(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (17 जुलाई 2020)

दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर


(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (17 जुलाई 2020)


:: राष्ट्रीय समाचार ::

NISHTHA कार्यक्रम

चर्चा में क्यों

  • मानव संसाधन और विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने आंध्रप्रदेश के शिक्षा से जुड़े 1200 प्रमुख व्यक्तियों के लिए पहला ऑन-लाइन NISHTHA कार्यक्रम शुरू किया।

क्या है NISHTHA कार्यक्रम

  • ISHTHA (National Initiative for School Head's and Teacher's Holistic Advancement) कार्यक्रम केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई राष्ट्रीय पहल है।
  • इस कार्यक्रम को 21 अगस्त 2019 को लांच किया गया था।
  • “निष्ठा (NISHTHA)” कार्यक्रम के तहत मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने देशभर के लाखों शिक्षकों को निःशुल्क प्रशिक्षण प्रदान कर रहा है।
  • केंद्र प्रायोजित यह कार्यक्रम स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग द्वारा समग्र शिक्षा 2019- 20 के तहत राष्ट्रीय मिशन के रूप में शुरू किया है।
  • “निष्ठा कार्यक्रम (NISHTHA Programme)” के प्राथमिक स्तर पर सभी सरकारी स्कूलों के सभी शिक्षक और स्कूल प्रमुख शामिल होंगे।

NISHTHA कार्यक्रम की विशेषताएँ

  • इस कार्यक्रम में बच्चों में महत्वपूर्ण सोच को प्रोत्साहित करने और बढ़ावा देने के लिए शिक्षकों को प्रेरित करने और प्रशिक्षण प्रदान हेतु डिज़ाइन किया गया है।
  • निष्ठा के तहत विकसित किए गये प्रारूपों के द्वारा बच्चों के समग्र विकास का ध्यान रखा जायेगा।
  • इसमें पाठ्यक्रम सहित स्वास्थ्य कल्याण, व्यक्तिगत सामाजिक गुण, कला, स्कूली शिक्षा में पहल, विषय-विशेष शिक्षा, शिक्षण-शिक्षा में आईसीटी, नेतृत्व क्षमता, पूर्व- विद्यालय शिक्षा, पूर्व-व्यावसायिक शिक्षा, आदि को शामिल किया गया है।
  • अब तक लगभग 23,000 प्रमुख संसाधन व्यक्ति (key resource personals) और 17.5 लाख शिक्षक और स्कूल निष्ठा से लाभान्वित हुए हैं।
  • अब इसके ऑनलाइन हो जाने इसका लाभ और अधिक शिक्षकों तक पहुंचेगा।

प्रसाद योजना

चर्चा में क्यों ?

  • हाल ही में केंद्रीय पर्यटन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार ) श्री प्रह्लाद सिंह पटेल जी ने गुजरात के सोमनाथ मंदिर में " तीर्थयात्री सुविधाओं के विकास " परियोजना का वर्चुअल उद्घाटन किया।
  • यह कार्य प्रसाद योजना के अंतर्गत किया जा रहा है। मार्च 2017 से जारी इस परियोजना की कुल 45.36 करोड़ रही।

प्रसाद योजना के बारे में :-

  • पर्यटन मंत्रालय द्वारा 2014-15 में ' तीर्थयात्रा कायाकल्प एवं अध्यात्मिक, विरासत संवर्धन अभियान मिशन (प्रसाद) का आरम्भ किया गया था।
  • इसका मुख्य उद्देश्य चिन्हित तीर्थस्थानों एवं धरोहर गंतव्यों का समेकित विकास था जिसके द्वारा आर्थिक संवृद्धि तथा रोजगार को भी बढ़ाया जाये।
  • इस योजना में 100% वित्तीयन केंद्र सरकार द्वारा की जा रही है तथा इसमें कॉर्पोरेट - सोशल रेस्पोंसबिलिटी तथा सार्वजानिक निजी भागीदारी को भी प्रयोग में लाया जा सकता है।
  • इस योजना का लक्ष्य प्रवेश बिन्दुओं (सड़क, रेल एवं जल परिवहन) का अवसंरचना विकास, अंतिम बिंदु तक संपर्क, सूचना/अनुवाद केंद्र जैसी मूलभूत पर्यटन सुविधाएं, एटीएम/मनी एक्सचेंज, क्षेत्र में लाइटिंग एवं ऊर्जा के नवीकरणीय स्रोतों के साथ प्रकाश व्यवस्था, पार्किंग, पीने के पानी, शौचालयों प्रतीक्षालय , प्राथमिक चिकित्सा केंद्र, क्राफ्ट आजार/हाट/सोविनियर दूकानों/कैफेटेरिया, वर्षा आश्रयगृहों, दूरसंचार सुविधाओं, इंटरनेट कनेक्टिविटी आदि जैसी सुविधाओं का विकास करना था।

सोमनाथ मंदिर

  • गुजरात में स्थित इस मंदिर के गर्भगृह में भगवान शिव विराजमान हैं
  • यह हिन्दू -सनातन परंपरा के महत्वपूर्ण मंदिरों में एक है।
  • महमूद गजनवी से लेकर औरंगजेब तक यह मंदिर कई बार आक्रांताओं का कोप भाजन बना है
  • मंदिर के आधुनिक भवन के निर्माण का श्रेय श्री सरदार पटेल जी को जाता है।

चमड़ा कारीगरों के लिए अत्याधुनिक फुटवियर प्रशिक्षण केंद्र

  • खादी और ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) ने चमड़ा कारीगरों को प्रशिक्षित करने के लिए दिल्ली में अपनी तरह के पहले फुटवियर प्रशिक्षण केंद्र का आज उद्घाटन किया। इस केंद्र को एमएसएमई मंत्रालय की इकाई केंद्रीय फुटवियर प्रशिक्षण संस्थान (सीएफटीआई) आगरा के तकनीकी जानकारों के साथ मिलकर स्थापित किया गया है।
  • दिल्ली में गांधीघाट, राजघाट स्थित “केवीआईसी-सीएफटीआई फुटवियर ट्रेनिंग कम प्रोडक्शन सेंटर” उच्च गुणवत्ता वाले फुटवियर बनाने के लिए चमड़ा कारीगरों को 2 महीने का एक व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम मुहैया करायेगा।

:: अंतर्राष्ट्रीय समाचार ::

संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक परिषद (ईसीओएसओसी)

चर्चा में क्यों?

  • प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी शुक्रवार, 17 जुलाई 2020 को न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र में संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक परिषद (ईसीओएसओसी) के सत्र के इस साल के उच्च- स्तरीय खंड को आभासी रूप से संबोधित करेंगे। नॉर्वे के प्रधानमंत्री और संयुक्त राष्ट्र के महासचिव श्री एंटोनियो गुटेरेस के साथ प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी समापन सत्र को संबोधित करेंगे।

ईसीओएसओसी के सत्र से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य

  • वार्षिक उच्च-स्तरीय खंड में सरकार, निजी क्षेत्र एवं सिविल सोसायटी के उच्चस्तरीय प्रतिनिधियों और शिक्षाविदों का एक विविध समूह शामिल है। इस वर्ष के उच्च-स्तरीय खंड की थीम है- 'कोविड-19 के बाद बहुपक्षवाद: 75वीं वर्षगांठ पर हमें किस तरह के संयुक्त राष्ट्र की जरूरत है।'
  • बदलते अंतरराष्ट्रीय परिदृश्‍य और कोविड-19 महामारी के मौजूदा संकट काल को ध्‍यान में रखते हुए यह सत्र बहुपक्षवाद की दिशा तय करने वाली महत्वपूर्ण ताकतों पर फोकस करेगा। इसके साथ ही इस सत्र के दौरान सुदृढ़ नेतृत्व, प्रभावशाली अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों, सहभागिता में वृद्धि और वैश्विक सार्वजनिक वस्तुओं के बढ़े हुए महत्व के जरिए वैश्विक एजेंडे को आगे बढ़ाने के तरीकों का पता लगाया जाएगा।
  • यह आयोजन विशेष अहमियत रखता है क्योंकि यह पहला अवसर होगा जब प्रधानमंत्री श्री मोदी 17 जून 2020 को सुरक्षा परिषद के गैर-स्थायी सदस्य (2021-22 के कार्यकाल के लिए) के रूप में भारत को निर्विरोध चुने जाने के बाद संयुक्त राष्ट्र की व्यापक सदस्यता को संबोधित करेंगे। संयुक्त राष्ट्र की स्थापना की 75वीं वर्षगांठ पर 'ईसीओएसओसी' के उच्च-स्तरीय खंड की थीम दरअसल भारत की सुरक्षा परिषद संबंधी प्राथमिकता के साथ भी प्रतिध्वनित होती है, जिसमें भारत ने कोविड-19 के बाद की दुनिया में 'पुनर्गठित बहुपक्षवाद' का आह्वान किया है।
  • इस अवसर पर ईसीओएसओसी के सबसे पहले अध्यक्ष (वर्ष 1946 में सर रामास्वामी मुदलियार) के रूप में भारत की भूमिका को भी स्‍मरण किया जाएगा। प्रधानमंत्री ने इससे पहले जनवरी 2016 में ईसीओएसओसी की 70वीं वर्षगांठ पर आभासी रूप से मुख्य भाषण दिया था।

दियामेर भाषा बांध

चर्चा में क्यों?

  • भारत के कड़े विरोध के बाद भी चीन ने अपने सदाबाहर मित्र पाकिस्‍तान की मदद के लिए पाक अधिकृत कश्‍मीर के गिलगिट-बाल्टिस्‍तान इलाके में दियामेर भाषा बांध का निर्माण शुरू कर दिया है। पाकिस्‍तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने इस इलाके का दौरा किया। उन्‍होंने कहा कि यह पाकिस्‍तान के इतिहास में अब तक सबसे बड़ा बांध होगा। उधर, भारत ने इस विवादित इलाके में चीन के बांध निर्माण का पुरजोर विरोध किया है।

दियामेर भाषा बांध के बारे में

  • बांध गिलगित-बाल्टिस्तान (Gilgit-Baltistan) में सिंधु नदी पर बनाया जाएगा, जो पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में है. इसके 2028 में पूरा होने की उम्मीद है. यदि निर्माण कार्य सफल होता है तो यह दुनिया का सबसे ऊंचा रोलर कॉम्पैक्ट कंक्रीट बांध होगा. बांध से पाकिस्तान को सस्ती बिजली मिलेगी और रोजगार पैदा होंगे.

:: राजव्यवस्था ::

पशु बलि पाबंदी कानून

चर्चा में क्यों?

  • देवताओं को कथित तौर पर प्रसन्न करने के लिए पूजा में पशुओं और पक्षियों की दी जाने वाली बलि पर प्रतिबंध लगाने संबंधी कानून को संवैधानिक ठहराने के केरल हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। शीर्ष अदालत ने इस याचिका पर केरल सरकार से जवाब मांगा है।
  • याचिकाकर्ता ने दलील दी है कि पशु बलि उसकी धार्मिक परंपरा का अभिन्न हिस्सा है।याचिका में कहा गया है कि हाईकोर्ट के आदेश से संविधान के अनुच्छेद 14 और 25 (1) में प्रदत्त उसके मौलिक अधिकारों का हनन हुआ है।

पृष्ठभूमि

  • बता दें कि केरल हाईकोर्ट ने केरल पशु और पक्षी बलि निषेध कानून की वैधता को चुनौती देने वाली जनहित याचिका 16 जून को खारिज कर दी थी। हाईकोर्ट ने कहा था कि ऐसा कोई सुबूत पेश नहीं किया गया जिससे यह साबित हो कि धर्म के लिए यह परंपरा जरूरी है। हालांकि याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट में दलील दी थी कि क्रूरता की रोकथाम कानून 1960 धार्मिक परंपराओं के लिए बलि की इजाजत देता है।
  • हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि क्रूरता रोकथाम कानून में धार्मिक कार्य के लिए बलि‍ शब्द का उल्‍लेख नहीं किया गया है।
  • अब मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा है जिसमें याचिकाकर्ता ने दलील दी है कि उसके द्वारा उठाए गए मामलों पर विचार किए बगैर ही अदालत ने याचिका खारिज कर दी थी। याचिका में कहा गया है कि बलि शक्ति की उपासना का अभिन्न हिस्सा है और याची इस फैसले की वजह से बालि अर्पित नहीं कर पा रहा है।

:: अर्थव्यवस्था ::

पशुपालन अवसंरचना विकास निधि

चर्चा में क्यों

  • केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री द्वारा 15,000 करोड़ रुपये के पशुपालन अवसंरचना विकास निधि (एएचआईडीएफ) के लिए कार्यान्वयन दिशानिर्देशों को जारी किए गए हैं।

पृष्ठभूमि

  • पशुपालन अवसंरचना विकास निधि को कई क्षेत्रों में विकास सुनिश्चित करने के लिए आत्मनिर्भर भारत अभियान प्रोत्साहन पैकेज के अंतर्गत 24 जून 2020 को मंजूरी प्रदान की गयी थी।

पशुपालन बुनियादी ढांचा विकास निधि के बारे में

  • यह निजी क्षेत्र में डेयरी एवं मीट प्रसंस्करण के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर और बेहतरीन बुनियादी ढांचे के विकास और पशु आहार संयंत्र की स्थापना में निवेश के अति आवश्यक प्रोत्साहन को बढ़ावा देने के लिए उचित सुविधा उपलब्ध कराएगा।
  • इस योजना के तहत योग्य लाभार्थी किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ), एमएसएमई, सेक्शन 8 कंपनियां, निजी कंपनियां और निजी उद्यमी होंगे जिन्हें 10 प्रतिशत की मार्जिन राशि का योगदान करना होगा।
  • इसके तहत सरकार पात्र लाभार्थियों को 3% ब्याज अनुदान भी प्रदान करेगी। मूल ऋण राशि के लिए 2 वर्ष का शुल्क स्थगन और उसके बाद 6 वर्ष के लिए पुनर्भुगतान अवधि प्रदान की जाएगी।
  • सरकार द्वारा नाबार्ड के माध्यम से प्रबंधित, 750 करोड़ रुपये की ऋण गारंटी कोष की स्थापना भी की जाएगी।
  • उन स्वीकृत परियोजनाओं को ऋण गारंटी प्रदान की जाएगी जो एमएसएमई की परिभाषित सीमा के अंतर्गत आते हैं और गारंटी कवरेज, उधारकर्ता की ऋण सुविधा का 25% तक होगा।

योजना के लाभ

  • योग्य लाभार्थियों द्वारा प्रसंस्करण और मूल्य वर्धन इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश से इन प्रसंस्कृत और मूल्य-वर्धित सामानों का निर्यात बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।
  • एएचआईडीएफ में निवेश से न सिर्फ निजी निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा बल्कि यह किसानों को भी पशुपालन में निवेश बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करेगा जिससे उत्पादन में वृद्धि होगी और उनकी आय में भी बढ़ोतरी होगी।
  • इस योजना से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर लगभग 35 लाख लोगों को आजीविका का साधन मिल सकेगा।
  • निजी क्षेत्र के जरिए निवेश से संभावनाओं के कई रास्ते खुलेंगे। एएचआईडीएफ के 15,000 करोड़ रुपये और निजी निवेशकों के लिए ब्याज में आर्थिक सहायता की योजना से इन परियोजनाओं के लिए जरूरी निवेश को पूरा करने में पूंजी की उपलब्धता सुनिश्चित होगी और इससे निवेशकों को अपना रिटर्न बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।

नेशनल इन्वेस्टमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर फण्ड (NIIF)

चर्चा में क्यों ?

  • हाल ही में NTPC द्वारा नेशनल इन्वेस्टमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर फण्ड के साथ एक समझौता ज्ञापन (मेमोरेंडम ऑफ़ अंडरस्टैंडिंग ) हस्ताक्षर किया गया।

सम्बंधित अन्य तथ्य

  • दोनों घटको के मध्य यह समझौता अक्षय ऊर्जा तथा तथा विद्युत् वितरण के क्षेत्र में निवेश बढ़ाने को लेकर है। NTPC की तकनीकी तथा नेशनल इन्वेस्टमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर फण्ड की वित्त संग्रहण क्षमता लक्ष्य की प्राप्ति हेतु एक दुसरे का पूरक बनेंगी।
  • इस समझौते से NTPC द्वारा 2032 तक 30 गीगावाट अक्षय ऊर्जा क्षमता निर्धारण के लक्ष्य को सहयोग प्राप्त होगा।

नेशनल इन्वेस्टमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर फण्ड :-

  • इसकी स्थापना वाणिज्यिक रूप से उपलब्ध परियोजनाओं के इंफ्रास्ट्रक्चर को सहयोग प्रदान कर उनके आर्थिक प्रभाव को बढ़ाने के उद्देश्य से की गई थी।
  • इसकी स्थापना 2015 में वित्त मंत्रालय के अंतर्गत की गई
  • इसका मुख्यालय मुंबई में है।
  • इसमें 49% हिस्सा भारत सरकार का है , तथा अन्य निवेशक भारतीय जीवन बीमा निगम, आईसीआईसीआई बैंक , एचडीएफसी बैंक , कोटक महिंद्रा तथा आबूधाबी इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी व एशियाई इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक हैं। इसीलिए NIIF को फण्ड ऑफ़ फंड्स भी बोला जाता है।

पार्टिसिपेटरी नोट्स (पी-नोट्स)

चर्चा में क्यों?

  • घरेलू पूंजी बाजार में पार्टिसिपेटरी नोट्स (पी-नोट्स) के माध्यम से होने वाले निवेश में जून में लगातार तीसरे महीने बढ़त दर्ज की गयी। जून के अंत तक यह 62,138 करोड़ रुपये रहा। पूंजी बाजार से आशय शेयर, बांड, हाइब्रिड सिक्युरिटीज और डेरिवेटिव सभी में आने वाले निवेश से है।
  • भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के आंकड़ों के अनुसार घरेलू पूंजी बाजार में पी-नोट्स निवेश जून अंत तक बढ़कर 62,138 करोड़ रुपये रहा। पी-नोट्स से होने वाले निवेश में इससे पहले भी मई और अप्रैल में बढ़त दर्ज की गयी थी। मई अंत में यह 60,027 करोड़ रुपये और अप्रैल में 57,100 करोड़ रुपये रहा था। जबकि मार्च अंत में यह गिरकर 15 साल के निचले स्तर 48,006 करोड़ रुपये रह गया था।

पार्टिसिपेटरी नोट्स (पी-नोट्स) क्या है?

  • पार्टिसिपेटरी नोट यानी (पी-नोट) एक तरह का ऑफशोर डेरिवेटिव इंस्ट्रूमेंट होता है। जो इन्वेस्टर्स सेबी के पास रजिस्ट्रेशन कराए बगैर इंडियन सिक्यॉरिटीज/ पूंजी बाजार में पैसा लगाना चाहते हैं, वे इनका इस्तेमाल करते हैं। विदेशी इन्वेस्टर्स को पी-नोट्स सेबी के पास रजिस्टर्ड फॉरन ब्रोकरेज फर्म्स या डोमेस्टिक ब्रोकरेज फर्म्स की विदेशी यूनिट्स जारी करती हैं। ब्रोकर इंडियन सिक्यॉरिटीज (शेयर, डेट या डेरिवेटिव्स) में खरीदारी करते हैं और फीस लेकर उन पर क्लायंट को पी-नोट्स इश्यू करते हैं।

:: विज्ञान और प्रौद्योगिकी ::

थर्टी मीटर टेलीस्कोप (टीएमटी)

चर्चा में क्यों?

  • हवाई पर्वत पर दुनिया के सबसे बड़े टेलीस्कोप बनाने की योजना से जुड़े वैज्ञानिकों ने कहा कि “वैश्विक महामारी और सर्दी जैसे कारणों के कम से कम अगले वर्ष तक यह निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाएगा।

थर्टी मीटर टेलीस्कोप (टीएमटी) के बारे में

  • थर्टी मीटर टेलीस्कोप (30 मीटर व्यास) ऑप्टिकल दूरबीन यानी टीएमटी नासा द्वारा अंतरिक्ष में स्थापित की गई दूरबीन हब्बल से 12 गुना अधिक स्पष्ट चित्र लेने में सक्षम होगी। यह वर्तमान में मौजूद दूरबीनों के मुकाबले तीन गुना अधिक बड़ी होगी। यह दूरबीन अंतरिक्ष की अबूझ पहेलियों का हल खोजने में मददगार साबित होगी।
  • वर्ष 1610 में पहली दूरबीन का निमार्ण हुआ। उसके बाद से अभी तक हजारों छोटी बड़ी दूरबीनों का निर्माण अनवरत जारी है। ऑप्टिकल दूरबीन में दस मीटर व्यास तक दूरबीन स्थापित की जा चुकी हैं।
  • अब जरूरत के मुताबिक तीस मीटर व्यास की दूरबीन स्थापित करने का कार्य हवाई द्वीप में चल रहा है। वैज्ञानिकों के अनुसार यह दूरबीन अत्याधुनिक उपकरणों से लेस होगी। जिसमें एडॉप्टिव व ऑप्टिकल उपकरण लगाए जाएंगे। इनके अलावा वाइल्ड फील्ड स्पेक्ट्रोमीटर व इंफ्रारेड इमेजिंग स्पेक्ट्रोमीटर अत्याधुनिक उपकरण स्थापित किए जाने हैं। इन उपकरणों से अंतरिक्ष के अथाह सागर की थाह पाना आसान हो जाएगा।
  • इस परियोजना में दुनिया के पांच देश क्रमश: भारत, अमेरिका, कनाडा, जापान व चायना शामिल हैं। इस परियोजना में भारत की दस फीसदी की भागीदारी है।

ब्यूबोनिक प्लेग

चर्चा में क्यों?

  • चीन में फैली नई बीमारी ब्यूबोनिक प्लेग से एक और मौत का मामला सामने आया है। चीन के पश्चिमी मंगोलिया में एक 15 साल के लड़के की ब्यूबोनिक प्लेग के कारण मौत हो गई।
  • चीन के स्वास्थ्य मंत्रालय ने घोषणा की कि एक संक्रमित मरमैट(Marmot) जानवर का मांस खाने के कारण इस लड़के की मौत हुई है। चीनी स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता नारंगेरेल दोर्ज(Narangerel Dorj) ने बताया कि दो अन्य लड़कों ने भी संक्रमित मरमैट(Marmot) जानवर का मांस खाया है। फिलहाल इन दोनों लड़कों का इलाज किया जा रहा है।
  • प्लेग मरमैट((Marmot) , बड़े रोडेंट्स(large rodents) में पाया जाता हैं जो उत्तरी एशियाई घास के मैदान में रहते हैं। इसके अलावा ये कुछ अन्य जंगली जानवरों में भी पाया जाता है, जो मंगोलिया, उत्तर-पश्चिमी चीन और पूर्वी रूस के इलाके में रहते हैं। मंगोलिया की सरकार ने जनता को ब्यूबोनिक प्लेग को लेकर चेतावनी दी है और उनसे कहा है कि मरमैट(Marmot) जानवर का शिकार न करें या इसे ना खाएं।

क्या है ब्यूबोनिक प्लेग?

  • घातक बीमारी ब्यूबोनिक प्लेग(bubonic plague) को मध्य काल में ब्लैक डेथ (Black Death) के रूप में जाना जाता था।
  • बुबोनिक प्लेग बैक्टीरिया यर्सिनिया पेस्टिस के कारण होता है। यर्सिनिया पेस्टिस बैक्टीरिया, आमतौर पर छोटे स्तनधारियों और उनके पिस्सू में पाए जाने वाले एक जूनोटिक जीवाणु होते हैं।
  • इस रोग में मरीजों को बुखार, सिरदर्द, ठंड लगना, कमजोरी, सूजन, लिम्फ नोड्स (जिन्हें बुबोस कहा जाता है) की अचानक शुरुआत होती है। यह रूप आमतौर पर एक संक्रमित पिस्सू के काटने से होता है । बैक्टीरिया लिम्फ नोड को बढ़ा देते हैं जहां से और अधिक बैक्टीरिया मानव शरीर में प्रवेश करते हैं। यदि रोगी को उचित एंटीबायोटिक दवाओं के साथ इलाज नहीं किया जाता है, तो बैक्टीरिया शरीर के अन्य भागों में फैल सकता है।
  • इस रोग के लक्षणों में लिम्फ नोड्स में सूजन शामिल हैं एवं इसका प्रभाव कमर, बगल या गर्दन में दिखता है ।
  • बुखार, ठंड लगना, सिरदर्द, थकान और मांसपेशियों में दर्द इसके अन्य लक्षण है।
  • बुबोनिक प्लेग की स्थिति में हैवी डोज के एंटीबायोटिक दवाओं के साथ तत्काल अस्पताल उपचार की आवश्यकता होती है।

राष्ट्रीय बायोफार्मा मिशन और कोविड -19 वैक्सीन जाइकोव –डी

चर्चा में क्यों?

  • जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद (बीआईआरएसी) द्वारा लागू किये गए राष्ट्रीय बायोफार्मा मिशन के तहत भारत सरकार के जैव प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा समर्थित एवं जाइडस द्वारा डिजाइन और विकसित प्लास्मिड डीएनए वैक्सीन जाइकोव – डी के नैदानिक परीक्षणों की शुरुआत हो गयी है। यह कार्यक्रम भारत सरकार के जैव प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा आंशिक रूप से वित्त पोषित है। यह कोविड - 19 के लिए पहला स्वदेशी रूप से विकसित वैक्सीन है, जिसके स्वस्थ मनुष्यों पर परीक्षण चरण की शुरुआत हो गयी है।
  • अनुकूलन चरण I / II के तहत खुराक वृद्धि के साथ बहु-केंद्रित अध्ययन वैक्सीन की सुरक्षा, सहनीयता और प्रतिरक्षा क्षमता का आकलन करेगा। फरवरी 2020 में कोविड - 19 के लिए त्वरित वैक्सीन विकास कार्यक्रम के शुभारंभ के बाद से वैक्सीन का मानव पर परीक्षण चरण की शुरुआत एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

जाइकोव –डी के बारे में

  • पूर्व-नैदानिक (प्री-क्लिनिक) चरण में, यह पाया गया कि वैक्सीन से चूहों, सूअरों और खरगोशों जैसे कई जानवरों की प्रजातियों में मजबूत प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया हुई है। वैक्सीन द्वारा उत्पादित एंटीबॉडी वायरस को बेअसर करने में सक्षम थे, जो वैक्सीन की सुरक्षात्मक क्षमता को दर्शाता है। दोबारा खुराक देने के बाद भी वैक्सीन के लिए कोई सुरक्षा चिंता नहीं देखी गयी। खरगोशों में, मानव के लिए अपेक्षित खुराक से तीन गुना तक सुरक्षित, सहनीय और प्रतिरक्षा को बेहतर बनाने वाला पाया गया।
  • जाइकोव –डी के साथ, कंपनी ने देश में डीएनए वैक्सीन प्लेटफ़ॉर्म को सफलतापूर्वक स्थापित किया है। इसके लिए गैर-प्रतिकृति और गैर-एकीकृत प्लास्मिड का उपयोग किया गया है जिसे बहुत सुरक्षित माना जाता है। इसके अलावा, वेक्टर प्रतिक्रिया और संक्रामक एजेंट की अनुपस्थिति में, यह प्लेटफॉर्म न्यूनतम जैव सुरक्षा आवश्यकताओं (बीएसएल -1) के साथ वैक्सीन के निर्माण को आसान बनाता है। इस प्लेटफ़ॉर्म में वैक्सीन स्थिरता बेहतर होती है और इसकी कोल्ड चेन आवश्यकता भी कम होती है जिससे देश के दूरस्थ क्षेत्रों में इसका परिवहन आसान हो जाता है। इसके अलावा, इस प्लेटफॉर्म में कुछ हफ़्ते के अन्दर वैक्सीन को संशोधित किया जा सकता है, यदि वायरस रूपांतरित होता है। वैक्सीन ऐसी स्थिति में भी सुरक्षा प्रदान कर सकता है।

डीबीटी के राष्ट्रीय बायोफार्मा मिशन के बारे में :

  • भारत सरकार के जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) के उद्योग- शिक्षा जगत सहयोग मिशन के तहत जैव औषधि (बायोफार्मास्यूटिकल) के त्वरित अनुसंधान पर विशेष जोर दिया जाता है। मंत्रिमंडल द्वारा अनुमोदित इस मिशन की कुल लागत 250 मिलियन डॉलर है और इसे विश्व बैंक द्वारा 50% वित्त पोषित किया जा रहा है। इस मिशन को जैव प्रौद्योगिकी अनुसंधान सहायता परिषद (बीआईआरएसी) द्वारा लागू किया गया है। यह कार्यक्रम भारत में स्वास्थ्य मानकों में सुधार करने के उद्देश्य से राष्ट्र के लिए किफायती उत्पाद विकसित करने के लिए समर्पित है। वैक्सीन, चिकित्सा उपकरण, नैदानिक और जैव रोग चिकित्सा इसके सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं।

जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद (बीआईआरएसी) के बारे में :

  • जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद (बीआईआरएसी), भारत सरकार के जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) द्वारा धारा 8, अनुसूची बी के अंतर्गत स्थापित एक सार्वजनिक क्षेत्र का उद्यम (लाभ के लिए नहीं ) है। यह जैव प्रौद्योगिकी उद्यमों के लिए एक सुविधा व समन्वय प्रदान करनेवाली एजेंसी के रूप में कार्य करता है ताकि उभरते हुए जैव प्रौद्योगिकी उद्यमों में रणनीतिक अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा दिया जा सके तथा राष्ट्रीय स्तर पर प्रासंगिक उत्पाद विकास आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके।

जाइडस के बारे में

  • जाइडस कैडिला एक नवोन्मेषी, वैश्विक दवा कंपनी है, जो सूक्ष्म अणु-औषधियों, जैविक- उपचार और वैक्सीन सहित स्वास्थ्य उपचारों की एक विस्तृत श्रृंखला का अनुसन्धान, विकास, निर्माण और विपणन करती है।

UAE का मंगल मिशन

चर्चा में क्यों?

  • संयुक्त अरब अमीरात ने 20 जुलाई से 22 जुलाई के बीच मंगल ग्रह के लिए अपने 'होप मार्स मिशन' की शुरूआत के लिए काम फिर से शुरू कर दिया है। जापान के तनेगाशिमा स्पेस सेंटर से यूएई के होप प्रोब का प्रक्षेपण अनिश्चित मौसम के कारण दो बार प्रभावित हुआ है। इससे पहले 15 जुलाई को लॉन्च किया जाना था लेकिन खराब मौसम की वजह से इसे 17 जुलाई के लिए टाल दिया गया और अब एक नई तारीख दी गई है। UAE अगर यह लॉन्च सफलतापूर्व कर लेता है तो दूसरे ग्रह पर मिशन भेजने वाला पहला अरब देश होगा।

'होप मार्स मिशन' और प्रोब 'अल-अमल' के बारे में

  • यूएई के मंगलयान का नाम 'अमल' या उम्मीद है, जिसे जापान के एच-2ए रॉकेट के जरिए दक्षिणी जापान के तनेगाशिमा अंतरिक्ष केंद्र से रवाना किया जाना था।यह संयुक्त अरब अमीरात के महत्वाकांक्षी अंतरिक्ष कार्यक्रम का अगला चरण होगा। मिशन का उद्देश्य है मंगल ग्रह के वातावरण के मौसम के रहस्यों को सुलझाना।
  • यूएई के मानवरहित प्रोब का नाम 'अल-अमल' है। ये अरबी शब्द है, इसका मतलब होता है 'उम्मीद'। 'अल-अमल' को पृथ्वी से मंगल तक की 49.3 करोड़ किलोमीटर की दूरी तय करने में सात महीने लग जाएंगे। अधिकारियों का कहना है कि 'अल-अमल' की रूप-रेखा ही इस उद्देश्य से बनाई गई है कि इससे इलाके के युवा प्रेरित हों और वैज्ञानिक दृष्टि से महत्वपूर्ण खोजों का मार्ग प्रशस्त हो।
  • कक्षा में पहुंच जाने के बाद, 1,21,000 किलोमीटर प्रति घंटे की औसत रफ्तार से प्रोब को एक चक्कर लगाने में 55 घंटे लगेंगे। यूएई कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से संपर्क सप्ताह में दो बार छह से आठ घंटों के लिए सीमित रहेगा। प्रोब कक्षा में मंगल ग्रह के पूरे एक साल की अवधि के बराबर तक रहेगा। 'अल-अमल' का प्रक्षेपण इस कार्यक्रम का अगला मील का पत्थर है।
  • प्रोब पर लगे तीन उपकरण मंगल के वातावरण की पूरी तस्वीर देंगे। पहला एक इंफ्रारेड स्पेक्ट्रोमीटर है वातावरण के निचले भाग को मापने और तापमान की संरचना का विश्लेषण करने के लिए, दूसरा हाई रेजॉल्यूशन इमेजर है जो वहां मौजूद ओजोन के स्तर की जानकारी देगा। तीसरा एक अल्ट्रावॉयलेट स्पेक्ट्रोमीटर है जो सतह से 43,000 किलोमीटर की दूरी से ऑक्सीजन और हाइड्रोजन के स्तर को मापेगा।

क्रिप्टोकरंसी बिटकॉइन

चर्चा में क्यों?

  • क्रिप्टोकरंसी स्कैम के उद्देश्य से अमेरिका के कई हाई प्रोफाइल ट्विटर अकाउंट हैक कर लिए गए। इसमें अमेरिकी नेता जो बिडन, टेसला के सीईओ एलन मस्क, माइक्रोसॉफ्ट के सहसंस्थापक बिल गेट्स और एपल के कई और अहम अकाउंट शामिल हैं। ट्विटर हैंडल हैक करने के बाद इसपर एक खास तरह के मेसेज पोस्ट किए गए। पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा का भी ट्विटर हैंडल हैक कर लिया गया।

क्रिप्टोकरेंसी क्या हैं?

  • क्रिप्टो करेंसी एक ऐसी मुद्रा है जो कंप्यूटर एल्गोरिथ्म पर बनी होती है। यह एक स्वतंत्र मुद्रा है जिसका कोई मालिक नहीं होता। यह करेंसी किसी भी एक अथॉरिटी के काबू में भी नहीं होती। अमूमन रुपया, डॉलर, यूरो या अन्य मुद्राओं की तरह ही इस मुद्रा का संचालन किसी राज्य, देश, संस्था या सरकार द्वारा नहीं किया जाता। यह एक डिजिटल करेंसी होती है जिसके लिए क्रिप्टोग्राफी का प्रयोग किया जाता है। आमतौर पर इसका प्रयोग किसी सामान की खरीदारी या कोई सर्विस खरीदने के लिए किया जा सकता है।
  • आपको पता होना चाहिए कि सर्वप्रथम क्रिप्टो करेंसी की शुरुआत 2009 में हुई थी जो “बिटकॉइन” थी। इसको जापान के सतोषी नाकमोतो नाम के एक इंजीनियर ने बनाया था। प्रारम्भ में यह उतनी प्रचलित नहीं थी, किन्तु धीरे-धीरे इसके रेट आसमान छूने लगे, जिससे यह सफल हो गई। देखा जाए तो 2009 से लेकर वर्तमान समय तक लगभग 1000 प्रकार की क्रिप्टो करेंसी बाजार में मौजूद हैं, जो पियर टू पियर इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम के रूप में कार्य करती है।

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सेवा 'जियोमीट'

  • वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सेवा 'जियोमीट' ने रिलायंस इंडस्ट्रीज की वार्षिक आमसभा के दौरान 42 देशों के करीब 3.21 लाख लोगों को एक साथ जोड़ने का रिकॉर्ड बनाया है। रिलायंस जियो ने देश में वीडियो कॉन्फ्रेंस सेवा की बढ़ती मांग को देखते हुए हाल में इसे आम लोगों के लिए उपलब्ध कराया है।

'जियोमीट' के बारे में

  • 'जियोमीट' वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग एप है एवं इस रिलायंसद्वारा बनाया गया है। जियोमीट को पूरी तरह से भारत में ही बनाया गया है और खासतौर पर भारतीयों की जरूरतों का इसमें ख्याल रखा गया है।' जियोमीट पर एक बार में 100 से अधिक उपयोक्ता वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए जुड़ सकते हैं।

:: पर्यावरण और पारिस्थितिकी ::

एनटीपीसी पर 10 करोड़ रू का जुर्माना

चर्चा में क्यों?

  • राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने सिंगरौली में एनटीपीसी विंध्याचल सुपर थर्मल पावर स्टेशन को उसके फ्लाई ऐश डाइक (राख के लिये बनाया गया बांध) में दरार से गोविंद वल्लभ पंत सागर “रिहंद जलाशय” में राख गिरने से हुए नुकसान पर अंतरिम मुआवजे के तौर पर 10 करोड़ रुपये देने के निर्देश दिये हैं।
  • एनजीटी ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि फ्लाई ऐश (थर्मल पावर प्लांट से निकलने वाली राख) का निस्तारण पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के प्रावधानों के तहत वन एवं पर्यावरण मंत्रालय द्वारा सांविधिक तौर पर अधिसूचित तरीके से हो, जिसमें 100 प्रतिशत उपयोग की आवश्यकता है।
  • एनजीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल ने कहा कि खदानों में राख का निस्तारण और परित्यक्त खानों में राख को पुन: भरने का काम सीपीसीबी के दिशानिर्देश के मुताबिक किया जा सकता है या धनबाद स्थित भारतीय खान ब्यूरो से भी इस विषय पर परामर्श लिया जा सकता है।

पृष्ठभूमि

  • अधिवक्ता अश्विनी कुमार दुबे की याचिका पर अधिकरण ने यह निर्देश दिये। दुबे ने याचिका में 6 अक्टूबर 2019 को हुई उस घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि एनटीपीसी विद्युत परियोजना के “लापरवाही भरे कृत्य” के कारण राख के बांध में दरार आई जिससे 35 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा फ्लाई ऐश गोविंद वल्लभ पंत सागर “रिहंद जलाशय” में गिरी।

रिलायंस इंडस्ट्रीज का 2035 तक 'शून्य कार्बन उत्सर्जन' कंपनी बनने का लक्ष्य

  • विश्व की सबसे बड़ी पेट्रोलियम रिफाइनरी चलाने वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज ने 2035 तक खुद को 'शून्य कार्बन उत्सर्जन' कंपनी बनाने का लक्ष्य रखा है।

रिलायंस इंडस्ट्रीज 'शून्य कार्बन उत्सर्जन' की दिशा में कदम

  • इस लक्ष्य को पाने के लिए कंपनी परिवहनों में इस समय इस्तेमाल होने वाले ईंधन की जगह स्वच्छ बिजली और हाइड्रोजन के इस्तेमाल को प्रोत्साहित करेगी।
  • तेल-दूरसंचार-खुदरा क्षेत्र में काम करने वाला रिलायंस समूह उत्सर्जित होने वाले कार्बन डाई ऑक्साइड को मूल्यवान रसायन और अन्य सामग्री को ईंटों में बदलने की प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल करेगी।
  • रिलायंस कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की उपयोक्ता बनी रहेगी, लेकिन वह नयी प्रौद्योगिकियों को लाकर उत्सर्जित होने वाले कार्बन डाई ऑक्साइड को उपयोगी उत्पाद और रसायनों में बदलने का काम करेगी।
  • कंपनी स्वच्छ और सस्ती ऊर्जा के लिए हाइड्रोजन, पवन, सौर ऊर्जा और बैटरी इत्यादि के उपयुक्त सम्मिश्रण की रणनीति अपनाएगी।
  • आम रिफाइनरी में कच्चे तेल से पेट्रोल, डीजल और विमानन ईंधन बनाने के बाद 60 से 70 प्रतिशत गाद बचती है। जैसे-जैसे रिफाइनरी का आकार और पूंजी बढ़ती है, वे नई प्रौद्योगिकी पर निवेश करते हैं, जैसे पेटकोक को गैस में बदलने इत्यादि पर। इससे गाद जैसे कम मूल्य वाले कई उत्पादों को उच्च मूल्य वाले उत्पादों में बदला जा सकता है।
  • वैश्विक स्तर पर आम रिफाइनरी करीब आठ प्रतिशत नाफ्था का उत्पादन करती हैं जिसका उपयोग रसायनिक खाद बनाने में किया जा सकता है। रिलायंस का तेल से रसायन बनाने की दर अभी 24 प्रतिशत है और कंपनी इसे बढ़ाकर 70 प्रतिशत करने का लक्ष्य लेकर चल रही है।
  • जामनगर रिफाइनरी में कार्बन डाई ऑक्साइड को उच्च मूल्य वाले प्रोटीन, औषधीय पदार्थों, आधुनिक सामग्रियों और ईंधन में बदलने के लिए फोटोसिंथेसिस बायोलॉजिकल प्रणाली बनाने की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति पहले ही की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि कंपनी कार्बन संग्रह और भंडारण करने वाली अगली पीढ़ी की प्रौद्योगिकी विकसित करेगी।

:: विविध ::

'इंडिया आइडियाज समिट'

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 22 जुलाई को अमेरिका-भारत कारोबार परिषद (यूएसआईबीसी) द्वारा आयोजित 'इंडिया आइडियाज समिट' को संबोधित करेंगे। इस शिखर सम्मेलन में दुनियाभर के लोगों की नजर होगी। अमेरिका और भारत की मुख्य भागीदारी वाला यह दो दिनों का शिखर सम्मेलन है, जिसे डिजिटल माध्यम से आयोजित किया जा रहा है। इसका आयोजन 21-22 जुलाई को होगा।
  • इस शिखर सम्मेलन में भारत सरकार और अमेरिका की सरकार के वे शीर्ष अधिकारी एक साथ आयेंगे, जो महामारी के बाद उबरने की रूपरेखा पर काम कर रहे हैं।

अशोक लवासा

  • चुनाव आयुक्त अशोक लवासा को एशियाई विकास बैंक (ADB) ने उपाध्यक्ष बनाने की घोषणा की। बैंक का मुख्यालय मनीला में है। चुनाव आयोग में लवासा का कार्यकाल अक्टूबर 2022 तक है।
  • फिलीपींस स्थित ADB ने एक बयान जारी कर कहा है, 'ADB ने अशोक लवासा को निजी क्षेत्र और सार्वजनिक- निजी भागीदारी के कारोबार के लिये उपाध्यक्ष नियुक्त किया है। वह दिवाकर गुप्ता का स्थान लेंगे जो कि 31 अगस्त को सेवानिवृत हो रहे हैं।

:: प्रिलिम्स बूस्टर ::

  • हाल में मानव संसाधन विकास मंत्रालय के द्वारा आंध्र प्रदेश के 1200 शिक्षाकर्मियों के शैक्षणिक कौशल उन्नयन हेतु हेतु समग्र शिक्षा अभियान के तहत किस ऑनलाइन कार्यक्रम की शुरुआत की है? (निष्ठा National Initiative for School Heads' and Teachers' Holistic Advancement)
  • हाल ही में राष्ट्रीय बायोफार्मा मिशन के तहत कोविड - 19 के लिए किस प्रथम स्वदेशी वैक्सीन के ह्यूमन ट्रायल की शुरुआत की गई है? (जाइकोव – डी )
  • हाल ही में जो बिडन, एलन मस्क और बिल गेट्स इत्यादि के ट्विटर अकाउंट हैक करने से चर्चा में रहे बिटकॉइन क्या है इसकी खोज किसने की थी? (एक वर्चुअल मुद्रा, सातोशी नकामोतो)
  • हाल ही में निर्माण कार्य जारी होने से चर्चा में रहे 'दियामेर भाषा' बांध का निर्माण कहां और किस नदी पर किया जा रहा है? (POK गिलगिट-बाल्टिस्‍तान, सिंधु नदी पर)
  • कोविड-19 के कारण निर्माण कार्य में देरी से चर्चा में रहे दुनिया के सबसे बड़े ऑप्टिकल टेलीस्कोप का नाम क्या है और यह कहां प्रस्तावित है? (थर्टी मीटर टेलीस्कोप-TMT, हवाई द्वीप समूह के मौना द्वीप)
  • खराब मौसम के कारण परियोजना में विलंब से चर्चा में रहे विलंब से चर्चा में रहे 'अल-अमल' मानवरहित प्रोब किस देश की परियोजना है एवं इसे किस ग्रह/ उपग्रह पर भेजा जाएगा? (संयुक्त अरब अमीरात,मंगल)
  • हाल ही में ब्लैक डेथ के नाम से मशहूर किस बीमारी से मंगोलिया में संक्रमण के मामले सामने आए हैं एवं इस रोग का वाहक कौन होते हैं? (बुबोनिक प्लेग, बैक्टीरिया यर्सिनिया पेस्टिस)
  • हाल ही में किस भारतीय व्यक्ति को निजी क्षेत्र और सार्वजनिक- निजी भागीदारी के कारोबार हेतु एशियाई विकास बैंक (ADB) का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है? (अशोक लवासा)
  • हाल ही में भारत के किस निजी कंपनी द्वारा 2035 तक खुद को 'शून्य कार्बन उत्सर्जन' कंपनी बनाने का लक्ष्य रखा है? (रिलायंस इंडस्ट्रीज)
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 22 जुलाई को संबोधन किए जाने से चर्चा में रहे 'इंडिया आइडियाज समिट' का आयोजन किसके द्वारा किया जा रहा है? (अमेरिका-भारत कारोबार परिषद-यूएसआईबीसी)
  • लगातार तीसरे महीने निवेश में बढ़त दर्ज करने से चर्चा में रहे पार्टिसिपेटरी नोट्स (पी-नोट्स) किसे जारी किए जाते हैं? (ऐसे निवेशक जो बिना पंजीकृत हुए भारत में निवेश करते हैं)
  • एनटीपीसी के साथ समझौता से चर्चा में रहे नेशनल इनवेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर फंड-NIIF को कब एवं किस उद्देश्य से स्थापित किया गया था? (2015, अवसंरचना विकास के लिए दीर्घकालिक ऋण हेतु)
  • हाल ही में किस कंपनी ने अपने किस ऐप के माध्यम से 42 देशों के करीब 3.21 लाख लोगों को एक साथ जोड़ने का रिकॉर्ड बनाया? (रिलायंस इंडस्ट्रीज,जियोमीट)

स्रोत साभार: Dainik Jagran (Rashtriya Sanskaran), Dainik Bhaskar (Rashtriya Sanskaran), Rashtriya Sahara (Rashtriya Sanskaran) Hindustan Dainik (Delhi), Nai Duniya, Hindustan Times, The Hindu, BBC Portal, The Economic Times (Hindi & English), PTI, PIB