(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (2 जून 2020)

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(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (2 जून 2020)


:: राष्ट्रीय समाचार ::

विश्व दुग्ध दिवस पर भारतीय डेयरी क्षेत्र का एक समग्र अध्ययन

  • प्रतिवर्ष 1 जून को पूरे विश्व में विश्व दुग्ध दिवस (World Milk Day) मनाया जाता है। इस दिवस को मनाने का उद्देश्य डेयरी क्षेत्र के विकास, दुग्ध उत्पादन गतिविधियां एवं दूध के पोषण संबंधी महत्त्व का प्रचार प्रसार करना है। खाद्य एवं कृषि संगठन के द्वारा वर्ष 2001 से प्रति वर्ष 1 जून को इस दिवस को मनाया जा रहा है। वर्ष 2020 विश्व दुग्ध दिवस की 20वीं वर्षगांठ है।

एक पौष्टिक आहार के रूप में दूधका महत्व

  • दूध में प्रोटीन,विटामिन (ए, बी 2, डी, के),फॉस्फोरस,मैग्नीशियम, आयोडीन,वसा (फैट)समेत कई महत्वपूर्ण खनिज पाए जाते हैं। दूध के नियमित सेवन से शरीर में कैल्शियम की पर्याप्त आपूर्ति होती है जो हड्डियों को मजबूत बनाती है। उच्च मात्रा में प्रोटीन बच्चों के शारीरिक विकास समेत बड़े लोगों के मांसपेशियों की मरम्मत करती है। दूध में विटामिन जहां शरीर के इम्यून सिस्टम को बढ़िया बनाता है वही बसा पर्याप्त मात्रा में शरीर को ऊर्जा उपलब्ध करवाती है।

भारत में दुग्ध क्रांति के जन्मदाता: डॉ॰ वर्गीज़ कुरियन

  • आज भारत दुग्ध उत्पादन में विगत कई वर्षों से दुनिया में प्रथम स्थान पर काबिज है। भारत की इस उपलब्धि की शुरुआतडॉ॰ वर्गीज़ कुरियन के दृष्टि पटल पर आने से प्रारंभ होती है। डॉ वर्गीज कुरियन ने प्रतिष्ठित दुग्ध ब्रांड अमूल को स्थापित करने एवं सफलता दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अमूल की सफलता से आशान्वित होकर तात्कालिक प्रधानमंत्रीलालबहादुर शास्त्री ने अमूल मॉडल को देश के अन्य स्थानों पर फैलाने के लिए राष्ट्रीय दुग्ध विकास बोर्ड (एनडीडीबी) का गठन 1965 में किया और डॉ. कुरियन को बोर्ड का अध्यक्ष बनाया गया। डॉ वर्गीज कुरियन के नेतृत्व में 1970 में ऑपरेशन फ्लड शुरू किया जिससे भारत में श्वेत क्रांति का आगाज हुआ और भारत दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश बन गया।

भारत में दुग्ध उत्पादनकी वर्तमान स्थिति

  • भारत में दुग्ध उत्पादन में पिछले 5 वर्षों से 6.4 प्रतिशत की दर से वृद्धि हो रही है और यह 2014-15 के 146.3 मिलियन मेट्रिक टन से बढ़कर 2018-19 में 187.7 मिलियन मेट्रिक टन हो गया है।इसी तरह दूध की प्रति व्यैक्ति उपलब्ध2ता वर्ष 2013-14 के 307 ग्राम से बढ़कर वर्ष 2018-19 में 394 ग्राम के स्तिर पर पहुंच गई है।
  • वर्ष 2009 से वर्ष 2014 तक की अवधि के दौरान दूध उत्पा़दन की वार्षिक वृद्धि दर 4.2 प्रतिशत आंकी गई थी जो वर्ष 2014 से वर्ष 2019 तक की अवधि के दौरान बढ़कर 6.4 प्रतिशत हो गई है। वर्ष 2014 से वर्ष 2019 तक की अवधि के दौरान विश्वष दूध उत्पाादन की वार्षिक वृद्धि दर में 1.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
  • इस उत्पादित दूध का लगभग 54 प्रतिशत बाजार में बेचे जाने के लिए अतिरिक्ति रूप से उपलब्धे है जबकि बाकी 46 प्रतिशत स्थानीय खपत के लिए गांवों में ही है। किसानों के पास उपलब्ध विपणन योग्य अतिरिक्तू दूध में से केवल 36 प्रतिशत संगठित क्षेत्र द्वारा सहकारिता और निजी क्षेत्र के माध्य्म से समान मात्रा में बेचा जा रहा है। शेष 64 प्रतिशत अतिरिक्त् दूध को भी विभिन्न हस्तक्षेपों के माध्यम से संगठित क्षेत्र के जरिए बेचे जाने की व्यवस्था करने की आवश्यकता है। पिछले 2 वर्षों के दौरान सहकारी क्षेत्र में दूध की खरीद लगभग 9 प्रतिशत की दर से बढ़ी है।

भारत में दुग्ध उत्पादन क्षेत्र की चुनौतियां

  • भारतीय पशुओं की कम दुग्ध उत्पादन क्षमता के कारण दुग्ध उत्पादन की लागत बहुत उच्चहै। उदाहरण के लिए भारत में औसतन उत्पादन प्रतिवर्ष प्रति पशु 1806 किलोग्राम है, जबकि वैश्विक औसत प्रतिवर्ष प्रति पशु 2310 किलोग्राम है वहीं डेनमार्क में यह 6273 किग्रा प्रति वर्ष।
  • भारत में दुग्ध अवसंरचना के प्रसंस्करण एवं भंडारण हेतु बुनियादी अवसंरचना लगभग ना के बराबर है जिससे इस क्षेत्र में मूल्य संवर्धन नहीं हो पाता
  • विकसित देशों में जहां पर बड़ी डेयरी कंपनियां डेयरी फार्म ऊपरनिर्भर है तो वहीं भारत में डेयरी फार्मिंग का अभी विकास नहीं हुआ है और यह एक मात्र निर्वाह गतिविधि है।
  • जहां विकसित देशों में डेरी फार्मिंग की गतिविधियां व्यापक स्तर पर होती हैं तो वहीं भारत में प्रमुख दुग्ध उत्पादन लाखों छोटे उत्पादकों से होता है जिनके पास औसतन एक या दो दुधारू पशु होते हैं
  • जहां विदेशों में अधिकांश दुग्ध उत्पादन का विपणन संगठित क्षेत्र के द्वारा होता है वही भारत में यह मात्र 20% है जबकि बाकी दुग्ध विपणन असंगठित क्षेत्र के द्वारा होता है।
  • विकसित देशों के विपरीत भारत में दुग्ध उत्पादन एवं आपूर्ति श्रृंखला में छोटे विक्रेताओं एवं स्थानीय उत्पादकों के कारण आपूर्ति श्रृंखला बाधित होती है एवं दुग्ध उत्पादन की लागत भी बढ़ जाती है।
  • भारत में दुग्ध उत्पादन में स्वच्छता के बुनियादी मानकों का पालन नहीं किया जाता इसके साथ ही दुग्ध में कीटाणुओं और जीवाणुओं के कारण 68.5% दूषित दुग्ध की आपूर्ति होती है।
  • भारत में दुग्ध विपणन श्रृंखला में 80% से ज्यादा हिस्सा तरल दूध का होता है जबकि इसके प्रसंस्करण पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया जाता
  • इस तरह की आपूर्ति श्रृंखला, अक्षमताओं को स्पष्ट रूप से प्रभावित करती है, जहां उत्पादित दूध का एक बड़ा हिस्सा स्वच्छता के बुनियादी मानकों का पालन नहीं करता है।

डेयरी क्षेत्र का SWOT(क्षमता, चुनौतियां और आसन्न खतरे) विश्लेषण

1. डेयरी क्षेत्र के विकास की क्षमता

  • भारत में व्यापक मात्रा में उपलब्ध पशुधन की आबादी जिससे सतत पुनरुत्पादनके द्वारा भविष्य में आपूर्ति और उद्योग के विकास को जारी रखा जा सकता है। भारत में कुछ प्रमुख दूध उत्पादक नस्ल-
  1. गायों की प्रमुख देशी नस्लें : साहिवाल,लाल सिन्धी, गीर,थपाकर,काकरेज
  2. प्रमुख गायों की विदेशी नस्लें: जर्सी (जर्सी द्वीप),हौल्सटी- फ्रीजियन (नीदर लैण्ड), ब्राउन स्विस (स्विटजरलैण्ड)
  3. संकर गाय:1. करन फ्रीज, करन स्विस-
  4. भैसों की प्रमुख नस्लें: मुर्रा(हरियाणा एवं पंजाब), मेहसाना (गुजरात), सूरती (गुजरात), नीली-राबी (पंजाब)
  • यद्यपि भारतीय दुधारू पशुओं की उत्पादकता कम है लेकिन इन पशुओं के दुग्ध उत्पादन क्षमता में सुधार की व्यापक गुंजाइश है।
  • भारतीय अर्थव्यवस्था में लगातार हो रही वृद्धि आय को बढ़ाएगी जिससे मध्यमवर्ग की क्रय शक्ति क्षमता में वृद्धि होगी एवं यह मांग को बनाए रखेगी।
  • भारतीय लोगों में दूध का उपयोग दैनिक आहार का हिस्सा है जो दूध की मांग में लगातार वृद्धि को आश्वस्त करती है।
  • कृषि के उपरांत फसल अवशिष्ट कम लागत के चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करती है जिससे दुग्ध उत्पादन की लागत कम रखने में मदद मिलेगी।
  • भारत में दुग्ध उत्पादन क्षेत्र में सहकारी संरचना का व्यापक विकास हुआ है जिससे दुग्ध सहकारी समितियां किसानों को दुग्ध का उचित मूल्य दिलाने में सक्षम है।

2. भारतीय डेयरी क्षेत्र की चुनौतियां

  • मिश्रित नस्ल और उच्च दुग्ध देने वाली पशुओं की सीमित मात्रा एवं डेयरी क्षेत्र में कम दूध देने वाली पशुओं की ज्यादा मात्रा
  • सड़क जैसे संचार मार्ग समेत अवसंरचना का कम विकास जिससे किसानों को प्रसंस्करण हेत कच्चे दूध की आपूर्ति में दिक्कत आती है।
  • भारत के अधिकांश डेरी फार्म आधुनिक वैज्ञानिक डेयरी तकनीकों से अनभिज्ञ हैं एवं वे स्वच्छ दुग्ध उत्पादन और एकीकृत आपूर्ति श्रृंखला को बनाए रखने में अक्षम है।
  • इसके अलावा डेयरी उद्योग की कम विकास दर, निवेश पर कम रिटर्न, अनुसंधान की कमी, विश्वसनीय दुग्ध उत्पादन के डाटा का अभाव एवं डेयरी क्षेत्र में निवेशकों की कमी इस क्षेत्र की प्रमुख समस्या है।

3. डेयरी क्षेत्र पर आसन्न खतरे

  • नगरीकरण और औद्योगिकरण के कारण दूध की मांग में वृद्धि से इस क्षेत्र पर दबाव ज्यादा है एवं अत्यधिक चराई से भूमि के क्षरण की संभावना लगातार बढ़ती जा रही है।
  • पशुओं के मिश्रित नस्लों के कारण कई सारे देसी नस्लों के अस्तित्व पर संकट आ गया है।
  • दूध में मिलावट और सिंथेटिक दूधों के कारण उपभोक्ता का विश्वास लगातार कम हो रहा है। इसी का कारण है कि लोग सोया मिल्क, कोकोनट मिल्क जैसे विकल्पों को बढ़ावा दे रहे हैं जिससे डेयरी के दूध की मांग में कमी आ रही है।
  • अभी भी दुग्ध उत्पादन क्षेत्र में मध्यस्थ लोगों का बोलबाला है जो दुग्ध उत्पादन की आपूर्ति श्रृंखला को व्यापक स्तर से लगातार प्रभावित कर रहे हैं जिससे एक और किसानों को कम मूल्य मिलता है तो वहीं उपभोक्ता को अधिक मूल्य देना पड़ता है।
  • किसानों में जागरूकता का घोर अभाव है उदाहरण के लिए सूक्ष्मजीव, रासायनिक संदूषक और अवशिष्ट एंटीबायोटिक दवाओं के संदर्भ में वह घोर अनभिज्ञता का परिचय देते हैं।

भारत में डेयरी उद्योग समेत पशुपालन उद्योग को बढ़ावा देने वाले कोर कार्यक्रम

  • राष्ट्रीय डेयरी योजना चरण I (NDP I)
  • गोजातीय प्रजनन और डेयरी विकासपर राष्ट्रीय कार्यक्रम (NPBBDD)
  • राष्ट्रीय पशुधन मिशन (एनएलएम)
  • पशुधन स्वास्थ्य और रोग नियंत्रण (एलएच और डीसी)
  • डेयरी उद्यमिता विकास योजना (DEDS)
  • राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY)
  • राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम)
  • कोल्ड चेन के लिए स्कीम, वैल्यू एडिशन और संरक्षण अधोसंरचना
  • राष्ट्रीय गोकुल मिशन
  • एफएमडी और ब्रुसेलोसिस के लिए राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम
  • राष्ट्रव्यापी कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम (एनएआईपी)
  • गुणवत्ता दुग्धक कार्यक्रम

क्या होना चाहिए आगे की राह?

  • सरकार के द्वारा दुग्ध उत्पाद अवसंरचना निर्माण एवं इस क्षेत्र में निजी क्षेत्र को बढ़ावा देना चाहिए । भारत द्वारा किसानों की 2 गुना आय बढ़ाने में इस क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है इसके लिए किसानों को उचित प्रशिक्षण, उच्च नस्ल के पशुओं की उपलब्धता, पशुओं की सार्वभौमिक ब्रीडिंग, पशु रोग नियंत्रण एवं चिकित्सकों का सर्वसुलभ होना इत्यादि कदम उठाना आवश्यक है। आपूर्ति श्रृंखला में मध्यस्थों का उन्मूलन आवश्यक है क्योंकि बिना इसके आपूर्ति श्रृंखला बढ़िया नहीं होगी एवं इससे ना किसानों को फायदा होगा और ना ही उपभोक्ता को। इसी के साथ किसानों को स्वयंसेवी संगठनों इत्यादि के द्वारा जागरूक बनाकर सतत कृषि को बढ़ावा देते हुए पशुपालन को ग्रामीण आजीविका का एक अभिन्न अंग बनाने के लिए किसानों को प्रोत्साहित करना चाहिये।

प्रधान मंत्री की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल के महत्वपूर्ण निर्णय

  • प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल की सोमवार 1 जून 2020 को बैठक हुई। केंद्र सरकार द्वारा अपने दूसरे वर्ष के कार्यकाल में प्रवेश करने के बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल की यह पहली बैठक थी।बैठक में ऐसे ऐतिहासिक फैसले लिए गए जिनका भारत के मेहनती किसानों, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम (एमएसएमई) क्षेत्र और रेहड़ी विक्रेताओं के रूप में काम करने वाले लोगों के जीवन पर एक परिवर्तनकारी प्रभाव पड़ेगा।सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम जिन्हें लोकप्रिय रूप से एमएसएमई कहा जाता है भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। देश भर के विभिन्न क्षेत्रों में चुपचाप काम करते हुए 6 करोड़ से अधिक एमएसएमई की एक मजबूत और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका है।
  • केंद्र सरकार ने आज आत्मनिर्भर भारत पैकेज के तहत अन्य घोषणाओं के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए रोड मैप भी तैयार किया है। इसमें शामिल है:
  1. एमएसएमई परिभाषा में बढ़ोतरी का संशोधन। यह व्यवसाय करने को आसान बनाने की दिशा में एक और कदम है। यह एमएसएमई क्षेत्र में निवेश को आकर्षित करने और अधिक नौकरियां पैदा करने में मदद करेगा;
  2. तनावग्रस्त एमएसएमई को इक्विटी सहायता प्रदान करने के लिए अधीनस्थ ऋण के रूप में 20,000 करोड़ रुपये के प्रावधान का प्रस्ताव आज कैबिनेट द्वारा औपचारिक रूप से अनुमोदित किया गया है। इससे 2 लाख स्ट्रेस्ड एमएसएमई को फायदा होगा।
  3. एमएसएमई के लिए 50,000 करोड़ रुपये के इक्विटी निवेश के लिए प्रस्ताव को भी आज कैबिनेट ने अनुमोदित कर दिया। यह एमएसएमई को ऋण-इक्विटी अनुपात के प्रबंधन और उनकी क्षमता वृद्धि में मदद करने के लिए एक ढांचा तैयार करेगा। यह उन्हें स्टॉक एक्सचेंजों में सूचीबद्ध होने का अवसर भी प्रदान करेगा।

एमएसएमई के लिए मदद का हाथ:

एमएसएमई परिभाषा में बढ़ोतरी का संशोधन:

  • भारत सरकार ने आज एमएसएमई परिभाषा को और संशोधित करने का निर्णय लिया। पैकेज घोषणा में सूक्ष्म मेन्यूफ़ेक्चरिंग और सेवा इकाई की परिभाषा को बढ़ाकर एक करोड़ रुपयों के निवेश तथा 5 करोड़ रुपयों का कारोबार कर दिया गया है।
  • लघु इकाई की सीमा बढ़ा कर 10 करोड़ रुपये का निवेश तथा 50 करोड़ रुपये का टर्नओवर कर दिया गया है। इसी प्रकार एक मध्यम इकाई की निवेश सीमा को बढ़ाकर 20 करोड़ रुपये तथा 100 करोड़ रुपये का कारोबार कर दिया गया है। गौरतलब है कि 2006 में एमएसएमई डेवलपमेंट एक्ट के अस्तित्व में आने के 14 साल बाद यह संशोधन किया गया है। पैकेज की 13 मई, 2020 को घोषणा के बाद अनेक प्रतिनिधित्व मिले थे कि घोषित संशोधन अब भी बाजार और मूल्य निर्धारण की स्थिति के अनुरूप नहीं है और इसे ऊपर की तरफ और संशोधित किया जाना चाहिए। इन अभ्यावेदनों को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री ने मध्यम मेन्यूफ़ेक्चरिंग और सेवा इकाइयों की सीमा को और बढ़ाने का निर्णय लिया। अब यह 50 करोड़ रूपये के निवेश और 250 करोड़ रुपये के कारोबार की सीमा का होगा।
  • यह भी निर्णय लिया गया है कि निर्यात के संबंध में कारोबार को एमएसएमई इकाइयों की किसी भी श्रेणी के लिए टर्नओवर की गणना में नहीं गिना जाएगा, चाहे वह सूक्ष्म, लघु या मध्यम हो।

मेहनती रेहड़ी विक्रेताओं की मदद:

  • आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय ने रेहड़ी विक्रेताओं को सस्ते ब्याज पर ऋण प्रदान करने के लिए एक विशेष माइक्रो-क्रेडिट सुविधा योजना – पीएम स्व-निधि (PMSVANidhi) प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्म निर्भर निधि शुरू की है। यह योजना उन्हें फिर से काम शुरू करने और अपनी आजीविका कमाने में सक्षम बनाने के लिए एक लंबा रास्ता तय करेगी।विभिन्न क्षेत्रों संदर्भों में वेंडर, हॉकर, ठेले वाले, रेहड़ी वाले, ठेली फलवाले आदि सहित 50 लाख से अधिक लोगों को इस योजना से लाभ मिलने की संभावना है।
  • उनके द्वारा आपूर्ति की जाने वाली वस्तुओं में सब्जियां, फल, रेडी-टू-ईट स्ट्रीट फूड, चाय, पकौड़े, ब्रेड, अंडे, वस्त्र, परिधान, जूते, कारीगर उत्पाद, किताबें/स्टेशनरी आदि शामिल हैं। सेवाओं में नाई की दुकानें, मोची, पान की दूकानें व कपड़े धोने की दूकानें शामिल हैं।वे लोग कोविड-19 संकट के मद्देनजर जिन समस्याओं का सामना कर रहें है, उनके प्रति भारत सरकार संवेदनशील है। ऐसे समय मेंउन्हें अपने व्यापार को बढ़ावा देने के लिए सस्ती क्रेडिट प्रदान करना सुनिश्चित करने की तत्काल आवश्यकता है।
  • शहरी स्थानीय निकाय इस योजना के कार्यान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।यह योजना कई कारणों से विशेष है:

पहली ऐतिहासिक योजना:

  1. यह भारत के इतिहास में पहली बार हुआ है कि शहरी/ग्रामीण क्षेत्रों के आस-पास सड़क पर माल बेचने वाले विक्रेता शहरी आजीविका कार्यक्रम के लाभार्थी बन गए हैं।वेंडर 10,000 रुपये तक की कार्यशील पूंजी ऋण का लाभ उठा सकते हैं किसे वे एक वर्ष में मासिक किस्तों में चुका सकते हैं। ऋण की समय पर/जल्दी चुकौती करने पर7% प्रति वर्ष की दर से ब्याज सब्सिडी लाभार्थियों के बैंक खातों में प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण के माध्यम से छह मासिक आधार पर जमा की जाएगी। ऋण के समय से पहले चुकाने पर कोई पेनल्टी नेहीन ली जाएगी।
  2. इस योजना में ऋण सीमा को समय पर/शीघ्र चुकाने के लिए ऋण की सीमा में वृद्धि करने में मदद मिलती है ताकि विक्रेता को आर्थिक सीढ़ी पर ऊपर चढ़ने की अपनी महत्वाकांक्षा को पूरा करने में मदद मिल सके। यह पहली बार है कि एमएफआई/गैर बैंकिंग वित्तीय संस्थान/स्वयं सहायता समूह बैंकों को उनके जमीनी स्तर की उपस्थिति और सड़क पर माल बेचने वालों सहित शहरी गरीबों के साथ निकटता के कारण शहरी गरीबों की इस योजना में अनुमति दी गई है।

सशक्तिकरण के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग:

  1. प्रभावी वितरण और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए प्रौद्योगिकी का लाभ उठाने की सरकार की दृष्टि के अनुरूप इस योजना को एंड-टू-एंड समाधान के साथ संचालित करने के लिए वेब पोर्टल/मोबाइल ऐप के साथ एक डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित किया जा रहा है। यह आईटी प्लेटफॉर्म वेंडर्स को औपचारिक वित्तीय प्रणाली में समाहित करने में भी मदद करेगा।
  2. यह प्लेटफ़ॉर्म क्रेडिट प्रबंधन के लिए सिडबी के उद्यमी मित्र पोर्टल और आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के पैसा पोर्टल के साथ एकीकृत करेगा ताकि ब्याज सब्सिडी को स्वचालित रूप से नियंत्रित किया जा सके।

डिजिटल लेनदेन को प्रोत्साहित करना

  • यह योजना सड़क पर माल बेचने वालों को मासिक नकद वापसी के जरिये डिजिटल लेनदेन को प्रोत्साहित करेगी।

क्षमता निर्माण पर ध्यान:

  • आवास और शहरी मामलों का मंत्रालय राज्य सरकारों, दीनदयाल अंत्योदय योजना– नेशनल अर्बन लाइवलीहुड मिशन, शहरी स्थानीय निकाय, सिडबी, क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट फॉर माइक्रो एंड स्माल एंटरप्राइज़ेस, भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम और डिजिटल पेमेंट एग्रीगेटर्स के राज्य मिशन के साथ मिल कर सभी हितधारकों और आईईसी गतिविधियों की क्षमता निर्माण के लिए वित्तीय साक्षरता कार्यक्रम का जून में पूरे देश में शुभारंभ करेगा। जुलाई के महीने में ऋण दिया जाना शुरू हो जाएगा।

जय किसान की भावनाके लिए किसानो की मदद :

  • खरीफ सीजन 2020-21 के लिए सरकार ने उत्पादन की लागत का कम से कम 1.5 गुना के स्तर पर न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करने का अपना वादा निभाया है।कृषि लागत और मूल्य आयोग की सिफारिश के आधार पर आज खरीफ सीजन 2020-21 के लिए 14 फसलों के न्यूनतम समर्थन दामों की घोषणा की गई है। इन 14 फसलों के लिए लागत पर वापसी 50% से 83% तक होगी।
  • भारत सरकार ने बैंकों द्वारा कृषि और संबद्ध गतिविधियों के लिए दिये गए 3 लाख रुपये तक के सभी अल्पकालिक ऋणों की पुनर्भुगतान तिथि को 31.08.2020 तक बढ़ाने का भी निर्णय लिया है। किसानों को ब्याज सबवेंशन और शीघ्र पुनर्भुगतान प्रोत्साहन का लाभ भी मिलेगा।ऐसे अल्पकालिक कृषि ऋण जिनका भुगतान 1 मार्च 2020 से 31 अगस्त, 2020 के बीच ड्यू है उन्हें बैंकों के 2% ब्याज सबवेंशन का और किसानों को 3% शीघ्र पुनर्भुगतान प्रोत्साहन का लाभ लगातार मिलता रहेगा।
  • बैंकों के माध्यम से बैंकों को 2% प्रतिवर्ष ब्याज सबवेंशन के साथ किसानों को 7% प्रति वर्ष की दर से ऋण और किसानों द्वारा समय पर पुनर्भुगतान पर 3% अतिरिक्त लाभ के साथ किसानों को ऐसे ऋण उपलब्ध कराने का भारत सरकार का निर्णय का अर्थ हुआ कि 3 लाख रुपयों तक के ऋण 4% सालाना ब्याज दर पर उपलब्ध होंगे।
  • किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से मिलने वाले ऋण सहित रियायती अल्पकालिक फसली ऋण प्रदान करने के लिए ब्याज निवारण योजना शुरू की गई है। पिछले कुछ हफ्तों में कई किसान अपने अल्पकालिक फसल ऋण बकाया के भुगतान के लिए बैंक शाखाओं तक पहुंचने में सक्षम नहीं हो सके हैं। इस कैबिनेट फैसले से करोड़ों किसानों को मदद मिलेगी।

गरीबों का ध्यान रखना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता:

  • गरीबों और जरूरतमंदों का ध्यान रखना प्रधानमंत्री के नेतृत्व वाली सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता रही है। कोरोना वायरस महामारी के दौरान लॉकडाउन की घोषणा के पहले दिन से ही सरकार गरीबों और जरूरतमंदों के प्रति संवेदनशील रही है। लॉकडाउन शुरू होने के दो दिन के भीतर 26 मार्च, 2020 को प्रधानमंत्री ग़रीब कल्याण योजना पैकेज की घोषणा में इस संवेदनशीलता की झलक देखने को मिलती है. सरकार की ओर से जो क़दम उठाए गए उनमें 80 करोड़ लोगों को खाद्य सुरक्षा का लाभ सुनिश्चित करना, 20 करोड़ महिलाओं के बैंक खातों में नक़दी का हस्तांतरण करना, वरिष्ठजन, ग़रीब विधवाओं और ग़रीब निःशक्तजन के खातों में पैसा डालना तथापी एम किसान के तहत करोड़ों किसानों को वित्तीय सहायता मुहैया कराना शामिल है।
  • सरकार के इन कदमों से उन संवेदनशील तबकों को भारी मदद मिली जिनके लॉकडाउन से सबसे ज़्यादा प्रभावित होने की आशंका थी। और यह केवल घोषणाएँ साबित नहीं हुई, बल्कि कुछ ही दिनों में करोड़ों लोगों को नगद अथवा अन्य सामग्री के रूप में सहायता प्राप्त हुई। आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत “एक देश एक राशन कार्ड योजना” के तहत उन लोगों को नि:शुल्क खाद्यान्न उपलब्ध कराया गया जिनके पास राशन कार्ड नहीं थे। इन वर्गों के लोगों के लिए आवास हेतु एक नई किराया योजना भी शुरू की गई। प्रवासी श्रमिकों के कल्याण के लिए भी कई उपायों कीघोषणा की गई है।
  • किसानों के कल्याण के लिए व्यापक सुधारों की घोषणा की गई है। ऐसी कई बेड़ियों को तोड़ा गया जिससे किसान बंधा हुआ था ताकि वह अपनी आमदनी में भी व्यापक इज़ाफ़ा कर सके। इसके साथ ही कृषि अवसंरचना में निवेश के कई उपाय प्रस्तावित किए गए। मत्स्यपालन जैसी सहायक कृषि गतिविधियों को भी वित्तीय पैकेज में शामिल किया गया।

खेलो इंडिया ई पाठशाला कार्यक्रम

  • खेल मंत्री किरेन रीजीजू और आदिवासी कल्याण मंत्री अर्जुन मुंडा ने सोमवार को यहां वेबीनार के साथ खेलो इंडिया ई-पाठशाला का उद्घाटन किया जिसमें देश भर के युवा तीरंदाजों, तीरंदाजी के कोचों और इस खेल से जुड़े विशेषज्ञों ने भाग लिया।
  • ई-पाठशाला के जरिये उन खिलाड़ियों को कोचिंग और शिक्षा मिल सकेगी जो दूरस्थ क्षेत्रों में रहते हैं। भारतीय खेल प्राधिकरण (साइ) ने राष्ट्रीय खेल महासंघों (एनएसएफ) के साथ मिलकर हाल में यह कार्यक्रम शुरू किया था।
  • कार्यक्रम में 21 खेलों को शामिल किया गया हैं। इनमें एथलेटिक्स, तीरंदाजी, मुक्केबाजी, साइकिलिंग, तलवारबाजी, फुटबॉल, जिम्नास्टिक, हॉकी, जूडो, कयाकिंग एवं कैनोइंग, कबड्डी, पैरा खेल, रोइंग, निशानेबाजी, ताइक्वांडो, टेबल टेनिस, वॉलीबॉल, भारोत्तोलन, कुश्ती और वुशु शामिल हैं। कार्यक्रम में सीनियर कोच भाग लेंगे और यह खेल वैज्ञानिकों, हाई परफोरमेन्स निदेशकों और मैनेजरों की समिति की देखरेख में संचालित किया जाएगा। यह समिति नियमित आधार पर अपना फीडबैक साझा करेगी।

वन नेशनवन कार्ड योजना

  • हाल ही में 'एकीकृत सार्वजनिक वितरण प्रणाली' (आईएम-पीडीएस) की योजना में तीन और राज्यों - ओडिशा, सिक्किम और मिजोरम को शामिल हो गए।

क्या है वन नेशनवन कार्ड योजना?

  • “वन नेशन वन राशन कार्ड” योजना राष्ट्रव्यापी पोर्टेबिलिटी के माध्यम से राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) के पात्र राशन कार्ड धारकों को किसी भी सार्वजनिक वितरण केन्द्र से सब्सिडी वाले खाद्यान्न अपने कोटे के हिसाब से प्राप्त करने के लिए लागू की गई है। लाभार्थी इन केन्द्रों पर इलेक्ट्रानिक प्वाइंट आफ सेल (ईपीओएस) पर आधार प्रमाणीकरण के बाद अपने मौजूदा राशन कार्ड का उपयोग कर इस सुविधा का लाभ ले सकते हैं।
  • अब तक यह सुविधा आंध्र प्रदेश, बिहार, दादरा और नगर हवेली और दमन और दीव, गोवा, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, केरल, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, पंजाब, तेलंगाना, त्रिपुरा और उत्तर प्रदेश,महाराष्ट्र और राजस्थान जैसे 17 राज्यों / केंद्रशासित प्रदेशों में उपलब्ध कराई गई है। इसके अलावा, खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग अन्य राज्यों / केंद्रशासित प्रदेशों के लाभार्थियों के लिए भी राष्ट्रीय पोर्टेबिलिटी की पहुंच का विस्तार करने के लिए संबंधित राज्य / केन्द्र शासित प्रदेशों की सरकारों के साथ सहयोग करने का प्रयास कर रहा है। इस प्रयास में तीन नए राज्यों को राष्ट्रीय क्लस्टर के साथ एकीकृत करने के लिए आवश्यक प्रारंभिक गतिविधियाँ जैसे इपीओएस सॉफ़्टवेयर का उन्नयन, केंद्रीय आईएम .पीडीएस और अन्नवितरण पोर्टलों के साथ एकीकरण, केंद्रीय भंडार में राशन कार्ड / लाभार्थियों के डेटा की उपलब्धता और राष्ट्रीय पोर्टेबिलिटी के तहत लेनदेन के आवश्यक परीक्षण को भी केंद्रीय एनआईसी टीम के समर्थन से पूरा किया गया है।

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डिप्लोमैटिक इम्युनिटी

चर्चा में क्यों?

  • पाक हाई कमीशन के दो अधिकारियों को जासूसी करते रंगे हाथों पकड़ा गया है, जिनका नाम आबिद हुसैन और ताहिर हुसैन है। विदेश मंत्रालय के अनुसार दोनों को पर्सन नॉन-ग्रेटा यानी अवांछित व्यक्ति घोषित कर दिया गया है और उन्हें 24 घंटे में देश छोड़ना होगा।
  • पाकिस्तान हाई कमीशन के इन दोनों लोगों पर भारत में मुकदमा इसलिए नहीं चलाया जा सकता है क्योंकि ये लोग डिप्लोमैट यानी राजनयिक हैं। डिप्लोमैटिक इम्युनिटी के तहत किसी भी राजनयिक पर दूसरे देश में मुकदमा नहीं चल सकता है। ये एक तरह का अंतरराष्ट्रीय कानून है, जो राजनयिकों को दूसरे देश में सुरक्षा देता है।

क्या है डिप्लोमैटिक इम्युनिटी?

  • डिप्लोमैटिक इम्युनिटी के तहत किसी भी देश के राजनियक और उसके परिवार की दूसरे देश में सुरक्षा करनी होती है। यानी जैसे पाकिस्तान का राजनयिक है तो उसकी भारत में हर हाल में सुरक्षा करनी होगी। ठीक ऐसे ही भारत के राजनयिक को पाकिस्तान में वहां की पुलिस या सेना कोई नुकसान नहीं पहुंचा सकती। देशों के पास सिर्फ इतना ही विकल्प होता है कि राजनयिक अगर किसी गैर-कानूनी काम में लिप्त पाया जाता है तो उसे उसके देश वापस भेज दिया जाए। 1961 की वियना कन्वेंसन ऑन डिप्लोमैटिक रिलेशन्स के जरिए इसे लागू किया गया है।

कहां से आई से डिप्लोमैटिक इम्युनिटी?

  • डिप्लोमैटिक इम्युनिटी का कॉन्सेप्ट आज से नहीं, बल्कि रामायण-महाभारत के वक्त से है। यानी डिप्लोमैटिक इम्युनिटी 1 लाख साल पुरानी परंपरा है, जिसमें वक्त के साथ थोड़ बहुत बदलाव होते रहे हैं। तब भी किसी भी राजदूत को नुकसान नहीं पहुंचाया जा सकता था। जब रावण ने हनुमान जी को मारने का आदेश दिया था तो उसके छोटे भाई विभीषण ने तुरंत कहा था कि नियम के मुताबिक किसी भी राजनयिक को नहीं मारा जा सकता है।

राजनयिक को कब हिरासत में लिया जा सकता है?

  • अगर किसी राजनयिक से कोई खतरा हो, सिर्फ तभी उसे हिरासत में लिया जा सकता है। वो भी ये सुनिश्चित करते हुए कि उसे कोई चोट ना पहुंचे।

किस स्थिति में दूसरे देश में चल सकता है राजनयिक पर मुकदमा?

  • ऐसा सिर्फ एक ही स्थिति में हो सकता है जब राजनयिक पर से डिप्लोमैटिक इम्युनिटी को हटा लिया जाए और ऐसा सिर्फ राजनियक का देश ही कर सकता है। हालांकि, अपने ही राजनयिक पर दूसरे देश में मुकदमा चलना शर्म की बात होती है, इसलिए ऐसा होता बहुत ही कम है। हां वो बात अलग है कि राजनयिक के देश वापस आने के बाद वहां पर उसके खिलाफ कोई मुकदमा चलाया जाए।

:: अर्थव्यवस्था ::

चैंपियन्स पोर्टल

चर्चा में क्यों?

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चैंपियन्स यानी क्रिएशन एंड हार्मोनियस एप्लीकेशन ऑफ मार्डन प्रोसेसेज फॉर इंक्रीजिंग द आउटपुट एंड नेशनल स्ट्रेंथ नाम के पोर्टल को लॉन्च किया।

क्या है चैंपियन्स पोर्टल?

  • चैंम्पियन्स पोर्टल को एमएसएमई का इन छोटी इकाइयों के लिए वन स्टॉप साल्यूशन माना जा रहा है। ये पोर्टल टेक्नोलॉजी पर आधारित मैनेजमेंट इन्फॉर्मेशन सिस्टम है। साथ ही ये पोर्टल सेक्टर की प्रशासनिक बाधाओं को दूर कर हर चुनौती को अवसर में बदलने का जरिया बन सकता है।
  • चैंपियन्स पोर्टल आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस, डेटा एनालिटिक्स और मशीन लर्निंग से लैस किया गया है। इससे कारोबारियों की शिकायत के बिना भी उनकी समस्या निपटाई जा सकेगी। उदाहरण के लिए अगर कोई एक बैंक कारोबारियों के लोन आवेदन को बार-बार रद कर रहा है या किसी एक क्षेत्र में एक ही तरह की समस्या ज्यादा हो रही है तो आर्टिफीशियल इंटेलीजेंस से ये समस्या चैंपियन्स पोर्टल पर दिखने लगेगी जिसे अधिकारी निपटा सकते हैं।
  • चैंपियन्स देश का पहला ऐसा पोर्टल है जिसे भारत सरकार की मुख्य केन्द्रीकृत लोक शिकायत निवारण और निगरानी प्रणाली यानी सीपी ग्राम्स से जोड़ा गया है। यानी अगर किसी ने सीपीग्राम्स पर शिकायत कर दी तो ये सीधे चैंपियन्स पोर्टल पर आ जाएगी। पहले ये शिकायत मंत्रालयों को भेजी जाती थी जिसे मंत्रालय के सिस्टम पर कापी किया जाता था। इससे शिकायतों को निपटाने की व्यवस्था तेज होगी।

कैबिनेट ने एमएसएमई क्षेत्रक सुधार के लिए नयी पहल और पैकेज

  • भारत सरकार के देश के एमएसएमई सेक्टर में नई जान फूंकने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों के क्रम में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति (सीसीईए) की एक विशेष बैठक हुई, जिसमें आत्मनिर्भर भारत पैकेज के अंतर्गत शेष दो घोषणाओं के प्रभावी कार्यान्वयन के तौर-तरीकों और रोडमैप को स्वीकृति दे दी गई। इनमें शामिल हैं :

एमएसएमई की नयी परिभाषा

  • पैकेज घोषणा में, सूक्ष्म विनिर्माण और सेवा इकाई (माइक्रो) की ऊपरी सीमा को बढ़ाकर 1 करोड़ रुपये का निवेश और 5 करोड़ रुपये का टर्नओवर किया गया है। छोटी इकाई की ऊपरी सीमा को बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये का निवेश और 50 करोड़ रुपये का टर्नओवर किया गया है। इसी तरह मध्यम इकाई की सीमा को बढ़ाकर 20 करोड़ रुपये का निवेश और 100 करोड़ का टर्नओवर कर दिया गया है। उल्लेखनीय है कि यह संशोधन एमएसएमई विकास अधिनियम के 2006 में लागू होने के 14 वर्षों के बाद किया गया है।
  • 13 मई, 2020 को पैकेज की घोषणा के बाद, कई प्रतिनिधिमंडलों ने यह तथ्य सामने रखा कि घोषित संशोधन अभी भी बाजार और मूल्य स्थितियों के अनुरूप नहीं है और ऊपरी सीमा को और संशोधित किया जाना चाहिए। इन अनुरोधों को ध्यान में रखते हुए, मध्यम विनिर्माण और सेवा इकाइयों की सीमा को और बढ़ाने का निर्णय लिया गया। अब इसके लिए 50 करोड़ रुपये के निवेश और 250 करोड़ रुपये के कारोबार की ऊपरी सीमा निर्धारित की गयी है।
  • यह भी तय किया गया है कि निर्यात के सन्दर्भ में कारोबार को एमएसएमई इकाइयों की किसी भी श्रेणी के लिए कारोबार की सीमा में शामिल (जोड़ा) नहीं किया जाएगा चाहे वह सूक्ष्म, लघु या मध्यम, किसी भी श्रेणी का उद्यम हो। यह व्यापार करने में आसानी की दिशा में एक और कदम है। यह एमएसएमई क्षेत्र में निवेश को आकर्षित करने और रोजगार के अधिक अवसरों के सृजन करने में सहायता प्रदान करेगा।

संकटग्रस्त एमएसएमई को पूंजी सहायता

  • संकटग्रस्त एमएसएमई को सहायक कर्ज के रूप में पूंजी सहायता उपलब्ध कराने के लिए 20,000 करोड़ रुपये के प्रावधान को स्वीकृति दी गई है। इससे संकट में फंसे 2 लाख एमएसएमई को मदद मिलेगी।
  • फंड ऑफ फंड्स (एफओएफ) के माध्यम से एमएसएमई के लिए 50,000 करोड़ रुपये की पूंजी लगाए जाने को स्वीकृति दी गई है। इससे एमएसएमई को क्षमता विस्तार में सहायता देने के लिए एक तंत्र स्थापित किया जाएगा। इससे उन्हें खुद को स्टॉक एक्सचेंजों में सूचीबद्ध कराने का भी अवसर मिलेगा।
  • आज की स्वीकृति से आत्मनिर्भर भारत के पूरे भाग के लिए तौर-तरीके और रोडमैप अस्तित्व में आ गए हैं। इससे एमएसएमई क्षेत्र में निवेश आकर्षित करने और ज्यादा रोजगार के अवसर पैदा करने में सहायता मिलेगी।
  • कोविड-19 महामारी के प्रकोप के क्रम में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी राष्ट्र के निर्माण में एमएसएमई की भूमिका को मान्यता देने के लिए तत्परता से आगे आए थे। इसी क्रम में आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत एमएसएमई के लिए कई अहम घोषणाएं की गईं। इस पैकेज के अंतर्गत, एमएसएमई क्षेत्र के लिए न सिर्फ खासा आवंटन किया गया, बल्कि अर्थव्यवस्था के पुनरोद्धार के उपायों के कार्यान्वयन में भी प्राथमिकता दी गई। एमएसएमई क्षेत्र को फौरी राहत देने के लिए पैकेज के अंतर्गत कई घोषणाएं की गईं। इसमें सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण घोषणाएं इस प्रकार हैं :
  1. परिचालन संबंधी जिम्मेदारियां पूरी करने, कच्चा माल खरीदने और कारोबार फिर से शुरू करने के लिए एमएसएमई के लिए 3 लाख करोड़ रुपये के गिरवी मुक्त स्वचालित कर्ज।
  2. क्षेत्र को अधिकतम लाभ देने के लिए एमएसएमई की परिभाषा में संशोधन;
  3. घरेलू कंपनियों को ज्यादा अवसर मुहैया कराने के लिए 200 करोड़ रुपए तक की खरीद के लिए वैश्विक निविदाओं की अनुमति नहीं,
  4. सरकार और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों द्वारा 45 दिन के भीतर एमएसएमई के बकायों का भुगतान करना।

एमएसएमई क्षेत्रक के लिए उठाये गए अन्य महत्वपूर्ण कदम

  • भारत सरकार इस दिशा में हर जरूरी कदम उठा रही है, जिससे इन प्रमुख फैसलों का एमएसएमई को जल्द से जल्द लाभ मिलना सुनिश्चित हो सके। इस संबंध में निम्नलिखित आवश्यक नीतिगत फैसले पहले ही लिए जा चुके हैं और कार्यान्वयन की रणनीति को लागू कर दिया गया है।
  1. तीन लाख करोड़ रुपये के गिरवी मुक्त स्वचालित कर्जों की योजना को सीसीईए द्वारा पहले ही स्वीकृति दी जा चुकी है और औपचारिक रूप से इसकी पेशकश की जा चुकी है।
  2. एमएसएमई की परिभाषा की ऊपरी सीमा में संशोधन के तौर-तरीके तय कर दिए गए हैं, जिससे एमएसएमई को अपनी क्षमताओं के ज्यादा से ज्यादा दोहन के अवसर मिलेंगे।
  3. इसी प्रकार, 200 करोड़ रुपये तक की खरीद के लिए अनिवार्य रूप से वैश्विक निविदाएं आमंत्रित नहीं करने के लिए सामान्य वित्तीय नियमों में संशोधन किया गया है। नए नियम पहले ही जारी कर दिए गए हैं और वे प्रभावी भी हो गए हैं। इससे भारतीय एमएसएमई के लिए कारोबार के नए अवसर मिलेंगे।
  4. एमएसएमई को 45 दिन की समयसीमा के भीतर भुगतान सुनिश्चित करने के लिए कैबिनेट सचिव, व्यय सचिव और सचिव, एमएसएमई के स्तर पर दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
  5. एमएसएमई पर बोझ कम करने के लिए, आरबीआई ने कर्ज अदायगी के लिए समय सीमा की छूट में और तीन महीने का विस्तार दिया है
  • इन सभी कदमों के प्रबंधन के लिए एमएसएमई मंत्रालय द्वारा एक मजबूत आईसीटी आधारित प्रणाली ‘चैंपियंस’ का शुभारम्भ किया गया है। इस पोर्टल से एमएसएमई को वर्तमान हालात में न सिर्फ सहायता मिल रही है, बल्कि कारोबार के नए अवसर हासिल करने के लिए दिशा-निर्देश तथा दीर्घावधि में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय चैम्पियन बनने में सहायता भी मिल रही है।
  • एमएसएमई मंत्रालय एमएसएमई और उन लोगों को जो उन पर निर्भर हैं, सभी को सहायता देने के लिए प्रतिबद्ध है। आत्मनिर्भर भारत पैकेज के अंतर्गत किए गए उपायों का फायदा उठाने के लिए एमएसएमई को प्रोत्साहन देने की दिशा में हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।

पृष्ठभूमि

  • एमएसएमई के नाम से पुकारे जाने वाले सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। देश के विभिन्न क्षेत्रों में खामोशी से परिचालन करने वाले 6 करोड़ से ज्यादा एमएसएमई मजबूत और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में अहम भूमिका निभाते रहे हैं। ये छोटे आर्थिक इंजन 29 प्रतिशत अंशदान के साथ देश के जीडीपी पर अहम प्रभाव डालते हैं। वे देश के निर्यात में लगभग आधा योगदान करते हैं। इसके अलावा एमएसएमई क्षेत्र में 11 करोड़ से ज्यादा लोगों को रोजगार मिला हुआ है।

खरीफ फसलों के लिए न्यूगनतम समर्थन मूल्यस (एमएसपी)

  • माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) ने विपणन सीजन 2020-21 के लिए सभी अनिवार्य खरीफ फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में वृद्धि को मंजूरी दे दी है।
  • सरकार ने विपणन सीजन 2020-21 के लिए खरीफ फसलों की एमएसपी में वृद्धि की है, ताकि उत्पादकों के लिए उनकी उपज के पारिश्रमिक मूल्य को सुनिश्चित किया जा सके। एमएसपी में उच्चतम वृद्धि नाइजरसीड (755 रुपये प्रति क्विंटल) और उसके पश्चात तिल (370 रुपये प्रति क्विंटल), उड़द (300 रुपये प्रति क्विंटल) और कपास (लंबा रेशा) (275 रुपये प्रति क्विंटल) प्रस्तावित है। पारिश्रमिक में अंतर का उद्देश्य फसल विविधीकरण को प्रोत्साहन देना है।

न्यू्नतम समर्थन मूल्यअ (एमएसपी)से सम्बंधित कुछ महत्वपूर्ण तथ्य

  • विपणन सत्र 2020-21 के लिए खरीफ फसलों हेतु एमएसपी में वृद्धि केंद्रीय बजट 2018-19 में अखिल भारतीय भारित औसत लागत उत्पादन (सीओपी) के कम से कम 1.5 गुना के स्तर पर एमएसपी को निर्धारित करने की घोषणा और किसानों के लिए यथोचित पारिश्रमिक के लक्ष्य के अनुरूप है। किसानों को बाजरा (83%) में उच्चतम वृद्धि के बाद उड़द (64%), तूर (58%) और मक्का (53%) में उनके उत्पादन की लागत से अधिक प्रतिफल मिलने का अनुमान है। बाकी फसलों के लिए, किसानों को उनकी उत्पादन लागत पर कम से कम 50% प्रतिफल का अनुमान है।
  • सरकार की रणनीति में देश में कृषि-जलवायु परिस्थितियों के अनुरूप विविध उत्पादकता वाली पद्धतियों को बढ़ावा देने के साथ-साथ जैव विविधता को खतरे में डाले बिना टिकाऊ कृषि के माध्यम से उच्च उत्पादकता के स्तर को प्राप्त करना शामिल है। इसके अंतर्गत एमएसपी के साथ-साथ खरीद के रूप में सहायता प्रदान करना है। इसके अलावा, किसानों की आय सुरक्षा के लिए पर्याप्त नीतियों पर विशेष रूप से ध्यान दिया जाना भी इसमें शामिल है। सरकार के उत्पादन-केंद्रित दृष्टिकोण को आय-केंद्रित दृष्टिकोण में परिवर्तित किया गया है।
  • इन फसलों को व्यापक क्षेत्रों में उगाने और सर्वोत्तम तकनीकों एवं कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए किसानों को प्रोत्साहन देने के प्रयास पिछले कुछ वर्षों से लगातार किए जा रहे हैं ताकि तिलहन, दलहन और मोटे अनाजों को बढ़ावा देने के साथ-साथ मांग और पूर्ति के असंतुलन को भी सही किया जा सके। भूजल स्थिति पर दीर्घकालिक प्रतिकूल प्रभाव के बिना पोषक तत्वों से भरपूर पोषक अनाज के उत्पादन को प्रोत्साहन देते हुए उन क्षेत्रों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया है जहां चावल-गेहूं नहीं उगाया जा सकता है।
  • उपर्युक्त उपायों को जारी रखने के क्रम में, सरकार कोविड-19 के कारण लॉकडाउन की स्थिति में खेती से संबंधित गतिविधियों की सुविधा प्रदान कर किसानों की सहायता करने के लिए समग्र दृष्टिकोण अपना रही है। किसानों द्वारा ही स्वयं कृषि उपज के विपणन की सुविधा के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। केंद्र सरकार द्वारा राज्य सरकारों/केंद्र शासित प्रदेशों को सीधे विपणन की सुविधा के लिए सलाह जारी की गई है, ताकि राज्य एपीएमसी अधिनियम के तहत विनियमन को सीमित करके थोक खरीदारों/बड़े फुटकर व्यापारियों/ संसाधकों द्वारा फैनर/एफपीओ/सहकारी समितियों से सीधी खरीद को सक्षम बनाया जा सके।

किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य हेतु अन्य योजना

  • इसके अलावा, सरकार द्वारा 2018 में घोषित समग्र योजना 'प्रधानमंत्री अन्नादाता आय संरक्षण अभियान' (पीएम-आशा) किसानों को उनकी उपज के लिए पारिश्रमिक प्रतिफल प्रदान करने में मदद करेगी। इस समग्र योजना में प्राथमिक आधार पर तीन उप-योजनाएं शामिल हैं जैसे मूल्य समर्थन योजना (पीएसएस), मूल्य न्यूनता भुगतान योजना (पीडीपीएस) और निजी खरीद एवं स्टॉकिस्ट पायलट योजना (पीडीपीएस)।

किस आयोग ने उत्पादन लागत से 1.5 गुना MSP की सिफारिशें?

  • स्वामीनाथन की अध्यक्षता में नवंबर 2004 को राष्ट्रीय किसान आयोग बनाया गया. कमेटी ने अक्टूबर 2006 में अपनी रिपोर्ट दे दी.
  1. फ़सल उत्पादन मूल्य से पचास प्रतिशत ज़्यादा दाम किसानों को मिले.
  2. किसानों को अच्छी क्वालिटी के बीज कम दामों में मुहैया कराए जाएं.
  3. गांवों में किसानों की मदद के लिए विलेज नॉलेज सेंटर या ज्ञान चौपाल बनाया जाए.
  4. महिला किसानों के लिए किसान क्रेडिट कार्ड जारी किए जाएं.
  5. किसानों के लिए कृषि जोखिम फंड बनाया जाए, ताकि प्राकृतिक आपदाओं के आने पर किसानों को मदद मिल सके.

बिजली संशोधन विधेयक 2020

चर्चा में क्यों?

  • सरकारी क्षेत्र की बिजली कंपनियों के अभियंताओं के एक संगठन ने कहा कि बिजली क्षेत्र के लाखों कर्मचारी और इंजीनियर बिजली संशोधन विधेयक 2020 और केंद्र शासित प्रदेशों में वितरण कंपनियों के निजीकरण को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे है।

पृष्ठभूमि

  • पिछले महीने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने केंद्र शासित प्रदेशों में बिजली वितरण कंपनियों के निजीकरण की योजना की घोषणा की थी। बिजली मंत्रालय ने बिजली संशोधन विधेयक का मसौदा भी 17 अप्रैल 2020 को जारी किया।

क्यों किया जा रहा है विरोध?

  • विधेयक में 2003 के बिजली कानून में कुछ नीतिगत संशोधन औैर कायार्त्मक संशोधन का प्रस्ताव किया गया है। बिजली समवर्ती सूची में है लेकिन केंद्र ने इस मामले में राज्यों की परवाह नहीं की और एक की कीमत पर दूसरे को सब्सिडी (क्रास सब्सिडी), किसानों और बीपीएल ग्राहकों को प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) , ईसीईई (विद्युत न्यायाधिकरण) और बिजली वितरण की फ्रेंचांइजी जैसे मामलों में अपनी बातों को थोपने का प्रयास कर रहा है। सरकार ने केंद्रशासित प्रदेशें में बिजली व्यवस्था के निजीकरण का आदेश दे दिया है। क्रास सब्सिडी वाणिज्यिक और औद्योगिक ग्राहकों की तुलना में गरीब नागरिकों और किसानों को सस्ती बिजली देने के लिये है।
  • संगठन का कहना है कि अब समयबद्ध तरीके से क्रास सब्सिडी समाप्त करने आौर ऐसे ग्राहकों के लिये राज्य सरकारों द्वारा डीबीटी व्यवस्था लागू करने की बात कही जा रही है। इससे उनके लिये सस्ती बिजली की पहुंच का अधिकार खत्म होगा। केंद्र राज्यों के अधिकारों को छीनने का प्रयास कर रही है जो स्वीकार्य नहीं है। ऐसे कानून लाने का कोई मतबल नहीं है जिससे सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां समाप्त हो जाए और पूरा बिजली आपूर्ति क्षेत्र निजी कंपनियों पर आश्रित हो जाए।’’

:: विज्ञान और प्रौद्योगिकी ::

चीन का अर्थ ऑब्जरवेशन सैटेलाइट हैड-4

  • चीन ने रविवार को एक हाइ रिजॉल्यूशन सैटेलाइट लॉन्च किया है। इस सैटेलाइट के जरिए वो जमीन का सर्वे करेगा और इंटरनेट की नैरोबैंड का भी इस्तेमाल करेगा। इस सैटेलाइट का नाम हैड-4 है। इस सैटेलाइट को चीन के ग्यात्सू प्रांत में जियुक्वान सैटेलाइट लॉन्च सेंटर से छोड़ा गया है। ये सैटेलाइट काफी उच्च क्षमता वाली है। इसमें गॉफ़न-9 02 (Gaofen-9 02) और संकीर्ण इंटरनेट ऑफ थिंग्स (Internet of Things-IoT satellite) भी शामिल हैं। इस हैड-4 को लॉन्ग मार्च -2 डी रॉकेट द्वारा लॉन्च किया गया है।
  • इस सैटेलाइट को चाइना हेड एयरोस्पेस टेक्नोलॉजी कंपनी द्वारा विकसित किया गया है और इसे वैश्विक जहाज नवीगा-टायन और वैश्विक उड़ानों के साथ-साथ IoT सूचनाओं का स्टेटस संग्रह करने का काम सौंपा गया है। Gaofen-9 02 एक ऑप्टिकल रिमोट सेंसिंग उपग्रह है जो मीटर से कम के रिज़ॉल्यूशन के साथ तस्वीरें प्रदान करने में सक्षम है। इसका उपयोग भूमि सर्वेक्षण, शहरी नियोजन, सड़क नेटवर्क डिजाइन, कृषि और आपदा राहत में किया जाएगा।
  • चीन इस उपग्रह की मदद से मिले चित्रों के जरिए प्रस्तावित बेल्ट और सड़क के निर्माण में इस्तेमाल करेगा। जिन क्षेत्रों में अभी तक चीन इस तरह से विकास के काम नहीं कर पा रहा था वहां पर इस उपग्रह के जरिए मिलने वाले चित्रों का अध्ययन करने के बाद काम किया जा सकेगा।

एंटीवायरल ड्रग एविफवीर (Avifavir)

  • रूस ने कहा है कि देश के सभी अस्प्तालों में 11 जून से कोरोना मरीजों को जापान की एविफवीर नाम से पंजीकृति एंटीवायरल ड्रग दिया जाएगा। हालांकि, रूस अगले सप्ता ह कोरोना रोगियों के इलाज हेतु अनुमोदित दवा देना शुरू कर देगा। यह उम्मीपद की जा रही है कि इससे देश की स्वाेस्य्स प्रणाली पर दबाव कम होगा। इसके साथ देश में कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्याम में कमी आएगी। रूस ने जापानी दवा के संशोधित संस्करण को अनुमति दी है। हालांकि, जापान ने अभी तक इस दवा के उपयोग की स्वीरकृत नहीं दी है।
  • मौजूदा समय में दुनिया में कोरोना वायरस के लिए कोई टीका नहीं है। हालांकि, पूरी दुनिया कोरोना वायरस की वैक्सींन की खोज में जुटी है, लेकिन इन दवाओं का मानव परीक्षणों में अभी तक कोई असर नहीं दिखा है। वैक्सीिन का मानव परीक्षण के परिणाम उत्साहहजनक नहीं रहे। ऐसे में गिलीड की एक नई एंटीवायरल दवा जिसे रेमेड्सविर कहा जाता है, काफी उम्मीीदें हैं। यह दावा किया जा रहा है कि दवा के परीक्षण के दौरान कोरोना संक्रमण को रोकने के सीमित प्रभाव दिखे हैं। दुनिया के कई मुल्कोंी में कोरोना मरीजों को यह दवा दी जा रही है।

:: पर्यावरण और पारिस्थितिकी ::

चक्रवाती तूफान 'निसर्ग'

  • लक्षद्वीप के पास अरब सागर में उष्णकटिबंधीय चक्रवाती तूफान निसर्ग (Nisarga) बन रहा है। केरल राज्य आपदा प्रबंधन (KSDMA) ने तूफान के मद्देनजर मछली पकड़ने से जुड़ी तमाम गतिविधियों को सस्पेंड कर दिया है । KSDMA के अनुसार, लक्ष्यद्वीप समेत केरल के तटीय इलाकों में 45-66 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चल सकती है। KSDMA ने यहां के 9 जिलों में येलो एलर्ट का ऐलान कर दिया है। समुद्री तूफान के अगले सप्ताह महाराष्ट्र और गुजरात की तटीय सीमा से टकराने की संभावना है।
  • मौसम विभाग ने चेतावनी देते हुए कहा, 'दक्षिण पूर्वी और आसपास के पूर्वी मध्य अरब सागर तथा लक्षद्वीप क्षेत्र के ऊपर कम दबाव का क्षेत्र बना हुआ है। इसके अगले 24 घंटे में पूर्वी मध्य और आसपास के दक्षिण पूर्वी अरब सागर के ऊपर दबाव के रूप में मजबूत होने की संभावना है तथा फिर यह अगले 24 घंटों में और अधिक मजबूत होकर चक्रवाती तूफान के रूप में तबदील हो सकता है। इसके उत्तर की तरफ आगे बढ़ने और तीन जून तक उत्तरी महाराष्ट्र तथा गुजरात तटों के पास पहुंचने की काफी संभावना है।'

क्या होते है उष्णकटिबंधीय चक्रवात?

  • भारत में अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से ही ज़्यादातर तूफ़ान पैदा होते है। इन तूफानों को उष्णकटिबंधीय चक्रवात कहा जाता है। भारतीय उपमहाद्वीप के आस-पास उठने वाले तूफान घड़ी की सुईयों की दिशा में आगे बढ़ते हैं। उष्णकटिबंधीय चक्रवात एक ऐसा तूफान है जिसके बीच में काफी कम दबाव का क्षेत्र होता है। चक्रवात के आने के साथ बिजली कड़कने के साथ तेज़ हवाएं चलती हैं और भारी बारिश होती है।उष्णकटिबंधीय चक्रवात तब पैदा होता है जब नम हवा ऊपर उठती है, नम हवा के ऊपर उठने से गर्मी पैदा होती है।इस गर्मी की वजह से हवा की नमी का संघनन होता है और बादल बनते हैं जिससे बारिश होती है।
  • उष्ण कटिबंधीय चक्रवात या ट्रॉपिकल साइक्लोन आम तौर पर 30° उत्तरी एवं 30° दक्षिणी अक्षांशों के बीच पैदा होते हैं । इसकी वजह इन अक्षांशों में इन चक्रवातों के पैदा होने के लिए सही स्थितियां पाया जाना है।
  • भूमध्य रेखा या इक्वेटर पर कम दबाव होने के बावजूद कोरिओलिस बल न के बराबर होता है ।इसकी वजह से हवाएं वृत्ताकार रूप में नहीं चलतीं,और चक्रवात नहीं बन पाते । दोनों गोलार्द्धों में 30° अक्षांश के बाद ये हवाएं पछुआ पवनों के प्रभाव में आकर स्थल पर पहुँचकर ख़त्म हो जाती हैं। आम तौर पर उष्ण कटिबंधीय चक्रवात बनने के लिए समुद्री सतह का तापमान 27°C से ज़्यादा होना चाहिए , कोरिओलिस बल का असर होना चाहिए , ऊपर चलने वाली हवा न के बराबर हो

कृषि-पारिस्थितिकी और प्राकृतिक खेती

चर्चा में क्यों?

  • नीति आयोग द्वारा 29 मई को आयोजित एक सम्मेलन में अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञों ने भारत में कृषि-पारिस्थितिकी और प्राकृतिक खेती के दृष्टिकोण को पर्याप्त9 रूप से बढ़ावा देने के प्रयासों का समर्थन किया।

भारत के प्रयास

  • केंद्रीय कृषि मंत्री श्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा, "प्राकृतिक खेती गोबर और मूत्र, बायोमास, गीली घास और मृदा वातन पर आधारित हमारी स्वतदेशी प्रणाली है । अगले पांच वर्षों में, हमारा प्राकृतिक खेती सहित जैविक खेती के किसी भी रूप में 20 लाख हेक्टेयर तक पहुंच बनाने का इरादा है, जिनमें से 12 लाख हेक्टेयर बीपीकेपी [भारतीय प्राकृतिक कृषि पद्धति कार्यक्रम] के अंतर्गत है।
  • छोटे और सीमांत किसानों के बीच जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए 2015 में शुरू की गई परम्परागत कृषि विकास योजना ने पिछले चार वर्षों में 7 लाख हेक्टेयर और 8 लाख किसानों को कवर किया है। उन्होंने कहा कि आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश और केरल ने बड़े पैमाने पर प्राकृतिक खेती को अपनाया है। अकेले आंध्र प्रदेश में इस योजना के तहत 2 लाख हेक्टेयर भूमि प्राकृतिक खेती के अंतर्गत लायी गई है। उन्होंने इस कथन के साथ अपनी बात समाप्तर की कि कोविड-19महामारी के मद्देनजर आज जरूरत इस बात की है कि देश को भोजन और पोषण उपलब्धे कराने की आवश्यकता की अनदेखा नहीं करते हुए ‘भोजन को रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों से मुक्त किया जाए’।

कृषि-पारिस्थितिकी और प्राकृतिक खेती के लाभ

  • कृषि में पारिस्थितिकी ऐसा विज्ञान है, जो सूखे या बाढ़ और कीटों के हमले जैसे जलवायु संबंधी आघातों के प्रति अधिक सुदृढ़ टिकाऊ परिणाम प्रा‍प्तं करने,लेकिन फिर भी उपयोगी और किसान की आजीविका और विशेष रूप से प्राकृतिक खेती का समर्थन करने से संबंधित है- जो कि कृषि विज्ञान का एक रूप है। प्राकृतिक खेती संश्लिष्ट या सिंथेटिक उर्वरकों और कीटनाशकों के उपयोग से बचती है, जबकि पौधों की उर्वरता और अच्छे पोषण में योगदान देने वाले लाभकारी मिट्टी के जीवों को पुनर्जीवित करने पर ध्यान केंद्रित करती है। विशेषज्ञों ने बताया कि अच्छी तरह से पोषित पौधों से मानव भी सुपोषित होते हैं।
  • प्राकृतिक खेती और जैविक कृषि जैसे अन्य कृषि संबंधी दृष्टिकोणों में भारतीय कृषि के पुनरुत्थान के लिए अपार संभावनाएं मौजूद है, ताकि खेती केवल उत्पादक न होकर, वास्तव में पुनरुत्पादक और टिकाऊ हो।
  • प्राकृतिक खेती को हमारे पूर्वजों की कृषि तकनीकों की दिशा में लौटने वाले कदम के तौर पर देखना भूल होगी, बल्कि, जैसा कि एफएओ की खाद्य सुरक्षा संबंधी समिति के विशेषज्ञों के एक उच्च स्तरीय पैनल की कृषि पारिस्थितिकी के संबंध में रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से प्रदर्शित किया गया है कि यह भविष्य के अत्याधुनिक विज्ञान पर आधारित है, जो जटिल अनुकूलन प्रणालियों से निपटने के लिए प्रणालीगत दृष्टिकोण की आवश्यकता की पहचान करता है, जो स्वस्थ प्राकृतिक दुनिया का आधार है। जैसा कि एक विशेषज्ञ का कहना था कि प्रकृति के साथ काम करना, यह समझने जैसा है कि ऐसा कैसे किया जाए, जिससे यह बेहतर पुनर्निर्माण करने में हमारी मदद कर सके।

:: विविध ::

जार्ज फ्लॉयड

  • पुलिस हिरासत में अश्वेत व्यक्ति जार्ज फ्लॉयड की मौत के पांचवें दिन अमेरिका में हालात बेकाबू हो गए हैं। प्रदर्शनकारियों द्वारा की जा रही हिंसा और तोड़फोड़ को देखते हुए वाशिंगटन डीसी समेत देश के 40 शहरों में कर्फ्यू लगा दिया गया है। वर्जीनिया में आपातकाल के साथ ही कैलिफोर्निया में सोमवार तक सभी सरकारी इमारतों को बंद रखने का आदेश दिया गया है।

:: प्रिलिम्स बूस्टर ::

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा MSME के लिए वन स्टॉप सॉल्यूशन, AI, डेटा एनालिटिक्स और मशीन लर्निंग से लैस किस पोर्टल का शुभारंभ किया गया? (चैंम्पियन्स पोर्टल)
  • हाल ही में किए गए संशोधन के अनुसार क्रमशः निवेश एवं टर्नओवर के संदर्भ में एमएसएमई की परिभाषा क्या है? (सूक्ष्म-1करोड़ एवं 5 करोड़, लघु 10 करोड़ एवं 50 करोड़, मध्यम 50 करोड़ एवं 250 करोड़)
  • हाल ही में रेहड़ी विक्रेताओं के लिए किस माइक्रो क्रेडिट योजना की शुरुआत की गई है एवं इसका क्रियान्वयन किस मंत्रालय द्वारा होगा? (पीएम स्व-निधि,आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय)
  • रेहड़ी विक्रेताओं की माइक्रो क्रेडिट योजना के क्रेडिट प्रबंधन से चर्चा में उद्यमी मित्र पोर्टल और पैसा पोर्टल क्रमशः किस संस्था की पहल है? (सिडबी और आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय)
  • कृषि उत्पादों के उचित मूल्य की अंब्रेला स्कीम “प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान” (पीएम-आशा) योजना में कौन से उपयोजना शामिल है? (मूल्य समर्थन योजना PSS, भावांतर भुगतान योजना PDPS) तथा प्रायोगिक निजी खरीद तथा भंडारण योजना PPSS)
  • हाल ही में जारी हुई न्यूनतम समर्थन मूल्य चर्चा में रहे से चर्चा में रहे MSP को किस समिति ने उत्पादन लागत से कम से कम 50% ज्यादा देने की सिफारिश की थी? (स्वामीनाथन आयोग)
  • तीन राज्यों के शामिल होने से चर्चा में रहे पोर्टेबिलिटी फिर “वन नेशन वन राशन कार्ड” योजना के तहत सभी राज्यों को किस तंत्र से जोड़ा जा रहा है? ('एकीकृत सार्वजनिक वितरण प्रणाली-IMPDS)
  • पाकिस्तानी जासूसों के संदर्भ में चर्चा में रहे डिप्लोमैटिक इम्युनिटी क्या है एवं किस संधि के तहत यह लागू होती है? (राजनयिकों को सुरक्षा प्रदान करना, वियना कन्वेंसन ऑन डिप्लोमैटिक रिलेशन्स 1961)
  • हाल ही में खेल मंत्रीकिरण रिजिजू के द्वारा दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले खिलाड़ियों की कोचिंग के लिए किस पहल की शुरुआत की गई है? (खेलो इंडिया ई-पाठशाला)
  • हाल ही में अरब सागर में उठने वाले किस तूफान के कारण केरल समेत अन्य राज्यों के द्वारा चेतावनी जारी की गई? (निसर्ग Nisarga) नीति आयोग के सतत कृषि पर आयोजित कन्वेंशन से चर्चा में रहे परंपरागत कृषि योजना को कब शुरू की गई थी एवं इसका उद्देश्य क्या था? (2015, ऑर्गेनिक कृषि को बढ़ावा)
  • हाल ही में अमेरिका में किस व्यक्ति की मृत्यु के कारण वाशिंगटन समेत 40 शहरों में हिंसा के कारण कर्फ्यू लगाना पड़ा? (जॉर्ज फ्लॉयड)

स्रोत साभार: Dainik Jagran (Rashtriya Sanskaran), Dainik Bhaskar (Rashtriya Sanskaran), Rashtriya Sahara (Rashtriya Sanskaran) Hindustan Dainik (Delhi), Nai Duniya, Hindustan Times, The Hindu, BBC Portal, The Economic Times (Hindi & English), PTI, PIB

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