(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (19 अगस्त 2019)

दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर


(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (19 अगस्त 2019)


:: राष्ट्रीय समाचार ::

चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS)

  • भारतीय सेनाओं को और मजबूती प्रदान करने और तालमेल बेहतर करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 73वें स्वतंत्रता दिवस (73rd Independence Day) पर बड़ी घोषणा की है। उन्होंने तीनों सेनाओं के ऊपर एक प्रमुख का पद बनाने की घोषणा की है, जो चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) होगा। भारत में 20 साल से इस सीडीएस व्यवस्था की जरूरत महसूस की जा रही है। हालांकि, दुनिया के तमाम देशों में ये व्यवस्था पहले से ही लागू है।
  • लाल किले की प्राचीर से ध्वजारोहण के बाद पीएम मोदी ने अपने भाषण में तीनों सेनाओं की मजबूती और तालमेल पर काफी जोर दिया था। उन्होंने कहा था, 'तेजी से बदलती तकनीक और वक्त के साथ युद्ध के तरीके भी बदल रहे हैं। अब अगर कहीं भी युद्ध हुआ तो वो पहले से कहीं भयावह होगा। इससे निपटने के लिए तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमाल आवश्यक है।' इसके साथ ही उन्होंने तीनों सेनाओं, थल सेना, नौसेना और वायु सेना के बीच बेहतर तालमाल स्थापित करने के लिए CDS सिस्टम लागू करने की घोषणा की।

पीएम ने बताई CDS की जरूरत

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि सुरक्षा विषय के जानकार लंबे समय से इस सिस्टम की मांग करते रहे हैं। उनकी मांग और सेना में बेहतर समन्वय की जरूरतों को देखते हुए चीफ ऑफ डिफेंस स्टॉफ (CDS) की व्यवस्था की गई है। सीडीए तीनों सेनाओं के प्रभारी होंगे। इससे तीनों सेनाओं को एक नेतृत्व प्राप्त होगा। प्रधानमंत्री ने कहा ये व्यवस्था इसलिए की गई है क्योंकि आज के समय में तीनों सेनाओं का साथ चलना बेहद जरूरी है। तीनों सेनाएं एक साथ चलें तभी काम चलेगा। अगर एक सेना आगे और बाकी सेनाएं उनके एक-एक कदम पीछे चल रहीं हैं तो काम नहीं चलेगा।

क्या है सीडीएस?

  • चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ का पद तीनों सेनाओं के ऊपर होता है। 1999 के कारगिल युद्ध के बाद से सुरक्षा विशेषज्ञ इसकी मांग करते रहे हैं। कारगिल के बाद तत्कालीन उपप्रधानमंत्री लाल कृष्ण आडवाणी की अध्यक्षता में बने ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स (GOM) ने भी तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने के लिए CDS की सिफारिश की थी। GOM ने अपनी सिफारिश में कहा था अगर कारगिल युद्ध के दौरान ऐसी कोई व्यवस्था होती और तीनों सेनाएं बेहतर तालमेल से युद्ध के मैदान में उतरतीं तो नुकसान काफी कम होता। 20 साल बाद इसे लागू गया है।

सेनाओं के बीच नहीं बन पाई थी सहमति

  • अटल बिहार वायपेयी सरकार में भी ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स की सिफारिश पर तीनों सेनाओं के प्रमुख के तौर पर सीडीएस व्यवस्था लागू करने का प्रयास किया गया था। हालांकि, उस वक्त तीनों सेनाओं के बीच इस मुद्दे पर सहमति नहीं बन पाई थी। इसके बाद तीनों सेनाओं के समन्वय के लिए चीफ ऑफ स्टाफ कमेटी (CoSC) का पद बनाया गया, लेकिन इसके चेयरमैन के पास पर्याप्त शक्तियां नहीं थीं। लिहाजा, ये पद होते हुए भी प्रभावी नहीं था। फिलहाल वासु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल बीएस धनोआ चीफ ऑफ स्टाफ कमेटी के चेयरमैन हैं। अब मोदी सरकार दो के पहले स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री ये महत्वपूर्ण घोषणा की है।

वायुसेना ने किया था CDS का विरोध

  • अटल सरकार में सीडीएस व्यवस्था लागू न हो पाने के पीछे सबसे बड़ी वजह वायुसेना थी। वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एस कृष्णास्वामी ने इस पद का विरोध किया था। वहीं थल सेना सेना प्रमुख जनरल बिक्रम सिंह और नेवी प्रमुख एडमिरल अरुण प्रकाश ने इस सिस्टम का समर्थन किया था। यहां तक की ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स (GOM) की सिफारिश पर उस वक्त की कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (सीसीए) ने मंजूरी प्रदान कर दी थी।

पहली मोदी सरकार में ही शुरू हो गया था काम

  • चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ का पद तीनों सेनाओं के बीच समन्वय के लिए जितना महत्वपूर्ण है, उतना ही प्रमुखता से ये मामला मोदी सरकार के एजेंडे में भी शामिल रहा है। इसकी घोषणा भले ही मोदी सरकार दो में हुई हो, लेकिन इसके प्रयास पहली मोदी सरकार में ही शुरू हो गए थे। मोदी सरकार एक में रक्षामंत्री रहे दिवंगत भाजपा नेता मनोहर पर्रिकर ने भी इस दिशा में काम किया था। उन्होंने अपने मंत्रीकाल में दो साल के भीतर ये पद बनाने की घोषणा भी कर दी थी, लेकिन स्वास्थ्य वजहों से वह अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सके और ये मामला थोड़ा लंबा खिंच गया।

कई देशों में लागू है CDS सिस्टम

  • भारत ने भले ही अपनी तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने के लिए CDS सिस्टम की घोषणा अब की हो, लेकिन दुनिया के तमाम देशों में सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने और उन्हें एकरूपता देने के लिए ये व्यवस्था पहले से लागू है। अमेरिका, चीन, यूनाइटेड किंगडम, जापान और नॉटो देशों की सेनाओं में ये पद पहले से लागू है। इसे एकीकृत रक्षा प्रणाली का सबसे अहम हिस्सा माना जाता है।

कौन होगा सीडीएस?

  • चूंकि सीडीएस तीनों सेनाओं का प्रमुख होगा, लिहाजा उसके पास सैन्य सेवा का लंबा अनुभव और उपलब्धियां होनी चाहिए। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ के पद की जिम्मेदारी थल सेना, नौसेना या वायु सेना प्रमुख को दी जा सकती है। अन्य देशों में तीनों सेना प्रमुखों में जो सबसे सीनियर और अनुभवी होता है उसे ही इस पद की जिम्मेदारी दी जाती है। सीडीएस की जिम्मेदारी देश की सेनाओं को वर्तमान चुनौतियों के अनुरूप तैयार रखना और भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए रूपरेखा तैयार करना होता है।

'जय हिंद-ज्वाइंट इनीशिएटिव ऑफ एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटीज इन इंडिया

  • कृषि शिक्षा के तीन प्रमुख संस्थानों जीबी पंत कृषि विश्वविद्यालय, पंतनगर, चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विवि, हिसार एवं पंजाब कृषि विवि, लुधियाना ने ब्लैक बोर्ड शिक्षण को वर्चुअल शिक्षण में बदलने के लिए हाथ मिलाया है, जिससे देश में कृषि शिक्षा की दिशा और दशा दोनों बदल जाएंगी।
  • उच्च कृषि शिक्षा में छात्रों को प्रेरित करने एवं पारंगत बनाने के लिए तीन कृषि विश्वविद्यालयों की संयुक्त पहल पर अभिनव प्रोग्राम 'जय हिंद-ज्वाइंट इनीशिएटिव ऑफ एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटीज इन इंडिया फॉर होनिंग एंड इंस्पायरिंग एग्रीकल्चरल ग्रेजुएट्स अंडर न्यू डाइमेंशन्स' तैयार किया गया है। देश में यह पहली बार है, जब किसी डिग्री प्रोग्राम के नियमित पाठ्यक्रमों को पढ़ाने के लिए ऐसी व्यवस्था की जा रही है। यानी व्याख्यान किसी एक विवि में विषय विशेषज्ञ द्वारा दिया जाएगा, जबकि अन्य विवि के छात्रों को वर्चुअल क्लासेज के माध्यम से लाइव प्राप्त होगा।
  • पंतनगर विवि के कृषि मौसम विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. अजीत नैन ने बताया कि जय हिंद विभिन्न संस्थानों में उपलब्ध साझा बौद्धिक संसाधनों पर निर्भर करेगा। इसके लिए विभिन्न पाठ्यक्रमों के लिए तीन विवि के सर्वश्रेष्ठ शिक्षकों की पहचान की जाएगी। बताया कि शुरुआत में इस प्लेटफार्म से तीन-चार कोर्स शैक्षणिक सत्र 2019-20 के पहले सेमेस्टर से शुरू करने का प्रयास है। पंतनगर विवि में आभासी कक्ष सुविधाओं से लैस समन्वय सेल की स्थापना की गई है। जहां लाइव प्रसारित होने वाले ऑडियो-वीडियो व्याख्यान रिकॉर्ड भी किए जाएंगे और वेबसाइट पर 24 घंटे उपलब्ध रहेंगे।

:: अंतराष्ट्रीय समाचार ::

भारत-भूटान संबंध एवं चीन

  • चीन के लिहाज से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भूटान दौरा खास मायने रखता है। चीन की कोशिश हमेशा से रही है कि भूटान में उसका प्रभाव बढ़े और कूटनीतिक संबंध बेहतर हों, लेकिन भूटान का साफ रुख यह है कि वो भारत के साथ है। भारत के साथ भूटान के कूटनीतिक रिश्ते हैं, जबकि चीन के साथ उसके इस तरह के रिश्ते भी नहीं हैं। डोकलाम विवाद के समय भी भूटान ने भारत का साथ दिया था।

भारत-भूटान के मध्य मैत्री संधि

  • भारत और भूटान की दोस्ती को और करीब लाने में 1949 में हुई इस संधि का बड़ा योगदान रहा है। इस संधि के तहत भूटान को अपने विदेशी संबंधों के मामले में भारत को भी शामिल करना होता है। लेकिन, 2007 में इस समझौते में संशोधन हुआ और इसमें जोड़ा गया कि जिन विदेशी मामलों में भारत सीधे तौर पर जुड़ा होगा, उन्हीं में भूटान उसे सूचित करेगा। यही नहीं, इस संधि से दोनों देश, अपने राष्ट्रीय हितों से संबंधित मुद्दों पर एक दूसरे के साथ घनिष्ठ सहयोग करने तथा एक दूसरे की राष्ट्रीय सुरक्षा और हितों के विरुद्ध अपने क्षेत्रों का उपयोग न करने देने के लिए प्रतिबद्ध होंगे। इसलिए भारत और भूटान के बीच की यह संधि चीन को हमेशा खटकती रही है।

मजबूत व्यापार संबंध

  • भारत और चीन के बीच हिमालय की गोद में बसे आठ लाख आबादी वाले देश भूटान की वित्तीय और रक्षा नीति पर भी भारत का प्रभाव है। यही नहीं, भूटान अपना 98 फीसद निर्यात भारत को करता है और करीब 90 फीसद सामान भी भारत से ही आयात करता है। भारतीय सेना भूटान की शाही सेना को प्रशिक्षण देती रही है। ये बातें भी चीन को कहीं न कहीं परेशान करती रही हैं।

डोकलाम विवाद

  • ये इलाका वहां है जहां चीन और भारत के उत्तर-पूर्व में मौजूद सिक्किम और भूटान की सीमाएं मिलती हैं। भूटान और चीन दोनों इस इलाके पर अपना दावा करते हैं और भारत भूटान के दावे का समर्थन करता है। यह वही इलाका है जो भारत को सेवन सिस्टर्स नाम से मशहूर उत्तर पूर्वी राज्यों से जोड़ता है और सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है। भारत भूटान के साथ 699 किलोमीटर लंबी सीमा साझा करता है।

सासेक परियोजना ने बढ़ार्ई चिंता

  • 2001 में भारत ने भूटान, नेपाल, बांग्लादेश व म्यांमार को जोड़ने के लिए सासेक (साउथ एशियन सब रीजनल इकोनॉमिक को-ऑपरेशन) कॉरिडोर शुरू किया था। इंफाल से मोरेह (म्यांमार) को जोड़ने वाले इस मार्ग को पूर्वी एशियाई बाजार के लिए भारत का प्रवेश द्वार माना जा रहा है। भारत की योजना इस मार्ग के जरिये पूर्वी एशियाई बाजारों को पूर्वोत्तर राज्यों को जोड़ने की है। इंफाल-मोरेह मार्ग के निर्माण के साथ ही बैंकाक तक पहुंचने के लिए भारत को एक वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध हो जाएगा। 2014 में मालदीव और श्रीलंका भी इसके सदस्य बन गए। चीन की महत्वकांक्षी ओबीओआर परियोजना के जवाब में भारत यह परियोजना लेकर आया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बहरीन और यूएई का दौरा

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 23 अगस्त से तीन दिनी यात्रा पर संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और बहरीन जाएंगे। मोदी वहां दोनों देशों के शीर्ष नेताओं से मुलाकात के दौरान द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा करेंगे।

'आर्डर ऑफ जायद' से सम्मानित होंगे मोदी

  • पीएम मोदी सबसे पहले यूएई जाएंगे। यहां पर उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक अलंकरण 'आर्डर ऑफ जायद' से सम्मानित किया जाएगा। 24 अगस्त को वह दो दिनी यात्रा पर बहरीन के लिए रवाना होंगे। यह किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री की खाड़ी के इस देश में पहली यात्रा होगी।
  • दरअसल, इस साल अप्रैल में यूएई ने पीएम मोदी को इस पुरस्कार से सम्मानित करने की घोषणा की थी। प्रधानमंत्री को यह सम्मान दोनों देशों के बीच लंबे समय से चली आ रही मित्रता और संयुक्त रणनीतिक सहयोग को मजबूत करने में उनकी भूमिका के लिए दिया जा रहा है।
  • इस सर्वोच्च नागरिक सम्मान का नाम यूएई के संस्थापक शेख जायद बिन सुल्तान अल नाहयान के नाम पर रखा गया है। खाड़ी नेता के जन्मशती वर्ष पर पीएम मोदी को यह पुरस्कार प्रदान किया जाएगा।

श्रीनाथजी मंदिर का जीर्णोद्धार

  • बहरीन यात्रा के दौरान पीएम मनामा में श्रीनाथजी (श्रीकृष्ण) मंदिर के जीर्णोद्धार का भी शुभारंभ करेंगे। पिछले कुछ वर्षो में भारत और बहरीन के बीच संबंधों में आई ताजगी को ऐसे समझा जा सकता है कि दोनों देशों के बीच 2018-19 में व्यापार बढ़कर लगभग 9300 करोड़ रुपये पहुंच गया है।
  • बहरीन में 3,000 से अधिक भारतीय स्वामित्व वाले संयुक्त वेंचर्स दोनों देशों के बीच गहन आर्थिक जुड़ाव का संकेत देते हैं। बता दें कि बहरीन में सबसे बड़ा प्रवासी समुदाय भारतीय नागरिकों का है। इनकी संख्या लगभग 3,50,000 है।

हांगकांग प्रदर्शन

  • हांगकांग के लोकतंत्र कार्यकर्ता बीजिंग की चेतावनी के बावजूद रविवार को व्यापक स्तर पर रैली निकालने की तैयारी कर रहे हैं। पिछले 10 हफ्तों से चल रहे प्रदर्शनों ने इस अंतरराष्ट्रीय आर्थिक केंद्र को संकट में डाल दिया है। उधर चीन के वामपंथी शासन ने कड़ा रुख अपनाया हुआ है और हिंसक प्रदर्शनकारियों के कदमों को ''आतंकवादी" की तरह करार दिया है।
  • प्रदर्शनकारी बड़ी रैलियां करने की योजना बना रहे हैं जिसका मकसद चीन और शहर के गैर निर्वाचित नेताओं को यह दिखाना है कि उनके आंदोलन को अब भी व्यापक जनसमर्थन हासिल है।
  • प्रदर्शनकारियों ने मंगलवार को शहर के हवाई अड्डे पर यात्रियों को विमानों पर सवार होने से रोक दिया था और बाद में दो पुरुषों से मारपीट की जिस पर उन्होंने चीन का जासूस होने का आरोप लगाया।
  • चीन की सरकारी मीडिया ने 'शेनजेन' में सीमा के पास सैन्य कर्मियों एवं बख्तरबंद वाहनों की मौजूदगी की तस्वीरें प्रकाशित की। अमेरिका ने चीन को सेना भेजने के खिलाफ आगाह किया है। कई विश्लेषकों का मानना है कि चीन का यह कदम उसकी साख के साथ ही आर्थिक संकट का मामला बन सकता है।

यमन के हाउती विद्रोहियों ने ईरान नियुक्त किया अपना राजदूत

  • यमन के हाउती विद्रोहियों ने ईरान में अपना राजदूत नियुक्त करने की घोषणा की है। इसको लेकर यमन की सरकार ने कड़ा विरोध जताया है। यमन की राजधानी सना और देश के उत्तरी हिस्से पर कब्जा जमाए हाउती विद्रोहियों की ओर से कहा गया है कि राष्ट्रपति के आदेश के तहत सहयोगी देश ईरान में इब्राहिम मुहम्मद अल-दैलामी को राजदूत बनाने का निर्णय लिया गया है।
  • पिछले सप्ताह हाउती विद्रोहियों के एक प्रतिनिधि मंडल ने तेहरान में ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामनेई से मुलाकात की थी।
  • यमन की सरकार ने इस निर्णय का विरोध करते हुए कहा है कि ईरान और हाउती विद्रोहियों के बीच राजनयिक संबंध अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है। यह हाउती और ईरान के बीच गुपचुप तरीके से स्थापित रिश्तों को भी उजागर करता है।
  • इस निर्णय को लेकर ईरान के तरफ से अभी कोई बयान नहीं आया है। यमन में 2014 से हाउती विद्रोहियों और सऊदी अरब समर्थित राष्ट्रपति अब्दरब्बू मंसूर हादी की सरकार के बीच जंग जारी है

:: राजव्यवस्था और महत्वपूर्ण विधेयक ::

ई-सिगरेट, निकोटिन फ्लेवर वाले हुक्का पर पाबंदी के लिए अध्यादेश ला सकती है केंद्र सरकार

  • केंद्र सरकार ई-सिगरेट समेत इलेक्ट्रॉनिक निकोटिन डिलीवरी सिस्टम्स (ईएनडीएस) उत्पादों के निर्माण, बिक्री और आयात पर पाबंदी लगाने के लिए अध्यादेश ला सकती है। हालांकि सरकार इन पर रोक लगाने के लिए अन्य विकल्पों पर भी विचार कर रही है लेकिन यह कदम दिल्ली हाईकोर्ट से राहत नहीं मिलने पर उठाया जाएगा। कोर्ट पहले अपने एक आदेश में ऐसे उत्पादों पर प्रतिबंध लगाने के सरकार के फैसले पर रोक लगा चुका है।
  • धूम्रपान के वैकल्पिक उपकरणों जैसे ई-सिगरेट, हीट-नॉट-बर्न डिवाइस, वेप और ई-निकोटिन स्वाद वाले हुक्कों पर पाबंदी लगाना स्वास्थ्य मंत्रालय के 100 दिन के एजेंडे में शीर्ष प्राथमिकताओं में से एक है। मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के 75 दिन पूरे हो चुके हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय ईएनडीएस डिवाइस के निर्माण, बिक्री, वितरण और आयात पर प्रतिबंध लगाने के लिए हरकत में आया है।
  • सूत्रों का कहना है कि मंत्रालय इस मुद्दे पर कानूनी राय भी ले रहा है। यदि सरकार अध्यादेश लाती है तो संसद के अगले सत्र में एक बिल लाकर इसे कानूनी जामा पहनाया जाएगा। एक बार संसद से बिल के पारित होने पर ऐसे उत्पादों पर प्रस्तावित पाबंदी को कानूनी शक्ति मिल जाएगी।
  • केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) ने सभी राज्य सरकारों के औषधि नियंत्रकों को पत्र लिख कर कहा है कि वे ईएनडीएस की बिक्री, निर्माण, वितरण, व्यापार, आयात अथवा विज्ञापन करने की अनुमति नहीं दें। दिल्ली हाईकोर्ट की एकल पीठ ने इसी साल मार्च में केंद्र सरकार के सर्कुलर पर अंतरिम रोक लगा दी थी और कहा था कि ये उत्पाद मादक पदार्थ नहीं हैं और इस प्रकार का आदेश जारी करने का अधिकार अधिकारियों को नहीं है।
  • केंद्र ने इस फैसले के खिलाफ डिवीजन बेंच में अपील की थी। उसने भी याचिका खारिज कर दी और सरकार को फिर से एकल पीठ के पास जाने का निर्देश दिया। हाल ही में सरकार ने एकल पीठ के सामने जवाबी हलफनामा और आदेश को रद्द करने की याचिका दायर की है। इस मामले की सुनवाई 22 अगस्त को होनी है।

आईसीएमआर ने पूर्ण प्रतिबंध की सिफारिश की

  • शीर्ष रिसर्च संस्था इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) ने ईएनडीएस पर पूर्ण प्रतिबंध की सिफारिश की थी। उसका कहना है कि यह धूम्रपान न करने वाले लोगों में भी निकोटिन की आदत डाल सकता है।
  • उसका कहना है कि ई-सिगरेट हृदय प्रणाली पर प्रतिकूल असर डालती है। साथ ही यह सिगरेट के धूम्रपान की तरह श्वसन प्रतिरक्षा सेल फंक्शन और वायुमार्ग को बाधित करती है तथा गंभीर श्वसन रोगों के लिए जिम्मेदार है।

:: आर्थिक समाचार ::

रक्षा खरीद प्रक्रिया (डीपीपी) 2016 और रक्षा खरीदी नियमावली (डीपीएम) 2009की समीक्षा

  • रक्षा मंत्री श्रीराजनाथ सिंह ने रक्षा खरीद प्रक्रिया (डीपीपी) 2016 और रक्षा खरीदी नियमावली (डीपीएम) 2009की समीक्षा करने के लिए महानिदेशक (अधिग्रहण) की अध्यक्षता में एक समिति के गठन को मंजूरी दी है। यह समिति परिसंपत्ति अधिग्रहण से जीवन चक्र समर्थन तक निर्बाध प्रवाह सुनिश्चित करने के उद्देश्य से प्रक्रियाओं को संशोधित और अनुकूल बनाएगी।
  • डीपीपी 2016 और डीपीएम 2009 का संशोधन होना है। प्रक्रियाओं को अनुकूल बनाने से परिसंपत्ति अधिग्रहण से जीवन चक्र सहायता तक निर्बाध प्रवाह सुनिश्चित होगा और सरकार की 'मेक इन इंडिया' पहल मजबूत होगी। महानिदेशक के अलावा इस उच्च स्तर समिति के 11 अन्य सदस्य संयुक्त सचिव और मेजर जनरल के समकक्ष पदों पर आसीन अधिकारी हैं।
  • समिति के विचारणीय विषयों में निम्नलिखित शामिल हैं:
  1. डीपीपी 2016 और डीपीएम 2009में दी गई प्रक्रियाओं को संशोधित करना ताकि प्रक्रियात्मक अड़चनों और जल्दबाजी में रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया को दूर किया जा सके।
  2. डीपीपी 2016 और डीपीएम 2009के प्रावधान, जहां भी लागू हों उन्हें अनुकूल और मानकीकृत करने का प्रावधान ताकि उपकरणों के लिए जीवन चक्र सहायता को अधिक से अधिक बढ़ाया जा सके।
  3. भारतीय उद्योग की अधिक से अधिक भागीदारी में मदद करने और मजबूत रक्षा औद्योगिक आधार विकसित करने के लिए नीति और प्रक्रियाओं को सरल बनाना।
  4. जहां भी लागू हो,नई अवधारणाओं जैसे कि जीवन चक्र लागत, जीवन चक्र सहायता कार्य प्रदर्शन आधारित लॉजिस्टिक्स, आईसीटी, लीज अनुबंध,कोडिफिकेशन और मानकीकरण की जांच करना तथा उन्हें शामिल करना।
  5. भारतीय स्टार्ट-अप और अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा देने के प्रावधान शामिल करना।
  6. कोई अन्य पहलू जो अधिग्रहण प्रक्रिया को परिष्कृत करे और ‘मेक इन इंडिया’ पहल का समर्थन करने में योगदान दे।

2018-19 में साइबर अपराध पर सिस्को की रिपोर्ट

  • बैंकिंग-फाइनेंस, सरकारी संस्थान और महत्वपूर्ण इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट 2018-19 में भारत में साइबर अपराधियों के सबसे ज्यादा निशाने पर रहे। यह जानकारी टेक कंपनी सिस्को की ताजा रिपोर्ट से सामने आई है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि साइबर हमलों में से 26% हमले ऐसे हुए जिससे हर मामले में 50 लाख डॉलर (करीब 35 करोड़ रुपए) या इससे अधिक का नुकसान हुआ। सिस्को के भारत और सार्क के डायरेक्टर (सिक्युरिटी बिजनेस) विशाक रमण ने कहा, ‘हैकर्स निरंतर रूप से सक्रिय हैं और वे बहुत सोच-समझकर अपना निशाना तय करते हैं।
  • हमने पाया है कि कुल हमलों में से 20.1% बैंकिंग-फाइनेंस से जुड़े संस्थान पर हुए। दूसरा नंबर सरकारी संस्थानों का है। 2018-19 में हुए कुल साइबर हमलों में से 19.6% सरकारी संस्थानों पर किए गए। 15.1% हमलों के साथ महत्वपूर्ण इन्फ्रास्ट्रक्चर तीसरे स्थान पर है।’ उन्होंने बताया कि साइबर अपराधी अब डिफेंस, आईटी, टेलीकॉम और हेल्थकेयर को भी पहले की तुलना में ज्यादा निशाना बना रहे हैं। पिछले वित्त वर्ष में हुए कुल साइबर हमलों के 15.1% हमले डिफेंस संस्थानों पर किए गए।
  • साइबर अपराधी अब हमले के लिए कई मैकेनिज्म का इस्तेमाल करते हैं। रिटेल, हॉस्पिटैलिटी, एंटरटेनमेंट, ई-कॉमर्स को निशाना बनाने के लिए प्वॉइंट ऑफ सेल अटैक ज्यादा किए जाते हैं। इसके अलावा पब्लिक सेक्टर इकाइयों, ट्रांसपोर्टेशन, बैंकिंग-फाइनेंस को निशाना बनाने के लिए रैंसमवेयर का इस्तेमाल किया जाता है।रमण ने सिस्को द्वारा की गई एशिया-पैसिफिक सिक्युरिटी कैपेबिलिटी बेंचमार्क स्टडी का हवाला देते हुए कहा कि जिन संस्थानों पर साइबर हमले हुए उनमें से 21% ने बताया कि उन्हें हमले से करीब 40 से 99 लाख डॉलर (करीब 35 करोड़ से 70 करोड़ रुपए तक) का नुकसान हुआ है। वहीं, 5% संस्थानों को इन हमले से 1 करोड़ डॉलर (करीब 70 करोड़ रुपए) से ज्यादा का नुकसान हुआ है।
  • 27% मामलों में 70 लाख रुपए या इससे कम का नुकसान : ऐसा नहीं है कि साइबर हमलों से सिर्फ रेवेन्यू का नुकसान हुआ है। ग्राहक और अन्य खर्च भी इसमें शामिल हैं। कुछ संस्थानों को अपेक्षाकृत कम नुकसान भी हुआ है। 27% मामलों में नुकसान की राशि 1 लाख डॉलर (करीब 70 लाख रुपए) या इससे कम रही है। कुछ मामलों में राशि भले ही कम हो लेकिन, कुल मिलाकर आंकड़ा काफी बड़ा हो जाता है। इनसे बचने के लिए कंपनियां संभावित खतरों की पहले से पहचान करने की कोशिश कर रही है।

छोटे कर्जधारकों के लोन माफ कर सकती है केंद्र सरकार

  • छोटे कर्ज के तले दबे लोगों को केंद्र की मोदी सरकार बड़ा तोहफा दे सकती है। इसके तहत इन लोगों को नए सिरे से शुरुआत करने का अवसर प्रदान करने के लिए सरकार इनके लोन माफ कर सकती है। यह सब इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (आईबीसी) के फ्रेश स्टार्ट प्रावधानों के तहत किया जा सकता है। इसको लेकर योजना तैयार हो रही है।
  • कॉरपोरेट मामलों के सचिव इंजेती श्रीनिवास ने कहा कि आर्थिक रूप से गरीब वर्ग के लोगों को कर्ज से मुक्ति दिलाने के लिए लोन माफी की योजना बनाई जा रही है। इसके स्वरूप को लेकर माइक्रो फाइनेंस इंडस्ट्री से बातचीत चल रही है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि यह लोन माफी व्यक्तिगत दिवालियापन से जुड़े मामलों में दी जाएगी जोकि आर्थिक रूप से गरीब लोगों को सबसे ज्यादा व्यथित करती है।

5 साल में सिर्फ एक बार ही मिलेगा लोन माफी का लाभ

  • कारपोरेट मामलों के सचिव इंजेती श्रीनिवास ने बताया नए सिरे से शुरुआत के तहत एक बार लोन माफी योजना का लाभ ले लिया तो अगले पांच साल तक इसका लाभ नहीं मिल पाएगा। उन्होंने कहा कि हम माइक्रो फाइनेंस इंडस्ट्री संतुष्टि और सुरक्षा के सभी उपायों पर भी काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर इस योजना को लागू करने के लिए तीन से चार साल में सरकार पर 10000 करोड़ रुपए का अतिरिक्त भार पड़ेगा।

माइक्रोफाइनेंस इंडस्ट्री की चिंताओं का ख्याल रखने का दावा

  • कॉरपोरेट मामलों के सचिव ने बताया कि मंत्रालय माइक्रोफाइनेंस इंडस्ट्री से इस बारे में बात की है और इस घोषणा में उनकी चिंताओं का पूरा ध्यान रखा गया है। इस घोषणा का मकसद माइक्रोफाइनेंस इंडस्ट्री को बर्बाद करना नहीं है। उन्होंने बताया कि इसमें योग्यता के आधार पर छोटे और मुश्किल में पड़े कर्जधारकों को राहत देना है। योग्यता की शर्तों पर माइक्रोफाइनेंस इंडस्ट्री के साथ विस्तृत चर्चा की गई थी। सचिव ने बताया कि आईबीसी प्रावधानों के तहत कॉरपोरेट डेट को लेकर पर्सनल गारंटर के बारे में निर्देश जल्द आएंगे। पार्टनरशिप और प्रोपराइटरशिप के बारे में दिशानिर्देश इसके बाद आएंगे।

60 हजार रुपए से ज्यादा सालाना आय पर नहीं मिलेगा लाभ

  • आईबीसी के फ्रेश स्टार्ट के तहत कई प्रकार के प्रावधान हैं। इसके तहत लोन माफी योजना के लाभार्थी की वार्षिक औसत आय 60000 रुपए से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। कर्जदार के एसेट्स की सकल वैल्यू 20 हजार रुपए से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। इसके अलावा लाभार्थी पर कर्ज की कुल राशि 35 हजार रुपए से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। इसके अलावा लाभार्थी के पास अपना खुद का घर भी नहीं होना चाहिए।

:: विज्ञान और प्रौद्योगिकी ::

एक्सडीआर स्ट्रेन टीबी

  • ट्यूबरकुलोसिस (टीबी) ने विश्व में इन्फेक्शन के कारण होने वाली मौतों में एड्स जैसी जानलेवा बीमारी को पीछे छोड़ दिया है। उसके एक्सडीआर स्ट्रेन ने टीबी के इलाज में सामान्यत: इस्तेमाल होने वाली एंटीबॉयोटिक्स दवाइयों के लिए प्रतिरोध पैदा कर लिया है। दक्षिण अफ्रीका में अभी हाल में स्ट्रेन से प्रभावित एक महिला के इलाज में सफलता हासिल कर ली गई है। 25 वर्ष की सिमांगो ने जोहांसबर्ग अस्पताल में जब नए इलाज के ट्रायल में हिस्सा लिया तब उसका वजन बमुश्किल 25 किलो था। उस पर आजमाया गए इलाज से 90% फायदा हुआ है। उसके साथ 109 अन्य मरीजों पर ट्रायल हो रहा है।
  • अमेरिका के खाद्य एवं दवा प्रशासन (एफडीए) ने तीन दवाइयों से इलाज को मंजूरी दे दी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) एफडीए या यूरोपीय एजेंसी की मंजूरी को स्वीकार कर लेता है। अब इस इलाज का दुनियाभर में उपयोग हो सकेगा। 100 देशों में एक्सडीआर स्ट्रेन के करीब 30000 मामले हैं। विशेषज्ञ मानते हैं जिन लोगों का सामान्य उपचार होता है, उनके स्वस्थ होने की दर केवल 34% है।इस बीमारी का इलाज बहुत अधिक कठिन है। दक्षिण अफ्रीका में ऐसे सामान्य इलाज के लिए दो वर्ष तक हर दिन 40 गोलियां लेना पड़ती हैं। अन्य देशों में पुराना तरीका चलता है जिसमें एंटीबॉयोटिक्स इंजेक्शन रोज लेना पड़ते हैं। इनके बहरेपन, किडनी खराब होने और मानसिक गड़बड़ी सहित कई भयानक दुष्प्रभाव हो सकते हैं। ट्रायल में सिमांगो को छह माह तक केवल पांच गोलियां हर दिन खाना पड़ीं। ये गोलियां हैं-प्रिटोमानिड, बेडाक्विलाइन और लिनेजोलिड।
  • 2006 में पहली बार दक्षिण अफ्रीका में जानलेवा टीबी स्ट्रेन से पीड़ित मरीज का पता लगा था। 53 मरीजों में यह स्ट्रेन पाया गया। इनमें से 52 की मौत हो गई थी। कुछ माह बाद पता लगा कि दक्षिण अफ्रीका के 40 अस्पतालों में घातक इन्फेक्शन के मरीज हैं। इसके बाद डब्ल्यूएचओ ने दुनियाभर में जांच कराई। अमेरिका तक में जानलेवा स्ट्रेन एक्सडीआर पाया गया। भारत, चीन रूस में इसके दो तिहाई मामले मिले हैं।

:: पर्यावरण और पारिस्थितिकी ::

'ओकजोकुल ग्लेशियर '

जलवायु परिवर्तन के कारण आइसलैंड के ग्लेशियर 'ओकजोकुल' ने अपनी पहचान खो दी है। अपना अस्तित्व खोने वाला यह दुनिया का पहला ग्लेशियर बन गया। शनिवार को आइसलैंड के प्रधानमंत्री की मौजूदगी में ओकजोकुल से ग्लेशियर का दर्जा वापस ले लिया गया। एक अनुमान है कि अगले 200 साल में दुनिया के सभी ग्लेशियर खत्म हो जाएंगे।

  1. 700 साल पुराना यह ग्लेशियर आइसलैंड देश के सबसे प्राचीन ग्लेशियरों में से एक था
  2. 2014 में इस ग्लेशियर को मृत घोषित कर दिया गया क्योंकि यह पूरी तरह पिघल चुका था
  3. 50 साल से ग्लेशियर के फोटो ले रहे पर्यावरणविद सायमीनी हावे ने पहली बार ओकजेाकुल की पिघली बर्फ पर चेताया था
  • भारत में गढ़वाल हिमालय में ग्लेशियर इतनी तेजी से पीछे हट रहे हैं कि शोधकर्ताओं का मानना है कि अधिकांश मध्य और पूर्वी हिमालयी ग्लेशियर 2035 तक गायब हो सकते हैं।
  • ग्लेशियर की स्थिति वैश्विक ताप और जलवायु परिवर्तन के अहम संकेतक हैं। साथ ही ग्लेशियर पिघलने से समुद्र के जल का स्तर बढ़ता है जिससे समुद्र का पारिस्थितिकी तंत्र प्रभावित होता है।
  • उत्तरी अटलांटिक में स्थित आइसलैंड एक नॉर्डिक द्वीप देश है। यहां कुल 269 ग्लेशियर हैं जो इस देश का 11 प्रतिशत हिस्सा घेरते हैं। अब यहां के कई छोटे-बड़े ग्लेशियर पिघल रहे हैं, जिसका कारण दुनिया के दूसरे भागों में पर्यावरण प्रदूषण बढ़ना है।

:: विविध ::

ऐथलेटिकी मिटिनेक रीटर स्पर्धा

  • भारत के शीर्ष फर्राटा धावकों हिमा दास और मोहम्मद अनस ने चेक गणराज्य में ऐथलेटिकी मिटिनेक रीटर स्पर्धा में क्रमश: पुरुष और महिला 300 मीटर स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीते। दो जुलाई से यूरोपीय स्पर्धाओं में यह हिमा का छठा स्वर्ण पदक है। इस स्पर्धा में हालांकि अधिकांश बड़े नामों ने हिस्सा नहीं लिया।

भूमिगत बंकर म्यूजियम

  • राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने रविवार को महाराष्ट्र के मुंबई स्थित राजभवन में बने भूमिगत बंकर संग्रहालय का उद्घाटन किया। यह 15 हजार वर्ग फीट में बना है। यहां 200 साल पुराना इतिहास दिखाई देगा। इसे साल के अंत में जनता के लिए खोला जाएगा। ये बंकर 19वीं सदी में दुश्मनों के जहाजों पर तोप चलाने के लिए बनाए गए थे। यहां आने वाले लोग 19वीं सदी की झलक देख पाएंगे। यहां पुरानी तोपें और हथियार रखे गए हैं। जिन्हें लाइटिंग से सजाया गया है। इसके अलावा यहां राजभवन के इतिहास को दर्शाया गया है

एन बोस किरन

  • चीन के चेंगदू में वर्ल्ड पुलिस एंड फायर गेम्स चैंपियनशिप शनिवार को खत्म हो गई है। इसमें भारत समेत 79 देशों के 10 हजार पुलिसकर्मी और फायर ब्रिगेड के जवानों ने भाग लिया। इस प्रतियोगिता में तेलंगाना के एडिशनल इंस्पेक्टर एन बोस किरन ने दो कांस्य पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया है। इसी के साथ वह वर्ल्ड चैंपियनशिप में कोई मेडल जीतने वाले पहले पुलिसकर्मी बन गए हैं। 35 वर्षीय किरन साइबराबाद के ट्रैफिक पुलिस स्टेशन में पदस्थ हैं। उन्होंने यह मेडल टेनिस में हासिल किए हैं। यह चैंपियनशिप पहली बार 1967 में अमेरिका के कैलिफोर्निया में आयोजित हुई थी। जिसमें 5000 जवानों ने हिस्सा लिया था।

एशिया का श्रेष्ठ सीएसआर-2019 अवार्ड

  • सुप्रसिद्ध कुचिपुड़ी नृत्यांगना और जेएसपीएल फाउंडेशन की सह-अध्यक्ष शालू जिंदल को सामाजिक उद्यमिता के लिए सीएमओ एशिया का श्रेष्ठ सीएसआर-2019 अवार्ड से सम्मानित किया गया है। उन्हें यह अवार्ड सिंगापुर में आयोजित विशेष समारोह में प्रदान किया गया।
  • शालू जिंदल कुचिपुड़ी के अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञ पद्म भूषण गुरु राजा एवं राधा रेड्डी की शिष्या हैं। उन्हें भारतीय शास्त्रीय नृत्य कुचिपुड़ी, कला-संस्कृति, शिक्षा और सामुदायिक विकास में उल्लेखनीय कार्यों के लिए भी सम्मानित किया जा चुका है। उन्होंने ‘तिरंगा एंड फ्रीडम’ पुस्तक का संकलन और ‘इंडिया : ऐन अल्फाबेट राइड’ पुस्तक भी लिखी है। वह यंग फिक्की लेडीज ऑर्गेनाइजेशन और जिन्दल आर्ट इंस्टीट्यूट की संस्थापक अध्यक्ष भी हैं

‘जर्नी ऑफ टीचर एजुकेशन: लोकल टू ग्‍लोबल’

  • केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री श्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ने नई दिल्‍ली में अंतरराष्‍ट्रीय सम्‍मेलन, ‘जर्नी ऑफ टीचर एजुकेशन: लोकल टू ग्‍लोबल’का उद्घाटन किया। इस दो दिवसीय सम्‍मेलन का आयोजन राष्‍ट्रीय अध्‍यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) के रजत जयंती समारोह के अंतर्गत किया गया है।
  • भारत और अन्‍य देशों के 40 से अधिक विशेषज्ञ, अध्‍यापक शिक्षा की वर्तमाान स्थिति, शिक्षण में नवाचार, शिक्षण में सूचना और संचार प्रौ़द्योगिकी का समावेश, अध्‍यापक शिक्षा का अंतरराष्‍ट्रीयकरण जैसे विषयों पर विचार-विमर्श करेंगे।

विश्व कौशल अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता

  • विश्व कौशल कज़न - 2019 में शामिल होने भारत की ओर से जा रहे 48 सदस्यीय दल को आज राजधानी दिल्ली में एक समारोह में भव्य विदाई दी गई। दुनियाभर में अपनी कौशल का डंका बजाने के लिए भागीदारों को प्रेरित करने के उद्देश्य से इसका आयोजन कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय कौशल विकास निगम द्वारा किया गया। इस प्रतियोगिता में भाग लेने वाला भारत छठा सबसे बड़ा दल है।
  • रूस के कजन में 22 अगस्त से 27 अगस्त तक चलने वाले इस बड़े कार्यक्रम में 56 कौशल प्रतियोगिताएं होंगी जिसमें 60 देशों के लगभग 1500 प्रतियोगी हिस्सा लेंगे।

:: प्रिलिमिस बूस्टर ::

  • सैन्य विशेषज्ञों के द्वारा सेनाओं में बेहतर समन्वय की जरूरत को देखते हुए किस पद के सृजन हेतु मांग की जा रही है? (चीफ ऑफ डिफेंस सिस्टम)
  • जय-हिंद ज्वाइंट इनिशिएटिव किससे संबंधित है? (कृषि शिक्षा में वर्चुअल शिक्षण को बढ़ावा देना)
  • जय हिंद ज्वाइंट इनीशिएटिव में किन-किन विश्वविद्यालय ने आपस में समझौता किया है? (जीबी पंत कृषि विश्वविद्यालय, पंतनगर, चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विवि, हिसार एवं पंजाब कृषि विवि, लुधियाना)
  • किस देश के द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सर्वोच्च नागरिक अलंकरण 'आर्डर ऑफ जायद' से सम्मानित किया जाएगा? (यूएई)
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा किस देश में श्रीनाथजी (श्रीकृष्ण) मंदिर के जीर्णोद्धार का भी शुभारंभ किया जाएगा? (बहरीन)
  • हाल ही में यमन के हाउती विद्रोहियों द्वारा किस देश में अपने राजदूत नियुक्त किया है? (ईरान)
  • किस शोध संस्थान के द्वारा ई सिगरेट समेत ईएनडीएस पर पूर्ण प्रतिबंध की सिफारिश की गई है? (इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च-आईसीएमआर)
  • जलवायु परिवर्तन के कारण अपना अस्तित्व खोने वाला दुनिया का प्रथम ग्लेशियर कौन है? (ओकजोकुल')
  • जलवायु परिवर्तन के कारण अपना अस्तित्व खोने वाला दुनिया का प्रथम ग्लेशियर कहां स्थित है? (आइसलैंड-ओकजोकुल' ग्लेशियर)
  • चेक गणराज्य में ऐथलेटिकी मिटिनेक रीटर स्पर्धा में किन भारतीय खिलाड़ियों ने स्वर्ण पदक हासिल किया? (हिमा दास और मोहम्मद अनस)
  • हाल ही में किस स्थान पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के द्वारा भूमिगत बंकर संग्रहालय का उद्घाटन किया गया? (मुंबई स्थित राजभवन में)
  • हाल ही में किसे एशिया का श्रेष्ठ सीएसआर-2019 अवार्ड से सम्मानित किया गया है? (शालू जिंदल)
  • हाल ही में किस स्थान पर अंतरराष्‍ट्रीय सम्‍मेलन, ‘जर्नी ऑफ टीचर एजुकेशन: लोकल टू ग्‍लोबल’का उद्घाटन किया गया? (नई दिल्‍ली)
  • विश्व कौशल अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता 2019 का आयोजन कहां किया जा रहा है? (कज़न-रूस)

स्रोत साभार: Dainik Jagran (Rashtriya Sanskaran), Dainik Bhaskar (Rashtriya Sanskaran), Rashtriya Sahara (Rashtriya Sanskaran) Hindustan Dainik (Delhi), Nai Duniya, Hindustan Times, The Hindu, BBC Portal, The Economic Times (Hindi & English), PTI, PIB

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