(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (16 जून 2020)

दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर


(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (16 जून 2020)


:: राष्ट्रीय समाचार ::

आरोग्यपथ (AarogyaPath)

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में सीएसआईआर द्वारा राष्ट्रीय स्वास्थ्य देखभाल आपूर्ति श्रृंखला पोर्टल ‘आरोग्यपथ’ को लॉन्च किया गया।

क्या है आरोग्यपथ?

  • यह एक वेब आधारित समाधान प्रणाली है। इसका उद्देश्य वास्तविक समय पर महत्वपूर्ण स्वास्थ्य आपूर्ति की उपलब्धता प्रदान करना है। आरोग्यपथ निर्माताओं, आपूर्तिकर्ताओं और ग्राहकों की मदद करेगा। इस पोर्टल को सर्वोदय इन्फोटेक और संस्थागत उपयोगकर्ताओं की साझेदारी में विकसित किया गया है।

पृष्ठभूमि

  • कोविड-19 महामारी से उत्पन्न मौजूदा राष्ट्रीय स्वास्थ्य आपातकाल के दौरान आपूर्ति श्रृंखला में गंभीर व्यवधान को उजागर किया है। ऐसे में महत्वपूर्ण वस्तुओं के उत्पादन और वितरण की क्षमता विभिन्न कारणों से संकट में पड़ सकती है। इन चुनौतियों से निपटने के लिए "किसी को अरोग्य (स्वस्थ जीवन) की ओर ले जाने वाला मार्ग उपलब्ध कराने” की दृष्टि से आरोग्यपथ नामक यह सूचना मंच विकसित किया गया।
  • भारत में महत्वपूर्ण स्वास्थ्य आपूर्ति में गंभीर मुद्दें विदमान है। इन मुद्दों में सीमित आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता,अच्छी गुणवत्ता वाले उत्पादों की पहचान करने में लगने वाला अधिक समय,वांछित समयसीमा के भीतर उचित मूल्य पर मानकीकृत उत्पादों की आपूर्ति करने वाले आपूर्तिकर्ताओं तक सीमित पहुंच,नवीनतम उत्पादों के बारे में जानकारी का अभाव इत्यादि शामिल हैं।

आरोग्यपथ के लाभ

  • आरोग्यपथ नाम का यह वेब आधारित सूचना मंच निर्माताओं और आपूर्तिकर्ताओं को पूरी कुशलता से ग्राहकों के एक विस्तृत नेटवर्क तक पहुंचने, उनके और आस-पास के चिकित्सा जांच केंद्रों, मेडिकल दुकानों, अस्पतालों इत्यादि जैसे मांग केंदों के बीच संपर्क की कमियों को दूर करने मदद करेगा।
  • यह ग्राहकों की विस्तृत सूची और उत्पादों के लिए दिखने वाली नई जरूरतों की वजह से व्यवसाय का विस्तार करने के अवसर भी उपलब्ध कराएगा।
  • यह अपर्याप्त पूर्वानुमान और अधिक विनिर्माण के कारण संसाधनों की बर्बादी को कम करने में मदद करेगा और नई प्रौद्योगिकियों की मांग के बारे में जागरूकता भी पैदा करेगा।
  • यह भारत में स्वास्थ्य देखभाल सामानों की आपूर्ति की उपलब्धता और उन्हें किफायती बनाते हुए रोगियों के लिए अंतिम समय में जरूरी सामानों की आपूर्ति की खाई को पाटने का कार्य करेगा।

'कोविड-19 के बीच परिदृश्य -- जमीनी स्थिति एवं संभावित समाधान'

चर्चा में क्यों?

  • ‘कोविड-19 के बीच परिदृश्य -- जमीनी स्थिति एवं संभावित समाधान’ शीर्षक वाला अध्ययन बाल अधिकार मुद्दों पर काम करने वाले गैर सरकारी संगठन स्माइल फाउंडेशन ने किया है। इस अध्ययन का उद्देश्य प्रौद्योगिकी की उपलब्धता का विश्लेषण करना है। यह अध्ययन पहली कक्षा से लेकर 12 कक्षा तक के छात्रों पर किया गया। यह अध्ययन दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, गुजरात, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना सहित 23 राज्यों में 16 अप्रैल से 28 अप्रैल के बीच 12 दिनों की अवधि के दौरान किया गया।

अध्यनन से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य

  • स्कूली छात्रों पर किये गये एक अध्ययन के मुताबिक करीब 56 प्रतिशत बच्चों को स्मार्टफोन उपलब्ध नहीं है, जबकि लॉकडाउन के दौरान ‘ई-लर्निंग’ के लिये यह एक आवश्यक उपकरण के रूप में उभरा है।
  • अध्ययन के नतीजों से यह प्रदर्शित होता है कि सर्वेक्षण में शामिल किये गये 43.99 प्रतिशत बच्चों को स्मार्टफोन उपलब्ध है और अन्य 43.99 प्रतिशत छात्रों को बेसिक फोन उपलब्ध है, जबकि 12.02 प्रतिशत के पास इन दोनों में से कोई भी फोन उपलब्ध नहीं है।
  • 31.01 प्रतिशत बच्चों के घर टीवी नहीं है।
  • इस तरह, यह पता चलता है कि सीखने की प्रक्रिया के लिये सिर्फ स्मार्टफोन का उपयोग करना एकमात्र समाधान नहीं है।

पृष्ठभूमि

  • गौरतलब है कि कोरोना वायरस संक्रमण को फैलने से रोकने के लिये 25 मार्च से लागू लॉकडाउन के दौरान स्कूल और कॉलेज बंद हैं। इस वजह से इन संस्थानों ने शिक्षण कार्य और पठन-पाठन की गतिविधियों के लिये ऑनलाइन मंच का रूख किया है।
  • आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक देश में 35 करोड़ से अधिक छात्र हैं। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि उनमें से कितने के पास डिजिटल उपकरण या इंटरनेट उपलब्ध हैं।
  • स्माइल फाउंडेशन के सह संस्थापक शांतनु मिश्रा ने कहा कि अध्ययन के नतीजों से यह स्पष्ट रूप से प्रदर्शित होता है कि ‘डिजिटल डिवाइड’ एक असली चुनौती है तथा इसे पाटने के लिये पूरे राष्ट्र में विभिन्न कदम उठाये जाने की जरूरत है। जिन लोगों के पास सूचना प्रौद्योगिकी उपलब्ध है और जिनके पास यह उपलब्ध नहीं है, उनके बीच मौजूद इस अंतराल को डिजिटल डिवाइड कहा जाता है।

पीएम केयर्स फंड

चर्चा में क्यों?

  • पीएम केयर्स फंड के ऑडिट के लिए दिल्ली की एक फर्म को जिम्मा सौंपा गया है। लाइव मिंट की खबर के मुताबिक दिल्ली स्थित चार्टर्ड अकाउंटेंसी फर्म SARC & Associates प्रधानमंत्री की नागरिक सहायता और आपातकालीन स्थिति (पीएम केयर) फंड का ऑडिट करेगा। स्वतंत्र ऑडिटर को तीन साल के लिए नियुक्त किया गया है।

पृष्ठभूमि

  • यह नियुक्ति इसलिए और भी महत्वपूर्ण है क्योंकि आलोचकों ने राहत कार्यों के लिए प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (पीएमएनआरएफ) के अलावा बने इस पीएम केयर्स फंड के औचित्य पर सवाल उठाया है। विपक्षी दल इस निधि से धन के उपयोग के बारे में अधिक पारदर्शिता की लगातार मांग कर रहे हैं।

पीएम-केयर्स फंड के बारे में

  • कोविड-19 महामारी जैसी किसी भी तरह की आपातकालीन या संकट की स्थिति से निपटने के प्राथमिक उद्देश्य के साथ एक समर्पित राष्ट्रीय निधि की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए और उससे प्रभावित लोगों को राहत प्रदान करने के लिए ‘आपात स्थितियों में प्रधानमंत्री नागरिक सहायता और राहत कोष (पीएम केयर्स फंड)’ के नाम से एक सार्वजनिक धर्मार्थ ट्रस्ट बनाया गया है।
  • प्रधानमंत्री, PM CARES कोष के पदेन अध्यक्ष और भारत सरकार के रक्षा मंत्री, गृह मंत्री और वित्त मंत्री, निधि के पदेन ट्रस्टी होते हैं। बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज के अध्यक्ष (प्रधानमंत्री) के पास 3 ट्रस्टीज को बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज में नामित करने की शक्ति होगी, जो अनुसंधान, स्वास्थ्य, विज्ञान, सामाजिक कार्य, कानून, लोक प्रशासन और परोपकार के क्षेत्र में प्रतिष्ठित व्यक्ति होंगे। ट्रस्टी नियुक्त किया गया कोई भी व्यक्ति निशुल्क रूप से कार्य करेगा।
  • पीएम-केयर्स फंड में दानदी गई रकम पर इनकम टैक्‍स से 100 फीसदी छूट मिलेगी। यह राहत इनकम टैक्‍स कानून के सेक्‍शन 80जी के तहत मिलेगी। पीएम-केयर्स फंड में दान भी कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी (CSR) व्यय के रूप में गिना जाएगा। वहीं पीएम केयर्स फंड को भी FCRA के तहत छूट मिली है और विदेशों से दान प्राप्त करने के लिए एक अलग खाता खोला गया है। इससे विदेशों में स्थित व्यक्ति और संगठन पीएम केयर्स फंड में दान दे सकते हैं। यह प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (पीएमएनआरएफ) की ही तरह है। पीएमएनआरएफ को 2011 से एक सार्वजनिक ट्रस्ट के रूप में विदेशी योगदान भी मिला है।

:: अंतर्राष्ट्रीय समाचार ::

भारत-नेपाल सीमा विवाद

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में नेपाल की संसद ने विवादित राजनीतिक नक्शे को लेकर पेश किए गए संविधान की तीसरी अनुसूची में संशोधन विधेयक को मंजूरी दे दी है।

पृष्ठभूमि

  • कुछ दिनों पहले भारत द्वारा 17000 फुट की ऊंचाई पर स्थित लिपूलेख दर्रे को उत्तराखंड के धारचूला से जोड़ने वाली 80 किलोमीटर लंबें रणनीति सर्कुलर लिंक रोड का उद्घाटन किया गया है। जिसको लेकर नेपाल द्वारा आपत्ति जताई गयी थी एवं प्रतिक्रिया स्वरुप नेपाल के कैबिनेट ने एक नया राजनीतिक मानचित्र को अपनाया जिसमें लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा को नेपाली क्षेत्र में दर्शाया गया है।

लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा की भौगोलिक अवस्थिति और महत्व

  • लिपुलेख दर्रा कालापानी के निकट सबसे पश्चिमी क्षेत्र है जिसके जरिये प्राचीन काल से 1962 तक चीन से भारत का व्यापार समेत कैलाश मानसरोवर यात्रा में इस मार्ग का इस्तेमाल होता रहा है। पुनः1991-92 में में लिपुलेख दर्रे को व्यापारिक मार्ग हेतु खोला गया। लिम्पियाधुरा, कालापानी के सुदूर उत्तर पश्चिम में स्थित एक महत्वपूर्ण इलाका है जहाँ से काली नदी की एक धारा का उद्गम होता है।
  • काली नदी का उद्गम स्थल वाले कालापानी 372 वर्ग किलोमीटर में फैला एक मत्वपूर्ण सामरिक इलाका है। इसे भारत-चीन और नेपाल का ट्राई जंक्शन भी कहा जाता है। भारत इसे जहाँ उत्तराखंड के पिथौरागढ़ का हिस्सा मानता वाही नेपाल इसे दार्चुला जिले का हिस्सा बताता है।
  • चीन हिमालय क्षेत्र में प्रभाव बनाने के लिए अंधाधुंध निर्माण कार्य कर रहा है जिससे यहाँ चीनी सेना की पकड़ बहुत मजबूत हो गई है। चीन-नेपाल के बढ़ते प्रगाढ़ संबंध के बीच चीनी सेना पर नजर रखने एवं सैन्य संतुलन स्थापित करने के लिए इस क्षेत्र का बड़ा ही रणनीतिक महत्व है।

क्या है नेपाल का दृष्टिकोण?

  • नेपाल सुगौली समझौते (1816) के तहत काली नदी के पूर्वी क्षेत्र, लिंपियादुरा, कालापानी और लिपुलेख पर अपना दावा करता है। इसी आधार पर नेपाल भारतीय उपस्थिति को अवैध बताता है। लिपूलेख दर्रे-धारचूला लिंक रोड के साथ-साथ जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन कानून के उपरान्त जारी नए राजनीतिक नक्शा पर भी नेपाल ने आपत्ति जताई थी।

क्या है सुगौली संधि?

  • नेपाल और ब्रिटिश इंडिया के बीच 1816 में सुगौली संधि हुई थी। इस संधि में तहत काली(महाकाली) नदी के पूरब का इलाका नेपाल का माना गया। इसके अलावा सुगौली संधि के तहत ही गंडक नदी को भारत-नेपाल के बीच की सीमा माना गया है। जहाँ काली नदी के कई धाराओं के होने एवं इसके अलग-अलग उदगम होने से वही दूसरी गंडक नदी की धारा का प्रवाह बदलने से भारत और नेपाल सीमा को लेकर विवाद कायम है।

पारासेल द्वीप

चर्चा में क्यों?

  • वियतनाम ने विवादित पारासेल द्वीप समूह में चीन के हालिया केबल बिछाने पर आपत्ति जताते हुए कहा कि यह वियतनामी संप्रभुता का उल्लंघन है। रेडियो फ्री एशिया (RFA) ने वियतनामी विदेश मंत्रालय के हवाले से कहा कि देश ने एक वियतनामी चौकी के आसपास चीनी समुद्री मिलिशिया की उपस्थिति के लिए एक स्पष्ट प्रतिक्रिया में दक्षिण चीन सागर में एक अन्य प्रतियोगिता द्वीप श्रृंखला में एक तटरक्षक पोत तैनात किया है।
  • यूएस-आधारित विशेषज्ञों ने कहा कि केबल कार्य ने अंदेशा दिया है कि चीन पारासेल में अपने कब्जे वाले सुविधाओं के लिए एक अंडरसीट सर्विलांस सिस्टम स्थापित कर रहा है, जिससे इस क्षेत्र का सैन्यीकरण हो रहा है।

पृष्ठभूमि

  • वियतनाम और चीन दोनों दक्षिण चीन सागर के उत्तर में चट्टानों और चट्टानों की एक श्रृंखला, पारासेल द्वीप समूह का दावा करते हैं। दक्षिण चीन सागर में स्थित पारासेल द्वीपसमूह को लेकर चीन, ताइवान एवं वियतनाम के बीच विवाद है।'वियतनाम के अनुसार उनके पास पर्याप्त ऐतिहासिक साक्ष्य और कानूनी आधार हैं जो होआंग सा (पारासेल) और ट्रूंग सा (स्प्रैटली) द्वीपसमूह पर अंतर्राष्ट्रीय कानून के अनुसार अपनी संप्रभुता की पुष्टि करते हैं।

सऊदी अरब की तेल सुविधाओं पर हमले की UN की रिपोर्ट

चर्चा में क्यों?

  • ईरान के विदेश मंत्रालय ने पिछले साल सऊदी अरब की तेल सुविधाओं पर मिसाइल और ड्रोन हमलों में अपनी 'भागीदारी' को लेकर संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट को खारिज कर दिया।
  • ईरान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि मुमकिन है कि संयुक्त राष्ट्र ने अमेरिका के 'राजनीतिक दबाव' में रिपोर्ट तैयार की होगी। बिना किसी संदेह के, इस तरह की रिपोर्टों से क्षेत्र की शांति और सुरक्षा में मदद नहीं मिलेगी।

पृष्ठभूमि

  • गौरतलब है कि संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को एक हालिया रिपोर्ट में बताया है कि 2019 में सऊदी तेल सुविधाओं पर हमलों में इस्तेमाल क्रूज मिसाइल और ड्रोन 'ईरानी मूल' के थे।

:: अर्थव्यवस्था ::

कॉरपोरेट दिवाला शोधन समाधान एवं बिक्री प्रक्रिया पर एक सलाहकार समिति

चर्चा में क्यों?

  • भारतीय दिवाला एवं ऋणशोधन अक्षमता बोर्ड (आईबीबीआई) ने चार नये सदस्यों को शामिल कर कॉरपोरेट दिवाला शोधन समाधान एवं बिक्री प्रक्रिया पर एक सलाहकार समिति का पुनर्गठन किया।

पृष्ठभूमि

  • भारतीय दिवाला एवं ऋणशोधन अक्षमता बोर्ड (आईबीबीआई) द्वारा कॉरपोरेट दिवाला शोधन समाधान एवं बिक्री प्रक्रिया पर एक सलाहकार समिति का पुनर्गठन किया। इसका गठन अगस्त 2017 में किया गया था।इस समिति के अध्यक्ष प्रख्यात बैंकर उदय कोटक हैं।

न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP)

चर्चा में क्यों?

  • केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग तथा सूक्ष्‍म, लघु एवं मझौले उद्यम मंत्री श्री नितिन गडकरी ने मीडिया के एक वर्ग में जारी ऐसी खबरों का जोरदार खण्‍डन किया है, जिनमें उनका मिथ्‍या रूप से हवाला देते हुए एमएसपी में कमी किए जाने की संभावना की बात कही गई है। श्री गडकरी ने कहा कि ऐसी खबरें मिथ्‍या ही नहीं, बल्कि दुर्भावनापूर्ण भी हैं।

क्या है न्यूनतम समर्थन मूल्य ?

  • किसानों को कृषि उपज का उचित मूल्य दिलाने तथा किसानो से कृषि कार्यों पर भय मुक्त अधिक पूंजी लगवाने व कृषि उपज बढ़ाने का प्रोत्साहन के लिए सरकार द्वारा समय-समय पर बुवाई से पूर्व ही फसलों की उपज का एक उचित मूल्य की घोषणा करती है जिसे फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (minimum support price) कहा जाता है। न्यूनतम समर्थन मूल्य कृषि उत्पादकों के लिए एक प्रकार की बीमा कीमत होती है। इसके द्वारा उत्पादक कृषकों को भारत सरकार आश्वासन देती है कि खाद्यान्नों की कीमतें नियत कीमत से नीचे नहीं गिरने दी जाएगी। यदि कीमतें न्यूनतम समर्थन मूल्य से नीचे गिरती है तो सरकार स्वयं ही घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य पर पर ही खाद्यान्नों की क्रय कर लेगी।

कौन जारी करता है न्यूनतम समर्थन मूल्य?

  • न्यूनतम समर्थन मूल्य का निर्धारण कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (CACP-Agriculture Cost And Price Commission) द्वारा वर्ष में दो बार खरीफ एवं रबी की फसलों की बुवाई के पूर्व किया जाता है। कृषि लागत एवं मूल्य आयोग की स्थापना का मुख्य उद्देश्य किसानों को बिचौलियों के शोषण से बचाकर उनके कृषि उत्पाद को उचित मूल्य प्रदान करना है। इसकी स्थापना जनवरी 1965 में खाद्य मूल्य नीति समिति 1964 की सिफारिश पर कृषि मूल्य आयोग के रूप में हुई थी लेकिन 1985 में इस संस्था के नाम का संशोधन करते हुए इसमें 'लागत' शब्द भी जोर दिया गया जिससे 1985 के बाद इस संस्था का पूरा नाम कृषि लागत एवं मूल्य आयोग हो गया। वर्तमान में इस आयोग के द्वारा 24 कृषि फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य जारी किये जाते हैं।

:: विज्ञान और प्रौद्योगिकी ::

विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार नीति (एसटीआईपी) 2020

चर्चा में क्यों?

  • भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रोफेसर के. विजय राघवन और डीएसटी के सचिव प्रोफेसर आशुतोष शर्मा ने विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार नीति (एसटीआईपी) 2020 के निर्माण के लिए आम लोगों और विशेषज्ञों से परामर्श प्राप्त करने हेतु एसटीआईपी 2020 टाउन हॉल मीट, ट्रैक-I लॉन्च किया।

विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार नीति के बारें में

  • भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार का कार्यालय (पीएसए का कार्यालय) और विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) ने नई राष्ट्रीय विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार नीति (एसटीआईपी 2020) के निर्माण के लिए एक परामर्श प्रक्रिया शुरू की है। इस प्रक्रिया में हितधारकों की एक विस्तृत श्रृंखला को जोड़ा गया है।
  • एसटीआईपी 2020 निर्माण प्रक्रिया को 4 श्रेणियों (ट्रैक) में आयोजित किया जा रहा है। इसके तहत नीति निर्माण के लिए बड़ी संख्या में हितधारकों को परामर्श के लिए जोड़ा जायेगा। ट्रैक I में साइंस पॉलिसी फोरम के माध्यम से आम लोगों और विशेषज्ञों की व्यापक परामर्श प्रक्रिया शामिल है। फोरम, नीति निर्माण प्रक्रिया के दौरान और बाद में आम लोगों और विशेषज्ञों से इनपुट प्राप्त करने के लिए एक समर्पित मंच के रूप में कार्य करेगा। ट्रैक II के तहत नीति-निर्माण प्रक्रिया में विशेषज्ञों के विषयगत परामर्श व साक्ष्य-आधारित सिफारिशों को शामिल किया जायेगा। इस उद्देश्य के लिए इक्कीस (21) विषयगत समूहों का गठन किया गया है। ट्रैक III में मंत्रालयों और राज्यों के साथ परामर्श किये जायेंगे, जबकि ट्रैक IV के अंतर्गत शीर्ष स्तर के बहु-हितधारकों के परामर्श प्राप्त किये जायेंगे।
  • विभिन्न श्रेणियों (ट्रैक) के अंतर्गत परामर्श प्रक्रियाएं पहले ही शुरू हो चुकी हैं और समानांतर रूप से चल रही हैं। ट्रैक II विषयगत समूह (टीजी) परामर्श, सूचना सत्रों की एक श्रृंखला के साथ शुरू हुआ, और ट्रैक -1 को विशेषज्ञों के साथ-साथ आम लोगों से इनपुट प्राप्त करने के लिए लॉन्च किया गया।
  • पूरी प्रक्रिया के समन्वय के लिए डीएसटी (प्रौद्योगिकी भवन) में एक सचिवालय स्थापित किया गया है जो नीतियों के सम्बन्ध में जानकारी एवं डेटा सहयोग प्रदान करेगा। इसका संचालन डीएसटी-एसटीआई के नीति विशेषज्ञों की एक टीम कर रही है।

:: विविध ::

अनमोल नारंग

  • अमेरिका में एक भारतीय महिला इतिहास रचने जा रही है। सेकंड लेफ्टिनेंट अनमोल नारंग वेस्ट प्वाइंट स्थित अमेरिकी सैन्य अकादमी से स्नातक की डिग्री प्राप्त करने वाली पहली सिख महिला बनकर इतिहास रचेंगी। वैसे, नारंग का जन्म अमेरिका में हुआ है। जॉर्जिया के रोजवेल में नारंग की परवरिश हुई। उन्होंने जॉर्जिया प्रौद्योगिकी संस्थान से स्नातक की पढ़ाई की और उसके बाद वेस्ट प्वाइंट गईं, जहां वह परमाणु इंजीनियरिंग में भारतीय समयानुसार आज देर शाम (अमेरिकी समय के अनुसार शनिवार सुबह) को स्नातक की डिग्री हासिल करेंगी।

अंतरराष्ट्रीय एल्बीनिज़्म यानी रंगहीनता जागरूकता दिवस-13 जून

  • प्रति वर्ष 13 जून को दुनिया भर में रंगहीनता की अवस्था में रह रहे लोगों के गरिमामय जीवन, मानवाधिकार, मूलभूत अधिकार्रों के साथ सामान्य और सुरक्षित जीवन जीने का अधिकार के लिए ‘अंतरराष्ट्रीय एल्बीनिज़्म यानी रंगहीनता जागरूकता दिवस’ मनाया जाता है। इसके ज़रिए रंगहीनता के साथ रह रहे लोगों को पहचानने, उनके साथ एकजुटता दिखाने और उनके लिए समर्थन जुटाने की अपील की जा रही है। वर्ष 2020 के अंतरराष्ट्रीय रंगहीनता जागरूकता दिवस की थीम " मेड तो शाइन-Made to Shine" है।
  • टिकाऊ विकास लक्ष्यों के एजेंडा में किसी को भी पीछे न छोड़ने का वादा किया गया है लेकिन रंगहीनता की अवस्था में रह रहे लोग विकास प्रक्रिया में काफ़ी पीछे छूट गए हैं।संयुक्त राष्ट्र उनके रास्ते में आने वाली बाधाओं को दूर करने, उनके मानवाधिकारों की रक्षा करने और उन्हें समान अवसर उपलब्ध कराने का प्रयास कर रहा है।

क्या है एल्बीनिज़म यानी रंगहीनता?

  • रंगहीनता की वजह से बालों, त्वचा और आंखों में रंजकता यानि पिंगमेंटेशन (मेलेनिन) की कमी हो जाती है जिससे सूरज और तेज़ रोशनी में मुश्किल का सामना करना पड़ता है। मेलेनिन की अनुपस्थिति का कोई इलाज नहीं है और यही रंगहीनता का कारण बनता है।
  • एल्बीनिज़्म यानी रंगहीनता एक दुर्लभ, ग़ैर-संक्रामक, अनुवांशिक रूप से जन्म के समय ही मौजूद रहने वाली त्वचा स्थिति है। ये पूरी दुनिया में और महिलाओं और पुरुषों - सभी में पाई जाती है।
  • रंगहीनता की स्थिति वाले अधिकांश लोग मंददृष्टि की समस्या से पीड़ित होते हैं और उन्हें त्वचा का कैंसर होने का ख़तरा भी ज़्यादा होता है।

:: प्रिलिम्स बूस्टर ::

  • हाल ही में नए सदस्यों की नियुक्ति से चर्चा में रहे ‘कॉरपोरेट दिवाला शोधन समाधान एवं बिक्री प्रक्रिया पर सलाहकार समिति’ के अध्यक्ष कौन हैं? (उदय कोटक)
  • किस संस्था के द्वारा प्रौद्योगिकी की उपलब्धता पर ‘कोविड-19 के बीच परिदृश्य -- जमीनी स्थिति एवं संभावित समाधान’ शीर्षक से रिपोर्ट जारी की गई? (स्माइल फाउंडेशन)
  • हाल ही में अमेरिकी सैन्य अकादमी से स्नातक की डिग्री प्राप्त करने वाली पहली सिख महिला की उपलब्धि किसने हासिल की है? (अनमोल नारंग)
  • हाल ही में ऑडिट का कार्य सौंपने से चर्चा में रहे PM CARES कोष के बोर्ड आफ ट्रस्टीस का अध्यक्ष एवं पदेन ट्रस्टी कौन होता है? (प्रधानमंत्री अध्यक्ष, रक्षा मंत्री, गृह मंत्री और वित्त मंत्री)
  • नितिन गडकरी द्वारा खंडन करने से चर्चा में रहे ‘ न्यूनतम समर्थन मूल्य’ की सिफारिश किस संस्था के द्वारा की जाती है एवं इसकी स्थापना कब हुई थी? (कृषि लागत और मूल्य आयोग,1965)
  • हाल ही में समुद्र में केबल बिछाने पर गतिरोध से चर्चा में ‘पारासेल द्वीप समूह’ किस सागर में स्थित है एवं इसको लेकर किन देशों के मध्य विवाद है? (दक्षिण चीन सागर; चीन और वियतनाम)
  • हाल ही में नेपाली संसद के द्वारा पास किए गए संविधान की तीसरी अनुसूची में संशोधन से संबंधित विधेयक किससे संबंधित है? (लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा पर नेपाल के दावे से)
  • हाल ही में किस नई विज्ञान नीति के निर्माण हेतु आम लोगों और विशेषज्ञों से परामर्श हेतु टाउन हॉल मीट, ट्रैक-I लॉन्च किया? (विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार नीति-एसटीआईपी) 2020
  • हाल ही में सरकार द्वारा वास्तविक समय पर महत्वपूर्ण स्वास्थ्य आपूर्ति की उपलब्धता प्रदान करने हेतु किस आपूर्ति श्रृंखला पोर्टल को प्रारंभ किया गया है? (आरोग्यपथ)
  • किस तिथि को प्रतिवर्ष अंतरराष्ट्रीय एल्बीनिज़्म या रंगहीनता जागरूकता दिवस मनाया जाता है एवं इस वर्ष इसकी थीम क्या थी? (13जून, मेड टू शाइन-Made to Shine)
  • अंतरराष्ट्रीय दिवस से चर्चा में रहे दुर्लभ बीमारीएल्बीनिज़्म या रंगहीनता किन कारणों से होती है? (मेलेनिन नामक पिंगमेंटेशन की कमी से)

स्रोत साभार: Dainik Jagran (Rashtriya Sanskaran), Dainik Bhaskar (Rashtriya Sanskaran), Rashtriya Sahara (Rashtriya Sanskaran) Hindustan Dainik (Delhi), Nai Duniya, Hindustan Times, The Hindu, BBC Portal, The Economic Times (Hindi & English), PTI, PIB

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