(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (17 मई 2020)

दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर


(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (17 मई 2020)


:: राष्ट्रीय समाचार ::

दियामर बाशा परियोजना (Diamer-Bhasha Project)

  • हाल ही में भारत सरकार ने पाक अधिकृत कश्मीर को अपना अभिन्न अंग बताते हुए गिलगित-बाल्टिस्तान में सिंधु नदी पर बनाए जा रहे दियामर बाशा परियोजना समेत चीन द्वारा संचालित चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) द्वारा POK में किसी भी निर्माण कार्य गतिविधियों पर पर कड़ा विरोध जताया है। वहीं चीन के द्वारा स्थानीय लोगों के लाभ को हवाला देते हुए अपनी सफाई दी है।

क्या है दियामर बाशा परियोजना?

  • 2010 से पाकिस्तान POK के गिलगित-बाल्टिस्तान में सिंधु नदी पर दियामर बाशा बांध बनाने की कोशिश कर रहा है लेकिन आर्थिक तंगी के कारण यह संभव हो नहीं पा रहा था। कुछ समय पहले पाकिस्तानी सेना की कमर्शियल विंग ने इस बांध के निर्माण हेतु चीनी कंपनी चाइना पावर के साथ समझौता किया है जिसके कारण इस परियोजना में तेजी आने की संभावना बढ़ गई है।

क्या है CPEC परियोजना?

  • चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) चीन की महत्वाकांक्षी परियोजना OBOR(ONE BELT ONE ROAD) का हिस्सा है। इसके तहत पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट को बलूचिस्तान, POK, होते हुए चीन के शिनजिआंग प्रांत से जोड़ा जाएगा। इस परियोजना में पाकिस्तान में बंदरगाह, सड़कों, पाइपलाइन्स, दर्जनों फैक्ट्रियों और एयरपोर्ट जैसे कई अवसंरचनात्मक निर्माण शामिल है। इसके जरिए चीन अरब सागर के ग्वादर बंदरगाह तक अपनी कनेक्टिविटी मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।

क्या है OBORपरियोजना

  • ओबोर (ONE BELT ONE ROAD) चीन की एक महत्वाकांक्षी परियोजना है जिसके जरिए वह प्राचीन सिल्क मार्ग को पुनः विकसित कर रहा है। इसके महत्वपूर्ण परियोजना के जरिए चीन सड़कों, रेल, बंदरगाह, पाइपलाइनों और अन्य बुनियादी सुविधाओंके माध्यम से मध्य एशिया से लेकर यूरोप और फिर अफ्रीका तक स्थलीय व समुद्री मार्ग तैयार कर रहा है। इसे 21वी सदी का समुद्री सिल्करोड भी कहा जा रहा है।

क्यों भारत के लिए यह चिंता का सबब है?

  • चीन और पाकिस्तान के द्वारा यह निर्माण कार्य पाक अधिकृत कश्मीर में किया जा रहा है जो भारत का एक अभिन्न हिस्सा है इसके अलावा इस योजना से चीन की सेना की पहुंच POK तक हो गई हैं। अगर हम चीन द्वारा संचालित नीतियों जैसे स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स, BCIM (बांग्लादेश-चीन-म्यांमार-भारत) कारीडोर और CPEC को समन्वित रूप से देखें तो चीन चारों ओर से भारत को घेर लेगा जो कि भारत के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

सिक्किम राज्य का स्‍थापना दिवस

  • प्रधानमंत्री ने “सिक्किम के स्‍थापना दिवस पर बधाई एवं जैविक खेती जैसे क्षेत्रों में सिक्किम की प्रगति की सराहना की।

सिक्किम का भारत में विलय कब हुआ?

  • भारत 1947 में आजाद हो गया लेकिन सिक्किम 1974 तक एक स्वतंत्र राष्ट्र रहा। लेकिन तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और देश की खुफिया एजेंसी रॉ के प्रयासों के बाद 26 अप्रैल, 1975 में सिक्किम का भारत में विलय हुआ। 20 दिन बाद 16 मई, 1975 को सिक्किम को भारत के 22वें राज्य का दर्जा मिला। आपको बता दे सिक्किम को 35वें संविधान संशोधन से सह-राज्य के रूप में भारत का भाग बनाया गया और 36वें संविधान से सिक्किम को पूर्ण राज्य का दर्जा दिया गया।

प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY)

चर्चा में क्यों?

  • केन्‍द्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस और इस्पात मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान ने वेबिनार के माध्यम से देश भर के 1500 से अधिक प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) लाभार्थियों, गैस वितरकों और ओएमसी अधिकारियों के साथ बातचीत की।
  • प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (पीएमयूवाई) ने अपनी सफल यात्रा के चार साल पूरे कर लिए हैं, जिसके कारण 8 करोड़ से अधिक गरीब और वंचित परिवारों के जीवन में सुधार हुआ है।

क्या है प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY)?

  • "स्वच्छ ईंधन, बेहतर जीवन" के नारे के साथ केंद्र सरकार नें उत्तर प्रदेश के बलिया में 1 मई 2016 को माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने नेतृत्व में एक सामाजिक कल्याण योजना - "प्रधानमंत्री उज्जवला योजना" की शुरूआत की है।

उद्देश्य

  • महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा
  • खाना पकाने के लिए एक स्वस्थ ईंधन उपलब्ध कराना
  • जीवाश्म ईंधन के उपयोग के कारण ग्रामीण आबादी के लाखों लोगों के बीच स्वास्थ्य से संबंधित खतरों को रोकने के लिए।

:: अंतर्राष्ट्रीय समाचार ::

ब्रह्मपुत्र नदी का हाइड्रोलॉजिकल डाटा

चर्चा में क्यों?

  • चीन ने ब्रह्मपुत्र नदी का हाइड्रोलॉजिकल डाटा भारत से साझा करना शुरू कर दिया है। पूर्वोत्तर के राज्यों में मानसून के समय बाढ़ की स्थिति का आकलन करने में इस डाटा की अहम भूमिका होती है। चीन की ओर से हर साल इस संबंध में डाटा साझा किया जाता है। जलशक्ति मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि डाटा को ब्रह्मपुत्र की मुख्य धारा में स्थित तीन हाइड्रोलॉजिकल स्टेशनों नुगेशा, यांगकुल और नुक्सिया से एकत्र किया जाता है। ब्रह्मपुत्र नदी को चीन में यारलंग जांगबो के नाम से जाना जाता है। लैंगकेन झंगबो के नाम से जानी जाने वाली सतलुज का हाइड्रोलॉजिकल डाटा तसदा स्टेशन से मुहैया कराया जाता है।
  • भारत से हुए एक समझौते के तहत चीन 15 मई से डाटा साझा करने की प्रक्रिया शुरू करता है। पहली जून से सतलुज नदी से जुड़ा डाटा भी साझा करने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। अक्टूबर तक रोजाना दो बार डाटा साझा किया जाता है।

पृष्ठभूमि

  • 2017 में बाढ़ के कारण डाटा एकत्र करने वाले केंद्रों को हुए नुकसान के कारण चीन ने डाटा साझा करने की प्रक्रिया रोक दी थी। डाटा साझा नहीं करने को भारत और चीन की सेनाओं के बीच डोकलाम में बनी तनाव की स्थिति से भी जोड़कर देखा जा रहा था। हालांकि 2018 में डाटा साझा करने की प्रक्रिया फिर शुरू कर दी गई थी।
  • करीब एक साल पहले मानसून सीजन के लिए चीन ने भारत के साथ ब्रम्हपुत्र नदी का हाइड्रोलॉजिकल (जल विज्ञान संबंधी) डाटा साझा किया था। जल संसाधन मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने सोमवार को आशा व्यक्त की कि एक जून से सतलुज नदी का डाटा भी साझा किया जाने लगेगा। ब्रम्हपुत्र नदी तिब्बत से निकलती है और अरुणाचल प्रदेश व असम से होती हुई बांग्लादेश के रास्ते बंगाल की खाड़ी में गिरती है। सिंधु की सहायक नदी सतलुज भी यहीं से निकलती है और भारत होती हुई पाकिस्तान में प्रवेश करती है।

विवादों में वेस्ट बैंक (पश्चिमी पट्टी)

चर्चा में क्यों?

  • जॉर्डन के राजा ने इजराइल को चेतावनी दी है कि अगर वह अवैध कब्जे वाली पश्चिमी पट्टी का विलय करता है तो बड़े पैमाने पर संघर्ष होगा। जॉर्डन ने यह चेतावनी शुक्रवार को ऐसे किसी कदम पर यूरोपीय संघ की प्रतिक्रिया पर विचार करने के लिए संघ के विदेश मंत्रियों की हुई बैठक के बीच कही है।

पृष्ठभूमि

  • उल्लेखनीय है कि इजराइल ने जॉर्डन घाटी में यहूदी बस्तियों के विलय करने की मंशा जताई है अगर ऐसा होता है तो लंबे समय से रुकी पड़ी शांति प्रक्रिया लगभग खत्म हो जाएगी क्योंकि फलस्तीन की स्थापना लगभग असंभव हो जाएगा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपनी पश्चिम एशिया योजना पेश की जिसका इजराइल ने समर्थन किया है जबकि फलस्तीनियों ने इसे खारिज कर दिया है। इस योजना में इजराइल द्वारा यहूदी बस्तियों के विलय को हरी झंडी दी गई है जबकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने मुखरता से इस कदम का विरोध किया है।

क्या है वेस्ट बैंक विवाद?

  • 1967 में इसराइल ने हमला करके जॉर्डन से वह हिस्सा छीन लिया जिसे आज पश्चिमी तट या वेस्ट बैंक कहा जाता है. इज़राइल के पूर्व में इज़राइल-जॉर्डन सीमा पर स्थित वेस्ट बैंक लगभग 6,555 वर्ग किमी. के भू-भाग में फैला है। जॉर्डन नदी के पश्चिमी तट पर स्थित होने की वजह से इसे वेस्ट बैंक कहा जाता है।
  • फिलीस्तीन वेस्ट बैंक, पूर्वी येरुशलम और गाजा पट्टी को साथ मिलाकर एक देश बनाना चाहता है, लेकिन इजरायल वेस्ट बैंक, पूर्वी येरुशलम पर अपना दावा करता है। इजरायल अब चार लाख यहूदियों की बस्ती का विस्तार कर उसे अपने अधिकार में लेना चाहता है। वेस्ट बैंक की बात करें, तो इजरायल की ओर से यहां पर लाखों यहूदियों को बसाया जा चुका है, लेकिन इस हिस्से में करीब 25 लाख फिलीस्तीनी लोग रहते हैं।

चीन की कंपनी हुवेई पर नए प्रतिबंध

चर्चा में क्यों?

  • अमेरिका ने चीन के प्रति हमलावर रुख अपनाते हुए शुक्रवार को चीन की टेक कंपनी हुवेई ( Huawei) पर नए प्रतिबंध लगाए हैं। इसके तहत अब सेमीकंडक्टरों के निर्माण व डिजाइन के लिए अमेरिकी टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल की क्षमता को सीमित कर दिया गया है। इस कदम का उद्देश्य Huawei को मौजूदा अमेरिकी प्रतिबंधों के आसपास रन बनाने से रोकना है। जिन चिप डिजाइन और मैन्युफैक्चरिंग उपकरणों का इस्तेमाल दुनिया के सेमीकंडक्टर प्लांट्स में होता है उसमें से अधिकांश अमेरिका के बने होते हैं इसलिए नए नियमों का उद्देश्य अनेकों विदेशी उत्पादकों को प्रभावित करेगा।
  • नए नियमों के तहत विदेशी सेमीकंडक्टर विनिर्माता को हुवेई द्वारा डिजाइन सेमीकंडक्टर जिनका निर्माण अमेरिकी प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल कर किया गया है, को चीन की कंपनी को भेजने के लिए अमेरिकी लाइसेंस हासिल करना होगा।

पृष्ठभूमि

  • हुवेई टेक्नोलॉजीज चीन का पहला वैश्विक प्रौद्योगिकी ब्रांड है और यह कंपनी नेटवर्क उपकरण तथा स्मार्टफोन बनाती है। हुवेई अमेरिका-चीन विवाद का प्रमुख मुद्दा है। अमेरिकी अधिकारी कहते रहे हैं कि हुवेई सुरक्षा के लिए खतरा है। हालांकि, कंपनी ने इन आरोपों को नकारा है। वहीं चीन का कहना है कि अमेरिका सुरक्षा चेतावनी का दुरुपयोग कर अमेरिकी प्रौद्योगिकी कंपनियों लिए चुनौती बन रही हुवेई को नुकसान पहुंचाना चाहता है।

US स्पेस फोर्स

  • अमेरिका की स्पेस फोर्स (US Space Force) का अब अपना झंडा होगा। स्पेस फोर्स ने अपना नया झंडा पेश किया है। झंडा गहरे ब्लू रंग का है जो पहली बार में काले रंग का प्रतीत होता है। इसमें तीन बड़े बड़े स्टार लगे हैं और स्पेस फोर्स का सिग्नेचर डेल्टा लोगो इसके केंद्र में बना है। इसके अलावा इसमें लिखा है, 'यूनाइटेड स्टेट्स स्पेस फोर्स (United States Space Force)।' इसके नीचे रोमन नंबर - MMXIX (2019) अंकित है। इसी साल स्पेस फोर्स का आधिकारिक तौर पर गठन किया गया था। 72 सालों में यह पहला नया मिलिट्री झंडा है। यह ओवल ऑफिस में अन्य झंडों के साथ ही रहेगा।

2019 में हुआ था स्पेस फोर्स का गठन

  • पिछले साल ही अंतरिक्ष में अपनी स्थिति मजबूत बनाने के लिए अमेरिका ने आधिकारिक तौर पर स्पेस कमांड लॉन्च किया था। ट्रंप प्रशासन की ओर से नई यूएस स्पेस फोर्स के गठन की दिशा में यह काफी अहम कदम है। यूएस स्पेस फोर्स अमेरिकी सेना की छठी शाखा है जो अंतरिक्ष जगत में देश का दबदबा बढ़ाएगी।

:: अर्थव्यवस्था ::

आर्थिक पैकेज से जुड़ी चौथी चरण की घोषणाएं

  • वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज यानि शनिवार को प्रेस कान्फ्रेंस के जरिये 20 लाख करोड़ रुपये के आर्थिक पैकेज से जुड़ी चौथी चरण की घोषणाएं कर रही हैं। सीतारमण की ओर से बुधवार से लगातार रोज शाम 4 बजे मीडिया के सामने लॉकडाउन से प्रभावित लोगों, सेक्टर्स एवं उद्योगों के लिए किए जा रहे उपायों की घोषणा की जा रही है। वित्त मंत्री ने अब तक की तीन किस्तों में किसानों, पशुपालकों, MSME सेक्टर, प्रवासी मजदूरों, स्ट्रीट वेंडर्स और अन्य तबके के लिए कई तरह की राहत उपायों की घोषणा की है।

घोषणा के प्रमुख बिंदु

  • वित्त मंत्री ने कहा कि परमाणु ऊर्जा से जुड़े सुधार में रिसर्च रीयेक्टर की स्थापना पीपीपी मॉडल में होगी। इससे मानवता की सेवा को बल मिलेगा।
  • उन्होंने कहा कि भारत ने करोना वायरस के दौरान और पहले केंसर के लिए भी दुनिया के कई देशों को दवाईयां भेजी हैं। इस दिशा में और आगे बढ़ना है। उन्होंने कहा कि पीपीपी मॉडल में एकीकृत खाद्य संरक्षण केंद्र स्थापना होगी।
  • इससे रेडिएशन तकनीक द्वारा प्याज जैसी खाद्य वस्तुओं की सेल्फ लाइफ बढ़ाने में मदद मिलेगी और किसानों को अधिक मुनाफा मिलेगा। उन्होंने कहा कि इससे स्टार्टअप्स के लिए भी एक नया क्षेत्र मिलेगा।
  • अंतरिक्ष क्षेत्र में इसरो ने भारत को काफी ख्याति दिलाई है। सरकार इस क्षेत्र में निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ाना चाहती है। इसके लिए सरकार उपग्रहों, प्रक्षेपण एवं अंतरिक्ष आधारित सेवाओं को लेकर निजी कंपनियों को लेवल प्लेइंग फील्ड उपलब्ध कराएगी।
  • निजी क्षेत्र को क्षमता में सुधार के लिए इसरो की सुविधाओं और परिसंपत्तियों के इस्तेमाल की अनुमति दी जाएगी।
  • वित्त मंत्री ने कहा कि सोशल इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की जरूरत है। इसके लिए इसमें निजी निवेश को बल देने के लिए कुछ बदलाव किए गए हैं। इसके लिए 30 फीसद केंद्र और 30 फीसद राज्य सरकारों द्वारा फंडिंग होगी। इसके लिए 8100 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे।
  • केंद्रशासित प्रदेशों में बिजली वितरण कंपनियों का निजीकरण किया जाएगा। इसके लिए एक टैरिफ पॉलिसी लाई जाएगी। इसमें इस चीज का ध्यान रखा जाएगा कि उपभोक्ताओं को उनका अधिकार हासिल हो सके।
  • डिस्कॉम्स कंपनियों को उपभोक्ताओं को पर्याप्त बिजली उपलब्ध कराना होगा। इससे विद्युत उत्पादन करने वाली कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। इससे बिजली उत्पादन करने वाली कंपनियों को समय पर भुगतान मिलेगा।
  • प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण के जरिए सब्सिडी दी जाएगी। प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगाए जाएंगे। इससे उपभोक्ताओं को बेहतर सेवाएं मिलेंगी।
  • वित्त मंत्री ने कहा कि मात्र 60 फीसदी भारतीय एयर स्पेस सिविल एविएशन के लिए है। इस स्पेस का ठीक उपयोग हो, फ्यूल बचे, कम से कम समय में यात्रा स्थान तक पहुंचें, इसके लिए काम होगा।
  • इससे विमानन क्षेत्र को 1000 करोड़ का फायदा होगा। उन्होंने कहा कि पीपीपी मॉडल के तहत 6 नए एयरपोर्ट्स की नीलामी होगी।
  • 2300 करोड़ रुपए की डाउन पेमेंट एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया को मिलेगी। 1300 करोड़ का निवेश पहले और दूसरे चरण में आएगा। साथ ही उन्होंने कहा कि भारत को एयरक्राफ्ट रिपेयर सर्विस हब बनाएंगे।
  • इंडियन एयरक्राफ्ट्स का मेंटेनेंस और रिपेयरिंग भारत में ही हो, ऐसा सुनिश्चित किया जाएगा। एयरलाइंस की लागत कम हो, उस दिशा में कदम उठाए जाएंगे।
  • समयबद्ध रक्षा खरीद के लिए सरकार कदम उठाएगी। इसके साथ ही ट्रायल और टेस्टिंग प्रक्रिया को बेहतर बनाया जाएगा।
  • ऑर्डिनेंस फैक्टरी बोर्ड का निगमीकरण उनके कामकाज में सुधार के लिए किया जाएगा। कंपनियों को शेयर बाजार में लिस्ट किया जाएगा। डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग में ऑटोमैटिक रूट्स के जरिए FDI की सीमा को 49 से बढ़ाकर 74 फीसद किया जाएगा।
  • रक्षा उत्पादन में देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए 'मेक इन इंडिया' बिल्कुल अपरिहार्य है। सरकार ऐसे हथियारों एवं प्लेटफॉर्म की लिस्ट अधिसूचित करेगी, जिनके आयात को प्रतिबंधित कर दिया जाएगा।
  • इस लिस्ट में शामिल हथियारों एवं प्लेटफॉर्म को देश से खरीदा जाएगा। इससे रक्षा उत्पादों के आयात पर आने वाले खर्च में कमी लाने में मदद मिलेगी।
  • सरकार ऑर्डिनेंस फैक्टरी की स्वायत्ता, जवाबदेही और क्षमता को बेहतर बनाने के लिए ऑर्डिनेंस फैक्टरी बोर्ड का कॉरपोरेटाइजेशन किया जाएगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि कॉरपोरेटाइजेशन बोर्ड का निजीकरण नहीं बल्कि कॉरपोरेटाइजेशन किया जाएगा।
  • वित्त मंत्री ने कहा कि मिनरल माइनिंग में निजी निवेश बढ़ाएंगे। मिनरल में एक्सप्लोरेशन माइनिंग प्रॉडक्शन सिस्टम लाएंगे।
  • नई व्यवस्था में 500 माइनिंग ब्लॉक्स उपलब्ध कराए जाएंगे। उन्होंने कहा कि इसमें भी 50000 करोड़ का खर्च इन्फ्रास्ट्रक्चर पर होगा। उन्होंने कहा कि बॉक्साइट और कोयला का ज्वाइंट ऑक्शन होगा। इससे खनन में वृद्धि होगी और रोजगार सृजन होगा।
  • लगभग 50 नए ब्लॉक खनन के लिए नीलामी पर उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके लिए नियमों में ढील दी जाएगी। कोयला से गैस बनाने के लिए नए आवंटन किए जाएंगे और उन्हें प्रोत्साहन दिया जाएगा।
  • कोल सेक्टर के आधारभूत ढांचे के विकास के लिए लगभग 50,000 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
  • कोयला क्षेत्र- कोयला उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने के लिए कोयला के आयात में कमी लाने की जरूरत है।
  • सरकार राजस्व साझा करने के तंत्र के आधार पर कोयला सेक्टर में प्रतिस्पर्धा, पारदर्शिता और निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ाएगी। सरकार कोयला क्षेत्र पर से सरकार की मोनोपोली को खत्म करेगी
  • वित्त मंत्री ने कहा कि कहा की ईजीएस के जरिए निवेश को जल्द मंजूरी देंगे। उन्होंने कहा कि इंडस्ट्रीयल इंफ्रास्ट्रक्चर को विकसित करना है।
  • उन्होंने कहा कि 5 लाख हेक्टर में फैले इंडस्ट्रीयल पार्कों की जानकारी आईआईएस पर मिलेगी। इस भूमि की जीपीएस मैपिंग होगी। इससे जमीन कि उपलब्धता के मामले में सरलता होगी। प्रतेक मंत्रालय में प्रोजेक्ट इन्वेस्टमेंट सेल बनेगा।
  • आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए निवेश की गति बढ़ाने को नीतिगत सुधार किये गए हैं। सचिवों के अधिकार प्राप्त समूह के जरिए निवेश को मंजूरी दिए जाने की गति को तेज किया गया है।
  • नए निवेश को आकर्षित करने को राज्यों के बीच प्रतिस्पर्धा पैदा करने के लिए रैकिंग सिस्टम।

भारत के 10 मेगा क्लस्टर

  • चीन भले ही कोरोना वायरस संकट से तकरीबन पूरी तरह उबर चुका हो, लेकिन दुनिया का अब पेइचिंग पर अविश्वास गहराता जा रहा है। तमाम मल्टिनेशनल कंपनियां अब चीन से बाहर निकलने की गंभीर कोशिशों में जुट चुकी हैं। भारत के लिए यह एक मौके की तरह है लिहाजा कंपनियों को आकर्षित करने के लिए देश में 'क्लस्टर प्लान' पर भी काम किया जा रहा है। भारत ने 9 राज्यों में फैले ऐसे 10 मेगा क्लस्टरों की लिस्ट बनाई है जो अलग-अलग सेक्टरों से जुड़े हैं और जो संबंधित कंपनियों के लिए मुफीद साबित होंगे।

क्या है इनकी विशेषता

  • इसे आसानी से ऐसे समझ सकते हैं कि नोएडा-ग्रेटर नोएडा क्लस्टर इलेक्ट्रॉनिक हब है, जबकि हैदराबाद क्लस्टर फार्मा और वैक्सीन के निर्यात का देश में सबसे बड़ा हब है। हैदराबाद क्लस्टर में ही दुनिया का करीब एक तिहाई वैक्सीन बनता है। अब इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों के लिए नोएडा-ग्रेटर नोएडा क्लस्टर और फार्मा से जुड़ी कंपनियों को हैदराबाद क्लस्टर में यूनिट डालने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है।

इन 10 मेगा क्लस्टरों में 600 से ज्यादा बहुराष्ट्रीय कंपनियां

  • अहमदाबाद, वडोदरा (भरुच-अंकलेश्वर क्लस्टर), मुंबई-औरंगाबाद, पुणे, बेंगलुरु, हैदराबाद, चेन्नै और तिरुपति-नेल्लोर क्लस्टर भी निवेशकों सबसे ज्यादा आकर्षित करने वाले क्लस्टर हैं। पुणे-औरंगाबाद ऑटो और ऑटो कंपोनेंट का हब है। इन 10 मेगा क्लस्टरों में करीब 100 लोकप्रिय इंडस्ट्रियल पार्क हैं। इसके अलावा यहां 600 से ज्यादा भारतीय और विदेशी बहुराष्ट्रीय कंपनियां काम कर रही हैं।

:: विज्ञान और प्रौद्योगिकी ::

लौह- मैंगनीज युक्त बायोडिग्रेडेबल धातु का विकास

  • विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के तहत स्वायत्त संस्थानों चूर्णिक धातु कर्म एवं नई सामग्री यानी पाउडर मेटलर्जी एंड न्यू मेटीरियल्स के लिए अंतरराष्ट्रीय उन्नत शोध केंद्र(एआरसीआई) और श्री चित्रा टिरुनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेस, तिरुअनंतपुरम के वैज्ञानिकों ने संयुक रूप से मानव शरीर में इस्तेमाल होने योग्य स्वाभाविक रूप से बायोडिग्रेडेबल धातु का इम्प्लांट बनाने के लिए लौह- मैंगनीज से युक्त उन्नत मिश्र धातु बनाया है।
  • स्वाभाविक रूप से बायोडिग्रेडेबल सामग्री (लौह, मैंगनीज जिंक और पॉलीमर) उपचारात्मक प्रक्रिया में भाग ले सकते हैं और फिर मानव शरीर में कोई इम्प्लांट अवशेष छोड़े बिना शरीर की संरचना को बरकरार रखते हुए धीरे-धीरे नष्ट हो जाते हैं। ये सामग्री अभी इस्तेमाल हो रहे धातुओं के इम्प्लांट का बेहतर विकल्प हैं जो स्थायी रूप से मानव शरीर में पड़े रहते हैं और धीरे-धीरे विषाक्तता, स्थायी सूजन एवं फ्रोमबाउसिस जैसे साइड इफेक्ट्स का कारण बन जाते हैं।
  • एआरसीआई की टीम ने स्वाभाविक रूप से सड़नशील लौह मैंगनीज युक्त मिश्र धातु और स्टेन्ट बनाने में दोनों पारंपरिक मेल्टिंग और पाउडर मेटलर्जी तकनीक का इस्तेमाल किया है। स्टेन्ट का आकार इस प्रकार है: व्यास 2 एमएम, लंबाई 12 एमएम, वॉल की मोटाई 172 म्यूएम।
  • इन प्रभावशाली नतीजों के आधार पर एआरसीआई की टीम इस बात को लेकर आश्वस्त है कि यह नई लौह-मैंगनीज युक्त मिश्र धातु स्वाभाविक रूप से बायोडिग्रेडेबल स्टेन्ट और ऑर्थोपेडिक इम्प्लांट अनुप्रयोगों के लिए उपयुक्त है। श्री चित्र टिरुनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में टीम द्वारा इस पर अभी और अध्ययन करने की योजना बनाई जा रही है।

माइकोबैक्टीरियम डब्ल्यू (Mycobacterium W- Mw)

चर्चा में क्यों?

  • अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (All India Institute of Medical Sciences यानी AIIMS) भोपाल का कहना है कि कोरोना के इलाज में माइकोबैक्टीरियम डब्ल्यू (Mycobacterium W यानी Mw) दवा के नतीजे भी बेहतर आए हैं। मालूम हो कि बीते कुछ दिनों से एम्स भोपाल में इस दवा का क्लिनिकल ट्रायल चल रहा है।

पृष्ठभूमि

  • बता दें कि माइकोबैक्टीरियम डब्ल्यू का इस्तेमाल कुष्ठ रोग में किया जाता है। ड्रग कंट्रोलर ऑफ इंडिया से वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद को इस दवा के क्लिनिकल ट्रायल को मंजूरी मिली थी। इस मंजूरी के बाद एम्स भोपाल सहित देश के तीन अस्पतालों में इस दवा का क्लिनिकल ट्रायल किया जा रहा है। यह दवा मरीज की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद करती है।

क्या है माइकोबैक्टीरियम डब्ल्यू?

  • माइकोबैक्टीरियम डब्ल्यू का इस्तेमाल कुष्ठ रोग में किया जाता है। MW एक माइको बैक्टीरिया है। यह माइको बैक्टीरिया की 150 प्रजातियों में से एक है। इसे मृत अवस्था में इस्तेमाल किया जाता रहा है। इस वैक्सीन की खोज लगभग 25 साल पहले दिल्ली के ही एक वैज्ञानिक डॉ. जीपी तलवार ने की थी। उन्होंने एक मरीज़ के बलगम से इसे खोज निकाला था। जब कुष्ठ रोगियों (LEPROSY) पर इसका इस्तेमाल किया गया तो नतीजे चौकाने वाले आये। कुष्ठ रोगियों को दी जाने वाली दवाईयों के साथ जब MW वैक्सीन को दिया गया तो वे आधे समय में ही ठिक होने लगे।
  • ये वैक्सीन शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बहुत बढ़ा देती है। इस वैक्सीन से शरीर की फर्स्ट लाइन और सेकेण्ड लाइन दोनों इम्यूनिटी काफी बढ़ जाती है। इससे शरीर में बी और टी सेल्स बहुत तेजी से बनने लगती हैं। ये दोनों सेल्स किसी भी नये या पुराने वायरस या बैक्टीरिया को खत्म करने में तेजी से जुट जाते हैं।

धूमकेतु स्वान (Comet Swan)

  • कई बार अंतरिक्ष में बेहद हैरतअंगेज और अद्भुत नजारे देखने को मिलते हैं। ठीक ऐसा ही नजारा शनिवार रात को भी देखने को मिलेगा। धूमकेतु स्वान अपने एक करोड़ 10 लाख मील लंबी चमकती पूंछ के साथ धरती के पास से गुजरेगा। इस नजारे को लोग बिना टेलीस्कोप के भी देख सकते हैं।
  • इस धूमकेतू को अप्रैल में ऑस्ट्रेलिया के खगोलशास्त्री माइकल मैटियाजो ने खोजा था। नासा के सोलर हेलियोस्फेयरिक ऑब्जरवेटरी के आंकड़े देखने के दौरान उन्हें सोहो सोलर विंड एनिसोट्रॉपिस इंस्ट्र्यूमेंट में इसकी छवि दिखाई दी। इसके बाद माइकल ने इसका नाम स्वान रख दिया। बता दें कि स्वान नामक मशीन का उपयोग अंतरिक्ष में हाइड्रोजन का पता लगाने के लिए किया जाता है।

धूमकेतु क्या होते हैं?

  • धूमकेतु (Comet) अंतरिक्ष में विचरने वाले बर्फ से बनें पिंड हैं, जो अपने पीछे गैस और बर्फ के कण छोड़ते हैं। धूमकेतु अपने अंदर धूल, बर्फ, कार्बन डाइऑक्साइड, मीथेन, अमोनिया और ऐसे ही बहुत से पर्दाथ और गैस रखते हैं। जब धूमकेतु सूर्य के नजदीक आता है तो इसके चारों ओर एक गर्म गैसों का गोला बन जाता है जिसे कोमा कहते हैं इस कोमा में मुख्यतः पानी की भाप, अमोनिया तथा कार्बन डाइऑक्साइड पाए जाते हैं. जैसे-जैसे धूमकेतु आगे बढ़ता है तो वह अपने पीछे धूल के कणों के पूँछ छोड़ता जाता है, जब ये धुल के कण पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करते हैं तो यह टूटते हुए तारे के रूप में दिखाई देते हैं, इस तरह आप कह सकते हैं की किसी टूटते हुए तारे का पिता एक धूमकेतु हौता है.

:: विविध ::

International Day of Light (इंटरनेशनल डे ऑफ़ लाइट)

  • प्रति वर्ष 16 मई को संपूर्ण विश्व में International Day of Light (इंटरनेशनल डे ऑफ़ लाइट) मनाया जाता है। इस दिवस को मनाने का उद्देश्य विज्ञान, संस्कृति कला, शिक्षा और सतत विकास, और औषधि, संचार और ऊर्जा के विविध क्षेत्र में प्रकाश की महत्वपूर्ण भूमिका के महत्व को उजागर करना है। इस दिवस को मनाने के लिए 16 मई के दिन का इसलिए चयन किया गया क्योंकि इस दिन वर्ष 1960 में प्रसिद्ध भौतिकशास्त्री और इंजीनियर थियोडोर मेमन (Theodore Maiman) द्वारा लेजर का पहली बार सफल संचालन किया गया। 7 नवंबर, 2017 को यूनेस्को के सामान्य सभा के 39वें सत्र में 16 मई को इस दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की गई थी।

यूनेस्को (UNESCO) यूनेस्को

  • (UNESCO) ‘संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संगठन’, संयुक्त राष्ट्र का एक महत्वपूर्ण अंग है जिसका कार्य शिक्षा, प्रकृति, समाज विज्ञान, संस्कृति तथा संचार के माध्यम से अंतराष्ट्रीय शांति को बढ़ावा देना है। यूनेस्को के 193 सदस्य देश हैं और 11 सहयोगी सदस्य देश हैं। कुछ समय पहले अमेरिका और इज़राइल ने इसकी सदस्यता को छोड़ दी थी इसका मुख्यालय पेरिस (फ्रांस) में है। यूनेस्को (UNESCO) का गठन 16 नवंबर, 1945 को किया गया एवं भारत वर्ष 1946 से ही यूनेस्को का सदस्य देश है।

स्रोत साभार: Dainik Jagran (Rashtriya Sanskaran), Dainik Bhaskar (Rashtriya Sanskaran), Rashtriya Sahara (Rashtriya Sanskaran) Hindustan Dainik (Delhi), Nai Duniya, Hindustan Times, The Hindu, BBC Portal, The Economic Times (Hindi & English), PTI, PIB

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