(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (15 और 16 मार्च 2020)

दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर


(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (15 और 16 मार्च 2020)


:: राष्ट्रीय समाचार ::

देश का सबसे बड़ा अशोक चक्र

  • 14वीं सदी में फिरोजशाह तुगलक जिले के गांव टोपरा कलां से अशोक स्तंभ उखाड़ ले गए थे। दो भाई सिद्धार्थ व डॉ. सत्यदीप नील गौरी के प्रयासों से अब यहां देश का सबसे बड़ा अशोक चक्र स्थापित हो गया। अशोक चक्र का निर्माण हरियाणा के यमुनानगर में हुआ है। लिम्का बुक ऑफ वर्ल्‍ड रिकॉर्ड्स ने 2020 में भारत का सबसे बड़ा धर्म चक्र होने का प्रमाण पत्र दिया है। लंबे समय से इसके लिए प्रयास हो रहे थे। सम्राट अशोक ने करीब 2500 साल पहले अशोक चक्र व स्तंभ स्थापित किया था। अब यह चक्र हमारा राष्ट्रीय चिन्ह है।

मास्क और सेनेटाइजर को मिल सकता है ड्रग्स का दर्जा

  • कोरोना संकट की वजह से मास्क एवं सेनेटाइजर की मनमानी कीमत पर रोक के लिए इन दोनों वस्तुओं को ड्रग्स का दर्जा दिया जा सकता है। ड्रग्स का दर्जा मिलते ही इसकी कीमत नेशनल फार्मास्यूटिकल्स प्राइसिंग अथॉरिटी (एनपीपीए) द्वारा तय होगी और उस कीमत से अधिक दाम पर इसे बाजार में नहीं बेचा जा सकेगा।

पृष्ठभूमि

  • कोरोना से बचने के उपाय में शामिल मास्क एवं सेनेटाइजर की भारी मांग को देखते हुए खुदरा स्तर पर इसकी मनमानी कीमत वसूली जा रही है। हिमाचल प्रदेश ड्रग्स मैन्यूफैक्चरिंग एसोसिएशन के सलाहकार एस. सिंगला ने बताया कि 100 एमएल के सेनेटाइजर की फैक्ट्री कीमत 25-27 रुपए है। लेकिन बाजार में इसे 200-250 रुपए तक में बेचा जा रहा है। इसकी अधिकतम खुदरा कीमत (एमआरपी) 80-90 रुपए तक होनी चाहिए। वैसे ही, 3 प्लाइ तक के मास्क की फैक्ट्री कीमत महज एक रुपया है जबकि इसे खुदरा बाजार में 25-50 रुपए तक में बेचा जा रहा है। इसकी अधिकतम कीमत 5 रुपए तक हो सकती है।
  • 3 प्लाई के मास्क को कोरोना वायरस रोकने के लिए सुरक्षित माना जा रहा है। सेनेटाइजर का उत्पादन करने के लिए लाइसेंस की जरूरत होती है, लेकिन अभी कई जगहों पर अवैध तरीके से सेनेटाइजर बनाने का काम शुरू हो गया है। कई जगह छापेमारी में सेनेटाइजर की अवैध फैक्टरियां पकड़ी गई हैं।
  • सरकार ने मास्क और सेनेटाइजर की कालाबाजारी रोकने के लिए इन्हें आवश्यक वस्तुओं की श्रेणी में रख दिया है, लेकिन इससे कीमत पर लगाम नहीं लगेगी। फार्मा उद्यमियों का मानना है कि अगले एक-दो दिनों में इन दोनों वस्तुओं को ड्रग्स का दर्जा दिया जा सकता है ताकि आम लोग आसानी से इसे खरीद सके।

कोरोना आपदा की श्रेणी में शामिल

  • देश में कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए केंद्र सरकार ने इसे आपदा की श्रेणी में शामिल कर दिया है। इसके साथ ही केंद्र सरकार ने इससे निपटने के लिए राज्यों को अपने आपदा फंड का खजाना खोलने की छूट दे दी है। इस घातक वायरस से अब तक दो मौतों की मौत हुई है और लगभग 84 लोग संक्रमित हुए हैं। हालांकि, देश में इस वायरस से संक्रमित पाए गए 10 लोग ठीक भी हो चुके हैं।

एसडीआरएफ के नियमों में बदलाव

  • गृह मंत्रालय ने स्टेट डिजास्टर रिस्पांस फंड (एसडीआरएफ) के नियमों में अहम बदलाव किया है। इसके तहत कोरोना को आपदा की श्रेणी में लाया गया है, ताकि आपदा फंड का राज्य इस चुनौती से निपटने के लिए इस्तेमाल कर सकें। हालांकि, राज्य इस आपदा फंड में मिलने वाली कुल सालाना राशि का 25 फीसद तक की राशि ही खर्च कर सकेंगे।

फंड के इस्तेमाल के लिए दिशा-निर्देश

  • इस फंड का इस्तेमाल कोरोना से प्रभावित लोगों के रहने के लिए वैकल्पिक प्रबंधन सहित उनके खाने, कपड़े, दवाईयों आदि पर खर्च किया जा सकेगा। राज्यों को यह फंड केंद्र सरकार की ओर से आपदाओं से निपटने के लिए दिया जाता है। जिसकी देखरेख राज्य स्तर पर ही एक कमेटी करती है।
  • गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को जारी पत्र में कहा है कि जरूरत पड़ने पर वो जांच के लिए और लैब या हेल्थ केयर उपकरण आदि खरीदने के लिए भी इस फंड का इस्तेमाल कर सकते हैं। स्वास्थ्यकर्मियों, नगर निगमकर्मियों, पुलिस और फायर बिग्रेड आदि को कोरोना संक्रमण की चुनौती से निपटने के लिए तैयार करने में इस फंड का इस्तेमाल किया जा सकेगा। इसके अलावा अस्पतालों को थर्मल स्कैनर, एयर प्यूरीफायर्स, वेंटीलेटर्स आदि से लैस करने में भी इस फंड का इस्तेमाल किया जा सकेगा। यह हिस्सा राज्य आपदा कोष को दिए जाने वाले सालाना फंड का 10 फीसद तक ही हो सकेगा।

देश का पहला नेशनल स्किल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (एनएसटीआइ)

  • देश के पहले नेशनल स्किल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (एनएसटीआइ) में अप्रैल से पढ़ाई शुरू हो जाएगी। पढ़ाई एयर क्राफ्ट के महत्वपूर्ण उपकरणों और पुर्जो की जानकारी देकर कराई जाएगी, जिसके लिए संस्थान ने सेना से पुराना हवाई जहाज मांगा है। नए सत्र से एनएसटीआइ की निर्माणाधीन बिल्डिंग में शुरू होने जा रहे इस एयरक्राफ्ट फ्रेम फिटर कोर्स के साथ इंटेलीजेंस ऑफ थिंग्स, मैकाट्रॉनिक्स, साइबर सिक्योरिटी के कोर्स संचालित होंगे।

पृष्ठभूमि

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2016 में गोविंदनगर(कानपुर) स्थित एटीआइ परिसर में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ स्किल्स (आइआइएस) का शिलान्यास किया था। बिल्डिंग का निर्माण शुरू हुआ लेकिन, कुछ महीने बाद ही बंद हो गया। सरकार की ओर से आइआइएस को एनएसटीआइ में तबदील कर दिया गया।

कौन-कौन से चलेंगे कोर्स?

  1. एयर फ्रेम में फिटर: एयरक्राफ्ट मेंटीनेंस और उसके उपकरणों के फंक्शन के बारे में पढ़ाई कराई जाएगी। कोर्स दो साल का होगा।
  2. इंटेलीजेंस ऑफ थिंग्स: ड्रोन, रोबोट समेत अन्य उपकरणों को अत्याधुनिक बनाने की तकनीक सिखाई जाएगी। एक साल का कोर्स रहेगा।
  3. मैकेट्रॉनिक्स: औद्योगिक इकाइयों में उपयोग किया जा रहा है। सॉफ्टवेयर और इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों में विशेषज्ञों की मांग है। दो वर्षीय कोर्स चलेगा।
  4. साइबर सिक्योरिटी: साइबर सुरक्षा की जानकारी दी जाएगी। उसी पर आधारित पढ़ाई होगी। एक वर्ष का कोर्स होगा।

:: अंतर्राष्ट्रीय समाचार ::

अलबामा में 27 साल से योग पर लगा प्रतिबंध हटा

  • अमेरिका की अलबामा प्रतिनिधि सभा ने महीनों तक गहन चर्चा के बाद योग से दशकों पुराना प्रतिबंध हटाने के पक्ष में मतदान किया है, लेकिन उसने ऐसे समय में ‘नमस्ते’ पर रोक लगा दी है जब दुनिया भर के नेता कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप के बीच अभिवादन के इस तरीके को अपना रहे हैं।
  • योग से प्रतिबंध हटाया जाना भारत की सदियों पुरानी इस पद्धति की बढ़ती स्वीकृति और लोकप्रियता को दर्शाता है। अलबामा शिक्षा बोर्ड ने कट्टरपंथी समूहों के दबाव में आकर 1993 में राज्य के सार्वजनिक स्कूलों में योग के साथ-साथ सम्मोहन और ध्यान पर प्रतिबंध लगाने के पक्ष में मतदान किया था। डेमोक्रेटिक पार्टी से विधायक जेरेमी ग्रे द्वारा पेश किये गए ''योग विधेयक'' पर मंगलवार को मतदान हुआ, जिसके पक्ष में 84 और विरोध में 17 वोट पड़े।

:: भारतीय राजव्यवस्था ::

चेन्नई में एनसीएलएटी की नयी पीठ का गठन

  • राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) की एक पीठ का गठन चेन्नई में किया जा रहा है। यह पीठ दक्षिणी राज्यों के मामलों को देखेगी।सरकार ने अपीलीय न्यायाधिकरण की चेन्नई पीठ के गठन को अधिसूचित कर दिया है। यह 18 मार्च से काम करने लगेगी।
  • अधिसूचना में कहा गया है कि एनसीएलएटी की चेन्नई पीठ कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, लक्षद्वीप और पुडुचेरी के राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) के आदेशों के खिलाफ याचिकाओं पर सुनवाई करेगी। इसमें कहा गया है, ‘‘अपीलीय न्यायाधिकरण की नयी दिल्ली पीठ को प्रधान पीठ के नाम से जाना जाएगा। वह एनसीएलएटी की चेन्नई पीठ के अधिकार क्षेत्र वाली अपीलों को छोड़कर अन्य याचिकाओं पर सुनवाई करती रहेगी। यह अधिसूचना 18 मार्च 2020 से प्रभाव में आ जायेगी। अपीलीय न्यायाधिकरण का गठन कंपनी कानून, 2013 की धारा 410 के तहत एनसीएलटी के आदेशों के खिलाफ अपीलों की सुनवाई के लिये किया गया।

एनसीएलएटी

  • एनसीएलएटी का गठन कंपनी अधिनियम 2013 की धारा 410 के अंतर्गत किया गया है। यह राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) के निर्णयों पर अपील की सुनवाई करता है। भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग के निर्णयों के खिलाफ भी यह अपीलीय मंच है।

संपत्ति क्षय दावा अधिकरण (Property Damage Claims Tribunals)

  • राजनीतिक जुलूसों, विरोध प्रदर्शनों, आंदोलनों के दौरान सार्वजनिक और निजी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने वालों से क्षतिपूर्ति वसूलने के लिए उत्तर प्रदेश की सरकार संपत्ति क्षय दावा अधिकरणों (Property Damage Claims Tribunals) का गठन करेगी।
  • दावा अधिकरण को सिविल न्यायालय की सभी शक्तियां प्राप्त होंगी और वह उसी रूप में काम करेगा। उसका फैसला अंतिम होगा और उसके खिलाफ किसी न्यायालय में अपील नहीं की जा सकेगी। क्षतिपूर्ति पाने के लिए संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की घटना के तीन माह के अंदर दावा अधिकरण के समक्ष आवेदन करना होगा। आवेदन में 30 दिन के विलंब को अधिकरण माफ कर सकता है, यदि आवेदक इसकी वाजिब वजह बताता है।
  • हड़ताल, बंद, दंगों और लोक उपद्रव के कारण सार्वजनिक और निजी संपत्तियों को हुए नुकसान की भरपाई कराने के लिए बनाया गया 'उत्तर प्रदेश लोक तथा निजी सम्पत्ति क्षति वसूली अध्यादेश 2020' रविवार को लागू हो गया। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की मंजूरी के बाद यह अध्यादेश सरकारी गजट में अधिसूचित हो गया। अध्यादेश को लागू करने के लिए सरकार नियमावली बना सकती है।

क्षतिपूर्ति के लिए तीन माह में करना होगा आवेदन

  • अध्यादेश के मुताबिक संपत्ति को नुकसान की एफआईआर पर आधारित संबंधित पुलिस क्षेत्राधिकारी की रिपोर्ट और इस दौरान एकत्र की गई अन्य सूचनाएं प्राप्त होने पर डीएम या पुलिस कमिश्नर या कार्यालय प्रमुख को लोक संपत्ति को क्षति पहुंचाये जाने की तारीख से तीन माह के अंदर अधिकरण के समक्ष दावा याचिका दाखिल करने के लिए कदम उठाना होगा। वहीं क्षतिग्रस्त हुई निजी संपत्ति के मालिक को संबंधित थानाध्यक्ष या थाना प्रभारी से ऐसी रिपोर्ट की प्रति हासिल करने के बाद अपनी दावा याचिका तीन माह के अंदर दाखिल करनी होगी।

दावा याचिका के साथ लगेगी 25 रुपये की स्टांप फीस

  • मुआवजे के लिए दाखिल किये जाने वाले आवेदन/दावा याचिका के साथ न्यायालय फीस स्टांप के रूप में 25 रुपये की फीस लगेगी। मुआवजे से भिन्न सभी आवेदन 50 रुपये के न्यायालयीय फीस स्टांप के साथ स्टांपित होंगे। समन किये गए प्रत्येक साक्षी या पक्षकार के लिए 100 रुपये की प्रक्रिया फीस न्यायालयीय फीस स्टांप के रूप में होगी। दावा याचिका में संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाले या इसके लिए उकसाने वाले, पुलिस की रिपोर्ट में नामित लोग, विरोध प्रदर्शन को प्रायोजित करने वालों को प्रतिवादियों के तौर पर शामिल किया जा सकता है।

एकपक्षीय कार्रवाई भी

  • अधिकरण प्रतिवादियों को आवेदन की प्रति के साथ आवेदन पर सुनवाई करने की तारीख की नोटिस भेजेगा। प्रतिवादी पहली सुनवाई या उससे पहले या नोटिस तामील किये जाने की तारीख से 30 दिनों तक दावा की गईं क्षतियों के बारे में लिखित विवरण देना होगा। यदि प्रतिवादी उपस्थित नहीं हुआ तो अधिकरण उसके खिलाफ एकपक्षीय कार्रवाई करेगा। पक्षकार के आवेदन या अन्य वाजिब कारणों से अधिकरण समय-समय पर सुनवाई स्थगित कर सकता है। किसी भी स्थिति में एक पक्षकार को तीन महीने से ज्यादा का स्थगन नहीं दिया जाएगा।

भू-राजस्व के बकाये की तरह होगी वसूली

  • दावा अधिकरण ऐसे प्रतिवादी की संपत्ति को कुर्क कर लेगा। साथ ही, प्राधिकारियों को निर्देश देगा कि वह प्रतिवादी की संपत्ति नहीं खरीदने के बारे में सार्वजनिक रूप से बड़े पैमाने पर चेतावनी जारी करें और इसके साथ उसका नाम, पता व फोटोग्राफ प्रकाशित करें। अधिकरण क्षतिपूर्ति की धनराशि के लिए कलेक्टर को प्रमाणपत्र जारी कर सकता है। कलेक्टर उसकी वसूली भू-राजस्व के बकाये की तरह करेगा। अधिकरण अनुकरणीय क्षति के तौर पर मुआवजे की दोगुनी धनराशि भी वसूलने का आदेश दे सकता है।

दावा आयुक्त और सर्वेयर की तैनाती का अधिकार

  • अधिकरण जांच और नुकसान के आकलन के लिए दावा आयुक्त की तैनाती कर सकता है। दावा आयुक्त अपर जिला मजिस्ट्रेट स्तर से निचले स्तर का अधिकारी नहीं होगा। अधिकरण दावा आयुक्त की मदद के लिए प्रत्येक जिले में राज्य सरकार द्वारा नियुक्त पैनल से एक-एक सर्वेयर भी नियुक्त कर सकता है, जो नुकसान के आकलन में तकनीकी विशेषज्ञ की भूमिका निभाएगा। दावा आयुक्त तीन महीने या बढ़ाई गई अवधि के भीतर अधिकरण को रिपोर्ट सौंपेगा। अधिकरण पक्षकारों की सुनवाई के बाद दायित्व तय करेगा।

जहां दो सदस्य, वहां रिटायर्ड जिला जज होगा अध्यक्ष

  • दावा अधिकरण में सदस्यों की संख्या राज्य सरकार जैसा उचित समझे, उतनी होगी। जहां दो या दो से अधिक सदस्य हों, वहां उनमें एक सदस्य की नियुक्ति अध्यक्ष के रूप में की जाएगी। अधिकरण का अध्यक्ष रिटायर्ड जिला जज और सदस्य अपर आयुक्त स्तर का अधिकारी होगा। किसी क्षेत्र के लिए दो या उससे अधिक अधिकरण गठित किए जाने पर वहां राज्य सरकार उनके बीच कार्य आवंटन कर सकती है।

पृष्ठभूमि

  • लखनऊ में 19 दिसंबर, 2019 को सीएए के विरोध के दौरान जमकर बवाल हुआ था। राज्य सरकार ने हिंसा के आरोप में दर्जनों लोगों पर मुकदमा दर्ज किया था। 57 लोगों को नोटिस भेजकर निजी और सरकारी संपत्ति को हुए नुकसान की भरपाई करने का निर्देश दिया गया था। इन सभी की तस्‍वीरों वाला पोस्‍टर शहर में जगह-जगह लखनऊ जिला प्रशासन और पुलिस ने लगवाए थे। यह मामला इलाहाबाद हाई कोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया। इसके बाद सरकार ने विरोध प्रदर्शनों, जुलूसों व ऐसे अन्य आयोजनों के दौरान सार्वजनिक व निजी संपत्तियों को क्षति पहुंचाने वाले लोगों से नुकसान की भरपाई के अध्यादेश को शुक्रवार को कैबिनेट की बैठक में रखा था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश रिकवरी ऑफ डैमेज टू पब्लिक एंड प्राइवेट प्रापर्टी अध्यादेश, 2020 के ड्राफ्ट को मंजूरी दी।

सुप्रीम कोर्ट में मनी लांड्रिंग कानून को चुनौती

  • प्रिवेंशन ऑफ मनी लांड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। इस कानून को असंवैधानिक बताते हुए कहा गया है कि इसके क्रिमिनल प्रोसीजर कोड (सीआरपीसी) में किसी संज्ञेय अपराध की जांच और ट्रायल के बारे में दी गई प्रक्रिया का पालन नहीं होता है। कोर्ट ने कानून को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

पृष्ठभूमि

  • दरअसल सीआरपीसी के चैप्टर-12 में संज्ञेय अपराध में एफआइआर दर्ज होने से लेकर जांच और चार्जशीट दाखिल करने आदि की प्रक्रिया दी गई है। संज्ञेय अपराध में अगर किसी को गिरफ्तार किया जाता है तो उसे नियम के मुताबिक 24 घंटे के भीतर मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जाना चाहिए जबकि पीएमएलए के तहत ऐसा नहीं होता है। उसमें गिरफ्तार करने के बाद मजिस्ट्रेट की कोई भूमिका ही नहीं है। सिर्फ कंप्लेन (पीएमएलए में चार्जशीट की जगह कंप्लेन दाखिल होती है) दाखिल करने के वक्त मजिस्ट्रेट की भूमिका आती है। कोर्ट ने पिछले सप्ताह याचिका पर दलीलें सुनने के बाद मामले में नोटिस जारी किया और इस याचिका को भी इसी मसले पर पहले से लंबित याचिकाओं के साथ संलग्न करने का आदेश दिया।

क्या है मनी लांड्रिंग कानून?

  • भारतीय संसद ने वित्तीय अपराधों को रोकने और वित्तीय अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट बनाया है.
  • इस कानून के तहत वित्तीय अपराध करने वाले को तीन साल से सात साल तक की कठोर सजा का प्रावधान किया गया है. इसके अलावा आरोपी पर जुर्माना लगाया जा सकता है और उसकी संपत्ति भी जब्त की जा सकती है. अगर वित्तीय अपराध कोई कंपनी या फर्म करती है, तो उसके अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाती है. कई बार शेल कंपनी बनाकर वित्तीय धोखाधड़ी की जाती है और काले धन को सफेद किया जाता है. साथ ही टैक्स चोरी की जाती है.

:: भारतीय अर्थव्यवस्था ::

SBI के अलावा यस बैंक को मिले 7 निवेशक

  • स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के बाद अब प्राइवेट सेक्टर के दूसरे बैंक भी यस बैंक में निवेश के लिए सामने आए हैं। ICICI बैंक ने शुक्रवार को कहा कि वह यस बैंक में 1,000 करोड़ रुपये का निवेश करेगा। एचडीएफसी बैंक ने भी यस बैंक में 6 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने का ऐलान किया है। इसके लिए वह 1000 करोड़ रुपये निवेश करेगा।
  • इन दो बैंकों के अलावा एक्सिस बैंक, कोटक महिन्द्रा बैंक, राधाकिशन दमानी, राकेश झुनझुनवाला और अजीम प्रेमजी भी 500-500 करोड़ निवेश कर 3-3 फीसदी हिस्सेदारी खरीदेंगे। एसबीआई ने पहले ऐलान किया था कि वह यह बैंक का 725 करोड़ शेयर 10 रुपये के भाव से खरीदेगा। वह इस तरह यस बैंक में 7250 करोड़ रुपये निवेश करेगा।

भारत में वर्क टू होम की स्थिति

  • कोरोना के कहर को देखते हुए दुनिया भर की कंपनियां और सरकारी विभाग कर्मचारियों को घर से ही कामकाज करने की सुविधा प्रदान कर रहे हैं। वहीँ भारत में भी यह कवायद चल रही है।गार्टनर की रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है कि देश की 54 फीसदी कंपनियों के पास वर्क टू होम के लिए पर्याप्त तकनीक और संसाधन ही नहीं हैं।

रिपोर्ट के मुख्य बिंदु

  • गूगल, माइक्रोसॉफ्ट जैसी आईटी कर्मचारियों के लिए वीडियो कान्फ्रेसिंग और अन्य सॉफ्टवेयर की मदद से दूरदराज या घर से काम करना आसान है।
  • लेकिन ज्यादातर गैर आईटी कंपनियों और छोटे-मझोले उद्योगों के पास विकल्प ही नहीं है। पुराने डेस्कटॉप-लैपटॉप, खराब नेटवर्क, कनेक्टिविटी और यूपीएस बैकअप न होने से वे लाचार नजर आ रही हैं।
  • दो तिहाई से ज्यादा कर्मचारियों को गूगल हैंगआउट, स्काइप, जूम, सिस्को वेबएक्स, गूटोमीटिंग, माइक्रोसॉफ्ट टीम्स, फ्लॉक जैसे ग्रुप चैट, डॉक्यूमेंट शेयरिंग और समूह के लिए काम करने वाले सॉफ्टवेयर की जानकारी तक नहीं है।
  • अब सवाल यह की अगर जल्द इस बीमारी पर काबू नहीं पाया गया तो भारत के लगभग 54% कमापनियों की कमर टूट सकती है। व्यूसोनिक के बिजनेस हेड मुनीर अहमद का कहना है कि रिमोट वर्किंग न होने से मैन्युफैक्चरिंग से लेकर कारपोरेट और शिक्षा क्षेत्र सर्वाधिक प्रभावित है।
  • क्लाउडकनेक्ट कम्यूनिकेशंस के कार्यकारी प्रमुख गोकुल टंडन के मुताबिक, टेलीमेडिसन, टेलीवर्किंग का ढांचा बेहतर करने की जरूरत है। यह उनके लिए सबक है और किसी अन्य वैश्विक आपदा के लिए उन्हें अभी से हर कर्मचारी को आधुनिक डिजिटल स्किल का प्रशिक्षण देना शुरू कर देना चाहिए। गार्टनर के वरिष्ठ निदेशक सैंडी शेन का कहना है कि बाजार की मांग है कि कंपनियों का डिजिटल ढांचा न केवल बाहरी हमले, बल्कि आंतरिक चुनौतियों के लिए मजबूत हो।

:: विज्ञान और प्रौद्योगिकी ::

वैक्सीन का इतिहास

  • कोरोना इंसानों के अस्तित्व पर भले ही संकट बना हो, लेकिन इंसान हमेशा से अपने अस्तित्व को लेकर बहुत सजग और सतर्क रहा है।
  • दुनिया भर में इस बीमारी को लेकर भय व्याप्त है। अमेरिका सहित कई देश और बड़ी दवा कंपनियां दवा और टीके की ईजाद में रात-दिन एक किए हैं। भारी खर्च और बड़ी मशक्कत के बाद भी रास्ता नहीं सूझ रहा है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इसकी दवा बनाने में फिलहाल अभी महीनों का वक्त लगेगा जबकि टीका अगले साल ही तैयार हो पाएगा। पूर्वी उत्तर प्रदेश में एक कहावत है, जिसमें कोई पूछता है कि सेठ, हल्दी क्या भाव है? जवाब मिलता है कि जैसा चोट में दर्द हो?

अथक मशक्कत के बाद तैयार हुए टीके

  • किसी बीमारी के टीके की अहमियत अब दुनिया को पता चल रही है। वर्तमान में ऐसी तमाम बीमारियां हैं जिनके टीके अथक मशक्कत के बाद तैयार हुए। दशकों से उनके इस्तेमाल से हम सुरक्षित रहे हैं। कई महामारियों का नामोनिशां इन्हीं के बूते मिटाया जा चुका है। फिर भी हम टीकाकरण के प्रति अन्यमनस्क रहते हैं। दलील देते हैं कि फलाने के जमाने में कौन सा टीका होता था। सब खाने-कमाने के धंधे हैं। जनाब, अगर आपकी भी यही सोच है तो इसे बदलिए। टीकाकरण के बूते ही आज शिशु और मातृ मृत्युदर में बहुत कमी पाई जा चुकी है।

वरदान बना बच्चों का टीकाकरण

  • बच्चों के लिए टीकाकरण तो एक तरह से वरदान साबित हो रहा है। 1995 में इसी दिन पोलियो की पहली खुराक पिलाई गई थी। लिहाजा कोरोना से सबक लेते हुए आज ही अपने स्वजनों को उनके लिए जरूरी टीके जरूर दिलाएं। ऐसे में आधुनिक स्वास्थ्य क्षेत्र में टीके की अहमियत की पड़ताल आज सबके लिए बड़ा मुद्दा है।

कब हुई टीकाकरण की शुरुआत

  • माना जाता है कि वास्तविक रूप से टीकाकरण का इतिहास अंग्रेज चिकित्सक एडवर्ड जेनर के समय से शुरू होता है। 1976 में जेनर ने पाया कि जो महिलाएं डेयरी उद्योग में काम करती हैं और वे काऊपॉक्स से संक्रमित होती है, लेकिन उन्हें चेचक नहीं होता। अपनी अवधारणा को साबित करने के लिए उन्होंने फार्म में काम करने वाले एक युवा के बाएं हाथ में चीरा लगाकर उसे काऊपॉक्स के विषाणुओं से संक्रमित कर दिया। हालांकि इस लड़के को चेचक नहीं हुआ। इस बात की पुष्टि होने के बाद उन्होंने चेचक का टीका बनाया। यह बीमारी उन दिनों महामारी बनकर लाखों लोगों का जीवन असमय निगल जाती थी।

पाश्चर का सिद्धांत

  • वैक्सीनेशन शब्द लैटिन भाषा के वैक्सीनस से बना है। जिसका अर्थ होता है गाय या उससे संबंधित। 18वीं सदी के उत्तराद्र्ध में फ्रांस के महान माइक्रोबॉयोलाजिस्ट लुई पाश्चर ने जर्म थ्योरी ऑफ डिजीज दी। इसी बुनियाद पर उन्होंने चिकेन पॉक्स, कॉलरा, रैबीज और एंथ्रेक्स के टीके विकसित किए।

ऐसे काम करता है टीका

  • टीका प्रतिरक्षा तंत्र को मजबूत करके शरीर की प्राकृतिक रक्षा प्रणाली को सक्रिय करने का काम करता है। इसके चलते जब बाहरी रोग शरीर में घुसने की कोशिश करता है तो हमारी प्रतिरक्षी तंत्र उसे मार भगाता है। अगर उसके खात्मे में अक्षम साबित होता है तो कम से कम उसके असर को कम कर देता है। ज्यादातर टीके वायरल रोगों से निपटने के लिए तैयार किये जाते हैं लेकिन कुछ का निर्माण कैंसर के इलाज और रोकथाम में भी किया जाता है। सांप काटने के इलाज के अलावा नशामुक्ति के लिए भी टीके तैयार होते हैं।

टीकों का विज्ञान

  • वायरल रोग जिनके चलते होते हैं उन पैथोजेन को एंटीजेन कहा जाता है। मानव शरीर इन एंटीजेन से लड़ने के लिए एक खास किस्म का प्रोटीन बनाता है जिसे एंटीबॉडी कहते हैं। यही एंटीबॉडी एंटीजेन का काम तमाम करने में सक्षम होता है। शुरुआत में शरीर में एंटीबॉडी के निर्माण की गति धीमी होती है। हमारे शरीर में एंटीबॉडी के निर्माण की दर और पैथोजेन के पुनर्उत्पादन की रफ्तार में जो जीतता है, वही विजयी होता है। यानी अगर एंटीबॉडी पैथोजेन की तुलना में ज्यादा बन रही है तो आप बीमार नहीं होते हैं, लेकिन अगर हालात प्रतिकूल हैं तो आपको बीमार होने में देर नहीं लगेगी।

एक्टिव इम्युनिटी

  • इंसान के शरीर में जब एंटीबॉडी तैयार होते हैं तो उसी के साथ दूसरी कोशिकाएं भी बनती हैं जिन्हें मेमोरी सेल्स कहा जाता है। ये मेमोरी सेल्स व्यक्ति के रक्त और लिंफ (लसीका) में लंबे समय तक परिसंचरित होते रहते हैं। ऐसे में अगर किसी पैथोजेन का शरीर पर हमला होता है तो ये कोशिकाएं बहुत त्वरित गति से बड़ी मात्रा में एंटीबॉडी तैयार करती हैं। लिहाजा रोग के लक्षण प्रकट होने से पहले ही पैथोजेन का खात्मा हो जाता है। इसे ही एक्टिव इम्युनिटी (सक्रिय प्रतिरक्षा) कहते हैं और ये लंबे समय बाद खत्म होती है।

पैसिव इम्युनिटी

  • प्रतिरक्षा तंत्र का यह दूसरा प्रकार है। यह शरीर में सुशुप्त अवस्था में विद्यमान रहती है लेकिन जब कोई बाहरी उत्प्रेरक खुराक के रूप में इसे मिलती है तो यह जाग्रत या सक्रिय हो जाती है। प्राकृतिक रूप से मां का दूध या किसी अन्य कृत्रिम उपाय से इसकी सक्रियता वापस लाई जा सकती है। कृत्रिम उपायों में ही टीका एक है।

:: विविध ::

तीजन बाई को लोक निर्मला सम्मान

  • लखनऊ स्थित संत गाडगे कैंपस में सोनचिरैया संस्था की ओर से पंडवानी गायिका पद्म विभूषण तीजन बाई को लोक निर्मला सम्मान से नवाजा गया। सम्मान के तौर पर उन्हें उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक लाख रुपए और सर्टिफिकेट देकर सम्मानित किया। संस्था की ओर से लोक संस्कृति के उत्थान में बेहतर काम करने के लिए यह सम्मान दिया गया है। लोक निर्मला सम्मान हर साल दिया जाएगा।

न्यायमूर्ति बंसीलाल भट

  • सरकार ने न्यायमूर्ति बंसीलाल भट को राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) का कार्यवाहक चेयरमैन नियुक्त किया है। वह न्यायमूर्ति सुधांशु ज्योति मुखोपाध्याय के स्थान पर चेयरमैन बनाए गए हैं।

इंडियन सुपर लीग (आईएसएल)

  • इंडियन सुपर लीग (आईएसएल) का फाइनल आज एटलेटिको डी कोलकाता (एटीके) चेन्नईयन एफसी के बीच शनिवार यानी 14 मार्च को गोवा के फटोर्दा में जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम पर खेला गया। कोरोना वायरस के कारण यह मुकाबला स्टेडियम में दर्शकों की गैरमौजूदगी में हुआ। एटीके ने चेन्नईयन एफसी को 3-1 से हरा दिया। इस जीत के साथ वह तीसरी बार चैंपियन बन गया है। वह टूर्नामेंट के इतिहास में सबसे ज्यादा बार खिताब जीतने वाली टीम बन गई।

ओमान ओपन

  • भारत के युवा टेबल टेनिस खिलाड़ी जीत चंद्रा ने शनिवार को यहां दुनिया के दूसरे नंबर के खिलाड़ी मानव ठक्कर को सीधे सेटों में हराकर ओमान ओपन में अंडर-21 मेंस सिंगल्स इवेंट का खिताब अपने नाम किया। दुनिया के 18वें नंबर के खिलाड़ी चंद्रा ने हमवतन ठक्कर को महज 24 मिनट में 11-6, 11-7, 13-11 से हराया।

चमेली देवी जैन पुरस्कार

  • द वायर की वरिष्ठ संपादक आरफा खानम शेरवानी, बेंगलुरु की स्वतंत्र पत्रकार रोहिणी मोहन और चेन्नई की स्वतंत्र डेटा पत्रकार रुक्मणी. एस को प्रतिष्ठित चमेली देवी जैन पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। वर्ष 2019 की सर्वश्रेष्ठ महिला पत्रकार के तौर पर तीनों को संयुक्त रूप से यह सम्मान दिया गया है।
  • आपको बता दे सर्वश्रेष्ठ महिला पत्रकार की पहचान के लिए मीडिया फाउंडेशन ने 1980 में चमेली देवी जैन पुरस्कार की शुरुआत की थी। इसका नाम दिग्गज स्वतंत्रता सेनानी एवं समाज सुधारक चमेली देवी जैन के नाम पर रखा गया।

ऑल इंग्लैंड चैम्पियनशिप

  • डेनमार्क के विक्टर एक्सेलसन ने पहली बार ऑल इंग्लैंड ओपन बैडमिंटन चैम्पियनशिप का खिताब जीता। 21 साल बाद डेनमार्क का कोई खिलाड़ी चैम्पियन बना। इससे पहले पीटर गेड ने 1999 में यह चैम्पियनशिप जीती थी। तब उन्होंने इंडोनेशिया के तौफिक हिदायत को हराया था।

:: प्रिलिम्स बूस्टर ::

  • मास्क एवं सेनेटाइजर वस्तुओं को ड्रग्स का दर्जा मिल जाने पर इसके कीमतों के निर्धारण हेतु कौन सी शीर्ष संस्था उत्तरदाई होगी? (नेशनल फार्मास्यूटिकल्स प्राइसिंग अथॉरिटी-एनपीपीए)
  • हाल ही में किस स्थान पर देश का सबसे बड़ा अशोक चक्र स्थापित किया गया है? (यमुनानगर-हरियाणा)
  • भारत सरकार के द्वारा कोरोना की चुनौती से निपटने के लिए आपदा फंड के इस्तेमाल हेतु किन नियमों में संशोधन किया गया है? (स्टेट डिजास्टर रिस्पांस फंड -एसडीआरएफ)
  • हाल ही में अमेरिका के किस राज्य के द्वारा योग पर से प्रतिबंध को हटा दिया गया है? (अलबामा)
  • दक्षिणी राज्य के लिए राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण(एनसीएलएटी) की नई पीठ की स्थापना कहाँ की गई है? (चेन्नई)
  • हाल ही में किस राज्य में संपत्ति क्षय दावा अधिकरणों (Property Damage Claims Tribunals) के गठन का फैसला किया है? (उत्तर प्रदेश)
  • हाल ही में उत्तर प्रदेश सरकार के द्वारा किसे ‘लोक निर्मला सम्मान’ प्रदान किया गया है? (तीजन बाई)
  • हाल ही में इंडियन सुपर लीग (आईएसएल) का खिताब किसने जीता? (एटलेटिको डी कोलकाता -एटीके)
  • हाल ही में किन महिला पत्रकारों को चमेली देवी जैन पुरस्कार से सम्मानित किया गया? (आरफा खानम शेरवानी, रोहिणी मोहन और रुक्मणी. एस)
  • हाल ही में किस खिलाड़ी ने ऑल इंग्लैंड चैम्पियनशिप का खिताब अपने नाम किया? (विक्टर एक्सेलसन)

स्रोत साभार: Dainik Jagran (Rashtriya Sanskaran), Dainik Bhaskar (Rashtriya Sanskaran), Rashtriya Sahara (Rashtriya Sanskaran) Hindustan Dainik (Delhi), Nai Duniya, Hindustan Times, The Hindu, BBC Portal, The Economic Times (Hindi & English), PTI, PIB

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