(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (18 सितंबर 2019)

दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर


(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (18 सितंबर 2019)


:: राष्ट्रीय समाचार ::

Right to Water: 'पानी का अधिकार'

  • मध्य प्रदेश में पानी का अधिकार (राइट-टू-वाटर) कानून का मसौदा जल्द से जल्द तैयार कर इसे विधानसभा के शीतकालीन सत्र में प्रस्तुत किया जाएगा। इस तरह पानी का अधिकार पर कानून लाने वाला मध्य प्रदेश देश का पहला राज्य होगा। इसके तहत प्रदेश के जल स्रोत (नदी, तालाब व अन्य) पर अतिक्रमण अपराध होगा।

पानी पर सबसे पहला अधिकार नागरिकों का है

  • मंगलवार को पानी का अधिकार कानून पर विशेषज्ञों की समिति की बैठक में मुख्यमंत्री कमलनाथ ने इस आशय की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि पानी पर सबसे पहला अधिकार नागरिकों का है, इसलिए समुदाय को पानी के प्रबंधन और उपयोग का अधिकार देना चाहिए। इसी सोच के साथ हम पानी का अधिकार कानून में अतिक्रमण को अपराध बनाने जा रहे हैं। बड़ी जल संरचनाओं की जगह छोटी जल संरचनाएं बनाना चाहिए।

एडवांस लैंडिंग ग्राउंड (एएलजी)

  • अरुणाचल प्रदेश में चीन सीमा के नजदीक विजय नगर में एडवांस लैंडिंग ग्राउंड (एएलजी) का बुधवार को उद्घाटन किया जाएगा। यह एएलजी चांगलांग जिले के दुर्गम सर्किल में चीन और म्यांमार सीमा के नजदीक स्थित है। गुवाहाटी स्थित रक्षा पीआरओ लेफ्टिनेंट कर्नल पी. खोंगसाई ने मंगलवार को बताया कि वायुसेना के पूर्वी कमान के प्रमुख एयर मार्शल आरडी माथुर और पूर्वी कमान के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल अनिल चौहान संयुक्त रूप से एएलजी का उद्घाटन करेंगे।
  • विजय नगर एएलजी का उद्घाटन अन्य सात एएलजी के प्रारंभ होने के बाद किया जा रहा है। इससे पहले पासीघाट, मेचुका, वालोंग, तुतिंग, जिरो, अलोंग और तवांग में एएलजी का संचालन शुरू हो चुका है। लेफ्टिनेंट कर्नल खोंगसाई ने कहा कि विजय नगर में एएलजी के उद्घाटन के बाद एएन 32 सहित फिक्स विंग विमानों का संचालन किया जा सकेगा। म्यांमार और चीन सीमा पर स्थित होने के कारण विजय नगर एएलजी का महत्व काफी ज्यादा है।
  • सड़क नहीं होने की वजह से विजय नगर तक मोटर से नहीं पहुंचा जा सकता है। पूरी तरह कटे होने की वजह से यह क्षेत्र दुर्गम माना जाता है। देखरेख के अभाव की वजह से विजय नगर एएलजी 2016 से संचालन में नहीं था। डोकलाम विवाद के बाद केंद्र ने अरुणाचल प्रदेश में एएलजी को रक्षा उद्देश्यों की पूर्ति के लिए संचलन में लाने की दिशा में कदम उठाया। अरुणाचल प्रदेश सरकार और रक्षा मंत्रालय के बीच 2009 में एमओयू हुआ था। इसके तहत पासीघाट एवं अन्य एएलजी के बुनियादी ढांचा को विकसित करने का काम शुरू किया गया।

राष्ट्रीय समुद्र प्रौद्योगिकी संस्थान

  • उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडू ने केन्द्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री श्री हर्षवर्धन को आंध्र प्रदेश के नेल्लोर जिले में थुपीलीपल्लम गांव में राष्ट्रीय समुद्र प्रौद्योगिकी संस्थान में नया अनुसंधान केन्द्र खोले जाने की प्रक्रिया तेज करने को कहा है।
  • राष्ट्रीय समुद्र प्रौद्योगिकी संस्थान में 250 करोड़ रुपये की लागत से बनाए जाने वाले आधुनिक सुविधाओं से लैस सी फ्रंट अनुसंधान केन्द्र की आधारशिला केन्द्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. हर्षवर्धन द्वारा 25 अप्रैल, 2016 को तत्कालीन शहरी विकास मंत्री श्री एम. वेंकैया नायडू और राज्य के तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री एन. चंद्रबाबू नायडू की मौजूदगी में रखी गई थी।
  • प्रस्तावित सुविधा केन्द्र में समुद्री तकनीकी गतिविधियों के वास्तविक समय प्रोटोटाइप परीक्षण, अंशांकन और स्वदेशी रूप से विकसित समुद्री प्रणालियों का सत्यापन, जिसमें समुद्र के किनारे प्रयोगशाला और परीक्षण सुविधाओं की स्थापना आदि की सुविधाएं उपलब्ध कराना शामिल है।

आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के लिए स्किल इंडिया और आईबीएम में समझौता

  • कौशल विकास तथा उद्यमिता मंत्रालय के प्रशिक्षण प्रभाग के महानिदेशक ने विश्व की प्रमुख आईटी कम्पनी आईबीएम के साथ समझौता पर हस्ताक्षर किया है जिसके अंतर्गत आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस में प्रशिक्षकों को प्रशिक्षित करने के लिए देशव्यापी कार्यक्रम चलाया जाएगा। कार्यक्रम के हिस्से के रूप में आईटीआई प्रशिक्षकों को दैनिक प्रशिक्षण गतिविधियों में टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल के लिए बुनियादी आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के बारे में प्रशिक्षण दिया जाएगा।
  • इस कार्यक्रम का उद्देश्य प्रशिक्षकों को बुनियादी दृष्टिकोण कार्य प्रवाह और आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस एप्लीकेशन में सहायक बनाना है, ताकि वे अपने प्रशिक्षण मॉड्यूल में इसका उपयोग कर सकें। आईबीएम का उद्देश्य देशभर के आईटीआई के 10,000 फैकल्टी सदस्यों को प्रशिक्षित करना है। यह कार्यक्रम एक वर्ष का होगा और इसमें 200 कार्यशालाओं के साथ 7 स्थानों पर 14 प्रशिक्षक होंगे।
  • आईबीएम 6 राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थानों (एनएसटीआई) और एक औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) पुणे सहित सात केन्द्रों में आवश्यक प्रशिक्षण देगी। प्रशिक्षण पाठ्यक्रम को दो हिस्सों में बांटा जाएगा, जहां कार्यशाला को ऑनलाइन मॉड्यूल द्वारा सहयोग दिया जाएगा, ताकि फैकल्टी के सदस्यों को समग्र रूप से सीखने का मौका मिले।
  • कार्यशाला में भाग लेने वाले प्रत्येक व्यक्ति का पूर्व मूल्यांकन किया जाएगा, ताकि उसकी कुशलता की जांच की जा सके। भाग लेने वाले ऑनलाइन पाठ्यक्रम प्रशिक्षिणों के तकनीकी सहयोग से प्राप्त करेंगे। कार्यक्रम के बाद कार्यशाला में शामिल लोगों का मूल्यांकन किया जाएगा।

पूरे देश की डिजिटल मैपिंग

  • बदलते वक्त के साथ भारत में बुनियादी ढांचे के विकास की आवश्यकता बढ़ रही है। इसके लिए सटीक मानचित्रों की जरूरत पड़ती है। इस मांग को पूरा करने के लिए भारत का 252 साल पुराना वैज्ञानिक संस्थान सर्वे ऑफ इंडिया पहली बार ड्रोंस की मदद से देश का डिजिटल मानचित्र बनाने जा रहा है। संस्‍थान ड्रोन की मदद से भारत के कुल 32 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में से 24 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र की मैपिंग करेगा।
  • अभी उपलब्ध मानचित्रों में वास्तविक और दर्शाई गई दूरी का अनुपात दस लाख से पचास लाख तक होता है। नए डिजिटल मानचित्रों में यह अनुपात 1:500 होगा। इसका मतलब है कि मानचित्र पर एक सेंटीमीटर दूरी 500 सेंटीमीटर को दर्शाएगी। डिजिटल मैपिंग परियोजना के तहत बनाए जाने वाले ये उच्च-रिजॉल्यूशन के 3डी मानचित्र होंगे, जिन्हें अगले दो वषों में तैयार किया जाना है। इस परियोजना में करीब 300 ड्रोंस का इस्तेमाल किया जाएगा।
  • ‘यह परियोजना नेटवर्क ऑफ कंटिन्यूअस्ली ऑपरेटेड रेफरेंस स्टेशंस’ (कोर्स) नामक कंप्यूटर प्रोग्राम पर आधारित है। कोर्स कुछ सेंटीमीटर के पैमाने पर भी ऑनलाइन 3डी पॉजिशनिंग आंकड़े उपलब्ध करा सकता है। मैपिंग के लिए उपयोग होने वाले ड्रोंस में कोर्स प्रोग्राम से लैस सेंसर लगे होंगे। करीब 200 से 300 मीटर की ऊंचाई पर उड़ने वाले ये ड्रोन जब जमीन की तस्वीरें लेंगे, तो उस स्थान के सटीक देशांतर और अक्षांश का पता लगाया जा सकेगा।’
  • वर्ष 1767 में स्थापित सर्वे ऑफ इंडिया द्वारा संचालित डिजिटल मैपिंग परियोजना में ‘नमामि गंगे’ मिशन को भी शामिल किया गया है। इसके तहत गंगा नदी के दोनों किनारों के 25 किलोमीटर के दायरे में बाढ़ प्रभावित मैदानों की मैपिंग की जाएगी। इसका उद्देश्य गंगा में अपशिष्ट प्रवाहित करने वाले स्नोतों, किनारों के कटाव और उनकी ऊंचाई का पता लगाना है। यह जानकारी बाढ़ से निपटने में भी मददगार हो सकती है।
  • ड्रोन आधारित मैपिंग से एक प्रमुख लाभ यह होगा कि इसकी मदद से ग्रामीण आबादी क्षेत्रों का डिजिटल मानचित्रण हो सकेगा। वर्तमान में, हमारे पास भारत के उच्च रिजॉल्यूशन वाले डिजिटल मानचित्र नहीं हैं। उपग्रह आधारित नेविगेशन प्रणाली ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (जीपीएस) या फिर गूगल मैप्स के विपरीत इस परियोजना में बनने वाले मानचित्र अधिक सटीक होंगे। इनके उपयोग से सरकार बेहतर योजनाएं बना सकेगी'
  • ये डिजिटल मानचित्र सभी सरकारी विभागों के लिए नि:शुल्क उपलब्ध होंगे। हालांकि, मानचित्रों का उपयोग करने वाली व्यावसायिक परियोजनाओं को अपने लाभ का एक हिस्सा सर्वे ऑफ इंडिया को देना होगा।
  • अब तक हवाई फोटोग्राफी की मदद से मैपिंग की जाती रही है, जिसमें हवाई जहाज पर कैमरा लगाकर तस्वीरें ली जाती हैं। शुरुआती दौर में तो नक्शे बनाने के लिए सर्वेक्षकों को दुर्गम इलाकों एवं घने जंगलों में अपनी जान जोखिम में डालकर जाना पड़ता था। डिजिटल मैपिंग परियोजना के तहत मानचित्रों के निर्माण में यह ध्यान रखा गया है कि इससे राष्ट्रीय सुरक्षा खतरे में न पड़े और विकास एवं सुरक्षा में संतुलन बना रहे।

वेद विश्वविद्यालय

  • साइबर सिटी में विश्व हिंदू परिषद वेद विश्वविद्यालय की स्थापना की जा रही है। विहिप वेद विश्वविद्यालय में देश विदेश के विद्यार्थी न केवल शिक्षा ग्रहण कर सकेंगे, बल्कि वेदों पर शोध भी कर सकेंगे। एयरपोर्ट के नजदीक सिहरौल बॉर्डर के समीप इस विश्वविद्यालय को खोलने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
  • विहिप वेद विश्वविद्यालय का नाम विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष रहे अशोक सिंघल के नाम पर रखा जाएगा। इसका नाम वेद विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय रखा जाएगा।
  • इस विश्वविद्यालय को लेकर कई तरह की योजनाएं हैं जिसमें विद्यार्थियों को आधुनिक व वैदिक विधि से शिक्षा दी जाएगी।
  • इसके अलावा विवि में वैदिक टावर भी बनाया जाएगा, यहां ऑडियो-विजुअल स्टूडियो के साथ हर कक्षा में वेद और उससे जुड़ा साहित्य और पौराणिक ग्रंथ भी उपलब्ध होंगे। विश्वविद्यालय में सुरभि सदन यानि गौशाला, मंदिर और मेडिटेशन हॉल के अलावा यज्ञ शाला भी होगी। यहां पर पौराणिक शैली में पढ़ाई करवाने के लिए ओपन एयर कक्षाएं भी लगाए जाने की तैयारियां हैं। इस विश्वविद्यालय में शुरुआत में कृषि तंत्रम, वास्‍तु तंत्रम, पर्यावरण विज्ञान, लिपि विज्ञान और युद्धतंत्रम सहित कुल बीस विषयों में शिक्षा दी जाएगी।

:: अंतराष्ट्रीय समाचार ::

इक्वाडोर में पूरे देश का डेटा लीक

  • इक्वाडोर में लगभग सभी नागरिकों का डेटा लीक हो गया है. इक्वाडोर के सिक्योरिटी एक्सपर्ट और अधिकारियों के मुताबिक, ये आंकड़ा करीब 2 करोड़ का है. सोमवार को इक्वाडोर के अटॉर्नी जनरल ने कहा इसमें मरे हुए लोग और नाबालिगों का डेटा भी शामिल है. ये डेटा इक्वाडोर की मार्केटिंग और एनालिटिक्स फर्म के असुरक्षित सर्वर पर था. मजे की बात ये है कि इसमें विकिलीक्स के संस्थापक जूलियन असांजे का भी डेटा था.
  • यूएन पॉपुलेशन फंड के मुताबिक, इक्वाडोर की जनसंख्या 1 करोड़ 70 लाख है. इक्वाडोर प्रशासन के मुताबिक, ये डेटा अमेरिका स्थित एक सर्वर में था. नोवाएस्ट्रैट नाम की फर्म के पास ये डेटा था जिसके लीक की जानकारी वीपीएन मेन्टॉर ने दी. इस डेटा में लोगों के पूरे नाम, जन्म की तारीख और जगह, साक्षरता, फोन नंबर और नेशनल आईडी कार्ड नंबर शामिल है.

:: राजव्यवस्था और महत्वपूर्ण विधेयक ::

मातृत्व लाभ अधिनियम

  • मातृत्व लाभ अधिनियम को लेकर उत्तराखंड हाई कोर्ट ने बड़ा आदेश पारित किया है। मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने राज्य सरकार की विशेष अपील स्वीकार करते हुए एकलपीठ का महिलाओं को तीसरे बच्चे में भी मातृत्व लाभ अधिनियम के तहत अवकाश देने के आदेश को निरस्त कर दिया है। अदालत के आदेश के बाद अब राज्य की सेवाओं में कार्यरत महिलाओं को तीसरा बच्चा होने पर मातृत्व लाभ अधिनियम के तहत अवकाश नहीं मिलेगा।
  • दरअसल, हल्द्वानी निवासी नर्स उर्मिला मसीह को तीसरी संतान पर मातृत्व लाभ अधिनियम के तहत लाभ नहीं दिया गया तो उसने हाई कोर्ट में याचिका दायर की। याचिका में नियमों का हवाला देते हुए नर्स ने कहा कि सरकार का नियम संविधान के अनुच्छेद-42 के मूल-153 तथा मातृत्व लाभ अधिनियम की धारा-27 का उल्लंघन करता है।
  • 2018 में एकलपीठ ने इस अधिनियम को अवैधानिक घोषित कर दिया था। एकलपीठ के इस आदेश को सरकार ने विशेष अपील दायर कर चुनौती दी। मंगलवार को मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश रंगनाथन व न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ में सरकार की ओर से सीएससी परेश त्रिपाठी ने कहा कि संविधान का अनुच्छेद-42 भाग चार अर्थात नीति निर्देशक तत्वों में शामिल है, जिसको लागू करने के लिए याचिका दायर नहीं की जा सकती।
  • मातृत्व लाभ अधिनियम राज्य सरकार के कर्मचारियों पर लागू नहीं होता, जबकि निजी क्षेत्र तथा सरकार की कंपनियों में कार्यरत महिलाओं पर लागू होता है। खंडपीठ ने मामले को सुनने के बाद सरकार की विशेष अपील स्वीकार करते हुए एकलपीठ का आदेश निरस्त कर दिया। साथ ही याचिका भी खारिज कर दी। कोर्ट के आदेश के बाद अब राज्य की सेवाओं में कार्यरत महिलाओं को दो बच्चों के बाद मातृत्व लाभ अधिनियम के तहत लाभ नहीं मिलेगा।

स्कूल, कॉलेज और NGO आरटीआई के दायरे में

  • सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक अहम फैसले में कहा कि सरकार से पैसे लेने वाले गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) सूचना के अधिकार कानून (आरटीआइ एक्ट) के तहत जानकारी देने के लिए बाध्य हैं।

कौन-कौन से संस्‍थान आते हैं आरटीआइ के दायरे में

  • शीर्ष अदालत ने कहा कि स्कूल, कॉलेज या अस्पताल, जो सरकार से प्रत्यक्ष या रियायती दर पर जमीन के रूप में अप्रत्यक्ष मदद लेने वाले संस्थान भी आरटीआइ के दायरे में आते हैं। ऐसे संस्थान भी आरटीआइ के तहत लोगों को सूचना देने के लिए बाध्य हैं।
  • जस्टिस दीपक गुप्ता और जस्टिस अनिरुद्ध बोस की पीठ ने कहा, 'अगर एनजीओ या अन्य संस्थान सरकार से पर्याप्त मात्रा में वित्तीय मदद हासिल करते हैं तो हमें कोई ऐसा कारण नहीं नजर आता कि क्यों कोई नागरिक यह जानकारी नहीं मांग सकता कि एनजीओ या अन्य संस्थानों को दिए गए उसके पैसे का सही इस्तेमाल हो रहा है या नहीं।'

पारदर्शिता लाने के लिए लागू किया गया आरटीआइ एक्ट

  • शीर्ष अदालत ने कहा कि सार्वजनिक जीवन और सार्वजनिक व्यवहार में पारदर्शिता लाने के लिए ही आरटीआइ एक्ट को लागू किया गया था। पीठ ने कहा, 'हमें यह मानने में कोई संकोच नहीं है कि सरकार द्वारा प्रदत्त धन से एक एनजीओ को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से वित्तीय मदद मिलती है तो वह अधिनियम के प्रावधानों के प्रति जवाबदेह सार्वजनिक प्राधिकरण होगा।'
  • सुप्रीम कोर्ट इस मसले पर सुनवाई कर रहा था कि सरकार से पैसे लेने वाले एनजीओ 2005 के आरटीआइ एक्ट के प्रावधानों के तहत सार्वजनिक प्राधिकरण के दायरे में आते हैं या नहीं। कई स्कूलों, कॉलेजों और इन शैक्षणिक संस्थानों को चलाने वाले संस्थानों ने शीर्ष अदालत में याचिका दायर कर यह दावा किया था कि एनजीओ आरटीआइ एक्ट के दायरे में नहीं आते।

गैर सरकारी संगठनों (एनजीओ)

  • धर्म परिवर्तन के बाद होने वाली सांप्रदायिकता को रोकने के लिए सरकार सख्त हो गई है। अब विदेशी फंड हासिल करने वाले गैर सरकारी संगठनों (एनजीओ) के सभी सदस्यों और पदाधिकारियों को सरकार के समक्ष यह घोषित करना होगा कि वे कभी किसी व्यक्ति के धर्मातरण में शामिल नहीं रहे हैं। गृह मंत्रालय ने सोमवार को यह जानकारी दी। अधिसूचना में मंत्रालय ने विदेशी चंदा (नियमन) कानून (एफसीआरए) में बदलाव की घोषणा की है। इसके तहत अब एक लाख रुपये तक के निजी उपहार प्राप्त करने वालों के लिए सरकार को इस आशय की सूचना देना जरूरी नहीं होगा। पहले यह राशि 25 हजार रुपये निर्धारित की गई थी।

एनजीओ के सभी सदस्य को देना होगा प्रमाण

  • मंत्रालय के मुताबिक, एनजीओ के प्रत्येक अहम सदस्य और पदाधिकारी को यह प्रमाणपत्र देना होगा कि उसे किसी के धर्मातरण के लिए न तो सजा सुनाई गई है और न ही दोषी ठहराया गया है। इसके पहले एफसीआरए 2010 के अनुसार केवल एनजीओ के निदेशक पद के लिए आवेदन करने वालों के लिए इस तरह का प्रमाणपत्र देना अनिवार्य था।

धर्मातरण के जरिये फैलने वाले तनाव पर अंकुश लगाने का मकसद

  • मंत्रालय ने यह कदम धर्मातरण जैसे कार्यो के जरिये सांप्रदायिक तनाव बढ़ाने वालों पर अंकुश लगाने के लिए उठाया है। इसके साथ ही एनजीओ के पदाधिकारियों और सदस्यों को यह शपथपत्र भी देना होगा कि वे विदेशी चंदे के दुरुपयोग अथवा राष्ट्रद्रोह और हिंसा को बढ़ावा देने वाली गतिविधियों में शामिल नहीं रहे हैं। पहले इस आशय का शपथपत्र केवल एनजीओ के लिए आवेदन करने वाले को देना होता था। विदेश में इलाज कराने के लिए देनी होगी जानकारी
  • एफसीआरए में बदलाव के मुताबिक अगर किसी व्यक्ति को विदेश यात्रा के दौरान आपात स्थिति में इलाज की जरूरत होती है और वह किसी से विदेशी मदद प्राप्त करता है तो उसे एक माह के भीतर इस आशय की सूचना सरकार को देनी होगी। सूचना में मदद का स्त्रोत, भारतीय मुद्रा में उसका मूल्य और किस तरह उसका इस्तेमाल किया गया, यह ब्योरा देना होगा। पहले यह काम दो माह में करना जरूरी था। इससे पहले भी मोदी सरकार ने पिछले पांच साल में विदेशी चंदा प्राप्त करने और उसका उपयोग करने को लेकर नियम-कायदों को सख्त बनाया है। इसके तहत एफसीआरए नियमों का उल्लंघन करने वाले करीब 18000 एनजीओ के विदेशी चंदा हासिल करने की अनुमति समाप्त की गई है।

इलेक्‍ट्रॉनिक सिगरेट निषेध अध्‍यादेश

  • प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इलेक्‍ट्रॉनिक सिगरेट (उत्‍पादन, विनिर्माण ,आयात , निर्यात,परिवहन , विक्रय, वितरण, भंडारण और विज्ञापन) निषेध अध्‍यादेश, 2019 की घोषणा को अपनी मंजूरी दे दी है।
  • इलेक्‍ट्रॉनिक सिगरेट बैटरी-युक्‍त उपकरण है, जो निकोटिन वाले घोल को गर्म करके एयरोसोल पैदा करता है। एयरोसोल सामान्‍य सिगरेटों में एक व्‍यसनकारी पदार्थ है। इनमें सभी प्रकार के इलेक्‍ट्रॉनिक निकोटिन डिलिवरी सिस्‍टम, जलाने नहीं, गर्म होने वाले (हिट नॉट बर्न) उत्‍पाद, ई-हुक्‍का और इस प्रकार के अन्‍य उपकरण शामिल हैं। ऐसे नए उत्‍पाद आकर्षक रूपों तथा विविध सुगंधों से युक्‍त होते हैं तथा इसका इस्‍तेमाल काफी बढ़ा है। विकसित देशों में विशेषकर युवाओं और बच्‍चों में इसने एक महामारी का रूप ले लिया है।

कार्यान्‍वयन :

  • अध्‍यादेश की घोषणा के बाद, ई-सिगरेटों का किसी प्रकार उत्‍पादन, विनिर्माण, आयात, निर्यात, परिवहन, विक्रय (ऑनलाइन विक्रय सहित), वितरण अथवा विज्ञापन (ऑनलाइन विज्ञापन सहित) एक संज्ञेय अपराध माना जायेगा और पहली बार अपराध के मामले में एक वर्ष तक कैद अथवा एक लाख रुपए तक जुर्माना अथवा दोनों; और अगले अपराध के लिए तीन वर्ष तक कैद और पांच लाख रुपए तक जुर्माना लगाया जा सकता है। इलेक्‍ट्रॉनिक सिगरेटों के भंडारण के लिए भी छह माह तक कैद अथवा 50 हजार रुपए तक जुर्माना अथवा दोनों दंड दिए जा सकते हैं।
  • अध्‍यादेश लागू होने की तिथि पर, ई-सिगरेटों के मौजूदा भंडारों के मालिकों को इन भंडारों की स्‍वत: घोषणा करके, निकटवर्ती पुलिस थाने में जमा कराना होगा। पुलिस उप निरीक्षक को अध्‍यादेश के तहत कार्रवाई करने के लिए अधिकृत अधिकारी के रूप में निर्धारित किया गया है। अध्‍यादेश के प्रावधानों को लागू करने के लिए, केंद्र अथवा राज्‍य सरकार किसी अन्‍य समकक्ष अधिकारी को अधिकृत अधिकारी के रूप में निर्धारित कर सकती है।

मुख्‍य प्रभाव:

  • ई-सिगरेटों के निषेध के निर्णय से लोगों को, विशेषकर युवाओं और बच्‍चों को ई-सिगरेटों के व्‍यसन के जोखिम से बचाने में मदद मिलेगी। अध्‍यादेश के लागू होने से सरकार द्वारा तंबाकू नियंत्रण के प्रयासों को बल मिलेगा और तंबाकू के इस्‍तेमाल में कमी लाने में मदद मिलेगी, साथ ही इससे जुड़़े आर्थिक बोझ और बीमारियों में भी कमी आएगी।

पृष्‍ठभूमि:

  • ई-सिगरेटों को प्रतिबंधित करने पर विचार करने के लिए, सरकार द्वारा 2018 में सभी राज्‍यों के लिए जारी की गई एक चेतावनी की पृष्‍ठभूमि में मौजूदा निर्णय लिया गया है। पहले ही 16 राज्‍यों और एक केंद्रशासित प्रदेश ने अपने क्षेत्राधिकारों में ई-सिगरेटों को प्रतिबंधित किया है। ध्‍यान रहे कि इस विषय पर हाल में जारी एक श्‍वेत-पत्र में भारतीय चिकित्‍सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने भी फिलहाल उपलब्‍ध वैज्ञानिक साक्ष्‍य के आधार पर ई-सिगरेटों पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगाने की अनुशंसा की है। विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन ने भी सदस्‍य देशों से मांग की है कि इन उत्‍पादों को प्रतिबंधित करने सहित समुचित उपाय किए जाएं। सामान्‍य तौर पर पारंपरिक सिगरेटों के लिए अपेक्षाकृत सुरक्षित विकल्‍पों के रूप में इन उत्‍पादों को बाजार में लाया जाता है, किन्‍तु इस प्रकार सुरक्षा के दावे असत्‍य हैं। इस उद्योग के द्वारा सामान्‍य रूप से ई-सिगरेटों को धूम्रपान निवारण उपकरणों के रूप में बढ़ावा दिया जाता है, किन्‍तु एक निवारण उपकरण के रूप में उनकी क्षमता और संरक्षा को अब तक सत्‍यापित नहीं किया गया है।
  • लोगों के लिए तंबाकू का इस्‍तेमाल छोड़ने में मददगार माने जाने वाले परीक्षित निकोटिन और गैर-निकोटिन फार्माकोथेरेपियों से पृथक, विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन ने निवारण उपकरणों के रूप में ई-सिगरेटों की अनुमति नहीं दी है। इन उत्‍पादों के संभावित लाभों के बारे में गलत जानकारी देकर तंबाकू निवारण के प्रयासों में तंबाकू उद्योग के हस्‍तक्षेप की संभावना, जिसे विकल्‍पों के रूप में प्रस्‍तुत किया गया है, किन्‍तु अधिकांश मामलों में ये पारंपरिक तंबाकू उत्‍पादों के इस्‍तेमाल के पोषक हैं तथा एक वर्तमान और वास्‍तविक संभावना भी है। निकोटिन के अलावा, अन्‍य साइकोएक्टिव पदार्थों के वितरण के लिए भी ई-सिगरेटों का इस्‍तेमाल किया जा सकता है। ई-सिगरेटों से जुड़े जोखिमों के बिना, वैज्ञानिक तौर पर प्रमाणित निकोटिन के लिए प्रतिस्‍थापन थेरेपियां, तंबाकू का इस्‍तेमाल छोड़ने के इच्‍छुक लोगों के लिए च्विंगमों, खट्टी-मीठी गोलियां और पैचों के रूप में उपलब्‍ध हैं। ई-सिगरेटों और ऐसे उपकरणों के व्‍यापक इस्‍तेमाल और अनियंत्रित फैलाव से, तंबाकू इस्‍तेमाल में कमी लाने के सरकार के प्रयास निष्‍प्रभावी सिद्ध होंगे।
  • तंबाकू की अत्‍यधिक व्‍यसनकारी प्रकृति, निकोटिन के साथ मिश्रित सुगंधों की सुरक्षा संबंधी चिंताओं, इन उपकरणों द्वारा अन्‍य साइकोएक्टिव पदार्थों के सेवन के जोखिम, धूम्रपान नहीं करने वालों, विशेषकर किशोरों और युवाओं द्वारा निकोटिन अथवा साइकोएक्टिव पदार्थों का सेवन शुरू किए जाने, ई-सिगरेटों और पारंपरिक सिगरेटों के दोहरे इस्‍तेमाल, तंबाकू निवारण के कारगर उपकरणों के रूप में ई-सिगरेटों के इस्‍तेमाल के लिए अपर्याप्‍त वैज्ञानिक प्रमाण, देश में तंबाकू नियंत्रण के प्रयासों के लिए चुनौती, सतत विकास लक्ष्‍यों, राष्‍ट्रीय असंक्रामक रोग रोकथाम एवं नियंत्रण निगरानी कार्यक्रम और राष्‍ट्रीय स्‍वास्‍थ्‍य नीति, 2017 के तहत निर्धारित लक्ष्‍यों तक पहुंचने में बाधा, और कुल मिलाकर भारतीय संविधान के अनुच्‍छेद-47 में उल्लिखित जन स्‍वास्‍थ्‍य से जुड़े हितों को ध्‍यान में रखते हुए, सभी प्रकार की इलेक्‍ट्रॉनिक निकोटिन डिलिवरी सिस्‍टमों (ईएनडीएस), हिट नॉट बर्न उत्‍पादों, ई-हुक्‍कों और ऐसे उपकरणों सहित ई-सिगरेटों के निषेध/प्रतिबंध का निर्णय लिया गया है।

:: भारतीय अर्थव्यवस्था ::

इंडियन स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व लिमिटेड (आइएसपीआरएल)

  • सऊदी अरब के दो बड़े तेल ठिकानों पर हुए ड्रोन हमले के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने तेल को लेकर वैश्विक स्तर पर संकट को देखते हुए कहा है कि वह तेल की मंदी की आपातकालीन स्थिति में बाजार में स्थिरता बनाए रखने के लिए स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व (एसपीआर) यानी भूमिगत तेल भंडारण का इस्तेमाल करने के लिए तैयार हैं। तेल संकट से निपटने के लिए भारत ने भी तीन भूमिगत भंडार का निर्माण किया है, जिनमें करीब 53 लाख टन कच्चा तेल स्टोर किया जा सकता है।

जमीन के अंदर तेल भंडार

  • भारत अपनी जरूरत का तीन चौथाई से अधिक कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में किसी भी कारण के चलते विदेश से आ रहे तेल की आपूर्ति में जरा भी कमी उसके लिए भारी मुश्किल का सबब हो सकती है। यही वजह है कि इस तरह के सामरिक भंडार बनाने की जरूरत काफी समय से महसूस की जा रही थी। इंडियन स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व लिमिटेड (आइएसपीआरएल) अब तक तीन जगहों विशाखापत्तनम में 13.3 लाख टन, मंगलोर (कर्नाटक) में 15 लाख टन और पदुर (कर्नाटक) में 25 लाख टन क्षमता वाले भंडार विकसित कर चुकी है।
  • भारतीय वित्त मंत्री अरुण जेटली द्वारा 2017-18 के बजट भाषण में, यह घोषणा की गई थी कि इस तरह के दो और भंडारों की स्थापना ओडिशा के चंदीखोल और राजस्थान के बीकानेर में की जाएगी। इसके अलावा गुजरात के राजकोट में भी भूमिगत तेल भंडार बनाने की योजना पर काम चल रहा है।

ऐसे हुई शुरुआत

  • 1973-74 में आए तेल संकट के बाद से अमेरिका ने 1975 में भूमिगत तेल भंडार बनाने की शुरुआत की थी। लुइसियाना और टेक्सास राज्य में भूमिगत रूप से बनाए गए तेल भंडार दुनिया की सबसे बड़ी आपातकालीन आपूर्ति है। मौजूदा समय में यहां करीब 8.7 करोड़ टन तेल स्टोर है। 1991 में पहले खाड़ी युद्ध के दौरान यहां से तेल का इस्तेमाल किया गया था। इसके बाद 2005 में कैटरीना तूफान और 2011 में लीबिया के साथ संबंध खराब होने के बाद एसपीआर का इस्तेमाल किया गया था।
  • अमेरिका के बाद दुनिया में कच्चे तेल का दूसरा सबसे बड़ा भूमिगत भंडार चीन के पास है। इस मामले में जापान तीसरे स्थान पर काबिज है।

कच्चे तेल के भंडारण के फायदे

  • कच्चे तेल के ऐसे भूमिगत भंडारण के कई फायदे हैं। पहला तो यह कि किसी हमले या आपदा की स्थिति में देश की ऊर्जा सुरक्षा अचानक खतरे में नहीं पड़ती।
  • 1991 में खाड़ी युद्ध के समय ये भंडार अमेरिका के काफी काम आए थे। दूसरा यह कि कच्चे तेल की कीमतें अचानक बहुत ज्यादा होने पर इस रिजर्व स्टॉक के इस्तेमाल से देश में तेल की कीमतें काबू में रखी जा सकती हैं।
  • इसके अलावा भूमिगत भंडारण कच्चे तेल को रखने का सबसे कम खर्चीला तरीका है। चूंकि भंडार काफी गहराई में होता है, इसलिए बड़े पैमाने पर जमीन के अधिग्रहण और सुरक्षा इंतजाम की जरूरत नहीं पड़ती।
  • इसमें तेल बहुत ही कम मात्रा में उड़ता है और चूंकि ये भंडार समुद्र किनारे भी बने होते हैं तो इनमें जहाजों से कच्चा तेल भरना भी आसान होता है।

फसल ऋण पर ब्याज सब्सिडी

  • रिजर्व बैंक के एक इंटरनल वर्किंग ग्रुप ने शॉर्ट टर्म क्रॉप लोन पर ब्याज सब्सिडी का भुगतान बैंकों को करने के बजाय सीधे किसानों के खाते में करने को कहा है। इस सिफारिश से कृषि ऋण वितरण की व्यवस्था अधिक पारदर्शी हो सकेगी। रिजर्व बैंक के इस ग्रुप का कहना है कि इंटरेस्ट सबवेंशन स्कीम की जगह धनराशि लक्षित लाभार्थियों को व्यक्तिगत या स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से डीबीटी के जरिये ट्रांसफर करनी चाहिए।
  • लाभार्थियों में सीमांत और छोटे किसानों, बटाईदार, पट्टेदार और भूमिहीन श्रमिक शामिल हैं। ग्रुप ने हाल ही में अपनी रिपोर्ट रिजर्व बैंक को सौंपी है। फिलहाल सरकार शॉर्ट टर्म क्रॉप लोन पर ब्याज दर में छूट के तौर पर बैंकों को आरबीआइ और नाबार्ड के माध्यम से ब्याज सब्सिडी का भुगतान करती है। इसके लिए सरकार हर साल अपने बजट में बाकायदा प्रावधान करती है।
  • ऐसे में नई व्यवस्था होने पर ब्याज सब्सिडी की राशि सीधे किसानों के खातों में जाएगी। इससे कृषि ऋण की मौजूदा व्यवस्था में पारदर्शिता भी आएगी। सरकार ने 2006-07 में शॉर्ट टर्म क्रॉप लोन के लिए इंटरेस्ट सबवेंशन स्कीम शुरू की थी। दरअसल बैंक तीन लाख रुपये तक का शॉर्ट टर्म क्रॉप लोन किसानों को नौ फीसद परसेंट ब्याज दर पर उपलब्ध कराते हैं।
  • हालांकि सरकार सब्सिडी देकर ब्याज दर में दो परसेंट की छूट मुहैया कराती है। इस तरह किसानों को सात परसेंट की दर पर कर्ज मिलता है। जो किसान समय पर कर्ज का भुगतान कर देते हैं, उन्हें ब्याज दर में तीन परसेंट की छूट और दी जाती है। इस तरह समय पर कर्ज चुकाने वाले किसानों के लिए शॉर्ट टर्म क्रॉप लोन मात्र चार परसेंट की दर पर मिलता है। रिपोर्ट में इस पर भी चिंता जताई गई है कि शॉर्ट टर्म क्रॉप लोन के तहत सस्ता ऋण मिलने के बावजूद कृषि क्षेत्र में निवेश का स्तर नहीं बढ़ पा रहा है।

:: विज्ञान और प्रौद्योगिकी ::

रुस्तम-2

  • रक्षा अनुसंधान विकास संगठन (डीआरडीओ) का एक मानव रहित एरियल व्हीकल (यूएवी) रुस्तम-2 कर्नाटक के चित्रदुर्ग जिले में मंगलवार (17 सितंबर) की सुबह क्रैश हो गया। चल्लाकेरे एयरोनॉटिकल टेस्ट रेंज में इस एयरक्राफ्ट का परीक्षण चल रहा था।
  • यूएवी रुस्तम-2 की खासियतः रिपोर्ट के मुताबिक डीआरडीओ को पहली बार 2014 में हुए डिफेंस एक्स्पो में प्रदर्शित किया गया था। फरवरी 2018 में रुस्तम-2 ने चित्रदुर्ग में ही सफलता पूर्वक उड़ान भरी थी। रुस्तम-2 एक ‘मीडियम एल्टीट्यूड लॉन्ग एंड्योरेंस’ (मध्यम ऊंचाई पर लगातार काम करने वाला) यूएवी है, फिलहाल इंडियन आर्मी इसका इस्तेमाल करती है।
  • इसका इस्तेमाल सर्विलांस में किया जाता है। यह अपने साथ कई तरह के कॉम्बिनेशन में सिंथेटिक अपर्चर रडार और इलेक्ट्रॉनिक इंटेलीजेंस सिस्टम आदि ले जाने में सक्षम है। अपनी खूबियों के चलते यह एयरक्राफ्ट भारतीय सेनाओं के लिए बेहद काम का है।

अस्‍त्र मिसाइल

  • रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल अस्‍त्र का सफल परीक्षण किया है। परीक्षण को सुखोई-30एमकेआई (Su-30MKI) लड़ाकू विमान से अंजाम दिया गया। विमान ने पश्चिम बंगाल के एक एयर बेस से उड़ान भरी थी। 26 सितंबर 2018 को देश में ही बनी यह मिसाइल 70 किलोमीटर दूर तक मार करने में सक्षम है। डीआरडीओ द्वारा विकसि‍त की गई इस मिसाइल ने हवा में तैर रहे लक्ष्य पर सटीक निशाना साधा।
  • यह मिसाइल अपनी श्रेणी की हथियार प्रणालियों में श्रेष्ठ है। अभी तक इसके कई परीक्षण किए जा चुके हैं। यह मिसाइल सुखोई-30एमकेआई जैसे लड़ाकू विमान पायलटों को 70 किलोमीटर दूर से ही दुश्मन विमानों को मार गिराने की क्षमता देती है। यह हवा से हवा में मार करने वाली भारत द्वारा विकसित पहली मिसाइल है। इसे मिराज 2000एच, मिग 29, सी हैरियर, मिग 21 और सुखोई एसयू-30 एमकेआई विमानों में लगाया जा सकता है।

भारत की अन्य मिसाइल-

  • ब्रह्मोस : भारत और रूस द्वारा विकसित यह दुनिया की सबसे अच्छी क्रूज मिसाइल है। इसकी रेंज 290 किलोमीटर और गति 4.5 मैक है।
  • आकाश : 700 किलोग्राम वजनी यह मिसाइल जमीन से हवा में मार कर सकने में सक्षम है। यह 25 किलोमीटर के रेंज में किसी भी उड़ती चीज को मार गिराने में सक्षम है।
  • अग्नि-5 : यह इंटर-कॉन्टिनेन्टल बैलिस्टिक मिसाइल है। 5500 किलोमीटर मारक क्षमता वाली इस मिसाइल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि समय आने पर इसकी रेंज का बढ़ाया जा सकता है।
  • अग्नि-4 : यह काफी हल्की और नई तकनीकों से लैस मिसाइल है। यह 4000 किलोमीटर से अधिक दूरी तक जमीन से जमीन पर मार करने में सक्षम है।
  • अग्नि-3 : एडवांस कम्प्यूटर और नेवीगेशन सिस्टम से लैस यह मिसाइल डेढ़ टन तक पेलोड ले जाने में सक्षम है। यह जमीन से जमीन पर 3500 किलोमीटर दूर वार कर सकती है।
  • अग्नि-2 : अत्याधुनिक नेवीगेशन सिस्टम और तकनीक से लैस यह मिसाइल एक टन का पेलोड ले जाने के साथ ही दो हजार किलोमीटर तक मार कर सकती है।
  • अग्नि-1 : इसे कम मारक क्षमता वाली मिसाइल के तौर पर विकसित किया गया है। यह 700 किलोमीटर तक मार करने में सक्षम है और भारतीय सेना में शामिल हो चुकी है।
  • निर्भय : भारत की सबसोनिक क्रूज इस मिसाइल में ठोस रॉकेट मोटर बूस्टर के साथ टर्बोफैन इंजन लगा है। इसी वजह से इसकी रेंज 800 से 1000 किलोमीटर है। इसे हर मौसम में दागा जा सकता है।
  • नाग : चार किलोमीटर रेंज के साथ 42 किलो के वजन वाली यह मिसाइल फायर और फारगेट के आधार पर काम करती है। इससे जमीन से जमीन और हवा से जमीन पर दागा जा सकता है।

एलिल आइसोथायोसाइनेट

  • खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने पहली बार किसी तेल मिल से सोयाडिगम तेल व राइस ब्रान तेल से हूबहू सरसों का नकली तेल बनाने वाला एसेंस पकड़ा है। एसेंस का रासायनिक नाम एलिल आइसोथायोसाइनेट है। इस एसेंस को किसी भी तेल में मिलाने पर कच्ची धानी के तेल जैसी खुशबू व झाग देता है।
  • सरसों के तेल का रंग पीला होता है। इसी रंग का सोयाडिगम का तेल होता है। मिल संचालक सोयाडिगम व राइस ब्रान तेल को मिला लेते हैं। सरसों के तेल की खुशबू और झाग के लिए इसमें एलिल आईसोथायोसाइनेट मिलाते हैं। कोई भी व्यक्ति असली सरसों के तेल व नकली तेल में अंतर नहीं कर सकता।
  • एलिल आइसोथायोसाइनेट एक रासायनिक यौगिक है, जिसमें सल्फर होता है। यह एक रंगहीन तेल होता है, जिसमें तीखी गंध होती है। एलिल आइसोथायोसाइनेट आमाशय में अम्ल बढ़ाता है। इससे शरीर की पाचन शक्ति कम हो जाती है।साथ ही शरीर का मेटाबोल्ज्मि बढ़ जाता है। अधिक मात्रा में सेवन करने पर खाना पचना बंद हो जाता है। इससे कोशिकाओं का विभाजन हो जाता है। साथ ही शरीर पर क्रोनिक प्रभाव भी हो सकते हैं। इसका लंबे समय तक सेवन करने से व्यक्ति की स्किन में झुर्रियां पड़ जाती हैं। असमय ही बूढ़ा दिखने लगता है।

:: विविध ::

'ग्लोबल गोलकीपर अवॉर्ड'

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक और वैश्विक पुरस्कार से नवाजा जाएगा। स्वच्छता की दिशा में किए गए महत्वपूर्ण सुधार और उनके नेतृत्व के लिए बिल ऐंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन अगले सप्ताह उन्हें प्रतिष्ठित 'ग्लोबल गोलकीपर अवॉर्ड' से सम्मानित करेगा। प्रधानमंत्री मोदी संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) के उच्च स्तरीय सत्र में भाग लेने के लिए अमेरिका जाएंगे।
  • मोदी को स्वच्छ भारत मिशन में उनके नेतृत्व के लिए सम्मानित किया जाएगा, जिसे उन्होंने 2 अक्टूबर 2014 को शुरू किया था। महत्त्वाकांक्षी मिशन का लक्ष्य देशभर में स्वच्छता को बढ़ावा देना है। इस मिशन का उद्देश्य महात्मा गांधी को उनकी 150 वीं जयंती पर श्रद्धांजलि स्वरूप देश में सार्वभौमिक स्वच्छता कवरेज को हासिल करने के प्रयासों में तेजी लाना है। 2 अक्टूबर, 2019 तक खुले में शौच को खत्म करने के लिए अब तक 9 करोड़ शौचालय बनाए गए हैं और वर्तमान में ग्रामीण स्वच्छता कवरेज भारत के 98 प्रतिशत गांवों तक पहुंच गया है, जो चार साल पहले तक महज 38 प्रतिशत ही था।

IIFA Technical Awards 2019: आइफा टेक्निकल अवार्ड्स

  • इंटरनेशनल इंडियन फिल्म एकेडमी (IIF) अवार्ड्स का आगाज सोमवार को मुंबई में 'आइफा रॉक्स' समारोह के साथ हुआ। इस दौरान इस साल के आइफा टेक्निकल अवार्ड्स का ऐलान किया गया।
  • 'अंधाधुन' फिल्म ने बेस्ट स्क्रीनप्ले, बेस्ट एडिटिंग, बेस्ट साउंड मिक्सिंग और बेस्ट बैकग्राउंड स्कोर सहित चार अवार्ड्स जीते।
  • बेस्ट स्पेशल इफेक्ट विजुअल्स और बेस्ट साउंड डिजाइन के लिए 'तुम्बाड' फिल्म को अवार्ड दिया गया।
  • फिल्म 'पद्मावत' को बेस्ट सिनेमेटोग्राफी और फिल्म के 'घूमर' गाने के लिए बेस्ट कोरियोग्राफी का अवार्ड मिला।
  • 'बधाई हो' फिल्म बेस्ट डॉयलाग का अवार्ड जीतने में कामयाब रही।
  • यह पहला मौका है जब आइफा का आयोजन भारत में किया गया है। इससे पहले यह अवार्ड समारोह दुनिया के विभिन्न देशों में आयोजित किया जाता था। पिछले वर्ष इसका आयोजन बैंकॉक में किया गया था।

सारा थॉमस ने बिना रुके चार बार में 215 किलोमीटर की दूरी तय की

  • अमेरिकन महिला सारा थॉमस बिना रुके तैरकर इंग्लिश चैनल चार बार पार करने वाली पहली महिला बन गई हैं। उन्होंने 54 घंटों में 215 किमी की दूरी तय की। सारा ने इंग्लैंड के कोलोराडो से तैरना शुरू किया था और मंगलवार सुबह 6.30 बजे अपना चौथा चक्कर डोवर तट पर खत्म किया।

:: प्रिलिमिस बूस्टर ::

  • किस राज्य में पानी का अधिकार( राइट टू वाटर) का मसौदा तैयार किया जा रहा है? (मध्य प्रदेश)
  • हाल ही में किस राज्य में एडवांस लैंडिंग ग्राउंड (एएलजी) का उद्घाटन किया गया? (अरुणाचल प्रदेश- विजय नगर)
  • हाल ही में चर्चा में रहे राष्ट्रीय समुद्र प्रौद्योगिकी संस्थान कहां स्थित है? (नेल्लोर-आंध्र प्रदेश)
  • आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस में प्रशिक्षकों को प्रशिक्षित करने के लिए कौशल विकास तथा उद्यमिता मंत्रालय द्वारा किस संस्थान के साथ समझौता किया गया है? (आईबीएम)
  • हाल ही में किस संस्थान के द्वारा पूरे भारत की डिजिटल मैपिंग कराने की पहल की शुरुआत की गई है? (सर्वे ऑफ इंडिया)
  • वेद विश्वविद्यालय की स्थापना कहां की जा रही है? (गुरुग्राम-हरियाणा)
  • हाल ही में किस देश के सभी नागरिकों का डाटा लीक हो गया? (इक्वाडोर)
  • हाल ही में किस राज्य की उच्च न्यायालय के द्वारा तीसरे बच्चे में भी मातृत्व लाभ अधिनियम के तहत अवकाश देने के आदेश को निरस्त कर दिया गया? (उत्तराखंड)
  • हाल ही में ई सिगरेट को प्रतिषेध करने हेतु किस अध्यादेश को मंजूरी दी गई है? (इलेक्‍ट्रॉनिक सिगरेट (उत्‍पादन, विनिर्माण ,आयात , निर्यात,परिवहन , विक्रय, वितरण, भंडारण और विज्ञापन) निषेध अध्‍यादेश, 2019)
  • हाल ही में चर्चा में रहे रुस्तम 2 क्या है? (डीआरडीओ निर्मित मानव रहित विमान)
  • हाल ही में चर्चा में रहे अस्त्र क्या है? (हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल)
  • हाल ही में चर्चा में रहे एलील आइसोथायोसाइनेट को किस खाद्य पदार्थ में मिलावट के रूप में प्रयोग किया जाता है? (सरसों का तेल)
  • किस संस्था के द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘ग्लोबल गोलकीपर अवार्ड’ प्रदान किया जाएगा? (बिल गेट्स फाउंडेशन)
  • हाल ही में किस महिला ने बिना रुके तैरकर इंग्लिश चैनल चार बार पार करने की उपलब्धि हासिल की? (सारा थॉमस)

स्रोत साभार: Dainik Jagran (Rashtriya Sanskaran), Dainik Bhaskar (Rashtriya Sanskaran), Rashtriya Sahara (Rashtriya Sanskaran) Hindustan Dainik (Delhi), Nai Duniya, Hindustan Times, The Hindu, BBC Portal, The Economic Times (Hindi & English), PTI, PIB

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