(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (17 अप्रैल 2020)

दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर


(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (17 अप्रैल 2020)


:: राष्ट्रीय समाचार ::

डिजिटल कुशलता में भारत सबसे अव्वल: गार्टनर 2019 डिजिटल वर्कप्लेस सर्वे

  • डिजिटल कामकाज को लेकर भारत दुनियाभर में सबसे कुशल देश है, जबकि ब्रिटेन और अमेरिका दूसरे-तीसरे स्थान पर हैं। गार्टनर इंक के बृहस्पतिवार को जारी सर्वे में बताया गया कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने वाले 67 फीसदी कर्मचारियों ने मशीन लर्निंग, एआई और इंटरनेट ऑफ थिंग्स जैसी नई तकनीक को अपने कामकाज के लिए बेहतर बताया है।
  • गार्टनर 2019 डिजिटल वर्कप्लेस सर्वे के अनुसार, अधिकांश भारतीय कर्मचारी डिजिटल क्षेत्र की नई तकनीकों को सीखने में रुचि दिखा रहे हैं। वरिष्ठ शोध विश्लेषक रश्मि चौधरी ने बताया कि 27 फीसदी से ज्यादा कर्मचारी डिजिटली रूप से पूरी तरह दक्ष हो चुके हैं और 10 में से 7 कर्मचारी नई तकनीकों को उच्च वेतन और बेहतर अवसर के रूप में देखते हैं।
  • तकनीकी पेशेवरों का मानना है कि मैन्युअल या सेमी स्किल्ड कर्मचारियों के बजाए डिजिटल तकनीक में दक्ष लोगों की मांग ज्यादा है। कर्मचारियों द्वारा रियल टाइम सहयोग के लिए टूल इस्तेमाल करने के मामले में सिंगापुर और भारत काफी आगे हैं, जबकि चीन, फ्रांस, जर्मनी, अमेरिका और ब्रिटेन मे इसका विकास सुस्त है।
  • रिपोर्ट बताती है कि 45 फीसदी भारतीय कर्मचारियों को इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि डिजिटल तकनीक उनके कामकाज की आदतों की निगरानी करती है।

राष्ट्रीय खरीफ सम्मेलन -2020

  • मानसून की अच्छी बारिश के मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मद्देनजर फसल वर्ष 2020-21 में 29.83 करोड़ टन खाद्यान्न के रिकॉर्ड उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। राजधानी दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय खरीफ सम्मेलन-2020 के दौरान इसकी घोषणा की गई। सम्मेलन के दौरान खाद्यान्न की पैदावार व उत्पादकता बढ़ाकर खाद्य सुरक्षा के साथ पोषक सुरक्षा पर बल दिया गया। केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने सम्मेलन का उद्घाटन करने के बाद कहा, ‘किसानों की आमदनी को दोगुना करने के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए इसे मिशन मोड में लिया जाना चाहिए।’

सम्मेलन के मुख्य बिंदु

  • सम्मेलन के दौरान कृषि मंत्रलय की ओर से आगामी फसल वर्ष की तस्वीर पेश की। इसके मुताबिक फसल वर्ष 2020-21 के दौरान फसल उत्पादन का लक्ष्य 29.83 करोड़ टन निर्धारित किया गया है। इसमें आगामी खरीफ सीजन में 14.99 करोड़ टन और रबी सीजन में 14.84 करोड़ टन खाद्यान्न की पैदावार का लक्ष्य तय किया गया है, जबकि वर्ष 2019-20 में 29.10 करोड़ टन पैदावार हुई।
  • खाद्यान्न के साथ बागवानी फसलों की खेती पर सरकार का जोर है, जिस पर कई राज्यों की अर्थव्यवस्था आधारित है। कृषि सचिव संजय अग्रवाल ने खाद्य सुरक्षा के साथ पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने पर भी बल दिया। आगामी खरीफ सीजन में दलहन व तिलहन की खेती का विस्तार करने और उत्पादन बढ़ाने की बात कही गई।
  • खाद्य तेलों के मामले में देश आत्मनिर्भर नहीं है। घरेलू जरूरतों के 60 फीसद से अधिक खाद्य तेलों का आयात किया जाता है। इसका उत्पादन बढ़ाने पर सरकार का पूरा जोर है। सभी राज्यों से इस पर अमल करने को कहा गया।
  • खरीफ फसलों की तैयारियों को लेकर चर्चा में सभी राज्यों से उनकी आवश्यकताओं के बारे में विस्तार से जानकारी मांगी गई। उन्नत बीज, फर्टिलाइजर, कीटनाशक और सिंचाई से जुड़ी जरूरतों के बारे में उनकी राय मांगी गई। मानसून के समय पर आने और सामान्य बरसात होने के अनुमान के मद्देनजर खरीफ की तैयारियों को अंजाम देने की अपील की गई।

देश की सात आईआईटी करेंगी टाइम्स हायर एजुकेशन की रैंकिंग का बहिष्कार

  • देश की सात प्रमुख आईआईटी ने टाइम्स हायर एजुकेशन वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग का बहिष्कार करने का निर्णय लिया है। इन आईआईटी संस्थानों का कहना है कि वो टाइम्स हायर एजुकेशन की रैंकिंग प्रक्रिया की पारदर्शिता से संतुष्ट नहीं हैं। इन संस्थानों ने संयुक्त बयान जारी कर कहा है कि वे इस साल की रैंकिंग में भाग नहीं लेंगे।
  • इन आईआईटी संस्थानों का कहना है कि अगर टाइम्स हायर एजुकेशन अपनी रैंकिंग प्रक्रिया में मापदंडों और पारदर्शिता के बारे में इन संस्थानों को सही से समझा पाता है, तो वे अपने फैसले पर अगले साल के लिए पुनर्विचार करेंगे।
  • टाइम्स हायर एजुकेशन का बहिष्कार करने वाले आईआईटी संस्थानों में आईआईटी बॉम्बे, आईआईटी दिल्ली, आईआईटी गुवाहाटी, आईआईटी कानपुर, आईआईटी खड़गपुर, आईआईटी मद्रास और आईआईटी रुड़की शामिल हैं।

पृष्ठभूमि

  • टाइम्स हायर एजुकेशन दुनियाभर के प्रमुख उच्च शिक्षण संस्थानों की रैंकिंग करता है। टीएचई की पिछले साल की रैंकिंग में भारत के किसी भी यूनिवर्सिटी को दुनिया के शीर्ष 300 विश्वविद्यालयों में शामिल नहीं किया गया था।

अंडमान निकोबार में कोरोना के प्रकोप से दूर लुप्तप्राय जनजातियों

  • अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के लिए गुरुवार को एक अच्छी खबर आई। वहां कोरोना वायरस के कुल 11 जो मरीज थे वे सभी के सभी ठीक हो गए। इसके साथ अंडमान और निकोबार के लिए राहत वाली बात यह रही कि लुप्तप्राय जनजातियों को इससे संक्रमण से बचाने के लिए उठाए गए कदम काम कर गए और उन्हें भी कोई नुकसान नहीं पहुंचा। कोरोना वायरस की वजह से पहली बार ऐसा हुआ कि अंडमान द्वीप समूह को दुनिया से काट दिया गया। ऐसे कठोर कदम 2004 में सूनामी के दौरान भी नहीं उठाए गए थे।
  • अंडमान तक कोरोना उन 9 लोगों की वजह से पहुंचा था जो दिल्ली मरकज में शामिल हुए थे। शुरुआती 10 मरीजों में से 9 मरकज के थे। 10वां केस मरकज में शामिल शख्स की पत्नी का था।

कौन सी जनजातियों का है वास ?

  • अंडमान और निकोबार में छह जनजातियां रहती हैं। इसमें ग्रेट अंडमानी, जारवा, ओन्गे, शोमेन, निकोबारी शामिल है। इनके अलावा सेंटीनल प्रजाति भी है, लेकिन वह बाहर की दुनिया से संपर्क नहीं रखती। जारवा जनजाति के लोग पूरी दुनिया में सिर्फ अंडमान में ही बचे हैं। वहीं सेंटीनल को एकांत इतना भाता है कि उनकी तरफ गए एक अमेरिकी टूरिस्ट को उन्होंने साल 2018 में तीर से मार गिराया था।

क्यों चिंता की है बात?

  • अंडमान और निकोबार में मिलनेवाली जनजातियों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम बताई जाती है। ऐसे में कोरोना का संक्रमण करीब उनके लिए घातक हो सकता है। ऐसा पहले खसरे का रोग कर चुका है, जिसने वहां रहनेवाले ग्रेट अंडमानीज की ज्यादातर जनसंख्या को खत्म कर दिया था। बताया जाता है कि सभी जनजातियों के मिलाकर वहां 1000 लोग होंगे।

जूम एप के लिए गृह मंत्रालय के साइबर को-ओरडिनेशन सेंटर (CyCord) की एडवाइजरी

  • देश में लॉकडाउन लागू होने के बाद सरकारी व निजी सेक्टर में वचरुअल बैठक व विचार विमर्श के लिए जिस तरह धड़ल्ले से जूम एप का इस्तेमाल हो रहा है उससे जुड़ी सुरक्षा को लेकर अब सरकार भी चौंकन्नी हो गई है। गृह मंत्रलय ने गुरुवार को इस एप का इस्तेमाल करने वालों को ज्यादा सतर्क रहने को कहा है। गृह मंत्रलय ने साफ तौर पर कहा है कि यह एप सुरक्षित नहीं है। सरकारी विभागों को तो कहा गया है कि वे आधिकारिक कार्यो में इसका इस्तेमाल न करें। निजी तौर पर इस्तेमाल करने वालों को भी आगाह किया गया है कि वह ऐहतियात बरतें।
  • गृह मंत्रालय के साइबर को-ओरडिनेशन सेंटर (CyCord) द्वारा ताजा एडवाइजरी जारी की गई है। इसमें कहा गया है कि अगर लोग इसका इस्तेमाल कर रहे हैं तो सतर्कता बरतें।

CyCord की गाइडलाइन -

  • हर मीटिंग के लिए नया यूजर आईडी और पासवर्ड सेट करें।
  • 'वेटिंग रूम' फीचर ऑन करें। इससे मीटिंग में लोग तभी आ पाएंगे, जब होस्ट अनुमति देगा।
  • 'ज्वॉइन बिफोर होस्ट' फीचर ऑफ कर दें। ऐसा करने से कोई भी यूजर होस्ट से पहले मीटिंग में नहीं आ पाएगा।
  • स्क्रीन शेयरिंग बाय होस्ट ऑनली फीचर ऑन रखें।
  • अलो रिमूव्ड पार्टिसिपेंट्स टू री-ज्वॉइन फीचर को बंद कर दें।
  • अगर जरूरत न हो, तो फाइल ट्रांसफर का ऑप्शन बंद कर दें।
  • एक बार सभी लोग मीटिंग में आ जाएं, तो मीटिंग को लॉक कर दें।
  • रिकॉर्डिंग फीचर ऑफ रखें।
  • अगर आप एडमिनिस्ट्रेटर हैं, तो मीटिंग को सिर्फ छोड़े नहीं, उसे बंद करें।

पृष्ठभूमि

  • अमेरिका की जांच एजेंसी एफबीआइ ने अपने नागरिकों को इसके इस्तेमाल को लेकर सतर्क किया है कि किस तरह से उनकी सूचनाओं को चुराया जा सकता है। इसकी प्राइवेसी नीति एक पक्ष है जिसको लेकर ज्यादा चिंता जताई जाती है।
  • पूर्व में इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम (सीईआरटी-इन) ने केंद्र सरकार व राज्यों को आगाह किया था कि जूम सुरक्षित नहीं है।
  • ताइवान, जर्मनी ने जहां इस जूम एप पर पाबंदी लगाई है वहीं गूगल ने इसी महीने की शुरुआत में कारपोरेट लैपटॉप से इसका डेस्कटाप वर्जन हटा दिया था।

:: अंतर्राष्ट्रीय समाचार ::

चीन ने किया परमाणु परीक्षण

  • अमेरिका ने चीन पर गुपचुप तरीके से कम शक्ति वाले परमाणु परीक्षण का आरोप लगाया है। अमेरिका का कहना है कि इस तरह के विस्फोट पर प्रतिबंध के अंतरराष्ट्रीय करार के बावजूद चीन ने ऐसा कदम उठाया है। हालांकि चीन ने किसी भी परीक्षण से इन्कार किया है। पहले ट्रेड वार और अब कोरोना वायरस के कारण अमेरिका और चीन के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई है।

'जीरो यील्ड' मानक का कर रहा उल्‍लंघन

  • अमेरिका के विदेश विभाग का कहना है कि चीन के लोप न्यूर परमाणु परीक्षण केंद्र की गतिविधियों से इस बात की आशंका गहराई है कि चीन 'जीरो यील्ड' मानक का उल्लंघन कर रहा है। जीरो यील्ड के तहत ऐसे परमाणु परीक्षण को अनुमति है, जिसमें कोई एक्स्प्लोसिव चेन रिएक्शन नहीं होता है। रिपोर्ट में परीक्षण का कोई प्रमाण दिए बिना कहा गया है, 'सालभर लोप न्यूर परीक्षण केंद्र के आसपास की गतिविधियां और चीन की ओर से पारदर्शिता की कमी से इस बात की आशंका गहरा गई है कि चीन जीरो यील्ड मानक का उल्लंघन कर रहा है।'

पारदर्शिता को प्रभावित करता रहा है चीन

  • साल 1996 में परमाणु हथियारों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए कंप्रेहेंसिव टेस्ट बैन ट्रिटी (सीटीबीटी) हुई थी। चीन संधि के अनुपालन पर नजर रखने वाले मॉनिटरिंग सेंटर के सेंसर तक पहुंचने वाले डाटा ब्लॉक करने जैसे कदम उठाकर पारदर्शिता को प्रभावित करता रहा है। सीटीबीटी ऑर्गनाइजेशन के प्रवक्ता कहना है कि 2018 में चीन में लगे पांच सेंसर को मिलने वाले डाटा में बाधा आनी शुरू हुई थी। हालांकि अगस्त, 2019 से इस डाटा में कोई बाधा नहीं आई है।

कोरोना संकट के कारन जी-20 देश ने रोकी गरीब देशों से कर्ज वसूली

  • जी-20 देशों ने दुनिया के सबसे गरीब देशों से फिलहाल कर्ज वसूली रोकने का फैसला लिया है। कोरोना वायरस के कहर को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। जी-20 देशों के वित्त मंत्रियों ने बैठक के बाद कहा कि हम गरीब देशों से कर्ज भुगतान को कुछ समय के लिए लंबित करने का समर्थन करते हैं। विश्व बैंक और 20 यूरोपीय व अफ्रीकी देशों ने जी-20 देशों से इस मुद्दे पर संयुक्त अपील की थी।

क्या है जी-20 ?

  • 1999 में जर्मनी के कोलोन में जी-8 देशों की बैठक हुई, इसमें एशिया के आर्थिक संकट पर चर्चा हुई। इसके बाद दुनिया के बीस शक्तिशाली अर्थव्यवस्था वाले देशों को एक मंच पर लाने का फैसला किया गया। दिसंबर 1999 में बर्लिन में पहली बार जी-20 समूह के लिए बैठक हुई।
  • यह एक ऐसा समूह जिसमें 19 देश हैं और 20वां यूरोपीय संघ है। साल में एक बार जी-20 शिखर सम्मेलन होता है, जिसमें राज्यों के सरकार प्रमुखों के साथ उन देशों के केंद्रीय बैंक के गवर्नर भी शामिल होते हैं। सम्मेलन में मुख्य रूप से आर्थिक मामलों पर चर्चा होती है।
  • जी-20 समूह में अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, कनाडा, चीन, यूरोपीय संघ, फ्रांस, जर्मनी, भारत, इंडोनेशिया, इटली, जापान, मैक्सिको, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण कोरिया, तुर्की, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका शामिल हैं। ये सभी सदस्य मिल कर दुनिया की जीडीपी का 85 फीसदी हिस्सा बनाते हैं

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की फंडिंग

  • माहामारी कोविड-19 से दुनिया जूझ रही है। विभिन्न देश अपने तरीके से इससे लड़ रहे हैं और इस बीमारी से लड़ने के लिए देशों को ज्यादा धनराशि की जरूरत है। ऐसे वक्त में उम्मीद की किरण विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) नजर आता है। हालांकि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को डब्ल्यूएचओ की फंडिंग को रोक दिया है।
  • डब्ल्यूएचओ को धनराशि मुहैया कराने वालों में सबसे बड़ा योगदान अमेरिका का रहता है। योगदान कुल फंडिंग का 14.67 फीसद था। इसके बाद डब्ल्यूएचओ के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो सकता है। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि कैसे डब्ल्यूएचओ की फंडिंग कितने तरह से और कैसे की जाती है?

कैसे फंड जुटाता है डब्ल्यूएचओ?

  • डब्ल्यूएचओ के लिए चार तरह की फंडिंग की जाती है, जिसमें मूल्यांकन योगदान, निर्दिष्ट स्वैच्छिक योगदान, कोर स्वैच्छिक योगदान और पीआईपी योगदान शामिल है। डब्ल्यूएचओ की वेबसाइट के अनुसार, मूल्यांकन योगदान में संगठन के सदस्य बकाया राशि का भुगतान करते हैं। प्रत्येक सदस्य देश द्वारा किए जाने वाले भुगतान की गणना देश के धन और जनसंख्या के सापेक्ष की जाती है। स्वैच्छिक योगदान सदस्य देशों (उनके निर्धारित योगदान के अतिरिक्त) या अन्य भागीदारों से आते हैं।
  • वहीं कोर स्वैच्छिक योगदान के तहत कम वित्त पोषित गतिविधियों को संसाधनों के बेहतर प्रवाह से लाभान्वित करने और तत्काल बाधा के समय फंडिंग की जाती है। जबकि पेनडेमिक इंफ्लूएंजा प्रिपेयर्डनेस (पीपीपी) योगदान को 2011 में शुरू किया गया। यह संभावित महामारी में सुधार और विकासशील देशों की वैक्सीन और अन्य महामारी की आपूर्ति में वृद्धि को बढ़ाने के लिए शुरू किया गया था। हाल के वर्षों में, डब्ल्यूएचओ के मूल्यांकन योगदान में गिरावट आई है, और अब इसकी निधि का यह एक-चौथाई से भी कम है।

डब्ल्यूएचओ का वर्तमान फंडिंग पैटर्न :

  • 2019 की चौथी तिमाही के अनुसार, डब्ल्यूएचओ की फंडिंग में कुल योगदान 5.62 बिलियन डॉलर (करीब 432 अरब 17 करोड़ रुपये)के आसपास था, जिसमें मूल्यांकन योगदान 956 मिलियन डॉलर (73 अरब 50 करोड़ रुपये) का था, स्वैच्छिक योगदान 4.38 बिलियन डॉलर(336 अरब 76 करोड़ रुपये), कोर स्वैच्छिक योगदान 160 मिलियन डॉलर (12 अरब 30 करोड़ रुपये) औरा पीआईपी योगदान 178 मिलियन डॉलर (13 अरब 68 करोड़ रुपये) था।

अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं भी योगदानकर्ता :

  • अगले चार सबसे बड़े दानदाता अंतरराष्ट्रीय संस्थाए हैं। इनमें संयुक्त राष्ट्र कार्यालय मानवीय मामलों के समन्वय के लिए (5.09%), विश्व बैंक (3.42%), रोटरी इंटरनेशनल (3.3%) और यूरोपीय आयोग (3.3%) का योगदान शामिल है। वहीं भारत का कुल योगदान में 0.48 फीसद और चीन का 0.21% योगदान है।

इस तरह खर्च होता है धन :

  • कुल धन में से, अफ्रीका क्षेत्र के लिए 1.2 बिलियन डॉलर, पूर्वी भूमध्य क्षेत्र के लिए 1.02 बिलियन डॉलर, डब्ल्यूएचओ मुख्यालय के लिए 963.9 मिलियन डॉलर, इसके बाद दक्षिण पूर्व एशिया (198.7 मिलियन डॉलर), यूरोप ( 200.4 मिलियन डॉलर), पश्चिमी प्रशांत (152.1 मिलियन डॉलर) के लिए आवंटित किया गया है। इसके अतिरिक्त अमेरिका (39.2 मिलियन) क्षेत्र को दिया जाता है। भारत दक्षिण पूर्व एशिया क्षेत्र का हिस्सा है।

पोलियो पर सबसे बड़ा कार्यक्रम :

  • सबसे बड़ा कार्यक्रम क्षेत्र जहां धन आवंटित किया जाता है, वह पोलियो उन्मूलन कार्यक्रम है। जहां पर 26.51 फीसद धनराशि खर्च की जाती है। इसके बाद आवश्यक स्वास्थ्य और पोषण सेवाओं पर 12.04 फीसद और बीमारियों को रोकने के लिए टीकों पर 8.89 फीसद राशि खर्च की जाती है।

अमेरिका का सबसे बड़ा योगदान :

  • वर्तमान में अमेरिका डब्ल्यूएचओ का सबसे बड़ा योगदानकर्ता है, जिसने 553.1 मिलियन डॉलर (42 अरब 52 करोड़ रुपये) प्रदान किए हैं, जो कुल धन का 14.67 फीसद है। इसके बाद बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन ने 9.76 फीसद का योगदान दिया है। यह राशि 367.7 मिलियन डॉलर (28 अरब 26 करोड़) है। तीसरा सबसे बड़ा योगदानकर्ता जीएवीआइ वैक्सीन अलायंस है, जिसने 8.39 फीसद का योगदान किया है। वहीं ब्रिटेन यूके (7.79 फीसद) और जर्मनी (5.68 फीसद) के योगदान के साथ क्रमश: चौथे और पांचवें स्थान पर हैं।

दक्षिण कोरिया में सत्तारूढ़ डेमोक्रेटिक पार्टी ने जीता चुनाव

  • कोरोना महामारी के बीच दक्षिण कोरिया में कराए गए संसदीय चुनाव में सत्तारूढ़ दल ने शानदार जीत दर्ज की है। इस चुनाव में पहली बार कोई उत्तर कोरियाई भी दक्षिण कोरिया की संसद में पहुंचा है। नेशनल असेंबली (संसद) की 300 सीटों में से 180 सत्तारूढ़ डेमोक्रेटिक पार्टी के खाते में गई हैं। राष्ट्रपति मून जे-इन की सरकार संसद में स्पष्ट बहुमत पाने में सफल रही।

:: भारतीय राजव्यवस्था ::

मौलाना साद कांधलवी के खिलाफ धन शोधन का मामला दर्ज

  • प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने तबलीगी जमात के नेता मौलाना साद कांधलवी, जमात से संबंधित ट्रस्ट और अन्य के खिलाफ धन शोधन का मामला दर्ज किया है। एजेंसी ने दिल्ली पुलिस की प्राथमिकी के आधार पर प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट (ईसीआईआर) दर्ज की है। धनशोधन रोकथाम कानून के तहत आपराधिक मामला दर्ज किया गया है।
  • दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने 31 मार्च को मौलाना और सात अन्य के खिलाफ निजामुद्दीन थाने के एसएचओ की शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज की थी। यह मामला कोरोना वायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने के आदेशों का कथित रूप से उल्लंघन कर तबलीगी जमात का इज्तिमा आयोजित करने को लेकर दर्ज किया गया था।

कैसे होता धन शोधन के मामलों का विनियमन

  • भारत में विदेशी मुद्रा/धनशोधन  के सन्दर्भ में अवैध वित्तीय गतिविधियों को विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम, 1999 -FEMA और धनशोधन रोकथाम अधिनियम, 2002-PMLA कानूनों द्वारा विनियमन किया जाता है।   

:: भारतीय अर्थव्यवस्था ::

अर्थव्‍यवस्‍था को RBI का बूस्टर डोज

  • कोविड-19 ने जिस तरह से देश की इकोनोमी के सामने चुनौतियां पेश की हैं उससे लड़ने में सरकार की कोशिशों को आरबीआइ भी पूरा समर्थन कर रहा है। तीन हफ्ते पहले 27 मार्च, 2020 को समय से पहले मौद्रिक नीति पेश कर सिस्टम में फंड की पर्याप्त उपलब्धता बढ़ाने के ऐलान के बाद आरबीआइ एक बार फिर सामने आया और उद्योग जगत व वित्तीय संस्थानों में भरोसा जताने के लिए कई उपायों का ऐलान किया है।

प्रमुख वित्तीय पहल

  • आरबीआइ ने मुख्य तौर पर दो उपायों के जरिए सीधे तौर पर सिस्टम में एक लाख करोड़ रुपये का फंड उपलब्ध कराने का इंतजाम किया है। साथ ही मौजूदा संकट से राहत देने के लिए वित्तीय संस्थानों के लिए नियमों को भी आसान बनाया है।
  • आरबीआइ ने देश के तीन बड़े वित्तीय संस्थानों नेशनल हाउसिंग बैंक (एनएचबी), नाबार्ड और सिडबी के लिए 50 हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त संसाधन जुटाने की व्यवस्था की है। इसमें से 25 हजार करोड़ रुपये की राशि नाबार्ड को उपलब्ध कराई जाएगी।
  • नाबार्ड इस राशि से क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक व ग्रामीण क्षेत्रों में फंड उपलब्ध कराने वाले दूसरे वित्तीय संस्थानों को ज्यादा कर्ज देगा।
  • 15 हजार करोड़ रुपये की राशि सिडबी को दिय गया है। सिडबी देश के मझोले व छोटे उद्यिमयों को कर्ज वितरित करने में अहम भूमिका निभाती है।
  • 10 हजार करोड़ रुपये एनएचबी दिया गया है जो इस राशि को आवासीय सेक्टर में पुनर्वित की सुविधा देने में इस्तेमाल करेगा।
  • आरबीआइ ने वाणिज्यिक बैंकों के लिए एक राहत का भी ऐलान किया है। इन बैंकों पर वित्त वर्ष की समाप्ति पर अपने मुनाफे से लाभांश देने का भारी दबाव रहता था। केंद्रीय बैंक ने कहा है कि मार्च, 2020 में समाप्त वित्त वर्ष के दौरान जो मुनाफा होगा उससे अतिरक्त लाभांश अदाएगी की जरुरत नहीं है। इस बारे में जो नियम है उसकी समीक्षा 30 सितंबर, 2020 के बाद की जाएगी।
  • बैंक ज्यादा कर्ज बांट सके इस उद्देश्य से रिवर्स रेपो रेट पर देय ब्याज की दर को 4 फीसद से घटा कर 3.75 फीसद कर दिया है।

:: विज्ञान और प्रौद्योगिकी ::

चित्रा जीनलैंप-एन डायग्नोस्टिक टेस्ट किट

  • विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी), भारत सरकार के अधीन राष्ट्रीय महत्व के संस्थान श्री चित्रा तिरुनाल इंस्टीट्यूट फॉर मेडिकल साइंसेज ऐंड टेक्नोलॉजी ने एक डायग्नोस्टिक टेस्ट किट विकसित की है, जो काफी कम खर्चे में 2 घंटे के भीतर कोविड19 की पुष्टि कर सकती है।
  • वायरल न्यूक्लिक एसिड के रिवर्स ट्रांसक्रिप्टेस लूप-मीडिएटेड एम्प्लीफिकेशन (आरटी-एलएएमपी) के इस्तेमाल से सार्स-कोव2 के एन जीन का पता लगाने वाला यह डायग्नोस्टिक टेस्ट दुनिया में अपनी तरह का पहला नहीं तो दुनिया के पहले कुछ में से एक होगा।
  • डीएसटी द्वारा वित्त पोषित टेस्ट किट को चित्रा जीनएलएएमपी-एन (लैंपएन-एन) कहते हैं, जो एसएआरएस-कोव-2 एन-जीन के लिए काफी विशिष्ट है और यह जीन के दो क्षेत्रों का पता लगा सकता है। किट यह सुनिश्चित करेगा कि भले ही वायरल जीन का एक क्षेत्र मौजूदा प्रसार के दौरान बदलाव से गुजरा हो, पर टेस्ट असफल न हो।

पानी में भारी धातु की खोज करने वाली कॉम्पैक्ट सॉलिड-स्टेट सेंसर

  • सेंटर फॉर नैनो एंड सॉफ्ट मैटर साइंसेज (सीईएनएस) ने पानी में भारी धातु के आयनों का पता लगाने के लिए एक कॉम्पैक्ट सॉलिड-स्टेट सेंसर विकसित किया है। यह एक पोर्टेबल यंत्र है जो दूरदराज के क्षेत्रों में ऑनसाइट खोज में मदद कर सकता है।
  • सीसा, पारा और कैडमियम जैसे भारी धातु के आयन सजीव प्राणियों के लिए बेहद गंभीर खतरे पैदा करते हैं क्योंकि वे आसानी से उनके शरीर में जमा हो सकते हैं और किसी भी रासायनिक या जैविक प्रक्रियाओं द्वारा उन्हें बाहर (डीटोक्सीफाई) नहीं किया जा सकता है। पानी में भारी धातु के आयनों से जुड़े स्वास्थ्य संबंधी खतरों को देखते हुए इन आयनों के तेजी से ऑनसाइट खोज के लिए कुशल और पोर्टेबल सेंसर विकसित करने की जरुरत है। ऐसे दृश्य सेंसरों के विकास की आवश्यकता है, जो परिवेश की स्थितियों के तहत भारी धातु के आयनों का तेजी से (चंद सेकंड के भीतर) प्रभावी ढंग से पता लगा सकें।

कार्यप्रणाली

  • डॉ. प्रलय के. संतरा की अगुवाई में सेंटर फॉर नैनो एंड सॉफ्ट मैटर साइंसेज के शोधकर्ताओं की एक टीम ने भारी धातु आयनों के प्रभावी ऑनसाइट खोज, मसलन लीड आयनों (Pb2 +) को 0.4 भाग प्रति एक अरब (पीपीबी) तक, के लिए एक कॉम्पैक्ट सॉलिड - स्टेट सेंसर विकसित किया है। इस सेंसर की फिल्म को मैंगनीज डोप्ड जिंक सल्फाइड क्वांटम डॉट्स एवं एक ग्लास सब्सट्रेट पर रिड्यूस्ड ग्राफीन ऑक्साइड के बीच संश्लेषण करके तैयार किया गया है। ये विशेष क्वांटम डॉट्स पानी में घुलनशील हैं और इनमें उच्च मात्रा में फोटोलुमिनेसेंस (~ 30%) क्वांटम  हैं, जिसकी वजह से वे ल्यूमिनेन्स - आधारित सेंसिंग के लिए उपयुक्त हैं। ये क्वांटम डॉट्स 254 एनएम के हैंडहेल्ड यूवी प्रकाश से उद्दीप्त हो सकते हैं और इस प्रकार वे दूरदराज के क्षेत्रों में भी एक पोर्टेबल डिवाइस को संभव बना सकते हैं। अगर पारा, सीसा, कैडमियम आदि जैसे भारी धातु के आयनों वाली पानी की एक बूंद को इस मिश्रित फिल्म से जोड़ा जाता है, तो फिल्म का उत्सर्जन चंद सेकंडों के भीतर हो जाता है।
  • यह अध्ययन पानी में भारी धातु आयनों की आसान पहचान को दर्शाता है। हालांकि, शोधकर्ताओं की टीम पहचान की चयनात्मकता में सुधार लाने की रणनीति विकसित कर रही है

‘कैसिनी’ ने उठाया शनि के रहस्य से पर्दा

  • हमारे सौरमंडल के अन्य ग्रह- शनि, बृहस्पति, यूरेनस और नेप्च्यून के वायुमंडल की ऊपरी सतह पृथ्वी की तरह ही गर्म गैसों से बनी है। सूर्य से काफी दूर स्थित होने के बावजूद भी इन ग्रहों के वायुमंडल का तापमान ज्यादा होना हमेशा से ही वैज्ञानिकों की उत्सुकता का विषय रहा है। अब वैज्ञानिकों शनि के वातावरण में गर्म गैसों के रहस्य से पर्दा उठा लिया है।
  • वैज्ञानिकों का कहना है कि पृथ्वी समेत अन्य ग्रहों के ऊपरी वातावरण के गर्म रहने का एक कारण इनके ध्रुवों पर मौजूद इलेक्टिक करंट (विद्युत प्रवाह) है। इसी कारण लगभग सभी ग्रहों के ऊपरी वायुमंडल में विशाल गैसों का झुंड नजर आता है।
  • शनि के रहस्यों से पर्दा उठाने के लिए अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ एरिजोना के शोधकर्ताओं ने अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के अंतरिक्ष यान कैसिनी के आंकड़ों के अध्ययन किया। बता दें कि ‘कैसिनी’ ने ईंधन समाप्त होने से पहले लगभग 13 वर्षो से शनि का अध्ययन किया था।
  • नेचर एस्ट्रोनॉमी नामक जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन के मुताबिक, इस इलेक्टिक करंट के कारण सौर हवाओं और शनि के चंद्रमाओं से आवेशित कणों के बीच परस्पर क्रिया से शुरू होती है। जिससे सूर्योदय के समय वायुमंडल के ऊपरी हिस्से का तापमान बढ़ जाता है।
  • अध्ययन में बताया गया है कि यह प्रक्रिया ठीक वैसी ही है जैसे पृथ्वी पर सूर्य के उदय होने के साथ-साथ तापमान बढ़ता चला जाता है।
  • तापमान और मौसम की मिलेगी जानकारी : कैसिनी की अल्ट्रावॉयलेट इमेजिंग स्पेक्टोग्राफ टीम के सदस्य टॉमी कोस्कि ने कहा, ‘ये नतीजे ग्रहों के ऊपरी वायुमंडल को समझने के लिए बहुत अहम हैं। इससे हमें सौरमंडल के अन्य ग्रहों के वायुमंडल के ऊपरी हिस्से के तापमान और मौसम को समझने में भी मदद मिलेगी।

कैसिनी मिशन :

  • बता दें कि कैसिनी को 1997 में 15 अक्टूबर को लांच किया गया था और 2004 में 30 जून को इसने शनि की कक्षा में प्रवेश किया था। कैसिनी का मिशन चार साल का निर्धारित किया गया था। लेकिन इसके काम को देखते हुए इसका मिशन दो बार बढ़ाया गया था। उसके बाद वैज्ञानिकों का मानना था कि ईंधन खत्म हो चुके इस यान को अगर शनि के वातावरण में यूं ही छोड़ दिया जाता तो उसके शनि के चंद्रमा टाइटन और पॉलीड्यूसेस से टकराने की आशंका थी। लेकिन वे ऐसा नहीं चाहते थे क्योंकि शनि के इन दोनों चंद्रमाओं पर जीवन की प्रबल संभावनाएं हैं, जिसे किसी भी तरह का नुकसान पहुंचाने का खतरा वे नहीं उठाना चाहते थे। इसके बाद वैज्ञानिकों ने इसे शनि के वातावरण में ही नष्ट करने का फैसला किया था।

आवेशित धाराएं बढ़ाती हैं गर्मी

  • अमेरिकी की यूनिवर्सिटी ऑफ एरिजोना के शोधकर्ताओं ने कहा ‘शनि के वातावरण की अनसुलझी तस्वीर को बहुत हद तक अब सुलझा लिया गया है। हम यह समझने में सफल रहे हैं किस तरह सूर्योदय के समय आवेशित धाराएं शनि के वायुमंडल के ऊपरी हिस्से में हवाओं को बहाकर वहां गर्मी पैदा करती हैं। इस ग्रह का वायु संचार इस ऊर्जा को बांट देता है और जितना सूर्य किरणों इसे गर्म कर सकती हैं उससे यहां तापमान दोगुना गर्म जो जाता है।’

वैज्ञानिकों ने खोजा कोरोना का जिनोम

  • गुजरात के वैज्ञानिकों ने कोरोना वायरस का जिनोम सिक्वेंस खोज निकालने का दावा किया है। इससे कोरोना से जंग और वैक्सीन खोजने में मदद मिलेगी।
  • गुजरात बायोटेक्नालॉजी रिसर्च सेंटर (जीबीआरसी) के निदेशक चैतन्य जोशी ने जिनोम खोजने की जानकारी दी। जीबीआरसी ने कोरोना संक्रमित अलग-अलग सौ लोगों के सैंपल लिए तथा उनका डीएनए टेस्ट किया। कोरोना वायरस में एक माह में दो बार परिवर्तन देखे गए, वह तेजी से बदलता है, लेकिन यह बेहद मामूली होता है। वैज्ञानिकों ने कोरोना वायरस के मूल को खोजा है। कोविड 19 में अब तक 9 म्यूटेशन पाए गए हैं। गुजरात की स्टेट लैब ने 3 नए म्यूटेशन को खोजा है। इससे पहले 6 म्यूटेशन खोजे जा चुके हैं। शोध से कोरोना की हिस्ट्री का पता चलेगा, साथ ही उसकी दवा या वैक्सीन ईजाद करने में मदद मिलेगी।

वायरस को खत्म करने वाले अत्याधुनिक मास्क

  • कोरोना के संक्रमण से बचने के लिए जहां अब मास्क पहनना जरूरी हो गया है, वहीं कोरोना के खिलाफ जंग लड़ रहे भारतीय वैज्ञानिकों ने एक ऐसा अनूठा मास्क तैयार किया है, जो न सिर्फ कोरोना के संक्रमण से बचाव करेगा, बल्कि संपर्क में आने पर वायरस को भी नष्ट देगा। इसे डॉक्टरों और कोरोना संक्रमित मरीजों के संपर्क में आने वालों के लिए काफी उपयोगी माना जा रहा है।

मास्क की विशेषता

  • वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआइआर) के भावनगर (गुजरात) स्थित केंद्रीय नमक एवं समुद्री रसायन अनुसंधान संस्थान (सीएसएमसीआरआइ) की ओर से विकसित किए गए इस खास मास्क को संशोधित पॉलीसल्फोन मैटेरियल से बनाया गया है जिसकी मोटाई 150 माइक्रोमीटर है। यह 60 नैनोमीटर या उससे बड़े किसी भी वायरस को नष्ट कर सकता है।
  • यहां बता दें कि कोरोना वायरस का व्यास 80 से 120 नैनोमीटर के बीच है। ऐसे में यह इस मास्क से बच नहीं सकेगा और लोग संक्रमित नहीं होंगे।
  • इस मास्क की बाहरी परत वायरस, फंगल एवं बैक्टीरिया प्रतिरोधी है इसकी बाहरी परत के संपर्क में आने पर कोई भी रोगजनित सूक्ष्मजीव नष्ट हो सकता है। इस लिहाज से यह अब तक सबसे सुरक्षित माने जाने वाले एन-95 मास्क से भी बेहतर साबित हो सकता है। वहीं इसे धोकर दोबारा भी इस्तेमाल में लाया जा सकता है।
  • यह बाजार में उपलब्ध दूसरे मास्क की तुलना में काफी किफायती भी है। इसकी अधिकतम लागत 45 रुपये के आस-पास है।

:: विविध ::

WWF के ब्रांड एंबेसडर बने विश्वनाथन आनंद

  • पांच बार के विश्व शतरंज चैंपियन विश्वनाथन आनंद डब्ल्यूडब्ल्यूएफ (वर्ल्ड वाइड फंड) इंडिया के पर्यावरण शिक्षा कार्यक्रम के एंबेसडर बने। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ इंडिया ने भारत में पर्यावरण सरंक्षण के 50 वर्ष पूरे किए हैं।
  • रमेश कुमार पांडेय बने चिड़ियाघर के नए निदेशक
  • केंद्रीय पर्यावरण मंत्रलय ने रमेश कुमार पांडेय को दिल्ली चिड़ियाघर का निदेशक नियुक्त किया है। रमेश कुमार पांडेय उत्तर प्रदेश कैडर के 1996 बैच के आइएफएस अधिकारी हैं। रमेश कुमार पांडेय को पांच वर्षो के लिए कार्यभार सौंपा गया है।

:: प्रिलिम्स बूस्टर ::

  • परमाणु परीक्षण के सन्दर्भ में चर्चा में रहे 'जीरो यील्ड-Zero Yield' मानक से क्या तात्पर्य होता है? (ऐसे परमाणु परीक्षण जिसमें कोई एक्स्प्लोसिव चेन रिएक्शन नहीं हो)

  • हाल ही में किसे वर्ल्ड वाइड फंड (WWF) इंडिया के पर्यावरण शिक्षा कार्यक्रम का एंबेसडर बनाया गया है? (विश्वनाथन आनंद)

  • गार्टनर 2019 डिजिटल वर्कप्लेस सर्वे के अनुसार डिजिटल कामकाज को लेकर दुनिया का सबसे कुशल देश कौन है? (भारत)

  • विश्व हीमोफ़ीलिया दिवस (WHD) किस तिथि को मनाया जाता है एवं वर्ष 2020 की थीम क्या है? (17 अप्रैल, “Get+involved”)

  • भारत में विदेशी मुद्रा/धनशोधन  के सन्दर्भ में अवैध वित्तीय गतिविधियों को किन कानूनों द्वारा विनियमन किया जाता है? (विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम, 1999 -FEMA और धनशोधन रोकथाम अधिनियम, 2002-PMLA)

  • हाल ही में चर्चा में रही अंडमान और निकोबार में किन प्रमुख जनजातियाँ का वास हैं? (छःजनजातियाँ- ग्रेट अंडमानी, जारवा, ओन्गे, शैम्पेन , निकोबारी और सेंटिनल)

  • चर्चा में रही राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (NABARD) का गठन कब एवं किस समिति के संस्तुति से की गयी? (1982, श्री बी शिवरामन समिति) 

  • हाल ही में चर्चा में रही भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (SIDBI) की स्थापना कब हुई एवं इसका मुख्यालय कहाँ स्थित है? (1990, लखनऊ)

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  • हाल ही में चर्चा में रहे कैसिनी मिशन को किस ग्रह की जानकारी के लिए एवं किस देश के द्वारा लाँच किया गया था? (शनि ग्रह, अमेरिका)

  • मार्च 2020 तक विश्व स्वास्थ्य संगठन(WHO) में फंडिंग के सन्दर्भ में शीर्ष देश कौन है? (अमेरिका, चीन और जापान)

  • पारदर्शिता के मानकों में अभाव के कारण देश की सात प्रमुख आईआईटी ने किस हायर एजुकेशन रैंकिंग का बहिष्कार करने का निर्णय लिया है? (टाइम्स हायर एजुकेशन वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग)

 

 

 

स्रोत साभार: Dainik Jagran (Rashtriya Sanskaran), Dainik Bhaskar (Rashtriya Sanskaran), Rashtriya Sahara (Rashtriya Sanskaran) Hindustan Dainik (Delhi), Nai Duniya, Hindustan Times, The Hindu, BBC Portal, The Economic Times (Hindi & English), PTI, PIB

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