(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (19 जुलाई 2020)

दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर


(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (19 जुलाई 2020)


:: राष्ट्रीय समाचार ::

प्रिडिक्टिव पुलिसिंग

चर्चा में क्यों?

  • दिल्ली पुलिस अब सॉफ्टवेयर के जरिये यह पता लगाएगी कि राजधानी के किस इलाके में किस तरह का अपराध कब हो सकता है। इतना ही नहीं डेटा के एल्गोरिदम पर आधारित विश्लेषण के जरिये यह सॉफ्टवेयर (प्रिडिक्टिव पुलिसिंग) पुलिस को पहले से ही आगाह कर देगा कि आने वाले समय में बदमाश किस इलाके में अपराध को अंजाम दे सकते हैं। इसका प्रयोग दिल्ली पुलिस अगले कुछ महीने में करने लगेगी।

पृष्ठभूमि

  • एल्गोरिदम और आर्टिफिशयल इंटेलिजेंस के आधार पर काम करने वाले इस सॉफ्टवेयर पर अभी यूरोप और यूके में कुछ जगहों पर प्रिडिक्टिव पुलिसिंग के लिए इस्तेमाल हो रहा है। देश में दिल्ली पुलिस पहली ऐसी पुलिस होगी जो इस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करेगी। इसके लिए सेफ सिटी प्रोजेक्ट के तहत कैमरों से राजधानी के अपराधग्रस्त थाना इलाकों को लैस करने जैसे संसाधनों पर काम चल रहा है।

प्रिडिक्टिव पुलिसिंग के बारे में

  • यह सॉफ्टवेटर पूर्वानुमान पर आधारित पुलिसिंग में बेहद मददगार है। राजधानी के अपराध ग्रस्त इलाकों में लगाए गए एचडी सीसीटीवी कैमरे में कैद आपराधिक घटनाओं, टाइमिंग, अंजाम देने के तरीके और शिकार होने वाले लोगों के डेटा के आधार पर यह उसका विश्लेषण करेगा। साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक पर आधारित आगामी दिनों में होने वाले अपराध के पैटर्न, टाइमिंग और इलाके के बारे में भी एक पूर्वानुमान पर आधारित जानकारी मुहैया कराएगा।
  • इस तकनीक से न सिर्फ अपराध के पूर्वानुमान का फायदा होगा, बल्कि वारदातों को अंजाम देने वाले बदमाशों की पहचान करने में मदद मिलेगी। दरअसल, इसमें चूंकि वारदात की फुटेज उपलब्ध होगी, जिससे उस तरीके से वारदात को अंजाम देने वाले बदमाशों के डोजियर खंगालकर उनकी पहचान करने में आसानी हो जाएगी। यह केंद्रीय कमांड रूम से सीधे जुड़ा रहेगा तो मौके की वीडियो फुटेज भी आसानी से उपलब्ध हो जाएगी और पुलिस के पास साक्ष्य भी मौजूद होंगे। इसके आधार पर वैज्ञानिक और सटीक तरीके से जांच बढ़ेगी और बदमाशों को पकड़ने में आसानी होगी।

संयुक्त राष्ट्र की 75वीं वर्षगांठ में प्रधानमंत्री का संबोधन

  • प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार, 17 जुलाई 2020 को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र में संयुक्त राष्ट्र आर्थिक एवं सामाजिक परिषद (ईसीओएसओसी) सत्र के इस साल के उच्च स्तरीय खंड में वर्चुअल रूप से मुख्य संबोधन दिया।

प्रधानमंत्री के संबोधन के मुख्य बिंदु

  • भारत अपने घरेलू प्रयासों के माध्यम से हम फिर से एजेंडा 2030 और सतत विकास लक्ष्यों को हासिल करने में एक प्रमुख भूमिका निभा रहा हैं।
  • हमारा मकसद है 'सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास'- जिसका अर्थ है 'साथ- साथ, सबके विकास के लिए, सबके भरोसे के साथ'। इसमें एसडीजी के मूल सिद्धांत कोई भी पीछे न छूटे, की ही भावना है। पोषण, स्वास्थ्य शिक्षा, बिजली या घर तक पहुंच हो- हम अपने समावेशी कार्यक्रमों के माध्यम से बहुत प्रगति कर रहे हैं।
  • पांच वर्षों में हमने 110 मिलियन से ज्यादा घरेलू शौचालयों का निर्माण किया, जिसने हमारे ग्रामीण स्वच्छता कवर को 38 प्रतिशत से 100 प्रतिशत तक सुधार दिया।
  • हमारे व्यापक जागरूकता कार्यक्रम हमारी महिलाओं को सशक्त बना रहे हैं। हमने प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा में लैंगिक समानता हासिल की है। ग्रामीण भारत में करीब 70 मिलियन महिलाएं हमारे आजीविका मिशन के तहत स्वयं सहायता समूहों का हिस्सा हैं। वे जीवन और आजीविका में बड़े पैमाने पर बदलाव ला रही हैं। एक मिलियन से ज्यादा महिलाएं हमारी स्थानीय सरकारों की प्रतिनिधि चुनी जाती हैं, जिससे भागीदारी विकास की प्रक्रिया आगे बढ़ती है। बीते छह वर्षों में हमने 400 मिलियन से ज्यादा बैंक खाते खोले, जिसमें से 220 मिलियन महिलाओं के स्वामित्व वाले हैं।
  • हमने वित्तीय समावेशन के लिए प्रौद्योगिकी की ताकत का लाभ उठाया है। यह तीन बिंदुओं- एक विशिष्ट पहचान संख्या, एक बैंक खाता और सभी के लिए मोबाइल कनेक्शन पर आधारित है। इससे हम 700 मिलियन से ज्यादा लोगों को 150 बिलियन डॉलर का प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण कर पा रहे हैं। हमारा खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम 813 मिलियन नागरिकों तक पहुंचता है।
  • हमारा 'सभी के लिए घर' कार्यक्रम यह सुनिश्चित करेगा कि 2022 तक, जब भारत के स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में 75 साल पूरे हो रहे होंगे तो प्रत्येक भारतीय के सिर पर एक सुरक्षित और सुदृढ़ छत हो। तब तक, इस कार्यक्रम के तहत 40 मिलियन नए घर बनाए जाएंगे- जो कई देशों में कुल घरों की संख्या से अधिक है।
  • आज हमारी 'आयुष्मान भारत' योजना दुनिया का सबसे बड़ा स्वास्थ्य सुरक्षा कार्यक्रम है, जिसमें 500 मिलियन लोग शामिल हैं। कोविड के खिलाफ लड़ाई में, गांव-गांव तक पहुंची हमारी स्वास्थ्य प्रणाली भारत को दुनिया में सबसे ज्यादा रिकवरी रेट में से एक सुनिश्चित करने में मदद कर रही है।
  • हम 2025 तक टीबी को खत्म करने के लिए भी काम कर रहे हैं। दूसरे विकासशील देश भारत के विकास कार्यक्रमों के पैमाने और सफलता से सीख सकते हैं। और हमने जिन प्रौद्योगिकियों और नवाचारों को अपनाया है। यह वैश्विक दक्षिण के साथ भारत की विकास साझेदारी की मजबूती का बोध कराता है।
  • विकास के पथ पर आगे बढ़ते हुए, हम अपने ग्रह के प्रति अपनी जिम्मेदारी नहीं भूल रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों में हमने सालाना 38 मिलियन टन कार्बन उत्सर्जन कम किया है। यह हमारे गांवों को विद्युतीकृत करने, 80 मिलियन गरीब परिवारों को स्वच्छ खाना पकाने के ईंधन प्रदान करने और दक्ष ऊर्जा उपायों की शुरुआत से प्राप्त किया गया। हमने 2030 तक 450 गीगावाट अक्षय ऊर्जा स्थापित करने और 26 मिलियन हेक्टेयर खराब भूमि को बहाल करने का लक्ष्य रखा है।
  • प्रकृति के साथ सद्भाव में रहने की हमारी पुरानी परंपरा रही है। हमने एकल-उपयोग प्लास्टिक के इस्तेमाल को हतोत्साहित करने और स्वच्छता के लिए सबसे बड़े अभियानों में से एक चला रखा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन की स्थापना करने की हमारी पहल क्लाइमेट एक्शन की व्यवहारिक अभिव्यक्ति थी। इसी प्रकार से, आपदा रोधी बुनियादी ढांचे का गठबंधन व्यापक एप्रोच के लिए सभी प्रासंगिक हितधारकों को साथ लाया। हम हमेशा हमारे क्षेत्र में- दोस्त की जरूरत के समय में पहले रेस्पांडर रहे हैं।
  • भूकंप हो, चक्रवात या कोई और प्राकृतिक या मानवीय संकट भारत ने तेजी से और एकजुटता के साथ मदद की है। कोविड के खिलाफ हमारी संयुक्त लड़ाई में, हमने 150 से ज्यादा देशों को चिकित्सा और अन्य सहायता पहुंचाई है। हमने अपने पड़ोस के लिए सार्क कोविड इमरजेंसी फंड बनाने में भी मदद की।
  • कोविड-19 महामारी ने सभी देशों की संकट से उबरने की क्षमता की गंभीर परीक्षा ली है। भारत में, हमने महामारी के खिलाफ लड़ाई को सरकार और समाज के एकजुट प्रयासों से एक जन आंदोलन बनाने की कोशिश की है। हमने गरीब घरों में लाभ पहुंचाने को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। हमने 300 अरब डॉलर से ज्यादा के पैकेज की घोषणा की है। यह अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाएगा, आधुनिक बुनियादी ढांचे का निर्माण करेगा और एक प्रौद्योगिकी संचालित प्रणाली को स्थापित करेगा। हमने वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ एकीकृत 'आत्मनिर्भर भारत' के दृष्टिकोण को सामने रखा है।
  • भारत का पूरी दृढ़ता से मानना है कि बहुपक्षवाद के माध्यम से ही स्थायी शांति और समृद्धि प्राप्त की जा सकती है। ग्रह पृथ्वी के बच्चों के रूप में, हमें अपनी आम चुनौतियों और साझा उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए हाथ अवश्य मिलाना चाहिए। हालांकि बहुपक्षवाद को समकालीन दुनिया की वास्तविकता का प्रतिनिधित्व करने की आवश्यकता है। संयुक्त राष्ट्र में सुधार के साथ ही बहुपक्षीय सुधार ही मानवता की आकांक्षाओं को पूरा कर सकता है। आज, संयुक्त राष्ट्र के 75 साल का जश्न मनाते हुए आइए हम वैश्विक बहुपक्षीय प्रणाली में सुधार करने का संकल्प लें। इसकी प्रासंगिकता को बढ़ाने, इसकी प्रभावशीलता में सुधार और इसे नए प्रकार के मानव-केंद्रित वैश्वीकरण का आधार बनाने की जरूरत है। मूल रूप से संयुक्त राष्ट्र का उदय द्वितीय विश्व युद्ध के रोष से हुआ था। आज महामारी का प्रकोप इसके पुनर्जन्म और सुधार की पृष्ठभूमि तैयार करता है। हमें यह मौका गंवाना नहीं चाहिए।

वन नेशन, वन राशन कार्ड योजना

चर्चा में क्यों?

  • देश में वन नेशन, वन राशन कार्ड की सुविधा 4 राज्यों में राशन कार्डों की अंतर-राज्यीय पोर्टेबिलिटी के साथ अगस्त, 2019 में शुरू की गई थी। तब से कुल 20 राज्यों/केन्द्र शासित प्रदेशों को निर्बाध राष्ट्रीय पोर्टेबिलिटी समूह में शामिल किया गया है जो जून 2020 से प्रभावी है। इस प्रकार, यह सुविधा अभी 20 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के एनएफएसए कार्ड धारकों को मिल रही है। ये 20 राज्य/केंद्र शासित प्रदेश- आंध्र प्रदेश, हरियाणा, कर्नाटक, महाराष्ट्र, ओडिशा, सिक्किम, मिजोरम, तेलंगाना, केरल, पंजाब, त्रिपुरा, बिहार, गोवा, हिमाचल प्रदेश, दादरा तथा नागर हवेली, दमन तथा दीव, गुजरात, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान हैं।
  • अब चार और राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों- जम्मू और कश्मीर, मणिपुर, नगालैंड और उत्तराखंड में बहुत जल्द ही वन नेशन, वन राशन कार्ड के तहत राष्ट्रीय पोर्टेबिलिटी की सुविधा देने के लिए जांच और परीक्षण का काम पूरा कर लिया गया है। इसके अलावा, अंतर्राज्यीय लेनदेन के लिए आवश्यक वेब-सेवाएं और केंद्रीय डैशबोर्ड के जरिए उनकी निगरानी भी इन राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के लिए सक्रिय हो गई हैं। शेष सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को मार्च 2021 से पहले इस योजना में शामिल कर लिए जाने का लक्ष्य रखा गया है।

क्या है वन नेशन, वन राशन कार्ड योजना?

  • वन नेशन, वन राशन कार्ड की सुविधा एक महत्वाकांक्षी योजना है। यह राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए), 2013 के तहत शामिल सभी लाभार्थियों के खाद्य सुरक्षा अधिकारों को सुनिश्चित करने के लिए खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग का प्रयास है चाहे वे देश के किसी भी हिस्से में रहें। ऐसा सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के सहयोग से 'सार्वजनिक वितरण प्रणाली के एकीकृत प्रबंधन (आईएम-पीडीएस)' पर चल रही केंद्रीय योजना के तहत राशन कार्डों की देशव्यापी पोर्टेबिलिटी को लागू करके किया जा रहा है।
  • इस प्रणाली के माध्यम से, वैसे प्रवासी एनएफएसए लाभार्थी जो अक्सर अस्थायी रोजगार इत्यादि की तलाश में अपना निवास स्थान बदलते रहते हैं, को अब किसी अपनी पंसद की किसी भी उचित मूल्य की दुकान (एफपीएस) से अपने खाद्यान्न का कोटा उठाने का विकल्प दिया गया है। ऐसा एफपीएस में स्थापित इलेक्ट्रॉनिक प्वाइंट ऑफ सेल (ईपीओएस) डिवाइस पर बायोमेट्रिक/ आधार आधारित प्रमाणीकरण के साथ अपने मौजूदा राशन कार्ड का उपयोग करके किया जा सकता है।
  • इस प्रकार, एफपीएस पर ईपीओएस उपकरणों की स्थापना और बायोमेट्रिक/आधार प्रमाणीकरण के लिए लाभार्थियों की आधार संख्या इस प्रणाली के मुख्य संवाहक हैं। लाभार्थी देश में किसी भी एफपीएस डीलर को राशन कार्ड नंबर या आधार नंबर बताकर इस सुविधा का लाभ ले सकता है। परिवार का कोई भी व्यक्ति जिसकी राशन कार्ड में आधार संख्या अंकित है, वह प्रमाणीकरण कराकर राशन उठा सकता है। इस सुविधा का लाभ पाने के लिए राशन डीलर को राशन कार्ड या आधार कार्ड दिखाने या इन्हें अपने साथ ले जाने की कोई आवश्यकता नहीं है। लाभार्थी अपने फिंगर प्रिंट या आईरिस आधारित पहचान का उपयोग करके अपना आधार प्रमाणीकरण कर सकता है।

ASEEM पोर्टल

चर्चा में क्यों?

  • कोरोना महामारी के उठापटक के बीच ASEEM पोर्टल के जरिए स्किल्ड और गैर स्किल्ड लोगों और कंपनियों को जोड़ा जा रहा है। ऐसे लोग जिनके पास स्किल है और वह नौकरी की तलाश कर रहे हैं तो इस पोर्टल पर जाकर रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं।

पृष्ठभूमि

  • कोरोना महामारी के चलते लाखों लोग बेरोजगार हुए हैं। मार्च में लॉकडाउन के बाद से तो प्रवासी मजदूर लाखों की संख्या में अपने-अपने गृह राज्यों की ओर लौट गए। कोरोना संकट के चलते कई नौकरीपेशा लोगों को छंटनी का शिकार होना पड़ा है। कंपनियां कर्मचारियों को कम सैलरी दे रही है। संकट की इस घड़ी में नौकरीपेशा लोगों को आर्थिक तंगी से गुजरना पड़ रहा है।
  • संकट की इस घड़ी में सभी को रोजगार मिले इसके लिए ASEEM (Aatamanirbhar Skilled Employee Employer Mapping) पोर्टल शुरू किया गया है।

ASEEM पोर्टल के बारे में

  • ASEEM (Aatamanirbhar Skilled Employee Employer Mapping) पोर्टल को नेशनल स्किल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (एनसडीसी) ने बेगलूरू की एक कंपनी बैटरप्लेस के साथ मिलकर तैयार किया है।
  • इस पोर्टल के जरिए स्किल्ड और गैर स्किल्ड लोगों और कंपनियों को जोड़ा जा रहा है। ऐसे लोग जिनके पास स्किल है और वह नौकरी की तलाश कर रहे हैं तो इस पोर्टल पर जाकर रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं। वहीं अगर कोई बिजनेसमैन, फैक्टरी मालिक आदि रोजगार देना चाहते हैं तो वे स्किल्ड और गैर स्किल्ड लोगों लोगों इस पोर्टल के जरिए हायर कर सकते हैं।
  • इस प्लेटफॉर्म पर एम्प्लायर और एम्पलाई एक दूसरे से कांटेक्ट करके रोजगार के बारे में बातचीत कर सकते हैं। इसका उद्देश्य डिजिटल माध्यम से लोगों को रोजगार के अवसर उपलब्ध काराना है।
  • यह पोर्टल क्षेत्रों और स्थानीय उद्योग की मांगों के आधार पर श्रमिकों के विवरणों को मैप करता है। राज्यों और विदेशी नागरिकों के श्रम प्रवासियों का डेटाबेस है। जिसमें वंदे भारत मिशन के तहत भारत लौटे और ‘स्वदेश’ स्किल कार्डधारकों को पोर्टल के साथ जोड़ा गया है।

विद्युत रोजगार पोर्टल

  • अब ऊर्जा क्षेत्र में प्रशिक्षित होने वाले युवाओं को रोजगार के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा। स्किल इंडिया के तहत पावर सेक्टर स्किल काउंसिल (पीएसएससी) ने ऐसे युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए ‘विद्युत रोजगार’ नाम से जॉब पोर्टल बनाया है। इसके माध्यम से अब इस क्षेत्र में रोजगार की सारी जानकारियां मिल जाया करेंगी। वहीं, कंपनियों को अच्छे प्रशिक्षित कर्मी मिलेंगे। पीएसएससी की कोशिश युवाओं को स्थानीय स्तर पर जॉब दिलवाकर आत्मनिर्भर बनाना है।
  • केंद्रीय कौशल विकास व उद्यमिता मंत्रालय के मुताबिक इस पोर्टल से नियोक्ता योग्य उम्मीदवार ढूंढ सकेंगे तो उम्मीदवार को ऊर्जा से संबंधित विभिन्न कंपनियों में होने वाली भर्ती के बारे में पता चल सकेगा। अन्य प्राइवेट जॉब पोर्टल से इतर पीएसएससी के ‘विद्युत रोजगार’ पोर्टल पर उम्मीदवारों से किसी तरह की फीस नहीं ली जाएगी।
  • पोर्टल पर देश भर में फैले पीएसएससी के विभिन्न ट्रेनिंग पार्टनर और इंडस्ट्री पार्टनर के माध्यम देश के विभिन्न हिस्सों में ऊर्जा के क्षेत्र से संबंधित जॉब को भी सूचीबद्ध किया जाएगा। समय-समय पर युवाओं को काउंसलिंग के जरिये नौकरी दिलाने में मदद भी की जाएगी। यहां आवेदन करने के बाद सीधे कंपनी की नीति के अनुसार भर्तियां होगी। इस पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करने के बाद ही जॉब पोस्ट किया जा सकता है या नौकरी के लिए आवेदन कर सकेंगे।

43 प्रतिशत दिव्यांग छात्र छोड़ सकते हैं पढ़ाई: स्वाभिमान संगठन का सर्वेक्षण

  • ऑनलाइन शिक्षा में आ रही दिक्कतों के कारण करीब 43 प्रतिशत दिव्यांग बच्चे पढ़ाई छोड़ने की तैयारी कर रहे हैं। एक सर्वेक्षण में यह बात सामने आयी है।दिव्यांग लोगों के अधिकारों के लिए काम करने वाले संगठन स्वाभिमान ने मई में ओडिशा, झारखंड, मध्य प्रदेश, त्रिपुरा, चेन्नई, सिक्किम, नगालैंड, हरियाणा और जम्मू कश्मीर में यह सर्वेक्षण किया।
  • इस सर्वेक्षण में छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों समेत कुल 3,627 लोगों ने भाग लिया।

सर्वेक्षण के मुख्य बिंदु

  • सर्वेक्षण के अनुसार 56.5 प्रतिशत दिव्यांग बच्चों को मुश्किलें आ रही हैं तब भी वे रोजाना कक्षाएं ले रहे हैं जबकि 77 प्रतिशत छात्रों ने कहा कि वे दूरस्थ शिक्षा के तरीकों से वाकिफ नहीं होने के कारण पढ़ाई नहीं कर पाएंगे।
  • सर्वेक्षण में पाया गया कि 56.48 प्रतिशत छात्र अपनी पढ़ाई जारी रख रहे हैं जबकि बाकी के 43.52 प्रतिशत छात्र पढ़ाई छोड़ने का मन बना रहे हैं।
  • इसमें कहा गया है कि 39 प्रतिशत दृष्टिबाधित छात्र कई छात्रों के एक साथ बात करने के कारण विषयों को समझने में सक्षम नहीं हैं।
  • करीब 44 प्रतिशत दिव्यांग बच्चों ने शिकायत की कि वेबीनार में सांकेतिक भाषा का कोई दुभाषिया मौजूद नहीं होता।
  • 86 प्रतिशत दिव्यांग बच्चों के अभिभावकों का कहना है कि वे तकनीक का इस्तेमाल करना नहीं जानते और करीब 81 फीसदी शिक्षकों ने कहा कि उनके पास दिव्यांग छात्रों तक पहुंचाने के लिए शिक्षण सामग्री नहीं है।
  • सर्वेक्षण में कहा गया है, ‘‘शिक्षकों ने यह भी कहा कि 64 प्रतिशत दिव्यांग बच्चों के पास घर में स्मार्टफोन या कम्प्यूटर नहीं है। 67 प्रतिशत छात्रों ने कहा कि उन्हें ऑनलाइन शिक्षा के लिए टैब या कम्प्यूटर की आवश्यकता है।’’
  • इसमें कहा गया है कि 74 प्रतिशत दिव्यांग बच्चों ने कहा कि उन्हें पढ़ाई के लिए डेटा/वाईफाई की आवश्यकता है जबकि 61 प्रतिशत ने सहायक की आवश्यकता बताई।
  • सर्वेक्षण के आधार पर तैयार की गई एक रिपोर्ट में कोविड-19 वैश्विक महामारी के वक्त नीतिगत बदलावों और आवश्यक संशोधनों की सिफारिश की है।

क्यों चिंता की है बात?

  • स्वाभिमान की संस्थापक और मुख्य कार्यकारी श्रुति महापात्रा ने कहा कि सभी दिव्यांग बच्चों को एक समूह में नहीं रखा जा सकता क्योंकि उनमें अलग-अलग शारीरिक अक्षमताएं होती हैं और इसलिए उनकी जरूरतें भी अलग-अलग होती हैं।उन्होंने कहा, ‘‘मौजूदा महामारी से दिव्यांग छात्र पीछे रह सकते हैं। अगर फौरन उचित कदम नहीं उठाए गए तो शिक्षा और जीवन जीने के उनके अधिकार को अपूर्णीय क्षति हो सकती है।

:: अंतर्राष्ट्रीय समाचार ::

संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक परिषद (UNECOSOC)

चर्चा में क्यों?

  • यूएनएससी में निर्वाचन के बाद पहली बार संयुक्त राष्ट्र की बैठक में पीएम मोदी ने वर्चुअल शिरकत की। यूएनएससी में सफलता के बाद पीएम मोदी का यूएन में यह पहला भाषण था।

क्या है UNECOSOC (United Nations Economic and Social Council):

  • दरअसल, आर्थिक और सामाजिक परिषद (ईसीओएसओसी), संयुक्त राष्ट्र (यूएन) के छह प्रमुख अंगों में से एक, यूएन द्वारा किए गए आर्थिक, सामाजिक, मानवीय और सांस्कृतिक गतिविधियों की दिशा और समन्वय का काम करता है। ECOSOC की स्थापना संयुक्त राष्ट्र चार्टर (1945) द्वारा की गई थी, जिसे 1965 और 1974 में संशोधित कर सदस्यों की संख्या 18 से बढ़ाकर 54 की गई थी। ECOSOC की सदस्यता भौगोलिक प्रतिनिधित्व पर आधारित है।
  • 14 सीटें अफ्रीका, 11 एशिया, 6 पूर्वी यूरोप को आवंटित है।10 लैटिन अमेरिका और कैरिबियन और 13 पश्चिमी यूरोप और अन्य क्षेत्रों को आंवटित है। महासभा द्वारा देशों को सदस्यों को तौर पर तीन साल के लिए चुना जाता है। सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्यों में से चार को लगातार फिर से चुना गया क्योंकि वे ECOSOC के अधिकांश बजट के लिए धन उपलब्ध कराते हैं, जो संयुक्त राष्ट्र की किसी भी सहायक संस्था का सबसे बड़ा कोष है। ईसीओएसओसी की अध्यक्षता प्रतिवर्ष बदलती रहती है।
  • ECOSOC का अधिकांश कार्य मानव अधिकारों, नशीले पदार्थों, जनसंख्या, सामाजिक विकास, सांख्यिकी, महिलाओं की स्थिति और विज्ञान और प्रौद्योगिकी जैसे विषयों पर किया जाता है।

इंटरपोल (इंटरनेशनल क्रिमिनल पुलिस ऑर्गेनाइजेशन)

चर्चा में क्यों?

  • केरल में सोने की तस्करी मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने इंटरपोल से आरोपी फैसल फरीद के खिलाफ ब्लू कॉर्नर नोटिस जारी करने का अनुरोध किया। एनआईए के अधिकारी स्वप्ना सुरेश और संदीप नायर को सोने की तस्करी के मामले में सबूत संग्रह के लिए तिरुवनंतपुरम में उनके निवास स्थान पर ले गए हैं।

पृष्ठभूमि

  • यह पूरा मामला केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम में यूएई के पता वाले डिप्लोमैटिक कार्गो से 30 किलो सोना चुराने का है। दावा किया गया था कि कार्गो के संबंध में स्वप्ना सुरेश ने एयरपोर्ट के अधिकारी से संपर्क साधा था। यूएई वाणिज्य दूतावास जनरल ऑफिस के उच्च कूटनीतिज्ञ राशिद खामिस अल शामली के कहने पर कथित तौर पर संपर्क किया गया था। तस्करी किए गए सोने की कीमत 15 करोड़ रुपये बताई गई है।

क्या है इंटरपोल?

  • इंटरनेशनल क्रिमिनल पुलिस ऑर्गेनाइजेशन यानी कि इंटरपोल एक संस्था है जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पुलिस के बीच समन्वय का काम करती है। इंटरपोल उन देशों के बीच समन्वय का काम करता है जो इस संस्था के सदस्य हैं। इंटरपोल की स्थापना का विचार सबसे पहले 1914 में मोनाको में आयोजित पहली अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक पुलिस कांग्रेस में रखा गया और उसके बाद इंटरपोल की स्थापना आधिकारिक रूप से 1923 में की गयी और इसका नाम ‘अंतर्राष्ट्रीय अपराध पुलिस आयोग’ रखा गया। बाद में साल 1956 में इसका नाम ‘इंटरपोल’ रखा गया। इंटरपोल मुख्य रूप से इन तीन प्रकार के अपराधों (काउंटर-टेरेरिज्म,साइबर अपराध,संगठित अपराध) के लिए अपनी पुलिस विशेषज्ञता और क्षमताओं का इस्तेमाल करता है।
  • इंटरपोल के प्रधान सचिवालय द्वारा, राष्ट्रीय केंद्रीय ब्यूरो (एनसीबी) और अधिकृत संस्थाओं के निवेदन पर 8 तरह के नोटिस जारी किए जाते हैं। ये नोटिस इंटरपोल की चार आधिकारिक भाषाओँ; अंग्रेजी, फ्रेंच, अरबी और स्पेनिश में प्रकाशित किए जाते हैं। इस तरह के नोटिस जारी करने के पीछे इंटरपोल का मकसद सदस्य देशों की पुलिस को सतर्क करना होता है ताकि संदिग्ध अपराधियों को पकड़ा जा सके या खोये हुए व्यक्तियों के बारे में जानकारी जुटाई जा सके।
  1. रेड कॉर्नर नोटिस (Red Corner Notice)
  2. पीला कार्नर नोटिस (Yellow Corner Notice)
  3. ब्लैक कार्नर नोटिस (Black Corner Notice)
  4. बैगनी नोटिस (Purple corner Notice)
  5. ग्रीन कॉर्नर नोटिस (Green Corner Notice)
  6. इंटरपोल-संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद विशेष सूचना (Interpol-United Nations Security Council Special Notice)
  7. ऑरेंज कार्नर नोटिस (Orange Corner Notice)
  8. ब्लू कॉर्नर नोटिस (Blue corner Notice)

भारत-अमेरिका सामरिक ऊर्जा साझेदारी की मंत्रिस्तरीय बैठक

  • भारत और अमेरिका ने सुपरक्रिटिकल सीओ2 (एससीओ2) बिजली चक्रों और कार्बन कैप्चर उपयोग एवं भंडारण (सीसीयूएस) समेत उन्नत कोयला प्रौद्योगिकियों पर आधारित परिवर्तनकारी बिजली उत्पादन को लेकर अनुसंधान के नए क्षेत्रों की घोषणा की है।
  • ये घोषणा 17 जुलाई, 2020 को भारत-अमेरिका सामरिक ऊर्जा साझेदारी (एसईपी) की वर्चुअल मंत्रिस्तरीय बैठक में हुई जिसे प्रगति समीक्षा, प्रमुख उपलब्धियां रेखांकित करने और सहयोग के लिए नए क्षेत्रों को प्राथमिकता देने के लिए आयोजित किया गया था। इस बैठक की सह-अध्यक्षता अमेरिकी ऊर्जा सचिव डैन ब्रोइलेट और भारतीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस और इस्पात मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान ने की।

चर्चा के प्रमुख बिंदु -

  • सुपरक्रिटिकल सीओ2 (एससीओ2) बिजली चक्रों और कार्बन कैप्चर उपयोग एवं भंडारण (सीसीयूएस) समेत उन्नत कोयला प्रौद्योगिकियों पर आधारित परिवर्तनकारी बिजली उत्पादन को लेकर अनुसंधान के नए क्षेत्रों की घोषणा की गई
  • 30 भारतीय और अमेरिकी इकाइयों के संघ द्वारा स्मार्ट ग्रिड और ऊर्जा भंडारण को कार्यान्वित किया जा रहा है
  • स्मार्ट ग्रिड अवधारणाओं, वितरित ऊर्जा संसाधनों, एकीकृत समाधानों के प्रभाव व मूल्य और वितरण प्रणाली संचालकों के रूप में उपयोगिताओं की उभरती भूमिका की सामाजिक स्वीकृति के लिए नीतिगत निर्देश
  • स्वच्छ कोयला प्रौद्योगिकियों, सुपरक्रिटिकल कार्बन डाइऑक्साइड (एससीओ2) पावर साइकल और कार्बन कैप्चर उपयोग एवं भंडारण (सीसीयूएस) प्रौद्योगिकियों में सहयोग के लिए समान प्राथमिकताएं

:: राजव्यवस्था ::

उपभोक्ता संरक्षण कानून 2019

  • खाद्य और उपभोक्ता मामलों के केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने कहा है कि 20 जुलाई यानी सोमवार से देश में नया उपभोक्ता संरक्षण कानून 2019 को लागू कर दिया जाएगा। यह 1986 में बने कानून का स्थान लेगा।

उपभोक्ता संरक्षण कानून 2019 से संबंधित मुख्य तथ्य

  • नया उपभोक्ता संरक्षण कानून अपने कई नए अधिसूचित नियमों और प्रावधानों के माध्यम से उपभोक्ताओं को उनके अधिकारों के प्रति अधिक सुरक्षा प्रदान करेगा।
  • नए उपभोक्ता संरक्षण कानून में उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग, मध्यस्थता, उत्पादों के लिए तय जिम्मेदारी और मिलावटी/खतरनाक उत्पाद बनाने और बेचने पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान, उपभोक्ताओं को अधिक सुरक्षा और अधिकार प्रदान करता है।
  • केन्द्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण बहुत जल्द काम शुरू कर देगा। यह अनुचित व्यापारिक गतिविधियों पर रोक लगाने हेतु सामूहिक कार्रवाई और नियमों को लागू कर उपभोक्ताओं के हितों को सुरक्षा देगा। केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) किसी भी किसी भी उपभोक्ता मामलों का अपनी ओर से संज्ञान ले सकता है, जांच शुरू कर सकता है और उपयुक्त कार्रवाई कर सकेगा। उपभोक्ता कहीं से भी शिकायत दर्ज कर सकते हैं और उन्हें अपने मामलों का प्रतिनिधित्व करने के लिए वकील नियुक्त करने की आवश्यकता नहीं है। मध्यस्थता के लिए, नियमों में निश्चित समयावधि तय की जायेगी।
  • जिला, राज्य और केंद्रीय उपभोक्ता मंचों, जिसे अब 'आयोग' कहा जाएगा।
  • भ्रामक विज्ञापनों पर जेल की सजा और जुर्माने का प्रावधान है। मशहूर हस्तियों के लिए जेल का कोई प्रावधान नहीं है, लेकिन अगर वे भ्रामक विज्ञापन करते पाए जाते हैं तो उन्हें उन उत्पादों का समर्थन करने पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है।

:: अर्थव्यवस्था ::

रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार

चर्चा में क्यों?

  • अमेरिका और भारत ने रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार बनाने के लिए एक सहमति ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके अलावा दोनों देशों के बीच भारत का भंडार बढ़ाने के लिए अमेरिका में कच्चे तेल का भंडारण करने के लिए बातचीत अग्रिम चरण में है।

पेट्रोलियम रिज़र्व क्या है?

  • पेट्रोलियम आपूर्ति के दौरान आनेवाली आपातकालीन स्थिति हेतु कोई भी देश अपनी तेल भंडारण की क्षमता को विकसित करता है।
  • लुइसियाना और टेक्सास राज्य में भूमिगत रूप से बनाए गए तेल भंडार दुनिया की सबसे बड़ी आपातकालीन आपूर्ति है।
  • अमेरिका के बाद दुनिया में कच्चे तेल का दूसरा सबसे बड़ा भूमिगत भंडार चीन के पास है। भारत के पेट्रोलियम रिज़र्व की स्थिति
  • मौजूदा समय में भारत के पास 2 महीने से अधिक का तेल-भंडार है।
  • इसका कारण भारत की आर्थिक स्थिति का सुधरना और दूसरी तरफ तेल स्टोरेज इन्फ्रास्ट्रक्चर का बेहतर होना है।
  • इंडियन स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व लिमिटेड अब तक तीन जगहों पर पेट्रोलियम भंडार विकसित कर चुका है।
  • इन तीन जगहों में,विशाखापत्तनम में 13.3 लाख टन, मंगलोर में 15 लाख टन और पदुर (कर्नाटक) में 25 लाख टन क्षमता वाले भंडार विकसित कर चुकी है।
  • 2017-18 के बजट भाषण में ओडिशा के चंदीखोल और राजस्थान के बीकानेर में इस तरह के दो और पेट्रोलियम भंडार बनाने की घोषणा की गई थी।
  • इसके अलावा गुजरात के राजकोट में भी भूमिगत तेल भंडार बनाने की योजना पर काम चल रहा है।

भारत एसडीजी, राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति और मातृ मृत्यु दर लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में अग्रसर

चर्चा में क्यों?

  • केन्द्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने मातृ मृत्यु दर (एमएमआर) के मामले में भारत द्वारा प्राप्त सफलता को रेखांकित किया।

भारत की उपलब्धि एक नजर में

  • भारत के रजिस्ट्रार जनरल द्वारा जारी एमएमआर की रिपोर्ट के अनुसार '' भारत की मातृ मृत्यु अनुपात दर (एमएमआर) में एक वर्ष में 9 अंकों की गिरावट आई है। यह अनुपात 2015-17 में 122 से घटकर 2016-18 में 113 हो गया है। देश में एमएमआर में 2011 से लेकर 2018 के दौरान लगातार कमी देखी गई। 2011-2013 में जहां यह 167 वहीं 2014-2016 में यह 130 हो गया, 2015-17 में यह घटकर 122 और 2016-18 में 113 रह गया।
  • एमएमआर में निरंतर गिरावट के साथ, भारत 2030 तक 70 / लाख जीवित बच्चों के जन्म के सतत विकास लक्ष्य और 100 / जीवित बच्चों के जन्म की राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति (एनएचपी) लक्ष्य 2020 को हासिल करने की राह पर अग्रसर है। एसडीजी लक्ष्य हासिल करने वाले राज्यों की संख्या अब 3 से बढ़कर 5 हो गई है। इन राज्यों में केरल (43), महाराष्ट्र (46) तमिलनाडु (60), तेलंगाना (63) और आंध्र प्रदेश (65) शामिल है।
  • देश में ग्यारह राज्य हैं जिन्होंने एनएचपी द्वारा निर्धारित एमएमआर के लक्ष्य को प्राप्त किया है जिसमें उपरोक्त 5 और झारखंड (71), गुजरात (75), हरियाणा (91), कर्नाटक (92), पश्चिम बंगाल (98) और उत्तराखंड (99) जैसे राज्य हैं।
  • तीन राज्यों (पंजाब) (129), बिहार (149), ओडिशा (150) में एमएमआर 100-150 के बीच है, जबकि 5 राज्यों छत्तीसगढ़ (159), राजस्थान (164), मध्य प्रदेश के लिए (173), उत्तर प्रदेश (197) और असम (215), एमएमआर 150 से ऊपर है।
  • राजस्थान जिसमें एमएमआर में 22 अंकों की अधिकतम गिरावट देखी गई , उत्तर प्रदेश जिसमें 19 अंकों, ओडिशा जिसमें 18 अंकों, बिहार जिसमें 16 अंकों और मध्य प्रदेश जिसमें 15 अंको की गिरावट दर्ज हुई।
  • दो राज्यों (तेलंगाना और महाराष्ट्र) ने एमएमआर में 15 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की है जबकि 4 राज्यों अर्थात् ओडिशा, राजस्थान, आंध्र प्रदेश और गुजरात में 10 से 15 प्रतिशत की गिरावट देखी गई है। कर्नाटक, असम, झारखंड, हरियाणा, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे साता राज्यों में एमएमआर में 5 से 10 प्रतिशत की की गिरावट देखी गई है।
  • रजिस्‍ट्रार जनरल ऑफ इंडिया के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, असम में प्रसव के समय मातृ मृत्‍यु दर की तादाद सबसे ज्‍यादा है। उत्‍तर प्रदेश और मध्‍य प्रदेश का नंबर उसके बाद है।

सरकार के प्रयास

  • डॉ. हर्षवर्धन ने केन्द्र, राज्यों और संघ शासित प्रदेश की सरकारों द्वारा इस दिशा में किए जा रहे प्रयासों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के साथ-साथ सेवाओं की गुणवत्ता और उनकी पहुंच पर ध्यान केन्द्रित करने के सरकार के गहन प्रयास और एनएचएम के तहत जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम और जननी सुरक्षा जैसी योजनाएं और प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान और लक्ष्य जैसी नई पहलों का इस सफलता के पीछे बड़ा हाथ है।
  • भारत सरकार ने प्रसव बाद और पूर्व की देखभाल के लिए मिडवाइफ की व्यवस्था करने के साथ ही सुमन कार्यक्रम को लागू करने की भी योजना बनाई है ताकि प्रसूताओं और नवजात शिशुओ के लिए मुफ्त और गुणवत्तापूर्ण सेवाओं की व्यापक पहुंच हो सके। इसमें ऐसी सेवाओं की अनुपलब्धता पूरी तरह से खत्म करने के साथ ही सम्मानजनक मातृत्व देखभाल सुनिश्चित किया जाना शामिल है।

विमानन क्षेत्र के निवेश प्रस्तावों में तेजी हेतु एकल खिड़की की व्यवस्था

  • नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने घरेलू विमानन उद्योग में विभिन्न निवेश प्रस्तावों में तेजी लाने के लिये एकल-खिड़की मंजूरी तंत्र स्थापित किया है। मंत्रालय ने शनिवार को एक ट्वीट में कहा, "नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने शीघ्र सहायता और मंजूरी के लिये निवेश मंजूरी सेल गठित की है।"
  • इस सेल की स्थापना की घोषणा वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस वर्ष फरवरी में 2020-2021 के केंद्रीय बजट में की थी। मंत्रालय के 16 जुलाई के आदेश के अनुसार, इस संबंध में एक जुलाई को उद्योग और व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईटी) के एक आदेश के बाद सेल की स्थापना की गयी।
  • 10 सदस्यीय सेल का नेतृत्व विमानन मंत्रालय में संयुक्त सचिव अंबर दुबे करेंगे। सेल के बाकी नौ सदस्यों में से पांच विमानन मंत्रालय से हैं। इनमें से एक भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण से और एक इसके कार्गो और लॉजिस्टिक्स व्यवसाय एआईएसीएलएस से तथा एक नागरिक उड्डयन महानिदेशालय से हैं। एक सदस्य को चेयरमैन के द्वारा नियुक्त किया जाना है।

:: विज्ञान और प्रौद्योगिकी ::

इबोला वायरस

चर्चा में क्यों?

  • कोरोनावायरस के बाद अब कुछ देशों में इबोला का प्रकोप भी बढ़ने लगा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसके बारे में चेताते हुए इस बीमारी से लड़ने में आने वाली धन की कमी के बारे में चेतावनी दी है।
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से बताया गया कि इन दिनों कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य में इबोला संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं। संगठन का कहना है कि ये भी कोरोनावायरस की तरह ही एक घातक बीमारी है। इससे लड़ने के लिए धन की आवश्यकता होगी, इस वजह से इससे निपटने के लिए दुनिया के देश तैयारी कर लें। संगठन ने कहा कि कांगो में ऐसे 56 मामले दर्ज किए गए हैं, जोकि 2018 में प्रांत के अंतिम प्रकोप में दर्ज मामलों की कुल संख्या से अधिक है।

क्‍या है इबोला?

  • बता दें कि इबोला अफ्रीका के उष्णकटिबंधीय वर्षावन वाले इलाके की क्षेत्रीय बीमारी है। इबोला वायरस की पहचान साल 1976 में की गई थी। उस वर्ष के अंत तक विषाणु की दो संबद्ध प्रजातियों की पहचान इबोला जायरे और इबोला सूडान के रूप में की गई। तीन अन्य प्रजातियों का भी पता लगाया गया। लगभग चार दशक बाद इसके नए मामले पश्चिमी अफ्रीका में एक बार फिर 2014 में सामने आए थे। तब से अब तक ये एक खतरनाक महामारी बन चुकी है। कांगो गणराज्य में इबोला के नाम से पहचाने जाने वाले इस रोग से काफी मौतें हुई हैं। इसके लक्षणों में शुरू में अचानक बुखार, कमजोरी, मांसपेशियों में दर्द और गले में खराश होती है।

:: पर्यावरण और पारिस्थितिकी ::

राष्‍ट्रीय आपदा मोचन निधि (एनडीआरएफ)

  • केंद्र सरकार ने आपदा प्रबंधन के प्रयोजन से आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 की धारा 46(1)(b) के अनुसार, किसी व्‍यक्ति अथवा संस्‍था से राष्‍ट्रीय आपदा मोचन निधि में अंशदान/अनुदान प्राप्‍त करने की प्रक्रिया निर्धारित की है। तदनुसार, किसी व्‍यक्ति अथवा संस्‍था द्वारा राष्‍ट्रीय आपदा मोचन निधि में अंशदान/अनुदान दिए जा सकते हैं।

क्या होता है आपदा प्रबंधन कोष?

  • आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 की धारा 46 (1)(b) के अनुसार केंद्र सरकार किसी आकस्मिक आपदा स्थिति या आपदा से निपटने के लिए सरकारी गजट में अधिसूचना के माध्यम से एनडीआरएफ नामक कोष गठित कर सकती है जिसमें आपदा प्रबंधन के लिए चंदा दिया जा सकता है।

:: विविध ::

पीपीपी मॉडल के तहत चार रेलवे स्टेशन को रिडेवलेप करने का प्रस्ताव

  • देश के चार बड़े शहरों के रेलवे स्टेशन को रिडेवलेप करने के लिए सरकार ने 9 कंपनियों को शॉर्ट लिस्ट कर लिया है। ये कंपनियां नागपुर, गवालियर, अमृतसर और साबरमती रेलवे स्टेशन को आधुनिक बनाने के लिए रिडेवलप करेंगी। ये स्टेशन रेलोपोलिस के रूप में विकसित किए जाएंगे। स्टेशनों का इस तरह से कायाकल्प किया जाएगा जिससे यात्रियों को वर्ल्ड क्लास अनुभव होगा। पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल के तहत इन प्रोजेक्ट्स को पूरा किया जाना है।

:: प्रिलिम्स बूस्टर ::

  • ऊर्जा क्षेत्र में प्रशिक्षित होने वाले युवाओं को रोजगार उपलब्ध करवाने के लिए किस रोजगार पोर्टल का गठन किया गया है? (विद्युत रोजगार पोर्टल)
  • केरल में सोने की तस्करी के आरोप में NIA ने किस संगठन से आरोपियों के खिलाफ ब्लू कॉर्नर नोटिस हेतु सिफारिश की है एवं यह संगठन कहां स्थित है? (इंटरपोल,लियॉन, फ़्रान्स)
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा भाषण से चर्चा में रहे संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक परिषद (ECOSOC) में कितने सदस्य हैं एवं इसकी सदस्यता का निर्धारण कैसे होता है? (54, भौगोलिक प्रतिनिधित्व)
  • ECOSOC में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अभिभाषण से चर्चा में रहे किस तिथि तक सभी भारत वासियों आवास उपलब्ध करवाया जाएगा? (2022)
  • हाल ही में रेलवे के द्वारा पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल पर किन 4 स्टेशनों को रीडिवेलप करने हेतु निविदा निकाली गई है? (नागपुर, गवालियर, अमृतसर और साबरमती)
  • कोविड-19 महामारी में रोजगार उपलब्ध करवाने से चर्चा में रहे ASEEM (Aatamanirbhar Skilled Employee Employer Mapping) पोर्टल का विकास किस संस्था के द्वारा किया गया है? (नेशनल स्किल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन-एनसडीसी और बैटरप्लेस)
  • अपराधियों के धरपकड़ हेतु हाल ही में दिल्ली पुलिस के द्वारा AI और डेटा के एल्गोरिदम पर आधारित विश्लेषण किस अनुप्रयोग को अपनाया गया है? (प्रिडिक्टिव पुलिसिंग- Predictive policing)
  • आगामी 20 जुलाई से देश में उपभोक्ता संरक्षण हेतु कौन सा नया कानून लागू किया जाएगा इसके तहत उपभोक्ता संरक्षण हेतु किस शीर्ष प्राधिकरण की स्थापना होगी? (नया उपभोक्ता संरक्षण कानून 2019, केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण-सीसीपीए)
  • हाल ही में अमेरिका से हुए संबंधों से चर्चा में रहे भारत के कार्यरत रणनीतिक तेल भंडार कहां पर स्थित है? (विशाखापत्तनम, मंगलोर और पदुर कर्नाटक)
  • ECOSOC में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अभिभाषण से चर्चा में 2030 तक कितने गीगा वाट अक्षय ऊर्जा के उत्पादन का लक्ष्य रखा है? (450 गीगा वाट)
  • डॉक्टर हर्षवर्धन द्वारा भारत में मातृत्व मृत्यु दर पर प्रकाश डालने से से चर्चा में रहे मातृत्व मृत्यु दर के संदर्भ में सबसे निचले पायदान पर कौन से राज्य स्थित है? (क्रमशः, असम, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश)
  • हाल ही में कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य में संक्रमण बढ़ने से चर्चा में रहे इबोला संक्रमण के कारक कौन होते हैं? (इबोला वायरस)
  • केंद्र सरकार द्वारा किसी व्यक्ति और संस्था को अनुसंधान की अनुमति देने से चर्चा में रहे राष्‍ट्रीय आपदा मोचन निधि का गठन किस अधिनियम के तहत किया गया था? (आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005)

स्रोत साभार: Dainik Jagran (Rashtriya Sanskaran), Dainik Bhaskar (Rashtriya Sanskaran), Rashtriya Sahara (Rashtriya Sanskaran) Hindustan Dainik (Delhi), Nai Duniya, Hindustan Times, The Hindu, BBC Portal, The Economic Times (Hindi & English), PTI, PIB