(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (16 अप्रैल 2020)

दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर


(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (16 अप्रैल 2020)


:: राष्ट्रीय समाचार ::

दुनियाभर में सबसे तेजी से पांच करोड़ डाउनलोड वाला एप: आरोग्य से

  • कोरोना संक्रमितों पर नजर रखने व उनकी पहचान करने के लिए सरकार की तरफ से लांच किए गए आरोग्य सेतु एप ने कीर्तिमान स्थापित किया है। वह 13 दिनों के भीतर सबसे तेजी से पांच करोड़ डाउनलोड किए जाने वाला एप बन गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को राष्ट्र के नाम संबोधन के दौरान लोगों से आरोग्य सेतु एप को डाउनलोड करने की अपील भी की थी।

क्या है आरोग्य सेतु?

  • आरोग्य सेतु एप मोबाइलधारक को आसपास आने वाले कोरोना संक्रमितों के बारे में सावधान करता है। साथ ही वह संक्रमण के खतरे के स्तर को भी बताता है। इसका विकास प्रधानमंत्री की तरफ से गठित कमेटी ने किया है, जिसमें नीति आयोग, इलेक्ट्रॉनिक और सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्रलयों की प्रमुख भूमिका रही है।
  • सूत्रों का कहना है कि कमेटी में शामिल टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज व टेक महिंद्रा इस एप में और सुविधाओं को जोड़ने की दिशा में काम कर रही हैं।
  • सेना ने सभी जवानों, भूतपूर्व सैनिकों और उनके परिजनों को आरोग्य सेतु एप डाउनलोड करने की सलाह दी है। उधर, प्रसार भारती ने अपने सभी कर्मचारियों के लिए मोबाइल फोन में इस एप को इंस्टाल करना अनिवार्य कर दिया है।

अनिवार्य इंग्लिश मीडियम शिक्षा पर आंध्र सरकार का आदेश रद्द

  • आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को करारा झटका दिया है। कोर्ट ने बुधवार को प्रदेश की जगनमोहन रेड्डी सरकार के उस आदेश को रद कर दिया , जिसमें सभी सरकारी स्कूलों को इंग्लिश मीडियम में अनिवार्य रूप से तब्दील करने को कहा गया था। कोर्ट ने कहा कि शिक्षा का माध्यम वही होना चाहिए जो बच्चों और उनके अभिभावकों को पसंद हो।

पृष्ठ्भूमि

  • राज्य सरकार ने प्रदेश के सभी सरकारी स्कूलों को शैक्षणिक सत्र 2020-21 से इंग्लिश मीडियम में तब्दील करने का आदेश दिया था। मुख्यमंत्री वाईएस जगनमोहन रेड्डी ने सरकार के इस कदम को यह कहते हुए सही ठहराया था कि इससे शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा। गरीब वर्ग के बच्चे भी अच्छी शिक्षा पा सकेंगे और इससे वह दूसरों के साथ प्रतिस्पर्धा के काबिल बनेंगे। उन्होंने विरोध कर रहे नेताओं से कहा था कि वे इस कदम का तभी विरोध करें जब उनके बच्चे इंग्लिश मीडियम स्कूलों में न पढ़े हों।
  • इस आदेश को जनहित याचिकाओं के जरिये हाई कोर्ट में चुनौती दी गई थी। मुख्य न्यायाधीश जेके माहेश्वरी और जस्टिस एन. जयसूर्या ने फरवरी में इस मामले में आदेश सुरक्षित रख लिया था। शिक्षाविदों, विपक्षी नेताओं और विभिन्न समुदायों के प्रतिनिधियों ने राज्य के सरकारी स्कूलों में तेलुगु या उर्दू की जगह अंग्रेजी को शिक्षण का मध्यम बनाए जाने का विरोध किया था। यहां तक कि उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने भी इस फैसले का विरोध करते हुए स्कूली स्तर पर मातृभाषा में शिक्षा दिए जाने की सिफारिश की थी।

कोरोना वायरस के प्रभाव के आधार पर राज्यों को अपने जिले का वर्गीकरण

  • स्वास्थ्य मंत्रलय ने कोरोना वायरस के प्रभाव के आधार पर राज्यों को अपने जिले को रेड, आरेंज और ग्रीन जोन में निर्धारित करने का निर्देश दिया है। देश के 170 जिलों को रेज जोन में रखा गया है।
  • स्वास्थ्य मंत्रलय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल के अनुसार, देश में 170 जिले रेड जोन और 207 जिले आरेंज जोन है। जाहिर है देश में कुल 736 जिलों में 359 जिले पूरी तरह से कोराना से मुक्त हैं और ग्रीन जोन में हैं।
  • रेड और आरेंज जोन में कोरोना वायरस का कंटेनमेंट प्लान लागू होगा। वहां किसी तरह की आर्थिक गतिविधि की इजाजत नहीं दी जाएगी।
  • ग्रीन जोन में शारीरिक दूरी और मास्क की अनिवार्यता के साथ आर्थिक व सामाजिक गतिविधियों की इजाजत मिलेगी।
  • 28 दिन तक कोरोना का मरीज सामने नहीं आने पर आरेंज जोन ग्रीन जोन में बदल जाएगा।

रेड और आरेंज जोन में अंतर

  • रेड जोन में वे इलाके हैं, जहां कोरोना के हॉटस्पॉट हैं। आरेंज जोन में कोई हॉटस्पॉट एरिया नहीं है। रेड जोन को भी दो भागों में बांटा गया है। रेड जोन में कुछ ऐसे इलाके हैं, जहां कोरोना का आउटब्रेक हुआ है। ऐसे जिलों की संख्या 123 है। कुछ रेड जोन वाले जिले में कोरोना के बहुत सारे मरीज सामने आए हैं। वहां कलस्टर बन गए हैं। ऐसे जिलों की संख्या 47 हैं।
  • स्वास्थ्य मंत्रलय के अनुसार बिहार का सीवान, दिल्ली के दक्षिणी, दक्षिणी पूर्वी, शाहदरा, पश्चिमी उत्तरी और मध्य दिल्ली, उत्तरप्रदेश के आगरा, नोएडा, मेरठ, लखनऊ गाजियाबाद, शामली, फिरोजाबाद, मुरादाबाद और सहारनपुर जिले कोरोना आउटब्रेक वाले रेड जोन में शामिल हैं। बिहार का मुंगेर, बेगुसराय और गया, दिल्ली का उत्तरी-पश्चिमी, उत्तराखंड के नैनीताल और उधम सिंह नगर और उत्तरप्रदेश के बुलंदशहर, सीतापुर, बस्ती और बागपत रेड जोन के कलस्टर वाले जिलों में है। बिहार के गोपालगंज, नवादा, भागलपुर, सारन, लखीसराय, नालंदा, पटना, दिल्ली का उत्तरी-पूर्वी क्षेत्र, उप्र के कानपुर नगर, वाराणसी, अमरोहा, हापुड़, महाराजगंज, प्रतापगढ़ और रामपुर जैसे जिले आरेंज जोन में शामिल हैं, जहां न तो कोरोना का कलस्टर और न ही आउटब्रेक हुआ है। यहां कुछ केस पाए गए थे।

अखिल भारतीय कृषि परिवहन कॉल सेंटर नम्‍बर

  • केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्‍याण मंत्री श्री नरेन्‍द्र सिंह तोमर ने कोविड-19 के खतरे के कारण जारी लॉकडाउन की मौजूदा परिस्थिति के दौरान खराब होने वाले उत्‍पादों को एक राज्‍य से दूसरे राज्‍य में भेजने के लिए आज कृषि भवन में आयोजित एक समारोह में अखिल भारतीय कृषि परिवहन कॉल सेंटर लॉन्‍च किया। इस कॉल सेंटर के नम्‍बर 18001804200 और 14488 हैं। इन नम्‍बरों पर दिन या रात को किसी भी समय मोबाइल या लैंडलाइन फोन से कॉल किया जा सकता है।
  • 24x7 सेवा प्रदान करने वाला यह अखिल भारतीय कृषि परिवहन कॉल सेंटर खराब होने वाले सब्जियों और फलों, बीज, कीटनाशक और उवर्रक आदि जैसे कृषि उत्‍पादों को एक स्‍थान से दूसरे स्‍थान पर भेजने के लिए राज्‍यों के बीच अंतर-राज्‍यीय सहयोग के लिए कृषि, सहयोग एवं किसान कल्‍याण विभाग (डीएसीएंडएफडब्‍ल्‍यू) भारत सरकार की एक पहल है।
  • कृषि, बागवानी या बीज और उर्वरकों के अलावा अन्‍य खराब होने वाली वस्‍तुओं को एक से दूसरे राज्‍य में भेजने में कठिनाइयों का सामना कर रहे ट्रक चालक और सहायक, व्‍यापारी, खुदरा व्‍यापारी, ट्रांसपोर्टर्स, किसान, विनिर्माता या अन्‍य हितधारक इस कॉल सेंटर पर सम्‍पर्क करके मदद मांग सकते हैं। कॉल सेंटर एक्‍जीक्‍यूटिव्‍स राज्‍य सरकार के अधिकारियों को मसलों को सुलझाने में सहायता करने के साथ-साथ वाहनों और खेप के विवरण उपलब्‍ध कराएंगे।
  • इफ्को किसान संचार लिमिटेड (आईकेएसएल) की ओर से फरीदाबाद, हरियाणा में उसके कार्यालयों से परिचालित इन कॉल सेंटर लाइन्‍स द्वारा शुरूआत में 10 कस्‍टमर्स एक्‍जीक्‍यूटिव्‍स द्वारा चौबीसों घंटे 8-8 घंटे की तीन पालियों में सेवाएं प्रदान की जाएगी। कॉल सेंटर सेवा को 20 सीट आधारित आवश्‍यकताओं की पूर्ण क्षमता तक विस्‍तारित किया जा सकता है। कॉल सेंटर एक्‍जीक्‍यूटिव्‍स हर प्रकार की समस्‍या के निपटान के रिकॉर्ड को बरकरार रखेंगे और उसे सत्‍यापित करेंगे।

राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA)

  • कोराना वायरस के संक्रमण के बीच कोरोना वॉरियर्स पर हो रहे हमलों से गुस्‍साए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्‍पष्‍ट कर दिया कि पुलिस तथा मेडिकल टीम पर हमला करने वालों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून-NSA- के तहत कार्रवाई होगी। यहां यह जानना जरूरी है कि आखिर क्‍या है राष्ट्रीय सुरक्षा कानून NSA? जानिए कब बना था ये कानून? किन नागरिकों को पकड़ा जा सकता है? इसमें कितने महीने जेल में रहने की सजा मिलती है?

क्‍या है राष्ट्रीय सुरक्षा कानून NSA 1980 (National security act NSA)

  • नाम से ही स्‍पष्‍ट है कि ये कानून जो राष्‍ट्रीय सुरक्षा में बाधा डालने वालों पर नकेल डालने का काम करे। अर्थात राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम-1980, देश की सुरक्षा के लिए सरकार को अधिक शक्ति देने से संबंधित एक कानून है। अगर सरकार को लगता कि कोई व्यक्ति कानून-व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने में उसके सामने बाधा खड़ा कर रहा है तो वह उसे एनएसए के तहत गिरफ्तार करने का आदेश दे सकती है। साथ ही, अगर उसे लगे कि वह व्यक्ति आवश्यक सेवा की आपूर्ति में बाधा बन रहा है तो वह उसे एनएसए के तहत गिरफ्तार करवा सकती है।

कब हुआ था लागू

  • रासुका यानी राष्ट्रीय सुरक्षा कानून NSA 23 सितंबर, 1980 को इंदिरा गांधी की सरकार के कार्यकाल में अस्‍तित्‍व में आया था। ये कानून देश की सुरक्षा मजबूत करने के लिए सरकार को अधिक शक्ति देने से संबंधित है। यह कानून केंद्र और राज्य सरकार को संदिग्ध व्यक्ति को हिरासत में लेने की शक्ति देता है। सीसीपी, 1973 के तहत जिस व्यक्ति के खिलाफ आदेश जारी किया जाता है, उसकी गिरफ्तारी भारत में कहीं भी हो सकती है।

कब-कब हो सकती है गिरफ्तारी

  • अगर सरकार को लगता है कि कोई व्यक्ति उसे देश की सुरक्षा सुनिश्चित करने वाले कार्यों को करने से रोक रहा है तो वह उसे एनएसए के तहत गिरफ्तार करने की शक्ति दे सकती है। 
  • यदि सरकार को लगता है कि कोई व्यक्ति कानून व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने में उसके सामने बाधा खड़ी कर रहा है को वह उसे हिरासत में लेने का आदेश दे सकती है।
  • इस कानून का इस्तेमाल जिलाधिकारी, पुलिस आयुक्त, राज्य सरकार अपने सीमित दायरे में भी कर सकती है।

कितने महीने जेल में

  • राष्ट्रीय सुरक्षा कानून NSA के तहत किसी संदिग्ध व्यक्ति को बिना किसी आरोप के 12 महीने तक जेल में रखा जा सकता है। राज्य सरकार को यह सूचित करने की आवश्यकता है कि NSA के तहत व्यक्ति को हिरासत में लिया गया है।
  • राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत हिरासत में लिए गए व्यक्ति को उनके खिलाफ आरोप तय किए बिना 10 दिनों के लिए रखा जा सकता है। हिरासत में लिया गया व्यक्ति उच्च न्यायालय के सलाहकार बोर्ड के समक्ष अपील कर सकता है लेकिन उसे मुकदमे के दौरान वकील की अनुमति नहीं है।

यह होती है पूरी प्रक्रिया

  • कानून के तहत उसे पहले तीन महीने के लिए गिरफ्तार किया जा सकता है। फिर, आवश्यकतानुसार, तीन-तीन महीने के लिए गिरफ्तारी की अवधि बढ़ाई जा सकती है। एकबार में तीन महीने से अधिक की अवधि नहीं बढ़ाई जा सकती है। अगर, किसी अधिकारी ने ये गिरफ्तारी की हो तो उसे राज्य सरकार को बताना होता है कि उसने किस आधार पर ये गिरफ्तारी की है। जब तक राज्य सरकार इस गिरफ्तारी का अनुमोदन नहीं कर दे, तब तक यह गिरफ्तारी बारह दिन से ज्यादा नहीं हो सकती। अगर अधिकारी पांच से दस दिन में जवाब दाखिल करता है तो ये अवधि 12 की जगह 15 दिन की जा सकती है। अगर रिपोर्ट को राज्य सरकार मंजूर कर देती है तो इसे सात दिनों के भीतर केंद्र सरकार को भेजना होता है। इसमें इस बात का जिक्र करना आवश्यक है कि किस आधार पर यह आदेश जारी किया गया और राज्य सरकार का इसपर क्या विचार है और यह आदेश क्यों जरूरी है।

क्‍यों पड़ी जरूरत

  • रामपुर, मेरठ, मुजफ्फनगर तथा अलीगढ़ में मेडिकल टीम पर हमले की जानकरी मिलने के बाद से सीएम योगी आदित्यनाथ बेहद नाराज हैं। सीएम योगी आदित्यनाथ ने साफ कहा है कि पुलिस तथा मेडिकल टीम पर हमला करने वालों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून-NSA के तहत कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा कि इंदौर तथा कर्नाटक जैसी घटना यूपी में किसी कीमत पर नहीं होनी चाहिए। प्रदेश में गाजियाबाद के साथ अन्य मामले में जो दोषी हैं, उन्हें कानून का पालन करना सिखाओ। प्रदेश सरकार ने आदेश दिया है कि जहां भी अभी तक ऐसे मामले सामने आए हैं, वहां पर तत्काल कार्रवाई हो। इसके साथ ही अब जहां कहीं भी ऐसा मामला होता है तो दोषी को तत्काल गिरफ्तार किया जाए।

भोपाल गैस त्रासदी

  • करीब 35 साल पहले हुई भयावह औद्योगिक त्रासदी भोपाल गैस कांड की जंग जीतने वाले पांच व्यक्ति कोरोना वायरस महामारी की जंग हार गये। इन पांचों की पांच अप्रैल से लेकर 12 अप्रैल के बीच कोविड-19 से मौत हुई है। कोरोना वायरस के संक्रमण से अब तक भोपाल में कुल पांच व्यक्तियों की मौत हुई और ये पांचों भोपाल गैस त्रासदी के पीड़ित थे।
  • भोपाल में 2-3 दिसंबर 1984 की दरमियानी रात को यूनियन कार्बाइड के कारखाने से रिसने वाली जहरीली गैस 'मिथायल आइसो साईंनाइड की चपेट में आने से हजारों लोग पिछले करीब साढ़े तीन दशक से तमाम स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।

पर्यावरण प्रभाव आकलन (ईआईए) अधिसूचना, 2006 में प्रमुख संशोधन

  • नोवेल कोरोना वायरस (कोविड-19) के वैश्विक प्रकोप से उत्पन्न अभूतपूर्व स्थिति का समाधान करने एवं विभिन्न दवाओं की उपलब्धता या उत्पादन बढ़ाने के लिए पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने 27 मार्च, 2020 को ईआईए अधिसूचना 2006 में एक संशोधन किया है। विभिन्न बीमारियों के उपचार के लिए विनिर्मित थोक दवाओं या मध्यवर्तियों के संबंध में सभी परियोजनाओं या कार्यकलापों को वर्तमान ‘ए‘ कैटेगरी से ‘बी2‘ कैटेगरी में पुनर्वर्गीकृत किया गया है।
  • ‘बी2‘ कैटेगरी में आने वाली परियोजनाओं को बेसलाइन डाटा के संग्रह, ईआईए अध्ययनों एवं सार्वजनिक परामर्श की आवश्यकता से छूट दे दी गई है। ऐसे प्रस्तावों का पुनर्वर्गीकरण राज्य स्तर पर मूल्यांकन के विकेंद्रीकरण को सुगम बनाने के लिए किया गया है जिससे कि प्रक्रिया में तेजी लाई जा सके। सरकार ने यह कदम देश में कम समय में महत्वपूर्ण दवाओं/ड्रग्स की उपलब्धता बढ़ाने के उद्वेश्य से उठाया है। यह संशोधन 30 सितंबर, 2020 तक प्राप्त होने वाले सभी प्रस्तावों पर लागू है। राज्यों को भी ऐसे प्रस्तावों की त्वरित गति से प्रोसेस करने के लिए परामशदात्री जारी कर दिए गए है।
  • इसके अतिरिक्त, दी गई समय सीमा के भीतर प्रस्तावों का त्वरित निपटान सुनिश्चित करने के लिए और इस तथ्य पर विचार करते हुए कि जमीनी स्तर पर वर्तमान में विद्यमान स्थिति को देखते हुए प्रस्तावों का मूल्यांकन भौतिक बैठकों के जरिये संभव नहीं है, मंत्रालय ने राज्यों को वीडियो कांफ्रेंस जैसी सूचना प्रौद्योगिकी का उपयोग करने का सुझाव दिया है।
  • लगभग दो सप्ताह की अवधि के भीतर, इस वर्ग के भीतर 100 से अधिक प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं, जो राज्यों में संबंधित विनियमन प्राधिकारियों द्वारा निर्णय लिए जाने के विभिन्न स्तरों पर हैं।

:: अंतर्राष्ट्रीय समाचार ::

मॉरीशस के निवेशक अब प्राथमिकता सूची में शामिल

  • विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआइ) द्वारा शेयर बाजारों से निकासी की रफ्तार को देखते हुए सरकार ने अब मॉरीशस से आने वाले विदेशी निवेश के प्रति अपनी चिंताओं को एक तरह से ठंडे बस्ते में डाल दिया है। वित्त मंत्रलय ने मॉरीशस से आने वाले विदेशी निवेश को प्राथमिकता वाली श्रेणी (वन) में रख दिया है। इस श्रेणी के निवेशकों पर टैक्स बोझ भी कम होता है और उन्हें कुछ सख्त नियम कानूनों से भी राहत मिलती है। वैसे, पूंजी बाजार नियामक सेबी ने भी इस बारे में सरकार को कदम उठाने की खुली छूट दी हुई है।
  • लेकिन एक उल्लेखनीय तथ्य यह है कि मॉरीशस अभी भी फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) की निगरानी सूची (ग्रे लिस्ट) में है। पाकिस्तान भी एफएटीएफ की निगरानी सूची में है।

पृष्ठभूमि

  • कोराना महामारी के प्रसार के बाद जब संस्थागत निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से निवेश निकालना शुरू किया तो अप्रैल के पहले हफ्ते में मारीशस के रास्ते भारत में पैसा लगाने वाले फंड निवेशकों को वरीयता वाले एफपीआइ के वर्ग में रखने की अनुमति दे दी गई थी। दरअसल, सेबी ने भारत सरकार को यह अनुमति दी थी कि अगर वह चाहे तो एफएटीएफ के दिशानिर्देश नहीं मानने वाले देशों से आने वाले निवेश को भी वरीयता वाली श्रेणी में रखने का अध्यादेश ला सकती है। अभी तक इस श्रेणी में उन्हीं देशों के फंड या निवेश को रखने का प्रावधान था जिनको लेकर एफएटीएफ को कोई आपत्ति नहीं हो।
  • फरवरी, 2020 में ही मॉरीशस को एफएटीएफ ने ग्रे लिस्ट में रखने का फैसला किया था। उसके बाद से ही वहां पंजीयन करा भारत में निवेश करने वाले निवेशकों के लिए समस्या पैदा हो गई थी। असल में घरेलू शेयर बाजारों को हासिल विदेशी निवेश में मॉरीशस की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा रही है।
  • वर्ष 2019 तक के आंकड़े बताते हैं कि देश में आने वाले कुल एफडीआइ में 32 फीसद मॉरीशस, 20 फीसद सिंगापुर और सात फीसद नीदरलैंड्स के रास्ते आए हैं।

जी20 के वित्त मंत्रि‍यों और केंद्रीय बैंकों के गवर्नरों की दूसरी बैठक

  • केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने कोविड-19 महामारी के गहराते संकट के बीच वैश्विक आर्थिक दृष्टिकोण पर चर्चा करने के लिए सऊदी अरब की अध्‍यक्षता में आयोजित जी20 के वित्त मंत्रि‍यों और केंद्रीय बैंकों के गवर्नरों (एफएमसीबीजी) की दूसरी बैठक के वर्चुअल सत्र में भाग लिया।
  • वित्त मंत्री ने कोविड-19 से निपटने हेतु  विशेषकर ‘जी20 कार्य योजना’ तैयार करने के लिए  असाधारण लीडर्स शिखर सम्मेलन के दौरान जी20 के नेताओं द्वारा निर्दिष्‍ट किए गए परिणाम देने हेतु अथक प्रयास करने के लिए सऊदी अरब की अध्‍यक्षता की सराहना की।

ट्रंप ने रोकी डब्ल्यूएचओ को दी जाने वाली आर्थिक मदद

  • अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी पहले दी गई चेतावनी पर अमल करते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) को सालाना दी जाने वाली 50 करोड़ डॉलर (करीब 38,19,02,50,000 रुपये) की आर्थिक सहायता रोकने का एलान किया है। साथ ही चीन से फैली वैश्विक महामारी कोविड-19 को लेकर डब्ल्यूएचओ के गंभीर कुप्रबंधन और दुनिया से हकीकत छिपाने की भूमिका की समीक्षा भी हो रही है।

:: भारतीय अर्थव्यवस्था ::

एमएसएमई के लिए जल्द 10,000 करोड़ रुपये के वृहत कोष को मंजूरी : गडकरी

  • सरकार जल्द सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उपक्रमों (एमएसएमई) के लिए 10,000 करोड़ रुपये के एक वृहत कोष (फंड आफ फंड्स) को मंजूरी देगी। केंद्रीय एमएसएमई मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि यह कोष शेयर बाजारों में सूचीबद्ध होने की मंशा रखने वाले और धन जुटाने के इच्छुक उच्च क्रेडिट रेटिंग वाले एमएसएमई में 15 प्रतिशत तक इक्विटी हिस्सेदारी खरीदने के लिए होगा।
  • उन्होंने बताया कि अलग से भी एक योजना बनाई जा रही है जिसके तहत एमएसएमई को उनके सालाना कारोबार, निर्यात और माल एवं सेवा कर (जीएसटी) भुगतान के आधार पर क्रेडिट रेटिंग दी जाएगी।
  • राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम (एनएसआईसी या कोई अन्य सरकारी निकाय इस कोष का नियंत्रण करेगा। इसके अलावा सरकार चाहती है कि इस कोष के धन का इस्तेमाल एएए यानी ट्रिपल ए रेटिंग वाले एमएसएमई करें। एमएसएमई मंत्री ने कहा, ‘‘10,000 करोड़ रुपये के कोष के प्रस्ताव को वित्त मंत्रालय ने मंजूरी दे दी है। इसे जल्द केंद्रीय मंत्रिमंडल के पास मंजूरी के लिए रखा जाएगा।’’

भारत का विदेश व्यापार : मार्च, 2020

  • भारत से अप्रैल-मार्च 2019-20* में 528.45 अरब अमेरिकी डॉलर का समग्र निर्यात (वस्तुएं एवं सेवाएं) होने का अनुमान लगाया गया है, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 1.36(-) प्रतिशत की नकारात्मक वृद्धि को दर्शाता है। उधर, अप्रैल-मार्च 2019-20* के दौरान 598.61 अरब अमेरिकी डॉलर का समग्र आयात होने का अनुमान लगाया गया है, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 6.33 (-) प्रतिशत की ऋणात्मक वृद्धि को दर्शाता है।

I. वस्तुओं का व्यापार

निर्यात (पुनर्निर्यात सहित)

  • मार्च, 2020 में 21.41 अरब अमेरिकी डॉलर का निर्यात हुआ, वहीं मार्च 2019 में हुए 32.72 अरब अमेरिकी डॉलर के निर्यात की तुलना में 34.57 (-) प्रतिशत की नकारात्मक वृद्धि को दर्शाता है। रुपये के लिहाज से मार्च, 2020 में निर्यात 1,59,157.98 करोड़ रुपये का हुआ वहीं मार्च, 2019 में निर्यात 2,27,318.25 करोड़ रुपये का हुआ जो 29.98(-) प्रतिशत की नकारात्मक वृद्धि को दर्शाता है। निर्यात में गिरावट मुख्य रूप से चल रही वैश्विक मंदी के कारण हुई है, जो वर्तमान कोविड -19 संकट के कारण बढ़ गई। बाद में आपूर्ति श्रृंखलाओं और मांग में बड़े पैमाने पर व्यवधान उत्पन्न हुए जिसके परिणामस्वरूप आदेश रद्द हो गए।
  • लौह अयस्क को छोड़कर, जिसने 58.43% की वृद्धि दर्ज की, अन्य सभी जिन्सों / जिन्स समूहों के मूल्यों में मार्च 2020 में मार्च 2019 की तुलना में नकारात्मक वृद्धि दर्ज की है।
  • जिन मुख्य जिन्स समूहों के मूल्यों में मार्च 2020 में मार्च 2019 की तुलना में नकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई वो हैं- तेल युक्त भोजन (-69.85%), मांस, डेयरी और पोल्ट्री उत्पाद (-45.48%), इंजीनियरिंग सामान (-42.32%), रत्न और आभूषण (-41.05%), चमड़ा और चमड़े के उत्पाद (-36.78%), प्लास्टिक और लिनोलियम (-35.67%), सभी वस्त्रों का आरएमजी (-34.91%), कालीन (-34.72%), मीका, कोयला और अन्य अयस्कों, प्रसंस्कृत खनिजों सहित अन्य खनिज (-34.06%), चाय (-33.72%), अन्य अनाज ( -33.42%), कार्बनिक और अकार्बनिक रसायन (-32.88%), सूती धागा / कपड़े / बने हुए सामान, हैंडलूम उत्पाद आदि (-32.16%), पेट्रोलियम उत्पाद (-31.12%) और चावल (-28.28%)।
  • अप्रैल-मार्च 2019-20 की अवधि के लिए निर्यात का संचयी मूल्य 314.31 अरब डॉलर (22,26,566.71 करोड़ रूपए) रहा वहीं अप्रैल-मार्च 2018-19 में 330.08 अरब डॉलर (23,07,726.19 करोड़ रूपए) रहा, डॉलर के संदर्भ में (-) 4.78 प्रतिशत की नकारात्मक वृद्धि (रुपये के संदर्भ में नकारात्मक वृद्धि  (-)3.52प्रतिशत रहा) दर्ज किया गया।
  • मार्च 2020 में गैर-पेट्रोलियम और गैर-रत्न व जेवरात निर्यात 16.90 अरब अमेरिकी डॉलर का हुआ, वहीं मार्च 2019 में 25.68 अरब अमेरिकी डॉलर का रहा यानि तुलना में (-) 34.19 प्रतिशत की ऋणात्मक वृद्धि को दर्शाता है। अप्रैल- मार्च 2019-20 में गैर-पेट्रोलियम और गैर-रत्न व जेवरात निर्यात 235.73 अरब अमेरिकी डॉलर का हुआ, जो पिछले वित्तीय वर्ष की समान अवधि  में 243.27 अरब अमेरिकी डॉलर का रहा था, यानि पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में वर्तमान वित्तीय वर्ष में (-) 3.10 प्रतिशत की ऋणात्मक वृद्धि को रेखांकित करता है।

आयात

  • मार्च 2020 में 31.16 अरब अमेरिकी डॉलर (2,31,710.92 करोड़ रुपये) का आयात हुआ जो मार्च, 2019 में 43.72 अरब अमेरिकी डॉलर (3,03,753.76 करोड़ रुपये) के मुकाबले डॉलर के लिहाज से 28.72 प्रतिशत कम है और रुपये के लिहाज से भी 23.72 प्रतिशत कम है। अप्रैल-मार्च 2019-20 में कुल मिलाकर 467.19 अरब अमेरिकी डॉलर (33,07,977.05 करोड़ रुपये) का आयात हुआ, अप्रैल-मार्च 2018-19 में हुए आयात 514.08 अरब अमेरिकी डॉलर (35,94,674.61 करोड़ रुपये) रहा, दोनों वित्तीय वर्ष की तुलना में डॉलर के लिहाज से (-)9.12 प्रतिशत नकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई है और रुपये की दृष्टि से (-)7.98 प्रतिशत नकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई है।
  • मार्च, 2020 में जिन प्रमुख जिंस समूहों के आयात में पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में ऋणात्मक वृद्धि दर्ज की गई है उनमें निम्नलिखित शामिल हैं-
  • मार्च 2020 में आयात में वृद्धि केवल परिवहन उपकरण में देखी गई, मार्च 2019 में 11.94 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की थी।

कच्चे तेल और गैर-तेल (पेट्रोलियम) का आयात:

  • मार्च 2020 में तेल का आयात 10.01 अरब अमेरिकी डॉलर (74,462.00 करोड़ रुपये) था, जो कि मार्च 2019 में 11.78 अरब अमेरिकी डॉलर (81,857.53 करोड़ रुपये) की तुलना में डॉलर के संदर्भ में 15.00 प्रतिशत कम (रुपये में 9.03 प्रतिशत कम) था। अप्रैल-मार्च 2019-20 में तेल का आयात 199.92 अरब अमेरिकी डॉलर (9,86,278.06 करोड़ रुपये) की तुलना में डॉलर के संदर्भ में (रुपये में 6.99 प्रतिशत कम) कम था, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि में 129.43 अरब अमेरिकी डॉलर (9,17,306.25 करोड़ रुपये) का रहा था।
  • इस संबंध में यह उल्लेख किया गया है कि विश्व बैंक से उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार मार्च 2020 में मार्च 2019 क तुलना में वैश्विक ब्रेंट मूल्य ($ / bbl) 50.34% कम हो गया है।
  • मार्च 2020 में गैर-तेल (पेट्रोलियम) के आयात का अनुमान 21.15 अरब अमेरिकी डॉलर (1,57,248.92 करोड़ रुपये) था, जो कि मार्च 2019 में 31.94 अरब अमेरिकी डॉलर (2,21,896.23 करोड़ रुपये) की तुलना में डॉलर के संदर्भ में 33.78 प्रतिशत कम (रुपये में 29.13 प्रतिशत कम) था। अप्रैल-मार्च 2019-20 में गैर-तेल का आयात 337.76 अरब अमेरिकी डॉलर (23,90,670.80 करोड़ रुपये) था, जो कि अप्रैल-मार्च 2018-19 में 373.16 अरब अमेरिकी डॉलर (26,08,399.55 करोड़ रुपये) की तुलना में डॉलर के संदर्भ में 9.49 प्रतिशत कम (रुपये में 8.35 प्रतिशत कम) था।
  • मार्च 2020 में गैर-तेल (पेट्रोलियम) और गैर-रत्न व जेवरात आयात 19.92 अरब अमेरिकी डॉलर का हुआ, वहीं मार्च 2019 में 26.65 अरब अमेरिकी डॉलर का रहा यानि तुलना में (-) 30.47 प्रतिशत की ऋणात्मक वृद्धि को दर्शाता है। अप्रैल- मार्च 2019-20 में गैर-पेट्रोलियम और गैर-रत्न व जेवरात आयात 309.53 अरब अमेरिकी डॉलर का हुआ, जो पिछले वित्तीय वर्ष की समान अवधि  में 340.25 अरब अमेरिकी डॉलर का रहा था, यानि पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में वर्तमान वित्तीय वर्ष में (-) 9.03 प्रतिशत की ऋणात्मक वृद्धि को रेखांकित करता है।

II. सेवाओं का व्यापार

निर्यात (प्राप्तियां)

  • भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा 15 अप्रैल, 2020 को जारी नवीनतम प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार फरवरी, 2020 में निर्यात 17.73 अरब अमेरिकी डॉलर (1,26,713.37 करोड़ रुपये) का हुआ, जो फरवरी 2019 की तुलना में डॉलर के लिहाज से 6.88 प्रतिशत की धनात्मक वृद्धि को दर्शाता है। मार्च 2020* में सेवाओं का निर्यात 17.69 अरब अमेरिकी डॉलर का होने का अनुमान लगाया गया है।

आयात (भुगतान)

  • भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा 15 अप्रैल, 2020 को जारी नवीनतम प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार फरवरी, 2020 में आयात 11.07 अरब अमेरिकी डॉलर (79,116.32 करोड़ रुपये) का हुआ, जो फरवरी 2019 की तुलना में डॉलर के लिहाज से 12.82 प्रतिशत की धनात्मक वृद्धि को दर्शाता है। मार्च 2020* में सेवाओं का आयात 10.97 अरब अमेरिकी डॉलर का होने का अनुमान लगाया गया है।

III. व्यापार संतुलन

  • वस्तुएं: मार्च, 2020 में व्यापार घाटा 9.76 अरब अमेरिकी डॉलर रहने का अनुमान लगाया गया है, जबकि मार्च 2019 में यह व्यापार घाटा 11.00 अरब अमेरिकी डॉलर का हुआ था।
  • सेवाएं : आरबीआई द्वारा 15 अप्रैल, 2020 को जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार फरवरी 2020 के दौरान सेवाओं में व्यापार संतुलन (अर्थात शुद्ध सेवा निर्यात) 6.66 अरब अमेरिकी डॉलर रहने का अनुमान लगाया गया है।
  • समग्र व्यापार संतुलन : वस्तुओं एवं सेवाओं दोनों को ही मिलाने पर अप्रैल-मार्च 2019-20* में कुल मिलाकर 70.16 अरब अमेरिकी डॉलर का समग्र व्यापार घाटा होने का अनुमान लगाया गया है, जबकि अप्रैल-मार्च 2018-19 में व्यापार घाटा 103.32 अरब अमेरिकी डॉलर का हुआ था।

मार्च, 2020 के लिए थोक मूल्‍य सूचकांक (आधार वर्ष : 2011-12 = 100) की समीक्षा

  • मार्च, 2020 के दौरान ‘सभी जिंसों’ के लिए आधि‍कारिक थोक मूल्‍य सूचकांक (आधार वर्ष : 2011-12=100) इससे पिछले महीने के 122.2 अंक (अनंतिम) से 0.90 प्रतिशत घटकर 121.1 अंक (अनंतिम) हो गया।

मुद्रास्‍फीति

  • मासिक थोक मूल्‍य सूचकांक (डब्‍ल्‍यूपीआई) पर आधारित मुद्रास्‍फीति की वार्षिक दर मार्च, 2020 के दौरान (मार्च, 2019 की तुलना में) 1.00  प्रतिशत (अनंतिम) रही, जबकि इससे पिछले महीने यह 2.26 प्रतिशत (अनंतिम) थी। वहीं, पिछले वर्ष के इसी महीने में यह 3.10 प्रतिशत रही थी।
  • वित्त वर्ष में अब तक क्रमिक वृद्धि के साथ मुद्रास्फीति की दर 1.00 प्रतिशत थी, जबकि पिछले वर्ष की इसी अवधि में क्रमिक वृद्धि के साथ मुद्रास्फी्ति या महंगाई दर 3.10 प्रतिशत थी।

विभिन्‍न जिंस समूहों के सूचकांक में उतार-चढ़ाव कुछ इस प्रकार रहे :-

प्राथमिक वस्तुएं (भारांक 22.62 प्रतिशत)

  • इस प्रमुख समूह का सूचकांक पिछले महीने के 143.1 अंक (अनंतिम) से 2.5 प्रतिशत घटकर 139.5 अंक (अनंतिम) रह गया। महीने के दौरान जिन समूहों और वस्‍तुओं के सूचकांक में उतार-चढ़ाव देखे गए, वे इस प्रकार हैं :
  • ‘खाद्य उत्‍पाद’ समूह का सूचकांक पिछले महीने के 154.9 अंक (अनंतिम) से 2.1 प्रतिशत घटकर 151.6 अंक (अनंतिम) रह गया। ऐसा अंडे (17 %), पोल्‍ट्री चिकन (9 %), चाय (7 %), अंतर्देशीय मछली, मक्का, फल एवं सब्जियों (प्रत्‍येक 5 %),ज्वार (4 %), बाजरा और गेहूं (प्रत्‍येक 3 %), चना, धान, सुपारी और उड़द (प्रत्‍येक 2 %) और समुद्री मछली, अरहर, सुअर का मांस, मसूर और मटन (प्रत्‍येक 1 %) के दाम घटने के कारण संभव हुआ। हालांकि, गोमांस और भैंस का मांस (8 %), मूंग और मटर / चवली (प्रत्येक 4 %), और रागी एवं दूध (1%) के दाम बढ़ गए।
  • ‘गैर-खाद्य पदार्थ’ समूह का सूचकांक पिछले महीने के 131.6 अंक (अनंतिम) से 4.2 प्रतिशत घटकर 131.6 अंक (अनंतिम) रह गया। ऐसा पुष्‍पकृषि (30%), कुसुम (कढ़ी बीज) (12%), सोयाबीन और ग्वार के बीज (प्रत्‍येक 8 %), सूरजमुखी (7%), कच्चा रबर (4%), अलसी का बीज, कॉयर फाइबर, एक पेड़ जिसके बीज का तेल निकाला जाता है और सरसों के बीज तथा खाल (कच्चे) (प्रत्येक 2%) और नाइजर बीज, कोपरा (नारियल), कच्चा जूट और अरंडी के बीज (प्रत्येक 1%) के दाम घटने के कारण संभव हुआ। हालांकि, कपास के बीज (6%), मूंगफली का बीज (5%), खाल (कच्चा) (3%) और औद्योगिक लकड़ी, कच्चे रेशम, चारा और गिंगेली के बीज (सीसम) (प्रत्येक 1%) के दाम बढ़ गए।
  • ‘खनिज’ समूह का सूचकांक पिछले महीने के 147.6 अंक (अनंतिम) से 4.2 प्रतिशत बढ़कर 153.8 अंक (अनंतिम) रह गया। ऐसा मैंगनीज अयस्क (15%) तांबा सांद्र (7%) और फॉस्फोराइट (6%)के दाम बढ़ने के कारण संभव हुआ। हालांकि, क्रोमाइट (3%),  चूना पत्‍थर (2%), बॉक्साइट, जस्ता सांद्र और सीसा सांद्र (प्रत्येक 1%) के दाम घटने के कारण संभव हुआ।
  • ‘अपरिस्कृत (कच्चे) पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस’ समूह का सूचकांक पिछले महीने के 87.0 अंक (अनंतिम) से 6.6 प्रतिशत घटकर 81.3 अंक (अनंतिम) रह गया। ऐसा कच्चे पेट्रोलियम (9%) का  दाम घटने के कारण संभव हुआ। 

ईंधन एवं बिजली (भारित 13.15 प्रतिशत)

  • इस प्रमुख समूह का सूचकांक पिछले महीने के 103.9 अंक (अनंतिम) से 3.1 प्रतिशत घटकर इस महीने 100.7 अंक (अनंतिम) हो गया। महीने के दौरान जिन समूहों और वस्तुvओं के सूचकांक में उतार-चढ़ाव देखे गए, वे इस प्रकार हैं :
  • ‘खनिज तेल’ समूह का सूचकांक 92.4 अंक (अनंतिम) से 5.6 प्रतिशत घटकर 87.2 अंक (अनंतिम) रह गया। ऐसा एटीएफ (19%), नेप्था (13%), एचएसडी और केरोसिन (प्रत्येक 5%), पेट्रोल और फर्नेस ऑयल (प्रत्येक 4%), और एलपीजी (3 %) के दाम घटने के कारण संभव हुआ। हालांकि, वहीं दूसरी ओर पेट्रोलियम कोक (7 %) के दाम बढ़ गये।

निर्मित उत्‍पाद (भारित 64.23 प्रतिशत)

  • इस प्रमुख समूह का सूचकांक पिछले महीने की तुलना में इस महीने बिना किसी प्रकार का परिवर्त्तन हुए 118.7 ही रहा। महीने के दौरान जिन समूहों और वस्‍तुओं के सूचकांक में उतार-चढ़ाव देखे गए, वे इस प्रकार हैं : 
  • ‘खाद्य उत्पादों के विनिर्माण’ समूह का सूचकांक पिछले महीने के सूचकांक में बिना कोई परिवर्त्तन के साथ 136.9 अंक (अनंतिम) ही रहा। ऐसा चावल की भूसी (9%), चावल की भूसी के तेल (3%), कपासे के बीज का तेल केक (2%) और गुड़, सफेद सरसों का तेल, चना का पाउडर (बेसन), शहद, चिकन / बत्तख, कपड़े पहने- फेश / फ्रोजन, ताड़ का तेल , मैदा, गोला और इसी तरह के अन्य मवेशी चारा, सूरजमुखी तेल, वनस्पति के माड़ (स्टार्च), चावल उत्पाद और कपास के बीज का तेल (प्रत्येक 1%) के दाम घटने के कारण संभव हुआ।हालांकि, वहीं दूसरी ओर शीरा (गुड़ का रस) (6 %), कासनी के साथ कॉफी पाउडर (4%), मसाले (मिश्रित मसाले सहित) (3%), मूंगफली का तेल, मछली जमा हुए / डिब्बाबंद / संसाधित और सरसों का तेल केक (प्रत्येक 2%) और प्रसंस्कृत चाय, वनस्पति, सरसों का तेल, खोई, सूजी (रवा), चीनी मिष्ठान्न, गैर-बासमती चावल, मक्के का आटा और आइसक्रीम (प्रत्येक 1%) के दाम बढ़ गए।
  • ‘तंबाकू उत्‍पादों के विनिर्माण’ समूह का सूचकांक पिछले महीने के 154.2 अंक (अनंतिम) से 0.4 प्रतिशत बढ़कर 154.8 अंक (अनंतिम) हो गया। ऐसा अन्‍य तंबाकू उत्‍पादों के दाम 1 प्रतिशत बढ़ने के कारण हुआ। हालांकि, सिगरेट के दाम में 1 प्रतिशत की कमी हुई।
  • ‘वस्त्र विनिर्माण’ समूह का सूचकांक पिछले महीने के 116.7 अंक (अनंतिम) से 0.1 प्रतिशत घटकर 11.6 अंक (अनंतिम) हो गया। ऐसा बुना हुए और कढ़ाई किए हुए कपड़े के विनिर्माण (1%) के दाम घटने के कारण हुआ।हालांकि, विस्कोस सूत (2%) के दामों में बढ़ोतरी हुआ।
  • ‘पहनने वाले वस्त्रों के विनिर्माण’ का सूचकांक पिछले महीने के 137.8 अंक (अनंतिम) से 0.1 प्रतिशत बढ़कर 138.0 अंक (अनंतिम) हो गया। ऐसा पहने जाने वाले वस्त्रों (सिले हुए), फर वाले परिधानों को छोड़कर (1%) के दाम बढ़ने का कारण हुआ। हालांकि, बुने हुए और कढ़ाई किए हुए कपड़े के विनिर्माण (1%) के दामों में कमी हुई।

थोक मूल्‍य सूचकांक (भारित 24.38%)

  • डब्ल्यूपीआई खाद्य पदार्थ सूचकांक पर आधारित मुद्रास्फीति की दर, प्राथमिक लेख समूह से ’खाद्य सामानों’ और निर्मित उत्पाद समूह से खाद्य उत्पाद फरवरी 2020 के 7.31% से घटकर मार्च 2020 में 5.49% हो गया।

:: विज्ञान और प्रौद्योगिकी ::

सुपरनोवा SN2016aps

  • अंतरिक्ष वैज्ञानिकों ने ब्रह्मांड में अब तक खोजे गए सुपरनोवा से भी 10 गुना अधिक शक्तिशाली सुपरनोवा को खोजा है। वैज्ञानिकों की मानें तो यह न केवल उससे करीब 500 गुना ज्यादा चमकदार है बल्कि अधिक शक्तिशाली भी है। नासा और ईएसए के मुताबिक वैज्ञानिकों का मानना है कि यह सुपरनोवा दो विशाल तारों के आपस में टकरा कर एक हो जाने के दौरान बना है। ब्रिटेन और अमेरिका के वैज्ञानिकों ने इसका खुलासा किया है। उनकी ये खोज नेचर एस्ट्रोनॉमी के पीयर रिव्यू जर्नल में प्रकाशित हुई है। इस रिसर्च पेपर में उन्‍होंने इस नई खोज से जुड़ी कई सारी बातों को बताया है। बर्मिंघम यूनिवर्सिटी और हार्वर्ड-स्मिथसोनियन सेंटर फॉर एस्ट्रोफिजिक्स ने इस खोज को SN2016aps नाम दिया है। इस शोधकर्ताओं में से एक इडो बर्गर ने इसे इसके आकार और चमक के अलावा भी कई दूसरे मायनों में भी बेहद खास बताया है।
  • आपको बता दें कि आमतौर पर ऐसे सुपरनोवा अपनी कुल ऊर्जा का केवल एक फीसदी दिखने वाले प्रकाश कुछ दूरी तक ही दिखाई देता है। लेकिन अब खोजे गए SN2016apsके साथ ऐसा नहीं है। इससे कहीं बड़ा हिस्सा इस प्रकाश के रूप में निकालता है। वैज्ञानिकों का अनुमाना है कि इस सुपरनोवा की ऊर्जा 200 ट्रिलियन ट्रिलियन गीगाटन टीएनटी के विस्फोट के बराबर होगी।
  • वैज्ञानिकों को इसकी खोज के दौरान ही इस बता का भी पता चला कि इस अत्‍यधिक ऊर्जा वाले सुपरनोवा के आसपास बनें बादलों में हाइड्रोजन की मात्रा काफी ज्‍यादा है। शोधकर्ताओं के मुताबिक इसकी वजह इस सुपरनोवा का निर्माण है जो सूर्य जैसे दो तारों के आपस में मिल जाने के कारण हुआ है। वैज्ञानिकों के मुताबिक अब तक ऐसी घटना का जिक्र केवल सैद्धांतिक तौर पर ही होता आया था लेकिन पहली बार ऐसा कुछ होने का प्रमाण मिला है। इस खोज से उत्‍साहित शोधकर्ताओं का मानना है कि भविष्‍य में इसी तरह के दूसरे विशाल और चमकीले सुपरनोवा का भी पता जरूर चलेगा। इससे दुनिया को ये समझने में मदद मिलेगी कि करोड़ों या अरबों वर्ष पहले हमारा ब्रह्मांड और उसका वातावरण कैसा था।
  • आपको बता दें कि जब कोई तारा अपनी आयु पूरी कर लेता है उसकी ऊर्जा उसमें से बाहर निकल जाती है। सामान्‍य भाषा में इसको तारों का टूटना कहा जाता है। लेकिन वैज्ञानिकों की भाषा में इसको ही सुपरनोवा कहा जाता है। ऐसे ही सुपरनोवा से नए तारों का जन्‍म भी होता है। सुपरनोवा की सबसे बड़ी खासियत ये भी होती है कि इस दौरान निकलने वाली ऊर्जा सूर्य से निकलने वाली ऊर्जा से भी कहीं अधिक होती है। इसकी की ऊर्जा इतनी शक्तिशाली होती है कि उसके आगे हमारी धरती की आकाशगंगा कई हफ्तों तक फीकी पड़ सकती है।
  • वैज्ञानिकों का मानना है कि आमतौर पर सुपरनोवा के निर्माण में व्हाइट ड्वार्फ की अहम भूमिका होती है जिसके एक चम्मच द्रव्य का वजन भी करीब 10 टन तक हो सकता है। ज्यादातर व्हाइट ड्वार्फ गर्म होते होते हैं और अचानक गायब हो जाते हैं वहीं कुछ व्हाइट ड्वार्फ दूसरे तारों से मिल कर सुपरनोवा का निर्माण करते हैं। इस बार वैज्ञानिकों को जिस विशाल और अदभुत सुपरनोवा के दर्शन हुए हैं वह व्हाइट ड्वार्फ तारे से नहीं टकराया बल्कि दो तारे ही आपस में टकराए हैं।

वायरस को नष्ट करने वाले नई तकनीक से बने मास्क

  • कोविड-19 के खतरे को देखते हुए भारतीय वैज्ञानिक दिन-रात ऐसे उपाय खोजने में जुटे हैं, जिससे इस चुनौती से निपटने में मदद मिल सके। इसी कड़ी में कार्य करते हुए गुजरात के भावनगर में स्थित केंद्रीय नमक व समुद्री रसायन अनुसंधान संस्थान  (CSMCRI) के वैज्ञानिकों ने एक अनूठा फेस-मास्क विकसित किया है, जिसके संपर्क में आने पर वायरस नष्ट हो सकते हैं। इस मास्क को चिकित्सीय मान्यता मिल जाती है, तो कोविड-19 के प्रकोप से जूझ रहे आम लोगों के साथ-साथ चिकित्सा सेवाओं से जुड़े कर्मचारियों एवं डॉक्टरों को बीमारी के खतरे से बचाने में मदद मिल सकती है।

मास्क की विशेषता

  • सीएसएमसीआरआई के वैज्ञानिकों ने बताया कि इस मास्क की बाहरी छिद्रयुक्त झिल्ली को संशोधित पॉलीसल्फोन मैटेरियल से बनाया गया है, जिसकी मोटाई 150 माइक्रोमीटर है। यह मैटेरियल 60 नैनोमीटर या उससे अधिक किसी भी वायरस को नष्ट कर सकता है। कोरोना वायरस का व्यास 80-120 नैनोमीटर के बीच है।
  • इस मास्क की एक खासियत यह भी है कि इसे धोकर दोबारा उपयोग किया जा सकता है।
  • दूसरे महंगे मास्कों की तुलना में यह काफी सस्ता है और इसकी लागत 50 रुपये से भी कम आती है।
  • इसकी बाहरी परत वायरस, फंगल एवं बैक्टीरिया प्रतिरोधी है। इसका अर्थ है कि इसकी बाहरी परत के संपर्क में आने पर कोई भी रोगजनक सूक्ष्मजीव नष्ट हो सकता है। इस तरह देखें तो यह एन-95 मास्क से भी बेहतर साबित हो सकता है।

सीएसआईआर प्रयोगशाला में भी हिगी कोविड-19 किट की वैधता का परीक्षण

  • वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) की हैदराबाद स्थित प्रयोगशाला कोशकीय एवं आणविक जीवविज्ञान केंद्र (सीसीएमबी) में भी अब कोविड-19 से संबंधित परीक्षण किट की वैधता का परीक्षण एवं प्रमाणीकरण हो सकेगा। इस पहल के बाद सीएसआईआर-सीसीएमबी भी अब भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) द्वारा चयनित देश के उन चुनिंदा केंद्रों में शामिल हो गया है, जहाँ पर कोविड-19 के परीक्षण में उपयोग होने वाली किट का प्रमाणीकरण किया जा सकेगा।
  • इससे पहले कोविड-19 की जाँच किट के प्रमाणीकरण के लिए सिर्फ आईसीएमआर से संबद्ध चार केंद्र संचालित हो रहे थे। इन चार केंद्रों में पुणे स्थित राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान एवं राष्ट्रीय एड्स अनुसंधान संस्थान के अलावा नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पैथोलॉजी, नई दिल्ली और राष्ट्रीय कॉलरा एवं आंत्र रोग संस्थान, कोलकाता शामिल थे। सीएसआईआर-सीसीएमबी को इस काम के लिए चुने जाने के बाद अब देश में कोविड-19 की परीक्षण किट का प्रमाणीकरण करने वाले पाँच केंद्र हो गए हैं।

:: विविध ::

'वन वर्ल्ड: टूगेदर एट होम'

  • हिंदी सिनेमा के सुपरस्टार अभिनेता शाहरुख खान और देसी गर्ल अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा कोरोना से लड़ने में आर्थिक तौर पर भारत सरकार की मदद पहले ही कर चुके हैं। अब वे दुनिया को बचाने की मुहिम में भी शामिल हो गए हैं। अमेरिका की पॉप गायिका लेडी गागा ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक ऑनलाइन कॉन्सर्ट 'वन वर्ल्ड: टूगेदर एट होम' की घोषणा की है। लेडी गागा की इस पहल का हॉलीवुड के कई जाने-माने कलाकारों ने समर्थन किया है। अब इसके समर्थन में शाहरुख खान और प्रियंका चोपड़ा भी उतर आए हैं।
  • लेडी गागा का यह कदम कोरोना पीड़ितों को बचाने और इस वायरस से लड़ने में डब्ल्यूएचओ की मदद करेगा। इस कॉन्सर्ट से फंड जुटाया जाएगा, जिससे दुनियाभर के जरूरतमंदों की मदद की जाएगी। डब्ल्यूएचओ की मदद के लिए होने वाले इस कॉन्सर्ट में लेडी गागा के अलावा क्रिस मार्टिन, एड्डी वेडर, एल्टन जॉन, जॉन लीजेंड, लीजो, जे बाल्विन, स्टीवी वंडर, बिली जो आर्मस्ट्रांग, एंड्रिया बॉसेली, कीथ अर्बन जैसे कई और कलाकार प्रस्तुति देंगे। अमेरिका के लोकप्रिय टॉक शो के होस्ट जिमी फॉलन, जिमी किमेल और स्टीफन कोलबर्टबिल इस शो को होस्ट करेंगे। इस कॉन्सर्ट का प्रसारण 18 अप्रैल को अमेरिका के टीवी नेटवर्क एबीसी, सीबीसी और एनबीसी पर एक साथ किया जाएगा, साथ ही इसका प्रसारण ऑनलाइन भी होगा।

रोहित शर्मा

  • भारतीय क्रिकेट टीम के सीमित ओवरों के उप कप्तान रोहित शर्मा को दुबई स्थित क्रिकेट अकादमी ‘क्रिककिंगडम’ का ब्रांड दूत नियुक्त किया गया है।

:: प्रिलिम्स बूस्टर ::

  • हाल ही में वैज्ञानिकों के द्वारा खोजे गए अब तक के सबसे शक्तिशाली सुपरनोवा (तारों में विस्फोट की घटना) का नाम क्या है? (SN2016aps) 

  • हाल ही में चर्चा में रहे राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) को सर्वप्रथम कब एवं किसके कार्यकाल में लागू किया गया था? (1980, इंदिरा गांधी)

  • हाल ही में चर्चा में रहे भोपाल गैस त्रासदी कब एवं किस गैस के कारण घटित हुई? (1984, मिथाइल आइसोसायनाइड/ आइसोसाइनेट)

  • विश्व स्वास्थ्य संगठन के मदद के लिए आयोजित होने वाले ऑनलाइन कॉन्सर्ट 'वन वर्ल्ड: टूगेदर एट होम' में भारत की ओर से कौन से कलाकार शामिल होंगे? (शाहरुख खान और प्रियंका चोपड़ा)

  • हाल ही में भारत सरकार के द्वारा सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उपक्रमों (MSME) के मदद हेतु कितने धनराशि के वृहत कोष की मंजूरी प्रदान की गई है? (10,000 करोड़ रुपये)

  • हाल ही में किस भारतीय खिलाड़ी को दुबई स्थित ‘क्रिककिंगडम’ का ब्रांड दूत नियुक्त किया गया है? (रोहित शर्मा)

  • चर्चा में रहे पर्यावरण प्रभाव आकलन का विनियमन किस कानून एवं किस मंत्रालय/ निकाय के तहत किया जाता है? (पर्यावरण प्रभाव आकलन-EIA अधिसूचना, 2006, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय)

  • मार्च, 2020 के दौरान ‘सभी जिंसों’ के लिए जारी किए गए थोक मूल्य सूचकांक का आधार वर्ष क्या है? (2011-12)

  • हाल ही में भारत सरकार के द्वारा किस देश से आने वाले निवेश को सरल नियमों वाली प्राथमिकता वाली श्रेणी (वन) में रख दिया है? (मॉरीशस)

  • अद्यतन आंकड़ों के अनुसार 2019  में भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के संदर्भ में अग्रणी देश कौन है? (क्रमशः सिंगापुर, मॉरीशस और नीदरलैंड)

  • हाल ही में किस राज्य के सभी सरकारी स्कूलों को इंग्लिश मीडियम में अनिवार्य रूप से तब्दील करने के आदेश को उच्च न्यायालय के द्वारा रद्द कर दिया गया है? (आंध्र प्रदेश)

 

 

 

स्रोत साभार: Dainik Jagran (Rashtriya Sanskaran), Dainik Bhaskar (Rashtriya Sanskaran), Rashtriya Sahara (Rashtriya Sanskaran) Hindustan Dainik (Delhi), Nai Duniya, Hindustan Times, The Hindu, BBC Portal, The Economic Times (Hindi & English), PTI, PIB

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