(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (14 अप्रैल 2020)

दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर


(दैनिक समसामयिकी और प्रिलिम्स बूस्टर) यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में समाचार पत्रों का संकलन (14 अप्रैल 2020)


:: राष्ट्रीय समाचार ::

केंद्र बनाम राज्यों का लॉकडाउन

  • ओडिशा, पंजाब, महाराष्ट्र, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल और कर्नाटक ने कोरोना वायरस महामारी के कारण लॉकडाउन को 30 अप्रैल तक बढ़ा दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, केंद्र सरकार 21 दिन के राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन को दो सप्ताह के लिए बढ़ाने पर भी विचार कर रही है। यदि राज्य अपने स्तर पर राज्यों में लॉकडाउन की घोषणा कर सकते हैं, तो यह सवाल उठता है कि केंद्र और राज्य के लॉकडाउन लगाने में क्या अंतर है और कौनसा लॉकडाउन जरूरी है। यदि केंद्र और राज्य सरकार के मध्य टकराव की स्थिति हो तो क्या होगा?

राज्यों द्वारा लॉकडाउन

  • संविधान के अनुसार, कानून और व्यवस्था के साथ ही सार्वजनिक स्वास्थ्य जैसे विषय राज्य सरकार के लिए रखे जाते हैं, जिसका अर्थ है कि राज्य दोनों से संबंधित कदम उठा सकते हैं। इसके अतिरिक्त, महामारी रोग अधिनियम, 1897 के तहत कई राज्यों ने लॉकडाउन का आदेश दिया है, जो उन्हें बीमारी के प्रकोप और प्रसार को रोकने के लिए अस्थायी नियमों को प्रस्तुत करने का अधिकार देता है।

केंद्र सरकार का लॉकडाउन

  • केंद्र सरकार ने 24 मार्च को देशव्यापी लॉकडाउन का आदेश देने के लिए राज्यों द्वारा लागू लॉकडाउन में एकरूपता की कमी का हवाला दिया था। लॉकडाउन का आदेश राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) के जरिए दिया गया था, आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 की धारा 6 (2) (आइ) के तहत इसका नेतृत्व प्रधानमंत्री करते हैं। केंद्रीय गृह मंत्रलय ने एनडीएमए के आदेश की अनुपालना में इस अधिनियम की धारा 10 (2) (एल) के तहत 21 दिन के लॉकडाउन के आदेश जारी किए। संभावना है कि लॉकडाउन के विस्तार के लिए भी यही समान प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

टकराव की स्थिति होने पर

  • केंद्र ने राज्यों के साथ लॉकडाउन को लेकर बातचीत की है। लेकिन सवाल उठता है कि क्या राज्य के लिए केंद्र के आदेशों की अवहेलना करना संभव है? विशेषज्ञों का कहना है, अपने आदेशों को लागू करने के लिए केंद्र की स्थिति मजबूत है। संविधान के अनुच्छेद 254 में कहा गया है कि यदि संसद द्वारा बनाए गए कानून और राज्यों द्वारा बनाए गए कानून के बीच असंगति है, तो इस परिस्थिति में केंद्र सरकार की स्थिति मजबूत होती है।

"देखोअपनादेश" वेबिनार श्रृंखला

  • मानव जीवन पर कोविड-19 का प्रभाव सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर भी बहुत ज्यादा पड़ा है। इसके कारण पर्यटन, एक क्षेत्र के रूप में, स्वाभाविक रूप से बहुत ज्यादा प्रभावित हुआ है क्योंकि घरेलू स्तर पर या सीमा पार से कोई आवागमन नहीं हो पा रहा है। लेकिन प्रौद्योगिकी के कारण, स्थानों और गंतव्यों तक आभासी रूप से पहुंचना  और बाद के दिनों के लिए अपनी यात्रा की योजना बनाना संभव है। इन अभूतपूर्व समय में, मानव संपर्क को बनाए रखने के लिए प्रौद्योगिकी काम आ रही है और यह भी विश्वास है कि फिर से यात्रा करने के लिए जल्द ही समय अच्छा हो जाएगा।
  • इसको ध्यान में रखते हुए, पर्यटन मंत्रालय ने आज से अपनी 'देखोअपनादेश" नामक वेबिनार श्रृंखला की शुरूआत की है जिससे हमारे अतुल्य भारत की संस्कृति और विरासत की गहरी और विस्तृत जानकारी प्रदान की जा सके। पहली वेबिनार, जो एक श्रृंखला का हिस्सा थी और प्रकाशित हुई, इसने दिल्ली के लंबे इतिहास को छूआ और यह 8 शहरों के रूप में सामने आया। प्रत्येक का चरित्र अपने आप में अद्वितीय था और जिसने अपने पीछे अवशेषों को छोड़ा, जिसके कारण दिल्ली एक शानदार शहर बना, जो कि वह आज है। इस वेबिनार का शीर्षक "सिटी ऑफ सिटीज- दिल्लीज पर्सनल डायरी" था।

एटीएल स्‍कूलों में ‘कोलैबकैड’ का शुभारंभ

  • अटल नवाचार मिशन, नीति आयोग और राष्‍ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी)  ने आज संयुक्‍त रूप से एक सहयोगपूर्ण नेटवर्क, कंप्यूटर सक्षम सॉफ़्टवेयर सिस्टम -कोलैबकैड लॉन्‍च किया। यह 2डी ड्राफ्टिंग एंड डिटेलिंग से 3डी प्रोडक्‍ट डिजाइन करने वाला एक समग्र अभियांत्रिकी समाधान है।
  • इस पहल का उद्देश्य देश भर में अटल टिंकरिंग लैबोरेटरीज़ (एटीएल) के छात्रों को रचनात्मकता और कल्पना के मुक्त प्रवाह के साथ 3 डी डिजाइन बनाने और संशोधित करने के लिए एक शानदार मंच प्रदान करना है। यह सॉफ्टवेयर छात्रों को पूरे नेटवर्क में डेटा तैयार करने और स्टोरेज और विज़ुअलाइज़ेशन के लिए उसी डिज़ाइन डेटा का समवर्ती रूप से उपयोग करने में सक्षम बनाता है।
  • भारत भर में स्थापित एटीएलबच्‍चों को उनकेनवोन्‍मेषी विचारों और रचनात्मकता में निखार लाने का अवसर (यानी टिंकरिंग स्पेस) प्रदान करते हैं। एनआईसी की कोलैबकैड प्रणालीके साथ एआईएम का सहयोग,छात्रों के लिए 3 डी प्रिंटिंग का उपयोग करने हेतु 3 डी मॉडलिंग/स्लाइसिंग हेतु स्वदेशी, अत्याधुनिक मेड-इन-इंडिया सॉफ्टवेयर का इस्‍तेमाल करने एक बड़ा मंच है।
  • एटीएल के लिए कोलैबकैड का कस्‍टमाइज्‍ड स्‍वरूप,स्‍कूली छात्रों के लिए उनके विचारों और रचनात्‍मकता को वास्‍तविक समाधानों में साकार करने की सर्वाधिक उपयुक्‍त विशेषताओं से युक्‍त है। इसे निर्बाध डिजाइनिंग सक्षम बनाने और इस प्रकाररचनात्मकता और नवीनता को सृजित होने की अनुमति देने के लिए विकसित किया गया है।

अटल नवाचार मिशन के बारे में

  • नीति आयोगके तहतअटल नवाचार मिशन, नवाचार और उद्यमिता की संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार की प्रमुख पहल है। स्कूल स्तर परएआईएमसमूचे भारत के सभी जिलों में एटीएलकी स्थापना कर रही है। आज तक, एआईएमने देश भर के 33 राज्यों और संघ शासित प्रदेशों में एटीएलकी स्थापना के लिए कुल 14,916 स्कूलों का चयन किया है।

गरीबों की होगी निजी लैब में कोरोना की मुफ्त जांच

  • सभी सरकारी और निजी लैब में कोरोना की मुफ्त जांच किए जाने के आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को संशोधन कर दिया है। कोर्ट के संशोधित आदेश के मुताबिक सिर्फ गरीबों यानी आर्थिक रूप से कमजोर लोगों की ही निजी लैब में कोरोना की मुफ्त जांच होगी। जो लोग पैसा दे सकते हैं उनसे निजी लैब भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आइसीएमआर) द्वारा तय कीमत (4500 रुपये) वसूल सकती हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के लाभार्थियों को पहले से ही निजी लैब में मुफ्त जांच का लाभ मिल रहा है।

पृष्ठभूमि

  • ये आदेश जस्टिस अशोक भूषण और एस. र¨वद्र भट की पीठ ने दिल्ली के रहने वाले डॉक्टर कौशल कांत मिश्र की आदेश में संशोधन करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई के बाद दिए। याचिका में कहा गया था कि निजी लैब में कोरोना की जांच सिर्फ आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए ही मुफ्त होनी चाहिए। जो लोग पैसे दे सकते हैं उनसे पैसे लिए जाने चाहिए।
  • याचिकाकर्ता का कहना था कि निजी लैब में सभी की जांच मुफ्त करने से न सिर्फ आर्थिक बोझ बढ़ेगा और बल्कि निजी लैब जांच करने से भी बचेंगी। सोमवार को सुनवाई के दौरान निजी लैबों की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने कहा, आइसीएमआर ने सभी पहलुओं के मद्देनजर 4500 रुपये निजी लैब में जांच के लिए तय किए हैं। रोहतगी ने कहा कि आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के लाभार्थियों की पहले से ही निजी लैब में मुफ्त जांच होती है। उन्होंने कहा कि अगर निजी लैब में सभी की जांच मुफ्त कर दी जाएगी तो निजी लैब के लिए काम कर पाना मुश्किल हो जाएगा। जांच किट इंपोर्टेड होती है उस पर ठीक-ठाक खर्च आता है।

:: अंतर्राष्ट्रीय समाचार ::

प्रथम ‘विश्व चगास रोग दिवस’

  • पहली बार पुरे विश्व में पहली बार चगास रोग के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए 14 अप्रैल को विश्व चगास रोग दिवस (World Chagas Disease Day) मनाया जा रहा है। इस वैश्विक दिवस को स्थापित और मनाने का मुख्य उद्देश्य चगास रोग के बारे में जागरूकता बढ़ाने के साथ- साथ  बीमारी को रोकने, नियंत्रण और खत्म करने के लिए आवश्यक संसाधनों पर ध्यान केंद्रित करना है। 24 मई 2019 को, विश्व स्वास्थ्य सभा – WHO ने इस दिवस के प्रस्ताव का अनुसमर्थन किया था।
  • आपको बता दे सर्वप्रथम इस रोग के लक्षण 1909 में ब्राजील की एक लड़की ‘बेर्निस सोरेस डी मौरा’ में डॉ कार्लोस रिबेरो जस्टिनो चैगास द्वारा पाया पता लगाया गया।
  • चगास रोग को ‘अमेरिकी ट्रिप्नोसोमियोसिस’ के साथ ‘साइलेंट डिजीज’ के नाम से भी जाना जाता है। "साइलेंट किलर नाम से भी यह रोग जाना जाता है क्योकि इसके लक्षण जल्दी दिखायी नहीं देते कई मामलों में कई वर्षों तक। इस रोग से प्रभावित अधिकतर गरीब लोग होते है जिनकी कोई आवाज नहीं होती। 

कौन है इस रोग के वाहक?

यह एक उष्णकटिबंधीय परजीवी रोग है जो प्रोटीन ट्राइनोनोसोमा क्रूज़ी के कारण होता है। इस रोग के वाहक  ट्रायटोमिना या चुंबन कीड़े (kissing bug's) है। शुरूआत में बीमारी का प्रकोप लैटिन अमेरिकी क्षेत्रों तक ही सीमित था लेकिन अब इसका प्रसार अन्य क्षेत्रों में हो चुका है। रिपोर्ट के अनुसार संक्रमित रक्त चढा़ने, जन्म के दौरान संक्रमित मां से बच्चों को और संक्रमित रोगी के अंगों के प्रत्यारोपण से चगास फैलता है। चगास से प्रभावित रोगियों को हृदय रोग, स्नायु, पाचन संबंधी या ऐसे ही मिले जुले शारीरिक परिवर्तन की आशंका बनी रहती है।

भारत को हारपून मिसाइल और टॉरपीडो देगा अमेरिका

  • अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के प्रशासन ने 15.5 करोड़ डॉलर की हारपून ब्लॉक II मिसाइलें और हल्के वजन के टॉरपीडो भारत को बेचने की अपनी प्रतिबद्धता से संसद को अवगत कराया है। भारत हल्के वजन वाला एमके54 टॉरपीडो अपने पी-8I विमानों में करना चाहता है। ये विमान समुद्र में निगरानी करते हैं और सबमरीन किलर कहे जाते हैं।
  • ‘डिफेंस सिक्योरिटी को-ऑपरेशन एजेंसी’ ने संसद को दो विभिन्न अधिसूचनाओं बताया कि इन 10 AGM-84L हारपून ब्लॉक II मिसाइलों की कीमत 9.2 करोड़ डॉलर है जबकि हल्के वजन के 16 ‘एमके 54 ऑल राउंड टॉरपीडो’ और तीन ‘एमके 54 एक्सरसाइज टॉरपीडो’ की कीमत करीब 6.3 करोड़ डॉलर है। पेंटागन ने कहा कि भारत सरकार की ओर से इनकी मांग किए जाने के बाद इस संबंध में अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने निर्णय लिया।
  • पेंटागन के अनुसार यह प्रस्तावित बिक्री अमेरिका-भारतीय सामरिक संबंधों को मजबूत करने और एक प्रमुख रक्षात्मक साझेदार की सुरक्षा मजबूत करने में मदद करेगी और यह हिंद-प्रशांत और दक्षिण एशिया क्षेत्र में राजनीतिक स्थिरता, शांति, और आर्थिक प्रगति के लिए महत्वपूर्ण होगा।

कोविड-19 संकट के वक्त मीडिया को ‘आवश्यक सेवा’ मानें सरकारें : यूनेस्को

  • यूनेस्को ने कोविड-19 संबंधी ‘गलत सूचनाओं की महामारी’ को रोकने के लिए सभी सरकारों को समाचार मीडिया को “आवश्यक सेवा” के तौर पर मान्यता देने और उसका समर्थन करने को कहा है।

क्या है यूनेस्को?

  • आज ही के दिन यानी 16 नवंबर, 1945 को यूनेस्को की स्थापना हुई थी। यूनेस्को का पूरा नाम यूनाइटेड नेशंस एजुकेशनल, साइंटिफिक ऐंड कल्चरल ऑर्गनाइजेशन (United Nations Educational, Scientific and Cultural Organization-UNESCO) है। इसका स्थायी मुख्यालय फ्रांस के पैरिस में है।

कोरोना से निपटने के लिए बनेगा इंडो-यूएस वर्चुअल नेटवर्क

  • कोरोना की चुनौतियों से निपटने के लिए भारत-अमेरिका विज्ञान व तकनीकी फोरम (आईयूएसएसटीएफ) ने वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को साथ मिलकर काम करने की अपील की है। फोरम ने मौजूदा आधारभूत संरचना व कोष का लाभ उठाकर संयुक्त शोध के लिए कहा है।
  • फोरम ने प्रस्तावित ‘इंडो-यूएस वर्चुअल नेटवर्क’ के लिए 15 मई तक आवेदन मांगे हैं। मार्च 2000 में भारत व अमेरिकी सरकार के बीच हुए करार के तहत इसकी स्थापना हुई थी। विज्ञान व तकनीकी मंत्रालय ने कहा कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी मिलकर नए टीके के विकास, उपकरण और जांच उपकरण व सूचना प्रणाली के साथ रणनीति बनाने व राष्ट्रों द्वारा संसाधनों के प्रबंध मे अहम भूमिका निभाएंगे।
  • दोनों देशों के वैज्ञानिकों के अनुसंधान से जल्द समाधान की उम्मीद की जा सकेगी। आईयूएसएसटीएफ के पास प्रासंगिक तकनीकों को विकसित करने का इतिहास व अच्छा अनुभव रहा है, इसलिए यह अच्छा प्लेटफार्म है।

कच्चे तेल के उत्पादन में कटौती पर सहमति

  • कच्चे तेल के उत्पादन में कटौती के लिए एक अंतरराष्ट्रीय समझौते की खबर के बाद तेल कीमतों में तेजी देखने को मिली, जिसके असर से एशियाई शेयर बाजार गिर गए। सऊदी अरब की अगुवाई वाले ओपेक देशों और रूस की अगुवाई वाले अन्य तेल उत्पादक देशों के बीच रविवार को उत्पादन में प्रतिदिन 970 लाख बैरल की कटौती के लिए एक समझौता हुआ।

शीर्ष तेल उत्पादक 'ऐतिहासिक कटौती को तैयार

  • शीर्ष तेल उत्पादक देशों ने कोरोना वायरस संकट और सऊदी अरब-रूस के बीच कीमत यु्द्ध के चलते कच्चे तेल के दाम में आई गिरावट को थामने के लिए उत्पादन में ''ऐतिहासिक कटौती करने पर सहमति जताई है। सऊदी अरब की अगुवाई वाले ओपेक देशों और रूस की अगुवाई वाले अन्य तेल उत्पादक देशों के बीच रविवार को वीडियो कांफ्रेंस के जरिए उत्पादन में कटौती के लिए एक समझौता हुआ। इससे पहले मैक्सिको के रुख के चलते यह समझौता नहीं हो पाया था।
  • मैक्सिको के ऊर्जा मंत्री रोशिया नहले ने बताया कि रविवार को हुए समझौते के तहत मई से प्रतिदिन 970 लाख बैरल प्रतिदिन की कटौती पर सहमति बनी है।
  • वियना स्थित पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन और अन्य साझेदारों के बीच सहमति बनी है कि मई और जून में उत्पादन में भारी कटौती की जाएगी, जिसके बाद अप्रैल 2022 तक क्रमिक रूप से कटौती जारी रहेगी। 

ओपेक क्या है?

  • ओपेक, पेट्रोलियम निर्यात करने वाले देशों का एक स्थायी अंतर सरकारी संगठन है एवं इसकी स्थापना 14 सितंबर, 1960 को इराक की राजधानी बगदाद में हुई थी। ओपेक का सचिवालय ऑस्ट्रिया की राजधानी वियना में है।

ओपेक प्लस क्या है?

  • तेल निर्यातक देशों के संगठन ओपेक, रूस व अन्य तेल उत्पादक देशों को संयुक्त रूप से ओपेक प्लस कहते है।

ADB ने कोरोना से निपटने के लिए वित्तीय सहायता तीन गुना बढ़ाई

  • एशियाई विकास बैंक (एडीबी) ने कहा कि उसने कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे सदस्य देशों के लिए वित्तीय पैकेज को तीन गुना बढ़ाकर 20 अरब डॉलर कर दिया है। एडीबी ने यह भी कहा कि उसने इस सहायता के तेजी से और बेहतर तरीके से वितरण को लेकर अपना कामकाज आसान करने के उपायों को भी मंजूरी दी है।
  • बहुपक्षीय वित्त पोषण एजेंसी ने एक विज्ञप्ति में कहा कि इससे पहले एडीबी ने 18 मार्च को 6.5 अरब डॉलर के शुरुआती पैकेज की घोषणा की थी। बाद में अपने विकासशील सदस्य देशों की कोरोना वायरस महामारी के कारण लोगों के स्वास्थ्य और वृहद आर्थिक प्रभाव से निपटने में मदद को लेकर 13.5 अरब डॉलर की सहायता और देने की घोषणा की गई है।

एशियाई विकास बैंक क्या है?

  • एशियाई विकास बैंक (एडीबी) एक क्षेत्रीय विकास बैंक है जिसकी स्थापना 19 दिसम्बर 1966 को एशियाई देशों के आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए की गयी थी।

चीन ने रोका मेकांग नदी का पानी, चार देशों में पड़ा सूखा

  • कोरोना महासंकट के बीच इस महामारी का गढ़ रहे चीन का एक और अमानवीय चेहरा सामने आया है। चीन ने दक्षिण पूर्व एशियाई देशों में बहने वाली मेकांग नदी में पानी का बहाव बहुत कम कर दिया है। इससे चार देशों थाइलैंड, लाओस, कंबोडिया और वियतनाम में भीषण सूखा पड़ गया है। इन देशों में हालात इतने खराब हो गए हैं कि किसानों और मछुआरों को प्रदर्शन करना पड़ा है। चीन के इस कदम के बाद ब्रह्मपुत्र नदी को लेकर भी संदेह के बादल उमड़ने लगे हैं।
  • न्‍यूयॉर्क टाइम्‍स की रिपोर्ट के मुताबिक इस साल फरवरी के अंतिम दिनों में चीन जब कोरोना से जूझ रहा था, उस समय उसके विदेश मंत्री को अचानक लाओस जाना पड़ा था। दरअसल, दक्षिण पूर्वी एशियाई देशों की जीवनधारा कही जाने वाली मेकांग नदी में पानी कम होने के बाद लाओस के किसानों और मछुआरों ने जोरदार प्रदर्शन किया था। इसके बाद चीन के विदेश मंत्री वांग यी को लाओस जाना पड़ा।

चीन के इंज‍नियरों ने कम किया बहाव

  • चीनी विदेश मंत्री ने कहा था कि वह किसानों और मछुआरों के दर्द को समझते हैं। उन्‍होंने दावा किया कि चीन भी इस साल सूखे का सामना कर रहा है और इससे मेकांग नदी में पानी कम हो रहा है। चीन के दावे के उलट अमेरिकी जलवायु विज्ञानियों के शोध से खुलासा हुआ है कि ऐसा पहली बार है जब चीन सूखे का सामना नहीं कर रहा है। उन्‍होंने कहा कि तिब्‍बत के पठार से मेकांग नदी निकलती है और चीनी इंज‍नियरों ने सीधे तौर पर नदी के पानी के बहाव को बहुत कम कर दिया है।

दक्षिण पूर्व एशिया की 'गंगा' है मेकांग

  • भारत में जो स्‍थान गंगा और ब्रह्मपुत्र नदी का है, वही दक्षिण पूर्व एशिया में मेकांग नदी का है। इस नदी पर करोड़ों लोगों की आजीविका निर्भर है। ये लोग खेती और मछली पकड़ने के लिए मेकांग नदी के पानी पर निर्भर हैं। लेकिन चीन में बड़े पैमाने पर बांध बन जाने की वजह से यह नदी सूखती जा रही है। इस नदी पर मछली पकड़ने के लिए निर्भर लोगों का कहना है कि पानी की लगातार कमी हो रही है। कभी-कभी लगातार सूखा पड़ रहा है और कभी अचानक से बाढ़ आ जा रही है। इससे किसानों की मुश्किल बहुत बढ़ गई है।
  • चीन का मेकांग के ऊपरी धारा पर नियंत्रण है। इसी धारा से मेकांग नदी की निचली धारा में सूखे के दिनों में करीब 70 फीसदी पानी आता है। चीन के ऊपरी धारा पर नियंत्रण करने के बाद दक्षिण पूर्वी एशियाई देशों की भौहें तन गई हैं। वह भी तब जब ये देश व्‍यापार के लिए काफी हद तक चीन पर ही निर्भर हैं। स्टिमंशन सेंटर के दक्षिण पूर्व एशिया के प्रोग्राम डायरेक्‍टर ब्रायन एलर कहते हैं, 'समस्‍या यह है कि चीन में सत्‍ता में बैठे लोग पानी को अपना समझ रहे हैं। वे यह मान ही नहीं रहे हैं कि इसे अन्‍य देशों के साथ साझा करना होगा।' चीन की सोच की वजह से थाइलैंड, लाओस, कंबोडिया और वियतनाम में सूखा पड़ गया है।

चीन ने ब्रह्मपुत्र पर बनाया विशाल बांध

  • चीन ने कुछ साल पहले ही तिब्बत में ब्रह्मपुत्र नदी पर बना सबसे बड़ा बांध चालू था। इस परियोजना से जल आपूर्ति में बाधा पड़ने को लेकर भारत की चिंताएं बढ़ गई हैं। चीन की सबसे बड़ी पनबिजली परियोजना का नाम 'जम हाइड्रोपावर स्टेशन' है। इससे डेढ़ अरब डॉलर की लागत से इसे बनाया गया है। शन्नान प्रिफेक्चर के ग्यासा काउंटी में स्थित 'जम हाइड्रो पावर स्टेशन' को 'जांगमू हाइड्रोपावर स्टेशन' के नाम से भी जाना जाता है। यह ब्रह्मपुत्र नदी के पानी का इस्तेमाल करता है। ब्रह्मपुत्र नदी को तिब्बत में यारलुंग जांगबो नदी के नाम से जाना जाता है। यह नदी तिब्बत से भारत आती है और फिर वहां से बांग्लादेश जाती है।

:: भारतीय अर्थव्यवस्था ::

खुदरा महंगाई दर मार्च, 2020 में 5.91 फीसदी

  • सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्‍वयन मंत्रालय के राष्‍ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) ने मार्च, 2020 के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) पर आधारित महंगाई दर के आंकड़े जारी किए। इस दौरान ग्रामीण क्षेत्रों के लिए सीपीआई आधारित महंगाई दर 6.09 फीसदी (अनंतिम) रही, जो मार्च, 2019 में 1.80 फीसदी थी। इसी तरह शहरी क्षेत्रों के लिए सीपीआई आधारित महंगाई दर मार्च, 2020 में 5.66 फीसदी (अनंतिम) आंकी गयी, जो मार्च, 2019 में 4.10 फीसदी थी। ये दरें फरवरी, 2020 में क्रमशः 6.67 तथा 6.57 फीसदी (अंतिम) थीं।
  • राष्‍ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय ने आज मार्च, 2020 के लिए उपभोक्ता खाद्य मूल्य सूचकांक (सीएफपीआई) पर आधारित महंगाई दर के आंकड़े भी जारी किए। इस दौरान ग्रामीण क्षेत्रों के लिए सीएफपीआई आधारित महंगाई दर 8.88 फीसदी (अनंतिम) रही जो मार्च, 2019 में (-) 1.46 फीसदी थी। इसी तरह शहरी क्षेत्रों के लिए सीएफपीआई आधारित महंगाई दर मार्च, 2020 में 8.59 फीसदी (अनंतिम) आंकी गई जो मार्च, 2019 में 3.47 फीसदी थी। ये दरें फरवरी, 2020 में क्रमशः 10.37 तथा 11.51 फीसदी (अंतिम) थीं।
  • अगर शहरी एवं ग्रामीण दोनों ही क्षेत्रों पर समग्र रूप से गौर करें तो उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) पर आधारित महंगाई दर मार्च, 2020 में 5.91 फीसदी (अनंतिम) आंकी गई है, जो मार्च, 2019 में 2.86 फीसदी (अंतिम) थी। वहीं, सीपीआई पर आधारित महंगाई दर फरवरी, 2020 में 6.58 फीसदी (अंतिम) थी। इसी तरह यदि शहरी एवं ग्रामीण दोनों ही क्षेत्रों पर समग्र रूप से गौर करें, तो उपभोक्ता खाद्य मूल्य सूचकांक (सीएफपीआई) पर आधारित महंगाई दर मार्च, 2020 में 8.76 फीसदी (अनंतिम) रही है, जो मार्च, 2019 में 0.30 फीसदी (अंतिम) थी। वहीं, सीएफपीआई पर आधारित महंगाई दर फरवरी, 2020 में 10.81 फीसदी (अंतिम) थी।
  • सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्‍वयन मंत्रालय के राष्‍ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) ने उपभोक्ता‍ मूल्य सूचकांक (सीपीआई) के लिए आधार वर्ष को 2010=100 से संशोधित करके 2012=100 कर दिया है।

इकोनॉमी में सुधार के लिए हर उपाय उठाने को तैयार: आरबीआइ

  • भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआइ) ने आश्वस्त किया है कि वह इकोनॉमी के स्थायित्व पर कोई संकट नहीं आने देगा। मौद्रिक नीति की पिछली बैठक के विवरण में केंद्रीय बैंक ने कहा कि वह इकोनॉमी में सुधार और इसकी स्थिरता बरकरार रखने के लिए हर कदम उठाने को तैयार है। कोरोना वायरस महामारी ने दुनिया के स्वास्थ्य ढांचे को हिलाकर रख दिया है, और इसकी वजह से जिस तरह से वैश्विक अर्थव्यवस्था का चक्का जाम हुआ है उसे देखते हुए आरबीआइ के गवर्नर डॉ. शक्तिकांत दास ने इसे एक मौन हत्यारा कहा है। एमपीसी में आरबीआइ गवर्नर समेत इसमें छह सदस्य होते हैं।

एमपीसी बैठक में हुई विस्तृत चर्चा का ब्योरा

  • गवर्नर समेत एमपीसी के चार सदस्यों ने रेपो रेट में 75 आधार अंकों की कटौती का सुझाव दिया था जबकि दो सदस्यों ने 50 आधार अंकों की कटौती का सुझाव दिया था। सभी सदस्यों के बीच इस बात की सहमति थी कि हालात बहुत ही गंभीर है और आने वाले दिनों में कोरोना वायरस की आर्थिक कीमत बहुत ज्यादा हो सकती है।
  • यह भी आम राय थी कि जिस तरह से केंद्र सरकार आगे बढ़ कर वित्तीय पैकेज की घोषणा कर रही है उसी तर्ज पर आरबीआइ को भी वित्तीय माहौल को मजबूत बनाने व सिस्टम में पर्याप्त धन की सप्लाई करने की व्यवस्था करनी चाहिए।
  • केंद्रीय बैंक यह मान रहा है कि बैंकों व वित्तीय संस्थानों को कर्ज वसूली को लेकर काफी चुनौतियां आ सकती हैं। सनद रहे कि इसी सोच के साथ ही आरबीआइ की तरफ से सभी तरह के सावधि कर्ज की अदायगी पर तीन महीने का स्थगन लगाया गया है।
  • पूरी रिपोर्ट में सिर्फ महंगाई को लेकर सकारात्मक बात कही गई है कि आने वाले दिनों में इसकी दर नीचे की तरफ ही रहेगी। लेकिन महंगाई के कम होने का फायदा पूरी अर्थव्यवस्था को कितना होगा, इसको लेकर संशय है।
  • कोविड-19 की वजह से मैन्यूफैक्चरिंगके साथ ही पूरा सर्विस सेक्टर भारी तनाव में है और आने वाले दिनों में यह कितना असर करेगा, यह अनिश्चित है। सिर्फ देश में लॉकडाउन की स्थिति सामान्य होने से काम नहीं चलेगा बल्कि इस महामारी से प्रभावित दुनिया के दूसरे देशों में हालात कब तक सामान्य होते हैं, इसको भी ध्यान में रखना होगा।
  • एमपीसी के पांच सदस्यों ने कहा है कि इस महामारी की वजह से आने वाले दिनों में भी मांग की समस्या गंभीर होगी। इसलिए मांग को बढ़ाने पर सबसे ज्यादा जोर देने की जरूरत है। सनद रहे कि पिछले दो वित्त वषों में देश की आर्थिक विकास दर के घटने के लिए घरेलू मांग को एक बड़ी वजह माना जाता है। अगर कोविड-19 की वजह से लॉकडाउन की अवधि बढ़ती है तो हालात और ज्यादा गंभीर हो सकते हैं।

क्या है मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी)

  • भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार, मौद्रिक नीति समिति के छह सदस्यों में से तीन सदस्य RBI से होते हैं और अन्य तीन सदस्यों की नियुक्ति केंद्रीय बैंक द्वारा की जाती है। रिज़र्व बैंक का गवर्नर इस समिति का पदेन अध्यक्ष होता है, जबकि भारतीय रिज़र्व बैंक के डिप्टी गवर्नर मौद्रिक नीति समिति के प्रभारी के तौर पर काम करते हैं।

:: विज्ञान और प्रौद्योगिकी ::

समुद्री लाल काई से कोरोना के इलाज के प्रयास

  • समुद्री लाल काई (शैवाल) से कोरोना का प्रकोप रोकने का रास्ता मिल सकता है। रिलायंस इंडस्ट्रीज से जुड़े वैज्ञानिकों का दावा है कि समुद्री लाल शैवाल से तैयार होने वाले जैव रासायनिक पाउडर को सैनिटरी की वस्तुओं पर कोटिंग की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके अलावा इससे एंटीवायरल दवा बनाना भी संभव हो सकता है।
  • रिलायंस के वैज्ञानिकों का कहना है कि जलीय जीवों, बैक्टीरिया, फंगस आदि में वायरस से होने वाली बीमारियों से लड़ने की क्षमता होती है। पॉलीसैचराइड्स जैसे अगर, एल्गीनेट, फ्यूकोडियन आदि कुछ ऐसे प्राकृतिक तत्व है, जिनमें एंटीवायरल खूबी होती है। इस अध्ययन में सल्फेट वाले पॉलीसैचराइड्स के स्नोत माने जाने वाली समुद्री लाल काई पॉर्फिरीडियम को कोरोना से लड़ने में कारगर बताया गया है। वैज्ञानिकों ने इसके लिए अब तक उपलब्ध डाटा का हवाला दिया है।

इम्युनिटी बढ़ाता है पॉलसैचराइड्स :

  • पॉर्फिरीडियम से मिलने वाले पॉलसैचराइड्स को एंटीवायरल खूबी और इम्युनिटी बढ़ाने वाला माना जाता है। रिसर्च पेपर के अनुसार, काई से प्राप्त सल्फेटेड पॉलीसैचराइड्स से कोरोना वायरस की वजह से सांस की नली में होने वाले संक्रमण की रोकथाम या इलाज के लिए उपयुक्त एंटीवायरल फार्मास्युटिकल कंपोजिशन तैयार करने में मदद मिल सकती है।

कैरी ग्रीन पर हुआ अध्ययन :

  • यह अध्ययन मुख्य तौर पर कैरी ग्रीन पर हुआ है। कैरी ग्रीन समुद्री काई का ही प्रकार है जिसे खाने में भी इस्तेमाल किया जाता रहा है। शोधकर्ताओं ने पाया कि कैरी ग्रीन कई तरह के वायरसों के लिए अवरोधकों का काम करती है। इस तरह की काई से निकलने वाले पॉलसैचराइड्स कोरोना से लड़ने में एंटीवायरल एजेंट के रूप में काम करते हैं। इसलिए अगर इनकी कोटिंग बनाकर की जाए तो कोरोना का प्रसार रोका जा सकता है। शोधकर्ताओं की मानें तो कोरोना का वायरस किसी भी सतह पर लंबा टिक सकता है। लेकिन अगर समुद्री लाल काई की कोटिंग इस वायरस को रोक पाती है तो यह अपने आप में एक बड़ी बात है।

सामुदायिक स्तर पर अध्ययन की तैयारी :

  • रिलायंस इंडस्ट्री के लिए यह अध्ययन विनोद नागले, महादेव गायकवाड़, योगेश पवार और शांतनु दासगुप्ता ने किया है। ये सभी वैज्ञानिक रिलायंस रिसर्च एंड डिवेलपमेंट सेंटर (नवी मुंबई) में काम करते हैं। उन्होंने अपने शोध में लाल काई से जुड़ा यह दावा किया है। रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर मुकेश अंबानी पहले ही रिलायंस के रिसर्च से जुड़ी कुछ बातें उनके कर्मचारियों से साझा कर चुके हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि रिलायंस लाइफ साइंस भारत में कोरोना जांच को और बढ़ाने में मदद कर रही है। जल्द ही वे समुदायिक स्तर पर भी अध्ययन करेंगे।

विवादों में सैनिटाइजेशन टनल

  • कोरोना वायरस के संक्रमण से बचने के लिए देश भर में कई जगहों पर सैनिटाइजेशन यूनिटें लगाई जा रही हैं। खास तौर पर कई अस्पतालों में ऐसे प्रयोग किए गए, ताकि कर्मचारियों व अस्पताल पहुंचने वाले लोगों को स्प्रे बाथ के माध्यम से सैनिटाइज किया जा सके। लेकिन, सैनिटाइजेशन यूनिट में इस्तेमाल किए जा रहे रसायन से एलर्जी की परेशानी होने की बात सामने आने के बाद दिल्ली स्थित एम्स ने अपनी सैनिटाइजेशन यूनिट को फिलहाल बंद कर दिया है।
  • बताया जा रहा है कि कर्मचारियों ने एलर्जी व शरीर में खुजली महसूस होने की शिकायत की थी। इसके बाद एम्स प्रशासन ने इसे अस्थायी रूप से बंद करने का फैसला किया है। अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. डीके शर्मा ने कहा कि अभी तक कोई ऐसा शोध सामने नहीं आया है जिससे यह पता चल सके कि इसके इस्तेमाल से संक्रमण रोकने में ज्यादा फायदा है। जिन देशों में पहले इसका इस्तेमाल हुआ है, वहां अब जो तथ्य सामने आए हैं, उनमें त्वचा की एलर्जी होने की बात कही गई है। इसलिए इसे अस्थायी रूप से बंद किया गया है। बाद में यदि इसका सकारात्मक वैज्ञानिक आधार सामने आया तो उसे दोबारा शुरू किया जा सकता है।

सोडियम हाइपोक्लोराइट नहीं है कोरोना का इलाज :

  • अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ऋषिकेश के निदेशक प्रोफेसर रविकांत का कहना है कि सोडियम हाइपोक्लोराइट का मानव शरीर पर छिड़काव कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए उपयोगी उपचार नहीं है। सोडियम हाइपोक्लोराइट का उपयोग किसी सतह को कीटाणु रहित करने के लिए किया जाता है। इसे टनल के जरिये शरीर पर आजमाना कई रूपों में घातक हो सकता है।

पंजाब ने सोडियम हाइपोक्लोराइट के स्प्रे पर लगाई रोक :

  • पंजाब सरकार ने सैनिटाइजर चैंबरों में पानी के साथ सोडियम हाइपोक्लोराइट के स्प्रे पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। इस आशय का पत्र सेहत विभाग द्वारा प्रदेश के सभी डिप्टी कमिश्नरों व सिविल सर्जनों को जारी कर दिया गया है।

जम्मू में क्यूएसी का हो रहा इस्तेमाल :

  • जम्मू और श्रीनगर नगर निगम के अधिकारियों ने साफ किया है कि क्वाटरनरी अमोनियम कंपाउंड (क्यूएसी) की सही मात्रा का इस्तेमाल हो तो ही यह टनल सुरक्षित हैं। साथ ही कहा कि जम्मू-कश्मीर में सोडियम हाइपोक्लोराइट नहीं क्यूएसी का इस्तेमाल किया जा रह है।
  • चिकित्सकों के अनुसार हाइपोक्लोराइटसे आंखों की रोशनी और त्वचा संबंधी रोग भी हो सकते हैं। क्वाटरनरी अमोनियम कंपाउंड भी निर्धारित मात्रा से अधिक नहीं होना चाहिए। अगर टनल में कोई जाता है तो उसे आंखें बंद करके ही गुजरना चाहिए।

सीईआरटी-इन ने साइबर हमलों पर नजर रखने को कहा

  • संघीय साइबर एजेंसी सीईआरटी-इन ने चेतावनी दी कि कोविड-19 के प्रसार को रोकने के लिये लागू लॉकडाउन में कर्मचारियों को घर से काम करने के लिये दी जा रही सुविधा के लिए संगठनों द्वारा इस्तेमाल किये जा रहे वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क (वीपीएन) को निशाना बनाए जाने समेत साइबर हमलों में बढ़ोतरी हुई है।
  • कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम ऑफ इंडिया (सीईआरटी-इन) ने एक ताजा परामर्श में गोपनीय सूचनाओं को हासिल कर उनके दुरूपयोग के प्रति चेताया है, जहां गलत तत्व वास्तविक बैक एंड सपोर्ट होने का बहाना कर भोले-भाले कर्मचारियों से संवेदनशील आंकड़े हासिल करते हैं। कोविड-19 के प्रसार के कारण बढ़ी ऑनलाइन गतिविधियों की वजह से धोखेबाजों का यह नया हथकंडा तेजी से पांव पसार रहा है।

हमलों में बढ़ोतरी के कारण

  • “कोरोना वायरस महामारी के कारण दुनिया भर के कई संस्थानों ने अपने कर्मचारियों को कार्यालय आने से रोका है और उन्हें अपने घर से ही सुरक्षित माहौल में काम करने को कहा है। संगठन ईमेल, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और अन्य चैट माध्यमों के जरिये संचार के लिये जोखिमपूर्ण वीपीएन का इस्तेमाल कर रहे हैं। वीपीएन सुरक्षित ऑनलाइन सर्वर के जरिये आंकड़ों को कूट संकेतों में बदलकर संचार को सक्षम बनाता है।
  • बहुत सारे संगठन अपने काम की निरंतरता के लिये वीपीएन का इस्तेमाल कर रहे हैं और ऐसे में साइबर हमलावर विभिन्न संगठनों को निशाना बनाने के लिये इसे आसान जरिया पा रहे हैं।

सुझाव

  • उसने संगठनों को यह भी सुझाव दिया कि उन्हें अपने कर्मचारियों को भी साइबर हमलों को लेकर ज्यादा संवेदनशील बनाना चाहिए जहां साइबर अपराधी ईमेल, टेक्स्ट संदेश के जरिये संवेदनशील जानकारी निकलवाने की कोशिश करते हैं।उसने कहा, “कोविड-19 जैसी महामारियां गोपनीय सूचनाओं को हासिल कर उनके दुरूपयोग का जरिया बन सकती हैं। कर्मचारियों को ऐसे हमलों के बारे सतर्क रहने की जरूरत है

क्या है संघीय साइबर एजेंसी सीईआरटी-इन

  • CERT-In साइबर सुरक्षा के लिए एक नोडल एजेंसी है, यह इलेक्ट्रॉनिक्स व सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अधीन सूचना व प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत कार्य करती है। इसकी स्थापना वर्ष 2004 में की गयी थी। इसका कार्य हैकिंग से भारतीय साइबरस्पेस व सॉफ्टवेर इन्फ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा करना है। यह साइबर हमलों के मामले में त्वरित कारवाई करता है। यह देश में सूचना व प्रौद्योगिकी क्षेत्र में सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए

:: विविध ::

पूर्व अटॉर्नी जनरल अशोक देसाई का निधन

  • पूर्व अटॉर्नी जनरल और वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक देसाई का सोमवार की सुबह निधन हो गया। देसाई नौ जुलाई, 1996 से छह मई, 1998 तक देश के अटॉर्नी जनरल थे। इससे पहले, 18 दिसंबर, 1989 से दो दिसंबर, 1990 तक वह सॉलिसीटर जनरल थे। पद्म भूषण से सम्मानित देसाई ने 1956 में बंबई उच्च न्यायालय में वकालत शुरू की और आठ अगस्त, 1977 को वह वरिष्ठ अधिवक्ता नामित किए गए थे।
  • भारत का महान्यायवादी (अनुच्छेद 76) भारत सरकार का विधि सर्वोच्च अधिकारी होता है.

चार भारतीय अमेरिकियों को अमेरिका की प्रतिष्ठित गुगेनहाइम फेलोशिप

  • भारतीय मूल के चार अमेरिकियों को उनकी उपलब्धियों और असाधारण प्रतिबद्धता के लिए एक प्रतिष्ठित यूएस फेलोशिप से सम्मानित किया गया है। ह्यूस्टन विश्वविद्यालय में मैकेनिकल इंजीनियर प्रदीप शर्मा, ब्राउन विश्वविद्यालय में एप्लाइड गणित की प्रोफेसर कविता रमण, हार्वर्ड विश्वविद्यालय और कोलंबिया विश्वविद्यालय में योजनाकार और शिक्षक दिलीप दा चुन्हा और डार्टमाउथ कॉलेज में पृथ्वी विज्ञान के प्रोफेसर मुकुल शर्मा को 2020 गुगेनहाइम फेलोशिप से सम्मानित किया गया है।

:: प्रिलिम्स बूस्टर ::

  • अटल नवाचार मिशन और राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र द्वारा प्रस्तुत ‘कोलैबकैड’ क्या है? (2D ड्राफ्टिंग की मदद से 3D प्रोडक्ट डिजाइन करने वाला सॉफ्टवेयर)

  • केंद्र एवं राज्य द्वारा क्रमशः किन प्रावधानों के तहत ‘लॉकडाउन’ का प्रवर्तन किया जाता है? (केंद्र- आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005,  राज्य-महामारी रोग अधिनियम, 1897)

  • प्रथम बार आयोजित हुए अंतर्राष्ट्रीय चगास रोग दिवस (World Chagas Disease Day) को  प्रति वर्ष मनाने हेतु किस तिथि का चयन किया गया है? (14 अप्रैल)

  • किस रोग को ‘साइलेंट डिसीज’ या साइलेंट किलर के नाम से जाना जाता है एवं इस रोग के वाहक कौन हैं? (चगास रोग, ट्रायटोमिना या चुंबन कीड़े- kissing bug's)

  • हाल ही में चर्चा में रहे किस नदी को एशिया की गंगा कहा जाता है एवं यह किन देशों में बहती हैं? (मेकांग नदी, चीन, थाइलैंड, लाओस, कंबोडिया, वियतनाम)

  • हाल ही में किस संस्था/ मंत्रालय के द्वारा 'देखो-अपना-देश" नामक वेबिनार श्रृंखला को प्रारंभ किया गया है? (पर्यटन मंत्रालय)

  • चर्चा में रहे स्वाइन फ्लू के वाहक वायरस का नाम क्या है? (H1NI)

  • किन भारतीय अमेरिकी मूल के लोगों को 2020 गुगेनहाइम फेलोशिप से सम्मानित किया गया है? (प्रदीप शर्मा, कविता रमण, दिलीप दा चुन्हा और मुकुल शर्मा)

  • हाल ही में चर्चा में रहे यूनेस्को(UNESCO) की स्थापना कब हुई एवं इसका मुख्यालय कहां है? (16 नवंबर 1945, पेरिस-फ्रांस)

  • हाल ही में चर्चा में रही संघीय साइबर एजेंसी CERT-In कब अस्तित्व में आई एवं यह किस मंत्रालय के अधीन कार्य करता है? (2004, इलेक्ट्रॉनिक्स व सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय)

  • पूर्व अटार्नी जनरल अशोक देसाई की मृत्यु से चर्चा में रहे अटॉर्नी जनरल का प्रावधान भारतीय संविधान में किस अनुच्छेद के तहत है? (अनुच्छेद 76)

  • किस देश ने सबमरीन किलर कहे जाने वाले एमके 54 टॉरपीडो और ‘हार्पून मिसाइलों को भारत को देने की प्रतिबद्धता व्यक्त की है? (अमेरिका)

  • हाल ही में चर्चा में रहे ‘ओपेक प्लस’ देशों से आशय क्या है? (ओपेक देशों के अलावा रूस सहित अन्य प्रमुख तेल उत्पादक देश जो ओपेक के निर्णय को मानते हैं)

  • हाल ही में चर्चा में रहे मौद्रिक नीति समिति(MPC) में कितने सदस्य होते हैं एवं इसकी अध्यक्षता कौन करता है? (6 सदस्य, भारतीय रिजर्व बैंक का गवर्नर)

 

 

 

स्रोत साभार: Dainik Jagran (Rashtriya Sanskaran), Dainik Bhaskar (Rashtriya Sanskaran), Rashtriya Sahara (Rashtriya Sanskaran) Hindustan Dainik (Delhi), Nai Duniya, Hindustan Times, The Hindu, BBC Portal, The Economic Times (Hindi & English), PTI, PIB

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