(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (14 जुलाई 2020)

दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर


(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (14 जुलाई 2020)


:: राष्ट्रीय समाचार ::

नेशनल इंटेलिजेंस ग्रिड (NATGRID)

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में नेशनल इंटेलिजेंस ग्रिड (NATGRID) ने चुराए गए वाहनों और एफआईआर के संदर्भ में केंद्रीयकृत ऑनलाइन डेटाबेस का उपयोग करने हेतु राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। यह समझौता ज्ञापन NATGRID को क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम (CCTNS)डेटाबेस के उपयोग करने की अनुमति प्रदान कराएगी। CCTNS देश के 14000 पुलिस स्टेशनों को आपस में जोड़ता है एवं सभी राज्य पुलिस संस्थाओं को CCTNS में एफआईआर दर्ज करना अनिवार्य है।

क्या है NATGRID?

  • Natgrid भारत सरकार की एक महात्त्वाकांक्षी परियोजना है जिसके तहत सरकार बिखरी हुई सूचनाओं व जानकारियों को एक online प्लेटफार्म में एकत्रित करेगी। इन जानकारियों के माध्यम से सरकार की सुरक्षा सम्बन्धी नीतियों को बल मिलेगा।
  • इन सूचनाओं को big data के रूप में एकत्रित करके व इनका विश्लेषण करके सरकार हर एक संदेहास्पद गतिविधि पर नजर रख सकेगी जिससे भविष्य में उत्पन्न होने वाले खतरों को टाला जा सके व उनसे निपटने की पूर्व तैयारी की जा सके।
  • इन खतरों में आतंकवादी हमले, अपराध, तस्करी, व संगठित अपराधों आदि के ऊपर नजर रखी जा सकेगी।

नैटग्रिड की संरचना:

  • Natgrid को भारत के श्रेष्ठतम इंजीनियरों व cyber experts के द्वारा design किया गया है जिसमें इसकी गोपनीयता का खास ध्यान रखा गया है।
  • दरअसल Natgrid में कुल 21 एजेन्सियों से data को इकठ्ठा कर उसे सुरक्षित रखा जायेगा। जिसमें लोगों के Bank Accound की जानकारी, टैक्स का पैसा, अप्रवासी लोगों की जानकारी, उनके रूपयों का लेन-देन उनके फोन कॉल की जानकारी, उनकी यात्रा का विवरण आदि से जुड़ी जानकारियाँ रखी गई है।
  • गौरतलब है कि इन जानकारियों तक सरकार की सिर्फ 10 संस्थाओं की पहुँच ही रहेगी जिनमें RAW यानि Research and Analysis Wing, IB यानि Intelligence Bureu, Military Intelligence, NIA आदि जैसी सुरक्षा एजेन्सियाँ शामिल रहेगी।
  • Natgrid का कार्यालय नई दिल्ली में जबकि इसके Data collection का कार्यालय बैंगलोर में होगा।

नैटग्रिड की जरूरत क्यों?

  • दरअसल भारत में किसी बड़ी अनहोनी या दुर्घटना के हो जाने पर या होने से पहले तमाम सरकारी संस्थाओं के बीच सामन्जस्य की कमी देखी गई थी। जिससे उनके बीच तालमेल बिठाना मुश्किल कार्य था।
  • खासकर 26/11 को मुंबई में हुये आतंकवादी हमले के बाद इसकी चर्चा जोर शोर से हुई थी कि भविष्य में ऐसे हमलों को रोकने के लिये सरकार व तमाम एजेन्सियाँ क्या करेंगी।
  • अभी तक यदि किसी एक Agency को दूसरी से कोई जानकारी लेनी होती थी तो पारम्परिक तरीके से उसमें समय लगता था और ऐसी घटनाओं में समय की क्या उपयोगिता होती है यह मुंबई जैसे हमलों ने समझा दी थी।
  • यही कारण है कि सरकार को Natgrid जैसे ठोस कदम की आवश्यकता पड़ी।
  • सरकार के मुताबिक Natgrid की आधारभूत सरंचना पूर्ण कर इसे दिसम्बर 2020 तक चालू कर दिया जायेगा।
  • अमेरिका जैसे देशों में Centralised Intelligence System यानि केन्द्रीकृत सूचना प्रणाली 1990 के दशक से ही कार्य कर रही है जिसने अमेरिका की CIA, FBI जैसी संस्थाओं को बल दिया है साथ ही विदेशों में आतंकवाद के खिलाफ चलाये गये अभियानों में कारगर भी साबित हुई है।

नैटग्रिड की आलोचना क्यों?

  • दरअसल कुछ लोगों के मुताबिक Natgrid, Right to privacy के खिलाफ है जिसमें आम लोगों की व्यक्तिगत जानकारी का सरकार गलत प्रयोग कर सकती है।
  • दूसरी यह कि राज्यों की पुलिस को Natgrid तक पहुँच नही मिलेगी जिससे किसी भी संदेहास्पद घटना पर तुरन्त कार्यवाही संभव नही हो पायेगी क्योंकि स्थानीय पुलिस को प्रथम प्रतिक्रिया कर्ता यानि first responder माना जाता है।
  • तीसरी यह कि ऐसे plateform की सुरक्षा करना एक बड़ी जिम्मेदारी होगी क्योंकि आतंकवादी आजकल cyber attack करने में माहिर हो गये हैं।

पद्मनाभस्वामी मंदिर

चर्चा में क्यों?

  • केरल के तिरुवनंतपुरम स्थित श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर के कानूनी विवाद में फैसला सुनते हुये सुप्रीम कोर्ट ने पद्मनाभस्वामी मन्दिर के प्रबंधन में त्रावणकोर के राजपरिवार के अधिकार को मान्यता दे दी।

पृष्ठभूमि

  • 1949 में त्रावणकोर और कोचिन के शाही परिवार और भारत सरकार के बीच अनुबंध के अनुसार श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर का प्रशासन 'त्रावणकोर के शासक' के पास रहेगा।
  • इसके उपरान्त त्रावणकोर कोचिन हिंदू रिलीजियस इंस्टिट्यूशंस एक्ट के सेक्शन 18(2) के तहत मंदिर का प्रबंधन त्रावणकोर के शासक के नेतृत्व वाले ट्रस्ट के हाथ में रहा।
  • त्रावणकोर के आखिरी शासक के निधन उपरान्त केरल सरकार ने उनके भाई उत्राटम तिरुनाल मार्तण्ड वर्मा के नेतृत्व में प्रशासकीय समिति के पास मंदिर का प्रबंधन सौंपा।
  • मंदिर के तहखानों में जमा संपत्ति पर राज परिवार का अधिकार होने का दावा कर मार्तड वर्मा 2007 में कोर्ट में मामला ले गए थे जिसके उपरान्त भक्तों ने याचिका लगाई कि त्रावणकोर शाही परिवार को मंदिर की संपत्ति का बेजां इस्तेमाल की अनुमति न दी जाए।
  • केरल की एक निचली अदालत ने राज परिवार के दावे के खिलाफ एक निषेधाज्ञा पारित की जिसके बाद यह मामला हाईकोर्ट चला गया। हाईकोर्ट ने 2011 के फैसले में आदेश पारित किया कि मंदिर के मामलों का प्रबंधन करने के लिए एक बोर्ड का गठन किया जाए जिसके विरुद्ध राज परिवार ने हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में फौरन याचिका दायर की।

फैसले के प्रमुख निष्कर्ष

  • अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि चार हफ्ते में प्रबंधन और सलाहकार समिति का गठन किया जाए और इन समितियों का पीठाधीश हिन्दू होगा।
  • सुप्रीम कोर्ट ने कहा है मंदिर की तमाम संपत्तियों को संरक्षित करने की इन समितियों की जिम्मेदारी होगी।
  • पद्मनाभस्वामी मंदिर के तहखाने (कल्लरा बी) को खोला जाए या नहीं इसका फैसला सुप्रीम कोर्ट ने प्रबंधन और सलाहकार समिति पर छोड़ दिया है।

श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर के बारे में

  • श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर केरल के तिरुअनन्तपुरम में स्थित भगवान विष्णु का प्रसिद्ध वैष्णव हिन्दू मंदिर है।
  • मंदिर के गर्भगृह में भगवान विष्णु की विशाल मूर्ति शेषनाग पर शयन मुद्रा में विराजमान हैं। भगवान विष्णु की विश्राम अवस्था को ही 'पद्मनाभ' कहा जाता है।

मंदिर का स्थापत्य

  • भगवान विष्णु को समर्पित पद्मनाम मंदिर को त्रावणकोर के राजाओं ने बनाया था।
  • इसका जिक्र 9 वीं शताब्दी के ग्रंथों में भी आता है, लेकिन मंदिर के मौजूदा स्वरूप को 1733 ई. में त्रावणकोर के राजा मार्तंड वर्मा ने बनवाया था।
  • इस मंदिर का वास्तुशिल्प द्रविड़ एवं केरल शैली का मिला-जुला रूप है।
  • इस मंदिर गोपुरम द्रविड़ शैली में बना हुआ है जिसमें सुंदर नक्काशी की गयी है।
  • मंदिर के पास ही एक सरोवर भी है, जो 'पद्मतीर्थ कुलम' के नाम से जाना जाता है।

दवा पार्क और चिकित्सा उपकरण पार्क

चर्चा में क्यों :-

  • केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री श्री डी.वी. सदानंद गौड़ा ने बताया है कि फार्मास्युटिकल विभाग ऐसे दिशा-निर्देशों को अंतिम रूप दे रहा है जो देश में आगामी तीन विस्तृत दवा पार्कों और चार चिकित्सा उपकरण पार्कों के लिए तटस्थ रूप से जगह चयन करने के लिए आधार तैयार करेगा।

पृष्ठभूमि

  • केंद्रीय मंत्रिमंडल ने महत्वपूर्ण एपीआई/ केएसएम और चिकित्सा उपकरणों के घरेलू उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए 12 मार्च,2020 को तीन विस्तृत दवा पार्कों और चार चिकित्सा उपकरण पार्कों के विकास के लिए एक योजना को मंजूरी दी थी
  • इसके अतिरिक्त भारत सरकार ने देश भर में महत्वपूर्ण प्रारंभिक सामग्री / ड्रग इंटरमीडिएट्स एवं एपीआई और चिकित्सा उपकरणों के घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए एक उत्पादन लिंक्ड प्रोत्साहन योजना की भी घोषणा की है। इन योजनाओं पर लगभग 13,760 करोड़ रुपये का वित्तीय भार पड़ेगा।
  • विस्तृत दवा पार्क को बढ़ावा देने की योजना से लगभग 46,400 करोड़ रुपये की अतिरिक्त थोक दवाओं का उत्पादन होगा और चिकित्सा उपकरण पार्क की योजना से लगभग 68,437 करोड़ रुपये के चिकित्सा उपकरणों का उत्पादन बढ़ेगा।
  • इन योजनाओं के परिणामस्वरूप रोजगार के नए अवसरों का सृजन भी होगा।

दवा पार्कों के बारे में

  • दवा पार्क केंद्र तथा राज्य सरकार की साझेदारी से स्थापित किये जाएंगे
  • भारत सरकार राज्य सरकारों को 1 बिस्तृत दवा पार्क की स्थापना के लिए 1000 करोड़ रूपए प्रदान करेगी। इस प्रकार 3 दवा पार्कों हेतु निर्धारित कुल राशि 3000 करोड़ रूपये है जिसे अगले 5 वर्षों में व्यय किया जायेगा
  • पार्कों में सॉल्वेंट रिकवरी प्लांट, डिस्टिलेशन प्लांट, पावर एंड स्टीम यूनिट्स, कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट होना अनिवार्य है।
  • इन दवा पार्कों में लगभग 140 से अधिक दवा निर्माता कम्पनिया दवा का उत्पादन करेंगी।
  • 1 दवा पार्क मध्य प्रदेश में प्रस्तावित है।
  • हाल ही में पंजाब के भटिंडा को पंजाब सरकार द्वारा पार्क विकास हेतु प्रस्तावित किया गया है परन्तु केंद्र द्वारा इस प्रस्ताव पर कोई भी प्रतिक्रिया अभी शेष है।

चिकित्सा उपकरण पार्क के बारे में :-

  • चिकित्सा उपकरण पार्क हेतु केंद्र सरकार अधिकतम 100 करोड़ की सहायता देगी।
  • इनमें विश्वस्तरीय चिकित्सा उत्पादों का निर्माण किया जाएगा जिससे वह स्थानीय स्तर पर इलाज के लिए वहनीय कीमत पर उपलब्ध होंगे। ये पार्क आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु और केरल में प्रस्तावित हैं । हालांकि गुजरात और उत्तराखंड ने भी केंद्र सरकार से ऐसे पार्क स्थापित करने के लिए कहा है।
  • इन पार्क में विनिर्माता कंपनियों को सभी अनिवार्य बुनियादी सुविधाएं मुहैयां करायी जाएंगी।
  • इससे ना सिर्फ देश का आयात बिल कम करने में मदद मिलेगी बल्कि उत्पादन की लागत भी कम होगी। ।
  • आंध्र प्रदेश मेडटेक जोन में सुपरकंडक्टिंग मैगनेटिक कॉइल टेस्टिंग एंड रिसर्च के लिए साझा सुविधा केंद्र (सीएफसी) के निर्माण के लिए हाल ही में सैद्धांतिक मंजूरी दी गयी है।
  • इस समय भारत नेट चिकित्सा उपकरण आयातक है। अतः ये योजनाएं भारत की आयात को भी कम करेगा।

ई-ज्ञानकोश

चर्चा में क्यों?

  • मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने छात्रों से अध्ययन के लिए ई-ज्ञानकोश की मदद लेने का सुझाव दिया है।

क्या है ई-ज्ञानकोश

  • ई-ज्ञानकोश राष्ट्रीय स्तर की रिपॉजिटरी है जिसमें मुक्त और दूरस्थ शिक्षा कोर्स उपलब्ध हैं । छात्रों को इग्नू से संबंधित तमाम कक्षाओं के रिकॉर्डेड और लाइव वीडियो मिल जाएंगे । इसमें लिए 2200 शैक्षणिक पाठ्यक्रमों की सामग्री उपलब्ध हैं । इसके अलावा छात्रों के लिए 2000 वीडियो लेक्चर्स भी उपलब्ध हैं ।
  • इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) ई-ज्ञानकोश के जरिये तमाम तरह के डिप्लोमा और सर्टिफिकेट कोर्स ऑनलाइन उपलब्ध करा रहा है। जो लोग डिप्लोमा, सर्टिफिकेट कोर्स करना चाहते हैं तो ई-ज्ञानकोश की मदद ले सकते हैं जहां काफी मात्रा में गुणवत्तापूर्ण सामग्री है।

भूमि के बेहतर इस्तेमाल के लिए केवीआईसी मॉडल

चर्चा में क्यों?

  • खादी और ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) ने बताया है कि केंद्र सरकार के थिंकटैंक नीति आयोग ने राज्यों से कहा है कि वे आयोग के मॉडल के आधार पर अपनी वन भूमि और कृषि भूमि पर चंदन और बांस की पौध लगाएं, साथ ही राज्यों में किसानों को भी ऐसे व्यावसायिक वृक्षारोपण के लिए प्रोत्साहित करें।

केवीआईसी मॉडल के बारे में

  • केवीआईसी ने 262 एकड़ भूमि में फैले नासिक स्थित अपने प्रशिक्षण केंद्र में चंदन और बांस के पेड़ लगाए थे। केवीआईसी ने चंदन और अगरबत्ती बनाने में काम आने वाली बांस की विशेष किस्म बंबूसी टुल्डा के 500-500 पेड़ लगाए। केवीआईसी को 10-15 वर्षों में तैयार होने वाले चंदन के पेड़ों से 50 करोड़ रुपये मिलने की उम्मीद है, जबकि बांस के पेड़ों से तीन साल बाद हर साल चार से पांच लाख रुपये मिलने का अनुमान है।
  • 'केवीआईसी की इस कवायद से दो उद्देश्य पूरे होंगे- विशाल भूमि संसाधानों से कुछ आमदनी होगी और किसानों को वित्तीय मजबूती के लिए चंदन और बांस की व्यावसायिक खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा सकेगा।'
  • चंदन और बांस का वृक्षारोपड़, जो संपत्तियों के मौद्रिकरण और वित्तीय स्थायित्व के लिए केवीआईसी की अपनी तरह की पहली शुरुआत है, उसे पूरे देश में अपनाना चाहिए।

:: अंतर्राष्ट्रीय समाचार ::

कोरोना महामारी का शिक्षा पर प्रभाव: सेव द चिल्ड्रन की रिपोर्ट

चर्चा में क्यों?

  • कोरोनावायरस ने पूरी दुनिया में कहर बरपाया है। करोड़ों लोग इससे संक्रमित हुए हैं और लाखों की जान जा चुकी है। कोरोनावायरस ने पूरे देश की अर्थव्यवस्था को भी नुकसान पहुंचाया है, इसी के साथ बच्चों के भविष्य पर भी प्रभाव डाला है। बच्चों के लिए काम करने वाली संस्था सेव द चिल्ड्रन संस्था ने इस संबंध में एक रिपोर्ट तैयार की है।

रिपोर्ट के मुख्य बिंदु

  • इस रिपोर्ट में संयुक्त राष्ट्र के डेटा का हवाला देते हुए लिखा गया हैकि अप्रैल 2020 में दुनियाभर में 1.6 अरब बच्चे स्कूल और यूनिवर्सिटी नहीं जा सके। यह दुनिया के कुल छात्रों का 90 फीसदी हिस्सा है।
  • मानव इतिहास में पहली बार वैश्विक स्तर पर बच्चों की एक पूरी पीढ़ी की शिक्षा बाधित हुई। इसके परिणामस्वरूप जो आर्थिक तंगी देखी जाएगी, उसके कारण आने वाले वक्त में स्कूलों के एडमिशन पर बुरा असर पड़ेगा।
  • रिपोर्ट के अनुसार अब 9 से 11 करोड़ बच्चों के गरीबी में धकेले जाने का खतरा भी बढ़ गया। साथ ही परिवारों की आर्थिक रूप से मदद करने के लिए छात्रों को पढ़ाई छोड़ कम उम्र में ही नौकरियां शुरू करनी होंगी।
  • ऐसी स्थिति में लड़कियों की जल्दी शादी भी कराई जाएगी और करीब एक करोड़ छात्र कभी शिक्षा की ओर नहीं लौट पाएंगे। संस्था ने चेतावनी दी है कि निम्न और मध्यम आय वाले देशों में 2021 के अंत तक शिक्षा बजट में 77 अरब डॉलर की कमी आएगी।
  • संस्था के अनुसार नाइजर, माली, चाड, लाइबेरिया, अफगानिस्तान, गिनी, मॉरिटानिया, यमन, नाइजीरिया, पाकिस्तान, सेनेगल और आयवरी कोस्ट जैसे देशों पर सबसे अधिक खतरा है। कोरोना महामारी शुरू होने से पहले भी दुनिया भर के करीब 26 करोड़ बच्चे शिक्षा से वंचित थे। अब कोरोना संकट के कारण, जिन बच्चों को शिक्षा मिल पा रही थी, उनसे भी यह छिन जाने का खतरा बन गया है।

वाघा बॉर्डर के जरिए अफगानिस्तान को निर्यात की अनुमति

चर्चा में क्यों?

  • कोरोना वायरस की वजह से लगी पाबंदियों में ढील देते हुए पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के साथ द्विपक्षीय व्यापार को फिर से बहाल कर दिया है। पाक विदेश मंत्रालय के मुताबिक अफगान सरकार के विशेष निवेदन पर यह फैसला लिया गया है ताकि अफगानिस्तान के ट्रांसिट व्यापार को मदद मिल सके।
  • पाकिस्तान सरकार ने पाकिस्तान अफगानिस्तान ट्रांसिट ट्रेड एग्रीमेंट एपीटीटीए की अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा किया है। पाकिस्तान ने अफगानिस्तान संग द्विपक्षीय व्यापार को फिर से खोल दिया है।
  • पाक सरकार के मुताबिक बुधवार यानी 15 जुलाई से वाघा बॉर्डर के जरिए अफगानिस्तान निर्यात कर सकेगा। कोरोना वायरस के चलते कई देशों ने अंतरराष्ट्रीय सीमाओं को बंद कर रखा है। इसी के तहत पाकिस्तान ने भी निर्यात को बंद कर दिया था।

वाघा बॉर्डर के बारे में

  • वाघा-अटारी बॉर्डर अमृतसर से करीब 30 किमी दूर है। बाघा बॉर्डर एक सैनिक चौकी है, जो अमृतसर और लाहौर के बीच स्थित है। यह भारत-पाकिस्तान का एकमात्र सड़क सीमारेखा है और यहां विस्तृत निर्माण, सड़क और अवरोध बने हुए हैं।

:: राजव्यवस्था ::

मेडिकल प्रवेश में ओबीसी कोटे का मुद्दा

चर्चा में क्यों?

  • सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाई कोर्ट से मेडिकल के 2020-21 के शैक्षणिक सत्र में ग्रेजुएट, पोस्ट ग्रेजुएट और डेंटल कोर्स में ऑल इंडिया कोटे में तमिलनाडु सरकार द्वारा छोड़ी गई सीटों में राज्य के ओबीसी छात्रों को 50 फीसद आरक्षण का लाभ नहीं देने के केंद्र के फैसले के खिलाफ लंबित याचिकाओं पर शीघ्र फैसला लेने को कहा। इन में से एक याचिका राज्य सरकार ने दायर कर रखी है।
  • जस्टिस एल. नागेश्वर राव और हेमंत गुप्ता की पीठ ने वीडियो कांफ्रेंसिंग से सुनवाई करते हुए कहा कि हाई कोर्ट को शीर्ष अदालत में एक अन्य मामला लंबित होने के बावजूद राज्य सरकार तथा अन्य की याचिकाओं पर फैसला करना चाहिए। पीठ ने कहा, 'उसके समक्ष याचिकाओं में दिए गए सभी तर्को पर हाई कोर्ट को फैसला करना चाहिए।' इसके साथ ही पीठ ने हाई कोर्ट से इसे देखने का अनुरोध किया।

पृष्ठभूमि

  • राज्य सरकार, द्रमुक, अन्नाद्रमुक, मा‌र्क्सवादी पार्टी, तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी और कम्युनिस्ट पार्टी ने 11 जून को शीर्ष अदालत से कोई राहत नहीं मिलने पर हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। शीर्ष अदालत ने इन याचिकाओं पर विचार करने से इन्कार करते हुए उनसे राहत के लिए मद्रास हाई कोर्ट जाने को कहा था।

क्या है मामला?

  • हाई कोर्ट ने केंद्र की इस दलील का संज्ञान लेते हुए कोई भी अंतरिम आदेश देने से इन्कार कर दिया था कि 1986 से ही शीर्ष कोर्ट के निर्देशानुसार मेडिकल में प्रवेश के मामले में अखिल भारतीय स्तर पर सीटों के कोटे में कोई आरक्षण प्रदान नहीं किया गया है। केंद्र के वकील ने हाई कोर्ट को सूचित किया था कि दस साल बाद इसमें सुधार किया गया था और एससी तथा एसटी के लिए आरक्षण का प्रावधान किया गया था। ओबीसी के आरक्षण के लिए 2015 में भी याचिकाएं दायर की गई थीं जो शीर्ष कोर्ट में अभी भी लंबित हैं।

सुप्रीम कोर्ट रुल का आदेश 4 नियम 1

  • कोर्ट ने खेमका को तीन पन्नों के जवाब में कहा कि खेमका स्वयं को बुद्धिमान और योग्य समझते हैं लेकिन वह आदेश 4 रुल 1 के पीछे का तर्क समझने में विफल रहे हैं। रजिस्ट्रार इस रुल के तहत ये राय देता है कि क्या व्यक्ति कोर्ट में केस के निस्तारण में बहस करके सहायता दे सकता है। ये रुल किसी की योग्यता और ज्ञान पर सवाल नहीं करते। यद्यपि ये जरूरी नहीं है कि डॉक्टर, इंजीनियर या प्रशासक एक वकील के बराबर कोर्ट की सहायता करने में सक्षम होंगे। ऐसे हजारों केस हैं जिसमें समाज के इस बुद्धिजीवी वर्ग ने अपने अधिकार सुनिश्चित करने के लिए वकीलों की सहायता ली है।

पृष्ठभूमि

  • खेमका सुप्रीम कोर्ट में खुद पेश होकर अपने मामले में बहस की अनुमति मांगी थी और पत्र लिखकर कहा था कि जो आईएएस देश का प्रशासन चलाते हैं और कोर्ट ये फैसले लागू करवाते हैं, क्या वे सुप्रीम कोर्ट में बहस नहीं कर कोर्ट की सहायता नहीं कर सकते। साथ ही उन्होंने सुप्रीम कोर्ट रुल्स, 2013 (आदेश 4 नियम 1) की वैधता को भी चुनौती दी।
  • दरअसल कोर्ट में खुद पेश होकर बहस करने के लिए एक प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। इसके लिए दी गई अर्जी तभी स्वीकार होती है जब ये अर्जी प्रतिवादी, जो खेमका के केस में हरियाणा सरकार है, को सर्व हो जाए। रजिस्ट्री ने खेमका की हस्तक्षेप अर्जी (आईए) ये कहकर अस्वीकार कर दी कि ये प्रतिवादी को सर्व नहीं की गई है। इसके बाद खेमका ने कोर्ट को उपरोक्त पत्र लिखा।

क्या है सुप्रीम कोर्ट रुल का आदेश 4 नियम 1?

चर्चा में क्यों?

  • जब भी कोई व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होकर बहस करना चाहता है तो उसे बताना पड़ता है कि वह वकील की सेवाएं क्यों नहीं ले रहा। ये अर्जी रजिस्ट्रार के पास जाती है और वह व्यक्ति से इंटरव्यू कर यह राय कोर्ट को भेजता है कि व्यक्ति कोर्ट की जरूरी सहायता करने में सक्षम है या फिर उसके लिए एमिकस क्यूरी नियुक्त करने की आवश्यकता है।

:: अर्थव्यवस्था ::

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना

चर्चा में क्यों

  • केन्द्रीय वित्त एवं कारपोरेट कार्य मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई) के कार्यान्वयन की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की।
  • केन्द्रीय वित्त मंत्री ने बैठक में इस योजना के तहत बीमा के दावों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करने के लिए राज्यों द्वारा प्रीमियम सब्सिडी जारी करने की जरूरत पर भी जोर दिया।

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना

  • प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की शुरुआत 13 जनवरी 2016 को की गयी थी।

योजना के उद्देश्य

  • प्राकृतिक आपदाओं, कीट और रोगों के परिणामस्वरूप अधिसूचित फसल में से किसी की विफलता की स्थिति में किसानों को बीमा कवरेज और वित्तीय सहायता प्रदान करना।
  • कृषि में किसानों की सतत प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए उनकी आय को स्थायित्व देना।
  • किसानों को कृषि में नवाचार एवं आधुनिक पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना।
  • कृषि क्षेत्र में ऋण के प्रवाह को सुनिश्चित करना।
  • अधिसूचित क्षेत्रों में अधिसूचित फसल उगानेवाले पट्टेदार/ जोतदार किसानों सहित सभी किसान इस योजना का लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
  • इसमें सभी खाद्य फसलें (अनाज, बाजरा और दालें), तिलहन और वार्षिक वाणिज्यिक/वार्षिक बागवानी की फसलें शामिल हैं।
  • इस योजना में फसल के निम्नलिखित चरण और फसल नुकसान के लिए जिम्मेदार जोखिमों से सुरक्षा प्रदान की गयी हैं।
  • वाई/रोपण में रोक संबंधित जोखिम: बीमित क्षेत्र में कम बारिश या प्रतिकूल मौसमी परिस्थितियों के कारण बुवाई/ रोपण में उत्पन्न रोक।
  • खड़ी फसल (बुवाई से कटाई तक के लिए): सूखा, अकाल, बाढ़, सैलाब, कीट एवं रोग, भूस्खलन, प्राकृतिक आग और बिजली, तूफान, ओले, चक्रवात, आंधी, टेम्पेस्ट, तूफान और बवंडर जैसे जोखिमों के कारण उपज के नुकसान को कवर करने के लिए व्यापक जोखिम बीमा प्रदान की जाती है।
  • कटाई के उपरांत नुकसान: फसल कटाई के बाद चक्रवात और चक्रवाती बारिश और बेमौसम बारिश के विशिष्ट खतरों से उत्पन्न हालत के लिए कटाई से अधिकतम दो सप्ताह की अवधि के लिए कवरेज उपलब्ध है।
  • स्थानीयकृत आपदायें: अधिसूचित क्षेत्र में मूसलधार बारिश, भूस्खलन और बाढ़ जैसे स्थानीय जोखिम की घटना से प्रभावित पृथक खेतों को उत्पन्न हानि/क्षति।
  • इसके लिए किसानों को सभी खरीफ फसलों के लिए केवल 2% एवं सभी रबी फसलों के लिए 1.5% का एक समान प्रीमियम का भुगतान करना होगा जबकि वार्षिक वाणिज्यिक और बागवानी फसलों के मामले में प्रीमियम केवल 5% होगा।

भारतीय डिजिटल अर्थव्यवस्था में गूगल का निवेश

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में गूगल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुन्दर पिचई ने भारत के डिजिटल क्षेत्र को मजबूत करने हेतु $10 बिलियन के निवेश की घोषणा की है। इससे भारत में सरकार के डिजिटल अभियान कार्यक्रम को बल मिलेगा।

गूगल के निवेश से जुड़े अन्य तथ्य :-

  • भारत यद्यपि डिजिटलाइजेशन के क्षेत्र में बेहतर प्रयास कर रहा है परन्तु अभी भी यह पूर्ण क्षमता का उपयोग करने में बिफल है। यह अनुमान है कि 2025 तक भारत 1 ट्रिलियन डिजिटल अर्थव्यवस्था का देश बने अतः गूगल ने भारतीय डिजिटल अर्थव्यवस्था में तेजी लाने के उद्देश्य से भारतीय डिजिटल फण्ड में $10 बिलियन इंफ्यूज करने की बात की है।
  • गूगल के यह निवेश निम्न क्षेत्रो में सहयोग करेगा
  1. सभी भारतीयों को उनकी भाषा में आसान तथा वहनीय सूचना की पहुंच
  2. भारतीयों तक उनकी आवश्यकता अनुसार सेवा तथा नए उत्पादों को पहुंचना
  3. डिजिटल ट्रांसफोर्मशन तथा नवीन तकनीकियों के माध्यम से बिजिनेस में सहायता
  4. कृत्रिम बुद्धिमत्ता के सहायता से स्वास्थ्य , शिक्षा , कृषि में बढ़ोत्तरी

डिजिटल भारत के बारे में

  • डिजिटल इंडिया कार्यक्रम का उद्देश्य देश को डिजिटल रूप से सशक्त समाज और ज्ञान अर्थव्यवस्था में परिणत करना है। यह कार्यक्रम इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी विभाग (डीईआईटीवाई) द्वारा परिकल्पित किया गया है।
  • डिजिटल इंडिया कार्यक्रम परिवर्तनकारी प्रकृति का है जो यह सुनिश्चित करेगा की सरकारी सेवाएँ इलेक्ट्रॉनिक रूप से नागरिकों के लिए उपलब्ध हैं।

डिजिटल इंडिया के 9 स्तम्भ निम्न हैं

  • ब्रॉडबैंड हाईवे
  • मोबाइल कनेक्टिविटी के लिए सार्वभौमिक पहुँच
  • पब्लिक इंटरनेट एक्सेस कार्यक्रम
  • ई-गवर्नेंस - प्रौद्योगिकी के माध्यम से शासन में सुधार
  • ई-क्रांति - सेवाओं की इलेक्ट्रानिक डिलीवरी
  • सभी के लिए सूचना
  • इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण
  • रोजगार हेतु सूचना प्रौद्योगिकी
  • अर्ली हार्वेस्ट कार्यक्रम

जून माह में खुदरा मुद्रास्फीति 6.09 प्रतिशत

  • सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के तहत राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) इस प्रेस विज्ञप्ति के माध्‍यम से जून 2020 (अनंतिम) महीने के लिए ग्रामीण, शहरी और संयुक्‍त रूप से आधार 2012 = 100 पर चयनित उप-समूहों/ समूहों के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) में उतार-चढ़ाव को जारी किया गया है। साथ ही अखिल भारतीय ग्रामीण, शहरी और संयुक्त तौर पर उपभोक्ता खाद्य मूल्य सूचकांक (सीएफपीआई) भी जारी किए जा रहे हैं।

खुदरा मुद्रास्फीति से जुड़े तथ्य

  • खाद्य पदार्थ महंगा होने से खुदरा मुद्रास्फीति जून में बढ़कर 6.09 प्रतिशत पर पहुंच गयी। सरकार के सोमवार को जारी आंकड़े के अनुसार पिछले महीने में खाद्य मुद्रास्फीति बढ़कर 7.87 प्रतिशत हो गयी। पिछले साल जून महीने में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई दर 3.18 प्रतिशत थी।
  • सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय ने एक विज्ञप्ति में कहा कि मुद्रास्फीति का आंकड़ा कोरोना वायरस महामारी के कारण पाबंदियों की वजह से सीमित संख्या में बाजारों से एकत्रित आंकड़ों पर आधारित है। बयान के अनुसार हालांकि जो आंकड़े लिये गये हैं, राज्य स्तर पर उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) का अनुमान सृजित करने के लिये पर्याप्तता मानदंड को पूरा नहीं करते। सरकार ने कोरोना वायरस महामारी की रोकथाम के लिये 'लॉकडाउन' के कारण अप्रैल और मई का पूरा सीपीआई आंकड़ा जारी नहीं किया है
  • बता दें कि जून 2019 में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पर आधारित खुदरा मुद्रास्फीति 3.18 प्रतिशत थी। सरकार ने देश में वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए लगाए गए लॉकडाउन की पृष्ठभूमि में अप्रैल और मई के लिए छोड़े गए सीपीआई डाटा को जारी किया था। मई माह के दौरान खाद्य पदार्थों की मुद्रास्फीति 1.13 फीसदी रही थी। इससे एक महीना पहले अप्रैल में यह 2.55 फीसदी थी।

:: विज्ञान और प्रौद्योगिकी ::

MQ-9 रीपर ड्रोन

चर्चा में क्यों?

  • भारत जल्द ही दुनिया का सबसे खतरनाक लड़ाकू ड्रोन MQ-9 रीपर अमेरिका से खरीदने वाला है, जिससे सीमा पर हमारी ताकत बढ़ेगी।

MQ-9 रीपर ड्रोन की विशेषता

  • MQ-9 रीपर एक सशस्त्र, कई तरह के कामों में माहिर, मध्यम ऊंचाई वाला ऐसा ताकतवर ड्रोन है, जो हवा में लंबे समय तक उड़ान भरने की क्षमता रखता है। यह 1150 मील की दूरी और 50 हजार फीट की ऊंचाई पर उड़ सकता है। इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि लंबी दूरी की उन जगहों पर जहां वायुसेना नहीं पहुंच पाए, वहां इससे काम लिया जा सके।
  • ये ड्रोन 4,900 पाउंड वजन का होता है। इसमें 2,200 लीटर फ्यूल भरा जा सकता है। ये अपने साथ 4,760 किलो का वजन लेकर 230 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से उड़ सकता है। इस ड्रोन का इस्तेमाल निगरानी करने, तलाशी अभियान और राहत-बचाव मिशन में भी किया जाता है।
  • इस ड्रोन में बड़ी रेंज को कवर करने वाले सेंसर, मल्टी-मोड संचार सूट और सटीक हथियारों के साथ काम करने की अद्भुत क्षमता होती है। ये कम समय में संवेदनशील लक्ष्यों पर अचूक हमला आसानी से कर सकता है। इसे दूर से भी कंट्रोल किया जा सकता है। अपनी तरह के इस अनोखे ड्रोन की डिजाइन और अत्याधुनिक तकनीक दुश्मनों के हौसले पस्त करने के लिए काफी है।
  • अमेरिकी वायुसेना एमक्यू-9 रीपर ड्रोन का पिछले 13 वर्षों से इस्तेमाल कर रही है। इसके विंगस्पान की लंबाई 66 फीट है। एक ड्रोन की कीमत 64.2 मिलियन डॉलर यानी 460 करोड़ 70 लाख 56 हजार 200 रुपये है। एमक्यू-9 रीपर ड्रोन मूवेबल टारगेट को सटीकता से भेदने में सक्षम है।

धूमकेतु निओवाइस या सी/2020 एफ3

चर्चा में क्यों?

  • धूमकेतु निओवाइस या सी/2020 एफ3 पृथ्वी से साफ दिखाई देने लगा है। वैज्ञानिकों ने इसकी खोज मार्च में की थी और कहा था कि जुलाई में इसे पृथ्वी से नंगी आंखों से साफ देखा जा सकेगा। अपनी 6800 साल की यात्रा में इसे पृथ्वी से एक ही बार देखा जा सकता है।
  • सबसे चमकीला धूमकेतु को भारत में नग्न आंखों से देखा जा सकता है। सूर्यास्त के बाद लगभग 20 मिनट तक यह दुर्लभ धूमकेतु 14 जुलाई यानि कल से 20 दिनों के लिए हर रोज दिखाई देगा।

धूमकेतु क्या होते हैं?

  • धूमकेतु (Comet) अंतरिक्ष में विचरने वाले बर्फ से बनें पिंड हैं, जो अपने पीछे गैस और बर्फ के कण छोड़ते हैं। धूमकेतु अपने अंदर धूल, बर्फ, कार्बन डाइऑक्साइड, मीथेन, अमोनिया और ऐसे ही बहुत से पर्दाथ और गैस रखते हैं। जब धूमकेतु सूर्य के नजदीक आता है तो इसके चारों ओर एक गर्म गैसों का गोला बन जाता है जिसे कोमा कहते हैं इस कोमा में मुख्यतः पानी की भाप, अमोनिया तथा कार्बन डाइऑक्साइड पाए जाते हैं. जैसे-जैसे धूमकेतु आगे बढ़ता है तो वह अपने पीछे धूल के कणों के पूँछ छोड़ता जाता है, जब ये धुल के कण पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करते हैं तो यह टूटते हुए तारे के रूप में दिखाई देते हैं, इस तरह आप कह सकते हैं की किसी टूटते हुए तारे का पिता एक धूमकेतु हौता है.

कोविड-19 वायरस का 'इन विट्रो (टेस्ट ट्यूब) कल्चर'

चर्चा में क्यों?

  • कोविड-19 के लिए दवा बनाने में मदद करने में सक्षम एक बड़ी उपलब्धि के तहत यहां के इंस्टीट्यूट ऑफ लाइफ साइंसेज (आईएलएस) ने वेरो कोशिकाओं का इस्तेमाल करते हुए मरीज के नमूनों से कोरोना वायरस का 'इन विट्रो (टेस्ट ट्यूब) कल्चर' सफलतापूर्वक स्थापित किए हैं।
  • बायोटेक्नोलॉजी विभाग के तहत स्वायत्त संस्थान, आईएलएस ने देश के अलग-अलग स्थानों से नमूने लेकर 17 वायरस कल्चर स्थापित किए हैं जिनमें वायरस लोड (विषाणु की मात्रा) अलग-अलग था।

इन विट्रो (टेस्ट ट्यूब) कल्चर'

  • इन विट्रो कल्चर मनुष्य या जानवरों की बजाय टेस्ट ट्यूब में जैविक लक्षणों के अध्ययन से जुड़ा है।

क्या होंगें लाभ?

  • पूरी तरह कोशिका आधारित निष्क्रिय टीकों को विकसित करने के लिए वीरो सेल कल्चर तकनीक का दुनिया भर में इस्तेमाल होता है।
  • “यह महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है क्योंकि भारत की केवल तीन अन्य प्रयोगशालाओं ने अब तक 'वायरस कल्चर' स्थापित करने में सफलता प्राप्त की है।”
  • संभावित दवा लक्ष्यों की जांच एवं स्क्रीनिंग, दवा तैयार करने के साथ ही टीकों के विकास में यह अहम हो सकता है।
  • यह कोविड-19 वैश्विक महामारी के खिलाफ जंग में और भविष्य की तैयारी में देश के लिए महत्त्वपूर्ण संसाधन साबित हो सकता है।
  • भविष्य में, ये वायरल कल्चर कोविड-19 वैश्विक महामारी के निदान, जांच एवं प्रबंधन में योगदान देने वाले विभिन्न एंटीवायरल उत्पादों की जांच एवं प्रमाणन के लिए उद्योगों के साथ-साथ शिक्षाविदों के लिए भी उपयोगी होंगे। स्थापित कल्चर में किसी तरह के परिवर्तन एवं स्थिरता को समझने के लिए जीनोम सीक्वेंसिंग का इस्तेमाल करने वाले अध्ययन किए जा रहे हैं।

रेमाटायड अर्थराइटिस

चर्चा में क्यों?

  • भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की एक स्वयात्तशासी संस्था नैनो विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (आईएनएसटी) के वैज्ञानिकों ने चिटोसन के साथ नैनोपार्टिकल का प्रतिपादन किया है और रेमाटायड अर्थराइटिस की तीव्रता को कम करने के लिए जिंक ग्लुकोनेट के साथ इन नैनोपार्टिकल्स को लोड कर दिया है।
  • जिंक तत्व सामान्य हड्डी होमियोस्टैसिस को बनाये रखने के लिए अहम होता है और ऐसा बताया जाता है कि इसका लेवल रेमाटायड अर्थराइटिस रोगियों एवं अर्थराइटिस-प्रेरित पशुओं में कम हो जाता है। ऐसा भी ज्ञात हुआ है कि जिंक ग्लुकोनेट के रूप में जिंक के ओरल स्पलीमेंटेशन की मानवों में बहुत कम जैव उपलब्धता होती है।

रेमाटायड अर्थराइटिस के बारे में

  • रूमेटाइड अर्थराइटिस (RA) एक क्रोनिक, ऑटोइम्यून, इंफ्लेमेशन वाली स्थिति है, जिसमें व्यक्ति की अपनी प्रतिरक्षा कोशिकाएं (immune cells) जोड़ों के आसपास की झिल्ली (membrane) पर अटैक करती हैं. ये सूजन और दर्द का कारण बनता है. ये प्रोटेक्टिव कार्टिलेज को भी नष्ट कर देता है और इसके परिणामस्वरूप हड्डियां कमजोर होने लगती हैं. कार्टिलेज से आशय लचीले कनेक्टिव टिश्यूज से है, जो शरीर के विभिन्न हिस्सों में मौजूद रहते हैं. इनका मुख्य काम हड्डियों को आपस में जोड़ना है.
  • समय के साथ, हड्डियों को आपस में जोड़ने वाले लिगामेंट्स कमजोर हो जाते हैं. ऐसे में हड्डी अपनी जगह से हट जाती है और विकृत भी हो सकती है.
  • रूमेटाइड अर्थराइटिस (RA) आमतौर पर पहले हाथ और पैर में छोटे जॉइंट्स को प्रभावित करता है. ये बाद में कलाई, कोहनी, टखनों, घुटनों, कूल्हों और कंधों तक फैल सकता है. यहां तक कि शरीर के दूसरे हिस्सों जैसे आंखें, हृदय, फेफड़े और रक्त वाहिकाओं को भी प्रभावित कर सकता है.

:: पर्यावरण और पारिस्थितिकी ::

भारतीय रेलवे 2030 तक "हरित रेलवे" बनने के मिशन मोड पर (शून्य कार्बन उत्सर्जन)

  • रेल मंत्रालय ने 2030 तक भारतीय रेलवे को पूरी तरह हरित ऊर्जा से संचालित करने का लक्ष्‍य निर्धारित करने के साथ, ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन से निपटने की दिशा में कई बड़ी पहल की है। रेलवे विद्युतीकरण, लोकोमोटिव और ट्रेनों की ऊर्जा दक्षता में सुधार के साथ स्थाई उपकरणों और प्रतिष्ठानों/स्टेशनों के लिए हरित प्रमाणन हासिल करने, डिब्बों में जैव शौचालय बनाए जाने तथा अपनी ऊर्जा जरुरतों के लिए नवीकरणीय स्रोतों पर निर्भरता तथा शून्य कार्बन उत्सर्जन को प्राप्त करना इस रणनीति का हिस्‍सा है।

:: विविध ::

पोलैंड के राष्ट्रपति आंद्रेज डूडा

  • पोलैंड के राष्ट्रपति आंद्रेज डूडा ने पांच साल के अपने दूसरे कार्यकाल के लिए जीत हासिल की। रूढ़िवादी डूडा ने सप्ताहांत पर हुये चुनाव के करीबी मुकाबले में वारसा के उदारवादी महापौर को हराया है। मतगणना लगभग पूरी हो चुकी है। निर्वाचन आयोग ने कहा कि 99.97 प्रतिशत जिलों के मतों की गणना के अनुसार डूडा को 51.21 प्रतिशत वोट मिले हैं, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी रफाल ट्रजासकोव्स्की को 48.79 प्रतिशत वोट मिले हैं।

सीआईआई-आईटीसी सस्टेनेबिलिटी पुरस्कार 2019

  • एनटीपीसी लिमिटेड, विद्युत मंत्रालय के अंतर्गत एक केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रम और भारत की सबसे बड़ी बिजली उत्पादन कंपनी ने, कॉर्पोरेट उत्कृष्टता श्रेणी के अंतर्गत उत्कृष्ट उपलब्धि के लिए, प्रतिष्ठित सीआईआई-आईटीसी सस्टेनेबिलिटी पुरस्कार 2019 जीता है। साथ ही, कंपनी की सीएसआर श्रेणी में महत्वपूर्ण उपलब्धि के लिए सराहना भी की गई।
  • सीआईआई-आईटीसी सस्टेनेबिलिटी पुरस्कार, निरंतरता में उत्कृष्ट प्रथाओं की पहचान करते हैं और उन्हें पुरस्कृत करते हैं। देश में सस्टेनेबिलिटी की पहचान के लिए इसे सबसे विश्वसनीय मंच माना जाता है।

:: प्रिलिम्स बूस्टर ::

  • इंस्टीट्यूट ऑफ लाइफ साइंसेज द्वारा कोविड-19 के वायरस का कल्चर करने से चर्चा में रहे 'इन विट्रो (टेस्ट ट्यूब) कल्चर' क्या है? (मनुष्य या जानवरों की बजाय टेस्ट ट्यूब में जैविक लक्षणों का अध्ययन)
  • चुराए गए वाहनों और एफआईआर के संदर्भ में राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के द्वारा किस इंटेलिजेंस डेटाबेस के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं? (NATGRID)
  • NATGRID से जुड़ने के उपरांत चर्चा में रहे किस डेटाबेस में सभी राज्य पुलिस संस्थाओं को एफआईआर दर्ज करवाना अनिवार्य है? (क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम- CCTNS)
  • रेमाटायड अर्थराइटिस के इलाज हेतु नैनोपार्टिकल की खोज से चर्चा में रहे रेमाटायड अर्थराइटिस बीमारी के लक्षण क्या है एवं यह मुख्यतः किस तत्व की कमी के कारण होता है? (जोड़ों में दर्द एवं जलन, जिंक)
  • हाल ही में भारत की कौन सी सबसे बड़ी बिजली उत्पादन कंपनी ने सीआईआई-आईटीसी सस्टेनेबिलिटी पुरस्कार 2019 जीता? (एनटीपीसी लिमिटेड)
  • 6800 साल बाद खगोलीय परिघटना से चर्चा में रहे 'निओवाइस या सी/2020 एफ3' क्या है? (एक धूमकेतु)
  • जून माह के लिए जारी हुई उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (Rural/Urban/Combined) को किस संगठन के द्वारा जारी किया गया एवं इसका आधार वर्ष क्या था? (National Statistical Office -NSO, 2012)
  • हाल ही में चर्चा में रहे सुप्रीम कोर्ट रुल का आदेश 4 नियम 1 किससे संबंधित है? (बिना वकील व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित होकर बहस करने से)
  • वित्त मंत्री द्वारा समीक्षा से चर्चा में रहे 'प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना' कब लागू हुई एवं इसमें खरीफ, रबी और वाणिज्यिक फसलों हेतु कितना प्रीमियम देना होता है? (2016, क्रमशः 2%, 1.5% और 5%)
  • हाल ही में पाकिस्तान द्वारा अफगानिस्तान से भारत को निर्यात हेतु किस बॉर्डर के जरिए ट्रांसिट व्यापार हेतु अनुमति दी गई है एवं यह किस राज्य में अवस्थित है? (बाघा बॉर्डर,अमृतसर पंजाब)
  • भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा संभावित खरीद से चर्चा में रहे MQ-9 रीपर क्या है एवं किस देश के द्वारा इसे निर्मित किया गया है? (सशस्त्र लड़ाकू ड्रोन, अमेरिका)
  • हाल ही में पोलैंड में हुए चुनाव में किस निवर्तमान राष्ट्रपति ने स्पष्ट रूप से बहुमत प्राप्त किया है? (आंद्रेज डूडा)
  • हाल ही में किस दिग्गज तकनीकी कंपनी ने भारत में अपने किस कोष के तहत 10 अरब डॉलर निवेश करने की घोषणा की है? (गूगल, गूगल फॉर इंडिया डिजिटाइजेशन फंड)
  • हाल ही में भारत के किस सार्वजनिक परिवहन तंत्र ने 2030 तक 'शून्य कार्बन उत्सर्जन' के रूप में रूपांतरित होने का लक्ष्य रखा है? (भारतीय रेलवे)

स्रोत साभार: Dainik Jagran (Rashtriya Sanskaran), Dainik Bhaskar (Rashtriya Sanskaran), Rashtriya Sahara (Rashtriya Sanskaran) Hindustan Dainik (Delhi), Nai Duniya, Hindustan Times, The Hindu, BBC Portal, The Economic Times (Hindi & English), PTI, PIB