(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (16 सितंबर 2019)

दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर


(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (16 सितंबर 2019)


:: राष्ट्रीय समाचार ::

देश का प्रथम डिजिटल नक्शा

  • सर्वे ऑफ इंडिया (एसओआई) पहली बार ड्रोन की मदद से देश का डिजिटल नक्शा बनाने जा रहा है। विज्ञान और तकनीकी विभाग के सहयोग से नक्शा बनाने का काम दो साल में पूरा कर लिया जाएगा। इसके लिए तीन डिजिटल केंद्र बनाए गए हैं, जहां से पूरे देश का भौगोलिक डिजिटल डेटा बनाया जाएगा। सैटेलाइट से नियंत्रित होने वाले जीपीएस सिस्टम की अपेक्षा यह डिजिटल नक्शा ज्यादा सटीक और स्पष्ट होगा। हालांकि, राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ऐसे स्थानों की मैपिंग नहीं की जाएगी, जो संवेदनशील हैं।
  • इस प्रोजेक्ट की शुरुआत महाराष्ट्र, हरियाणा और कर्नाटक से हो गई है। इससे जमीन संबंधी जानकारियां और ठिकाने की पतासाजी आसानी से की जा सकेगी। सर्वे ऑफ इंडिया का कहना है कि यह नक्शा 10 सेंटीमीटर तक की सटीक पहचान प्रदान करेगा। अभी हमारे पास 2500 से ज्यादा ग्राउंड कंट्रोल पॉइंट्स हैं। इसी आधार पर मैपिंग की जाती रही है। यह ग्राउंड कंट्रोल पाइंट्स देश के हर 30 से 40 किमी के दायरे में समान रूप से बांटे गए हैं। हालांकि, नई मैंपिंग के लिए हम वर्चुअल सीओआरएस सिस्टम का इस्तेमाल कर रहे हैं। सीओआरएस यानी सतत संचालन संदर्भ स्टेशन। इसके नेटवर्क का उपयोग करते हुए अब जो नक्शे बनाए जा रहे हैं उनसे तत्काल थ्री-डी जानकारी हासिल की जा सकती है। नई तकनीक की मदद से विभाग निर्धारित स्केल पर ही डिजिटल नक्शा उपलब्ध कराएगा। अभी जो नक्शा मौजूद है उसे ब्रिटिश सर्वेयर कर्नल सर जॉर्ज एवरेस्ट ने 1 मई 1830 को बनाया था।
  • 189 साल पुराने इस सटीक नक्शे के प्रकाशन के बाद इसे नए सिरे से बनाने के लिए सरकार ने कई प्रोजेक्ट शुरू किए थे। 2017 में डाक विभाग ने मैपमायइंडिया के साथ जुड़कर एक पायलट डिजिटल प्रोजेक्ट शुरू किया था। इसका नाम ई-लोकेशन्स था। इस डिजिटल मैपिंग प्रोग्राम का उद्देश्य लोगों के पते की डिजिटल मैपिंग करना था, जिससे भारत की डाक सेवा ज्यादा सटीक हो और रियल एस्टेट के बारे में पारदर्शिता आए।
  • ये फायदे होंगे: बाढ़ के बाद भी खाली प्लॉट की मैपिंग आसान हो जाएगी : नए ड्रोन मैपिंग सर्वे में सभी घरों की जियो मैपिंग होगी। वास्तविक स्थान को नक्शे पर चिह्नित किया जाएगा। इससे संपत्तियों के टैक्स में सामने आने वाली त्रुटियां खत्म होंगी। टैक्स वसूली बढ़ने से नगर निगम और पालिकाओं को आर्थिक मजबूती मिलेगी। बाढ़ के बाद भी खाली प्लॉट की आसानी के साथ मैपिंग की जा सकेगी। इससे लोगों को राहत मिलेगी।

कुपोषण के मापदंडों की समीक्षा

  • पर्याप्त पोषण न मिलने, बार-बार संक्रमण आदि के कारण बच्चों की लंबाई प्रभावित होती है। इसे बौनापन कहा जाता है। फिलहाल बौनेपन का निर्धारण बच्चे की लंबाई के आधार पर किया जाता है। ग्लोबल न्यूट्रिशन रिपोर्ट-2018 के अनुसार, भारत में सबसे ज्यादा 4.66 करोड़ बच्चे बौनेपन का शिकार हैं। इसके बाद नाइजीरिया व पाकिस्तान का नंबर आता है, जहां क्रमश: 1.39 व 1.07 करोड़ बच्चों में बौनेपन की समस्या है। भारत में 2.55 करोड़ बच्चे कुपोषित हैं, जबकि नाइजीरिया व इंडोनेशिया में इनकी संख्या क्रमश: 34 व 33 लाख है।
  • राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-4 (NFHS-4) के अनुसार, भारत में पांच साल से कम उम्र के 38.4 फीसद बच्चों में बौनापन है। यानी, उनकी लंबाई उम्र के मुकाबले कम है। दूसरी तरफ, 21 प्रतिशत बच्चे ऐसे हैं, जिनका वजन उनकी लंबाई के अनुपात में कम है। सर्वेक्षण के अनुसार, बिहार में पांच साल से कम उम्र के 48.3 फीसद बच्चे बौनेपन का शिकार हैं।
  • आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि भारत के विभिन्न हिस्सों में बच्चों का मानव संरचना विज्ञान बदलता है। विविधतापूर्ण देश में बच्चों में बौनापन मापने का एक ही मापदंड सही नहीं हो सकता। उन्होंने बताया कि सरकार हार्वर्ड टीएच चान स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ और विश्व स्वास्थ्य संगठन की मदद से यह जानने का प्रयास कर रही है कि बौनेपन को मापने वाले अंतरराष्ट्रीय मापदंड का भारतीयकरण कैसे किया जाए।
  • केंद्र सरकार विभिन्न राज्यों के कुपोषित बच्चों की भोजन की जरूरतों को समझते हुए स्थानीय स्तर पर उपलब्ध ऐसे खाद्य पदार्थो का अध्ययन भी करा रही है, जो पोषणयुक्त होने के साथ-साथ सस्ते और पारंपरिक रूप से स्वीकार्य हों। सरकार बच्चों व उनके परिजनों को भी पोषण के बारे में जागरूक कर रही है।

सेल्कू मेला

  • जिला मुख्यालय उत्तरकाशी से 85 किमी दूर मां गंगा के शीतकालीन पड़ाव मुखवा में हर वर्ष मनाया जाने वाला दो-दिवसीय सेल्कू मेला सबसे निराला उत्सव है। जो हर वर्ष 16-17 सितंबर को आयोजित होता है।
  • सेल्कू उत्सव का इतिहास भारत-तिब्बत व्यापार से जुड़ा हुआ है। गंगा घाटी की संस्कृति एवं सभ्यता पर पुस्तक लिख चुके स्थानीय इतिहासकार उमा रमण सेमवाल बताते हैं कि 1962 के भारत-चीन युद्ध से पहले गंगा घाटी तिब्बत और भारत के बीच व्यापार का केंद्र हुआ करती थी। तब वर्ष में 15 अप्रैल से लेकर 15 सितंबर तक यह व्यापार चलता था और व्यापार सीजन की समाप्ति पर सेल्कू उत्सव मनाया जाता था। उन्हीं यादों को जिंदा रखने के लिए यह सिलसिला आज भी चला आ रहा है। सेल्कू का अर्थ है 'सोएगा कौन '। इस त्योहार का स्वरूप भी दीपावली जैसा ही है। त्योहार में कई तरह के पकवान बनाए जाते हैं और दीपावली में चीड़ व देवदार की लकड़ियों के छिल्लों से बना भैलो खेला जाता है।

:: अंतराष्ट्रीय समाचार ::

2047 के बाद क्‍या होगा हांगकांग का भविष्‍य?

  • हांगकांग में कई महीनों से प्रदर्शन हो रहे हैं। ये प्रदर्शन एक विवादित प्रत्यर्पण बिल के खिलाफ शुरू हुए थे। धीरे-धीरे इस विरोध ने लोकतंत्र समर्थन आंदोलन की शक्ल ले ली। कुछ दिन पहले वहां हजारों प्रदर्शनकारियों ने अमेरिकी राष्ट्रगान गाते हुए राष्ट्रपति ट्रंप से चीनी सत्ता से मुक्ति दिलाने की गुहार भी लगाई है।

ब्रिटेन-चीन समझौता

  • 1984 में ब्रिटेन-चीन समझौते के तहत ब्रिटेन ने एक देश, दो प्रणाली के तहत 1997 में चीन को हांगकांग सौंपा था। इसका मतलब यह था कि चीन का हिस्सा होने के बाद भी हांगकांग 50 वर्षों यानी साल 2047 तक विदेशी और रक्षा मामलों को छोड़कर स्वायत्तता का आनंद लेगा।

खत्म होगी स्वायत्तता

  • दोनों देशों के बीच हुए समझौते के समय ऐसी कोई कानूनी व्यवस्था नहीं बनाई गई, जिससे स्वायत्तता को बचाया जा सके। इसका मतलब 70 लाख आबादी वाला हांगकांग विशेष स्वायत्त क्षेत्र के रूप में अपनी स्वतंत्रता अगले 28 साल बाद खो देगा। तब हांगकांग के भाग्य का फैसला चीनी कम्युनिस्ट सरकार के पास चला जाएगा।

चीन का रुख

  • 2017 में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कम्युनिस्ट पार्टी के एक कार्यक्रम में यह संकेत दिया था कि हांगकांग में एक देश, दो प्रणाली का सिद्धांत कभी बदला नहीं जाएगा।

कारोबार के लिहाजा से फायदेमंद

  • हांगकांग के विशिष्ट प्रशासन ने इसे चीन में विदेशी निवेश का प्राथमिक प्रवेश द्वार बनाने में मदद की, क्योंकि कई वैश्विक कंपनियां भूमि के नियामकों और कानूनी प्रणाली पर भरोसा नहीं करती हैं। व्यापार के उद्देश्य से अमेरिका हांगकांग को शेष चीन से खास मानता है। इसलिए चीनी वस्तुओं पर राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ से हांगकांग अछूता है। दोनों प्रमुख दलों के अमेरिकी सांसदों ने कहा है कि अगर चीन हांगकांग की स्वायत्तता को खत्म करता है तो वे हांगकांग की विशेष स्थिति पर पुनर्विचार करेंगे।

अन्य विकल्प क्या हैं स्वायत्तता खत्म होने के बाद

  • हांगकांग औपचारिक रूप से पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना में शामिल हो सकता है और चीन के शेनजेन जैसे कुछ क्षेत्रों को मिले विशेष अधिकारों को प्राप्त कर सकता है। हालांकि, उन क्षेत्रों के विशेषाधिकार लोकतांत्रिक शासन या स्वतंत्र न्यायपालिका के बजाय व्यापार और कारोबार से संबंधित हैं।

2047 तक स्वायत्ता पर संशय

  • जोनाथन रॉबिसन ने सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज द्वारा प्रकाशित एक लेख में लिखा है कि यह एक ऐसी व्यवस्था है, जो चीन के लिए कई तरह से काम करती है, जिसमें एक वैश्विक वित्तीय केंद्र के रूप में हांगकांग की स्थिति को कम करना भी शामिल है। चीन यह व्यवस्था बनाये रखना चाहता है क्योंकि इसे ताइवान के एकीकरण के लिए एक मॉडल के रूप में भी देखा जाता है। उनका तर्क है कि एक देश, दो प्रणाली को उदार लोकतंत्र के लिए एक ढांचे के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

जनता का रुख

  • चीन का हिस्सा होने के बावजूद हांगकांग के अधिकांश लोग चीन में शामिल नहीं होना चाहते हैं। कई साल से वहां की जनता आंदोलनों के जरिये चीनी सत्ता से आजादी की मांग कर रही है।

तापी परियोजना

  • कश्मीर को लेकर भारत-पाक के बीच बढ़े तनाव का असर तापी (तुर्कमेनिस्तान, अफगानिस्तान, पाकिस्तान, भारत) और अन्य गैस पाइपलाइन परियोजनाओं पर नहीं पड़ेगा। पाकिस्तान ने इस संबंध में तुर्कमेनिस्तान को आश्वासन दिया है। दस अरब डॉलर की तापी परियोजना से भारत और पाकिस्तान को प्रतिदिन 1.3 अरब घन फीट गैस मिलेगी।
  • पाकिस्तान ने तुर्कमेनिस्तान को तापी और अन्य बड़ी परियोजनाओं पर कोई असर नहीं पड़ने का भरोसा दिलाया है। भारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर को लेकर कितना भी तनाव बढ़ जाए लेकिन तापी पाइपलाइन परियोजना पर कोई बुरा असर नहीं पड़ेगा। इस बीच, तापी गैस पाइपलाइन बनाने वाली कंपनी ने भूमिगत गैस भंडारण की भी योजना बनाई है। ताकि लोड मैनेजमेंट के जरिए ऊर्जा की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
  • इंटरस्टेट गैस सिस्टम्स (आइएसजीएस) कंपनी तापी समेत नार्थ-साउथ पाइपलाइन और ऑफशोर गैस पाइपलाइन जैसी कुछ बड़ी परियोजनाओं पर काम कर रही है। तापी परियोजना के जरिए मध्य और दक्षिण एशिया को जोड़ा जा सकेगा। यह पाइपलाइन अफगानिस्तान और पाकिस्तान से होकर भारत तक पहुंचेगी। आर्थिक गतिविधियों को बढ़ाने वाली यह पाइपलाइन क्षेत्र में शांति और स्थिरता को सुनिश्चित करेगी। इस परियोजना के जरिए दोनों क्षेत्रों को सड़क, रेल और फाइबर केबिल के जरिए जोड़ा जाएगा।
  • इस गैस पाइपलाइन के लिए तुर्कमेनिस्तान में निर्माण कार्य पहले ही शुरू हो चुका है। तुर्कमेन-अफगान सीमा से लेकर हेरत क्षेत्र तक जल्द ही काम शुरू होने की उम्मीद है। पाकिस्तान में इससे संबंधित निर्माण कार्य वर्ष 2020 की पहली तिमाही में शुरू होगा।

:: राजव्यवस्था और महत्वपूर्ण विधेयक ::

संदेशों के स्रोत तक पहुंचने की मांग

  • सरकार वाट्सएप पर भेजे जाने वाले संदेशों के स्रोत तक पहुंचने की मांग पर अडिग है, जबकि फेसबुक ने संदेशों के खिलाफ सरकारी एजेंसियों की शिकायत पर आगे की कार्रवाई की व्यवस्था किए जाने का प्रस्ताव किया है।
  • संदेशों के स्रोत की पहचान का मुद्दा लंबे समय से सरकार और वाट्सएप के बीच विवाद का केंद्र बना हुआ है। फेसबुक की कंपनी वाट्सएप संदेश डालने वाले मूल व्यक्ति की पहचान बताने की सरकार की मांग को मानने से अभी इन्कार करती आ रही है। उसका कहना है कि ऐसा करने से गोपनीयता तथा शुरू से लेकर अंत तक संदेश के इनक्रिप्शन की उसकी नीति प्रभावित होगी।
  • सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पीटीआइ से कहा कि फेसबुक के उपाध्यक्ष (वैश्रि्वक मामले एवं संवाद) निक क्लेग ने पिछले सप्ताह केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद से मुलाकात की। इस मुलाकात में क्लेग ने संदेशों के मूल स्त्रोत का पूरा सुराग देने के मुद्दे पर कुछ वैकल्पिक सुझाव दिए हैं। उन्होंने मेटा डाटा (पारिभाषिक डेटा) और मशीन इंटेलीजेंस के इस्तेमाल के साथ ही कानूनी एजेंसियों को वाट्सएप, इंस्टाग्राम और फेसबुक के लिंकेज का लाभ देने का विकल्प दिया।
  • फेसबुक के प्रवक्ता ने इस बारे में पूछे जाने पर कहा, 'फेसबुक भारत में लोगों की सुरक्षा का ध्यान रखती है। निक की इस सप्ताह हुई बैठक से हमें हमारे हर एप में सुरक्षा एवं गोपनीयता को लेकर हमारी प्रतिबद्धता पर बातचीत का अवसर मिला। हमें यह भी समझने को मिला कि हम इन साझा लक्ष्यों को पाने में भारत सरकार के साथ मिलकर किस तरह से काम कर सकते हैं।' वाट्सएप से जुड़े एक व्यक्ति ने बताया कि संदेशों के इनक्रिप्टेड होने की वजह से कंपनी भी इन्हें पढ़ नहीं सकती है।
  • क्लेग ने गृहमंत्री अमित शाह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद के साथ 12 सितंबर को मुलाकात की। उन्होंने दोहराया कि वाट्सएप भारत सरकार द्वारा सूचना की वैध मांग को मानने के लिए बाध्य है। हालांकि उन्होंने कहा कि आदान-प्रदान किए गए संदेशों को पढ़ पाना संभव नहीं है। क्लेग ने कहा कि कंपनी सिग्नल और मेटा डाटा प्रदान कर सकती है, यह बता सकती है कि किसे कॉल किया गया और कितनी देर बात की गई। भारत में वाट्सएप के 40 करोड़ और फेसबुक के 32.8 करोड़ यूजर हैं

:: भारतीय अर्थव्यवस्था ::

निर्यात क्षेत्र के प्रोत्साहन हेतु कार्यक्रम

  • निर्यात उत्पादों पर शुल्कों की कटौती (रॉडटेप) नाम से एक नई योजना शुरू की जा रही है जो सभी वस्तु निर्यातों के लिए पहले से जारी वाणिज्यिक निर्यात योजना (एमईआईएस) की जगह लेगी। वर्ष 2015 में विदेश व्यापार नीति के तहत लाई गई एमईआईएस योजना 5,000 से अधिक वस्तुओं के वाणिज्यिक निर्यात को प्रोत्साहन दे रही है और अपने किस्म की सबसे बड़ी निर्यात प्रोत्साहन योजना मानी जाती है। इसके तहत निर्यातक उत्पादों एवं भेजे जाने वाले देश के आधार पर दो फीसदी, तीन फीसदी और पांच फीसदी की तय दरों पर शुल्क क्रेडिट अर्जित करते हैं। अधिकारियों का कहना है कि इसके स्थान पर लाई जा रही नई योजना रॉडटेप भी शुल्क क्रेडिट पद्धति पर ही आधारित होगी लेकिन अभी इसकी दरें नहीं तय की गई हैं।
  • सीतारमण ने यह साफ किया है कि परिधान निर्यातों को फिलहाल एमईआईएस या राज्य एवं केंद्रीय कर एवं शुल्क छूट योजना के तहत मिलने वाले लाभ 31 दिसंबर 2019 तक जारी रहेंगे। इसका फायदा उन निर्यातकों को होगा जो पहले से ही ऑर्डर बुक कर चुके हैं। नई योजना से निर्यातकों को समुचित प्रोत्साहन मिलने का रास्ता साफ होगा। सरकार इस योजना पर करीब 50,000 करोड़ रुपये व्यय करेगी।
  • बकाया इनपुट टैक्स क्रेडिट कारोबारियों के लिए चिंता का बड़ा मुद्दा रहा है। सरकार ने निर्यातकों को त्वरित एवं स्वचालित रिफंड दिलाने के लिए एक इलेक्ट्रॉनिक रिफंड मॉडल अपनाने की घोषणा की है। इससे फंड की निगरानी एवं जब्ती की आशंका कम होने की उम्मीद है। वित्त मंत्री ने कहा कि यह इस महीने के अंत तक शुरू हो जाएगा।
  • अधिक निर्यात वित्त की मांगों से निपटने के लिए निर्यात क्रेडिट गारंटी निगम बढ़ा हुआ बीमा कवर देगा। यह बैंकों को आवंटित फंड बढ़ा देगा जिससे बैंक निर्यातकों को अधिक कर्ज बांट सकेंगे। इस मद में सरकार 1,700 करोड़ रुपये वार्षिक मुहैया कराएगी। समुचित विदेशी मुद्रा संसाधन को रिजर्व बैक की मदद से बैंकों को वाजिब कीमत पर उपलब्ध कराया जाएगा। सरकार को उम्मीद है कि इन कदमों से विदेशी मुद्रा एवं रुपये में निर्यात क्रेडिट ब्याज दरें क्रमश: चार फीसदी और आठ फीसदी के नीचे रहेंगी। इससे ऋण उपलब्धता की स्थिति भी सुधरेगी।
  • सरकार ने 36,000 करोड़ से लेकर 68,000 करोड़ रुपये तक अतिरिक्त राशि बैंकों को मुहैया कराए जाने की भी घोषणा की है जिसका इस्तेमाल निर्यात क्षेत्र को कर्ज देने में किया जाएगा। रिजर्व बैंक प्राथमिकता वाले क्षेत्रों को कर्ज संबंधी मौजूदा मानदंडों को अद्यतन करने वाले दिशानिर्देश जल्द लेकर आएगा।

:: विज्ञान और प्रौद्योगिकी ::

स्पाइस-2000

  • भारतीय वायुसेना ने बालाकोट एयर स्ट्राइक में सफलतापूर्वक इस्तेमाल की गई ‘बिल्डिंग ब्लास्टर’ के नाम से प्रसिद्ध स्पाइस-2000 बमों की पहली खेप हासिल कर ली है। वायुसेना सूत्रों ने न्यूज एजेंसी को बताया कि इजरायली कंपनी ने भारत को स्पाइस-2000 बमों की डिलीवरी शुरू कर दी है और हाल ही में इसकी पहली खेप मिली है।
  • उन्होंने बताया कि यह बम मिराज-2000 फाइटर एयरक्राफ्ट के घरेलू बेस ग्वालियर को हासिल हुआ है क्योंकि यही एयरक्राफ्ट इजरायली बमों को फायर करने में सक्षम है। भारतीय वायुसेना ने इजरायल के साथ मार्क 84 वारहेड और बमों को हासिल करने के लिए 250 करोड़ रु. के समझौते पर हस्ताक्षर किया था। इसमें बिल्डिंग को पूरी तरह ध्वस्त करने की क्षमता है।
  • उन्होंने बताया कि यह समझौता इसी साल जून में 100 स्पाइस बमों को हासिल करने के लिए हुआ था। वायुसेना बालाकोट स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के ठिकानों पर सफलतापूर्वक एयर स्ट्राइक करने के बाद इन बमों को हासिल करना चाहती थी। वायुसेना ने आतंकियों के ठिकानों पर मिराज-2000 लड़ाकू विमान से स्पाइस-2000 बमों को गिराया था।

वाह्य कोशिकाएं या एक्स्ट्रासेल्यूलर वेसिकल्स(ईवीएस)

  • वैज्ञानिकों ने कैंसर मरीजों के इलाज का नया तरीका ईजाद किया है। वैज्ञानिकों का दावा है कि इलाज का नया तरीका कीमोथेरेपी से ज्यादा कारगर है। इतना ही नहीं वैज्ञानिकों ने एक तरीका इजाद किया है, जिससे कैंसर मरीजों को काफी राहत मिलेगी। विशेष तौर पर महिला मरीजों को। अब उन्हें कीमोथेरेपी के दौरान अपने बाल नहीं खोने पड़ेंगे।

कैंसर से लड़ सकते हैं शरीर के बुलबुले

  • कैंसर किसी भी तरह का हो, लोगों के माथे पर शिकन जरूर ला देता है, क्योंकि इसका इलाज बहुत मुश्किल होता है। कुछ मामलों में इलाज है भी तो वह बहुत खर्चीला होता है। अब इससे निपटने के लिए एक नई विधि ईजाद की है। वैज्ञानिकों ने हमारे शरीर में छोटे-छोटे बुलबुलों का पता लगाया है, जो कैंसर के इलाज में उपयोगी सिद्ध हो सकता है। वैज्ञानिकों का दावा है कि ये बुलबुले कीमोथेरेपी के मुकाबले बीमारी से बेहतर तरीके से लड़ सकते हैं। इन्हें वाह्य कोशिकाएं या एक्स्ट्रासेल्यूलर वेसिकल्स(ईवीएस) भी कहा जाता है।

ऐसे काम करती है नई तकनीक

  • हमारे शरीर की कोशिकाएं बेहद छोटे-आकार के बुलबुलों का स्नाव (रिलीज) करती हैं, जो आनुवांशिक सामग्री जैसे डीएनए और आरएनए को अन्य कोशिकाओं में स्थानांतरित करते हैं। यह आपका डीएनए ही है, जो प्रोटीन का उत्पादन करने के लिए आरएनए के लिए आवश्यक और महत्वपूर्ण जानकारी संग्रहीत करता है और सुनिश्चित करता है कि वे उसके अनुसार काम करते रहें। शोधकर्ताओं के मुताबिक, हमारे शरीर में पाए जाने वाले एक्स्ट्रासेल्यूलर वेसिकल्स दवाओं और जीन के मेल से कैंसर कोशिकाओं को लक्षित कर उन्हें मार देती हैं।

शरीर में तुरंत सक्रिय हो जाती है ये दवाएं

  • शोधकर्ताओं का यह अध्ययन मॉलीक्यूलर कैंसर थेरैपिटिक्स में प्रकाशित हुआ है, जो चूहों के स्तन की कैंसर की कोशिकाओं पर आधारित था। इस अध्ययन के प्रमुख लेखक और मिशीगन स्टेट यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर मैसमित्सु कनाडा ने कहा कि हमने जो किया है, वह शरीर में एंजाइम-उत्पादक जीन को वितरित करने का एक बेहतर तरीका साबित हो सकता है। यह कुछ दवाओं को विषाक्त एजेंटों में बदल कर ट्यूमर की कोशिकाओं को निशाना बना सकता है। उन्होंने कहा कि ये दवाएं (प्रोड्रग) शुरुआत में निष्क्रिय यौगिक के रूप में रहती हैं, लेकिन शरीर के भीतर पहुंचते ही तुरंत सक्रिय हो जाती हैं और कैंसर की कोशिकाओं से लड़ना शुरू कर देती हैं।

ऐसे किया गया अध्ययन

  • इस अध्ययन के लिए शोधकर्ताओं ने एंजाइम-उत्पादक जीन को वितरित करने के लिए ईवीएस यानी एक्स्ट्रासेल्यूलर वेसिकल्स का इस्तेमाल किया, जो स्तन कैंसर की कोशिकाओं में गैनिक्लोविर और सीबी1954 नामक दवाओं के संयोजन के जरिये उन्हें सक्रिय कर सकता था। शोधकर्ताओं ने दो अलग-अलग जीन वैक्टर, मिनिकिरकल डीएनए और नियमित प्लास्मिड को वेसिकल्स लोड कर यह देखा कि क्या यह दवाओं को ट्यूमर की कोशिकाओं तक ले जाने में सक्षम है या नहीं। अध्ययन के दौरान शोधकर्ताओं ने पाया कि मिनिकिरकल डीएनए कैंसर की कोशिकाओं को मारने में अन्य के मुकाबले 14 गुना ज्यादा कारगर है। इसे प्रोड्रग थेरेपी के रूप में जाना जाता है।

कीमोथेरेपी नहीं कर पाती अंतर

  • प्रोफेसर मैसमित्सु कनाडा ने कहा कि परंपरागत कीमोथेरेपी ट्यूमर और सामान्य ऊतक के बीच अंतर करने में सक्षम नहीं है, इसलिए यह सभी पर हमला करता है। वहीं ईवीएस के जरिये उपचार करने पर केवल लक्षित हिस्सों को ही निशाना बनाया जाता है। इससे अवांछित प्रतिरक्षा प्रतिक्रियाओं के जोखिम को कम किया जा सकता है। कनाडा ने कहा कि अभी केवल चूहे पर इसका सफल प्रयोग किया गया है। यदि भविष्य में ईवीएस मनुष्यों में प्रभावी साबित होते हैं तो यह जीन वितरण के लिए एक आदर्श मंच सिद्ध होगा।

कीमोथेरेपी में बाल झड़ने से मुक्ति

  • वैज्ञानिकों को कीमोथेरेपी में बाल झड़ने की रोकथाम करने में बड़ी सफलता मिली है। उन्होंने एक ऐसा तरीका खोज निकाला है, जिससे बालों को बचाया जा सकता है। कैंसर में आमतौर पर कीमोथेरेपी की जाती है। इसका एक प्रमुख दुष्प्रभाव बाल झड़ने के तौर पर सामने आता है। शोधकर्ताओं के अनुसार, अध्ययन के नतीजों से जाहिर हुआ कि कैंसर के उपचार में काम आने वाली टैक्सनेस दवाओं से हमेशा के लिए बाल झड़ सकता है। इस समस्या की रोकथाम हो सकती है। ईएमबीओ मोलेक्यूलर मेडिसिन जर्नल में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, कैंसर रोधी दवा के तौर पर टैक्सनेस का आमतौर पर इस्तेमाल होता है। स्तन से लेकर फेफड़ों के कैंसर तक के उपचार में यह दवा उपयोगी होती है। शोधकर्ताओं ने पाया कि CDK4/6 इंहिबिटर वर्ग की नई दवाएं, कोशिकाओं में विभाजन को रोकती हैं। इससे बालों को कोई नुकसान नहीं पहुंचता है। इन दवाओं को कैंसर के उपचार के लिए मंजूरी भी मिल चुकी हैं

:: पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी ::

टाइगर स्ट्राइक फोर्स

  • बाघों की सुरक्षा को लेकर चिंतित मध्य प्रदेश सरकार ने आखिर टाइगर स्ट्राइक फोर्स के गठन की तैयारी कर ली है। वन विभाग ने फोर्स के गठन का प्रस्ताव शासन को भेज दिया है, जो मंजूरी के लिए कैबिनेट भेजा जा रहा है। पहले चरण में बांधवगढ़, पेंच और कान्हा टाइगर रिजर्व में बाघों की सुरक्षा की जिम्मेदारी फोर्स को सौंपी जाएगी। इसके लिए वनरक्षकों की भर्ती होगी, जो 40 साल की उम्र तक फोर्स में रहेंगे और फिर 62 साल की उम्र तक मैदानी अमले के रूप में विभाग में काम करेंगे। फोर्स को पॉवरफुल बनाने के लिए शस्त्र चलाने के अधिकार भी दिए जा रहे हैं।
  • आठ साल बाद प्रदेश 'टाइगर स्टेट" बना है। प्रदेश में पिछले साल हुई गिनती में 526 बाघ मिले हैं। इसके बाद सरकार की बाघों को लेकर चिंता और जिम्मेदारी बढ़ गई है। यही कारण है कि केंद्र सरकार के वर्ष 2012 के प्रस्ताव पर अमल करते हुए राज्य सरकार टाइगर स्ट्राइक फोर्स का गठन कर रही है। वैसे तो प्रदेश के सभी छह टाइगर रिजर्व में फोर्स गठित की जानी है, लेकिन पहले चरण में तीन टाइगर रिजर्व लिए जा रहे हैं।
  • तीनों पार्क में एसीएफ के नेतृत्व में एक-एक कंपनी तैनात की जाएंगी। एक कंपनी 112 लोगों की रहेगी। इसमें तीन रेंजर, 22 उप वनपाल और 36 वनरक्षक रहेंगे। सरकार फोर्स में तैनात कर्मचारियों के वेतन और भत्तों पर करीब 10 करोड़ रुपए सालाना खर्च करेगी। जबकि संसाधनों पर 6.60 करोड़ रुपए एक बार खर्च किए जाएंगे। फोर्स पार्क संचालक की निगरानी में काम करेगी।
  • फोर्स के गठन और संचालन पर खर्च होने वाली राशि में से 40 फीसदी राशि राज्य सरकार खर्च करेगी। जबकि केंद्र सरकार 60 फीसदी राशि देगी। वर्ष 2012 में केंद्र सरकार ने सौ फीसदी राशि देने का प्रस्ताव दिया था। तब राज्य सरकार ने प्रस्ताव नहीं माना। जबकि कर्नाटक सरकार ने केंद्र सरकार के निर्देश मानते हुए फोर्स का गठन कर लिया था। इसी के बाद कर्नाटक को टाइगर स्टेट का दर्जा मिला था।

गंगा नदी में सूक्ष्म जीवाणुओं की होगी GIS मैपिंग

  • सरकार गंगा नदी में प्रदूषणकारी तत्वों, नदी के स्वास्थ्य एवं पारिस्थितकी तथा मानवीय स्वास्थ्य से जुड़े आयामों का अध्ययन करने के लिए नदी के उद्गम से गंगा सागर तक ‘सूक्ष्म जीवाणु विविधता की जीआइएस मैपिंग’ करायेगी.
  • ‘मिशन की कार्यकारी समिति की बैठक में पारिस्थितकी सेवाओं के लिए गंगा नदी में जीवाणु विविधता की GIS मैंपिंग के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गयी. इस पर 9.33 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत आयेगी और इसे 24 महीने में पूरा किया जायेगा.’
  • एनएमसीजी की कार्यकारी समिति की बैठक में राष्ट्रीय पर्यावरण, इंजीनियरिंग शोध संस्थान (NEERI), नागपुर के वरिष्ठ मुख्य वैज्ञानिक डॉ अत्या कापले ने उक्त प्रस्ताव पेश किया. इसका उद्देश्य उद्गम से गंगा सागर तक गंगा नदी के बहाव क्षेत्र में सूक्ष्म जीवाणुओं से जुड़ी विविधता का मानचित्र तैयार करना है.
  • प्रस्ताव में कहा गया है कि गंगा नदी के कई क्षेत्रों में जीवाणुओं के संबंध में अनेक रिपोर्ट हैं, लेकिन पूरी नदी में जीवाणुओं के संबंध में कोई रिकॉर्ड नहीं है. ऐसे में जीवाणुओं के विस्तार के बारे में परिणाम आधारित GIS मैपिंग राष्ट्रीय महत्व की होगी. इसके तहत कुछ विशिष्ठ लक्ष्य निर्धारित किये गये हैं, जिनमें नदी में प्रदूषणकारी तत्वों के प्रकार तथा पारिस्थितिकी से जुड़ी सेवाओं का अध्ययन करने की बात कही गयी है.
  • इसमें नदी के स्वास्थ्य एवं पुनर्जीवन क्षमता को परिभाषित करने एवं मानव स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव का भी आकलन किया जायेगा . इसमें कहा गया है, ‘इससे नदी गुणवत्ता मापदंडों को पुन: परिभाषित करने में मदद मिलेगी.’ इस उद्देश्य के लिए राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) के महानिदेशक के तहत एक निगरानी समिति का गठन किया जायेगा.
  • एनएमसीजी की ओर से गंगा नदी में जीवाणुओं की विविधता की जीआइएस (GIS) मैपिंग की पहल ऐसे समय में की जा रही है, जब नदी में जैव विविधता की कमी आने की रिपोर्ट सामने आयी है. इसमें एक महत्वपूर्ण आयाम नदी जल में मौजूद बैक्टीरियोफेज नामक जीवाणु की मौजूदगी का हो सकता है, जो गंदगी और बीमारी फैलाने वाले जीवाणुओं को नष्ट कर देते हैं.
  • रिपोर्टों के अनुसार, गंगा में वनस्पतियों एवं जंतुओं की 2,000 प्रजातियां मौजूद हैं. इन प्रजातियों में से कई क्षेत्र विशेष में पायी जाती हैं. गंगेय डाल्फिन, घड़ियाल और मुलायम आवरण वाले कछुए इसके विशिष्ट उदाहरण हैं. पालीकीट, सीप एवं घोंघों की कई प्रजातियां, समुद्र और गंगा, दोनों में पायी जाती हैं.
  • हिलसा मछली रहती तो है समुद्र में, लेकिन प्रजनन के लिए गंगा में आती है. ऐसी रिपोर्ट भी सामने आयी है कि पिछले एक-दो दशकों से तिलापिया, ग्रास कॉर्प, कॉमन कॉर्प, टेरिगोप्लीक्थीस अनिसित्सी और फाइसा (हाइतिया) मेक्सिकाना-जैसी मछली एवं घोंघे की कई विदेशी प्रजातियां भी गंगा में आ गयी हैं.

:: विविध ::

आइबीएसएफ विश्व बिलिय‌र्ड्स चैंपियनशिप

  • भारत के स्टार क्यू खिलाड़ी पंकज आडवाणी ने 150 अप प्रारूप में लगातार चौथे आइबीएसएफ विश्व बिलिय‌र्ड्स चैंपियनशिप के खिताब के साथ अपने करियर का 22वां विश्व खिताब जीता। बिलिय‌र्ड्स के छोटे प्रारूप में यह 34 साल के आडवाणी का पिछले छह साल में पांचवां खिताब है।
  • 34 वर्षीय पंकज ने एशियन गेम्स में भी स्वर्ण पदक जीते हैं। उन्होंने ये पदक 2006 दोहा गेम्स और 2010 ग्वांग्झू गेम्स में जीते थे।

वियतनाम ओपन

  • भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी सौरभ वर्मा ने वियतनाम ओपन के पुरुष सिंगल्स फाइनल में चीन के सुन फेई शियांग को हराकर खिताब अपने नाम किया।

बास्केटबॉल विश्व कप

  • स्पेन ने रविवार को खेले गए फाइनल मुकाबले में अर्जेंटीना को 95-75 से हराकर बास्केटबॉल विश्व कप जीत लिया। स्पेन की टीम ने पूरे मैच के दौरान बढ़त बनाए रखी और दूसरी बार अंतरराष्ट्रीय बास्केटबॉल का सबसे बड़ा खिताब जीतने में सफल रही।
  • स्पेन ने 2006 के बाद पहली बार ये खिताब जीता है। फाइनल मुकाबले में स्पेन ने 2004 की ओलंपिक चैंपियन अर्जेंटीना को आसानी से मात दे दी।

:: प्रिलिमिस बूस्टर ::

  • हाल ही में किस संस्था के द्वारा ड्रोन की मदद से भारत का प्रथम डिजिटल नक्शा बनाने की प्रक्रिया शुरू करने की घोषणा की गई है? (सर्वे ऑफ इंडिया -एसओआई)
  • ग्लोबल न्यूट्रिशन रिपोर्ट 2018 के अनुसार किस देश में कुपोषण के कारण सर्वाधिक बच्चे बौनेपन के शिकार हुए हैं? (भारत)
  • ब्रिटेन चीन समझौते के तहत किस वर्ष हांगकांग की स्वायत्तता समाप्त हो जाएगी? (2047)
  • हाल ही में चर्चा में रहे तापी गैस परियोजना किन देशों की संयुक्त गैस पाइपलाइनपरियोजना है ? (तुर्कमेनिस्तान, अफगानिस्तान, पाकिस्तान, भारत)
  • सेल्कू मेला किस राज्य में मनाया जाता है? (उत्तरकाशी- उत्तराखंड)
  • स्पाइस 2000 बम को किस देश के द्वारा विकसित किया गया है? (इजराइल)
  • किस विध्वंसक बम को ‘बिल्डिंग ब्लास्टर’ के नाम से जाना जाता है? (स्पाइस-2000)
  • बाघों की सुरक्षा हेतु किस राज्य के द्वारा टाइगर स्ट्राइक फोर्स के गठन की घोषणा की गई है? (मध्य प्रदेश)
  • भारत सरकार के द्वारा किस नदी में ‘सूक्ष्म जीवाणु विविधता की जीआइएस मैपिंग’ करायेगी? (गंगा नदी)
  • हाल ही में किस खिलाड़ी के द्वारा आइबीएसएफ विश्व बिलिय‌र्ड्स चैंपियनशिप का खिताब अपने नाम किया गया? (पंकज आडवाणी)
  • हाल ही में किस खिलाड़ी के द्वारा वियतनाम ओपन के पुरुष सिंगल्स मुकाबले में सफलता हासिल की गई? (सौरभ वर्मा)
  • हाल ही में किस देश के द्वारा बास्केटबॉल विश्व कप जीता गया? (स्पेन)

स्रोत साभार: Dainik Jagran (Rashtriya Sanskaran), Dainik Bhaskar (Rashtriya Sanskaran), Rashtriya Sahara (Rashtriya Sanskaran) Hindustan Dainik (Delhi), Nai Duniya, Hindustan Times, The Hindu, BBC Portal, The Economic Times (Hindi & English), PTI, PIB

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