेनों के सफर के समय में 30 फीसद तक की कमी होगी। इन रूटों पर चलने वाली सबसे तेज गति की ट्रेनों से इनके समय का मुकाबला होगा।

भारतीय रेलवे के कर्मचारी चलाएंगे ट्रेनें

  • निजी ट्रेनों का संचालन करने वाले ड्राइवर और गार्ड भारतीय रेलवे के कर्मचारी ही होंगे। इन ट्रेनों की निगरानी और रखरखाव भारतीय रेलवे के मानकों के अनुरूप ही होगा। इन ट्रेनों को 95 फीसद तक समय से चलना होगा। एक लाख किलोमीटर की यात्रा में इन ट्रेनों की विश्वसनीयता में विफलता केवल एक बार स्वीकार्य होगी। निजी कंपनियों के इन ट्रेनों के उपयुक्त संचालन में विफल रहने की सूरत में इन कंपनियों पर भारी जुर्माना भी लगेगा।

:: विज्ञान और प्रौद्योगिकी ::

कोविड-19 के लिए प्लाज्मा दान अभियान

चर्चा में क्यों?

  • केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने दिल्ली स्थित एम्स अस्पताल में प्लाज्मा दान अभियान की शुरुआत की। इस कार्यक्रम की सह-आयोजक दिल्ली पुलिस थी, दिल्ली पुलिस के कोविड-19 से स्वस्थ हुए 26 पुलिसकर्मियों ने अपनी स्वेच्छा से प्लाज्मा दान किया।

प्लाज्मा दान अभियान के बारे में

  • कोविड-19 से ठीक हुए रोगियों से प्राप्त प्लाज्मा नोवेल सार्स-सीओवी-2 वायरस के लिए सुरक्षात्मक एंटीबॉडी होती है। जब इसे शरीर में प्रवेश कराया जाता है तब यह कोविड- 19 के रोगियों में रोग प्रतिरोधक क्षमता उत्पन्न कर सकता है। इसके संभावित लाभ को ध्यान में रखते हुए, प्लाज्मा थैरेपी उन रोगियों को प्रदान की जाती है जो पारंपरिक उपचार से ठीक नहीं हो पा रहे हैं। कोई भी व्यक्ति जो कोविड-19 से ठीक हो चुका है, और उपचार या होम आइसोलेशन के बाद 28 दिन पूरा कर चुका है, जिसका वजन 50 किलो से ज्यादा है और जिसकी उम्र 18 से 60 वर्ष के बीच है, वह अपने रक्त प्लाज्मा को दान कर सकता है। उनके द्वारा प्लाज्मा दान करने से पहले, ब्लड बैंक द्वारा रक्तदान के लिए उनकी पात्रता का आकलन किया जाएगा और उनके रक्त में कोविड-19 के लिए सुरक्षात्मक एंटीबॉडी के स्तर की भी जांच की जाएगी। एक ठीक हुए व्यक्ति के रक्त में, आमतौर पर इस प्रकार के एंटीबॉडी का एक उच्च जमाव होता है और जब इसे एक अतिसंवेदनशील व्यक्ति को दिया जाता है, तो ये एंटीबॉडी रक्त में फैल जाती हैं, ऊतकों तक पहुंचते हैं और वायरस को बेअसर करते हैं। प्लाज्मा दान की प्रक्रिया एक से तीन घंटे में पूरी हो जाती है और उसी दिन प्लाज्मा को एकत्रित किया जा सकता है।

:: विविध ::

प्रख्यात गणितज्ञ सीएस शेषाद्रिका

  • प्रख्यात गणितज्ञ कांजिवरम श्रीरंगचारी शेषाद्रि यानी सीएस शेषाद्रि का निधन हो गया है। साल 2009 में उन्हें देश के तीसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्मभूषण से नवाजा गया था।
  • शेषाद्रि ने अपने करियर की शुरुआत टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च में स्नातक छात्रों के पहले बैच के रूप में की थी। 1985 में वह चेन्नई के गणितीय विज्ञान संस्थान चले गए। 1989 में उन्हें स्कूल ऑफ मैथेमेटिक्स शुरू करने का मौका मिला, जो स्पिक साइंस फाउंडेशन का हिस्सा था। उन्हें 1988 में रॉयल सोसाइटी का फेलो और 2010 में अमेरिका के नेशनल एकेडमी ऑफ साइंस का फॉरेन एसोसिएट चुना गया।

अमेरिकी नागरिक अधिकारों के चैंपियन जॉन लुइस

  • अमेरिका में नागरिक अधिकारों के लिए आंदोलन करने वाले जॉन लुइस का शनिवार को निधन हो गया था, वो 80 साल के थे। लुइस नागरिक अधिकारों के लिए आंदोलन करने वाले 'बिग सिक्स' नागरिक अधिकार कार्यकर्ताओं में से एक थे। आंदोलन करने वाले समूह का नेतृत्व मार्टिन लूथर किंग जूनियर (Martin Luther King Jr) ने किया था।

समृद्धि कालिया ने तोड़ा योग का विश्व रिकॉर्ड

  • दुबई स्थित एक भारतीय लड़की समृद्धि कालिया ने तीन मिनट के भीतर एक छोटे से बॉक्स में सौ योगासन करने का विश्व रिकॉर्ड तोड़ दिया है। उसने 11 साल की उम्र में गोल्डन बुक ऑफ व‌र्ल्ड रिकॉर्ड में गुरुवार को एक बार फिर छोटे से स्थान में सबसे तेजी से सौ योगासन करने का रिकॉर्ड दर्ज कराया। उसने बुर्ज खलीफा के व्यूइंग डेक पर तीन मिनट 18 सेकंड में यह चुनौती पूरी की। एक छोटे से बॉक्स के अंदर एक मिनट में लगभग 40 एडवांस्ड योगासन करने का खिताब पाने के कुछ ही हफ्तों बाद उसने ये तीसरा विश्व रिकॉर्ड बनाया है।

ग्रैंडमास्टर हरिकृष्णा शतरंज महोत्सव

  • भारतीय ग्रैंडमास्टर पी हरिकृष्णा ने 53वें बेल शतरंज महोत्सव में ऐक्सेंटस चेस960 (शतरंज) टूर्नामेंट के खिताब को अपने नाम किया। हरिकृष्णा (2690 रेटिंग अंक) सात मैचों में अपराजित रहते हुए 5.5 अंक लेकर शीर्ष पर रहे ।

:: प्रिलिम्स बूस्टर ::

  • हाल में भारत और चीन के सीमा विवाद के संदर्भ में चर्चा में रहे ‘देपसांग घाटी’ भारत के किस भौगोलिक भू भाग का हिस्सा है? (लद्दाख)
  • सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के संदर्भ में चर्चा में रहे ‘वेंकटचलैया आयोग’ किससे संबंधित है? (जनसंख्या नियंत्रण)
  • उच्चतम न्यायालय में याचिका से चर्चा में रहे ‘वेंकटचलैया आयोग’ ने जनसंख्या नियंत्रण हेतु संविधान के किस अनुच्छेद में संशोधन हेतु सिफारिश की थी? (अनुच्छेद-47 ए)
  • हाल ही में किस भारतीय ग्रैंडमास्टर ने 53वें बेल शतरंज महोत्सव में ऐक्सेंटस चेस960 (शतरंज) टूर्नामेंट का खिताब अपने नाम किया? (ग्रैंडमास्टर पी हरिकृष्णा)
  • हाल ही में किस भारतीय के द्वारा छोटे से स्थान में सबसे तेजी से सौ योगासन करने का रिकॉर्ड बनाते हुए गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराया? (समृद्धि कालिया)
  • हाल ही में दिवंगत हुए नागरिक अधिकारों, अहिंसा और गांधीवादी मूल्यों की पक्षधर लुइस जॉन (John Lewis) किस देश से संबंधित थे? (अमेरिका)
  • हाल ही में दिवंगत हुए कांजिवरम श्रीरंगचारी शेषाद्रि यानी सीएस शेषाद्रि को किस क्षेत्र में ख्याति हासिल थी? (गणित- बीजगणितीय ज्यामिति)
  • हाल ही में सरकार द्वारा स्पष्टीकरण से चर्चा में रहे भारतीय रेलवे द्वारा कब से निजी क्षेत्र द्वारा रेलगाड़ियों के परिचालन का कार्य प्रारंभ किया जाएगा? (मार्च 2023)
  • आयकर रिटर्न को जल्दी और सही ढंग से फाइलिंग करने हेतु आयकर विभाग द्वारा फेसलेस एसेसमेंट हेतु किस नए फार्म को उपलब्ध करवाया गया है? (फॉर्म 26एएस)
  • हाल ही में 20 राज्य/केंद्र शासित प्रदेश को जोड़ने से चर्चा में रहे ‘वन नेशन, वन राशन कार्ड’ योजना के तहत पूरे भारत को किस समय सीमा के भीतर इस तंत्र से जोड़ दिया जाएगा? (मार्च 2021)
  • पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में महात्मा बुद्ध की 1700 साल पुरानी प्रतिमा तोड़े जाने से चर्चा में रही गांधार मूर्तिकला का विकास किस काल में हुआ था? (कनिष्क प्रथम,कुषाण वंश)

स्रोत साभार: Dainik Jagran (Rashtriya Sanskaran), Dainik Bhaskar (Rashtriya Sanskaran), Rashtriya Sahara (Rashtriya Sanskaran) Hindustan Dainik (Delhi), Nai Duniya, Hindustan Times, The Hindu, BBC Portal, The Economic Times (Hindi & English), PTI, PIB